सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही एक स्थाई नियमित संवैधानिक पीठ की नियुक्ति की जाएगी। यह पीठ संवैधानिक मामलों से जुड़े सवाल और कानून की व्याख्या से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेगी। बताया जा रहा है कि देश् के 70 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा। सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 34 जज नियुक्त हैं। एक अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की स्थाई संविधान पीठ होगी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जो प्रक्रिया रही है, उसके अनुसार दो जजों की बेंच किसी मुद्दे को तीन जजों की बेंच के पास भेजती है और तीन जजों की बेंच जरुरत पड़ने पर महत्वपूर्ण केस को संवैधानिक पीठ के पास भेजती है।
चीफ जस्टिस के पत्र के बाद बढ़ाई गई थी जजों की संख्या
पिछले दिनों चीफ जस्टिस रंजन गोगोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था कि जजों की संख्या कम होने के कारण काम का अतिरिक्त दबाव पड़ता है और केस पेंडिंग होते चले जाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से तत्काल इस दिशा में कदम उठाने की मांग की थी, जिसके बाद संसद से एक संशोधन के जरिए जजों की संख्या बढ़ाई गई।
पेंडिंग केस कम करने को तीन जजों की बेंच का भी होगा गठन
सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान समय तक 164 ऐसे मामलें हैं, जिन्हें विचारण और सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच के पास भेजा गया है। लंबे समय से पेंडिंग पड़े ऐसे 164 मामलों की सुनवाई के लिए तीन जजों की स्थाई बेंच का भी गठन करने जा रहे हैं।
वर्तमान में स्थाई तीन जजों की बेंच सिर्फ एक या दो ही है जो रोजाना मामलों की सुनवाई कर रही है। दिक्कत यह है कि इस बेंच के पास भी पहले से ही इतने केस रोज की सुनवाई के लिए रहते हैं कि लंबित केसों की सुनवाई के लिए पर्याप्त वक्त नहीं मिल पाता है। बेंच के गठन के बाद इसमें सहूलियत होगी।
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