बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना-धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए और जहां आवश्यक है, वहां उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को ऐसे न्यायालय में, जिसमें उसकी हाजिरी अपेक्षित है, भिजवाएगा जिससे वह आदेश में उल्लिखित समय पर वहां उपस्थित हो सके, और उसे न्यायालय में या उसके पास अभिरक्षा में तब तक रखवाएगा जब तक उसकी परीक्षा न कर ली जाए या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार को, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध था, वापस ले जाए जाने के लिए प्राधिकृत न करे ।

