झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो में एक लापता लड़की के मामले में नाराजगी जताई है। महिला के कंकाल को गंभीरता से लेते हुए बुधवार (15 अप्रैल) को राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी), फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक और पीड़िता का पता लगाने के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 16 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की पीठ को याचिकाकर्ता रेखा देवी के अधिवक्ता ने बताया कि बोकारो पुलिस द्वारा बरामद किया गया महिला का कंकाल उनकी 18 वर्षीय लापता बेटी का नहीं है। रेखा देवी की बेटी पिछले साल जुलाई से लापता है।
अदालत ने उठाया सवाल?
अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या रेखा देवी और उनके पति के साथ कंकाल का डीएनए का मिलान किया गया है। अदालत ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि कंकाल बरामद हुए कुछ दिन हो गए हैं, लेकिन डीएनए परीक्षण या नमूने नहीं लिए गए हैं।
अदालत ने कहा कि अगर नमूना पहले ही एकत्र कर लिया गया होता, तो परिणाम कुछ ही घंटों में पता चल जाता, लेकिन बेवजह पूरी प्रक्रिया में देरी की जा रही है। अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बोकारो के एक जंगल से एक महिला का कंकाल बरामद किया गया है।
18 पुलिस कांस्टेबल निलंबित
इस बीच, बोकारो पुलिस अधीक्षक ने पिंड्राजोरा पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी समेत 18 पुलिस कांस्टेबल को कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया है। रेखा देवी की 18 वर्षीय बेटी 31 जुलाई 2025 को लापता हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने पिंड्राजोरा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। हालांकि, लापता लड़की का पता लगाने के लिए पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर देवी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
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