Thursday, 21, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 
Recent News

सुप्रीम कोर्ट में वनतारा की जीत, दो जजों की पीठ बोली- याचिका में कोई दम नहीं


Supreme Court, oil Painting.png
20 Mar 2026
Categories: Hindi News

सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा (Vantara) वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र में वाइल्‍डलाइफ इंपोर्ट्स को लेकर जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह केंद्र रिलायंस ग्रुप द्वारा संचालित वन्‍यजीव राहत एवं पुनर्वास केंद्र है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और इसमें किसी भी प्रकार के कानून उल्लंघन के सबूत नहीं मिले हैं। जस्टिस पीके. मिश्रा और जस्टिस एनवी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों की जांच पहले ही कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कर चुका है। SIT ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सितंबर 2025 में अदालत को सौंपी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था। रिपोर्ट में यह साफ कहा गया था कि वनतारा में वन्यजीव आयात के दौरान किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि इस याचिका में कोई दम या मेरिट नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी आयात को वैध अनुमति के तहत किया गया हो, तो बाद में उठाई गई आपत्तियों के आधार पर उसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि इस तरह के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से जानवरों के कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पीठ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि पहले से स्थापित वातावरण और देखभाल में रह रहे जानवरों को हटाया या परेशान किया गया, तो यह स्वयं क्रूरता का कारण बन सकता है। अदालत के अनुसार, ‘कानूनी रूप से आयात किए गए और बचाए गए जानवरों के वातावरण और देखभाल में हस्तक्षेप करना उनके लिए हानिकारक हो सकता है।’

क्‍या था मामला

दरअसल, याचिकाकर्ता ने Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES) के एक दस्तावेज का हवाला दिया था, लेकिन अदालत ने पाया कि यह दस्तावेज भी आरोपों का समर्थन नहीं करता। इसके उलट, CITES सचिवालय ने कहा था कि जानवरों के आयात में आवश्यक दस्तावेजों या परमिट की कमी का कोई प्रमाण नहीं मिला और न ही यह संकेत मिला कि आयात व्यावसायिक उद्देश्य से किए गए थे।

याचिका में क्‍या की गई थी मांग

याचिका में वाइल्‍डलाइफ इंपोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि ये सभी मुद्दे पहले ही निपटाए जा चुके हैं। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पॉल और अधिवक्ता अंकुर यादव ने पैरवी की।

Source link



Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : MAIMS

 
 
Latestlaws Newsletter