इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विदेश में रह रहे पति को वैवाहिक विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उपस्थित होने की अनुमति दी है। इसके साथ ही मामले को निस्तारण के लिए मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र भेज दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने पूनम चंद और अन्य की अर्जी पर दिया है।

गौतमबुद्ध नगर के रहने वाले याचियों ने अदालत में लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि अंकुर चंद (पति) वर्तमान में भारत से बाहर रह रहे हैं। मामला पूरी तरह से वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। इसलिए मध्यस्थता के जरिये इसके समाधान की संभावना तलाशी जानी चाहिए।

अदालत ने परिस्थितियों पर विचार करते हुए आवेदकों को तीन सप्ताह के भीतर 50,000 रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। इस राशि में से 25,000 रुपये पत्नी को मध्यस्थता केंद्र में उनकी पहली उपस्थिति पर और 20,000 रुपये दूसरी उपस्थिति पर दिए जाएंगे। शेष 5,000 रुपये मध्यस्थता केंद्र को देय होंगे।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक आवेदकों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मध्यस्थता केंद्र के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे विदेश में रह रहे पति की वर्चुअल भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करें। मध्यस्थता केंद्र को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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