Wednesday, 29, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 ( Indian Statistical Institute Act, 1959 )


 

भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959

(1959 का अधिनियम संख्यांक 57)

[24 दिसम्बर, 1959]

भारतीय सांख्यिकी संस्थान के नाम से ज्ञात संस्था को, वर्तमान में

जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय कलकत्ता में है, राष्ट्रीय

महत्व की संस्था घोषित करने के लिए और

उससे सम्बद्ध कुछ मामलों का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के दसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 है

(2) यह ऐसी तारीख  से प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

() संस्थान" से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत भारतीय सांख्यिकी संस्थान अभिप्रेत है;

() ज्ञापन" से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन ज्वांइट स्टाक कम्पनियों के रजिस्ट्रार के पास फाइल किया गया संस्थान का संगम ज्ञापन अभिप्रेत है;

() नियम और विनियम" के अन्तर्गत वे नियम और विनियम (चाहे जिस नाम से सम्बोधित किए जाएं) आते हैं जो संस्थान सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन उसको प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में बनाने के लिए सक्षम है, किन्तु इसके अन्तर्गत उसके दैनिक प्रशासन के संचालन के लिए नियमों और विनियमों के अधीन बनाई गई उपविधियां या स्थायी आदेश नहीं हैं

3. भारतीय सांख्यिकी संस्थान का राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में घोषित किया जाना-यतः भारतीय सांख्यिकी संस्थान के नाम से ज्ञात संस्था के उद्देश्य इस प्रकार के हैं कि वे उसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था बनाते हैं अतः एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था है

4. संस्थान द्वारा उपाधियों और डिप्लोमाओं का दिया जाना-विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, संस्थान  [सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और ऐसे अन्य विषयों में जो सांख्यिकी से संबंधित हैंट ऐसी परीक्षाएं ले सकता है और ऐसी उपाधियां और डिप्लोमा दे सकता है जो समय-समय पर संस्थान द्वारा अवधारित की जाएं

5. केन्द्रीय सरकार द्वारा संस्थान को अनुदान और उधार आदि-संस्थान को अपने कृत्यों का, जिसके अन्तर्गत राष्ट्रीय विकास के लिए योजना से सम्बन्धित अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण, परियोजना सम्बन्धी कार्य और सांख्यिकी कार्य है, दक्षतापूर्ण निर्वहन करने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजनार्थ, केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, संस्थान को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी धनराशियां, जो सरकार आवश्यक समझे, अनुदान, उधार या अन्य रीति में संदाय कर सकती है

6. संस्थान के लेखों की संपरीक्षा-(1) संस्थान के लेखों की संपरीक्षा, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन कम्पनियों के संपरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक्तः अर्हित संपरीक्षकों द्वारा की जाएगी, और संस्थान ऐसे संपरीक्षक नियुक्त करेगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक और संस्थान के परामर्श के पश्चात् चयन करे

(2) केन्द्रीय सरकार संपरीक्षकों को उनके कर्तव्यों के पालन के लिए ऐसे निदेश जारी कर सकती है जो वह ठीक समझे

(3) ऐसे प्रत्येक संपरीक्षक की अपने कर्तव्यों के पालन के लिए सभी युक्तियुक्त समयों पर संस्थान के रजिस्टर, लेखा पुस्तकों, अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों तक पहुंच होगी

(4) संपरीक्षक अपनी रिपोर्ट संस्थान को देंगे और उसकी एक प्रति सूचनार्थ केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित करेंगे

7. संस्थान द्वारा कुछ कार्यों के लिए केन्द्रीय सरकार का पुर्वानुमोदन आवश्यक होना-सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) या संस्थान के ज्ञापन या नियमों और विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना, संस्थान-

() उन प्रयोजनों में से किसी को परिवर्तित, विस्तारित या न्यून नहीं करेगा जिनके लिए वह स्थापित किया गया था या जिनके लिए इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले उसका उपयोग किया जा रहा है, या अपने को किसी अन्य संस्थान या सोसाइटी से पूर्णतः या अंशतः समामेलित नहीं करेगा; या

() किसी रीति में अपने ज्ञापन या नियम और विनियमों को परिवर्तित या संशोधित नहीं करेगा; या

() केन्द्रीय सरकार द्वारा विशिष्टतः अर्जन के लिए उपबन्धित धन से संस्थान द्वारा अर्जित किसी सम्पत्ति का विक्रय या अन्यथा व्ययन नहीं करेगा:

परन्तु ऐसी किसी जंगम सम्पत्ति या जंगम सम्पत्ति के वर्ग के लिए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, ऐसा अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा; या

() विघटित नहीं होगा

8. संस्थान के लिए कार्यक्रम आदि तैयार करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा समितियों का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार ऐसी संख्या में व्यक्तियों वाली और इतनी समितियां, जिन्हें वह नियुक्त करना ठीक समझे, जैसे और जब आवश्यक समझे नियुक्ति कर सकती है और ऐसी प्रत्येक समिति को निम्नलिखित कर्तव्यों में से सभी या कोई सौंप सकती है, अर्थात्: -

() यथासम्भव प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ के पहले उस वर्ष के दौरान संस्थान द्वारा किए जाने वाले उस काम के कार्यक्रम का विवरण जिसके लिए संस्थान सहमत हो गया है और जिसके लिए केन्द्रीय सरकार निधियां दे सकती है, और ऐसे काम के सम्बन्ध में साधारण वित्तीय प्राक्कलन तैयार करना और केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करना; और

() ऐसा कार्यक्रम मोटे तौर से तय करना

(2) जब संस्थान उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति द्वारा सुझाया गया कोई काम लेने में सहमत नहीं होता है तो वह केन्द्रीय सरकार को ऐसे सहमत होने के अपने कारण देगा

9. किए गए कार्य का पुनरीक्षण, आस्तियों का निरीक्षण आदि-(1) केन्द्रीय सरकार एक समिति गठित करेगी जिसमें उतनी संख्या में व्यक्ति होंगे जितने वह निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए नियुक्त करना ठीक समझे, अर्थात्: -

                () संस्थान द्वारा किए गए काम और उसकी प्रगति का पुनर्विलोकन;

() उसके भवन, उपस्कर और अन्य आस्तियों का निरीक्षण;

() संस्थान द्वारा किए गए काम का मूल्यांकन; और

() सरकार को साधारणतः किसी ऐसे मामले में सलाह देने के लिए जो केन्द्रीय सरकार की राय में संस्थान के काम के सम्बन्ध में महत्व की है,

और समिति उस पर अपनी रिपोर्ट ऐसी रीति में देगी जो केन्द्रीय सरकार निदेश करे

(2) प्रत्येक दशा में पुनर्विलोकन, निरीक्षण और मूल्यांकन करने के आशय की सूचना संस्थान को दी जाएगी और संस्थान एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का हकदार होगा जिसको ऐसे पुनर्विलोकन, निरीक्षण या मूल्यांकन में उपस्थित होने और सुने जाने का अधिकार होगा

(3) केन्द्रीय सरकार ऐसे पुनर्विलोकन, निरीक्षण या मूल्यांकन की उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति की रिपोर्ट में जो प्रकट है उस परिवर्तन के निर्देश में संस्थान के अध्यक्ष को सम्बोधित कर सकती है, और अध्यक्ष उस पर की गई कार्यवाही की, यदि कोई हो, सूचना केन्द्रीय सरकार को देगा

(4) जब केन्द्रीय सरकार ने, उपधारा (3) के अनुसरण में, किसी मामले के सम्बन्ध में संस्थान के अध्यक्ष को सम्बोधित किया है, और अध्यक्ष उसकी बाबत केन्द्रीय सरकार के समाधान पर्यन्त युक्तियुक्त समय के अन्दर कोई कार्यवाही नहीं करता है तो, केन्द्रीय सरकार, संस्थान द्वारा इस निमित्त दिए गए किन्हीं स्पष्टीकरणों और अभ्यावेदनों पर विचार करने के पश्चात्, उस रिपोर्ट में चर्चित मामलों की बाबत ऐसे निदेश दे सकती है जो वह आवश्यक समझे

10. संस्थान समितियों को सुविधाएं देगा-धारा 8 या धारा 9 के अधीन गठित समिति को उसके कर्तव्यों को करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए संस्थान सभी आवश्यक सुविधाएं देने के लिए आबद्ध होगा

11. संस्थान को निदेश देने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि लोक हित में ऐसा करना आवश्यश्क है तो, ऐसे कारणों के आधार पर जो अभिलेखित और संस्थान को सूचित किए जाएंगे, संस्थान को ऐसे निदेश दे सकती है, जो वह ठीक समझे, और ऐसे निदेशों के अन्तर्गत संस्थान से निम्नलिखित अपेक्षा करने वाले निदेश भी आते हैं,-

() ऐसी कालावधि के अन्दर जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाए ज्ञापन का संशोधन करने के लिए किसी नियम या विनियम के बनाने या संशोधन करने के लिए ;

() ऐसी रीति में, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करना ठीक समझे, संस्थान द्वारा लिए गए या लिए जाने वाले काम को पूर्विकता देने के लिए

(2) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या संस्थान के ज्ञापन या नियमों और विनियमों में किसी बात के होते हुए भी इस धारा के अधीन जारी किए गए निदेश प्रभावी होंगे

12. केन्द्रीय सरकार की नियंत्रण हाथ में लेने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की राय में, -

(i) संस्थान ने न्यायपूर्ण या युक्तियुक्त कारण के बिना धारा 9 की उपधारा (4) या धारा 11 के अधीन जारी किए गए किसी निदेश को प्रभार देने में व्यतिक्रम किया है; या

(ii) संस्थान की परिषद् ने संस्थान या उसके किसी भाग के सम्बन्ध में अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया है, या दुरुपयोग किया है,

तो केन्द्रीय सरकार, लिखित आदेश द्वारा, संस्थान को आदेश में विनिर्दिष्ट कालावधि के अन्दर उपधारा (2) में निर्दिष्ट नियुक्ति करने के विरुद्ध केन्द्रीय सरकार के समाधान पर्यन्त हेतुक दर्शित करने के लिए निदेश दे सकती है

(2) यदि, उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए किसी आदेश में नियत कालावधि के अन्दर, केन्द्रीय सरकार के समाधान पर्यन्त हेतुक नहीं दर्शाया जाता है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा और उसके कारण कथित करते हुए, एक या अधिक व्यक्तियों को, ऐसी कालावधि के लिए जो दो वर्ष से अधिक हो और जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, संस्थान या उसके किसी भाग का भारसाधन करने के लिए नियुक्त कर सकती है

(3) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या संस्थान के ज्ञापन या नियमों और विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) के अधीन आदेश के जारी होने पर उस आदेश में विनिर्दिष्ट कालावधि के दौरान,-

() जहां आदेश यह उपबन्ध करता है कि एक व्यक्ति या एक से अधिक व्यक्ति संस्थान के भारसाधक होंगे-

(i) वहां अध्यक्ष सहित परिषद् के सदस्य के रूप में पद धारण करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए यह समझा जाएगा कि उन्होंने उस रूप में अपना पद रिक्त कर दिया है

(ii) उपधारा (2) के अधीन संस्थान के भारसाधक होने के लिए नियुक्त व्यक्ति, चाहे एक बैठक में या अन्यथा, उस संस्थान की बाबत संस्थान के अध्यक्ष या परिषद् की सभी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करेंगे ;

() जहां आदेश यह उपबन्ध करता है कि एक व्यक्ति या एक से अधिक व्यक्ति संस्थान के किसी भाग के भारसाधक होंगे वहां इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति ही केवल उस भाग के सम्बन्ध में अध्यक्ष या परिषद् की सभी शक्तियों का प्रयोग करने के और सभी कर्तव्यों का पालन करने के हकदार होंगे

-------------

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter