सर्वोच्च न्यायालय ने 12 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में NGO के खजांची (Treasurer) की Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति किसी संस्था की ओर से सभी वित्तीय लेनदेन के लिए "सामने का चेहरा" बनाया जाता है, वह चेक का "आहर्ता" (Drawer) माना जाएगा और केवल खजांची होने का दावा करके आपराधिक दायित्व से नहीं बच सकता।

मामले की पृष्ठभूमि में TIMES NGO तथा प्रतिवादी के मध्य 30 जुलाई 2009 को एक MOU था, जिसके अंतर्गत TIMES को APCPDCL (अब तेलंगाना CPDCL) के घरेलू उपभोक्ताओं से बिजली बिल वसूली का कार्य आउटसोर्स किया गया था। अपीलार्थी के. रंगनायकुलु ने TIMES के खजांची के रूप में MOU पर हस्ताक्षर किए और सभी चेक तथा RTGS लेनदेन के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे। चेक अनादरित (Dishonour) होने पर धारा 138 NI Act के अंतर्गत परिवाद दायर किया गया। ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया और तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक वर्ष सश्रम कारावास तथा ₹1.5 करोड़ जुर्माने की सजा बरकरार रखी। उच्च न्यायालय ने उपस्थिति सुनिश्चित कर शेष सजा भुगतने के आदेश भी दिए।

अपीलार्थी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री संतोष कुमार ने तर्क दिया कि अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कंपनी की ओर से हस्ताक्षर करता है और "आहर्ता" नहीं बन जाता। दंड विधियों की व्याख्या सख्ती से होनी चाहिए, विशेषकर परोक्ष दायित्व (Vicarious Liability) के मामलों में। प्रतिवादी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रवि शंकर जांध्याला ने तर्क दिया कि MOU की शर्तों के अनुसार समस्त वित्तीय दायित्व केवल अपीलार्थी पर थे और उन्होंने ही TIMES की ओर से सभी लेनदेन का संचालन किया।

न्यायालय ने MOU के खंड 7, 20 और 28 का विश्लेषण किया और पाया कि MOU में किसी अन्य व्यक्ति — यहाँ तक कि अध्यक्ष को भी — लेनदेन का उत्तरदायी नहीं बनाया गया था। NGO ने अपीलार्थी को समस्त वित्तीय दायित्वों के लिए "सामने का चेहरा" बनाया, अतः व्यावहारिक दृष्टि से वे ही चेक के आहर्ता थे। दोषसिद्धि में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए न्यायालय ने यह अवश्य माना कि अपीलार्थी केवल खजांची थे, न कि स्वामी या अध्यक्ष, अतः सज़ा में संशोधन उचित है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए प्रारंभिक एक वर्ष के सश्रम कारावास को हटाकर सज़ा को संशोधित किया। अपीलार्थी को दो माह के भीतर ₹1.5 करोड़ तेलंगाना CPDCL/TSSPDCL को अदा करने का निर्देश दिया गया। भुगतान न होने पर एक वर्ष का डिफॉल्ट सश्रम कारावास भुगतना होगा।

Case Details:

Case No.: Criminal Appeal No. 2472 of 2026 (arising from SLP (Crl.) No. 1915 of 2025)

Bench: Justice Prashant Kumar Mishra & Justice N.V. Anjaria

Appellant: K. Ranganayakulu

Respondents: State of Telangana & Ors.

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