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भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 ( State Bank of India (Subsidiary Banks) Act, 1959 )


 

भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959

(1959 का अधिनियम संख्यांक 38)

[10 सितम्बर, 1959]

भारतीय स्टेट बैंक के समनुषंगियों के रूप में कतिपय सरकारी या सरकार-सहयुक्त

बैंकों के बनाए जाने के लिए और इस प्रकार बनाए गए समनुषंगी

बैंकों के गठन, प्रबंध और नियंत्रण के लिए, तथा

उनसे सम्बद्ध, या उनके आनुषंगिक विषयों

के लिए उपबंध करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के दसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 है  

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

() नियत दिन" से, -

(i) किसी विद्यमान बैंक के सम्बन्ध में, वह तारीख अभिप्रेत है जिसको धारा 3 के अधीन तत्स्थानी नया बैंक गठित किया जाता है;

(ii) किसी नए बैंक के सम्बन्ध में, वह तारीख अभिप्रेत है जिसको धारा 3 के अधीन नया बैंक गठित किया जाता है;

(iii) हैदराबाद बैंक के सम्बन्ध में, वह तारीख अभिप्रेत है जिसको हैदराबाद का स्टेट बैंक अधिनियम, 1956 (1956 का 79) में किए गए संशोधन तृतीय अनुसूची के भाग 7 के अधीन प्रभावी होते हैं

                                                                                                                                                     

() तत्स्थानी बैंक" से निम्नलिखित बैंक अभिप्रेत हैं, अर्थात् :-

(i) स्टेट बैंक आफ बीकानेर के सम्बन्ध में, बैंक आफ बीकानेर, लिमिटेड

                                                                                                                                                     

                                                                                                                                                     

(iv) स्टेट बैंक आफ मैसूर के सम्बन्ध में, बैंक आफ मैसूर, लिमिटेड

(v) स्टेट बैंक आफ पटियाला के सम्बन्ध में, बैंक आफ पटियाला;

(vi) स्टेट बैंक आफ तिरुवांकुर के सम्बन्ध में, तिरुवांकुर बैंक, लिमिटेड

() तत्स्थानी नया बैंक" से निम्नलिखित बैंक अभिप्रेत हैं, अर्थात् :-

(i) बैंक आफ बीकानेर, लिमिटेड के सम्बन्ध में, स्टेट बैंक आफ बीकानेर

3                                                                                                                                                   

4                                                                                                                                                   

(iv) बैंक आफ मैसूर, लिमिटेड के सम्बन्ध में, स्टेट बैंक आफ मैसूर;

(v) बैंक आफ पटियाला के सम्बन्ध में, स्टेट बैंक आफ पटियाला

(vi) तिरुवांकुर बैंक, लिमिटेड के सम्बन्ध में स्टेट बैंक आफ तिरुवांकुर;

() विद्यमान बैंक" से निम्नलिखित में से कोई बैंक अभिप्रेत है, अर्थात् :-

(i) बैंक आफ बीकानेर, लिमिटेड

                                                                                                                                                     

                                                                                                                                                     

(iv) बैंक आफ मैसूर, लिमिटेड;

(v) बैंक आफ पटियाला

(vi) तिरुवांकुर बैंक, लिमिटेड

() हैदराबाद बैंक" से हैदराबाद स्टेट बैंक ऐक्ट, 1350 एफ० (1350 एफ० का 19) के अधीन गठित हैदराबाद स्टेट बैंक अभिप्रेत है जिसे हैदराबाद का स्टेट बैंक अधिनियम, 1956 (1956 का 79) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन हैदराबाद का स्टेट बैंक के रूप में पुनःनामित किया गया है

() नया बैंक" से धारा 3 के अधीन गठित बैंकों में से कोई बैंक अभिप्रेत है;

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

() रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है

                                                                                                                                                                     

() स्टेट बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है

() समनुषंगी बैंक" से कोई नया बैंक अभिप्रेत है और इसमें हैदराबाद बैंक  [भी आता है];

() अधिकरण" से धारा 15 के अधीन गठित अधिकरण अभिप्रेत है

 [() कर्मकार" का वही अर्थ है जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में है ]

अध्याय 2

[नए बैंकों का गठन और किसी समनुषंगी बैंक का नाम परिवर्तन

3. नए बैंकों की स्थापना-ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, निम्नलिखित नए बैंकों की स्थापना की जाएगी, अर्थात् :-

() बीकानेर स्टेट बैंक

                                                                                                                                                                   

                                                                                                                                                                   

() मैसूर स्टेट बैंक;

() पटियाला स्टेट बैंक

() तिरुवांकुर स्टेट बैंक,

और विभिन्न नए बैंकों की स्थापना के लिए विभिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकती हैं  

[3. समनुषंगी बैंक का नाम परिवर्तन-(1) केन्द्रीय सरकार, स्टेट बैंक और रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकती है कि किसी समनुषंगी बैंक का नाम, ऐसी तारीख से जो इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए, बदल कर कोई अन्य नाम कर दिया जाएगा और तदुपरि इस अधिनियम में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी संविदा, लिखत या दस्तावेज में उस समनुषंगी बैंक के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस बैंक के प्रति उसके नए नाम से निर्देश है

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी समनुषंगी बैंक के नाम में परिवर्तन से उस बैंक के अधिकारों या बाध्यताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसके द्वारा या उसके विरुद्ध की गई विधिक कार्यवाहियां त्रुटियुक्त हो जाएंगी, तथा कोई ऐसी विधिक कार्यवाहियां जो उस बैंक के पूर्ववर्ती नाम से उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी गई अथवा प्रारम्भ की गई हों, तो वे उसके नए नाम से उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी ]

4. नए बैंकों का निगमित निकाय होना-(1) प्रत्येक नया बैंक शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा  

(2) नए बैंकों में से प्रत्येक के निगमित निकाय का गठन स्टेट बैंक तथा नए बैंक के तत्कालीन अन्य शेयरधारकों, यदि कोई हों, से मिलकर होगा  

(3) प्रत्येक नया बैंक बैंककारी का कारोबार और अन्य कारोबार इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार करेगा, और उसे अपने कारोबार के प्रयोजनों के लिए जंगम अथवा स्थावर संपत्ति के अर्जन और धारण करने की और उसका व्ययन करने की शक्ति होगी  

5. नए बैंकों के प्रधान कार्यालय और शाखाएं-(1) नए बैंकों में से प्रत्येक का प्रधान कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे  

(2) प्रत्येक नया बैंक तत्स्थानी बैंक की नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान सभी शाखाओं को अपनी शाखाओं के रूप में बनाए रखेगा, और स्टेट बैंक से परामर्श किए बिना और रिजर्व बैंक के अनुमोदन के सिवाय कोई नई शाखा तो स्थापित करेगा और किसी शाखा को बन्द करेगा  

 [6. नए बैंक की प्राधिकृत पूंजी-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक नए बैंक की प्राधिकृत पूंजी पांच अरब रुपए होगी  

(2) प्रत्येक नए बैंक की प्राधिकृत पूंजी, एक-एक सौ रुपए के या ऐसे अंकित मूल्य के जो नया बैंक, स्टेट बैंक के अनुमोदन से विनिश्चित करे, शेयरों में विभाजित की जाएगी  

(3) प्रत्येक नया बैंक, विहित प्रक्रिया के अनुसार ऐसे अंकित मूल्य के, जो नया बैंक, स्टेट बैंक के अनुमोदन से विनिश्चित करे, समतुल्य मूल्य के शेयर प्रमाणपत्र जारी कर सकेगा और नए बैंक का प्रत्येक शेयरधारक ऐसे अंकित मूल्य के समतुल्य मूल्य के शेयर प्रमाणपत्र प्राप्त करने का हकदार होगा

(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, स्टेट बैंक  [रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] नए बैंक को अपनी प्राधिकृत पूंजी बढ़ाने या घटाने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा]

7. नए बैंकों की पुरोधृत पूंजी-(1) नियत दिन को, किसी नए बैंक की पुरोधृत पूंजी सौ-सौ रुपए के पूर्णतः समादत्त शेयरों में विभाजित उतनी रकम होगी जो स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से नियत करे  

 [(1) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, नए बैंक की पुरोधृत पूंजी ऐसी रकम के रूप में होगी, जो स्टेट बैंक  [रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] नियत करे और धारा 6 की उपधारा (2) के अनुसार ऐसे अंकित मूल्य के पूर्णतः समादत्त शेयरों में विभाजित होगी

(2) नए बैंक की पुरोधृत पूंजी के सभी शेयर, नियत दिन को स्टेट बैंक को आबंटित हो जाएंगे  

(3) स्टेट बैंक किसी विद्यमान बैंक की बाबत संदेय प्रतिकर की रकम के अधिकरण द्वारा अवधारण, यदि कोई हो, के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, यह विचार करेगा कि ऐसे बैंक की आरक्षितियों में समायोजन करके या उनसे या उसको अन्तरण करके या किसी अन्य रीति से, किसी तत्स्थानी नए बैंक की उपधारा (1) के अधीन नियत की गई पुरोधृत पूंजी में कोई वृद्धि या कमी करना आवश्यक या समीचीन है अथवा नहीं और तदन्तर वह, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, उस बैंक को अपनी पुरोधृत पूंजी बढ़ाने या घटाने का निदेश कर सकती है

 [(4) नया बैंक, समय-समय पर [रिजर्व बैंक से परामर्श करके, स्टेट बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो विहित की जाए, अपनी पुरोधृत पूंजी को, चाहे 2[लोक निर्गमन या अधिकारवान् निर्गमन द्वारा] या अधिमानी आबंटन या निजी स्थापन द्वारा साधारण शेयर या अधिमानी शेयर जारी करके बढ़ा सकेगा   

(5) किसी नए बैंक की पुरोधृत पूंजी, साधारण शेयरों या साधारण और अधिमानी शेयरों में होगी

परन्तु अधिमानी शयरों का जारी किया जाना, रिजर्व बैंक द्वारा अधिमानी शेयरों के वर्ग, ऐसे अधिमानी शेयरों के (चाहे शाश्वत् हों या अमोचनीय या मोचनीय) प्रत्येक वर्ग के जारी शेयरों की सीमा और उन निबंधनों और शर्तों को विनिर्दिष्ट करते हुए, जिनके अधीन रहते हुए प्रत्येक वर्ग के शेयर जारी किए जा सकेंगे, विरचित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार होगा  

(6) नया बैंक, 2[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, स्टेट बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] समय-समय पर, विद्यमान साधारण शेयरधारक को बोनस शेयर जारी करके अपनी पुरोधृत पूंजी को ऐसी रीति से बढ़ा सकेगा, जो स्टेट बैंक, 2[रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] निदेशित करे  

(7) नए बैंक की पुरोधृत पूंजी में कोई वृद्धि या कमी ऐसी रीति में नहीं की जाएगी कि स्टेट बैंक किसी भी समय नए बैंक के साधारण शेयरों वाली पुरोधृत पूंजी के इक्यावन प्रतिशत से कम धारण करे   

(8) नया बैंक पुरोधृत पूंजी में वृद्धि के संबंध में जारी शेयरों के संबंध में किस्तों में धन स्वीकार कर सकेगा, उसके लिए मांग कर सकेगा और असमादत्त शेयरों का समपहरण कर सकेगा और विहित रीति में उन्हें पुनः जारी कर सकेगा ]

8. नए बैंकों की आरक्षित निधि-(1) प्रत्येक नया बैंक एक आरक्षित निधि स्थापित करेगा जो धारा 7 की उपधारा (3) और इस धारा की उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, -

() नियत दिन को, उतनी धनराशि होगी जितनी स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से अवधारित करे; और  

() नियत दिन के पश्चात्, पूर्वोक्त धनराशि और ऐसी अन्य धनराशियों का योग होगी जो नए बैंक द्वारा लाभांश घोषित करने से पूर्व के अपने वार्षिक शेष लाभों में से आरक्षित निधि को अन्तरित की जाए  

(2) स्टेट बैंक, अधिकरण द्वारा किसी विद्यमान बैंक की बाबत प्रतिकर की रकम के अवधारण, यदि कोई हो, के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, यह विचार करेगा कि किसी खाते से, या उसको, अन्तरण द्वारा समायोजन के रूप में या डूबे हुए तथा शंकास्पद ऋणों के लिए, आस्तियों में अवक्षयण या आकस्मिकता व्यय के लिए उपबन्ध करने के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, तत्स्थानी नए बैंक की आरक्षित निधि में वृद्धि या कमी करना आवश्यक है या नहीं, और उसके पश्चात्, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, उस बैंक को अपनी आरक्षित निधि इस प्रकार बढ़ाने या उसे कम करने का निदेश दे सकता है

9. विद्यमान बैंकों के शेयरों का स्टेट बैंक को अन्तरण-किसी नए बैंक के गठन पर, वहां जहां तत्स्थानी बैंक की कोई शेयर पूंजी हो, ऐसी पूंजी में के सभी शेयर, सभी न्यासों, दायित्वों और विल्लंगमों से मुक्त होकर स्टेट बैंक को अन्तरित हो जाएंगे, और उसमें निहित होंगे   

10. विद्यमान बैंकों के उपक्रमों का नए बैंकों को अन्तरण-(1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए जब कोई नया बैंक गठित किया जाए तब तत्स्थानी बैंक का उपक्रम नए बैंक को अन्तरित हो जाएगा और उसमें निहित होगा  

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट तत्स्थानी बैंक के उपक्रम के बारे में यह समझा जाएगा कि उसके अन्तर्गत उस बैंक के सब अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा नकदी अतिशेषों (रोकड़ बाकी) आरक्षित निधियों, विनिधानों सहित सब जंगम और स्थावर सम्पत्ति तथा नियत दिन के ठीक पूर्व उस बैंक के कब्जे में जो भी सम्पत्ति है उसमें, या उससे उद्धृत, सब अन्य हित और अधिकार, तथा उनसे संबंधित सभी बहियां, लेखे, और दस्तावेजें तथा उस बैंक के उस समय विद्यमान किसी प्रकार के सब ऋण, दायित्व और बाध्यताएं भी हैं   

(3) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अन्य उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सब सुविधाएं, विलेख, बंधपत्र, करार, मुख्तारनामे, विधिक प्रतिनिधित्व की मंजूरियां और किसी भी स्वरूप की अन्य लिखतें जो नियत दिन के ठीक पूर्व अस्तित्वशील या प्रभावशील हैं और जिनमें विद्यमान बैंक एक पक्षकार है या जो उस बैंक के पक्ष में है, यथास्थिति, तत्स्थानी नए बैंक के विरुद्ध या पक्ष में पूर्णतया प्रवृत्त और प्रभावशील होंगी और उन्हें इस प्रकार पूर्ण और प्रभावशील रूप से प्रवर्तित या कार्यान्वित किया जा सकेगा मानो उक्त विद्यमान बैंक के स्थान पर तत्स्थानी नया बैंक उनमें पक्षकार रहा हो अथवा मानो वे तत्स्थानी नए बैंक के पक्ष में जारी की गई हों  

(4) यदि किसी विद्यमान बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध किया गया कोई वाद, अपील या किसी प्रकार की अन्य विधिक कार्यवाही नियत दिन को लम्बित है तो वह तत्स्थानी नए बैंक को विद्यमान बैंक का उपक्रम अन्तरित होने या इस अधिनियम में किसी बात के होने के कारण, उपशमित, बन्द या प्रतिकूलतः प्रभावित नहीं होगी, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही तत्स्थानी नए बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, अभियोजित की जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी

11. विद्यमान बैंकों के कर्मचारियों की सेवाओं का अंतरण-(1) इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, विद्यमान बैंक का प्रत्येक कर्मचारी, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस बैंक के नियोजन में है, उस दिन से ही तत्स्थानी नए बैंक का कर्मचारी हो जाएगा और उसमें अपना पद या सेवा उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर तथा पेंशन, उपदान और अन्य विषयों के बारे में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों सहित धारण करेगा जिन पर यदि विद्यमान बैंक का उपक्रम तत्स्थानी नए बैंक को अन्तरित या उसमें निहित नहीं होता तो वह उसे नियत दिन को धारण करता, और तब तक ऐसे धारण करता रहेगा जब तक कि उस बैंक में उसके नियोजन को समाप्त नहीं कर दिया जाता या उसके पारिश्रमिक का या उसकी सेवा के निबंधनों और शर्तों का तत्स्थानी नए बैंक द्वारा, किसी विधि के अधीन या उसके अनुसरण में, अथवा किसी ऐसे उपबन्ध के अनुसार जिससे तत्समय उसकी सेवा शासित है, पुनरीक्षण नहीं किया जाता या उनमें कोई परिवर्तन नहीं कर दिया जाता :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात पटियाला बैंक के किसी ऐसे कर्मचारी को, जो पंजाब राज्य के अधीन कोई सिविल पद धारण करता है, तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि वह पटियाला बैंक के माध्यम से, उस राज्य की सरकार को लिखित रूप में दी गई सूचना द्वारा पटियाला स्टेट बैंक का कर्मचारी हो जाने के लिए अपनी सहमति के बारे में नियत दिन के पूर्व, प्रज्ञापित नहीं करता

(2) कोई ऐसा व्यक्ति जो नियत दिन पर, किसी विद्यमान बैंक से या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि से अथवा ऐसी निधि का प्रशासन करने वाले किसी प्राधिकारी से, पेंशन या अन्य अधिवार्षिकी का अनुकम्पा भत्ते या अन्य फायदे प्राप्त करने का हकदार है या उसे प्राप्त कर रहा है, तत्स्थानी नए बैंक द्वारा या किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि से या ऐसी निधि का प्रशासन करने वाले किसी प्राधिकारी द्वारा वही पेंशन, भत्ता या प्रसुविधा दिए जाने और उनसे उन्हें प्राप्त करने का तब तक हकदार बना रहेगा जब तक वह उन शर्तों का पालन करता है जिन पर पेंशन, भत्ता या फायदा मंजूर किया गया था, तथा यदि यह प्रश्न उठता है कि उसने ऐसी शर्तों का उस प्रकार से पालन किया है या नहीं तो उस प्रश्न का अवधारण स्टेट बैंक द्वारा किया जाएगा और उस पर उसका विनिश्चय अन्तिम होगा  

(3) उन व्यक्तियों के स्थान पर, जो नियत दिन के ठीक पूर्व किसी विद्यमान बैंक के कर्मचारियों के फायदे के लिए गठित किसी निधि के न्यासी हैं या ऐसी किसी निधि का प्रशासन करने वाले किसी प्राधिकरण के सदस्य हैं, ऐसे न्यासी या सदस्य रखे जाएंगे, जिन्हें स्टेट बैंक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे  

(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में, या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी करार में, किसी बात के होते हुए भी, किसी विद्यमान बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का उस बैंक से तत्स्थानी नए बैंक को इस धारा के आधार पर अन्तरण, ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को किसी ऐसे प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा जिसका वह इस उपबंध के होने की दशा में ऐसी किसी विधि या करार के अधीन हकदार होता, तथा ऐसे प्रतिकर की बाबत कोई भी दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा  

12. विदेशी आस्तियों के अन्तरण के लिए विशेष उपबन्ध-(1) यदि, भारत के बाहर के किसी देश की विधियों के अनुसार इस अधिनियम के उपबंध, उस देश में स्थित किसी आस्ति या दायित्व को, जो किसी विद्यमान बैंक के उपक्रम के भागरूप हैं, तत्स्थानी नए बैंक को अन्तरित करने या उसमें निहित करने में अपने आप में प्रभावशील नहीं हैं तो ऐसी आस्ति या दायित्व की बाबत उस विद्यमान बैंक के कार्यकलाप, नियत दिन को और उससे, तत्स्थानी नए बैंक के तत्समय प्रबंध निदेशक को न्यस्त हो जाएंगे, और प्रबंध निदेशक उस बैंक के कार्यकलाप के कारगर रूप में परिसमापन के प्रयोजन के लिए उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और वे सभी कार्य और बातें कर सकता है जिनका प्रयोग विद्यमान बैंक कर सकता है या जो कार्य और बातें विद्यमान बैंक द्वारा की जा सकती हैं  

(2) तत्स्थानी नए बैंक का  [प्रबंध निदेशक], उपधारा (1) द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, ऐसे सभी कदम उठा सकता है जिनकी भारत से बाहर के किसी ऐसे देश की विधियों द्वारा ऐसे अन्तरण या निहित किए जाने को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए अपेक्षा की जा सकती है तथा 1[प्रबंध निदेशक] उसके संबंध में या तो स्वयं या इस निमित्त अपने द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के माध्यम से विद्यमान बैंक की किसी आस्ति की वसूली कर सकता है और किसी दायित्व का उन्मोचन कर सकता है तथा उसके शुद्ध आगमों को तत्स्थानी नए बैंक को अन्तरित कर सकता है  

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, नियत दिन को ही, कोई भी व्यक्ति किसी विद्यमान बैंक के विरुद्ध अथवा उसके नाम से या उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के विरुद्ध, वहां तक के सिवाय जहां तक कि इस धारा के उपबंधों को प्रवर्तित करने के लिए आवश्यक हो अथवा वहां तक के सिवाय जहां तक कि उसका संबंध ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए किसी अपराध से हो तो कोई दावा या मांग करेगा और कोई कार्यवाही संस्थित करेगा

 [(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

() तत्स्थानी नया बैंक" से, जयपुर बैंक लिमिटेड के संबंध में, धारा 3 के अधीन बीकानेर स्टेट बैंक के रूप में गठित संस्था अभिप्रेत है

() विद्यमान बैंक" में जयपुर बैंक लिमिटेड भी आता है

 

अध्याय 3

प्रतिकर

13. पटियाला बैंक से भिन्न विद्यमान बैंक के शेयरधारियों को प्रतिकर का दिया जाना-(1) ऐसे प्रत्येक व्यक्ति और किसी राज्य सरकार को जो नियत दिन से ठीक पूर्व किसी बैंक की बहियों में शेयरों के धारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं, स्टेट बैंक द्वारा, ऐसे विद्यमान बैंक की पूंजी में से शेयरों के स्टेट बैंक को अन्तरण की बाबत उतना प्रतिकर दिया जाएगा जितना प्रथम अनुसूची में दिए गए सिद्धान्तों के अनुसार अवधारित किया जाता है  

(2) प्रथम अनुसूची में दिए गए सिद्धान्तों के अनुसार दिए जाने वाले प्रतिकर की रकम प्रथमतः स्टेट बैंक द्वारा, रिजर्व बैंक से परामर्श करके अवधारित की जाएगी, तथा उसके द्वारा वह उन सबको, जिन्हें उपधारा (1) के अधीन प्रतिकर संदेय है, उसकी पूर्ण तुष्टि के तौर पर, प्रस्तावित की जाएगी  

(3) यदि उपधारा (2) में वर्णित के अनुसार स्टेट बैंक द्वारा प्रस्तावित प्रतिकर की रकम विद्यमान बैंक के किसी शेयरधारी को स्वीकार्य नहीं है तो ऐसा शेयरधारी, उस तारीख से पूर्व, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचित करे, केन्द्रीय सरकार से, लिखित रूप में, अनुरोध कर सकता है कि वह मामला अधिकरण को निर्दिष्ट कर दिया जाए

(4) उपधारा (3) के अधीन अधिसूचित तारीख से पूर्व यदि केन्द्रीय सरकार को उस उपधारा में वर्णित के अनुसार अनुरोध, कम से कम एक चौथाई ऐसे शेयरधारियों से जो विद्यमान बैंक की समादत्त शेयर पूंजी के मूल्य की दृष्टि से कम से कम एक चौथाई शेयर धारण करते हैं, प्राप्त होते हैं तो केन्द्रीय सरकार उस मामले को विनिश्चय के लिए अधिकरण को निर्देशित कर देगी  

 

(5) उपधारा (3) के अधीन अधिसूचित तारीख से पूर्व यदि केन्द्रीय सरकार को उस उपधारा में उपबन्धित रूप में अनुरोध प्राप्त नहीं होते हैं तो स्टेट बैंक द्वारा प्रस्तावित प्रतिकर की रकम, और जहां अधिकरण को मामला निर्दिष्ट किया गया हो वहां उसके द्वारा अवधारित रकम, उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर होगा और वह अंतिम होगी तथा संबंधित सभी पक्षकारों पर आबद्धकर होगी   

(6) आगामी उपधाराओं के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रतिकर की रकम, -

() यदि शेयरधारी ने उपधारा (7) के उपबंधों के अनुसार तत्स्थानी नए बैंक के शेयरों के लिए आवेदन नहीं किया है तो स्टेट बैंक पर लिखे गए चैक द्वारा संदत्त की जाएगी; और

() यदि उसने उक्त उपधारा के उपबंधों के अनुसार तत्स्थानी नए बैंक के शेयरों के लिए आवेदन किया है तो उसे आबंटित ऐसे शेयरों के मूल्य तक तत्स्थानी नए बैंक के शेयरों में और अतिशेष स्टेट बैंक पर लिखे गए चैक द्वारा संदत्त की जाएगी

(7) विद्यमान बैंक का कोई शेयरधारी जिसे इस धारा के अधीन प्रतिकर संदेय है, उपधारा (5) के अधीन ऐसे प्रतिकर की रकम के अंतिम अवधारण की तारीख से तीन मास के अवसान के पूर्व, या बढ़ाई गई ऐसी अवधि के अवसान से पूर्व जिसे स्टेट बैंक किसी विशिष्ट मामले में अनुज्ञात करना ठीक समझे, स्टेट बैंक को ऐसे प्रतिकर या उसके किसी भाग के बदले में तत्स्थानी नए बैंक की पूंजी में शेयरों को उसे अंतरित करने के लिए आवेदन कर सकता है; और ऐसे अन्तरण के प्रयोजनों के लिए तत्स्थानी नए बैंक के प्रत्येक शेयर का मूल्य उतना होगा जो स्टेट बैंक द्वारा रिजर्व बैंक के अनुमोदन से इस निमित्त अवधारित किया जाए   

                (8) स्टेट बैंक उपधारा (7) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, तत्स्थानी नए बैंक को इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट प्ररूप एक अधिपत्र यह निदेश देते हुए जारी करेगा कि अधिपत्र में विनिर्दिष्ट व्यक्ति के पक्ष में इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन स्टेट बैंक को आबंटित की हुई उस बैंक की पूंजी में के शेयरों में से उतने शेयर अंतरित कर दिए जाएं जितने उस आवेदक को उपधारा (9) और उपधारा (10) के अनुसार आबंटित किए जाएं, तथा तत्स्थानी नया बैंक ऐसे अधिपत्र का अनुपालन करने के लिए आबद्धकर होगा  

                (9) विद्यमान बैंक के उस शेयरधारी को, जिसने तत्स्थानी नए बैंक की पूंजी के शेयरों के लिए आवेदन किया हो,-

() उतने शेयर आबंटित किए जाएंगे जिनका प्रत्यक्ष मूल्य तत्स्थानी नए बैंक की पुरोधृत पूंजी के पैंतालीस प्रतिशत से अनुपात में उतना है जितना कि विद्यमान बैंक को पूंजी में उसके उन शेयरों का समादत्त मूल्य, जिनकी बाबत उसे प्रतिकर संदत्त किया गया है, अनुपात में तत्स्थानी नए बैंक की कुल समादत्त पूंजी से है; और 

() यदि सब आवेदकों को उपखण्ड () के अधीन आबंटित शेयरों की कुल संख्या तत्स्थानी नए बैंक की पुरोधृत पूंजी के पैंतालीस प्रतिशत से कम है तो उतने अतिरिक्त शेयर आबंटित किए जाएंगे जितने स्टेट बैंक इस अधिनियम के उपबंधों, मामले की परिस्थितियों और इस बात की वांछनीयता को ध्यान में रखते हुए ठीक समझे कि शेयरों का वितरण यथासम्भव अधिक से अधिक शेयरधारियों के बीच हो जिससे कि शेयरों का व्यापक वितरण सुनिश्चित हो सके

                स्पष्टीकरण-इस उपधारा के अधीन शेयरों की संख्या अवधारित करने के प्रयोजन के लिए शेयर का भाग गणना में नहीं लिया जाएगा  

(10) उपधारा (9) में किसी बात के होते हुए भी, उस उपधारा के अधीन शेयरों का आबंटन ऐसी रीति में नहीं किया जाएगा कि स्टेट बैंक के पास, किसी भी समय, तत्स्थानी नए बैंक की पुरोधृत पूंजी का पचपन प्रतिशत से कम रह जाए  

(11) स्टेट बैंक द्वारा उपधारा (2) के अधीन जारी किया गया अधिपत्र भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का 2) के अधीन शुल्क के दायित्वाधीन नहीं होगा  

(12) इस धारा की कोई बात किसी विद्यमान बैंक में किसी शेयरधारी के बीच और ऐसे शेयरधारी तथा अन्य व्यक्ति के बीच जिसका ऐसे शेयर में हित हो, अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी तथा ऐसा अन्य व्यक्ति ऐसे शेयर के धारक को दिए गए प्रतिकर में से, किन्तु स्टेट बैंक के विरुद्ध नहीं, अपना हित प्रवर्तित करने का हकदार होगा  

 [(13) इस धारा के प्रयोजनों के लिए

() तत्स्थानी नया बैंक" में पटियाला स्टेट बैंक नहीं आता और उससे जयपुर बैंक लिमिटेड के संबंध में धारा 3 के अधीन बीकानेर स्टेट बैंक के रूप में गठित संस्था अभिप्रेत है;

() विद्यमान बैंक" में जयपुर बैंक लिमिटेड आता है किन्तु पटियाला बैंक नहीं आता

14. स्टेट बैंक द्वारा पटियाला बैंक और हैदराबाद बैंक की बाबत संदेय, प्रतिकर-(1) पटियाला बैंक की बाबत पंजाब राज्य सरकार 2 और हैदराबाद बैंक की बाबत रिजर्व बैंक को इस अधिनियम के उपबन्धों या तृतीय अनुसूची के भाग 5 या भाग 7 में अन्तर्विष्ट संशोधनों के कारण स्टेट बैंक द्वारा उतना प्रतिकर दिया जाएगा जितना प्रथम अनुसूची में अन्तर्विष्ट सिद्धान्तों के अनुसार अवधारित किया जाए   

(2) प्रथम अनुसूची में दिए गए सिद्धान्तों के अनुसार दिए जाने वाले प्रतिकर की रकम प्रथमतः स्टेट बैंक द्वारा अवधारित की जाएगी तथा, यथास्थिति, पंजाब राज्य सरकार, 2 या रिजर्व बैंक को उसके द्वारा उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर की पूर्ण तुष्टि के तौर पर प्रस्तावित की जाएगी:

परन्तु पंजाब राज्य सरकार 2 को प्रस्तावित किए जाने वाले प्रतिकर की रकम अवधारित करने में स्टेट बैंक रिजर्व बैंक से परामर्श करेगा   

(3) यदि उपधारा (2) में वर्णित के अनुसार स्टेट बैंक द्वारा प्रस्तावित प्रतिकर की रकम पंजाब राज्य सरकार, 2 या रिजर्व बैंक को स्वीकार्य नहीं है तो संबंधित राज्य सरकार या रिजर्व बैंक उस तारीख से पूर्व, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित करे, केन्द्रीय सरकार से अनुरोध कर सकती है कि वह मामला अधिकरण को निर्दिष्ट कर दिया जाए तथा ऐसा अनुरोध प्राप्त होने पर केन्द्रीय सरकार तद्नुसार मामला निर्दिष्ट कर देगी  

(4) उपधारा (3) के अधीन अधिसूचित तारीख के पूर्व यदि पंजाब राज्य सरकार, 2 या रिजर्व बैंक ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है तो स्टेट बैंक द्वारा प्रस्तावित प्रतिकर की रकम, और जहां अधिकरण का मामला निर्दिष्ट किया गया है वहां उसके द्वारा अवधारित रकम, उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर होगा और वह अंतिम होगी तथा सभी संबंधित पक्षकारों पर आबद्धकर होगी

(5) प्रतिकर की रकम रिजर्व बैंक पर लिखे गए चैक द्वारा संदत्त की जाएगी

15. अधिकरण का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक अधिकरण का गठन कर सकेगी जिसमें एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य होंगे  

(2) अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होगा जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है, या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा है तथा दो अन्य सदस्यों में से एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसे केन्द्रीय सरकार की राय में वाणिज्यिक बैंककारी का अनुभव प्राप्त है तथा दूसरा ऐसा व्यक्ति होगा जो चार्टर्ड अकाउण्टेंट अधिनियम, 1949 (1949 का 38) के अर्थ में चार्टर्ड अकाउन्टेट है  

(3) यदि किसी कारणवश अधिकरण के अध्यक्ष का या किसी अन्य सदस्य का पद रिक्त हो जाता है, तो केन्द्रीय सरकार उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करके उस रिक्ति को भरेगी तथा इस प्रकार पुनर्गठित अधिकरण के समक्ष कोई भी कार्यवाही उसी प्रक्रम से आगे चलाई जा सकेगी जिस प्रक्रम पर वह रिक्ति हुई थी

(4) अधिकरण, इस अधिनियम के अधीन संदेय कोई प्रतिकर अवधारित करने के प्रयोजन के लिए, एक या अधिक व्यक्तियों को, जिन्हें किसी सुसंगत बात का विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो, ऐसे प्रतिकर का आवधारण करने में उसे सहायता देने के लिए चुन सकता है

16. अधिकरण को सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्राप्त होना-(1) अधिकरण को निम्नलिखित विषयों की बाबत वे शक्तियां प्राप्त होंगी जो वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन प्राप्त हैं, अर्थात्: -

() किसी व्यक्ति को समन करना और उसकी हाजिरी कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना

() दस्तावेजों का प्रकटीकरण और उनकी पेशी अपेक्षित करना;  

() शपथपत्रों पर साक्ष्य लेना; और

() साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना  

(2) उपधारा (1) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी अधिकरण रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक या किसी समनुषंगी बैंक को इस बात के लिए विवश करेगा कि वह

() ऐसी किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को पेश करे जिनकी बाबत रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक या समनुषंगी बैंक का दावा है कि वे गोपनीय स्वरूप की हैं

() किन्हीं ऐसी बहियों या दस्तोवजों को अधिकरण के समक्ष कार्यवाहियों के अभिलेख का भाग बनाए; अथवा 

() अधिकरण के समक्ष किसी पक्षकार को या किसी अन्य व्यक्ति को किन्हीं ऐसी बहियों या दस्तावेजों का निरीक्षण करने दे

17. अधिकरण की प्रक्रिया-(1) अधिकरण को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति होगी

(2) अधिकरण पूरी जांच या का कोई भाग बन्द कमरे में कर सकेगा  

(3) अधिकरण के किसी आदेश में कोई लिपिकीय या गणित संबंधी गलती या किसी आकस्मिक भूल या लोप से उसमें पैदा हुई कोई गलती अधिकरण द्वारा स्वप्ररेणा से या पक्षकारों में से किसी के आवेदन पर किसी भी समय ठीक की जा सकती है  

अध्याय 4

समनुषंगी बैंकों के शेयर

18. शेयरों की अंतरणीयता-(1) उपधारा (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, समनुषंगी बैंक के शेयर निर्बाध रूप से अन्तरणीय होंगे

(2) समनुषंगी बैंक में के जिन शेयरों को स्टेट बैंक धारण किए हुए है यदि उनमें से किन्हीं शेयरों के अन्तरण के परिणामस्वरूप उन शेयरों की संख्या, जिन्हें वह धारण किए हुए हैं, समनुषंगी बैंक की [साधारण शेयरों वाली पुरोधृत पूंजी का इक्यावन प्रतिशत] से कम हो जाती है तो स्टेट बैंक अपने द्वारा धारित ऐसे किन्हीं शेयरों का अंतरण करने के लिए हकदार उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात से नहीं हो जाएगा

 [18. रजिस्ट्रीकृत शेयरधारकों का नामनिर्देशित करने का अधिकार-(1) किसी समनुषंगी बैंक का रजिस्ट्रीकृत शेयरधारक प्रत्येक व्यक्ति, किसी भी समय, किसी विहित रीति में ऐसे व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट कर सकेगा, जिसे उसकी मृत्यु की दशा में शेयरों में के उसके सभी अधिकार निहित होंगे

(2) जहां शेयर एक से अधिक व्यक्तियों के नाम में संयुक्त रूप से रजिस्ट्रीकृत हों, वहां संयुक्त धारक, विहित रीति में, एक साथ ऐसे व्यक्ति को नामनिर्देशित कर सकेंगे, जिसे सभी संयुक्त धारकों की मृत्यु की दशा में शेयरों में के उनके सभी अधिकार निहित होंगे

(3) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या ऐसे शेयरों की बाबत किसी व्ययन में, चाहे वसीयती हो या अन्यथा, किसी बात के होते हुए भी, जहां विहित रीति में किया गया नामनिर्देशन शेयरों को निहित करने का अधिकार किसी व्यक्ति को प्रदत्त करने के लिए तात्पर्यित है, वहां नामनिर्देशिती, यथास्थिति, शेयरधारक की मृत्यु पर या सभी संयुक्त धारकों की मृत्यु पर, जब तक कि नामनिर्देशन में विहित रीति में परिवर्तन या उसका निरसन कर दिया गया हो, सभी अन्य व्यक्तियों को छोड़ते हुए ऐसे शेयरों के संबंध में, यथास्थिति, धारक या सभी संयुक्त धारकों के सभी अधिकारों के लिए हकदार होगा  

(4) जहां कोई नामनिर्देशिती अवयस्क है, वहां शेयरधारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह नामनिर्देशिती की अवयस्कता के दौरान, अपनी मृत्यु होने की दशा में शेयरों का हकदार होने के लिए किसी व्यक्ति को, विहित रीति में, नियुक्त करने के लिए नामनिर्देशन करे ]

2[19. मताधिकार पर निर्बंधन-स्टेट बैंक से भिन्न, कोई शेयरधारक, संबद्ध समनुषंगी बैंक की पुरोधृत पूंजी के दस प्रतिशत के आधिक्य में उसके द्वारा धारित किन्हीं शेयरों के संबंध में मताधिकार का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा:

 परन्तु समनुषंगी बैंक में कोई अधिमानी शेयरपूंजी धारण करने वाले शेयरधारक को, केवल ऐसी पूंजी के संबंध में, ऐसे समनुषंगी बैंक के समक्ष रखे गए संकल्पों के संबंध में ही मत देने का अधिकार होगा, जो उसके अधिमानी शेयरों से संबंधित अधिकारों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं:

परन्तु यह और कि कोई अधिमानी शेयरधारक, केवल अधिमानी शेयरपूंजी धारण करने वाले सभी शेयरधारकों के कुल मताधिकारों के दस प्रतिशत से आधिक्य में उसके द्वारा धारित अधिमानी शेयरों के संबंध में मताधिकार का प्रयोग करने का हकदार नहीं होगा ]

20. शेयर अनुमोदित प्रतिभूतियां होंगे-इस धारा में इसके पश्चात् उल्लिखित अधिनियमों में किसी बात के होते हुए भी, समनुषंगी बैंक के शेयर भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 20 में प्रगणित प्रतिभूतियों में सम्मिलित समझे जाएंगे और बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित प्रतिभूतियां भी समझे जाएंगे  

21. शेयरधारियों का रजिस्टर- [(1)] प्रत्येक समनुषंगी बैंक एक या अधिक बहियों के रूप में शेयरधारियों का एक रजिस्टर अपने प्रधान कार्यालय में रखेगा और उसमें जहां तक उपलभ्य हो निम्नलिखित विशिष्टियां प्रविष्ट करेगा-

(i) शेयरधारियों के नाम, पते और उपजीविकाएं, यदि कुछ हों, प्रत्येक शेयरधारी द्वारा धृत शेयरों का विवरण जिसमें प्रत्येक शेयर को उसके द्योतक संख्यांक द्वारा सुभिन्नतः बताया गया हो

(ii) वह तारीख जिसको प्रत्येक व्यक्ति शेयरधारी के रूप में इस प्रकार प्रविष्ट किया जाता है

(iii) वह तारीख जिसमें कोई व्यक्ति शेयरधारी नहीं रह जाता है; और 

(iv) ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं

 [परंतु इस धारा की कोई बात किसी निक्षेपागार द्वारा धारित शेयरों को लागू नहीं होगी ]

 [(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी समनुषंगी बैंक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे रक्षोपायों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, कंप्यूटर फ्लापियों या डिस्केटों या अन्य इलेक्ट्रानिक रीति में शेयरधारकों का रजिस्टर रखे

(3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) में किसी बात के होते हुए भी, शेयरधारक रजिस्टर की एक प्रति या उसके उद्धरण, जो प्राधिकृत समनुषंगी बैंक के इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए गए हों, सभी विधिक कार्यवाहियों में साक्ष्य में ग्राह्य होंगे ]

 [21. फायदाग्राही स्वामियों का रजिस्टर-निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 11 के अधीन किसी निक्षेपागार द्वारा रखा गया फायदाग्राही स्वामियों का रजिस्टर इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शेयरधारियों का रजिस्टर समझा जाएगा ]

22. रजिस्टरों में न्यासों का प्रविष्ट नहीं किया जाना- [किसी न्यास की कोई अभिव्यक्त, विवक्षित या आन्वयिक सूचना] समनुषंगी बैंक के शेयरधारियों के रजिस्टर में प्रविष्ट नहीं की जाएंगी या उस बैंक द्वारा अपने शेयरों की बाबत ग्राह्य नहीं होंगी:

 [परंतु इस धारा की कोई बात, किसी निक्षेपागार द्वारा फायदाग्राही स्वामियों की ओर से रजिस्ट्रीकृत स्वामी के रूप में धारित अंशों (शेयरों) की बाबत लागू नहीं होगी  

स्पष्टीकरण-धारा 21, धारा 21 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, फायदाग्राही स्वामी", निक्षेपागार" और रजिस्ट्रीकृत स्वामी" पदों के क्रमशः वही अर्थ हैं जो निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (), खंड () और खंड () में हैं

अध्याय 5

समनुषंगी बैंकों का प्रबन्ध

23. कतिपय अधिकारियों द्वारा पद का रिक्त किया जाना-नियत दिन से ठीक पूर्व, किसी विद्यमान बैंक (पटियाला बैंक से भिन्न,  [और हैदराबाद बैंक] में, यथास्थिति, प्रबन्ध बोर्ड के अध्यक्ष, निदेशक, सदस्य जिसके अन्तर्गत स्थानीय या सलाहकार समिति का सदस्य भी है), प्रबन्ध निदेशक, महाप्रबन्धक, प्रबंधक, (किसी शाखा के प्रबन्धक से भिन्न), उपप्रबन्ध निदेशक, उपमहाप्रबन्धक, सहायक महाप्रबन्धक या सलाहकार के रूप में पदासीन प्रत्येक व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने नियत दिन को वह पद रिक्त कर दिया है, और इस अधिनियम में अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी करार या संविदा दे, किसी बात के होते हुए भी ऐसा व्यक्ति पद हानि के लिए अथवा उसके नियोजन से संबंधित किसी करार या संविदा के असामयिक पर्यवसान के लिए ऐसी पेंशन, ऐसे प्रतिकर या ऐसी अन्य प्रसुविधा के सिवाय किसी भी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा, जिसे, यथास्थिति, तत्स्थानी नया बैंक, [या हैदराबाद बैंक] स्टेट बैंक के अनुमोदन से, उसे इस बात का ध्यान रखते हुए प्रदान करे कि यदि यह अधिनियम पारित किया गया होता और यदि उसका नियोजन सामान्य अनुक्रम में नियत दिन को समाप्त हो गया होता तो उसे क्या मिलता :

                परन्तु इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसने उक्त बैंकों से किसी में से अपना पद इस प्रकार रिक्त कर दिया हो, किसी समनुषंगी बैंक में किसी पद पर इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार पुनःनामनिर्देशित या पुनर्नियुक्त किए जाने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी

24. प्रबन्ध-(1) स्टेट बैंक, समनुषंगी बैंक को उसके किन्हीं कार्यकलापों और कारबार की बाबत समय-समय पर निदेश और अनुदेश दे सकता है तथा समनुषंगी बैंक इस प्रकार दिए गए निदेशों और अनुदेशों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा  

(2) ऐसे किन्हीं निदेशों और अनुदेशों के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक के कार्यकलापों और कारबार का साधारण अधीक्षण और प्रबन्ध, नियत दिन से एक निदेशक बोर्ड में निहित होगा जो [प्रबन्ध निदेशक] की सहायता से उन सब शक्तियों का प्रयोग तथा वे सब कार्य और बातें कर सकेगा जिनका उस बैंक द्वारा प्रयोग किया जा सकता है या जिन्हें वह बैंक कर सकता है  

(3) समनुषंगी बैंक का निदेशक बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में, लोकहित का ध्यान रखते हुए, कारबार के सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करेगा  

25. निदेशक बोर्ड का गठन-(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड में निम्नलिखित होंगे, अर्थात्: -

 [() भारतीय स्टेट बैंक का तत्समय अध्यक्ष, पदेन या उसके द्वारा [रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] अध्यक्ष के रूप में नामनिर्देशित स्टेट बैंक का या समनुषंगी बैंक का कोई पदधारी;]

 [(कक) धारा 29 की उपधारा (1) या धारा 32 के अधीन नियुक्त प्रबन्ध निदेशक;]

3[() एक ऐसा निदेशक, जिसके पास वाणिज्यिक बैंकों के विनियमन या पर्यवेक्षण से संबंधित मामलों में आवश्यक विशेषज्ञता और अनुभव हो, जिसे 4[रिजर्व बैंक की सिफारिश पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित] किया जाएगा;] 

() पांच से अनधिक निदेशक जो स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे, जिनमें से तीन से अनधिक उस बैंक के अधिकारी होंगे

 [परन्तु स्टेट बैंक द्वारा इस खंड के अधीन किया गया किसी निदेशक का कोई नामनिर्देशन, सिवाय उसके जहां यह उस बैंक के किसी अधिकारी से संबंधित है, केंद्रीय सरकार के परामर्श से होगा;] 

 5[(गक) एक निदेशक, जो समनुषंगी बैंक के उन कर्मचारियों में से जो कर्मकार हैं इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में उपबन्धित रीति से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा

(गख) एक निदेशक, जो समनुषंगी बैंक के उन कर्मचारियों में से जो कर्मकार नहीं हैं, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में उपबन्धित रीति से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;]   

 [() तीन से अनधिक निदेशक निम्नलिखित रीति से निर्वाचित किए जाएंगे, अर्थात्: -

(i) यदि किसी समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों (स्टेट बैंक से भिन्न) की धृति की कुल रकम, कुल पुरोधृत पूंजी के एक प्रतिशत से अधिक है और ऐसी पूंजी के सोलह प्रतिशत के बराबर या उससे कम है तो एक निदेशक ऐसे शेयरधारकों द्वारा विहित रीति में निर्वाचित किया जाएगा और दो निदेशक स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे; या 

(ii) यदि किसी समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों (स्टेट बैंक से भिन्न) की धृति की कुल रकम, कुल पुरोधृत पूंजी के सोलह प्रतिशत से अधिक है और ऐसी पूंजी के बत्तीस प्रतिशत के बराबर या उससे कम है तो दो निदेशक ऐसे शेयरधारकों द्वारा विहित रीति में निर्वाचित किए जाएंगे और एक निदेशक स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा; या 

 

(iii) यदि किसी समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों (स्टेट बैंक से भिन्न) की धृति की कुल रकम, कुल पुरोधृत पूंजी के बत्तीस प्रतिशत से अधिक है तो सभी तीनों निदेशक ऐसे शेयरधारकों द्वारा विहित रीति में निर्वाचित किए जाएंगे:

परंतु यदि किसी समनुषंगी बैंक (स्टेट बैंक से भिन्न) के शेयरधारकों की धृति की कुल रकम कुल पुरोधृत पूंजी से अधिक नहीं है तो सभी तीनों निदेशक स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे, और ऐसे निदेशक इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए इस खंड के अधीन निर्वाचित किए गए निदेशक समझे जाएंगे   

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे शेयरधारकों की (स्टेट बैंक से भिन्न), जिनके नाम निदेशकों के निर्वाचन के लिए नियत की गई तारीख के तीन मास पूर्व समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों के रजिस्टर पर हैं, धृति की कुल रकम गणना में ली जाएगी;]

() एक निदेशक, यदि कोई हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा  

                (2) उपधारा (1) के खण्ड () में किसी बात के होते हुए भी, निदेशक बोर्ड के प्रथम गठन पर, उक्त खण्ड में निर्दिष्ट निदेशक स्टेट बैंक द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और इस प्रकार नियुक्त निदेशक इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, उक्त खण्ड के अर्थ में निर्वाचित समझे जाएंगे  

                                                                                                                                                                                   

(4) 2 स्टेट बैंक का कोई अधिकारी उसके पद के आधार पर समनुषंगी बैंक का निदेशक नामनिर्देशित किया जा सकता है  

(5) उपधारा (2) के अधीन नामनिर्देशित निदेशक नियत दिन के पश्चात् एक वर्ष की समाप्ति पर निवृत्त हो जाएंगे  

(6) स्टेट बैंक द्वारा निदेशक के रूप में इस अधिनियम के अधीन नामनिर्देशन या नियुक्ति, सिवाय वहां के जहां वह उसके किसी अधिकारी के सम्बन्ध में है, [केन्द्रीय सरकार से परामर्श करके] किया जाएगा या की जाएगी  

 [25. किसी निर्वाचित निदेशक की ठीक और उचित प्रास्थिति-(1) धारा 25 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले निदेशकों के पास-

() निम्नलिखित एक या अधिक विषयों की बाबत विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होगा, अर्थात्: -

(i) कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

(ii) बैंककारी

(iii) सहकारिता

(iv) अर्थशास्त्र,

(v) वित्त,

(vi) विधि

(vii) लघु उद्योग

(viii) कोई अन्य ऐसा विषय, जिसका विशेष ज्ञान और जिसमें व्यावहारिक अनुभव रिजर्व बैंक की राय में समनुषंगी बैंक के लिए उपयोगी होंगे

() जमाकर्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करेंगे; या

() किसानों, कर्मकारों और शिल्पियों के हितों का प्रतिनिधित्व करेंगे  

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, धारा 25 की उपधारा (1) के खंड () के निदेशक के रूप में निर्वाचित किए जाने के लिए तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह ट्रेक रिकार्ड, सत्यनिष्ठा और ऐसे अन्य मापदंड के, जो इस संबंध में रिजर्व बैंक, समय-समय पर, अधिसूचित करे, ठीक और उचित प्रास्थिति वाला व्यक्ति हो  

(3) रिजर्व बैंक, उपधारा (2) के अधीन जारी अधिसूचना में, ठीक और उचित प्रास्थिति का अवधारण करने वाला प्राधिकारी, ऐसे अवधारण की रीति, ऐसे अवधारण के लिए अनुपालन की जाने वाली प्रक्रिया और ऐसे अन्य विषयों को, जो आवश्यक और उससे आनुषंगिक समझे जाएं, भी विनिर्दिष्ट कर सकेगा  

(4) जहां रिजर्व बैंक की यह राय है कि धारा 25 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन निर्वाचित समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक, उपधारा (1) और उपधारा (2) की अपेक्षाएं पूरी नहीं करता है, वहां वह ऐसे निदेशक और समनुषंगी बैंक को सुनवाई का अवसर दिए जाने के पश्चात्, आदेश द्वारा, उस निदेशक को हटा सकेगा और ऐसे हटाए जाने पर, निदेशक बोर्ड, उक्त धाराओं की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले व्यक्ति को, अगले वार्षिक साधारण अधिवेशन में समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों द्वारा किसी निदेशक के सम्यक् रूप से निर्वाचित किए जाने तक, इस प्रकार हटाए गए व्यक्ति के स्थान पर निदेशक के रूप में सहयोजित करेगा और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति समनुषंगी बैंक के शेयरधारकों द्वारा निदेशक के रूप में सम्यक् रूप से निर्वाचित किया गया समझा जाएगा  

25. रिजर्व बैंक की अतिरिक्त निदेशक नियुक्त करने की शक्ति-(1) यदि रिजर्व बैंक की यह राय है कि बैंककारी नीति के हित में या लोकहित में या समनुषंगी बैंक या उसके निक्षेपकर्ताओं के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह, समय-समय पर और लिखित आदेश द्वारा, ऐसी तारीख से, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, एक या अधिक व्यक्तियों को, समनुषंगी बैंक के अतिरिक्त निदेशकों के रूप में पद धारण करने के लिए नियुक्त कर सकेगा  

(2) इस धारा के अनुसरण में अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति

() रिजर्व बैंक के प्रसादपर्यन्त और उसके अधीन रहते हुए, तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए या ऐसी और अवधि के लिए पद धारण करेगा, जो एक बार में तीन वर्ष से अनधिक हो, जो रिजर्व बैंक विनिर्दिष्ट करे

() स्वयं निदेशक होने के कारण ही या अपने पद के कर्तव्यों के निष्पादन में या उसके संबंध में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के किए जाने या करने से रह गई किसी बात के कारण कोई बाध्यता या उत्तरदायित्व उपगत नहीं करेगा;

() उससे समनुषंगी बैंक में अर्हता शेयर धारण करना अपेक्षित नहीं होगा  

(3) समनुषंगी बैंक के निदेशकों की कुल संख्या के किसी अनुपात की संगणना करने के प्रयोजन के लिए इस धारा के अधीन नियुक्त किसी अतिरिक्त निदेशक को हिसाब में नहीं लिया जाएगा ]

26. निदेशकों की पदावधि-(1) समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक [यदि वह धारा 25 की उपधारा (1) के खंड () या खंड () या खंड () के अधीन नामनिर्देशित किया गया है या यदि वह उस उपधारा के खंड (गक) या खंड (गख) के अधीन नियुक्तट किया गया है तो उसे [नामनिर्देशित करने वाले या नियुक्ति करने वाले] प्राधिकारी के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा

 [(2) धारा 25 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस धारा की उपधारा (1) के खंड () के अधीन निर्वाचित निदेशक तीन वर्ष तक पद धारण करेगा और वह पुनः निर्वाचन के लिए पात्र होगा:

परंतु कोई ऐसा निदेशक छह वर्ष से अधिक की अवधि तक निरंतर पद धारण नहीं करेगा  

(2) धारा 25 में और उपधारा (1) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, खंड () के अधीन नामनिर्देशित निदेशक, जो स्टेट बैंक का अधिकारी नहीं है, या खंड (गक) या खंड (गख) के अधीन नियुक्त कोई निदेशक या धारा 25 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन नामनिर्देशित कोई ऐसा निदेशक, जो केन्द्रीय सरकार का अधिकारी नहीं है, ऐसी अवधि तक जो तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे पद धारण करेगा और वह, यथास्थिति, पुनर्नामनिर्देशित या पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा :

परन्तु कोई ऐसा निदेशक छह वर्ष से अधिक की अवधि तक निरंतर पद धारण नहीं करेगा ]   

                                                                                                                                                                                   

27. निदेशक पद के लिए निरर्हता-(1) यदि कोई व्यक्ति

() किसी बैंककारी कम्पनी के, या ऐसी बैंककारी कम्पनी के जिसे बनाने के लिए विवरण पत्रिका जारी की गई हो, निदेशक, अनन्तिम निदेशक, संप्रवर्तक, अभिकर्ता या प्रबन्धक का पद धारण करता है; अथवा 

() सरकार का वैतनिक अधिकारी है; अथवा 

() सरकार या स्थानीय प्राधिकारी या निगम की या ऐसी कम्पनी की, जिसमें इक्यावन प्रतिशत से अन्यून समादत्त शेयर पूंजी सरकार द्वारा धारित है, सेवा से हटाया गया या पदच्युत कर दिया गया है, अथवा 

 

() समनुषंगी बैंक के अधीन, [प्रबंध निदेशक के पद से भिन्नट कोई लाभ का पद धारण करता है; अथवा 

1[(घक) धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त निदेशक की दशा में, -

(i) समनुषंगी बैंक में सेवा नहीं कर रहा है या कम से कम पांच वर्षों की निरंतर अवधि तक उसमें सेवा नहीं करता रहा है; और 

(ii) ऐसी आयु का है कि इस बात की संभावना है कि वह निदेशक के रूप में अपनी पदावधि के दौरान अधिवर्षिता की आयु प्राप्त कर लेगा; अथवा

() दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है या किसी समय रहा है या उसने अपने ऋणों का संदाय करना निलंबित कर दिया है या अपने लेनदारों के साथ ऋणों का प्रशमन कर लिया है; अथवा

() विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है; अथवा 

() किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष है, या सिद्धदोष हो चुका है, जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्वलित है; अथवा 

() निर्वाचित निदेशक की दशा में, समनुषंगी बैंक में कम से कम एक हजार रुपए के अभिहित मूल्य के विल्लंगम-मुक्त शेयरों के धारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं है,

तो वह समनुषंगी बैंक का निदेशक होने के लिए निरर्हित होगा:

                परन्तु खण्ड () में वर्णित निरर्हता केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारों को लागू नहीं होगी जो निदेशक के रूप में धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित किया गया है

 [परन्तु यह और कि धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त निदेशक की दशा में खण्ड () में वर्णित निरर्हता प्रवृत्त नहीं होगी:

परन्तु यह और भी किट निदेशक बोर्ड के प्रथम गठन पर निर्वाचित समझे गए निदेशक की दशा में, खण्ड () में वर्णित निरर्हता उसके ऐसा निदेशक होने से छह मास की अवधि तक प्रवृत्त नहीं होगी  

(2) कोई दो व्यक्ति जो एक ही फर्म के भागीदार हैं या एक ही प्राइवेट कम्पनी के निदेशक हैं या जिनमें से एक दूसरे का अभिकर्ता है या किसी ऐसी फर्म से, जिसका दूसरा व्यक्ति भागीदार है, मुख्तारनामा धारण करता है, एक ही समय पर समनुषंगी बैंक के निदेशक नहीं हो सकेंगे  

(3) किसी ऐसे व्यक्ति का, जो संसद् या राज्य विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य है, निदेशक के रूप में नामनिर्देशन या निर्वाचन तब तक शून्य होगा जब तक कि ऐेसे निदेशक के रूप में नामनिर्देशन या निर्वाचन होने की तारीख से दो मास के भीतर वह संसद् या राज्य विधान-मंडल का सदस्य नहीं रह जाता है, और यदि कोई निदेशक संसद् या किसी राज्य विधान-मंडल के सदस्य के रूप में निर्वाचित या नामनिर्देशित हो जाता है तो वह, यथास्थिति, ऐसे निर्वाचन या नामनिर्देशन की तारीख से निदेशक नहीं रह जाएगा

(4) उपधारा (1) के खण्ड () में की कोई बात किसी व्यक्ति को केवल इस कारण से समनुषंगी बैंक का निदेशक होने से प्रभावित करने वाली नहीं समझी जाएगी कि वह उस बैंक का विधिक या तकनीकी सलाहकार है  

(5) इस धारा में, -

() बैंककारी कम्पनी" का वही अर्थ है जो [ बैंककारी विनियमन, 1949] (1949 का 10) में है

() प्रबंधक" से बैंककारी कंपनी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी अभिप्रेत है भले ही वह किसी नाम से ज्ञात क्यों हो

() प्राइवेट कम्पनी" का वही अर्थ है जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में है

28. निदेशक के पद का रिक्त हो जाना-यदि समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक-

() धारा 27 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी से ग्रस्त है, या ग्रस्त हो जाता है; अथवा

() स्वलिखित सूचना द्वारा, जो नामनिर्देशित निदेशक की दशा में स्टेट बैंक और निर्वाचित निदेशक की दशा में समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड को दी जाएगी, अपना पद त्याग देता है, और पद त्याग मंजूर कर लिया जाता है; अथवा 

() निदेशक बोर्ड की इजाजत के बिना उसके तीन से अधिक अधिवेशनों से लगातार अनुपस्थित रहता है,

तो निदेशक बोर्ड में उसका स्थान रिक्त हो जाएगा:

                परन्तु खण्ड () या खण्ड () की कोई बात धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () में निर्दिष्ट निदेशक को या उस उपधारा के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित निदेशक को, जो स्टेट बैंक का अधिकारी है, या खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित निदेशक को, जो केन्द्रीय सरकार का अधिकारी है, लागू नहीं होगी  

29. प्रबंध निदेशक-(1) स्टेट बैंक, समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड से परामर्श के पश्चात् [और रिजर्व बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] समनुषंगी बैंक के लिए एक [प्रबंध निदेशक] नियुक्त करेगा

परन्तु 2[प्रबन्धक निदेशक] की प्रथम नियुक्ति की दशा में समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड से ऐसा परामर्श आवश्यक नहीं होगा

(2) निदेशक बोर्ड के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक के कार्यकलापों का दिनानुदिन प्रशासन और प्रबन्ध, प्रबन्ध निदेशक में निहित होगा तथा 2[प्रबन्ध निदेशक] ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो निदेशक बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं   

(3) समनुषंगी बैंक का 2[प्रबन्ध निदेशक]-

() अपना पूरा समय उस बैंक के कार्यकलापों में लगाएगा:

परन्तु समनुषंगी बैंक का 2[प्रबन्ध निदेशक] 1[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] किसी अन्य संस्था का निदेशक हो सकता है

() चार वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए पदधारण करेगा जो स्टेट बैंक 1[रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से], उसकी नियुक्ति के समय विनिर्दिष्ट करे;

() ऐसा वेतन और भत्ते प्राप्त करेगा जो स्टेट बैंक द्वारा 1[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] अवधारित किए जाएं  

(4) अपना पद रिक्त करने वाला 2[प्रबन्ध निदेशक] पुनर्नियुक्ति का पात्र होगा  

(5) स्टेट बैंक, 1[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से], समनुषंगी बैंक के 2[प्रबन्ध निदेशक] को किसी पर्याप्त कारण से, उसके पद से हटा सकता है:

परन्तु ऐसा कोई 2[प्रबन्ध निदेशक] तब तक अपने पद से नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे इस प्रकार हटाए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर नहीं दिया गया हो  

30. निदेशकों का पारिश्रमिक-समनुषंगी बैंक के निदेशक को निदेशक बोर्ड के या उसकी किन्हीं समितियों के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए और समनुषंगी बैंक का कोई अन्य काम करने के लिए ऐसी फीसें और भत्ते दिए जाएंगे जो विहित किए जाएं:

परन्तु स्टेट बैंक के अध्यक्ष [या समनुषंगी बैंक के प्रबन्ध निदेशक] या किसी अन्य निदेशक को, जो केन्द्रीय सरकार का या रिजर्व बैंक या स्टेट बैंक का पूर्णकालिक अधिकारी है, कोई फीस संदेय नहीं होगी  

31. निदेशक पद से हटाया जाना-(1) स्टेट बैंक, [रिजर्व बैंक से परामर्श करके केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से], किसी पर्याप्त कारण से, ऐसे निदेशक को जो धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित है और जो स्टेट बैंक का अधिकारी नहीं है, निदेशक के पद से हटा सकता है  

(2) केन्द्रीय सरकार, स्टेट बैंक के परामर्श से, किसी पर्याप्त कारण से, ऐसे निदेशक को जो धारा 25 की उपधारा (1) के [खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त किया गया है या खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित है] और जो केन्द्रीय सरकार का अधिकारी नहीं है, निदेशक के पद से हटा सकती है  

(3) धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन निर्वाचित कोई निदेशक-

() स्टेट बैंक द्वारा, 4[रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] उसके पद से हटाया जा सकता है यदि हटाए जाने के समय सम्बन्धित समनुषंगी बैंक की बहियों में स्टेट बैंक से भिन्न कोई शेयरधारी रजिस्ट्रीकृत नहीं है

() ऐसे सब शेयरधारियों द्वारा धृत शेयर पूंजी के कुल मिलाकर कम से कम आधी के बराबर पूंजी धारण करने वाले शेयरधारियों के बहुसंख्यक मत से पारित संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है:

                परन्तु यदि समनुषंगी बैंक की बहियों में रजिस्ट्रीकृत स्टेट बैंक से भिन्न सब शेयरधारियों की धृत पूंजी की कुल रकम, संकल्प की तारीख को कुल पुरोधृत पूंजी के पांच प्रतिशत से कम है तो संकल्प तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक स्टेट बैंक द्वारा उसे पुष्ट नहीं कर दिया जाता  

(4) कोई निदेशक उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन तब तक पद से नहीं हटाया जाएगा जब तक उसे इस प्रकार हटाए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर नहीं दे दिया जाता  

32. प्रबन्ध निदेशक की अनुपस्थिति के दौरान उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए अन्य व्यक्ति की नियुक्ति-यदि समनुषंगी बैंक का  [प्रबन्ध निदेशक] दौर्बल्य के कारण या अन्यथा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के अयोग्य हो गया है या छुट्टी के कारण अथवा ऐसी परिस्थितियों में, जिनमें उसका पद रिक्त नहीं हो जाता, अन्यथा अनुपस्थित है तो स्टेट बैंक किसी अन्य व्यक्ति को प्रबन्ध निदेशक के पद पर स्थानापन्न रूप में उस तारीख तक के लिए नियुक्त कर सकता है जिस तक 1[प्रबन्ध निदेशक] कार्य पर वापस नहीं जाता

33. निदेशकों की आकस्मिक रिक्तियां-(1) जहां कोई रिक्ति [धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त प्रबन्ध निदेशक या निदेशक से भिन्न] समनुषंगी बैंक के निदेशक की पदावधि के अवसान के पूर्व होती है वहां वह रिक्ति-

() धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित निदेशक की दशा में, जो स्टेट बैंक का अधिकारी नहीं है, स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशन करके भरी जाएगी;

() धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन निर्वाचित निदेशक की दशा में, निर्वाचन करके भरी जाएंगी या जहां उस खण्ड का परन्तुक लागू होता हो वहां स्टेट बैंक द्वारा नामनिर्देशन करके भरी जाएगी:

परन्तु जहां निर्वाचित निदेशक के पद में रिक्ति की अवधि छह मास से कम होनी संभाव्य है वहा वह रिक्ति शेष निदेशकों द्वारा उन शेयरधारियों में से, जो धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन निदेशक निर्वाचित करने के हकदार हैं, उस व्यक्ति को सहयोजित करके भरी जा सकती है जो धारा 27 के अधीन निरर्हित नहीं है

() धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित निदेशक की दशा में, जो केन्द्रीय सरकार का अधिकारी नहीं है, उस सरकार द्वारा, स्टेट बैंक के परामर्श से, नामनिर्देशन करके भरी जाएगी

(2) [उपधारा (1) के अधीन] यथास्थिति, नामनिर्देशित या निर्वाचित या सहयोजित व्यक्ति अपने पूर्ववर्ती की पदावधि की अनवसित अवधिपर्यन्त पद धारण करेगा  

2[(3) जहां कोई रिक्ति धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त निदेशक की पदावधि के अवसान के पूर्व होती है वहां वह रिक्ति, यथास्थिति, उक्त खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अनुसार भरी जाएगी तथा इस प्रकार नियुक्त निदेशक धारा 26 की उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि तक पद धारण करेगा ]  

34. निदेशक बोर्ड के अधिवेशन- [(1) समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड का अधिवेशन, ऐसे समय और स्थान पर होगा, और वह अपने अधिवेशनों में कामकाज के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा, जो विहित किए जाएं; और निदेशक बोर्ड के अधिवेशन, वीडियो-कान्फ्रेंसिंग या ऐसे अन्य इलेक्ट्रानिक साधनों के, जो विहित किए जाएं, माध्यम से, बोर्ड के निदेशकों की सहभागिता द्वारा आयोजित किए जा सकेंगे, जो निदेशकों की सहभागिता को रिकार्ड और स्वीकार करने में सक्षम हों और ऐसे अधिवेशनों की कार्यवाहियां अभिलिखित और भंडारित किए जाने के योग्य हों :

परन्तु केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन शक्तियों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनका वीडियो-कान्फ्रेंसिंग या ऐसे अन्य इलेक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से किए गए निदेशक बोर्ड के अधिवेशन में प्रयोग नहीं किया जाएगा ]

 (2) 2[किसी समनुषंगी बैंक निदेशक बोर्ड का अध्यक्षट समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन का सभापतित्व करेगा और, उसकी अनुपस्थिति में, निदेशकों में से कोई एक निदेशक जो साधारणतया या किसी विशिष्ट अधिवेशन की बाबत अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, सभापतित्व करेगा; तथा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में और ऐसे प्राधिकार के अभाव में, अधिवेशन में उपस्थित समनुषंगी बैंक के निदेशक अधिवेशन का सभापतित्व करने के लिए अपने बीच में से किसी एक को निर्वाचित करेंगे  

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए अधिवेशन से अनुपस्थिति" से किसी ऐसे अधिवेशन या अधिवेशन के किसी भाग से, जिसके दौरान किसी कारबार का संव्यवहार होता है, किसी भी कारणवश गैरहाजिरी अभिप्रेत है  

 [(3) समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के अधिवेशन में सभी प्रश्न, अधिवेशन में उपस्थित या वीडियो-कान्फ्रेंसिंग या ऐसे अन्य इलेक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से निदेशकों के बहुमत द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे तथा मतों के बराबर होने की दशा में, समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थित में अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का दूसरा या निर्णायक मत होगा ]

(4) जहां धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () और () में विनिर्दिष्ट निदेशकों में से कोई या उस उपधारा के खण्ड () में विनिर्दिष्ट निदेशकों में से कोई, जो स्टेट बैंक का अधिकारी है, समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित रहने में असमर्थ है, और स्टेट बैंक या अधिवेशन में उपस्थित किसी अन्य निदेशक का यह विचार है कि किसी ऐसे निदेशक की अनुपस्थिति के कारण ऐसे अधिवेशन में स्टेट बैंक का यथेष्ट रूप से या प्रभावशील रूप से प्रतिनिधित्व नहीं होगा तो स्टेट बैंक या उपस्थित निदेशक उस समनुषंगी बैंक को लिखित में यह सूचना दे सकता है कि-

(i) अधिवेशन ऐसी तारीख के लिए स्थगित किया जाना चाहिए, जो सूचना में उपदर्शित की गई हो; अथवा 

(ii) कोई ऐसा विषय, कार्रवाई, उपाय या कार्यवाही, जिस पर उस अधिवेशन में विचार करना या जिसे करना या कार्यान्वित करना प्रस्थापित है, उस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए या वह नहीं की जानी चाहिए; अथवा 

(iii) किसी ऐसे विषय, कार्रवाई, उपाय या कार्यवाही पर उस अधिवेशन में कोई विनिश्चय नहीं किया जाना चाहिए,

और वह समनुषंगी बैंक तथा निदेशक बोर्ड ऐसी सूचना का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होंगे और तद्नुसार कार्य करेंगे  

(5) समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक, जो समनुषंगी बैंकों द्वारा या उनकी ओर से की गई या किए जाने के लिए प्रस्थापित किसी संविदा, ठहराव या प्रस्थापना से या दिए गए या दिए जाने के लिए प्रस्थापित उधार से, प्रत्येक रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, सम्बन्धित है या उसमें हितबद्ध है, तो वह अपने हित की प्रकृति को शीघ्रतम सम्भव अवसर पर बैंक के निदेशक बोर्ड के समक्ष प्रकट करेगा; और जब किसी संविदा, उधार, ठहराव या प्रस्थापना पर विचार-विमर्श किया जाए तब ऐसा निदेशक, निदेशक बोर्ड के अधिवेशन में तब तक उपस्थित नहीं होगा जब तक कि उसकी अनुपस्थिति की अपेक्षा अन्य निदेशकों द्वारा कोई जानकारी अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए नहीं की जाती और जब किसी ऐसे निदेशक से उपस्थित रहने की ऐसी अपेक्षा की जाए तब वह किसी ऐसी संविदा, उधार, ठहराव या प्रस्थापना पर मत नहीं देगा :

 [परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे निदेशक को केवल इस कारण लागू नहीं होगी कि वह, -

(i)  (निदेशक से भिन्न) ऐसा शेयरधारी है, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथापरिभाषित किसी भी लोक कम्पनी में अथवा भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित ऐसे किसी निगम में अथवा ऐसी किसी सहकारी सोसाइटी में, जिससे समनुषंगी बैंक कोई संविदा, ठहराव या प्रस्थापना कर चुका है या करने की प्रस्थापना करता है अथवा जिसे समनुषंगी बैंक उधार दे चुका है या उधार देने की प्रस्थापना करता हो, उसकी समादत्त पूंजी को दो प्रतिशत से अनधिक पूंजी धारण किए हुए है; अथवा 

(ii) स्टेट बैंक का या किसी अन्य समनुषंगी बैंक का, धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () या खण्ड () के अधीन, निदेशक होने के कारण या उस उपधारा के 1[खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित स्टेट बैंक] का अधिकारी होने के कारण, निदेशक है;] [अथवा]

 [(iii) वहां, जहां वह धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 32 के अधीन नियुक्त प्रबन्ध निदेशक हो, स्टेट बैंक या किसी अन्य संस्था का अधिकारी या अन्य कर्मचारी है

(vi) वहां, जहां वह धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन नियुक्त निदेशक हो, समनुषंगी बैंक का अधिकारी या अन्य कर्मचारी है ]

(6) समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन के कार्यवृत्त की एक प्रति, सब सम्बन्धित कागजपत्रों की प्रतियों के साथ, यथासम्भव शीघ्र स्टेट बैंक को भेजी जाएगी  

35. कार्यपालिका समिति और अन्य समितियां-(1) समनुषंगी बैंक की बाबत एक कार्यपालिका समिति होगी, जिसमें उतने निदेशक होंगे, जितने विहित किए जाएं:

परन्तु यदि कोई ऐसा निदेशक, जो स्टेट बैंक का अधिकारी है और उस बैंक द्वारा धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन नामनिर्देशित किया गया है, कार्यपालिका समिति की बाबत अपने कृत्यों का प्रयोग और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में किसी कारणवश असमर्थ है तो, जब कभी ऐसा निदेशक अपने कृत्यों का प्रयोग करने या अपने कर्तव्यों का पालन करने में समर्थ हो, तब स्टेट बैंक अपने अधिकारियों में से किसी को कार्यपालिका समिति की बाबत ऐसे निदेशक के सब कृत्यों का पालन और सब कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रतिनियुक्त कर सकता है और इस प्रकार प्रतिनियुक्त कर सकता है ; और इस प्रकार प्रतिनियुक्त अधिकारी, जहां तक कि यह अधिनियम कार्यपालिका समिति को लागू है, इस अधिनियम के सब प्रयोजनों के लिए, समनुषंगी बैंक का निदेशक समझा जाएगा

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए, कार्यपालिका समिति कोई भी कार्य कर सकती है जिसके करने के लिए निदेशक बोर्ड सक्षम है

(3) समनुषंगी बैंक की कार्यपालिका समिति के प्रत्येक अधिवेशन के कार्यवृत्त की एक प्रति स्टेट बैंक को भेजी जाएगी और अधिवेशन के पश्चात् यथासम्भव शीघ्र समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के समक्ष रखी जाएगी  

(4) कार्यपालिका समिति की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक का निदेशक बोर्ड चाहे पूर्णतया निदेशकों को या पूर्णतया अन्य व्यक्तियों को अथवा भागतः निदेशकों को और भागतः अन्य व्यक्तियों को, मिलाकर ऐसी और उतनी अन्य समितियां गठित कर सकता है जैसी और जितनी वह ठीक समझता है; ये समितियां ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए होंगी, जो उन्हें, ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जैसी निदेशक बोर्ड, अधिरोपित करे, निदेशक बोर्ड द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं

 [35. कतिपय मामलों में निदेशक बोर्ड का अधिक्रमण-(1)  [जहां केन्द्रीय सरकार का, रिजर्व बैंक की सिफारिश पर और स्टेट बैंक से परामर्श करके] यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में या किसी समनुषंगी बैंक के कार्यों का संचालन ऐसी रीति में, जो निक्षेपकर्ताओं या समनुषंगी बैंक के हित के लिए हानिकारक है, किए जाने से रोकने के लिए या किसी नए बैंक के उचित प्रबंध को सुनिश्चित करने के लिए  ऐसा करना आवश्यक है वहां 2[केन्द्रीय सरकार] ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, आदेश द्वारा, ऐसे समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड को, छह मास से अनधिक की ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, अधिक्रांत कर सकेगा

परन्तु यह कि निदेशक बोर्ड के अधिक्रमण की अवधि, समय-समय पर, बढ़ाई जा सकेगी, किन्तु फिर भी कुल अवधि बारह मास से अधिक नहीं होगी  

(2) 2[केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके] उपधारा (1) के अधीन समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के अधिक्रमण पर, ऐसी अवधि के लिए, जो वह अवधारित करे, एक ऐसे प्रशासक की, जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार का अधिकारी हो, नियुक्ति कर सकेगी, जिसके पास विधि, बैंककारी, अर्थशास्त्र या लेखाकर्म में अनुभव हो  

(3) 2[केन्द्रीय सरकार] प्रशासक को ऐसे निदेश जारी कर सकेगा, जो वह समुचित समझे और प्रशासक ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा  

(4) समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के अधिक्रमण का आदेश करने पर, इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी

() अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और अन्य निदेशक, अधिक्रमण की तारीख से उस रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे

() ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन ऐसे समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से या समनुषंगी बैंक के साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा प्रयोग या निर्वहन किया जा सकेगा, ऐसे समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड का पुनर्गठन किए जाने तक, उपधारा (2) के अधीन 2[केन्द्रीय सरकार] द्वारा नियुक्त प्रशासक द्वारा प्रयोग और निर्वहन किया जाएगा:

                परंतु प्रशासक द्वारा प्रयोग की गई शक्ति, इस बात के होते हुए भी विधिमान्य होगी कि ऐसी शक्ति समनुषंगी बैंक के साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा प्रयोक्तव्य है

(5) 2[केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके] प्रशासक की, उसके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए, तीन या अधिक ऐसे व्यक्तियों की समिति का गठन कर सकेगा, जिनके पास विधि, वित्त, बैंककारी, अर्थशास्त्र या लेखाकर्म में अनुभव हो  

(6) उपधारा (5) में निर्दिष्ट समिति ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगी और प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी, जो 2[केन्द्रीय सरकार] द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं

(7) प्रशासक और 2[केन्द्रीय सरकार] द्वारा उपधारा (5) के अधीन गठित समिति के सदस्यों के वेतन और भत्ते ऐसे होंगे, जो 2[केन्द्रीय सरकार] द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और वे संबंधित समनुषंगी बैंक द्वारा संदेय होंगे  

(8) उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए आदेश में यथा विनिर्दिष्ट निदेशक बोर्ड के अधिक्रमण की अवधि की समाप्ति से पूर्व दो मास के अवसान पर और उसके पूर्व समनुषंगी बैंक का प्रशासक नए निदेशकों का निर्वाचन करने और उसके निदेशक बोर्ड का पुनर्गठन करने के लिए समनुषंगी बैंक का साधारण अधिवेशन बुलाएगा  

(9) किसी अन्य विधि में या किसी संविदा, ज्ञापन या संगम-अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति अपने पद की हानि या पर्यवसान के लिए किसी प्रतिकर का दावा करने का हकदार नहीं होगा  

(10) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त प्रशासक, समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के पुनर्गठित किए जाने के पश्चात् तुरन्त अपना पद रिक्त कर देगा ]

अध्याय 6

समनुषंगी बैंकों का कारबार

36. समनुषंगी बैंक, स्टेट बैंक के अभिकर्ता के रूप में कार्य करेगा-(1) समनुषंगी बैंक, स्टेट बैंक द्वारा ऐसी अपेक्षा किए जाने पर, भारत में किसी भी स्थान पर-

() भारत की किसी सरकार की ओर से धन, सोना-चांदी और प्रतिभूतियां देने, प्राप्त करने, संगृहीत और संप्रेषित करने के लिए; और

() कोई अन्य कारबार, जो रिजर्व बैंक समय-समय पर सौंपे, लेने और संव्यवहृत करने के लिए,

स्टेट बैंक के अभिकर्ता के रूप में कार्य करेगा  

(2) वे निबन्धन और शर्तें, जिन पर ऐसा कोई अभिकरण कारबार स्टेट बैंक की ओर से समनुषंगी बैंक द्वारा किया जाएगा, ऐसी होंगी जैसी स्टेट बैंक द्वारा, समनुषंगी बैंक से परामर्श करने के पश्चात् और रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, अवधारित की जाएं

                                                                                                                                                                                   

 [36. समनुषंगी बैंक, रिजर्व बैंक के अभिकर्ता के रूप में कार्य करेगा-(1) समनुषंगी बैंक, रिजर्व बैंक द्वारा ऐसी अपेक्षा किए जाने पर, भारत में ऐसे सभी स्थानों पर, जहां उसकी कोई शाखा है

() भारत में कोई किसी सरकार की ओर से धन, सोना-चांदी और प्रतिभूतियां देने, प्राप्त करने, संगृहीत करने और संप्रेषित करने के लिए; और 

() कोई अन्य कारबार, जो रिजर्व बैंक समय-समय पर उसे सौंपे, लेने और संव्यवहृत करने के लिए,

रिजर्व बैंक के अभिकर्ता के रूप में कार्य करेगा  

(2) वे निबंधन और शर्तें, जिन पर ऐसा कोई अभिकरण कारबार रिजर्व बैंक की ओर से समनुषंगी बैंक द्वारा किया जाएगा, ऐसी होंगी, जो करार पाई जाएं

(3) यदि उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी विषय पर करार नहीं हो पाता है या यदि समनुषंगी बैंक और रिजर्व बैंक के बीच, उनके बीच हुए किसी करार के निर्वचन के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो वह विषय केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा  

(4) समनुषंगी बैंक, ऐसे किसी कारबार का संव्यवहार या ऐसे कृत्यों का, जो उसे उपधारा (1) के अधीन सौंपे जाएंगे, पालन स्वयं या रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी अभिकर्ता के माध्यम से कर सकेगा  

37. अन्य कारबार, जिसे समनुषंगी बैंक कर सकेगा- [(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खण्ड () में परिभाषित बैंककारी का कारबार कर सकेगा, और उस अधिनियम की धारा 6 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अन्य प्रकार के कारबारों में से एक या अधिक में लग सकेगा

(2) केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक से परामर्श करने के पश्चात् लिखित आदेश द्वारा-

() समनुषंगी बैंक को अन्य प्रकार का ऐसा कारबार करने के लिए, जिसे केन्द्रीय सरकार आवश्यक या समीचीन समझती है, प्राधिकृत कर सकती है

() यह निदेश दे सकती है कि ऐसे प्रकार का कारबार, जैसा आदेश में उल्लिखित हो, ऐसे निबन्धनों, शर्तों और संरक्षणों के अधीन रहते हुए किया जाएगा, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं; अथवा 

() समनुषंगी बैंक को कोई ऐसे प्रकार का कारबार करने का संव्यवहृत करने से प्रतिषिद्ध कर सकती है, जिसे करना समुनषंगी बैंक के लिए विधिपूर्ण है, यदि यह खण्ड उसका प्रतिषेध नहीं करता  

(3) उपधारा (2) में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, समनुषंगी बैंक उपधारा (1) में निर्दिष्ट से भिन्न किसी प्रकार के कारबार में नहीं लगेगा  

38. अन्य बैंकों के कारबार का अर्जन-(1) समनुषंगी बैंक किसी बैंककारी संस्था के कारबार का उसकी आस्तियों और दायित्वों सहित अर्जन करने के लिए स्टेट बैंक के अनुमोदन से बातचीत कर सकेगा तथा यदि रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक से परामर्श करके, वैसा निदेश दे, तो ऐसी बातचीत करेगा

(2) ऐसे अर्जन से सम्बन्धित निबन्धन और शर्तें, यदि वे सम्बन्धित समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड तथा सम्बन्धित बैंककारी संस्था के निदेशकगण या प्रबन्ध मण्डल के बीच करार पाई गई हैं और रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित हैं तो, केन्द्रीय सरकार के समक्ष उसकी मंजूरी के लिए रखी जाएंगी तथा उक्त सरकार लिखित आदेश द्वारा (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् मंजूरी का आदेश कहा गया है) उन्हें मंजूर कर सकती है  

(3) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या सम्बन्धित बैंककारी संस्था के गठन को विनियमित करने वाली किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार द्वारा मंजूर किए गए निबन्धन और शर्तें उस सरकार द्वारा मंजूरी के आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट तारीख को प्रभावशील होंगी, और समनुषंगी बैंक पर और सम्बन्धित बैंककारी संस्था पर तथा बैंककारी संस्था के शेयरधारियों (अथवा, यथास्थिति, स्वत्वधारियों) पर तथा लेनदारों पर आबद्धकर होंगे   

(4) यदि वे निबन्धन और शर्तें मंजूरी के आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख को किसी कारणवश प्रभावशील नहीं हो सकते, तो केन्द्रीय सरकार उस प्रयोजन के लिए कोई अन्य समुचित तारीख नियत कर सकती है

(5) उस तारीख को, जिसको पूर्वोक्त निबन्धन और शर्तें प्रभावशील होते हैं, सम्बन्धित बैंककारी संस्था का वह कारबार और वे आस्तियां और दायित्व, जो अर्जन के अन्तर्गत सम्मिलित हैं, मंजूरी के आदेश के आधार पर उस आदेश में उपबन्धित के अनुसार सम्बन्धित समनुषंगी बैंक को अन्तरित हो जाएंगे और समनुषंगी बैंक का कारबार तथा आस्तियां और दायित्व हो जाएंगे  

(6) किसी बैंककारी संस्था के कारबार तथा उसकी आस्तियों और दायित्वों का इस धारा के अधीन अर्जन करने के लिए प्रतिफल, यदि ऐसा करार पाया जाए तो, या तो नगदी में या सम्बन्धित समनुषंगी बैंक की पूंजी में शेयरों के आबंटन द्वारा अथवा भागतः नगदी में और भागतः शेयरों के आबंटन द्वारा संदत्त किया जा सकता है तथा समनुषंगी बैंक, ऐसे किसी आबंटन के प्रयोजन के लिए, इस अधिनियम के उन अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, जो पूंजी में वृद्धि करने से सम्बन्धित हैं, समनुषंगी बैंक की पूंजी में वृद्धि इतने शेयरों के पुरोधरण द्वारा कर सकेगा, जितने समनुषंगी बैंक द्वारा अवधारित किए जाएं  

(7) इस धारा के अधीन अर्जित किया गया कोई कारबार, समनुषंगी बैंक द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार किन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा रिजर्व बैंक के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त दी गई छूटों या किए गए उपान्तरों के अधीन रहते हुए, चलाया जाएगा:

परन्तु ऐसी कोई छूट ऐसे नहीं दी जाएगी या ऐसा कोई उपान्तरण ऐसे नहीं किया जाएगा कि वह अर्जन की तारीख से सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए प्रभावशील रहे

(8) किसी बैंककारी संस्था के कारबार तथा आस्तियों और दायित्वों का, इस धारा के अधीन, अर्जन किए जाने पर उस बैंककारी संस्था का कोई भी अधिकारी या अन्य कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी करार में, किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे प्रतिकर का हकदार होगा, जिसका हकदार वह उस अधिनियम या उस अन्य विधि या उस करार के अधीन हो, तथा ऐसे प्रतिकर की बाबत कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा, यदि वह अधिकारी या कर्मचारी किसी समनुषंगी बैंक द्वारा प्रस्थापित निबन्धनों और शर्तों पर, उस बैंक के नियोजन के किसी प्रस्ताव को लिखित में स्वीकार कर लेता है और उसे ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अनुसार नियोजित कर लिया गया है  

(9) यदि केन्द्रीय सरकार, ऐसी किसी बैंककारी संस्था की दशा में जिसके सम्बन्ध में मंजूरी का आदेश इस धारा के अधीन कर दिया गया है, यह बात आवश्यक या समीचीन समझती है, तो उस बैंककारी संस्था के कारबार तथा आस्तियों और दायित्वों के अर्जन से सम्बन्धित निबन्धनों और शर्तों के प्रभावशील होने के पूर्व या पश्चात् किसी समुचित व्यक्ति को इसलिए नियुक्त कर सकेगी कि वह उस बैंककारी संस्था का प्रबन्ध, उसके कार्यकलाप का परिसमापन करने और उसकी आस्तियों का वितरण करने के प्रयोजन से, अपने हाथ में ले ले तथा ऐसे प्रबन्ध के सम्बन्ध में किया गया व्यय (जिसके अन्तर्गत उस व्यक्ति को, जो ऐसे नियुक्त किया गया है तथा उसके कर्मचारिवृन्द का, यदि कोई हो, पारिश्रमिक आता है), उस बैंककारी संस्था की आस्तियों में से अथवा समनुषंगी बैंक द्वारा, जैसा भी केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, दिया जाएगा  

(10) किसी बैंककारी संस्था का प्रबन्ध हाथ में लेने के लिए उपधारा (9) के अधीन समुचित व्यक्ति की नियुक्ति के साथ या उसके ठीक पश्चात् केन्द्रीय सरकार ऐसे निदेश दे सकेगी, जिनका उस व्यक्ति द्वारा अनुसरण पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए उस बैंककारी संस्था के प्रबन्ध में किया जाना है और वैसा होने पर

() कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के या [बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10)] के या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के अथवा उस अधिनियम या विधि के आधार पर प्रभावशील होने वाली किसी लिखत के उपबंध उस बैंककारी संस्था को, या उसके संबंध में, वहां तक लागू रह जाएंगे जहां तक कि वे ऐसे निदेशकों से असंगत हैं;

() ऐसे निदेशों के जारी किए जाने के ठीक पूर्व प्रबन्ध के भारसाधक सब व्यक्तियों की बाबत, जिसके अन्तर्गत ऐसा कोई व्यक्ति है, जो ऐसे निदेशों के जारी किए जाने के ठीक पूर्व बैंककारी संस्था के प्रबन्धक या निदेशक के रूप में पद धारण किए हुए हैं, यह समझा जाएगा कि उन्होंने उस रूप में अपने पद रिक्त कर दिए हैं; तथा 

() वह व्यक्ति, जो बैंककारी संस्था का प्रबन्ध अपने हाथ में लेने के लिए नियुक्त किया गया है, उन निदेशों के अनुसार ऐसे सब कदम उठाएगा, जैसे उस संस्था के कार्यकलाप का परिसमापन करने और उसकी आस्तियों का वितरण सुकर बनाने के लिए आवश्यक हो  

(11) केन्द्रीय सरकार का जब यह समाधान हो जाए कि ऐसी किसी बैंककारी संस्था के कार्यकलाप का परिसमापन करने के लिए और कुछ करना शेष नहीं रहा है तब वह, लिखित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि ऐसी तारीख से, जैसी उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, वह बैंककारी संस्था विघटित हो गई है और वैसा होने पर ऐसा निदेश किसी अन्य विधि में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी प्रभावशील होगा  

(12) इस धारा के अधीन कोई कार्रवाई मात्र इस आधार पर प्रश्नगत की जाएगी कि उस बैंककारी संस्था के गठन में, जिसके संबंध में ऐसी कार्रवाई की गई है अथवा उसके निदेशक बोर्ड के गठन में, कोई त्रुटि है अथवा उन व्यक्तियों की नियुक्ति में, जिन्हें उसके कार्यकलाप का प्रबन्ध सौंपा गया है, कोई त्रुटि है  

(13) इस धारा के उपबन्ध एक समनुषंगी बैंक द्वारा किसी अन्य समनुषंगी बैंक की आस्तियों और दायित्वों सहित उसके कारबार का अर्जन करने के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे कि वे एक समनुषंगी बैंक द्वारा किसी अन्य बैंककारी संस्था की आस्तियों और दायित्वों सहित उसके कारबार का अर्जन करने के संबंध में लागू होते हैं  

(14) इस धारा में बैंककारी संस्था" के अन्तर्गत ऐसा कोई व्यष्टि या व्यष्टियों का संगम (चाहे वह निगमित हो या नहीं, अथवा वह सरकारी विभाग हो या पृथक् संस्था हो) आता है, जो बैंककारी का कारबार कर रहा है  

 [38. निदेशकों की नियुक्ति के संबंध में समनुषंगी बैंकों के साथ किए गए ठहराव का अभिभावी होना-(1) जहां किसी कंपनी के साथ समनुषंगी बैंक द्वारा किए गए किसी ठहराव में समनुषंगी बैंक द्वारा ऐसी कंपनी के एक या अधिक निदेशकों की नियुक्ति के लिए उपबंध है, वहां ऐसा उपबंध और उसके अनुसरण में की गई निदेशकों की कोई नियुक्ति कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या कंपनी से संबंधित संगम-ज्ञापन, संगम-अनुच्छेद या किसी अन्य लिखत में, किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, विधिमान्य और प्रभावी होगी और शेयर अर्हता, आयु-सीमा, निदेशकों की संख्या, निदेशकों के पद से हटाए जाने और पूर्वोक्त किसी विधि या लिखत में अन्तर्विष्ट वैसी ही शर्तों के संबंध में कोई उपबंध, पूर्वोक्त ठहराव के अनुसरण में समनुषंगी बैंक द्वारा नियुक्त किसी निदेशक को लागू नहीं होगा  

(2) पूर्वोक्त रूप से नियुक्त कोई निदेशक

() समनुषंगी बैंक के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और उसे समनुषंगी बैंक के लिखित आदेश द्वारा हटाया जा सकेगा या उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को रखा जा सकेगा

() निदेशक होने के कारण ही अथवा ऐसी बात के लिए, जिसे निदेशक के रूप में अपने कर्तव्यों के निर्वहन में सद्भावपूर्वक किया गया है या करने का लोप किया गया है अथवा उससे संबंधित किसी बात के लिए कोई बाध्यता या दायित्व उपगत नहीं करेगा

() चक्रानुक्रम से निवृत्ति के लिए दायी नहीं होगा और उसे ऐसी निवृत्ति के लिए दायी निदेशकों की संख्या की संगणना करने के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा ]

अध्याय 7

लेखा और संपरीक्षा

39. वार्षिक लेखाओं का बंद किया जाना-समनुषंगी बैंक अपनी बहियों को, [प्रत्येक वर्ष इकतीस [मार्च] या ऐसी अन्य तारीख को, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करेट बन्द और सन्तुलित कराएगा:  

 [परंतु केन्द्रीय सरकार, इस धारा के अधीन एक लेखा अवधि से दूसरी लेखा अवधि को संक्रमण को सुकर बनाने की दृष्टि से राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो वह संबंधित वर्षों की बाबत बहियों को बंद और संतुलित करने के लिए, या उससे संबंधित अन्य विषयों के लिए, आवश्यक या समीचीन समझती है ]

40. लाभों का व्ययन-(1) डूबन्त और शंकापूर्ण ऋणों, आस्तियों में अवक्षयण, लाभांशों में समीकरण, कर्मचारिवृन्द और अधिवार्षिकी निधियों में अभिदाय के लिए तथा सब अन्य विषयों के लिए उपबन्ध, जो इस अधिनियम के अधीन या उसके द्वारा आवश्यक है या जिनके लिए बैंककारी कम्पनियों द्वारा प्रायः उपबन्ध किया जाता है, उपबन्ध करने के पश्चात् समनुषंगी बैंक अपने शुद्ध लाभांश की घोषणा कर सकेगा  

(2) लाभांश की दर संबंधित समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड द्वारा अवधारित की जाएगी

(3) इस धारा की कोई बात अंतरिम लाभांशों के संदाय को, ऐसी रीति से और ऐसे विस्तार तक, जो विहित की या किया जाए, प्रवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी  

 [40. असंदत्त या अदावाकृत लाभांश का असंदत्त लाभांश लेखा में अंतरण-(1) जहां, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक विधियां) संशोधन अधिनियम, 2007 के प्रारंभ के पश्चात्, समनुषंगी बैंक द्वारा कोई लाभांश घोषित किया गया है, किन्तु घोषणा की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसे किसी शेयरधारी को, जो लाभांश के संदाय का हकदार है, उसका संदाय नहीं किया गया है या उसके द्वारा दावा नहीं किया गया है, वहां समनुषंगी बैंक तीस दिन की ऐसी अवधि की समाप्ति की तारीख से सात दिन के भीतर, ऐसे लाभांश की कुल रकम, जो उक्त तीस दिन की अवधि के भीतर असंदत्त या अदावाकृत रह जाती है, एक विशेष लेखा में, जो……………………...का (समनुषंगी बैंक का नाम) असंदत्त लाभांश लेखा" अंतरित करेगा

 स्पष्टीकरण-इस उपधारा में, लाभांश, जो असदंत्त" पद से ऐसा लाभांश अभिप्रेत है, जिसकी बाबत अधिपत्र भुनाया नहीं गया है या जिसका अन्यथा संदाय या दावा नहीं किया गया है

(2) जहां भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक विधियां) संशोधन अधिनियम, 2007 के प्रारंभ के पूर्व, समनुषंगी बैंक द्वारा घोषित कोई संपूर्ण लाभांश या उसका कोई भाग ऐसे प्रारंभ पर असंदत्त रहता है, वहां समनुषंगी बैंक, ऐसे प्रारंभ से छह मास की अवधि के भीतर, ऐसी असंदत्त रकम को उपधारा (1) में निर्दिष्ट लेखा में अंतरित कर देगा  

(3) इस धारा के अनुसरण में समनुषंगी बैंक के असंदत्त लाभांश लेखा में अंतरित कोई ऐसा धन, जो ऐसे अंरतण की तारीख से सात वर्ष की अवधि तक असंदत्त या अदावाकृत रहता है, समनुषंगी बैंक द्वारा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 205 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि में अंतरित कर दिया जाएगा  

(4) उपधारा (3) के अधीन विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि में अंतरित धन का, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 205 में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए और रीति से उपयोग किया जाएगा ]

41. संपरीक्षा-(1) धारा 42 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, समनुषंगी बैंक के लेखाओं की संपरीक्षा कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 226 की उपधारा (1) के अधीन कंपनियों के संपरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित ऐसे संपरीक्षक द्वारा की जाएगी, जो स्टेट बैंक द्वारा रिजर्व बैंक के अनुमोदन से नियुक्त किया जाएगा  

(2) संपरीक्षक को ऐसा पारिश्रमिक मिलेगा, जो स्टेट बैंक नियत करे

(3) समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक या अधिकारी ऐसे निदेशक या अधिकारी के रूप में पद पर बने रहने के दौरान उस बैंक का संपरीक्षक होने के लिए पात्र नहीं होगा

(4) प्रत्येक संपरीक्षक को वार्षिक तुलनपत्र तथा लाभ और हानि लेखा की एक प्रति, तथा समनुषंगी बैंक द्वारा रखी गई सब बहियों की एक सूची दी जाएगी और संपरीक्षक का कर्तव्य होगा कि वह तुलनपत्र तथा लाभ और हानि लेखा की उनसे सम्बद्ध लेखाओं और वाउचरों के साथ जांच करे, तथा अपने कर्तव्यों के पालन में संपरीक्षक

() की पहुंच समनुषंगी बैंक की बहियों, लेखाओं और दस्तावेजों तक सभी युक्तियुक्त समयों पर होगी

() ऐसे लेखाओं की जांच पड़ताल करने में अपनी सहायता के लिए समनुषंगी बैंक के व्यय पर लेखापालों या अन्य व्यक्तियों को नियोजित कर सकेगा; और 

() समनुषंगी बैंक के किसी निदेशक या किसी अधिकारी की परीक्षा ऐसे लेखाओं के सम्बन्ध में कर सकेगा  

(5) संपरीक्षक एक वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए पद धारण करेगा, जो स्टेट बैंक उसकी नियुक्ति के समय नियत करे; और यदि संपरीक्षक की पदावधि की समाप्ति के पूर्व कोई रिक्ति हो जाती है, तो ऐसी रिक्ति स्टेट बैंक द्वारा, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, भरी जा सकती है  

(6) संपरीक्षक पदमुक्त होने पर पुनर्नियुक्ति का पात्र होगा

(7) संपरीक्षक समनुषंगी बैंक के वार्षिक तुलनपत्र और लेखाओं के बारे में बैंक को रिपोर्ट भेजेगा, और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में वह-

() यह कथन करेगा कि उसकी राय में क्या तुलनपत्र पूरा और साफ तुलनपत्र है और उसमें वे सब आवश्यक विशिष्टियां दी हुई हैं और क्या वह ऐसे तैयार किया गया है कि उससे समनुषंगी बैंक के कारबार की  [सच्ची और यथार्थस्थिति] प्रदर्शित होती है, और उस दशा में, जहां उसने कोई स्पष्टीकरण या जानकारी मांगी है, यह कथन करेगा कि वह उसे दी गई या नहीं और क्या वह समाधानप्रद है;

() यह कथन करेगा कि समनुषंगी बैंक के जिन संव्यवहारों पर उसका ध्यान गया है, उनके लिए समनुषंगी बैंक सक्षम था या नहीं;

() यह कथन करेगा कि समनुषंगी बैंक के कार्यालयों और उसकी शाखाओं से प्राप्त विवरणियां उनकी समीक्षा के प्रयोजन के लिए पर्याप्त पाई गई हैं या नहीं;    

() यह कथन करेगा कि लाभ और हानि लेखा उस अवधि के लिए, जिसके लिए वह लेखा है, लाभ या हानि की सच्ची तुलना दर्शित करता है या नहीं; और 

() ऐसी किसी अन्य बात का कथन करेगा, जिसके बारे में वह यह समझता है कि उसे स्टेट बैंक के ध्यान में लाई जानी चाहिए  

 [स्पष्टीकरण 1-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, इस तथ्य मात्र के कारण कि, यथास्थिति, तुलनपत्र या लाभ और हानि लेखा कोई ऐसी बातें प्रकट नहीं करता है, जिनको प्रकट करने की अपेक्षा इस अधिनियम के सुसंगत उपबधों के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के उपबंधों द्वारा नहीं की गई है, -

() तुलनपत्र को समनुषंगी बैंक के कारबार की सच्ची और यथार्थस्थिति प्रकट करने वाला नहीं समझा जाएगा, और 

() लाभ और हानि लेखा को उस अवधि के लिए, जिसके लिए वह लेखा है, लाभ या हानि की सच्ची तुलना दर्शित करने वाला नहीं समझा जाएगा  

स्पष्टीकरण 2-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, समनुषंगी बैंक के लेखाओं की बाबत, मात्र इस आधार पर कि वे कुछ बातों को प्रकट नहीं करते हैं, यह नहीं समझा जाएगा कि वे समुचित रूप से तैयार नहीं किए गए हैं, यदि

(i) वे बातें ऐसी हैं, जिन्हें प्रकट करना समनुषंगी बैंक के लिए इस अधिनियम के सुसंगत उपबंधों के साथ पठित बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के किसी उपबंध के आधार पर, अपेक्षित नहीं है; और 

(ii) खण्ड (i) में निर्दिष्ट उपबन्ध समनुषंगी बैंक तुलनपत्र तथा लाभ और हानि लेखा में या संपरीक्षक की रिपोर्ट में विनिर्दिष्ट किए गए हैं  

(8) संपरीक्षक संपरीक्षा रिपोर्ट की एक प्रति समनुषंगी बैंक को और एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा  

(9) पूर्वगामी उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना केन्द्रीय सरकार, किसी भी समय, उतने संपरीक्षक नियुक्त कर सकती है, जितने वह समनुषंगी बैंक के लेखाओं की परीक्षा करने और उन पर रिपोर्ट देने के लिए ठीक समझती है, तथा इस प्रकार नियुक्त संपरीक्षकों को समनुषंगी बैंक लेखाओं की संपरीक्षा करने के संबंध में वे सब अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे, जो स्टेट बैंक द्वारा नियुक्त संपरीक्षक को इस धारा के अधीन प्राप्त हैं  

42. विद्यमान संपरीक्षकों की बाबत अस्थायी उपबन्ध-यदि, नियत दिन को, किसी विद्यमान बैंक  [या हैदराबाद बैंक] द्वारा, या उसके संबंध में की गई किसी संपरीक्षक की नियुक्ति अस्तित्वशील है, तो स्टेट बैंक उस दिन को या उसके पश्चात् इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार, किन्तु नियुक्ति के निबन्धनों और शर्तों में ऐसे उपान्तरणों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह आवश्यक समझे, उस नियुक्ति को या तो पुष्ट कर सकता है, या पर्यवसित कर सकता है, तथा यदि वह नियुक्ति को इस प्रकार पर्यवसित करता है तो वह उतना पारिश्रमिक नियत कर सकता है जितना संबंधित संपरीक्षक द्वारा पहले किए गए कार्य, निर्वहन किए गए कृत्यों और पालन किए गए कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए उसे युक्तियुक्त प्रतीत होता है   

43. समनुषंगी बैंक द्वारा दी जाने वाली विवरणियां-(1) समनुषंगी बैंक, स्टेट बैंक [और [रिजर्व बैंक और केंद्रीय सरकार] को, -

 

 

() [ [यथास्थिति, इकतीस [मार्च] या धारा 39 के अधीन अधिसूचित तारीख] से, जिस तारीख को उसकी बाहियां बन्द और संतुलित की जाती हैं, तीन मास के अन्दर] लाभ और हानि लेखा तथा संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ अपना तुलनपत्र और उस अवधि के दौरान जिसके लिए वह लेखा है, समनुषंगी बैंक के कार्यकरण [और क्रियाकलापोंट की बाबत निदेशक बोर्ड को रिपोर्ट देगा

() समनुषंगी बैंक के कार्यकलापों और कारबार से सम्बन्धित ऐसी अन्य जानकारी देगा जिसकी अपेक्षा स्टेट बैंक या रिजर्व बैंक द्वारा की जाए:   

  [परन्तु रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक से परामर्श करने के पश्चात् तीन मास की उक्त अवधि का विस्तार तीन मास से अनधिक ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए कर सकता है जो वह ठीक समझे ]

 3[(2) समनुषंगी बैंक के तुलनपत्र और लाभ और हानि लेखा पर समनुषंगी बैंक के कार्यालय में अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक के पद धारण करने वाले व्यक्तियों और अन्य निदेशकों की बहुसंख्या द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे ]

 [(3) केंद्रीय सरकार संपरीक्षकों की रिपोर्ट और समनुषंगी स्टेट बैंक के कार्यकरण और क्रियाकलापों की बाबत निदेशक बोर्ड की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, रखवाएगी ]

44. साधारण अधिवेशन-(1) समनुषंगी बैंक का एक साधारण अधिवेशन (जिसे इसमें इसके पश्चात् वार्षिक साधारण अधिवेशन कहा गया है) [प्रत्येक वर्ष] ऐसे स्थान पर किया जाएगा जहां समनुषंगी बैंक का प्रधान कार्यालय स्थित है, तथा कोई अन्य साधारण अधिवेशन निदेशक बोर्ड द्वारा किसी भी समय पर बुलाया जा सकता है:

परन्तु ऐसा वार्षिक साधारण अधिवेशन उस तारीख से, जिस तारीख को तुलनपत्र, लाभ और हानि लेखा तथा संपरीक्षक रिपोर्ट के साथ धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन [स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक या केंद्रीय सरकार को] भेजा जाता है, छह सप्ताह के अवसान के पूर्व, जो भी तारीख पूर्वतर हो, बुलाया जाएगा

(2) किसी वार्षिक साधारण अधिवेशन में उपस्थित शेयरधारी संबंधित बैंक के 2[यथास्थिति, पिछले इकतीस [मार्च] या धारा 39 के अधीन अधिसूचित तारीख] तक के लिए तैयार तुलनपत्र और लाभ और हानि लेखा पर, उस अवधि के लिए, जिसके लिए लेखे हैं, उस बैंक के कार्यकरण [और क्रियाकलापों] की बाबत निदेशक बोर्ड की रिपोर्ट पर तथा 9[तुलनपत्र और लेखाओं की बाबत संपरीक्षकों की रिपोर्ट पर चर्चा करने और उसे अंगीकार करने के हकदार होंगे ]

(3) वार्षिक अधिवेशन के संबंध में इस धारा की कोई बात समनुषंगी बैंक की बाबत लागू नहीं होगी यदि उस बैंक की पुरोधृत पूंजी में के 2[यथास्थिति, पिछले इकतीस 9[मार्च] या धारा 39 के अधीन अधिसूचित तारीख] को, यथास्थिति, सब शेयर स्टेट बैंक द्वारा धारित हैं   

अध्याय 8

प्रकीर्ण

45. कठिनाइयों के निवारण के लिए निदेश जारी करने की शक्ति-इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किसी विद्यमान बैंक के उपक्रम के पूर्ण तथा प्रभावी रूप से अन्तरण को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, या किसी ऐसी कठिनाई का निवारण करने के लिए जो केन्द्रीय सरकार की राय में ऐसे अंतरण से उत्पन्न हुई है या जो उसके संबंध में उत्पन्न हो सकती है, केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, किसी विद्यमान बैंक या स्टेट बैंक को ऐसे निदेश दे सकती है जो उसे आवश्यक प्रतीत हों और उक्त बैंक या स्टेट बैंक ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगा  

46. विद्यमान बैंकों के लिए संप्रेक्षक-(1) स्टेट बैंक, नियत दिन से पूर्व किसी भी समय, किसी विद्यमान बैंक 11 के संबंध में, -

() बैंक के निदेशक बोर्ड के या किसी समिति या अन्य निकाय के किसी अधिवेशन में कार्यवाहियों पर ध्यान रखने के लिए एक या अधिक व्यक्तियों को प्रतिनियुक्त कर सकता है, बैंक से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह इस प्रकार प्रतिनियुक्त व्यक्ति या व्यक्तियों को ऐसे अधिवेशन में सुनवाई का अवसर दे तथा यह अपेक्षा भी कर सकता है कि ऐसा व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति ऐसी कार्यवाहियों की रिपोर्ट स्टेट बैंक को भेजे या भेजें;

() बैंक के निदेशक बोर्ड से या किसी समिति या निकाय से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह, यथास्थिति, बोर्ड, समिति या अन्य निकाय के किसी अधिवेशन की सब सूचनाएं या उनसे संबंधित अन्य सूचनाएं स्टेट बैंक द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को, उसके प्रायिक पते पर लिखित में दे

() एक व्यक्ति या अधिक व्यक्तियों को उस रीति का संप्रेक्षण करने के लिए, जिसमें बैंक का या उसके कार्यालयों या शाखाओं का कार्यकलाप चलाया जा रहा है तथा उस पर रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त कर सकता है; तथा 

() बैंक से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह उतनी अवधि के भीतर जो स्टेट बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, बैंक के कारबार या कार्यकलापों से संबंधित कोई विवरण या जानकारी जिसमें बैंक के निदेशक बोर्ड की, या उसकी किसी समिति या अन्य निकाय की, कार्यवाहियों की प्रतियां भी आती हैं, स्टेट बैंक को दें

(2) बैंक के निदेशक बोर्ड के, या उसकी किसी समिति या अन्य निकाय के, किसी अधिवेशन की कार्यवाहियों पर ध्यान रखने के लिए, स्टेट बैंक द्वारा प्रतिनियुक्त किया गया व्यक्ति यदि बैंक को लिखित रूप में सूचना देता है कि वह यह समझता है कि बैंक द्वारा किए जाने के लिए प्रस्थापित या किया कोई कार्य, उपाय या कार्यवाही स्टेट बैंक के लिए या स्वयं उस बैंक के लिए अहितकर होगा या होगी तो ऐसा कार्य, उपाय या कार्यवाही बैंक द्वारा तब तक नहीं किया जाएगा या की जाएगी जब तक कि स्टेट बैंक ऐसे कार्य, उपाय या ऐसी कार्यवाही का लिखित में अनुमोदन नहीं कर देता  

                                                                                                                                                                                   

47. निरीक्षण-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों पर प्रतिकूल डाले बिना, स्टेट बैंक, किसी भी समय, किसी विद्यमान बैंक, नए बैंक, [या हैदराबाद बैंक] का निरीक्षण अपने एक या अधिक अधिकारियों से करा सकता है  

(2) ऐसे प्रत्येक व्यक्ति का, जो उस बैंक का, जिसका उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण किया गया है, निदेशक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी है, या किसी समय रहा है, यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी अभिरक्षा या शक्ति के अधीन सभी ऐसे अतिशेष, बहियां, लेखे, प्रतिभूतियां और अन्य दस्तावेज तथा बैंक के कार्यकलापों से संबंधित ऐसा कोई विवरण और जानकारी जिनका निरीक्षण कर रहे अधिकारी द्वारा उससे अपेक्षा की जाए, उतने समय के भीतर पेश करे, जो उक्त अधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए  

(3) यदि कोई व्यक्ति, -

() नियत समय के भीतर कोई अतिशेष, बहियां, लेखा, प्रतिभूति या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने में अथवा कोई ऐसा विवरण या जानकारी देने में असफल रहता है जिसे प्रस्तुत करना या देना उपधारा (2) के अधीन उसका कर्तव्य है, अथवा निरीक्षण करने वाले अधिकारी द्वारा निरीक्षणाधीन बैंक के कारबार के संबंध में पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने में असफल रहता है, अथवा 

() अपेक्षित या दिए गए किसी दस्तावेज या जानकारी में या उससे पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देते समय जानबूझकर ऐसा कोई कथन करता है जिसकी कोई तात्त्विक विशिष्टियां मिथ्या हैं और जिसकी बाबत वह जानता है कि वह मिथ्या है, अथवा कोई तात्त्विक विवरण देने में जानबूझकर लोप करता है,

तो, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा तथा जुर्माने का दायी भी होगा  

48. विकास कार्यक्रम के खर्चे-(1) समनुषंगी बैंक, स्टेट बैंक द्वारा प्रस्थापित कोई सहायकी

() उस समनुषंगी बैंक द्वारा स्टेट बैंक के अनुमोदन से अपने जिम्मे लिए गए किसी संपूर्ण विनिर्दिष्ट विकास कार्यक्रम के या उसके किसी भाग के खर्चों को वहन करने के लिए; और 

() ऐसी हानियों या व्ययों को वहन करने के लिए जो स्टेट बैंक द्वारा, रिजर्व बैंक की सहमति से, अनुमोदित किए जाएं,

स्वीकार कर सकता है  

(2) समनुषंगी बैंक द्वारा उपधारा (1) के अधीन प्राप्त की गई कोई सहायकी [आय-कर अधिनियम, 1961] (1961 का 43) के समनुषंगी बैंक की आय, लाभ या अभिलाभ नहीं मानी जाएगी      

49. विद्यमान अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों में से किसी में, या किसी अन्य विधि में या सेवा में संविदा या अन्य दस्तावेज में किसी बात के होते हुए भी, 10 फरवरी, 1958 के पश्चात् और नियत दिन से पूर्व किसी विद्यमान बैंक  द्वारा की गई कोई भी नियुक्ति या प्रोन्नति या दी गई कोई वेतन वृद्धि या भत्ता या कोई अन्य प्रसुविधा, जो सामान्यतः नहीं की गई होती या नहीं दी गई होती या जो उक्त बैंक के 10 फरवरी, 1958 से पूर्व प्रवृत्त नियमों या प्राधिकरणों या भविष्य निधि, पेंशन निधि या अन्य निधि के अधीन सामान्यतः अनुज्ञेय नहीं होती, जब तक स्टेट बैंक ने, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, साधारण या विशेष आदेश द्वारा उस नियुक्ति, प्रोन्नति या वेतनवृद्धि की पुष्टि कर दी हो या उस पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के दिए जाने का निदेश दे दिया हो, प्रभावी नहीं होगी और ही संबंधित समनुषंगी बैंक से अथवा किसी भविष्य निधि, पेंशन निधि या अन्य निधि से या ऐसी किसी निधि का प्रशासन करने वाले किसी प्राधिकारी से, संदेय या दावायोग्य होगी  

(2) जहां किसी विद्यमान बैंक 1 के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी ने उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी ऐसी नियुक्ति, प्रोन्नति, वेतनवृद्धि या पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के दिए जाने के कारण, जो स्टेट बैंक द्वारा उस उपधारा के अधीन पुष्ट या मंजूर नहीं की गई है, कोई रकम प्राप्त कर ली है, वहां ऐसा अधिकारी या कर्मचारी उस रकम को संबंधित समनुषंगी बैंक को वापिस करने के लिए आबद्ध होगा, और उस बैंक को ऐसे सभी उपाय करने का हक होगा जो उस रकम की वसूली के लिए आवश्यक हो  

(3) जहां किसी विद्यमान बैंक 1 के किसी प्रबन्ध-निदेशक, महाप्रबन्धक या प्रबन्धक, उप-प्रबन्ध निदेशक या उप-महाप्रबन्धक या अन्य कर्मचारी को 10 फरवरी, 1958 के पश्चात् और नियत दिन से पूर्व प्रतिकर या उपदान के रूप में कोई राशि दी गई है और यदि उस संदाय को स्टेट बैंक ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुष्ट नहीं किया है तो इस प्रकार दी गई राशि की वापसी का दावा करने का संबंधित समनुषंगी बैंक को हक होगा  

(4) इस धारा की कोई बात पटियाला बैंक के किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, या उसके संबंध में, लागू नहीं होगी जो धारा 11 के उपबंधों के अधीन पटियाला स्टेट बैंक का अधिकारी या अन्य कर्मचारी नहीं हो जाता

 50. समनुषंगी बैंक के कर्मचारिवृन्द-(1) समनुषंगी बैंक, ऐसी परिसीमाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, उतने अधिकारी, सलाहकार और कर्मचारी नियुक्त कर सकता है जितने वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक या वांछनीय समझे तथा, ऐसी नियुक्तियां ऐसे निबंधनों और शर्तों पर की जाएंगी जिन्हें वह बैंक ठीक समझे

 [(1) संबंधित समनुषंगी बैंक के अधिकारी, सलाहकार और कर्मचारी, व्यक्तिगत रूप से या संयुक्त रूप से या किसी समिति में अन्य अधिकारियों, सलाहकारों और कर्मचारियों के साथ, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे, जो निदेशक बोर्ड या उसकी कार्यपालिका समिति द्वारा उनको सौंपे जाएं या प्रत्यायोजित किए जाएं ]

(2) संदेहों के निराकरण के लिए यह घोषित किया जाता है कि समनुषंगी बैंक के अधिकारी, सलाहकार और कर्मचारी, चाहे वे किसी हैसियत में नियोजित किए गए हों, किसी भी प्रयोजन के लिए स्टेट बैंक के अधिकारी, सलाहकार या कर्मचारी तब तक नहीं समझे जाएंगे जब तक ऐसे अधिकारी, सलाहकार या कर्मचारी की सेवा संविदा या करार में अन्यथा उपबंधित नहीं किया गया हो

 [50. बोनस-(1) समनुषंगी बैंक का कोई अधिकारी, सलाहकार या [बोनस संदाय अधिनियम, 1965 (1965 का 21) की धारा 2 के खंड (13) के अर्थ में किसी कर्मचारी से भिन्न] अन्य कर्मचारी किसी बोनस के संदाय का हकदार नहीं होगा  

(2) समनुषंगी बैंक का कोई कर्मचारी, जो बोनस संदाय अधिनियम, 1965 (1965 का 21) की धारा 2 के खंड (13) के अर्थ में कोई कर्मचारी है किसी बोनस के संदाय का उस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ही हकदार होगा, अन्यथा नहीं  

(3) इस धारा के उपबंध, किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में या आद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अथवा किसी चलन, प्रथा या रूढ़ि में अथवा किसी संविदा, करार, समझौता, अधिनिर्णय या अन्य लिखत में किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ]

51. समनुषंगी बैंक द्वारा पेंशन और अधिवार्षिकी निधियों की स्थापना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, समनुषंगी बैंक अपने अधिकारियों या कर्मचारियों या ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों के आश्रितों के फायदे के लिए या समनुषंगी बैंक के प्रयोजनों के लिए अधिवार्षिकी निधि, पेंशन निधि, भविष्य निधि या अन्य निधियां स्थापित कर सकता है और उन्हें बनाए रख सकता है, तथा किसी ऐसी निधि में से संदेय अधिवार्षिकी भत्ते, वार्षिकियां और पेंशन मंजूर कर सकता है

52. विश्वसनीयता और गोपनीयता के बारे में बाध्यता-(1) किसी विधि द्वारा अन्यथा अपेक्षित के सिवाय, समनुषंगी बैंक बैंककारी के बीच रूढ़िगत प्रणालियों और प्रथाओं का पालन करेगा तथा विशेषतया वह अपने संघटकों या उनके कार्यों से संबंधित कोई जानकारी उन परिस्थितियों के सिवाय प्रकट नहीं करेगा जिनमें वैसी जानकारी विधि के अनुसार या बैंककारी के बीच रूढ़िगत प्रणालियों और प्रथा के अनुसार प्रकट करना उस बैंक के लिए आवश्यक या समुचित है

(2) समनुषंगी बैंक का प्रत्येक निदेशक, संपरीक्षक, सलाहकार, अधिकारी या अन्य कर्मचारी अपने कर्तव्य ग्रहण करने से पूर्व द्वितीय अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा करेगा:

परन्तु हैदराबाद का स्टेट बैंक अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन की गई कोई घोषणा इस उपधारा के अधीन हैदराबाद बैंक के प्रति की गई घोषणा समझी जाएगी

                 [(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 (2005 का 30) के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ]

53. निदेशकों की क्षतिपूर्ति-(1) समनुषंगी बैंक के प्रत्येक निदेशक की, उसके कर्तव्यों के निर्वहन में या संबंध में उसके द्वारा उपगत उन सभी हानियों और व्ययों की बाबत जो उसके जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम से हुई हो, समनुषंगी बैंक द्वारा क्षतिपूर्ति की जाएगी  

(2) समनुषंगी बैंक का कोई निदेशक बैंक को हुई किसी ऐसी हानि या किसी ऐसे व्यय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा जो उक्त बैंक की ओर से अर्जित की गई या ली गई किसी सम्पत्ति या प्रतिभूति के मूल्य की, या उस सम्पत्ति या प्रतिभूति में हक की किसी अपर्याप्तता या कमी के परिणामस्वरूप अथवा उस निदेशक के अपने पद के कर्तव्यों के निष्पादन में या उसके सम्बन्ध में उसके द्वारा जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम से भिन्न किसी बात के परिणामस्वरूप हो  

 [(3) जहां स्टेट बैंक अपने किसी अधिकारी को समनुषंगी बैंक का निदेशक नामनिर्देशित करता है वहां ऐसा निदेशक अपने निदेशक होने के कारण ही अथवा ऐसी बात के लिए जिसे निदेशक के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन में सद्भावपूर्वक किया गया है या करने का लोप किया गया है अथवा उससे संबंधित किसी बात के लिए कोई बाध्यता या दायित्व उपगत नहीं करेगा ]

54. नियुक्ति या गठन में त्रुटियों के कारण कार्यों या कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-(1) समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही बोर्ड में कोई रिक्ति, या उसके गठन में कोई त्रुटि होने के आधार पर ही प्रश्नगत की जाएगी  

(2) समनुषंगी बैंक के निदेशक के रूप में सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के सब कार्य, इस बात के होते हुए भी कि वह निदेशक होने के लिए निरर्हित था या उसकी नियुक्ति में कोई अन्य त्रुटि थी, विधिमान्य समझे जाएंगे  

55. कंपनी अधिनियम, 1956 और  [बैंककारी विनियमन अधिनियम,] 1949 का कतिपय विद्यमान बैंकों को लागू होना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए और तब तक जब तक कि केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अन्यथा निदेश करे, नियत दिन को और उससे, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) और 3[बैंककारी विनियमन अधिनियम,] 1949 (1949 का 10) के उपबंध किसी विद्यमान बैंक को वहां तक लागू होंगे जहां तक उक्त उपबन्ध किसी ऐसे बैंक पर कोई बाध्यता अधिरोपित करते हैं या उस बैंक से कोई बात करने की अपेक्षा करते हैं  

56. पटियाला स्टेट बैंक  द्वारा दिए गए उधारों और अग्रिम धनों की वसूली की बाबत विशेष उपबंधों का चालू रहना-पटियाला स्टेट बैंक 4 द्वारा नियत दिन के पूर्व दिए गए उधारों या अग्रिम धनों के संबंध में शोध्य किन्हीं धनों को पटियाला बैंक 4 उसी रीति से वसूल करने के हकदार  [होगा] जैसे भू-स्वराज की बकाया वसूल की जाती है तथा ऐसी वसूली से संबंधित किसी विधि के उपबंध जैसे कि वे नियत दिन के पूर्व उस बैंक को लागू थे, नियत दिन के पश्चात् ऐसी वसूली के संबंध में पटियाला स्टेट बैंक 4 को लागू रहेंगे  

57. समनुषंगी बैंक के परिसमापन का वर्जन-कंपनियों के परिसमापन से संबंधित विधि का कोई उपबंध समनुषंगी बैंक को लागू नहीं होगा और इस अधिनियम में उपबंधित के सिवाय या केन्द्रीय सरकार के आदेश के सिवाय तथा ऐसी रीति में के सिवाय जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, समनुषंगी बैंक का परिसमापन नहीं किया जाएगा  

58. विद्यमान बैंकों का विघटन-इस अधिनियम में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी संविदा या अन्य लिखत में किसी बात के होते हुए भी कोई विद्यमान बैंक ऐसी तारीख को जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, विघटित हो जाएगा

 [59. विद्यमान बैंक के प्रति निर्देशों का अर्थान्वयन-(1) धारा 45, धारा 49, धारा 55, धारा 58 और प्रथम अनुसूची के प्रयोजनों के लिए विद्यमान बैंक" पद में जयपुर बैंक लिमिटेड भी आता है

(2) इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि में, या किसी संविदा या अन्य लिखत में, केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी साधारण या विशेष आदेश में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, -

() किसी विद्यमान बैंक के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह तत्स्थानी नए बैंक के प्रति निर्देश है

() जयपुर बैंक लिमिटेड के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह बीकानेर स्टेट बैंक के प्रति निर्देश है

60. रिजर्व बैंक की ओर से शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग-इस अधिनियम द्वारा रिजर्व बैंक को प्रदत्त या न्यस्त या उस पर अधिरोपित किन्हीं शक्तियों, कृत्यों या कर्तव्यों का प्रयोग या पालन रिजर्व बैंक के गवर्नर द्वारा या उसकी अनुपस्थिति में भारतीय रिवर्ज बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन नामनिर्देशित उप-गवर्नर द्वारा, अथवा ऐसे विषयों के सम्बन्ध में ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए जो रिजर्व बैंक के गवर्नर द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, रिजर्व बैंक के किसी अधिकारी या किन्हीं अधिकारियों द्वारा किया जाएगा  

61. अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात को हुए या संभावित किसी भी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक या स्टेट बैंक के विरुद्ध या उनके किसी अधिकारी के विरुद्ध होगी  

(2) किसी व्यक्ति को धारा 46 और धारा 47 के उपबन्धों के प्रवर्तन के कारण या उनके अनुसरण में की गई किसी बात के कारण उपगत किसी हानि या कारित किसी नुकसान के लिए प्रतिकर का कोई अधिकार, चाहे वह किसी संविदा के अधीन हो अथवा अन्यथा, नहीं होगा

62. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार उन सभी विषयों के लिए उपबन्ध करने के लिए, जिनके लिए उपबन्ध किया जाना [इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हो, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ]

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -

() अधिकरण के अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारिवृन्द की सेवा के निबंधन और शर्तें

() इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर के संदाय (जिसमें प्रतिकर के स्थान पर शेयरों का आबंटन भी आता है) की रीति और प्रक्रिया, जिसमें वे अपेक्षाएं भी आती हैं जिनके अधीन रहते हुए संदाय किया जाएगा;

() उन व्यक्तियों का अवधारण जिन्हें उक्त प्रतिकर सब मामलों में संदेय होगा, जिनके अन्तर्गत वे मामले भी हैं जहां शेयर एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा धृत हैं या वे नियत दिन से पूर्व अन्तरित कर दिए गए हैं किन्तु वह अन्तरण रजिस्ट्रीकृत नहीं हुआ है, अथवा जहां शेयरधारी की मृत्यु हो गई है

() वे परिस्थितियां जिनमें शेयरधारी की मार्फत या उसके अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों से उक्त प्रतिकर के संदाय के लिए दावे ग्रहण किए जा सकेंगे

() वे अपेक्षाएं जिनका अनुपालन उक्त प्रतिकर प्राप्त करने से पूर्व ऐसे शेयरधारी द्वारा करना होगा जिसका शेयर प्रमाणपत्र खो गया है, नष्ट हो गया है, विरूपित हो गया है या चोरी हो गया है

() वे अपेक्षाएं जिनके अधीन रहते हुए उक्त प्रतिकर के संदाय की बाबत कोई जानकारी दी जा सकेगी या ऐसी जानकारी देने से इंकार किया जा सकेगा तथा वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए ऐसी जानकारी दी जा सकेगी

 [() धारा 25 की उपधारा (1) के खण्ड (गक) या खण्ड (गख) के अधीन किसी निदेशक की नियुक्ति की रीति और उससे सम्बन्धित या उनके आनुषंगिक सभी अन्य विषय ]

                 [(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ]

[63. समनुषंगी बैंकों की विनियम बनाने की शक्ति-(1) किसी समनुषंगी बैंक का निदेशक बोर्ड, स्टेट बैंक और रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात् और केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे सभी विषयों का उपबंध करने के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, ऐसे विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत हो

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे, -

() समनुषंगी बैंक के प्रबंध-निदेशक की शक्तियां और कर्तव्य

() वे फीसें और भत्ते, जो निदेशकों या अन्य व्यक्तियों को निदेशक बोर्ड या उसकी समितियों (जिसमें कार्यपालिका समिति भी है) या अन्य समितियों के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए या समनुषंगी बैंक का कोई अन्य कार्य करने के लिए दिए जा सकेंगे

() वह समय और स्थान, जिस पर तथा वह रीति, जिसमें समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड के कामकाज का संव्यवहार किया जाएगा और उसके अधिवेशनों में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया

() समनुषंगी बैंक की कार्यपालिका समिति का गठन और वे शर्तें तथा परिसीमाएं, जिनके अधीन रहते हुए कार्यपालिका समिति अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगी और उसके अधिवेशनों में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया

() किन्हीं अन्य समितियों का, चाहे सनमुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड की हों अथवा अन्यथा, गठन और ऐसी समितियों को बोर्ड की शक्तियों और कृत्यों का प्रत्यायोजन तथा ऐसी समितियों में कारबार का संचालन;

() समनुषंगी बैंक के शेयरों का स्वरूप, वह रीति, जिसमें और वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए शेयर का धारण और अंतरण किया जा सकेगा तथा साधारणतः शेयरधारियों के अधिकारों और कर्तव्यों से संबंधित सभी विषय

() शेयर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रक्रिया

() साधारण या अधिमानी शेयर जारी करके, चाहे लोक निर्गमन द्वारा या अधिकारवान निर्गमन या अधिमानी आबंटन या प्राइवेट स्थापन द्वारा, पुरोधृत पूंजी को बढ़ाने के संबंध में प्रक्रिया;  

() किस्तों में शेयर धनराशि स्वीकार करने की रीति, उसके लिए मांग करने की रीति और असंदत्त शेयरों के समपहरण और उनको पुनः जारी करने की रीति

() शेयर रजिस्टरों का रखा जाना और धारा 21 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट विशिष्टियों के अतिरिक्त ऐसे रजिस्टरों में प्रविष्ट की जाने वाली विशिष्टियां, कम्प्यूटर फ्लॉपियों या डिस्कोटों पर या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक रूप में शेयरधारियों के रजिस्टरों के रखे जाने में अनुपालन किए जाने वाले रक्षोपाय, रजिस्टर का निरीक्षण और उनका बंद किया जाना और उससे संबद्ध अन्य सभी विषय

() वह रीति, जिसमें प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत शेयरधारी व्यष्टि, ऐसे विहित व्यष्टि को नामनिर्देशित करता है, जिसको धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन उसकी मृत्यु की दशा में शेयरों में के उनके सभी अधिकार निहित होंगे;

() वह रीति, जिसमें संयुक्त धारक, ऐसे व्यष्टि को नामनिर्देशित कर सकेंगे, जिनको धारा 18 की उपधारा (2) के अधीन सभी संयुक्त धारकों की मृत्यु की दशा में शेयरों में के उनके सभी अधिकार निहित होंगे

() वह रीति, जिसमें धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन नामनिर्देशन में परिवर्तन किया जाता है या उसे रद्द किया जाता है

() वह रीति, जिसमें शेयरधारी के रूप में रजिस्ट्रीकृत प्रत्येक व्यष्टि, जहां नामनिर्देशिती अवयस्क है, धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन नामनिर्देशिती की अवयस्कता के दौरान अपनी मृत्यु की दशा में, शेयरों के लिए हकदार बनने वाले किसी व्यक्ति को नियुक्ति करने के लिए नामनिर्देशित कर सकेगा;

() इस अधिनियम के अधीन निर्वाचनों का आयोजन और संचालन तथा निर्वाचन के लिए अभ्यर्थियों की अर्हताओं की बाबत या निर्वाचनों की विधिमान्यता की बाबत संदेहों या विवादों का अंतिम अवधारण

() वह रीति, जिसमें साधारण अधिवेशन बुलाए जाएंगे, उनमें अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और वह रीति, जिसमें मताधिकारों का प्रयोग किया जा सकेगा;

() वह रीति, जिसमें समनुषंगी बैंक की ओर से शेयरधारियों या अन्य व्यक्तियों पर सूचनाएं तामील की जा सकेंगी

() लाभांशों का, जिनमें अन्तरिम लाभांश भी हैं, संदाय

() समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड की शक्तियों और कृत्यों का उस बैंक के प्रबंध-निदेशक या निदेशकों या अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को प्रत्यायोजन;

() वे शर्तें और परिसीमाएं, जिनके अधीन रहते हुए समनुषंगी बैंक अधिकारियों, सलाहकारों और अन्य कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा और उनके पारिश्रमिक तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें नियत कर सकेगा;  

() समनुषंगी बैंक के अधिकारियों, सलाहकारों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचारण

() समनुषंगी बैंक के अधिकारियों या कर्मचारियों या ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों के आश्रितों के फायदे के लिए या समनुषंगी बैंक के प्रयोजनों के लिए अधिवार्षिकी निधि, पेंशन निधि, भविष्य निधि या अन्य निधियों की स्थापना और उन्हें बनाए रखना तथा किसी ऐसी निधि में से संदेय अधिवार्षिकी भत्तों, वार्षिकियों और पेंशनों की मंजूरी

() समनुषंगी बैंक द्वारा या उसके विरुद्ध विधिक कार्यवाहियों का संचालन और प्रतिरक्षा, तथा अभिवचनों पर हस्ताक्षर करने की रीति

() समनुषंगी बैंक के लिए मुद्रा का उपबंध करना और उसके प्रयोग की रीति और प्रभाव

() वह प्ररूप और रीति, जिसमें समनुषंगी बैंक पर आबद्धकर संविदाएं निष्पादित की जा सकेंगी

() वे शर्तें और अपेक्षाएं, जिनके अधीन रहते हुए समनुषंगी बैंक द्वारा उधार और अग्रिम धन दिए जा सकेंगे या बिलों का मितिकाटे पर भुगतान किया जा सकेगा या उन्हें क्रय किया जा सकेगा

(यक) वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए समनुषंगी बैंक द्वारा अपने निदेशकों या अधिकारियों या ऐसे निदेशकों या अधिकारियों के नातेदारों को या ऐसी कंपनियों, फर्मों, व्यष्टियों को उधार या अग्रिम धन दिए जा सकेंगे, जिनके साथ या जिनसे ऐसे निदेशक या अधिकारी या नातेदारों, भागीदारों, निदेशकों, प्रबंधकों, सेवकों, शेयरधारियों के रूप में अथवा अन्यथा किसी रूप में संबद्ध हैं;

(यख) वे व्यक्ति या प्राधिकारी, जो समनुषंगी बैंक के अधिकारियों या कर्मचारियों के या उनके आश्रितों के फायदे के लिए या उस बैंक के प्रयोजनों के लिए गठित किसी पेंशन निधि, भविष्य निधि या अन्य निधि का प्रशासन करेंगे

(यग) वे परिस्थितियां, जिनमें समनुषंगी बैंक द्वारा उधारों और अग्रिम धनों के दिए जाने के लिए या निधियों के विनियोजन के लिए या किसी संविदा, ठहराव या प्रस्थापना के लिए, जो समनुषंगी बैंक द्वारा की गई हो या किए जाने के लिए प्रस्थापित हो, स्टेट बैंक का विनिर्दिष्ट अनुमोदन अपेक्षित होगा

(यघ) समनुषंगी बैंक के क्रियाकलाप के कार्यक्रमों के विवरणों और वित्तीय विवरणों की तैयारी तथा स्टेट बैंक और रिजर्व बैंक को उनका भेजा जाना, और वह अवधियां, जिनकी बाबत तथा वह समय, जिसके भीतर विवरण और प्राक्कलन तैयार और प्रस्तुत करने होंगे

(यङ) साधारणतः समनुषंगी बैंक के कारबार का दक्षतापूर्ण संचालन  

(3) इस धारा के अधीन बनाए गए सभी विनियम ऐसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख से प्रभावी होंगे, जो विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाएं  

(4) इस धारा के अधीन समनुषंगी बैंक के निदेशक बोर्ड द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार उसकी प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह विनियम निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ]

64. [कुछ अधिनियमितियों का संशोधन ]-निरसन और संशोधन अधिनियम, 1964 (1964 का 52) की धारा 2 और पहली अनुसूची द्वारा निरसित  

65. व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई बात भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 35 के उपबंधों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी

प्रथम अनुसूची

(धारा 13 और धारा 14 देखिए)

प्रतिकर के सिद्धान्त

1.. हैदराबाद बैंक, [या पटियाला बैंक] की दशा में स्टेट बैंक द्वारा किए जाने वाले प्रतिकर की रकम, उतनी होगी, जो नियत दिन के ठीक पूर्ववर्ती दिन से, इस पैरा के भाग 1 के उपबन्धों के अनुसार संगणित की गई बैंक की आस्तियों में से इस पैरा के भाग 2 के उपबन्धों के अनुसार संगणित उसके दायित्वों की कुल रकम को घटाकर हो   

. पटियाला बैंक से भिन्न विद्यमान बैंकों की पूंजी में शेयरों के अन्तरण के संबंध में उन व्यक्तियों (जिसमें कोई राज्य सरकार भी है) को जो नियत दिन के ठीक पूर्ववर्ती दिन को इन बैंकों में से, प्रत्येक की बहियों में शेयरधारियों के रूप में रजिस्ट्रीकृत है, स्टेट बैंक द्वारा किए जाने वाले प्रतिकर की कुल रकम उतनी होगी जो प्रत्येक मामले में, नियत दिन के ठीक पूर्ववर्ती दिन को इस पैरा के भाग 1 के उपबंधों के अनुसार संगणित की गई तत्स्थानी नए बैंक की आस्तियों में से इस पैरा के भाग 2 के उपबंधों के अनुसार संगणित उसके दायित्वों की कुल रकम को घटाकर हो  

भाग 1-आस्तियां

इस पैरा के प्रयोजनों के लिए आस्तियों" से निम्नलिखित का योग अभिप्रेत है: -

() हाथ नकदी तथा रिजर्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में नकद रकम (जिसके अन्तर्गत विदेशी करेन्सी नोट भी हैं जिन्हें बाजार की विनियम दर पर संपरिवर्तित किया जाएगा); 

() रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक से भिन्न किसी अन्य बैंक में अतिशेषों की रकम, चाहे निक्षेप के रूप में या चालू खाते में हो, तथा मांग पर और अल्प सूचना पर प्राप्त धनराशि, भारत के बाहर धारित अतिशेष जिन्हें बाजार की विनियम दर पर संपरिवर्तित किया जाएगा:

परन्तु जो अतिशेष पूर्णतः वसूली योग्य नहीं हैं उनकी बाबत यह समझा जाएगा कि वे ऋण हैं और उनका तदनुकूल मूल्यांकन किया जाएगा

() संबंधित बैंक द्वारा धारित किन्हीं प्रतिभूतियों, शेयरों, डिबेंचरों, बन्धपत्रों और अन्य विनिधानों का वह बाजार मूल्य जो नियत दिन को हो

स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए, - 

(i) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों की प्रतिभूतियों का [उन प्रतिभूतियों से भिन्न जो इस स्पष्टीकरण के उपखण्ड (ii) और (iii) में विनिर्दिष्ट हैं] जो नियत दिन से पांच वर्ष के अन्दर मोचन के लिए परिपक्व हो जाती है, मूल्याकंन उनके अंकित मूल्य या बाजार मूल्य, इनमें से जो भी अधिक हो, उसके अनुसार किया जाएगा

(ii) केन्द्रीय सरकार की प्रतिभूतियों का, जैसे डाकघर बचतपत्र और राजकोष बचत निक्षेपपत्र तथा केन्द्रीय सरकार की अल्प बचत योजना के अधीन निगमित या निगमित की जाने वाली किन्हीं अन्य प्रतिभूतियों या बचतपत्रों का मूल्याकंन उनके अंकित मूल्य अथवा नियत दिन को उनके बाजार मूल्य के नकदी में मिल सकने वाले मूल्य के, इनमें से जो भी अधिक हो, अनुसार किया जाएगा

(iii) जहां किसी ऐसी सरकारी प्रतिभूति का, जैसे जमींदारी उन्मूलन बन्धपत्र या वैसी ही अन्य प्रतिभूति का, जिसकी बाबत मूलधन किस्तों में देय है, बाजार मूल्य अभिनिश्चेय नहीं है या किसी कारणवश उसका समुचित मूल्य प्रतिदर्शित करने वाला नहीं समझा जाता है या अन्यथा समुचित नहीं समझा जाता, वहां ऐसी प्रतिभूति का मूल्य इतनी रकम लगाया जाएगा जितनी संदेय मूल्यधन और ब्याज की किस्तों को तथा उस अवधि को, जिसके दौरान ऐसी किस्त देय है, तथा वैसी ही या लगभग वैसी ही परिपवक्ता वाली, सरकार द्वारा निर्गमित, किसी ऐसी प्रतिभूति से, जिससे वह प्रतिभूति सम्बन्धित हो, प्राप्ति का तथा अन्य सुसंगत बातों का ध्यान रखते हुए उचित समझी जाती है

(iv) जहां किसी प्रतिभूति, शेयर, डिबेंचर, बन्धपत्र या अन्य विनिधान का बाजार मूल्य इस कारण उचित नहीं समझा जाता कि वह असामान्य बातों से प्रभावित हुआ है, वहां विनिधान का मूल्यांकन किसी युक्तियुक्त अवधि के दौरान उसके औसत बाजार के मूल्य के आधार पर किया जा सकेगा;

(v) जहां किसी प्रतिभूति, शेयर, डिबेंचर, बन्धपत्र या अन्य विनिधान का बाजार मूल्य अभिनिश्चेय नहीं है, वहां केवल ऐसा मूल्य, यदि कोई हो, हिसाब में लिया जाएगा जो उसे निर्गमित करने वाले समुत्थान की वित्तीय स्थिति का, पूर्वगामी पांच वर्षों के दौरान उसके द्वारा दिए गए लाभांश का तथा अन्य सुसंगत बातों का ध्यान रखते हुए उचित समझा जाता है;

() अग्रिम धनों की (जिनके अन्तर्गत उधार, नकद ऋण, ओवर डाफ्ट, क्रय किए गए और मितिकाटे पर भुगतान किए गए विनिमय पत्र भी हैं) रकम तथा प्रतिभूत या अप्रतिभूत अन्य ऋण जहां तक कि वे प्रतिभूत के, यदि कोई हो, मूल्य को, खाते में किए गए लेन-देन, उधार लेने वाले ज्ञात साख और प्रतिष्ठा को, वसूली की सम्भावनाओं को तथा अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए वसूलीय समझे जाते हैं

() किसी भूमि या भवनों का बाजार मूल्य

() सब पट्टाधृत सम्पत्तियों की बाबत दिए गए प्रीमियमों की कुल रकम जैसी कि वह प्रत्येक ऐसे प्रीमियम की दशा में इतनी रकम को घटाकर आए जितनी का ऐसे प्रीमियम से वही अनुपात है, जो उस पट्टे की समाप्ति अवधि का, जिसकी बाबत कि ऐसा प्रीमियम दिया गया है, पट्टे की कुल अवधि से है

() सब फर्नीचर, फिक्सचरों और फिटिंगों का बहियों के अनुसार अभिलिखित मूल्य या वसूलीय मूल्य, इनमें से जो भी उचित समझा जाए

() बैंक की बहियों में दी हुई अन्य आस्तियों का बाजार या वसूलीय मूल्य, जो भी समुचित हो, किन्तु शेयर-विक्रय कमीशन, संगठन-व्यय और दलाली, उपगत हानियों और इसी प्रकार की अन्य मदों जैसे पूंजीकृत व्ययों के लिए कोई मूल्य अनुज्ञात नहीं किया जाएगा  

भाग 2-दायित्व

इस पैरा के प्रयोजनों के लिए दायित्व" से, उन सब बाहरी दायित्वों की, जो नियत दिन को विद्यमान हैं, और उन सब आश्रित दायित्वों की, जिनकी बाबत संबंधित समनुषंगी बैंक से उचित रूप से यह अपेक्षा की जा सकती है कि नियत दिन को या उसके पश्चात् उनकी पूर्ति उन्हीं के स्रोतों से की जाएगी, कुल रकम अभिप्रेत है  

शेयरधारियों को देय प्रतिकर

2. पटियाला बैंक से भिन्न विद्यमान बैंक के प्रत्येक शेयरधारी को प्रतिकर के रूप में इतनी रकम दी जाएगी जिसका पैरा 1 उपबन्धों के अनुसार उक्त बैंकों में से प्रत्येक बैंक के संबंध में परिकलित कुल प्रतिकर से वही अनुपात है जो उस शेयरधारी द्वारा धारित शेयरों की समादत्त पूंजी की रकम का उस बैंक की कुल समादत्त पूंजी से है

कतिपय लाभांशों का हिसाब में लिया जाना

3. नियत दिन से ठीक पूर्ववर्ती ऐसी किसी अवधि की बाबत, जिस अवधि के लिए लाभों का अन्तरण या लाभांश की घोषणा, सामान्य अनुक्रम में नियत दिन के पश्चात् की गई होती, किन्हीं लाभों या किन्हीं लाभांशों के लिए कोई पृथक् प्रतिकर संदेय होगा  

द्वितीय अनुसूची

(धारा 52 देखिए)

विश्वसनीयता और गोपनीयता की घोषणा

मैं ..........................घोषण करता हूं कि मैं......................।स्टेट बैंक के .................(यथास्थिति, निदेशक, संपरीक्षक, सलाहकार अधिकारी या अन्य कर्मचारी) के रूप में मुझसे अपेक्षित और उक्त बैंक में या उसके सम्बन्ध में मेरे द्वारा धारण किए गए पद या ओहदे से उचित रूप से सम्बद्ध कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक, सत्यनिष्ठापूर्वक और अपनी पूर्ण कुशलता और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा

मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं ....................स्टेट बैंक के कार्यों से या उक्त बैंक से व्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कार्यों से सम्बद्ध कोई जानकारी ऐसे किसी व्यक्ति को, जो उसका विधिक रूप से हकदार नहीं है, संसूचित नहीं करूंगा और संसूचित होने दूंगा और ऐसे किसी व्यक्ति को उक्त बैंक या उसके कब्जे की तथा उक्त बैंक के कारबार से या उक्त बैंक से संव्यवहार करने वाले किसी व्यक्ति के कारबार से सम्बद्ध किन्हीं पुस्तकों या दस्तावेजों का निरीक्षण करने दूंगा और उसकी उन तक पहुंच होने दूंगा

तृतीय अनुसूची- [कुछ अधिनियमितियों का संशोधन] श्न्निरसन और संशोधन अधिनियम, 1964 (1964 का 52) की धारा 2 और पहली अनुसूची द्वारा निरसित

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