वित्तीय गड़बड़ी और कथित धोखाधड़ी पर सख्त टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को आदेश दिया है कि वह 152 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम को दो हफ्ते में कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करे।

यह मामला पब्लिक फंड के करीब 70 करोड़ गायब होने से जुड़ा है, जिसकी जांच अब CBI कर रही है। यह रकम 'रिज मैनेजमेंट बोर्ड' की थी, जिसे दिल्ली रिज इलाके के पर्यावरण सुधार के लिए रखा गया था। लेकिन यह पैसा कथित गबन का शिकार हो गया। कोर्ट ने जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच में रिज मैनेजमेंट बोर्ड की आपात बैठक बुलाने का भी आदेश दिया है ताकि इस फंड का इस्तेमाल वन और जंगलों के विकास के लिए किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

क्या है मामला

यह मामला तब सामने आया जब वन और वन्यजीव विभाग ने ज्यादा ब्याज के लिए अपनी रकम भारतीय स्टेट बैंक से हटाकर बैंक ऑफ बड़ौदा की देशबंधु रोड ब्रांच में जमा कर दी। बैंक ने 5.25% ब्याज दर का ऑफर दिया था और 223 करोड़ रुपये को 113 फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया था।

आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने बदनीयती से काम करते हुए करीब 70.25 करोड़ रुपये की रकम खातों से निकाल ली। सुनवाई के दौरान बैंक ने जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की और वन विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया।

कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि यह मामला जमा रकम लौटाने से जुड़ा है और इसमें कोई विवाद नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां शहर का पर्यावरण खराब हो रहा है, वहीं इतनी बड़ी रकम बेकार पड़ी रही, जिसका इस्तेमाल जरूरी कामों में होना चाहिए था।

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