सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का अंतिम कार्यदिवस है। वह दो अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। वह भारत के 45वें CJI थे। परंपरा के मुताबिक, उनके साथ अगले होने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अदालत में बैठेंगे।और फिर CJI मिश्रा का विदाई समारोह होगा।

जस्टिस दीपक मिश्रा से जुड़े मुख्य विवाद सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने इसी साल 12 जनवरी को मीडिया के सामने आकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। जस्टिस दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर सिस्टम को प्रभावित करने के आरोप लगा था। जस्टिस दीपक मिश्रा पर अपने वकालत के शुरुआती दिनों में एक झूठा शपथ पत्र देकर ओडिशा सरकार से भूमिहीन किसानों के लिए एक योजना के अंतर्गत जमीन हड़पने का आरोप लगा था। वरिष्ठ वकील और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने दीपक मिश्रा पर आरोप लगाया था कि उनका नाम अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल के सुसाइड नोट में था।

जस्टिस दीपक मिश्रा ने कर्नाटक में संवैधानिक संकट के दौरान आधी रात को कोर्ट खोलने का आदेश भी दिया। CJI के रूप में संभवतः दीपक मिश्रा ऐसे पहले न्यायाधीश हैं, जिन्हें पद से हटाने के लिए राज्यसभा में सांसदों ने सभापति एम वेंकैया नायडू को याचिका दी थी। हालांकि, तकनीकी आधार पर विपक्ष इस मामले को आगे नहीं बढ़ा पाया था।

यह भी पहली बार हुआ कि न्यायपालिका के मुखिया न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर उनके ही कई सहयोगी न्यायाधीशों ने सवाल उठाए। यहां तक कि शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई (अगले CJI), न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी को अभूतपूर्व कदम उठाते हुये उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।

सीजेआई रहते जस्टिस दीपक मिश्रा ने दिए ये अहम फैसले:

न्यायपालिका के भीतर और बाहर अनेक चुनौतियों का सामना करने वाले न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा अपने कार्यकाल के अंतिम सप्ताह में अपनी अध्यक्षता वाली संविधान पीठ और खंडपीठ ने कई ऐसी व्यवस्थाएं दीं, जिनकी सहजता से कल्पना नहीं की जा सकती। ये फैसले रहे अहम...

मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी की सजा पर बहस के लिए जब आधी रात को कोर्ट में सुनवाई हुई, तो जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच में ही मामला सुना गया था। पूरी रात बहस होने के बाद जस्टिस मिश्रा ने फैसला देते हुए कहा कि याकूब मेमन की फांसी की सजा पर रोक नहीं लगेगी। सुबह याकूब मेमन को फांसी दे दी गई थी।

CJI दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने दो वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से स्थापित समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। साथ ही इससे संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के इस अंश को निरस्त कर दिया।

एडल्ट्री यानी विवाहेत्तर संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने का अहम फैसले दिया और इससे जुड़ी आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया।

न्यायमूर्ति मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश की इजाजत दी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से आधार मामले में ऐतिहासिक फैसले में आधार के संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा ।

अयोध्या केस में मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग है, के बारे में 1994 के फैसले को दोबारा विचार के लिए संवैधानिक बेंच भेजने से इनकार कर दिया।

पांच साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में आरोप तय होने के बाद भी नेताओं के चुनाव लड़ने से रोक लगाने से इनकार कर दिया।

एससी-एसटी से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का रास्ता साफ कर दिया।

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पांचों ऐक्टिविस्टों को राहत नहीं मिली।

दहेज प्रताड़ना के मामलों में पति और उसके परिवार की तुरंत गिरफ्तारी को लेकर भी सीजेआई दीपक मिश्रा ने एक बड़ा फैसला सुनाया था। फैसले के अनुसार, इन मामलों में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर से रोक हटा ली गई है। अब अगर कोई महिला अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए के तहत दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराती है, तो उनकी तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें पेशे से वकील जनप्रतिनिधियों के देशभर की अदालतों में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून अदालतों में उनके प्रैक्टिस करने पर कोई पाबंदी नहीं लगाता है।

 

Source

Picture Source :