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होटल-आमदनी कर अधिनियम, 1980 ( Hotel-Receipts Tax Act, 1980 )


 

होटल-आमदनी कर अधिनियम, 1980

(1980 का अधिनियम संख्यांक 54)

[9 दिसम्बर, 1980]

कुछ होटलों की सकल आमदनी पर

विशेष कर अधिरोपित

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के इकतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम होटल आमदनी कर अधिनियम, 1980 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है । 

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(1) निर्धारिती" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन होटल-आमदनी कर या धन की कोई अन्य राशि संदेय है और इसके अन्तर्गत- 

(क) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति है, जिसके बारे में, उसकी प्रभार्य आमदनी के या उसे शोध्य प्रतिदाय की रकम के या किसी अन्य व्यक्ति की प्रभार्य आमदनी के, जिसके बारे में वह निर्धार्य है, या ऐसे अन्य व्यक्ति को शोध्य प्रतिदाय की रकम के निर्धारण के लिए इस अधिनियम के अधीन कोई कार्यवाही की गई है;

() प्रत्येक ऐसा व्यक्ति है जिसे इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा गया है

(2) निर्धारण" के अन्तर्गत पुनर्निर्धारण भी है; 

(3) निर्धारण वर्ष" से बारह मास की वह अवधि अभिप्रेत है, जो प्रति वर्ष अप्रैल के प्रथम दिन प्रारम्भ होती है; 

(4) बोर्ड" से केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 (1963 का 54) के अधीन गठित केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अभिप्रेत है

(5) प्रभार्य आमदनी" से धारा 6 में निर्दिष्ट सभी प्रभारों की ऐसी कुल रकम अभिप्रेत है जो धारा 7 में अधिकथित रीति से संगणित की गई है; 

(6) होटल" के अन्तर्गत ऐसा भवन या भवन का भाग है जिसमें धनीय प्रतिफल के लिए, कारबार के रूप में निवास की जगह दी जाती है; 

(7) होटल-आमदनी कर" या कर" से इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन प्रभार्य कर अभिप्रेत है; 

(8) आय-कर अधिनियम" से आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) अभिप्रेत है; 

(9) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; 

(10) कमरा प्रभार" से किसी होटल में निवास की जगह की इकाई के लिए प्रभार अभिप्रेत हैं और उनके अन्तर्गत-

(क) फर्नीचर, एयरकंडीशनर, रेफ्रीजरेटर, रेडियो, संगीत, टेलीफोन, टेलीविजन के लिए; और 

(ख) ऐसी अन्य सेवाओं के लिए जो प्रसामान्यतया होटल द्वारा कमरा किराए में सम्मिलित की जाती हैं, 

प्रभार भी हैं किन्तु उनके अन्तर्गत खाद्य, पेय और किन्हीं ऐसी सेवाओं के लिए प्रभार नहीं हैं जो उपखण्ड (क) और (ख) में निर्दिष्ट सेवाओं से भिन्न हैं; 

(11) अन्य सभी शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त हैं, किन्तु परिभाषित नहीं हैं और आय-कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वहीं अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।

3. अधिनियम का लागू होना-(1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, यह अधिनियम प्रत्येक ऐसे होटल के सम्बन्ध में लागू होगा, जिसमें किसी व्यक्ति को पूर्व वर्ष के दौरान किसी समय दी गई निवास की जगह के लिए कमरा प्रभार प्रति दिन प्रति व्यक्ति पचहत्तर रुपए या उससे अधिक है ।

स्पष्टीकरण-जहां कमरा प्रभार दैनिक आधार पर या प्रति व्यक्ति के हिसाब से अन्यथा संदेय हैं, वहां कमरा प्रभारों की संगणना एक दिन के लिए और प्रति व्यक्ति के हिसाब से की जाएगी जो उस निवास की जगह के अधिभोग की उस अवधि, जिसके लिए प्रभार संदेय हैं और व्यक्तियों की उस संख्या पर आधारित होगी जिसे होटल के नियमों और रूढ़ि के अनुसार ऐसी जगह का अधिभोग करने के लिए मामूली तौर पर अनुज्ञात किया जाता है   

(2) जहां निवास की जगह और खाद्य की बाबत संयुक्त प्रभार संदेय है, वहां उसमें सम्मिलित कमरा प्रभारों का अवधारण विहित रीति से किया जाएगा । 

(3) जहां- 

(i) निवास की जगह, खाद्य, पेय और अन्य सेवाओं या उनमें से किसी की बाबत संयुक्त प्रभार संदेय है और वह मामला उपधारा (2) के उपबन्धों के अन्तर्गत नहीं आता है, अथवा

(ii) आय-कर अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि निवास की जगह, खाद्य पेय या अन्य सेवाओं के लिए प्रभारों को ऐसे विन्यस्त किया गया है कि कमरा प्रभार कम करके बतलाए गए हैं और अन्य प्रभारों को बढ़ाकर बतलाया गया है,

वहां आय-कर अधिकारी, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए कमरा-प्रभारों का ऐसे युक्तियुक्त आधार पर अवधारण करेगा जो वह उचित समझे । 

4. कर प्राधिकारी-(1) प्रत्येक निरीक्षण निदेशक, आय-कर आयुक्त, आय-कर आयुक्त (अपील), सहायक आय-कर आयुक्त (निरीक्षण), आय-कर अधिकारी और आय-कर निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन वैसी ही शक्तियां होंगी और वह वैसे ही कृत्यों का पालन करेगा जैसी शक्तियां उसे आय-कर अधिनियम के अधीन हैं और जैसे कृत्यों का वह उस अधिनियम के अधीन पालन करता है, तथा अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का पालन करने के लिए, इस अधिनियम के अधीन उसकी अधिकारिता वही होगी जो उसकी आय-कर अधिनियम के अधीन है ।

(2) इस अधिनियम के निष्पादन के लिए नियोजित सभी अधिकारी और व्यक्ति बोर्ड के आदेशों, निदेशों और अनुदेशों का अनुपालन और अनुसरण करेंगे :

परन्तु कोई भी ऐसे आदेश, अनुदेश या निदेश इस प्रकार नहीं दिए जाएंगे जिनसे-

(क) किसी कर प्राधिकारी से विशिष्ट निर्धारण करने या किसी विशिष्ट मामले को किसी विशिष्ट रीति से निपटाने की अपेक्षा की जाए; या 

(ख) आयुक्त (अपील) के अपीली कृत्यों के करने में उसके विवेकाधिकार में हस्तक्षेप हो । 

(3) इस अधिनियम के निष्पादन के लिए नियोजित हर आय-कर अधिकारी उन आदेशों, अनुदेशों और निदेशों का अनुपालन और अनुसरण करेगा जो उसके मार्गदर्शन के लिए उस निरीक्षण निदेशक द्वारा या आयुक्त द्वारा या सहायक आयुक्त (निरीक्षण) द्वारा जारी किए जाएं जिसकी अधिकारिता के भीतर ऐसा अधिकारी अपने कृत्यों का पालन करता है ।  

5. कर का प्रभारण-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ऐसे व्यक्ति पर जो ऐसे होटल का कराबार कर रहा है जिसके सम्बन्ध में यह अधिनियम लागू होता है, 1 अप्रैल, 1981 के प्रथम दिन को या उसके पश्चात् आरम्भ होने वाले हर निर्धारण वर्ष के लिए, पूर्व वर्ष की उसकी प्रभार्य आमदनी की बाबत, ऐसे आमदनी के 15 प्रतिशत की दर से कर प्रभारित किया जाएगा :

परन्तु जहां ऐसी प्रभार्य आमदनी के अन्तर्गत कोई ऐसे प्रभार भी हैं जो विदेशी मुद्रा में प्राप्त हुए हैं तो निर्धारिती द्वारा संदेय कर में, विदेशी मुद्रा में इस प्रकार प्राप्त प्रभारों (विक्रय कर, मनोरंजन कर, विलास वस्तुओं पर कर या इस अधिनियम के अधीन कर के रूप में संदेय रकम को छोड़कर) के पांच प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती कर दी जाएगी

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,- 

(क) भारतीय करेंसी में प्राप्त उन प्रभारों से, जो विदेशी मुद्रा का भारतीय करेंसी में संपरिवर्तन करके अभिप्राप्त किए गए हैं, ऐसे मामलों में और ऐसी परिस्थितियों में, जो विहित की जाएं, यह समझा जाएगा कि वे विदेशी मुद्रा में प्राप्त किए गए है; तथा  

(ख) विदेशी मुद्रा" और भारतीय करेंसी" के वही अर्थ होंगे जो उनके विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) की धारा 2 के क्रमशः खण्ड (ग) और (ट) में हैं । 

(2) जहां ऐसे व्यक्ति के, जो ऐसे होटल का कारबार कर रहा है जिसको यह अधिनियम लागू होता है और किसी अन्य ऐसे व्यक्ति के बीच जिसका उससे निकट सम्बन्ध है, किए गए किसी ठहराव के अधीन, द्वितीय वर्णित व्यक्ति द्वारा ऐसे होटल के परिसर में किसी खाद्य, पेय या अन्य सेवाओं का प्रबन्ध किया जाता है तथा आय-कर अधिकारी की यह राय है कि प्रथम वर्णित व्यक्ति द्वारा ऐसा ठहराव इस अधिनियम के अधीन दायित्व से बचने या उसमें कमी करने की दृष्टि से किया गया है, वहां-

(क) द्वितीय वर्णित व्यक्ति को भी ऐसी व्यक्ति समझा जाएगा जो ऐसे होटल का कारबार कर रहा है जिसको यह अधिनियम लागू है; तथा

(ख) द्वितीय वर्णित व्यक्ति पर उस खाद्य, पेय या अन्य सेवाओं के लिए, जिनका उनके द्वारा इस प्रकार प्रबन्ध किया गया है, प्रभारों की बाबत होटल आमदनी-कर ऐसे प्रभारित किया जाएगा मानो ऐसे प्रभार होटल के ऐसे कारबार की, जो उसके द्वारा खण्ड (क) के अधीन किया गया समझा गया है, प्रभार्य आमदनी हो,

तथा तदनुसार इस अधिनियम के सभी उपबन्ध लागू होंगे । 

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-

(i) होटल का कारबार करने वाले व्यक्ति और किसी अन्य व्यक्ति के बीच निकट सम्बन्ध का विद्यमान होना तब समझा जाएगा, यदि होटल का कारबार करने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में ऐसा अन्य व्यक्ति कोई ऐसा व्यक्ति है जो आय-कर अधिनियम की धारा 40क की उपधारा (2) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट है; 

(ii) किसी होटल के परिसर में किसी खाद्य, पेय या अन्य सेवाओं का प्रबन्ध किया गया तब समझा जाएगा, यदि उसका या उनका होटल में या उससे अनुलग्न किसी स्थान में, और जहां होटल, भवन के किसी भाग में स्थित है, वहां भवन के किसी अन्य भाग में प्रबन्ध किया जाता है । 

6. प्रभार्य आमदनी का प्रविषय-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारिती की किसी पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी उन सब प्रभारों की, चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात हों, कुल रकम होगी, जो होटल के ऐसे कारबार की जिसको यह अधिनियम लागू होता है, करने के अनुक्रम में निर्धारिती ने निवास की जगह, खाद्य, पेय या अन्य सेवाओं या उनमें से किसी का प्रबन्ध करने के सम्बन्ध में प्राप्त ही है या उसे प्रोद्भूत या उद्भूत होती है (जिन प्रभारों के अन्तर्गत उन व्यक्तियों से लिए गए ऐसे प्रभार भी हैं जिनके लिए ऐसी जगह का प्रबन्ध नहीं किया गया है  [किन्तु जिनके अंतर्गत उन व्यक्तियों से लिए गए ऐसे प्रभार नहीं हैं जो राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन, 1961 या कौंसलीय संबंधों पर वियना कन्वेंशन, 1963 के अधीन हैट) और इसके अन्तर्गत प्रत्येक ऐसी रकम भी होगी जो निर्धारिती ने इस अधिनियम के अधीन कर, विक्रय कर, मनोरंजन कर और विलास-वस्तुओं पर कर के रूप में संगृहीत की है । 

(2) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां ऐसे कोई प्रभार किसी पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी में, उस पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती को प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाले प्रभारों के रूप में, सम्मिलित किए गए हैं, वहां ऐसे प्रभारों को किसी ऐसे पश्चात्वर्ती पूर्ववर्ष की, जिसमें वे निर्धारिती द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, प्रभार्य आमदनी में सम्मिलित नहीं किया जाएगा । 

7. प्रभार्य आमदनी की संगणना-(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, किसी पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी की संगणना करने में निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी, अर्थात्-

(i) किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष में प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाले प्रभारों की ऐसी रकम जिसका पूर्ववर्ष के दौरान डूबन्त ऋण होना साबित कर दिया गया है :

परन्तु यह तब जक कि ऐसे प्रभारों को किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष की निर्धारिती की प्रभार्य आमदनी की संगणना करने में हिसाब में ले लिया गया हो और उस रकम को उस पूर्ववर्ष के लिए जिसके दौरान उसका डूबन्त ऋण होना साबित किया गया है, निर्धारिती के लेखाओं में वसूल की जा सकने वाली रकम के रूप में बट्टे खाते डाल दिया गया हो

(ii) किन्हीं ऐसे प्रभारों की बाबत जो पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी में सम्मिलित हैं, आय-कर, मनोरंजन कर या विलास-वस्तुओं पर कर के रूप में संदेय कोई रकम;

(iii) इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य कर की रकम ।

                स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि किसी पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी की संगणना करने में, निर्धारिती द्वारा प्राप्त या उसे प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाले प्रभारों की कुल रकम में से इस उपधारा में विनिर्दिष्ट कटौतियों से भिन्न कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।   

(2) किसी पूर्ववर्ष की प्रभार्य आमदनी की संगणना करने में, प्रभारों की वह रकम, जो निर्धारिती द्वारा उस मास के जिसमें यह अधिनियम प्रवृत्त होता है, अन्त से एक मास के अवसान के पहले  [या 27 फरवरी, 1982 के पश्चात्] प्राप्त की गई है या उसे प्रोद्भूत या उद्भूत हुई है, हिसाब में नहीं  ली जाएगी । 

8. प्रभार्य आमदनी की विवरणी-(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो पूर्ववर्ष के दौरान, होटल का ऐसा कारबार करता था जिसके सम्बन्ध में यह अधिनियम लागू होता है या जो इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य व्यक्ति की प्रभार्य आमदनी की बाबत निर्धार्य है, पूर्ववर्ष की अपनी प्रभार्य आमदनी अथवा ऐसे अन्य व्यक्ति की प्रभार्य आमदनी की, विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं, उपवर्णित करने वाली एक विवरणी, होटल के कारबार की बाबत पूर्ववर्ष की समाप्ति से अथवा जहां ऐसे कारबार की बाबत एक से अधिक पूर्ववर्ष हैं, वहां उस पूर्ववर्ष की समाप्ति से जो निर्धारण वर्ष के प्रारम्भ के सबसे अन्त में पहले समाप्त हुआ था, चार मास के अवसान के पहले, अथवा निर्धारण वर्ष के 30 जून से पूर्व, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, देगा :

परन्तु इस निमित्त किए गए आवेदन पर, आय-कर अधिकारी विवरणी देने की तारीख स्वविवेकानुसार बढ़ा सकेगा  

(2) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो आय-कर अधिकारी की राय में, या तो स्वयं अपनी प्रभार्य आमदनी की बाबत या किसी अन्य व्यक्ति की प्रभार्य आमदनी की बाबत, इस अधिनियम के अधीन निर्धार्य है, आय-कर अधिकारी सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति के पहले, उसे ऐसी सूचना जारी करके और उस पर उसकी तामील करके, उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी सूचना की तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर पूर्ववर्ष की अपनी प्रभार्य आमदनी या ऐसे अन्य व्यक्ति की प्रभार्य आमदनी की, विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं, उपवर्णित करने वाली विवरणी दे :

परन्तु इस निमित्त किए गए आवेदन पर, आय-कर अधिकारी विवरणी देने की तारीख स्वविवेकानुसार बढ़ा सकेगा  

(3) कोई ऐसा निर्धारिती, जिसने उपधारा (1) या उपधारा (2) में अनुज्ञात समय के भीतर विवरणी नहीं दी है अथवा जिसे, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन विवरणी देने के पश्चात्, उसमें किसी लोप या गलत कथन का पता चलता है, निर्धारण किए जाने के पहले किसी समय, यथास्थिति, विवरणी या संशोधित विवरणी दे सकेगा ।

9. स्वतः निर्धारण-(1) जहां किसी ऐसी विवरणी के आधार पर जिसके दिए जाने की अपेक्षा धारा 8 या धारा 13 के अधीन की गई है, कोई होटल-आमदनी कर, उस होटल-आमदनी कर की रकम को, यदि कोई हो, जिसका इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन पहले ही संदाय कर दिया गया है, हिसाब में लेने के पश्चात् संदेय है, वहां निर्धारिती ऐसी विवरणी देने के पहले, ऐसे कर का संदाय करने के दायित्वाधीन होगा और विवरणी के साथ ऐसे कर के संदाय का सबूत लगाया जाएगा । 

(2) धारा 10 या धारा 11 के अधीन निर्धारण किए जाने के पश्चात्, उपधारा (1) के अधीन संदत्त की गई कोई रकम ऐसे निर्धारण लेखे संदत्त की गई समझी जाएगी । 

(3) यदि कोई निर्धारिती उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार होटल-आमदनी कर या उसका कोई भाग संदत्त करने में असफल रहता है तो आय-कर अधिकारी निदेश दे सकेगा कि उससे, यथास्थिति, ऐसे कर या उसके ऐसे भाग के दो प्रतिशत के बराबर धनराशि प्रत्येक ऐसे मास के लिए, जिसके दौरान व्यतिक्रम बना रहता है, शास्ति के तौर पर वसूल की जाएगी :

परन्तु ऐसी कोई शास्ति उद्गृहीत करने के पूर्व, निर्धारिती को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

10. निर्धारण-(1) इस अधिनियम के अधीन निर्धारण के प्रयोजन के लिए, आय-कर अधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति पर, जिसने धारा 8 के अधीन विवरणी दी है या जिस पर धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन सूचना की तामील की गई है (चाहे विवरणी दी गई हो या नहीं), एक सूचना तामील कर के उससे यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस तारीख को जो उस सूचना में विनिर्दिष्ट की जाएगी, ऐसे लेखा या दस्तावेजें या अन्य साक्ष्य पेश करे या पेश कराए, जिनकी आय-कर अधिकारी इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अपेक्षा करे, तथा समय-समय पर ऐसे अतिरिक्त लेखाओं या दस्तावेजों या अन्य साक्ष्य के, जिनकी वह अपेक्षा करे, पेश किए जाने की अपेक्षा करने वाली अतिरिक्त सूचनाओं की तामील कर सकेगा । 

(2) आय-कर अधिकारी, ऐसे लेखाओं, दस्तावेजों या अन्य साक्ष्य पर यदि कोई हो, जो उसने उपधारा (1) के अधीन अभिप्राप्त किए हैं, विचार करने के पश्चात् और किसी सुसंगत सामग्री पर, जो उसने एकत्र की है, ध्यान देने के पश्चात् प्रभार्य आमदनी का निर्धारण और ऐसे निर्धारण के आधार पर संदेय होटल-आमदनी कर की रकम का निर्धारण, लिखित आदेश द्वारा करेगा । 

11. सर्वोत्तम विवेकबुद्धि के अनुसार निर्धारण-यदि- 

(क) कोई व्यक्ति धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन दी गई किसी सूचना द्वारा अपेक्षित विवरणी देने में असफल रहता है और उसने उस धारा की उपधारा (3) के अधीन विवरणी या संशोधित विवरणी नहीं दे दी है, या 

(ख) कोई व्यक्ति विवरणी देने के पश्चात्, धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन निकाली गई सूचना के सब निबन्धनों का अनुपालन करने में असफल रहता है, या

(ग) आय-कर अधिकारी का निर्धारिती के लेखाओं की शुद्धता और पूर्णता के बारे में समाधान नहीं होता है,

तो आय-कर अधिकारी ऐसी सभी सुसंगत सामग्री पर जो उसने एकत्र की है, ध्यान देने के पश्चात्, प्रभार्य आमदनी का अपनी सर्वोत्तम विवेक बुद्धि के अनुसार निर्धारण करेगा और ऐसे निर्धारण के आधार पर निर्धारिती द्वारा संदेय या निर्धारिती को प्रतिदेय धनराशि का अवधारण करेगा । 

12. निर्धारिती के अनुरोध पर निर्धारण का फिर से किया जाना-(1) जहां धारा 11 के अधीन निर्धारित निर्धारिती, निर्धारण के परिणामस्वरूप जारी की गई मांग की सूचना की तामील की तारीख से एक मास के भीतर, आय-कर अधिकारी से, निर्धारण को इस आधार पर रद्द करने के लिए आवेदन करता है कि-

(i) वह धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित विवरणी देने से पर्याप्त कारणवश निवारित था, या

(ii) उसे धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई सूचना प्राप्त नहीं हुई थी, या 

(iii) उसे खण्ड (ii) में निर्दिष्ट सूचना के निबन्धनों का अनुपालन करने का युक्तियुक्त अवसर नहीं मिला है या वह ऐसा करने से पर्याप्त कारणवश निवारित था,

वहां यदि आय-कर अधिकारी का, ऐसे आधार के अस्तित्व के बारे में समाधान हो जाता है तो वह उस निर्धारण को रद्द कर देगा और धारा 10 या धारा 11 के उपबन्धों के अनुसार नए सिरे से निर्धारण करने के लिए कार्रवाई करेगा   

(2) आय-कर अधिकारी उपधारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक आवेदन का निपटारा, उसके प्राप्त होने की तारीख से नब्बे दिन के भीतर, कर देगा :

परन्तु नब्बे दिन की पूर्वोक्त अवधि की संगणना करने में, आवेदन का निपटारा करने में हुए किसी ऐसे विलम्ब को अपवर्जित कर दिया जाएगा जो निर्धारिती की ओर से हुआ माना जा सकता है । 

13. निर्धारण से छुटी आमदनी-यदि-

(क) आय-कर अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 8 के अधीन विवरणी देने में अथवा किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसका निर्धारण करने के लिए आवश्यक सब सारवान् तथ्यों को पूर्णतः और सही रूप में प्रकट करने में निर्धारिती की ओर से हुए लोप या असफलता के कारण, उस वर्ष की प्रभार्य आमदनी निर्धारण से छूट गई है या वह अवनिर्धारित की गई है या उसे इस अधिनियम के अधीन अत्यधिक राहत का विषय बना लिया गया है, अथवा 

(ख) इस बात के होते हुए भी कि निर्धारिती की ओर से ऐसा कोई लोप या असफलता नहीं हुई है जैसा कि खण्ड (क) में वर्णित है, आय-कर अधिकारी के पास, अपने कब्जे में की जानकारी के परिणामस्वरूप, यह विश्वास करने का कारण है कि किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय प्रभार्य आमदनी निर्धारण से छूट गई है या अवनिर्धारित की गई है या उसे इस अधिनियम के अधीन अत्यधिक राहत का विषय बना लिया गया है,   

तो वह खण्ड (क) के अन्तर्गत आने वाले मामलों में किसी भी समय, तथा खण्ड (ख) के अन्तर्गत आने वाले मामलों में, उस निर्धारण वर्ष की समाप्ति के चार वर्ष के भीतर किसी भी समय, निर्धारिती पर ऐसी सूचना तामील कर सकेगा, जिसमें वे सब अपेक्षाएं या उनमें से कोई अन्तर्विष्ट हो, जो धारा 8 के अधीन सूचना में सम्मिलित की जाएं, तथा वह होटल-आमदनी कर से प्रभार्य रकम का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए कार्रवाई कर सकेगा, तथा इस अधिनियम के उपबन्ध, जहां तक हो सके, उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह सूचना उस धारा के अधीन निकाली गई सूचना हो । 

14. होटल-आमदनी कर का अग्रिम संदाय-(1) होटल-आमदनी कर उस अवधि की, जो इस धारा के उपबन्धों के अनुसार ठीक बाद के निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ववर्ष होगी, प्रभार्य आमदनी की बाबत वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम रूप में संदेय होगा ।

(2) होटल-आमदनी कर वित्तीय वर्ष के दौरान दो किस्तों में निम्नलिखित तारीखों को अग्रिम रूप में संदेय होगा, अर्थात् :-

(i) उस प्रभार्य आमदनी की बाबत जो पूर्ववर्ष के पूर्वार्ध में हुई मानी जा सकती है, 15 सितम्बर को; और 

(ii) उस प्रभार्य आमदनी की बाबत जो पूर्ववर्ष के उत्तरार्ध में हुई मानी जा सकती है, 15 मार्च को : 

परन्तु 1 अप्रैल, 1980 को प्रारम्भ होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम रूप में संदेय होटल आमदनी कर 15 मार्च,  1981 को एक मुश्त संदेय होगा । 

(3) प्रत्येक निर्धारिती प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, उन तारीखों में से ऐसी तारीख को या उनके पहले, जिनको होटल-आमदनी कर की कोई किस्त अग्रिम रूप में संदेय है, उस प्रभार्य आमदनी का, जो पूर्ववर्ष के सुसंगत भाग से हुई मानी जा सकती है तथा ऐसी प्रभार्य आमदनी पर अग्रिम रूप में संदेय होटल-आमदनी कर का प्राक्कलन आय-कर अधिकारी को भेजेगा और होटल, आमदनी-कर की ऐसी रकम का जो उसके प्राक्कलन के अनुसार है, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट सुसंगत तारीख को या उसके पहले संदाय करेगा : 

परन्तु 1 अप्रैल, 1980 को प्रारम्भ होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम रूप से संदेय होटल-आमदनी कर की बाबत, निर्धारिती आय-कर अधिकारी को उस प्रभार्य आमदनी का प्राक्कलन भेजेगा, जो उस अवधि में हुई मानी जा सकती है जो 1 अप्रैल, 1981 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष और ऐसे प्रभार्य आमदनी पर अग्रिम रूप से संदेय होटल-आमदनी कर के लिए पूर्ववर्ष होगी तथा वह होटल-आमदनी-कर की ऐसी रकम का जो 15 मार्च, 1981 को या उसके पहले उसके प्राक्कलन के अनुसार संदाय करेगा । 

(4) इस धारा के अधीन प्रत्येक प्राक्कलन विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित करके भेजा जाएगा ।

(5) यदि कोई निर्धारिती विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पहले अग्रिम रूप से संदेय होटल-आदमनी कर की किस्त नहीं देता है तो यह समझा जाएगा कि वह ऐसी किस्त की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती है ।

15. विवरणियां देने में या अधिसूचनाओं के अनुपालन में असफलता या आमदनी को छिपाने, आदि के लिए शास्ति-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के दौरान आय-कर अधिकारी या आयुक्त (अपील) का यह समाधान हो जाता है कि- 

(क) कोई व्यक्ति प्रभार्य आमदनी की विवरणी देने में, जिसके दिए जाने की उससे अपेक्षा धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 8 की उपधारा (2) या धारा 13 के अधीन दी गई सूचना द्वारा की गई थी, बिना युक्तियुक्त हेतुक के असफल रहा है या, यथास्थिति, धारा 8 की उपधारा (1) द्वारा या ऐसी सूचना द्वारा अनुज्ञात समय के भीतर और अपेक्षित रीति से देने में बिना युक्तियुक्त हेतुक के, असफल रहा है, या 

() कोई व्यक्ति धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन सूचना का अनुपालन करने में युक्तियुक्त हेतुक के बिना अफसल रहा है, या   

() किसी व्यक्ति ने अपनी प्रभार्य आमदनी की विशिष्टियां छिपाई हैं या ऐसी आमदनी की गलत विशिष्टियां दी हैं,

तो वह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में,-

(i) खण्ड (क) में निर्दिष्ट दशाओं में, उसके द्वारा संदेय होटल-आमदनी कर के अतिरिक्त, ऐसे प्रत्येक मास के लिए, जिसके दौरान व्यतिक्रम बना रहा है, निर्धारित कर के दो प्रतिशत के बराबर रकम देगा किन्तु यह रकम निर्धारित कर के कुल पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगी । 

स्पष्टीकरण-इस खण्ड में, निर्धारित कर" से धारा 14 के अधीन अग्रिम रूप से संदत्त राशि को, यदि कोई हो, घटाकर इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन प्रभार्य होटल-आमदनी कर अभिप्रेत है ; 

(ii) खण्ड (ख) में निर्दिष्ट दशाओं में, उसके द्वारा संदेय होटल-आमदनी कर के अतिरिक्त वह धनराशि जो होटल-आमदनी कर की उस रकम के दस प्रतिशत से कम नहीं होगी किन्तु उसके पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, जिसका परिवर्जन हो जाता यदि उसके द्वारा दी गई विवरणी को सही मानकर स्वीकार कर लिया जाता; 

(iii) खंड (ग) में निर्दिष्ट दशाओं में, उसके द्वारा संदेय होटल-आमदनी कर के अतिरिक्त, वह राशि जो उस होटल-आमदनी कर की रकम से कम नहीं होगी किन्तु उसके दुगुने से अधिक नहीं होगी, जिसका परिवर्जन हो जाता यदि उसके द्वारा दी गई विवरणी को सही मानकर स्वीकार कर लिया जाता :

परन्तु खंड (ग) के अन्तर्गत आने वाली दशा में, आय-कर अधिकारी, सहायक आयुक्त (निरीक्षण) के पूर्व अनुमोदन के बिना, कोई शास्ति अधिरोपित नहीं करेगा ।  

(2) इस धारा के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला कोई आदेश देने पर, आयुक्त (अपील) उसकी एक प्रति आय-कर अधिकारी को तुरन्त भेजेगा ।

16. अग्रिम रूप से संदेय होटल-आमदनी कर के मिथ्या प्राक्कलन या संदाय में असफलता के लिए शास्ति-यदि आय-कर अधिकारी का, धारा 10 या धारा 11 के अधीन निर्धारण से सम्बन्धित कार्यवाही के दौरान यह समाधान हो जाता है कि किसी निर्धारिती ने,-

(क) धारा 14 के अधीन, अपने द्वारा अग्रिम रूप से संदेय होटल-आमदनी कर का ऐसा प्राक्कलन दिया है जिसका मिथ्या होना वह जानता था या जिसके मिथ्या होने का उसे विश्वास था; या 

(ख) युक्तियुक्त हेतुक के बिना धारा 14 के उपबन्धों के अनुसार अपने द्वारा अग्रिम रूप से संदेय होटल-आमदनी कर का प्राक्कलन देने में असफल रहा है,

तो वह यह निदेश दे सकेगा कि निर्धारिती अपने द्वारा संदेय होटल-आमदनी कर के अतिरिक्त, शास्ति के रूप में ऐसी राशि का संदाय करेगा-

(i) जो, खंड (क) में निर्दिष्ट दशा में, उस रकम के दस प्रतिशत से कम किन्तु उसके डेढ़ गुने से अधिक नहीं होगी, जिससे निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अग्रिम रूप से संदत्त होटल-आमदनी कर, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन प्रभार्य होटल-आमदनी कर के पचासी प्रतिशत से कम है;

(ii) जो, खंड (ख) में निर्दिष्ट दशा में, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन प्रभार्य होटल-आमदनी कर के पचासी प्रतिशत के दस प्रतिशत से कम नहीं होगी किन्तु डेढ़ गुने से अधिक नहीं होगी ।

17. सुनवाई का अवसर-धारा 15 या धारा 16 के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला कोई आदेश, निर्धारिती को सुनने के या उसे सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के पश्चात् ही, किया जाएगा, अन्यथा नहीं । 

18. आयुक्त (अपील) को अपीलें-(1) कोई व्यक्ति जो ऐसे होटल-आमदनी कर की रकम पर आक्षेप करता है जिसके लिए वह आय-कर अधिकारी द्वारा निर्धारित किया गया है, या जो इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किए जाने के अपने दायित्व से इंकार करता है, या धारा 12 के अधीन ऐसे आदेश पर आक्षेप करता है जो धारा 11 के अधीन किए गए निर्धारण के फिर से किए जाने से इंकार करता है, या जो आय-कर अधिकारी द्वारा अधिरोपित किसी शास्ति या जुर्माने पर आक्षेप करता है या इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन राहत के रूप में आय-कर अधिकारी द्वारा अनुज्ञात रकम पर आक्षेप करता है या आय-कर अधिकारी द्वारा राहत दी जाने से इंकार पर या भूल को सुधारने के ऐसे आदेश पर जिसके परिणामस्वरूप निर्धारण में वृद्धि या प्रतिदाय में कमी की गई है, या धारा 20 के अधीन भूल सुधार के लिए निर्धारिती द्वारा किए गए दावे को मंजूर करने से इंकार करने वाले किसी आदेश पर आक्षेप करता है तो वह आयुक्त (अपील) को अपील कर सकेगा । 

(2) प्रत्येक अपील विहित प्ररूप में होगी और विहित रीति से सत्यापित की जाएगी । 

(3) अपील निम्नलिखित तारीख के तीस दिन के भीतर प्रस्तुत की जाएगी, अर्थात् :-

(क) जहां अपील, निर्धारण या शास्ति या जुर्माने से सम्बन्धित है वहां निर्धारण या शास्ति या जुर्माने से सम्बन्धित मांग की सूचना की तामील की तारीख, या 

() किसी अन्य दशा में, वह तारीख जिसको उस आदेश की सूचना की तामील की जाती है जिसके विरुद्ध अपील की जा रही है :

परन्तु यदि आयुक्त (अपील) का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी के पास उक्त अवधि के भीतर अपील प्रस्तुत न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था तो वह उस अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा । 

(4) आयुक्त (अपील) अपील की सुनवाई और अवधारण करेगा और इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, ऐसे आदेश पारित करेगा जो वह ठीक समझे और ऐसे आदेशों के अन्तर्गत निर्धारण या शास्ति की वृद्धि करने वाला आदेश भी आ सकेगा : 

परन्तु निर्धारण या शास्ति में वृद्धि करने वाला आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि उससे प्रभावित व्यक्ति को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।

(5) अपीलों की सुनवाई और अवधारण में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, किसी आवश्यक उपान्तर सहित, आय-कर के सम्बन्ध में लागू होने वाली प्रक्रिया के अनुसार होगी ।

19. अपील अधिकरण को अपीलें-(1) कोई निर्धारिती, जो आयुक्त द्वारा धारा 22 के अधीन पारित आदेश से आयुक्त (अपील) द्वारा इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पारित आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील, अपील अधिकरण को कर सकेगा ।  

(2) यदि आयुक्त (अपील) द्वारा इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पारित किसी आदेश पर आयुक्त आक्षेप करता है तो वह आय-कर अधिकारी को उस आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील करने का निदेश दे सकेगा   

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक अपील उस तारीख से साठ दिन के भीतर फाइल की जाएगी, जिसको वह आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की जा रही है, यथास्थिति, निर्धारिती को या आयुक्त को संसूचित किया जाता है  

(4) यथास्थिति, आय-कर अधिकारी या निर्धारिती यह सूचना प्राप्त होने पर कि आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध दूसरे पक्षकार द्वारा अपील उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन की गई है, इस बात के होते हुए भी कि उसने ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील न की हो, सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर, आयुक्त (अपील) के आदेश के किसी भाग के विरुद्ध, विहित रीति से सत्यापित, प्रत्याक्षेपों का ज्ञापन फाइल कर सकेगा तथा ऐसे ज्ञापन का अपील अधिकरण द्वारा इस प्रकार निपटारा किया जाएगा मानो वह उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर पेश की गई अपील हो । 

(5) अपील अधिकरण उपधारा (3) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट सुसंगत अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी अपील को ग्रहण कर सकेगा या प्रत्याक्षेपों का ज्ञापन फाइल करने की अनुज्ञा दे सकेगा, यदि उसका समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर उसे पेश न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था । 

(6) अपील अधिकरण को अपील विहित प्ररूप में होगी और उसका सत्यापन विहित रीति से किया जाएगा और उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी अपील या उपधारा (4) में निर्दिष्ट किन्हीं प्रत्याक्षेपों के ज्ञापन की दशा के सिवाय, उसके साथ  [दो सौ रुपए] फीस होगी । 

(7) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन किसी अपील की सुनवाई करने और उसकी बाबत आदेश देने में अपील अधिकरण उन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेगा और उसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जिनका उसके द्वारा प्रयोग और अनुसरण आय-कर अधिनियम के अधीन अपील की सुनवाई और आदेश करने में किया जाता है । 

20. भूल सुधार-(1) अभिलेख से प्रकट किसी भूल को सुधारने की दृष्टि से, आय-कर अधिकारी, आयुक्त (अपील), आयुक्त और अपील अधिकरण स्वप्रेरणा से या इस निमित्त निर्धारिती द्वारा अथवा जहां सम्बन्धित प्राधिकारी आयुक्त (अपील) है, वहां आय-कर अधिकारी द्वारा भी किए गए आवेदन पर, इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में अपने द्वारा पारित किसी आदेश को, उस तारीख के चार वर्ष के भीतर संशोधित कर सकेगा जिसको ऐसा आदेश पारित किया गया था । 

(2) कोई संशोधन, जिसका परिणाम निर्धारण में वृद्धि करना या प्रतिदाय को घटाना या निर्धारिती के दायित्व को अन्यथा बढ़ाना है, इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि सम्बन्धित प्राधिकारी ने ऐसा करने के अपने आशय की निर्धारिती को सूचना दे दी हो और निर्धारिती को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दे दिया हो

(3) जहां इस धारा के अधीन कोई संशोधन किया जाता है वहां सम्बन्धित प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में आदेश पारित किया जाएगा ।   

(4) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां ऐसे किसी संशोधन का परिणाम निर्धारण को घटाना है, वहां आय-कर अधिकारी ऐसा प्रतिदाय करेगा जो ऐसे निर्धारिती को देय हो ।

(5) जहां ऐसे किसी संशोधन का परिणाम पहले से किए गए निर्धारण में वृद्धि करना या प्रतिदाय को घटाना है वहां आय-कर अधिकारी संदेय राशि विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना निर्धारिती पर तामील करेगा  

21. आय-कर अधिनियम के अधीन कुल आय की संगणना में होटल-आमदनी कर का कटौती योग्य होना-आय-कर अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो ऐसे होटल का कारबार कर रहा हो जिसे यह अधिनियम लागू होता है, कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय की संगणना में, किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती द्वारा संदेय होटल-आमदनी कर की, होटल के कारबार के लाभों और अभिलाभों में से, जो उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय है, कटौती की जा सकेगी ।

22. राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले आदेश का पुनरीक्षण-(1) आयुक्त इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा और यदि वह यह समझता है कि आय-कर अधिकारी द्वारा उसमें पारित कोई आदेश, वहां तक गलत है, जहां तक कि वह राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है, तो वह निर्धारिती को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने या कराने के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझता है, उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा उस मामले की परिस्थितियों में न्यायोचित हो, और जिसके अन्तर्गत निर्धारण में वृद्धि या उपान्तरण का, या निर्धारण को रद्द करने और नए सिरे से निर्धारण करने का, निदेश देने का आदेश भी है । 

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश,-

(क) धारा 13 के अधीन पुनः निर्धारण के आदेश का पुनरीक्षण करने के लिए नहीं किया जाएगा, अथवा 

(ख) उस आदेश की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, नहीं किया जाएगा जिसका पुनरीक्षण चाहा गया है । 

(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे आदेश की दशा में जो अपील अधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेशों के परिणामस्वरूप या उनको प्रभावी करने के लिए पारित किया गया है, इस धारा के अधीन पुनरीक्षण में आदेश, किसी भी समय पारित किया जा सकेगा ।

स्पष्टीकरण-उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए परिसीमाकाल की संगणना करने में ऐसी अवधि का अप्रवर्जन कर दिया जाएगा जिसके दौरान इस धारा के अधीन कोई कार्यवाही किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश से रोक दी गई है । 

23. आयुक्त द्वारा आदेशों का पुनरीक्षण-(1) आयुक्त स्वप्रेरणा से या निर्धारिती द्वारा पुनरीक्षण के लिए आवेदन पर, इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगा जो उसके अधीनस्थ किसी आय-कर अधिकारी द्वारा की गई है और उसमें ऐसी जांच कर सकेगा या करवा सकेगा जो वह ठीक समझे और इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे, किन्तु वह आदेश निर्धारिती को प्रतिकूलतः प्रभावित करने वाला नहीं होगा ।

(2) यदि कोई आदेश एक वर्ष से अधिक पहले किया गया है तो आयुक्त स्वप्रेरणा से इस धारा के अधीन उस आदेश का पुनरीक्षण नहीं करेगा ।

(3) निर्धारिती द्वारा इस धारा के अधीन पुनरीक्षण के लिए किसी आवेदन की दशा में आवेदन, उस तारीख से जिसको कि प्रश्नगत आदेश उसे संसूचित किया गया था या उस तारीख से जिसको उसे अन्यथा उसका ज्ञान हुआ था, इनमें से जो भी पूर्वतर हो उससे, एक वर्ष के भीतर करना होगा :

परन्तु यदि आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि निर्धारिती उस अवधि के भीतर आवेदन करने से पर्याप्त हेतुक से निवारित हो गया था तो वह उस अवधि की समाप्ति के पश्चात् किया गया आवेदन ग्रहण कर सकेगा ।

(4) आयुक्त किसी आदेश का इस धारा के अधीन पुनरीक्षण निम्नलिखित दशाओं में नहीं करेगा :-

(क) जहां आदेश के विरुद्ध अपील, आयुक्त (अपील) को होती है किन्तु की नहीं गई है और वह समय जिसके भीतर ऐसी अपील की जा सकती है, समाप्त नहीं हुआ है अथवा निर्धारिती ने अपील के अपने अधिकार का अधित्यजन नहीं किया है, अथवा 

(ख) जहां आदेश को, आयुक्त (अपील) को की गई अपील का विषय बनाया गया है । 

(5) इस धारा के अधीन पुनरीक्षण के लिए निर्धारिती द्वारा दिए गए प्रत्येक आवेदन के साथ पच्चीस रुपए फीस होगी

स्पष्टीकरण-आयुक्त के ऐसे आदेश के बारे में, जिसमें हस्तक्षेप करने से इंकार किया गया है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, यह नहीं समझा जाएगा कि वह निर्धारिती पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला आदेश है । 

24. आय-कर अधिनियम के उपबन्धों का लागू होना-आय-कर अधिनियम की निम्नलिखित धाराओं तथा अनुसूचियों के उपबन्ध और समय-समय पर यथा प्रवृत्त आय-कर (प्रमाणपत्र कार्यवाही) नियम, 1962 आवश्यक उपान्तरों सहित उसी प्रकार लागू होंगे मानो उक्त उपबन्ध तथा नियम आय-कर के स्थान पर होटल-आमदनी कर के प्रति निर्देश करते हों :-

2(43ख) और (44), 41 (4), 118, 125, 125क, 128 से 136 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), 138, 140, 144क, 156, 159 से 163 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), 166, 167, 170, 171, 173 से 179 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं)  187, 188, 189, 219 से 227 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं ), 228क, 229, 231, 232, 237 से 242 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) 244, 245, 254 से 262 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), 265, 266, 268, 269, 278ख, 278ग, 278घ, 281, 281ख, 282, 283, 284, 287, 288, 288क, 288ख, 289 से 293 (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं), द्वितीय अनुसूची और तृतीय अनुसूची :

परन्तु उक्त उपबन्धों और नियमों में निर्धारिती" के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे इस अधिनियम में यथा परिभाषित निर्धारिती के प्रति निर्देश है । 

25. इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आय-कर के कागज-पत्रों का उपलब्ध होना-(1) आय-कर अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, उस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किए गए किसी कथन या दी गई किसी विवरणी में अन्तर्विष्ट या उस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अभिप्राप्त या संगृहीत सभी जानकारी का उपयोग इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा ।

(2) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किए गए किसी कथन या दी गई किसी विवरणी में अन्तर्विष्ट या इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अभिप्राप्त या संगृहीत सब जानकारी का उपयोग आय-कर अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा ।

26. कर आदि के अपवंचन का जानबूझकर प्रयत्न-(1) यदि कोई व्यक्ति किसी भी रीति से किसी ऐसे कर, शास्ति या ब्याज के, जो इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय है, अपवंचन का जानबूझकर प्रयत्न करता है तो वह किसी ऐसी शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो उस पर इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के अधीन अधिरोपणीय है,-

(i) ऐसे मामले में, जिसमें वह रकम जिसका अपवंचन चाहा गया है, एक लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास के कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा

(ii) किसी अन्य मामले में कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा । 

(2) यदि कोई व्यक्ति किसी भी रीति से इस अधिनियम के अधीन किसी कर, शास्ति या ब्याज के संदाय के अपवंचन का जानबूझकर प्रयत्न करता है तो वह किसी ऐसी शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो उस पर इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के अधीन अधिरोपणीय है, कठोर कारावास से जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी, किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा तथा न्यायालय के विवेकानुसार जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसे कर, शास्ति या ब्याज से जो इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय है या उसके संदाय के अपवंचन के लिए जानबूझकर किए गए प्रयत्न के अन्तर्गत ऐसा मामला भी आएगा जिसमें कोई व्यक्ति-

(i) अपने कब्जे या नियन्त्रण में कोई ऐसी लेखा-बहियां या अन्य दस्तावेजें (जो ऐसी लेखा-बहियां या अन्य दस्तावेजें हैं जो कि इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही से सुसंगत हैं) रखता है, जिनमें कोई मिथ्या प्रविष्टि या कथन है; अथवा 

(ii) ऐसी लेखा-बहियों या अन्य दस्तावेजों में कोई मिथ्या प्रविष्टि या कथन करता है या कराता है; अथवा 

(iii) ऐसी लेखा-बहियों या अन्य दस्तावेजों में से किसी सुसंगत प्रविष्टि या कथन का जानबूझकर लोप करता है या कराता है; अथवा

(iv) कोई अन्य ऐसी परिस्थिति विद्यमान कराता है जिसके परिणामस्वरूप ऐसा व्यक्ति किसी ऐसे कर, शास्ति या ब्याज के, जो इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य या अधिरोपणीय है, या उसके संदाय के अपवंचन में समर्थ हो सके  

27. प्रभार्य आमदनी की विवरणियां देने में असफलता-यदि कोई व्यक्ति प्रभार्य आमदनी की ऐसी विवरणी जिसकी धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 8 की उपधारा (2) या धारा 13 के अधीन दी गई सूचना द्वारा उससे अपेक्षा की गई है, सम्यक् समय में देने में जानबूझकर असफल रहता है तो वह- 

(i) ऐसे मामले में जिसमें कर की वह रकम जिसका कि यदि असफलता का पता न चलता तो अपवंचन किया जाता, एक लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा; 

(ii) किसी अन्य मामले में, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा :

                परन्तु धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन प्रभार्य  आमदनी की विवरणी सम्यक् समय में न देने के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध इस धारा के अधीन कार्यवाही नहीं की जाएगी, यदि- 

(क) उसके द्वारा विवरणी निर्धारण वर्ष की समाप्ति के पहले दे दी जाती है; अथवा 

(ख) निर्धारण पर अवधारित प्रभार्य आमदनी पर उसके द्वारा संदेय कर, जो धारा 14 के अधीन अग्रिम रूप से संदत्त कर, यदि कोई हो, को घटाकर आए, तीन हजार रुपए से अधिक न हो । 

28. लेखा और दस्तावेज पेश करने में असफलता-यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी सूचना में, जो धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन उस पर तामील की गई है, विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पहले, ऐसे लेखाओं या दस्तावेजों की जो ऐसी सूचना में निर्दिष्ट हैं, पेश करने या कराने में जानबूझकर असफल रहता है तो वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके दौरान व्यतिक्रम बना रहता है, चार रुपए से कम या दस रुपए से अधिक नहीं होगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा । 

29. सत्यापन में मिथ्या कथन, आदि-यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन किसी सत्यापन में ऐसा कथन करता है या ऐसा लेखा या विवरण देता है, जो मिथ्या है और जिसके बारे में वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, तो वह

(i) ऐसे मामले में जिसमें कर की वह रकम जिसका कि यदि उस विवरण या लेखे को सही मानकर स्वीकार कर लिया जाता तो अपवंचन किया जाता, एक लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, दण्डनीय होगा; 

(ii) किसी अन्य मामले में, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से दंडनीय होगा । 

30. मिथ्या विवरणी का दुष्प्रेरण आदि-यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को किसी प्रभार्य आमदनी से संबंधित ऐसा लेखा देने या विवरण या घोषणा परिदत्त करने के लिए, जो मिथ्या है और जिसकी बाबत वह या तो यह जानता है कि वह मिथ्या है या जिसके सही होने का उसे विश्वास नहीं है, अथवा धारा 26 की उपधारा (1) के अधीन कोई अपराध करने के लिए, किसी रीति से दुष्प्रेरित या उत्प्रेरित करता है, तो वह- 

(i) ऐसे मामले में जिसमें कर, शास्ति या ब्याज की वह रकम जिसका कि यदि उस घोषणा, लेखे या विवरण को सही मान कर स्वीकार कर लिया जाता तो अपवंचन किया जाता या जिसका अपवंचन किए जाने का जानबूझकर प्रयत्न किया गया है, एक लाख रुपए से अधिक है, कठोर कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा;

(ii) किसी अन्य मामले में, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा । 

31. द्वितीय और पश्चात्वर्ती अपराधों के लिए दण्ड-यदि कोई व्यक्ति जो धारा 26 की उपधारा (1) या धारा 27 या धारा 29 या धारा 30 के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, पूर्वोक्त उपबन्धों में से किसी के अधीन किसी अपराध के लिए पुनः सिद्धदोष ठहराया जाता है तो वह द्वितीय और प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कठोर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

32. कुछ अपराधों का असंज्ञेय होना-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 26 या धारा 27 या धारा 29 या धारा 30 के अधीन दण्डनीय अपराध को उस संहिता के अर्थ में असंज्ञेय समझा जाएगा  

33. कार्यवाहियों का संस्थित किया जाना और अपराधों का शमन-(1) धारा 26 या धारा 27 या धारा 28 या धारा 29 या धारा 30 के अधीन किसी अपराध के लिए, इस अधिनियम से सम्बद्ध या उससे उद्भूत होने वाले किसी मामले के बारे में भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अधीन किसी अपराध के लिए, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई कार्यवाही आयुक्त की प्रेरणा पर ही की जाएगी, अन्यथा नहीं । 

(2) आयुक्त धारा 26 या धारा 27 या धारा 28 या धारा 29 या धारा 30 के अधीन दण्डनीय अपराध का शमन कार्यवाहियों के संस्थित होने के पूर्व या उनके पश्चात् कर सकेगा ।

34. नियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित में से सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

(क) वह रीति जिसमें उन मामलों में जिनमें कि निवास की जगह और खाद्य की बाबत संयुक्त प्रभार उद्ग्रहीत किए जाते हैं, धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन, कमरा प्रभारों का अवधारण किया जा सकेगा; 

(ख) वे मामले और वे परिस्थितियां जिनमें विदेशी मुद्रा का भारतीय करेंसी में संपरिवर्तन करके भारतीय करेंसी में किए गए संदायों की बाबत यह समझा जाएगा कि धारा 5 की उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए संदाय विदेशी मुद्रा में किए गए हैं; 

(ग) वह प्ररूप जिसमें धारा 8 के अधीन विवरणियां दी जा सकेंगी, वह रीति जिसमें वे सत्यापित की जा सकेंगी तथा वे अन्य विशिष्टियां जो किसी प्ररूप में हो सकेंगी ; 

() वह प्ररूप जिसमें धारा 14 के अधीन प्राक्कलन भेजा जा सकेगा और वह रीति जिसमें उसे सत्यापित किया जा सकेगा

(ङ) वह प्ररूप जिसमें धारा 18 या धारा 19 के अधीन अपीलें फाइल की जा सकेंगी और वह रीति जिसमें वे सत्यापित की जा सकेंगी; 

(च) वह प्ररूप जिसमें धारा 19 की उपधारा (4) के अधीन प्रत्याक्षेपों के ज्ञापन को सत्यापित किया जा सकेगा; 

(छ) वह प्रक्रिया जिसका धारा 20 के अधीन भूलों को सुधारने के लिए आवेदनों की बाबत अनुसरण किया जाएगा; 

(ज) वह प्ररूप जिसमें धारा 20 की उपधारा (5) के अधीन निर्धारिती पर मांग की सूचना तामील की जा सकेगी;

(झ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जा सकेगा । 

(3) इस धारा द्वारा प्रदत्त नियम बनाने की शक्ति के अन्तर्गत उसके प्रयोग के प्रथम अवसर पर, उन नियमों या उनमें से किसी को, किसी ऐसी तारीख से जो इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से पहले की नहीं है, भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति होगी ।

(4) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन बनाए गए प्रत्येक नियम को बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखेगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

35. छूट देने की शक्ति-जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि या तो लोक हित में या मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, वहां वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी होटल या किसी वर्ग के होटलों को होटल-आमदनी कर के उद्ग्रहण से छूट दे सकेगी ।

36. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा   

37. पारिणामिक संशोधन-(1) केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 (1963 का 54) की धारा 2 के खण्ड (ग) के     उपखण्ड (1) में,-

(क) मद (vii) में, अन्त में आने वाले और" शब्द का लोप किया जाएगा; और  

(ख) इस प्रकार संशोधित मद (vii) के पश्चात् निम्नलिखित मद अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

(viii) होटल-आमदनी कर अधिनियम, 1980; और" । 

(2) आर्थिक अपराध (परिसीमा का लागू न होना) अधिनियम, 1974 (1974 का 12) की अनुसूची में ब्याज कर अधिनियम, 1974 (1974 का 45) से संबंधित प्रविष्टि 2क के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

2ख. होटल-आमदनी कर अधिनियम, 1980" ।

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