हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजधानी में ट्रैफिक जाम लगने से आम लोगों को हो रही परेशानी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के समय पेश हुए अफसरों को निर्देश दिया कि वे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालें।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश शहर में जाम की समस्या को लेकर दायर कई जनहित याचिकाओं पर पारित किया। याचिका में जनहित में यातायात समस्या के उचित समाधान के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। राजधानी में विशेष रूप से पॉलीटेक्निक से किसान पथ तक यातायात जाम की समस्या के संबंध में दिए गए पूर्व आदेश के तहत डीसीपी (ट्रैफिक), डीसीपी (पूर्व) और लखनऊ नगर निगम के एक राजपत्रित अधिकारी शुक्रवार को खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। इन अफसरों ने ट्रैफिक जाम को दूर करने के लिए हाल में किए गए उपायों की जानकारी दी। हालांकि कोर्ट ने इंतजामों पर असंतोष जताते हुए और अधिक प्रभावी तथा स्थायी उपाय करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

इस मामले में पूर्व की सुनवाई में अदालत ने कहा था पिछले कई वर्षों से लखनऊ में पॉलीटेक्निक से लेकर किसान पथ तक के सड़क मार्ग पर जाम और यातायात से संबंधित अन्य समस्याएं आम जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बन रही हैं। कई जनहित याचिकाओं के माध्यम से यह तथ्य अदालत के ध्यान में लाया गया है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अब तक कोई उपयुक्त समाधान नहीं निकाला है। अदालत ने इस जनहित याचिका को एक अन्य समान मामले के साथ जोड़ने और अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।

पूर्व की सुनवाई में अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि उपस्थित होने से पहले अधिकारी, याचिका और इसमें उल्लिखित संपूर्ण मार्ग व क्षेत्र (पॉलीटेक्निक से लेकर किसान पथ तक के सड़क मार्ग) का निरीक्षण करेंगे जिससे समस्या का पता लगाया जा सके और क्या समाधान हो सकते हैं, यह निर्धारित किया जा सके। इसके बाद ही यदि कोई समाधान हो तो न्यायालय को सुझाया जाए।

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