भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत आज चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर(CIAC) का उद्घाटन करने वाले हैं। इससे पहले भूटान से लौटते हुए उन्होंने दैनिक ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि भारत की न्यायिक व्यवस्था का खास स्थान है। इससे पूरी न्यायिक प्रणाली में अदालतों को संस्थागत सीख मिलती है। साथ ही भारतीय न्यायिक व्यवस्था दूसरे देशों के साथ गहरा न्यायिक सहयोग और भागीदारी भी करती है।
अदालतों की वैधता पारदर्शिता पर निर्भर: CJI
भारत के न्यायिक अनुभव का लाभ उठा सकती है दुनिया
साइबर अपराध किसी भौगोलिक सीमा को नहीं मानते
भारत की अदालतें दे सकती हैं दिशा
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि जटिल संघीय संरचना के तहत लाखों मामलों को संभालने वालीं भारत की अदालतों ने दशकों से ऐसे तंत्र और संस्थागत प्रतिक्रियाएं विकसित की हैं जो वैश्विक स्तर पर न्याय प्रणालियों को दिशा दे सकती हैं।
कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाता है
आज कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाता है। अदालतें एक-दूसरे के अनुभव से सीखती हैं। अधिकारों की रक्षा करना, संस्थाओं को मजबूत करना और न्याय तक पहुंच आसान बनाना जैसी चीजें कोर्ट अनुभवों से सीखते हैं।
भारत की न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों को व्यावहारिक इनोवेशंस के साथ तालमेल बिठाती रही है। यह वैश्विक बातचीत में अपना योगदान दे सकती है।
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