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विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 ( Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 )


 

विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992

(1992 का अधिनियम संख्यांक 22)

[7 जुलाई, 1992]

भारत में आयात को सुकर बनाने और भारत से

निर्यात का संवर्धन करके विदेश व्यापार का विकास और विनियमन का और उससे

संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 है ।

(2) इस अधिनियम की धारा 11 से धारा 14 तक तुरंत प्रवृत्त होंगी और उसके शेष उपबंध 19 जून, 1992 को प्रवृत्त हुए    समझे जाएंगे । 

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) न्यायनिर्णयन प्राधिकारी" से धारा 13 में, या उसके अधीन, विनिर्दिष्ट प्राधिकारी अभिप्रेत है ; 

(ख) अपील प्राधिकारी" से धारा 15 की उपधारा (1) में, या उसके अधीन, विनिर्दिष्ट प्राधिकारी अभिप्रेत है ; 

(ग) प्रवहण" से कोई यान, जलयान, वायुयान या परिवहन का कोई अन्य साधन, जिसके अंतर्गत कोई पशु भी है, अभिप्रेत है ;

(घ) महानिदेशक" से धारा 6 के अधीन नियुक्त किया गया विदेश व्यापार महानिदेशक अभिप्रेत है ;

 [(ङ) आयात" और निर्यात" से अभिप्रेत है,- 

(i) माल के संबंध में, भूमि मार्ग, समुद्री मार्ग या वायुमार्ग से किसी माल को भारत में लाना या भारत से बाहर ले जाना ; 

(ii) सेवाओं या प्रौद्योगिकी के संबंध में,-

(i) सेवाओं या प्रौद्योगिकी को,-

(क) किसी अन्य देश के राज्यक्षेत्र से भारत के राज्यक्षेत्र में प्रदाय करना ;

(ख) किसी अन्य देश के राज्यक्षेत्र में किसी भारतीय सेवा उपभोक्ता को प्रदाय करना;

(ग) किसी अन्य देश के किसी सेवा प्रदाता द्वारा, भारत में वाणिज्यिक उपस्थिति के माध्यम से प्रदाय करना ;

(घ) किसी अन्य देश के किसी सेवा प्रदाता द्वारा भारत में उनके प्रकृत व्यक्तियों की उपस्थिति के माध्यम से प्रदाय करना ;

(ii) सेवाओं का प्रौद्योगिकी को- 

(क) भारत से किसी अन्य देश के राज्यक्षेत्र को प्रदाय करना ;

(ख) भारत में किसी अन्य देश के सेवा उपभोक्ता को प्रदाय करना ; 

(ग) भारत के किसी सेवा प्रदाता द्वारा, किसी अन्य देश के राज्यक्षेत्र में वाणिज्यिक उपस्थिति के माध्यम से प्रदाय करना ; 

(घ) भारत के किसी सेवा प्रदाता द्वारा किसी अन्य देश के राज्यक्षेत्र में भारतीय प्रकृत व्यक्तियों की उपस्थिति के माध्यम से प्रदाय करना : 

परंतु विशेष आर्थिक जोन के संबंध में या दो विशेष आर्थिक जोनों के मध्य माल, सेवाओं और प्रौद्योगिकी के संबंध में आयात" और निर्यात", विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार प्रशासित होंगे ।] 

(च) आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक" से धारा 7 के अधीन दिया गया कोड संख्यांक अभिप्रेत है ;

(छ) अनुज्ञप्ति" से आयात या निर्यात करने की अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन जारी किया गया या दिया गया सीमाशुल्क निकासी अनुज्ञापत्र और कोई अन्य अनुज्ञा भी है ;

(ज) आदेश" से धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किया गया कोई आदेश अभिप्रेत है ;

(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

 [(ञ) सेवाओं" से किसी ऐसे प्रकार की सेवा अभिप्रेत है, जो संभावी उपयोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है और जिसके अंतर्गत भारत और अन्य देशों के बीच जो उक्त करार के पक्षकार हैं, किए गए सेवाओं में व्यापार के साधारण करार के अधीन, विनिर्दिष्ट सभी व्यापारिक सेवाएं भी हैं :

परंतु यह परिभाषा कराधान के क्षेत्र को लागू नहीं होगी ;

(ट) सेवा प्रदायकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी सेवा का प्रदाय करता है और जो विदेशी व्यापार नीति के अधीन फायदा लेने का आशय रखता है ; 

(ठ) विनिर्दिष्ट माल या सेवा या प्रौद्योगिकी" से ऐसे माल या सेवाएं या प्रौद्योगिकी अभिप्रेत हैं, जिनका निर्यात, आयात, अंतरण, पुनःअंतरण, अभिवहन और पोतांतरण किसी नाभिकीय शस्त्र राज्य के रूप में भारत से या भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से या सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली से संबंधित किसी द्विपक्षीय, बहुपक्षीय या अंतर्राष्ट्रीय संधि, प्रसंविदा, अभिसमय या ठहराव के, जिसका भारत एक पक्षकार है या अधिनियम की धारा 5 के अधीन विरचित और अधिसूचित विदेश व्यापार नीति के अधीन किसी विदेश के साथ उसके करार के अधीन उसकी विदेश नीति या उसकी अन्तर्राष्ट्रीय बाध्यताओं को अग्रसर करने से संबंधित या सुसंगत होने के आधारों पर शर्तों के अधिरोपण के कारण प्रतिषिद्ध या निर्बन्धित है ;

(ड) प्रौद्योगिकी" से लोकाधिकार क्षेत्र में सूचना से भिन्न, ऐसी कोई सूचना (जिसके अंतर्गत साफ्टवेयर में सम्मिलित कोई सूचना भी है) अभिप्रेत है, जो- 

(i) किसी माल या साफ्टवेयर के विकास, उत्पादन या उपयोग में,

(ii) किसी औद्योगिक या व्यापारिक क्रियाकलाप के विकास में या उसको करने में या किसी प्रकार की सेवाओं का उपबंध करने में,

                उपयोग किए जाने के लिए सक्षम है ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजन के लिए,-

(क) जब प्रौद्योगिकी पूर्णतः या भागतः ऐसे उपयोगों के प्रतिनिर्देश से वर्णित की गई हो, जिसमें उसका (या ऐसे माल का, जिससे वह संबंधित है) उपयोग किया जा सकता है, तब उसके अंतर्गत ऐसी सेवाएं भी होंगी, जो ऐसी प्रौद्योगिकी या माल के विकास, उत्पादन या उपयोग में उपलब्ध कराई जाती हैं या उपयोग की जाती हैं या उपयोग किए जाने के लिए समर्थ हैं ;  

(ख) लोकाधिकारी क्षेत्र" का वही अर्थ होगा, जो सामूहिक संहार के आयुध और परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) की धारा 4 के खंड (i) में है ।]

 

 

 

 

अध्याय 2

केन्द्रीय सरकार की आदेश करने तथा  [विदेश व्यापार नीति] घोषित करने की शक्ति

3. आयात और निर्यात से संबंधित उपबंध करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, आयात को सुकर बनाकर और निर्यात की वृद्धि करके विदेश व्यापार के विकास और विनियमन के लिए, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, उपबंध कर सकेगी ।

(2) केन्द्रीय सरकार, [माल या सेवाओं या तकनीक का आयात या निर्यात के], सभी मामलों में या विनिर्दिष्ट वर्गों के मामलों में, तथा ऐसे अपवादों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो आदेश द्वारा या उसके अधीन किए जाएं, प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या अन्यथा विनियमित करने के लिए भी, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, उपबंध कर सकेगी:

 [परंतु इस उपधारा के उपबंध सेवाओं या प्रौद्योगिकी के आयात या निर्यात की दशा में केवल तब लागू होंगे, जब सेवा या प्रौद्योगिकी प्रदाता विदेश व्यापार नीति के अधीन फायदों का उपभोग कर रहा है या विनिर्दिष्ट सेवाओं या विनिर्दिष्ट प्रौद्योगिकियों का व्यौहार करता है ।]

(3) ऐसे सभी माल को, जिन्हें उपधारा (2) के अधीन कोई आदेश लागू होता है, ऐसा माल समझा जाएगा जिनका सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन आयात या निर्यात प्रतिषिद्ध किया गया है और उस अधिनियम के सभी उपबंधों का तद्नुसार प्रभाव होगा । 

 3[(4) किसी अन्य विधि, नियम, विनियम, अधिसूचना या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना किसी माल के आयात या निर्यात के लिए न तो कोई परमिट या अनुज्ञप्ति आवश्यक होगी, न ही कोई माल इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या आदेशों के अधीन जैसा अपेक्षित किया जाए उसके सिवाय आयात या निर्यात के लिए प्रतिबंधित नहीं होगा ।]

4. विद्यमान आदेशों का बना रहना-आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 (1947 का 18) के अधीन किए गए और इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी आदेश, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, प्रवृत्त बने रहेंगे और इस अधिनियम के अधीन किए गए समझे जाएंगे । 

  [5. विदेश व्यापार नीति-केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विदेश व्यापार नीति विरचित कर सकेगी और उसकी घोषणा कर सकेगी और उस नीति का, उसी रीति से, संशोधन भी कर सकेगी :

परंतु केन्द्रीय सरकार यह निदेश दे सकेगी कि विशेष आर्थिक जोन की बाबत, विदेश व्यापार नीति माल, सेवाओं और प्रौद्योगिकी को ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों सहित लागू होगी, जो उसके द्वारा राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट किए जाएं ।]

6. महानिदेशक की नियुक्ति और उसके कृत्य-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति को विदेश व्यापार महानिदेशक नियुक्त कर सकेगी ।

(2) महानिदेशक  [विदेश व्यापार नीतिट के बनाने में केन्द्रीय सरकार को सलाह देगा और उस नीति को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होगा । 

(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति का (जो धारा 3, धारा 5, धारा 15, धारा 16 और धारा 19 के अधीन शक्तियों से भिन्न है) महानिदेशक द्वारा या महानिदेशक के अधीनस्थ ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा भी, ऐसे मामलों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रयोग किया जा सकेगा । 

अध्याय 3

आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक और अनुज्ञप्ति

7. आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक-कोई भी व्यक्ति, महानिदेशक द्वारा या महानिदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा, ऐसी प्रक्रिया के अनुसार जो महानिदेशक द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए, दिए गए आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक के अधीन ही कोई आयात या निर्यात करेगा, अन्यथा नहीं : 

 

 [परंतु सेवाओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात और आयात की दशा में, आयातकर्ता और निर्यातकर्ता कोड संख्यांक केवल तभी आवश्यक होगा, जब सेवा या प्रौद्योगिकी प्रदाता विदेश व्यापार नीति के अधीन फायदा ले रहा है या विनिर्दिष्ट सेवाओं या विनिर्दिष्ट प्रौद्योगिकियों के संबंध में व्यौहार करता है ।]

8. आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक का निलंबन और रद्दकरण- [(1) जहां,-

(क) किसी व्यक्ति ने इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या किए गए आदेशों या किसी विदेश नीति या केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क या सीमाशुल्क या विदेशी मुद्रा से संबंधित या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि का उल्लंघन किया है या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन, ऐसा कोई अन्य आर्थिक अपराध किया है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ; या 

(ख) महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति ने किसी ऐसी रीति में कोई आयात या निर्यात किया है, जो भारत के किसी अन्य देश के साथ व्यापार संबंधों पर या आयात या निर्यात में लगे अन्य व्यक्तियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली है या जिससे देश की साख या माल या उसके द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवाओं या प्रौद्योगिकी की बदनामी हुई है; या 

(ग) कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या किए गए आदेशों या विदेश व्यापार नीति के उल्लंघन में विनिर्दिष्ट माल या सेवा या प्रौद्योगिकी का आयात या निर्यात करता है,

वहां महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी उस व्यक्ति से अभिलेख या कोई अन्य जानकारी मांग सकेगा और उस व्यक्ति को लिखित सूचना देने के पश्चात्, जिसमें उसे उन आधारों की जानकारी दी जाएगी जिन पर आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक को निलंबित या रद्द किए जाने के लिए प्रस्ताव किया गया है तथा उसे ऐसे युक्तियुक्त समय के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, लिखित अभ्यावेदन करने का और यदि वह व्यक्ति ऐसी वांछा करे तो सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् उस व्यक्ति को दिए गए आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक को ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित या रद्द कर सकेगा ।]

(2) जहां किसी व्यक्ति को दिए गए आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक को उपधारा (1) के अधीन निलंबित या रद्द कर दिया गया है, वहां वह व्यक्ति महानिदेशक द्वारा, ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, उसे दी गई किसी विशेष अनुज्ञप्ति के अधीन ही 2[किसी माल या सेवा या प्रौद्योगिकी के आयात या निर्यातट करने का हकदार होगा, अन्यथा नहीं । 

9. अनुज्ञप्ति का दिया जाना, उसका निलंबन और रद्दकरण-(1) केन्द्रीय सरकार  [अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] के लिए आवेदन करने वाले ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग के संबंध में या दी गई अथवा नवीकृत की गई किसी 3[अनुज्ञप्ति प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] के संबंध में, ऐसी रीति से और ऐसे अपवादों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, फीस उद्गृहीत कर सकेगी । 

3[(2) महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, किसी आवेदन पर और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, ऐसे वर्ग या वर्गों के माल या सेवाओं या प्रौद्योगिकी का, जो विहित की जाएं, आयात या निर्यात करने के लिए कोई अनुज्ञप्ति दे सकेगा या उसका नवीकरण कर सकेगा या उसे देने या नवीकरण करने से इंकार कर सकेगा और वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए प्रमाणपत्र, कोई स्क्रिप या कोई लिखत दे सकेगा या नवीकृत कर सकेगा या ऐसी इंकारी के कारण लेखबद्ध करने के पश्चात्, देने या नवीकृत करने से इंकार कर सकेगा ।]

(3) इस धारा के अधीन दी गई या नवीकृत की गई 3[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत]-

                (क) ऐसे प्ररूप में होगी जो विहित किया जाए ; 

(ख) ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगी जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए; और 

(ग) ऐसे निबन्धनों, शर्तों और निर्बंधनों के अधीन होगी, जो विहित किए जाएं या 3[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] में इस प्रकार विहित निबंधनों, शर्तों और निर्बंधनों के प्रति निर्देश से विनिर्दिष्ट की जाए ।

(4) महानिदेशक या उपधारा (2) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, उचित और पर्याप्त कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, इस अधिनियम के अधीन दी गई किसी 3[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] को निलंबित या रद्द कर सकेगा :

परंतु ऐसा कोई निलंबन या रद्दकरण  [अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] के धारक को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं । 

(5) किसी 1[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] को देने या नवीकरण करने से इंकार करने या निलंबित करने अथवा रद्द करने वाले आदेश के विरुद्ध अपील उसी रीति से की जाएगी जिस रीति से धारा 15 के अधीन की जाएगी ।

[अध्याय 3

परिमाणात्मक निर्बंधन

9क. परिमाणात्मक निर्बंधन अधिरोपित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि भारत में किन्हीं मालों का आयात, ऐसी बढ़ी हुई मात्राओं में और ऐसी दशाओं के अधीन किया जाता है जिससे घरेलू उद्योग को गंभीर क्षति हो सकती है या होने की आशंका है, तो वह ऐसे माल के आयात पर ऐसे परिमाणात्मक निर्बंधन अधिरोपित कर सकेगी जो वह ठीक समझे :

परंतु ऐसे परिमाणात्मक निर्बन्धन किसी विकासशील देश से उद्भूत होने वाले किसी माल पर तब तक अधिरोपित नहीं किए जाएंगे जब तक उस देश से ऐसे माल के आयातों का शेयर तीन प्रतिशत से अधिक नहीं है या जहां ऐसा माल एक से अधिक विकासशील देशों से उद्भूत होता है, वहां जब तक सभी ऐसे देशों से एक साथ मिलकर आयातों का योग भारत में ऐसे माल के कुल आयातों के नौ प्रतिशत से अधिक नहीं होता है ।

(2) इस धारा के अधीन अधिरोपित परिमाणात्मक निर्बंधन, जब तक पूर्व में प्रतिसंहृत न किए गए हों, ऐसे अधिरोपण की तारीख से चार वर्ष की समाप्ति तक प्रभावी नहीं रहेंगे :

परंतु यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि घरेलू उद्योग ने ऐसी क्षति या उसकी आशंका को समायोजित करने के उपाय किए हैं और यह आवश्यक है कि परिमाणात्मक निर्बंधन ऐसी क्षति या उसकी आशंका को रोकने के लिए और समायोजन को सुकर बनाने के लिए अधिरोपित किए जाते रहे तो वह उक्त अवधि को चार वर्ष से परे विस्तारित कर सकेगी :

परंतु यह और कि किसी भी दशा में परिमाणात्मक निर्बंधन उस तारीख से, जिसको ऐसे निर्बंधन पहली बार अधिरोपित किए गए थे, दस वर्ष की अवधि से परे लागू नहीं होंगे ।

(3) केन्द्रीय सरकार, नियमों द्वारा, उस रीति का, जिसमें ऐसे माल की, जिसका आयात इस धारा के अधीन परिमाणात्मक निर्बंधनों के अध्यधीन होगा, पहचान की जा सकेगी और ऐसी रीति का, जिसमें ऐसे माल के संबंध में गंभीर क्षति के कारणों या गंभीर क्षति की आशंका के कारणों को अवधारित किया जा सकेगा, उपबंध कर सकेगी ।

(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) विकासशील देश" से केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचित देश अभिप्रेत हैं ; 

(ख) घरेलू उद्योग" से ऐसे माल के उत्पादक (जिनके अन्तर्गत कृषि माल के उत्पादक भी हैं) अभिप्रेत है,-

(i) भारत में ऐसे संपूर्ण समान माल या सीधे प्रतिस्पर्धी माल; या

(ii) जिसका भारत में समान माल या सीधे प्रतिस्पर्धी माल का सामूहिक उत्पादन भारत में उक्त माल के कुल उत्पादन के मुख्य अंश का गठन करता है ; 

(ग) गंभीर क्षति" से ऐसी क्षति अभिप्रेत है, जिसके कारण किसी घरेलू उद्योग की प्रास्थिति में महत्वपूर्ण व्यापक ह्रास होता है ; 

(घ) गंभीर क्षति की आशंका" से गंभीर क्षति का स्पष्ट और आसन्न संकट अभिप्रेत है ।]

अध्याय 4

तलाशी, अभिग्रहण, शास्ति और अधिहरण

10. तलाशी और अभिग्रहण के संबंध में शक्ति- [(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, किसी व्यक्ति को निम्नलिखित के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के प्रयोजनों के लिए, ऐसी अपेक्षाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए और ऐसे अधिकारी के अनुमोदन से, जो विहित किया जाए, प्राधिकृत कर सकेगी,-

(क) ऐसे परिसरों में, जहां माल आयात या निर्यात के प्रयोजनों के लिए रखे जाते हैं, भंडारित या प्रसंस्कृत, विनिर्मित किए जाते है, उनका व्यापार या प्रदाय या उन्हें प्राप्त किया जाता है, प्रवेश करने और ऐसे माल, माल के ऐसे आयात या निर्यात से संबंधित दस्तावेजों, वस्तुओं और हस्तांतरण पत्रों की तलाशी लेने, उनका निरीक्षण करने तथा अभिग्रहण करने, 

(ख) ऐसे परिसरों में, जहां से सेवाएं या प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराई जाती है या प्रदाय, प्राप्त या उपभोग या प्रयुक्त की जाती हैं प्रवेश करने और ऐसे माल, ऐसी सेवाओं या प्रौद्योगिकी के आयात या निर्यात से संबंधित वस्तुओं, दस्तावेजों और हस्तांतरण पत्रों की तलाशी लेने, उनका निरीक्षण करने तथा अभिग्रहण करने : 

परंतु खंड (ख) के उपबंध सेवाओं या प्रौद्योगिकी के आयात और निर्यात की दशा में केवल तभी लागू होंगे, जब सेवा या प्रौद्योगिकी प्रदाता विदेश व्यापार नीति के अधीन फायदा प्राप्त करता है या विनिर्दिष्ट सेवाओं या विनिर्दिष्ट प्रौद्योगिकियों में व्यौहार करता है ।]

(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के तलाशी और अभिग्रहण से संबंधित उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन की गई प्रत्येक तलाशी और अभिग्रहण को लागू होंगे ।

 [11 इस अधिनियम के उपबंधों, नियमों, आदेशों और विदेश व्यापार नीति का उल्लंघन-(1) किसी व्यक्ति द्वारा कोई भी निर्यात या आयात इस अधिनियम के उपबंधों, उसके अधीन बनाए गए नियमों और किए गए आदेशों और तत्समय प्रवृत्त विदेश व्यापार नीति के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

(2) जहां कोई व्यक्ति इस अधिनियम के किसी उपबंध या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या किए गए आदेशों या विदेश व्यापार नीति के उल्लंघन में कोई निर्यात या आयात करेगा या उसे करने के लिए दुष्प्रेरण करेगा या प्रयत्न करेगा, वहां वह, दस हजार रुपए से अन्यून और उस माल या सेवा या प्रौद्योगिकी के, जिसके बारे में कोई उल्लंघन किया गया है, या करने का प्रयत्न किया गया है, मूल्य के पांच गुना से अनधिक की, इनमें से जो भी अधिक हो, की शास्ति का भागी होगा ।

(3) जहां कोई व्यक्ति महानिदेशक या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को प्रस्तुत की गई किसी घोषणा, विवरण या दस्तावेज पर यह जानते हुए या ऐसा विश्वास करने का कारण होते हुए हस्ताक्षर करता है या उसका उपयोग करता है या उसे प्रस्तुत, हस्ताक्षरित या उपयोग करवाता है कि ऐसी घोषणा, विवरण या दस्तावेज कूटरचित है या उसमें फेरफार की गई है या किसी सारवान् विशिष्टि के संबंध में मिथ्या है तो वह दस हजार रुपए से अन्यून या ऐसे माल या सेवाओं या प्रौद्योगिकी के, जिसके संबंध में ऐसी घोषणा, विवरण या दस्तावेज प्रस्तुत किया गया हो, मूल्य के पांच गुना से अनधिक की, इनमें से जो भी अधिक हो, शास्ति का भागी होगा ।

(4) जहां कोई व्यक्ति, न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा उसे सूचना दिए जाने पर, कोई उल्लंघन स्वीकार करता है वहां न्यायनिर्णयन प्राधिकारी ऐसे वर्ग या वर्गों या मामलों में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, उस व्यक्ति द्वारा संदत्त की जाने वाली रकम, परिनिर्धारण के रूप में, अवधारित कर सकेगा ।

(5) इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी शास्ति की, यदि वह किसी व्यक्ति द्वारा संदत्त नहीं की जाती है, निम्नलिखित किसी एक या अधिक पद्धतियों द्वारा वसूल की जा सकेगी, अर्थात् :-

(क) महानिदेशक इस अधिनियम के अधीन संदेय किसी रकम की, ऐसे व्यक्ति को देय किसी ऐसी धनराशि से, जो ऐसे अधिकारी के नियंत्रणाधीन हो, कटौती कर सकेगा या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से ऐसी कटौती करने की अपेक्षा कर सकेगा; या  

(ख) महानिदेशक, किसी सीमाशुल्क अधिकारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह इस अधिनियम के अधीन संदेय किसी रकम की ऐसे व्यक्ति को देय किसी ऐसी धनराशि से, जो ऐसे सीमाशुल्क अधिकारी के नियंत्रणाधीन हो, इस प्रकार कटौती करे, मानो उक्त रकम सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के अधीन संदेय हो ; या  

(ग) महानिदेशक, सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या सीमाशुल्क उपायुक्त या सीमाशुल्क के किसी अन्य अधिकारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह इस प्रकार संदेय रकम की, ऐसे व्यक्ति के ऐसे माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबद्ध माल भी है) को, जो सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या सीमाशुल्क उपायुक्त या सीमाशुल्क के किसी अन्य अधिकारी के नियंत्रणाधीन हों, निरुद्ध करके या उनका विक्रय करके इस प्रकार वसूली करे मानो उक्त रकम सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के अधीन संदेय हो ; या 

(घ) यदि रकम की खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) में उपबंधित रीति के अनुसार ऐसे व्यक्ति से वसूली नहीं की जा सकती है तो,-

(i) महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, उसके द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाणपत्र तैयार कर सकेगा, जिसमें ऐसे व्यक्ति से शोध्य रकम विनिर्दिष्ट होगी और उसे उस जिले के कलक्टर को भेज सकेगा, जिसमें ऐसे व्यक्ति के स्वामित्वाधीन कोई संपत्ति है या वह निवास करता है या कारबार करता है और उक्त कलक्टर ऐसे प्रमाणपत्र की प्राप्ति पर, तद्धीन विनिर्दिष्ट रकम की ऐसे व्यक्ति से वसूली करने के लिए इस प्रकार कार्यवाही करेगा, मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो ; या

(ii) महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी (जिसके अन्तर्गत सीमाशुल्क का ऐसा कोई अधिकारी भी है, जो सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के अधीन तब अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा) और इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति के स्वामित्वाधीन या उसके नियंत्रणाधीन किसी जंगम या स्थावर संपत्ति को निरुद्ध कर सकेगा और उसे तब तक इस प्रकार निरुद्ध रखेगा जब तक कि संदेय रकम को संदत्त नहीं कर दिया जाता, मानो उक्त रकम सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 के अधीन संदेय हो; और उस दशा में, यदि उक्त संदेय रकम का कोई भाग या करस्थम् का या संपत्ति को रखने का खर्च, किसी ऐसे करस्थम् के पश्चात् के आगामी तीस दिन की अवधि के लिए असंदत्त रहता है तो वह उक्त संपत्ति का विक्रय करवा सकेगा और ऐसे विक्रय के आगमों से संदेय रकम और खर्चों, जिसके अन्तर्गत असंदत्त रह गया विक्रय का खर्च भी है, को पूरा कर सकेगा और किसी अधिशेष, यदि कोई हो, को ऐसे व्यक्ति को सौंप देगा ।

(6) जहां इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन निष्पादित किसी बंधपत्र या अन्य लिखत के निबंधन यह उपबंध करते हैं कि ऐसी लिखित के अधीन शोध्य किसी रकम की वसूली उपधारा (5) में अधिकथित रीति में की जा सकेगी, वहां ऐसी रकम की वसूली, वसूली की किसी अन्य पद्धति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उक्त उपधारा के उपबंधों के अनुसार की जा सकेगी ।

(7) इस धारा में अन्तर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी ऐसे व्यक्ति के, जो इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी शास्ति का संदाय करने में असफल रहता है, आयातकर्ता-निर्यातकर्ता कोड संख्यांक को न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा, यथास्थिति, शास्ति का संदाय या उसकी वसूली किए जाने तक निलंबित किया जा सकेगा ।

(8) जहां इस अधिनियम के किसी उपबंध या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या किए गए आदेशों या विदेश व्यापार नीति का कोई उल्लंघन किया गया है, किया जा रहा है या करने का प्रयत्न किया जाता है, वहां किसी पैकेज, आवेष्टक या पात्र और किसी प्रवहण सहित माल (जिसके अंतर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है), ऐसी अपेक्षाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा अधिहरण किए जाने के दायित्वाधीन होगा । 

(9) उपधारा (8) के अधीन अधिहृत माल (जिसके अंतर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है) या प्रवहण को न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा, यथास्थिति, माल या प्रवहण के बाजार मूल्य के बराबर मोचन प्रभारों का संबद्ध व्यक्ति द्वारा संदाय करने पर, ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाए, निर्मुक्त किया जा सकेगा ।]

 [11क. शास्तियों के रूप में वसूल की गई राशियों को भारत की संचित निधि में जमा करना-इस अधिनियम के अधीन शास्तियों के रूप में वसूल की गई सभी राशियां भारत की संचित निधि में जमा की जाएंगी ।

11ख. निर्यात बाध्यता व्यतिक्रम के नियमितीकरण हेतु समाधान आयोग को सशक्त करना-केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क अधिनियम, 1944 (1944 का 1) की धारा 32 के अधीन गठित किए गए समाधान, आयोग द्वारा आदेश किए गए अनुसार सीमाशुल्क और उस पर ब्याज का समाधान इस अधिनियम के अधीन समाधान समझा जाएगा ।]

12. शास्ति या अधिहरण से अन्य दंडों में हस्तक्षेप होना-इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित कोई शास्ति या किया गया अधिहरण किसी ऐसे अन्य दंड को अधिरोपित करने से निवारित नहीं करेगा जिसके लिए उससे प्रभावित व्यक्ति उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन दायी है । 

13. न्यायनिर्णयन प्राधिकारी-इस अधिनियम के अधीन महानिदेशक द्वारा या ऐसी सीमाओं के अधीन रहते हुए जो विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत करे, कोई शास्ति अधिरोपित की जा सकेगी या कोई अधिहरण न्यायनिर्णीत किया जा सकेगा ।

14. माल, आदि के स्वामी को अवसर दिया जाना-शास्ति अधिरोपित करने या अधिहरण का न्यायनिर्णयन करने का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि  [माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है)] या प्रवहण के स्वामी या अन्य संबद्ध व्यक्ति को-

(क) उन आधारों की, जिन पर शास्ति अधिरोपित करने या ऐसे 2[माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है)] या प्रवहण का अधिहरण करने की प्रस्थापना हो, जानकारी देने वाली लिखित सूचना न दे दी गई हो; और

(ख) ऐसे उचित समय के भीतर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, उसमें वर्णित शास्ति या अधिहरण के अधिरोपण के विरुद्ध लिखित अभ्यावेदन करने की, और यदि वह ऐसी वांछा करे तो, मामले में उसकी सुनवाई करने की लिखित सूचना न दे दी गई हो ।

 

[अध्याय 4

विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात पर नियंत्रण

14क. विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात पर नियंत्रण-(1) इस अध्याय में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात पर नियंत्रणों के संबंध में सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) विनिर्दिष्ट माल, प्रौद्योगिकी या सेवाओं के निर्यात अन्तरणों, पुनःअंतरणों, किए गए अभिवहन, पोतांतरण और उसमें दलाली को लागू होगा । 

(2) सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005(2005 का 21) के सभी पद, अभिव्यक्तियां या उपबंध, विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं या प्रौद्योगिकी को ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों सहित लागू होंगे, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अध्याय का कोई उपबंध, -

(क) किन्हीं माल, सेवाओं या प्रौद्योगिकियों को लागू नहीं होगा ; या 

(ख) किन्हीं ऐसे माल, सेवाओं या प्रौद्योगिकियों को ऐसे अपवादों, उपान्तरणों और अनुकूलनों सहित लागू होगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं । 

14ख. अन्तरण संबंधी नियंत्रण-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं या प्रौद्योगिकी के अन्तरण के संबंध में नियंत्रण के अधिरोपण के लिए या उसके संबंध में सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) के उपबंधों के अनुरूप नियम बना सकेगी । 

(2) इस अध्याय के अधीन अधिसूचित कोई माल, सेवाएं या प्रौद्योगिकी का निर्यात, अन्तरण, पुनःअन्तरण, अभिवहन या पोतान्तरण, इस अधिनियम, सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) या किसी अन्य सुसंगत अधिनियम के उपबंधों के अनुसार करने के सिवाय, नहीं किया जाएगा ।  

14ग. संपूर्ण नियंत्रण रखना-कोई व्यक्ति, किसी सामग्री, उपस्कर या प्रौद्योगिकी का, यह जानते हुए कि ऐसी सामग्री, उपस्कर या प्रौद्योगिकी, जैव आयुध, रासायनिक आयुध, अणु आयुध या अन्य अणु विस्फोट युक्ति को डिजाइन करने या उसके विनिर्माण में अथवा उनकी मिसाइल परिदान प्रणाली में उपयोग किए जाने के लिए आशयित है, निर्यात नहीं करेगा । 

14घ. किसी अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्दकरण-महानिदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट माल या सेवाओं या प्रौद्योगिकी के आयात या निर्यात की अनुज्ञप्ति, अनुज्ञप्तिधारक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना, निलंबित या रद्द कर सकेगा, किन्तु ऐसे व्यक्ति को ऐसे आदेश के छह मास के भीतर सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा और तदुपरांत महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी, यदि आवश्यक हो, तो लिखित में आदेश द्वारा उस आदेश की पुष्टि कर सकेगा, उसे उपान्तरित या प्रतिसंहृत कर सकेगा ।

14अपराध और शास्तियां-(1) विनिर्दिष्ट माल, सेवाओं या प्रौद्योगिकियों के संबंध में किसी उल्लंघन की दशा में शास्ति सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) के उपबंधों के अनुसार होगी । 

(2) जहां कोई व्यक्ति विनिर्दिष्ट माल या सेवाओं अथवा प्रौद्योगिकी के आयात या निर्यात के संबंध में इस अध्याय के किसी उपबंध (किन्हीं उपबंधों) का उल्लंघन करता है या उल्लंघन करने का प्रयास अथवा दुष्प्रेरण करता है, वह, किसी ऐसी शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो उस पर अधिरोपित की जाए, सामूहिक संहार के आयुध और उनकी परिदान प्रणाली (विधिविरुद्ध क्रियाकलापों का प्रतिषेध) अधिनियम, 2005 (2005 का 21) में अनुबंधित अवधि के कारावास से दंडनीय होगा । 

(3)  कोई न्यायालय, केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना इस अध्याय के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा ।]

अध्याय 5

अपील और  [पुनर्विलोकन]

15. अपील-(1) इस अधिनियम के अधीन न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा किए गए किसी विनिश्चय या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति,- 

(क) जहां ऐसा विनिश्चय या आदेश, महानिदेशक द्वारा किया गया है, वहां केन्द्रीय सरकार को ;  

(ख) जहां ऐसा विनिश्चय या आदेश महानिदेशक के अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा किया गया है, वहां महानिदेशक को, या अपील की सुनवाई करने के लिए महानिदेशक द्वारा प्राधिकृत न्यायनिर्णयन प्राधिकारी से वरिष्ठ किसी अधिकारी को,

ऐसी तारीख से, जिसको ऐसे व्यक्ति को ऐसे विनिश्चय या आदेश की तामील की जाती है, पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर अपील कर सकेगा :

                परन्तु यदि अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी पर्याप्त हेतुक से पूर्वोक्त अवधि के भीतर अपील करने से निवारित हो गया था तो वह तीस दिन की और अवधि के भीतर ऐसी अपील करने की अनुज्ञा दे सकेगा :

                परन्तु यह और कि कोई शास्ति या मोचन प्रभार अधिरोपित करने के विरुद्ध अपील की दशा में, ऐसी कोई अपील तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक अपीलार्थी द्वारा शास्ति या मोचन प्रभारों की रकम जमा न कर दी गई हो :

                परन्तु यह और भी कि जहां अपील प्राधिकारी की यह राय है कि जमा की जाने वाली रकम से अपीलार्थी को असम्यक् कठिनाई होगी वहां वह स्वविवेकानुसार, या तो शर्त के बिना या ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो वह अधिरोपित करे, ऐसी रकम को जमा करने से अभिमुक्ति दे सकेगा । 

(2) यदि अपीलार्थी ऐसी वांछा करे तो, अपील प्राधिकारी उसे सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् और ऐसी अतिरिक्त जांच, यदि कोई हों, करने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, उस विनिश्चय या आदेश की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्टि करते हुए, उसे उपांतरित करते हुए या उलटते हुए ऐसे आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे अथवा मामले को, ऐसे निदेशों के साथ जो वह ठीक समझे, अतिरिक्त साक्ष्य, यदि आवश्यक हो, लेने के पश्चात् नए सिरे से, यथास्थिति, न्यायनिर्णयन या विनिश्चय के लिए वापस भेज सकेगा : 

परन्तु इस धारा के अधीन किसी शास्ति या मोचन प्रभारों में वृद्धि या उन्हें अधिरोपित करने वाला या अधिक मूल्य के  [माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है)] का अधिहरण करने वाला आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक अपीलार्थी को अभ्यावेदन करने का, और यदि वह ऐसी वांछा करे तो, अपनी प्रतिरक्षा के लिए सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।

(3) अपील प्राधिकारी द्वारा अपील में किया गया आदेश अंतिम होगा ।

 [16. पुनर्विलोकन-महानिदेशक द्वारा किए गए किसी विनिश्चय या आदेश की दशा में केन्द्रीय सरकार या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा किए गए किसी विनिश्चय या आदेश की दशा में महानिदेशक स्वप्रेरणा  से या अन्यथा ऐसे विनिश्चय या आदेश की, यथास्थिति, शुद्धता, विधिमान्यता या औचित्य के बारे में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए किसी कार्यवाही के अभिलेख मंगा सकेगी/मंगा सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगी/कर सकेगा और उस पर ऐसे आदेश कर सकेगी/कर सकेगा, जो वह                ठीक समझे :

परन्तु इस धारा के अधीन किसी विनिश्चय या आदेश में तब तक इस प्रकार फेरफार नहीं किया जाएगा, जिससे कि किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े, जब तक कि,-

(क) ऐसे व्यक्ति ने ऐसे विनिश्चय या आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर यह हेतुक दर्शित करने के लिए सूचना प्राप्त न की हो कि ऐसे विनिश्चय या आदेश में फेरफार क्यों न किया जाए; और 

(ख) ऐसे व्यक्ति को अभ्यावेदन करने का और यदि वह ऐसी वांछा करे तो, अपनी प्रतिरक्षा में सुनवाई का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।]

17. न्यायनिर्णयन और अन्य प्राधिकारियों की शक्तियां-(1) इस अधिनियम के अधीन कोई न्यायनिर्णयन या किसी अपील की सुनवाई करने वाले या  [पुनर्विलोकन] की किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने वाले प्रत्येक प्राधिकारी को सिविल प्रक्रिया संहिता,   1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों की बाबत किसी वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, अर्थात् :-

(क) साक्षियों को समन करना और उन्हें हाजिर कराना ; 

(ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना ; 

(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतिलिपि की अध्यपेक्षा करना ; 

(घ) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना ; और 

(ङ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।

(2) इस अधिनियम के अधीन कोई न्यायनिर्णयन या किसी अपील की सुनवाई करने वाले या  [पुनर्विलोकनट की किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने वाले प्रत्येक प्राधिकारी को, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और धारा 346 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।  

(3) इस अधिनियम के अधीन कोई न्यायनिर्णयन या अपील की सुनवाई करने वाले या 1[पुनर्विलोकनट की किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने वाले प्रत्येक प्राधिकारी को अंतरिम प्रकृति के ऐसे आदेश करने की शक्ति होगी जो वह ठीक समझे और वह पर्याप्त हेतुक से किसी विनिश्चय या आदेश के प्रवर्तन को रोक देने के लिए भी आदेश कर सकेगा ।

(4) किसी विनिश्चय या आदेश में लिपिकीय या गणितीय भूलें या उसमें किसी आकस्मिक भूल या लोप से उत्पन्न होने वाली गलतियां उस प्राधिकारी द्वारा, जिसने ऐसा विनिश्चय या आदेश किया था, स्वप्रेरणा से या पक्षकारों में से किसी के आवेदन पर, किसी भी समय शुद्ध की जा सकेंगी :

परंतु जहां इस उपधारा के अधीन की जाने के लिए प्रस्थापित किसी शुद्धि का परिणाम किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला होगा वहां ऐसी शुद्धि उस व्यक्ति को इस मामले में अभ्यावेदन करने का उचित अवसर दिए बिना नहीं की जाएगी और ऐसी कोई शुद्धि ऐसे विनिश्चय या आदेश के किए जाने की तारीख से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं की जाएगी ।  

अध्याय 6

प्रकीर्ण

18. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन किए गए या किए गए समझे गए किसी भी आदेश को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा और इस अधिनियम या उसके अधीन किए गए या किए गए समझे गए किसी आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।

 [18क. अन्य विधियों के लागू होने का वर्जित होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।]

19. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन विशेष अनुज्ञप्ति धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन जारी की जा सकेगी ; 

(ख) वे अपवाद जिनके अधीन, और वह व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग जिसके संबंध में धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन फीस उद्गृहीत की जा सकेगी और वह रीति जिससे कोई  [अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] दी या नवीकृत की जा सकेगी ; 

3[(ग) ऐसे वर्ग या वर्गों के माल (जिनके अंतर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी हैं), जिनके लिए धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन कोई अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत दी जा सकेगी ;]

(घ) वह प्ररूप जिसमें और वे निबंधन, शर्तें और निर्बन्धन, जिनके अधीन रहते हुए धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन 3[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] दी जा सकेगी ; 

(ङ) वे शर्तें, जिनके अधीन कोई 3[अनुज्ञप्ति, प्रमाणपत्र, वित्तीय या राजवित्तीय फायदों को प्राप्त करने के लिए कोई स्क्रिप या कोई लिखत] धारा 9 की उपधारा (4) के अधीन निलंबित या रद्द की जा सकेगी ; 

 [(ङक) वह रीति, जिसमें उन मालों की पहचान की जा सकेगी, जिनका आयात परिमाणात्मक निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए किया जाएगा और वह रीति, जिसमें ऐसे मालों के संबंध में गंभीर क्षति के कारण या गंभीर क्षति की आशंका के कारणों को धारा 9क की उपधारा (3) के अधीन अवधारित किया जा सकेगा ;]

(च) वे परिसर,  [माल, (जिसके अन्तर्गत सेवा या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है)] दस्तावेज, वस्तुएं और प्रवहण, जिनके संबंध में, और वे अपेक्षाएं और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन प्रवेश, तलाशी, निरीक्षण और अभिग्रहण की शक्ति का प्रयोग किया जा सकेगा ;

(छ) ऐसे वर्ग या वर्गों के मामले, जिनके लिए और वह रीति, जिससे 1[धारा 11 की उपधारा (4)] के अधीन परिनिर्धारण के रूप में कोई रकम अवधारित की जा सकेगी ;

1[(ज) वे अपेक्षाएं और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है) और प्रवहण, धारा 11 की उपधारा (8) के अधीन अधिहरण के दायित्वाधीन होंगे ;]

1[(झ) वह रीति, जिसमें और वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए माल (जिसके अन्तर्गत सेवाओं या प्रौद्योगिकी से संबंधित माल भी है) और प्रवहण धारा 11 की उपधारा (9) के अधीन मोचन प्रभारों का संदाय करने पर निर्मुक्त किए जा सकेंगे ;] और

(ञ) कोई अन्य विषय जो नियमों द्वारा विहित किया जाना है या किया जाए या जिसके बारे में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है या किया जाए ।

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और किया गया प्रत्येक आदेश बनाए जाने या किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या  वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

20. निरसन और व्यावृत्ति-(1) आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 (1947 का 18) और विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अध्यादेश, 1992 (1992 का अध्यादेश संख्यांक 11) निरसित किए जाते है । 

(2) आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 (1947 का 18) के निरसन का- 

(क) इस प्रकार निरसित अधिनियम या उसके अधीन सम्यक् रूप से की गई या हुई किसी बात के पूर्ववर्ती प्रवर्तन पर ; या 

(ख) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर ; या 

(ग) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन किसी उल्लंघन की बाबत उपगत किसी शास्ति, अधिहरण या दण्डादेश पर ; या 

(घ) यथापूर्वोक्त ऐसे किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, अधिहरण या दण्डादेश की बाबत किसी कार्यवाही या उपचार पर,

प्रभाव नहीं पड़ेगा और ऐसी कोई कार्यवाही या उपचार संस्थित किया जा सकेगा, जारी रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा और ऐसी कोई शास्ति अधिरोपित की जा सकेगी, अधिहरण या दण्डादेश किया जा सकेगा मानो वह अधिनियम निरसित नहीं हुआ है । 

(3) विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अध्यादेश, 1992 (1992 का अध्यादेश संख्यांक 11) का निरसन होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

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