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अदालतें सिर्फ फैसले देने तक सीमित नहीं, साख-पारदर्शिता भी जरूरी: CJI सूर्यकांत


CJI Surya Kant .png
07 Mar 2026
Categories: Hindi News

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत आज चंडीगढ़ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर(CIAC) का उद्घाटन करने वाले हैं। इससे पहले भूटान से लौटते हुए उन्होंने दैनिक ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि भारत की न्यायिक व्यवस्था का खास स्थान है। इससे पूरी न्यायिक प्रणाली में अदालतों को संस्थागत सीख मिलती है। साथ ही भारतीय न्यायिक व्यवस्था दूसरे देशों के साथ गहरा न्यायिक सहयोग और भागीदारी भी करती है।
 

अदालतों की वैधता पारदर्शिता पर निर्भर: CJI

  • CJI सूर्यकांत ने कहा-अदालतों की वैधता महज निर्णय देने तक सीमित नहीं है। यह उनकी साख, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच को आसान बनाने पर भी निर्भर करती है।
  • उन्होंने कहा-तकनीक को जब पूरी सोच के साथ एकीकृत किया जाए तो यह न्याय देने में बदलाव ला सकती है और कोर्टों को नागरिकों के करीब ला सकती है।

भारत के न्यायिक अनुभव का लाभ उठा सकती है दुनिया

  • CJI सूर्यकांत ने कहा-भारत का विशाल न्यायिक अनुभव इसके मजबूत संवैधानिक ढांचे, अदालतों के कामकाज के तरीके और तेजी से विकसित हो रही तकनीक आधारित न्याय वितरण प्रणाली पर आधारित है।
  • बीते साल नवंबर में देश का मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद से सीजेआई सूर्यकांत का चंडीगढ़ का यह पहला दौरा है। यहां पर वह एक बड़े इंटरनेशनल लीगल इवेंट में शिरकत कर रहे हैं, जिसमें 50 देशों के न्यायिक संस्थाओं के स्पीकर आ रहे हैं। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, कनाडा और फ्रांस की न्यायिक संस्थाओं के पदाधिकारी आ रहे हैं।

साइबर अपराध किसी भौगोलिक सीमा को नहीं मानते

  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आगे कहा कि डिजिटल जगत को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के लिए कानूनी प्रणालियों को अधिकाधिक सहयोग करना होगा।
  • जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-साइबर जगत में होने वाले अपराध भौगोलिक सीमाओं का सम्मान नहीं करते। इसलिए न्यायिक प्रणालियों और कानूनी संस्थानों को सहयोगात्मक ढांचे विकसित करने होंगे ताकि न्याय तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठा सके।

भारत की अदालतें दे सकती हैं दिशा

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि जटिल संघीय संरचना के तहत लाखों मामलों को संभालने वालीं भारत की अदालतों ने दशकों से ऐसे तंत्र और संस्थागत प्रतिक्रियाएं विकसित की हैं जो वैश्विक स्तर पर न्याय प्रणालियों को दिशा दे सकती हैं।

कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाता है

आज कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाता है। अदालतें एक-दूसरे के अनुभव से सीखती हैं। अधिकारों की रक्षा करना, संस्थाओं को मजबूत करना और न्याय तक पहुंच आसान बनाना जैसी चीजें कोर्ट अनुभवों से सीखते हैं।

भारत की न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों को व्यावहारिक इनोवेशंस के साथ तालमेल बिठाती रही है। यह वैश्विक बातचीत में अपना योगदान दे सकती है।

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