इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में कांस्टेबल पद पर चयनित अभ्यर्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पुलिस सत्यापन में देरी या किसी लंबित आपराधिक मामले के आधार पर किसी अभ्यर्थी की दावेदारी को प्रभावित नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने बलिया के रोहित यादव व अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिया है।

रोहित का रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से आयोजित कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में अंतिम चयन हुआ। हालांकि, उसके विरुद्ध बलिया के नगरा थाने में एक आपराधिक मामला लंबित है, जिसमें जनवरी 2021 में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। इस लंबित प्रकरण के कारण पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पा रही थी। इससे याची की नियुक्ति प्रक्रिया बीच में ही अटकने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। याची ने कोर्ट से मांग की थी कि उसके खिलाफ जारी समन आदेश और पूरी कार्यवाही को निरस्त किया जाए, ताकि उसकी नौकरी पर खतरा न मंडराए।

कोर्ट ने सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर, रेलवे सुरक्षा बल, खुर्दा रोड (ओडिशा) को निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि याची का अभ्यर्थन केवल इसलिए निरस्त नहीं किया जा सकता कि उसका पुलिस सत्यापन लंबित है। पीठ ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को निर्देशित किया है कि वे संबंधित रेलवे अधिकारियों को इस आदेश से तुरंत अवगत कराएं, ताकि चयन प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। नौ अप्रैल को सुनवाई होगी।

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