रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1974
(1974 का अधिनियम संख्यांक 57)
[21 दिसम्बर, 1974]
प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों का इस दृष्टि से पुनर्गठन और
पुनरुद्धार करने के लिए कि विभिन्न प्रकार के वस्त्र और सूत के उत्पादन में
वृद्धि और उचित कीमतों पर उनके वितरण द्वारा जनसाधारण का हित
साधन हो सके, ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों का और ऐसे रुग्ण
कपड़ा-उपक्रमों के सम्बन्ध में स्वामियों के अधिकार,
हक और हित का अर्जन और अन्तरण करने के
लिए और उनसे संबंधित या उनके
आनुषंगिक विषयों के लिए
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पच्चीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम,1974 है ।
(2) इस अधिनियम की धारा 32 और 33 के उपबन्ध तुरन्त प्रवृत्त होंगे और इस अधिनियम के शेष उपबन्ध 1974 के अप्रैल के प्रथम दिन प्रवृत्त हुए समझे जाएंगे ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से 1974 के अप्रैल का प्रथम दिन अभिप्रेत है ;
(ख) बैंक" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं-
(i) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक ;
(ii) भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में यथापरिभाषित कोई समनुषंगी बैंक ;
(iii) बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित कोई तत्स्थानी नया बैंक ;
(iv) कोई अन्य बैंक, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 खण्ड (ङ) में यथापरिभाषित अनुसूचित बैंक है ;
(ग) आयुक्त" से धारा 17 के अधीन नियुक्त संदाय आयुक्त अभिप्रेत है ;
(घ) अभिरक्षक" से रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) की धारा 5 के अधीन नियुक्त अभिरक्षक अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत वह व्यक्ति या व्यक्तियों का निकाय भी है जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अधीन कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत है ;
(ङ) राष्ट्रीय कपड़ा निगम" से कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाया गया और रजिस्ट्रीकृत राष्ट्रीय कपड़ा निगम लिमिटेड अभिप्रेत है ;
(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(छ) अध्यादेश" से रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अध्यादेश, 1974 (1974 का 12) अभिप्रेत है ;
(ज) स्वामी" से, जब कि वह किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में प्रयुक्त हुआ है, कोई ऐसा व्यक्ति या फर्म अभिप्रेत है जो रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके किसी भाग का, नियत दिन के ठीक पूर्व, अव्यवहित स्वत्वधारी या पट्टेदार या अधिष्ठाता है और ऐसी कपड़ा कम्पनी की दशा में, जिसका परिसमापन किया जा रहा है या जिसका कारबार समापक या रिसीवर द्वारा चलाया जा रहा है, इसके अन्तर्गत ऐसा समापक या रिसीवर है और ऐसे स्वामी का कोई अभिकर्ता या प्रबन्धक भी, किन्तु इसके अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का निकाय नहीं है जो सम्पूर्ण रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके किसी भाग का प्रबन्ध ग्रहण करने के लिए उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) या रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के अधीन प्राधिकृत किया गया है ।
(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ञ) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम" से प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट ऐसा कपड़ा-उपक्रम अभिप्रेत है जिसका प्रबन्ध, नियत दिन के पूर्व, यथास्थिति, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया है, या रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है ;
(ट) विनिर्दिष्ट तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकती हैं ;
(ठ) समनुषंगी कपड़ा निगम" से राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा अपने समनुषंगी के रूप में बनाया गया कपड़ा निगम अभिप्रेत है ;
(ड) कपड़ा" के अन्तर्गत सूत या तन्तुकृत भी हैं जो या तो पूर्णतः या भागतः कपास, ऊन, जूट, संश्लिष्ट और कृत्रिम (मनुष्यकृत) तन्तु से बने हों ;
(ढ) कपड़ा कम्पनी" से प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (3) में विनिर्दिष्ट ऐसी कम्पनी अभिप्रेत है जो उस अनुसूची के स्तम्भ (2) में तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट कपड़ा-उपक्रम का स्वामित्व रखती है ;
(ण) कपड़ा-उपक्रम" से ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जो कपड़े के विनिर्माण में लगा हुआ है और जिसे कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) के उपबन्ध लागू होते हैं ।
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
(3) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु इसमें या उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में परिभाषित नहीं हैं, किन्तु कम्पनी अधिनियम, 1956 में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में हैं ।
अध्याय 2
रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के स्वामियों के अधिकारों का अर्जन
3. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के सम्बन्ध में स्वामियों के अधिकारों का अर्जन-(1) नियत दिन को प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम और ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में स्वामी के अधिकार, हक और हित, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित हो जाएंगे और उसमें पूर्ण रूप से निहित हो जाएंगे ।
(2) प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम, जो उपधारा (1) के आधार पर केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाता है, उसके इस प्रकार निहित हो जाने के ठीक पश्चात्, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाएगा और उसमें निहित हो जाएगा ।
4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) धारा 3 में निर्दिष्ट रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के बारे में यह समझा जाएगा कि इसके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम सम्पत्ति, जिसके अन्तर्गत भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर भी हैं, रोकड़ बाकी, हाथ-नकदी, आरक्षित निधि, विनिधान तथा बही ऋण और ऐसी सम्पत्ति में या उससे उद्भूत होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियन्त्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे और सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और तत्सम्बन्धी अन्य सभी दस्तावेजें भी हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, और यह भी समझा जाएगा कि इसके अन्तर्गत धारा 5 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व और बाध्यताएं भी हैं ।
(2) यथापूर्वोक्त सभी सम्पत्ति, जो धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, ऐसे निहित होने के आधार पर न्यास, बाध्यता, बन्धक, भार, धारणाधिकार और उसको प्रभावित करने वाले अन्य सभी विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएगी और ऐसी सम्पत्ति के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करने वाली किसी न्यायालय की कुर्की, व्यादेश या डिक्री या आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।
(3) जहां रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत उस तारीख के पूर्व, जिसको अध्यादेश प्रख्यापित किया गया था, किसी भी समय केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा स्वामी को प्रदान की गई है, वहां उस तारीख से राष्ट्रीय कपड़ा निगम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में, उसमें निर्दिष्ट स्वामी के स्थान पर रखा गया है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत उस निगम को प्रदान की गई थी और वह निगम ऐसी अनुज्ञप्ति को या ऐसी अन्य लिखत में विनिर्दिष्ट रुग्ण कपड़ा-उपक्रम को शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए स्वामी ऐसी अनुज्ञप्ति को या ऐसी अन्य लिखत के अधीन रुग्ण कपड़ा-उपक्रम को धारण करता ।
(4) किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो केन्द्रीय सरकार में इस अधिनियम के अधीन निहित हो गई है, प्रत्येक बन्धकदार और किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के अन्दर और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, ऐसे बन्धक, भार, धारणाधिकार और अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा ।
(5) शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का बन्धकदार या किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला कोई अन्य व्यक्ति प्रथम अनुसूची में ऐसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट रकम में से बन्धक धन या अन्य शोध्य रकम के, पूर्णतः या भागतः, संदाय के लिए अपने अधिकारों और हितों के अनुसार दावा करने का हकदार होगा, किन्तु ऐसा कोई बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है ।
(6) यदि, नियत दिन को, रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की बाबत धारा 5 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट किसी विषय के सम्बन्ध में कपड़ा कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित या किया गया कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लम्बित है तो रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के अन्तरण या इस अधिनियम की किसी बात के कारण उसका उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा बल्कि वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकती है, चलाई जा सकती है और प्रवर्तित की जा सकती है ।
(7) कोई व्यक्ति, जो उस तारीख को जिसको अध्यादेश प्रख्यापित किया गया था, धारा 3 में निर्दिष्ट किसी ऐसे सम्पूर्ण रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का, या उसके किसी भाग का, जिसका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश के कारण या अन्यथा ग्रहण नहीं कर सकी थी, कब्जा रखता था या वह उसकी अभिरक्षा या नियंत्रण के अधीन था, ऐसे उपक्रम या उसके भाग का कब्जा और ऐसे उपक्रम या उसके भाग से सम्बन्धित सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और अन्य सभी दस्तावेजें, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम को या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, तत्काल देगा ।
5. स्वामी का कतिपय पहले के दायित्वों के लिए जिम्मेदार होना-(1) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी का नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के सम्बन्ध में ऐसा प्रत्येक दायित्व, जो उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न हो, उसी स्वामी का दायित्व होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा और केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ।
(2) कोई दायित्व, जो-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अथवा दोनों द्वारा ऐसे उपक्रम को दिए गए उधारों (उन पर शोध्य ब्याज सहित),
(ख) राष्ट्रीय कपड़ा निगम या राज्य कपड़ा निगम अथवा दोनों द्वारा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम को (केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात्) दी गई रकमों और उन पर शोध्य ब्याज,
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात् किसी भी अवधि के सम्बन्ध में ऐसे उपक्रम के कर्मचारियों की मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य रकमों,
के सम्बन्ध में उद्भूत होता है, नियत दिन से केन्द्रीय सरकार का दायित्व होगा और उसका निर्वहन उस सरकार के लिए और उसकी ओर से राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा किया जाएगा जैसे ही और जब ऐसे उधारों या रकमों का प्रतिसंदाय शोध्य होता है अथवा जैसे ही और जब ऐसी मजदूरी, वेतन या अन्य शोध्य रकमें शोध्य और संदेय होती हैं ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि-
(क) इस धारा में या इस अधिनियम की किसी अन्य धारा में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में कोई दायित्व, जो उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न है, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ;
(ख) किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण का कोई अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश जो नियत दिन के पूर्व उत्पन्न किसी ऐसे मामले, दावे या विवाद के बारे में, नियत दिन के पश्चात् पारित किया गया है, जो उपधारा (2) में निर्दिष्ट नहीं है केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ;
(ग) तत्समय प्रवृत्ति विधि के किसी उपबन्ध के, नियत दिन के पूर्व किए गए उल्लंघन के लिए रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का या उसके किसी स्वामी का कोई दायित्व, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में राज्य कपड़ा निगम" से ऐसा निगम अभिप्रेत है जो किसी राज्य में कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाया गया और रजिस्ट्रीकृत है और जो किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के प्रबन्ध का, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अधीन प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में या रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के अधीन अभिरक्षक के रूप में भारसाधक है और इसके अन्तर्गत पश्चिमी बंगाल राज्य कपड़ा निगम लिमिटेड भी है जिसने उस राज्य में रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों को रकमें उधार दी हैं ।
6. राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा समनुषंगी निगमों का बनाया जाना-(1) यदि राष्ट्रीय कपड़ा निगम ऐसा करना आवश्यक समझे तो वह कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन समनुषंगी निगम बना सकता है और उनको उस अधिनियम के अधीन रजिस्टर करा सकता है ।
(2) राष्ट्रीय कपड़ा निगम, लिखित आदेश द्वारा, कोई रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसका कोई भाग समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित कर सकता है और कोई ऐसा अन्तरण ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन होगा जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(3) समनुषंगी कपड़ा निगम, ऐसे अन्तरण की तारीख से, धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के स्थान पर रखा गया समझा जाएगा मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत समनुषंगी कपड़ा निगम को प्रदान की गई थी और वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत को शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत को धारण करता ।
(4) समनुषंगी कपड़ा निगम को किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके किसी भाग का अन्तरण किए जाने पर उन दायित्वों का, जिनका धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा निर्वहन किया जाना अपेक्षित है, जहां तक उनका सम्बन्ध इस प्रकार समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके भाग से है, ऐसे अन्तरण की तारीख से, समनुषंगी कपड़ा निगम द्वारा निर्वहन किया जाएगा जैसे ही और जब ऐसे किसी दायित्व का निर्वहन किया जाना अपेक्षित हो ।
(5) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वे किसी ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके किसी भाग के सम्बन्ध में जो समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित किया जाता है, समनुषंगी कपड़ा निगम के प्रति निर्देश हैं ।
7. केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित आस्तियों के मूल्य के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा शेयरों का निर्गमन-(1) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित और उसमें निहित रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की आस्तियों के मूल्य के बराबर रकम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कपड़ा निगम की साधारण पूंजी में किया गया अभिदाय है और इस प्रकार किए गए अभिदाय के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम केन्द्रीय सरकार को, अपनी साधारण पूंजी में, समादत्त शेयर (यदि आवश्यक हो तो अपने संगम-ज्ञापन और संगम-अनुच्छेद का संशोधन करने के पश्चात्) निर्गमित करेगा जिनका अंकित मूल्य प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (4) में तत्स्थानी प्रविष्टि में रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर होगा ।
(2) जहां इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किए गए किसी दायित्व को, राष्ट्रीय कपड़ा निगम, धारा 27 के अधीन ग्रहण कर लेता है वहां केन्द्रीय सरकार उस निगम को ऐसे शेयर अभ्यर्पित कर देगी जो उसे उपधारा (1) के अधीन निर्गमित किए गए थे और जिनका अंकित मूल्य राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा इस प्रकार ग्रहण किए गए दायित्व की रकम के बराबर होगा और तब राष्ट्रीय कपड़ा निगम की शेयर पूंजी, इस प्रकार अभ्यर्पित शेयरों के अंकित मूल्य के बराबर कम हो जाएगी ।
अध्याय 3
रकम का संदाय
8. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के स्वामियों को रकम का संदाय-प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को केन्द्रीय सरकार द्वारा, ऐसा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम और ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में स्वामी के अधिकार, हक और हित, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन उसको अन्तरित और उसमें निहित होने के लिए, प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (4) में तत्स्थानी प्रविष्टि में उसके सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर रकम, नकद रूप में और अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट रीति से दी जाएगी ।
9. अतिरिक्त रकम का संदाय-(1) धारा 3, धारा 4 और धारा 5 के उपबन्धों के भूतलक्षी प्रवर्तन को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के, जिसका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण कर लिया गया है, स्वामी को केन्द्रीय सरकार द्वारा, रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) की धारा 6 में विनिर्दिष्ट दर पर संगणित रकम के बराबर रकम, नियत दिन को प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको अध्यादेश प्रख्यापित किया गया था, समाप्त होने वाली अवधि के लिए, नकद रूप में दी जाएगी ।
(2) धारा 8 में निर्दिष्ट रकम के अतिरिक्त, केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को उस रकम पर, जो प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (4) में तत्स्थानी प्रविष्टि में ऐसे स्वामी के सामने विनिर्दिष्ट है, चार प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज, उस तारीख को, जिसको अध्यादेश प्रख्यापित किया गया था, प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको ऐसी रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि के लिए, नकद रूप में दिया जाएगा ।
(3) उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दर पर संगणित ब्याज की रकम उस रकम के अतिरिक्त दी जाएगी जो प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट है ।
10. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के स्वामियों द्वारा लेखाओं का दिया जाना-(1) जहां किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश के अनुसरण में या अन्यथा, केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण करने से निवारित कर दिया गया था वहां ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का स्वामी-
(क) ऐसे उपक्रम की दशा में, जिसका प्रबन्ध तत्पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा अध्यादेश की प्रख्यापना की तारीख के पूर्व किसी भी समय ग्रहण किया गया था, ऐसी तारीख से साठ दिन के अन्दर ; या
(ख) किसी ऐसे अन्य रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की दशा में, जिसका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा अध्यादेश की प्रख्यापना की तारीख के पूर्व ग्रहण नहीं किया जा सका था, ऐसी तारीख से साठ दिन के अन्दर,
यथास्थिति, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अधीन अधिसूचित आदेश की तारीख को या रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के प्रारम्भ की तारीख को प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक द्वारा ग्रहण किया गया था, समाप्त होने वाली अवधि के सम्बन्ध में निम्नलिखित की बाबत लेखे देगा, अर्थात् :-
(i) उक्त अवधि के दौरान रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की आस्तियां और स्टोर जो उसने अर्जित किए हैं या जिनका उसने विक्रय किया है ;
(ii) उक्त अवधि के दौरान विक्रय किया गया या भेजा गया कपड़ा ; और
(iii) उक्त अवधि के दौरान स्वामी द्वारा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम से प्राप्त की गई आय ।
(2) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट लेखाओं की परीक्षा करने पर यह पाया जाता है कि कोई आय उस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि के दौरान रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी द्वारा प्राप्त की गई है तो ऐसी आय ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को धारा 8 के अधीन संदेय रकम में से केन्द्रीय सरकार द्वारा वसूल की जा सकेगी और केन्द्रीय सरकार को इस मद्धे शोध्य ऋण अप्रतिभूत ऋण के समान होगा ।
(3) यदि रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी द्वारा कोई लेखा उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि के अन्दर नहीं दिया जाता है या यदि केन्द्रीय सरकार को यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे स्वामी द्वारा दिए गए लेखे की तात्त्विक विशिष्टियां गलत या मिथ्या हैं तो केन्द्रीय सरकार मामले को आयुक्त को निर्देशित कर सकती है और तब आयुक्त रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी द्वारा उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि के दौरान प्राप्त की गई आय का अवधारण करेगा और धारा 8 के अधीन रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को संदेय रकम में से उक्त आय को वसूल करने के लिए कदम उठाएगा मानो केन्द्रीय सरकार को इस मद्धे शोध्य ऋण अप्रतिभूत ऋण हो ।
(4) किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसकी किसी आस्ति के सम्बन्ध में कोई बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य विल्लंगम केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम पर बाध्यकर नहीं होगा, यदि ऐसा बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य विल्लगंम उस अवधि के दौरान किसी समय सृष्ट किया गया था जिसमें केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश द्वारा या अन्यथा उक्त रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध ग्रहण करने से निवारित किया गया था ।
अध्याय 4
रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों का प्रबन्ध, आदि
11. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों का प्रबन्ध आदि-राष्ट्रीय कपड़ा निगम या कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे वह निगम, लिखित आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे, उस रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के, जिसके सम्बन्ध में स्वामी के अधिकार, हक और हित धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन उस निगम में निहित हो गए हैं, कार्यकलापों और कारबार के साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबंध की शक्तियों का प्रयोग करने का और ऐसी सभी बातें करने का हकदार होगा जिन शक्तियों का प्रयोग करने और जिन बातों को करने के लिए रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का स्वामी प्राधिकृत है ।
[11क. कतिपय परिस्थितियों में रुग्ण कपड़ा उपक्रमों की आस्तियों के व्ययन के लिए विशेष उपबंध-यदि राष्ट्रीय कपड़ा निगम, किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के बेहतर प्रबंध, आधुनिकीकरण, पुनःसंरचना या पुनरुज्जीवन के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझता है तो वह केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, रुग्ण कपड़ा उपक्रमों में से किसी की किसी भूमि, संयंत्र, मशीनरी या किसी अन्य आस्ति का अंतरण, बंधक, विक्रय या अन्यथा व्ययन कर सकेगा :
परन्तु ऐसे किसी अंतरण, बंधक, विक्रय या व्ययन के आगमों का उपयोग उस प्रयोजन से, जिसके लिए केन्द्रीय सरकार की मंजूरी अभिप्राप्त की गई है, भिन्न किसी प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा ।]
12. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के प्रबन्ध के भारसाधक व्यक्तियों का सभी आस्तियों, आदि का परिदान करने का कर्तव्य-किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के प्रबन्ध के राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो जाने पर ऐसे सभी व्यक्ति, जो ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के प्रबन्ध के ऐसे निहित हो जाने के ठीक पूर्व भारसाधक थे, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को रुग्ण कपड़ा-उपक्रम से सम्बन्धित ऐसी सभी आस्तियां, लेखा बहियां, रजिस्टर या अन्य दस्तावेजें, जो उनकी अभिरक्षा में हैं, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे ।
13. लेखे-राष्ट्रीय कपड़ा निगम, रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के लेखे कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के उपबन्धों के अनुसार रखेगा ।
अध्याय 5
रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के कर्मचारियों के बारे में उपबन्ध
14. कतिपय कर्मचारियों के नियोजन का चालू रहना-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम,1947 (1947 का 14) के अर्थ में कर्मकार है और नियत दिन के ठीक पूर्व रुग्ण कपड़ा-उपक्रम में नियोजित रहा है, नियत दिन से, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और राष्ट्रीय कपड़ा निगम में पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे अनुज्ञेय होते यदि ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में अधिकार राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित न किए जाते और उसमें निहित न हो जाते और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक उस राष्ट्रीय कपड़ा निगम में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक, नियोजन के निबन्धन और शर्तें राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं ।
(2) प्रत्येक व्यक्ति, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अर्थ में कर्मकार नहीं है और नियत दिन के ठीक पूर्व रुग्ण कपड़ा-उपक्रम में नियोजित रहा है, जहां तक ऐसा व्यक्ति उस रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में नियोजित किया जाता है जो राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गया, नियत दिन से, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और वह उसमें उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर और पेंशन और उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या अपनी सेवा धारण करेगा जैसा कि वह उस रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के अधीन धारण करता यदि वह राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित न हो जाता और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक उस राष्ट्रीय कपड़ा निगम में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक, नियोजन के निबन्धन और शर्तें राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं :
परन्तु किसी ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में, जिसका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के अधीन किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश के कारण ग्रहण नहीं किया जा सका था, कोई अभिकर्ता, निदेशक (जिसके अन्तर्गत प्रबन्ध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक भी है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) या प्रबन्धक राष्ट्रीय कपड़ा निगम का कर्मचारी नहीं हो जाएगा ।
(3) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम में नियोजित किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की सेवाओं का राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
(4) जहां, सेवा की किसी संविदा के निबन्धनों के अधीन या अन्यथा, कोई ऐसा व्यक्ति, जिसकी सेवाएं इस अधिनियम के उपबन्धों के कारण समाप्त हो जाती हैं या राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाती हैं, वेतन या मजदूरी की किन्हीं बकाया का या न ली गई किसी छुट्टी के लिए किसी संदाय का या किसी ऐसे संदाय का जो उपदान या पेंशन के तौर पर संदाय नहीं है, हकदार है वहां ऐसा व्यक्ति, उस दायित्व को छोड़कर जो केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 5 के अधीन ग्रहण कर लिया गया है, अपना दावा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के विरुद्ध प्रवर्तित करा सकता है किन्तु केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तित नहीं करा सकता ।
15. भविष्य और अन्य निधियां-(1) जहां रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी ने ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए कोई भविष्य निधि, अधिवार्षिकी, कल्याण या अन्य निधि स्थापित की है, वहां ऐसे कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं राष्ट्रीय कपड़ा निगम को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अन्तरित हो गई हैं, संबंधित धनराशियां ऐसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी, कल्याण या अन्य निधि के खाते में, नियत दिन को, जमा धनराशियों में से राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगी ।
(2) उन धनराशियों के संबंध में, जो उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाती हैं, उस निगम द्वारा ऐसी रीति से कार्रवाई की जाएगी जो विहित की जाए ।
16. समनुषंगी कपड़ा निगम को कर्मचारियों का अन्तरण-जहां कोई रुग्ण कपड़ा-उपक्रम या उसका कोई भाग समनुषंगी कपड़ा निगम को इस अधिनियम के अधीन अन्तरित किया जाता है वहां धारा 14 की उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे अन्तरण की तारीख से, समनुषंगी कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और धारा 14 और धारा 15 के उपबन्ध ऐसे कर्मचारी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे राष्ट्रीय कपड़ा निगम के किसी कर्मचारी को लागू होते हैं मानों उक्त धाराओं में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के प्रति निर्देश समनुषंगी कपडा निगम के प्रति निर्देश थे ।
अध्याय 6
संदाय आयुक्त
17. संदाय आयुक्तों की नियुक्ति-(1) प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को संदेय रकमों के वितरण के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-
(क) उतने व्यक्तियों को संदाय आयुक्त नियुक्त करेगी जितने वह ठीक समझे ; और
(ख) उन स्थानीय सीमाओं का परिनिश्चय करेगी जिनके भीतर संदाय आयुक्त इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उनको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे और उन पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करेंगे ।
(2) केन्द्रीय सरकार ऐसे अन्य व्यक्तियों को आयुक्त की सहायता के लिए नियुक्त कर सकती है जिन्हें वह ठीक समझे और तब आयुक्त ऐसे व्यक्तियों में एक या अधिक को इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकता है और विभिन्न व्यक्तियों को विभिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकता है ।
(3) कोई व्यक्ति जो किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किया गया है उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदत्त की गई थीं और प्राधिकरण के रूप में प्रदान नहीं की गई थीं ।
(4) इस धारा के अधीन नियुक्त आयुक्त और अन्य व्यक्तियों के वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि में से चुकाए जाएंगे ।
(5) जहां एक से अधिक आयुक्त नियुक्त किए गए हैं, वहां इस अधिनियम में आयुक्त के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वे उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में आयुक्त के प्रति निर्देश हैं ।
18. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर, आयुक्त को रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को संदाय करने के लिए, प्रथम अनुसूची में रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर रकम नकद रूप में देगी और आयुक्त को ऐसी धनराशियां भी देगी जो रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को धारा 9 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन शोध्य हों ।
(2) ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के सम्बन्ध में, जिनका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अधीन ग्रहण किया गया था, केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को उस तारीख को जिसको ऐसा प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया था, प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन को समाप्त होने वाली अवधि के लिए रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) की धारा 6 में विनिर्दिष्ट दर पर संगणित रकम [उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम के अतिरिक्तट नकद रूप में दी जाएगी ।
(3) ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के सम्बन्ध में, जिनका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) के अधीन ग्रहण किया गया था, केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को उस अधिनियम की धारा 6 के अधीन संदेय ऐसी रकम, जो उस तारीख को, जिसको ऐसा प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया था, प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन को समाप्त होने वाली अवधि की बाबत असंदत्त रह गई है [उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम के अतिरिक्तट नकद रूप में दी जाएगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार भारत के लोक-लेखे में आयुक्त के नाम से एक निक्षेप खाता खोलेगी और इस अधिनियम के अधीन आयुक्त को दी गई प्रत्येक रकम उसके द्वारा भारत के लोक-लेखे में उक्त निक्षेप खाते में जमा की जाएगी और उसके पश्चात् आयुक्त उक्त निक्षेप खाते को चलाएगा ।
(5) आयुक्त ऐसे प्रत्येक रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की बाबत, जिसके सम्बन्ध में इस अधिनियम के अधीन उसे संदाय किए गए हैं, अलग-अलग अभिलेख रखेगा ।
(6) उपधारा (4) में निर्दिष्ट निक्षेप खाते में जमा रकमों पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज, रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के स्वामियों के फायदे के लिए काम आएगा ।
19. राष्ट्रीय कपड़ा निगम की कतिपय शक्तियां-(1) राष्ट्रीय कपड़ा-निगम, अन्य सभी व्यक्तियों का अपवर्जन करके, नियत दिन के पश्चात् वसूल किया गया रुग्ण कपड़ा-उपक्रम को शोध्य धन, विनिर्दिष्ट तारीख तक प्राप्त करने का हकदार होगा, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी वसूली नियत दिन के पूर्व की अवधि से सम्बन्ध रखती है ।
(2) राष्ट्रीय कपड़ा निगम, आयुक्त को प्रत्येक ऐसे संदाय के संबंध में दावा कर सकता है जो, अभिरक्षक द्वारा नियत दिन के पश्चात् किन्तु इस तारीख के पूर्व जिसको अध्यादेश रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के सम्बन्ध में किसी दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रख्यापित किया गया था और ऐसे प्रत्येक दावे को उन पूर्विकताओं के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी जो उस विषय को इस अधिनियम के अधीन प्राप्त है जिसकी बाबत ऐसे दायित्व का निर्वहन अभिरक्षक द्वारा किया गया है ।
(3) इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में दायित्व, जिनका अभिरक्षक द्वारा निर्वहन नहीं किया गया है, उस रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के दायित्व होंगे ।
20. आयुक्त के समक्ष दावों का किया जाना-प्रत्येक व्यक्ति जिसका किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के विरुद्ध कोई दावा है ऐसा दावा विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर आयुक्त के समक्ष करेगा :
परन्तु यदि आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि दावेदार पर्याप्त कारण से तीस दिन की उक्त अवधि के अन्दर दावा करने से निवारित रहा था तो वह तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के अन्दर दावा ग्रहण कर सकता है किन्तु इसके पश्चात् ग्रहण नहीं कर सकता ।
21. दावों की पूर्विकता-द्वितीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों से उद्भूत होने वाले दावों को निम्नलिखित सिद्धान्तों के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी, अर्थात् :-
(क) प्रवर्ग 1 को अन्य सभी प्रवर्गों पर अग्रता दी जाएगी और प्रवर्ग 2 को प्रवर्ग 3 पर अग्रता दी जाएगी और इस प्रकार आगे भी ;
(ख) प्रत्येक प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दावे, सिवाय प्रवर्ग 4 के, एक समान होंगे और पूर्णतः संदत्त किए जाएंगे, किन्तु यदि रकम ऐसे दावों को पूर्णतः चुकाने के लिए अपर्याप्त हो तो वे समानुपात में कम कर दिए जाएंगे और तद्नुसार संदत्त किए जाएंगे ;
(ग) प्रवर्ग 4 में विनिर्दिष्ट दायित्वों का निर्वहन, इस धारा में विनिर्दिष्ट पूर्विकताओं के अधीन रहते हुए, प्रतिभूत उधारों के निबन्धनों और ऐसे उधारों की परस्पर पूर्विकता के अनुसार किया जाएगा ; और
(घ) किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट विषय की बाबत दायित्व के संदाय का प्रश्न तब उठेगा जब उसके ठीक उच्चतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट सभी दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अधिशेष रह जाए ।
22. दावों की परीक्षा-(1) आयुक्त, धारा 20 के अधीन दावों की प्राप्ति पर, उन्हें द्वितीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट पूर्विकता के अनुसार क्रमबद्ध करेगा और उक्त क्रम से उनकी परीक्षा करेगा ।
(2) यदि दावों की परीक्षा करने पर, आयुक्त की यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त रकम किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह ऐसे निम्नतर प्रवर्ग की बाबत दायित्वों की परीक्षा करे ।
23. दावों का स्वीकार या अस्वीकार किया जाना-(1) द्वितीय अनुसूची में उपवर्णित पूर्विकता के प्रति निर्देश से दावों की परीक्षा करने के पश्चात्, आयुक्त ऐसी कोई निश्चित तारीख नियत करेगा जिसको या जिसके पूर्व प्रत्येक दावेदार अपने दावे का सबूत फाइल करेगा या आयुक्त द्वारा किए गए संवितरण के फायदे से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
(2) इस प्रकार नियत तारीख के बारे में कम से कम चौदह दिन की सूचना ऐसे अंग्रेजी भाषा के दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में और ऐसे प्रादेशिक भाषा के दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में, जो आयुक्त उपयुक्त समझे, विज्ञापन द्वारा दी जाएगी और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत आयुक्त के समक्ष विज्ञापन में विनिर्दिष्ट समय के अन्दर फाइल करे ।
(3) प्रत्येक दावेदार, जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट समय के अन्दर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहता है, आयुक्त द्वारा किए गए संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
(4) आयुक्त, ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात् जो उसकी राय में आवश्यक है, और रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को दावे का खण्डन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् लिखित रूप में दावे को पूर्णतः या भागतः स्वीकार करेगा या अस्वीकार करेगा ।
(5) आयुक्त को, अपने कृत्यों के निर्वहन से उद्भूत होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं जहां वह अपनी बैठकें करेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए उसे वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों की बाबत वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-
(क) किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;
(ख) किसी दस्तावेज या अन्य भौतिक पदार्थ का, जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हो, प्रकटीकरण और पेश किया जाना ;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना ;
(घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
(6) आयुक्त के समक्ष कोई अन्वेषण, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
(7) कोई दावेदार, जो आयुक्त के विनिश्चय से असन्तुष्ट है, उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील आरम्भिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायालय में कर सकता है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह रुग्ण कपड़ा-उपक्रम स्थित है :
परन्तु जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है, वहां ऐसी अपील उस राज्य के उच्च न्यायालय को की जाएगी जिसमें वह रुग्ण कपड़ा-उपक्रम स्थित है और वह अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी ।
24. आयुक्त द्वारा दावेदारों को धन का संवितरण-इस अधिनियम के अधीन दावा स्वीकार करने के पश्चात् ऐसे दावे की बाबत शोध्य रकम आयुक्त द्वारा सुसंगत निधि में जमा की जाएगी या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को संदत्त की जाएगी जिन्हें ऐसी धनराशियां शोध्य हैं और ऐसे जमा या संदाय किए जाने पर ऐसे दावे की बाबत स्वामी के दायित्व का निर्वहन हो जाएगा ।
25. रुग्ण कपड़ा-उपक्रमों के स्वामियों को रकमों का संवितरण-(1) यदि रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में आयुक्त को संदत्त धनराशियों में से, द्वितीय अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अतिशेष रह जाता है तो वह उस अतिशेष का संवितरण ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी को कोई संदाय करने के पूर्व आयुक्त ऐसी सम्पूर्ण रकम या उसका कोई भाग प्राप्त करने के ऐसे व्यक्ति के अधिकार के बारे में अपना समाधान करेगा और यदि धारा 8 और धारा 9 में निर्दिष्ट सम्पूर्ण रकम या उसका कोई भाग प्राप्त करने के उस व्यक्ति के अधिकार के बारे में कोई शंका या विवाद है, तो आयुक्त वह मामला न्यायालय को निर्देशित करेगा और न्यायालय के विनिश्चय के अनुसार संवितरण करेगा ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (3) में की प्रविष्टियां उक्त अनुसूची के स्तम्भ (2) में की तत्स्थानी प्रविष्टियों में विनिर्दिष्ट किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति के अधिकार, हक और हित के बारे में निश्चायक नहीं समझी जाएंगी और ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति का अधिकार, हक और हित स्थापित करने के लिए साक्ष्य ग्राह्य होगा ।
(4) जहां रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की कोई मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति, राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गई है किन्तु ऐसी मशीनरी, उपस्कर या सम्पत्ति ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी की नहीं है वहां प्रथम अनुसूची के स्तम्भ (4) में ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम, न्यायालय को आयुक्त द्वारा किए गए निर्देश पर, न्यायालय द्वारा ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी और ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति के स्वामी के बीच, ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति का नियत दिन को जो मूल्य था उसका सम्यक् ध्यान रखते हुए, प्रभाजित की जाएगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में, न्यायालय" से किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के संबंध में आरम्भिक अधिकारिता वाला वह प्रधान सिविल न्यायालय अभिप्रेत है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह रुग्ण कपड़ा-उपक्रम स्थित है ।
26. असंवितरित या अदावाकृत रकमों का साधारण राजस्व खाते में जमा किया जाना-आयुक्त को संदत्त कोई धन, जो उस अंतिम दिन से, जिस दिन संवितरण किया गया था, तीन वर्ष की अवधि तक असंवितरित या अदावाकृत रहता है, आयुक्त द्वारा केन्द्रीय सरकार के साधारण राजस्व खाते में अन्तरित किया जाएगा, किन्तु इस प्रकार अन्तरित किसी धन के लिए कोई दावा ऐसे संदाय के हकदार व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को किया जा सकता है और उस संबंध में कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा अन्तरण नहीं किया गया था और दावे के संदाय के लिए आदेश, यदि कोई हो, राजस्व के प्रतिदाय के लिए आदेश माना जाएगा ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
27. दायित्व का ग्रहण किया जाना-(1) जहां किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी के किसी ऐसे दायित्व का, जो द्वितीय अनुसूची के प्रवर्ग 1 में विनिर्दिष्ट किसी मद से उद्भूत हुआ है, आयुक्त को इस अधिनियम के अधीन संदत्त रकम में से, आयुक्त द्वारा पूर्णतया निर्वहन नहीं किया जाता है वहां आयुक्त केन्द्रीय सरकार को उतने दायित्व की, जितने का निर्वहन नहीं हुआ है, सूचना लिखित रूप में देगा और वह दायित्व केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया जाएगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को यह निदेश दे सकती है कि वह उपधारा (1) के अधीन उस सरकार द्वारा ग्रहण किए गए किसी दायित्व को ग्रहण करे और ऐसे निदेश की प्राप्ति पर, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे दायित्व का निर्वहन करे ।
28. प्रबंध का अभिरक्षक में तब तक निहित रहना जब तक आनुकल्पिक इंतजाम न किए जाएं-इस अधिनियम के अधीन किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित होने पर भी,-
(क) जब तक राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा आनुकल्पिक इंतजाम न किए जाएं तक तक ऐसा अभिरक्षक, जो उस तारीख के पूर्व जिसको अध्यादेश प्रख्यापित किया गया था, ऐसे उपक्रम के कार्यकलापों का प्रबंध कर रहा हो, ऐसे उपक्रम के कार्यकलापों का प्रबंध ऐसे करता रहेगा मानो वह अभिरक्षक ऐसे उपक्रम के कार्यकलापों का प्रबंध करने के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा प्राधिकृत किया गया था ; और
(ख) जब तक राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा आनुकल्पिक इंतजाम न किए जाएं तब तक अभिरक्षक या उसके द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति, रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के संबंध में, बैंक में ऐसे उपक्रम के किसी खाते को चलाने के लिए वैसे ही प्राधिकृत किया जाता रहेगा मानो ऐसा अभिरक्षक या उस अभिरक्षक द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति ऐसा खाता चलाने के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा प्राधिकृत किया गया था ।
29. अधिनियम अन्य सभी अधिनियमितियों का अध्यारोहण करेगा-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
30. संविदाओं का प्रभावी न रहना जब तक कि राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा अनुसमर्थन न कर दिया जाए-(1) किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के स्वामी या अधिष्ठाता द्वारा की गई और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त प्रत्येक संविदा उस तारीख से जिसको इस अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, एक सौ अस्सी दिन की समाप्ति से प्रभावी नहीं रहेगी जब तक कि ऐसी संविदा उस अवधि की समाप्ति के पूर्व राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा लिखित रूप में अनुसमर्थित नहीं कर दी जाए और राष्ट्रीय कपड़ा निगम ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने में, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, ऐसे परिवर्तन या उपान्तर कर सकेगा जो वह ठीक समझे :
परन्तु राष्ट्रीय कपड़ा निगम किसी संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार और किसी संविदा में कोई परिवर्तन या उपान्तर तब तक नहीं करेगा जब तक उसका यह समाधान नहीं हो जाता कि ऐसी संविदा अनुचित रूप से दुर्भर है या दुर्भाव से की गई है या रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के हितों के लिए अहितकर है ।
(2) राष्ट्रीय कपड़ा निगम संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार और उसमें कोई परिवर्तन या उपांतर, उस संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना, और संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार करने के या उसमें कोई परिवर्तन या उपान्तर करने के अपने कारणों को लेखबद्ध किए बिना, नहीं करेगा ।
31. कतिपय दशाओं में आस्तियों, आदि के अन्तरण का शून्य होना-(1) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (प्रबंध-ग्रहण) अधिनियम, 1972 (1972 का 72) की अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम का स्वामी, जिसका प्रबंध किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश के कारण या अन्यथा केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण नहीं किया जा सका था, लोक सभा में रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधेयक, 1974 के पुरःस्थापित किया जाने की तारीख से, उक्त रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति या अन्य आस्तियों को केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना विक्रय या बंधक द्वारा या अन्यथा अन्तरित नहीं करेगा और ऐसा अन्तरण, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना, शून्य और अप्रवर्तनशील होगा ।
(2) जो कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
32. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति,-
(क) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की भागरूप जो सम्पत्ति उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, उस सम्पत्ति को केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम से या, यथास्थिति, उस सरकार या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति से सदोष विधारित करेगा, या
(ख) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा या ऐसे रुग्ण कपड़ा-उपक्रम से संबंधित किसी दस्तावेज को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, जानबूझकर विधारित करेगा या केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम को, या, यथास्थिति, उस सरकार या निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को देने में असफल रहेगा अथवा रुग्ण कपड़ा-उपक्रम से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा बहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उसकी अभिरक्षा में हैं, राष्ट्रीय कपड़ा निगम या उस निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को देने में असफल रहेगा, या
(ग) किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन कोई ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह मिथ्या है या बिल्कुल गलत है,
वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
33. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
34. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या उस सरकार के किसी अधिकारी के या अभिरक्षक के या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के या किसी समनुषंगी कपड़ा निगम के या ऐसे निगमों में से किसी निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
35. कपड़ा कम्पनियों का न्यायालय द्वारा परिसमापन न किया जाना-किसी ऐसी कपड़ा कम्पनी के, जिसके स्वामित्व में के रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में अधिकार, हक और हित इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गए हैं, परिसमापन के लिए या उस रुग्ण कपड़ा-उपक्रम के कारबार की बाबत रिसीवर की नियुक्ति के लिए कोई कार्यवाही, किसी न्यायालय में केन्द्रीय सरकार की सहमति के बिना, नहीं होगी या नहीं की जाएगी ।
36. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य, धारा 37 के अधीन शक्ति से भिन्न, सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया जाता है तब वह व्यक्ति, जिसको ऐसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया गया है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा ।
37. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह समय जिसके अन्दर और वह रीति जिससे धारा 4 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट सूचना दी जाएगी ;
(ख) वह रीति जिससे धारा 15 में निर्दिष्ट किसी भविष्य निधि या अन्य निधि में की धनराशियों के संबंध में कार्रवाई की जाएगी ;
(ग) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जा सकता है ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
38. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :
परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होने की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
39. राज्य की नीति के बारे में घोषणा-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 39 के खण्ड (ख) में उल्लिखित तत्त्वों का प्रयोग सुनिश्चित करने के लिए राज्य की नीति को प्रभावी करने के लिए है ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में, राज्य" का वही अर्थ है जो संविधान के अनुच्छेद 12 में है ।
40. निरसन और व्यावृत्ति-(1) रुग्ण कपड़ा-उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अध्यादेश, 1974 (1974 का 12) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी यह है कि इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
प्रथम अनुसूची
[धारा 2(ज), 8 और 18 देखिए]
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क्रम सं० |
उपक्रम का नाम |
स्वामी का नाम |
रकम (रुपयों में) |
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(1) |
(2) |
(3) |
(4) |
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1. |
अडोनी काटन मिल्स, अलूर रोड, अडोनी (आंध्र प्रदेश) |
अडोनी काटल मिल्स लिमिटेड, 22, बेल बिल्डिंग, सर पी० एम० रोड, मुम्बई-1 |
10,79,000 |
|
|
2. |
अहमदाबाद जूपीटर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, मिल सं० 1, दधीचि रोड, अहमदाबाद (गुजरात) |
|
अहमदाबाद जूपीटर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, दधीचि रोड, अहमदाबाद । |
1,39,06,000 |
|
3. |
अहमदाबाद जूपीटर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, मिल सं० 2, परेल मुम्बई-13 (महाराष्ट्र) |
|
2,35,68,000 |
|
|
4. |
अहमदाबाद न्यू टैक्सटाइल मिल्स, रायुपर गेट के बाहर, अहमदाबाद (गुजरात) |
अहमदाबाद न्यू टैक्सटाइल कम्पनी लिमिटेड, रायुपर गेट के बाहर, अहमदाबाद । |
93,44,000 |
|
|
5. |
अयोध्या टैक्सटाइल मिल्स, आजादपुर, दिल्ली-33 |
अयोध्या टैक्सटाइल मिल्स लिमिटेड, 23-24, राधा बाजार स्ट्रीट, कलकत्ता-1 |
8,41,000 |
|
|
6. |
अलगप्पा टैक्सटाइल (कोचीन) मिल्स, अलगप्पानगर (केरल) |
अलगप्पा टैक्सटाइल (कोचीन) लिमिटेड, अलगप्पानगर (केरल) । |
43,62,000 |
|
|
7. |
अनन्तपुर काटन मिल्स, ताडपत्री (आंध्र प्रदेश) |
अनन्तपुर काटन मिल्स लिमिटेड, ताडपत्री (आंध्र प्रदेश) । |
2,97,000 |
|
|
8. |
अपोलो मिल्स, एन० एम० जोशी मार्ग, चिंचपोकली, मुम्बई-11 (महाराष्ट्र) |
अपोलो मिल्स लिमिटेड, एन० एम० जोशी मार्ग, चिंचपोकली, मुम्बई-11 (महाराष्ट्र) । |
1,20,37,000 |
|
|
9. |
आरती काटन मिल्स, दास नगर, हावड़ा (पश्चिमी बंगाल) |
आरती काटन मिल्स लिमिटेड, 29, स्ट्रेण्ड रोड, कलकत्ता-1 |
4,85,000 |
|
|
10. |
एसोसिएटेड इन्डस्ट्रीज (आसाम) (स्पिनिंग यूनिट), चन्द्रपुर, जिला कामरूप (आसाम) |
एसोसिएटेड इन्डस्ट्रीज (आसाम), चन्द्रपुर, जिला कामरूप, आसाम । |
14,14,000 |
|
|
11. |
औरंगाबाद मिल्स, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) |
औरंगाबाद मिल्स लिमिटेड, 16, हिमगिरि पदम् टीकरी, पेडूर रोड, मुम्बई-26 |
1,000 |
|
|
12. |
आजम जाही मिल्स, वारंगल (आंध्र प्रदेश) |
आजम जाही मिल्स लिमिटेड, 159, गनफाउण्डरी रोड, हैदराबाद । |
92,95,000 |
|
|
13. |
बलराम वर्मा टैक्सटाइल मिल्स, शैन्कोट्टा (तमिलनाडु) |
बलराम वर्मा टैक्सटाइल्स लिमिटेड, शैन्कोट्टा (तमिलनाडु) । |
34,00,000 |
|
|
14. |
बंगश्री काटन मिल्स, सोदपुर (पश्चिमी बंगाल) |
बंगश्री काटन मिल्स लिमिटेड, चन्द्रचूड सदन, सोदपुर, 24-परगना (पश्चिमी बंगाल) । |
4,85,000 |
|
|
15.
|
बंगाल फाइन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, मिल सं० 1, कौन्नागर, जिला हुगली (पश्चिमी बंगाल) |
|
बंगाल फाइन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड, 7, बिपिन बिहारी गांगुली स्ट्रीट, कलकत्ता । |
15,16,000 |
|
16. |
बंगाल फाइन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, मिल सं० 2, काटगंज, जिला नादिया (पश्चिमी बंगाल) |
|
11,96,000 |
|
|
17. |
बंगाल लक्ष्मी काटन मिल्स, सीरामपुर, जिला हुगली (पश्चिमी बंगाल) |
बंगाल लक्ष्मी काटन मिल्स लिमिटेड, 7, चौरंगी रोड, कलकत्ता । |
22,00,000 |
|
|
18. |
बंगाल नागपुर काटन मिल्स, राजनंदगांव (मध्य प्रदेश) |
बंगाल नागपुर काटन मिल्स लिमिटेड, 4, लाइएन्ज रैंज, कलकत्ता । |
69,71,000 |
|
|
19. |
बंगाल टैक्सटाइल मिल्स, काशिमबाजार (पश्चिमी बंगाल) |
बंगाल टैक्सटाइल मिल्स लिमिटेड, मर्केन्टाइल बिल्डिंग, लाल बाजार, कलकत्ता । |
3,48,000 |
|
|
20. |
बिहार को-आपरेविट वीवर्स स्पिनिंग मिल्स, मोकामा, पटना (बिहार) |
बिहार को-आपरेटिव वीवर्स स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड, मोकामा, पटना । |
13,07,000 |
|
|
21. |
बिजली काटन मिल्स, मेंडू रोड, हाथरस (उत्तर प्रदेश) |
बिजली काटन मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड, आगरा (उत्तर प्रदेश) । |
21,49,000 |
|
|
22. |
बुरहानपुर ताप्ती मिल्स, लाल बाग, बुरहानपर आर० एस० (निमार) (मध्य प्रदेश) |
बुरहानपुर ताप्ती मिल्स लिमिटेड, बुरहानपुर आर० एस० (निमार) (मध्य प्रदेश) |
86,80,000 |
|
|
23. |
कम्बोडिया मिल्स, ओन्डीपुडुर, कोयम्बटूर-16 (तमिलनाडु) |
कम्बोडिया मिल्स लिमिटेड, ओन्डीपुडुर, कोयम्बटूर-16 (तमिलनाडु) । |
64,40,000 |
|
|
24. |
कन्ननूर स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, कन्ननूर (केरल) |
|
कन्ननूर स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड, कन्ननूर (केरल) । |
47,08,000 |
|
25. |
कन्ननूर स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, महे (पांडिचेरी) |
|
61,24,000 |
|
|
26. |
सैन्ट्रल काटन मिल्स, हावड़ा (पश्चिमी बंगाल) |
सैन्ट्रल काटन मिल्स लिमिटेड, 9, ब्राबोर्न रोड, कलकत्ता-1 |
44,10,000 |
|
|
27. |
छगनलाल टैक्सटाइल मिल्स, चालीसगांव, पूर्वी खानदेश (महाराष्ट्र) |
छगनलाल टैक्सटाइल मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड, चौक, भोपाल (मध्य प्रदेश) । |
5,42,000 |
|
|
28. |
कोयम्बटूर मुरुगन मिल्स, मट्टूपालायम रोड, कोयम्बटूर-11 |
कोयम्बटूर मुरुगन मिल्स लिमिटेड, मट्टूपालायाम रोड, कोयम्बटूर-11 |
18,50,000 |
|
|
29. |
कोयम्बटूर स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, कृष्णास्वामी मुदालियर रोड, कोयम्बटूर-1 |
कोयम्बटूर स्पिनिंग एण्ड वीविंग कम्पनी लिमिटेड, कृष्णास्वामी मुदालियर रोड, कोयम्बटूर-1 |
47,03,000 |
|
|
30. |
दयालबाग स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, अमृतसर (पंजाब) |
सर साहबजी महाराज मिल्स लिमिटेड, दयालबाग, आगरा (उत्तर प्रदेश) । |
5,74,000 |
|
|
31. |
दिग्विजय स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, लाल बाग, परेल, मुम्बई-33 (महाराष्ट्र) |
दिग्विजय स्पिनिंग एण्ड वीविंग कम्पनी लिमिटेड, लाल बाग, परेल, मुम्बई-33 |
75,65,000 |
|
|
32. |
एडवर्ड मिल्स, ब्यावर (राजस्थान) |
एडवर्ड मिल्स कम्पनी लिमिटेड, ब्यावर (राजस्थान) । |
6,79,000 |
|
|
33. |
एडवर्ड टैक्सटाइल मिल्स, फरगुसन रोड, लोअर परेल, मुम्बई (महाराष्ट्र) |
एडवर्ड टैक्सटाइल मिल्स लिमिटेड, इन्दु हाउस, डोगल रोड, बेलार्ड एस्टेट, मुम्बई (महाराष्ट्र) |
66,28,000 |
|
|
34. |
फाइन निटिंग मिल्स, चामुण्डामाता के समीप, असरवा रोड, अहमादाबाद (गुजरात) |
फाइन निटिंग कम्पनी लिमिटेड, असरवा, चामुण्डामाता के समीप, अहमदाबाद-16 (गुजरात) । |
10,17,000 |
|
|
35. |
गया काटन एण्ड जूट मिल्स, गया (बिहार) |
गया काटन एण्ड जूट मिल्स लिमिटेड, गया (बिहार) । |
10,49,000 |
|
|
36. |
हिमाभाई मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, सरसपुर गेट के बाहर, अहमदाबाद (गुजरात) |
हिमाभाई मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, चरटोडा कब्रिस्तान के सामने, सरसपुर, अहमदाबाद-18 (गुजरात) । |
54,77,000 |
|
|
37. |
हीरा मिल्स, 1/10, हीरा मिल्स मार्ग (आगरा रोड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) |
हीरा मिल्स लिमिटेड, 1/10, हीरा मिल मार्ग (आगरा रोड), उज्जैन (मध्य प्रदेश) । |
12,39,000 |
|
|
38. |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, मिल सं० 1, अम्बेडकर मार्ग, मुम्बई-12 |
|
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड, इन्दु हाउस, नरोत्तम मोरारजी मार्ग (डौगल रोड), बेलार्ड एस्टेट, मुम्बई-400001 |
1,000
|
|
39. |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, मिल सं० 2, भोगले मार्ग, मुम्बई-33 |
|
||
|
40. |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, मिल सं० 3, भोगले मार्ग, मुम्बई-33 |
|
||
|
41 |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, मिल सं० 4, टी० बी० कदम मार्ग, मुम्बई-33 |
|
||
|
42. |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, मिल सं० 5, चिंचपोकली लेन, मुम्बई-27 |
|
||
|
43. |
इण्डिया यूनाइटेड मिल्स, डाई वर्क्स, सावरकर मार्ग, मुम्बई-28 |
|
||
|
44. |
इंदौर मालवा यूनाइटेड मिल्स, इंदौर |
इन्दौर मालवा यूनाइटेड मिल्स लिमिटेड, 139, मीडोज स्ट्रीट, फोर्ट, मुम्बई । |
94,25,000 |
|
|
45. |
जयशंकर मिल्स बरसी, बरसी, जिला शोलापुर (महाराष्ट्र) |
जयशंकर मिल्स बरसी लिमिटेड, बरसी, 139, जिला शोलापुर (महाराष्ट्र) । |
31,04,000 |
|
|
46. |
जहांगीर वकील मिल्स, दिल्ली गेट के बाहर, अहमदाबाद (गुजरात) |
जहांगीर वकील मिल्स कम्पनी लिमिटेड, दिल्ली गेट के बाहर, अहमदाबाद (गुजरात) । |
98,89,000 |
|
|
47. |
ज्योति वीविंग फैक्ट्री, 69, एस० के० देव रोड, कलकत्ता-48, पश्चिमी बंगाल |
ज्योति वीविंग फैक्ट्री (प्राइवेट) लिमिटेड, 69, एस० के० देव रोड, पटीपुकुर, कलकत्ता-48 (पश्चिमी बंगाल) । |
1,000 |
|
|
48. |
कालीश्वरर मिल्स, ‘ए’ यूनिट, कोयम्बटूर (तमिलनाडु) |
|
कालीश्वरर मिल्स लिमिटेड, कोयम्बटूर (तमिलनाडु) |
32,08,000 |
|
49. |
कालीश्वरर मिल्स, ‘बी’यूनिट, कल्यानारकोइन (जिला रमनाड), (तमिलनाडु) |
|
15,97,000 |
|
|
50. |
कल्याणमल मिल्स, 15, सिलनाथ कैम्प, इंदौर (मध्य प्रदेश) |
कल्याणमल मिल्स लिमिटेड, 15, सिलनाथ कैम्प, इन्दौर (मध्य प्रदेश) । |
90,64,000 |
|
|
51. |
कनोडिया इंडस्ट्रीज (काटन मिल्स सेक्शन), कौन्नागर (पश्चिमी बंगाल) |
कनोडिया इन्डस्ट्रीज लिमिटेड, 59, नेताजी सुभाष रोड, कलकत्ता-1 |
7,88,000 |
|
|
52. |
केरल लक्ष्मी मिल्स, त्रिचूर (केरल राज्य) |
केरल लक्ष्मी मिल्स लिमिटेड, पुलाझी, त्रिचूर-4, केरल राज्य । |
25,71,000 |
|
|
53. |
केशव मिल्स, पटलाड (गुजरात) |
केशव मिल्स कम्पनी लिमिटेड, पटलाड (गुजरात) । |
56,28,000 |
|
|
54. |
खरड़ टैक्सटाइल मिल्स, खरड़, चण्डीगढ़ के समीप |
पानीपत वूलन एण्ड जनरल मिल्स कम्पनी लिमिटेड, खरड़, चण्डीगढ़ के समीप । |
12,89,000 |
|
|
55. |
किशनावेनी टैक्सटाइल मिल्स, त्रिची रोड, सिंगनालूर पोस्ट, कोयम्बटूर (तमिलनाडु) |
किशनावेनी टैक्सटाइल लिमिटेड, त्रिची रोड, सिंगनालूर पोस्ट, कोयम्बटूर-5 |
25,50,000 |
|
|
56. |
लक्ष्मी नारायण काटन मिल्स, रिशरा (पश्चिमी बंगाल) |
लक्ष्मी नारायण काटन मिल्स लिमिटेड, 4-बी, गार्स्तिन प्लेस, कलकत्ता-1 |
18,77,000 |
|
|
57. |
लार्ड कृष्णा टैक्सटाइल मिल्स, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) |
लार्ड कृष्णा शुगर मिल्स लिमिटेड, चांद होटल, चान्दनी चौक, दिल्ली । |
69,92,000 |
|
|
58. |
महालक्ष्मी मिल्स, व्यावर (राजस्थान) |
महालक्ष्मी मिल्स कम्पनी लिमिटेड, व्यावर (राजस्थान) । |
3,68,000 |
|
|
59. |
महालक्ष्मी मिल्स, वारतेज रोड, भावनगर (गुजरात) |
महालक्ष्मी मिल्स लिमिटेड, वारतेज रोड, भावनगर (गुजरात) । |
83,61,000 |
|
|
60. |
महबूब शाही कुलबर्गा मिल्स, गुलबर्गा (कर्नाटक) |
महबूब शाही कुलबर्गा मिल्स कम्पनी लिमिटेड, गुलबर्गा (कर्नाटक) । |
1,34,84,000 |
|
|
61. |
मणिन्द्रा मिल्स, काशिमबाजार (पश्चिमी बंगाल) |
मणिन्द्रा मिल्स लिमिटेड, बी० के० पाल एवेन्यू, कलकत्ता । |
7,71,000 |
|
|
62. |
मिनर्वा मिल्स, मलेश्वरम्, बंगलौर-3 (कर्नाटक) |
मिनर्वा मिल्स लिमिटेड, टेम्पल बार बिल्डिंग, 70, फोर्बेस स्ट्रीट, फोर्ट, मुम्बई-1 |
75,41,000 |
|
|
63. |
माडल मिल्स नागपुर, उमरेड रोड, नागपुर (महाराष्ट्र) |
माडल मिल्स नागनुर लिमिटेड, इलाको हाउस, सर फिरोजशाह मेहता रोड, मुम्बई-1 |
1,000 |
|
|
64. |
म्यूर मिल्स, सिविल लाइन्स, कानपुर (उत्तर प्रदेश) |
म्यूर मिल्स कम्पनी लिमिटेड, सिविल लाइन्स, कानपुर (उत्तर प्रदेश) । |
1,36,60,000 |
|
|
65. |
मैसूर स्पिनिंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, मगादी रोड, बंगलौर (कर्नाटक) |
मैसूर स्पिनिंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, 70, फोर्बेस स्ट्रीट, फोर्ट, मुम्बई-1 |
84,97,000 |
|
|
66. |
नटराज स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, नीरमल, आदिलाबाद जिला (आंध्र प्रदेश) |
नटराज स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड, 37, लाल बहादुर स्टेडियम, हैदराबाद-1 |
17,26,000 |
|
|
67. |
नैथा को-आपरेटिव स्पिनिंग मिल्स, 608, एलीचीगुदा, सिकन्दराबाद- 3(आंध्र प्रदेश) |
नैथा को-ओपरेटिव स्पिनिंग मिल्स लिमिटेड, सिकन्दराबाद-3 |
28,42,000 |
|
|
68. |
न्यू भोपाल टैक्सटाइल मिल्स, चांदबार, तहसील हुजूर, भोपाल (मध्य प्रदेश) |
न्यू भोपाल टैक्सटाइल्स मिल्स लिमिटेड, चांदबार, तहसील हुजूर, भोपाल । |
7,35,000 |
|
|
69. |
न्यू केसर-ए-हिन्द स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, गोरुपदेव रोड, चिंचपोकली, मुम्बई-33 (महाराष्ट्र) |
न्यू केसर-ए-हिन्द स्पिनिंग एण्ड वीविंग कम्पनी लिमिटेड, अशोक अपार्टमेंट, अल्तामाउन्ट रोड, मुम्बई । |
48,70,000 |
|
|
70. |
न्यू मानकचौक स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, ईदगाह गेट के सामने, अहमदाबाद-16 (गुजरात) |
न्यू मानकचौक स्पिनिंग एण्ड वीविंग कम्पनी लिमिटेड, ईदगाह गेट के सामने, अहमदाबाद-16 |
54,37,000 |
|
|
71. |
न्यू प्रताप स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, धुलिया, पश्चिमी खानदेश |
न्यू प्रताप स्पिनिंग एण्ड वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, धुलिया, पश्चिमी खानदेश । |
70,45,000 |
|
|
72. |
न्यू विक्टोरिया मिल्स, 14/1, सिविल लाइन्स, कानपुर (उत्तर प्रदेश) |
न्यू विक्टोरिया मिल्स कम्पनी लिमिटेड, 14/1, सिविल लाइन्स, कानपुर (उत्तर प्रदेश) । |
47,38,000 |
|
|
73. |
ओम पराशक्ति मिल्स कृष्णरायापुरम्, गणपति पो० ओ०, कोयम्बटूर-6 (तमिलनाडु) |
ओम पराशक्ति मिल्स लिमिटेड, कृष्णरायापुरम्, गणपति पो० ओ०, कोयम्बटूर-6 |
27,99,000 |
|
|
74. |
उड़ीसा काटन मिल्स, भगतपुर, कटक |
उड़ीसा काटन मिल्स लिमिटेड, 41, आयर्नसाइड रोड, कलकत्ता-1 |
1,000 |
|
|
75. |
उस्मानशाही मिल्स, मिल रोड, नान्देड़ (महाराष्ट्र) |
उस्मानशाही मिल्स लिमिटेड, मिल रोड, नान्देड़ (महाराष्ट्र) । |
1,06,71,000 |
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76. |
पानीपत वूलन मिल्स, खरड़, चंडीगढ़ के समीप |
पानीपत वूलन एण्ड जनरल मिल्स कम्पनी लिमिटेड, खरड़, चण्डीगढ़ के समीप । |
6,40,000 |
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77. |
पंकज मिल्स, कोयम्बटूर |
पंकज मिल्स लिमिटेड, कोयम्बटूर । |
26,10,000 |
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78. |
पार्वती मिल्स, क्विलोन (केरल) |
पार्वती मिल्स लिमिटेड, क्विलोन (केरल) |
26,05,000 |
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79. |
पाइनियर स्पिनर्स, पाइनियर नगर (तमिलनाडु) |
पाइनियर स्पिनर्स (प्राइवेट) लिमिटेड, पाइनियर नगर (तमिलनाडु) । |
26,44,000 |
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80. |
प्रभा मिल्स, वीरमगाम (गुजरात) |
प्रभा मिल्स लिमिटेड, हाइवे रोज बिल्डिंग, 92, अम्बावाड़ी दीक्षित रोड, विले पार्ले, मुम्बई-57 |
9,10,000 |
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81. |
आर० बी० बन्सीलाल अबीरचन्द स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, हिंगनघाट (महाराष्ट्र) |
आर० बी० बन्सीलाल अबीरचंद स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स कम्पनी (प्राइवेट) लिमिटेड, हिंगनघाट (महाराष्ट्र) । |
57,50,000 |
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82. |
राजकोट स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, कर्णसिंजी क्रास रोड, पोस्ट बाक्स सं० 2, राजकोट (गुजरात) |
राजकोट स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड, कर्णसिंजी क्रास रोड, पोस्ट बाक्स सं० 2, राजकोट । |
31,79,000 |
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83. |
राजनगर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, यूनिट सं० 1, अहमदाबाद (गुजरात) |
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राजनगर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, प्रेम गेट के बाहर, अहमदाबाद । |
58,81,000
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84. |
राजनगर स्पिनिंग, वीविंग एण्ड मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, यूनिट सं० 2, अहमदाबाद (गुजरात) |
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85. |
रामपुरिया काटन मिल्स, सेरामपुर (पश्चिमी बंगाल) |
रामपुरिया काटन मिल्स लिमिटेड, 8-बी, लाल बाजार स्ट्रीट, कलकत्ता-1 |
47,67,000 |
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86. |
आर० एस० आर० गोपालदास मोहता स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, अकोला (महाराष्ट्र) |
आर० एस० आर० गोपालदास मोहता स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड, अकोला, जिला अकोला (महाराष्ट्र) । |
1,01,88,000 |
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87. |
सावतराम रामप्रसाद मिल्स, अकोला (महाराष्ट्र) |
सावतराम रामप्रसाद मिल्स कम्पनी लिमिटेड, अकोला (महाराष्ट्र) । |
59,34,000 |
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88. |
सेक्सरिया काटन मिल्स, डेलिसल रोड, परेल, मुम्बई |
सेक्सरिया काटन मिल्स लिमिटेड, डेलिसल रोड, परेल, मुम्बई । |
49,67,000 |
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89. |
श्री विजय काटन मिल्स, विजय नगर (राजस्थान) |
श्री विजय काटन मिल्स लिमिटेड, विजय नगर (राजस्थान) । |
87,000 |
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90. |
श्री महालक्ष्मी मिल्स, पल्टा (पश्चिमी बंगाल) |
मैसर्स गजराज पन्नालाल लिमिटेड, कलकत्ता । |
27,22,000 |
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91. |
श्री विक्रम काटन मिल्स, तालकटोरा, लखनऊ (उत्तर प्रदेश ) |
श्री विक्रम काटन मिल्स लिमिटेड, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) । |
12,46,000 |
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92. |
सोदपुर काटन मिल्स, सोदपुर (पश्चिमी बंगाल) |
सोदपुर काटन मिल्स लिमिटेड, सोदपुर (पश्चिमी बंगाल) । |
1,000 |
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93. |
सोमसुन्दरम् मिल्स, 10/64, सोमसुन्दरम् मिल रोड, कोयम्बटूर |
सोमसुन्दरम् मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड, 10/64, सोमसुन्दरम मिल रोड, कोयम्बटूर (तमिलनाडु) । |
38,25,000 |
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94. |
श्री यलम्मा काटन, वूलन एण्ड सिल्क मिल्स, यलम्मानगर (तोलाहुनासो रेलवे स्टेशन) |
श्री यलम्मा काटन, वूलन एण्ड सिल्क मिल्स कम्पनी लिमिटेड, देवनगिरि सिटी, मैसूर राज्य । |
10,18,000 |
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95. |
श्री भारती मिल्स, मुदालियरपेट पो० ओ० पांडिचेरी |
श्री भारती मिल्स लिमिटेड, मुदालियरपेट पो० ओ० पांडिचेरी । |
15,22,000 |
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96. |
श्री कोठान्द्रम स्पिनिंग मिल्स, मदुराई |
श्री कोठान्द्रम स्पिनिंग मिल्स (प्राइवेट) लिमिटेड, मदुराई । |
97,000 |
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97. |
श्री रंग विलास जिनिंग, स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, अवनाशी रोड, पीलमडु पो० ओ० कोयम्बटूर (तमिलनाडु) |
श्री रंग विलास जिनिंग, स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स लिमिटेड, अवनाशी रोड, पीलमडु पो० ओ०, पोस्ट बाक्स सं० 828, कोयम्बटूर । |
35,14,000 |
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98. |
श्री शारदा मिल्स, पोदनूर (तमिलनाडु) |
श्री शारदा मिल्स लिमिटेड, पोदनूर (तमिलनाडु) । |
50,31,000 |
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99. |
सूरज टैक्सटाइल मिल्स, मालोट मण्डी, पंजाब |
सूरज टैक्सटाइल मिल्स लिमिटेड, मालोट मण्डी, पंजाब । |
2,37,000 |
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100. |
स्वदेशी काटन एण्ड फ्लोर मिल्स, 7, सीलनाथ कैम्प, इन्दौर-3 (मध्य प्रदेश) |
स्वदेशी काटन एण्ड फ्लोर मिल्स लिमिटेड, 7, सीलनाथ कैम्प, इन्दौर-3 (मध्य प्रदेश) । |
1,000 |
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101. |
तिरुपति काटन मिल्स, रेनीगुन्ता (आन्ध्र प्रदेश) |
तिरुपति काटन मिल्स लिमिटेड, 8, बोग रोड, टी० नगर, मद्रास-17 |
23,99,000 |
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102. |
विदर्भ मिल्स (बरार) एलिचपुर (महाराष्ट्र) |
विदर्भ मिल्स बरार लिमिटेड, एलिचपुर (महाराष्ट्र) । |
73,26,000 |
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103. |
विजयमोहिनी मिल्स, त्रिवेन्द्रम् । |
विजयमोहिनी मिल्स लिमिटेड, त्रिवेन्द्रम् । |
32,95,000 |
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द्वितीय अनुसूची
(धारा 21, 22, 23 और 27 देखिए)
किसी रुग्ण कपड़ा-उपक्रम की बाबत दायित्वों के निर्वहन के लिए पूर्विकता का क्रम
भाग क
प्रबन्ध ग्रहण के पश्चात् की अवधि
प्रवर्ग 1-
(क) बैंक द्वारा दिए गए उधार ।
(ख) बैंक से भिन्न किसी संस्था द्वारा दिए गए उधार ।
(ग) कोई अन्य उधार ।
(घ) व्यापार या विनिर्माण संक्रियाओं के प्रयोजन के लिए लिया गया कोई ऋण ।
प्रवर्ग 2-
(क) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को राजस्व, कर, उपकर, रेट अथवा कोई अन्य शोध्य रकम ।
(ख) कोई अन्य शोध्य रकम ।
भाग ख
प्रबन्ध ग्रहण के पूर्व की अवधि
प्रवर्ग 3-
भविष्य निधि, वेतन और मजदूरी की बाबत बकाया और अन्य रकमें जो किसी कर्मचारी को देय हों ।
प्रवर्ग 4-
प्रतिभूत उधार ।
प्रवर्ग 5-
केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या राज्य बिजली बोर्ड को राजस्व, कर, उपकर, रेट अथवा कोई अन्य शोध्य रकम ।
प्रवर्ग 6-
(क) व्यापार या विनिर्माण संक्रियाओं के प्रयोजन के लिए लिया गया कोई ऋण ।
(ख) कोई अन्य शोध्य रकम ।
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