सुप्रीम कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि बैंकों के लिए किसी भी खाते को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने से पहले संबंधित ग्राहक को व्यक्तिगत रूप से मौखिक सुनवाई का मौका देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक अहम शर्त भी रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बैंकों को भले ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत न हो लेकिन किसी भी खाते को फ्रॉड लेबल करने से पहले बैंक को उस ग्राहक को ‘फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट’ मुहैया करानी होगी। यह रिपोर्ट ग्राहक को अपना पक्ष रखने और बैंक के आरोपों को समझने का मौका देगी जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है।
बैंकों और आरबीआई की दलीलों पर मुहर
यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा इस साल की शुरुआत में दी गई दलीलों के बाद आया है।
· सुनवाई संभव नहीं: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एसबीआई की ओर से दलील दी थी कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी के मामलों के बड़े पैमाने को देखते हुए हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
· प्रक्रिया में बाधा: मेहता ने तर्क दिया कि यदि व्यक्तिगत सुनवाई की अनिवार्यता लागू की जाती है तो इससे धोखाधड़ी वाले खातों की पहचान करने और उन्हें घोषित करने की पूरी प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
· धोखाधड़ी में भारी उछाल: कोर्ट को बताया गया कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में बैंक धोखाधड़ी के लगभग 60,000 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 48,244 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी।
धोखाधड़ी के आंकड़े: 194% की चौंकाने वाली वृद्धि
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट के समक्ष चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:
· वर्ष 2023-24: 36,060 मामले दर्ज हुए।
· वर्ष 2024-25: 23,953 मामले सामने आए।
· वित्तीय प्रभाव: 2024-25 में धोखाधड़ी की राशि 36,014 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष (12,230 करोड़ रुपये) की तुलना में 194 प्रतिशत अधिक है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत व्यक्तिगत सुनवाई की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे, लेकिन बैंकों की व्यावहारिक चुनौतियों और बढ़ते वित्तीय जोखिमों को देखते हुए अब यह संतुलित फैसला सुनाया है।
सवाल-जवाब
क्या बैंक अब बिना बताए खाते को फ्रॉड घोषित कर सकते हैं?
नहीं, बैंक को व्यक्तिगत सुनवाई देने की जरूरत नहीं है, लेकिन खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले ग्राहक को फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट देना अनिवार्य है।
कोर्ट ने व्यक्तिगत सुनवाई की अनिवार्यता क्यों हटाई?
एसबीआई और आरबीआई ने दलील दी थी कि धोखाधड़ी के मामलों की भारी संख्या (लगभग 60,000 मामले) के कारण हर ग्राहक की व्यक्तिगत सुनवाई करना संभव नहीं है।
पिछले साल बैंक फ्रॉड के मामलों में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है?
साल 2024-25 में धोखाधड़ी की राशि में 194 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जो 12,230 करोड़ से बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये पहुंच गई।
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