उत्तर प्रदेश में हालिया कुछ सालों में कई मदरसों पर कार्रवाई की गई है, इस विवाद के बीच प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महराजगंज जिले में प्रशासन के जरिय सील किए गए दो मदरसों को खोलने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि सिर्फ मान्यता न होना किसी मदरसे को सील करने की पर्याप्त वजह नहीं हो सकती।
मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की जिला प्रशासन ने वहां स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन और मदरसा इदारा अरबिया सैदिया अशरफ उल उलूम को सील कर दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ दोनों मदरसों के जिम्मेदार लोगों ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राज्य अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी से संपर्क किया। इसके बाद जिला प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले श्रावस्ती में मौजूद मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा के मामले का हवाला देते हुए आदेश दिया कि दोनों मदरसों को 24 घंटे के भीतर खोल दिया जाए। अदालत की बेंच ने कहा कि किसी मदरसे की मान्यता न होना उसे सील करने का आधार नहीं बन सकता।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, बहराइच और सिद्धार्थनगर जिलों में जिला प्रशासन ने लगभग दो दर्जन मदरसों को गैर-मान्यता प्राप्त बताते हुए सील कर दिया था। इनमें से कुछ मदरसों को जमीयत की ओर से कानूनी मदद दी गई थी। इसी क्रम में महराजगंज के मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन और मदरसा इदारा अरबिया सैदिया अशरफ उल उलूम की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी।
इंकलाब की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से इस मामले की पैरवी सीनियर वकील मुर्तजा अली ने की। इस मामले की सुनवाई 10 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच में हुई थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के 1 मई 2025 के उस फैसले का हवाला दिया, जो श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा के मामले में दिया गया था।
अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि दोनों मदरसों को 24 घंटे के भीतर खोला जाए। इस संबंध में मौलाना काब रशीदी ने बताया कि अदालत की बेंच ने साफ कहा है कि सिर्फ गैर-मान्यता प्राप्त होने के आधार पर किसी मदरसे को सील नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले की प्रति जमीयत को शुक्रवार (13 मार्च) को हासिल हुई।
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