बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को तोतों द्वारा क्षतिग्रस्त अनार के पेड़ों के लिए एक किसान को मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि ये पक्षी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत वन्य प्राणी हैं और राज्य सरकार को संपत्ति के नुकसान के लिए नागरिकों की भरपाई करनी होगी। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता की नागपुर पीठ ने कहा कि यदि संरक्षित प्रजातियों के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो वे ऐसे उपायों का सहारा ले सकते हैं, जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अधिनियम का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है, जिसमें स्पष्ट रूप से तोतों को शामिल किया गया है।
यह आदेश 24 अप्रैल को पारित किया गया था, जिसकी प्रति रविवार को उपलब्ध कराई गई। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को 200 पेड़ों को हुए नुकसान के लिए प्रति पेड़ 200 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। किसान को यह नुकसान मई 2016 में हुआ था।
यह है पूरा मामला
बॉम्बे हाई कोर्टने वर्धा जिले के हिंगी गांव के किसान महादेव डेकाटे (70) द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभ्यारण्य से आए जंगली तोतों ने उनके अनार के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था और इसके लिए मुआवजे की मांग की थी। राज्य सरकार ने दावा किया कि अतीत में जारी सरकारी प्रस्तावों में कहा गया है कि मुआवजा केवल तभी दिया जा सकता है, जब जंगली हाथी और जंगली भैसें फलदार पेड़ो को नुकसान पहुंचाएं।
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