Citation : 2019 Latest Caselaw 4404 ALL
Judgement Date : 13 May, 2019
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
ए.एफ.आर.
कोर्ट नं0 - 5
केस :- रिट टैक्स नं0 - 481 ऑफ 2016
पिटीशनर :- श्रीमती सुराती देवी
रेस्पान्डेन्ट :- स्टेट ऑफ यू0पी0 एण्ड 6 अदर्स
काउंसिल फार पिटीशनर :- चन्दन शर्मा, अभिषेक राय
काउंसिल फार रेस्पान्डेन्ट :- सी0एस0सी0, एस0सी0
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याचिनी के विद्वान अधिवक्ता श्री अभिषेक राय एवं विपक्षी संख्या 1,2,3,4 एवं 5 की ओर से श्री अविनाश चन्द्र त्रिपाठी, स्थायी अधिवक्ता को सुना।
प्रस्तुत याचिका के द्वारा याचिनी ने जिला आबकारी अधिकारी आजमगढ़ के आदेश दिनांक 09.07.2015, जिलाधिकारी आजमगढ़ द्वारा संस्तुति दिनांक 09.07.2015, जिला आबकारी अधिकारी द्वारा पारित आदेश दिनांक 16.07.2015, आबकारी आयुक्त द्वारा पारित आदेश (अन्तर्गत धारा 11(1) यू0पी0 एक्साईज ऐक्ट, 1910 (अपील संख्या 72/2015) दिनांक 26.08.2015 तथा पुनर्निरीक्षण याचिका संख्या 60 (रिवीजन) / 2015 में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पारित आदेश धारा 11(2) दिनांक 22.02.2016 को चुनौती दी गई।
वाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि याचिनी को आबकारी वर्ष 2015-16 में दिनांक 28.05.2015 को जिला आबकारी अधिकारी/ जिलाधिकारी, आजमगढ़ द्वारा देशी शराब की फुटकर बिक्री हेतु देशी शराब दुकान कमालपुर को संचालित करने के लिए निर्धारित प्रतिभूति एवं निर्धारित शुल्क जमा करने पर अस्थायी अनुज्ञापन 15 दिन के लिए जारी किया गया।
यू0पी0 एक्साईज ऐक्ट, 1910 के अन्तर्गत व्यवस्था के अनुसार स्थायी अनुज्ञापन जारी होने तक अथवा 15 दिन जो भी पहले हो, तक ही अस्थायी अनुज्ञापन की व्यवस्था की गई है।
चूँकि याचिनी द्वारा कुल प्रतिभूति 8,17,200/- के विरुद्ध मात्र 2,00,000/- रूपये की प्रतिभूति जमा की गई अतएव याचिनी को सम्बन्धित विभागीय अधिकारी द्वारा आदेशित किया गया कि याचिनी 3 दिन के अन्दर बकाया प्रतिभूति का भुगतान सुनिश्चित करे।
याचिनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि याचिनी के द्वारा आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 सदर, आजमगढ़ के सम्मुख एक प्रार्थनापत्र दिनांक 11.07.2015 प्रस्तुत करते हुए यह निवेदित किया गया कि याचिनी को बकाया लाईसेन्स फीस व प्रतिभूति धनराशि जमा करने हेतु 10 से 15 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान किया जावे क्योंकि याचिनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उपरोक्त पत्र दिनांक 11.07.2015 में याचिनी द्वारा विभाग के पत्र दिनांक 20.06.2015 का सन्दर्भ ग्रहण करने हेतु प्रार्थना की गई।
यह तथ्य इस बात से समर्थित है कि विभाग द्वारा दिनांक 20.06.2015 को याचिनी को पत्र अर्थात नोटिस यह स्पष्ट करते हुए प्रेषित किया था कि याचिनी द्वारा देय जो रुपये 6,17,200/- प्रतिभूति धनराशि बकाया है को निर्धारित अवधि व्यवस्थापन उपरान्त अधिकतम 20 दिन होने के पश्चात भी जमा नहीं किया गया है।
याचिनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में यह कहा गया कि याचिनी द्वारा दिनांक 24.07.2015 को बकाया प्रतिभूति धनराशि रुपये 6,17,200/- डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से विभाग में जमा करने का प्रयास किया गया परन्तु विभागीय अधिकारी द्वारा उपरोक्त डिमांड ड्राफ्ट याचिनी को वापस किया गया तथा यह कहा गया कि विभाग द्वारा सम्बन्धित दुकान का अनुज्ञापन दिनांक 16.07.2015 को समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञापित किया जा चुका है।
याचिनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में मेरे सम्मुख यह प्रकाश में लाया गया कि दिनांक 09.07.2015 के पश्चात विभाग द्वारा दिनांक 12.07.2015, दिनांक 14.07.2015 एवं दिनांक 16.07.2015 को याचिनी के पक्ष में देशी शराब का आवंटन लगातार किया जाता रहा। अपने कथन के समर्थन में विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि एक तरफ याचिनी के लाईसेन्स का निरस्तीकरण दिनांक 09.07.2015 को किया गया तथा दूसरी तरफ याचिनी को देशी शराब का आवंटन दिनांक 16.07.2015 तक जारी रखा गया। याचिनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि जिलाधिकारी/ जिला आबकारी अधिकारी द्वारा पारित आदेश जिनका समर्थन आबकारी आयुक्त तथा शासन द्वारा किया गया कदापि उपयुक्त नहीं है।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा याचिनी के अधिवक्ता के कथन का विरोध किया गया तथा यह कहा गया कि लाईसेन्स का निरस्तीकरण पूर्णतः वैधानिक एवं विधि अनुकूल है।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा मेरे सम्मुख यह कहा गया कि याचिनी द्वारा समय के अन्तर्गत प्रतिभूति जमा न करना स्वयं में एक आधार था जिसके द्वारा याचिनी का लाईसेन्स निष्काषित किया गया।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि वस्तुतः जिला आबकारी अधिकारी द्वारा याचिनी को समय समाप्त होने के पश्चात भी 3 दिन का समय प्रदान किया गया कि वह बकाया प्रतिभूति जमा करें अन्यथा उनका आबकारी लाईसेन्स निरस्त किया जाएगा तथा उनके द्वारा जमा बेसिक लाईसेन्स फीस व प्रतिभूति राशि राज्य सरकार के पक्ष समपहृत कर ली जाएगी।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि जहाँ तक देशी मदिरा की सप्लाई का प्रश्न है उक्त की खरीद याचिनी द्वारा बल्क मदिरा सप्लायर के यहाँ धनराशि जमाकर प्राप्त की जाती रही जिसके लिए वस्तुतः याचिनी कदापि अधिकृत नहीं थी।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि बल्क मदिरा सप्लायर द्वारा यदि मदिरा की सप्लाई की जाती है एवं यदि उसके संज्ञान में यह तथ्य प्रकट नहीं किया जाता है कि प्राप्तकर्ता का लाईसेन्स निरस्त किया जा चुका है उस दशा में प्राप्तकर्ता कदापि यह नहीं कह सकता है कि वह विधिक रूप से देशी मदिरा को प्राप्त कर रहा है।
विद्वान स्थायी अधिवक्ता द्वारा लाईसेन्स निरस्तीकरण का आदेश तथा आबकारी आयुक्त द्वारा पारित आदेश एवं पुनर्निरीक्षण याचिका में शासन द्वारा पारित आदेश का समर्थन किया गया एवं उत्तर प्रदेश आबकारी (देशी शराब की फुटकर बिक्री के अनुज्ञापनों का व्यवस्थापन) नियमावली 2002 का नियम 12 प्रस्तुत किया गया। उपरोक्त नियम 12 द्वारा बेसिक लाईसेन्स फीस तथा प्रतिभूति धनराशि को राज्य सरकार के पक्ष में समपहृत करने की दशा एवं व्यवस्था का क्रियान्वयन करने की प्रक्रिया का चित्रण किया गया है, जो निम्नवत है:-
"12. बेसिक लाइसेंस फीस और प्रतिभूति धनराशि का भुगतान यदि किसी आवेदक को लाइसेंस धारी के रूप में चयनित किया जाता है तो अपने चयन की सूचना की प्राप्ति के तीन कार्य दिवसों के भीतर वह बेसिक लाइसेंस फीस की सम्पूर्ण धनराशि जमा करेगा। उससे यह अपेक्षा की जायेगी कि वह प्रतिभूति धनराशि का आधा भाग अपने चयनित होने की सूचना के 10 कार्य दिवसों के भीतर और अवशेष प्रतिभूति धनराशि अपने चयनित होने की सूचना के 20 दिनों के भीतर जमा कर दे। यदि वह निहित अवधि में बेसिक लाइसेंस फीस या प्रतिभूति धनराशि जमा करने में विफल रहता है तो उसका चयन निरस्त हो जायेगा और उसकी धरोहर धनराशि तथा बेसिक लाइसेंस फीस और प्रतिभूति धनराशि यदि उसके द्वारा जमा की गई हो राज्य सरकार के पक्ष में समपहृत कर ली जायेगी और उक्त दुकान को तत्काल पुनर्व्यवस्थापित कर दिया जायेगा।"
मेरे द्वारा याचिनी के विद्वान अधिवक्ता एवं विपक्षी के स्थायी अधिवक्ता को विस्तृत रूप से सुना गया, पत्रावली का सम्यक परिशीलन किया गया तथा यह पाया गया कि जिला आबकारी अधिकारी द्वारा लाईसेन्स निरस्तीकरण आदेश दिनांक 09.07.2015 /16.07.2015 पूर्णतः वैधानिक है जिसका समर्थन आबकारी आयुक्त तथा पुनर्निरीक्षण सम्यक अधिकारी द्वारा सम्यक विचारोपरान्त किया गया।
मैं, जिला आबकारी अधिकारी/जिलाधिकारी, आजमगढ़ के आदेश की पुष्टि करता हूँ।
उपरोक्त कारणों से प्रस्तुत याचिका पोषणीय नहीं है अतएव याचिका अस्वीकार की जाती है।
दिनाँक :- 13.5.2019
एस0 के0 श्रीवास्तव
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