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M/S Darshan Oils Ltd. vs The Commissioner Of Trade Tax
2018 Latest Caselaw 1771 ALL

Citation : 2018 Latest Caselaw 1771 ALL
Judgement Date : 30 July, 2018

Allahabad High Court
M/S Darshan Oils Ltd. vs The Commissioner Of Trade Tax on 30 July, 2018
Bench: Ashok Kumar

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

ए एफ आर

रिजर्व

कोर्ट नं0 - 6

केस :- सेल्स/ट्रेड टैक्स रिवीजन नं0 - 1817 ऑफ 2007

अप्लीकाण्ट :- एम/एस दर्शन ऑयल्स लिमिटेड

अपोजिट पार्टी :- दि कमिश्नर ऑफ ट्रेड टैक्स

काउंसिल फार अप्लीकाण्ट :- पीयूष अग्रवाल, भरत जी अग्रवाल

काउंसिल फार अपोजिट पार्टी :- सी0 एस0 सी0

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प्रस्तुत निगरानी व्यापार कर अधिकरण, अलीगढ़, पीठ-अलीगढ़ (खण्डपीठ) के द्वारा द्वितीय अपील संख्या 1/2007 वर्ष 1996-1997 प्रान्तीय वाद में पारित आदेश दिनाँक 24.03.2007 के विरुद्ध दाखिल की गई है।

वाद के तथ्य निम्न है।

प्रस्तुत वर्ष के वाद में व्यापारी द्वारा प्रस्तुत किये गये फार्म - एफ प्रान्त बाहर के आढ़ती/ ट्रांसपोर्टर की जाँच करने पर यह पाया गया कि निगरानी कर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों में वर्णित कथित ट्रांसपोर्ट कम्पनी अस्तित्व में नहीं है।

व्यापारी द्वारा प्रान्त बाहर के जिस आढ़ती सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी, समरिया चौक, सतना, मध्य प्रदेश को रु0 13,24,20,099.99/- मूल्य के वनस्पति घी तथा रु0 3,33,33,191.25/- मूल्य के खाद्य तेल की कन्साइनमेण्ट के आधार पर बिक्री प्रदर्शित की गई है वह सतना के उक्त व्यापारी ने वर्ष 1996-1997 में वनस्पति घी व खाद्य तेल की कोई भी खरीद/बिक्री अपने रिकार्ड के माध्यम से प्रदर्शित नहीं की है।

यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि सतना के उक्त व्यापारी के द्वारा केवल, चूड़ी, अगरबत्ती व गुड़ की मात्र रु0 11,53,295/- की बिक्री वर्ष 1996-1997 में अपने रूपपत्रों के माध्यम से घोषित की गई है।

कर निर्धारण अधिकारी द्वारा कर निर्धारण आदेश पारित करते हुए उक्त तथ्यों के बारे में विस्तृत चर्चा की गई।

"इस कन्साइनमेण्ट बिक्री के संबंध में व्यापारी द्वारा दाखिल प्रपत्र एफ को सतना के व्यापारी ने चूड़ी व गुड़ के लिए जारी करना प्रदर्शित किया गया है तथा अवशेष प्रपत्र एफ को जारी न करना अपने कर निर्धारक अधिकारी के समक्ष दर्शित किया है। कन्साइनमेण्ट के उक्त दावे के संबंध में व्यापारी द्वारा भुगतान अलीगढ़ स्थित कैनरा बैंक की शाखा से चैक/ड्राफ्ट से प्राप्त होना बताया गया है जिसकी जाँच पर यह तथ्य पाया गया कि सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना ने अपना स्थानीय पता 1/271 शक्तिनगर, गूलररोड, अलीगढ़ प्रदर्शित किया था, परन्तु जाँच करने पर उक्त पते पर व्यापारी का कोई अस्तित्व उक्त पते पर नहीं पाया गया। उक्त बैंक खाते के अवलोकन पर यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि इन खातों में बड़ी-बड़ी धनराशियाँ नकद जमा की गयी है तथा बाद में चैक तथा ड्राफ्ट से भुगतान किया गया है। व्यापार के सामान्य क्रम में यह सम्भव नहीं है कि उक्त सतना के व्यापारी द्वारा बड़ी-बड़ी धनराशि सतना से अलीगढ़ तक नकद (Cash) लाकर के इस खाते में जमा की जायेगी तथा आपको भुगतान हेतु इस बैंक खाते से चैक/ड्राफ्ट जारी किये जायेंगे। सतना के उक्त व्यापारी की जाँच अक्टूबर 96 में किये जाने पर यह फर्म बंद पाई गई तथा इसका पंजीयन भी दिनांक 01.04.1997 से निरस्त कर दिये जाने की सूचना वाणिज्य कर अधिकारी सतना द्वारा दी गयी है२। उक्त परिस्थितियों में वाणिज्य कर आयुक्त मध्य प्रदेश इन्दोर के आदेश संख्या 348/99/41/डी/21/6-5/99 के द्वारा सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना को जारी समस्त सी/एफ फार्मो को निरस्त कर दिया गया है। वैसे भी इन फार्म एफ में उल्लिखित माल की परिवहनकर्ता ट्रान्सपोर्ट कम्पनी-दि सेन्ट्रल फारवर्डिंग एजेन्सी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ तथा सर्वश्री लक्ष्मी ट्रांसपोर्ट कम्पनी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ की वि0अनु0शा0 इकाई अलीगढ़ द्वारा दिनांक 24.12.1997 को जाँच किये जाने पर इन ट्रांसपोर्ट कम्पनियों का कोई अस्तित्व नहीं पाया गया था। फलतः व्यापारी द्वारा कन्साइनमेण्ट पर उक्त माल भेजना प्रमाणित नहीं होता है। अतएव क्यों न कन्साइनमेण्ट बिक्री को अस्वीकार करके प्रान्तीय बिक्री मानते हुए नियमानुसार कर आरोपित कर दिया जाये।"

इसी प्रकार एक अन्य व्यापारी सर्वश्री महेश एण्ड सन्स, नई दिल्ली द्वारा फार्म एफ के विरुद्ध रु0 4,43,04,578/- रिफाइन्ड ऑयल की एवं रु0 12,99,07,891/- की वनस्पति घी की कन्साइनमेण्ट बिक्री प्रदर्शित की गई।

व्यापारी द्वारा उक्त कन्साइनमेण्ट बिक्री जाँच पर सत्यापित नहीं पाई गई न ही माल का परिवहन ट्रांसपोर्ट कम्पनी के माध्यम से सही पाया गया क्योंकि जिस ट्रांसपोर्ट कम्पनी से माल परिवहन करने का विवरण दर्शाया गया वह कदापि अस्तित्व में नहीं पायी गई।

कर निर्धारण अधिकारी ने एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस व्यापारी को दिया। जिसमें उपरोक्त अनियमित बिन्दुओं को स्पष्ट करने हेतु व्यापारी का जवाब माँगा।

व्यापारी के स्पष्टीकरण के पश्चात कर निर्धारण अधिकारी द्वारा विस्तृत विवेचना के उपरान्त यह निष्कर्ष निकाला कि उपरोक्त सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी, सतना म0 प्र0 एक अस्तित्व हीन कम्पनी थी तथा व्यापारी यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि माल का परिवहन सर्वश्री सेन्ट्रल ट्रांसपोर्ट एवं फारवर्डिंग एजेन्सी, जिसके मालिक अलीगढ़ निवासी थें, के द्वारा कदापि नहीं किया गया। कर निर्धारण अधिकारी द्वारा व्यापारी के स्पष्टीकरण जिसमें व्यापारी द्वारा यह कहा गया कि सतना के व्यापारी के विरुद्ध वर्ष 1996-97 में जारी फार्म एफ के आधार पर रु0 17 करोड़ के रिफाइन्ड खाद्य तेल तथा वनस्पति घी की बिक्री पर कर आरोपित कर दिया है, यद्यपि इस सन्दर्भ में सन्दर्भित कर निर्धारण आदेश की कोई प्रतिलिपि किसी भी सम्यक अधिकारी के सामने प्रस्तुत नहीं की गई।

व्यापारी धारा 6-ए (2) में प्रावधानित आवश्यक प्रपत्रों को प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस सन्दर्भ में कर निर्धारण अधिकारी द्वारा निम्न मत व्यक्त किया गया।

"जैसा कि उक्त विवेचना से स्पष्ट है कि सतना के उक्त व्यापारी को कन्साइनमेण्ट पर माल भेजने के संबंध में दि सेन्ट्रल एण्ड फारवर्डिंग एजेन्सी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ का मुख्यतः उल्लेख फार्म एफ में किया गया है। इस ट्रांसपोर्ट कम्पनी की जाँच वि0अनु0शा0 इकाई द्वारा दिनांक 24.12.1997 को उदय सिंह जैन रोड पर स्थित तीन ट्रांसपोर्ट कम्पनियों से पूछतांछ करने पर ज्ञात हुआ कि इस नाम की कभी कोई ट्रांसपोर्ट कम्पनी नहीं रही है। इस तथ्य से व्यापारी को वि0अनु0शा0 अधिकारी द्वारा अवगत कराने पर व्यापारी द्वारा ही तथाकथित रूप से इस ट्रांसपोर्ट कम्पनी के स्वामी श्री प्रताप सिंह पुत्र श्री रेवा सिंह निवासी 8/88 शिवपुरी अलीगढ़ द्वारा दिनांक 05.02.1998 का एक शपथ इस आशय का दिया गया कि वे इस ट्रांसपोर्ट कम्पनी की जी0आर0 का प्रयोग करके व्यापारी का माल कमीशन प्राप्त करके दूसरों की गाड़ियों से ढोते हैं परन्तु इसका कोई हिसाब किताब उनके पास नहीं है। अधिकरण द्वारा प्रांतप्रेषित वाद को सुनवाई करने के उपरान्त उपरोक्त जारी कारण बताओ नोटिस में पुनः उक्त विषय में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिये जाने पर उक्त श्री प्रताप सिंह पुत्र श्री रेवा सिंह निवासी 8/88 शिवपुरी, अलीगढ़ का दिनांक 29.03.2004 का शपथ पत्र, जो मेरे समक्ष सर्वश्री दर्शन एग्रोआयल्स लि0, उदय सींह जैन रोड, अलीगढ़ के वर्ष 2001-02 के कर निर्धारण के संबंध में प्रस्तुत किया गया था तथा इसी कर निर्धारण आदेश के विरुद्ध ज्वाइन्ट कमिश्नर (अपील) व्यापार कर, अलीगढ़ के समक्ष प्रस्तुत अपील में इन्ही प्रताप सिंह के दिनांक 08.05.2004 के शपथ पत्र की फोटो प्रतियाँ प्रस्तुत की गयी है। दिनांक 29.03.2004 के शपथ पत्र के प्रस्तर-6 में उल्लेख है कि यह कार्य उन्होंने काफी दिनों से बंद कर रखा है जबकि दिनांक 08.05.2004 के शपथ पत्र के प्रस्तर-6 में यह कार्य पिछले 6 माह से बंद करने का उल्लेख है। इस व्यवसाय के संबंध में कोई हिसाब किताब न रखा जाना दोनो शपथ पत्रों में उल्लिखित है। इन दोनों शपथ पत्रों में से किसी में भी इस व्यापारी सर्वश्री दर्शन आयल्स लि0 का माल परिवहन किये जाने का उल्लेख नहीं है। तथापि इस शपथ पत्र की सत्यता की जाँच मेरे द्वारा स्वंय दिनाँक 30.11.2004 को उक्त श्री प्रताप सिंह का पता ज्ञात करके उनसे पूछताछ करके की गयी जिससे यह तथ्य प्रकाश में आया कि उक्त श्री प्रताप सिंह वर्ष 1979 से ही दर्शन ग्रुप की कम्पनियों के उदय सिंह जैन रोड स्थित कार्यालय में नौकरी कर रहे हैं तथा वर्तमान में दर्शन ग्रुप के ही ग्रान्ड सुरजीत नामक सिनेमा हॉल में गेटकीपर के रूप में नौकरी करते हुए रु0 2700/- मासिक वेतन प्राप्त कर रहै हैं। पिछले लगभग 4 वर्ष 6 माह से वे मकान 8/124 शिवपुरी में किराये पर रह रहे हैं तथा इस प्रकार 8/88 शिवपुरी का उक्त मकान वर्ष 2000 के मध्य में ही छोड़ देना प्रमाणित है। इस प्रकार दिनांक 29.03.2004 तथा 08.05.2004 के शपथ पत्रों में उल्लिखित पता 8/88 शिवपुरी अलीगढ़ शपथ पत्र की तिथियों के दृष्टिगत पूर्णतः गलत पाये गये। उक्त ट्रांसपोर्ट कम्पनी के बारे में पूछने पर श्री प्रताप सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट कम्पनी का यह कार्य लगभग 15 महीने तक किया था तथा इस लगभग चार वर्ष से बंद कर दिया गया है। इस प्रकार यदि समयावधि के उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखा जाये तब इस प्रकार की किसी ट्रांसपोर्ट कम्पनी का अस्तित्व वर्ष 1996-97 में प्रमाणित ही नहीं होता है। इस जाँच दिनांक 30.11.2004 के समय उक्त श्री प्रताप सिंह ने विल्टियों की कोई कार्बन प्रति अपने पास होना स्वीकार नहीं किया। इस प्रकार उक्त ट्रासंपोर्ट कम्पनी से उक्त वर्ष 1996-97 में व्यापारी के द्वारा रिफाइन्ड खाद्य तेल तथा वनस्पति घी के अलीगढ़ से सतना तक के परिवहन का कोई प्रमाण उक्त शपथ पत्र देने वाले व्यक्ति के पास नहीं है। उक्त इंगित विसंगतियों के आधार पर शपथ पत्र दिनांक 29.03.2004 तथा दिनांक 08.05.2004 विश्वसनीय नहीं रह जाता है। इस प्रकार ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य माल के अलीगढ़ से सतना तक के परिवहन का व्यापारी के पास उपलब्ध नहीं पाया गया। वैसे भी इस संबंध में व्यापारी द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण के विभिन्न प्रस्तर आपस में विरोधाभासी है। जैसे व्यापारी के स्पष्टीकरण के प्रस्तर-7 में यह उल्लेख किया गया है कि श्री अशोक जैन स्वामी फर्म सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना द्वारा इस आशय का शपथ पत्र दिया गया है कि सर्वश्री दर्शन आयल्स लि0 अलीगढ़ से प्राप्त समस्त रिफाइन्ड खाद्य तेल तथा वनस्पति घी की बिक्री को उन्होंने अपने लेखों में पूर्णतः प्रदर्शित किया है, जबकि इसी स्पष्टीकरण के प्रस्तर -10 में यह उल्लेख किया गया है कि सतना के उक्त व्यापारी ने उक्त टर्नओवर को घोषित नहीं किया है। ऐसी दशा में उक्त श्री अशोक जैन स्वामी सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना का उक्त शपथ पत्र विश्वसनीय नहीं रह जाता है। उल्लेखनीय है कि सतना के उक्त व्यापारी को जारी फार्म एफ को वाणिज्य कर आयुक्त इन्दौर द्वारा अपने आदेश संख्या 348/99/41/डी/21/दिनांक 06.05.1999 द्वारा निरस्त कर दिया गया है। अतएव सतना के उक्त व्यापारी को प्रदर्शित को प्रदर्शित कन्साइनमेण्ट बिक्री किया जाना प्रमाणित नहीं है। यह भी प्रमाणित नहीं है कि उक्त प्रदर्शित माल का परिवहन उ0 प्र0 के बाहर केन्द्रीय बिक्री के परिणाम स्वरूप हुआ हो। चूँकि इस माल के संबंध में भुगतान कैनारा बैंक की मुख्य शाखा से किया जाना प्रदर्शित है अतएव उक्त की प्रान्तीय बिक्री मानकर नियमानुसार कर आरोपित किया जायेगा।"

उपरोक्त विस्तृत विवेचना के उपरान्त कर निर्धारण अधिकारी द्वारा व्यापारी के विरुद्ध कर निर्धारण आदेश पारित किया गया।

निगरानी कर्ता द्वारा कर निर्धारण आदेश के विरुद्ध अपील प्रस्तुत की गई जिसे ज्वाइंट कमिश्नर (अपील) द्वारा दिनांक 07.09.2006 को स्वीकार किया गया।

उक्त आदेश दिनांक 07.09.2006 के विरुद्ध निगरानी कर्ता द्वारा व्यापार कर अधिकरण अलीगढ़ पीठ, अलीगढ़ के सम्मुख द्वितीय अपील संख्या 1 सन् 2007 (वर्ष 1996-97 यू0पी0) प्रस्तुत की गई।

अधिकरण के सम्मुख याची के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कथन किया गया कि याची के द्वारा फार्म एफ के विरुद्ध सतना के व्यापारी को जो बिक्री घोषित की गई वह प्रपत्रों द्वारा पूर्णतः सत्यापित है। याची के विद्वान अधिवक्ता द्वारा इस सम्बन्ध में यह कहा गया कि सतना के व्यापारी के विरुद्ध उसके कर निर्धारण अधिकारी द्वारा वर्ष 1996-97 का आदेश दिनांक 06.04.2000 पारित किया गया तथा उसके विरुद्ध कुल विक्रय राशि रु0 17 करोड़ पर 2% की दर से रु0 34 लाख कर आरोपित किया गया।

प्रस्तुत निगरानी के साथ संलग्नक सात द्वारा के व्यापारी ने मेसर्स अशोक ट्रेडिंग कम्पनी, समरिया, चौक, सतना का कर निर्धारण आदेश दिनांक 06.04.2000 प्रस्तुत किया। कर निर्धारण आदेश दिनांक 06.04.2000 के परिशीलन से यह ज्ञात होता है कि उक्त सतना के व्यापारी का पंजीयन मात्र अगरबत्ती, गुड़, वाशिंग पाउडर, तेल इत्यादि दिनांक 01.01.1996 द्वारा जारी किया गया। सतना के व्यापारी के कर निर्धारण अधिकारी द्वारा यह मत व्यक्त किया गया कि उक्त व्यापारी ने अपनी विवरणी में किसी भी प्रकार की कन्साइनमेण्ट से प्राप्त खाद्य तेल एवं वनस्पति घी को कदापि नहीं दर्शाया है एवं न ही उस पर कोई कर जमा किया है।

वाणिज्य कर अधिकरण द्वारा निगरानी कर्ता की ओर से प्रस्तुत अपीलों में वर्णित तथ्यों का अवलोकन किया गया। याची के विद्वान अधिवक्ता के इस तर्क को कि कन्साइनमेण्ट सेल को सही प्रकार से नीचे के अधिकारियों द्वारा नहीं देखा गया न ही कोई उचित कारण बताया गया। ट्रांसपोर्टर के बयान के सम्बन्ध में याची के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कहा गया कि यह बयान अनावश्यक रूप से दबाव डालकर लिपिबद्ध किया गया कदापि उचित नहीं प्रतीत होता है क्योंकि उक्त संदर्भ में अधिकरण द्वारा सम्यक जाँच के उपरान्त निम्न निर्णय लिया गया:-

"सर्वश्री अशोक ट्रेडिंक कम्पनी समरिया चौक, सतना के संबंध में वाणिज्य कर विभाग म0प्र0 से विस्तृत जाँच की गई तथा जाँच करने पर पाया गया कि प्रश्नगत व्यापारी ने अपने नक्शों में वनस्पति घी तथा खाद्य तेल की बिक्री प्रदर्शित नहीं की बल्कि चूड़ी, अगरबत्ती तथा गुड़ की रु0 11,53,295/- की घोषित की गई। वाणिज्य कर अधिकारी, सतना द्वारा सूचित किया गया कि सतना के व्यापारी को केवल चूड़ी एवं गुड़ के लिये ही फार्म-एफ जारी किया गया। इस व्यापारी ने अक्टूबर 1996 से अपनी फर्म बंद कर दी और इस का पंजीयन दिनांक 01.04.1997 से पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। वाणिज्य कर आयुक्त म0प्र0 इंदौर के आदेश सं0 348/99/41/डी/21/6-5/99 द्वारा अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना को जारी किये गये समस्त "सी" एण्ड "एफ" फार्मों को निरस्त कर दिया गया। सर्वश्री अशोक ट्रेडिंग कम्पनी सतना ने अपने स्थानीय पता 1/277, शक्तिनगर, गूलर रोड, अलीगढ़ अंकित किया गया जिसकी जाँच पर उक्त फर्म का कोई अस्तित्व नहीं पाया गया। इस फर्म ने अपने बैंक खाता, कैनरा बैंक की मुख्य शाखा अलीगढ़ में खोला था, जिसकी जाँच करने पर पाया गया कि इस खाते में बड़ी-बड़ी धनराशियाँ नगद जमा की गई तथा बाद में चैक एवं ड्राफ्ट द्वारा भुगतान दिखाया गया। कर निर्धारण अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि सतना म0प्र0 में सामान्य क्रम में इतनी बड़ी-बड़ी नगद धनराशियाँ अलीगढ़ ला कर जमा करना न तो स्वाभाविक है और न ही सम्भव है। प्रस्तुत किये गये फार्म-एफ में ट्रांसपोर्टर के नाम दि सेन्ट्रल फारवर्डिंग एजेन्सी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ तथा लक्ष्मी ट्रांसपोर्ट कम्पनी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ दर्शाये गये जिनकी जाँच वि0अनु0शा0 इकाई द्वारा दिनांक 24.12.1997 को की गई और जाँच करने पर दोनों ट्रांसपोर्ट कंपनियाँ अस्तित्व में नहीं पाई गई। इस प्रकार से सतना की फर्म को आढ़त पर बिक्री हेतु माल का भेजा जाना प्रमाणित नहीं हो सका।

सर्वश्री महेश एण्ड संस, नई दिल्ली को रिफाइन्ड आयल रु0 4,43,04,578=50/- एवं वनस्पति घी रु0 12,99,07,891=00/- बिक्री हेतु भेजा जाना दर्शाया गया जिसके संबंध में फार्म-एफ दाखिल किये गये जिनकी जाँच पर पाया गया कि परिवहनकर्ता ट्रांसपोर्ट कम्पनी दि सेन्ट्रल फारवर्डिंग एजेन्सी, उदय सिंह जैन रोड, अलीगढ़ का कोई अस्तित्व वि0अनु0शा0 इकाई द्वारा की गई जाँच दिनांक 24.12.1997 के समय नहीं पाया गया। इस प्रकार दिल्ली की पार्टी को माल का भेजा जाना प्रमाणित नहीं हो रहा है।"

मेरे द्वारा याची के विद्वान अधिवक्ता एवं आयुक्त व्यापार कर के विद्वान अधिकारी को सुना गया एवं निर्णयों का सम्यक परिशीलन किया गया। मात्र फार्म एफ को प्रस्तुत कर देने से पारेषण बिक्री पूरी तरह सिद्ध नहीं हो सकती है जैसा कि अधिकरण द्वारा भी मत दिया गया। धारा 6 क (2) (केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम) में दिये गये प्रावधान के अनुसार माल के परिवहन के सम्बन्ध में व्यापारी द्वारा प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना आवश्यक था।

प्रस्तुत वाद में यह विवादित नहीं है कि जाँच करने पर ट्रांसपोर्ट कम्पनी अस्तित्व में पाई गई। जब ट्रांसपोर्ट कम्पनी ही अस्तित्व में नहीं थी तो इतने बड़े संव्यवहार का परिवहन एक जगह से दूसरी जगह के मध्य कैसे प्रमाणित हो सकता है। अधिकरण द्वारा इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है। जिससे में पूर्णतः सहमत हूँ।

दोनों ही कन्साइनमेण्ट सेल अर्थात् सतना के व्यापारी एवं दिल्ली के व्यापारी की किन्ही भी दशाओं में प्रमाणित नहीं पायी जाती है। अतः जो नीचे के अधिकारियों द्वारा तथा व्यापार कर अधिकरण द्वारा मत लिया गया है वह पूर्णतः सही है एवं उसकी पुष्टी की जाती है।

कन्साइनमेण्ट का परिवहन प्रमाणित न होने की दशा कर निर्धारण अधिकारी एवं अपीलीय अधिकारियों का यह निर्णय पूर्णतः उचित है कि उक्त दशा में सम्बन्धित बिक्री प्रान्त के अन्दर करने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता अतः यह बिक्री प्रान्त के अन्दर ही की गई होगी तथा उक्त बिक्री पर जो कर आरोपित किया गया है वह मेरे अनुसार से उचित है।

उपरोक्त विवरण के उपरान्त मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ कि प्रस्तुत निगरानी में कोई बल नहीं है तथा व्यापार कर अधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.03.2007 पूर्णतः उचित प्रतीत होता है एवं निगरानी कर्ता पर जो कर दायित्व निर्धारित किया गया है वह विधि अनुकूल देय है।

प्रस्तुत निगरानी उपरोक्त विवेचना को दृष्टीगत रखते हुए अस्वीकार की जाती है।

दिनाँक :- 30.7.2018

एस0 के0 श्रीवास्तव

 

 

 
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