जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में 13 साल जेल में बिताने के बाद दो आरोपियों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने अनूपपुर जिला अदालत के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। यह घटना जुलाई 2013 की है। अनूपपुर में बृजेश सिंह नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
पुलिस ने इस मामले में आधार सिंह और पूरन सिंह के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने बृजेश सिंह को पुल से नीचे फेंक दिया था। जिला अदालत ने सबूतों के आधार पर दोनों को दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हादसे में हुई थी मौत
बचाव पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दो बाइक पर चार लोग घर लौट रहे थे। एक बाइक पर आधार सिंह और पूरन सिंह सवार थे। दूसरी बाइक पर बृजेश सिंह और कैलाश बैठे थे। रास्ते में पान नदी के पास एक ट्रक खड़ा था। बृजेश की बाइक उस ट्रक से टकरा गई। इस हादसे में कैलाश घायल हो गया, जबकि बृजेश की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आधार सिंह और पूरन सिंह डर के कारण वहां से चले गए थे।
हाईकोर्ट न की ये टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि प्रॉसिक्यूशन यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि यह हत्या थी या महज एक हादसा। कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं। कोर्ट ने कहा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं था। किसी भी मामले में सजा तभी दी जा सकती है, जब सबूतों की कड़ी पूरी हो। इस मामले में सबूतों की श्रृंखला अधूरी थी।
गिरफ्तारी का आधार
पुलिस ने जांच के दौरान पाया था कि बृजेश को आखिरी बार आधार सिंह, पूरन सिंह और कैलाश के साथ देखा गया था। इसी थ्योरी के आधार पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में जेल भेज दिया। लेकिन, अब 13 साल बाद हाईकोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया है।
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