मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने अपने पहले के फैसले में बदलाव करते हुए अधिकतर मामलों को फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। अब इस मुद्दे पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट में ही होगा।  

बरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह के मुताबिक, राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। ये मामले अलग-अलग बेंच के सामने लंबित थे। लगातार सुनवाई की मांग के बीच 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया था, लेकिन इस समय कुछ मामले उस आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे।

सुप्रीम कोर्टने 54 मामले हाई कोर्ट भेजे

इस गलती को लेकर दीपक कुमार पटेल के नाम से दाखिल रिव्यू याचिक पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने वे 54 मामले भी हाई कोर्ट भेज दिए, जो पहले के आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दो खास याचिकाएं दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन को दोबारा अपनी सुनवाई के लिए अपने पास रख लिया है। बाकी सभी मामलों में पहले वाला आदेश लागू रहेगा।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में  2 अप्रैल से शुरू होगी अंतिम बहस 

नए आदेश के साथ OBC आरक्षण से जुड़े सभी प्रमुख मामलों की सुनवाई अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में होगी, जहां अंतिम बहस 2 अप्रैल से शुरू होने वाली है। उच्चतम न्यायालय का यह संशोधित आदेश 30 मार्च 2026 को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और वरुण ठाकुर ने OBC अधिवक्ता कल्याण संघ की ओर से प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए।

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