राजस्थान हाईकोर्ट में तृतीय श्रेणी अध्यापक (लेवल-1) भर्ती 2022 से जुड़े मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। यह मामला अब अवमानना (Contempt) की स्थिति में पहुंच गया है। जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने राज्य सरकार की ओर से कोर्ट के पूर्व आदेशों की लगातार अनुपालना न करने पर कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के अंदर आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित उच्च अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार और भर्ती से जुड़े विभागों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों को इस तरह नजरअंदाज करना गंभीर मामला है।

तलाकशुदा अभ्यर्थियों की मांग

मामले में याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी।एल।एस। राजपुरोहित ने मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने तलाकशुदा श्रेणी में आवेदन किया था। राजस्थान लोक सेवा नियमावली के अनुसार, यदि विधवा श्रेणी में पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उन रिक्त पदों को तलाकशुदा श्रेणी के योग्य अभ्यर्थियों से भरा जाना अनिवार्य है।अधिवक्ता राजपुरोहित ने जोर देकर कहा कि यह प्रावधान स्पष्ट रूप से निर्धारित है, लेकिन भर्ती एजेंसी ने जानबूझकर इस नियम की अनदेखी की है।

कोर्ट का पुराना आदेश और उसकी अनदेखी

हाईकोर्ट ने 8 फरवरी 2024 को एक स्पष्ट आदेश जारी किया था। इस आदेश में राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया था कि विधवा श्रेणी की खाली पड़ी सीटों पर तलाकशुदा श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इस आदेश को पारित हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी राज्य सरकार और भर्ती एजेंसी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी नियुक्ति को जानबूझकर रोका जा रहा है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

अवमानना याचिका पर सुनवाई

अब अभ्यर्थियों ने इस अनुपालन न करने के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान जस्टिस रेखा बोराणा की पीठ ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकार को 3 सप्ताह (तीन हफ्ते) के अंदर आदेश का अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आगे चेतावनी दी कि यदि इस समयावधि में भी आदेश का पालन नहीं किया गया, तो प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर और कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB), जयपुर के सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।

यह मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और कानून के शासन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। तलाकशुदा महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान सामाजिक न्याय की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि सरकार इन प्रावधानों को लागू नहीं करती है, तो इससे कमजोर वर्गों के अधिकारों का हनन होता है।अभ्यर्थी लंबे समय से इस भर्ती के इंतजार में हैं। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि वे सालों से बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं और कोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

अगली सुनवाई में राज्य सरकार को 3 सप्ताह के अंदर अपना स्टेटस रिपोर्ट पेश करना होगा। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो कोर्ट द्वारा सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति और संभवतः जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

Source link

Picture Source :