इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट कर डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने विकास विश्वकर्मा की जमानत अर्जी पर दिया है।
गोरखपुर की महिला ने एफआईआर दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि अज्ञात व्यक्तियों ने वीडियो कॉल के जरिये उसे डिजिटल अरेस्ट किया था। इसके बाद उसके खाते से डेढ़ करोड़ रुपये को वैध बनाने के नाम पर ट्रांसफर करा लिए थे। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी गई राशि में से 80 लाख रुपये विकास विश्वकर्मा के फर्म के खाते में आए थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। याची ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
याची के अधिवक्ता प्रिंस कुमार श्रीवास्तव ने दलील दी कि एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज थी। विकास का नाम इसमें शामिल नहीं था। याची के फर्म के खाते में आए 80 लाख रुपये तुरंत ही किसी अन्य खाते में स्थानांतरित कर दिए गए थे। निजी खाते में कोई पैसा नहीं आया। चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है। आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने विकास विश्वकर्मा को सशर्त जमानत दे दी।
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