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कोयला खान (संरक्षण और विकास) अधिनियम, 1974 ( Coal Mines (Conservation and Development) Act, 1974 )


 

कोयला खान (संरक्षण और विकास) अधिनियम, 1974

(1974 का अधिनियम संख्यांक 28)

[26 अगस्त, 1974]

कोयले के संरक्षण और कोयला खानों के विकास के लिए और

उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के पच्चीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कोयला खान (संरक्षण और विकास) अधिनियम, 1974 है । 

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है । 

(3) यह उस दिन को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे । 

2. केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-इसके द्वारा घोषित किया जाता है कि लोक हित में यह समीचीन है कि केन्द्रीय सरकार कोयला खानों के विनियमन और विकास को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित विस्तार तक अपने नियंत्रण में ले ले । 

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) नियत दिन" से वह दिन अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त हो; 

(ख) सम्मिश्रण" से विभिन्न प्रकार के कोयले को घनिष्ठ रूप से इस प्रकार मिश्रित करने की प्रक्रिया अभिप्रेत है जिससे ऐसा मिश्रण तैयार हो जिसके कार्बनीकरण के फलस्वरूप कोक बने;

(ग) कोयले" के अन्तर्गत सभी प्रकार का कोक है किन्तु लिग्नाइट इसके अन्तर्गत नहीं है; 

(घ) मुख्य निरीक्षक" और निरीक्षक" से वे व्यक्ति अभिप्रेत हैं जो खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के अधीन क्रमशः खानों के मुख्य निरीक्षक और खानों के निरीक्षक नियुक्त किए जाएं, तथा उस अधिनियम के उपबन्ध मुख्य निरीक्षक को और सभी निरीक्षकों को, जब वे इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहे हों, लागू होंगे; 

(ङ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है; 

(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(छ) अनुसूचित बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में तत्समय सम्मिलित बैंक अभिप्रेत हैं; 

(ज) रेल" का वही अर्थ होगा जो भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) में है; 

(झ) कोयला खानों में सुरक्षा" के अन्तर्गत कोयला खान के ऊपर सतह पर आस्थित किसी रेल की सुरक्षा भी है; 

(ञ) भरण" से कोयला निकालने से किसी कोयला खान में भूमि के नीचे खाली जगहों को बालू या किसी अन्य सामग्री से अथवा दोनों से भरने की प्रक्रिया अभिप्रेत है; 

(ट) धावन" से कोई ऐसी प्रक्रिया या प्रक्रियाओं का समुच्चय अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित की जाए और जिससे कोयले में पाई गई किसी सम्पूर्ण शेल और खनिज पदार्थ अथवा उनके किसी भाग को उसमें से हटाया जाए; 

(ठ) अभिकर्ता", खान" और स्वामी" के वही अर्थ हैं जो उनके खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) में हैं । 

अध्याय 2

कोयले के संरक्षण और कोयला खानों के विकास सम्बन्धी उपबन्ध

4. कोयले के संरक्षण और कोयला खानों के विकास के बारे में केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, कोयले के संरक्षण के प्रयोजन के लिए और कोयला खानों के विकास के लिए ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे उपाय कर सकेगी या करा सकेगी जिन्हें वह आवश्यक या उचित समझे या जो विहित किए जाएं ।

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार कोयला खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक को सम्बोधित लिखित आदेश द्वारा उससे अपेक्षा कर सकेगी कि वह कोयले के संरक्षण के प्रयोजन के लिए या कोयला खानों के विकास के लिए ऐसे उपाय करे जिन्हें केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे, जिनके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं :-

(क) किसी कोयला खान में सुरक्षार्थ भरण; या 

(ख) किसी ऐसी बात की रोक जिसका कोयले के संरक्षण या कोयला खान के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है; या 

(ग) कोयले के परिष्करण और उसके राखतत्व कम करने की दृष्टि से कोयले का धावन । 

 [(3) यदि केन्द्रीय सरकार का सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि कोयला खान के सम्बन्ध में उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन उसके द्वारा किए गए उपायों के, यदि कोई हों, खर्च की वसूली न्यायोचित है तो वह कोयला खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबन्धक से ऐसा खर्च, पूर्णतः या भागतः उसी रीति से वसूल कर सकेगी जैसे भू-राजस्व की बकाया वसूल की जाती है ।]

5. कोयले के संरक्षण और कोयला खान के विकास के लिए कार्यवाहियां करने का स्वामी का कर्तव्य-(1) किसी कोयला खान का स्वामी अपने स्वामित्वाधीन प्रत्येक कोयला खान के सम्बन्ध में ऐसी कार्यवाहियां करेगा जो कोयले का संरक्षण और उस कोयला खान का विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों । 

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी कोयला खान का स्वामी- 

(क) इस प्रकार के भरण और अन्य संक्रियाएं निष्पादित करेगा जिनका करना इस अधिनियम के उन उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए आवश्यक हो जिनका सम्बन्ध कोयले के संरक्षण या कोयला खान के विकास अथवा कोयला खान से अभिप्राप्त कोयले के उपयोग से हो; 

(ख) भरण की और अन्य ऐसी सामग्रियां अर्जित करेगा जो कोयले के संरक्षण और कोयला खानों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों; 

(ग) कोयले के संरक्षण, कोयला खानों के विकास और कोयले के उपयोग के सम्बन्ध में अनुसंधान करेगा; 

(घ) कोयला खानों के विकास की योजना और उसका कार्यान्वयन वैज्ञानिक ढंग से करेगा; 

(ङ) ऐसे अन्य क्रियाकलाप करेगा जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए निदिष्ट करे । 

6. उत्पाद-शुल्क का अधिरोपण-(1) नियत दिन से, उस सब कोयले पर जो भारत में कोयला खानों से निकाला जाए और वहां से भेजा जाए तथा उस सब कोक पर जो वहां विनिर्मित किया जाए और भेजा जाए प्रति टन दस रुपए से अनधिक उतना उत्पाद-शुल्क जितना केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा समय-समय पर नियत किया जाए, उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा तथा विभिन्न श्रेणियों या प्रकार के कोयले या कोक पर शुल्क की विभिन्न दरें उद्गृहीत की जा सकेंगी :

परन्तु केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी विशेष श्रेणी या श्रेणियों अथवा प्रकार के कोयले या कोक को ऐसे उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण से छूट दे सकेगी । 

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए कोयले को केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे विनिर्देशों के अनुसार श्रेणीबद्ध किया जाएगा, जो उस सरकार द्वारा समय-समय पर नियत किए जाएं । 

(3) इस धारा के अधीन निकाली गई सब अधिसूचनाएं यथाशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएंगी ।

7. सीमाशुल्क का अधिरोपण-उस अवधि के दौरान जब धारा 6 के अधीन कोई उत्पाद-शुल्क उद्गृहीत किया जा रहा है, केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा, उस सभी कोयले पर (जिसके अन्तर्गत सोफ्ट और हार्ड कोक भी हैं), जो भारत के बाहर के किसी स्थान से भारत में आयात किया जाए या लाया जाए उन दरों पर, जो धारा 6 के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क की दरों के बराबर हैं, सीमाशुल्क (जो किसी अन्य विधि के अधीन तत्समय उद्ग्रहणीय किसी सीमाशुल्क के अतिरिक्त होगा), लगा सकेगी । 

8. उत्पाद-शुल्क का संग्रहण- [(1)] धारा 6 के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क ऐसे अभिकरणों द्वारा और ऐसी रीति से संगृहीत किए जाएंगे जो विहित की जाए ।

 [(2) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट उत्पाद-शुल्क उस उपधारा के अधीन विहित रीति से संगृहीत नहीं किया जा सकता है वहां वह कोयला खान के स्वामी से उसी रीति से वसूल किया जाएगा जैसे भू-राजस्व की बकाया वसूल की जाती है ।]

9. धारा 6 और 7 के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत शुल्कों के आगमों का उपयोग-प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष या वर्षों के दौरान क्रमशः धारा 6 और 7 के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क के (ऐसी रीति से अवधारित जो विहित की जाए), शुद्ध आगमों से अनधिक राशि, केन्द्रीय सरकार द्वारा, ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो विहित की जाए, कोयला खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं या प्रबन्धकों को अथवा किसी अन्य व्यक्ति को निम्नलिखित प्रयोजनों में से किसी एक या अधिक के लिए संवितरित की जाएगी, अर्थात् :-

(क) कोयले का संरक्षण और कोयला खानों का विकास; 

(ख) भरण संक्रियाओं के लिए भरण सामग्री और अन्य सहायता का दिया जाना; 

(ग) कोयला खानों में सुरक्षा या कोयले के संरक्षण के लिए भरण और अन्य संक्रियाओं का निष्पादन; 

(घ) कोयले के संरक्षण और उपयोग से संबंधित अनुसंधान कार्य चलाना; और

(ङ) कोयले के संरक्षण या कोयला खानों के विकास अथवा कोयले के परिवहन, वितरण या उपयोग से संबंधित कोई अन्य प्रयोजन :

परन्तु केन्द्रीय सरकार कोयला खान (संरक्षण, सुरक्षा और विकास) अधिनियम, 1962 (1962 का 12) की धारा 8 के अधीन संगृहीत उत्पाद-शुल्कों के कुल शुद्ध आगमों से अनधिक राशि, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व असंवितरित रह गई हो, इस धारा में विनिर्दिष्ट सब प्रयोजनों या उनमें से किसी के लिए कोयला खानों के स्वामियों, अभिकर्ताओं या प्रबन्धकों को अथवा किसी अन्य व्यक्ति को संवितरित कर सकेगी । 

10. कोयला खान संरक्षण और विकास खाता खोलने का स्वामी का कर्तव्य-(1) प्रत्येक कोयला खान का स्वामी, जिसे धारा 9 के अधीन कोई धन संवितरित किया गया हो, किसी अनुसूचित बैंक में एक अलग खाता खोलेगा जो कोयला खान संरक्षण और विकास खाता" कहलाएगा और उक्त खाते में वह उसे संवितरित सभी राशियां जमा करेगा :

परन्तु जहां किसी स्वामी के स्वामित्वाधीन कोयला खानों के विभिन्न समूहों के बारे में अलग खाते आवश्यक हों, वहां कोयला खानों के प्रत्येक ऐसे समूह के बारे में अलग खाते खोले जा सकेंगे । 

(2) कोयला खान संरक्षण और विकास खाते में जमा धन और उसकी अनुवृद्धियों का कोयला खान के स्वामी द्वारा निम्नलिखित के लिए उपयोजन किया जाएगा-

(क) इस अधिनियम के उद्देश्यों को अग्रसर करना;

(ख) कोयला खान में भरण संक्रियाओं के लिए आवश्यक भरण की अथवा अन्य सामग्रियों का अर्जन; 

(ग) इस अधिनियम के उद्देश्यों को अग्रसर करने में भरण और अन्य संक्रियाओं का निष्पादन; 

(घ) कोयले के संरक्षण, उसके विकास और उपयोग तथा कोयला खानों में सुरक्षा से संबंधित अनुसंधान कार्य चलाना; 

(ङ) कोयला खानों की योजना और विकास वैज्ञानिक ढंग से करना ; और 

(च) कोई अन्य व्यय जिसका केन्द्रीय सरकार उस खाते में जमा धन से चुकाया जाना निर्दिष्ट करे । 

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट खाता ऐसी रीति से और ऐसे प्ररूप में रखा जाएगा जो विहित किया जाए, और प्रत्येक ऐसे खाते की लेखापरीक्षा उसी व्यक्ति द्वारा की जाएगी जिसके द्वारा कोयला खान के स्वामी के खाते की लेखापरीक्षा की जाती है । 

11. निरीक्षकों की शक्ति-(1) मुख्य निरीक्षक या कोई निरीक्षक यह अभिनिश्चित करने के लिए कि इस अधिनियम के अथवा इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों और आदेशों के उपबंधों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं ऐसी परीक्षा और जांच कर सकेगा जैसी वह ठीक समझे ।

(2) मुख्य निरीक्षक या कोई निरीक्षक यह सुनिश्चित करने के लिए कि भरण या कोई अन्य क्रिया कारगर ढंग से की गई है या की जा रही है, किसी कोयला खान में, दिन या रात में, किसी भी समय ऐसी सहायता के साथ, यदि कोई हो, जो वह आवश्यक समझे, प्रवेश, निरीक्षण और परीक्षा कर सकेगा :

परन्तु इस उपधारा द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग ऐसी रीति से नहीं किया जाएगा जिससे खान के कामकाज में अनुचित रूप से अड़चन या बाधा पड़े । 

(3) खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, मुख्य निरीक्षक या कोई निरीक्षक किसी कोयला खान के स्वामी, अभिकर्ता या प्रबंधक को संबोधित लिखित आदेश द्वारा उससे खान में, ऐसे सुरक्षा-उपाय, जिनके अन्तर्गत भरण भी है, जिन्हें मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक आवयक समझे, करने की अपेक्षा उस दशा में कर सकेगा जिसमें उस मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक की यह राय है कि :-

(क) कोयला खान के किसी भाग में से स्तम्भों के निकाले जाने या छांटे जाने से इस बात की संभावना है कि स्तम्भ बैठ जाएं या खनिजों का कोई भाग समय-पूर्व ढह जाए अथवा मानवजीवन या कोयला खान अथवा रेल को अन्यथा संकटापन्न करे, या 

(ख) आग लगना या पानी भरना रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था के रूप में कोयला खान के किसी भाग को बन्द करने और अलग करने के लिए अथवा, यथास्थिति, आग या पानी भरने से प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्र को सीमित करने के उपाय नहीं किए गए हैं ।  

(4) उपधारा (1), (2) और (3) के अधीन निरीक्षक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारी द्वारा भी किया जा सकेगा जिसे वह सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे । 

अध्याय 3

कोयला बोर्ड का विघटन और उसके कर्मचारियों का अन्तरण

12. कोयला बोर्ड का विघटन-(1) नियत दिन को कोयला खान (संरक्षण, सुरक्षा और विकास) अधिनियम, 1962 (1962 का 12) की धारा 4 के अधीन स्थापित कोयला बोर्ड विघटित हो जाएगा ।

(2) कोयला बोर्ड के विघटन पर,-

(क) कोयला बोर्ड के सब अधिकार और विशेषाधिकार केन्द्रीय सरकार के अधिकार और विशेषाधिकार हो जाएंगे; 

(ख) नियत दिन से ठीक पूर्व किसी पट्टे के अधीन कोयला बोर्ड द्वारा धारित सभी सम्पत्ति की पट्टेदार केन्द्रीय सरकार समझी जाएगी, और वह सरकार पट्टे को उन्हीं निबन्धनों और शर्तों के अधीन धारित करेगी जिनके अधीन वह पट्टा कोयला बोर्ड द्वारा धारित था; 

(ग) जंगम और स्थावर सभी अन्य सम्पत्ति, जिनके अन्तर्गत रोकड़-बाकी, आरक्षित निधियां, विनिधान और धनराशियां हैं, जो कोयला खान सुरक्षा और संरक्षण निधि तथा कोयला विकास निधि के नाम जमा हैं तथा ऐसी सम्पत्ति में या उससे पैदा होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन से ठीक पूर्व कोयला बोर्ड के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे तथा सभी लेखा-पुस्तकें, रजिस्टर, अभिलेख और उससे संबंधित किसी प्रकार की सभी अन्य दस्तावेज केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी; 

(घ) कोयला बोर्ड के किसी भी प्रकार के सभी उधार, दायित्व और बाध्यताएं, जो नियत दिन से ठीक पूर्व विद्यमान हैं, नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार के, यथास्थिति, उधार, दायित्व या बाध्यताएं समझी जाएंगी; 

(ङ) कोयला बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी विषय और बातें, जो नियत दिन से ठीक पूर्व विद्यमान हैं, नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके साथ या उसके लिए की गई या की जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी; 

(च) ऐसी सभी अनुज्ञप्तियां और अनुज्ञापत्र, जो कोयला बोर्ड को दिए गए हैं, और नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार को दिए गए समझे जाएंगे और तदनुसार प्रभावी होंगे । 

13. सरकारी कम्पनी में अधिकारों को निहित करने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-धारा 12 में किसी बात के होते हुए भी, यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि कोई सरकारी कम्पनी ऐसे निबन्धनों और शर्तों का, जिन्हें अधिरोपित करना वह सरकार ठीक समझे, अनुपालन करने के लिए राजी है या उसने अनुपालन कर दिया है तो वह लिखित आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कि किसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में कोयला बोर्ड का अधिकार, हक और हित उसमें निहित रहने की बजाय उस सरकारी कम्पनी में या तो निदेश के प्रकाशन की तारीख को या ऐसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख को, (जो नियत दिन से पूर्ववर्ती तारीख नहीं होगी) जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाए निहित हो जाएंगे और इस प्रकार निहित होने पर ऐसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में कोयला बोर्ड का, यथास्थिति, दायित्व या बाध्यता केन्द्रीय सरकार का दायित्व या बाध्यता होने की बजाय उस सरकारी कम्पनी का, यथास्थिति, दायित्व या बाध्यता होगी ।

14. केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध वादों आदि का जारी रहना-(1) यदि नियत दिन को कोयला बोर्ड के सम्बन्ध में कोई वाद, अपील या किसी भी प्रकार की अन्य कार्यवाही ऐसे बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध लम्बित है तो उसका कोयला बोर्ड के विघटन के कारण उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं की जाएगी या उस पर किसी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या उस सरकारी कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध, जिसमें कोयला बोर्ड की सम्पत्ति निहित हो गई है, जारी रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी । 

(2) जहां नियत दिन से पूर्व कोयला बोर्ड के पक्ष में या उसके विरुद्ध किसी वाद या कार्यवाही के लिए कोई वाद-हेतुक या अपील का अधिकार पैदा हुआ है और ऐसे वाद-हेतुक पर किसी वाद या कार्यवाही का संस्थित किया जाना अथवा ऐसी अपील का फाइल किया जाना नियत दिन से पूर्व वर्जित नहीं था वहां, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या उपधारा (1) में निर्दिष्ट सरकारी कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध ऐसा वाद या कार्यवाही संस्थित की जाएगी या ऐसी अपील फाइल की जाएगी । 

15. कोयला बोर्ड के विद्यमान कर्मचारियों की सेवा का अन्तरण-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अथवा किसी संविदा में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कोयला बोर्ड का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, नियत दिन से ही, ऐसी सरकारी कम्पनी या संगठन का, जिसे केन्द्रीय सरकार लिखित रूप में विनिर्दिष्ट करे, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा और यथास्थिति, ऐसी सरकारी कम्पनी या संगठन में अपना पद या सेवा उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर तथा पेंशन, उपदान और अन्य विषयों की बाबत वैसे ही अधिकारों के साथ धारण करेगा जैसे उसे अनुज्ञेय होते यदि कोयला बोर्ड समाप्त न कर दिया जाता, और तब तक ऐसा करना रहेगा जब तक उस सरकारी कम्पनी या संगठन में उसका नियोजन समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक अथवा सेवा के निबन्धन और शर्तें, यथास्थिति, उस सरकारी कम्पनी या संगठन द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं  कर दी जातीं :

परन्तु किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवा की अवधि, पारिश्रमिक और सेवा के अन्य निबन्धनों और शर्तों का परिवर्तन उसके अहित रूप में केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा अथवा ऐसे अनुमोदन के बिना उस दशा के सिवाय नहीं किया जाएगा जिसमें कि वह परिवर्तन सम्बन्धित सरकारी कम्पनी या संगठन के नियमों के अधीन दण्ड के रूप में हो । 

(2) जब कोयला बोर्ड का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी उपधारा (1) के अधीन किसी सरकारी कम्पनी या संगठन का अधिकारी या अन्य कर्मचारी बन जाए तब नियत दिन से पूर्व कोयला बोर्ड के अधीन उसके द्वारा की गई अथवा की गई समझी गई सेवा की अवधि, वेतन और अन्य उपलब्धियां, पेंशन तथा अन्य निवृत्ति-फायदे नियत करने के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, उक्त सरकारी कम्पनी या संगठन के अधीन उसके द्वारा की गई सेवा की अवधि समझी जाएगी मानो वह सरकारी कम्पनी या संगठन उक्त अवधि के दौरान विद्यमान थे ।

16. किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं के अन्तरण के लिए किसी प्रतिकर का दिया जाना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोयला बोर्ड से किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का किसी सरकारी कम्पनी या संगठन को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा । 

अध्याय 4

प्रकीर्ण

17. सद्भापूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या आदेशों के अनुसरण में अथवा कोयला खान (संरक्षण, सुरक्षा और विकास) अधिनियम, 1952 (1952 का 12) या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अनुसरण में सद्भापूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध अथवा कोयला बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के या उसके किसी अधिकारी के अथवा किसी भी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी । 

18. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी । 

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

(क) कोयले के संरक्षण और कोयला खानों में सुरक्षा बनाए रखने के प्रयोजन के लिए किए जाने वाले उपाय; 

(ख) कोयला खानों के विकास के लिए किए जाने वाले उपाय; 

(ग) वह रीति जिसमें और वे शर्तें जिनके अधीन, कोयला खान संरक्षण और विकास खाते में जमा राशियों का उपयोजन किया जा सकेगा; 

(घ) वह प्ररूप जिसमें कोयला खान संरक्षण और विकास खाता रखा जाएगा । 

(ङ) कोई अन्य विषय जिसको विहित किया जाना अपेक्षित हो या जो विहित किया जा सके । 

(3) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन बनाया गया कोई नियम यह उपबन्ध कर सकेगा कि उसका उल्लंघन कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा । 

(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएग किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा । 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                              ।

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