Citation : 2019 Latest Caselaw 5046 ALL
Judgement Date : 27 May, 2019
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
ए.एफ.आर.
कोर्ट नं0 - 5
केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 162 ऑफ 2019
अप्लीकाण्ट :- एम/एस शर्मा सीमेण्ट स्टोर
अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर कामर्शियल टैक्स, यू0पी0
काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- मुरारी मोहन राय
काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0
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प्रस्तुत पुनर्निरीक्षण याचिका धारा 58 उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2008 के अन्तर्गत अपीलार्थी सर्वश्री शर्मा सीमेण्ट स्टोर, गंज रोड, बिजनौर द्वारा प्रस्तुत की गई है। प्रस्तुत याचिका वर्ष 2014-15 से सम्बन्धित है। अपीलार्थी एक अपंजीकृत व्यापारी है।
अपीलार्थी द्वारा वर्ष 2014-15 में कुल रुपये 1,85,147/- की सीमेण्ट की खरीद की गई जिसमें से कुल रुपये 1,21,500/- की बिक्री दर्शायी गयी।
अपीलार्थी द्वारा स्टाक रजिस्टर खरीद बिक्री से सम्बन्धित रजिस्टर एवं खरीद बिक्री के बिल इत्यादि रखने का दावा किया गया।
विशेष अनुसंधान शाखा द्वारा दिनांक 30.12.2014 को अपीलार्थी के व्यापार स्थल का सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के समय व्यापार स्थल पर लगभग 100 कुन्टल बालू एवं 500 बोरी सीमेण्ट की पाई गई।
सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा व्यापार स्थल पर 7 लूज पर्चे भी बरामद किये गए। बरामद किये हुए लूज पर्चों से सर्वेक्षण कर्ता द्वारा यह मत लिया गया कि व्यापारी द्वारा माह अगस्त एवं माह सितम्बर में की गई खरीद बिक्री को अपने लेखा पुस्तकों में दर्शित नहीं किया गया है।
सर्वेक्षण आख्या के आधार पर कर निर्धारण अधिकारी द्वारा अपील कर्ता को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया जिसके अनुपालन में अपील कर्ता द्वारा कर निर्धारण अधिकारी के सम्मुख स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया जिसे कर निर्धारण अधिकारी द्वारा अस्वीकार किया गया।
कर निर्धारण अधिकारी द्वारा अपीलार्थी के विरुद्ध सीमेण्ट की खरीद रुपये 2,00,000/- पर 15.5% की दर से रुपये 31,000/- अपंजीकृत से खरीद पर कर आरोपित किया गया। इसी तरह कर निर्धारण अधिकारी द्वारा व्यापारी के विरुद्ध रुपये 2,25,000/- बालू की खरीद पर 5% की दर से रुपये 11,250/- कर आरोपित किया गया।
कर निर्धारण अधिकारी द्वारा व्यापारी के विरुद्ध अपंजीकृत सीमेण्ट की बिक्री रुपये 2,30,000/- पर 15.5% की दर से रुपये 35,650/- कर निर्धारित किया गया साथ ही पंजीकृत से खरीद की बिक्री रुपये 1,21,500/- पर 15.5% की दर से रुपये 18,832/- तथा अपंजीकृत से खरीदे बालू की बिक्री रुपये 2,70,000/- पर 5% की दर से रुपये 13,500/- कर आरोपित किया गया। अर्थात अपीलार्थी पर कुल कर रुपये 1,10,232/- आरोपित किया गया।
अपीलार्थी द्वारा कर निर्धारण आदेश दिनांक 29.09.2016 के विरुद्ध प्रथम अपील प्रस्तुत की गई जिसे प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा अपने निर्णय व आदेश दिनांकित 12.12.2017 को अस्वीकार किया गया।
प्रथम अपीलीय निर्णय दिनांक 12.12.2017 के विरुद्ध अपीलार्थी द्वारा द्वितीय अपील संख्या 32/2019 न्यायालय सदस्य वाणिज्यकर अधिकरण, पीठ प्रथम मेरठ के सम्मुख प्रस्तुत की गई।
विद्वान अधिकरण द्वारा अपीलार्थी के अधिवक्ता एवं विभागीय प्रतिनिधि को विस्तार से सुना गया तथा निम्न आदेश पारित करते हुए व्यापारी के विरुद्ध कुल रुपये 3,31,500/- (क्रय एवं विक्रय धन) करयोग विक्रय धन निर्धारित करते हुए रुपये 29,332/- कर के रूप में आदेश दिनांक 25 मार्च 2019 द्वारा आरोपित किया गया जो कि निम्नवत है:-
"मेरे द्वारा व्यापारी की ओर से उसके विद्वान अधिवक्ता श्री एस0एन0 खन्ना एडवोकेट तथा विभाग की ओर से विद्वान ए0सी0एस0आर0 को सुना गया तथा पत्रावली का ध्यानपूर्वक परिशीलन किया।
एस0आई0बी0 रिपोर्ट की छायाप्रति के अवलोकन से दुकान का साईज 15 X 12 फीट होना अंकित है और यह ही तर्क अपीलकर्ता का है कि उसकी दुकान बहुत छोटी है और व्यवसाय भी बहुत छोटे स्तर का है। विभाग यह भी स्वीकार कर रहा है कि अपीलकर्ता अपंजीकृत है और उसकी दुकान में 500 बैग सीमेण्ट के और 100 कुन्तल रेता सर्वेक्षण के समय पाया गया। अपीलकर्ता की ओर से स्टाक रजिस्टर की जो छायाप्रति प्रस्तुत की गयी है उसके अनुसार भी सर्वेक्षण के दिन स्टाक में 500 कट्टे सीमेण्ट ही था और उस दिन कोई बिक्री न किया जाना स्टाक रजिस्टर से स्पष्ट होता है। इसके अतिरिक्त व्यापारी की बिक्री के सम्बन्ध में स्टाक रजिस्टर के अवलोकन से व्यापारी का यह तर्क विश्वसनीय है कि उसका व्यापार छोटे स्तर का है क्योंकि किसी भी दिन 18 कट्टे से अधिक की बिक्री प्रदर्शित नहीं हो रही है। विभाग भी अप्रत्यक्ष रूप से इस तथ्य को स्वीकार कर रहा है कि व्यापार छोटे स्तर का है और व्यापारी अपंजीकृत है यदि व्यापारी का व्यापार पंजीकृत व्यापारी की सीमा में आता है तो विभाग को व्यापारी को नोटिस देकर पंजीयन के लिये कहना चाहिए किन्तु ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है, जो अभिग्रहीत पर्चे विभाग द्वारा लिये गये है। उनके अवलोकन से 143 दिनों में लगभग रुपये 68,000/- की रेत की बिक्री परिलक्षित होती है, जिसके विपरीत विभाग की ओर से रेत की खरीद रुपये 2,25,000/- तथा बिक्री रुपये 2,70,000/- निर्धारित की गयी है, जो अनुचित प्रतीत होती है। मेरे विचार में व्यापारी के व्यापार की प्रकृति को देखते हुए रेत की खरीद रुपये 1,00,000/- तथा बिक्री रुपये 1,10,000/- निर्धारित किया जाना उचित होगा, जिस पर 5 प्रतिशत की दर से रुपये 10,500/- कर देयता निर्धारित की जाती है।
व्यापारी पर अपंजीकृत से सीमेण्ट की खरीद बिक्री पर भी कर आरोपित किया गया है किन्तु ऐसा कोई साक्ष्य अभिग्रहीत पर्चों के अवलोकन से स्पष्ट नहीं होता कि व्यापारी ने अपंजीकृत से सीमेण्ट की खरीद की हो और तदनुसार बिक्री की हो। इन परिस्थितियों में अपीलकर्ता व्यापारी पर अपंजीकृत से सीमेण्ट की खरीद बिक्री पर लगाया गया कर अनुचित प्रतीत होता है, जो समाप्त किये जाने योग्य पाया जाता है। तद्नुसार अपीलकर्ता व्यापारी की यह अपील आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है और अपीलकर्ता की कर देयता निम्न प्रकार निर्धारित की जाती है।
अपंजीकृत से रेत की खरीद
1,00,000/-
5.00%
5,000/-
अपंजीकृत से रेत की बिक्री
1,10,000/-
5.00%
5,500/-
पंजीकृत से खरीदे सीमेण्ट की बिक्री
1,21,500/-
15.50%
18,832/-
योग
29,332/-
फलस्वरूप आरोपित कर में रुपये 82,000/- की कमी किये जाने योग्य है।
व्यापारी द्वारा योजित द्वितीय अपील संख्या- 32/2019 आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है तथा आरोपित कर में रुपये 82,000/- की कमी की जाती है। यदि यह कर जमा कर दिया गया हो तो उसे नियमानुसार अपीलकर्ता को वापिस किया जाये।"
प्रस्तुत पुनर्निरीक्षण याचिका अपीलार्थी द्वारा उपरोक्त अधिकरण आदेश दिनांक 25 मार्च 2019 के विरुद्ध योजित की गई है।
याची के विद्वान अधिवक्ता श्री मुरारी मोहन राय द्वारा मेरे सम्मुख यह कथन किया गया कि विद्वान अधिकरण का निर्णय स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2008 की धारा 3 द्वारा यह प्रदत्त किया गया है कि किन परिस्थितियों में कर का भार, उदग्रहण व दर निर्धारित की जावेगी।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2008 उप धारा (4) धारा 3 को प्रस्तुत किया गया।
धारा- 3 उप धारा- (4) निम्नवत हैं:-
"धारा- 3. कर का भार, उद्ग्रहण और दर-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए प्रत्येक व्यवहारी कराधेय माल के, यथा स्थिति, विक्रय या क्रय या दोनों के उतने करयोग्य आवर्त पर, प्रत्येक करनिर्धारण वर्ष के लिए, इस अधिनियम के अधीन ऐसी दरों पर और विक्रय या क्रय के ऐसे बिन्दु पर, जैसा धारा-4 या धारा-5 के अधीन उपबन्धित है, कर के भुगतान करने का दायी होगा:
प्रतिबन्ध यह है कि कर का उद्ग्रहण, प्रत्येक व्यापारी से ऐसे विक्रयों और क्रयों पर किया और प्रमाणित किया जायेगा, जो ऐसे दिनांक को या उसके पश्चात हो, जिसको व्यापारी, यथास्थिति, उपधारा (3) या उपधारा (5) के उपबन्धों के अनुसार कर के भुगतान का दायी हो।
(4) उपधारा (3) में निर्दिष्ट कराधेय मात्रा 5 लाख रुपये होगी।
(प्रतिबन्ध यह है कि जहाँ कोई व्यवहारी कर निर्धारण वर्ष के किसी भाग में कारबार करता है वहाँ कराधेय मात्रा रुपये पाँच लाख की आंशिक धनराशि होगी जिसकी गणना आनुपातिक आधार पर की जायेगी तथा इस हेतु माह के भाग को सम्पूर्ण माह गिना जायेगा।)"
धारा 3 की उप धारा (4) में स्पष्ट रूप से यह प्रतिपादित किया गया है कि धारा 3 की उप धारा (3) में निर्दिष्ट कराधेय मात्रा रूपये 5,00,000/- होगी अर्थात, यदि किसी व्यापारी का व्यापार का स्तर पूरे वर्ष में रुपये 5,00,000/- से कम है, चाहे वह व्यापारी पंजीकृत हो अथवा अपंजीकृत हो तो उस दशा में व्यापारी कर के दायित्व से मुक्त रहेगा।
मेरे द्वारा विद्वान अधिवक्ता श्री मुरारी मोहन राय द्वारा प्रस्तुत कथन का समुचित परीक्षण किया गया एवं उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2008 की धारा 3 की उप धारा (3) उप धारा (4) का सम्यक परीक्षणोंपरान्त यह निष्कर्ष दिया जा रहा है कि किन्ही भी परिस्थितियों में यदि किसी व्यापारी का व्यापार रुपये 5,00,000/- (रुपये पांच लाख) से कम सम्पूर्ण वर्ष में होता है तो वह कर से मुक्ति का अधिकारी होगा।
प्रस्तुत वाद में यद्यपि कि व्यापार कर अधिकारी द्वारा अपीलार्थी की सम्पूर्ण करयोग्य खरीद व बिक्री कुल रुपये 10,46,500/- निर्धारित की गई थी परन्तु वाणिज्यकर अधिकरण द्वारा अपने विस्तृत आदेश में यह पाया गया कि अपीलार्थी की वर्ष 2014-15 मे करयोग्य खरीद व बिक्री कुल रुपये 3,31,500/- ही हुई है।
मेरे द्वारा विद्वान स्थायी अधिवक्ता श्री अविनाश चन्द्र त्रिपाठी से यह जानना चाहा कि क्या अधिकरण के आदेश दिनांक 25.03.2019 के विरुद्ध वाणिज्यकर आयुक्त द्वारा कोई पुनर्निरीक्षण याचिका इस न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत की गई है। श्री अविनाश चन्द्र त्रिपाठी, स्थायी अधिवक्ता द्वारा यह बताया गया कि चूँकि विवादित कर कुल रुपये 1,00,000/- से कम है तथा शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि जब तक कि कोई विधिक प्रश्न न हो तो उस परिस्थिति में रुपये 1,00,000/- से कम के विवादित वादों को उच्च न्यायालय स्तर पर न प्रस्तुत किया जावे।
ऊपर लिखित विवरण तथा तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तुत पुनर्निरीक्षण याचिका स्वीकृत की जाती है।
वाणिज्य कर अधिकरण के निर्णय दिनांक 25.03.2019 को अपास्त किया जाता है।
दिनाँक :- 27.5.2019
एस0 के0 श्रीवास्तव
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