लेवी चीनी समान कीमत निधि अधिनियम, 1976
(1976 का अधिनियम संख्यांक 31)
[16 फरवरी, 1976]
लेवी चीनी की समान कीमत सारे भारत में सुनिश्चित करने
के लिए जनसाधारण के हित में एक निधि की स्थापना
का और उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक
विषयों का उपबन्ध
करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के सत्ताईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम लेवी चीनी समान कीमत निधि अधिनियम, 1976 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियंत्रित कीमत" से लेवी चीनी की सुसंगत श्रेणी की वह कीमत अभिप्रेत है जो किसी उत्पादन वर्ष के सम्बन्ध में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) की धारा 3 की उपधारा (3ग) के अधीन या भारत रक्षा और आन्तरिक सुरक्षा नियम, 1971 के अधीन समय-समय पर अवधारित की गई हो ;
(ख) अधिक वसूली" से, लेवी चीनी की प्रत्येक श्रेणी के सम्बन्ध में,-
(i) वह कीमत अभिप्रेत है, जो किसी उत्पादक द्वारा ऐसी श्रेणी की लेवी चानी के विक्रय पर,-
(क) नियंत्रित कीमत से, अथवा
(ख) जहां ऐसी श्रेणी की लेवी चीनी के लिए न्यायालय द्वारा कोई उचित कीमत नियत की गई है वहां ऐसी उचित कीमत से, अधिक वसूल की गई है, और
(ii) कोई ऐसी वसूली भी इसके अन्तर्गत है जो नियंत्रित कीमत और न्यायालय के किसी अन्तरिम आदेश द्वारा अनुज्ञात कीमत के बीच के अन्तर के रूप में है, यदि ऐसा अन्तरिम आदेश, चाहे उस न्यायालय द्वारा जिसने वह आदेश किया था, या अपील या पुनरीक्षण में, अपास्त कर दिया जाता है ।
[स्पष्टीकरण-शंकाओं के निराकरण के लिए, इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि जहां किसी उत्पादक द्वारा विक्रय की गई किसी श्रेणी की लेवी चीनी के सम्बन्ध में उत्पादक ने ऐसी चीनी की बाबत उत्पाद-शुल्क लेखे कोई ऐसी रकम वसूल की है जो ऐसे शुल्कों के रूप में संदेय किसी रकम से अधिक है तो ऐसे आधिक्य को भी इस खण्ड के अर्थ में अधिक वसूली समझा जाएगा ;]
(ग) लेवी चीनी के सम्बन्ध में उचित कीमत" से अभिप्रेत है वह कीमत जो न्यायालय द्वारा नियंत्रित कीमत से अधिक नियत की गई है और जहां न्यायालय द्वारा नियत अन्तरिम कीमत को अतिष्ठित करने वाली कोई कीमत न्यायालय द्वारा अन्तिम रूप से नियत की जाती है, वहां इस प्रकार अन्तिम रूप से नियत कीमत ;
(घ) निधि" से धारा 3 के अधीन स्थापित लेवी चीनी समान कीमत निधि अभिप्रेत है ;
[(ङ) लेवी चीनी" से वह चीनी अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) की धारा 3 की उपधारा (2) के खण्ड (च) के अधीन अधिगृहीत की गई है ;]
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(छ) उत्पादक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो वैक्यूम पैन प्रक्रिया द्वारा चीनी विनिर्माण का कारबार चलाता है ।
3. लेवी चीनी समान कीमत निधि-(1) लेवी चीनी समान कीमत निधि के नाम से एक निधि स्थापित की जाएगी ।
(2) [उपधारा (5) में जैसा उपबन्धित है] उसके सिवाय, निधि में ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, निम्नलिखित रकमें जमा की जाएंगी, अर्थात् :-
(क) ऐसी रकमें जो उत्पादकों द्वारा की गई सभी अधिक वसूली के रूप में हैं, चाहे ऐसी अधिक वसूली इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् की गई हों ;
(ख) ऐसी रकमें जो ऐसे उधार या अनुदान के रूप में हैं जैसे इस निधि के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं :
[परन्तु-
(क) वह ब्याज, जो लेवी चीनी समान कीमत निधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 के प्रारम्भ की तारीख के पहले की गई किसी अधिक वसूली की किसी रकम के उतने भाग पर शोध्य है जो निधि में साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की पूर्वोक्त दर से ब्याज सहित ऐसे प्रारम्भ की तारीख से साठ दिन के अवसान के पहले जमा नहीं किया गया है ; और
(ख) वह ब्याज, जो ऐसे प्रारम्भ की तारीख को या उसके पश्चात् की गई किसी अधिक वसूली की रकम के उतने भाग पर शोध्य है जो निधि में साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की पूर्वोक्त दर से ब्याज सहित उस तारीख से, जिसको ऐसी रकम वसूल की गई थी, साठ दिन के भीतर जमा नहीं किया गया है,
उस तारीख से जिसको उत्पादक द्वारा ऐसी रकम वसूल की गई थी, पन्द्रह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से होगा ।]
(3) उपधारा (4) में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय, प्रत्येक उत्पादक,-
(क) इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व की गई अधिक वसूली की दशा में, ऐसे प्रारम्भ से तीस दिन के भीतर ;
(ख) ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् की गई अधिक वसूली की दशा में, उस तारीख से, जिसको ऐसी अधिक वसूली की गई थी, तीस दिन के भीतर,
निधि में ऐसी रकम, जो अधिक वसूली के रूप में है, उस तारीख से, जिसको ऐसी रकम उसके द्वारा वसूल की गई थी, साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से उस पर देय ब्याज सहित जमा करेगा ।
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(5) 1[किसी न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ के पहले या उसके पश्चात् किए गए अन्तरिम आदेश के अनुसरण में,] कोई ऐसी रकम जो नियंत्रित कीमत और न्यायालय द्वारा अनुज्ञात अन्तरिम कीमत के बीच के अन्तर के रूप में है,-
(क) किसी उत्पादक द्वारा स्वयं अपने पास या किसी अन्य व्यक्ति या किसी न्यायालय, सरकार, बैंक या अन्य प्राधिकारी के पास धारित है, अथवा
(ख) उत्पादक द्वारा किसी गारण्टी के अधीन संगृहीत की गई है और रखी गई है,
1[पूर्वोक्त न्यायालय की कार्यवाहियों का अन्तिम निपटारा होने पर, ऐसी रकम को, ऐसे अंतिम निपटारे की तारीख से साठ दिन के भीतर उस विस्तार तक जो अधिक वसूली के रूप में है, उस पर उस तारीख से जिसको उसके द्वारा ऐसी रकम वसूल की गई थी, साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से, शोध्य ब्याज सहित निधि में जमा करेगा :
परन्तु-
(i) वह ब्याज, जो ऐसी रकम के उतने भाग पर शोध्य है जो लेवी चीनी समान कीमत निधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 के प्रारम्भ की तारीख से पहले वसूल किया गया था और साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की पूर्वोक्त दर से ब्याज सहित ऐसे प्रारम्भ की तारीख से साठ दिन के अवसान के पहले निधि में जमा नहीं किया गया है ; और
(ii) वह ब्याज, जो ऐसी रकम के उतने भाग पर शोध्य है जो ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् वसूल किया गया है और साढ़े बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष की पूर्वोक्त दर से ब्याज सहित, उस तारीख से जिसको ऐसी रकम वसूल की गई थी, साठ दिन के भीतर निधि में जमा नहीं किया गया है,
उस तारीख से जिसको उत्पादक द्वारा ऐसी रकम वसूल की गई थी, पन्द्रह प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से होगा ।]
[(5क) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, वह ब्याज, जो किसी ऐसी अधिक वसूली की रकम पर संदेय है, जो किसी ऐसी अवधि की बाबत जिसके दौरान ऐसी रकम, उत्पादक द्वारा किसी न्यायालय के किसी आदेश के कारण उस उपधारा के खण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी अन्य व्यक्ति के पास अथवा किसी न्यायालय, सरकार, बैंक या किसी प्राधिकारी के पास धृत थी, उस उपधारा के अधीन निधि में जमा किए जाने के लिए अपेक्षित थी, वह ब्याज होगा जो उस रकम पर ऐसी अवधि की बाबत वस्तुतः प्रोद्भूत हुआ था ;]
1[(5ख) उपधारा (5) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कोई ऐसी रकम जो नियन्त्रित कीमत और न्यायालय द्वारा अनुज्ञात अन्तरिम कीमत के बीच अन्तर के रूप में है और, जो-
(क) किसी उत्पादक द्वारा उस उपधारा के खण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी अन्य व्यक्ति अथवा न्यायालय, सरकार, बैंक या अन्य प्राधिकारी के पास धृत है ; अथवा
(ख) उस उपधारा के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी गारण्टी के अधीन है,
पूर्वोक्त न्यायालय की कार्यवाहियों के अंतिम निपटारे के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, उस विस्तार तक जहां तक ऐसी रकम अधिक वसूली के रूप में है, उस ब्याज के साथ, यदि कोई हो, जो उस पर प्रोद्भूत हुआ है या जिसकी उसके संबंध में गारण्टी दी गई है, उस निधि में, यथास्थिति, ऐसे अन्य व्यक्ति, न्यायालय, सरकार, बैंक या अन्य पूर्वोक्त प्राधिकारी द्वारा अथवा ऐसी गारण्टी देने वाले बैंक या अन्य व्यक्ति द्वारा जमा की जाएगी, तथा इस प्रकार जमा की गई रकम उस रकम (ब्याज सहित) के प्रति, जो उत्पादक द्वारा उपधारा (5) के अधीन जमा की जानी अपेक्षित है, मुजरा की जाएगी ।
(5ग) उपधारा (5ख) के उपबंध प्रत्येक ऐसी रकम के संबंध में, जो नियंत्रित कीमत और न्यायालय द्वारा अनुज्ञात अंतरिम कीमत के बीच अंतर के रूप में है और जो लेवी चीनी समान कीमत निधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 के प्रारम्भ के ठीक पहले,-
(क) किसी उत्पादक द्वारा उस उपधारा के खण्ड (क) में वर्णित किसी अन्य व्यक्ति के पास या किसी न्यायालय, सरकार, बैंक या किसी अन्य प्राधिकारी के पास धृत है ; अथवा
(ख) उस उपधारा के खण्ड (ख) में वर्णित किसी गारण्टी के अधीन है,
इस बात के होते हुए भी लागू होंगे कि पूर्वोक्त न्यायालय की कार्यवाहियों का अन्तिम निपटारा ऐसे प्रारंभ के पहले हुआ था तथा इस प्रयोजन के लिए, उस उपधारा में न्यायालय में कार्यवाहियों का अन्तिम निपटारा" के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे प्रारंभ के प्रति निर्देश है ।
(5घ) जहां निधि में कोई रकम उपधारा (5ख) के अधीन जमा की जाती है वहां ऐसा जमा किया जाना-
(क) ऐसे मामले में, जो उस उपधारा के खण्ड (क) के अन्तर्गत आता है, इस प्रकार रकम जमा करने वाले उस व्यक्ति, न्यायालय, सरकार, बैंक या किसी अन्य प्राधिकारी के ऐसी रकम के संबंध में दायित्व के उन्मोचन के रूप में प्रवर्तित होगा ;
(ख) ऐसे मामले में, जो उस उपधारा के खण्ड (ख) के अन्तर्गत आता है, इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वह रकम जमा करने वाले बैंक या अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई गारण्टी के अनुसार किया गया है तथा इस प्रयोजन के लिए ऐसी गारण्टी के बारे यह समझा जाएगा कि उसमें इस प्रकार जमा किए जाने का उपबंध किया गया है ।]
(6) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि ऐसी रकमों को जो अधिक वसूली के रूप में हैं निधि में जमा करने की बाध्यता किसी ऐसी शास्ति के अतिरिक्त होगी जो इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के उल्लंघन के लिए अधिरोपित की जाए ।
(7) केन्द्रीय सरकार द्वारा निधि का प्रशासन, धारा 8 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, किया जाएगा ।
4. अधिक वसूली करने के बारे में प्रश्नों का अवधारण-यदि कोई प्रश्न उठता है कि किसी उत्पादक ने लेवी चीनी के विक्रय पर, यथास्थिति, नियंत्रित कीमत या उचित कीमत से अधिक कोई रकम वसूल की है या नहीं तो इसका विनिश्चय केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे उत्पादक को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् किया जाएगा जो वह सरकार ठीक समझे ।
5. निधि में जमा की गई रकमों की बाबत दायित्व से व्यक्तियों का उन्मोचन-जहां कोई रकम धारा के अधीन निधि में जमा की जाती है वहां [संबंधित उत्पादकट, इस प्रकार जमा किए जाने पर ऐसी रकमों का उन व्यक्तियों को जो उनके हकदार हैं, प्रतिसंदाय करने के दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा और प्रतिसंदाय करने के दायित्व के ऐसे उन्मोचन से किसी ऐसी शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा जो उत्पादक द्वारा की गई प्रत्येक अधिक वसूली के लिए उस पर अधिरोपित की जाए ।
6. प्रतिदाय का दावा करने के लिए क्रेता का अधिकार-(1) जहां कोई रकम निधि में जमा की जाती है वहां लेवी चीनी के ऐसे क्रेता को जिससे उत्पादक या व्यौहारी ने कोई अधिक वसूली की थी, निधि में से प्रतिदाय किया जाएगा ।
परन्तु कोई क्रेता इस उपधारा के अधीन प्रतिदाय का दावा करने का हकदार नहीं होगा यदि वह,-
(क) थोक व्यौहारी होते हुए, लेवी चीनी की नियंत्रित या उचित कीमत से अधिक का भार उस खुदरा व्यौहारी को संक्रान्त करता है जिसने ऐसी चीनी की कीमत संदत्त की थी ; अथवा
(ख) खुदरा व्यौहारी होते हुए, लेवी चीनी की नियंत्रित या उचित कीमत से अधिक का भार उस उपभोक्ता को संक्रान्त करता है जिसने ऐसी चीनी की कीमत संदत्त की थी ; अथवा
[(ग) ऐसा व्यक्ति होते हुए, जो थोक व्यौहारी या खुदरा व्यौहारी नहीं है, लेवी चीनी की नियंत्रित या उचित कीमत से अधिक का भार, यथास्थिति, किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को किसी ऐसे उत्पाद की कीमत के भाग के रूप में, जिसके विनिर्माण में, ऐसी चीनी का उपयोग किया गया है अथवा उस उपभोक्ता को, जिसके द्वारा ऐसी चीनी की कीमत का संदाय किया गया था, संक्रान्त कर चुका है ।]
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रतिदाय के लिए प्रत्येक आवेदन उस तारीख से जिसको वह अधिक वसूली जिसके सम्बन्ध में ऐसे प्रतिदाय का दावा किया जाता है, निधि में जमा की जाती है, छह मास के भीतर केन्द्रीय सरकार को किया जाएगा और ऐसा प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जो विहित किया जाए और उसके साथ ऐसा दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य होगा जैसा कि आवेदक यह सिद्ध करने के लिए दे कि वह अधिक वसूली जिसके सम्बन्ध में ऐसे प्रतिदाय का दावा किया जाता है, उससे की गई थी ।
(3) यदि उपधारा (1) के अधीन किए गए दावे की संवीक्षा पर केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि दावेदार से अधिक वसूली की गई थी तो वह [दावेदार से की गई अधिक वसूली के विस्तार तक, उस पर निधि में जमा किए गए ब्याज के साथ (यदि कोई हो)ट निधि में से उसे प्रतिदाय किए जाने का निदेश देगी :
परन्तु यदि निधि में जमा रकम केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रतिदाय किए जाने के लिए पर्याप्त नहीं है तो ऐसा प्रतिदाय केन्द्रीय राजस्व में से किया जाएगा ।
7. चीनी के किसी उत्पादक को अधिक वसूली का संदाय न किया जाना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी संविदा में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, कोई ऐसी रकम जो उत्पादक द्वारा की गई अधिक वसूली या किसी व्यक्ति द्वारा दी गई किसी गारण्टी के अधीन उत्पादक द्वारा की गई अधिक वसूली के रूप में है किसी उत्पादक को संदत्त नहीं की जाएगी ।
8. निधि का केन्द्रीय सरकार में निहित होना-(1) निधि में संदत्त कोई धन, जिसका उस तारीख से जिसको वह निधि में जमा किया जाता है, छह मास की अवधि के अवसान के पश्चात् दावा नहीं किया जाता है, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगा और ऐसी रकम का उपयोग उस सरकार द्वारा ऐसी रीति से किया जाएगा जो लेवी चीनी के उपभोक्ताओं के वर्ग के हितों को और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विहित की जाए कि लेवी चीनी की खुदरा कीमत सारे भारत में समान रहे :
परन्तु केन्द्रीय सरकार में ऐसे धन के निहित हो जाने पर भी, निधि में जमा धन के प्रतिदाय के लिए दावा [धारा 6 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति सेट किसी भी समय ऐसे क्रेता द्वारा किया जा सकता है जो ऐसा दावा करने के लिए विधिपूर्वक हकदार है और ऐसे प्रत्येक दावे के सम्बन्ध में, यदि वह स्वीकार कर लिया जाता है तो कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसे दावे से सम्बन्धित धन केन्द्रीय सरकार में निहित नहीं हुआ था ।
(2) केन्द्रीय सरकार, निधि में से कोई उधार या वित्तीय सहायता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ही देगी, अन्यथा नहीं ।
(3) केन्द्रीय सरकार, निधि के सम्बन्ध में उचित और पृथक् लेखा तथा अन्य सुसंगत अभिलेख ऐसे प्ररूप में रखेगी जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए, या यदि वह ठीक समझे तो उस प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट करेगी जो ऐसा लेखा या अभिलेख रखेगा ।
9. उत्पादकों से लेखा, आदि रखने की अपेक्षा करने की शक्ति-यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसा करना समीचीन या आवश्यक है तो वह आदेश द्वारा किसी उत्पादक को लेवी चीनी के सम्बन्ध में ऐसी लेखा-बहियां और अन्य अभिलेख रखने का जो वह ठीक समझे और ऐसी लेखा-बहियों और अन्य अभिलेखों को निरीक्षण के लिए पेश करने का निदेश दे सकती है और ऐसे उत्पादक को लेवी चीनी के सम्बन्ध में ऐसी जानकारी देने के लिए भी निदेश दे सकती है जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए ।
10. प्रवेश, तलाशी और अभिग्रहण की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का उल्लंघन किया गया है या हो रहा है या किया जाने वाला है तो वह किसी व्यक्ति को किसी ऐसे परिसर में प्रवेश करने और तलाशी लेने के लिए प्राधिकृत कर सकता है जहां लेवी चीनी से सम्बन्धित और उत्पादक या उसके अभिकर्ता के या उसके नियंत्रणाधीन लेखें, पुस्तकें, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजें रखी गई हैं या सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई हैं ।
(2) यदि इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति को यह विश्वास करने का कोई कारण है कि इस अधिनियम का उल्लंघन किया गया है या हो रहा है या किया जाने वाला है तो वह ऐसे लेखाओं, पुस्तकों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों का अभिग्रहण कर सकता है :
परन्तु इस धारा के अधीन अभिगृहीत लेखे, पुस्तकें, रजिस्टर या अन्य दस्तावेजें नब्बे दिन से अधिक अवधि के लिए केन्द्रीय सरकार की अभिरक्षा में प्रतिधारित नहीं की जाएंगी :
परन्तु यह और कि जहां ऐसे लेखे, पुस्तकें, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजें किसी अभियोजन के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित हों वहां वे ऐसे अभियोजन के प्रयोजनों के लिए अतिरिक्त अवधि के लिए जो नब्बे दिन से अधिक की नहीं होगी, केन्द्रीय सरकार की अभिरक्षा में प्रतिधारित की जा सकती हैं ।
(3) तलाशियों और अभिग्रहणों से सम्बद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्ध इस अधिनियम के अधीन की गई तलाशियों और अभिग्रहणों को, जहां तक हो सके, लागू होंगे ।
11. अधिक वसूली को भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-यदि कोई उत्पादक [अपने द्वारा की गई किसी अधिक वसूली, या ऐसी अधिक वसूली पर शोध्य किसी ब्याज को या ऐसी अधिक वसूली, या ब्याज के किसी भाग को निधि में जमा करने में व्यतिक्रम करेगा तो, यथास्थिति, ऐसी अधिक वसूली या ऐसा ब्याज या उसका ऐसा भागट केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे उत्पादक से भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल किया जा सकेगा ।
12. निधि का विघटन-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह घोषणा कर सकती है कि ऐसी तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, निधि का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और तब निधि में जमा सभी रकमें केन्द्रीय राजस्व में जमा की जाएंगी और यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा लेवी चीनी के किसी क्रेता को ऐसी समाप्ति के पश्चात् कोई प्रतिदाय किया जाता है तो वह राजस्व के प्रतिदाय का आदेश माना जाएगा ।
13. शास्तियां-(1) यदि कोई उत्पादक-
(क) [अपने द्वारा की गई किसी अधिक वसूली या ऐसी अधिक वसूली पर शोध्य किसी ब्याज या ऐसी अधिक वसूली या ब्याज के किसी भाग कोट निधि में जमा करने में व्यतिक्रम करेगा, अथवा
(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए अपेक्षा की जाने पर,-
(i) लेवी चीनी के सम्बन्ध में कोई पुस्तक, लेखा या अन्य अभिलेख रखने में लोप करेगा या असफल रहेगा, अथवा
(ii) कोई पुस्तक, लेखा या अन्य अभिलेख निरीक्षण के लिए पेश करने में लोप करेगा या असफल रहेगा, अथवा
(iii) कोई जानकारी देने में लोप करेगा या असफल रहेगा, या कोई ऐसी जानकारी देगा जो तात्त्विक विशिष्टि में अशुद्ध या मिथ्या है,
तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान केन्द्रीय सरकार के, या उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी या प्राधिकारी के लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
14. कठिनाइयों का दूर किया जाना-यदि इस अधिनियम के किसी उपबन्ध को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसा आदेश कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक प्रतीत हो ।
15. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के लिए जो इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या किए जाने के लिए आशयित है, केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
16. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह रीति जिससे धारा 3 के अधीन निधि में रकमें जमा की जाएंगी ;
(ख) वह प्ररूप जिसमें धारा 6 में निर्दिष्ट प्रतिदाय के लिए आवेदन किया जाएगा ;
(ग) वह रीति जिससे निधि में जमा रकमों का जैसा कि धारा 8 में अपेक्षित है, उपयोग किया जाएगा ;
(घ) वह प्ररूप जिसमें धारा 8 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट लेखा और सुसंगत अभिलेख रखे जाएंगे ;
(ङ) कोई अन्य विषय जिसके सम्बन्ध में ऐसे नियम बनाए जाने हैं या बनाए जा सकते हैं ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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