अन्तर्राज्यिक निगम अधिनियम, 1957
(1957 का अधिनियम संख्यांक 38)
[20 सितम्बर, 1957]
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 109 या राज्यों के पुनर्गठन से
संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति के आधार पर दो या अधिक
राज्यों में काम करने वाले कतिपय निगमों के पुनर्गठन के
लिए और उससे सम्बद्ध मामलों के
लिए उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
भारत गणराज्य के आठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अन्तर्राज्यिक निगम अधिनियम, 1957 है ।
2. परिभाषा-इस अधिनियम में, अन्तर्राज्यिक निगम" से अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमों में से किसी के अधीन गठित और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 109 [या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति] के आधार पर दो या अधिक राज्यों में काम करने वाला कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है ।
3. स्कीमें बनाने की राज्य सरकारों की शक्ति-यदि किसी ऐसे राज्य की, जिसके किसी भाग में कोई अन्तर्राज्यिक निगम काम कर रहा है, सरकार को यह प्रतीत हो कि उस अन्तर्राज्यिक निगम को राज्य के भीतर के ही एक या अधिक निगमों में पुनर्संगठित और पुनर्गठित किया जाना चाहिए या उसका विघटन किया जाना चाहिए, तो राज्य सरकार, यथास्थिति, ऐसे पुनर्गठन और पुनर्गठन या ऐसे विघटन के लिए स्कीम बना सकेगी, जिसमें उस अन्तर्राज्यिक निगम की आस्तियां, अधिकार और दायित्व के, किसी अन्य निगम को या राज्य सरकार को, अन्तरण की बाबत तथा उस अन्तर्राज्यिक निगम के कर्मचारियों के अन्तरण या पुनर्नियोजन की बाबत प्रस्ताव सम्मिलित होंगे और उस स्कीम को केन्द्रीय सरकार को भेज सकेगी ।
4. कतिपय अन्तर्राज्यिक निगमों का पुनर्गठन-(1) धारा 3 के अधीन भेजी गई किसी स्कीम की प्राप्ति पर, केन्द्रीय सरकार, सम्बद्ध राज्य सरकारों से परामर्श करने के पश्चात्, उपान्तरों सहित या रहित स्कीम अनुमोदित कर सकेगी और इस प्रकार अनुमोदित स्कीम को ऐसे आदेश द्वारा प्रभावी कर सकेगी, जैसा वह ठीक समझे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन दिया गया कोई आदेश सभी निम्नलिखित मामलों या उनमें से किसी के लिए भी उपबन्ध कर सकेगा, अर्थात्: -
(क) अन्तर्राज्यिक निगम का विघटन;
(ख) अन्तर्राज्यिक निगम का किसी भी रीति में पुनर्संगठन और पुनर्गठन, जिसमें, जहां आवश्यक हो, वहां नए निगमों का गठन भी सम्मिलित है ;
(ग) वह क्षेत्र, जिसकी बाबत पुनर्गठित निगम या नया निगम काम करेगा;
(घ) अन्तर्राज्यिक निगम की आस्तियों, अधिकारों और दायित्वों का (जिनमें उसके द्वारा की गई किसी संविदा के अधीन अधिकार और दायित्व भी सम्मिलित हैं) किन्हीं अन्य निगमों या राज्य सरकारों को पूर्णतः या अंशतः अन्तरण और ऐसे अन्तरण के निबन्धन और शर्तें;
(ङ) किसी ऐसे विधिक कार्यवाही में, जिसमें अन्तर्राज्यिक निगम पक्षकार है, पक्षकार के रूप में अन्तर्राज्यिक निगम के स्थान पर किसी ऐसे अन्तरिती का प्रतिस्थापन या किसी ऐसे अन्तरिती का जोड़ा जाना और अन्तर्राज्यिक निगम के समक्ष लम्बित किन्हीं कार्यवाहियों का किसी ऐसे अन्तरिती को अन्तरण ;
(च) अन्तर्राज्यिक निगम के किन्हीं कर्मचारियों का किसी ऐसे अन्तरिती को या उसके द्वारा अन्तरण या पुनर्नियोजन और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 111 1[या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति] के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसे अन्तरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् ऐसे कर्मचारियों को लागू सेवा के निबन्धन और शर्तें ;
(छ) जिसके अधीन अन्तर्राज्यिक निगम गठित किया गया था उस अधिनियम के ऐसे अनुकूलन या उपान्तरण, चाहे निरसन या संशोधन के रूप में हों, जो अनुमोदित स्कीम को प्रभावी करने के लिए आवश्यक या समीचीन हों ;
(ज) ऐसी आनुषंगिक, पारिणामिक और अनुपूरक बातें जो अनुमोदित स्कीम को प्रभावी करने के लिए आवश्यक हों ।
(3) जहां इस धारा के अधीन किसी अन्तर्राज्यिक निगम की आस्तियों, अधिकारों और दायित्वों का अन्तरण करने वाला आदेश दिया गया है, वहां उस आदेश के आधार पर उस अन्तर्राज्यिक निगम की ऐसी आस्तियां, अधिकार और दायित्व अन्तरिती में निहित हो जाएंगे और वे अन्तरिती की आस्तियां, अधिकार और दायित्व होंगे ।
(4) इस धारा के अधीन दिया गया प्रत्येक आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और वह अधिनियम, जिसके अधीन वह अन्तर्राज्यिक निगम गठित किया गया था, उस आदेश के उपबंधों तथा उनके द्वारा किए गए अनुकूलनों और उपांतरों के अधीन रहते हुए, तब तक प्रभावी होगा, जब तक किसी राज्य के समक्ष विधान-मंडल द्वारा उसे परिवर्तित, निरसित या संधोधित न किया जाए ।
[(5) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस आदेश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु आदेश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
5. अनुसूची में जोड़ने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची में किसी ऐसे अधिनियम को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिसके अधीन किसी राज्य के लिए गठित निगमित निकाय राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 109 [या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति] के आधार पर दो या अधिक राज्यों में काम कर रहा है और ऐसी अधिसूचना के जारी किए जाने पर वह अनुसूची उसमें उक्त अधिनियम के सम्मिलित किए जाने से संशोधित की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
(धारा 2 और 5 देखिए)
1. मुम्बई चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, 1938 (1938 का मुम्बई अधिनियम 26) ।
2. मुम्बई माध्यमिक विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा अधिनियम, 1948 (1948 का मुम्बई अधिनियम 49) ।
3. मुम्बई आवास बोर्ड अधिनियम, 1948 (1948 मुम्बई अधिनियम 69) ।
4. मुम्बई खार भूमि अधिनियम, 1948 (1948 का मुम्बई अधिनियम 72) ।
5. मुम्बई लोक न्यास अधिनियम, 1950 (1950 का मुम्बई अधिनियम 29) ।
6. मुम्बई श्रम-कल्याण निधि अधिनियम, 1953 (1953 का मुम्बई अधिनियम 40) ।
7. मुम्बई परिचारिका, दाई और स्वास्थचर अधिनियम, 1954 (1954 का मुम्बई अधिनियम 14) ।
8. मुम्बई ग्रामोद्योग अधिनियम, 1954 (1954 का मुम्बई अधिनियम 41) ।
9. हैदराबाद परिचारिका, दाई और स्वास्थचर रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1951 (1951 का हैदराबाद अधिनियम 19) ।
10. हैदराबाद खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1955 (1955 का हैदराबाद अधिनियम 12) ।
11. मध्य प्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 (1953 का मध्य प्रदेश अधिनियम 15) ।
[12. राजस्थान चिकित्सा अधिनियम, 1952 (1952 का राजस्थान अधिनियम 13) ।
13. राजस्थान देशी औषध अधिनियम, 1953 (1953 का राजस्थान अधिनियम 5) ।
14. राजस्थान भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 (1954 का राजस्थान अधिनियम 16) ।
15. राजस्थान खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1955 (1955 का राजस्थान अधिनियम 5) ।]
[16. मध्य भारत पंचायत अधिनियम, संवत् 2006 (1949 का 58) ।]
17. मध्य भारत देशी औषध अधिनियम, संवत् 2009 (1952 का 28) ।
18. मध्य भारत दाई रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1953 (1953 का 22) ।
19. मध्य भारत चिकित्सा व्यवसायी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1954 (1954 का 16) ।
20. मध्य भारत परिचारिका, दाई और स्वास्थचर रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1955 (1955 का 2) ।
21. मध्य भारत भूदान यज्ञ अधिनियम, 1955 (1955 का 3) ।
22. मध्य भारत खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम, 1955 (1955 का 24) ।]
[23. हैदराबाद कृषि-मण्डी अधिनियम (1339 फसली का अधिनियम सं० 2) ।]
[24. दन्त-चिकित्सक अधिनियम, 1948 (1948 का केन्द्रीय अधिनियम 16) ।]
[25. मद्रास हिन्दू धार्मिक तथा खैराती विन्यास अधिनियम, 1951 (1951 का मद्रास अधिनियम 19) ।]
[26. शासकीय न्यासी अधिनियम, 1913 (1913 का केन्द्रीय अधिनियम 2) ।
27. महा-प्रशासक अधिनियम, 1913 (1913 का केन्द्रीय अधिनियम 3) ।]
[28. फार्मेसी अधिनियम, 1948 (1948 का केन्द्रीय अधिनियम 8) ।]
[29. मुम्बई हौम्योपैथी अधिनियम, 1951 (1951 का मुम्बई अधिनियम 48) ।]
[30. मुम्बई खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम, 1960 (1960 का मुम्बई अधिनियम 19) ।]
[31. मुम्बई ग्राम पंचायत अधिनियम, 1958 (1958 का मुम्बई अधिनियम 3) ।]
[32. खैराती विन्यास अधिनियम, 1890 (1890 का अधिनियम 6) ।]
[33. पंजाब परिचारिका रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1932 (1932 का पंजाब अधिनियम 1) ।
34. पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 (1952 का पंजाब अधिनियम 4) ।
35. वक्फ अधिनियम, 1954 (1954 का केन्द्रीय अधिनियम 29) ।
36. पंजाब खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1955 (1956 का पंजाब अधिनियम 40) ।
37. पंजाब पंचायत समिति तथा जिला परिषद् अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 3) ।
38. पंजाब कृषक-उत्पाद-मण्डी अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 23) ।
39. महा-प्रशासक अधिनियम, 1963 (1963 का केन्द्रीय अधिनियम 45) ।]
[40. पंजाब होम्योपैथी व्यवसायी अधिनियम, 1965 (1965 का पंजाब अधिनियम 16) ।]
[41. पंजाब भूदान यज्ञ अधिनियम, 1955 (1955 का पंजाब अधिनियम 45) ।]
[42. पंजाब श्रम-कल्याण निधि अधिनियम, 1965 (1965 का पंजाब अधिनियम 17) ।
43. पंजाब राज्य आयुर्वेद तथा यूनानी औषध पद्धतियों का संकाय अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 38) ।]
44. शाही कुटुम्ब (बड़ौदा) न्यास निधि (निरसन) अधिनियम, 1956 (1957 का मुम्बई अधिनियम 4) ।
[45. सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 (1925 का पंजाब अधिनियम 8) ।]
----------------

