रासायनिक आयुध अभिसमय अधिनियम, 2000
(2000 का अधिनियम संख्यांक 34)
[26 अगस्त, 2000]
रासायनिक आयुधों के विकास, उत्पादन, संचयन और उपयोग के
प्रतिषेध और उनके विनाश पर अभिसमय को प्रभावी बनाने
के लिए और उससे संसक्त या उसके आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
रासायनिक आयुधों के विकास, उत्पादन, संचयन और उपयोग के प्रतिषेध और उनके विनाश पर अभिसमय पर भारत सरकार की ओर से पेरिस में 14 जनवरी, 1993 को हस्ताक्षर किए गए थे;
और भारत को, उक्त अभिसमय का अनुसमर्थन करने के पश्चात् उसे प्रभावी बनाने के लिए और उससे संसक्त या उसके आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध बनाने हैं;
भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, लागू होना और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम रासायनिक आयुध अभिसमय अधिनियम, 2000 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है और यह निम्नलिखित को लागू होगाः-
(क) भारत के नागरिक, जो भारत से बाहर हैं; और
(ख) भारत में रजिस्ट्रीकृत या निगमित कम्पनियों या निगमित निकायों के भारत से बाहर सहयुक्त, शाखा या समनुषंगी ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) अनुच्छेद" से अभिसमय का कोई अनुच्छेद अभिप्रेत है;
(ख) रासायनिक आयुध" से,-
(i) विषैले रसायन और उनके पूर्वगामी, सिवाय वहां के जहां वे इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए आशयित हैं, जब तक कि उनकी किस्में और मात्राएं उक्त प्रयोजनों से सुसंगत हैं;
(ii) युद्ध सामग्री और युक्तियां जो उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट उन विषैले रसायनों के विषैले गुणधर्म के माध्यम से मृत्यु या अन्य अपहानि कारित करने के लिए विनिर्दिष्ट रूप से बनाई गई हैं, जो ऐसी युद्ध सामग्री और युक्तियों के नियोजन के परिणामस्वरूप निर्मुक्त किए जाएंगे; या
(iii) उपखंड (ii) में विनिर्दिष्ट युद्ध सामग्री और युक्तियों के नियोजन के संबंध में प्रत्यक्ष रूप से उपयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप से अभिकल्पित किया गया एक साथ पृथक् रूप से कोई उपस्कर, अभिप्रेत है,
(ग) अभिसमय" से रासायनिक आयुधों के विकास, उत्पादन, संचयन और उपयोग के प्रतिषेध और उनके विनाश पर भारत सरकार की ओर से पेरिस में 14 जनवरी, 1993 को हस्ताक्षरित अभिसमय अभिप्रेत है;
(घ) प्रवर्तन अधिकारी" से उस रूप में केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन या राज्य सरकार द्वारा उस धारा की उपधारा (2) के अधीन नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ङ) विषैले रसायनों, उनके पूर्वगामियों या विविक्त कार्बनिक रसायनों के संबंध में, जिनके अन्तर्गत फास्फोरस, गंधक, या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट करने वाले विविक्त कार्बनिक रसायन हैं, माल" से अभिप्रेत है कोई सामग्री, वाणिज्या, वस्तु या यौगिक, जो ऐसे विषैले रसायनों, उनके पूर्वगामियों या विविक्त कार्बनिक रसायनों से मिलकर बना हो जिनमें, फास्फोरस, गंधक, या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट करने वाले विविक्त कार्बनिक रसायन हों और इसके अन्तर्गत कार्बनिक रसायनों, उनके पूर्वगामियों या विविक्त कार्बनिक रसायनों के, जिनके अन्तर्गत फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट करने वाले विविक्त कार्बनिक रसायन हैं उत्पादन, प्रसंस्करण या भण्डारण में प्रयुक्त सामग्री, वाणिज्या, वस्तुएं, यौगिक या साधित्र हैं;
(च) उद्योग" के अंतर्गत कोई प्रसुविधा भी है;
(छ) निरीक्षक" से अभिसमय के अनुसार निरीक्षण या परिदर्शन करने के लिए अभिसमय के सत्यापन उपाबंध के भाग 2, अनुभाग स्त्र्कऱ् में उपवर्णित रूप में प्रक्रिया के अनुसार तकनीकी सचिवालय द्वारा अभिहित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ज) राष्ट्रीय प्राधिकरण" से धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित रासायनिक आयुध अभिसमय के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(झ) संगठन" से अनुच्छेद के अनुसरण में स्थापित रासायनिक आयुधों के प्रतिषेध के लिए संगठन अभिप्रेत है;
(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ट) इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैंः-
(i) औद्योगिक, कृषि, अनुसंधान, आयुर्विज्ञान, भेषजीय या अन्य शान्तिपूर्ण प्रयोजन;
(ii) संरक्षा प्रयोजन, अर्थात्, वे प्रयोजन जो विषैले रसायनों के विरुद्ध संरक्षण और रासायनिक आयुधों के विरुद्ध संरक्षण से प्रत्यक्षतः संबंधित हैं;
(iii) सैन्य प्रयोजन, जो रासायनिक आयुधों के प्रयोग से सम्बद्ध नहीं हैं और युद्ध की रीति के रूप में रसायनों के विषैले गुणधर्मों के प्रयोग पर आश्रित नहीं हैं;
(iv) विधि का प्रवर्तन, जिसमें घरेलू बलवा नियंत्रण प्रयोजन भी सम्मिलित हैं;
(ठ) राज्य पक्षकार" से अभिसमय का कोई ऐसा हस्ताक्षरकर्ता या सम्मिलित होने वाला राज्य अभिप्रेत है जिसका अनुसमर्थन या अंगीकार का पत्र अभिसमय के निक्षेपकर्ता के पास जमा कर दिया गया है;
(ड) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु अभिसमय या दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उस अभिसमय या संहिता में हैं ।
3. अभिसमय का लागू होना-(1) किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम की अनुसूची में उपवर्णित अभिसमय के उपबन्ध भारत में विधि का बल रखेंगे ।
(2) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर और राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उक्त अभिसमय के उपबंधों के जो उसमें उपवर्णित हैं, किन्हीं संशोधनों के अनुरूप जो सम्यक् रूप से बनाए गए और अंगीकार किए गए हैं, अनुसूची का संशोधन कर सकेगी ।
4. निरीक्षण के लिए अनुरोध को अस्वीकार करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जहां केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के अधीन भारत में रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा के किसी निरीक्षण के बारे में यह समझती है कि वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों और आर्थिक हितों के विपरीत है तो वह ऐसे निरीक्षण के लिए अनुरोध को अस्वीकार कर सकेगी ।
5. अधिनियम की समाप्ति की घोषणा करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह घोषणा कर सकेगी कि यदि भारत सरकार अनुच्छेद 16 के उपबंधों के अनुसार अभिसमय से अलग हो जाती है तो यह अधिनियम प्रवर्तन में नहीं रहेगा और ऐसी घोषणा पर यह अधिनियम प्रवर्तन में नहीं रहेगा किन्तु इस धारा के प्रवर्तन के अधीन इसकी समाप्ति निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेगी-
(क) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या ऐसे किसी नियम के अधीन किए गए आदेश का पूर्व प्रवर्तन या उनके अधीन सम्यक् रूप से की गई या हुई कोई बात, या
(ख) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या ऐसे किसी नियम के अधीन किए गए किसी आदेश के अधीन अर्जित, उद्भूत या उपगत कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व, या
(ग) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध की बाबत उपगत कोई शास्ति, समपहरण या दंड, या
(घ) पूर्वोक्त किसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड की बाबत कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार,
और कोई ऐसा अन्वेषण और विधिक कार्यवाही या उपचार संस्थित, जारी या प्रवर्तित की जा सकेगी और ऐसी कोई शास्ति, समपहरण या दंड ऐसे अधिरोपित किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम समाप्त ही न हुआ हो ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय प्राधिकरण की स्थापना और उसकी शक्तियां तथा कृत्य
6. राष्ट्रीय प्राधिकरण की स्थापना-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अभिसमय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में ज्ञात एक प्राधिकरण की स्थापना करेगी जो एक अध्यक्ष और उतने निदेशकों से मिलकर बनेगा, जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं ।
(2) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिकारियों और ऐसे अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।
(3) अध्यक्ष और निदेशकों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
(4) राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
(5) इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के निर्वहन में राष्ट्रीय प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन होगा ।
7. राष्ट्रीय प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए,-
(क) राष्ट्रीय प्राधिकरण का यह साधारण कर्तव्य होगा कि वह भारत सरकार की ओर से अभिसमय के अधीन बाध्यताओं को पूरा करे;
(ख) राष्ट्रीय प्राधिकरण के लिए यह आवश्यक होगा कि वह अभिसमय से संबंधित विषयों पर संगठन और राज्य पक्षकारों से प्रभावी संपर्क बनाने के लिए राष्ट्रीय केन्द्र बिन्दु के रूप में कार्य करे ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय प्राधिकरण के निम्नलिखित कृत्य होंगेः-
(क) अभिसमय के अधीन भारत सरकार की बाध्यताओं को पूरा करने के प्रयोजनों के लिए, संगठन और अन्य राज्य पक्षकारों के साथ संपर्क बनाए रखना;
(ख) अभिसमय के उपबंधों के अनुपालन को मानीटर करना;
(ग) अभिसमय में यथा विनिर्दिष्ट विषैले रसायनों या उनके पूर्वगामियों के विकास, उत्पादन, प्रसंस्करण, उपभोग, अंतरण या प्रयोग को विनियमित और मानीटर करना;
(घ) रासायनिक आयुधों के प्रयोग या प्रयोग की धमकी के विरुद्ध अनुच्छेद 10 के अधीन सहायता और संरक्षण के लिए किसी राज्य पक्षकार को अनुरोध करना या उससे अनुरोध प्राप्त करना;
(ङ) उस दशा में जब लड़ाई के साधन के रूप में रासायनिक आयुधों या दंगा नियंत्रण कारकों के प्रयोग की शिकायत संगठन से प्राप्त होती है; नेमी निरीक्षण या आक्षेप निरीक्षण का या प्रबन्धन अन्वेषण का प्रबंध करना;
(च) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निरीक्षण का संचालन करना;
(छ) आक्षेप निरीक्षण के लिए भारत के अनुरोध के स्वीकार किए जाने के लिए संगठन से संपर्क करना अथवा संगठन से भारत के विरुद्ध किसी राज्य पक्षकार द्वारा की गई किसी तुच्छ या मानहानिकारक अनुरोध का प्रतिरोध करना;
(ज) निरीक्षकों की सूची की संवीक्षा करना और उसे स्वीकार करना तथा निरीक्षण स्थल पर निरीक्षण दल द्वारा लाए गए अनुमोदित उपस्करों का सत्यापन करना;
(झ) भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर निरीक्षण दल और प्रेक्षकों के लिए अनुरक्षकों की व्यवस्था करना;
(ञ) रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं, पुराने रासायनिक आयुधों या परित्यक्त रासायनिक आयुधों की समाप्ति की पहचान और निगरानी करना;
(ट) आक्षेप निरीक्षण के दौरान लक्ष्य प्राप्ति पैठ के लिए वार्ता करना;
(ठ) कोई जांच पूरी हो जाने के पश्चात् अनुमोदित उपस्करों का गैर-संदूषण सुनिश्चित करना;
(ड) रासायनिक आयुधों के परिवहन, नमूना लेने या भण्डारण के लिए रक्षोपाय अधिकथित करने और रासायनिक आयुधों, पुराने रासायनिक आयुधों, परित्यक्त रासायनिक आयुधों या रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा को नष्ट करने से पैदा होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण के उत्सर्जन या निस्सारण के लिए मानकों के नियत करने के लिए केन्द्रीय सरकार को सलाह देना;
(ढ) आंकड़ा आधारित गोपनीयता सुनिश्चित करना और इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा संगृहीत और प्राप्त की गई गोपनीय जानकारी और प्रौद्योगिकी को गुप्त बनाए रखना;
(ण) राज्य पक्षकारों के बीच रसायनों के विकास से संबंधित वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी जानकारी का विनिमय सुकर बनाना;
(त) किसी ऐसे व्यक्ति से ऐसी जानकारी मांगना जिसके लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि ऐसी जानकारी अभिसमय के उपबंधों के अनुपालन के लिए अपेक्षित होगी;
(थ) भारत सरकार की ओर से ऐसे प्रयोजनों के लिए जो अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं हैं, रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों के उत्पादन के लिए किसी एकल लघु प्रसुविधा का अनुमोदन और घोषणा करना;
(द) प्रवर्तन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करना;
(ध) रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा, पुराने रासायनिक आयुधों या परित्यक्त रासायनिक आयुधों के परिवहन, नमूना लेने, भण्डारकरण या नष्ट करने के दौरान पर्यावरण का संरक्षण, लोगों के स्वास्थ्य या उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना;
(न) विषैले रसायनों या उनके पूर्वगामियों को हैंडलिंग करने वाली प्रयोगशालाओं के बीच वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय जानकारी के विनिमय का समन्वय करना;
(प) रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबन्ध की अनुसूची 1 से 3 तक में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी, किसी विविक्त कार्बनिक रसायन जिनमें वे भी हैं जिनमें ऐसे प्रयोजनों के लिए जो अधिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं हैं फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं समय-समय पर, उस अधिकतम मात्रा का अवधारण करना जिसका कोई व्यक्ति, किसी एक समय पर उत्पादन या अन्यथा अर्जन, धारण, अन्तरण या प्रयोग कर सकेगा;
(फ) ऐसे अन्य कृत्य करना जो विहित किए जाएं ।
8. राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा संगठनों को आरम्भिक, वार्षिक और अन्य कालिक घोषणाओं का प्रस्तुत किया जाना-राष्ट्रीय प्राधिकरण, रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबन्ध की अनुसूची 1 से 3 तक में से किसी में सूचीबद्ध विषैले रसायन, या उनके ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं, रासायनिक आयुध पूर्वगामियों, पुराने रासायनिक आयुध, परित्यक्त रासायनिक आयुध, दंगा नियंत्रण कारक, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा, रासायनिक आयुधों के पूर्वकालिक अन्तरण या उनके उत्पादन उपस्करों के संबंध में ऐसी आरम्भिक, वार्षिक और अन्य आवधिक घोषणाएं या ऐसी अन्य घोषणाएं जो अभिसमय के अधीन की जानी अपेक्षित हों, तैयार करेगा तथा ऐसे समय पर जो अभिसमय के अधीन विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी घोषणाएं संगठन को प्रस्तुत करेगा ।
9. प्रर्वतन अधिकारियों की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय प्राधिकरण [या केन्द्रीय सरकार] के ऐसे अधिकारियों को, जिन्हें वह ठीक समझे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में नियुक्त कर सकेगी :
1[परन्तु ऐसे अधिकारी विहित मानदंडों को पूरा करेंगे ।]
(2) राज्य सरकार जब भी केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसा निदेश दिया जाए और राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राजपत्रित श्रेणी के अपने ऐसे अधिकारियों को जो वह ठीक समझे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में नियुक्त कर सकेगी और उन्हें ऐसी स्थानीय सीमाएं सौंप सकेगी, जो वह ठीक समझे ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्रवर्तन अधिकारी के रूप में नियुक्त प्रत्येक अधिकारी को, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार द्वारा या राज्य सरकार द्वारा प्रवर्तन अधिकारी के रूप में नियुक्ति का एक प्रमाणपत्र दिया जाएगा और ऐसे प्रमाणपत्र की मांग किए जाने पर, ऐसे प्रवर्तन अधिकारी द्वारा उसे प्रस्तुत किया जाएगा ।
10. निदेश जारी करने की राष्ट्रीय प्राधिकरण की शक्ति-किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी किन्तु इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय प्राधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कृत्यों के पालन में, किसी व्यक्ति, अधिकारी या प्राधिकारी को लिखित रूप में निदेश जारी कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति, अधिकारी या प्राधिकारी ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए आबद्ध होगा ।
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन निदेश जारी करने की शक्ति के अन्तर्गत निम्नलिखित के संबंध में निदेश देने की शक्ति है,-
(क) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध विषैले रसायन या पूर्वगामी के या किसी विविक्त कार्बनिक रसायन के जिसके अन्तर्गत फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्वों से युक्त विविक्त कार्बनिक रसायन हैं, विकास, उत्पादन, प्रसंस्करण, उपभोग या उपयोग में लगी किसी कंपनी, फर्म या उद्योग को बंद करना, उसका प्रतिषेध या विनियमन; या
(ख) ऐसी कंपनी, फर्म या उद्योग को बिजली या पानी या किसी अन्य सेवा के प्रदाय का रोका जाना या उसका विनियमन ।
11. समिति गठित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-यदि केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो वह, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे नाम से, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, राष्ट्रीय प्राधिकरण के कृत्यों का निरीक्षण करने और इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार की ऐसी शक्तियों (धारा 56 के अधीन नियम बनाने की शक्ति को छोड़कर) का प्रयोग करने और ऐसे कृत्यों का पालन करने के, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रयोजन के लिए और केन्द्रीय सरकार के पर्यवेक्षण और नियंत्रण तथा ऐसे आदेश के उपबंधों के अधीन रहते हुए एक समिति गठित कर सकेगी । ऐसी समिति आदेश में इस प्रकार विनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग या कृत्यों का निष्पादन कर सकेगी मानो ऐसी समिति उन शक्तियों का प्रयोग या उन कृत्यों का निष्पादन करने के लिए इस अधिनियम द्वारा सशक्त की गई हो ।
12. जानकारी, आदि मांगने की राष्ट्रीय प्राधिकरण की शक्ति-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय प्राधिकरण, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी व्यक्ति से उस प्राधिकरण को कालिकतः या जब भी रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध विषैले रसायनों या पूर्वगामियों, रासायनिक आयुधों, पुराने रासायनिक आयुधों, परित्यक्त रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा, बलवा नियंत्रण कर्मक, एकल लुघ प्रसुविधा या विविक्त कार्बनिक रसायनों, जिनके अन्तर्गत फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन तत्वों से युक्त विविक्त कार्बनिक रसायन हैं, से संबंधित घोषणा या विवरणी ऐसी विशिष्टियों सहित देने की मांग कर सकेगा जो राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
(2) कोई भी व्यक्ति, जब वह उपधारा (1) के अधीन किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन कर रहा हो, कोई ऐसी जानकारी नहीं देगा या कोई ऐसी घोषणा या विवरणी या विवरण नहीं देगा जिसके बारे में वह जानता है या उसके पास विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह मिथ्या है या किसी तात्त्विक विशिष्टि में सत्य नहीं है ।
अध्याय 3
रासायनिक आयुधों और विषैले रसायनों का प्रतिषेध और विनियमन
13. रासायनिक आयुधों के विकास, उत्पादन, अर्जन, आदि पर प्रतिषेध-(1) कोई भी व्यक्ति,-
(क) रासायनिक आयुधों का विकास, उत्पादन, अन्यथा अर्जन, संचय नहीं करेगा, उन्हें प्रतिधारित नहीं करेगा या उनका उपयोग नहीं करेगा अथवा किन्हीं रासायनिक आयुधों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी व्यक्ति को अन्तरण नहीं करेगा;
(ख) बलवा नियंत्रण कर्मकों का युद्ध की पद्धति के रूप में उपयोग नहीं करेगा;
(ग) रासायनिक आयुधों का उपयोग करने के लिए किन्हीं सैनिक तैयारियों में नहीं लगेगा;
(घ) किसी व्यक्ति की-
(i) किसी बलवा नियंत्रण कर्मक का युद्ध की पद्धति के रूप में उपयोग करने में;
(ii) अभिसमय के अधीन किसी राज्य पक्षकार के लिए प्रतिषिद्ध किसी अन्य क्रियाकलाप में,
लगे रहने के लिए किसी भी रीति से न तो सहायता करेगा, न उसे प्रोत्साहित करेगा और न ही उत्प्रेरित करेगा ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट प्रतिषेध किसी ऐसे रासायनिक आयुध के प्रतिधारण या कब्जे को जो ऐसे आयुध के नष्ट किए जाने तक अभिसमय द्वारा अनुज्ञात है लागू नहीं होगा ।
14. पुराने या परित्यक्त रासायनिक आयुधों के बारे में जानकारी का राष्ट्रीय प्राधिकरण को सूचित किया जाना-कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे पुराने रासायनिक आयुधों या परित्यक्त रासायनिक आयुधों के कब्जे या अवस्थान के बारे में जानकारी है, ऐसे पुराने रासायनिक आयुधों या परित्यक्त रासायनिक आयुधों के ऐसे कब्जे और ठीक-ठीक अवस्थान के बारे में इस अधिनियम के प्रारंभ से सात दिन के भीतर राष्ट्रीय प्राधिकरण को सूचित करेगा :
परंतु जहां पुराने रासायनिक आयुधों या परित्यक्त रासायनिक आयुधों के कब्जे या अवस्थान के बारे में जानकारी इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् अभिप्राप्त की जाती है, वहां ऐसे कब्जे या अवस्थान की जानकारी के बारे में सूचना ऐसी जानकारी होने से सात दिन के भीतर राष्ट्रीय प्राधिकरण को दी जाएगी ।
15. विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी के विकास, उत्पादन, अर्जन, आदि पर प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति-
(क) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायनों या पूर्वगामियों का राज्य पक्षकारों के राज्यक्षेत्र के बाहर उत्पादन, अर्जन, प्रतिधारण या उपयोग नहीं करेगा और ऐसे रसायनों या उनके पूर्वगामियों का किसी अन्य राज्य पक्षकार के सिवाय भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर अन्तरण नहीं करेगा;
(ख) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों या पूर्वगामियों का राष्ट्रीय प्राधिकरण से अनुज्ञा के बिना और तब तक जब तक कि-
(i) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायन या पूर्वगामी अनुसंधान, चिकित्सा, औषध या रक्षण प्रयोजनों में अनुप्रयुक्त किए जाने के प्रयोजन के लिए न हो; और
(ii) विषैले रसायनों या पूर्वगामियों के प्रकार पूर्णतः उन तक सीमित न हों जिन्हें उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के प्रति निर्देश से न्यायोचित ठहराया जा सकता है और ऐसे विषैले रसायनों या पूर्वगामियों की मात्रा ऐसे प्रयोजनों के लिए किसी भी समय राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा नियत सीमा से अधिक न हों,
उत्पादन, अर्जन, प्रतिधारण, अन्तरण या उपयोग नहीं करेगा;
(ग) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों या पूर्वगामियों का भारत के बाहर किसी अन्य राज्य पक्षकार को निम्नलिखित के सिवाय अन्तरण नहीं करेगा,-
(i) खंड (ख) के उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए; और
(ii) अभिसमय के सत्यापन उपाबंध के भाग 6 में उपवर्णित प्रक्रिया के अनुसार :
परंतु खंड (ग) में निर्दिष्ट किन्हीं भी विषैले रसायनों या पूर्वगामियों का किसी इतर राज्य को पुनः अंतरण नहीं किया जाएगा ।
[16. अनुसूची 2 में सूचीबद्ध विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी के अंतरण पर निर्बंधन-कोई भी व्यक्ति, किसी ऐसे राज्य को जो अभिसमय का पक्षकार नहीं है या किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी पक्षकार राज्य का नागरिक नहीं है, रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 2 में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी का न तो अंतरण करेगा और न उससे प्राप्त करेगा ।]
17. निर्यात और आयात नीति के अनुसार आयात या निर्यात किया जाना-कोई भी व्यक्ति, विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 (1992 का 22) और उसके अधीन किए गए आदेशों के अधीन समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित निर्यात और आयात नीति के उपबंधों के अनुसार के सिवाय रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी का न तो भारत से निर्यात करेगा न ही भारत में आयात करेगा ।
अध्याय 4
उत्पादक, उपयोक्ता आदि के रूप में व्यक्तियों का रजिस्ट्रीकरण
18. विषैले रसायनों या पूर्वगामियों के उत्पादन आदि में लगे हुए व्यक्तियों का रजिस्ट्रीकरण-(1) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध विषैले रसायन या पूर्वगामी के उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अंतरण, आयात, निर्यात या उपयोग में लगा हुआ या ऐसे किसी विविक्त कार्बनिक रसायन के जिसके अंतर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, [के उत्पादन में लगा हुआ प्रत्येक व्यक्ति ऐसी छूटों और अवसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं,] इस अधिनियम के प्रारंभ से तीस दिन के भीतर, यथास्थिति, किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी के उत्पादक, प्रसंस्करणकर्ता, अर्जनकर्ता, उपभोक्ता, अंतरक, आयातकर्ता, निर्यातकर्ता या उपयोक्ता के रूप में किसी ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन के उत्पादक के रूप में जिसके अंतर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं अपने नाम के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन ऐसे रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को करेगा जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विहित करे ।
(2) 2[ऐसी छूटों और अवसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, कोई भी व्यक्ति, जो इस धारा के प्रवर्तन में आने के पश्चात्], रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी का उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अन्तरण, आयात, निर्यात या उपयोग करना चाहता है या किसी ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन का जिनके अंतर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, उत्पादन करना चाहता है, तब तक कारबार आरंभ नहीं करेगा जब तक ऐसे व्यक्ति ने, यथास्थिति, किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी के उत्पादक, प्रसंस्करणकर्ता, अर्जनकर्ता, उपभोक्ता, अंतरक, आयातकर्ता, निर्यातकर्ता या उपयोक्ता के रूप में या ऐसे किसी विविक्त कार्बनिक रसायन के उत्पादक के रूप में जिसके अंतर्गत ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, अपने नाम के रजिस्ट्रीकरण के लिए उपधारा (1) के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को आवेदन नहीं कर दिया है ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को किए जाने वाले आवेदन का प्ररूप, ऐसे आवेदन के प्ररूप में अंतर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां, वह रीति जिसमें ऐसा आवेदन किया जाएगा, ऐसे आवेदन पर संदेय फीस,रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का प्ररूप, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त करने या उसे रद्द करने में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट आवेदन की प्राप्ति पर रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी, यदि आवेदन विहित प्ररूप में है, आवेदक के नाम को रजिस्टर करेगा और [उसे, ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र] अनुदत्त करेगा ।
(5) इस धारा के अनुसरण में अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, उसमें विनिर्दिष्ट अवधि के लिए विधिमान्य होगा और ऐसी और अवधि के लिए और ऐसी फीस के संदाय पर जो विहित की जाए, समय-समय पर नवीकृत किया जा सकेगा ।
[(6) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसे उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है, केंद्रीय सरकार को, कालिकतः या जब कभी अपेक्षा की जाए, ऐसी जानकारी, घोषणा या विवरणी देगा, जो विहित की जाए ।]
अध्याय 5
निरीक्षण, तलाशी, अभिग्रहण और समपहरण
19. किसी व्यक्ति या स्थान का निरीक्षण करने की निरीक्षक की शक्ति-(1) कोई निरीक्षक,-
(क) ऐसे किसी व्यक्ति का, जो निम्नलिखित में लगा हुआ है-
(i) रसायन अभिसमय संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी के उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अंतरण, आयात, निर्यात या उपयोग; या
(ii) ऐसे किसी विविक्त कार्बनिक रसायन के जिसके अंतर्गत वे विभिन्न कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, उत्पादन में;
(ख) ऐसे किसी स्थान का जहां कोई रासायनिक आयुध, पुराना रासायनिक आयुध या परित्यक्त रासायनिक आयुध अवस्थित है, या रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा विद्यमान है,
अभिसमय के सत्यापन उपाबंध में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए निरीक्षण कर सकेगा ।
(2) निरीक्षण दल अनुच्छेद 9 के अनुसरण में किसी प्रसुविधा या अवस्थान का आक्षेप निरीक्षण कर सकेगा और ऐसा निरीक्षण अभिसमय के सत्यापन उपाबंध के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।
(3) निरीक्षण दल के साथ आक्षेप निरीक्षण करते समय, आक्षेप निरीक्षण का प्रेक्षण करने के लिए एक प्रेक्षक जा सकेगा ।
(4) प्रवर्तन अधिकारी निरीक्षक या निरीक्षण दल द्वारा किए गए सभी सत्यापन क्रियाकलापों का संप्रेक्षण करने के लिए और निरीक्षण के दौरान निरीक्षक या निरीक्षण दल को ऐसी संदिग्धता के संबंध में जो निरीक्षण के दौरान उत्पन्न हो, ऐसे स्पष्टीकरण जो ऐसी संदिग्धता को दूर करने के लिए आवश्यक हों, उपलब्ध कराने के लिए निरीक्षक या निरीक्षण दल के साथ जाएगा ।
(5) प्रत्येक निरीक्षक या निरीक्षण दल को,-
(क) सुसंगत तथ्यों को स्थापित करने के प्रयोजन के लिए प्रवर्तन अधिकारी की उपस्थिति में किसी प्रसुविधा कार्मिक का साक्षात्कार करने का अधिकार होगा;
(ख) ऐसी संदिग्धताओं के संबंध में जो निरीक्षण के दौरान उत्पन्न हों, स्पष्टीकरणों के लिए अनुरोध करने का अधिकार होगा;
(ग) ऐसे दस्तावेजों और अभिलेखों को जो निरीक्षण के प्रयोजन के लिए सुसंगत और आवश्यक हों, प्रस्तुत करने की मांग करने का अधिकार होगा;
(घ) निरीक्षण स्थल के भीतर किसी वस्तु या भवन का फोटो लेने का अधिकार होगा, यदि उस वस्तु या भवन के बारे में प्रश्न को सुलझाया नहीं गया है;
(ङ) नमूने लेने, ऐसे नमूनों का स्थल पर विश्लेषण करने का अधिकार होगा; और
(च) ऐसे अन्य अधिकार होंगे जो अभिसमय के अधीन उपबंधित हैं ।
(6) निरीक्षक या निरीक्षण दल, सत्यापन क्रियाकलाप या आक्षेप निरीक्षण करने के दौरान अभिसमय के सत्यापन उपाबंध के भाग 2 में निर्दिष्ट विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त करेगा ।
(7) किसी निरीक्षक या निरीक्षण दल द्वारा उपधारा (5) के खंड (ङ) के अधीन लिया गया कोई नमूना भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर किसी प्रयोगशाला में विश्लेषण के लिए नहीं भेजा जाएगा ।
20. प्रवर्तन अधिकारी, परीक्षा करने और परीक्षण प्रसुविधा या तलाशी लेने के लिए किसी स्थान में प्रवेश कर सकेगा-(1) किसी प्रवर्तन अधिकारी को ऐसी सहायता के साथ जो आवश्यक समझे,-
(क) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन दी गई किसी जानकारी, घोषणा या विवरणी की शुद्धता का सत्यापन करने;
(ख) उसे सौंपे गए राष्ट्रीय प्राधिकरण के किसी कृत्य को करने;
(ग) यह अवधारण करने कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबंधों या इस अधिनियम के अधीन दिए गए किसी निदेश का रसायन संबंधी उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी के उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अंतरण, आयात, निर्यात या उपयोग में लगे हुए या ऐसे किसी विविक्त कार्बनिक रसायन के उत्पादन में जिसके अंतर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, लगे हुए किसी व्यक्ति द्वारा पालन किया जा रहा है अथवा नहीं;
(घ) यथास्थिति, किसी प्रसुविधा, अभिलेख, दस्तावेज या किसी अन्य वस्तु की परीक्षा और परीक्षण करने या किसी स्थान या व्यक्ति की तलाशी लेने;
(ङ) जहां धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन कोई वारंट ऐसे प्रवर्तन अधिकारी को संबोधित है या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन वह इस प्रकार प्राधिकृत है, तलाशी लेने,
के प्रयोजन के लिए किसी भवन या स्थान में प्रवेश करने का अधिकार होगा ।
(2) किसी प्रवर्तन अधिकारी को भारत में निरीक्षण के दौरान भारत के प्रतिनिधि के रूप में निरीक्षक या निरीक्षण दल के साथ जाने का अधिकार होगा ।
21. कतिपय कार्यों का अपराध होना-यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर,-
(क) अभिसमय के सत्यापन उपाबंध के अनुसार उस निरीक्षण के संचालन को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए निरीक्षक या निरीक्षण दल द्वारा किए गए अनुरोध का पालन करने से युक्तियुक्त प्रतिहेतु के बिना इंकार करता है;
(ख) निरीक्षण के संचालन में विलंब करता है या निरीक्षण दल के किसी सदस्य, निरीक्षक, प्रवर्तन अधिकारी या प्रेक्षक के सामने बाधा डालता है;
(ग) किसी स्थल पर लगे उपकरण को, या प्रवर्तन अधिकारी निरीक्षक या निरीक्षण दल द्वारा, संस्थापित अनुमोदित उपस्कर को, ऐसे उपकरण या उपस्कर के प्रवर्तन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के आशय से हटाता है या उसे बिगाड़ता है, तो वह इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध का दोषी होगा ।
22. वारंट और प्राधिकार जारी करने की शक्ति-(1) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा, विशेष रूप से सशक्त किया गया द्वितीय वर्ग का मजिस्ट्रेट, ऐसे किसी व्यक्ति को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया है, गिरफ्तार करने के लिए या ऐसे किसी उद्योग, भवन, वाहन या स्थान को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसमें ऐसा कोई माल रखा है या छिपाया गया है, जिसके संबंध में अध्याय 6 के अधीन अपराध किया गया है, या कोई दस्तावेज या अन्य माल जो ऐसे अपराध के कारित किए जाने का साक्ष्य हो सकता है, दिन या रात में तलाशी लेने के लिए वारंट जारी कर सकेगा ।
(2) कोई प्रवर्तन अधिकारी या राष्ट्रीय प्राधिकरण का ऐसा अन्य अधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त सशक्त किया जाता है अथवा राज्य सरकार का कोई ऐसा अधिकारी जिसे राज्य सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त सशक्त किया जाता है, यदि व्यक्तिगत जानकारी या किसी व्यक्ति द्वारा दी गई और लेखबद्ध की गई सूचना से उसके पास इस बारे में विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति ने अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया है या कोई माल जिसके संबंध में अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है या ऐसा कोई दस्तावेज या अन्य माल जो ऐसे अपराध के कारित होने का साक्ष्य हो सकता है, किसी उद्योग, भवन, वाहन या स्थान में रखा गया है या छिपाया गया है, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने या किसी उद्योग या भवन, वाहन या स्थान की दिन या रात में तलाशी लेने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा या ऐसे व्यक्ति को स्वयं गिरफ्तार कर सकेगा या ऐसे उद्योग या भवन, वाहन या स्थान की तलाशी ले सकेगा ।
(3) उक्त अधिकारी को जिसे उपधारा (1) के अधीन वारंट संबोधित किया जाता है और उस अधिकारी को जो गिरफ्तारी या तलाशी लेने के लिए प्राधिकृत करता है या उस अधीनस्थ अधिकारी को जो उपधारा (2) के अधीन इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है, धारा 23 के अधीन कार्य करने वाले अधिकारी की सभी शक्तियां होंगी ।
23. वारंट या प्राधिकार के बिना प्रवेश करने, तलाशी लेने, अभिग्रहण और गिरफ्तार करने की शक्ति-(1) प्रवर्तन अधिकारी का कोई ऐसा अधीनस्थ अधिकारी जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाता है, या किसी ऐसे प्रवर्तन अधिकारी का कोई ऐसा अधीनस्थ अधिकारी जिसे राज्य सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाता है, यदि उसके पास व्यक्तिगत जानकारी या किसी व्यक्ति द्वारा दी गई और लेखबद्ध की गई जानकारी से इस बारे में विश्वास करने का कारण है कि कोई माल जिसके संबंध में अध्याय 6 के अधीन दंडनीय अपराध किया गया है या कोई दस्तावेज या माल जो ऐसे अपराध के कारित किए जाने का साक्ष्य हो सकता है, किसी उद्योग, भवन, वाहन या स्थान में रखा गया है या छिपाया गया है, सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच,-
(क) किसी ऐसे उद्योग, भवन, वाहन या स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा;
(ख) विरोध किए जाने की दशा में, ऐसे प्रवेश के लिए किसी दरवाजे की तोड़ सकेगा और किसी बाधा को हटा सकेगा;
(ग) ऐसे रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा, बल्वा नियंत्रण कारक, पुराने रासायनिक आयुधों, परित्यक्त रासायनिक आयुधों, विषैले रसायनों या पूर्वगामी अथवा विविक्त कार्बनिक रसायनों जिनके अंतर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं सभी माल और किसी वाहन को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह इस अधिनियम के अधीन अधिहरण किए जाने के दायी हैं और ऐसे किसी दस्तावेज या अन्य माल को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा, बल्वा नियंत्रण कारक, पुराने रासायनिक आयुधों, परित्यक्त रासायनिक आयुधों, विषैले रसायनों, पूर्वगामी या किसी विविक्त कार्बनिक रसायनों के संबंध में जिनके अन्तर्गत वे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं, जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अंतर्विष्ट हैं, अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध कारित किए जाने का वह साक्ष्य हो सकता है अभिगृहीत कर सकेगा; तथा
(घ) किसी व्यक्ति को निरुद्ध कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा और यदि वह उचित समझता है तो उसे गिरफ्तार कर सकेगा जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने ऐसे रासायनिक आयुधों, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा, बल्वा नियंत्रण कारकों, पुराने रासायनिक आयुधों, परित्यक्त रासायनिक आयुधों, विषैले रसायन या पूर्वगामी अथवा पृथक् कार्बनिक रसायनों के संबंध में जिनके अन्तर्गत वे पृथक् कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं, अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया है :
परन्तु यदि ऐसे अधीनस्थ अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि तलाशी वारंट या प्राधिकार, साक्ष्य को छिपाने के लिए अवसर दिए बिना या अपराधी के फरार हो जाने की सुविधा दिए बिना अभिप्राप्त नहीं किया जा सकता है तो वह अपने विश्वास के आधारों को अभिलिखित करने के पश्चात् सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी समय ऐसे उद्योग, भवन, वाहन या स्थान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा ।
(2) जहां किसी अधिकारी ने किसी जानकारी को उपधारा (1) के अधीन लेखबद्ध किया है या उसके परन्तुक के अधीन अपने विश्वास के आधारों को अभिलिखित किया है, वहां वह अपने ठीक वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल उसकी एक प्रति भेजेगा ।
24. सार्वजनिक स्थानों पर अधिग्रहण और गिरफ्तारी की शक्ति-धारा 23 के अधीन इस प्रकार सशक्त प्रवर्तन अधिकारी का कोई अधीनस्थ अधिकारी,-
(क) किसी सार्वजनिक स्थान में या अभिवहन में किसी माल को जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसके संबंध में अध्याय 6 के अधीन दण्डनीय अपराध किया गया है और ऐसे माल के साथ ऐसे वाहन को जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरण किए जाने का दायी है और ऐसे किसी दस्तावेज या माल को भी अभिगृहीत कर सकेगा, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह ऐसे माल के संबंध में अध्याय 6 के अधीन दण्डनीय अपराध कारित किए जाने का साक्ष्य हो सकता है;
(ख) ऐसे किसी व्यक्ति को निरुद्ध कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा, जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसने अध्याय 6 के अधीन दण्डनीय अपराध किया है और यदि ऐसे व्यक्ति के पास कोई विषैला रसायन या पूर्वगामी या कोई विविक्त कार्बनिक रसायन है जिसके अन्तर्गत ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं, जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं और ऐसा कब्जा उसे विधिविरुद्ध प्रतीत होता है तो वह उसे और उसके साथ के किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए सार्वजनिक स्थान" पद के अन्तर्गत कोई सार्वजनिक यान, दुकान, होटल या जनता द्वारा उपयोग के लिए आशयित कोई अन्य स्थान या जनता की पहुंच का कोई स्थान है ।
25. जहां अधिहरण के लिए दायी माल का अभिग्रहण संभव नहीं है, वहां प्रक्रिया-(1) जहां किसी ऐसे माल का अभिग्रहण करना व्यवहार्य नहीं है, जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरण का दायी है, वहां धारा 23 के अधीन प्राधिकृत कोई अधिकारी, स्वामी या ऐसे व्यक्ति पर जिसके कब्जे में वह माल है, यह आदेश तामील कर सकेगा कि वह उस माल को नहीं हटाएगा या अलग नहीं करेगा या ऐसे अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना उस माल का अन्यथा व्ययन नहीं करेगा ।
(2) अभिग्रहण और अधिहरण करने के लिए, उस प्रसुविधा का स्वामी, संयंत्र प्रचालक और अन्य अधिकारी उक्त माल की देखभाल करने में सुरक्षा के संबंध में सभी सहायता प्रदान करेंगे ।
26. वाहन को रोकने और उसकी तलाशी लेने की शक्ति-धारा 23 के अधीन प्राधिकृत कोई अधीनस्थ अधिकारी, यदि उसके पास यह संदेह करने का कारण है कि किसी वाहन का ऐसे किसी माल का परिवहन करने के लिए उपयोग किया जाता है या जिसके उपयोग किए जाने की संभावना है, जिसके संबंध में उसको यह संदेह है कि इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का किसी समय उल्लंघन किया गया है या उल्लंघन किए जाने की संभावना है, ऐसे वाहन को रोक सकेगा अथवा वायुयान की दशा में उसे जमीन पर उतारने के लिए विवश कर सकेगा, और-
(क) वाहन या उसके किसी भाग की खोज और तलाशी ले सकेगा;
(ख) उक्त वाहन पर किसी माल की परीक्षा और उसकी तलाशी ले सकेगा;
(ग) यदि उस वाहन को रोकना आवश्यक हो जाता है तो वह उसे रोकने के लिए सभी वैध साधनों का उपयोग कर सकेगा ।
27. वे शर्तें जिनके अधीन व्यक्तियों की तलाशी ली जाएगी-(1) जब धारा 23 के अधीन प्राधिकृत कोई अधीनस्थ अधिकारी या धारा 22 की उपधारा (3) के अनुसरण में शक्ति का प्रयोग करने वाला कोई अधीनस्थ अधिकारी, धारा 22 या धारा 23 या धारा 24 के उपबन्धों के अधीन किसी व्यक्ति की तलाशी लेने वाला हो, तब वह, यदि ऐसा व्यक्ति ऐसी अपेक्षा करे, ऐसे व्यक्ति को बिना किसी अनावश्यक विलम्ब के निकटतम प्रवर्तन अधिकारी या ऐसी तलाशी को प्राधिकृत करने वाले अधिकारी या निकटतम मजिस्ट्रेट के पास ले जाएगा ।
(2) यदि ऐसी अध्यपेक्षा की जाती है तो अधिकारी उस व्यक्ति को, जब तक कि वह उसको उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष ला सके, निरुद्ध रख सकेगा ।
(3) वह अधिकारी या मजिस्ट्रेट जिसके समक्ष कोई ऐसा व्यक्ति लाया जाता है, यदि वह तलाशी के लिए कोई युक्तियुक्त आधार नहीं पाता है, तो तत्काल उस व्यक्ति को निर्मुक्त कर देगा, अन्यथा निदेश देगा कि तलाशी ली जाए ।
(4) किसी स्त्री की तलाशी किसी स्त्री द्वारा ही ला जाएगी, अन्य किसी के द्वारा नहीं ।
28. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के उपबन्धों का गिरफ्तारियों, तलाशियों और अभिग्रहणों को लागू होना-दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्ध, जहां तक वे इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत नहीं हैं, इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए सभी वारन्टों और की गई गिरफ्तारियों, तलाशियों और अभिग्रहणों को लागू होंगे ।
29. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों और अभिग्रहण की गई वस्तुओं का व्ययन-(1) धारा 22, धारा 23 या धारा 24 के अधीन किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाला कोई अधिकारी, यथाशक्य शीघ्र उसे ऐसी गिरफ्तारी के लिए आधारों की सूचना देगा ।
(2) धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए वारंट के अधीन गिरफ्तार किए गए प्रत्येक व्यक्ति और अभिग्रहण किए गए माल को उस मजिस्ट्रेट को जिसके द्वारा वारन्ट जारी किया गया था, बिना अनावश्यक विलम्ब के भेजा जाएगा ।
(3) धारा 22 की उपधारा (2), धारा 23 या धारा 24 के अधीन गिरफ्तार किए गए प्रत्येक व्यक्ति और अभिग्रहण किए गए माल को बिना अनावश्यक विलम्ब के-
(क) निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को; या
(ख) धारा 30 के अधीन सशक्त अधिकारी को, भेजा जाएगा ।
(4) वह प्राधिकारी या अधिकारी, जिसको कोई व्यक्ति या माल उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन भेजा जाता है, सुविधानुसार शीघ्रता से ऐसे अध्युपाय करेगा जो ऐसे व्यक्ति या माल के विधि के अनुसार व्ययन के लिए आवश्यक हो ।
30. राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिकारियों, आदि में पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियां विनिहित करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार से परामर्श के पश्चात्, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा राष्ट्रीय प्राधिकरण के किसी अधिकारी में इस अधिनियम के अधीन अपराधों के अन्वेषण के लिए किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियां विनिहित कर सकेगी ।
(2) राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, राजपत्रित पंक्ति के किसी अधिकारी में या किसी वर्ग के ऐसे अधिकारियों में इस अधिनियम के अधीन अपराधों का अन्वेषण करने के लिए किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की शक्तियां विनिहित कर सकेगी ।
31. पुलिस द्वारा अभिगृहीत और परिदत्त माल को अपनी सुपुर्दगी में लेना-किसी पुलिस थाने का भारसाधक कोई अधिकारी, मजिस्ट्रेट द्वारा आदेश किए जाने तक, उस पुलिस थाने के स्थानीय क्षेत्र के भीतर इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत सभी माल को, जो उसे परिदत्त किया जाए, अपनी सुपुर्दगी में लेगा और सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा और किसी ऐसे अधिकारी को जो ऐसे माल के साथ पुलिस थाने जाता है या जो इस प्रयोजन के लिए प्रतिनियुक्त किया जाता है, ऐसे माल पर अपनी मुद्रा लगाने के लिए और उससे नमूने लेने के लिए अनुज्ञात करेगा और इस प्रकार लिए गए सभी नमूने पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की मुद्रा से मुद्रांकित किए जाएंगे ।
32. गिरफ्तारी और अभिग्रहण की रिपोर्ट-जब कभी कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन कोई गिरफ्तारी या अभिग्रहण करता है तो वह, ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण के पश्चात् अड़तालीस घंटे के भीतर ऐसी गिरफ्तारी या अभिग्रहण की सभी विशिष्टियों की पूरी रिपोर्ट अपने अव्यवहित वरिष्ठ अधिकारी को देगा ।
33. अधिहरण के लिए विषैले रसायन, उनके पूर्वगामी और वाहन का दायित्व-(1) जब कभी अध्याय 6 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है तो वह माल जिसके संबंध में या जिसके साधनों द्वारा ऐसा अपराध किया गया है, अधिग्रहण का दायी होगा ।
(2) कोई विषैला रसायन या पूर्वगामी, जिसका विधिपूर्ण रूप से भारत में उत्पादन, आयात, परिवहन, उपयोग, क्रय या विक्रय किसी ऐसे माल के साथ या उसके अतिरिक्त किया गया है, जो उपधारा (1) के अधीन अधिहरण के लिए दायी है और वे पात्र, पैकेज और आवरक, जिनमें उपधारा (1) के अधीन अधिहरण के लिए दायी कोई माल पाया जाता है और ऐसे पात्र या पैकेज की अन्य अंतर्वस्तुएं, यदि कोई हों, इस प्रकार अधिहरण की दायी होंगी ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिहरण के लिए दायी कोई माल ले जाने में प्रयुक्त कोई वाहन अधिहरण का दायी होगा जब तक कि वाहन का स्वामी यह साबित नहीं कर देता है कि उसका उपयोग स्वयं स्वामी की, उसके अभिकर्ता, यदि कोई हो, और वाहन के भारसाधक व्यक्ति की जानकारी या मौनानुमति के बिना किया गया था और उनमें से प्रत्येक ने ऐसे उपयोग के विरुद्ध सभी युक्तियुक्त पूर्वोपाय किए थे ।
34. विषैले रसायनों या पूर्वगामियों को छिपाने के लिए उपयोग किए गए माल का अधिहरण-किसी ऐसे माल को, जो इस अधिनियम के अधीन अधिहरण के लिए दायी है, छिपाने के लिए उपयोग किया गया कोई माल भी, ऐसे अधिहरण के लिए दायी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में माल" के अंतर्गत परिवहन के साधन के रूप में वाहन भी है ।
35. माल के विक्रय आगमों का अधिहरण-जहां किसी माल का किसी व्यक्ति द्वारा यह जानकारी या विश्वास करने का कारण रखते हुए विक्रय किया गया है कि वह माल इस अधिनियम के अधीन अधिहरण का दायी है वहां उसके विक्रय आगम भी अधिहरण के दायी होंगे ।
36. अधिहरण करने की प्रक्रिया-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण में, चाहे अभियुक्त सिद्धदोष या दोषमुक्त या निर्मुक्त हो, न्यायालय यह विनिश्चय करेगा कि इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत कोई माल अधिहरण के लिए दायी है और यदि वह विनिश्चय करता है कि वह माल इस प्रकार दायी है तो वह तद्नुसार अधिहरण के लिए आदेश कर सकेगा ।
(2) जहां इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत कोई माल धारा 33 या धारा 34 या धारा 35 के अधीन अधिहरण के लिए दायी प्रतीत होता है किन्तु वह व्यक्ति जिसने उसके साथ अपराध किया है अज्ञात है या पाया नहीं जा सकता है, वहां न्यायालय ऐसे दायित्व के बारे में जांच और विनिश्चय कर सकेगा और तद्नुसार अधिहरण के लिए आदेश कर सकेगा :
परन्तु किसी माल के अधिहरण का कोई आदेश अभिग्रहण की तारीख से एक मास की समाप्ति तक या किसी ऐसे व्यक्ति की सुनवाई किए बिना जो उससे संबंधित किसी अधिकार का दावा कर सकता है और साक्ष्य के बिना, यदि कोई हो, जो वह अपने दावे के संबंध में पेश कर सकता है, नहीं किया जाएगा ।
(3) कोई व्यक्ति जो सिद्धदोष नहीं ठहराया गया है उस संपत्ति के लिए, जिसका इस धारा के अधीन अधिहरण किया गया है किसी अधिकार का दावा करता है, सत्र न्यायालय को अधिहरण के आदेश के विरुद्ध अपील कर सकेगा ।
37. जानकारी, आदि मांगने की शक्ति-धारा 23 के अधीन प्राधिकृत कोई अधीनस्थ अधिकारी, इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन के संबंध में किसी जांच के दौरान,-
(क) स्वयं का यह समाधान करने के प्रयोजन के लिए कि क्या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश या जारी किए गए किसी निदेश के उपबंधों का कोई उल्लंघन किया गया है, किसी व्यक्ति से जानकारी मांग सकेगा;
(ख) जांच के लिए उपयोगी या सुसंगत किसी दस्तावेज या चीज को पेश करने या परिदत्त करने की किसी व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा;
(ग) मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से अवगत किसी व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा ।
38. अपराधों के किए जाने के बारे में सूचना-इस अधिनियम के किसी उपबंध या उसके अधीन बनाए गए किसी ऐसे आदेश के अधीन उसमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए कोई प्रवर्तन अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी का अधीनस्थ अधिकारी या राष्ट्रीय प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार का अधिकारी या ऐसे अधिकारी का अधीनस्थ अधिकारी, जो धारा 22 की उपधारा (2) में वर्णित किया गया है, यह बताने के लिए विवश नहीं किया जाएगा कि किसी अपराध के किए जाने के बारे में कोई सूचना उसने कहां से प्राप्त की है ।
अध्याय 6
अपराध और शास्तियां
39. रजिस्टर कराने में असफल होने के लिए दंड-जो कोई, यथास्थिति, धारा 18 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबंधों का अनुपालन किए बिना ही,-
(क) इस अधिनियम के प्रारंभ के पहले, रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 तक से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी के विकास, उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अंतरण, आयात, निर्यात या उपयोग में लगा रहा है या किसी विविक्त कार्बनिक रसायन जिसके अन्तर्गत ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं, के उत्पादन में लगा हुआ है और ऐसे प्रारंभ के पश्चात् इस प्रकार लगा हुआ है; या
(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 तक में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन का उत्पादन, प्रसंस्करण, अर्जन, उपभोग, अंतरण, आयात, निर्यात या प्रयोग करता है या ऐसे किसी विविक्त कार्बनिक रसायन, जिसके अन्तर्गत ऐसे विविक्त कार्बनिक रसायन भी हैं, जिनमें फास्फोरस, गंधक या फ्लुओरीन के तत्व अन्तर्विष्ट हैं, का उत्पादन करता है;
जब तक उक्त धारा के उपबंधों के अनुसार उसका नाम रजिस्टर नहीं कर दिया जाता है वह ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा और व्यतिक्रम जारी रहने की दशा में ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से जो पहले व्यतिक्रम के लिए दोषिसिद्धि के पश्चात् ऐसे व्यतिक्रम के जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या दोनों से, दंडनीय होगा ।
40. रासायनिक आयुधों या बलवा नियंत्रण कारकों आदि के विकास, उत्पादन, आदि के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई, इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन में, रासायनिक आयुधों का विकास, उत्पादन, अन्यथा अर्जन, इकठ्ठा, प्रतिधारण या प्रयोग करता है या किसी व्यक्ति को किसी रासायनिक आयुध का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंतरण करता है, किसी बलवा नियंत्रण कारकों का लड़ाई के साधन के रूप में प्रयोग करता है, रासायनिक आयुधों के प्रयोग के लिए किसी सैनिक तैयारियों में लगाता है, बलवा नियंत्रण कारकों को लड़ाई के साधन रूप में प्रयोग में लाने के लिए किसी व्यक्ति की किसी रीति से सहायता करता है, प्रोत्साहित करता है या उत्प्रेरित करता है, या अभिसमय के अधीन किसी राज्य पक्षकार के लिए निषिद्ध किसी अन्य क्रियाकलाप में लगाता है तो वह, ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु आजीवन अवधि तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
41. अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों, आदि के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई, इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन में अभिसमय के अधीन किसी राज्य पक्षकार को निषिद्ध प्रयोजनों के लिए रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी का उत्पादन, अर्जन, प्रतिधारण, अंतरण या प्रयोग करता है या रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी का भारत से बाहर अंतरण करता है तो वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की न होगी किन्तु आजीवन अवधि तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
42. अनुसूची 2 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों, आदि के अंतरण के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन में [ऐसे किसी राज्य से, जो राज्य पक्षकार नहीं है या किसी ऐसे व्यक्ति से] जो किसी राज्य पक्षकार का नागरिक नहीं है रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 2 में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या उसके पूर्वगामी का अंतरण करता है, या प्राप्त करता है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन अवधि तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
43. विषैले रसायनों, आदि के निर्यात या आयात के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई, इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन में रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 1 से 3 तक में से किसी में सूचीबद्ध किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी का भारत से निर्यात या भारत में आयात करेगा तो वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु आजीवन अवधि तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
44. गोपनीय जानकारी के प्रकटीकरण के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई इस अधिनियम के किसी उपबंध के उल्लंघन में किसी घोषणा या प्रस्तुत की गई विवरणी या किए गए किसी कथन से राष्ट्रीय प्राधिकरण के द्वारा प्राप्त किसी गोपनीय जानकारी या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किए गए किसी निरीक्षण के अनुक्रम के दौरान किसी प्रवर्तन अधिकारी को प्रदत्त या उसके द्वारा अभिप्राप्त जानकारी प्रकट करेगा तो वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु आजीवन अवधि तक की हो सकेगी और ऐसे जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
45. पहुंच के प्रत्याख्यान के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई अभिसमय के अधीन क्रियाकलापों का निरीक्षण करने से संबंधित बाध्यताओं का अनुपालन नहीं करेगा या किसी निरीक्षण दल या निरीक्षक, प्रवर्तन अधिकारी या प्रेक्षक को उसके कृत्यों के पालन में विलंब करेगा या बाधा डालेगा या स्थल पर संस्थापित किसी औजार या किसी अनुमोदित उपस्कर को जानबूझकर हटाएगा या उसके साथ छेड़छाड़ करेगा, कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन अवधि तक बढ़ाई जा सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा ।
46. सूचना, घोषणा या विवरणी देने में असफलता के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड-वह व्यक्ति, जिससे इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन कोई-
(क) सूचना;
(ख) घोषणा; या
(ग) विवरणी,
दिया जाना अपेक्षित है, ऐसी सूचना, घोषणा या विवरणी देने में असफल रहता है, जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, और चालू रहने वाले व्यतिक्रम की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा व्यतिक्रम ऐसे प्रथम व्यतिक्रम के लिए दोषिसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
47. धारा 46 के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञेय होना-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 46 के अधीन दंडनीय अपराध संज्ञेय होंगे ।
48. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां अध्याय 6 के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के लिए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक या उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी ऐसे दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां अध्याय 6 के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
49. अपराधों का अभियोजन-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपराधों के अभियोजन की मंजूरी देने के लिए सक्षम रूप में राजपत्र में अधिसूचित प्राधिकारी की मंजूरी के बिना नहीं करेगा ।
50. राष्ट्रीय प्राधिकरण के विनिश्चय के विरुद्ध अपीलें-(1) धारा 10 के अधीन जारी किए गए राष्ट्रीय प्राधिकरण के किसी निदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा ।
(2) यदि कोई अपील उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् की जाती है तो वह ग्रहण नहीं की जाएगी :
परंतु यदि अपीलार्थी केन्द्रीय सरकार का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विहित अवधि के भीतर अपील न करने के लिए पर्याप्त कारण था तो उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण की जा सकेगी ।
(3) इस धारा के अधीन की गई प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में की जाएगी और उसके साथ उस निदेश की एक प्रति होगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है और ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।
(4) अपील का निपटारा करने के लिए प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए :
परन्तु किसी अपील का निपटारा करने से पूर्व अपीलार्थी को सुने जाने का उचित अवसर दिया जाएगा ।
51. अभिसमय का उपबंध कतिपय मिश्रणों को लागू नहीं होगा-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, अभिसमय के उपबंध, जहां तक उनका संबंध-
(क) निर्बंधन और रिपोर्ट करने;
(ख) निरीक्षण; या
(ग) घोषणा और सत्यापन,
से है, ऐसे किसी मिश्रण को लागू नहीं होंगे जिसमें अभिसमय के साथ रसायनों से संबंधित अभिसमय के उपाबंध की अनुसूची 2 या अनुसूची 3 में विनिर्दिष्ट ऐसे रसायनों का सांद्रण है जो केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा राजपत्र में विनिर्दिष्ट करें ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
52. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी अधिकारी या राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष, निदेशकों और अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों या इस अधिनियम के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग या किन्हीं कृत्यों का निर्वहन या किन्हीं कर्तव्यों का पालन करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
53. प्रत्यायोजन की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन (धारा 56 के अधीन नियम बनाने की शक्ति को छोड़कर) अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों का राष्ट्रीय प्राधिकरण या धारा 11 में निर्दिष्ट समिति का प्रत्यायोजन कर सकेगी जो वह आवश्यक या समीचीन समझे ।
(2) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन ऐसी शक्तियों और कृत्यों का उस सरकार के किसी प्राधिकारी या अधिकारी को प्रत्यायोजन कर सकेगी जो वह आवश्यक या समीचीन समझे ।
54. अधिकारियों का लोक सेवक होना-राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष, निदेशक, अधिकारी और अन्य कर्मचारी अथवा इस अधिनियम के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग या किन्हीं कृत्यों का निर्वहन करने वाला कोई अन्य व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
55. कठिनाइयों को दूर करना-यदि कोई कठिनाई इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :
परन्तु ऐसा कोई आदेश उस तारीख से, जिसको इस अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, तीन वर्ष की अवधि के समाप्त होने के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
56. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन अध्यक्ष और निदेशकों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें तथा उस धारा की उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें;
(ख) राष्ट्रीय प्राधिकरण के अन्य कृत्य जो धारा 7 की उपधारा (2) के खंड (5) के अधीन विहित किए जाएं;
[(खक) वे मानदंड, जिनको धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन अधिकारियों से पूरा किए जाने की अपेक्षा की जाती है;]
[(ग) धारा 18 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन छूट और अवसीमा, धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन का प्ररूप, आवेदन प्ररूप में अंतर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का प्ररूप, आवेदन करने की रीति, संदेय फीस की रकम, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त करने या उसे रद्द करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त करने के लिए निबंधन और शर्तें, धारा 18 की उपधारा (5) के अधीन वह अवधि, जिसके लिए नवीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा और उसके लिए संदेय फीस की रकम और उस धारा की उपधारा (6) के अधीन दी जाने वाली सूचना, की जाने वाली घोषणा या दी जाने वाली विवरणी;]
(घ) वह समय जिसके भीतर धारा 50 की उपधारा (1) के अधीन अपील की जा सकेगी;
(ङ) धारा 50 की उपधारा (3) के अधीन अपील करने के लिए प्ररूप और उसके साथ दी जाने वाली फीस;
(च) धारा 50 की उपधारा (4) के अधीन अपील का निपटारा करने की प्रक्रिया;
(छ) कोई अन्य बात जिसे विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना, धारा 5 के अधीन की गई प्रत्येक घोषणा, धारा 55 के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश तथा धारा 56 के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, निकाले जाने, की जाने, किए जाने या बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना, आदेश या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना नहीं निकाली जानी चाहिए, वह आदेश नहीं किया जाना चाहिए या वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु अधिसूचना, आदेश या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अनुसूची
(धारा 3 देखिए)
अभिसमय के वे उपबंध, जो विधि का बल रखेंगे
अनुच्छेद 1
साधारण बाध्यताएं
1. इस अभिसमय का प्रत्येक पक्षकार राज्य किन्हीं भी परिस्थितियों में निम्नलिखित कार्य कभी भी न करने का वचन देता है :-
(क) रासायनिक आयुधों का विकास, उत्पादन, अन्यथा अर्जन, संचयन या प्रतिधारण करना या रासायनिक आयुधों को प्रत्यक्ष रूप में या परोक्ष रूप में किसी को अंतरण करना ;
(ख) रासायनिक आयुधों का प्रयोग करना ;
(ग) रासायनिक आयुधों के प्रयोग के लिए किन्हीं सैन्य तैयारियों में लगना ;
(घ) किसी को इस अभिसमय के अधीन किसी पक्षकार राज्य के लिए प्रतिषिद्ध किसी क्रियाकलाप में लगने के लिए किसी भी रूप में सहायता देना, प्रोत्साहित करना या उत्प्रेरित करना ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसे रासायनिक आयुध का, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में हैं या जो इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित हैं, इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार नाश करने का वचन देता है ।
3. प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसे सभी रासायनिक आयुधों का, जिसे उसने किसी दूसरे पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में परित्यक्त किया है, इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार नाश करने का वचन देता है ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसे किसी रासायनिक आयुध के उत्पादन सुविधाओं का, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में हैं या जो इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित हैं, इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार नाश करने का वचन देता है ।
5. प्रत्येक पक्षकार राज्य युद्ध की रीति के रूप में बलवा नियंत्रण अभिकर्ताओं का उपयोग न करने का वचन देता है ।
अनुच्छेद 2
परिभाषा और मानदंड
इस अभिसमय के प्रयोजनों के लिए :-
1. रासायनिक आयुध" से सामूहिक या पृथक् रूप में निम्नलिखित अभिप्रेत हैं :-
(क) विषैले रसायन और उनके पूर्वगामी, सिवाय वहां के जहां इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए आशयित है जब तक कि उनकी किस्में और मात्राएं उक्त प्रयोजनों के सुसंगत हैं ;
(ख) युद्ध सामग्री और युक्तियां जो उपपैरा (क) में विनिर्दिष्ट उन विषैले रसायनों के विषैले गुणधर्मों के माध्यम से मृत्यु या अन्य अपहानि कारित करने के लिए विनिर्दिष्ट रूप से अभिकल्पित हैं, जो ऐसी युद्ध सामग्री और युक्तियों के नियोजन के परिणामस्वरूप निर्मुक्त होंगे ;
(ग) उपपैरा (ख) में विनिर्दिष्ट युद्ध सामग्री और युक्तियों के नियोजन के संबंध में प्रत्यक्ष रूप से उपयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप से अभिकल्पित किया गया कोई उपस्कर ।
2. विषैले रसायन" से ऐसा कोई रसायन अभिप्रेत है जो जीवन प्रक्रियाओं पर रासायनिक क्रियाओं द्वारा मानव या पशुओं की मृत्यु, अस्थायी असमर्थता या स्थायी अपहानि कारित कर सकता है । इसके अन्तर्गत ऐसे सभी रसायन, उनकी उत्पत्ति और उत्पादन की पद्धति को ध्यान में रखे बिना और इस बात को ध्यान में रखे बिना कि वे युद्ध सामग्री, प्रसुविधाओं में या कहीं और उत्पादित किए गए हैं, भी हैं ।
(इस अभिसयम को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए ऐसे विषौले रसायनों को, जिनकी सत्यापन उपायों के लागू करने के लिए पहचान कर ली गई है, रसायनों से संबंधित उपाबंध में अन्तर्विष्ट अनुसूचियों में सूचीबद्ध किया गया है ।)
3. पूर्वगामी" से अभिप्रेत है :-
कोई रसायन अभिकारक, जो विषैले रसायन के किसी भी रीति में उत्पादन में किसी भी प्रक्रम पर हिस्सा लेता है । इसके अन्तर्गत किसी दोहरी या बहुसंघटक रसायन प्रणाली का कोई मुख्य घटक भी है ।
(इस अभिसयम को लागू करने के प्रयोजन के लिए ऐसे पूर्वगामी", जिनकी सत्यापन उपायों को लागू करने के लिए पहचान की ली गई है, रसायनों से संबंधित उपाबंध में अन्तर्विष्ट अनुसूचियों में सूचीबद्ध किए गए हैं ।)
4. दोहरी या बहु-संघटक रसायन प्रणाली का मुख्य संघटक" (जिससे इसमें इसके पश्चात् मुख्य संघटक" कहा गया है) से अभिप्रेत है :-
ऐसे पूर्वगामी, जो अंतिम उत्पाद के विषैले गुणधर्मों को अवधारित करने में अधिकतम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और दोहरी या बहु-संघटक प्रणाली में अन्य रसायनों के साथ शीघ्र प्रतिक्रिया करते हैं ।
5. पुराने रासायनिक आयुध" से अभिप्रेत हैं :-
(क) ऐसे रासायनिक आयुध, जो 1925 से पहले उत्पादित किए गए थे ; या
(ख) ऐसे रासायनिक आयुध जो वर्ष 1925 और 1946 के बीच की अवधि में उत्पादित किए गए थे और जिनका ऐसी सीमा तक ह्रास हो गया है कि इनका अब रासायनिक आयुध के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है ।
6. परित्यक्त रासायनिक आयुध" से अभिप्रेत हैं :-
ऐसे रासायनिक आयुध जिनके अन्तर्गत पुराने रासायनिक आयुध भी हैं जो किसी राज्य द्वारा 1 जनवरी, 1925 के पश्चात् किसी दूसरे राज्य के राज्यक्षेत्र में उसकी सहमति के बिना परित्यक्त कर दिए गए हैं ।
7. बलवा नियंत्रण कर्मक" से अभिप्रेत हैं :-
ऐसा कोई रसायन, जो किसी अनुसूची में सूचीबद्ध नहीं है और जो मानव संवेदों में तीव्रता से जलन या शारीरिक निःशक्तता का प्रभाव उत्पन्न कर सकता है और जो उच्छन्नता के समाप्त होने पर थोड़े समय के भीतर ही गायब हो जाती है ।
8. रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा" से :-
(क) ऐसा कोई उपस्कर और ऐसे उपस्कर को रखने के लिए कोई भवन अभिप्रेत है, जो 1 जनवरी, 1946 के बाद किसी भी समय निम्नलिखित रूप में अभिकल्पित, सन्निर्मित या प्रयुक्त किया गया था :-
(i) रसायनों के उत्पादन में स्टेज के भाग रूप में (अंतिम प्रौद्योगिकी स्टेज") जहां सामग्री के प्रवाह में उपस्कर के प्रवर्तन के समय निम्नलिखित अन्तर्विष्ट होगा :-
(1) रसायनों से संबंधित उपाबंध में अनुसूची 1 में सूचीबद्ध कोई रसायन ; या
(2) कोई अन्य रसायन, जिसका इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए किसी पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में या किसी पक्षकार राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में या किसी अन्य स्थान में प्रतिवर्ष 1 टन से ऊपर का कोई उपयोग नहीं है, किन्तु रासायनिक आयुध के प्रयोजनों के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है ; या
(ii) रासायनिक आयुधों को भरने के लिए, जिसके अन्तर्गत, अन्य बातों के साथ युद्ध सामग्रियों, युक्तियों या प्रपुंज भंडारण कंटेनरों में अनुसूची 1 में सूचीबद्ध रसायनों को भरना, कंटेनरों में रसायन को भरना जो दोहरी युद्ध सामग्री और युक्तियों के भाग हैं या रासायनिक युद्ध उप-सामग्रियों में भरना जो समंजित एकिक युद्ध सामग्री और युक्तियों के भाग हैं और कंटेनरों और रासायनिक युद्ध उप-सामग्रियों की संबंधित युद्ध सामग्री और युक्तियों की लदाई भी सम्मिलित है ।
(ख) निम्नलिखित अभिप्रेत नहीं हैं :-
(i) उपपैरा (क) (i) में विनिर्दिष्ट रसायनों के संश्लेषण के लिए उत्पादन क्षमता रखने वाली कोई प्रसुविधा, जो 1 टन से कम है ;
(ii) कोई प्रसुविधा, जिसमें उपपैरा (क) (i) में विनिर्दिष्ट रसायन इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए उन क्रियाकलापों के अपरिहार्य सह-उत्पाद के रूप में उत्पादित किया जाता है या था, परन्तु यह कि उक्त रसायन कुल उत्पाद के 3 प्रतिशत से अधिक न हो और उक्त सुविधा, कार्यान्वयन और सत्यापन (जिसे इसमें इसके पश्चात् रसायन उपाबंध" कहा गया है) संबंधी उपाबंध के अधीन घोषणा और निरीक्षण के अधीन है ; या
(iii) सत्यापन उपाबंध के भाग 6 में यथानिर्दिष्ट इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए अनुसूची 1 में सूचीबद्ध रसायनों के उत्पादन के लिए एकल लघु प्रसुविधा ।
9. इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं :-
(क) औद्योगिक, कृषि, अनुसंधान, आयुर्विज्ञान, भेषजीय या अन्य शांतिपूर्ण प्रयोजन ;
(ख) संरक्षा प्रयोजन, अर्थात् वे प्रयोजन जो विषैले रसायनों के विरुद्ध संरक्षण से प्रत्यक्षतः संबंधित हैं ;
(ग) सैन्य प्रयोजन, जो रासायनिक आयुधों के प्रयोग से संबद्ध नहीं हैं और युद्ध की रीति के रूप में रसायनों के विषैले गुणधर्मी प्रयोग पर आश्रित नहीं हैं ;
(घ) विधि का प्रवर्तन, जिसमें घरेलु बलवा नियंत्रण प्रयोजन भी सम्मिलित है ।
10. उत्पादन क्षमता" से अभिप्रेत है :-
वास्तविक रूप में प्रयुक्त प्रौद्योगिक प्रक्रिया, या यदि प्रक्रिया अभी प्रवर्तन में नहीं है तो सुसंगत प्रसुविधा में प्रयोग किए जाने के लिए योजनाबद्ध की गई प्रक्रिया पर आधारित विनिर्दिष्ट रसायनों के विनिर्माण के लिए वार्षिक मात्रात्मक अन्तःशक्ति । इसे नामपट्टिका क्षमता या यदि नामपट्टिका क्षमता उपलब्ध नहीं है तो अभिकल्पित क्षमता के बराबर समझा जाएगा । नामपट्टिका क्षमता, एक या अधिक परीक्षणों द्वारा यथाप्रदर्शित उत्पादन प्रसुविधा की अधिकतम मात्रा के लिए अनुकूलतम दशाओं के अधीन उत्पादन है । अभिकल्पना क्षमता सैद्धांतिक रूप से परिकलित उत्पादन से सदृश्य है ।
11. संगठन" से इस अभिसमय के अनुच्छेद 8 के अनुसरण में स्थापित रासायनिक आयुधों के प्रतिषेध के लिए संगठन अभिप्रेत है ।
12. अनुच्छेद 6 के प्रयोजनों के लिए :-
(क) किसी रसायन के उत्पादन" से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा इसका निर्माण अभिप्रेत है ;
(ख) किसी रसायन के प्रसंस्करण" से कोई भौतिक प्रक्रिया अभिप्रेत है, जैसे सूत्रीकरण, निष्कर्षण और शुद्धिकरण, जिसमें कोई रसायन किसी रसायन में परिवर्तित नहीं होता है ;
(ग) किसी रसायन के उपभोग" से किसी रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा दूसरे रसायन में परिवर्तन अभिप्रेत है ।
अनुच्छेद 3
घोषणाएं
1. प्रत्येक पक्षकार राज्य इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 30 दिन के अन्दर संगठन को निम्नलिखित घोषणाएं प्रस्तुत करेगा, जिनमें :-
(क) रासायनिक आयुधों के संबंध में :-
(i) यह घोषणा करेगा कि क्या इसके स्वामित्व या कब्जे में कोई रासायनिक आयुध है या क्या इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में कोई रासायनिक आयुध अवस्थित है ;
(ii) ऐसे रासायनिक आयुधों की जो इसके स्वामित्व या कब्जे में हैं या जो इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित हैं, सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 1 से 3 के अनुसार, सिवाय उन रासायनिक आयुधों के जो उपपैरा (iii) में निर्दिष्ट किए गए हैं, सही अवस्थिति, कुल मात्रा और ब्यौरेवार सूची विनिर्दिष्ट करेगा ;
(iii) इसके राज्यक्षेत्र में ऐसे किन्हीं रासायनिक आयुधों की रिपोर्ट करेगा, जो सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 4 के अनुसार किसी दूसरे राज्य के स्वामित्व या कब्जे में है और किसी दूसरे राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है ;
(iv) घोषणा करेगा कि क्या सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 5 के अनुसार इसने 1 जनवरी, 1946 से किसी रासायनिक आयुध को प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से अंतरित या प्राप्त किया है और ऐसे आयुधों के अंतरण या प्राप्ति को विनिर्दिष्ट करेगा ;
(v) ऐसे रासायनिक आयुधों के, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में हैं या जो सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 6 के अनुसार इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है, के नाश के लिए साधारण योजना उपलब्ध कराएगा ।
(ख) पुराने रासायनिक आयुधों और परित्यक्त रासायनिक आयुधों के संबंध में :-
(i) यह घोषणा करेगा कि क्या इसके राज्यक्षेत्र में पुराने रासायनिक आयुध हैं और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(ख), पैरा 3 के अनुसार सभी उपलब्ध जानकारी देगा ;
(ii) यह घोषणा करेगा कि क्या इसके राज्यक्षेत्र में कोई परित्यक्त रासायनिक आयुध है और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(ख), पैरा 8 के अनुसार सभी उपलब्ध जानकारी देगा ।
(iii) यह घोषणा करेगा कि क्या अन्य राज्यों के राज्यक्षेत्र में इसके परित्यक्त रासायनिक आयुध हैं और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(ख), पैरा 10 के अनुसार सभी उपलब्ध जानकारी देगा ।
(ग) रायायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं के संबंध में :-
(i) यह घोषणा करेगा कि क्या 1 जनवरी, 1946 से किसी भी समय उसके स्वामित्व या कब्जे में कोई रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा है या रही थी या वह इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है या की गई है ;
(ii) सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 1 के अनुसार किसी ऐसी रासायनिक उत्पादन प्रसुविधा को 1 जनवरी, 1946 से किसी समय इसके स्वामित्व या कब्जे में रही है या रही थी या जो इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन है या रही है सिवाय उन प्रसुविधाओं के जो उपपैरा (iii) में निर्दिष्ट है ;
(iii) अपने राज्यक्षेत्र में ऐसी किसी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा के, सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 2 के अनुसार रिपोर्ट देगा जो 1 जनवरी, 1946 से इसके स्वामित्व या कब्जे के अधीन दूसरे राज्य द्वारा रखी गई है या रखी गई थी और जो किसी समय किसी दूसरे राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है या की गई है ;
(iv) सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 3 से 5 के अनुसार यह घोषणा करेगा कि 1 जनवरी, 1946 से क्या उसने रासायनिक आयुधों के उत्पादन के लिए किसी उपस्कर को प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से अंतरित या प्राप्त किया है और ऐसे उपस्कर के अंतरण या प्राप्ति को विनिर्दिष्ट करेगा ;
(v) सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 6 के अनुसार ऐसी रासायनिक उत्पादन प्रसुविधा के, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में हो या जो इसकी अधिकारिता या निंयत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है, नाश के लिए अपनी साधारण योजना देगा ;
(vi) सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 1(i) के अनुसार ऐसे किसी रासायनिक आयुध की उत्पादन प्रसुविधा को, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में है या जो इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है, बंद करने के लिए किए गए कार्यों को विनिर्दिष्ट करेगा ;
(vii) सत्यापन उपाबंध के भाग 5, पैरा 7 के अनुसार किसी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा के, जो इसके स्वामित्व या कब्जे में है या इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित है, रासायनिक आयुध नाशन प्रसुविधा में किसी अस्थायी संपरिवर्तन के लिए अपनी साधारण योजना देगा ।
(घ) किसी प्रसुविधा या स्थापन की अन्य प्रसुविधाओं के संबंध में जो इसके स्वामित्व या कब्जे में है या इसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान में अवस्थित है और जो मुख्यतः रासायनिक आयुधों के विकास के लिए 1 जनवरी, 1946 के पश्चात् अभिकल्पित, सन्निर्मित और प्रयुक्त किए गए हैं, सही अवस्थिति, प्रकृति और उसके क्रियाकलापों के साधारण विस्तार को विनिर्दिष्ट करेगा । ऐसी घोषणा में, अन्य बातों के साथ प्रयोगशालाएं और परीक्षण तथा मूल्यांकन स्थल भी हैं ।
(ङ) बलवा नियंत्रण कर्मकों के संबंध में बलवा नियंत्रण, के प्रयोजनों के लिए इसके द्वारा धारित प्रत्येक रसायन का रासायनिक नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सार सेवा (सी०ए०एस०) रजिस्ट्रीकरण संख्या, यदि दी गई हो, विनिर्दिष्ट करेगा । यह घोषणा किसी परिवर्तन के प्रभावी होने के पश्चात् 30 दिन के अंदर अद्यतन की जाएगी ।
2. इस अनुच्छेद के उपबंध और सत्यापन उपाबंध के भाग 4 के सुसंगत उपबंध आयुधों को जो किसी पक्षकार राज्य के विवेक पर, 1 जनवरी, 1977 से पहले इसके राज्यक्षेत्र में दफना दिए गए या जो दफन किए पड़े हैं या जिन्हें 1 जनवरी, 1985 से पहले समुद्र में फेंक दिया गया है, लागू नहीं होंगे ।
अनुच्छेद 4
रासायनिक आयुध
1. इस अनुच्छेद के उपबंध और इसके कार्यान्वयन के लिए विस्तृत प्रक्रिया किसी पक्षकार राज्य के स्वामित्वाधीन और कब्जे में के या जो उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान पर अवस्थित है, सभी रासायनिक आयुधों को लागू होता है सिवाय ऐसे पुराने रासायनिक आयुध और परित्यक्त रासायनिक आयुधों के जिसको सत्यापन उपाबंध का भाग 4(ख) लागू होता है ।
2. इस अनुच्छेद के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत प्रक्रिया सत्यापन उपाबंध में उपवर्णित है ।
3. ऐसे सभी स्थान जहां पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध भंडारित किए जाते हैं या नष्ट किए जाते हैं, स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन तथा सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क) के अनुसार स्थान पर ही मानीटरिंग के अध्यधीन होंगे ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुच्छेद 3, पैरा 1(क) के अधीन घोषणा के प्रस्तुत किए जाने के तत्काल पश्चात् स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से घोषणा के व्यवस्थित सत्यापन के प्रयोजन के लिए पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुधों तक पहुंच उपलब्ध कराएगा । उसके पश्चात् प्रत्येक पक्षकार राज्य इनमें से किसी रासायनिक आयुध को सिवाय रासायनिक आयुध नाशन प्रसुविधा के, नहीं हटाएगा । यह स्थल पर ही व्यवस्थित सत्यापन के प्रयोजन के लिए ऐसे रासायनिक आयुधों तक पहुंच उपलब्ध कराएगा ।
5. प्रत्येक पक्षकार राज्य किसी रासायनिक आयुध नाशन प्रसुविधा और उनके भंडारण क्षेत्र तक जो उसके स्वामित्व और कब्जे में है या जो उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान पर अवस्थित है, स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन के प्रयोजन के लिए और स्थल पर ही उपकरण से मानीटरिंग के प्रयोजन के लिए पहुंच कराएगा ।
6. प्रत्येक पक्षकार राज्य सत्यापन उपाबंध के अनुसरण में और नाशन के करार पाई दर और अनुक्रम के अनुसार (जिसे इसमें इसके पश्चात् नाशन का आदेश" कहा गया है) पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुधों को नष्ट करेगा । ऐसा नाशन इसके लिए इस अभिसमय के प्रवर्तन में आ जाने के पश्चात् दो वर्ष से अनधिक के भीतर प्रारंभ किया जाएगा और इस अभिसमय के प्रवृत्त हो जाने के पश्चात् दस वर्ष से अनधिक अवधि के भीतर समाप्त किया जाएगा । कोई पक्षकार राज्य ऐसे रासायनिक आयुधों को तीव्रतर दर से नष्ट करने से निवारित नहीं होगा ।
7. प्रत्येक पक्षकार राज्य-
(क) सत्यापन उपांबध के भाग 4(क), पैरा 29 के अनुसार प्रत्येक वार्षिक नाशन अवधि प्रारंभ होने से पहले 60 दिन के अपश्चात् पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध के नाशन के लिए विस्तृत योजना प्रस्तुत करेगा; विस्तृत योजना में आगामी वार्षिक नाशन अवधि के दौरान नष्ट किए जाने वाले सभी स्टाक का वर्णन होगा ;
(ख) पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुधों को नष्ट करने की अपनी योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में वार्षिक घोषणाएं प्रत्येक वर्ष नष्ट करने की अवधि के अन्त के पश्चात् से 60 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत करेगा; और
(ग) नष्ट करने की प्रक्रिया के पूरा होने के पश्चात्, 30 दिन के अपश्चात् प्रमाणित करेगा कि पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध नष्ट कर दिए गए हैं ।
8. यदि पैरा 6 में अधिकथित नष्ट करने के लिए 10 वर्षीय अवधि के पश्चात् इस अभिसमय का कोई राज्य अनुसमर्थन करता है या स्वीकार करता है तो वह पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुधों को यथाशक्य शीघ्र नष्ट करेगा । ऐसे किसी राज्य पक्षकार के लिए नष्ट करने का आदेश और कठोर सत्यापन की प्रक्रियाएं कार्यपालक परिषद् द्वारा अवधारित की जाएंगी ।
9. रासायनिक आयुधों की प्रारम्भिक घोषणा के पश्चात् ऐसे किसी राज्य पक्षकार द्वारा किसी रासायनिक आयुध की खोज की रिपोर्ट दी जाएगी, उसे सुरक्षित किया जाएगा और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क) के अनुसार नष्ट किया जाएगा ।
10. प्रत्येक पक्षकार राज्य रासायनिक आयुधों के परिवहन, नमूना रखने, भंडारण करने और नष्ट करने के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पर्यावरण के संरक्षण को सर्वोच्च पूर्विकता देगा । प्रत्येक पक्षकार राज्य रासायनिक आयुधों को सुरक्षा और उत्सर्जन के लिए अपने राष्ट्रीय मानकों के अनुसार परिवहन करेगा, नमूने रखेगा, भंडारण करेगा और नष्ट करेगा ।
11. कोई पक्षकार राज्य जिनके राज्यक्षेत्रों में ऐसा रासायनिक आयुध है जो किसी अन्य राज्य के स्वामित्व और कब्जे में हैं या जो किसी अन्य राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान पर अवस्थित है यह सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण प्रयास करेगा कि इस अभिसमय के प्रवृत्त हो जाने के पश्चात् एक वर्ष से अनधिक अवधि के भीतर ऐसे रासायनिक आयुधों को उसके राज्यक्षेत्र से हटा दिया जाए । यदि वे एक वर्ष के भीतर नहीं हटाए जाते हैं तो पक्षकार राज्य, संगठन और अन्य राज्य पक्षकारों से अनुरोध कर सकता है कि वे इन रासायनिक आयुधों को नष्ट किए जाने में सहायता उपलब्ध कराएं ।
12. प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसे अन्य पक्षकार राज्य के साथ जो रासायनिक आयुधों के सुरक्षित और दक्षतापूर्वक नष्ट किए जाने के लिए पद्धति और प्रौद्योगिकी से संबंधित द्विपक्षीय आधार पर या तकनीकी सचिवालय के माध्यम से जानकारी या सहायता के लिए अनुरोध करता है, सहयोग करने का वचन देता है ।
13 इस अनुच्छेद और सत्यापन उपांबध के भाग 4(क) के अनुसरण में सत्यापन क्रियाकलापों को क्रियान्वित करने में संगठन, रासायनिक आयुधों के सत्यापन पर भंडारण और पक्षकार राज्यों के बीच उनको नष्ट किए जाने के संबंधों में द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करारों के अनावश्यक दोहराव से बचने के लिए उपाय पर विचार करेगा ।
इस लक्ष्य के लिए कार्यपालक परिषद् ऐसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करारों के अनुसरण में अपनाए गए अनुपूरक उपायों के सत्यापन को सीमित करने का विनिश्चय कर सकेगी यदि वह समझती है कि :-
(क) ऐसे किसी करार के सत्यापन उपाबंध इस अनुच्छेद और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क) के सत्यापन उपाबंधों से संगत हैं ;
(ख) ऐसे किसी करार का कार्यान्वयन, इस अभिसमय के सुसंगत उपबंधों के अनुपालन का पर्याप्त आश्वासन देता है; और
(ग) द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार के पक्षकार उनके सत्यापन क्रियाकलापों के बारे में संगठन को पूर्ण रूप से जानकारी देते हैं ।
14. यदि कार्यपालक परिषद् पैरा 13 के अनुसरण में विनिश्चय करता है तो संगठन को द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार के कार्यान्वयन को मानिटर करने का अधिकार होगा ।
15. पैरा 13 और पैरा 14 में की कोई बात पक्षकार राज्य को, अनुच्छेद 3, इस अनुच्छेद और सत्यापन उपाबंध के भाग 4(क) के अनुसरण में घोषणा करने की बाध्यता को प्रभावित नहीं करेगी ।
16. प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसे रासायनिक आयुधों के जिसको नष्ट करने के लिए वह बाध्य है नष्ट करने का खर्च स्वयं वहन करेगा । वह इन रासायनिक आयुधों के भंडारण और नष्ट करने के सत्यापन खर्च भी वहन करेगा जब तक कि कार्यपालक परिषद् अन्यथा विनिश्चय न करे । यदि कार्यपालिका परिषद् पैरा 13 के अनुसरण में संगठन के सत्यापन उपायों को सीमित करने का विनिश्चय करती है तो संगठन द्वारा अनुपूरक सत्यापन और मानीटर करने का खर्च संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्धारण मापमान के अनुसार संदत्त किया जाएगा जैसा अनुच्छेद 8 के पैरा 7 में विनिर्दिष्ट है ।
17. इस अनुच्छेद के उपबंध और सत्यापन उपाबंध के भाग 4 के सुसंगत उपबंध पक्षकार राज्य के विवेक पर उसके राज्यक्षेत्र में 1 जनवरी, 1977 से पहले दफन किए गए थे और दफन हैं या जिनको 1 जनवरी, 1985 से पहले समुद्र में फेंक दिया गया है, के बारे में लागू नहीं होंगे ।
अनुच्छेद 5
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाएं
1. इस अनुच्छेद के उपबंध और इसके कार्यान्वयन के लिए विस्तृत प्रक्रिया, किसी पक्षकार राज्य के स्वामित्वाधीन और कब्जे में की या जो उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी स्थान में अवस्थित किसी भी और सभी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा को लागू होंगे ।
2. इस अनुच्छेद के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत प्रक्रिया सत्यापन उपाबंध में वर्णित है ।
3. पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध उत्पादन, प्रसुविधाएं स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन और सत्यापन उपाबंध के भाग 5 के अनुसार स्थल पर ही उपकरण से मानीटरिंग के अध्यधीन होंगे ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य, पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा में उसके बंद किए जाने के लिए अपेक्षित क्रियाकलाप को छोड़कर सभी क्रियाकलाप तत्काल समाप्त कर देगा ।
5. कोई पक्षकार राज्य कोई नई रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा की संरचना नहीं करेगा या रासायनिक आयुध उत्पादन के प्रयोजन के लिए किसी विद्यमान प्रसुविधा का या इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध किसी अन्य क्रियाकलाप के लिए उपांतरण नहीं करेगा ।
6. प्रत्येक पक्षकार राज्य, अनुच्छेद 3 पैरा 1(ग) के अधीन घोषणा किए जाने के तत्काल पश्चात् स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से घोषणा के व्यवस्थित सत्यापन के प्रयोजन के लिए पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं तक पहुंच की व्यवस्था करेगा ।
7. प्रत्येक पक्षकार राज्य :-
(क) इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् की अवधि के भीतर पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा को सत्यापन उपाबंध के भाग 5 के अनुसार बन्द कर देगा और उसकी सूचना देगा; तथा
(ख) बन्द करने के पश्चात् पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा तक, स्थल पर ही निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन के प्रयोजन के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रसुविधा बन्द रहे और बाद में इसे नष्ट कर दिया जाए, स्थल पर ही उपकरण से मानीटरिंग के प्रयोजन के लिए पहुंच उपलब्ध कराएगा ।
8. प्रत्येक पक्षकार राज्य पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाएं और संबंधित प्रसुविधाएं और उपकरण, सत्यापन उपाबंध के अनुसरण में तथा नष्ट किए जाने (जिसे इसमें इसके पश्चात् नष्ट किए जाने का आदेश" कहा गया है) के लिए करार पाई दर और अनुक्रम के अनुसार नष्ट करेगा । ऐसा नष्ट किया जाना इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् एक वर्ष से अनधिक अवधि भीतर प्रारंभ किया जाएगा और वह इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् दस वर्ष से अपश्चात् अवधि के भीतर पूरा कर लिया जाएगा । पक्षकार राज्य ऐसी प्रसुविधाओं को तीव्रतर गति से नष्ट करने से निवारित नहीं किए गए हैं ।
9. प्रत्येक पक्षकार राज्य :-
(क) पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं के नाशन के लिए उक्त सुविधा के नाश के प्रारंभ होने से पहले 180 दिन के अपश्चात् विस्तृत योजनाएं प्रस्तुत करेगा ;
(ख) पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं के नाश के लिए अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित वार्षिक घोषणाएं, प्रत्येक वार्षिक नाशन अवधि की समाप्ति के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत करेगा; और
(ग) नाशन प्रक्रिया पूरी हो जाने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् प्रमाणित करेगा कि पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाएं नष्ट की गई हैं ।
10. यदि कोई राज्य पैरा 8 में वर्णित नाशन के लिए 10 वर्ष की अवधि के पश्चात् इस अभिसमय का अनुसमर्थन करता है या इसे स्वीकार कर लेता है तो वह पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं का यथासंभव शीघ्र नाश कर देगा । ऐसे किसी पक्षकार राज्य के लिए नाशन और प्रक्रिया के कड़े सत्यापन के आदेश का अवधारण कार्य परिषद् द्वारा किया जाएगा ।
11. रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं के नाशन के दौरान प्रत्येक पक्षकार राज्य जनता की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम प्राथमिकता समुनदेशित करेगा । प्रत्येक पक्षकार राज्य सुरक्षा और उत्सर्जन के लिए राष्ट्रीय मानकों के अनुसार रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाश करेगा ।
12. पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाएं सत्यापन उपाबंध के भाग 5 के पैरा 18 से पैरा 25 के अनुसार रासायनिक आयुधों के नाश के लिए अस्थायी रूप से संपरिवर्तित किया जा सकेगा । ऐसी संपरिवर्तित सुविधा को, जैसे ही वह रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए उपयोग में न रहे, किन्तु किसी भी दशा में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 10 वर्ष के अपश्चात्, यथाशीघ्र नष्ट कर देना चाहिए ।
13. कोई पक्षकार राज्य, बाध्यकारी आवश्यकता के आपवादिक मामलों में, इस अभिसमय के अन्तर्गत प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा के उपयोग के लिए अनुज्ञा का अनुरोध कर सकेगा । कार्य परिषद् की सिफारिश पर, पक्षकार राज्यों का सम्मेलन यह विनिश्चय करेगा कि उक्त अनुरोध को अनुमोदित करें या न करें और ऐसी शर्तें स्थापित करेगा जिन पर सत्यापन उपाबंध के भाग 5, अनुभाग घ के अनुसार अनुमोदन समाश्रित है ।
14. रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा को ऐसी रीति से संपरिवर्तित किया जाएगा कि संपरिवर्तित प्रसुविधा पुनः रासायनिक उत्पादन प्रसुविधा में, औद्योगिक, कृषि, अनुसंधान, चिकित्सा, भेषजीय या अनुसूची 1 में सूचीबद्ध रसायनों को अन्तर्वलित न करने वाले अन्य शान्तिपूर्ण प्रयोजनों में उपयोजित किसी अन्य प्रसुविधा की भांति ही संपरिवर्तित न हो सके ।
15. सभी संपरिवर्तित प्रसुविधाएं, सत्यापन उपाबंध के भाग 5, अनुभाग घ के अनुसार स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से और स्थल पर उपकरणों के मानीटर के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन के अध्यधीन होंगी ।
16. सत्यापन उपाबंध के इस अनुच्छेद और भाग 5 के अनुसरण में सत्यापन क्रियाकलाप करते समय संगठन, पक्षकार राज्यों के बीच रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं और उनके नाशन के सत्यापन पर द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करारों को अनावश्यक रूप से दोबारा न करने के उपायों पर विचार करेगा ।
इस लक्ष्य के लिए कार्य परिषद् ऐसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार के अनुसरण में किए गए उपायों के अनुपूरक उपायों के सत्यापन की सीमा विनिश्चित करेगी यदि वह यह विचार करती है कि :-
(क) ऐसे करार के सत्यापन उपाबंध इस अनुच्छेद और सत्यापन उपाबंध के भाग 5 के सत्यापन उपाबंधों से संगत हैं ;
(ख) उक्त करार का क्रियान्वयन, इस अभिसमय के सुसंगत उपबंधों के अनुपालन का पर्याप्त आश्वासन देता है ;
(ग) द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार के पक्षकार अपने सत्यापन क्रियाकलापों के बारे में संगठन को पूर्ण रूप से संसूचित रखते हैं ।
17. यदि कार्य परिषद् पैरा 16 के अनुसरण में विनिश्चय करती है तो संगठन को द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार के क्रियान्वयन को मानीटर करने का अधिकार होगा ।
18. पैरा 16 और पैरा 17 की कोई बाबत, सत्यापन उपाबंध के अनुच्छेद 3, इस अनुच्छेद और भाग 5 के अनुसरण में पक्षकार राज्य की घोषणा करने की बाध्यता को प्रभावी नहीं करेगी ।
19. प्रत्येक पक्षकार राज्य, ऐसी रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधाओं के नाशन के खर्चे की पूर्ति करेगा जिसका नाश करने के लिए वह बाध्य है । कार्य परिषद् अन्यथा विनिश्चय नहीं करती तो यह इस अनुच्छेद के अधीन सत्यापन की भी पूर्ति करेगा । यदि कार्य परिषद् पैरा 16 के अनुसरण में संगठन के सत्यापन उपायों को सीमित करने का विनिश्चय करती है, तो संगठन द्वारा अनुपूरक सत्यापन और मानीटरिंग के खर्चों का संदाय अनुच्छेद 8 के पैरा 7 में यथा विनिर्दिष्ट संयुक्त राष्ट्र के निर्धारण मापमान के अनुसार किया जाएगा ।
अनुच्छेद 6
इस अभिसमय के अन्तर्गत प्रतिषिद्ध न किए गए क्रियाकलाप
1. इस अभिसमय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक पक्षकार राज्य को इस अभिसमय के अन्तर्गत प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए विषैले रसायनों और उनके पूर्वगामियों के विकास, उत्पादन, अन्यथा अभिप्राप्त, प्रतिधारण, अंतरित और उपयोग करने का अधिकार है ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करेगा कि विषैले रसायन और उनके पूर्वगामी इसके राज्यक्षेत्र के भीतर या इसकी अधिकारिता या नियंत्रणाधीन किसी अन्य स्थान में इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए केवल विकसित, उत्पादित, अन्यथा अर्जित, प्रतिधारित, अन्तरित या प्रयुक्त किए जाते हैं । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए और यह सत्यापित करने के लिए कि क्रियाकलाप इस अभिसमय के अधीन दायित्वों के अनुसार हैं, प्रत्येक पक्षकार राज्य विषैले रसायनों और रसायन उपबंध की अनुसूची 1, 2 और 3 में सूचीबद्ध उनके पूर्वगामियों, ऐसे रसायनों से संबंधित प्रसुविधाओं और सत्यापन उपाबंध में यथाविनिर्दिष्ट अन्य प्रसुविधाओं जो उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान में अवस्थित हैं, सत्यापन उपाबंध में यथा उपबंधित सत्यापन उपायों के अध्यधीन करेगा ।
3. प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुसूची 1 में (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुसूची 1 रसायन" कहा गया है) सूचीबद्ध रसायनों को उत्पादन, अर्जन, प्रतिधारण, अन्तरण और सत्यापन उपाबंध के भाग 6 में यथाविनिर्दिष्ट उपयोग पर प्रतिषेधों के अध्यधीन रखेगा । यह अनुसूची 1 रसायनों और सत्यापन उपाबंध के भाग 6 में विनिर्दिष्ट प्रसुविधाओं को सत्यापन उपाबंध के उस भाग के अनुसार स्थल पर निरीक्षण और स्थल पर उपकरण मानीटर के माध्यम से व्यवस्थित सत्यापन के अधीन रखेगा ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुसूची 2 में (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुसूची 2 रसायन" कहा गया है) में सूचीबद्ध रसायनों और सत्यापन उपाबंध के भाग 7 में विनिर्दिष्ट प्रसुविधाओं को सत्यापन उपाबंध के उस भाग के अनुसार डाटा मानीटरिंग और स्थल पर सत्यापन के अधीन रखेगा ।
5. प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुसूची 3 में (जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुसूची 3 रसायन" कहा गया है) सूचीबद्ध रसायनों और सत्यापन उपाबंध के भाग 8 में विनिर्दिष्ट प्रसुविधाओं को सत्यापन उपाबंध के इस भाग के अनुसार डाटा मानीटरिंग और स्थल पर सत्यापन के अधीन रखेगा ।
6. प्रत्येक पक्षकार राज्य डाटा मानीटरिंग के सत्यापन उपाबंध के भाग 9 में विनिर्दिष्ट प्रसुविधाओं को डाटा मानीटरिंग और सत्यापन उपाबंध के उस भाग के अनुसार अंतिम स्थल पर सत्यापन के अधीन रखेगा, जब तक कि सत्यापन उपाबंध भाग 9, पैरा 22 के अनुसरण में पक्षकार राज्यों के सम्मेलन द्वारा अन्यथा विनिश्चित नहीं किया जाता ।
7. इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के तीस दिन से अपश्चात् पक्षकार राज्य सुसंगत रसायनों और प्रसुविधाओं पर सत्यापन उपाबंध के अनुसार आरंभिक घोषणा करेगा ।
8. प्रत्येक पक्षकार राज्य, सुसंगत रसायनों और प्रसुविधाओं की बाबत सत्यापन उपाबंध के अनुसार वार्षिक घोषणाएं करेगा ।
9. स्थल पर सत्यापन के प्रयोजन के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य, सत्यापन उपाबंध में यथा अपेक्षित प्रसुविधाओं तक निरीक्षकों की पहुंच की मंजूरी देगा ।
10. सत्यापन क्रियाकलापों को संचालित करने में तकनीकी सचिवालय, इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए पक्षकार राज्य के रासायनिक क्रियाकलापों में असम्यक् अतिक्रमण से बचेगा और विशिष्टतः गुप्त जानकारी के संरक्षण (जिसे इसमें इसके पश्चात् गुप्त उपाबंध" कहा गया है) के बारे में उपाबंध में वर्णित उपबंधों का पालन करेगा ।
11. इस अनुच्छेद के उपबंध इस रीति से क्रियान्वित होंगे जो पक्षकार राज्यों के आर्थिक या प्रौद्योगिक विकास और इस अभिसमय के अंतर्गत प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए रासायनिक क्रियाकलाप के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, जिसमें वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी का अंतरराष्ट्रीय विनिमय और रसायन और उपकरण के उत्पादन, प्रसंस्करण तथा इस अभिसमय के अंतर्गत प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए रसायनों का उपयोग सम्मिलित है, में बाधा से बचता है ।
अनुच्छेद 7
राष्ट्रीय क्रियान्वयन उपाय
साधारण वचनबंध :
1. प्रत्येक पक्षकार राज्य, अपनी सांविधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार इस अभिसमय के अधीन अपनी बाध्यताओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक उपायों को अपनाएगा । विशिष्टतः यह,-
(क) प्राकृतिक और विधिक व्यक्तियों को जो इसके राज्यक्षेत्र में या अंतरराष्ट्रीय विधि द्वारा मान्यताप्राप्त इसकी अधिकारिता के अंदर किसी अन्य स्थान में है, इस अभिसमय के अधीन किसी पक्षकार राज्य के लिए प्रतिषिद्ध कोई क्रियाकलाप जिसमें ऐसे क्रियाकलाप की बाबत दंड-विधान अधिनियमित करना भी सम्मिलित है, करने से प्रतिषिद्ध करेगा ;
(ख) इस अभिसमय के अधीन किसी पक्षकार राज्य के लिए प्रतिषिद्ध किसी क्रियाकलाप को अपने नियंत्रणाधीन किसी स्थान में अनुज्ञा नहीं देगा ;
(ग) उपपैरा (क) के अधीन अधिनियमित अपने दंड-विधान को इस अभिसमय के अधीन किसी पक्षकार राज्य के लिए प्रतिषिद्ध किसी क्रियाकलाप के लिए जो किसी ऐसे प्रकृत व्यक्ति द्वारा किया गया है जो अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुरूप इसकी राष्ट्रीयता रखता हो, विस्तारित करेगा ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य अन्य पक्षकार राज्यों को सहयोग देगा और पैरा 1 के अधीन दायित्वों के क्रियान्वयन को सुकर बनाने के लिए समुचित प्रकार की विधिक सहायता प्रदान करेगा ।
3. इस अभिसमय के अधीन इसके दायित्वों के क्रियान्वयन के दौरान, प्रत्येक पक्षकार राज्य जनता की सुरक्षा और पर्यावरण के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए उच्चतम प्राथमिकता समनुदेशित करेगा और इस संबंध में अन्य पक्षकार राज्यों को भी समुचित सहयोग देगा ।
पक्षकार राज्य और संगठन के बीच संबंध :
4. इस अभिसमय के अधीन अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य, संगठन और अन्य पक्षकार राज्यों से प्रभावी संपर्क के लिए राष्ट्रीय केन्द्रीय बिन्दु के रूप में सेवा के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण अभिहित या स्थापित करेगा । प्रत्येक पक्षकार राज्य, अभिसमय के उसके लिए प्रभावी होने के समय संगठन को अपने राष्ट्रीय प्राधिकरण के बारे में अधिसूचित करेगा ।
5. प्रत्येक पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के क्रियान्वयन के लिए किए गए विधायी और प्रशासनिक उपायों की सूचना संगठन को देगा ।
6. प्रत्येक पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के क्रियान्वयन के संबंध में संगठन से गोपनीय रूप से प्राप्त की गई जानकारी और आंकड़ों को गोपनीय रखेगा और विशेष रूप से संभालेगा ।
यह ऐसी जानकारी और आंकड़ों को उसके अधिकार और दायित्वों की बाबत इस अभिसमय के अधीन गोपनीय उपाबंध में उपवर्णित उपबंधों के अनुसार आत्यन्तिक मानेगा ।
7. प्रत्येक पक्षकार राज्य, संगठन को अपने सभी कृत्यों का निर्वहन करने में सहयोग देने और विशेषतया तकनीकी सचिवालय को सहायता देने का वचन करता है ।
अनुच्छेद 8
संगठन
क. साधारण उपबन्ध
1. इस अभिसमय के पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन की प्राप्ति के लिए रासायनिक आयुधों के प्रतिषेध, इसके उपबंधों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने, जिसके अन्तर्गत वे भी हैं जो इसके अनुपालन में अंतरराष्ट्रीय सत्यापन के संबंध में है, और पक्षकार राज्यों के बीच परामर्श और सहयोग के लिए एक मंच का उपबंघ करने के लिए संगठन स्थापित करते हैं ।
2. इस अभिसमय के सभी पक्षकार राज्य उक्त संगठन के सदस्य होंगे । किसी पक्षकार राज्य को संगठन में इसकी सदस्यता से वंचित नहीं किया जाएगा ।
3. संगठन का मुख्यालय, हेग, नीदरलैंड किंग्डम में होगा ।
4. संगठन के अंग के रूप में पक्षकार राज्यों का सम्मेलन, कार्य परिषद् और तकनीकी सचिवालय स्थापित किया जाता है ।
5. संगठन इस अभिसमय के अधीन उपबंधित किए गए इसके सत्यापन क्रियाकलापों का संचालन, उनके उद्देश्यों को यथासमय और दक्षतापूर्ण रूप से पूरा करने से सुसंगत यथासंभव अतिक्रमी रीति में करेगा । यह इस अभिसमय के अधीन अपने उत्तरदायित्वों को पूरा करने के लिए केवल जानकारी और आवश्यक आंकडों की मांग करेगा । यह इस अभिसमय के क्रियान्वयन में सिविल और सैन्य क्रियाकलापों और प्रसुविधाओं से संबंधित प्राप्त जानकारी की गोपनीयता की संरक्षा के लिए प्रत्येक पूर्वावधानी बरतेगा और विनिर्दिष्ट रूप से गोपनीयता संबंधी उपाबंध में वर्णित उपबंधों का पालन करेगा ।
6. अपने सत्यापन क्रियाकलापों को करते समय संगठन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति का प्रयोग करने के लिए उपायों पर विचार करेगा ।
7. संगठन के क्रियाकलापों के व्यय, संयुक्त राष्ट्र और इस संगठन के बीच सदस्यता में अन्तरों को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र निर्धारण के समायोजित मान के अनुसार और अनुच्छेद 4 और 5 के उपबंधों के अधीन पक्षकार राज्यों द्वारा संदत्त किया जाएगा । प्रारंभिक (प्रिपरेटरी) आयोग के संबंध में पक्षकार राज्यों के वित्तीय अंशदानों की, नियमित बजट में उनके अंशदानों से समुचित प्रकार से कटौती की जाएगी । संगठन के बजट में दो पृथक् अध्याय होंगे, एक प्रशासनिक और अन्य व्ययों से संबंधित होगा और दूसरा सत्यापन व्ययों से संबंधित होगा ।
8. संगठन के किसी सदस्य का जिस पर संगठन के प्रति इसके वित्तीय अंशदान के संदाय का बकाया है, संगठन में कोई मत नहीं होगा, यदि इसके बकाया की रकम, पूर्ववर्ती दो पूर्ण वर्षों के लिए देय अंशदान की रकम के बराबर या उससे अधिक है । पक्षकार राज्यों का सम्मेलन, तब भी ऐसे सदस्य को मत देने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा, यदि इसका यह समाधान हो जाता है कि संदाय में असफलता, ऐसे कारणों से है, जो उक्त सदस्य के नियंत्रण के परे है ।
ख. पक्षकार राज्यों का सम्मेलन
संरचना, प्रक्रिया और विनिश्चय करना :
9. पक्षकार राज्यों का सम्मेलन (जिसे इसमें इसके पश्चात् सम्मेलन" कहा गया है) इस संगठन के सभी सदस्यों से मिलकर बनेगा । सम्मेलन में प्रत्येक सदस्य का एक प्रतिनिधि होगा, जिसके साथ अनुकल्पी और सलाहकार हो सकेंगे ।
10. सम्मेलन का पहला सत्र इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन से अपश्चात् निक्षेपागार द्वारा बुलाया जाएगा ।
11. सम्मेलन की बैठक नियमित सत्रों में होगी, जो कि, जब तक कि अन्यथा विनिश्चित नहीं किया जाता वार्षिक रूप से आयोजित की जाएगी ।
12. सम्मेलन का विशेष सत्र तभी बुलाया जाएगा :-
(क) जब सम्मेलन द्वारा विनिश्चित किया जाए ;
(ख) जब कार्य परिषद् द्वारा अनुरोध किया जाए ;
(ग) जब किसी सदस्य द्वारा अनुरोध किया जाए और एक-तिहाई सदस्यों द्वारा उसका समर्थन किया जाए ;
(घ) इस अभिसमय के प्रवर्तन के पुनर्विलोकन के लिए पैरा 22 के अनुसार ।
पैरा (घ) की दशा के सिवाय, विशेष सत्र, तकनीकी सचिवालय के महानिदेशक द्वारा अनुरोध की प्राप्ति के पश्चात् 30 दिन से अपश्चात् बुलाया जाएगा, जब तक कि अनुरोध में अन्यथा विनिर्दिष्ट न किया गया हो ।
13. सम्मेलन अनुच्छेद 15, पैरा 2 के अनुसार किसी संशोधन के रूप में भी बुलाया जा सकेगा ।
14. सम्मेलन के सत्र जब तक कि सम्मेलन में अन्यथा विनिश्चित न किया जाए, संगठन के स्थान पर होंगे ।
15. सम्मेलन प्रक्रिया के अपने नियमों को अपनाएगा । प्रत्येक नियमित सत्र के प्रारम्भ में, यह अपना अध्यक्ष और ऐसे अन्य अधिकारियों को जो अपेक्षित हो निर्वाचित करेगा । वे तक तक अपना पद धारित करेंगे जब तक कि आगामी नियमित सत्र में नया अध्यक्ष और अन्य अधिकारी निर्वाचित नहीं किए जाते ।
16. सम्मेलन के लिए गणपूर्ति संगठन के सदस्यों के बहुमत से होगी ।
17. संगठन के प्रत्येक सदस्य का सम्मेलन में एक मत होगा ।
18. सम्मेलन में प्रक्रिया के प्रश्नों पर उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा विनिश्चय लिया जाएगा । महत्वपूर्ण मामलों पर जहां तक संभव हो मतैक्य द्वारा विनिश्चय किया जाना चाहिए । जब कोई विवाद्यक विनिश्चय के लिए आता है और मतैक्य प्राप्य नहीं है तो अध्यक्ष, 24 घंटे के लिए किसी मतदान को आस्थगित करेगा और आस्थगन की इस अवधि के दौरान मतैक्य प्राप्त करने के लिए प्रत्येक प्रयास करेगा और इस अवधि की समाप्ति से पूर्व सम्मेलन को रिपोर्ट देगा । 24 घंटे की समाप्ति पर मतैक्य संभव न होने की दशा में सम्मेलन उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा विनिश्चय लेगा जब तक कि इस अभिसमय में अन्यथा विनिर्दिष्ट न हो । जब इस बारे में कोई विवाद्यक उत्पन्न होता है कि उक्त प्रश्न एक महत्वपूर्ण प्रश्न है या नहीं तो उस प्रश्न को महत्वपूर्ण विषय माना जाएगा, जब तक कि महत्वपूर्ण मामलों पर सम्मेलन द्वारा विनिश्चय के लिए अपेक्षित बहुमत द्वारा उसका विनिश्चय नहीं कर दिया जाता ।
19. सम्मेलन, संगठन का प्रधान अंग होगा । यह इस अभिसमय की सीमा के भीतर किन्हीं प्रश्नों, विषयों और विवाद्यकों पर विचार करेगा, जिसके अंतर्गत वे भी हैं जो कार्य परिषद् और तकनीकी सचिवालय की शक्तियों और कृत्यों से संबंधित हैं । यह किसी पक्षकार राज्य द्वारा उठाए गए या कार्य परिषद् द्वारा इसके ध्यान में लाए गए इस अभिसमय से संबंधित किन्हीं प्रश्नों, विषयों, या विवादों के संबंध में विनिश्चय ले सकेगा ।
20. सम्मेलन, इस अभिसमय के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा और इसके उद्देश्य और प्रयोजन के संप्रवर्तन के लिए कार्य करेगा । सम्मेलन इस अभिसमय के अनुपालन का पुनर्विलोकन करेगा । यह कार्य परिषद् और तकनीकी सचिवालय के क्रियाकलापों की देखरेख करेगा और उनके कृत्यों के प्रयोग में इस अभिसमय के अनुसार मार्गदर्शक सिद्धान्त जारी कर सकेगा ।
21. सम्मेलन-
(क) अपने नियमित सत्र में कार्य परिषद् द्वारा प्रस्तुत की गई संगठन की रिपोर्ट, कार्यक्रम और बजट पर विचार करेगा और उसे अंगीकार करेगा, साथ ही अन्य रिपोर्टों पर विचार करेगा ;
(ख) पैरा 7 के अनुसार पक्षकार राज्यों द्वारा संदत्त किए जाने वाले वित्तीय अंशदानों के मान पर विनिश्चय करेगा ;
(ग) कार्य परिषद् के सदस्य निर्वाचित करेगा ;
(घ) तकनीकी सचिवालय के महानिदेशक (जिसे इसमें इसके पश्चात् महानिदेशक" कहा गया है) की नियुक्ति करेगा ;
(ङ) पश्चात्वर्ती द्वारा प्रस्तुत किए गए कार्य परिषद् के प्रक्रिया के नियमों को अनुमोदित करेगा ;
(च) ऐसे समनुषंगी अंगों को स्थापित करेगा, जिन्हें यह इस अभिसमय के अनुसार अपने कृत्यों के प्रयोग के लिए आवश्यक पाता है ;
(छ) रासायनिक क्रियाकलापों के क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रयोजनों के लिए अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देगा ;
(ज) ऐसे वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकासों का जो इस अभिसमय के प्रवर्तन को प्रभावित कर सकते हैं, पुनर्विलोकन करेगा और इस संदर्भ में, महानिदेशक को, इस सम्मेलन, कार्यकारी परिषद् या पक्षकार राज्यों को अभिसमय से सुसंगत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में विशेषज्ञ सलाह देने के लिए, उनके कृत्यों के निर्वहन में उसे समर्थ बनाने के लिए एक वैज्ञानिक सलाह बोर्ड बनाने के लिए निदेश देगा । वैज्ञानिक सलाह बोर्ड, सम्मेलन द्वारा अंगीकृत निर्देश के निर्बन्धनों के अनुसार नियुक्त किए गए स्वतंत्र विशेषज्ञों से मिलकर बनेगा ;
(झ) अपने पहले अधिवेशन में प्रिपरेटरी आयोग द्वारा विकसित किए गए किन्हीं प्रारूप करारों, उपबंधों और दिशा निदेशों पर विचार करेगा और उन्हें अनुमोदित करेगा ;
(ञ) अपने पहले सत्र में अनुच्छेद 10 के अनुसार सहायता के लिए स्वैच्छिक निधि स्थापित करेगा ;
(ट) इस अभिसमय का अनुपालन सुनिश्चित करने और ऐसी स्थिति को, जो इस अभिसमय के उपबंधों का उल्लंघन करती है, को दूर करने और उसका उपचार करने के लिए अनुच्छेद 12 के अनुसार आवश्यक उपाय करेगा ।
22. सम्मेलन, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् पांचवें और दसवें वर्ष की समाप्ति के पश्चात् एक वर्ष से अपश्चात् ऐसी समयावधि के भीतर ऐसे अन्य समयों पर, जिसका विनिश्चय किया जाए, इस अभिसमय के प्रवर्तन का पुनर्विलोकन करने के लिए विशेष सत्र बुलाएगा । ऐसे पुनर्विलोकन करते समय किसी सुसंगत वैज्ञानिक और तकनीकी विकासों को ध्यान में रखा जाएगा । उसके पश्चात् पांच वर्ष के अंतरालों पर, जब तक कि अन्यथा विनिश्चित नहीं किया जाता, उसी उद्देश्य से और सत्र बुलाए जाएंगे ।
ग. कार्य परिषद्
संरचना, प्रक्रिया और विनिश्चय लेना :
23. कार्य परिषद् 41 सदस्यों से मिलकर बनेगी । प्रत्येक पक्षकार राज्य को चक्रानुक्रम के सिद्धान्त के अनुसार कार्य परिषद् में सेवा करने का अधिकार होगा । कार्य परिषद् के सदस्य सम्मेलन द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचित किए जाएंगे । इस अभिसमय के प्रभावी कार्यकरण, साम्यापूर्ण भौगोलिक वितरण पर विशेष रूप से ध्यान दिए जाने को, रसायन उद्योग के महत्व के साथ-साथ राजनैतिक और सुरक्षा संबंधी हितों को सुनिश्चित करने के लिए कार्य परिषद् निम्नलिखित से मिलकर बनेगी :-
(क) अफ्रीका के नौ पक्षकार राज्यों को इस क्षेत्र में स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के लिए आधार के रूप में यह समझ लिया जाए कि इन नौ पक्षकार राज्यों में से तीन सदस्य नियम के रूप में, अन्तरराष्ट्रीय रूप से ज्ञापित और प्रकाशित आंकड़ों द्वारा यथा अवधारित इस क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रासायनिक उद्योग वाले, पक्षकार राज्य होंगे । इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समूह इन तीन सदस्यों को नामनिर्दिष्ट करने में, अन्य क्षेत्रीय बातों को भी ध्यान में रखेंगे ;
(ख) एशिया से नौ पक्षकार राज्यों को इस क्षेत्र में अब स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के लिए आधार के रूप में यह समझ लिया जाए कि इन नौ पक्षकार राज्यों में से चार सदस्य, नियम के रूप में, अंतरराष्ट्रीय रूप से ज्ञापित और प्रकाशित आंकड़ों द्वारा यथा अवधारित इस क्षेत्र में अधिकतम महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रासायनिक उद्योग वाले पक्षकार राज्य होंगे, इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समूह, चार सदस्यों को नामनिर्दिष्ट करने में अन्य क्षेत्रीय बातों को भी ध्यान में रखेंगे ;
(ग) पूर्वी यूरोप से पांच पक्षकार राज्यों को इस क्षेत्र में अब स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के लिए आधार के रूप में यह समझ लिया जाए कि इन पांच पक्षकार राज्यों में से एक सदस्य, नियम के रूप में, अन्तरराष्ट्रीय रूप से ज्ञापित और प्रकाशित आंकड़ों द्वारा यथा अवधारित इस क्षेत्र में अधिकतम महत्वपूर्ण रासायनिक उद्योग वाला पक्षकार राज्य होगा, इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समूह, इस एक सदस्य को नामनिर्दिष्ट करने में, अन्य क्षेत्रीय बातों को ध्यान में रखेंगे ;
(घ) लैटिन अमेरिका और केरिबियन क्षेत्र में सात पक्षकार राज्यों को इस क्षेत्र में अब स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के आधार पर के रूप में यह समझ लिया जाए कि इन सात पक्षकार राज्यों में से तीन सदस्य, नियम के रूप में अन्तरराष्ट्रीय रूप में से ज्ञापित और प्रकाशित आंकड़ों द्वारा यथा अवधारित इस क्षेत्र में अधिकतम महत्वपूर्ण रासायनिक उद्योग वाले पक्षकार राज्य होंगे, इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समूह इन तीन सदस्यों को नामनिर्दिष्ट करने में अन्य क्षेत्रीय बातों को भी ध्यान में रखेंगे ;
(ङ) पश्चिम यूरोप और अन्य राज्यों में से दस पक्षकार राज्यों को इस क्षेत्र में अब स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के लिए आधार के रूप में यह समझ लिया जाए कि इन दस पक्षकार राज्यों में से पांच सदस्य, नियम के रूप में, अन्तरराष्ट्रीय रूप से ज्ञापित और प्रकाशित आंकड़ों द्वारा यथा अवधारित इस क्षेत्र में अधिकतम महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रासायनिक उद्योग वाले पक्षकार राज्य होंगे, क्षेत्रीय समूह, इन पांच सदस्यों को नामनिर्दिष्ट करने में अन्य क्षेत्रीय बातों को भी ध्यान में रखेंगे ।
(च) एक और पक्षकार राज्य क्रमशः एशिया और लैटिन अमेरिका और केरिबियन क्षेत्रों में अब स्थित पक्षकार राज्यों द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । इस नामनिर्देशन के लिए आधार के रूप में यह समझ लिए जाए कि वह पक्षकार राज्य इन क्षेत्रों से चक्रानुक्रम से लिया जाने वाला सदस्य होगा ।
24. कार्य परिषद् के प्रथम निर्वाचन के लिए 20 सदस्य, पैरा 23 में यथा वर्णित स्थापित संख्यात्मक अनुपातों को ध्यान में रखकर, एक वर्ष के लिए निर्वाचित किए जाएंगे ।
25. अनुच्छेद 4 और 5 के पूर्ण कार्यान्वयन के पश्चात्, सम्मेलन, कार्य परिषद् के सदस्यों के बहुमत के अनुरोध पर, पैरा 23 में विनिर्दिष्ट सिद्धांतों से, जो इसकी संरचना को शासित करते हैं, संबंधित विकासों को ध्यान में रखकर कार्य परिषद् की संरचना का पुनर्विलोकन करेगा ।
26. कार्य परिषद् अपने प्रक्रिया नियमों का प्रतिपादन करेगी और उन्हें अनुमोदन के लिए सम्मेलन को प्रस्तुत करेगी ।
27. कार्य परिषद् अपने सदस्यों में से अपना अध्यक्ष निर्वाचित करेगी ।
28. कार्य परिषद् के सत्र नियमित होंगे । नियमित सत्रों के बीच में, जब कभी भी इसकी शक्तियों और कृत्यों की पूर्ति के लिए अपेक्षित हों, यह बैठक करेगी ।
29. कार्य परिषद् के प्रत्येक सदस्य का एक मत होगा । जब तक कि इस अधिसमय में अन्यथा विनिर्दिष्ट नहीं किया गया हो, कार्य परिषद् सभी महत्वपूर्ण मामलों पर अपने सभी सदस्यों के दो तिहाई बहुमत द्वारा विनिश्चय लेगी । कार्य परिषद् प्रक्रिया के प्रश्नों पर अपने सभी सदस्यों के साधारण बहुमत द्वारा विनिश्चय लेगी । जब इस बारे में कोई विवाद्यक उत्पन्न होता है कि वह प्रश्न महत्वपूर्ण है या नहीं तो उस प्रश्न को, जब तक कि कार्य परिषद् द्वारा उस महत्वपूर्ण मामले के संबंध में अपेक्षित बहुमत द्वारा अन्यथा विनिश्चय न किया जाए, महत्वपूर्ण मामले के रूप में माना जाएगा ।
शक्तियां और कृत्य :
30. कार्य परिषद् संगठन का कार्यकारी अंग होगा । यह सम्मेलन के प्रति उत्तरदायी होगा । कार्य परिषद् इस अभिसमय के अधीन उसे सौंपी गई शक्तियों और कृत्यों और उन कृत्यों को, जो सम्मेलन द्वारा इसको प्रत्यायोजित किए गए हों, करेगा । ऐसा करने में, यह सम्मेलन की सिफारिशों, विनिश्चयों और मार्गदर्शी सिद्धान्तों के अनुरूप कार्य करेगी और उनका उचित और निरन्तर कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी ।
31. कार्य परिषद् इस अभिसमय के प्रभावी क्रियान्यवन और पालन में अभिवृद्धि करेगी । यह प्रत्येक पक्षकार राज्य के तकनीकी सचिवालय के क्रियाकलापों का पर्यवेक्षण करेगी, राष्ट्रीय प्राधिकरणों से सहयोग करेगी और पक्षकार राज्य को, उनके अनुरोध पर, परामर्श और सहयोग प्रदान करेगी ।
32. कार्य परिषद्-
(क) संगठन के प्रारूप कार्यक्रम और बजट पर विचार करेगी और सम्मेलन में प्रस्तुत करेगी ;
(ख) इस अभिसमय के क्रियान्वयन पर, संगठन की प्रारूप रिपोर्ट, अपने स्वयं के क्रियाकलापों के निष्पादन के संबंध में रिपोर्ट और ऐसी विशेष रिपोर्टों पर, जो वह आवश्यक समझे या जिसके लिए सम्मेलन अनुरोध करे, विचार करेगी और सम्मेलन में प्रस्तुत करेगी :
(ग) सम्मेलन के सत्रों का प्रबंध करेगी जिसके अन्तर्गत प्रारूप कार्य सूची तैयार करना भी है ।
33. कार्य परिषद् सम्मेलन का कोई विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध कर सकेगी ।
34. कार्य परिषद्-
(क) सम्मेलन द्वारा पूर्व अनुमोदन के अधीन रहते हुए, संगठन की ओर से राज्यों और अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के साथ करार या समझौते करेगी ।
(ख) संगठन की ओर से अनुच्छेद 10 की बाबत पक्षकार राज्यों के साथ करार करेगी और अनुच्छेद 10 में निर्दिष्ट स्वैच्छिक निधि का पर्यवेक्षण करेगी ।
(ग) तकनीकी सचिवालय द्वारा बातचीत से पक्षकार राज्यों के साथ सत्यापन क्रियाकलापों के क्रियान्वयन के संबंध में किए गए करारों और समझौतों का अनुमोदन करेगी ।
35. कार्य परिषद् इस अभिसमय को प्रभावित करने वाले अपनी सक्षमता के भीतर किसी विवाद्यक या मामले और इसके क्रियान्वयन जिसके अन्तर्गत अननुपालन के और अनुपालन के मामले भी हैं, पर विचार करेगी और समुचित रूप में पक्षकार राज्यों को सूचित करेगी तथा विवाद्यक या मामले को सम्मेलन के ध्यान में लाएगी ।
36. कार्य परिषद् अनुपालन के और अननुपालन के मामलों के संबंध में संदेह या चिंता पर विचार करते समय, जिसके अन्तर्गत अन्य बातों के साथ-साथ इस अभिसमय के अधीन उपबंधित अधिकारों का दुरुपयोग भी है, उसमें अंतर्वलित पक्षकार राज्यों से परामर्श करेगी और समुचित समझने पर पक्षकार राज्य से विनिर्दिष्ट समय के भीतर स्थिति सुधारने के लिए उपाय करने का अनुरोध करेगी । उस सीमा तक जहां तक आगे कार्रवाई करना कार्य परिषद् आवश्यक समझे, वह अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित उपायों में से एक या अधिक उपाय करेगी,-
(क) विवाद्यक या मामले के संबंध में सभी पक्षकार राज्यों को सूचित करना ;
(ख) विवाद्यक या मामले को सम्मेलन के ध्यान में लाना;
(ग) उक्त स्थिति में सुधार लाने के लिए उपायों के संबंध में सम्मेलन से सिफारिश करना और इसके अनुपालन को सुनिश्चित करना,
कार्य परिषद् विशिष्ट गंभीरता और अत्यावश्यकता के मामलों में, विवाद्यक या मामले को, जिसके अंतर्गत सुसंगत सूचना और निष्कर्ष है, सीधे संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के ध्यान में लाएगी । इस कदम के संबंध में यह उसी समय सभी पक्षकार राज्यों को भी सूचित करेगी ।
घ. तकनीकी सचिवालय
37. तकनीकी सचिवालय, सम्मेलन और कार्य परिषद् को उनके कृत्यों के पालन में सहायता करेगा । तकनीकी सचिवालय इस अभिसमय में उपबंधित सत्यापन उपायों को कार्यान्वित करेगा । यह इस अभिसमय के अधीन उसे सौंपे गए अन्य कृत्यों तथा सम्मेलन और कार्य परिषद् द्वारा इसे प्रत्यायोजित कृत्यों को करेगा ।
38. तकनीकी सचिवालय :-
(क) संगठन का प्रारूप कार्यक्रम और बजट तैयार करेगा और कार्य परिषद् को प्रस्तुत करेगा ;
(ख) इस अभिसमय के कार्यान्वयन पर संगठन की प्रारूप रिपोर्ट और ऐसी अन्य रिपोर्टें, जिनके लिए सम्मेलन या कार्य परिषद् अनुरोध करे, तैयार करेगा और कार्य परिषद् को प्रस्तुत करेगा ;
(ग) सम्मेलन, कार्य परिषद् और समनुषंगी अंगों को प्रशासनिक और तकनीकी समर्थन देगा ;
(घ) इस अभिसमय के क्रियान्वयन से संबंधित मामलों पर पक्षकार राज्यों को संगठन की ओर से सूचनाएं भेजेगा और प्राप्त करेगा ;
(ङ) इस अभिसमय के उपबंधों के क्रियान्वयन में जिसके अंतर्गत अनुसूचित और गैर अनुसूचित रसायनों का मूल्यांकन भी है, पक्षकार राज्यों को तकनीकी सहायता और तकनीकी मूल्यांकन प्रदान करेगा ।
39. तकनीकी सचिवालय :-
(क) कार्य परिषद् के अनुमोदन के अधीन रहते हुए सत्यापन क्रियाकलापों के क्रियान्वयन के संबंध में पक्षकार राज्यों के साथ करारों और समझौतों के लिए बातचीत करेगा ;
(ख) इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के 180 दिन के अपश्चात् अनुच्छेद 10, पैरा 7(ख) और (ग) के अनुसार पक्षकार राज्यों द्वारा आपातकालीन और मानवीय सहायता के स्थायी संचयनों के स्थापन और अनुरक्षण में समन्वय करेगा । तकनीकी सचिवालय उपयोग के लिए अनुरक्षित मदों का निरीक्षण कर सकेगा । संचित की जाने वाली मदों की सूची पर सम्मेलन द्वारा उपरोक्त पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार किया जाएगा और उसका अनुमोदन किया जाएगा ;
(ग) अनुच्छेद 10 में निर्दिष्ट स्वैच्छिक निधि को प्रशासित करेगा, पक्षकार राज्यों द्वारा की गई घोषणाओं को संकलित करेगा और अनुरोध किए जाने पर पक्षकार राज्यों या पक्षकार राज्य और संगठन के बीच अनुच्छेद 10 के प्रयोजन के लिए निष्पादित किए गए द्विपक्षीय करारों को रजिस्ट्रीकृत करेगा ।
40. तकनीकी सचिवालय, अपने कृत्यों के निर्वहन में आने वाली किसी समस्या के संबंध में, जिसके अंतर्गत इस अभिसमय के अनुपालन के बारे में ऐसे संदेह, संदिग्धताएं या अनिश्चितताएं भी हैं जो सत्यापन क्रियाकलापों के निष्पादन के दौरान इसकी जानकारी में आई हों और वह संबंधित पक्षकार राज्य के साथ अपने परामर्श से उनका समाधान करने या स्पष्ट करने में असमर्थ रहा हो, कार्य परिषद् को सूचित करेगा ।
41. तकनीकी सचिवालय में एक महानिदेशक जो इसका प्रधान होगा, तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, निरीक्षक और अपेक्षानुसार वैज्ञानिक, तकनीकी और अन्य कार्मिक होंगे ।
42. निरीक्षणालय तकीनीकी सचिवालय का एक एकक होगा और वह महानिदेशक के पर्यवेक्षण में कार्य करेगा ।
43. महानिदेशक की नियुक्ति कार्य परिषद् की सिफारिश पर सम्मेलन द्वारा चार वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी जिसे एक अवधि के लिए और बढ़ाया जा सकता है किन्तु इसके पश्चात् नहीं ।
44. महानिदेशक, कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति, संगठन और तकनीकी सचिवालय के कार्यकरण के लिए सम्मेलन और कार्य परिषद् के प्रति उत्तरदायी होगा । कर्मचारिवृन्द के नियोजन और उनकी सेवा शर्तें अवधारित करते समय दक्षता, क्षमता और एकनिष्ठता के सर्वोच्च मानकों को प्राप्त करने पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाएगा । केवल पक्षकार राज्यों के नागरिक ही महानिदेशक के रूप में, निरीक्षकों के रूप में या वृत्तिक और लिपिकीय कर्मचारिवृन्द के अन्य सदस्यों के रूप में सेवा करेंगे । यथासंभव व्यापक भौगोलिक आधार पर कर्मचारिवृन्द की भर्ती करने के महत्व पर सम्यक्तः ध्यान दिया जाएगा । भर्ती इस सिद्धांत से मार्गदर्शित होगी कि तकनीकी सचिवालय के दायित्वों के समुचित निर्वहन के लिए आवश्यक न्यूनतम आवश्यक कर्मचारिवृन्द कर्मचारी रखे जाएं ।
45. महानिदेशक, संगठन और पैरा 21(ज) में निर्दिष्ट वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के कार्यकरण के लिए उत्तरदायी होगा । महानिदेशक, पक्षकार राज्यों के परामर्श से वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति करेगा जो अपनी व्यष्टिक क्षमता में सेवा करेंगे । बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति इस अभिसमय के क्रियान्वयन से सुसंगत विशिष्ट वैज्ञानिक क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर की जाएगी । महानिदेशक, यदि वह उचित समझे, बोर्ड के सदस्यों के परामर्श से विशिष्ट मुद्दों पर सिफारिश करने के लिए वैज्ञानिक विशेषज्ञों के अस्थायी कार्यकारी समूह भी स्थापित कर सकेगा । उपरोक्त के संबंध में, पक्षकार राज्य, विशेषज्ञों की सूची महानिदेशक को प्रस्तुत कर सकेंगे ।
46. महानिदेशक, निरीक्षक और कर्मचारिवृन्द के अन्य सदस्य, अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी सरकार या संगठन के बाहर के किसी स्रोत से अनुदेश नहीं मांगेंगे या प्राप्त करेंगे ।
47. प्रत्येक पक्षकार राज्य, महानिदेशक, निरीक्षक और कर्मचारिवृन्द के अन्य सदस्यों के दायित्वों के अनन्य अंतरराष्ट्रीय स्वरूप का आदर करेगा और कर्तव्यों के निर्वहन में उन पर दबाव डालने का प्रयत्न नहीं करेगा ।
ङ. विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां
48. संगठन को पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र और उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान पर ऐसी विधिक हैसियत तथा ऐसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी जो इसके कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।
49. पक्षकार राज्यों के प्रत्यायुक्तों को अपने परम्परानुवर्तियों और सलाहकारों तथा अपने परम्परानुवर्तियों और सलाहकारों सहित कार्य परिषद् में नियुक्त प्रतिनिधियों, महानिदेशक और संगठन के कर्मचारिवृन्द को ऐसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी जो संगठन के संबंध में स्वतंत्र रूप से उनके कृत्यों का पालन करने के लिए आवश्यक हों ।
50. इस अनुच्छेद में निर्दिष्ट विधिक हैसियत, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों को संगठन और पक्षकार राज्यों के बीच करारों में तथा संगठन और उस राज्य जिसमें संगठन का मुख्यालय स्थित है पक्षकार राज्य के बीच करार में परिभाषित किया जाएगा । इन करारों पर पैरा 21(झ) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
51. पैरा 48 और पैरा 49 के होते हुए भी, सत्यापन क्रियाकलाप के संचालन के दौरान महानिदेशक और तकनीकी सचिवालय के कर्मचारिवृन्द को प्राप्त विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां वे होंगी जो सत्यापन उपाबंध के भाग 2, खंड ख में दी गई हैं ।
अनुच्छेद 9
परामर्श, सहयोग और तथ्यों का पता लगाना
1. इस अभिसमय के उद्देश्यों और प्रयोजनों तथा इसके उपबंधों के क्रियान्वयन से संबंधित उठाए गए किन्हीं मामलों पर पक्षकार राज्य आपस में, सीधे या संगठन के माध्यम से या अन्य समुचित अन्तरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के माध्यम से जिनमें संयुक्त राष्ट्र की परिधि के भीतर और इसके चार्टर के अनुसार, प्रक्रियाएं भी सम्मिलित हैं, परामर्श और सहयोग करेंगे ।
2. किसी पक्षकार राज्य के आक्षेप निरीक्षण के लिए अनुरोध के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पक्षकार राज्यों को ऐसे मामलों को, जिसके कारण इस अभिसमय के अनुपालन के बारे में संदेह उत्पन्न होता हो या संबंधित मामले में चिन्ता उत्पन्न होती हो, जो संदिग्ध जानी जाए, जहां तक संभव हो, आपस में, जानकारी और परामर्श के आदान-प्रदान से ऐसे प्रयत्न किए जाने चाहिएं जिससे वे स्पष्ट हो जाएं और उनका समाधान हो जाए । कोई पक्षकार राज्य, जिसे किसी अन्य पक्षकार राज्य से किसी ऐसे मामले के स्पष्टीकरण के लिए अनुरोध प्राप्त होता है, जिसके बारे में अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य का यह विश्वास है कि वह संदेह या चिन्ता का कारण है, अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य को यथासंभव शीघ्र किन्तु किसी भी स्थिति में अनुरोध के बाद 10 दिन के पश्चात् इस बारे में ऐसे स्पष्टीकरण सहित कि जानकारी से मामले का कैसे समाधान होगा, ऐसी जानकारी प्रदान करेगा जो संदेह या चिन्ता का समाधान करने के लिए पर्याप्त हो । इस अभिसमय की कोई बात किन्हीं दो या अधिक पक्षकार राज्यों के निरीक्षण के लिए आपसी सहमति द्वारा या आपस में किसी अन्य प्रक्रिया द्वारा संदिग्ध समझे जाने वाले संबंधित विषयों की बाबत अनुपालन के संबंध में उत्पन्न संदेह या चिन्ता को स्पष्ट करने या समाधान करने की व्यवस्था के अधिकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । ऐसी व्यवस्था, इस अभिसमय के अन्य उपबंधों के अधीन किसी पक्षकार राज्य के अधिकारों और दायित्वों को प्रभावित नहीं करेगी ।
स्पष्टीकरण के अनुरोध की प्रक्रिया :
3. पक्षकार राज्य को यह अधिकार होगा कि वह संदिग्ध समझी जाने वाली किसी स्थिति को या किसी ऐसी स्थिति को जो अन्य पक्षकार राज्य द्वारा इस अभिसमय के संभाव्य अननुपालन के विषय में चिन्ता उत्पन्न करे, स्पष्ट करने में सहायता के लिए कार्य परिषद् से अनुरोध करे । कार्य परिषद् उसके पास उपलब्ध ऐसी चिन्ता से सुसंगत उपयुक्त जानकारी प्रदान करेगी ।
4. पक्षकार राज्य को यह अधिकार होगा कि वह संदिग्ध समझी जाने वाली किसी स्थिति को या किसी ऐसी स्थिति को, जो अन्य पक्षकार राज्य द्वारा इस अभिसमय के संभाव्य अननुपालन के विषय में चिन्ता उत्पन्न करे, अन्य पक्षकार राज्य से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए कार्य परिषद् से अनुरोध करे । ऐसी स्थिति में निम्नलिखित लागू होगा :
(क) कार्य परिषद्, स्पष्टीकरण के लिए अनुरोध को, उसकी प्राप्ति के घंटे 24 के अपश्चात् महानिदेशक के माध्यम से संबंधित पक्षकार राज्य को अग्रेषित करेगा ;
(ख) ऐसे पक्षकार राज्य जिससे अनुरोध किया गया है, यथासंभवशीघ्र किन्तु किसी भी स्थिति में अनुरोध प्राप्त होने के 10 दिन के अपश्चात् कार्य परिषद् को स्पष्टीकरण प्रदान करेगा ;
(ग) कार्य परिषद् स्पष्टीकरण पर विचार करेगी और उसे प्राप्त होने के 24 घंटे के अपश्चात् अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य को अग्रेषित करेगी ;
(घ) यदि अनुरोध करने वाला पक्षकार राज्य स्पष्टीकरण को अपर्याप्त समझता है तो उसे यह अधिकार होगा कि वह अनुरोध किए जाने वाले पक्षकार राज्य से और स्पष्टीकरण के लिए कार्य परिषद् को अनुरोध करे ;
(ङ) उपपैरा (घ) में मांगे गए और स्पष्टीकरण को प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए कार्य परिषद् तकनीकी सचिवालय से या यदि तकनीकी सचिवालय में समुचित कर्मचारिवृन्द उपलब्ध न हो तो कहीं और से विशेषज्ञों का समूह स्थापित करने के लिए कह सकेगी, जो चिन्ता का कारण बनी स्थिति से सुसंगत उपलब्ध जानकारी और आंकड़ों की समीक्षा करेगा । विशेषज्ञों का समूह अपने निष्कर्षों पर कार्य परिषद् को तथ्यपरक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ;
(च) यदि अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य के विचार में उपपैरा (घ) और उपपैरा (ङ) के अधीन प्राप्त स्पष्टीकरण असमाधानप्रद है, तो उसे कार्य परिषद् का विशेष सत्र बुलाने के लिए अनुरोध करने का अधिकार होगा और इस सत्र में ऐसे अन्तर्वलित पक्षकार राज्य जो कार्य परिषद् के सदस्य नहीं हैं, भाग लेने के हकदार होंगे । ऐसे विशेष सत्र में कार्य परिषद् मामले पर विचार करेगी और ऐसे उपायों की सिफारिश कर सकेगी जो वह उक्त स्थिति का समाधान करने के लिए उपयुक्त समझे ।
5. पक्षकार राज्य को यह भी अधिकार होगा कि वह किसी ऐसी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए जिसे संदिग्ध माना गया है या जिसके इस अभिसमय के संभाव्य अननुपालन के संबंध में चिन्ता को जन्म दिया है, कार्य परिषद् से अनुरोध करे । कार्य परिषद् उपयुक्त सहायता प्रदान करते हुए उसका जवाब देगी ।
6. कार्य परिषद् इस अनुच्छेद में उपबंधित स्पष्टीकरण के किसी भी अनुरोध के बारे में पक्षकार राज्यों को सूचित करेगी ।
7. यदि किसी पक्षकार राज्य के संभाव्य अननुपालन की बाबत किसी संदेह या चिन्ता का समाधान, कार्य परिषद् को, स्पष्टीकरण के लिए अनुरोध प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् 60 दिन के भीतर नहीं होता है या उसके विचार में उसके संदेह अत्यावश्यक विचारण चाहते हैं तो, आक्षेप निरीक्षण के लिए अनुरोध का अधिकार होते हुए भी वह अनुच्छेद 8, पैरा 12 (ग) के अनुसार सम्मेलन के विशेष सत्र के लिए अनुरोध कर सकेगा । ऐसे विशेष सत्र में सम्मेलन मामले पर विचार करेगा और ऐसे उपाय की सिफारिश कर सकेगा जिसे वह इस स्थिति का समाधान करने के लिए समुचित समझे ।
आक्षेप निरीक्षणों के लिए प्रक्रिया :
8. प्रत्येक पक्षकार राज्य को इस अभिसमय के उपबंधों के संभाव्य अननुपालन से संबंधित किन्हीं प्रश्नों को स्पष्ट करने और हल करने के एकमात्र प्रयोजन के लिए राज्यक्षेत्र में या किसी अन्य पक्षकार राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान में किसी प्रसुविधा या अवस्थान का स्थल पर आक्षेप निरीक्षण करने का और यह निरीक्षण महानिदेशक द्वारा पदाभिहित किसी निरीक्षण दल द्वारा और सत्यापन उपाबन्ध के अनुसार बिना विलम्ब कहीं पर निरीक्षण कराने का अनुरोध करने का अधिकार है ।
9. प्रत्येक पक्षकार राज्य निरीक्षण अनुरोध को इस अभिसमय के क्षेत्र के भीतर रखने और निरीक्षण अनुरोध में ऐसी सभी समुचित जानकारी देने की बाध्यता के अधीन हैं, जिनके आधार पर सत्यापन उपाबन्ध में यथा विनिर्दिष्ट इस अभिसमय के संभाव्य अननुपालन की बाबत चिन्ता उद्भूत हुई है । प्रत्येक पक्षकार राज्य निराधार निरीक्षण अनुरोधों से बचेगा, सावधानी दुरुपयोग से बचने के लिए की जा रही है । आक्षेप निरीक्षण, संभाव्य अननुपालन से संबंधित तथ्यों के अवधारण के एक मात्र उपयोजन के लिए किया जाएगा ।
10. इस अभिसमय के उपबंधों के अनुपालन के सत्यापन के प्रयोजन के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य पैरा 8 के अनुसरण में स्थल पर आक्षेप निरीक्षण करने के लिए तकनीकी सचिवालय को अनुज्ञा देगा ।
11. किसी प्रसुविधा या अवस्थान के आक्षेप निरीक्षण के लिए अनुरोध के अनुसरण में और सत्यापन उपाबन्ध में उपबंधित प्रक्रियाओं के अनुसार निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य के पास निम्नलिखित अधिकार और दायित्व होंगे :-
(क) इस अभिसमय का अनुपालन प्रदर्शित करने के लिए प्रत्येक उचित प्रयास करने का अधिकार और दायित्व तथा इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए निरीक्षण दल को अपने आदेश की पूर्ति करने के लिए समर्थ बनाना ;
(ख) संभाव्य अननुपालन की बाबत चिन्ता से सुसंगत तथ्यों को स्थापित करने के एक मात्र प्रयोजन के लिए अनुरोध किए गए स्थल के भीतर पहुंच का उपबन्ध करने का दायित्व; और
(ग) संवेदनशील स्थापनों के संरक्षण के उपाय करने और गोपनीय जानकारी तथा आंकड़े जो इस अभिसमय से सम्बद्ध नहीं हैं, के प्रकटीकरण का अधिकार ।
12. किसी प्रेक्षक की बाबत निम्नलिखित लागू होगा :-
(क) अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य, निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य के करार के अधीन रहते हुए, एक प्रतिनिधि भेज सकेगा, जो आक्षेप निरीक्षण के संचालन को देखेगा और जो अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य का या किसी तीसरे पक्षकार राज्य का राष्ट्रिक हो सकेगा ;
(ख) निरीक्षण किया गया पक्षकार राज्य तब प्रेक्षक को सत्यापन उपाबन्ध के अनुसार पहुंच प्रदान करेगा ;
(ग) निरीक्षण किया गया पक्षकार राज्य, एक नियम के रूप में, प्रस्तावित प्रेक्षक को स्वीकार करेगा, किन्तु यदि निरीक्षण किया गया पक्षकार राज्य इंकार करता है तो यह तथ्य अन्तिम रिपोर्ट में अभिलिखित किया जाएगा ।
13. अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य स्थल पर आक्षेप निरीक्षण के लिए कार्य परिषद् को और उसी के साथ तत्काल कार्य किए जाने के लिए महानिदेशक को निरीक्षण अनुरोध प्रस्तुत करेगा ।
14. महानिदेशक तत्काल यह सुनिश्चित करेगा कि निरीक्षण अनुरोध सत्यापन उपाबन्ध के भाग 10, पैरा 4 में विनिर्दिष्ट अपेक्षाओं को पूरा करता है और यदि आवश्यक हो तो अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य की तद्नुसार निरीक्षण अनुरोध को फाइल करने में सहायता करेगा । जब निरीक्षण अनुरोध अपेक्षाओं को पूरा कर देता है तब आक्षेप निरीक्षण के लिए तैयारियां आरम्भ होंगी ।
15. महानिदेशक निरीक्षण अनुरोध को, निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य के पास प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल की संभावित पहुंच से कम से कम 12 घंटे पूर्व प्रेषित करेगा ।
16. निरीक्षण अनुरोध प्राप्त हो जाने के पश्चात् कार्य परिषद्, अनुरोध पर महानिदेशक की कार्रवाइयों का संज्ञान करेगी और उस मामले को संपूर्ण निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अपने विचाराधीन रखेगी । तथापि, इसके विचार-विमर्श निरीक्षण प्रक्रिया में विलम्ब नहीं करेंगे ।
17. कार्य परिषद् निरीक्षण अनुरोध प्राप्त हो जाने के पश्चात्, 12 घंटे के अपश्चात् अपने सभी सदस्यों के तीन चौथाई बहुमत द्वारा तब आक्षेप निरीक्षण कराने के विरुद्ध विनिश्चय कर सकेगी जब वह ऐसा समझती है कि निरीक्षण अनुरोध तुच्छ, दुरुपयोगी या पैरा 8 में यथावर्णित इस अभिसमय के विस्तार से स्पष्ट रूप से परे है । अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य और निरीक्षण किया गया पक्षकार राज्य ऐसे विनिश्चय में भाग नहीं लेंगे । यदि कार्य परिषद् आक्षेप निरीक्षण के विरोध में विनिश्चय करती है तो तैयारियां बन्द कर दी जाएंगी, निरीक्षण अनुरोध पर आगे कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और सम्बद्ध पक्षकार राज्यों को तद्नुसार सूचित किया जाएगा ।
18. महानिदेशक आक्षेप निरीक्षण कराने के लिए एक निरीक्षण आदेश जारी करेगा । निरीक्षण आदेश ऊपर पैरा 8 और पैरा 9 में वर्णित निरीक्षण अनुरोध होगा और प्रवर्तन निबन्धनों के अनुसार होगा और निरीक्षण अनुरोध के अनुरूप होगा ।
19. आक्षेप निरीक्षण सत्यापन उपाबन्ध के भाग 10 के अनुसार अथवा अभिकथित उपयोग की दशा में सत्यापन उपाबन्ध के भाग 11 के अनुसार किया जाएगा । निरीक्षण दल अपने मिशन के प्रभावी और सामयिक पूरा होने से सुसंगत रंचमात्र संभावित अन्तर के बिना आक्षेप निरीक्षण करने के सिद्धान्त द्वारा मार्गदर्शित होगा ।
20. निरीक्षित पक्षकार राज्य, सम्पूर्ण आक्षेप निरीक्षण के दौरान निरीक्षण दल की सहायता करेगा और उसके कार्य को सुकर बनाएगा । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य, सत्यापन उपाबंध के भाग 10, खण्ड (ग) के अनुसरण में इस अभिसमय के अनुपालन को प्रदर्शित करने के इंतजामों, पूर्ण और व्यापक पहुंच के विकल्प का प्रस्ताव करता है तो वह निरीक्षण दल के साथ विचार-विमर्श करके इसका अनुपालन प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तथ्यों को स्थापित करने के लिए रूपात्मकताओं के बारे में किसी सहमति पर पहुंचने के लिए प्रत्येक युक्तियुक्त प्रयास करेगा ।
21. अन्तिम रिपोर्ट में तथ्यपरक निष्कर्ष और साथ ही निरीक्षण दल द्वारा पहुंच की प्रमात्रा और प्रकृति का निर्धारण तथा आक्षेप निरीक्षण के समाधानप्रद कार्यान्वयन के लिए अनुदत्त सहयोग समाविष्ट होगा । महानिदेशक, निरीक्षण दल की अन्तिम रिपोर्ट तुरन्त अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य को, निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य को, कार्य परिषद् को और सभी अन्य राज्य पक्षकारों को संप्रेषित करेगा । महानिदेशक अनुरोधकर्ता तथा निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्यों के निर्धारण और साथ ही साथ उन अन्य पक्षकार राज्यों के विचार भी जो उस प्रयोजन के लिए महानिदेशक को प्रेषित किए जा सकेंगे, कार्य परिषद् को तत्काल संप्रेषित करेगा और फिर उन्हें सभी पक्षकार राज्यों को उपलभ्य कराएगा ।
22. कार्य परिषद्, अपनी शक्तियों और कृत्यों के अनुसार, निरीक्षण दल की अन्तिम रिपोर्ट का, जैसे वह उसे प्रस्तुत की जाती है, पुनर्विलोकन करेगी और निम्नलिखित बातों पर ध्यान देगी-
(क) क्या कोई अननुपालन हुआ है ;
(ख) क्या अनुरोध इस अभिसमय के कार्यक्षेत्र के भीतर किया गया था; और
(ग) क्या आपेक्ष निरीक्षण के अनुरोध के अधिकार का दुरुपयोग किया गया था ।
23. यदि कार्य परिषद् अपनी शक्तियों और कृत्यों को ध्यान में रखते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि पैरा 22 के संबंध में आगे कार्रवाई आवश्यक हो सकती है तो वह स्थिति के सुधार के लिए और इस अभिसमय का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, जिसके अन्तर्गत सम्मेलन को की जाने वाली विनिर्दिष्ट सिफारिशें भी हैं, समुचित उपाय करेगी । दुरुपयोग की दशा में कार्य परिषद् यह जांच करेगी कि क्या अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य को आक्षेप निरीक्षण की किन्हीं वित्तीय विवक्षाओं को वहन करना चाहिए ।
24. अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य और निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य को पुनर्विलोकन प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार होगा । कार्य परिषद् पक्षकार राज्यों को और सम्मलेन के अगले सत्र को प्रक्रिया के परिणाम की सूचना देगी ।
25. यदि कार्य परिषद् ने सम्मेलन को विनिर्दिष्ट सिफारिशें की हैं तो सम्मेलन अनुच्छेद 12 के अनुसार कार्रवाई करने पर विचार करेगा ।
अनुच्छेद 10
रासायनिक आयुधों के विरुद्ध सहायता और संरक्षण
1. इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए, सहायता" से रासायनिक आयुधों के विरुद्ध संरक्षण के पक्षकार राज्यों से समन्वयन, और परिदान अभिप्रेत है, जिसके अन्तर्गत अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित खोज उपस्कर और अलार्म पद्धतियां, संरक्षी उपस्कर, विसंदूषण उपस्कर और विसंदूषक; चिकित्सीय, एंटीडाट्स और अभिक्रियाएं; तथा इन संरक्षी उपायों में से किसी पर सलाह भी है ।
2. इस अभिसमय की किसी बात का यह निर्वचन नहीं किया जाएगा कि वह किसी पक्षकार राज्य के उन प्रयोजनों के लिए जो इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं है, किन्हीं रासायनिक आयुधों में अनुसंधान करने, उनका विकास करने, उत्पादन करने, अर्जन करने, अन्तरण या संरक्षण के साधनों का उपयोग करने के अधिकार में अड़चन डाल रहा है ।
3. प्रत्येक पक्षकार राज्य रासायनिक आयुधों के विरुद्ध संरक्षण के साधनों से संबंधित उपस्कर, सामग्री तथा वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक जानकारी के पूर्ण संभाव्य विनियम को सुकर बनाने का वचन देता है और उसे उनमें भाग लेने का अधिकार होगा ।
4. संरक्षी प्रयोजनों से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों की पारदर्शिता के अभिवर्धन के प्रयोजनों के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य अपने कार्यक्रमों के संबंध में, अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार और अनुमोदित की गई प्रक्रियाओं के अनुसार तकनीकी सचिवालय को वार्षिक जानकारी प्रदान करेगा ।
5. तकनीकी सचिवालय इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 180 दिन के अपश्चात् किसी अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य के उपयोग के लिए एक डाटा (आंकड़ा) बैंक स्थापित करेगा और रासायनिक आयुधों के विरुद्ध संरक्षण के विभिन्न उपायों से संबंधित जानकारी और साथ ही ऐसी जानकारी जो पक्षकार राज्यों द्वारा दी जाए, निर्बाध रूप से उपलब्ध कराएगा ।
तकनीकी सचिवालय, उसे उपलभ्य संसाधनों के भीतर और किसी पक्षकार राज्य के अनुरोध पर विशेषज्ञ सलाह भी प्रदान करेगा और पक्षकार राज्य की यह पहचान करने में सहायता करेगा कि रासायनिक आयुधों के विरुद्ध संरक्षी हैसियत के विकास और उन्नयन के लिए कार्यक्रमों को कैसे कार्यान्वित किया जा सकता है ।
6. इस अभिसमय की किसी बात का यह निर्वचन नहीं किया जाएगा कि वह किसी पक्षकार राज्य के अनुरोध के अधिकार पर और द्विपक्षीय रूप से सहायता की व्यवस्था पर और अन्य पक्षकार राज्यों के साथ सहायता की आपात उपाप्ति से संबंधित व्यक्तिगत करार करने में अड़चन है ।
7. प्रत्येक पक्षकार राज्य संगठन के माध्यम से सहायता प्रदान करने का और इस उद्देश्य से निम्नलिखित एक या अधिक उपायों का चयन करने का वचन देता है :-
(क) सम्मेलन द्वारा उसके पहले अधिवेशन में स्थापित की जाने वाली सहायता के लिए स्वैच्छिक निधि में अभिदाय करना ;
(ख) यदि संभव हो तो इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 180 दिन के भीतर मांग पर, सहायता की उपाप्ति से संबंधित संगठन के साथ करारों को अंतिम रूप देना ;
(ग) इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 180 दिन के अपश्चात् सहायता की वह किस्म घोषित करना जो वह संगठन द्वारा की गई अपील के प्रत्युत्तर में प्रदान कर सकेगा । तथापि, यदि कोई पक्षकार राज्य तत्पश्चात् अपनी घोषणा में अभिकल्पित सहायता प्रदान करने में असमर्थ होता है तो भी वह इस पैरा के अनुसार सहायता देने की बाध्यता के अधीन रहेगा ।
8. प्रत्येक पक्षकार राज्य रासायनिक आयुधों के उपयोग या उपयोग की धमकी के विरुद्ध सहायता और संरक्षण के लिए अनुरोध करने और पैरा 9, पैरा 10 और पैरा 11 में वर्णित प्रक्रियाओं के अधीन रहते हुए सहायता और संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार रखता है, यदि वह ऐसा समझता है कि :-
(क) उसके विरुद्ध रासायनिक आयुधों का उपयोग किया गया है ;
(ख) युद्ध की एक पद्धति के रूप में उसके विरुद्ध बलवा नियंत्रण अभिकारकों का उपयोग किया गया है; या
(ग) किसी ऐसे राज्य के ऐसे कार्यों या गतिविधियों द्वारा, जो अनुच्छेद 1 द्वारा पक्षकार राज्यों के लिए प्रतिषिद्ध है, उसे धमकी दी गई है ।
9. सुसंगत जानकारी द्वारा समर्थित अनुरोध महानिदेशक को पेश किया जाएगा जो इसे तत्काल कार्य परिषद् को और सभी पक्षकार राज्यों को संप्रेषित करेगा । महानिदेशक तत्काल वह अनुरोध उन पक्षकार राज्यों को जिन्होंने स्वेच्छया सहमति दी है, पैरा 7 (ख) और पैरा 7(ग) के अनुसार अनुरोध की प्राप्ति के पश्चात् 12 घंटे के अपश्चात् संबद्ध पक्षकार राज्य को रासायनिक आयुधों के प्रयोग की दशा में या युद्ध की एक पद्धति के रूप में बलवा नियंत्रण अभिकारकों के उपयोग की दशा में या रासायनिक आयुधों के उपयोग की गंभीर धमकी की दशा में या युद्ध की एक पद्धति के रूप में बलवा नियंत्रण अभिकारकों के उपयोग की गंभीर धमकी की दशा में मानवीय आधार पर सहायता के लिए आपात सहायता भेजने के लिए उसे संप्रेषित करेगा । महानिदेशक, अनुरोध की प्राप्ति के पश्चात्, 24 घन्टे के अपश्चात्, आगे कार्रवाई के लिए आधार प्रदान करने के क्रम में अन्वेषण आरम्भ करेगा । वह यह अन्वेषण 72 घंटे के भीतर पूरा करेगा और कार्य परिषद् को एक रिपोर्ट अग्रेषित करेगा । यदि अन्वेषण को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय अपेक्षित है तो उसी समय-सीमा के भीतर एक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी । अन्वेषण के लिए अपेक्षित अतिरिक्त समय 72 घंटे से अधिक का नहीं होगा । किन्तु इस समय-सीमा को ऐसी ही अवधियों के लिए और बढ़ाया जा सकता है । प्रत्येक अतिरिक्त अवधि की समाप्ति पर कार्य परिषद् को रिपोर्टें प्रस्तुत की जाएंगी । अन्वेषण, अनुरोध और अनुरोध के साथ दी गई जानकारी के लिए समुचित और अनुरूप होते हुए, अनुरोध से संबंधित संगत तथ्यों और साथ ही अनुपूरक सहायता की किस्म और विस्तार और आवश्यक संरक्षण से संगत तथ्य स्थापित करेगा ।
10. कार्य परिषद् स्थिति पर विचार करने के लिए अन्वेषण रिपोर्ट के प्राप्त होने के पश्चात् 24 घंटे के भीतर बैठक करेगी और अगले 24 घंटे के भीतर साधारण बहुमत द्वारा यह विनिश्चय करेगी कि क्या तकनीकी सचिवालय को अनुपूरक सहायता देने के लिए अनुदेश दिए जाएं । तकनीकी सचिवालय, अन्वेषण रिपोर्ट और कार्य परिषद् द्वारा किए गए विनिश्चय सभी पक्षकारों राज्यों और सुसंगत अन्तरराष्ट्रीय संगठनों को तत्काल संप्रेषित करेगा । जब कार्य परिषद् द्वारा ऐसा विनिश्चय किया जाए तब महानिदेशक तत्काल सहायता की व्यवस्था करेगा । इस प्रयोजन के लिए महानिदेशक, अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य, अन्य पक्षकार राज्यों और सुसंगत अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग कर सकेगा । पक्षकार राज्य सहायता प्रदान करने के लिए सभी संभव प्रयास करेंगे ।
11. यदि चल रहे अन्वेषण से या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से उपलभ्य जानकारी से पर्याप्त सबूत मिल जाता है, कि रासायनिक आयुधों के उपयोग से पीड़ित व्यक्ति है और तत्काल कार्रवाई अपरिहार्य है तो महानिदेशक सभी पक्षकार राज्यों को अधिसूचित करेगा और उन संसाधनों का उपयोग करते हुए जो ऐसी आकस्मिक स्थितियों के लिए सम्मेलन द्वारा उसके अधिकार में रखे गए हैं, सहायता के आपात उपाय करेगा । महानिदेशक इस पैरा के अनुसरण में की गई कार्यवाहियों से कार्य परिषद् को सूचित रखेगा ।
अनुच्छेद 11
आर्थिक और प्रौद्योगिकी विकास
1. इस अभिसमय के उपबंधों को ऐसी रीति से कार्यान्वित किया जाएगा जो पक्षकार राज्यों के आर्थिक या प्रौद्योगिक विकास तथा इस अभिसमय द्वारा प्रतिषिद्ध न किए गए रासायनिक क्रियाकलापों के क्षेत्र में, जिनके अन्तर्गत वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी का अन्तरराष्ट्रीय विनिमय और इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए रसायनों के उत्पादन, प्रसंस्करण या उपयोग के लिए और रसायन तथा उपस्कर के अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर प्रभाव न डाले ।
2. इस अभिसमय के उपबंधों के अधीन रहते हुए और अन्तरराष्ट्रीय विधि के सिद्धांतों और लागू नियमों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पक्षकार राज्यों :-
(क) को व्यष्टिक या सामूहिक रूप से रसायनों का विकास, उत्पाद, अर्जन, प्रतिधारण, अंतरण और उपयोग करने के लिए अनुसंधान करने का अधिकार होगा ;
(ख) को इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए रसायन शास्त्र के विकास और उपयोजन से संबंधित रसायनों, उपस्कर और वैज्ञानिक तथा तकनीकी जानकारी के पूर्ण संभव विनिमय को सुकर बनाने का वचन देने और उसे उसमें भाग लेने का अधिकार होगा ;
(ग) इस अभिसमय के अधीन लिए गए दायित्वों से भिन्न कोई ऐसे निर्बन्धन जिनके अन्तर्गत अंतरराष्ट्रीय करारों के निर्बन्धन भी हैं, अपने बीच नहीं रखेगा जो औद्योगिक, कृषि, अनुसंधान, चिकित्सा, भेषज निर्माण या अन्य शांतिपूर्ण प्रयोजनों के लिए रसायन शास्त्र के क्षेत्र में व्यापार और वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक ज्ञान के विकास और उन्नयन को निर्बन्धित करे या उन्हें कम करे ;
(घ) इस अभिसमय के अधीन उपबंधित या अनुज्ञात उपायों से भिन्न किसी उपाय के उपयोजन के लिए इस अभिसमय का आधार के रूप में प्रयोग नहीं करेगा और इस अभिसमय से अंसगत किसी उद्देश्य के अनुसरण के लिए किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय करार का उपयोग नहीं करेगा ;
(ङ) इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन से संगत बनाने के लिए रसायनों के व्यापार के क्षेत्र में अपने विद्यमान राष्ट्रीय विनियमों का पुनर्विलोकन करेगा ।
अनुच्छेद 12
किसी स्थिति के प्रतितोष और अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उपाय जिसमें मंजूरियां भी हैं
1. सम्मेलन इस अभिसमय का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए और किसी ऐसी स्थिति के प्रतितोष और उपचार के लिए, जो इस अभिसमय के उपबंधों का उल्लंघन करती है, पैरा 2, 3 और 4 में वर्णित आवश्यक उपाय करेगा । इस पैरा के अनुसरण में की जाने वाली कार्यवाही पर विचार करते समय सम्मेलन कार्य परिषद् द्वारा प्रस्तुत किए गए विवाद्यकों पर संपूर्ण जानकारी और सिफारिशों को गणना में लेगा ।
2. उन दशाओं में जब किसी पक्षकार राज्य से कार्य परिषद् द्वारा ऐसी स्थिति के जो इसके अनुपालन की बाबत समस्याएं उत्पन्न कर रही है, प्रतितोष का अनुरोध किया जाता है और जहां पक्षकार राज्य विनिर्दिष्ट समय के भीतर अनुरोध को पूरा करने में असफल रहता है तो सम्मेलन अन्य बातों से साथ-साथ कार्य परिषद् की सिफारिश पर उस पक्षकार राज्य के इस अभिसमय के अधीन अधिकारों और विशेषाधिकारों को तब तक के लिए निलंबित या निर्बंधित कर सकेगा जब तक कि वह इस अभिसमय के अधीन अपने दायित्वों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई नहीं करता है ।
3. उन दशाओं में जहां इस अभिसमय के अधीन, विशिष्टतया अनुच्छेद 1 द्वारा प्रतिषिद्ध क्रियाकलापों से इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन को गंभीर नुकसान होता है, सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुरूप पक्षकार राज्यों से सामूहिक उपाय करने की सिफारिश कर सकेगा ।
4. सम्मेलन किन्हीं विशिष्ट गंभीर मामलों में विवाद्यक को जिसके अंतर्गत संगत जानकारी और निष्कर्ष भी है, संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के ध्यान में लाएगा ।
अनुच्छेद 13
अन्य अन्तरराष्ट्रीय करारों से संबंध
इस अभिसमय की किसी बात का यह निर्वचन नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी राज्य द्वारा 17 जून, 1925 को जेनेवा में हस्ताक्षरित प्रोटोकाल फार दि प्रोहिबिशन आफ दि वार आफ एस्फिकसिएटिंग, पायजंस आर अदर गैसिस, एण्ड आफ बैकटीरियोलाजिकल मैथड्स आफ वार फेयर तथा 10 अप्रैल 1972 को लंदन, मास्को और वाशिंगटन में हस्ताक्षित कन्वैंशन आन दि प्रोहिबिशन आफ दि डेवलपमेंट, प्रोडक्शन एंड स्टाकपाइलिंग आफ बैकटीरियोलाजिकल (बायोलोजिकल) एंड टाक्सिन वीपन एंड आन देयर डेस्ट्रक्शन द्वारा किए गए दायित्वों को किसी प्रकार सीमित या कम करती है ।
अनुच्छेद 14
विवादों का निपटारा
1. ऐसे विवादों का, जो इस अभिसमय के उपयोजन या निर्वचन के संबंध में उद्भूत हों, निपटारा इस अभिसमय के सुसंगत उपबंधों के अनुसार और संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के उबपंधों के अनुरूप किया जाएगा ।
2. जब दो या अधिक पक्षकार राज्यों के बीच या एक या अधिक पक्षकार राज्यों तथा संगठन के बीच इस अभिसमय के निर्वचन या उपयोजन से संबंधित कोई विवाद उद्भूत होता है वहां संबंधित पक्षकार विवाद के शीघ्र निपटारे की दृष्टि से विवाद को बातचीत द्वारा या पक्षकारों की पसंद के अनुसार अन्य शांतिपूर्ण तरीके से जिसके अंतर्गत इस अभिसमय के समुचित अंगों का अवलंब भी है और परस्पर सहमति द्वारा न्यायालय के कानूनों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को निर्देशित करके किया जाएगा । अन्तर्वलित पक्षकार राज्य कार्य परिषद् को की गई कार्यवाही के बारे में सूचित रखेंगे ।
3. संशोधन, अनुसमर्थन लिखत को निक्षेप करने के या निम्नलिखित उपपैरा (ख) में निर्दिष्ट सभी पक्षकार राज्यों द्वारा स्वीकृत किए जाने के तीस दिन के पश्चात् प्रवृत्त हो जाएंगे :-
(क) जब उसका संशोधन सम्मेलन द्वारा सभी पक्षकार राज्यों के बहुमत के सकारात्मक मत द्वारा जहां किसी पक्षकार द्वारा नकारात्मक मतदान किया गया हो, अंगीकार किया गया है ;
(ख) संशोधन सम्मेलन में सभी उन पक्षकार राज्यों द्वारा उसका अनुसमर्थन कर दिया गया है या उसे स्वीकार कर लिया गया है जिन्होंने सकारात्मक मतदान किया था ।
4. सम्मेलन पक्षकार राज्यों द्वारा उठाए गए विवादों से या कार्य परिषद् द्वारा उसके ध्यान में लाए गए विवादों से संबंधित प्रश्नों पर विचार करेगा । सम्मेलन यदि वह आवश्यक पाता है तो अनुच्छेद 8, पैरा 21(च) के अनुरूप इन विवादों के निपटारे से संबंधित कार्य के लिए अंतःस्थापित करेगा या उसे न्यस्त करेगा ।
5. सम्मेलन और कार्य परिषद्, संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के प्राधिकार के अधीन रहते हुए पृथक् रूप से सशक्त हैं कि वे संगठन के क्रियाकलापों की सीमा के अंदर उद्भूत होने वाले किसी विधिक प्रश्न पर परामर्श संबंधी राय देने के लिए अंतराष्ट्रीय न्यायालय से अनुरोध करें । संगठन और संयुक्त राष्ट्र संघ के बीच कोई करार अनुच्छेद 8, पैरा 34 (क) के अनुसार इस प्रयोजन के लिए निष्पादित किया जाएगा ।
6. यह अनुच्छेद, अनुच्छेद 9 या ऐसी स्थिति के उपचार के प्रतितोष के उपायों के लिए उपबंधों और अनुपालन सुनिश्चित करने जिसके अंतर्गत मंजूरी भी है, पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा ।
अनुच्छेद 15
संशोधन
1. कोई पक्षकार राज्य इस अभिसमय में संशोधन का प्रस्ताव कर सकता है । कोई पक्षकार राज्य इस अभिसमय के उपबंधों के पैरा 4 में यथाविर्निष्ट परिवर्तनों का प्रस्ताव भी कर सकेगा । संशोधनों के लिए प्रस्ताव पैरा 2 और 3 में प्रक्रिया के अध्यधीन होंगे । परिवर्तनों के लिए प्रस्ताव जैसा पैरा 4 में विनिर्दिष्ट है, पैरा 5 में प्रक्रिया के अध्यधीन होंगे ।
2. प्रस्तावित संशोधन का पाठ सभी पक्षकार राज्यों और निक्षेपागार को परिचालन के लिए महानिदेशक को प्रस्तुत किया जाएगा । प्रस्तावित संशोधन पर केवल संशोधन सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा । ऐसा संशोधन सम्मेलन तभी बुलाया जाएगा जब एक तिहाई या अधिक पक्षकार राज्य इसके परिचालन के पश्चात् 30 दिन की अवधि के अपश्चात् महानिदेशक को यह अधिसूचित करे कि वे प्रस्ताव पर आगे विचार का समर्थन करते हैं । संशोधन सम्मेलन, सम्मेलन के नियमित सत्र के तत्काल बाद आयोजित किया जाएगा जब तक अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य इससे पूर्वतर बैठक के लिए न कहें । किसी भी दशा में संशोधन सम्मेलन प्रस्तावित संशोधन के परिचालन के पश्चात् साठ दिन से कम अवधि के भीतर आयोजित नहीं किया जाएगा ।
3. कार्य परिषद् विवादों का ऐसे किसी उपाय से जो वह समुचित समझे जिसके अंतर्गत अपने सत्प्रयत्नों के उपयोग की प्रस्थापना, पक्षकार राज्यों को अपने पंसद की समझौता प्रक्रिया प्रारंभ करके विवादों का निपटारा करने के लिए आहूत करना और किसी करार पाई गई प्रक्रिया के लिए समय-सीमा की सिफारिश भी है, विवादों के निपटारे में अंशदान करेगी-
(क) जब उसका संशोधन सम्मेलन द्वारा सभी पक्षकार राज्यों के बहुमत के सकारात्मक मत द्वारा जहां किसी पक्षकार द्वारा नकारात्मक मतदान किया गया हो, अंगीकार किया गया है ;
(ख) संशोधन सम्मेलन में सभी उन पक्षकार राज्यों द्वारा उसका अनुसमर्थन कर दिया गया है या उसे स्वीकार कर लिया गया है जिन्होंने सकारात्मक मतदान किया था ।
4. इस अभिसमय की व्यवहार्यता और प्रभाविकता सुनिश्चित करने की दृष्टि से उपाबंधों के उपबंध पैरा 55 के अनुसार परिवर्तनों के अध्यधीन होंगे यदि प्रस्तावित परिवर्तन प्रशासनिक या तकनीकी प्रकृति के विषयों से संबंधित हों । रसायनों के बारे में उपबंधों में सभी परिवर्तन पैरा 5 के अनुसार किए जाएंगे । गोपनीयता उपबंध के अनुभाग (क) और (ग) सत्यापन उपाबंध के भाग 10 में और सत्यापन उपाबंध के भाग 1 में वे परिभाषाएं जो अनन्य रूप से आक्षेप निरीक्षण से संबंधित हैं, पैरा 5 के अनुसार परिवर्तनों के अध्यधीन नहीं होगी ।
5. पैरा 4 में निर्दिष्ट प्रस्तावित परिवर्तन निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार होंगे :-
(क) प्रस्तावित परिवर्तनों का पाठ, आवश्यक जानकारी के साथ महानिदेशक को संप्रेषित किया जाएगा । प्रस्ताव के मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त जानकारी किसी पक्षकार राज्य और महानिदेशक द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी । महानिदेशक ऐसे किसी प्रस्ताव और जानकारी को सभी राज्य पक्षकारों, कार्य परिषद् और निक्षेपागार को तत्परता से सूचित करेगा ;
(ख) इसकी प्राप्ति के 60 दिन के अपश्चात् महानिदेशक इस अभिसमय के उपबंधों और इसके क्रियान्वयन के लिए सभी संभावित परिणामों का अवधारण करके प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगा और ऐसी जानकारी सभी पक्षकार राज्यों और कार्य परिषद् को संसूचित करेगा ;
(ग) कार्य परिषद् उसके पास उपलब्ध सभी सूचना के प्रकाश में जिसके अन्तर्गत यह भी है कि प्रस्ताव पैरा 4 की अपेक्षाओं को पूरा करता है या नहीं, प्रस्ताव की परीक्षा करेगी । कार्य परिषद् इसकी प्राप्ति के नब्बे दिन के अपश्चात् सभी पक्षकार राज्यों को समुचित स्पष्टीकरण के साथ अपनी सिफारिशें विचार के लिए अधिसूचित करेगी । पक्षकार राज्य 10 दिन के भीतर पावती की अभिस्वीकृति देगा ;
(घ) यदि कार्य परिषद् सभी पक्षकार राज्यों को सिफारिश करती है कि प्रस्ताव को अंगीकृत कर लिया जाए, यदि सिफारिश की पावती के पश्चात् 90 दिन के भीतर कोई राज्य पक्षकार इस पर आक्षेप नहीं करता तो यह अनुमोदित समझ लिया जाएगा । यदि कार्य परिषद् सिफारिश करती है कि प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया जाए तो यह तब नामंजूर समझा जाएगा जब सिफारिश की प्राप्ति के पश्चात् 90 दिन के भीतर कोई पक्षकार राज्य नामंजूरी के प्रति आक्षेप नहीं करता ;
(ङ) यदि कार्य परिषद् की सिफारिशें उपपैरा (ख) के अधीन अपेक्षित स्वीकृति को पूरा नहीं करती है तो प्रस्ताव पर विनिश्चय जिसके अन्तर्गत यह भी है कि क्या यह पैरा 4 की अपेक्षाओं को पूरा करता है, सम्मेलन द्वारा इसके आगामी सत्र में सारभूत विषय के रूप में लिया जाएगा ;
(च) महानिदेशक सभी पक्षकार राज्यों और निक्षेपागार को इस पैरा के अधीन किसी विनिश्चय से अधिसूचित करेगा ;
(छ) इस प्रक्रिया के अधीन अनुमोदित परिवर्तन उनके अनुमोदन की महानिदेशक द्वारा अधिसूचना की तारीख के पश्चात् 180 दिन के भीतर सभी पक्षकार राज्यों के लिए प्रवृत्त हो जाएंगे जब तक कि कार्य परिषद् द्वारा किसी अन्य समय अवधि की सिफारिश नहीं की जाती है या सम्मेलन द्वारा विनिश्चय नहीं किया जाता है ।
अनुच्छेद 16
अवधि और वापसी
1. यह अभिसमय असीमित अवधि का होगा ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य अपनी राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का प्रयोग करने में इस अभिसमय से हटने का अधिकार रखता है यदि वह विनिश्चय करता है कि इस अभिसमय की विषय-वस्तु से संबंधित असाधारण घटनाएं उसके देश के सर्वोत्तम हितों को संकट में डालती हैं । वह अपने ऐसे हटने की सूचना सभी अन्य पक्षकार राज्यों, कार्य परिषद्, निक्षेपागार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् को 90 दिन पहले देगा । ऐसी सूचना में उसके सर्वोच्च हितों को संकट में डालने के संबंध में असाधारण घटानाओं का विवरण होगा ।
3. किसी पक्षकार राज्य की इस अभिसमय से वापसी किसी भी रूप से अन्तरराष्ट्रीय विधि से सुसंगत किसी नियम के अधीन, विशेष रूप से 1925 के जेनेवा प्रोटोकोल के अधीन कल्पित दायित्व को पूरा करने के राज्य के कर्तव्य पर प्रभाव नहीं डालेगी ।
अनुच्छेद 17
उपबन्धों की प्रास्थिति
उपाबंध इस अभिसमय के अभिन्न भाग हैं । इस अभिसमय के प्रति प्रत्येक निर्देश के अन्तर्गत उपाबंध भी है ।
अनुच्छेद 18
हस्तारक्षर
यह अभिसमय इसके प्रवृत्त होने के पहले सभी राज्यों के हस्ताक्षर के लिए खुला रहेगा ।
अनुच्छेद 19
अनुसमर्थन
यह अभिसमय हस्ताक्षर करने वाले राज्यों द्वारा उनकी अपनी-अपनी संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार अनुसमर्थन के अधीन होगा ।
अनुच्छेद 20
स्वीकृति
कोई राज्य जो इस क्षेत्र अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पहले इस पर हस्ताक्षर नहीं करता है, उसके पश्चात् किसी समय इसे स्वीकृति दे सकेगा ।
अनुच्छेद 21
प्रवर्तन में आना
1. यह अभिसमय अनुसमर्थन की पैंसठवीं लिखत के निक्षेप की तारीख के 180 दिन पश्चात् किन्तु हस्ताक्षर के लिए खोले जाने के पश्चात् से दो वर्ष पहले प्रवर्तन में नहीं आएगा ।
2. ऐसे राज्यों के लिए जिनके अनुसमर्थन या स्वीकृति की लिखतें इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् निक्षेप की जाती हैं तो वह अनुसमर्थन या स्वीकृति की लिखतों के निक्षेप की तारीख से आगामी तीसवें दिन प्रवर्तन में आ जाएगा ।
अनुच्छेद 22
प्रतिबंध
इस अभिसमय के अनुच्छेद किसी प्रतिबंध के अध्यधीन नहीं होंगे । इस अभिसमय के उपाबंध इसके उद्देश्य और प्रयोजनों से बेमेल प्रतिबंधों के अध्यधीन नहीं होंगे ।
अनुच्छेद 23
निक्षेपधारी
संयुक्त राष्ट्र संघ का महासचिव इस अभिसमय का निक्षेपधारी अभिहित किया जाता है और अन्य बातों के साथ-साथ :
(क) सभी हस्ताक्षर करने वाले और स्वीकृति देने वाले राज्यों को प्रत्येक हस्ताक्षर की तारीख की, अनुसमर्थन या स्वीकृति की प्रत्येक लिखत के निक्षेप की तारीख की और इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने की तारीख की तथा अन्य सूचनाओं की प्राप्ति की सूचना तत्परता से देगा ;
(ख) इस अभिसमय की सम्यक् रूप से अधिप्रमाणित प्रतियां सभी हस्ताक्षर करने और स्वीकृति देने वाली राज्य सरकारों को संप्रेषित करेगा; और
(ग) इस अभिसमय को संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 102 के अनुसरण में रजिस्टर करेगा ।
अनुच्छेद 24
प्राधिकृत पाठ
यह अभिसमय, जिसके अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रांसिसी, रूसी और स्पेनी पाठ समतुल्य रूप से प्राधिकृत हैं संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के पास निक्षिप्त किया जाएगा ।
इसके साक्ष्यस्वरूप अद्योहस्ताक्षरी ने इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किए जाने पर इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए हैं ।
यह पेरिस में 13 जनवरी, 1993 को निष्पादित किया गया है ।
रसायनों के संबंध में उपाबन्ध
क. रसायनों की अनुसूचियों के लिए मार्गदर्शन
अनुसूची 1 के लिए मार्गदर्शन :
1. इस बात पर विचार करते समय कि किसी विषैले रसायन या पूर्वगामी को अनुसूची 1 में सम्मिलित किया जाए अथवा नहीं निम्नलिखित मानदण्ड ध्यान में रखा जाएगा :-
(क) इसे अनुच्छेद 2 में यथापरिभाषित रासायनिक आयुध के रूप में विकसित, उत्पादित, संचयित या प्रयुक्त किया गया है;
(ख) यह इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्धि क्रियाकलापों में उपयोग के लिए अपनी उच्च क्षमता के कारण इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के संबंध में अन्यथा उच्च जोखिम प्रकट करता है, यदि निम्नलिखिति एक या अधिक शर्तें पूरी होती हैं :-
(i) यह ऐसी रासायनिक संरचना रखता है, जो अनुसूची 1 में सूचीबद्ध अन्य विषैले रसायनों से घनिष्ट रूप से संबंधित है और सदृश गुणधर्म रखता है या उससे रखने की प्रत्याशा की जा सकती है;
(ii) यह ऐसे घातक या अशक्त करने वाले विषाक्त और अन्य गुणधर्म रखता है, जो रासायनिक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने के लिए इसे समर्थ बनाते हैं;
(iii) यह इस बात पर ध्यान दिए बिना कि क्या यह प्रक्रम सुविधाओं में, युद्ध सामग्रियों में या अन्यथा में पैदा हो सकता है, अनुसूची 1 में सूचीबद्ध विषैले रसायनों के उत्पादन के अन्तिम एकल प्रौद्योगिकीय प्रक्रम में पूर्वगामी के रूप में उपयोग किया जा सकेगा ;
(ग) इसका, इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए बहुत कम उपयोग है या कोई उपयोग नहीं है ।
अनुसूची 2 के लिए मार्गदर्शन :
2. इस बात पर विचार किए जाते समय कि किसी विषैले रसायन को, जो अनुसूची 1 में सूचीबद्ध नहीं किया गया है या अनुसूची 1 के रसायन के किसी पूर्वगामी को या अनुसूची 2, भाग क में सूचीबद्ध किसी रसायन को अनुसूची 2 में सम्मिलित किया जाए अथवा नहीं निम्नलिखित मानदण्ड को ध्यान में रखा जाएगा :-
(क) यह, इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है, क्योंकि इसमें ऐसी घातक और अशक्त करने वाली विषाक्तता और अन्य गुणधर्म हैं, इसे जो रासायनिक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने के लिए समर्थ बना सकते हैं;
(ख) इसे, अनुसूची 1 या अनुसूची 2, भाग क में सूचीबद्ध किसी रसायन की विरचना की अंतिम अवस्था में रासायनिक प्रतिक्रियाओं में से एक में पूर्वगामी के रूप में उपयोग किया जा सकता है;
(ग) अनुसूची 1 या अनुसूची 2, भाग क में सूचीबद्ध किसी रसायन के उत्पादन में इसके महत्व के कारण इसमें इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण जोखिम हैं;
(घ) इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए इसका उत्पादन बड़ी वाणिज्यिक मात्राओं में नहीं किया जाता है ।
अनुसूची 3 के लिए मार्गदर्शन :
3. इस बात पर विचार करते समय कि कोई विषैला रसायन या पूर्वगामी जिसे अन्य अनुसूचियों में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, अनुसूची 3 में सम्मिलित किया जाए अथवा नहीं, निम्नलिखित मानदण्ड को ध्यान में रखा जाएगा :-
(क) इसका किसी रासायनिक आयुध के रूप में उत्पादन, संचयन या उपयोग किया गया है;
(ख) यह इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के संबंध में अन्यथा कोई जोखिम पैदा करता है, क्योंकि इसमें ऐसी घातक और अशक्त करने वाली विषाक्तता और अन्य गुणधर्म हैं, जो रासायनिक आयुधों के रूप में उपयोग किए जाने के लिए इसे समर्थ बना सकेंगे;
(ग) यह अनुसूची 1 या अनुसूची 2 में सूचीबद्ध किए गए एक या अधिक रसायनों के उत्पादन में इसके महत्व के कारण इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए जोखिम पैदा करता है;
(घ) इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए इसका उत्पादन बड़ी वाणिज्यिक मात्राओं में किया जा सकेगा ।
ख. रसायनों की अनुसूचियां
विषैले रसायनों और उनके पूर्वगामियों की सूची निम्नलिखित अनुसूचियों में दी गई है । इस अभिसमय को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए, ये अनुसूचियां सत्यापन उपाबंध के उपबंधों के अनुसार, सत्यापन उपायों के लागू करने के लिए रसायनों की पहचान करती हैं । अनुच्छेद 2, उपपैरा 1 (क) के अनुसरण में, ये अनुसूचियां रासायनिक आयुधों की परिभाषा नियत नहीं करती हैं ।
(जब कभी अनुसरण में डाइ ऐल्किलेटिड रसायनों के समूह के संबंध में निर्देश दिया जाता है जिसके पश्चात् कोष्ठकों में दिए गए ऐल्किल समूहों की सूची है तो कोष्ठकों में सूचीबद्ध किए गए ऐल्किल समूहों के सभी संभाव्य समुच्चयों द्वारा संभव सभी रसायनों को संबंधित अनुसूची में सूचीबद्ध समूह समझा गया है, जहां तक कि उन्हें स्पष्ट रूप से छूट नहीं दी गई है । अनुसूची 2, भाग क में ।" चिह्नित कोई रसायन सत्यापन उपाबंध के भाग 7 में विनिर्दिष्ट की गई कोई घोषणा और सत्यापन के लिए विशेष न्यूनतम सीमा रेखा के अधीन है ।)
अनुसूची 1
|
क. विषैले रसायन : |
(सी०ए०एस० रजिस्ट्री संख्यांक) |
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(1) |
ओ-ऐल्किल (सी10, जिसके अन्तर्गत साइक्लोऐल्किल भी है) ऐल्किल (एमई,ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर)द्भफॉस्फोनोफ्लुओरिडेटस अर्थात् उदाहरणतया सेरीनः ओ-आइसोप्रोपिल मेथिल फॉस्फोनोफ्लुओराइडेट |
(107-44-8)
|
|
|
सोमैनः ओ-पिनाकोलाइन मैथिलफास्फोनोफ्लुओराइडेट |
(96-64-0) |
|
(2) |
ओ-ऐल्किल ( सी10, जिसके अन्तर्गत साइक्लोऐल्किल भी है) एन, एन-डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) फॉस्फोरेमिडो सायनाइडेट्स अर्थात् टाबनः ओएथिल एन, एन-डाइमेथिल फास्फोरामिडो सॉयनाइडेट |
(77-81-6)
|
|
(3) |
ओ-ऐल्किल (एच या सी10, जिसके अंतर्गत साइक्लोऐल्किल भी है) एस-2-डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर)-एमिनो एथिल ऐल्किल (एमई, ईटी,-एन-पीआर या आई-पीआर) फॉस्फोनोथीयोलेट्स और तत्संबंधी ऐल्किलेटिड या प्रोटोनित लवण उदाहरणतयाः वी०एक्स० : ओ-ऐथिल एस-2-डाइआइसो-प्रोपाइलएमिनोइएथिल मेथिल फॉसफोनोथीयोलेट |
(50782-69-9)
|
|
(4) |
सल्फर मस्टर्ड : |
|
|
|
2-क्लोरोएथिलक्लोरोमेथिल सल्फाइड |
(2625-76-5) |
|
|
मस्टर्ड गैसः बिस (2-क्लोरोऐथिल) सल्फाइड |
(505-60-2) |
|
|
बिस (2-क्लोरोएथिलथियो) मीथेन |
(63869-13-6) |
|
|
सेस्क्वीमस्टर्ड : 1, 2-बिस (2-क्लोरोएथिलथियो) ईथेन |
(3563-36-8) |
|
|
1, 3-बिस (2-क्लोरोएथिलथियो) एन-प्रोपेन |
(63905-10-2) |
|
|
1, 4-बिस (2-क्लोरोएथिलथियो) एन-ब्यूटेन |
(142868-93-7) |
|
|
1, 5-बिस (2-क्लोरोएथिलथियो) एन-पेन्टेन |
(142868-94-8) |
|
|
बिस (2-क्लोरोऐथिलथियोमेथिल) ईथर |
(63918-90-1) |
|
|
ओ-मस्टर्ड : बिस (2-क्लोरोएथिलथियोएथिल) ईथर |
(63918-89-8) |
|
(5) |
लूइसाइट्स |
|
|
|
लूइसाइट 1 : 2-क्लोरोविनाइलडाइक्लोरोआर्सीन |
(541-25-3) |
|
|
लूइसाइट 2 : बिस (2-क्लोरोविनाइल) क्लोरोआर्सीन |
(40334-69-8) |
|
|
लूइसाइट 3 : ट्राइस (2-क्लोरोविनाइल) आर्सीन |
(40334-70-1) |
|
|
क. विषैले रसायन : |
(सी०ए०एस० रजिस्ट्री संख्यांक) |
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(6) |
नाइट्रोजन मस्टर्ड : |
|
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एच०एन० 1 : बिस (2-क्लोरोएथिल) एथिलऐमीन |
(538-07-8) |
|
|
एच०एन० 2 : बिस (2-क्लोरोएथिल) मेथिलऐमीन |
(51-75-2) |
|
|
एच०एन० 3 : ट्राइस (2-क्लोरोएथिल) ऐमीन |
(555-77-1) |
|
(7) |
सैक्सीटॉक्सिन |
(35523-89-8) |
|
(8) |
राइसिन |
(9009-86-3) |
|
ख. पूर्वगामी : |
|
|
|
(9) |
ऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) फास्फोनिलडाइफ्लोराइड्स |
|
|
|
उदाहरणतया : डी एफ-मेथिलफास्फोनिलडाइफ्लोराइड |
(676-99-3) |
|
(10) |
ओ :-ऐल्किल (एच या सी-10, जिसके अन्तर्गत साइक्लोऐल्किल भी है) ओ-2-डाइऐल्किल (एमई, ईटी०-एन-पीआर या आई-पीआर) एमीनोएथिल ऐल्किल (एमई, ईटी, एन पी आर या आई-पीआर) फास्फोनाइट और तत्संबंधी एल्किलेटिड या प्रोटनित लवण |
|
|
|
उदाहरणतयाः क्यूएलः ओ-एथिल ओ-2 डाइआइसोप्रोपिलऐमीनोएथिल मेथिलफॉस्फोनाइट |
(57856-11-8) |
|
(11) |
क्लोरोसेरीन : ओ-आइसोप्रोपिल मेथिल फॉस्फोनोक्लोरिडेट |
(1445-76-7) |
|
(12) |
क्लोरोसोमन : ओ-पिनाकोलिल मेथिलफॉस्फोनो-क्लोराइड |
(7040-57-5) |
अनुसूची 2
|
क. विषैले रसायन : |
(सी०ए०एस० रजिस्ट्री संख्यांक) |
|
|
(1) |
अमिटोन : ओ, ओ-डाइएथिल एस-[2-(डाइएथिलऐमीनो) एथिल,] फॉस्फोरोथियोलेट और तत्संबंधी ऐल्किलयुक्त या प्रोटॉनित लवण |
(78-53-5) |
|
(2) |
पी एफ आई बी : 1, 1, 3, 3, 3-पेंटाफ्लुओरो-2-(ट्राइफ्लुओरोमेथिल)-1-प्रोपेन |
(382-22-8) |
|
(3) |
बी जैड : 3-क्विन्यक्लिडिनेल बेनजिलेट (।) |
(6581-06-2) |
|
ख. पूर्वगामी : |
|
|
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(4) |
अनुसूची 1 में सूचीबद्ध रसायनों से भिन्न रसायन, जिनमें फॉस्फोरस के परमाणु हैं और जिसमें एक मेथिल, एथिल या प्रोपिल ( सामान्य या आइसो) समूह अन्तर्विष्ट हैं किन्तु और कार्बन परमाणु नहीं हैं |
|
|
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उदाहरणतया मेथिल फॉस्फोनेल डाइक्लोराइड |
(676-97-1) |
|
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डॉइएथिल मेथिल फॉस्फोनेट |
(750-70-6) |
|
|
छूट : फोनोफॉस : ओ-एथिल एस-फेमिल ऐथिलफॉस्फोनो थियोलोथियोनेट |
(944-22-9) |
|
(5) |
एन, एन-डाइऐल्किल (एमई,ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) फास्फोरामाडिक डाइहैलाइड्स |
|
|
(6) |
डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पी आर या आई-पीआर) एन, एन-डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) फॉस्फोरऐमिडेट्स) |
|
|
(7) |
आर्सेनिक ट्राइक्लोराइड |
(7784-34-1) |
|
(8) |
2, 2-डाइफेनिल-2 हाइड्रोऑक्सीएसीटिक अम्ल |
(76-93-7) |
|
(9) |
क्विन्यूक्लिडिन-3-ओएल |
(1619-34-7) |
|
(10) |
एन, एन-डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) एमीनोएथिल-2-क्लोराइडस और तत्संबंधी प्रोटॉनित लवण । |
|
|
(11) |
(एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) एमीनोएथेन-2-ओएलएस और तत्संबंधी प्रोटॉनित लवण । |
|
|
|
छूट : एन, एन डाइमेथिल अमीनोएथानॉल और प्रोटोनित लवण |
(108-01-0) |
|
|
एन, एन-डाइएथिल एमीनोएथानॉल और तत्संबंधी लवण । |
(100-37-8) |
|
(12) |
एन, एन-डाइऐल्किल (एमई, ईटी, एन-पीआर या आई-पीआर) ऐमीनोएथेन-2-थाइओल और तत्संबंधी प्रोटॉनित लवण । |
|
|
(13) |
थायोडाईग्लालकौल : बिस (2-हाइड्रोऑक्सी एथिल) सल्फाइड |
(111-48-8) |
|
(14) |
पिनाकोलित ऐल्कोहॉल : 3, 3-डाइमेथिल ब्यूटेन-2-ओएल |
(464-07-3) |
अनुसूची 3
|
अ. विषैले रसायन
|
(सी०ए०एस० रजिस्ट्री संख्यांक) |
|
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(1) |
फॉसजीन : कार्बोनिल डाइक्लोराइड |
(75-44-5) |
|
(2) |
साइनोजेन क्लोराइड |
(506-77-4) |
|
(3) |
हाइड्रोजन साइनाइड |
(74-90-8) |
|
(4) |
क्लोरोपिक्रिन : ट्राइक्लोरोनाइट्रोमेथैन |
(76-06-2) |
|
आ. पूर्वगामी : |
|
|
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(5) |
फॉस्फोरस ऑक्सीक्लोराइड |
(10025-87-3) |
|
(6) |
फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड |
(7719-12-2) |
|
(7) |
फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड |
(10026-13-8) |
|
(8) |
ट्राइमेथिल फॉस्फाइट |
(121-45-9) |
|
(9) |
ट्राइएथिल फॉस्फाइट |
(122-52-1) |
|
(10) |
डाइमेथिल फॉस्फाइट |
(868-85-9) |
|
(11) |
डाइएथिल फॉस्फाइट |
(762-04-9) |
|
(12) |
सल्फर मोनोक्लोराइड |
(10025-67-9) |
|
(13) |
सल्फर डाइक्लोराइड |
(10545-99-0) |
|
(14) |
थानोनिल क्लोराइड |
(7719-09-7) |
|
(15) |
एथिल डाइएथानॉल-ऐमीन |
(139-87-9) |
|
(16) |
मेथिल डाइएथानॉल-ऐमीन |
(105-59-9) |
|
(17) |
ट्राइएथानॉलअमीन |
(102-71-6) |
कार्यान्वयन और सत्यापन के संबंध में उपाबंध (सत्यापन उपाबंध")
भाग 1
परिभाषाएं
1. अनुमोदित उपस्कर" से निरीक्षण दल के कर्तव्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक ऐसी युक्तियां और उपकरण अभिप्रेत हैं जो इस उपाबन्ध के भाग 2, पैरा 27 के अनुसरण में तकनीकी सचिवालय द्वारा तैयार विनियमों के अनुसार तकनीकी सचिवालय द्वारा प्रमाणित किए गए हैं । ऐसे उपस्कर से, निरीक्षण दल द्वारा प्रयोग किए जाने वाले प्रशासनिक प्रदाय या अभिलेखन सामग्री के प्रति निर्देश भी हो सकता है ।
2. भवन" में अनुच्छेद 2 में रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा की परिभाषा में यथा निर्दिष्ट विशेषित भवन और मानक भवन होंगे-
(क) विशेषित भवन" से निम्नलिखित अभिप्रेत है :-
(i) विशेषित भवन, जिसमें भूमिगत संरचनाएं भी सम्मिलित हैं और जिसमें किसी उत्पादन या भरण विन्यास संरूपण के साधन के रूप में विशिष्ट उपस्कर लगे हुए हैं;
(ii) कोई भवन जिसमें भूमिगत संरचनाएं भी सम्मिलित हैं और जो ऐसी सुभिन्न विशेषताएं रखती हैं, जो उन्हें ऐसे भवनों से विभेदित करती हों जिनका सामान्यतया उपयोग ऐसे रासायनिक उत्पादन या भरण क्रियाकलापों के लिए किया जाता है जो इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं है;
(ख) मानक भवन" से ऐसे भवन अभिप्रेत हैं, जिनके अन्तर्गत ऐसे विद्यमान मानकों के अनुसार निर्मित भूमिगत संरचनाएं भी हैं, जो अनुच्छेद 2, पैरा 8(क)(i) में विनिर्दिष्ट किसी रसायन या संक्षारक रसायन का उत्पादन नहीं कर रही है ।
3. आक्षेप निरीक्षण" से किसी पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में या उसकी अधिकारिता में या उसके नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान में प्रसुविधा या अवस्थिति का निरीक्षण अभिप्रेत है, जिसके लिए अनुच्छेद 9, पैरा 8 से 25 के अनुसरण में किसी अन्य पक्षकार राज्य द्वारा अनुरोध किया गया है ।
4. विविक्त कार्बनिक रसायन" से ऐसा कोई रसायन अभिप्रेत है, जिसका संबंध रासायनिक यौगिकों के ऐसे वर्ग से है, जो इसके आक्साइड सल्फाइड और मैटल कार्बोनेट से भिन्न कार्बन के सभी यौगिकों से मिलकर बनेंगे, जिनकी पहचान रासायनिक नाम द्वारा, संरचात्मक सूत्र द्वारा, यदि ज्ञात हो और रासायनिक सार सेवा रजिस्ट्री संख्या द्वारा, यदि समनुदेशित की गई है, की जा सकेगी ।
5. उपस्कर" में जैसा कि अनुच्छेद 2 में रासायनिक आयुध उत्पादन प्रसुविधा की परिभाषा में निर्दिष्ट किया गया है, विशेषित उपस्कर और मानक उपस्कर होंगे,-
(क) विशेषित उपस्कर" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैः-
(i) मुख्य उत्पादन श्रेणी, जिसके अन्तर्गत उत्पादन संश्लेषण, पृथक्करण या शुद्धिकरण के लिए कोई रिएक्टर या उपस्कर, अन्तिम प्रौद्योगिकीय प्रक्रम में ऊष्मा अन्तरण के लिए सीधे प्रयुक्त कोई उपस्कर, जैसे कि रिएक्टरों में या उत्पाद पृथक्करण में तथा अनुच्छेद 2, पैरा 8(क)(i) में विनिर्दिष्ट किसी रसायन के संपर्क में रहा कोई अन्य उपस्कर या उपस्कर जो यदि सुविधा प्रचालित की जाती है तो ऐसे रसायन के सम्पर्क में आएगा;
(ii) रासायनिक आयुध की भराई करने वाली कोई मशीन;
(iii) कोई अन्य उपस्कर जो किसी रासायनिक आयुद्ध उत्पादन प्रसुविधा के रूप में प्रसुविधा को प्रचालित करने के लिए जो अनुच्छेद 2, पैरा 8(क)(i) में विनिर्दिष्ट किसी रसायन या संक्षारक रसायन का उत्पादन न करने की प्रसुविधाओं के लिए विद्यमान वाणिज्यिक उद्योग मानकों के अनुसार सन्निर्मित प्रसुविधा से भिन्न है, के प्रचालन के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित, निर्मित या प्रतिस्थापित किया गया है, जैसे उच्च निकल मिश्र धातु या अन्य विशेष संक्षारक प्रतिरोधी पदार्थ से बना उपस्कर; अपशिष्ट नियंत्रण, अपशिष्ट उपचार, वायु फिल्टरिंग (छानने के लिए) या विलायक प्राप्त करने के लिए विशेष उपस्कर; विशेष संरोधन अहाता और सुरक्षा शील्ड; रासायनिक आयुधों के प्रयोजन के लिए विषैले रसायनों के विश्लेषण में प्रयुक्त गैर-मानकीय प्रयोगशाला उपस्कर; विनिर्दिष्ट रूप से डिज़ाइन की गई प्रक्रिया नियंत्रण पैनल; या विशेषित उपस्करों के लिए विशेष रूप से बनाए गए पुर्जे;
(ख) मानक उपस्कर" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैः-
(i) ऐसा उत्पादन उपस्कर, जिसका उपयोग साधारणतया रसायन उद्योग में किया जाता है और जिसे विशेषित उपस्करों की किस्म में शामिल नहीं किया गया है;
(ii) ऐसा अन्य उपस्कर, जिनका उपयोग सामान्यतया रसायन उद्योग में किया जाता है, जैसे अग्निशमन उपस्कर, गार्ड और सुरक्षा/रक्षा निगरानी उपस्कर, चिकित्सा सुविधाएं, प्रयोगशाला सुविधाएं; या संचार उपस्कर ।
6. अनुच्छेद 6 के संदर्भ में प्रसुविधा" से नीचे यथा परिभाषित कोई औद्योगिक स्थल अभिप्रेत हैः-
संयंत्र स्थल", संयंत्र" और यूनिट"
(क) संयंत्र स्थल (संकर्म, कारखाना) से किसी मध्यवर्ती प्रशासनिक स्तर के साथ एक या अधिक संयंत्रों का ऐसा स्थानीय एकीकरण अभिप्रेत है, जो एक संक्रियात्मक नियंत्रण के अधीन हों, और इसमें सामान्य अवसंरचना भी सम्मिलित है, जैसेः-
(i) प्रशासन और अन्य कार्यालय;
(ii) मरम्मत और रखरखाव की दुकानें;
(iii) चिकित्सा केन्द्र;
(iv) उपयोगिता सेवाएं;
(v) केन्द्रीय विश्लेषण प्रयोगशाला;
(vi) अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाएं;
(vii) केन्द्रीय निस्सारी और अपशिष्ट उपचार क्षेत्र; और
(viii) भाण्डागार, भण्डारकरण ।
(ख) संयंत्र" (उत्पादन सुविधा, कर्मशाला) से तुलनात्मक रूप से एक स्वतः पूर्ण ऐसा क्षेत्र, संरचना या भवन अभिप्रेत है, जिसमें निम्नलिखित सहायक और सहयुक्त अवसंरचना के साथ एक या अधिक यूनिट होंगी,-
(i) लघु प्रशासनिक अनुभाग;
(ii) फीड स्टाक और उत्पादों के लिए भंडारकरण उठाई-धराई क्षेत्र;
(iii) निस्सारी अपशिष्ट उठाई-धराई उपचार क्षेत्र;
(iv) नियंत्रण विश्लेषण प्रयोगशाला;
(v) प्राथमिक उपचार सेवा संबंधित चिकित्सा अनुभाग; और
(vi) घोषित रसायनों की स्थल के भीतर, आस-पास या बाहर गतिविधि से सहयुक्त अभिलेख और उनसे निर्मित समुचित, फीड स्टाक या उत्पाद रसायन ।
(ग) यूनिट" (उत्पादन यूनिट, प्रसंस्करण यूनिट) से उपस्कर की ऐसी मदों का संयोजन अभिप्रेत है जिसके अन्तर्गत किसी रसायन के उत्पादन, प्रसंस्करण या उपभोग के लिए आवश्यक पात्र या पात्रों का गठन भी सम्मिलित है ।
7. सुविधा करार" से अनुच्छेद 4, 5 और 6 के अनुसरण में स्थल पर सत्यापन के अधीन रहते हुए किसी विनिर्दिष्ट सुविधा के संबंध में किसी पक्षकार राज्य और संगठन के बीच किया गया कोई करार या समझौता अभिप्रेत है ।
8. मेजबान राज्य" से ऐसा राज्य अभिप्रेत है जिसके राज्यक्षेत्र में या इस अभिसमय के किसी अन्य पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में सुविधाएं स्थित हैं और जो इस अभिसमय के अधीन निरीक्षण के अध्यधीन हैं ।
9. देश के अन्दर अनुरक्षक" से ऐसे व्यष्टि अभिप्रेत हैं जो देश के अन्दर की अवधि के दौरान, निरीक्षित पक्षकार राज्य और यदि उचित हो तो मेजबान राज्य द्वारा यदि वे ऐसा चाहें, निरीक्षण दल के साथ जाने और उसकी सहायता करने के लिए विनिर्दिष्ट किए गए हैं ।
10. देश के अन्दर अवधि" से निरीक्षण दल के प्रवेश बिन्दु पर आगमन से प्रवेश बिन्दु से उसके प्रस्थान तक की अवधि अभिप्रेत है ।
11. आरंभिक निरीक्षण" से अनुच्छेद 3, 4, 5 और 6 तथा इस उपाबन्ध के अनुसरण में प्रस्तुत घोषणाओं के सत्यापन के लिए सुविधाओं का स्थल पर पहला निरीक्षण अभिप्रेत है ।
12. निरीक्षित पक्षकार राज्य" से ऐसा पक्षकार राज्य अभिप्रेत है जिसके राज्यक्षेत्र में या उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान पर इस अभिसमय के अनुसरण में कोई निरीक्षण किया जाता है या ऐसा पक्षकार राज्य अभिप्रेत है जिसकी मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में सुविधा या जिसका क्षेत्र ऐसे निरीक्षण के अधीन है; तथापि इसमें इस उपाबंध के भाग 2, पैरा 22 में विनिर्दिष्ट पक्षकार राज्य सम्मिलित नहीं हैं ।
13. निरीक्षण सहायक" से इस उपाबंध के भाग 2, खंड (क) में यथावर्णित तकनीकी सचिवालय द्वारा अभिहित ऐसा व्यष्टि अभिप्रेत है जो निरीक्षण में निरीक्षक की चिकित्सा, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्मिक या द्विभाषिया के रूप में सहायता करता है या दौरा करता है ।
14. निरीक्षण आदेश" से महानिदेशक द्वारा निरीक्षण दल को किसी विशिष्ट निरीक्षण का संचालन करने के लिए जारी अनुदेश अभिप्रेत है ।
15. निरीक्षण निर्देशिका" से निरीक्षण का संचालन करने के लिए तकनीकी सचिवालय द्वारा विकसित अतिरिक्त प्रक्रियाओं का संकलन है ।
16. निरीक्षण स्थल" से ऐसी कोई सुविधा या क्षेत्र अभिप्रेत है जहां निरीक्षण किया जाता है और जिसे अपने-अपने सुविधा करार या निरीक्षण अनुरोध या आदेश में वैकल्पिक अथवा अंतिम क्षेत्रसीमा द्वारा यथा विस्तारित निरीक्षण अनुरोध में विनिर्दिष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ।
17. निरीक्षण दल" से किसी विशिष्ट निरीक्षण का संचालन करने के लिए महानिदेशक द्वारा समनुदेशित निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों का समूह अभिप्रेत है ।
18. निरीक्षक" से इस अभिसमय के अनुसार निरीक्षण करने के लिए या दौरा करने के लिए इस उपाबंध के भाग 2, खण्ड (क) में यथावर्णित प्रक्रिया के अनुसार तकनीकी सचिवालय द्वारा अभिहित व्यष्टि अभिप्रेत है ।
19. नमूना करार" से ऐसा दस्तावेज अभिप्रेत है जो इस उपाबंध में विनिर्दिष्ट सत्यापन उपबंधों को पूरा करने के लिए पक्षकार राज्य और संगठन के बीच किए गए किसी करार के लिए साधारण रूप और अन्तर्वस्तु विनिर्दिष्ट करती है ।
20. संप्रेक्षक" से आक्षेप निरीक्षक का संप्रेक्षण करने के लिए अनुरोध करने वाले पक्षकार राज्य या अन्य तीसरे पक्षकार राज्य का प्रतिनिधि अभिप्रेत है ।
21. क्षेत्र सीमा" से आक्षेप निरीक्षण की दशा में, या तो भौगोलिक समन्वय या नक्शे पर वर्णन द्वारा परिभाषित निरीक्षण स्थल की बाहरी सीमा अभिप्रेत है ।
(क) निवेदित सीमाक्षेत्र" से इस उपाबंध के भाग 10, पैरा 8 के अनुरूप यथा विनिर्दिष्ट निरीक्षण स्थल सीमाक्षेत्र अभिप्रेत है;
(ख) वैकल्पिक सीमाक्षेत्र" से निरीक्षण पक्षकार राज्य द्वारा निवेदित सीमाक्षेत्र के वैकल्पिक तौर पर, यथा विनिर्दिष्ट निरीक्षण स्थल सीमाक्षेत्र अभिप्रेत है, यह इस उपाबंध के भाग 10, पैरा 17 में विनिर्दिष्ट अपेक्षाओं के अनुरूप होगा;
(ग) अंतिम सीमाक्षेत्र" से इस उपाबंध के भाग 10, पैरा 16 से 21 के अनुसार, निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच बातचीत से तय किए गए अनुसार अंतिम निरीक्षण स्थल सीमाक्षेत्र अभिप्रेत है;
(घ) घोषित सीमाक्षेत्र" से अनुच्छेद 3, 4, 5 और 6 के अनुसरण में घोषित सुविधा की बाहरी सीमा अभिप्रेत है ।
22. अनुच्छेद 9 के प्रयोजनों के लिए निरीक्षण अवधि" से निरीक्षण स्थल में निरीक्षण दल के प्रवेश से निरीक्षण स्थल से इसके प्रस्थान तक की व्यवस्था की समयावधि अभिप्रेत है, जिसमें सत्यापन क्रियाकलापों से पहले और बाद में विवरण दिए जाने पर व्यतीत समय सम्मिलित नहीं है ।
23. अनुच्छेद 4, 5 और 6 के प्रयोजनों के लिए, निरीक्षण की अवधि" से निरीक्षण दल के निरीक्षण स्थल पर पहुंचने से इसके निरीक्षण स्थल से प्रस्थान तक की समयावधि अभिप्रेत है, जिसमें सत्यापन क्रियाकलापों से पहले और बाद में विवरण दिए जाने पर व्यतीत समय सम्मिलित नहीं है ।
24. प्रवेश बिन्दु/निकास बिन्दु" से इस अभिसमय के अनुसरण में निरीक्षण के लिए निरीक्षण दलों के देश के भीतर पहुंचने के लिए और उसके मिशन के पूरा होने के पश्चात् उनके प्रस्थान के लिए अभिहित स्थान अभिप्रेत है ।
25. निवेदनकर्ता पक्षकार राज्य" से ऐसा कोई पक्षकार राज्य अभिप्रेत है, जिसने अनुच्छेद 9 के अनुसरण में आक्षेप निरीक्षण का निवेदन किया है ।
26. टन" से मीटरी टन अर्थात् 1000 कि. ग्रा. अभिप्रेत है ।
भाग 2
सत्यापन के साधारण नियम
क. निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों का पदाभिधान :
1. तकनीकी सचिवालय, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् सभी पक्षकार राज्यों को पदाभिधान के लिए प्रस्तावित निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों के नाम, राष्ट्रीयता और पंक्तियों तथा उनकी योग्यताओं और वृत्तिक अनुभव के बारे में लिखित रूप में संसूचित करेगा ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य, उसे संसूचित किए गए पदाभिधान के लिए प्रस्तावित निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों की सूची की प्राप्ति की तुरन्त अभिस्वीकृति देगा । राज्य पक्षकार, सूची की अभिस्वीकृति के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात्, प्रत्येक निरीक्षक और निरीक्षण सहायक के संबंध में अपनी स्वीकृति की लिखित रूप में तकनीकी सचिवालय को सूचना देगा । इस सूची में सम्मिलित कोई निरीक्षक या निरीक्षण सहायक यथा पदाभिहित समझा जाएगा, जब तक कि कोई पक्षकार राज्य, सूची की प्राप्ति की अभिस्वीकृति के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात्, लिखित रूप में अपनी अस्वीकृति घोषित नहीं कर देता है । पक्षकार राज्य, आपत्ति के लिए कारण भी सम्मिलित कर सकेगा ।
अस्वीकृति की दशा में, प्रस्तावित निरीक्षक या निरीक्षण सहायक ऐसे पक्षकार राज्य जिसने अपनी अस्वीकृति घोषित कर दी है, के राज्यक्षेत्र में या उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन ऐसे किसी अन्य स्थान पर सत्यापन क्रियाकलाप नहीं करेगा या उसमें भाग नहीं लेगा । तकनीकी सचिवालय आवश्यक रूप से, मूल सूची के अतिरिक्त और प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा ।
3. इस अभिसमय के अधीन सत्यापन क्रियाकलाप, पदाभिहित निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों द्वारा ही निष्पादित किए जाएंगे ।
4. पैरा 5 के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी पक्षकार राज्य को किसी भी समय किसी निरीक्षक या निरीक्षण सहायक, जिसे पहले से ही पदाभिहित किया जा चुका है, के संबंध में आपत्ति करने का अधिकार है । यह अपनी आपत्तियां तकनीकी सचिवालय को लिखित में सूचित करेंगे और उक्त आपत्ति के लिए कारण भी सम्मिलित कर सकेगा ।
ऐसी आपत्ति तकनीकी सचिवालय द्वारा प्राप्ति के 30 दिन पश्चात् प्रभावी होगी । तकनीकी सचिवालय संबंधित पक्षकार राज्य को तुरन्त निरीक्षक या निरीक्षण सहायक के पदाभिधान को वापस लेने की सूचना देगा ।
5. कोई पक्षकार राज्य, जिसे किसी निरीक्षण की अधिसूचना दे दी गई है, उस निरीक्षण के लिए, निरीक्षण दल सूची में नामित, पदाभिहित किए गए किसी निरीक्षक या निरीक्षण सहायक को, निरीक्षण दल सूची से हटाए जाने की मांग नहीं करेगा ।
6. किसी पक्षकार राज्य द्वारा स्वीकृत और पदाभिहित किए गए निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों की संख्या, निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों की उपलब्धता और चक्रानुक्रम के अनुसार अनुज्ञात किए जाने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए ।
7. यदि महानिदेशक की राय में, प्रस्तावित निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों की अस्वीकृति, पर्याप्त संख्या में निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों को पदाभिहित करने में बाधा डालती है या तकनीकी सचिवालय के कार्यों को प्रभावी रूप में पूरा करने में अन्यथा अवरोध पैदा करती है तो महानिदेशक इस विवाद्यक को कार्य परिषद् को निर्दिष्ट करेगा ।
8. जब कभी निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों की ऊपर वर्णित सूचियों में संशोधन आवश्यक हों या अनुरोध किया जाए तब प्रतिस्थापन निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों को उसी रीति में पदाभिहित किया जाएगा, जो प्रारंभिक सूची के संबंध में वर्णित की गई है ।
9. ऐसे निरीक्षण दल के सदस्य, जो किसी दूसरे पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र पर स्थित किसी पक्षकार राज्य की सुविधा का निरीक्षण कर रहे हैं, निरीक्षण किए गए पक्षकार राज्य और मेजबान पक्षकार राज्य, दोनों को यथा लागू, इस उपबंध में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार, पदाभिहित किए जाएंगे ।
ख. विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां :
10. प्रत्येक पक्षकार राज्य, निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों की सूची या उसमें परिवर्तनों की प्राप्ति की अभिस्वीकृति के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् निरीक्षण क्रियाकलापों को करने के प्रयोजन के लिए प्रत्येक निरीक्षक या निरीक्षण सहायक को उस पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में प्रवेश करने और वहां बने रहने के लिए समर्थ बनाने के लिए बहु-प्रवेश निकास और/ या पारगमन वीजा और ऐसे अन्य दस्तावेज प्रदान करेगा । ये दस्तावेज तकनीकी सचिवालय की उनकी व्यवस्था कराए जाने के पश्चात् कम से कम दो वर्ष के लिए विधिमान्य होंगे ।
11. निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों को, अपने कृत्यों को प्रभावी रूप से करने के लिए उपपैरा (क) से (ज) में वर्णित विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्रदान की जाएंगी । विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां निरीक्षण दल के सदस्यों को इस अभिसमय के लिए दी जाएंगी न कि उनके अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए । ऐसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां उनको निरीक्षत पक्षकार राज्य और मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में पहुंचने और वहां से प्रस्थान के बीच संपूर्ण अवधि के लिए और उनके पश्चात् उनके शासकीय कृत्यों को पूरा करने में पूर्व में निष्पादित कार्य के संबंध में प्रदान की जाएंगी :-
(क) निरीक्षण दल के सदस्यों को, 18 अप्रैल, 1961 के राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 29 के अनुसार राजनयिक अभिकर्ताओं द्वारा उपभोग की जा रही अनतिक्रमणीत प्रदान की जाएगी;
(ख) इस अभिसमय के अनुसरण में निरीक्षण क्रियाकलाप करने वाले निरीक्षण दल के अधिभोगाधीन निवास-स्थानों और कार्यालय परिसरों को, राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 30, पैरा 1 के अनुसार राजनयिक अभिकर्ताओं के परिसरों को प्रदान की गई अनतिक्रमणीयता और संरक्षण प्रदान किया जाएगा;
(ग) निरीक्षण दल के कागजपत्र और पत्राचार, जिसके अन्तर्गत अभिलेख भी है, राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 30, पैरा 2 के अनुसरण में राजनयिक अभिकर्ताओं के सभी कागजपत्र और पत्राचार को प्रदान की गई अनतिक्रमणीयता का उपयोग करेंगे । निरीक्षण दल को तकनीकी सचिवालय के साथ अपने पत्र-व्यवहार के लिए कोड के प्रयोग का अधिकार होगा;
(घ) निरीक्षण दल के सदस्यों द्वारा लाए गए नमूने और अनुमोदित उपस्कर इस अभिसमय में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन अनतिक्रमणीय होंगे और उन्हें सभी सीमाशुल्क से छूट प्राप्त होगी । खतरनाक नमूनों का सुसंगत विनियमों के अनुसार परिवहन किया जाएगा ;
(ङ) निरीक्षण दल के सदस्यों को, राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 31, पैरा 1, 2 और 3 के अनुसरण में राजनयिक अभिकर्ताओं को प्रदान की गई उन्मुक्तियां प्रदान की जाएंगी;
(च) इस अभिसमय के अनुसरण में विहित क्रियाकलाप करने वाले निरीक्षण दल के सदस्यों को राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 34 के अनुसरण में राजनयिक अभिकर्ताओं को प्रदान की गई शोध्यों और करों से छूट प्रदान की जाएगी;
(छ) निरीक्षण दल के सदस्यों को निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य पक्षकार के राज्यक्षेत्र में, किसी सीमाशुल्क या संबंधित प्रभारों के संदाय के बिना निजी उपयोग के लिए वस्तुएं, ऐसी वस्तुओं के अपवाद सहित, जिसका आयात या निर्यात विधि द्वारा प्रतिषिद्ध है या जो करंतीन विनियमों द्वारा नियंत्रित की जाती है, लाने की अनुज्ञा होगी;
(ज) निरीक्षण दल के सदस्यों को वही करेंसी और विनिमय सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जो अस्थायी शासकीय मिशन पर विदेशी सरकारों के प्रतिनिधियों को प्रदान की जाती हैं;
(झ) निरीक्षण दल के सदस्य निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी वृत्तिक या वाणिज्यिक क्रियाकलाप में लिप्त नहीं होंगे ।
12. गैर-निरीक्षित पक्षकार राज्यों के राज्यक्षेत्र में पारगमन करते समय निरीक्षण दल के सदस्यों को, राजनीतिक संबंधों पर वियना अभिसमय के अनुच्छेद 40, पैरा 1 के अनुसार राजनयिक अभिकर्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्रदान की जाएंगी । उनके द्वारा ले जाए जाने वाले कागजपत्र और पत्राचार, जिनके अंतर्गत अभिलेख भी हैं, नमूनों और अनुमोदित उपस्करों के संबंध में, पैरा (ग) और (घ) में वर्णित विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्रदान की जाएंगी ।
13. निरीक्षण दल के सदस्य, उनके विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निरीक्षित पक्षकार राज्य और मेजबान पक्षकार राज्य की विधियों और विनियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे और उस सीमा तक जो निरीक्षण आदेश से सुसंगत हैं, उस राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिए बाध्य होंगे । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान पक्षकार राज्य यह समझते हैं कि इस उपाबंध में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का दुरुपयोग किया गया है तो यह अवधारित करने के लिए कि क्या ऐसा दुरुपयोग हुआ है और यदि ऐसा अवधारित किया जाता है तो ऐसे किसी दुरुपयोग की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पक्षकार राज्य और महानिदेशक के बीच परामर्श किया जाएगा ।
14. निरीक्षण दल के सदस्यों की अधिकारिता से उन्मुक्ति को उन मामलों में महानिदेशक द्वारा अधित्यक्त किया जा सकेगा, जिनमें महानिदेशक की यह राय है कि उन्मुक्ति, न्याय के मार्ग में बाधा पहुंचाएगी और इस अभिसमय के उपबंधों के कार्यान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इसका अधित्यजन किया जा सकता है । अधित्यजन सदैव अभित्यक्त होना चाहिए ।
15. संप्रेक्षकों को वही विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्रदान की जाएंगी जो इस धारा के अनुसार निरीक्षकों को प्रदान की गई हैं, सिवाय उनके जो पैरा 11(घ) के अनुसार प्रदान की गई हैं ।
ग. स्थायी व्यवस्थाएं :
प्रवेश बिंदु
16. प्रत्येक पक्षकार राज्य प्रवेश के बिन्दु अभिहित करेगा और इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय को अपेक्षित जानकारी प्रदान करेगा । ये प्रवेश बिन्दु ऐसे होंगे कि निरीक्षण दल 12 घंटे के भीतर कम से कम एक प्रवेश से किसी निरीक्षण स्थल पर पहुंच सके । प्रवेश बिन्दु के अवस्थान सभी पक्षकार राज्यों को तकनीकी सचिवालय द्वारा मुहैया कराए जाएंगे ।
17. प्रत्येक पक्षकार राज्य प्रवेश बिन्दु का परिवर्तन, तकनीकी सचिवालय को ऐसे परिवर्तन की सूचना देकर कर सकेगा । ऐसे परिवर्तन, सभी पक्षकार राज्यों को समुचित अधिसूचना अनुज्ञात करने के लिए, ऐसी अधिसूचना की तकनीकी सचिवालय में प्राप्ति के 30 दिन के पश्चात् प्रभावी हो जाएंगे ।
18. यदि तकनीकी सचिवालय यह समझता है कि निरीक्षण के यथासमय संचालन के लिए प्रवेश बिन्दु अपर्याप्त है या किसी पक्षकार राज्य द्वारा प्रस्तावित प्रवेश बिन्दु के परिवर्तनों से निरीक्षण के यथासमय संचालित करने में अवरोध पैदा होता है तो वह उस समस्या को सुलझाने के लिए संबंधित पक्षकार राज्य से परामर्श कर सकेगा ।
19. ऐसे मामलों में जहां किसी निरीक्षण पक्षकार राज्य की सुविधाएं या क्षेत्र, किसी मेजबान पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र पर अवस्थित है या जहां प्रवेश बिन्दु से सुविधाओं या निरीक्षण के अधीन क्षेत्रों में पहुंचने के लिए, दूसरे पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र से पारगमन अपेक्षित है वहां निरीक्षित पक्षकार राज्य इस उपाबंध के अनुसार ऐसे निरीक्षणों से संबंधित अधिकारों का प्रयोग करेंगे और दायित्वों को पूरा करेंगे । मेजबान पक्षकार राज्य उन सुविधाओं और क्षेत्रों के निरीक्षण को सुकर बनाएगा और निरीक्षण दल को यथासमय और प्रभावी रीति से अपने कार्य करने के लिए समर्थ बनाने के लिए आवश्यक सहायता का प्रबंध करेगा । ऐसे पक्षकार राज्य, किसी निरीक्षित पक्षकार राज्य की सुविधाओं या क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए जिसके राज्यक्षेत्र से पारगमन अपेक्षित हो, ऐसे पारगमन को सुकर बनाएगा ।
20. ऐसे मामलों में, जहां किसी निरीक्षित पक्षकार राज्य की सुविधाएं या क्षेत्र, ऐसे राज्य के राज्यक्षेत्र में अवस्थित है, जो इस अभिसमय का पक्षकार नहीं हैं, वहां निरीक्षित पक्षकार राज्य, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा कि उन सुविधाओं या क्षेत्रों का निरीक्षण, इस उपाबंध के उपबन्धों के अनुसार किया जा सके । कोई पक्षकार राज्य, जिसकी एक या अधिक सुविधाएं या क्षेत्र किसी ऐसे राज्य के राज्यक्षेत्र में है जो इस अभिसमय का पक्षकार नहीं है, उस पक्षकार राज्य के संबंध में अभिहित किए गए निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों की मेजबान राज्य द्वारा स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा । यदि कोई निरीक्षित पक्षकार राज्य पहुंच सुनिश्चित करने में असमर्थ है तो यह प्रदर्शित करेगा कि उसने पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी उपाय किए थे ।
21. ऐसे मामलों में जहां वे सुविधाएं या क्षेत्र जिनके निरीक्षण कराए जाने की इच्छा की गई है, किसी पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में अवस्थित है किन्तु ऐसे स्थान में है जो ऐसे राज्य की अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन है जो इस अभिसमय का पक्षकार नहीं है, वहां पक्षकार राज्य ऐसे सभी आवश्यक उपाय करेगा जो ऐसी सुविधाओं या क्षेत्रों का निरीक्षण इस उपाबन्ध के उपबंधों के अनुसार किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए किसी निरीक्षित पक्षकार राज्य और मेजबान पक्षकार राज्य द्वारा यथा अपेक्षित है । यदि पक्षकार राज्य उन सुविधाओं या क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने में असमर्थ है तो वह यह प्रदर्शित करेगा कि उसने पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय किए थे । यह पैरा वहां लागू नहीं होगा जहां निरीक्षण के लिए ईप्सित सुविधाएं या क्षेत्र उस पक्षकार राज्य के हैं ।
गैर-अनुसूचित वायुयान के उपयोग के लिए प्रबन्ध :
22. अनुच्छेद 9 के अनुसरण में निरीक्षण के लिए और ऐसे अन्य निरीक्षणों के लिए जहां अनुसूचित वाणिज्यिक परिवहन के उपयोग से यात्रा साध्य न हो, वहां निरीक्षण दल ऐसा वायुयान उपयोग में ला सकेगा जो तकनीकी सचिवालय के स्वामित्व में है या उसके द्वारा भाड़े पर लिया गया है । इसके लिए अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात्, 30 दिन के अपश्चात्, प्रत्येक पक्षकार राज्य, तकनीकी सचिवालय को निरीक्षण दल और निरीक्षण के लिए आवश्यक उपस्कर को ऐसे राज्यक्षेत्र के भीतर या बाहर जहां निरीक्षण अवस्थित है, ले जाने के लिए गैर-अनुसूचित वायुयान के लिए स्थायी राजनयिक निकासी संख्या से सूचित करेगा । अभिहित प्रवेश बिन्दु को और से वायुयान के मार्ग ऐसे प्रतिष्ठित अन्तरराष्ट्रीय वायुमार्गों के साथ-साथ होंगे जो ऐसी राजनयिक निकासी के लिए आधार रूप में पक्षकार राज्यों और तकनीकी सचिवालय के बीच करार पाए गए हों ।
23. जब किसी गैर-अनुसूचित वायुयान का उपयोग किया जाता है, तो तकनीकी सचिवालय निरीक्षित पक्षकार राज्य को राष्ट्रीय प्राधिकरण के माध्यम से उस राज्य के हवाई क्षेत्र में प्रवेश के पहले, जहां निरीक्षण स्थल अवस्थित है, पिछले हवाई मैदान से वायुयान की उड़ान के लिए प्रवेश बिन्दु तक, उस हवाई मैदान से नियत प्रस्थान समय से कम से कम छह घंटे पहले उड़ान प्लान देगा । ऐसा प्लान सिविल वायुयान को लागू अन्तरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन की प्रक्रिया के अनुसार फाइल किया जाएगा । अपने स्वामित्व वाली या चार्टर्ड उड़ानों के लिए, तकनीकी सचिवालय प्रत्येक उड़ान के प्लान के टिप्पण खंड में स्थायी राजनयिक निकासी संख्या और वायुयान की निरीक्षण वायुयान के रूप में पहचान के लिए समुचित संकेतन सम्मिलित करेगा ।
24. उस राज्य के आकाशी क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व, जिसमें निरीक्षण किया जाना है, अंतिम हवाई मैदान से निरीक्षण दल के अनुसूचित प्रस्थान से पहले तीन घंटे से अन्यून पूर्व निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि पैरा 23 के अनुसार फाइल की गई उड़ान योजना अनुमोदित कर दी गई है जिससे कि निरीक्षण दल प्राक्कलित आगमन समय पर प्रवेश बिन्दु पर पहुंच जाए ।
25. निरीक्षित पक्षकार राज्य, प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के वायुयान के लिए तकनीकी सचिवालय द्वारा यथा अपेक्षित पार्किंग, सुरक्षा संरक्षण, सेवा और ईंधन की व्यवस्था तब करेगा जब ऐसा वायुयान तकनीकी सचिवालय के स्वामित्व में है या उसके द्वारा भाड़े पर लिया गया है । ऐसा वायुयान अवतरण फीस, प्रस्थान कर और इसी प्रकार के अन्य प्रभारों के लिए दायी नहीं होगा । तकनीकी सचिवालय ऐसे ईंधन, सुरक्षा संरक्षण, सेवा का खर्च वहन करेगा ।
प्रशासनिक इन्तजाम :
26. निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल के लिए संचार साधन, साक्षात्कार और अन्य कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक सीमा तक भाषांतरण सेवाएं, परिवहन, कार्य-स्थल, आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधा जैसी आवश्यक सुख सुविधाएं उपलब्ध करेगा या इंतजाम करेगा । इस संबंध में निरीक्षण दल द्वारा उपगत किए गए ऐसे खर्चों के लिए संगठन द्वारा निरीक्षित पक्षकार राज्य को प्रतिपूर्ति की जाएंगी ।
अनुमोदित उपस्कर :
27. पैरा 29 के अधीन रहते हुए निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा पैरा 28 के अनुसार अनुमोदित ऐसे उपस्कर को निरीक्षण स्थल पर लाने के लिए निरीक्षण दल पर कोई निर्बंधन नहीं लगाए जाएंगे जो तकनीकी सचिवालय ने निरीक्षण अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक अवधारित किए गए हैं । तकनीकी सचिवालय अनुमोदित उपस्कर की अद्यतन समुचित सूची तैयार करेगा जो ऊपर वर्णित प्रयोजनों और इस उपाबंध के अनुसार ऐसे उपस्करों को शासित करने वाले विनियमों के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हों । अनुमोदित उपस्कर की सूची और इन विनियमों को तय करने में तकनीकी सचिवालय यह सुनिश्चित करेगा कि सभी प्रकार की सुविधाओं के लिए जिन पर ऐसे उपस्कर के उपयोग किए जाने की संभावना है, सभी प्रकार की सुरक्षा संबंधी बातों को पूर्णतः ध्यान में रखा गया है । अनुमोदित उपस्कर के बारे में अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और उसका अनुमोदन किया जाएगा ।
28. उक्त उपस्कर तकनीकी सचिवालय की अभिरक्षा में रहेगा और तकनीकी सचिवालय द्वारा अभिहित अंश शोधित और अनुमोदित किया जाएगा । तकनीकी सचिवालय, संभव सीमा तक उस उपस्कर का चयन करेगा जो विशेष तौर पर विशिष्ट प्रकार के अपेक्षित निरीक्षण के लिए अभिकल्पित हो । अभिहित और अनुमोदित उपस्कर को अप्राधिकृत परिवर्तन से विशेष तौर पर सुरक्षित रखा जाएगा ।
29. विहित समय सीमा पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निरीक्षण पक्षकार राज्य को प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के सदस्यों की उपस्थिति में उक्त उपस्कर का निरीक्षण करने, अर्थात् निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में अन्दर लाए गए या उससे हटाए गए उपस्कर की पहचान की जांच पड़ताल करने का अधिकार होगा । ऐसी पहचान को सुकर बनाने के लिए, तकनीकी सचिवालय उक्त उपस्कर के पदाभिधान और अनुमोदन को अधिप्रमाणित करने के लिए दस्तावेज और युक्तियां संलग्न करेगा । उक्त उपस्कर का निरीक्षण, निरीक्षित पक्षकार राज्य के समाधान के लिए यह अभिनिश्चित करेगा कि उक्त उपस्कर विशिष्ट प्रकार के निरीक्षण के लिए अनुमोदित उपस्कर के वर्णन के अनुरूप है । निरीक्षित पक्षकार राज्य उस वर्णन के अनुरूप न होने वाले उपस्कर या ऊपर वर्णित अधिप्रमाणन दस्तावेजों और युक्तियों के बिना उपस्कर को अपवर्जित कर सकेगा । उपस्कर के निरीक्षण के लिए प्रक्रियाओं पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
30. उन मामलों में जहां निरीक्षण दल, स्थल पर उपलब्ध उस उपस्कर का उपयोग करना आवश्यक पाता है, जो तकनीकी सचिवालय का नहीं है और निरीक्षित पक्षकार राज्य को ऐसे उपस्कर के उपयोग में दल को समर्थ बनाने के लिए अनुरोध करता है तो, निरीक्षित पक्षकार राज्य, जहां तक हो सके, इस अनुरोध का अनुपालन करेगा ।
घ. निरीक्षण पूर्व के क्रियाकलाप
अधिसूचना :
31. महानिदेशक, प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के योजनाबद्ध आगमन के पहले और विहित समय-सीमा के भीतर, जहां विनिर्दिष्ट हो, निरीक्षण करने के अपने आशय को पक्षकार राज्य को अधिसूचित करेगा ।
32. महानिदेशक द्वारा जारी की गई अधिसूचनाओं में निम्नलिखित जानकारियां सम्मिलित होंगी :-
(क) निरीक्षण की किस्म;
(ख) प्रवेश बिन्दु;
(ग) प्रवेश बिन्दु पर आगमन की तारीख और अनुमानित समय;
(घ) प्रवेश बिन्दु पर आगमन के साधन;
(ङ) स्थल जिसका निरीक्षण किया जाना है;
(च) निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों के नाम;
(छ) यदि समुचित हो, विशिष्ट उड़ान के लिए वायुयान निकासी ।
33. निरीक्षित पक्षकार राज्य, तकनीकी सचिवालय द्वारा निरीक्षण करने के आशय की अधिसूचना की प्राप्ति के पश्चात् एक घंटे के अपश्चात् अभिस्वीकृत करेगा ।
34. किसी अन्य पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में अवस्थित पक्षकार राज्य की सुविधा के निरीक्षण की दशा में दोनों पक्षकार राज्यों को पैरा 31 और पैरा 32 के अनुसार एक साथ अधिसूचित किया जाएगा ।
निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में प्रवेश और निरीक्षण स्थल को अन्तरण :
35. निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान पक्षकार राज्य जिसे निरीक्षण दल के आगमन की अधिसूचना दी गई है, इसके राज्यक्षेत्र में तत्काल प्रवेश को सुनिश्चित करेगा और देश के भीतर अनुरक्षक द्वारा या अन्य साधन के माध्यम से अपनी शक्ति के भीतर, इसके प्रवेश बिन्दु से निरीक्षण स्थल (स्थलों) और निकास बिन्दु तक निरीक्षण दल के सुरक्षित संचालन और इसके उपस्कर और आपूर्तियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कार्य करेगा ।
36. निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल के प्रवेश बिन्दु पर आगमन के पश्चात् 12 घंटे के अपश्चात् निरीक्षण स्थल पर पहुंचने के लिए यथा आवश्यक सहायता करेगा ।
निरीक्षण पूर्ण विवरण देना :
37. निरीक्षण स्थल पर पहुंचने पर और निरीक्षण के आरंभ से पहले निरीक्षण दल को सुविधा प्रतिनिधियों द्वारा सुविधा से संबंधित मानचित्रों और अन्य समुचित दस्तावेजों की सहायता से, उन पर किए जा रहे क्रियाकलापों, सुरक्षा उपायों और निरीक्षण के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कार्मिक व्यवस्थाओं पर विवरण दिया जाएगा । विवरण के लिए व्यतीत समय न्यूनतम आवश्यक समय तक सीमित होगा और किसी भी दशा में तीन घंटे से अधिक नहीं होगा ।
ङ. निरीक्षणों का संलालन
साधारण नियम :
38. इस अभिसमय के उपबंधों और महानिदेशक द्वारा स्थापित नियमों तथा पक्षकार राज्यों और संगठन के बीच किए गए सुविधा करारों के अनुसार निरीक्षण दल के सदस्य अपने कृत्यों का निर्वहन करेंगे ।
39. निरीक्षण दल, महानिदेशक द्वारा जारी निरीक्षण आदेश कड़ाई से पालन करेगा । यह आदेश से परे जाने वाले क्रियाकलापों को नहीं करेगा ।
40. निरीक्षण दल के क्रियाकलाप इस प्रकार व्यवस्थित होंगे कि वह अपने कृत्यों का समय से और प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित कर सकें और निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य को कम से कम असुविधा हो और सुविधा या निरीक्षित क्षेत्र में कम से कम विघ्न पड़े । किसी सुविधा के प्रचालन में निरीक्षण दल, अनावश्यक बाधा डालने या विलम्ब करने से दूर रहेगा और इसकी सुरक्षा को प्रभावित करने से बचेगा । विशिष्टतः निरीक्षण दल किसी सुविधा को प्रचालित नहीं करेगा । यदि निरीक्षक यह समझता है कि उसकी आज्ञा का पालन करने के लिए किसी सुविधा में विशिष्ट संक्रिया की जानी चाहिए तो वे निरीक्षित सुविधा के पदाभिहित प्रतिनिधि से उनका निष्पादन कराए जाने के लिए अनुरोध करेंगे । प्रतिनिधि उस अनुरोध को यथासंभव सीमा तक क्रियान्वित कराएगा ।
41. निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र पर अपने कर्तव्यों के निष्पादन में निरीक्षण दल के सदस्य, यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य ऐसा अनुरोध करता है, निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों के साथ रहेंगे किन्तु इससे निरीक्षण दल को विलंब नहीं होना चाहिए या अन्यथा इसके कृत्यों में व्यवधान नहीं होना चाहिए ।
42. निरीक्षणों के संचालन के लिए विस्तृत प्रक्रियाएं तकनीकी सचिवालय द्वारा निरीक्षण मैनुअल में सम्मिलित करने के लिए अनुच्छेद 8 के पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा उन पर विचार किया जाएगा और अनुमोदन किए जाने वाले मार्गनिर्देशनों को ध्यान में रखते हुए विकास किया जाएगा ।
सुरक्षा:
43. अपने क्रियाकलापों को करने में निरीक्षक और निरीक्षण सहायक, निरीक्षण स्थल पर स्थापित सुरक्षा विनियमों की जिनमें सुविधा के भीतर नियंत्रित पर्यावरण के संरक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए विनियम भी सम्मिलित हैं का पालन करेंगे । इन अपेक्षाओं के क्रियान्वयन के लिए समुचित विस्तृत प्रक्रियाओं पर अनुच्छेद 8 के पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
संचार :
44. निरीक्षकों को देश में पूरी अवधि के दौरान तकनीकी सचिवालय के मुख्यालयों से संपर्क रखने का अधिकार होगा । इस प्रयोजन के लिए वे अपने स्वयं के सम्यक् रूप से अनुप्रमाणित, अनुमोदित उपस्कर का उपयोग कर सकेंगे और वह अनुरोध कर सकेंगे कि निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान पक्षकार राज्य उन्हें अन्य दूर संचार सेवाएं उपलब्ध कराएं । निरीक्षण दल को उक्त सीमा क्षेत्र में गश्त कर रहे कार्मिकों और निरीक्षण दल के अन्य सदस्यों के बीच अपनी रेडियो संसूचना की द्विमार्गी प्रणाली का उपयोग करने का अधिकार होगा ।
निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के अधिकार :
45. निरीक्षण दल को इस अभिसमय के सुसंगत अनुच्छेदों और उपाबंधों तथा निरीक्षण मैनुअल में दिए करारों और प्रक्रियाओं की सुविधा के साथ निरीक्षण स्थल पर बिना अड़चन के पहुंचने का अधिकार होगा । निरीक्षण किए जाने वाली मदों का चयन निरीक्षकों द्वारा किया जाएगा ।
46. निरीक्षकों को सुसंगत तथ्यों को स्थापित करने के प्रयोजन से निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसी सुविधा कार्मिक से साक्षात्कार करने का अधिकार होगा । निरीक्षक केवल उसी सूचना और डाटा (आंकड़े) का अनुरोध करेगा जो निरीक्षण के संचालन के लिए आवश्यक है और निरीक्षित पक्षकार राज्य ऐसे अनुरोध पर ऐसी सूचना प्रस्तुत करेगा, निरीक्षित पक्षकार राज्य को सुविधा कार्मिक से किए प्रश्नों पर आक्षेप करने का अधिकार होगा । यदि वे प्रश्न निरीक्षण के लिए सुसंगत न समझे जाएं । यदि निरीक्षण दल का प्रधान आक्षेप करता है और उनकी सुसंगतता बताता है, तो वे प्रश्न उत्तर के लिए निरीक्षित पक्षकार राज्य को लिखित में दिए जाएंगे । निरीक्षण दल साक्षात्कार की अनुज्ञा देने या उन प्रश्नों के उत्तर देने की अनुज्ञा देने और दिए गए किन्हीं स्पष्टीकरणों के किसी इंकार को निरीक्षण रिपोर्ट के उस भाग में नोट कर सकेंगे जो निरीक्षित पक्षकार राज्य के सहयोग के बारे में है ।
47. निरीक्षकों को उन दस्तावेजों और अभिलेखों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा जो उनके मिशन के संचालन के लिए सुसंगत समझे जाएं ।
48. निरीक्षकों को निरीक्षित पक्षकार राज्य या निरीक्षित सुविधा के प्रतिनिधियों द्वारा उनके अनुरोध पर लिए गए फोटो रखने का अधिकार होगा । तत्काल विकसित फोटो प्रिंट लेने की समर्थता उपलब्ध रहेगी । निरीक्षण दल इस बारे में अवधारित करेगा कि उक्त फोटो उन अनुरोध किए गए फोटोचित्रों के अनुरूप हैं अथवा नहीं और यदि नहीं हैं तो दौबारा फोटो-चित्र लिए जाएंगे । निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य प्रत्येक फोटो-चित्र की एक-एक प्रति अपने पास रखे रहेंगे ।
49. निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों को निरीक्षण दल द्वारा किए गए समस्त सत्यापन क्रियाकलापों के संप्रेषण करने का अधिकार होगा ।
50. निरीक्षित पक्षकार राज्य इसके अनुरोध पर तकनीकी सचिवालय द्वारा इसकी सुविधा (सुविधाओं) के बारे में इकट्ठी की गई जानकारी और आंकड़ों की प्रतियां प्राप्त करेगा ।
51. निरीक्षकों को किसी निरीक्षण के दौरान उत्पन्न होने वाली संदिग्धता के संबंध में स्पष्टीकरण के लिए अनुरोध करने का अधिकार होगा । ऐसे अनुरोध निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधि के माध्यम से तत्परता से किए जाएंगे । निरीक्षित पक्षकार राज्य का प्रतिनिधि, निरीक्षण के दौरान निरीक्षण दल को, संदिग्धता को दूर करने के लिए आवश्यक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेगा । यदि किसी वस्तु या निरीक्षण स्थल के भीतर अवस्थित किसी भवन से संबंधित प्रश्नों का समाधान नहीं किया जाता है तो यदि, अनुरोध किया जाता है, उक्त वस्तु या भवन का इसकी प्रकृति और कृत्यों के स्पष्टीकरण के प्रयोजन के लिए फोटो लिया जाएगा । यदि निरीक्षण के दौरान उक्त संदिग्धता दूर नहीं की जा सकती, तब निरीक्षक तकनीकी सचिवालय को तत्काल अधिसूचित करेंगे । निरीक्षक निरीक्षण रिपोर्ट में ऐसे किसी समाधान न हुए प्रश्न, सुसंगत स्पष्टीकरणों और लिए गए फोटो की प्रति सम्मिलित करेंगे ।
नमूनों का संग्रह, रखरखाव और विश्लेषण :
52. निरीक्षित पक्षकार राज्य या निरीक्षित सुविधा के प्रतिनिधि, निरीक्षण दल के अनुरोध पर निरीक्षकों की उपस्थिति में नमूना लेंगे । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य या निरीक्षित सुविधा के प्रतिनिधियों की अग्रिम सहमति है तो निरीक्षण दल स्वयं भी नमूने ले सकेगा ।
53. जहां संभव हो, नमूनों का विश्लेषण स्थल पर किया जाएगा । निरीक्षण दल को इसके द्वारा लाए गए अनुमोदित उपस्कर का उपयोग करते हुए नमूनों का विश्लेषण स्थल पर करने का अधिकार होगा । निरीक्षण दल के अनुरोध पर निरीक्षित पक्षकार राज्य करार की गई प्रक्रियाओं के अनुसार स्थल पर नमूनों के विश्लेषण के लिए सहायता प्रदान करेगा । अनुकल्पतः निरीक्षित दल अनुरोध कर सकेगा कि स्थल पर समुचित विश्लेषण उसकी उपस्थिति में किया जाए ।
54. निरीक्षत पक्षकार राज्य को, लिए गए समस्त नमूनों के भाग को रखने या नमूने लेने और जब नमूनों का विश्लेषण स्थल पर किया जाए तब उपस्थित रहने का अधिकार होगा ।
55. निरीक्षण दल, यदि वह इसे आवश्यक समझे, स्थल से बाहर संगठन द्वारा अभिहित प्रयोगशालाओं में विश्लेषण के लिए नमूने हस्तांतरित करेगा ।
56. महानिदेशक का नमूनों की सुरक्षा, अखंडता और परिरक्षण के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्थल से बाहर विश्लेषण के लिए हस्तान्तरित नमूनों की गोपनीयता को सुरक्षित रखा जाएगा, प्राथमिक उत्तरदायित्व होगा । महानिदेशक ऐसा, निरीक्षण निर्देशिका में सम्मिलित किए जाने के लिए अनुच्छेद 8 के पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किए जाने और अनुमोदित की जाने वाली प्रक्रियाओं के अनुसार करेगा, वहः-
(क) नमूनों के संग्रहण, उठाई-धराई, परिवहन और विश्लेषण को शासित करने वाली कड़ी पद्धति स्थापित करेगा;
(ख) विभिन्न प्रकार के विश्लेषण करने के लिए अभिहित प्रयोगशालाओं को प्रमाणित करेगा;
(ग) इन अभिहित प्रयोगशालाओं, गतिशील विश्लेषक, उपस्कर और प्रक्रियाओं तथा मानीटर क्वालिटी नियंत्रण के उपस्कर और प्रक्रियाओं के मानकीकरण तथा इन प्रयोगशालाओं, गतिशील उपस्कर और प्रक्रियाओं के प्रमाणन की बाबत समस्त मानकों का निरीक्षण करेगा;
(घ) अभिहित प्रयोगशालाओं में से उन प्रयोगशालाओं का चयन करेगा जो विनिर्दिष्ट अन्वेषणों के संबंध में विश्लेषणात्मक या अन्य कृत्यों को करेंगी ।
57. जब स्थल के बाहर विश्लेषण किया जाना हो तो नमूनों का कम से कम दो अभिहित प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किया जाएगा । तकनीकी सचिवालय विश्लेषण शीघ्र कराए जाने को सुनिश्चित करेगा । तकनीकी सचिवालय द्वारा नमूनों का हिसाब रखा जाएगा और किन्हीं अप्रयुक्त नमूनों या उनके भागों को तकनीकी सचिवालय को वापस किया जाएगा ।
58. तकनीकी सचिवालय, इस अभिसमय के अनुपालन से सुसंगत नमूनों के प्रयोगशाला विश्लेषण के परिणामों को संकलित करेगा और उन्हें अंतिम निरीक्षण रिपोर्ट में सम्मिलित करेगा । तकनीकी सचिवालय, अभिहित प्रयोगशालाओं द्वारा अपनाए गए संबंधित उपस्कर और क्रियापद्धति की विस्तृत जानकारी रिपोर्ट में सम्मिलित करेगा ।
निरीक्षण अवधि का विस्तार :
59. निरीक्षण की अवधि निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधि के साथ करार द्वारा विस्तारित की जा सकती है ।
जानकारी प्राप्त करने के लिए पुनः प्रश्न करना :
60. निरीक्षण के पूरा होने पर, निरीक्षण दल निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों और निरीक्षण के लिए उत्तरदायी कार्मिकों से निरीक्षण दल के प्रारंभिक निष्कर्षों का पुनर्विलोकन करने तथा किन्हीं संदिग्धताओं को स्पष्ट करने के लिए बैठक करेगा । निरीक्षण दल निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों को, किन्हीं नमूनों की सूची और लिखित जानकारी की प्रतियों तथा एकत्रित आंकड़ों और स्थल से बाहर ले जाई जाने वाली अन्य सामग्री के साथ मानकीकृत रूपविधान के अनुसार लिखित प्ररूप में, उसके प्रारंभिक निष्कर्षों को उपलब्ध कराएगा । दस्तावेज, निरीक्षण दल के प्रधान द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा । यह उपदर्शित करने के लिए कि उसने दस्तावेज की विषय-वस्तु की सूचना ले ली है, निरीक्षण पक्षकार राज्य का प्रतिनिधि दस्तावेज पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा । बैठक, निरीक्षण पूरा होने के पश्चात् 24 घंटे के अपश्चात् पूरी की जाएगी ।
च. प्रस्थान
61. निरीक्षण के पश्चात् की प्रक्रिया के पूरा होने पर, निरीक्षण दल, निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र को यथासंभव शीघ्र छोड़ देगा ।
छ. रिपोर्ट
62. निरीक्षण के पश्चात् दस दिन के अपश्चात् निरीक्षक उसके द्वारा किए गए क्रियाकलापों और निष्कर्षों पर तथ्यपरक अंतिम रिपोर्ट तैयार करेंगे । इसमें केवल इस अभिसमय के अनुपालन के सुसंगत तथ्य अंतर्विष्ट होंगे, जैसा कि निरीक्षण आदेश के अन्तर्गत उपबंधित है । रिपोर्ट में उस रीति की भी जानकारी होगी जिसमें निरीक्षित पक्षकार राज्य ने निरीक्षण दल के साथ सहयोग किया है । निरीक्षकों द्वारा दिए गए भिन्न संप्रेक्षणों को रिपोर्ट के साथ संलग्न किया जाएगा । रिपोर्ट गोपनीय रखी जाएगी ।
63. अंतिम रिपोर्ट निरीक्षित पक्षकार राज्य को तुरन्त प्रस्तुत की जाएगी । ऐसी लिखित टीका-टिप्पणियों को, जो निरीक्षित पक्षकार राज्य उनके निष्कर्षों पर तुरन्त करे, इसके साथ उपाबद्ध किया जाएगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा की गई टीका-टिप्पणियों के साथ अंतिम रिपोर्ट, निरीक्षण के पश्चात् तीस दिन के अपश्चात् महानिदेशक को प्रस्तुत की जाएगी ।
64. यदि रिपोर्ट में अनिश्चितताएं अंतर्विष्ट हैं या राष्ट्रीय प्राधिकरण और निरीक्षकों के बीच सहयोग अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं रहा है तो महानिदेशक पक्षकार राज्य से स्पष्टीकरण के लिए संपर्क करेगा ।
65. यदि अनिश्चितताएं दूर नहीं की जा सकती हैं या स्थापित तथ्य ऐसे हैं जिनसे यह पता चलता है कि इस अभिसमय के अधीन लिए गए दायित्वों को पूरा नहीं किया गया है तो महानिदेशक अविलंब कार्य परिषद् को सूचित करेगा ।
ज. साधारण उपबन्धों का लागू होना
66. उस भाग के उपबंध इस अभिसमय के अनुसरण में किए गए सभी निरीक्षणों को लागू होंगे । सिवाय वहां के जहां इस भाग के उपबंध, इस उपाबंध के भाग 3 से 11 में निरीक्षणों के विनिर्दिष्ट प्रकारों के लिए दिए गए उपबंधों से भिन्न हैं और उस दशा में पश्चात्वर्ती उपबंध अग्रता में होंगे ।
भाग 3
अनुच्छेद 4, 5 और 6, पैरा 3 के अनुसरण में सत्यापन उपायों के लिए साधारण उपबन्ध
क. आरम्भिक निरीक्षण और सुविधा करार
1. प्रत्येक घोषित सुविधा का, अनुच्छेद 4, 5 और 6, पैरा 3 के अनुसरण में स्थल पर निरीक्षण के अधीन रहते हुए, सुविधा के घोषित होने के पश्चात् होने तत्परता से आरंभिक निरीक्षण किया जाएगा । सुविधा के इस निरीक्षण का प्रयोजन उपलब्ध कराई गई जानकारी को सत्यापित करना और सुविधा पर भावी सत्यापन क्रियाकलापों की योजना के लिए आवश्यक कोई अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करना होगा जिसमें स्थल पर निरीक्षण करना और स्थल पर उपकरणों से लगातार मानीटर करना तथा सुविधा करारों पर कार्य करना भी सम्मिलित है ।
2. पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करेंगे कि घोषणाओं का सत्यापन और व्यवस्थित सत्यापन उपायों का आरंभ, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् स्थापित समय-सीमा के भीतर सभी सुविधाओं पर, तकनीकी सचिवालय द्वारा पूरा किया जा सकता है ।
3. प्रत्येक पक्षकार राज्य, घोषित प्रत्येक सुविधा के लिए और अनुच्छेद 4, 5 और 6, पैरा 3 के अनुसरण में स्थल पर निरीक्षण के अध्यधीन संगठन के साथ करार सम्पन्न करेगा ।
4. सुविधा करार, पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् या उक्त सुविधा के पहली बार घोषित होने के पश्चात् सिवाय ऐसी रसायन आयुध नाशन सुविधा के जिसे पैरा 5 से 7 लागू होंगे, 180 दिन के अपश्चात् पूरे किए जाएंगे ।
5. ऐसी रसायन आयुध नाशन सुविधा की दशा में, जिसका प्रचालन, पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के एक वर्ष पश्चात् प्रारंभ होता है वहां सुविधा करार, सुविधा का प्रचालन प्रारंभ होने से पूर्व 180 से अन्यून दिन पूर्व पूरा किया जाएगा ।
6. किसी रसायन आयुध नाशन सुविधा की दशा में, जो उस समय प्रचालन में है जब उक्त पक्षकार राज्य के लिए यह अभिसमय प्रवृत्त होता है या उसके पश्चात् प्रचालन एक वर्ष के अपश्चात् आरंभ होता है, सुविधा करार, पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 210 दिन के अपश्चात् पूरा किया जाएगा सिवाय इसके कि कार्य परिषद् यह विनिश्चय कर सकेगी कि संक्रमणकालीन सत्यापन करार, जिन्हें इस उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 51 के अनुसार अनुमोदित किया गया है और जिसमें संक्रमणकालीन सुविधा करार, स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से सत्यापन के लिए उपबंध और स्थल पर उपकरणों से मानीटरिंग तथा समझौतों के लागू होने के लिए, समय-सीमा भी है, पर्याप्त है ।
7. पैरा 6 में निर्दिष्ट सुविधा की दशा में, जिसका प्रचालन, पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात्, दो वर्ष के अपश्चात् बन्द हो जाएगा, कार्य परिषद् यह विनिश्चय कर सकेगी कि संक्रमणकालीन सत्यापन करार जिन्हें इस उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 51 के अनुसार अनुमोदित किया गया है और जिसमें संक्रमणकालीन सुविधा करार, स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से सत्यापन के लिए उपबंध तथा स्थल पर उपकरणों से मानीटरिंग और समझौतों के लागू होने के लिए समय-सीमा भी है, पर्याप्त है ।
8. सुविधा करार, ऐसे करारों के लिए, माडलों पर आधारित होंगे और विस्तृत इंतजाम के लिए उपबंध होंगे जो प्रत्येक सुविधा पर निरीक्षणों को शासित करेंगे । माडल करार में ऐसे उपबंध होंगे जो भावी प्रौद्योगिक विकास को गणना में लेंगे और जिन पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में अभिसमय द्वारा विचार या अनुमोदन किया जाएगा ।
9. तकनीकी सचिवालय फोटो, रेखांक और अन्य जानकारी के लिए सीलबंद आधानों को प्रत्येक स्थल पर रख सकेगा जिससे कि उन्हें पश्चात्वर्ती निरीक्षण के दौरान संदर्भ में लिया जा सके ।
ख. स्थायी इन्तजाम :
10. जहां लागू हो, तकनीकी सचिवालय को इस अभिसमय के सुसंगत उपबंधों तथा पक्षकार राज्यों और संगठन के बीच सुविधा करारों के अनुरूप निरन्तर मानीटरी यंत्रों और प्रणालियों तथा मुद्राओं को संस्थित करने और उनका उपयोग करने का अधिकार होगा ।
11. निरीक्षित पक्षकार राज्य को करार की गई प्रक्रियाओं के अनुसार, निरीक्षण दल द्वारा प्रयुक्त या प्रख्यापित किए गए किसी उपकरण का निरीक्षण करने और उसे निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जांच करने का अधिकार होगा । निरीक्षण दल को उन उपकरणों का उपयोग करने का अधिकार होगा जिन्हें रसायन आयुधों की प्रौद्योगिक नाशन प्रक्रिया को स्वयं मानीटर करने के लिए निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा स्थापित किया गया था । इस उद्देश्य के लिए निरीक्षण दल को उन उपकरणों के निरीक्षणों का जो रसायन आयुधों के नाशन के सत्यापन के प्रयोजन के लिए आशयित हैं तथा उन्हें अपनी उपस्थिति में जांच कराए जाने का अधिकार होगा ।
12. निरीक्षित पक्षकार राज्य निरन्तर मानीटर करने वाले उपकरणों और पद्धतियों के स्थापन के लिए आवश्यक तैयारी तथा सहायता उपलब्ध करेगा ।
13. पैरा 11 और पैरा 12 को कार्यान्वित करने के लिए सम्मलेन द्वारा समुचित विस्तृत प्रक्रिया पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार किया जाएगा और उसका अनुमोदन किया जाएगा ।
14. निरीक्षित पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय को, यदि किसी सुविधा पर कोई घटना घटित होती है या घटित हो सकती है, जहां कि मानीटर करने वाले उपकरण प्रतिष्ठापित हैं जिससे मानीटर-पद्धति पर प्रभाव पड़ सकता है, तुरन्त अधिसूचित करेगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय के साथ, यदि आवश्यक हो, यथासंभव शीघ्र मानीटर पद्धति के प्रचालन को पुनः स्थापित करने तथा अंतरिम उपायों को स्थापित करने की दृष्टि से पश्चात्वर्ती कार्रवाइयां करने के लिए समन्वय करेगा ।
15. निरीक्षण दल प्रत्येक निरीक्षण के दौरान यह सत्यापित करेगा कि मानीटर पद्धति ठीक प्रकार से कार्य कर रही है तथा उसमें लगाई गई मुहर से छेड़छाड़ नहीं की गई है । इसके अतिरिक्त, किसी उपस्कर का आवश्यक अनुरक्षण या प्रतिस्थापन करने का यथा अपेक्षित मानीटर पद्धति के विस्तार को समायोजित करने के लिए मानीटर पद्धति की सेवा का निरीक्षण कर सकेगा ।
16. यदि मानीटर पद्धति कोई विषमता उपदर्शित करती है तो तकनीकी सचिवालय यह अवधारण करने के लिए तुरन्त कार्रवाई करेगा कि क्या ऐसे उपकरण के सही कार्य न करने या सुविधा पर क्रियाकलापों के परिणामस्वरूप हुआ है । इस परीक्षण के पश्चात् यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो तकनीकी सचिवालय तत्काल वास्तविक स्थिति का अभिनिश्चय करेगा जिसमें सुविधा का यदि आवश्यक हो, स्थल पर तुरन्त निरीक्षण या सुविधा का परिदर्शन सम्मिलित है । तकनीकी सचिवालय किसी ऐसी समस्या का पता लगाने के तत्काल पश्चात् निरीक्षित पक्षकार राज्य को रिपोर्ट करेगा जो उसके निराकरण में सहायता करेगा ।
ग. निरीक्षण पूर्व क्रियाकलाप :
17. निरीक्षित पक्षकार राज्य को, सिवाय पैरा 18 में यथाविनिर्दिष्ट, निरीक्षण दल के प्रवेश स्थान पर योजनाबद्ध रूप में पहुंचने के 24 घंटे से अन्यून पहले निरीक्षणों की सूचना दी जाएगी ।
18. निरीक्षित पक्षकार राज्य को सूचना निरीक्षण दल के आरंभिक निरीक्षणों के प्रवेश स्थान पर पहुंचने के प्राक्कलित समय से पूर्व अग्रिम में 72 घंटे से अन्यून में दी जाएगी ।
भाग 4(क)
रासायनिक आयुधों का नाश और अनुच्छेद 4 के अनुसरण में उनका सत्यापन
क. घोषणा
रासायनिक आयुध :
1. अनुच्छेद 3, पैरा 1(क) (ii) के अनुसरण में पक्षकार राज्य द्वारा रासायनिक आयुधों पर घोषणा में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(क) प्रत्येक घोषित रसायन की कुल मात्रा;
(ख) प्रत्येक रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा की यथावत अवस्थिति जिसमें निम्नलिखित अभिव्यक्त होगा :-
(i) नाम;
(ii) भौगोलिक समन्वय; और
(iii) एक विस्तृत स्थल डायग्राम जिसमें सुविधा के भीतर सीमा मानचित्र और तहखानों/भंडारण क्षेत्रों की अवस्थिति भी है;
(ग) प्रत्येक रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा के लिए विस्तृत सूची में निम्नलिखित सम्मिलित होंगेः-
(i) अनुच्छेद 2 के अनुसार रासायनिक आयुधों के रूप में परिभाषित रसायन;
(ii) रासायनिक आयुध के रूप में परिभाषित बिना भरी युद्ध सामग्री (गोला-बारुद), गौण युद्ध सामग्री (छोटे गोला-बारुद), युक्तियां और उपकरण;
(iii) उपपैरा (ii) में विनिर्दिष्ट युद्ध सामग्री (गोला-बारुद), गौण युद्ध सामग्री (छोटे गोला-बारुद), युक्तियों या उपकरण के संबंध में प्रत्यक्ष उपयोग के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए उपकरण ;
(iv) उपपैरा (ii) में विनिर्दिष्ट युद्ध सामग्री (गोला-बारुद), गौण युद्ध सामग्री (छोटे गोला-बारुद), युक्तियां या उपकरण के संबंध में प्रत्यक्ष उपयोग के लिए विशेष रूप अभिकल्पित रसायन ।
2. पैरा 1 (ग) (i) में निर्दिष्ट रसायनों की घोषणा के लिए निम्नलिखित लागू होंगेः-
(क) रसायनों को, रसायन संबंधी उपाबंध की अनुसूची के अनुसार घोषित किया जाएगा ;
(ख) रसायन संबंधी उपाबंध की अनुसूची में सूचीबद्ध न किए गए रसायन के लिए समुचित अनुसूची में रसायन के संभावित समनुदेशन के लिए अपेक्षित जानकारी दी जाएगी जिसमें विशुद्ध सम्मिश्रण की विषाक्तता भी है । पूर्वगामी के लिए, प्रधान अंतिम प्रतिक्रिया उत्पाद (उत्पादों) की विषाक्तता और पहचान प्रदान की जाएगी;
(ग) रसायनों की युद्ध और अनुप्रयुक्त रसायन शास्त्र अंतरराष्ट्रीय संघ (शु०ओ०अ०रा०अं०सठ०) की चालू नाम पद्धति, संचनात्मक सूत्र और रासायनिक सार सेवा रजिस्ट्री संख्यांक, यदि समनुदेशित हो, के अनुसार रासायनिक नाम से पहचाने जाएंगे । किसी पूर्वगामी के लिए विषाक्तता और प्रधान अंतिम प्रतिक्रिया उत्पाद (उत्पादों) की पहचान प्रदान की जाएगी;
(घ) दो या अधिक रसायनों के मिश्रण से संबंधित मामलों में प्रत्येक रसायन की पहचान की जाएगी और प्रत्येक का प्रतिशत दिया जाएगा और मिश्रण को सर्वाधिक विषैले रसायन के प्रवर्ग के अधीन घोषित किया जाएगा । यदि किसी द्विआधारी रासायनिक आयुध का संघटक दो या दो से रसायनों से बना है तो प्रत्येक रसायन की पहचान की जाएगी और प्रत्येक का प्रतिशत दिया जाएगा;
(ङ) द्धिआधारी रासायनिक आयुध की पैरा 16 में निर्दिष्ट रासायनिक आयुधों के प्रवर्गों के ढांचे के भीतर सुसंगत अंतिम उत्पाद के अन्तर्गत घोषित किया जाएगा । प्रत्येक प्रकार की द्विआधारी रासायनिक युध सामग्री युक्ति के लिए निम्नलिखित पूरक जानकारी दी जाएगी :-
(i) विषालू अंतिम उत्पाद का रासायनिक नाम;
(ii) प्रत्येक संघटक का रासायनिक सम्मिश्रण और प्रत्येक संघटक की मात्रा;
(iii) संघटकों के बीच वास्तविक भार अनुपात;
(iv) किस संघटक को मुख्य संघटक समझा गया है;
(v) मुख्य संघटक से स्टाइकियोमिट्री आधार पर, 100 प्रतिशत परिणाम मानते हुए, संगणित विषालु अंतिम उत्पाद की संभावित मात्रा विनिर्दिष्ट विषालु अंतिम उत्पाद के लिए आशयित मुख्य संघटक की घोषित मात्रा (टनों में) 100 प्रतिशत परिणाम मानते हुए तत्वयागमितिक आधार पर संगणित इस विषालु अंतिम उत्पाद की मात्रा (टनों में) के समतुल्य मानी जाएगी;
(च) बहुसंघटक रासायनिक आयुधों के लिए घोषणा, द्विआधारी रासायनिक आयुधों के लिए परिकल्पित घोषणा के सदृश होगी;
(छ) प्रत्येक रसायन के लिए भंडारण का रूप अर्थात् युद्ध सामग्री, गौण युद्ध सामग्री, युक्तियां उपस्कर या प्रपुंज आधान और अन्य आधान घोषित किए जाएंगे । प्रत्येक प्रकार के भंडारण के लिए निम्नलिखित को सूचीबद्ध किया जाएगा :-
(i) प्रकार;
(ii) आकार या अधिव्यास;
(iii) मदों की संख्या; और
(iv) प्रति मद में भरे रसायन का अंकित भार;
(ज) प्रत्येक रसायन के लिए, भंडारण सुविधा पर विद्यमान कुल भार घोषित किया जाएगा;
(झ) इसके अतिरिक्त, थोक में भंडारित रसायनों के लिए, शुद्धता का प्रतिशत घोषित किया जाएगा, यदि ज्ञात हो ।
3. पैरा 1(ग)(ii) में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रकार की न भरी गई युद्ध सामग्री, गौण युद्ध सामग्री, युक्तियां या उपस्कर के लिए, जानकारी में निम्नलिखित सम्मिलित होंगेः-
(क) मदों की संख्या;
(ख) प्रति मद में अकलित भराव मात्रा;
(ग) भरे जाने के लिए आशयित रसायन ।
अनुच्छेद 3, पैरा 1(क)(iii) के अनुसरण में रासायनिक आयुधों की घोषणाः
4. अनुच्छेद 3, पैरा 1(क)(iii) के अनुसरण में रासायनिक आयुधों की घोषणा में उपरोक्त पैरा 1 से 3 में विनिर्दिष्ट सभी जानकारी अंतर्विष्ट होंगी । यह उस पक्षकार राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र में उक्त रासायनिक आयुध अवस्थित हैं कि वह अन्य राज्य के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित प्रबंध करे कि घोषणा कर दी गई है । यदि वह पक्षकार राज्य जिसके राज्यक्षेत्र में रासायनिक आयुद्ध अवस्थित है, इस पैरा के अधीन दायित्व को पूरा करने में समर्थ न हों तो वह इसके लिए कारणों को बताएगा ।
पूर्व-अन्तरणों और प्राप्तियों की घोषणाएं :
5. वह पक्षकार राज्य जिसने 1 जनवरी, 1946 से रासायनिक आयुध अंतरित या प्राप्त किए हैं, अनुच्देद 3 के पैरा 1(क)(iv) के अनुसरण में इन अंतरणों या प्राप्तियों को घोषित करेगा यदि थोक और/या युद्ध सामग्री के रूप में प्रतिवर्ष 1 टन रसायन से अधिक अंतरित या प्राप्त हुए हैं । यह घोषणा पैरा 1 और पैरा 2 में विनिर्दिष्ट तालिका प्ररूप के अनुसार की जाएगी । इस घोषणा में आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता देश, अंतरणों या प्राप्तियों की तारीख और यथासंभव ठीक-ठीक अंतरित मदों की वर्तमान अवस्थिति भी उपदर्शित करेगा । जब 1 जनवरी, 1946 और 1 जनवरी, 1970 के बीच की कालावधि के लिए रासायनिक आयुधों के अंतरण और प्राप्तियों के लिए सभी विनिर्दिष्ट जानकारी उपलब्ध न हो तो पक्षकार राज्य तब तक उपलब्ध जो कुछ भी जानकारी है, घोषित करेगा और इस बारे में स्पष्टीकरण देगा कि वह पूर्ण घोषणा क्यों प्रस्तुत नहीं कर सकता ।
रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए साधारण योजना प्रस्तुत करना :
6. अनुच्देद 3 के पैरा 1(क)(v) के अनुसरण में प्रस्तुत रासायनिक आयुध के नाशन के लिए साधारण योजना में उक्त पक्षकार राज्य के संपूर्ण राष्ट्रीय रासायनिक आयुध नाशन कार्यक्रम और इस अभिसमय में अंतर्विष्ट नाशन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पक्षकार राज्य के प्रयत्नों के बारे में जानकारी का हवाला दिया जाएगा । इस योजना में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट किया जाएगा :-
(क) नाशन के लिए साधारण अनुसूची जिसमें प्रत्येक विद्यमान रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए और यदि संभव हो, प्रत्येक योजनाबद्ध रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए प्रत्येक वार्षिक नाशन कालावधि में नष्ट किए जाने के लिए योजनाबद्ध रासायनिक आयुधों के प्रकार और इसकी अनुमानित मात्रा दी जाएगी ;
(ख) विद्यमान या नाशन अवधि में प्रचालित की जाने के लिए योजनाबद्ध रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं की संख्या;
(ग) प्रत्येक विद्यमान या योजनाबद्ध रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए :-
(i) नाम और अवस्थिति; और
(ii) नष्ट किए जाने वाले रासायनिक आयुधों की किस्म और उनकी अनुमानित मात्रा और रासायनिक भराव की किस्म (उदाहरण के लिए तंत्रिका कारक या स्फोटक कारक) और उसकी अनुमानित मात्रा;
(घ) नाशन सुविधाओं के प्रचालन के लिए कार्मिक के प्रशिक्षण के लिए योजनाएं और कार्यक्रम;
(ङ) सुरक्षा और उत्सर्जनों के लिए राष्ट्रीय मानक जिनका नाशन सुविधाएं समाधान करे;
(च) रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए नई पद्धतियों के विकास और विद्यमान पद्धतियों में सुधार के बारे में जानकारी;
(छ) रासायनिक आयुधों को नष्ट करने के लिए प्राक्कलित लागत; और
(ज) कोई अन्य विवाद्यक जो राष्ट्रीय नाशन कार्यक्रम पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता हो ।
ख. भण्डारण सुविधा और भण्डारण सुविधा की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए उपाय
7. रासायनिक आयुधों की घोषणा प्रस्तुत करने के अपश्चात् कोई पक्षकार राज्य ऐसे उपाय करेगा जैसे वह इसकी भंडारण सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त समझे और सुविधाओं के बाहर उसके रासायनिक आयुधों के किसी संचलन को विनाश के लिए हटाए जाने को छोड़कर, निवारित करे ।
8. पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि इसकी भंडारण सुविधाओं में रासायनिक आयुध, पैरा 37 से पैरा 49 के अनुसार सत्यापन के लिए सहज पहुंच को अनुज्ञात करने के लिए संरूपित किए गए हैं ।
9. जब कभी कोई भंडारण सुविधा उनके नाशन के लिए हटाए जाने के अलावा सुविधा के बाहर रासायनिक आयुध के किसी भी संचलन के लिए बंद रहती है, तब पक्षकार राज्य सुविधा पर मानक रखरखाव क्रियाकलाप जिसमें रासायनिक आयुधों के मानक रखरखाव; सुरक्षा मानीटरिंग तथा भौतिक सुरक्षा क्रियाकलाप और नाशन के लिए रासायनिक आयुधों की तैयारी सम्मिलित है, को जारी रखेगा ।
10. रासायनिक आयुधों के रखरखाव क्रियाकलापों में निम्नलिखित सम्मिलित नहीं होंगेः-
(क) अभिकारकों या युद्ध सामग्री निकायों का प्रतिस्थापन;
(ख) युद्ध सामग्री या उसके भागों अथवा संघटकों की मूल विशिष्टताओं में उपांतरण ।
11. सभी रखरखाव क्रियाकलाप तकनीकी सचिवालय द्वारा मानीटरिंग के अधीन होंगे ।
ग. नाशन
रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए सिद्धांत और पद्धति :
12. रासायनिक आयुधों के नाशन" से वह प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसके द्वारा रसायनों को रासायनिक आयुधों के उत्पादन के लिए अनुपयुक्त रूप में अनिवार्यतः अननुक्रमणीय तरीके से संपरिवर्तित किया जाता है और जो अननुक्रमणीय तरीके से युद्ध सामग्री और अन्य युक्तियों को अनुपयोगी बना देता है ।
13. प्रत्येक पक्षकार राज्य यह अवधारित करेगा कि वह रासायनिक आयुध को नष्ट कैसे करे, सिवाय इसके कि निम्नलिखित प्रक्रियाओं का अर्थात् किसी जलाशय में डुबो देने, भूमि में गाड़ देने या खुले गड्ढे में जला देने की प्रक्रिया का उपयोग न करना पड़े । यह रासायनिक आयुधों को केवल विनिर्दिष्टः अभिहित और समुचित रूप से अभिकल्पित और सज्जित सुविधाओं पर ही नष्ट करेगा ।
14. प्रत्येक पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि इसकी रासायनिक आयुध नाशन सुविधाएं ऐसी रीति से सन्निर्मित और संचलित है जिसमें रासायनिक आयुधों का नाशन सुनिश्चित है तथा इस अभिसमय के उपबंधों के अधीन नाशन प्रक्रिया का सत्यापन किया जा सकता है ।
नाशन का आदेश :
15. रासायनिक आयुधों के नाशन का आदेश अनुच्छेद 1 और अन्य अनुच्छेदों में विनिर्दिष्ट दायित्वों, जिसमें स्थल पर क्रमबद्ध सत्यापन की बाबत दायित्व भी सम्मिलित है, पर आधारित है । यह नाशन अवधि के दौरान कम न हुई सुरक्षा के लिए, नाशन प्रक्रिया के पूर्व भाग में विश्वास बनाए रखने, रासायनिक आयुधों का नाश करने के दौरान धीरे-धीरे अनुभव की प्राप्ति और संचयनों की वास्तविक संरचना के होते हुए और रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए चयन की गई पद्धतियों को ध्यान में रखे बिना उनके लागू होने के लिए पक्षकार राज्यों के हितों को ध्यान में रखेगा । नाशन का आदेश समकारी सिद्धान्त पर आधारित है ।
16. नाशन के प्रयोजन के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य द्वारा घोषित रासायनिक आयुधों को तीन प्रवर्गों में विभाजित किया जाएगा :-
प्रवर्ग 1ः अनुसूची 1 के रसायनों के आधार पर रासायनिक आयुध तथा उनके भाग और संघटक;
प्रवर्ग 2ः अन्य समस्त रसायनों पर आधारित रासायनिक आयुध तथा उनके भाग और संघटक;
प्रवर्ग 3ः न भरी गई युद्ध सामग्री और युक्तियां और रासायनिक आयुधों के नियोजन के संबंध में सीधे उपयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप में अभिकल्पित उपस्कर ।
17. पक्षकार राज्यः-
(क) इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् दो वर्ष के भीतर प्रवर्ग 1 के रसायन आयुधों का नाश प्रारम्भ करेगा और इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 10 वर्ष के अपश्चात् नाशन को पूरा करेगा । पक्षकार राज्य नाशन की निम्नलिखित समय-सीमा के अनुसार रासायनिक आयुधों का नाश करेगाः-
(i) चरण 1ः इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् दो वर्ष के भीतर इसकी प्रथम नाशन सुविधा का परीक्षण पूरा किया जाएगा । वर्ग 1 के रासायनिक आयुधों में से 1 प्रतिशत से अन्यून आयुध इस अभिसमय के प्रवर्तन के पश्चात् तीन वर्ष के अपश्चात् नष्ट किए जाएंगे ।
(ii) चरण 2ः इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 5 वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 1 के 20 प्रतिशत से अन्यून रासायनिक आयुध नष्ट किए जाएंगे ।
(iii) चरण 3ः इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् सात वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 1 के 45 प्रतिशत से अन्यून रासायनिक आयुध नष्ट किए जाएंगे ।
(iv) चरण 4 : इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 10 वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 1 के समस्त रासायनिक आयुध नष्ट किए जाएंगे ;
(ख) इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् एक वर्ष के भीतर प्रवर्ग 2 के रासायनिक आयुधों का नाशन आरंभ करेगा और इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् पांच वर्ष के अपश्चात् नाशन पूरा करेगा । प्रवर्ग 2 के रासायनिक आयुध नाशन अवधि में बराबर वार्षिक अभिवृद्धि में किया जाएगा । ऐसे आयुधों के लिए तुलन कारक प्रवर्ग 2 के भीतर रसायनों का भार है; और
(ग) इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् एक वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 3 के रासायनिक आयुधों का नाश करेगा और इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् पांच वर्ष के अपश्चात् नाशन पूरा करेगा । प्रवर्ग 3 के रासायनिक आयुधों का नाशन अवधि में बराबर वार्षिक अभिवृद्धि में किया जाएगा । न भरी गई युद्ध सामग्री और युक्तियों के लिए तुलन कारक अंकित भरण मात्रा [एम (3)ट में और उपस्कर के लिए मदों की संख्या में अभिव्यक्त है ।
18. द्विआधारी रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए निम्नलिखित लागू होगा :-
(क) नाशन आदेश के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट विषालु अंतिम उत्पाद के लिए आशयित मुख्य संघटकों की घोषित मात्रा (टनों में) 100 प्रतिशत उत्पादन मानते हुए स्टाइकियामिट्री आधार पर संगणित इस विषालु अंतिम उत्पाद की मात्रा (टनों में) के समतुल्य मानी जाएगी;
(ख) मुख्य संघटक की दी गई मात्रा का नाशन करने के लिए, अन्य संघटक की तत्समान मात्रा जो द्विआधारी रासायनिक युद्ध सामग्री युक्तियों के सुसंगत प्रकार के संघटकों के भार के वास्तविक अनुपात में संगणित हैं, के नाश की अपेक्षा आवश्यक होगी;
(ग) यदि संघटकों के बीच वास्तविक भार के अनुपात पर आधारित आवश्यकता से अधिक अन्य संघटक घोषित किया जाता है तो उक्त अधिक संघटक, नाशन क्रिया आरंभ होने के पश्चात् पहले दो वर्ष में नष्ट किया जाएगा;
(घ) प्रत्येक पश्चात्वर्ती संक्रिया वर्ष की समाप्ति पर, पक्षकार राज्य अन्य घोषित संघटक की वह मात्रा रख सकेगा जो द्विआधारी रासायनिक युद्ध सामग्री युक्तियों के सुसंगत प्रकार के संघटकों के वास्तविक भार के अनुपात के आधार पर अवधारित है ।
19. बहुसंघटक रासायनिक आयुधों के लिए नाशन आदेश द्विआधारी रासायनिक आयुधों के लिए परिकल्पित आदेश के अनुरूप होगा ।
मध्यवर्ती नाशन की समय सीमा का संशोधन :
20. कार्य परिषद्, अनुच्देद 3, पैरा 1(क)(v) के अनुसरण में और पैरा 6 के अनुसार रासायनिक आयुध के नाशन के लिए प्रस्तुत की गई और अन्य बातों के साथ पैरा 15 से पैरा 19 में दिए नाशन के आदेश के साथ अनुरूपता का निर्धारण करने के लिए साधारण योजनाओं का पुनर्विलोकन करेगी । कार्य परिषद् किसी पक्षकार राज्य से जिसकी योजना अनुरूप नहीं है, अनुरूपता लाने के उद्देश्य से परामर्श करेगी ।
21. यदि कोई पक्षकार राज्य, इसके नियंत्रण के बाहर आपवादिक परिस्थितियों के कारण यह विश्वास करता है कि वह प्रवर्ग 1 के रासायनिक आयुधों के नाशन आदेश के चरण 1, चरण 2 या चरण 3 के लिए विनिर्दिष्ट नाशन के स्तर की प्राप्ति नहीं कर सकता है तो वह उन चरणों में परिवर्तन प्रस्तावित कर सकता है ऐसे प्रस्ताव इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 120 दिन के अपश्चात् किए जाएंगे और उनमें ऐसे प्रस्ताव के लिए कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण अंतर्विष्ट होगा ।
22. प्रत्येक पक्षकार राज्य, पैरा 21 के अनुसरण में यथा परिवर्तित पैरा 17 (क) में वर्णित नाशन की अन्तिम तिथियों के अनुसार प्रवर्ग 1 के रासायनिक आयुधों का नाश सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा । तथापि यदि कोई पक्षकार राज्य यह विश्वास करता है कि किसी मध्यवर्ती नाशन की अन्तिम तिथि तक प्रवर्ग 1 के रासायनिक आयुधों के अपेक्षित प्रतिशत को नष्ट करना संभव नहीं है, तो वह कार्य परिषद् से अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए उस अन्तिम तिथि को बढ़ाने के लिए सम्मेलन से सिफारिश करने का अनुरोध कर सकेगा । ऐसा अनुरोध, नाशन की मध्यवर्ती अन्तिम तारीख से 180 से अन्यून दिन पूर्व किया जाएगा और उसमें ऐसा अनुरोध किए जाने के कारणों का विस्तुत ब्यौरा तथा उक्त पक्षकार राज्य की योजना यह सुनिश्चित करने के लिए होगी कि वह अगली मध्यवर्ती नाशन की अन्तिम तारीख तक अपने दायित्व को पूरा करने में समर्थ होगा ।
23. यदि कोई विस्तार मंजूर कर लिया जाता है तो भी उक्त पक्षकार राज्य नष्ट करने को अगली अन्तिम तारीख के लिए आकलित वर्णित नाशन अपेक्षाओं को पूरा करने के दायित्वाधीन होगा । इस धारा के अनुसरण में स्वीकृत विस्तारण पक्षकार राज्य के इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 10 वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 1 के सभी रासायनिक आयुधों को नष्ट करने के दायित्व में किसी भी तरह उपांतरण नहीं करेगा ।
नाशन को पूरा करने के लिए अन्तिम तिथि का विस्तारण :
24. यदि कोई पक्षकार राज्य यह विश्वास करता है कि वह इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 10 वर्ष के अपश्चात् प्रवर्ग 1 के सभी रासायनिक आयुधों के नाशन को सुनिश्चित करने में असमर्थ होगा, तो वह ऐसे रासायनिक आयुधों के नाशन को पूरा करने के लिए अन्तिम तिथि के विस्तारण के लिए कार्य परिषद् को अनुरोध प्रस्तुत कर सकेगा । ऐसा कोई अनुरोध इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 9 वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए ।
25. उक्त अनुरोध में निम्नलिखित अन्तर्विष्ट होगा :-
(क) प्रस्तावित विस्तारण की अवधि;
(ख) प्रस्तावित विस्तारण के लिए कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण; और
(ग) प्रस्तावित विस्तारण और नाशन के लिए 10 वर्ष की मूल अवधि के शेष भाग के दौरान नाशन के लिए विस्तृत योजना ।
26. उक्त अनुरोध पर विनिश्चय सम्मेलन द्वारा, कार्यकारी परिषद् की सिफारिश पर, अपने अगले सत्र में किया जाएगा । कोई भी विस्तारण आवश्यक न्यूनतम होगा, किन्तु किसी भी दशा में किसी पक्षकार राज्य के लिए समस्त रासायनिक आयुधों के नाशन को पूरा करने के लिए अन्तिम तिथि इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 15 वर्ष से अधिक विस्तारित नहीं की जाएगी । कार्य परिषद्, विस्तारण प्रदान करने के लिए शर्तें रखेगी जिसमें उन विनिर्दिष्ट सत्यापन उपायों, जिन्हें आवश्यक समझा जाए तथा नाशन कार्यक्रमों में समस्याओं को सुलझाने के लिए पक्षकार राज्य द्वारा किए जाने वाले विनिर्दिष्ट कार्य भी सम्मिलित हैं । विस्तारण अवधि के दौरान सत्यापन के खर्चे अनुच्छेद 4, पैरा 16 के अनुसार आबंटित किए जाएंगे ।
27. यदि कोई विस्तारण मंजूर किया जाता है तो पक्षकार राज्य, सभी पश्चात्वर्ती अन्तिम तारीखों के भीतर उसे पूरा करने के लिए समुचित उपाय करेगा ।
28. पक्षकार राज्य पैरा 29 के अनुसार नाशन के लिए विस्तृत वार्षिक योजनाएं और पैरा 36 के अनुसार प्रवर्ग 1 के रासायनिक आयुधों के नाशन पर वार्षिक रिपोर्टें तब तक पेश करता रहेगा जब तक कि प्रवर्ग 1 के सभी रासायनिक आयुध नष्ट नहीं कर दिए जाते । इसके अतिरिक्त उक्त विस्तारित अवधि के प्रत्येक 90 दिन के अन्त पर पक्षकार राज्य कार्य परिषद् को अपने नाशन क्रियाकलापों की रिपोर्ट देगा । कार्य परिषद् नाशन को पूरा करने की दिशा में प्रगति का पुनर्विलोकन करेगा और इस प्रगाति का प्रलेखीकरण करने के लिए आवश्यक उपाय करेगा । विस्तारित अवधि के दौरान नाशन क्रियाकलापों के संबंध में सभी सूचना अनुरोध पर कार्य परिषद् द्वारा पक्षकार राज्यों को प्रदान की जाएगी ।
नाशन के लिए विस्तृत वार्षिक योजनाएं :
29. नाशन के लिए विस्तृत वार्षिक योजनाएं तकनीकी सचिवालय को अनुच्छेद 4, पैरा 7(क) के अनुसरण में प्रत्येक वार्षिक नाशन अविध के आरम्भ होने से 60 दिन से अन्यून पहले प्रस्तुत की जाएगी और वह निम्नलिखित को विनिर्दिष्ट करेंगीः-
(क) प्रत्येक नाशन सुविधा में नष्ट किए जाने वाले प्रत्येक विनिर्दिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुध की मात्रा और वे सम्मिलित तारीखें भी होंगी जब प्रत्येक विनिर्दिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुध का विनाश किया जाएगा;
(ख) प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए विस्तृत स्थल आरेख और पहले प्रस्तुत किए गए आरेख में किया गया कोई परिवर्तन; और
(ग) आगे आने वाले वर्ष के लिए प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए क्रियाकलापों की विस्तृत सारणी जिसके अन्तर्गत उक्त सुविधा के डिजाइन, सन्निर्माण या उपांतरण के लिए अपेक्षित समय, उपस्कर के स्थापन, उपस्कर की जांच और प्रचालक प्रशिक्षण, प्रत्येक विनिर्दिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुध के लिए नाशन संक्रियाएं और निष्क्रियता की नियत अवधियों की पहचान अन्तर्विष्ट होगी ।
30. पक्षकार राज्य अपनी प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के लिए, उक्त सुविधा में उपयोग के लिए प्रारम्भिक निरीक्षण प्रक्रियाएं विकसित करने में तकनीकी सचिवालय की सहायता करने के लिए विस्तृत सुविधा सूचना देगा ।
31. प्रत्येक नाशन सुविधा के लिए विस्तृत सुविधा सूचना के अंतर्गत निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित होंगी :-
(क) नाम, पता और अवस्थान;
(ख) विस्तृत व्याख्या सहित सुविधा रेखाचित्र;
(ग) सुविधा डिजाइन रेखाचित्र, प्रक्रिया रेखाचित्र तथा पाइप और उपकरण लगाने का डिजाइन रेखाचित्र;
(घ) युद्ध सामग्री, युक्तियों और आधानों से रासायनिक भराव को हटाने, निष्कासित रसायनों के भराव को अस्थायी रूप से भंडारित करने, रासायनिक कर्मकों को नष्ट करने और युद्ध सामग्री, युक्तियों और आधानों को नष्ट करने के लिए अपेक्षित उपस्कर के डिजाइन रेखाचित्र और उपकरण विनिर्देश सहित विस्तृत तकनीकी वर्णन;
(ङ) नाशन प्रक्रिया का विस्तृत तकनीकी वर्णन जिनमें सामग्री प्रवाह दरें, तापमान और दाब भी सम्मिलित हैं, और परिकल्पित नाशन क्षमता;
(च) प्रत्येक विशिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुध के लिए डिजाइन क्षमता;
(छ) नाशन उत्पादों और उनके अंतिम निपटान की पद्धति का विस्तृत वर्णन;
(ज) इस अभिसमय के अनुसार निरीक्षण को सुकर बनाने के लिए उपायों का विस्तृत तकनीकी वर्णन;
(झ) उक्त नाशन सुविधा पर किसी अस्थायी धारणक्षेत्र का विस्तृत वर्णन जिसका उपयोग रासायनिक आयुधों को सीधे नाशन सुविधा पर पहुंचाने में किया जाएगा जिसके अंतर्गत स्थल और सुविधा का रेखाचित्र और उक्त सुविधा पर नष्ट किए जाने वाले प्रत्येक विनिर्दिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुद्ध के लिए भंडारण क्षमता की जानकारी सम्मिलित है;
(ञ) उक्त सुविधा पर प्रवृत्त सुरक्षा और चिकित्सीय उपायों का विस्तृत वर्णन;
(ट) निरीक्षकों के रहने के लिए आवास और काम करने के लिए परिसरों का विस्तृत वर्णन;
(ठ) अंतरराष्ट्रीय सत्यापन के लिए सुझाए गए उपाय ।
32. पक्षकार राज्य अपनी प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं के लिए संयंत्र प्रचालन संहिता, सुरक्षा और चिकित्सीय योजनाएं, प्रयोगशाला प्रचालन और गुणवत्ता आश्वासन तथा नियंत्रण संहिता और पर्यावरणीय अनुज्ञाएं जो अभिप्राप्त कर ली गई हैं, प्रदान करेगा सिवाय इसके कि इसमें पहले से प्रदान की गई सामग्री सम्मिलित नहीं होगी ।
33. पक्षकार राज्य ऐसे किसी विकास को जो उसकी नाशन सुविधा पर निरीक्षण क्रियाकलापों को प्रभावित कर सकता है, तकनीकी सचिवालय को तत्परता से अधिसूचित करेगा ।
34. पैरा 30 से 32 में विनिर्दिष्ट सूचना को प्रस्तुत करने के लिए अन्तिम तारीखों पर सम्मेलन द्वारा अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार किया जाएगा और अनुमोदन किया जाएगा ।
35. प्रत्येक नाशन सुविधा के लिए विस्तृत सुविधा सूचना के पुनर्विलोकन के पश्चात् तकनीकी सचिवालय, यदि आवश्यक हो, पक्षकार राज्य से यह सुनिश्चित करने के लिए परामर्श करेगा कि उसकी रासायनिक आयुध नाशन सुविधा रासायनिक आयुधों के नाशन को सुनिश्चित करने के लिए और इस बारे में अग्रिम योजना को मंजूर करने के लिए अभिकल्पित है कि सत्यापन उपाय कैसे लागू किए जा सकेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सत्यापन उपायों को लागू किया जाना उचित सुविधा प्रचालन से संगत है, और सुविधा प्रचालन समुचित सत्यापन को अनुज्ञात करता है, अभिकल्पित है ।
नाशन की वार्षिक रिपोर्टें :
36. रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए योजना के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी तकनीकी सचिवालय को अनुच्छेद 4, पैर 7(ख) के अनुसरण में प्रत्येक वार्षिक नाशन अवधि की समाप्ति के पश्चात् 60 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत की जाएगी और उक्त जानकारी में उन रासायनिक आयुधों की वास्तविक मात्रा विनिर्दिष्ट की जाएगी जो प्रत्येक नाशन सुविधा पर पूर्व वर्ष में नष्ट किए गए थे । यदि उचित हो तो नाशन लक्ष्य को प्राप्त न कर पाने के लिए कारणों का कथन किया जाना चाहिए ।
घ. सत्यापन
स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से रासायनिक आयुधों की घोषणाओं का सत्यापन :
37. रासायनिक आयुधों की घोषणाओं के सत्यापन का प्रयोजन अनुच्छेद 3 के अनुसरण में की गई सुसंगत घोषणाओं की यथार्थता की स्थल निरीक्षण के माध्यम से पुष्टि करना होगा ।
38. निरीक्षक यह सत्यापन घोषणा प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् तत्परता से करेंगे । वे अन्य बातों के साथ-साथ रसायनों की मात्रा और पहचान, युद्ध सामग्री, युक्तियों तथा अन्य उपस्कर के प्रकार और संख्या सत्यापित करेंगे ।
39. निरीक्षक, जहां तक उचित होगा, प्रत्येक भंडारण सुविधा में रासायनिक आयुधों की यथार्थ सूची तैयार करने के लिए करार की गई मुहर, चिह्न या अन्य सूची नियंत्रण प्रक्रियाएं नियोजित करेंगे ।
40. जैसे-जैसे सूची में प्रगति होती है निरीक्षक यथा आवश्यक ऐसी करार पाई गई मुहर का इस बारे में स्पष्ट संकेत देने के लिए कि कोई भंडार हटाया गया है और उक्त सूची तैयार करने के दौरान उक्त भंडारण सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए मुहर लगाएगा । सूची पूरी करने के पश्चात् ऐसी मुहरों को हटा देंगे जब तक कि अन्यथा करार न हुआ हो ।
भण्डारण सुविधाओं का व्यवस्थित सत्यापन :
41. भंडारण सुविधाओं के व्यवस्थित सत्यापन का प्रयोजन यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सुविधाओं से रासायनिक आयुधों को, जिनका पता नहीं लगा है, न हटाया जाए ।
42. रासायनिक आयुधों की घोषणा प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् यथासंभव शीघ्र व्यवस्थित सत्यापन आरंभ किया जाएगा और उस समय तक जारी रहेगा जब तक कि उक्त भंडारण सुविधा से सभी रासायनिक आयुध हटा नहीं लिए जाते । यह सुविधा करार के अनुसार स्थल पर निरीक्षण और स्थल पर उपकरण मानीटरिंग दोनों को मिलकर होगा ।
43. जब उक्त भंडारण सुविधा से सभी रासायनिक आयुध हटा लिए गए हों तब तकनीकी सचिवालय उस पक्षकार राज्य की इस निमित्त घोषणा की पुष्टि करेगा । इस पुष्टिकरण के पश्चात् तकनीकी सचिवालय उक्त भंडारण सुविधा के व्यवस्थित सत्यापन को समाप्त करेगा और निरीक्षकों द्वारा स्थापित किसी मानीटरिंग उपकरण को तत्परता से हटा देगा ।
निरीक्षण और परिदर्शन :
44. निरीक्षण किए जाने वाली किसी विशिष्ट भंडारण सुविधा का चयन तकनीकी सचिवालय द्वारा ऐसी रीति में किया जाएगा कि सुविधा का निरीक्षण कब किया जाना है उसकी भविष्यवाणी प्रवारित की जा सके । स्थल पर व्यवस्थित निरीक्षणों की आवृत्ति का अवधारण करने के लिए मार्गदर्शन तकनीकी सचिवालय द्वारा, अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार की गई और अनुमोदित सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ।
45. तकनीकी सचिवालय निरीक्षित पक्षकार राज्य को सुविधा पर व्यवस्थित निरीक्षण या परिदर्शन के अपने विनिश्चय को व्यवस्थित निरीक्षण या परिदर्शन के लिए सुविधा पर निरीक्षण दल के योजनाबद्ध रूप से पहुंचने से 48 घंटे पूर्व अधिसूचित करेगा । अत्यंत आवश्यक समस्याओं को सुलझाने के लिए निरीक्षण या परिदर्शन की दशा में यह अवधि कम की जा सकेगी । तकनीकी सचिवालय उक्त निरीक्षण या परिदर्शन के प्रयोजन को विनिर्दिष्ट करेगा ।
46. निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षकों के पहुंचने के लिए कोई भी आवश्यक तैयारियां करेगा और उनके प्रवेश बिन्दु से भंडारण सुविधा तक त्वरित परिवहन को सुनिश्चित करेगा । सुविधा करार में निरीक्षकों के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को विनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
47. निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण करने के लिए निरीक्षण दल के रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा में पहुंचने पर सुविधा के बारे में निम्नलिखित आंकड़े प्रदान करेगा :-
(क) भंडारण भवनों और भंडारण अवस्थानों की संख्या;
(ख) प्रत्येक भंडारण भवन और भंडारण अवस्थान के लिए स्थल आरेख में दर्शित प्रकार और पहचान संख्या या नामनिर्देशन; और
(ग) सुविधा में प्रत्येक भंडारण भवन और भंडारण अवस्थान के लिए प्रत्येक विनिर्दिष्ट प्रकार के रासायनिक आयुध की मद संख्या और उन आधानों के लिए जो द्विआधारी युद्ध सामग्री का भाग नहीं है, प्रत्येक आधान में भरे गए रसायन की वास्तविक मात्रा ।
48. उपलब्ध समय के भीतर कोई सूची तैयार करते समय निरीक्षकों को निम्नलिखित अधिकार होंगे :-
(क) निम्नलिखित में से किसी निरीक्षण तकनीक का उपयोग करना :-
(i) उक्त सुविधा पर भंडारित सभी रासायनिक आयुधों की सूची बनाना;
(ii) उक्त सुविधा में विनिर्दिष्ट भवनों या अवस्थानों में भंडारित सभी रासायनिक आयुधों की जैसा कि निरीक्षकों द्वारा चयन किया जाए सूची बनाना; या
(iii) निरीक्षकों द्वारा यथाचयनित उक्त सुविधा में भंडारित एक या अधिक प्रकार के विनिर्दिष्ट सभी रासायनिक आयुधों की सूची बनाना; और
(ख) करार पाए गए अभिलेखों के लिए सूचीबद्ध सभी मदों की जांच करना ।
49. निरीक्षक सुविधा करारों के अनुसार :-
(क) उक्त भंडारण सुविधा के सभी भागों तक जिनके अन्तर्गत कोई युद्ध सामग्री, युक्ति, प्रपुंज, आधान या अन्य आधान सम्मिलित हैं, बिना किसी अड़चन के पहुंचना । अपने क्रियाकलाप करते समय निरीक्षक उक्त सुविधा पर सुरक्षा विनियमों का पालन करेंगे । निरीक्षण किए जाने वाली मदों का चयन निरीक्षकों द्वारा किया जाएगा; और
(ख) प्रत्येक रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा के प्रथम और पश्चात्वर्ती किसी निरीक्षण के दौरान उन युद्ध सामग्री, युक्तियों और आधानों का नामनिर्देशन करने का अधिकार होगा जिनमें से नमूने लिए जाने हैं और ऐसी युद्ध सामग्री, युक्तियों और आधानों पर एक अनूठा टैग लगाने का अधिकार होगा जिससे उक्त अनूठे टैग को हटाने या परिवर्तित करने के प्रयास का संकेत मिलेगा । किसी रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा या किसी रासायनिक आयुध नाशन सुविधा पर अनूठा टैग लगी मद से कोई नमूना तत्संबंधी नाशन कार्यक्रमों के अनुसार यथासंभव साध्य शीघ्रता से लिया जाएगा और किसी भी दशा में वह नाशन संक्रियाओं की समाप्ति से अपश्चात् लिया जाएगा ।
रासायनिक आयुधों के नाशन का व्यवस्थित सत्यापन :
50. रासायनिक आयुध नाशन के सत्यापन का प्रयोजन निम्नलिखित होगा :-
(क) नष्ट किए जाने वाले रासायनिक आयुध स्टाक की पहचान और उसकी मात्रा की पुष्टि करना; और
(ख) इस बात की पुष्टि करना कि इन स्टाकों को नष्ट कर दिया गया है ।
51. इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् प्रथम 390 दिन के दौरान रासायनिक आयुध नाशन संक्रियाएं संक्रमणीय सत्यापन व्यवस्था द्वारा शासित होंगी । संक्रमणकालीन सुविधा करार सहित ऐसे समझौते, स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से सत्यापन और स्थल पर उपकरणों से मानीटरिंग के उपबंध और उक्त समझौतों के लागू होने की समय अवधि के बारे में संगठन और निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा करार किया जाएगा । इन समझौतों का कार्य परिषद् द्वारा उक्त पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 60 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए अनुमोदन किया जाएगा जो पैरा 31 के अनुसार प्रदान की गई विस्तृत सुविधा सूचना के मूल्यांकन और उक्त सुविधा के परिदर्शन पर आधारित होंगी । कार्य परिषद् अपने प्रथम सत्र में अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मलेन द्वारा विचार किए जाने और अनुमोदित की जाने वाली सिफारिशों पर आधारित ऐसे संक्रमणकालीन सत्यापन व्यवस्थाओं के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत स्थापित करेगी । संक्रमणकलीन सत्यापन व्यवस्थाएं उस संपूर्ण संक्रमणकालीन अवधि के दौरान पैरा 50 में वर्णित प्रयोजनों के अनुसार रासायनिक आयुधों के नाशन का सत्यापन करने के लिए और चल रही नाशन संक्रियाओं में रूकावट से बचने के लिए परिकल्पित की जाएगी ।
52. पैरा 53 से 61 तक के उपबंध ऐसे रासायनिक आयुध नाशन प्रचालनों को जो इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 390 दिन के बाद आरम्भ होने हैं, लागू होंगे ।
53. तकनीकी सचिवालय, यथास्थिति, इस अभिसमय और विस्तृत नाशन सुविधा सूचना तथा पूर्व निरीक्षणों से अनुभव के आधार पर प्रत्येक नाशन सुविधा पर रासायनिक आयुधों के नाशन के निरीक्षण के लिए एक प्रारूप योजना तैयार करेगा । उक्त योजना इस अभिसमय के अनुसरण में उक्त सुविधा के नाशन संक्रिया आरम्भ करने से पहले 270 से अन्यून दिन पहले पूरी की जाएगी और निरीक्षित पक्षकार राज्य को टिप्पणी के लिए दी जाएगी । तकनीकी सचिवालय और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच किसी मतभेद को परामर्श के माध्यम से हल किया जाना चाहिए । किसी भी सुलझाए न गए मामले को इस अभिसमय के पूर्ण क्रियान्वयन को सुकर बनाने के लिए उचित कार्रवाई हेतु कार्य परिषद् को अग्रेषित किया जाएगा ।
54. तकनीकी सचिवालय, निरीक्षित पक्षकार राज्य की प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधा का इस अभिसमय के अनुसरण में नाशन संक्रिया आरंभ करने से 240 से अन्यून दिन पहले, स्वयं को उक्त सुविधा से परिचित होने और निरीक्षण योजना की पर्याप्तता को निर्धारण करने के लिए आरंभिक परिदर्शन करेगा ।
55. किसी ऐसी विद्यमान सुविधा के मामले में जहां रासायनिक आयुध नाशन संक्रिया पहले ही आरंभ हो चुकी है वहां निरीक्षित पक्षकार द्वारा राज्य तकनीकी सचिवालय द्वारा आरंभिक परिदर्शन किए जाने से पूर्व उक्त सुविधा को विसंदूषित किया जाना अपेक्षित नहीं होगा । उक्त परिदर्शन की अवधि 5 दिन से अधिक नहीं होगी और परिदर्शन करने वाले कार्मिकों की संख्या 15 से अधिक नहीं होगी ।
56. तकनीकी सचिवालय की समुचित सिफारिश के साथ सत्यापन की तय पाई गई विस्तृत योजना पुनर्विलोकन हेतु कार्य परिषद् को अग्रेषित की जाएगी । कार्य परिषद्, इस अभिसमय के अधीन सत्यापन उद्देश्यों और दायित्वों से संगत रूप में उन्हें अनुमोदित करने के उद्देश्य से उक्त योजना का पुनर्विलोकन करेगी । यह इस बात की भी पुष्टि करेगी कि नाशन के लिए सत्यापन स्कीमें सत्यापन उद्देश्यों से संगत है और दक्ष तथा व्यावहारिक हैं । यह पुनर्विलोकन नाशन अवधि के आरम्भ होने से 180 से अन्यून दिन पहले पूरा होना चाहिए ।
57. कार्य परिषद् का प्रत्येक सदस्य सत्यापन के लिए योजना की पर्याप्तता से संबंधित प्रत्येक विवाद्यक पर तकनीकी सचिवालय से परामर्श कर सकेगा । यदि कार्य परिषद् के किसी सदस्य की कोई आपत्ति नहीं हो तो उक्त योजना को कार्यान्वित किया जाएगा ।
58. यदि कोई कठिनाई हो तो कार्य परिषद् उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए पक्षकार राज्य से परामर्श करेगी । यदि किसी कठिनाई का समाधन नहीं होता है तो वह सम्मेलन को निर्दिष्ट की जाएगी ।
59. रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं के लिए विस्तृत सुविधा करारों में उक्त नाशन सुविधा के विनिर्दिष्ट लक्षणों और उसके प्रचालन की रीति को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित विनिर्दिष्ट किया जाएगा :-
(क) विस्तृत स्थल पर निरीक्षण प्रक्रियाएं; और
(ख) स्थल पर उपकरणों के लगातार मानीटरिंग और निरीक्षकों की वास्तविक उपस्थिति के माध्यम से सत्यापन के लिए उपबंध ।
60. निरीक्षकों को इस अभिसमय के अनुसरण में सुविधा में नाशन प्रारंभ होने से 60 दिन से अन्यून पूर्व प्रत्येक रासायनिक नाशन सुविधा तक पहुंच प्रदान की जाएगी । ऐसी पहुंच, निरीक्षण उपकरण के स्थापन, इस उपकरण के निरीक्षण करने और इसके प्रचालन का परीक्षण करने तथा उक्त सुविधा का अंतिम इंजीनियरी पुनर्विलोकन करने के प्रयोजन हेतु पर्यवेक्षण करने के प्रयोजन के लिए होगी । ऐसी किसी विद्यमान सुविधा की दशा में जहां रासायनिक आयुध नाशन पहले ही आरम्भ हो चुका है, नाशन संक्रियाएं उस अपेक्षित न्यूनतम अवधि के लिए जो 60 दिन से अधिक की नहीं होगी, निरीक्षण उपकरण के स्थापन और परीक्षण के लिए रोक दी जाएगी । उक्त परीक्षण और पुनर्विलोकन के परिणाम पर निर्भर रहते हुए उक्त पक्षकार राज्य और तकनीकी सचिवालय, उक्त सुविधा के लिए विस्तृत सुविधा करार में परिवर्धन या या परिवर्तन के लिए करार कर सकेंगे ।
61. निरीक्षित पक्षकार राज्य, किसी रासायनिक आयुध नाशन सुविधा पर निरीक्षण दल के नेता को किसी रासायनिक आयुध भंडारण सुविधा से उस नाशन सुविधा के लिए रासायनिक आयुधों की लदाई के प्रस्थान से चार घंटे से अन्यून पूर्व लिखित में अधिसूचित करेगा । इस अधिसूचना में भंडारण सुविधा का नाम, प्रस्थान और आगमन का प्राक्कलित समय, परिवहन किए जाने वाले रासायनिक आयुधों का विनिर्दिष्ट प्रकार और मात्रा अन्तर्विष्ट होगी तथा यह भी अन्तर्विष्ट होगा कि कोई टैग लगा मद भेजा जा रहा है और उक्त परिवहन की पद्धति क्या है । इस अधिसूचना में एक से अधिक लदाई की सूचना भी सम्मिलित की जा सकेगी । निरीक्षण दल के नेता को इस अधिसूचना में किसी परिवर्तन को लिखित में तत्परता से अधिसूचित किया जाएगा ।
रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में रासायनिक आयुध भण्डारण सुविधाएं :
62. निरीक्षक, नाशन सुविधा में रासायनिक आयुधों के आगमन और इन रासायनिक आयुधों के भंडार करने का सत्यापन करेंगे । निरीक्षक, प्रत्येक लदाई की सूची का, रासायनिक आयुधों के नाशन से पूर्व, सुविधा सुरक्षा विनियमों से संगत करार पाई प्रक्रियाओं का प्रयोग करते हुए सत्यापन करेंगे । वे नाशन से पूर्व रासायनिक आयुधों की यथार्थ सूची तैयार करने के लिए यथा उपयुक्त, करार पाई मुहरें, चिह्नक या अन्य सूची नियंत्रण प्रक्रिया अपनाएंगे ।
63. जब तक और जहां तक ये रासायनिक आयुध, रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं में स्थित रासायनिक आयुध भंडारण सुविधाओं में भंडारित हैं, ये भंडारण सुविधाएं सुसंगत सुविधा करारों के अनुरूप व्यवस्थित सत्यापन के अधीन होंगी ।
64. किसी क्रियाशील नाशन चरण के अन्त में निरीक्षक, उन रासायनिक आयुधों की एक सूची तैयार करेंगे जिन्हें नष्ट किए जाने के लिए भंडारण सुविधा से हटा लिया गया है, वे पैरा 62 में यथानिर्दिष्ट सूची नियंत्रण प्रक्रिया अपनाते हुए शेष रासायनिक आयुधों की सूची की यथार्थता का सत्यापन करेंगे ।
रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं में व्यवस्थित स्थल पर सत्यापन उपाय :
65. निरीक्षकों को नाशन के संपूर्ण क्रियाशील चरण के दौरान ऐसी सुविधाओं में स्थित रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं और रासायनिक आयुध भंडारण सुविधाओं पर अपने क्रियाकलाप करने के लिए पहुंच प्रदान की जाएगी ।
66. यह आश्वस्त करने के लिए कि किसी भी रासायनिक आयुध को किसी दूसरी दिशा में नहीं भेजा गया है और नाशन प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, प्रत्येक रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में निरीक्षकों को अपनी वास्ताविक उपस्थिति और स्थल पर उपकरणों से मानीटरिंग द्वारा निम्नलिखित का सत्यापन करने का अधिकार होगा :-
(क) सुविधा में रासायनिक आयुधों की प्राप्ति;
(ख) रासायनिक आयुधों के लिए अस्थायी धारण क्षेत्र और उस क्षेत्र में भंडारित रासायनिक आयुधों का विनिर्दिष्ट प्रकार और उनकी मात्रा;
(ग) नष्ट किए जाने वाले रासायनिक आयुधों का विशिष्ट प्रकार और उनकी मात्रा;
(घ) नाशन की प्रक्रिया;
(ङ) नाशन के अंतिम उत्पाद;
(च) धातु पुर्जों की विकृति; और
(छ) नाशन प्रक्रिया और सुविधा का समग्र रूप से एकीकरण ।
67. निरीक्षकों को रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं में अस्थायी धारण क्षेत्रों में स्थित युद्ध सामग्री, युक्तियों या
68. उस सीमा तक जहां तक यह निरीक्षण की अपेक्षाओं को पूरा करती है, समुचित आंकड़ों के अधिप्रमाणन के साथ नेमी सुविधा संक्रिया से प्राप्त जानकारी निरीक्षण प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त की जाएगी ।
69. प्रत्येक नाशन अवधि के पूरा होने के बाद तकनीकी सचिवालय, रासायनिक आयुधों की अभिहित मात्रा के नाशन के पूरे होने की रिपोर्ट देने वाले पक्षकार राज्य की घोषणा की पुष्टि करेगा ।
70. निरीक्षकों को सुविधा करारों के अनुसार :-
(क) रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं के सभी भागों तक और ऐसी सविधाओं में स्थित रासायनिक आयुध भंडारण सुविधाओं तक जिसके अंतर्गत कोई युद्ध सामग्री, युक्ति, प्रपुंज आधान या अन्य आधान भी होंगे, निर्विघ्न पहुंच होगी । निरीक्षित किए जाने वाली मदों का चयन निरीक्षकों द्वारा उस सत्यापन योजना के अनुसार किया जाएगा जिस पर निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा सहमति प्रदान की गई है और जिसका कार्य परिषद् द्वारा अनुमोदन किया गया है ;
(ख) नाशन प्रक्रिया के दौरान नमूनों के व्यवस्थित स्थल पर विश्लेषण का मानीटरिंग करना ; और
(ग) नाशन सुविधा या उस पर भंडारण सुविधा पर किसी युक्ति, प्रपुंज आधानों या अन्य आधनों से उनके अनुरोध पर लिए गए नमूनों, यदि आवश्यक हों, की प्राप्ति ।
पैरा 4(ख)
पुराने रासायनिक आयुध और परित्यक्त रासायनिक आयुध
अ. साधारण
1. पुराने रासायनिक आयुधों को खंड आ में यथा उपबंधित के अनुसार नष्ट किया जाएगा ।
2. परित्यक्त रासायनिक आयुधों को जिनमें वे रासायनिक आयुध भी हैं जो अनुच्छेद 2, पैरा 5(ख) की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, खंड इ के लिए यथा उपबंधित के अनुसार नष्ट किया जाएगा ।
आ. पुराने रासायनिक आयुधों के लिए अवधि
3. ऐसा पक्षकार राज्य जिसके राज्यक्षेत्र में अनुच्छेद 2, पैरा 5(क) में यथा परिभाषित पुराने रासायनिक आयुध हैं, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय को सभी उपलभ्य सुसंगत जानकारी, जिसमें जहां तक संभव हो, उन पुराने आयुधों की अवस्थिति, प्रकार, मात्रा और वर्तमान स्थिति सम्िमलित है, प्रस्तुत करेगा ।
अनुच्छेद 2, पैरा 5(ख) में यथा परिभाषित पुराने रासायनिक आयुधों की दशा में, पक्षकार राज्य इस उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 1 से 3 में विनिर्दिष्ट सूचना सहित अनुच्छेद 3, पैरा 1(ख)(i) के अनुसरण में एक घोषणा तकनीकी सचिवालय को प्रस्तुत करेगा ।
4. कोई पक्षकार राज्य जिसे इसके लिए इस अधिनियम के प्रवर्तन में आने के पश्चात् पुराने रासायनिक आयुधों का पता चला है, पुराने रासायनिक आयुधों के पता चलने के बाद 180 दिन के अपश्चात् पैरा 3 में विनिर्दिष्ट सूचना तकनीकी सचिवालय को प्रस्तुत करेगा ।
5. तकनीकी सचिवालय पैरा 3 और पैरा 4 के अनुसरण में प्रस्तुत जानकारी का सत्यापन करने के लिए यथा आवश्यक आरंभिक निरीक्षण या आगे और निरीक्षण करेगा तथा विशिष्टतः यह अवधारण करने के लिए कि पुराने रासायनिक आयुध अनुच्छेद 2, पैरा 5 में यथा विनिर्दिष्ट पुराने रासायनिक आयुधों की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं अथवा नहीं । वर्ष 1925 और 1946 के बीच उत्पादित रासायनिक आयुधों की उपयोग्यता का अवधारण करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
6. कोई पक्षकार राज्य ऐसे पुराने आयुधों को जिनकी तकनीकी सचिवालय द्वारा इस रूप में पुष्टि कर दी गई है कि वे अनुच्छेद 2, पैरा 5(क) में दी गई परिभाषा के अंतर्गत आते हैं, विषालु अपशिष्ट के रूप में मानेगा । वह तकनीकी सचिवालय को, विषालु अपशिष्ट के रूप में उन पुराने रासायनिक आयुधों को अपने राष्ट्रीय विधान के अनुसार नष्ट करने या अन्यथा व्ययन के लिए उठाए जाने वाले उपायों की बाबत सूचित करेगा ।
7. पैरा 3 से पैरा 5 के अधीन रहते हुए, पक्षकार राज्य, ऐसे पुराने रासायनिक आयुधों को जिनकी तकनीकी सचिवालय द्वारा अनुच्छेद 2, पैरा 5(ख) की परिभाषा के अन्तर्गत आने वाले के रूप में पुष्टि कर दी गई है, इस उपाबंध के अनुच्छेद 4 और भाग 4(क) के अनुसार नष्ट करेगा । पक्षकार राज्य के अनुरोध पर, कार्य परिषद् इन पुराने रासायनिक आयुधों के नाशन की समय-सीमा और क्रम के बारे में उपबंधों को उपांतरित कर सकेगी, यदि वह यह अवधारित करती है कि ऐसा करने से इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए कोई जोखिम पैदा नहीं होगा । उक्त अनुरोध में इन उपबंधों के उपांतरण के लिए विनिर्दिष्ट प्रस्ताव और प्रस्तावित उपांतरण के लिए कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण अन्तर्विष्ट होगा ।
इ. परित्यक्त रासायनिक आयुधों के लिए अवधि
8. ऐसा कोई पक्षकार राज्य जिसके राज्यक्षेत्र में परित्यक्त रासायनिक आयुध (जिसे इसमें इसके पश्चात् क्षेत्रीय पक्षकार राज्य" कहा गया है) है, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय को, परित्यक्त रासायनिक आयुधों से संबंधित उपलब्ध सभी सुसंगत जानकारी प्रस्तुत करेगा । इस जानकारी में, जहां तक संभव हो, परित्यक्त रासायनिक आयुधों के अवस्थान, प्रकार, मात्रा और वर्तमान स्थिति तथा परित्याग के बारे में जानकारी सम्मिलित होगी ।
9. कोई पक्षकार राज्य जिसे इसके लिए इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 180 दिन के अपश्चात् उक्त आयुधों का पता लगता है, तकनीकी सचिवालय को उन परित्यक्त रासायनिक आयुधों के पता लगाने के संबंध में सभी उपलभ्य सुसंगत जानकारी प्रस्तुत करेगा । इस जानकारी में, जहां तक संभव हो, परित्यक्त रासायनिक आयुधों की अवस्थिति, प्रकार, मात्रा और वर्तमान स्थिति तथा परित्याग के बारे में जानकारी सम्मिलत होगी ।
10. ऐसा पक्षकार राज्य जिसके परित्यक्त रासायनिक आयुध किसी अन्य पक्षकार राज्य (जिसे इसमें इसके पश्चात् परित्याग करने वाला पक्षकार राज्य" कहा गया है) के राज्यक्षेत्र में है, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय को परित्यक्त रासायनिक आयुधों से संबंधित सभी उपलब्ध सुसंगत जानकारी प्रस्तुत करेगा । इस जानकारी में, जहां तक संभव हो, परित्यक्त रासायनिक आयुधों के अवस्थान, प्रकार, मात्रा तथा उनकी वर्तमान स्थिति और परित्याग के बारे में जानकारी भी सम्मिलित होगी ।
11. तकनीकी सचिवालय पैरा 8 से 10 के अनुसरण में प्रस्तुत की गई समस्त उपलब्ध सुसंगत जानकारी का सत्यापन करने के लिए आरम्भिक निरीक्षण और यथा आवश्यक कोई और निरीक्षण करेगा तथा यह अवधारण करेगा कि क्या इस उपाबंध के भाग 4(क), पैरा 41 से 43 के अनुसार व्यवस्थित सत्यापन अपेक्षित है । यदि आवश्यक हो तो वह परित्यक्त रासायनिक आयुधों के उद्भव का सत्यापन करेगा और परित्याग और परित्यागकर्ता राज्य की पहचान से संबद्ध साक्ष्य स्थापित करेगा ।
12. तकनीकी सचिवालय की रिपोर्ट कार्य परिषद्, क्षेत्रीय पक्षकार राज्य और परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य या क्षेत्रीय पक्षकार राज्य द्वारा घोषित अथवा तकनीकी सचिवालय द्वारा इस इस रूप में पहचाने गए पक्षकार राज्य को कि उसने रासायनिक आयुधों को परित्यक्त कर दिया है प्रस्तुत की जाएगी । यदि प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध पक्षकार राज्यों में से किसी एक का रिपोर्ट से समाधान नहीं होता है तो उसे उस विषय को इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार सुलझाने का या विषय को शीघ्रतापूर्वक सुलझाने की दृष्टि से कार्य परिषद् के समक्ष लाने का अधिकार होगा ।
13. अनुच्छेद 1 के पैरा 3 के अनुसरण में क्षेत्रीय पक्षकार राज्य को उस पक्षकार राज्य से जो पैरा 8 से पैरा 12 तक के अनुसरण में परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य के रूप में स्थापित किया गया है, क्षेत्रीय पक्षकार राज्य के सहयोग से परित्यक्त रासायनिक आयुधों को नष्ट करने के प्रयोजन के लिए विचार-विमर्श करने हेतु अनुरोध करने का अधिकार होगा । वह तत्काल इस अनुरोध की तकनीकी सचिवालय को सूचना देगा ।
14. नाशन के लिए पारस्परिक करार पाई गई योजना बनाने की दृष्टि से क्षेत्रीय पक्षकार राज्य और परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य के बीच परामर्श, तकनीकी सचिवालय को पैरा 13 में निर्दिष्ट अनुरोध की सूचना दिए जाने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् प्रारंभ हो जाएगा । नाशन के लिए पारस्परिक करार पाई गई योजना तकनीकी सचिवालय को, पैरा 13 में निर्दिष्ट अनुरोध की सूचना तकनीकी सचिवालय को मिल जाने के बाद, 180 दिन के भीतर संप्रेषित की जाएगी । परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य और क्षेत्रीय पक्षकार राज्य के अनुरोध पर, कार्य परिषद्, नाशन के लिए पारस्परिक करार पाई गई योजना के संप्रेषण के लिए समय-सीमा बढ़ा सकेगी ।
15. परित्यक्त रासायनिक आयुधों के नाशन के प्रयोजन के लिए, परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य सभी आवश्यक वित्तीय, तकनीकी, विशेषज्ञ, सुविधा और साथ ही अन्य संसाधनों की व्यवस्था करेगा । क्षेत्रीय पक्षकार राज्य समुचित सहयोग प्रदान करेगा ।
16. यदि परित्यागकर्ता राज्य की पहचान नहीं की जा सकती या वह एक पक्षकार राज्य नहीं है तो क्षेत्रीय पक्षकार राज्य इन परित्यक्त रासायनिक आयुधों का नाशन सुनिश्चित करने के लिए संगठन और अन्य पक्षकार राज्यों से इन परित्यक्त रासायनिक आयुधों के नाशन में सहायता प्रदान करने का अनुरोध कर सकता है ।
17. पैरा 8 से 16 तक के अधीन रहते हुए इस उपाबंध के अनुच्छेद 4 और भाग 4(क), परित्यक्त रासायनिक आयुधों को लागू होंगे । परित्यक्त रासायनिक आयुध जो अनुच्छेद 2, पैरा 5(ख) में की पुराने रासायनिक आयुधों की परिभाषा के अंतर्गत भी आते हैं, कार्य परिषद्, क्षेत्रीय पक्षकार राज्य के अनुरोध पर, व्यष्टिक रूप से या परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य के साथ मिलकर, नाशन संबंधी उपबंधों को उपांतरित कर सकती है या आपवादिक मामलों में उनका लागू होना निलंबित कर सकती है, यदि वह यह अवधारित करती है कि ऐसा करने से इस अधिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए कोई जोखिम नहीं होगा । ऐसे परित्यक्त रासायनिक आयुधों की दशा में जो अनुच्छेद 2, पैरा 5(ख) में पुराने रासायनिक आयुधों की परिभाषा के अन्तर्गत नहीं आते हैं, कार्य परिषद्, क्षेत्रीय पक्षकार राज्य के अनुरोध पर, व्यष्टिक रूप से या परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य के साथ मिलकर, आपवादिक परिस्थितियों में नाशन की समय-सीमा और उसके क्रम को उपांतरित कर सकती है, यदि वह ऐसा अवधारित करती है कि ऐसा करने से इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए जोखिम नहीं होगा । इस पैरा में यथा निर्दिष्ट किसी अनुरोध में उपबंधों के उपांतरण के लिए विनिर्दिष्ट प्रस्थापनाएं और प्रस्तावित उपांतरण के लिए कारणों की विस्तृत व्याख्या अंतर्विष्ट होगी ।
18. पक्षकार राज्य आपस में परित्यक्त रासायनिक आयुधों के नाशन से संबंधित करार अथवा समझौता कर सकते हैं । कार्य परिषद् क्षेत्रीय पक्षकार राज्य के अनुरोध पर, व्यष्टिक रूप से या परित्यागकर्ता पक्षकार राज्य के साथ मिलकर यह विनिश्चय कर सकती है कि ऐसे करारों या समझौतों के चयनित उपबंध इस धारा के उपबंधों पर अग्रता रखेंगे, यदि वह ऐसा अवधारित करता है कि करार या समझौतों में परित्यक्त रासायनिक आयुधों का नाशन पैरा 17 के अनुसार सुनिश्चित होता है ।
भाग 5
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाशन और अनुच्छेद 5 के अनुसरण में उसका सत्यापन
क. घोषणाएं
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं की घोषणा
1. अनुच्छेद 3 के पैरा 1(ग)(ii) के अनुसरण में किसी पक्षकार राज्य द्वारा रासायनिक आयुध सुविधाओं की घोषणा में प्रत्येक सुविधा के लिए निम्नलिखित बातें होंगी :-
(क) सुविधा का नाम, स्वामियों के नाम और उन कंपनियों या उद्यमों के नाम जो 1 जनवरी, 1946 से सुविधा चला रहे हैं ;
(ख) सुविधा की सही अवस्थिति, जिसमें काम्पलेक्स का पता, अवस्थान, काम्पलेक्स के भीतर सुविधा के विनिर्दिष्ट भवन तथा संरचना संख्यांक सहित, यदि कोई है, अवस्थिति भी है ;
(ग) इस बारे में एक कथन कि क्या यह सुविधा उन रसायनों के विनिर्माण के लिए है जो रासायनिक आयुधों के रूप में परिभाषित हैं अथवा क्या यह सुविधा रासायनिक आयुधों के भरण के लिए है, अथवा इन दोनों के लिए है ;
(घ) वह तारीख जब सुविधा का सन्निर्माण पूरा हुआ था और वे अवधियां जिनके दौरान सुविधा में कोई उपांतरण किए गए थे जिनके अंतर्गत ऐसे नए अथवा उपांतरित उपस्कर का संस्थापन भी है जिसने सुविधा की उत्पादन प्रक्रिया संबंधी विशेषताओं को महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तित किया था ;
(ङ) ऐसे रासायनिक आयुधों के रूप में परिभाषित रसायनों की सूचना जो इस सुविधा में विनिर्मित किए गए थे ; युद्ध सामग्री, युक्तियां और आधान जो सुविधा में भरे गए थे और ऐसे विनिर्माण अथवा भराई के आरंभ होने और उनकी समाप्ति की तारीखें :-
(i) रासायनिक आयुधों के रूप में परिभाषित उन रसायनों के लिए जो सुविधा में विनिर्मित किए गए थे, ऐसी सूचना विनिर्मित रसायनों की विनिर्दिष्ट किस्म के रूप में वर्तमान इंटरनेशनल यूनियन आफ प्योर एण्ड अप्लाइड केमिस्ट्री (आई०यू०पी०ए०सी०) के अनुसार रासायनिक नाम, नाम पद्धति, संरचनात्मक सूत्र और केमिकल एक्सट्रेक्ट सर्विस रजिस्ट्री संख्यांक, यदि समनुदेशित हो, और टनों में रसायन के भार द्वारा अभिव्यक्त प्रत्येक रसायन की मात्रा उपदर्शित करते हुए व्यक्त की जाएगी ;
(ii) युद्ध सामग्री, युक्तियों और आधानों के लिए जो सुविधा में भरे गए थे, ऐसी जानकारी भरे गए रासायनिक आयुध की विनिर्दिष्ट किस्म और प्रति इकाई रसायन भराव के भार के रूप में व्यक्त की जाएगी ;
(च) रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा की उत्पादन क्षमता :-
(i) ऐसी सुविधा के लिए जहां रासायनिक आयुध विनिर्मित किए गए थे, उत्पादन क्षमता वस्तुतः प्रयुक्त प्रौद्योगिक प्रक्रिया के आधार पर या यदि प्रक्रियाएं वस्तुतः प्रयुक्त नहीं हुई हैं तो उस दशा में सुविधा में प्रयोग की जाने के लिए योजनाबद्ध प्रक्रिया के आधार पर विनिर्दिष्ट पदार्थ के विनिर्माण के लिए वार्षिक, परिणात्मक संभावना के रूप में व्यक्त की जाएगी ;
(ii) ऐसी सुविधा के लिए जहां रासायनिक आयुध भरे गए थे, उत्पादन क्षमता रसायन की उस प्रमात्रा के रूप में व्यक्त की जाएगी जिसे वह सुविधा एक वर्ष में रासायनिक आयुध को प्रत्येक विनिर्दिष्ट किस्म में भर सकती है ;
(छ) ऐसी प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए जो नष्ट नहीं की गई है, सुविधा का वर्णन जिसमें निम्नलिखित हों :-
(i) स्थल आरेख ;
(ii) सुविधा का क्रमदर्शी आरेख ; और
(iii) सुविधा पर स्थित भवनों की सूची, सुविधा के विशेषित उपस्कर और ऐसे उपस्कर के लिए किन्हीं फालतू पुर्जों की सूची ;
(ज) सुविधा की वर्तमान प्रास्थिति, जिसमें निम्नलिखित हों :-
(i) वह तारीख जब सुविधा में रासायनिक आयुध अंतिम बार तैयार किए गए थे ;
(ii) क्या सुविधा नष्ट कर दी गई है, उसके नाशन की तारीख और रीति सहित, और
(iii) क्या सुविधा इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पूर्व रासायनिक आयुधों के उत्पादन से असंबद्ध किसी क्रियाकलाप के लिए प्रयुक्त या उपांतरित की गई है और यदि ऐसा है तो जो उपांतरण किए गए हैं उनके बारे में जानकारी, वह तारीख जब ऐसे गैर-रासायनिक आयुधों से संबद्ध क्रियाकलाप आरम्भ हुआ था और ऐसे क्रियाकलाप की, यदि लागू हो, तो उत्पाद की किस्म उपदर्शित करते हुए प्रकृति ;
(झ) उन उपायों का विनिर्देश जो पक्षकार राज्य द्वारा बन्द करने के लिए किए गए हैं और उन उपायों का वर्णन जो सुविधा को निष्क्रिय बनाने के लिए पक्षकार राज्य द्वारा किए गए हैं या किए जाएंगे ;
(ञ) निष्क्रियित सुविधा में सुरक्षा और संरक्षा के लिए क्रियाकलाप के सामान्य पैटर्न का वर्णन ; और
(ट) इस बारे में कथन कि क्या सुविधा रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए संपरिवर्तित की जाएगी और यदि ऐसा है तो ऐसे संपरिवर्तनों की तारीखें ।
अनुच्छेद 3 के पैरा 1(ग)(iii) के अनुसरण में रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं की घोषणा
2. अनुच्छेद 3 के पैरा 1(ग)(iii) के अनुसरण में रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं की घोषणा में ऊपर पैरा 1 में विनिर्दिष्ट सभी सूचनाएं होंगी । यह उस पक्षकार राज्य का दायित्व है जिसके राज्यक्षेत्र में उक्त सुविधा अवस्थित है या अवस्थित की गई है कि वह अन्य राज्य से यह सुनिश्चित करने के लिए कि घोषणा की गई है, समुचित इंतजाम करे । यदि वह पक्षकार राज्य जिसके राज्यक्षेत्र में सुविधा अवस्थित है या अवस्थित की गई है, इस दायित्व को पूरा करने में समर्थ नहीं है तो वह उसके लिए कारणों का कथन करेगा ।
पूर्व अंतरणों और प्राप्तियों की घोषणा
3. वह पक्षकार राज्य जिसने 1 जनवरी, 1946 से रासायनिक आयुध उत्पादन उपस्कर अंतरित किए हैं या प्राप्त किए हैं, इन अंतरणों और प्राप्तियों की, अनुच्छेद 3 के पैरा 1(ग)(iv) के अनुसरण में और नीचे पैरा 5 के अनुसार घोषणा करेगा । जब 1 जनवरी, 1946 और 1 जनवरी, 1970 के बीच की अवधि के लिए ऐसे उपस्कर के अंतरण और प्राप्ति की संपूर्ण विनिर्दिष्ट सूचना उपलभ्य नहीं है तो पक्षकार राज्य जो भी सूचना अभी उपलभ्य है, उसकी घोषणा करेगा और यह स्पष्टीकरण देगा कि पूर्ण घोषणा क्यों नहीं प्रस्तुत की जा सकती ।
4. पैरा 3 में निर्दिष्ट रासायनिक आयुध उत्पादन उपस्कर से निम्नलिखित अभिप्रेत है :-
(क) विशेषित उपस्कर ;
(ख) रासायनिक आयुध नियोजन से प्रत्यक्षतः संबंधित उपयोग के लिए विनिर्दिष्ट रूप से अभिकल्पित उपस्कर के उत्पादन के लिए उपस्कर ; और
(ग) रासायनिक युद्ध सामग्री के लिए गैर-रासायनिक पुर्जों के उत्पादन के लिए अनन्यतः अभिकल्पित या प्रयुक्त उपस्कर ।
5. रासायनिक आयुध उत्पादन उपस्कर के अंतरण और प्राप्ति से संबंधित घोषणा में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होगा :-
(क) किसने रासायनिक आयुध उत्पादन उपस्कर प्राप्त/अंतरित किया था ;
(ख) ऐसे उपस्कर की पहचान ;
(ग) अंतरण या प्राप्ति की तारीख ;
(घ) क्या उपस्कर नष्ट कर दिया गया था, यदि ज्ञात हो ; और
(ङ) चालू व्ययन, यदि ज्ञात हो ।
नाशन के लिए साधारण योजनाओं का प्रस्तुत किया जाना
6. प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए, पक्षकार राज्य निम्नलिखित सूचना देगा :-
(क) किए जाने वाले उपायों के लिए परिकल्पित समय-सीमा ; और
(ख) विनाश की पद्धतियां ।
7. ऐसी प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए जिसे पक्षकार राज्य अस्थायी रूप से रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में संपरिवर्तित करना चाहता है, पक्षकार राज्य निम्नलिखित सूचनाएं देगा :-
(क) नाशन सुविधा में संपरिवर्तन के लिए परिकल्पित समय-सीमा ;
(ख) रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के रूप में सुविधा के उपयोग के लिए परिकल्पित समय-सीमा ;
(ग) नई सुविधा का वर्णन ;
(घ) विशेष उपस्कर के नाशन पद्धति ;
(ङ) संपरिवर्तित सुविधा के, रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए उसका उपयोग किए जाने के पश्चात्, नाशन के लिए समय-सीमा ; और
(च) संपरिवर्तित सुविधा के नाश की पद्धति ।
नाशन के लिए वार्षिक योजनाओं और नाशन संबंधी वार्षिक रिपोर्टों का प्रस्तुत किया जाना
8. पक्षकार राज्य, आगामी नाशन वर्ष के प्रारंभ से कम से कम 90 दिन पूर्व नाशन की वार्षिक योजना प्रस्तुत करेगा । वार्षिक योजना में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होंगे :-
(क) नष्ट की जाने वाली क्षमता ;
(ख) उन सुविधाओं के नाम और अवस्थिति जहां नाश किया जाएगा ;
(ग) उन भवनों और उपस्करों की सूची जो प्रत्येक सुविधा में नष्ट किए जाएंगे ; और
(घ) नाशन की योजनाबद्ध पद्धतियां ।
9. कोई पक्षकार राज्य पूर्ववर्ती नाशन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् 90 दिन के भीतर नाशन संबंधी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा । वार्षिक रिपोर्ट में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होंगे :-
(क) नष्ट की गई क्षमता ;
(ख) उस प्रत्येक सुविधा का नाम और अवस्थिति जहां नाशन किया गया ;
(ग) उन भवनों और उपस्करों की सूची जो प्रत्येक सुविधा पर नष्ट किए गए थे ;
(घ) नाशन की पद्धतियां ।
10. अनुच्छेद 3 पैरा 1(ग)(iii) के अनुसरण में घोषित प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए यह उस पक्षकार राज्य का उत्तरदायित्व है जिसके राज्यक्षेत्र में सुविधा अवस्थित है या अवस्थित की गई है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित इंतजाम करे कि ऊपर पैरा 6 से 9 तक में विनिर्दिष्ट घोषणाएं की गई हैं । यदि वह पक्षकार राज्य जिसके राज्यक्षेत्र में सुविधा अवस्थित है या अवस्थित की गई है, इस बाध्यता को पूरा करने में असमर्थ है तो वह उसके लिए कारणों का कथन करेगा ।
ख. नाशन
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के नाशन के लिए साधारण सिद्धांत
11. प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुच्छेद 5 और इस भाग में अधिकथित सिद्धांतों के अनुसार रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के नाशन के लिए उपयोजित की जाने वाली पद्धतियों का विनिश्चय करेगा ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं को बन्द करने के लिए सिद्धांत और पद्धतियां
12. रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा को बन्द करने का प्रयोजन उसे निष्क्रिय बना देना है ।
13. बन्द करने के लिए करार पाए उपाय, पक्षकार राज्य द्वारा प्रत्येक सुविधा की विनिर्दिष्ट विशेषताओं को सम्यक् रूप से ध्यान में रखते हुए किए जाएंगे, ऐसे उपायों में, अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित होंगे :-
(क) करार पाए क्रियाकलापों के सिवाय सुविधा के विशेषित भवनों और मानक भवनों के अधिभोग का प्रतिषेध ;
(ख) रासायनिक आयुधों के उत्पादन से सीधे संबंधित उपस्कर का पृथक्करण, जिसके अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ प्रक्रिया नियंत्रण उपस्कर और उपयोगिताएं भी हैं ;
(ग) रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के प्रचालन की सुरक्षा के लिए अनन्यतः प्रयुक्त संरक्षी संस्थापनों और उपस्करों का बंद किया जाना ;
(घ) किसी विशेषित प्रक्रिया उपस्कर में या से संश्लेषण, पृथक्करण या उन रसायनों के जो रासायनिक आयुधों के रूप में परिभाषित हैं, शोधन के लिए रसायनों के अभिवर्धन या रसायनों के हटाए जाने के निवारण के लिए ब्लाइंड फ्लैगों और अन्य युक्तियों का संस्थापन, भण्डारण टैंक या रासायनिक आयुधों को भरने के लिए मशीन, तापन, प्रशीतन या बिजली या अन्य ऊर्जा स्रोत की ऐसे उपस्कर, भंडारण या मशीनों को आपूर्ति ; और
(ङ) करार पाए क्रियाकलापों के लिए अपेक्षित को छोड़कर रेल, सड़क या अन्य रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा तक भारी परिवहन के लिए पहुंच मार्गों का व्यवधान ।
14. जब रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा बन्द रहती है तब पक्षकार राज्य सुविधा में सुरक्षा और वास्तविक संरक्षा संबंधी क्रियाकलाप चालू रख सकेगा ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का उनके नाशन से पूर्व तकनीकी अनुरक्षण
15. कोई पक्षकार राज्य केवल सुरक्षा के कारणों से, किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा में मानक अनुरक्षण क्रियाकलाप जिनमें दृश्य निरीक्षण, निवारक अनुरक्षण और दिन प्रतिदिन मरम्मत भी है, कर सकता है ।
16. सभी योजनाबद्ध अनुरक्षण क्रियाकलाप, नाशन के लिए साधारण और विस्तृत योजनाओं में विनिर्दिष्ट होंगे । अनुरक्षण क्रियाकलापों में निम्नलिखित शामिल नहीं होंगे :-
(क) किसी प्रक्रिया-उपस्कर का प्रतिस्थापन ;
(ख) रासायनिक प्रक्रिया-उपस्कर की विशेषताओं का उपान्तरण ;
(ग) किसी किस्म के रसायन का उत्पादन ।
17. सभी अनुरक्षण संबंधी क्रियाकलाप तकनीकी सचिवालय द्वारा मानीटरिंग के अधीन होंगे ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं में अस्थायी संपरिवर्तन के लिए सिद्धांत और पद्धतियां
18. रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में अस्थायी संपरिवर्तन से संबंधित उपाय यह सुनिश्चित करेंगे कि अस्थायी रूप से संपरिवर्तित सुविधाओं के लिए अवधि कम से कम उतनी कठोर हो जितनी कि उन रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं की अवधि है जो संपरिवर्तित नहीं की गई है ।
19. इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पूर्व रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं में संपरिवर्तित उन रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं को रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के प्रवर्ग के अधीन घोषित किया जाएगा ।
वे निरीक्षकों द्वारा उनके आरंभिक परिदर्शन के अधीन होंगे जो इन सुविधाओं के बारे में जानकारी की शुद्धता की पुष्टि करेंगे । ऐसे सत्यापन की भी अपेक्षा की जाएगी कि इन सुविधाओं का संपरिवर्तन ऐसी रीति में किया गया था जिससे वे रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के रूप में अप्रवर्तनीय हो जाएंगी और वे सुविधाओं के लिए उपबंधित उन उपायों की परिधि के अंतर्गत आ जाएंगी जो इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् अप्रवर्तनीय हो जाएंगी ।
20. ऐसा पक्षकार राज्य जो रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का संपरिवर्तन करना चाहता है, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात्, 30 दिन के अपश्चात् या अस्थायी संपरिवर्तन के बारे में विनिश्चय लिए जाने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय को एक साधारण सुविधा परिवर्तन योजना और तत्पश्चात् वार्षिक योजना प्रस्तुत करेगा ।
21. यदि किसी पक्षकार राज्य को ऐसी रासायनिक आयुध नाशन सुविधा को एक अतिरिक्त रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के रूप में संपरिवर्तित करने की आवश्यकता पड़ती है जिसे इस अभिसमय के प्रवृत्त होने पर बन्द कर दिया गया था तो वह इसके तकनीकी सचिवालय को संपरिवर्तन के पहले 150 दिन से अन्यून पूर्व सूचित करेगा । तकनीकी सचिवालय पक्षकार राज्य के सहयोग से यह सुनिश्चित करेगा कि उस सुविधा के संपरिवर्तन के पश्चात् उसे रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के रूप में अप्रर्वतनीय बनाने के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं ।
22. ऐसी सुविधा जिसे रासायनिक आयुधों के नाशन के लिए संपरिवर्तित किया गया था, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रारंभ करने के लिए ऐसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा से अधिक उपयुक्त नहीं होगी जिसे बन्द कर दिया गया था और जो अनुरक्षणाधीन है । इसके पुनः संक्रियकरण में ऐसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए जिसे बन्द कर दिया गया है और जो निरीक्षणाधीन है, अपेक्षित समय से कम समय नहीं लगेगा ।
23. संपरिवर्तित रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाशन इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 10 वर्ष के अपश्चात् कर दिया जाएगा ।
24. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के संपरिवर्तन के लिए उपाय सुविधा-विशिष्ट होंगे और इसकी व्यष्टिक विशिष्टताओं पर निर्भर करेंगे ।
25. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा को रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में संपरिवर्तन करने के प्रयोजन के लिए अपनाए गए उपायों की संख्या किसी पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् अन्य रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं को निष्क्रिय बनाने के लिए उपबंधित उपायों की संख्या से कम नहीं होगी ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के नाशन से संबंधित सिद्धांत और पद्धतियां
26. कोई पक्षकार राज्य, रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा की परिभाषा के अन्तर्गत आने वाले उपस्करों और भवनों का विनाश निम्नानुसार करेगा :-
(क) सभी विशेषित उपस्कर और मानक उपस्कर भौतिक रूप से नष्ट किए जाएंगे ;
(ख) सभी विशेषित भवन और मानक भवन भौतिक रूप से नष्ट किए जाएंगे ।
27. कोई पक्षकार राज्य, खाली रासायनिक युद्ध सामग्री के उत्पादन के लिए सुविधाओं और रासायनिक आयुध नियोजन के लिए उपस्करों का नाशन निम्नानुसार करेगा :-
(क) ऐसी सुविधाओं को जिनका उपयोग अनन्यतः रासायनिक युद्ध सामग्री के लिए गैर-रासायनिक पुर्जों के या ऐसे उपस्कर के उत्पादन के लिए या जिन्हें रासायनिक आयुध नियोजन की बाबत सीधे उपयोग के लिए विशिष्ट रूप से डिजाइन किया जाता है, घोषित किया जाएगा और उन्हें नष्ट किया जाएगा । नाशन प्रक्रिया और इसका सत्यापन अनुच्छेद 5 और इस उपाबंध के इस भाग के उपाबन्धों के अनुसार जो रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के नाशन को शासित करते हैं, किया जाएगा ;
(ख) ऐसे सभी उपस्करों को, जिन्हें अनन्य रूप से रासायनिक युद्ध सामग्री के गैर-रासायनिक पुर्जों का उत्पादन करने के लिए डिजाइन किया गया है या उपयोग में लाया गया है, भौतिक रूप से नष्ट किया जाएगा । ऐसे उपस्कर को जिसके अंतर्गत विशेष रूप से अभिकल्पित सांचे और धातु को आकृति देने वाले ठप्पे (डाई) भी हैं, नाशन के लिए किसी विशेष स्थान पर ले जाया जा सकेगा ;
(ग) ऐसे उत्पादन क्रियाकलापों में प्रयुक्त सभी भवनों और मानक उपस्करों का नाशन किया जाएगा या उन्हें यथा आवश्यक पुष्टि के साथ, अनुच्छेद 9 के अधीन यथा उपबंधित परामर्श और निरीक्षण के माध्यम से ऐसे प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तित किया जाएगा जो इस अभिसमय के अधीनप प्रतिषिद्ध नहीं हैं ;
(घ) विनाश या संपरिवर्तन के दौरान, ऐसे प्रयोजनों के लिए जो इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं हैं क्रियाकलाप जारी रह सकेंगे ।
नाशन का आदेश
28. रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के नाशन का आदेश इस अभिसमय के अनुच्छेद 1 और अन्य अनुच्छेदों में विनिर्दिष्ट बाध्यताओं पर आधारित है, जिनके अन्तर्गत व्यवस्थित स्थल पर सत्यापन संबंधी बाध्यता भी है । नाशन अवधि के दौरान कम न होने वाली सुरक्षा के लिए पक्षकार राज्यों के हितों, नाशन प्रक्रम के आरंभिक दौर में विश्वास बनाने, रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाश करने के प्रक्रम में धीरे-धीरे अनुभव अर्जित करने और नाश के लिए चयनित सुविधाओं और पद्धतियों की वास्तविक विशेषताओं के होते हुए भी लागू होने को ध्यान में रखेगा । नाश का आदेश समकारिता के सिद्धांत पर आधारित है ।
29. पक्षकार राज्य, प्रत्येक नाशन अवधि के लिए यह अवधारित करेगा कि कौन सी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाश किया जाना है और नाश का कार्य इस प्रकार करेगा कि प्रत्येक नाशन अवधि के अन्त में पैरा 30 और पैर 31 में विनिर्दिष्ट से अधिक शेष न रहे ।
30. अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन करने वाली रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के संबंध में निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे :-
(क) पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद एक वर्ष के अपश्चात् ऐसी सुविधाओं का नाशन आरंभ कर देगा और उसे इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद 10 वर्ष के अपश्चात् पूरा कर लेगा । ऐसे राज्यों के लिए जो इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के समय पक्षकार हैं, इस संपूर्ण अवधि को तीन पृथक् नाशन अवधियों में, अर्थात् 2-5 वर्ष, 6-8 वर्ष और 9-10 वर्ष में विभाजित किया जाएगा । ऐसे राज्यों के लिए जो इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के अपश्चात् पक्षकार बने हैं, नाशन अवधियों को पैरा 28 और पैरा 29 को ध्यान में रखते हुए अंगीकार किया जाएगा ;
(ख) ऐसी सुविधाओं के लिए उत्पादन क्षमता का उपयोग तुलना कारक के रूप में किया जाएगा । इन्हें, द्विआधारी रासायनिक आयुधों के लिए विनिर्दिष्ट नियमों को ध्यान में रखते हुए एजेंट टनों में अभिव्यक्त किया जाएगा ;
(ग) इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् आठवें वर्ष की समाप्ति के लिए, करार पाए गए उत्पादन क्षमता के समुचित स्तर स्थापित किए जाएंगे । ऐसी उत्पादन क्षमता का नाशन जो सुसंगत स्तर से अधिक हो, पहली दो नाशन अवधियों के दौरान समान अभिवृद्धियों में किया जाएगा ;
(घ) किसी दी गई क्षमता की मात्रा के नाश के लिए अपेक्षा किसी ऐसी अन्य रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के नाश के लिए होगी जो अनुसूची 1 की सुविधा को प्रदाय करती है या वहां उत्पादित अनुसूची 1 के रसायनों द्वारा युद्ध सामग्री और युक्तियों की भराई करती हों ;
(ङ) ऐसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाएं, जिन्हें अस्थायी रूप से रासायनिक आयुधों के नाश के लिए संपरिवर्तित किया गया है, इस पैरा के उपबंधों के अनुसार क्षमता का नाश करने की बाध्यता के अधीन बनी रहेंगी ।
31. पक्षकार राज्य, पैरा 30 के अन्तर्गत न आने वाली रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का नाशन इस अभिसमय के इसके लिए प्रवृत्त होने के पश्चात् एक वर्ष के अपश्चात् प्रारंभ करेगा और इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद पांच वर्ष के अपश्चात् पूरा करेगा ।
नाशन के लिए ब्यौरेवार योजना
32. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा का नाशन आरंभ होने के 180 दिन से अन्यून पूर्व, पक्षकार राज्य, तकनीकी सचिवालय को सुविधा के नाशन के लिए ब्यौरेवार योजना प्रदान करेगा, जिसके अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित की बाबत पैरा 33(च) में निर्दिष्ट नाशन के सत्यापन के लिए प्रस्तावित उपाय भी हैं :-
(क) नाश की जाने वाली सुविधा में निरीक्षकों की उपस्थिति का समय ; और
(ख) घोषित तालिका पर प्रत्येक मद को लागू होने वाले उपायों के सत्यापन के लिए प्रक्रिया ।
33. प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के नाशन के लिए ब्यौरेवार योजनाओं में निम्नलिखित अंतर्विष्ट होगा :-
(क) नाशन प्रक्रिया की ब्यौरेवार समय सूची ;
(ख) सुविधा का विन्यास ;
(ग) प्रक्रिया प्रवाह आरेख ;
(घ) नाश किए जाने वाले उपस्कर, भवनों और अन्य मदों की ब्यौरेवार तालिका ;
(ङ) तालिका की प्रत्येक मद के संबंध में लागू किए जाने वाले उपाय ;
(च) सत्यापन के लिए प्रस्तावित उपाय ;
(छ) सुविधा के नाशन के दौरान पालन किए जाने वाले सुरक्षा/अभिरक्षा उपाय ; और
(ज) निरीक्षकों को प्रदान की जाने वाली कार्य और रहने की परिस्थितियां ।
34. यदि कोई पक्षकार राज्य किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा को अस्थायी रूप से रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में संपरिवर्तित करने का इरादा करता है तो वह कोई संपरिवर्तित क्रियाकलाप आरंभ करने के पहले 150 दिन से अन्यून पूर्व तकनीकी सचिवालय को अधिसूचित करेगा । अधिसूचना में-
(क) सुविधा का नाम, पता और अवस्थान विनिर्दिष्ट करेगा ;
(ख) स्थल आरेख प्रदान करेगा जिसमें रासायनिक आयुधों के नाशन में अन्तर्वलित सभी संरचनाएं और क्षेत्र उपदर्शित किए जाएंगे और अस्थायी रूप से संपरिवर्तित की जाने वाली रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा की सभी संरचनाओं की पहचान की जाएगी ;
(ग) रासायनिक आयुधों की किस्म और रासायनिक भराव की किस्म और मात्रा ;
(घ) नाशन की पद्धति विनिर्दिष्ट करेंगे ;
(ङ) प्रक्रिया प्रवाह आरेख प्रदान करेगा जिसमें यह उपदर्शित होगा कि उत्पादन प्रक्रिया और विशेषित उपस्कर के किस भाग को रासायनिक आयुधों के नाश के लिए परिवर्तित किया जाना है ;
(च) संपरिवर्तन द्वारा, यदि लागू हो, संभावित रूप से प्रभावित मुद्राओं और निरीक्षण उपस्कर को विनिर्दिष्ट करेगा ; और
(छ) अभिकल्पना करने के लिए आबंटित समय, सुविधा का अस्थायी संपरिवर्तन, उपस्कर का प्रतिष्ठापन, उपस्कर जांच, नाशन संक्रियाओं और समापन अभिज्ञात करने वाली अनुसूची प्रदान करेगा ।
35. ऐसी किसी सुविधा के नाश के संबंध में, जिसे रासायनिक आयुधों के नाश के लिए अस्थायी रूप से संपरिवर्तित किया गया था, जानकारी पैरा 32 और 33 के अनुसार दी जाएगी ।
ब्यौरेवार योजनाओं का पुनर्विलोकन
36. नाशन के लिए ब्यौरेवार योजना और पक्षकार राज्य द्वारा प्रस्तुत किए गए सत्यापन के संबंध में प्रस्तावित उपायों के आधार पर और पूर्व निरीक्षणों के अनुभव पर, तकनीकी सचिवालय, पक्षकार राज्य से घनिष्ठ रूप से परामर्श करके, सुविधा के नाशन के सत्यापन के लिए योजना तैयार करेगा । तकनीकी सचिवालय और पक्षकार राज्य के बीच समुचित उपायों से संबंधित किन्हीं मतभेदों को परामर्श द्वारा सुलझाना चाहिए । किसी अनसुलझे मामले को, इस अभिसमय के पूर्ण कार्यान्वयन को सुकर बनाने की दृष्टि से समुचित कार्रवाई के लिए कार्य परिषद् को अग्रेषित किया जाएगा ।
37. यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनुच्छेद 5 और इस भाग के उपबंधों का पालन किया गया है, नाशन और सत्यापन की संयुक्त योजनाओं के संबंध में कार्य परिषद् और पक्षकार राज्य की सहमति ली जाएगी । यह करार, नाशन के योजनाबद्ध आरंभ किए जाने के कम से कम 60 दिन पहले पूरा किया जाना चाहिए ।
38. कार्य परिषद् का प्रत्येक सदस्य, नाशन और सत्यापन की संयुक्त योजना की पर्याप्तता के बारे में किसी विवाद्यक पर तकनीकी सचिवालय से परामर्श करेगा । यदि कार्य परिषद् के किसी सदस्य द्वारा कोई आक्षेप नहीं किया जाता है तो योजना को कार्यान्वित कर दिया जाएगा ।
39. यदि कोई कठिनाइयां आती हैं तो कार्य परिषद् उन्हें दूर करने के लिए पक्षकार राज्य के साथ परामर्श शुरू करेगी । यदि कोई कठिनाइयां अनसुलझी रह जाती हैं तो उन्हें सम्मेलन को निर्दिष्ट किया जाएगा । नाशन की पद्धतियों के संबंध में किसी मतभेद का हल नाशन योजना के अन्य भागों के, जो स्वीकार्य हैं, निष्पादन में विलंब नहीं करेगा ।
40. यदि सत्यापन के पहलुओं पर कार्य परिषद् के साथ सहमति नहीं होती है या अनुमोदित सत्यापन योजना को कार्यान्वित नहीं किया जा सकता है तो नाशन का सत्यापन स्थल पर उपकरणों और निरीक्षक की वास्तविक उपस्थिति को लगातार मानीटर करके आरंभ किया जा सकेगा ।
41. नाशन और सत्यापन, तय की गई योजना के अनुसार आरंभ किया जाएगा । सत्यापन, नाशन प्रक्रिया में अनुचित रूप से बाधा नहीं डालेगा और नाशन के साक्ष्य के लिए स्थल पर निरीक्षकों की उपस्थिति में किया जाएगा ।
42. यदि अपेक्षित सत्यापन या नाशन कार्रवाइयां योजनाबद्ध रूप में नहीं की जाती हैं तो सभी पक्षकार राज्यों को वैसी सूचना दी जाएगी ।
ग. सत्यापन
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं की घोषणाओं के स्थल पर निरीक्षक के द्वारा सत्यापन
43. तकनीकी सचिवालय, पक्षकार राज्य के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के पश्चात् 90 से 120 दिन की अवधि में प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा का प्रारंभिक निरीक्षण करेगा ।
44. प्रारंभिक निरीक्षण के प्रयोजन निम्नलिखित होंगे :-
(क) यह पुष्टि करना कि रासायनिक आयुधों का उत्पादन बन्द कर दिया गया है और यह कि सुविधा को इस अभिसमय के अनुसार निष्क्रिय बना दिया गया है ;
(ख) उन उपायों से अपने को परिचित करने के लिए, जो सुविधा में रासायनिक आयुधों के उत्पादन को बन्द करने के लिए किए गए हैं, तकनीकी सचिवालय को अनुज्ञा देना ;
(ग) निरीक्षकों को अस्थायी मुद्राएं लगाने के लिए अनुज्ञा देना ;
(घ) निरीक्षकों को भवनों और विशेषित उपस्कर की सूचियों की पुष्टि करने की अनुज्ञा देना ;
(ङ) सुविधा में निरीक्षण क्रियाकलापों की, जिसके अन्तर्गत मुद्राओं को उपदर्शित करने वाले हस्तक्षेपण और अन्य कराए पाए गए उपस्कर भी हैं, जिन्हें सुविधा के संबंध में ब्यौरेवार सुविधा करार के अनुसरण में प्रतिष्ठापित किया जाएगा, योजना बनाने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करना ;
(च) सुविधा में निरीक्षण प्रक्रियाओं के संबंध में ब्यौरेवार करार के संबंध में प्रारंभिक घोषणाएं करना ।
45. निरीक्षक, प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा में घोषित मदों की सही सूची बनाने को सुकर बनाने के लिए समुचित रूप से करार पाई मुद्राओं, चिह्नांकों या अन्य सूची नियंत्रण प्रक्रियाओं को नियोजित करेंगे ।
46. निरीक्षक, करार पाई गई युक्तियों को प्रतिष्ठापित करेंगे जो यह उपदर्शित करने के लिए आवश्यक हों कि रासायनिक आयुधों के उत्पादन का कोई पुनर्रारम्भ हुआ है या किसी घोषित मद को हटाया गया है । वे निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा समापन क्रियाकलापों में बाधा न पहुंचाए जाने लिए आवश्यक पूर्वावधानी बरतेंगे । निरीक्षक युक्तियों के रखरखाव और अखंडता के सत्यापन के लिए वापस आ सकेंगे ।
47. यदि प्रारंभिक निरीक्षण के आधार पर महानिदेशक यह समझता है कि इस अभिसमय के अनुसार सुविधा को निष्क्रिय बनाने के लिए अतिरिक्त उपाय आवश्यक हैं, तो महानिदेशक, किसी पक्षकार राज्य के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 135 दिन के अपश्चात् यह अनुरोध कर सकेगा कि निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा इस अभिसमय के उसके संबंध में प्रवर्तन में आने 180 के दिन के अपश्चात् ऐसे उपाय क्रियान्वित किए जाएंगे । निरीक्षित पक्षकार राज्य अपने विवेकानुसार उस अनुरोध का समाधान कर सकेगा । यदि वह उक्त अनुरोध का समाधान नहीं करता है तो निरीक्षित पक्षकार राज्य और महानिदेशक इस मामले को सुलझाने के लिए परामर्श करेंगे ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का व्यवस्थित सत्यापन और उनके क्रियाकलापों का बन्द हो जाना
48. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के व्यवस्थित सत्यापन का प्रयोजन यह सुनिश्चित करना होगा कि इस सुविधा में रासायनिक आयुध के उत्पादन के किसी पुनः आरम्भ या घोषित मदों को हटाए जाने का पता लगाया जा सके ।
49. प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के संबंध में ब्यौरेवार सुविधा करार में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होगा :-
(क) ब्यौरेवार स्थल पर निरीक्षण प्रक्रियाएं, जिनके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हो सकेंगे :-
(i) दृष्टिगत परीक्षण ;
(ii) मुद्राओं और अन्य करार पाई गई युक्तियों की जांच और सर्विस करना ; और
(iii) नमूने प्राप्त करना और उनका विश्लेषण करना,
(ख) सुविधा की पता न लगी पुनः क्रियाशीलता को रोकने के लिए हस्तक्षेपदर्शी मुद्राओं और अन्य करार पाए गए उपस्कर के संबंध में प्रक्रियाएं, जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होंगे :-
(i) प्रतिष्ठापन की किस्म, प्रतिस्थापन और व्यवस्थाएं ; और
(ii) ऐसी मुद्राओं और उपस्कर का रखरखाव ; और
(ग) अन्य करार पाए गए उपाय ।
50. उस सुविधा के लिए निरीक्षण उपायों के संबंध में ब्यौरेवार करार में दी गई मुद्राओं या अन्य अनुमोदित उपस्कर को, इस अभिसमय के किसी पक्षकार राज्य के लिए प्रवर्तन में आने के 240 दिन के अपश्चात् लगाया जाएगा । निरीक्षकों को ऐसी मुद्राओं या उपस्कर के प्रतिष्ठापन के लिए प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा में जाने की अनुज्ञा होगी ।
51. तकनीकी सचिवालय को प्रत्येक कलैंडर वर्ष के दौरान, प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के चार निरीक्षण तक करने की अनुज्ञा दी जाएगी ।
52. महानिदेशक किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा का निरीक्षण या परिदर्शन करने के अपने विनिश्चय को निरीक्षण दल के व्यवस्थित निरीक्षण या परिदर्शन करने के लिए सुविधा पर योजनाबद्ध रूप से पहुंचने के 48 घंटे पूर्व निरीक्षित पक्षकार राज्य को अधिसूचना देगा । तत्कालिक समस्याओं को सुलझाने के लिए निरीक्षण या परिदर्शन की दशा में इस अवधि को कम किया जा सकेगा । महानिदेशक निरीक्षण या परिदर्शन का प्रयोजन विनिर्दिष्ट करेगा ।
53. निरीक्षकों को, सुविधा करार के अनुसार रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के सभी भागों में अबाधित प्रवेश करने का अधिकार होगा । निरीक्षण के किए जाने के लिए घोषित सूची के संबंध में मदों का चयन निरीक्षकों द्वारा किया जाएगा ।
54. स्थल पर व्यवस्थित निरीक्षणों की आवृत्ति अवधारित करने के लिए मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसार सम्मेलन द्वारा विचार और अनुमोदन किया जाएगा । निरीक्षित की जाने वाली विशिष्ट उत्पादन सुविधा का चयन, तकनीकी सचिवालय द्वारा ऐसी रीति में किया जाएगा कि जब सुविधा निरक्षित की जानी हो तब उसकी भविष्यवाणी प्रवारित की जा सके ।
रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के नाशन का सत्यापन
55. रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के नाशन के व्यवस्थित सत्यापन का प्रयोजन इसकी पुष्टि किया जाना होगा कि सुविधा को, इस अभिसमय के अधीन बाध्यताओं के अनुसार नष्ट कर दिया गया है और यह कि घोषित सूची की प्रत्येक मद को नाशन के संबंध में करार पाई ब्यौरेवार योजना के अनुसार नष्ट कर दिया गया है ।
56. जब घोषित सूची की सभी मदों को नष्ट कर दिया गया हो तो तकनीकी सचिवालय इस बाबत पक्षकार राज्य की घोषणा की पुष्टि करेगा । इस पुष्टिकरण के पश्चात् तकनीकी सचिवालय, रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के व्यवस्थित सत्यापन को समाप्त करेगा और निरीक्षकों द्वारा प्रतिष्ठापित की गई सभी युक्तियों और मानीटर करने वाले उपकरणों को तत्परता से हटा लेगा ।
57. इस पुष्टिकरण के पश्चात् पक्षकार राज्य यह घोषणा करेगा कि सुविधा नष्ट कर दी गई है ।
किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के रासायनिक आयुध नाशन सुविधा में अस्थायी संपरिवर्तन का सत्यापन
58. किसी उत्पादन सुविधा का अस्थायी रूप से संपरिवर्तन करने के आशय की प्रारंभिक अधिसूचना प्राप्त करने के 90 दिन के अपश्चात्, निरीक्षकों को, प्रस्तावित अस्थायी संपरिवर्तन से अपने आप को परिचित करने और संभावित निरीक्षण उपायों का जो संपरिवर्तन के दौरान अपेक्षित होंगे, अध्ययन करने के लिए सुविधा का परिदर्शन करने का अधिकार होगा ।
59. ऐसे किसी परिदर्शन के 60 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय और निरीक्षित पक्षकार राज्य, संक्रमण करार को, जिसमें अस्थायी संपरिवर्तन की अवधि के लिए अतिरिक्त निरीक्षण उपाय अंतर्विष्ट होंगे, निष्पादित करेंगे । संक्रमण करार में निरीक्षण प्रक्रिया जिसके अन्तर्गत मुद्रा का उपयोग, उपस्कर को मानीटर करना और निरीक्षण भी है, विनिर्दिष्ट करेंगे, जो यह विश्वास प्रदान करेगा कि संपरिवर्तन प्रक्रिया के दौरान रासायनिक आयुधों का कोई उत्पादन नहीं हुआ है । यह करार अस्थायी संपरिवर्तन के आरम्भ होने से सुविधा के रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के रूप में कार्य आरंभ करने तक प्रवर्तन में रहेगा ।
60. निरीक्षित पक्षकार राज्य, संक्रमण करार के पूरा कर दिए जाने तक सुविधा के ऐसे किसी भाग को नहीं हटाएंगे या संपरिवर्तित नहीं करेंगे या किसी मुद्रा या अन्य करार किए गए निरीक्षण उपस्कर को नहीं हटाएंगे या उपांतरित नहीं करेंगे जो इस अभिसमय के अनुसरण में प्रतिष्ठापित किए गए हैं ।
61. सुविधा के एक बार रासायनिक आयुध नाशन सुविधा के रूप में प्रचालन शुरू कर देने पर, यह रासायनिक आयुध नाशन सुविधाओं के संबंध में लागू इस उपाबंध के भाग 4(क) के उपबंधों के अधीन होगी । प्रचालन पूर्व अवधि के लिए व्यवस्थाएं संक्रमण करार द्वारा शासित होंगी ।
62. नाशन संक्रियाओं के दौरान, निरीक्षकों की अस्थायी रूप से संपरिवर्तित रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं के सभी हिस्सों में, जिसके अन्तर्गत वे भी हैं जो रासायनिक आयुध के नाशन में प्रत्यक्ष रूप में शामिल नहीं हैं पहुंच होगी ।
63. सुविधा में, इसे अस्थायी रूप से रासायनिक आयुध नाशन प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तित करने का कार्य आरंभ होने से पूर्व और सुविधा के रासायनिक आयुध नाशन की सुविधा के रूप में कार्य बंद करने के पश्चात् सुविधा रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं को लागू इस भाग के उपबंधों के अधीन होगी ।
घ. रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधाओं का इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन
64. इस अभिसमय के अधीन, प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के उपयोग के लिए कोई अनुरोध ऐसी किसी सुविधा के लिए किया जा सकेगा जिसका कोई पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के उसके संबंध में प्रवर्तन में आने से पहले ही ऐसे प्रयोजन के लिए उपयोग कर रहा है या उसकी ऐसे प्रयोजनों के लिए प्रयोग की योजना हो ।
65. किसी ऐसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए, जिसका उपयोग इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए तब किया जा रहा है, जब किसी पक्षकार राज्य के संबंध में वह अभिसमय प्रवर्तन में आता है तब अनुरोध इस अभिसमय के उस पक्षकार राज्य के संबंध में प्रवर्तन में आने के 30 दिन के अपश्चात् महानिदेशक को किया जाएगा । अनुरोध में, पैरा 1(ज)(iii) के अनुसार दिए गए आंकड़ों के अतिरिक्त, निम्नलिखित जानकारी अन्तर्विष्ट होगी :-
(क) अनुरोध के लिए एक ब्यौरेवार न्यायोचित्य ;
(ख) एक साधारण सुविधा संपरिवर्तन योजना, जिसमें निम्नलिखित विनिर्दिष्ट किया जाएगा :-
(i) सुविधा पर संचालित किए जाने वाले क्रियाकलाप की प्रकृति ;
(ii) यदि योजनाबद्ध क्रियाकलाप में रसायनों का उत्पादन, प्रसंस्करण या खपत अन्तर्वलित है तो प्रत्येक रसायन का नाम, सुविधा का क्रमदर्शी, आरेख और प्रतिवर्ष उत्पादित प्रसंस्कृत या खपत की जाने के लिए योजनाबद्ध मात्रा ;
(iii) कौन से भवन या संरचनाएं उपयोग किए जाने के लिए प्रस्तावित हैं और क्या उपान्तरण, यदि कोई हैं, प्रस्तावित हैं ;
(iv) किन भवनों या संरचनाओं को नष्ट किया गया है या नष्ट किए जाने के लिए प्रस्ताव किया गया है और नाशन संबंधी योजनाएं ;
(v) सुविधा में कौन सा उपस्कर उपयोग किया जाएगा ;
(vi) कौन सा उपस्कर हटाया और नष्ट किया गया है और किस उपस्कर को हटाने या नष्ट करने का प्रस्ताव किया गया है इसके नाशन के संबंध में योजनाएं ;
(vii) संपरिवर्तन के लिए प्रस्तावित अनुसूची, यदि लागू हो ; और
(viii) स्थल पर चलाई जा रही प्रत्येक अन्य सुविधा के क्रियाकलाप की प्रकृति ; और
(ग) इस बाबत एक ब्यौरेवार स्पष्टीकरण कि उपपैरा (ख) में दिए गए उपाय और पक्षकार राज्य द्वारा प्रस्तावित कोई अन्य उपाय सुविधा में अतिरिक्त रासायनिक आयुध उत्पादन सामर्थ्य का निवारण किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे ।
66. जब यह अभिसमय किसी पक्षकार राज्य के संबंध में प्रवर्तन में आता है तो ऐसी किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के लिए अनुरोध, जिसका उपयोग इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है, संपरिवर्तन के विनिश्चय के 30 दिन के अपश्चात्, किन्तु किसी भी दशा में पक्षकार राज्य के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के चार वर्ष अपश्चात् नहीं, महानिदेशक को, प्रस्तुत किया जाएगा । अनुरोध में निम्नलिखित जानकारी अन्तर्विष्ट होगी :-
(क) अनुरोध के लिए जिसमें इसकी आर्थिक आवश्यकताएं भी सम्मिलित हैं, एक ब्यौरेवार न्यायोचित्य ;
(ख) एक साधारण सुविधा संपरिवर्तन योजना, जिसमें निम्नलिखित विनिर्दिष्ट होगा :-
(i) सुविधा में किए जाने वाले योजनाबद्ध क्रियाकलाप की प्रकृति ;
(ii) यदि योजनाबद्ध क्रियाकलाप में रसायनों का उत्पादन, प्रसंस्करण या खपत अंतर्वलित है तो प्रत्येक रसायन का नाम, सुविधा का क्रमदर्शी आरेख और प्रत्येक वर्ष उत्पादित प्रसंस्कृत या खपत की जाने के लिए योजनाबद्ध मात्राएं ;
(iii) किन भवनों या संरचनाओं को रखे जाने के लिए प्रस्तावित किया गया है और क्या उपान्तरण, यदि कोई हो, प्रस्तावित है ;
(iv) किन भवनों या संरचनाओं को नष्ट किया गया है या नष्ट करने के लिए प्रस्तावित है और नाशन की योजना ;
(v) सुविधा में उपयोग के लिए कौन सा उपस्कर प्रस्तावित है ;
(vi) कौन सा उपस्कर हटाए जाने या नष्ट किए जाने के लिए प्रस्तावित है और उसके नाशन की योजना ;
(vii) संपरिवर्तन के लिए प्रस्तावित अनुसूची ; और
(viii) स्थल पर चलाई जा रही प्रत्येक अन्य सुविधा के क्रियाकलाप की प्रकृति ; और
(ग) एक ब्यौरेवार स्पष्टीकरण कि उपपैरा (ख) में वर्णित उपाय और पक्षकार राज्य द्वारा प्रस्तावित कोई अन्य उपाय, सुविधा पर अतिरिक्त रासायनिक आयुध उत्पादन सामर्थ्य का निवारण किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे ।
67. पक्षकार राज्य अपने अनुरोध में किन्हीं अन्य उपायों का, जिन्हें यह विश्वास बनाने के लिए समुचित समझे, प्रस्ताव कर सकेंगे ।
विनिश्चय होने तक कार्रवाई
68. सम्मेलन में किसी विनिश्चय के होने तक कोई पक्षकार राज्य इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए किसी सुविधा का उपयोग कर सकेगा, जिसका उपयोग इस अभिसमय के उसके संबंध में प्रवर्तन में आने से पहले ऐसे प्रयोजनों के लिए किया जा रहा था, परन्तु केवल तभी, जब पक्षकार राज्य अपने अनुरोध में यह प्रमाणित कर देता है कि किसी विशेषित उपस्कर और किसी विशेषित भवन का प्रयोग नहीं किया जा रहा है और यह कि विशेषित उपस्कर और विशेषित भवन को पैरा 13 में विनिर्दिष्ट रीति में उपयोग करके निष्क्रिय बना दिया गया है ।
69. यदि सुविधा का, जिसके लिए अनुरोध किया गया है, पक्षकार राज्य के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने से पहले, इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा था यदि पैरा 68 में अपेक्षित प्रमाणन नहीं किया जाता है तो पक्षकार राज्य अनुच्छेद 5, पैरा 4 के अनुसार सभी कार्यवाहियों को तुरन्त बंद कर देगा । पक्षकार राज्य इसके संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 90 दिन के पश्चात् पैरा 13 के अनुसार सुविधा को बंद कर देगा ।
संपरिवर्तन की शर्तें
70. इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के संपरिवर्तन की शर्तों के रूप में, सुविधा में के सभी विशेषित उपस्करों को नष्ट कर दिया जाएगा और भवनों और संरचनाओं के सभी विशेष लक्षणों को, जो इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए सामान्यतया प्रयुक्त किए जाने वाले भवनों और संरचनाओं से उन्हें भिन्न बनाती है और जो रसायनों की अनुसूची 1 में अंतर्विष्ट नहीं है विलुप्त कर दिया जाएगा ।
71. किसी संपरिवर्तित सुविधा का निम्नलिखित के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा :-
(क) किसी क्रियाकलाप के संबंध में, जिसमें अनुसूची 1 या अनुसूची 2 के रसायन का उत्पादन, प्रसंस्करण या खपत अंतर्वलित है,
(ख) किसी अत्यधिक विषैले रसायन के उत्पादन के लिए जिसके अंतर्गत कोई अत्यधिक विषैला फॉस्फोरस रसायन भी है या किसी अन्य कार्रवाई के लिए, जिसमें अत्यधिक विषैले या अत्यधिक संक्षारक रसायनों की उठाई-धराई के लिए विशेष उपस्कर अपेक्षित होंगे, जब तक कि परिषद्, अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसार इस सम्मेलन द्वारा विचार और अनुमोदित की गई विषाक्तता, संक्षरणीयता के मानदंडों और, यदि लागू हों, अन्य तकनीकी तथ्यों को ध्यान में न रखते हुए यह विनिश्चय नहीं करती है कि ऐसे उत्पादन या क्रियाकलाप से इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजनों के लिए कोई जोखिम उत्पन्न नहीं होगा ।
72. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा का संपरिवर्तन, इस अधिसमय के प्रवर्तन में आने के 6 वर्ष के अपश्चात् पूरा किया जाएगा ।
कार्य परिषद् द्वारा और सम्मेलन द्वारा विनिश्चय
73. महानिदेशक द्वारा अनुरोध की प्राप्ति के 90 दिन के अपश्चात् तकनीकी सचिवालय द्वारा सुविधा का प्रारंभिक निरीक्षण किया जाएगा । इस निरीक्षण का प्रयोजन, अनुरोध में दी गई जानकारी की शुद्धता आवधारित करना, प्रस्तावित संपरिवर्तित सुविधा की तकनीकी विशेषताओं के संबंध में जानकारी अभिप्राप्त करना और ऐसी शर्तों का निर्धारण करना है जिनके अधीन इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए उपयोग की अनुज्ञा दी जा सकेगी । महानिदेशक, कार्य परिषद्, सम्मेलन और सभी पक्षकार राज्यों को तत्परता से एक रिपोर्ट देगा, जिसमें इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए सुविधा के संपरिवर्तन के लिए और यह आश्वासन देने के लिए कि संपरिवर्तित सुविधा का उपयोग केवल इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए किया जाएगा, आवश्यक उपायों के संबंध में उसकी सिफारिशें अंतर्विष्ट होंगी ।
74. यदि, पक्षकार राज्य के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने से पहले सुविधा का उपयोग, इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए किया गया है और वह प्रचालन में बना हुआ है, परन्तु पैरा 68 के अधीन प्रमाणित किए जाने के लिए अपेक्षित उपाय नहीं अपनाए गए हैं तो महानिदेशक तुरंत कार्य परिषद् को इसकी जानकारी देगा, जो ऐसे उपाय जो वह समुचित समझे जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ सुविधा को बन्द करना, विशेषित उपस्कर को हटाना और भवनों या सरंचनाओं के उपान्तरण की अपेक्षा कर सकेगी । कार्य परिषद् इन उपायों को लागू करने के लिए अन्तिम तिथि अनुबंधित करेगी और उनके समाधानप्रद रूप में पूरा किए जाने तक अनुरोध पर विचार किए जाने को स्थगित कर देगी । यह अवधारित करने के लिए कि क्या उपायों को लागू कर दिया गया है, सुविधा का अन्तिम तिथि की समाप्ति के पश्चात् तत्परतापूर्वक निरीक्षण किया जाएगा । ऐसा न होने पर, पक्षकार राज्य को, सभी सुविधा कार्यों को पूर्णतया बंद करना होगा ।
75. सम्मेलन, महानिदेशक की रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात् कार्य परिषद् की सिफारिश पर, उक्त रिपोर्ट और पक्षकार राज्य द्वारा व्यक्त किए गए विचारों को ध्यान में रखकर यथासंभव शीघ्र विनिश्चित करेगा कि क्या अनुरोध को स्वीकार किया जाए, और ऐसी शर्तें स्थापित करेगा, जिन पर अनुमोदन निर्भर करेगा । यदि किसी पक्षकार राज्य द्वारा अनुरोध के अनुमोदन और सहयुक्त शर्तों पर आक्षेप किया जाता है तो पारस्परिक रूप से स्वीकार्य हल निकालने के लिए हितबद्ध पक्षकार राज्यों के बीच 90 दिन तक परामर्श किया जा सकेगा । अनुरोध और उससे सहयुक्त शर्तों के साथ उसके किसी प्रस्तावित उपांतरणों के संबंध में, परामर्श की अवधि की समाप्ति के पश्चात् यथासंभव शीघ्र, सारवान् विषय के रूप में कोई विनिश्चय लिया जाएगा ।
76. अनुरोध के अनुमोदित किए जाने की दशा में, किसी सुविधा करार को, ऐसा विनिश्चय लिए जाने के 90 दिन के अपश्चात् पूरा किया जाएगा । सुविधा करार में ऐसी शर्तें अंतर्विष्ट होंगी, जिनके अधीन संपरिवर्तन और सुविधा का प्रयोग अनुज्ञात है जिसके अंतर्गत सत्यापन के लिए उपाय भी है । संपरिवर्तन, सुविधा करार के निष्पादन से पहले आरंभ नहीं किया जाएगा ।
संपरिवर्तन के लिए ब्यौरेवार योजना
77. किसी रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा की संपरिवर्तन की योजना को शुरू करने से 180 दिन के पश्चात् पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय को सुविधा के संपरिवर्तन के लिए, अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित के संबंध में ब्यौरेवार योजना देगा जिसके अंतर्गत संपरिवर्तन के सत्यापन के संबंध में प्रस्तावित उपाय भी हैं :-
(क) संपरिवर्तित किए जाने वाली सुविधा में निरीक्षकों की उपस्थिति का समय ; और
(ख) घोषित सूची के संबंध में प्रत्येक मद का लागू किए जाने वाले उपायों के सत्यापन के लिए प्रक्रिया ।
78. प्रत्येक रासायनिक आयुध उत्पादन सुविधा के संपरिवर्तन की ब्यौरेवार योजना में निम्नलिखित अंतर्विष्ट होंगे :-
(क) संपरिवर्तन प्रक्रिया की ब्यौरेवार समय-सूची ;
(ख) संपरिवर्तन के पूर्व और पश्चात् सुविधा का अभिन्यास ;
(ग) संपरिवर्तन के पूर्व और यथासमुचित, पश्चात् सुविधा का प्रक्रिया क्रमदर्शी आरेख ;
(घ) नष्ट किए जाने वाले उपस्कर, भवनों और संरचनाओं और अन्य मदों और उपांतरित किए जाने वाले भवनों और संरचनाओं की ब्यौरेवार सूची ;
(ङ) सूची की प्रत्येक मद को लागू किए जाने वाला उपाय, यदि कोई हो ;
(च) सत्यापन के लिए प्रस्तावित उपाय ;
(छ) सुविधा के संपरिवर्तन के दौरान पालन किए जाने वाले सुरक्षा/बचाव के उपाय ;
(ज) निरीक्षकों के कार्य करने और रहने के लिए प्रदान की जाने वाली सुविधाएं ।
ब्यौरेवार योजनाओं का पुनर्विलोकन
79. संपरिवर्तन के लिए ब्यौरेवार योजना और पक्षकार राज्य द्वारा सत्यापन के लिए प्रस्तुत किए गए प्रस्तावित उपायों और पूर्व निरीक्षणों के अनुभव के आधार पर, तकनीकी सचिवालय, पक्षकार राज्य से घनिष्ठ रूप से परामर्श करके, सुविधा के संपरिवर्तन के सत्यापन के लिए एक योजना तैयार करेगा । तकनीकी सचिवालय और पक्षकार राज्य के बीच समुचित उपायों से संबंधित कोई मतभेद, परामर्श द्वारा सुलझाए जाएंगे । इस अभिसमय के पूर्ण कार्यान्वयन को सुकर बनाने की दृष्टि से कोई सुलझाए न गए मामले, समुचित कार्रवाई के लिए कार्य परिषद् को अग्रेषित किए जाएंगे ।
80. यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनुच्छेद 5 और इस भाग के उपबंधों का पालन किया गया है; कार्य परिषद् और पक्षकार राज्य के बीच संपरिवर्तन और सत्यापन के लिए संयुक्त योजना तय की जाएगी । यह करार, संपरिवर्तन करने की योजना को आरंभ करने से 60 दिन से अनधिक पूर्व पूरा किया जाएगा ।
81. कार्य परिषद् का प्रत्येक सदस्य, संपरिवर्तन और सत्यापन के संबंध में संयुक्त योजना की पर्याप्तता से संबंधित किसी मुद्दे पर तकनीकी सचिवालय से परामर्श कर सकेगा । यदि कार्य परिषद् के किसी सदस्य द्वारा कोई आक्षेप नहीं किया जाता है तो योजना कार्यान्वित कर दी जाएगी ।
82. किन्हीं कठिनाइयों की दशा में, कार्य परिषद् को उनको सुलझाने के लिए, पक्षकार राज्य से परामर्श करना चाहिए । यदि कोई कठिनाई अनसुलझी रह जाती है तो वह सम्मेलन को निर्दिष्ट की जानी चाहिए । संपरिवर्तन की पद्धतियों के संबंध में मतभेदों के निपटारे के कारण, ऐसे संपरिवर्तन के अन्य भागों के निष्पादन में विलंब नहीं पड़ना चाहिए, जो स्वीकार्य है ।
83. सत्यापन के पहलुओं पर कार्य परिषद् के साथ कोई सहमति न होने की दशा में या यदि अनुमोदित सत्यापन योजना को कार्यान्वित नहीं किया जा सकता है तो संपरिवर्तन का सत्यापन, स्थल पर उपकरणों और निरीक्षकों की वास्तविक उपस्थिति से लगातार मानीटर करके आरम्भ किया जाएगा ।
84. संपरिवर्तन और सत्यापन, करार पाई योजना के अनुसार, प्रारंभ किया जाएगा । सत्यापन, संपरिवर्तन कार्यवाहियों में अनुचित रूप से बाधा नहीं डालेगा और संपरिवर्तन की पुष्टि के लिए निरीक्षकों की उपस्थिति के द्वारा किया जाएगा ।
85. महानिदेशक के यह प्रमाणित करने के कि संपरिवर्तन पूरा हो गया है, पश्चात् 10 वर्ष के लिए पक्षकार राज्य, निरीक्षकों को किसी भी समय सुविधा में अबाधित रूप से प्रवेश करने देगा । निरीक्षकों को सुविधा में सभी क्षेत्रों, सभी क्रियाकलापों और उपस्कर की सभी मदों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा । निरीक्षकों को यह सत्यापन करने का अधिकार होगा कि सुविधा में किए जा रहे क्रियाकलाप कार्य परिषद् और सम्मेलन द्वारा इस धारा के अधीन स्थापित की गई शर्तों से सुसंगत हैं । इस उपाबंध के भाग 2 के खंड (ङ) के उपबंधों के अनुसार निरीक्षकों को सुविधा के किसी क्षेत्र से नमूने प्राप्त करने और अनुसूची 1 के रसायनों, उनके स्थिर उत्पादों, पृथक्करण उत्पादों और अनुसूची 2 के रसायनों की अनुपस्थिति सत्यापित करने के लिए उनके विश्लेषण करने और यह सत्यापित करने का भी अधिकार होगा कि सुविधा में किए जा रहे क्रियाकलाप कार्य परिषद् और सम्मेलन द्वारा इस धारा के अधीन रासायनिक क्रियाकलापों के संबंध में स्थापित शर्तों से सुसंगत हैं । निरीक्षकों को इस उपाबंध के भाग 10, पैरा ग के अनुसार उस संयंत्र स्थल में जिसमें सुविधा अवस्थित है व्यवस्थित प्रवेश का भी अधिकार होगा । पक्षकार राज्य, 10 वर्ष की अवधि के दौरान संपरिवर्तित सुविधा में क्रियाकलापों के संबंध में वार्षिक रूप से रिपोर्ट देगा । इस 10 वर्ष की अवधि की समाप्ति पर कार्य परिषद्, तकनीकी सचिवालय की सिफारिशों को ध्यान में रखकर निरन्तर किए जा रहे सत्यापन उपायों की प्रकृति के संबंध में विनिश्चय करेगा ।
86. संपरिवर्तित सुविधा के सत्यापन के खर्चे, अनुच्छेद 5, पैरा 19 के अनुसार आबंटित किए जाएंगे ।
भाग 6
अनुच्छेद 6 के अनुसार इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं किए गए क्रियाकलाप अनुसूची 1 के रसायनों और ऐसे रसायनों से संबंधित सुविधाओं के लिए अवधि
क. साधारण उपबंध
1. कोई पक्षकार राज्य, पक्षकार राज्यों के राज्यक्षेत्रों के बाहर अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन, अर्जन, धारण या उपयोग नहीं करेगा और ऐसे रसायनों का किसी दूसरे पक्षकार राज्य के सिवाय अपने राज्यक्षेत्र से बाहर अंतरण नहीं करेगा ।
2. कोई पक्षकार राज्य अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन, अर्जन, धारण या उपयोग तब तक नहीं करेगा जब तक कि :-
(क) उक्त रसायनों को अनुसंधान, चिकित्सीय, भेषजी या संरक्षणात्मक प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा रहा हो ; और
(ख) रसायनों की किस्मों और मात्राओं को कड़ाई से उनके लिए सीमित नहीं किया गया है, जो ऐसे प्रयोजनों के लिए न्यायसंगत हो सकते हैं ; और
(ग) ऐसे प्रयोजनों के लिए किसी भी दिए गए समय में ऐसे रसायनों की संकलित मात्रा 1 टन के बराबर या उससे कम नहीं है ; और
(घ) किसी पक्षकार राज्य द्वारा ऐसे प्रयोजनों के लिए किसी वर्ष में, उत्पादन, रासायनिक आयुध भंडारों से प्रत्याहरण और अंतरण द्वारा अर्जित की गई संकलित मात्रा 1 टन के बराबर या उससे कम नहीं है ।
ख. अंतरण
3. कोई पक्षकार राज्य अनुसूची 1 के रसायनों का अपने राज्यक्षेत्र से बाहर अंतरण पैरा 2 के अनुसार केवल दूसरे पक्षकार राज्य को और केवल अनुसंधान, चिकित्सीय, भेषजी या संरक्षात्मक प्रयोजनों के लिए ही कर सकेगा ।
4. अंतरित किए गए रसायनों को किसी तीसरे राज्य को पुनः अंतरित नहीं किया जाएगा ।
5. किसी दूसरे पक्षकार राज्य को किसी अंतरण के 30 दिन से अन्यून पूर्व दोनों पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय को अंतरण की अधिसूचना देंगे ।
6. प्रत्येक पक्षकार राज्य गत वर्ष के दौरान अंतरणों के संबंध में ब्यौरेवार वार्षिक घोषणा करेंगे । उक्त घोषणा उस वर्ष की समाप्ति के 90 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत की जाएगी और उसमें प्रत्येक अनुसूची 1 के रसायनों के संबंध में, जिन्हें अंतरित किया गया है, निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित होगी :-
(क) रसायन का नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो ;
(ख) अन्य राज्यों से अर्जित या अन्य पक्षकार राज्यों को अंतरित की गई मात्रा । प्रत्येक अंतरण के संबंध में, मात्रा प्राप्तिकर्ता और प्रयोजन सम्मिलित किया जाएगा ।
ग. उत्पादन
उत्पादन के साधारण सिद्धांत
7. प्रत्येक पक्षकार राज्य, पैरा 8 से 12 के अधीन उत्पादन के दौरान व्यक्तियों की सुरक्षा और पर्यावरण का संरक्षण सुनिश्चित करने को उच्चतम प्राथमिकता देगा । प्रत्येक पक्षकार राज्य ऐसा उत्पादन, सुरक्षा और उत्सर्जन के लिए इसके राष्ट्रीय मानकों के अनुसार करेगा ।
एकल लघु सुविधा
8. प्रत्येक पक्षकार राज्य, जो अनुसंधान, चिकित्सीय, भेषजी या संरक्षणात्मक प्रयोजनों के लिए अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन करता है, पैरा 10, 11 और 12 में यथावर्णित के सिवाय पक्षकार राज्य द्वारा अनुमोदित किसी एकल लघु सुविधा में उत्पादन करेगा ।
9. किसी एकल लघु सुविधा में उत्पादन ऐसे उत्पादन क्रमों में प्रतिक्रिया पात्रों में किया जाएगा जिन्हें लगातार प्रचालन के लिए विन्यासित नहीं किया गया है । ऐसे प्रतिक्रिया पात्रों का परिमाण 100 लीटर से अनधिक होगा और 5 लीटरों से अधिक परिमाण वाले सभी प्रतिक्रिया पात्रों का कुल परिमाण 500 लीटर से अधिक ही होगा ।
अन्य सुविधाएं
10. ऐसे अनुसूची 1 के रसायनों का जो संकलित मात्रा में 10 कि० ग्रा० प्रतिवर्ष से अनधिक है, उत्पादन संरक्षणात्मक प्रयोजनों के लिए किसी एकल लघु सुविधा से बाहर एक सुविधा में किया जा सकेगा । यह सुविधा पक्षकार राज्य द्वारा अनुमोदित की जाएगी ।
11. ऐसे अनुसूची 1 के रसायनों का जिनकी मात्रा 100 ग्राम प्रतिवर्ष से अधिक है, उत्पादन अनुसंधान, चिकित्सीय या भेषजी प्रयोजनों के लिए किसी एकल लघु सुविधा से बाहर, जिसकी संकलित मात्रा प्रति सुविधा 10 कि० ग्रा० प्रतिवर्ष से अनधिक है, किया जा सकेगा । इन सुविधाओं को पक्षकार राज्य द्वारा अनुमोदित किया जाएगा ।
12. अनुसंधान, चिकित्सीय या भेषजी प्रयोजनों के लिए, परन्तु संरक्षणात्मक प्रयोजनों के लिए नहीं, अनुसूची 1 के रसायनों का संश्लेषण ऐसी प्रयोगशालाओं में किया जा सकेगा, जिनकी संकलित मात्राएं प्रति सुविधा 100 ग्रा० प्रतिवर्ष से कम है । ये सुविधाएं खंड ई और उ में यथाविनिर्दिष्ट घोषणा और सत्यापन से संबंधित किसी बाध्यता के अधीन नहीं होगी ।
घ. घोषणाएं
एकल लघु सुविधा
13. प्रत्येक पक्षकार राज्य, जो एकल लघु सुविधा को चलाने की योजना बनाता है, तकनीकी सचिवालय को सही अवस्थान और सुविधा का ब्यौरेवार तकनीकी विवरण देगा, जिसके अन्तर्गत उपस्कर की सूची और ब्यौरेवार आरेख भी हैं । विद्यमान सुविधाओं के संबंध में यह प्रारंभिक घोषणा, पक्षकार के संबंध में इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 30 दिन के अपश्चात् दी जाएगी । नई सुविधाओं संबंधी प्रारंभिक घोषणाएं कार्य चालू किए जाने से 180 दिन से अन्यून पूर्व दी जाएगी ।
14. प्रत्येक पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय को प्रारम्भिक घोषणा से संबंधित योजनाबद्ध परिवर्तनों की अन्तिम अधिसूचना देगा । यह अधिसूचना परिवर्तनों के किए जाने के 180 दिन से अन्यून पूर्व दी जाएगी ।
15. प्रत्येक पक्षकार राज्य, जो एकल लघु सुविधा पर अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन कर रहा है, गत वर्ष के संबंध में सुविधा के क्रियाकलापों के संबंध में ब्यौरेवार वार्षिक घोषणा करेगा । घोषणा उस वर्ष की समाप्ति के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत की जाएगी और उसमें निम्नलिखित सम्मिलित होगा :-
(क) सुविधा की पहचान ;
(ख) सुविधा में उत्पादित, अर्जित, उपभुक्त या संचयित अनुसूची 1 के प्रत्येक रसायनों के संबंध में निम्नलिखित जानकारी :-
(i) रासायनिक नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दिया गया हो ;
(ii) नियोजित पद्धति और उत्पादित मात्रा ;
(iii) अनुसूची 1 के रसायनों के उत्पादन के लिए उपयोग किए गए अनुसूची 1, 2 या 3 में सूचीबद्ध पूर्वगामियों का नाम और उनकी मात्रा ;
(iv) सुविधा में उपभोग की गई मात्रा और उपभोग का (के) प्रयोजन ;
(v) पक्षकार राज्य में अन्य सुविधाओं से प्राप्त की गई या उनमें पोत परिवहन की गई मात्रा । प्रत्येक पोत-लदान की मात्रा, प्राप्तिकर्ता और प्रयोजन सम्मिलित किया जाना चाहिए ;
(vi) वर्ष के दौरान किसी भी समय में संचयित की गई अधिकतम मात्रा ; और
(vii) वर्ष के अन्त में संचयित मात्रा ; और
(ग) पहले प्रस्तुत सुविधा के ब्यौरेवार तकनीकी विवरणों, जिनके अन्तर्गत उपस्करों की तालिकाएं और ब्यौरेवार आरेख भी हैं, की तुलना में वर्ष के दौरान सुविधा में किसी परिवर्तन की जानकारी ।
16. किसी एकल लघु सुविधा में अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन करने वाला प्रत्येक पक्षकार राज्य परियोजित क्रियाकलापों और आगामी वर्ष के लिए सुविधा में प्राक्कलित उत्पादन के संबंध में ब्यौरेवार वार्षिक घोषणा करेगा । घोषणा उस वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 90 दिन पूर्व प्रस्तुत की जाएगी और उसमें निम्नलिखित होगा :-
(क) सुविधा की पहचान ;
(ख) सुविधा पर उत्पादन, उपभोग या भंडारण के लिए प्रत्याशित अनुसूची 1 प्रत्येक रसायन के लिए निम्नलिखित जानकारी-
(i) रसायन का नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो,
(ii) उत्पादन के लिए प्रत्याशित मात्रा और उत्पादन का प्रयोजन ; और
(ग) पहले प्रस्तुत सुविधा के ब्यौरेवार तकनीकी विवरणों, जिसके अन्तर्गत उपस्कर की तालिकाएं और ब्यौरेवार आरेख भी हैं, की तुलना में वर्ष के दौरान सुविधा के संबंध में किसी प्रत्याशित परिवर्तन की जानकारी ।
पैरा 10 और पैरा 11 में निर्दिष्ट अन्य सुविधाएं
17. प्रत्येक सुविधा के लिए पक्षकार राज्य तकनीकी सचिवालय को सुविधा या उसके भाग (रठ्ठ) का नाम, अवस्थान और ब्यौरेवार तकनीकी विवरण देगा जैसा कि तकनीकी सचिवालय द्वारा अनुरोध किया जाए । संरचनात्मक प्रयोजनों के लिए अनुसूची 1 के रसायनों का उत्पादन करने वाली सुविधा की पहचान विनिर्दिष्ट रूप से की जाएगी । विद्यमान सुविधाओं के लिए, यह आरंभिक घोषणा पक्षकार राज्य के लिए इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 30 दिन के अपश्चात् की जानी चाहिए ।
18. प्रत्येक पक्षकार राज्य आरंभिक घोषणा से संबंधित योजनाबद्ध परिवर्तन के संबंध में अग्रिम अधिसूचना तकनीकी सचिवालय को देगा । अधिसूचना को परिवर्तन किए जाने के कम से कम 180 दिन पहले प्रस्तुत किया जाएगा ।
19. प्रत्येक पक्षकार राज्य, प्रत्येक सुविधा के लिए गत वर्ष के लिए सुविधा के क्रियाकलाप से संबंधित एक ब्यौरेवार वार्षिक घोषणा प्रस्तुत करेगा । घोषणा उस वर्ष की समाप्ति के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात् प्रस्तुत की जाएगी और उसमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(क) सुविधा की पहचान ;
(ख) अनुसूची 1 के प्रत्येक रसायन के संबंध में निम्नलिखित जानकारी :-
(i) रसायन का नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो ;
(ii) उत्पादित मात्रा और संरक्षात्मक प्रयोजनों के लिए उत्पादन की दशा में नियोजित तरीके ;
(iii) अनुसूची 1 के रसायनों के उत्पादन के लिए प्रयुक्त अनुसूची 1, 2 या 3 में सूचीबद्ध पूर्वगामियों का नाम और मात्रा ;
(iv) सुविधा में उपयोग की गई मात्रा और उपभोग का प्रयोजन ;
(v) पक्षकार राज्य के भीतर अन्य सुविधाओं को अंतरित मात्रा, प्रत्येक अंतरण के लिए मात्रा, प्राप्तिकर्ता और प्रयोजन सम्मिलित किए जाने चाहिएं ;
(vi) वर्ष के दौरान किसी भी समय भंडारित अधिकतम मात्रा ; और
(vii) वर्ष के अन्त में भंडारित मात्रा ; और
(ग) पहले प्रस्तुत सुविधा के ब्यौरेवार तकनीकी विवरणों की तुलना में वर्ष के दौरान सुविधा या इसके सुसंगत भागों में किसी परिवर्तन की जानकारी ।
20. प्रत्येक पक्षकार राज्य प्रत्येक सुविधा के लिए आगामी वर्ष के लिए सुविधा के परियोजित क्रियाकलाप और प्रत्याशित उत्पादन से संबंधित एक ब्यौरेवार वार्षिक रिपोर्ट बनाएगा । घोषणा उस वर्ष के प्रारंभ होने के कम से कम 90 दिन पहले प्रस्तुत की जाएगी और उसमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(क) सुविधा की पहचान ;
(ख) अनुसूची 1 के प्रत्येक रसायन के लिए निम्नलिखित जानकारी :-
(i) रसायन का नाम, संरचनात्मक सूत्र और रासायनिक सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो ; और
(ii) उत्पादन के लिए प्रत्याशित मात्रा, उत्पादन, उत्पादन के लिए प्रत्याशित समयावधि और उत्पादन का प्रयोजन ; और
(ग) पहले प्रस्तुत सुविधा के ब्यौरेवार तकनीकी विवरणों की तुलना में वर्ष के दौरान सुविधा या इसके सुसंगत भागों में किसी परिवर्तन की जानकारी ।
ङ. सत्यापन
एकल लघु सुविधा :
21. एकल लघु सुविधा में सत्यापन क्रियाकलापों का उद्देश्य यह सत्यापित करना होगा कि अनुसूची 1 के उत्पादित रसायनों की मात्राओं की सही घोषणा की गई है और विशिष्टतया, वे कुल मिलाकर 1 टन से अधिक नहीं हैं ।
22. सुविधा, स्थल पर निरीक्षण और स्थल पर उपकरणों के साथ मानीटर करने के माध्यम से सत्यापन के अधीन होगी ।
23. किसी विशिष्ट सुविधा के लिए निरीक्षणों की संख्या तीव्रता, अवधि, समय और रीति, सुसंगत रसायनों, सुविधा की विशेषताओं और वहां पर किए जा रहे क्रियाकलापों की प्रकृति द्वारा इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए जोखिम पर आधारित होंगी । समुचित मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
24. आरंभिक निरीक्षण का प्रयोजन, सुविधा से संबंधित दी गई जानकारी का सत्यापन करना होगा जिसके अंतर्गत पैरा 9 में वर्णित प्रतिक्रिया जलयानों पर सीमाओं का सत्यापन भी है ।
25. पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के उसके लिए प्रवृत्त होने के बाद 180 दिन के अपश्चात् संगठन के साथ सुविधा के ब्यौरेवार निरीक्षण की प्रक्रियाओं को शामिल करते हुए माडल करार पर आधारित एक सुविधा करार को अंतिम रूप देगा ।
26. इस अभिसमय के इसके लिए प्रवृत्त होने के पश्चात् एकल लघु सुविधा स्थापित करने की योजना बनाने वाला प्रत्येक पक्षकार राज्य सुविधा के प्रचालन या उसके उपयोग के पहले ब्यौरेवार निरीक्षण प्रक्रियाओं को शामिल करते हुए संगठन के साथ माडल पर आधारित करार को अंतिम रूप देगा ।
27. सम्मेलन, करारों के लिए माडल पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार करेगा और उसका अनुमोदन करेगा ।
पैरा 10 और पैरा 11 में निर्दिष्ट अन्य सुविधाएं :
28. पैरा 10 और पैरा 11 में निर्दिष्ट किसी सुविधा में सत्यापन क्रियाकलापों का उद्देश्य निम्नलिखित सत्यापन करना होगा :-
(क) सुविधा का उपयोग, घोषित रसायनों के सिवाय, अनुसूची 1 के किसी रसायन के उत्पादन के लिए नहीं किया जाता है ;
(ख) अनुसूची 1 के उत्पादित, संसाधित या उपभोग किए गए रसायनों की मात्राओं की घोषणा सही रूप में की गई है और वे घोषित प्रयोजन की आवश्यकताओं से संगत हैं ; और
(ग) अनुसूची 1 के रसायन का अन्य प्रयोजन के लिए अपयोजन या उपयोग नहीं किया जाता है ।
29. सुविधा, स्थल पर निरीक्षण और स्थल पर उपकरणों के साथ मानीटर करने के माध्यम से सत्यापन के अधीन होगी ।
30. किसी विशिष्ट सुविधा के लिए निरीक्षणों की संख्या, तीव्रता, अवधि, समय और रीति, उत्पादित रसायन की मात्रा, सुविधा की विशेषताओं और वहां पर किए जा रहे क्रियाकलापों की प्रकृति द्वारा प्रस्तुत इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए जोखिम पर आधारित होगी । समुचित मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर सम्मेलन द्वारा अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार किया जाएगा और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
31. पक्षकार राज्य, इस अभिसमय के इसके लिए प्रवृत्त होने के बाद 180 दिन के अपश्चात् संगठन के साथ प्रत्येक सुविधा के लिए ब्यौरेवार निरीक्षण प्रक्रियाओं को शामिल करते हुए, माडल करार पर आधारित सुविधा करार को अंतिम रूप देगा ।
32. इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् ऐसी सुविधा स्थापित करने की योजना बनाने वाला प्रत्येक पक्षकार राज्य सुविधा के प्रचालन या उसके उपयोग के पहले संगठन के साथ एक सुविधा करार को अंतिम रूप देगा ।
भाग 7
अनुच्छेद 6 के अनुसार इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए क्रियाकलाप अनुसूची 2 के रसायनों के लिए अवधि और ऐसे रसायनों से संबंधित सुविधाएं
क. घोषणाएं :
संकलित राष्ट्रीय आंकड़ों के संबंध में घोषणाएं :
1. अनुच्छेद 6, पैरा 7 और पैरा 8 के अनुसरण में प्रत्येक पक्षकार राज्य द्वारा दी जाने वाली आरंभिक और वार्षिक घोषणाओं में अनुसूची 2 के प्रत्येक रसायन की उत्पादित, संसाधित, उपभुक्त, आयातित और निर्यातित मात्राओं के संबंध में पूर्ववर्ती कलैंडर वर्ष के लिए संकलित राष्ट्रीय आंकड़े तथा उसमें अंतर्वलित प्रत्येक देश के लिए आयात और निर्यात की मात्रा के संबंध में विनिर्देश सम्मिलित होंगे ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य निम्नलिखित प्रस्तुत करेगा :-
(क) इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद 30 दिन के अपश्चात् पैरा 1 के अनुसरण में और आने वाले कलैन्डर वर्ष में प्रारम्भ होने वाली आरंभिक घोषणाएं ;
(ख) पूर्ववर्ती कलैंडर वर्ष की समाप्ति के बाद 90 दिन के अपश्चात् वार्षिक घोषणाएं ।
अनुसूची 2 के रसायनों का उत्पादन, संसाधन या उपभोग कर रहे संयंत्र स्थलों की घोषणाएं :
3. आरंभिक और वार्षिक घोषणाएं ऐसे सभी संयंत्र स्थलों के लिए अपेक्षित हैं जो पूर्ववर्ती तीन कलैंडर वर्षों में से किसी कलैंडर वर्ष के दौरान निम्नलिखित से अधिक उत्पादन, संसाधन या उपभोग करने वाले या आगामी कलैंडर वर्ष में उत्पादन, संसाधन या उपभोग करने के लिए प्रत्याशित एक या अधिक संयंत्रों से मिलकर बनी है :-
(क) अनुसूची 2, भाग क में 1 किग्रा० ।" से अभिहित रसायन ;
(ख) अनुसूची 2, भाग क में सूचीबद्ध कोई अन्य 100 किग्रा० रसायन ; या
(ग) अनुसूची 2, भाग ख में सूचीबद्ध 1 टन रसायन ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य निम्नलिखित प्रस्तुत करेगा :-
(क) इस अभिसमय के इसके लिए प्रवृत्त होने के बाद 30 दिन के अपश्चात् और आगामी कलैंडर वर्ष में आरम्भ होने वाली पैरा 3 के अनुसरण में आरंभिक घोषणाएं ;
(ख) पूर्ववर्ती कलैंडर वर्ष की समाप्ति के बाद 90 दिन के अपश्चात् गत क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणाएं ;
(ग) आगामी कलैंडर वर्ष के प्रारंभ होने से पहले 60 दिन के अपश्चात् प्रत्याशित क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणाएं । वार्षिक घोषणा प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् यदि कोई अतिरिक्त क्रियाकलाप की योजना बनाई जाती है तो उसे क्रियाकलाप आरंभ करने से पहले पांच दिन के अपश्चात् घोषित किया जाएगा ।
5. पैरा 3 के अनुसरण में घोषणाएं, ऐसे मिश्रणों के लिए सामान्यतया अपेक्षित नहीं है जिनमें अनुसूची 2 के रसायन कम सांद्रण में हैं । वे मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार केवल उन्हीं दशाओं में अपेक्षित हैं जहां अनुसूची 2 के रसायन के मिश्रण से प्राप्ति की सरलता और इसके कुल भार से इस अभिसमय के उद्देश्यों और प्रयोजनों को खतरा पैदा होता हो । इन मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार किया जाएगा और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
6. पैरा 3 के अनुसरण में किसी संयंत्र स्थल की घोषणाओं में निम्नलिखित सम्मिलित होगा :-
(क) संयंत्र स्थल का नाम और इसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कंपनी या उद्यम का नाम ;
(ख) इसका सही अवस्थान, जिसके अन्तर्गत पता भी है ; और
(ग) संयंत्र स्थल के भीतर ऐसे संयंत्रों की संख्या जिसकी घोषणा इस उपाबंध के भाग 8 के अनुसरण में की जाती है ।
7. संयंत्र स्थल के भीतर अवस्थित ऐसे प्रत्येक संयंत्र, जो पैरा 3 में वर्णित विनिर्देशों के अधीन आते हैं, की पैरा 3 के अनुसरण में घोषणाओं में निम्नलिखित जानकारी भी सम्मिलत होगी :-
(क) संयंत्र का नाम और इसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कंपनी या उद्यम का नाम ;
(ख) संयंत्र स्थल के भीतर इसका सही अवस्थान, जिसके अन्तर्गत विशिष्ट भवन या संरचना की संख्या, यदि कोई हो, भी है ;
(ग) इसके मुख्य क्रियाकलाप ;
(घ) क्या संयंत्र :-
(i) अनुसूची 2 के घोषित रसायन/रसायनों का उत्पादन, संसाधन या उपभोग करता है ;
(ii) ऐसे क्रियाकलाप या बहुउद्देशियों के प्रति समर्पित है ; और
(iii) अनुसूची 2 के घोषित रसायन (रसायनों) से संबंधित अन्य क्रियाकलापों का निष्पादन करता है जिनके अन्तर्गत अन्य क्रियाकलापों का विनिर्दिष्टिकरण (अर्थात् भंडारण) भी है ; और
(ङ) अनुसूची 2 के प्रत्येक घोषित रसायन के लिए संयंत्र की उत्पादन क्षमता ।
8. पैरा 3 के अनुसरण में संयंत्र स्थल की घोषणा में अनुसूची 2 के प्रत्येक रसायन के लिए उपरोक्त घोषणा के अलावा निम्नलिखित जानकारी भी सम्मिलित होगी :-
(क) रसायन का नाम सुविधा द्वारा, प्रयुक्त सामान्य या व्यापार का नाम, संरचनात्मक सूत्र और रसायन सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो ;
(ख) आरंभिक घोषणा की दशा में पूर्ववर्ती तीन कलैंडर वर्षों में से प्रत्येक वर्ष में संयंत्र स्थल द्वारा उत्पादित, संसाधित, उपभोग की गई आयातित और निर्यातित कुल मात्रा ;
(ग) गत क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणा की दशा में, पूर्ववर्ती कलैंडर वर्ष में संयंत्र स्थल द्वारा उत्पादित, संसाधित, उपभोग की गई, आयातित और निर्यातित कुल मात्रा ;
(घ) प्रत्याशित क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणा की दशा में, आगामी कलैंडर वर्ष में संयंत्र स्थल द्वारा उत्पादित, संसाधित या उपभोग किए जाने के लिए प्रत्याशित कुल मात्रा, जिसके अंतर्गत उत्पादन, संसाधन या उपभोग के लिए प्रत्याशित समयावधि भी है ; और
(ङ) प्रयोजन जिनके लिए रसायन का उत्पादन, संसाधन या उपभोग किया गया था या किया जाएगा :-
(i) उत्पादन की किस्मों के विनिर्देश के साथ स्थल पर संसाधन और उपभोग ;
(ii) पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र के भीतर या किसी ऐसे स्थान पर जो उसकी अधिकारिता में या नियंत्रणाधीन है, ऐसे विनिर्देश के साथ कि क्या किसी अन्य उद्योग, व्यापारी या अन्य गन्तव्य को विक्रय या अंतरण किया गया है और यदि संभव हो तो उत्पाद की किस्में ;
(iii) अन्तर्वलित राज्य के विनिर्देश सहित प्रत्यक्ष निर्यात ; या
(iv) अन्य, जिसके अंतर्गत अन्य प्रयोजनों के विनिर्देश भी हैं ।
रासायनिक आयुध प्रयोजनों के लिए अनुसूची 2 के रसायनों के गत उत्पादन पर घोषणाएं :
9. प्रत्येक पक्षकार राज्य, इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद 30 दिन के अपश्चात् ऐसे संयंत्रों से मिलकर बने सभी संयंत्र स्थलों की घोषणा करेगा जिन्होंने 1 जनवरी, 1946 से किसी भी समय अनुसूची 2 के रसायनों का उत्पादन रासायनिक आयुध प्रयोजनों के लिए किया है ।
10. पैरा 9 के अनुसरण में किसी संयंत्र स्थल की घोषणाओं में निम्नलिखि सम्मिलित होगा :-
(क) संयंत्र स्थल का नाम और इसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कंपनी या उद्यम का नाम ;
(ख) इसका सही अवस्थान जिसके अंतर्गत पता भी है ;
(ग) ऐसे प्रत्येक संयंत्र के लिए जो संयंत्र स्थल के भीतर अवस्थित है और जो पैरा 9 में वर्णित विनिर्देशों के अंतर्गत आता है, वही जानकारी जो पैरा 7 के उपपैरा (क) से उपपैरा (ङ) में अपेक्षित है ; और
(घ) रासायनिक आयुध प्रयोजनों के लिए उत्पादित अनुसूची 2 के प्रत्येक रसायन के लिए :-
(i) रसायन का नाम, रासायनिक आयुध उत्पादन प्रयोजनों के लिए संयंत्र स्थल द्वारा प्रयोग किया गया सामान्य या व्यापार नाम, संरचनात्मक सूत्र और रसायन गुण सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि दी गई हो ;
(ii) ऐसी तारीखें जिनको रसायन का उत्पादन किया गया और उसकी उत्पादित मात्रा ; और
(iii) अवस्थान जिसको रसायन का परिदान किया गया और वहां उत्पादित अंतिम उत्पाद; यदि ता हो ।
पक्षकार राज्यों को सूचना :
11. पैरा 6, 7(क), 7(ग), 7(घ)(i), 7(घ)(iii), 8(क) और 10 के अधीन दी गई जानकारी के साथ, इस खंड के अधीन घोषित संयंत्र स्थलों की एक सूची, अनुरोध किए जाने पर तकनीकी सचिवालय द्वारा पक्षकार राज्यों को पारेषित की जाएगी ।
ख. सत्यापन
साधारण :
12. अनुच्छेद 6, पैरा 4 में उपबंधित सत्यापन, स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से ऐसे घोषित संयंत्र स्थलों पर किया जाएगा जो पूर्ववर्ती तीन कलैंडर वर्षों में से किसी एक के दौरान उत्पादन, संसाधन या उपभोग या आगामी कलैंडर वर्ष में निम्नलिखित से अधिक उत्पादन, संसाधन या उपभोग करने के लिए प्रत्याशित एक या अधिक संयंत्रों से मिलकर बने हों :-
(क) अनुसूची 2, भाग क में स्त्र्।ऱ् से अभिहित 10 कि०ग्रा० रसायन ;
(ख) अनुसूची 2, भाग क में सूचीबद्ध कोई अन्य 1 टन रसायन ; या
(ग) अनुसूची 2, भाग ख में सूचीबद्ध कोई 10 टन रसायन ।
13. सम्मेलन द्वारा अनुच्छेद 8, पैरा 21(क) के अनुसरण में अंगीकृत किए जाने वाले संगठन के कार्यक्रम और बजट में, इस खंड के अधीन, सत्यापन के लिए कार्यक्रम और बजट एक पृथक् मद के रूप में अंतर्विष्ट होगा । अनुच्छेद 6 के अधीन सत्यापन के लिए उपलब्ध साधनों के आबंटन में, तकनीकी सचिवालय, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् पहले तीन वर्षों के दौरान खंड क के अधीन घोषित संयंत्र स्थलों के आरम्भिक निरीक्षणों को पूर्विकता देगा । तत्पश्चात् प्राप्त अनुभव के आधार पर आबंटन का पुनर्विलोकन किया जाएगा ।
14. तकनीकी सचिवालय, पैरा 15 से पैरा 22 तक के अनुसार आरम्भिक निरीक्षणों और पश्चात्वर्ती निरीक्षणों का संचालन करेगा ।
निरीक्षण के उद्देश्य :
15. निरीक्षणों का साधारण उद्देश्य यह सत्यापित करना होगा कि क्रियाकलाप इस अभिसमय के अधीन दायित्वों के अनुसार और घोषणाओं में दी जाने वाली जानकारी से संगत है । खंड क के अधीन घोषित संयंत्र स्थलों पर निरीक्षणों के विशिष्ट उद्देश्यों में निम्नलिखित का सत्यापन सम्मिलित होगा :-
(क) अनुसूची 1 के किसी रसायन की अनुपस्थिति, विशेष रूप से उत्पादन में, इस उपाबन्ध के भाग 6 के अनुसार के सिवाय ;
(ख) अनुसूची 2 के रसायनों के उत्पादन, संसाधन या उपभोग के स्तरों की घोषणाओं से संगति ; और
(ग) इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध किए गए क्रियाकलापों के लिए अनुसूची 2 के रसायनों का अपयोजन न किया जाना ।
आरम्भिक निरीक्षण :
16. पैरा 12 के अनुसरण में निरीक्षण किया जाने वाला प्रत्येक संयंत्र स्थल, यथासंभव शीघ्र किन्तु इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के बाद तीन वर्ष के अपश्चात् एक आरंभिक निरीक्षण कराएगा । इस अवधि के पश्चात् घोषित संयंत्र स्थलों का, उनके द्वारा प्रथमतः उत्पादन, संसाधन या उपभोग को घोषित किए जाने के बाद एक वर्ष के पश्चात् आरंभिक निरीक्षण कराया जाएगा । आरंभिक निरीक्षणों के लिए संयंत्र स्थलों का चयन तकनीकी सचिवालय द्वारा इस प्रकार किया जाएगा कि संयंत्र-स्थल का निरीक्षण कब किया जाना है, इसकी भविष्यवाणी प्रवारित की जा सके ।
17. आरंभिक निरीक्षण के दौरान, जब तक कि निरीक्षित पक्षकार राज्य और तकनीकी सचिवालय इस पर सहमत न हो जाएं कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, संयंत्र स्थल के लिए एक प्रारूप सुविधा करार तैयार किया जाएगा ।
18. पश्चात्वर्ती निरीक्षणों की आवृत्ति और तीव्रता के संबंध में निरीक्षक, आरंभ निरीक्षण के दौरान अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित मानदंडों पर विचार करते हुए, सुसंगत रसायनों, संयंत्र-स्थल की विशेषताओं और वहां किए जा रहे क्रियाकलापों की प्रकृति द्वारा इस अभिसमय के उद्देश्यों और प्रयोजनों को होने वाले जोखिम का निर्धारण करेंगे :-
(क) अनुसूचित रसायनों और उनसे उपोत्पादित अन्तिम उत्पादों आदि का विषैलापन ;
(ख) निरीक्षित स्थल पर विशिष्ट रूप से भंडारित अनुसूचित रसायनों की मात्रा ;
(ग) निरीक्षित स्थल पर विशिष्ट रूप से भंडारित अनुसूचित रसायनों के लिए फीड स्टाक रसायनों की मात्रा ;
(घ) अनुसूची 2 के संयंत्रों की उत्पादन क्षमता ; और
(ङ) निरीक्षित स्थल पर विषैले रसायनों का उत्पादन, भंडारण और भराई आरंभ करने के लिए सामर्थ्य और परिवर्तनीयता ।
निरीक्षण :
19. आरंभिक निरीक्षण कराने के पश्चात् पैरा 12 के अनुसरण में निरीक्षण किया जाने वाला प्रत्येक संयंत्र स्थल पश्चात्वर्ती निरीक्षणों के अधीन रहेगा ।
20. निरीक्षण के लिए किसी विशिष्ट संयंत्र स्थलों का चयन करते समय और निरीक्षणों की आवृत्ति और तीव्रता विनिश्चित करते समय, तकनीकी सचिवालय, संबंधित सुविधा करार तथा आरंभिक निरीक्षणों और पश्चात्वर्ती निरीक्षणों के परिणामों को ध्यान में रखते हुए, सुसंगत रसायनों, संयंत्र स्थल की विशेषज्ञताओं और वहां किए जा रहे क्रियाकलापों से इस अभिसमय के उद्देश्यों और प्रयोजनों को होने वाले जोखिम पर सम्यक्तः विचार करेगा ।
21. निरीक्षण के लिए किसी विशिष्ट संयंत्र स्थल का चयन तकनीकी सचिवालय द्वारा इस प्रकार किया जाएगा कि संयंत्र-स्थल का निरीक्षण कब किया जाना है उसकी भविष्यवाणी प्रवारित की जा सके ।
22. इस खंड के उपबंधों के अधीन, कोई भी संयंत्र स्थल प्रति कलैंडर वर्ष में दो से अधिक निरीक्षण नहीं कराएगा । तथापि यह अनुच्छेद 9 के अनुसरण में निरीक्षणों को परिसीमित नहीं करेगा ।
निरीक्षण प्रक्रियाएंः
23. करार किए गए मार्गदर्शी सिद्धान्त, इस उपाबन्ध और गोपनीयता उपाबन्ध के अन्य सुसंगत उपबंधों के अतिरिक्त नीचे पैरा 24 से पैरा 30 लागू होंगे ।
24. घोषित संयंत्र-स्थल से संबंधित सुविधा करार निरीक्षित पक्षकार राज्य और संगठन के बीच आरंभिक निरीक्षण पूरा होने के बाद 90 दिन के अपश्चात् निष्पादित किया जाएगा जब तक कि निरीक्षित पक्षकार राज्य और तकनीकी सचिवालय इसके लिए सहमत न हो जाएं कि इसकी आवश्यकता नहीं है । यह एक माडल करार पर आधारित होगा और घोषित संयंत्र स्थल पर से निरीक्षण के संचालन को शासित करेगा । करार में पैरा 25 से पैरा 29 से संगत निरीक्षणों की आवृत्ति और तीव्रता तथा ब्यौरेवार निरीक्षण प्रक्रिया विनिर्दिष्ट होंगी ।
25. निरीक्षण का केन्द्र बिन्दु घोषित संयंत्र स्थल के भीतर अनुसूची 2 के घोषित संयंत्र होंगे । यदि निरीक्षण दल संयंत्र स्थल के अन्य भागों में प्रवेश के लिए अनुरोध करता है तो इन क्षेत्रों में प्रवेश, इस उपाबन्ध के भाग 2, पैरा 51 के अनुसरण में स्पष्टीकरण देने के दायित्व के अनुसार और सुविधा करार के अनुसार या किसी सुविधा करार के अभाव में, इस उपाबन्ध के भाग 10, खंड (ग) में यथाविनिर्दिष्ट व्यवस्थित प्रवेश के नियमों के अनुसार मंजूर किया जाएगा ।
26. इस बात का आश्वासन देने के लिए कि घोषित रसायनों का कोई अपवर्जन नहीं हुआ है और उत्पादन घोषणा से संगत रहा है अभिलेखों तक यथा समुचित पहुंच प्रदान की जाएगी ।
27. अघोषित अनुसूचित रसायनों के न होने की जांच करने के लिए नमूना लिया जाएगा और विश्लेषण किया जाएगा ।
28. निरीक्षण किए जाने वाले क्षेत्रों में निम्नलिखित सम्मिलित हो सकेगा :-
(क) वे क्षेत्र जहां भरण रसायनों (अभिकरणों) को परिदत्त या भंडारित किया जाता है ;
(ख) वे क्षेत्र जहां प्रतिक्रिया जलयानों में वृद्धि से पूर्व अभिकारकों पर छलयोजित प्रक्रियाएं की जाती हैं ;
(ग) उप पैरा (क) या उप पैरा (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्रों से प्रतिक्रिया जलयानों तक सहबद्ध वाल्व, प्रवाह मीटर, आदि के साथ समुचित भरण लाइनें ;
(घ) प्रतिक्रिया जलयानों और उसके सहायक उपस्कर के बाहरी पहलू ;
(ङ) प्रतिक्रिया जलयानों से बड़ी या छोटी अवधि के लिए भंडारण तक लाइनें या अनुसूची 2 में घोषित रसायनों का और प्रसंस्करण करने वाले उपस्कर ;
(च) उप पैरा (क) से (ङ) के अन्तर्गत किसी मद के साथ सहबद्ध नियंत्रण उपस्कर ;
(छ) अपशिष्ट और निस्सार की उठाई-धराई के लिए उपस्कर और क्षेत्र ;
(ज) उन रसायनों के व्ययन के लिए जो विनिर्देशों को पूरा नहीं करते हैं, उपस्कर और क्षेत्र ।
29. निरीक्षण की अवधि 96 घंटे से अधिक नहीं होगी, तथापि निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच विस्तारण के लिए करार किया जा सकेगा ।
निरीक्षण की अधिसूचना :
30. पक्षकार राज्य को, निरीक्षण किए जाने वाले संयंत्र स्थल पर निरीक्षण दल के पहुंचने के 48 घंटे से अन्यून पूर्व निरीक्षण के बारे में तकनीकी सचिवालय द्वारा अधिसूचित किया जाएगा ।
ग. ऐसे राज्यों को अंतरण जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं :
31. अनुसूची 2 के रसायनों को केवल पक्षकार राज्यों को अंतरित या उनसे प्राप्त किया जाएगा । यह बाध्यता इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के तीन वर्ष पश्चात् प्रभावी होगी ।
32. तीन वर्ष की इस अंतरिम अवधि के दौरान प्रत्येक पक्षकार राज्य अनुसूची 2 के रसायनों के ऐसे राज्यों को जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं अंतरण के लिए नीचे यथाविनिर्दिष्ट अंत-उपयोग (एण्ड-यूज) प्रमाणपत्र की अपेक्षा करेगा । ऐसे अंतरणों के लिए प्रत्येक पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय अपनाएगा कि अंतरित रसायनों का उपयोग केवल उन प्रयोजनों के लिए किया जाएगा जो इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं हैं । अन्य बातों के साथ पक्षकार राज्य प्राप्तिकर्ता देश से अंतरित रसायनों के संबंध में निम्नलिखित की बाबत प्रमाणपत्र की अपेक्षा करेगा :-
(क) वे केवल उन प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाएंगे जो इस अभिसमय के अंतर्गत प्रतिषिद्ध नहीं हैं ;
(ख) वे पुनः अंतरित नहीं किए जाएंगे ;
(ग) उनकी किस्म और मात्रा ;
(घ) उनका अंत-उपयोग (एण्ड-यूज) ; और
(ङ) अंत-उपयोग (एण्ड-यूज) कर्ताओं के नाम और पते ।
भाग 8
वे क्रियाकलाप जो अनुच्छेद 6 के अनुसार इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध नहीं हैं अनुसूची 3 के रसायनों और ऐसे रसायनों से संबंधित सुविधाओं के लिए अवधि
क. घोषणाएं
संकलित राष्ट्रीय आंकड़ों की घोषणाएं :
1. अनुच्छेद 6, पैरा 7 और पैरा 8 के अनुसरण में, पक्षकार राज्य द्वारा दी जाने वाली आरंभिक और वार्षिक घोषणाओं में, अनुसूची 3 के प्रत्येक रसायन के पूर्व कैलेंडर वर्ष में उत्पादन आयात और निर्यात की मात्रा के बारे में संकलित राष्ट्रीय आंकड़े तथा प्रत्येक अंतर्वलित देश के लिए आयात और निर्यात के परिमाणात्मक विनिर्देश सम्मिलित होंगे ।
2. प्रत्येक पक्षकार राज्य निम्नलिखित प्रस्तुत करेगा :-
(क) इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के 30 दिन के अपश्चात् पैरा 1 के अनुसरण में और आगामी कैलेंडर वर्ष में प्रारंभ होने वाली आरम्भिक घोषणाएं ;
(ख) पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष की समाप्ति के बाद 90 दिन के अपश्चात् वार्षिक घोषणाएं ।
अनुसूची 3 के रसायनों का उत्पादन करने वाले संयंत्र स्थलों की घोषणाएं :
3. उन सभी संयंत्र स्थलों के लिए आरंभिक और वार्षिक घोषणाएं अपेक्षित हैं जो ऐसे एक या अधिक संयंत्रों में बने हैं जो पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष के दौरान अनुसूची 3 के रसायन का 30 टन से अधिक उत्पादन कर रहे हैं या आगामी कैलेंडर वर्ष में उत्पादन करने के लिए प्रत्याशित हैं ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य निम्नलिखित प्रस्तुत करेगा :-
(क) इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के 30 दिन के अपश्चात् पैरा 3 के अनुसरण में और आगामी कैलेंडर वर्ष में प्रारंभ होने वाली आरंभिक घोषणाएं ;
(ख) पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष की समाप्ति के 90 दिन के अपश्चात् पिछले क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणाएं ;
(ग) प्रत्याशित क्रियाकलापों पर वार्षिक घोषणाएं जो आगामी कैलेंडर वर्ष के आरंभ होने से पूर्व 60 दिन के अपश्चात् की गई हों । कोई ऐसा अतिरिक्त क्रियाकलाप जो वार्षिक घोषणा के प्रस्तुत किए जाने के पश्चात् योजनाबद्ध किया गया है, इस क्रियाकलाप के प्रारंभ होने के पांच दिन के अपश्चात् घोषित किया जाएगा ।
5. पैरा 3 के अनुसरण में, घोषणाएं, अनुसूची 3 के रसायन के निम्न सांद्रण से युक्त मिश्रणों के लिए साधारणतः अपेक्षित नहीं हैं । मार्गदर्शी सिद्धान्तों के अनुसरण में ऐसे मामलों में ही अपेक्षित हैं जहां अनुसूची 3 के रसायनों के मिश्रण की सहायता और इसके कुल भार से इस अभिसमय के उद्देश्य और प्रयोजन के लिए जोखिम पैदा होता है । इन मार्गदर्शी सिद्धान्तों पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार और उनका अनुमोदन किया जाएगा ।
6. पैरा 3 के अनुसरण में संयंत्र स्थल की घोषणाओं में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(क) संयंत्र स्थल का नाम और उसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कंपनी और उद्यम का नाम ;
(ख) उसकी सही अवस्थिति, जिसमें पता भी हो ; और
(ग) संयंत्र स्थल के भीतर के संयंत्रों की संख्या जो इस उपाबंध के भाग 7 के अनुसरण में घोषित किए गए हैं ।
7. पैरा 3 के अनुसरण में संयंत्र स्थल की घोषणाओं में ऐसे प्रत्येक संयंत्र के लिए जो संयंत्र स्थल के भीतर अवस्थित हैं और जो पैरा 3 में वर्णित विनिर्देशों के अधीन आता है, निम्नलिखित जानकारी भी होगी :-
(क) संयंत्र का नाम और उसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कंपनी या उद्यम का नाम ;
(ख) संयंत्र स्थल के भीतर की इसकी सही अवस्थिति, जिसमें विशिष्ट भवन या संरचना संख्या, यदि कोई है, भी है ;
(ग) उसके मुख्य क्रियाकलाप ।
8. पैरा 3 के अनुसरण में किसी संयंत्र स्थल की घोषणाओं में अनुसूची 3 के प्रत्येक रसायन के संबंध में निम्नलिखित सूचना होगी :-
(क) रसायन का नाम, सुविधा द्वारा प्रयुक्त सामान्य और व्यापार नाम, संरचनात्मक सूत्र और रसायन सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या यदि दी गई हो ;
(ख) पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष में रसायन के उत्पादन की अनुमानित मात्रा या प्रत्याशित क्रियाकलापों पर घोषणा की दशा में 30 से 200 टन, 200 से 1000 टन, 1000 से 10,000 टन, 10,000 टन से 1,00,000 टन और 1,00,000 टन से ऊपर की श्रेणियों में अभिव्यक्त आगामी कैलेंडर वर्ष के लिए प्रत्याशित मात्रा ; और
(ग) वे प्रयोजन जिनके लिए रसायन का उत्पादन किया गया था या किया जाएगा ।
रासायनिक आयुधों के प्रयोजनों के लिए अनुसूची 3 के रसायनों के पिछले उत्पादन के संबंध में घोषणाएं :
9. प्रत्येक पक्षकार राज्य इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् 30 दिन के अपश्चात् ऐसे सभी संयंत्र स्थलों की घोषणा करेगा जिनमें ऐसे संयंत्र हैं जो 1 जनवरी, 1946 के बाद किसी भी समय रासायनिक आयुधों के प्रयोजन के लिए अनुसूची 3 के किसी रसायन का उत्पादन करता था ।
10. पैरा 9 के अनुसरण में संयंत्र स्थल की घोषणाओं में निम्नलिखित सम्मिलित होगा :-
(क) संयंत्र स्थल का नाम और इसे प्रचालित कर रहे स्वामी, कम्पनी या उद्यम का नाम ;
(ख) इसका सही अवस्थान जिसमें पता सम्मिलित है ;
(ग) ऐसे प्रत्येक संयंत्र के लिए जो संयंत्र स्थल के भीतर अवस्थित है और जो पैरा 9 में वर्णित विनिर्देशों के अधीन आता है, पैरा 7 उपपैरा (क) से उपपैरा (ग) में यथाअपेक्षित सूचनाएं ; और
(घ) रासायनिक आयुधों के प्रयोजनों के लिए उत्पादित अनुसूची 3 के प्रत्येक रसायन के लिए :-
(i) रसायन का नाम, संयंत्र स्थल का रासायनिक आयुध उत्पादन के प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया गया सामान्य या व्यापार नाम, संरचनात्मक सूत्र और रसायन सत्व सेवा रजिस्ट्री संख्या, यदि समनुदेशित है ;
(ii) वे तारीखें जब रसायन का उत्पादन किया गया था और उत्पादित मात्रा ; और
(iii) वह अवस्थान जिसको रसायन परिदत्त किया गया था और वहां उत्पादित अंतिम उत्पाद यदि ज्ञात हो ।
पक्षकार राज्यों को जानकारी :
11. पैरा 6, पैरा 7(क), पैरा 7(ग), पैरा 8(क) और पैरा 10 के अधीन दी गई जानकारी के साथ इस अनुभाग के अधीन घोषित संयंत्र स्थलों की सूची, तकनीकी सचिवालय द्वारा अनुरोध करने पर पक्षकार राज्य को पारेषित की जाएगी ।
ख. सत्यापन
साधारण :
12. अनुच्छेद 6 के पैरा 5 में उपबंधित सत्यापन, स्थल पर निरीक्षणों के माध्यम से उन घोषित संयंत्र स्थलों पर किया जाएगा जिन्होंने पिछले कैलेंडर वर्ष के दौरान उपरोक्त अनुसूची 3 के किसी रसायन का 30 टन की सीमा की घोषणा से अधिक कुल 200 टन से ऊपर उत्पादन किया है या अगले कैलेंडर वर्ष में उत्पादन किया जाना प्रत्याशित है ।
13. अनुच्छेद 8 के पैरा 21(क) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा अपनाए जाने वाले संगठन के कार्यक्रम और बजट में, एक पृथक् मद के रूप में इस उपाबंध के भाग 7 के पैरा 13 को ध्यान में रखते हुए इस खंड के अधीन सत्यापन के लिए कार्यक्रम और बजट अन्तर्विष्ट होंगे ।
14. इस खंड के अधीन, तकनीकी सचिवालय समुचित यंत्र रचना जैसे निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर विशेष रूप से अभिकल्पित कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर के उपयोग के माध्यम से निरीक्षण के लिए यदा-कदा संयंत्र स्थलों का चयन करेगा :-
(क) निरीक्षणों का साम्यापूर्ण भौगोलिक विवरण ; और
(ख) तकनीकी सचिवालय को उपलब्ध घोषित संयंत्र स्थलों के संबंध में सुसंगत रसायनों, संयंत्र स्थल की विशिष्टताओं और वहां किए जा रहे क्रियाकलापों की प्रकृति से संबंधित जानकारी ।
15. किसी संयंत्र के इस खंड के उपबंधों के अधीन प्रतिवर्ष दो से अधिक निरीक्षण नहीं होंगे । तथापि, यह अनुच्छेद 9 के अनुसरण में निरीक्षणों को सीमित नहीं करेगा ।
16. इस खंड के अधीन निरीक्षण के लिए संयंत्र स्थलों का चयन करते समय तकनीकी सचिवालय इस उपाबंध के इस भाग और भाग 9 के अधीन किसी पक्षकार राज्य द्वारा प्रति कैलेंडर वर्ष के दौरान कराए गए निरीक्षणों की संख्या के लिए निम्नलिखित परिसीमा का पालन करेगा । निरीक्षणों की संयुक्त संख्या इस उपाबंध के इस भाग और भाग 9 दोनों के अधीन पक्षकार राज्य द्वारा घोषित संयंत्र स्थलों की कुल संख्या का 3 5 प्रतिशत स्थलों या 20 निरीक्षणों, इनमें से जो कम हो, से अधिक नहीं होगी ।
17. खंड अ के अधीन घोषित संयंत्र स्थलों पर निरीक्षणों का सामान्य उद्देश्य, यह सत्यापित करना होगा कि उक्त क्रियाकलाप घोषणाओं में दी गई जानकारी से संगत हैं । निरीक्षणों का विशिष्ट उद्देश्य अनुसूची 1 के किसी रसायन की अनुपस्थिति यदि वह इस उपाबंध के भाग 6 के अनुसार है सिवाय विशेषतः इसके उत्पादन को सत्यापित करना होगा ।
निरीक्षण प्रक्रियाएं :
18. करार पाए मार्गदर्शी सिद्धान्तों, इस उपाबंध और गोपनीयता उपाबंध के अन्य सुसंगत उपाबंधों के अतिरिक्त, नीचे पैरा 19 से पैरा 25 लागू होंगे ।
19. जब तक निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा अनुरोध न किया जाए, कोई सुविधा करार नहीं होगा ।
20. निरीक्षणों का केन्द्र बिन्दु घोषित संयंत्र स्थल के भीतर घोषित अनुसूची 3 के संयंत्र (संयंत्रों) पर होगा । यदि निरीक्षण दल, इस उपाबंध के भाग 2 के पैरा 51 के अनुसार संदिग्धताओं के स्पष्टीकरण के लिए संयंत्र स्थल के अन्य भागों में पहुंचने का अनुरोध करता है तो ऐसी पहुंच की सीमा के संबंध में निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच करार किया जाएगा ।
21. निरीक्षण दल उन स्थितियों में अभिलेखों तक पहुंच रख सकेगा जिसमें निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य सहमत हों कि ऐसी पहुंच निरीक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी ।
22. नमूने लेने और स्थल पर विश्लेषण करने का काम अघोषित अनुसूचित रसायनों की अनुपस्थिति की पड़ताल करने के लिए किया जा सकेगा । अनसुलझी संदिग्धताओं की दशा में, निरीक्षित पक्षकार राज्य के करार के अधीन रहते हुए स्थल के बाहर नमूनों का विश्लेषण अभिहित प्रयोगशाला में किया जा सकेगा ।
23. निरीक्षण किए जाने वाले क्षेत्रों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(क) वे क्षेत्र जहां भरण रसायन (अभिकारक) परिदत्त या भंडारित किए जाते हैं ;
(ख) वे क्षेत्र जहां प्रतिक्रिया जलयानों में वृद्धि से पूर्व अभिकारकों पर छलसाधित प्रक्रियाएं की जाती हैं ;
(ग) उपपैरा (क) या उपपैरा (ख) में निर्दिष्ट क्षेत्रों से सहबद्ध वाल्व, प्रवाह मीटर, आदि के साथ प्रतिक्रिया जलयानों तक यथा समुचित प्रदाय लाइन ;
(घ) प्रतिक्रिया जलयानों और उसके सहायक उपस्कर के बाहरी पहलू ;
(ङ) प्रतिक्रिया जलयानों से छोटी या बड़ी अवधि के लिए भंडारण तक या अनुसूची 3 में घोषित रसायनों का और प्रसंस्करण करने वाले उपस्कर तक प्रणाली ;
(च) पैरा (क) से पैरा (ङ) के अंतर्गत किसी मद के साथ सहबद्ध नियंत्रण उपस्कर ;
(छ) अपशिष्ट और मलबे की उठाई-धराई के लिए उपस्कर और क्षेत्र ;
(ज) उन रसायनों के जो विनिर्देशों को पूरा नहीं करते हैं व्ययन के लिए उपस्कर और क्षेत्र ।
24. निरीक्षण की अवधि 24 घंटे से अधिक नहीं होगी ; तथापि, निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच विस्तारण के लिए करार किया जा सकेगा ।
निरीक्षण की अधिसूचना :
25. किसी पक्षकार राज्य को, निरीक्षण किए जाने वाले संयंत्र स्थल पर निरीक्षण दल के पहुंचने के 120 घंटे से अन्यून पूर्व निरीक्षण की तकनीकी सचिवालय द्वारा अधिसूचना दी जाएगी ।
ग. उन राज्यों को जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं, अंतरण :
26. ऐसे राज्यों को जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं अनुसूची 3 के रसायनों का अंतरण करते समय प्रत्येक पक्षकार राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों को अपनाएगा कि अंतरित रसायनों का उपयोग केवल इस अभिसमय के अंतर्गत प्रतिषिद्ध न किए गए प्रयोजनों के लिए किया जाएगा । साथ ही पक्षकार राज्य अंतरित रसायनों के संबंध में प्राप्तिकर्ता राज्य से एक प्रमाणपत्र की अपेक्षा करेगा जिसमें निम्नलिखित कथन होगा :-
(क) कि उनका केवल उन प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाएगा जो इस अभिसमय के अंतर्गत प्रतिषिद्ध नहीं हैं ;
(ख) कि वे पुनः अंतरित नहीं किए जाएंगे ;
(ग) उनकी किस्म और मात्रा :
(घ) उनका अंत उपयोग (एण्ड-यूज) ; और
(ङ) अंत उपयोगकर्ताओं के नाम और पते ।
27. इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पांच वर्ष के पश्चात् सम्मेलन, उन राज्यों को जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं अनुसूची 3 के रसायनों के अंतरण के संबंध में अन्य उपाय स्थापित करने की आवश्यकता पर विचार करेगा ।
भाग 9
अनुच्छेद 6 के अनुसार इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध न किए गए क्रियाकलाप
अन्य रसायन-उत्पादन सुविधाओं के लिए अवधि :
क. घोषणाएं
1. प्रत्येक पक्षकार राज्य द्वारा अनुच्छेद 6, पैरा 7 के अनुसरण में दी जाने वाली प्रारंभिक घोषणा में ऐसे सभी संयंत्र स्थलों की सूची सम्मिलित होगी-
(क) जिन्होंने पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष के दौरान संश्लेषण द्वारा 200 टन से अधिक अनुसूचित विविक्त कार्बनिक रसायनों का उत्पादन किया था ;
(ख) जो ऐसे एक या अधिक संयंत्रों से मिलकर बने हैं जिन्होंने पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष के दौरान संश्लेषण द्वारा 30 टन से अधिक ऐसे अननुसूचित विविक्त कार्बनिक रसायनों का उत्पादन किया था जिनमें फास्फोरस, सल्फर या फ्लुओरीन जैसे पदार्थ अन्तर्विष्ट थे (जिन्हें इसमें आगे पी०एस०एफ० संयंत्र" और पी०एस०एफ० रसायन" कहा गया है) ।
2. पैरा 1 के अनुसरण में प्रस्तुत की जाने वाली अन्य रसायन-उत्पादन सुविधाओं की सूची में ऐसे संयंत्र स्थल सम्मिलित नहीं होंगे जिन्होंने अनन्य रूप से विस्फोटकों और हाइड्रोकार्बन का उत्पादन किया था ।
3. प्रत्येक पक्षकार राज्य इसके लिए इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात्, 30 दिन के अपश्चात् अपनी प्रारंभिक घोषणा के भाग के रूप में अपने अन्य रसायन-उत्पादन सुविधाओं की सूची पैरा 1 के अनुसरण में प्रस्तुत करेगा । प्रत्येक पक्षकार राज्य, प्रत्येक आगामी कैलेंडर वर्ष के प्रारंभ होने के पश्चात् 90 दिन के अपश्चात्, सूची को अद्यतन बनाने के लिए आवश्यक वार्षिक जानकारी प्रदान करेगा ।
4. पैरा 1 के अनुसरण में प्रस्तुत की जाने वाली अन्य रसायन-उत्पादन सुविधाओं की सूची में प्रत्येक संयंत्र स्थल के संबंध में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित होगी :-
(क) संयंत्र स्थल का नाम और इसका प्रचालन करने वाले स्वामी, कम्पनी या उद्यम का नाम ;
(ख) संयंत्र स्थल का सही अवस्थान जिसमें इसका पता भी है ;
(ग) इसके मुख्य क्रियाकलाप ;
(घ) संयंत्र स्थल में, पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रसायनों का उत्पादन करने वाले संयंत्रों की लगभग संख्या ।
5. पैरा 1(क) के अनुसरण में सूचीबद्ध संयंत्र स्थलों के संबंध में सूची के अन्तर्गत पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष में 1,000 टन से कम, 1,000 से 10,000 टन और 10,000 टन से अधिक की श्रेणियों में अभिव्यक्त अननुसूचित विविक्त कार्बनिक रसायनों के उत्पादन की लगभग कुल मात्रा के संबंध में जानकारी सम्मिलित होगी ।
6. पैरा 1(ख) के अनुसरण में सूचीबद्ध संयंत्र स्थलों के संबंध में सूची के अन्तर्गत संयंत्र स्थल के भीतर पी०एस०एफ० संयंत्रों की संख्या भी विनिर्दिष्ट की जाएगी और इसमें पूर्ववर्ती वर्ष में प्रत्येक पी०एस०एफ० संयंत्र द्वारा उत्पादित 200 टन से कम, 200 से 1,000 टन, 1,000 से 10,000 टन और 10,000 टन से अधिक की श्रेणियों में अभिव्यक्त पी०एस०एफ० रसायनों के उत्पादन की लगभग कुल मात्रा के संबंध में जानकारी सम्मिलित होगी ।
तकनीकी सचिवालय द्वारा सहायता :
7. यदि कोई पक्षकार राज्य, प्रशासनिक कारणों से, पैरा 1 के अनुसरण में रसायन उत्पादन सुविधाओं की सूची का संकलन करने में सहायता के लिए अनुरोध करना आवश्यक समझता है तो वह तकनीकी सचिवालय से ऐसी सहायता प्रदान करने के लिए अनुरोध कर सकेगा । सूची के पूरा होने के प्रश्नों का समाधान फिर पक्षकार राज्य और तकनीकी सचिवालय के बीच परामर्श से किया जाएगा ।
पक्षकार राज्यों को जानकारी देना :
8. अनुरोध किए जाने पर, तकनीकी सचिवालय पैरा 1 के अनुसरण में प्रस्तुत अन्य रसायन-उत्पादन सुविधाओं की सूचियां, जिसके अंतर्गत पैरा 4 में दी गई जानकारी भी है, पक्षकार राज्यों को प्रेक्षित करेगा ।
ख. सत्यापन
साधारण :
9. खंड ग के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, अनुच्छेद 6, पैरा 6 में यथाउपबंधित सत्यापन स्थल पर निरीक्षण के माध्यम से निम्नलिखित पर किया जाएगा :-
(क) पैरा 1(क) के अनुसरण में सूचीबद्ध संयंत्र स्थल ; और
(ख) पैरा 1(ख) के अनुसरण में सूचीबद्ध ऐसे संयंत्र स्थल जो एक या अधिक पी०एस०एफ० संयंत्रों से मिलकर बने हैं और जिन्होंने पूर्ववर्ती कैलेंडर वर्ष के दौरान 200 टन से अधिक पी०एस०एफ रसायन का उत्पादन किया था ।
10. अनुच्छेद 8, पैरा 21(क) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा अंगीकृत किए जाने वाले संगठन के कार्यक्रम और बजट में इसका क्रियान्वयन आरम्भ हो जाने के पश्चात् इस खंड के अधीन सत्यापन के लिए कार्यक्रम और बजट एक पृथक् मद के रूप में अन्तर्विष्ट होंगे ।
11. इस खंड के अधीन, तकनीकी सचिवालय समुचित यंत्र संरचनाओं के माध्यम से, जैसे विशेष रूप से डिजाइन की गई कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का उपयोग, द्वारा निरीक्षण के लिए संयंत्र स्थलों का चयन यदा कदा रूप में निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर किया जाएगा :-
(क) निरीक्षणों का साम्यापूर्ण भौगोलिक संवितरण ;
(ख) सूचीबद्ध संयंत्र स्थलों पर संयंत्र स्थल की विशेषताओं और वहां किए जा रहे क्रियाकलापों के संबंध में तकनीकी सचिवालय को जानकारी ; और
(ग) पक्षकार राज्यों द्वारा उस आधार पर प्रस्ताव, जिनके बारे में पैरा 25 के अनुसार करार किया जाएगा ।
12. इस खंड के अधीन किसी भी संयंत्र के प्रति वर्ष दो से अधिक निरीक्षण नहीं किए जाएंगे । तथापि, यह अनुच्छेद 9 के अनुसरण में निरीक्षणों को सीमित नहीं करेगा ।
13. इस खंड के अधीन निरीक्षण के लिए संयंत्र स्थलों का चयन करते समय तकनीकी सचिवालय इस उपाबंध के इस भाग और भाग 8 के अधीन प्रति कैलेंडर वर्ष किसी पक्षकार राज्य के निरीक्षणों की संयुक्त संख्या के लिए निम्नलिखित परिसीमा का पालन करेगाः इस उपाबंध के इस भाग और भाग 8 दोनों के अधीन निरीक्षणों की संयुक्त संख्या, किसी पक्षकार राज्य द्वारा घोषित संयंत्र स्थलों की कुल संख्या का 3 5 प्रतिशत या 20 निरीक्षण, इनमें से जो संख्या कम हो, से अधिक नहीं होगी ।
निरीक्षण उद्देश्य :
14. खंड क के अधीन सूचीबद्ध संयंत्र स्थलों पर निरीक्षण का साधारण उद्देश्य यह सत्यापित करना होगा कि क्रियाकलाप घोषणाओं में दी गई जानकारी से संगत है । निरीक्षणों का विशिष्ट उद्देश्य, इस उपाबंध के भाग 6 के अनुसरण के सिवाय, अनुसूची 1 के किसी रसायन की, विशेष रूप से इसके उत्पादन की अनुपस्थिति को सत्यापित करना होगा ।
निरीक्षण प्रक्रिया :
15. करार पाए गए मार्गदर्शी सिद्धान्तों के अतिरिक्त इस उपांबध और गोपनीयता उपांबध के नीचे दिए गए पैरा 16 से पैरा 20 के अन्य सुसंगत उपबंध लागू होंगे ।
16. जब तक निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा अनुरोध न किया जाए, कोई सुविधा करार नहीं किया जाएगा ।
17. निरीक्षण के लिए चयनित, संयंत्र स्थल पर निरीक्षण का केन्द्र बिन्दु, पैरा 1 में विनिर्दिष्ट रसायनों का उत्पादन करने वाले संयंत्र, विशेष रूप से पैरा 1(ख) के अनुसरण में सूचीबद्ध पी०एस०एफ० संयंत्र होंगे । निरीक्षित पक्षकार राज्य को इन संयंत्रों में, इस उपाबंध के भाग 10 खंड (ग) में यथाविनिर्दिष्ट व्यवस्थित प्रवेश के नियमों के अनुसार प्रवेश की व्यवस्था करने का अधिकार होगा । यदि निरीक्षण दल, संदिग्धताओं के स्पष्टीकरण के लिए, इस उपाबंध के भाग 2, पैरा 51 के अनुसार संयंत्र स्थल के अन्य भागों में प्रवेश के लिए अनुरोध करता है तो ऐसे प्रवेश की सीमा को निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच तय किया जाएगा ।
18. निरीक्षण दल को ऐसी परिस्थितियों में अभिलेख तक पहुंच प्राप्त होगी जहां निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य में यह सहमति हो जाती है कि ऐसी पहुंच इस निरीक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी ।
19. अघोषित अनुसूचित रसायनों की अनुपस्थिति की जांच करने के लिए नमूने लिए जा सकेंगे और स्थल पर विश्लेषण किया जा सकेगा । ऐसे मामलों में, जहां संदिग्धताओं का समाधान नहीं किया गया है, नमूनों का विश्लेषण निरीक्षित पक्षकार राज्य की सहमति के अध्यधीन रहते हुए स्थल के बाहर किसी अभिहित प्रयोगशाला में किया जा सकेगा ।
20. निरीक्षण की अवधि 24 घंटे से अधिक नहीं होगी; तथापि, निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच विस्तारण के लिए सहमति हो सकेगी ।
निरीक्षण की अधिसूचना :
21. निरीक्षण के लिए किसी पक्षकार राज्य को, तकनीकी सचिवालय द्वारा, निरीक्षण किए जाने वाले संयंत्र स्थल पर निरीक्षण दल के पहुंचने के 120 घंटे पहले अधिसूचित किया जाएगा ।
ग. खंड ख का क्रियान्वयन और पुनर्विलोकन
क्रियान्वयन :
22. जब तक कि सम्मेलन, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् तीसरे वर्ष में अपने नियमित सत्र में अन्यथा विनिश्चित न करे, खंड ख का क्रियान्वयन, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् चौथे वर्ष के प्रारंभ में शुरू किया जाएगा ।
23. महानिदेशक, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् तीसरे वर्ष में, सम्मेलन के नियमित सत्र के लिए एक रिपोर्ट तैयार करेगा जो इस उपाबंध के भाग 7 और भाग 8 तथा इस भाग के खंड क के उपाबंधों को कार्यान्वित करने में तकनीकी सचिवालय के अनुभव को दर्शाएगी ।
24. सम्मेलन, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् तीसरे वर्ष में अपने नियमित सत्र में महानिदेशक की रिपोर्ट के आधार पर खंड ख के अधीन सत्यापन के लिए उपलब्ध साधनों को पी०एस०एफ० संयंत्रों", और अन्य रासायनिक उत्पादन सुविधाओं के बीच संवितरित करने पर भी विनिश्चय कर सकेगा । अन्यथा यह संवितरण तकनीकी सचिवालय की विशेषज्ञता के लिए छोड़ दिया जाएगा और पैरा 11 के महत्वपूर्ण तथ्यों में जोड़ दिया जाएगा ।
25. सम्मेलन, इस अभिसमय के प्रवृत्त होने के पश्चात् तीसरे वर्ष में, अपने नियमित सत्र में, कार्य परिषद् की सलाह पर यह विनिश्चित करेगा कि पक्षकार राज्यों द्वारा निरीक्षणों के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों के संबंध में किस आधार (अर्थात् क्षेत्रीय) पर, पैरा 11 में विनिर्दिष्ट चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में, विचार किए जाने के लिए पेश किया जाए ।
पुनर्विलोकन :
26. अनुच्छेद 8, पैरा 22 के अनुसरण में बुलाए गए सम्मेलन के प्रथम विशेष सत्र में सत्यापन उपाबंध के इस भाग के उपबंधों को प्राप्त किए गए अनुभव के आधार पर रासायनिक उद्योग (इस उपाबंध के अनुच्छेद 6, भाग 7 से 9) संपूर्ण सत्यापन अवधि के व्यापक पुनर्विलोकन को ध्यान में रखकर पुनः परीक्षा की जाएगी । सम्मेलन तब सिफारिशें करेगा, जिससे कि सत्यापन अवधि की क्रियाशीलता में सुधार किया जा सके ।
भाग 10
अनुच्छेद 9 के अनुसरण में आक्षेप निरीक्षण
क. निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों का पदाभिधान और चयन :
1. अनुच्छेद 9 के अनुसरण में आक्षेप निरीक्षण केवल ऐसे निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें इस कृत्य के लिए विशेष रूप से पदाभिहित किया गया है, अनुच्छेद 9 के अनुसरण में आक्षेप निरीक्षणों के लिए निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों को पदाभिहित करने के लिए, महानिदेशक, नेमी निरीक्षण क्रियाकलापों के लिए निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों में से निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों का चयन करके प्रस्तावित निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों की सूची स्थापित करेगा । इसमें, निरीक्षकों के चयन में नमनीयता अनुज्ञात करने के लिए उनकी उपलब्धता और चक्रानुक्रम की आवश्यकता को ध्यान में रखकर पर्याप्त रूप से अधिक संख्या में ऐसे निरीक्षक और निरीक्षण सहायक समाविष्ट होंगे, जिनके पास आवश्यक अर्हता, अनुभव, कौशल और प्रशिक्षण है । यथा संभव विस्तृत रूप से भौगोलिक आधारों पर निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों का चयन करने के महत्व पर भी सम्यक् रूप से ध्यान दिया जाएगा । निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों को पदाभिहित किए जाने में इस उपाबंध के भाग 2, खंड (क) के अधीन उपबंधित प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा ।
2. महानिदेशक, किसी विशिष्ट अनुरोध की परिस्थितियों को ध्यान में रख कर निरीक्षण दल के आकार का अवधारण करेगा और इसके सदस्यों का चयन करेगा । निरीक्षण दल का आकार, निरीक्षण आदेश के समुचित पालन के लिए निम्नतम आवश्यकता तक रखा जाएगा । अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य या निरीक्षित पक्षकार राज्य का कोई राष्ट्रिक, निरीक्षण दल का सदस्य नहीं होगा ।
ख. निरीक्षण पूर्व क्रियाकलाप :
3. पक्षकार राज्य, आक्षेप निरीक्षण के लिए निरीक्षण अनुरोध प्रस्तुत करने से पहले, महानिदेशक से इस बात के पुष्टिकरण की ईप्सा कर सकेगा कि क्या तकनीकी सचिवालय अनुरोध पर तुरन्त कार्रवाई करने की स्थिति में है । महानिदेशक द्वारा ऐसा पुष्टिकरण तुरन्त न दिए जा सकने की दशा में, वह पुष्टिकरण के संबंध में अनुरोधों के क्रम को ध्यान में रख कर, सर्वप्रथम अवसर पर ऐसा करेगा । वह पक्षकार राज्य को भी इस बारे में जानकारी देगा कि तुरन्त कार्रवाई कब तक की जा सकने की संभावना है । यदि महानिदेशक इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि अनुरोधों के संबंध में सामयिक कार्रवाई नहीं की जा सकती है तो वह, कार्य परिषद् को भविष्य में स्थिति में सुधार करने के लिए समुचित कार्रवाई करने के लिए कह सकेगा ।
अधिसूचना :
4. कार्य परिषद् और महानिदेशक को दिए जाने वाले आक्षेप निरीक्षण से संबंधित निरीक्षण अनुरोध में कम से कम निम्नलिखित जानकारी अन्तर्विष्ट होगी :-
(क) निरीक्षण किया जाने वाला पक्षकार राज्य और, यदि लागू हो तो, मेजबान राज्य ;
(ख) प्रयोग किया जाने वाला प्रवेश बिन्दु ;
(ग) निरीक्षण स्थल का आकार और प्रकार ;
(घ) इस अभिसमय के संभाव्य अननुपालन की बाबत चिन्ता जिसमें इस अभिसमय के सुसंगत उपबंधों के प्रति विनिर्देश है जिनके बारे में चिन्ता उत्पन्न हुई है, संभाव्य अननुपालन की प्रकृति और परिस्थितियां तथा वह समुचित जानकारी जिसके आधार पर चिन्ता उत्पन्न हुई है ; और
(ङ) अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य के संप्रेषक का नाम,
अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य ऐसी कोई अतिरिक्त जानकारी जो वह आवश्यक समझता है, प्रस्तुत कर सकेगा ।
5. महानिदेशक अनुरोध की प्राप्ति से एक घंटे के भीतर अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य को उसकी प्राप्ति की सूचना देगा ।
6. अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य महानिदेशक को सम्यक् समय के भीतर निरीक्षण स्थल की अवस्थिति अधिसूचित करेगा ताकि वह निरीक्षित किए गए पक्षकार राज्य को यह जानकारी प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के निर्धारित आगमन के कम से कम 12 घंटे पूर्व उपलब्ध कराने में समर्थ हो सके ।
7. निरीक्षण स्थल अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य द्वारा इस प्रकार अभिहित किया जाएगा कि जहां तक संभव हो निर्देश बिन्दु से संबंधित स्थल आरेख दिया जाएगा जिसमें भौगोलिक दिशाएं निकटतम संभव सीमा तक स्पष्ट की गई हों । यदि संभव हो तो अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य निरीक्षण स्थल के साधारण उपदर्शन सहित मानचित्र और यथा संभव निरीक्षण किए जाने वाले स्थल का अनुरोध किया गया पैरीमीटर उपदर्शित करते हुए आरेख प्रस्तुत करेगा ।
8. अनुरोध किए गए पैरीमीटर में निम्नलिखित होंगे :-
(क) किसी भवन या अन्य संरचना के बाहर कम से कम 10 मीटर की दूरी पर चिह्न ;
(ख) विद्यमान सुरक्षा बाड़ों के बीच से कोई कटाव नहीं; और
(ग) अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य के किसी विद्यमान सुरक्षा बाड़े के बाहर कम से कम 10 मीटर की दूरी पर एक चिह्न जिसे वह अनुरोध किए गए पैरीमीटर के भीतर शामिल करना चाहता है ।
9. यदि अनुरोध किया गया पैरीमीटर पैरा 8 के विनिर्देशों के अनुरूप नहीं है तो उसे निरीक्षण दल द्वारा इस प्रकार पुनः रेखांकित किया जाएगा कि वह उस उपबंध के अनुरूप हो जाए ।
10. महानिदेशक प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के निर्धारित आगमन से कम से कम 12 घंटे पूर्व, कार्य परिषद् को पैरा 7 में यथाविनिर्दिष्ट निरीक्षण स्थल की अवस्थिति के बारे में सूचित करेगा ।
11. कार्य परिषद् को पैरा 10 के अनुसार सूचित करने के साथ ही साथ महानिदेशक निरीक्षित पक्षकार राज्य को निरीक्षण अनुरोध, पैरा 7 में यथाविनिर्दिष्ट निरीक्षण स्थल की अवस्थिति सहित, संप्रेषित करेगा । इस अधिसूचना में इस उपाबंध के भाग 2 के पैरा 32 में विनिर्दिष्ट सूचना भी शामिल होगी ।
12. निरीक्षण दल के प्रवेश बिन्दु पर पहुंच जाने पर निरीक्षित पक्षकार राज्य को निरीक्षण दल द्वारा निरीक्षण आदेश की सूचना दी जाएगी ।
निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में प्रवेश :
13. महानिदेशक, अनुच्छेद 9 के पैरा 13 से पैरा 18 तक के अनुसार निरीक्षण अनुरोध प्राप्त हो जाने के पश्चात् यथासंभव शीघ्र एक निरीक्षण दल भेजेगा । निरीक्षण दल अनुरोध में विनिर्दिष्ट प्रवेश बिन्दु पर, पैरा 10 और पैरा 11 के उपबंधों से संगत न्यूनतम संभव समय में पहुंचेगा ।
14. यदि अनुरोध किया गया पैरीमीटर, निरीक्षित पक्षकार राज्य को स्वीकार्य है तो यह अंतिम पैरीमीटर के रूप में यथासंभव शीघ्र, किन्तु किसी भी दशा में प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के 24 घंटे के अपश्चात् अभिहित किया जाएगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल को निरीक्षण स्थल के अंतिम पैरीमीटर तक ले जाएगा । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य आवश्यक समझता है तो ऐसा परिवहन अंतिम पैरीमीटर के अभिधान के लिए इस पैरा में विनिर्दिष्ट समयावधि की समाप्ति से 12 घंटे पूर्व आरंभ किया जा सकेगा । किसी भी दशा में परिवहन निरीक्षण दल के प्रवेश बिन्दु पर पहुंचने के पश्चात् 36 घंटे के भीतर पूरा किया जाएगा ।
15. सभी घोषित सुविधाओं के लिए, उपपैरा (क) और (ख) की प्रक्रियाएं लागू होंगी (इस भाग के प्रयोजनों के लिए घोषित सुविधा" से वे सभी सुविधाएं अभिप्रेत हैं जो अनुच्छेद 3, 4 और 5 के अनुसरण में घोषित की गई हैं । अनुच्छेद 6 के संबंध में घोषित सुविधा" से वही सुविधाएं अभिप्रेत हैं जो इस उपांबध के भाग 6 के अनुसरण में घोषित की गई हैं साथ ही इस उपाबंध के भाग 7 के पैरा 7 और 10 (ग) के तथा भाग 8 के पैरा 7 और 10(ग) के अनुसरण में घोषणा द्वारा विनिर्दिष्ट घोषित संयंत्र भी अभिप्रेत हैं :-
(क) यदि अनुरोध किया गया पैरीमीटर, घोषित पैरीमीटर में है या उसके अनुरूप है तो घोषित पैरीमीटर को अंतिम पैरीमीटर समझा जाएगा । तथापि अंतिम पैरीमीटर, यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य सहमत हो तो अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य द्वारा अनुरोध किए गए पैरीमीटर के अनुरूप लाने के लिए छोटा किया जा सकेगा ।
(ख) निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल का, यथाशीघ्र व्यवहार्य, अंतिम पैरीमीटर तक परिवहन करेगा । किन्तु हर दशा में यह सुनिश्चित करेगा कि निरीक्षण दल प्रवेश बिन्दु पर पहुंचने के पश्चात् 24 घंटे के भीटर पैरीमीटर तक पहुंच जाए ।
अंतिम पैरीमीटर का वैकल्पिक अवधारण :
16. प्रवेश बिन्दु पर, यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य अनुरोध किए गए पैरीमीटर को स्वीकार नहीं कर सकता तो वह यथासंभव शीघ्र किन्तु हर दशा में प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के पश्चात् 24 घंटे के अपश्चात् वैकल्पिक पैरीमीटर का प्रस्ताव करेगा । मत वैभिन्य की दशा में निरीक्षित पक्षकार राज्य और निरीक्षण दल, अंतिम पैरीमीटर पर सहमति के उद्देश्य से विचार-विमर्श में लग जाएंगे ।
17. वैकल्पिक पैरीमीटर, यथासंभव पैरा 8 के अनुसार विनिर्दिष्टतः अभिहित किया जाना चाहिए । इसके अन्तर्गत संपूर्ण अनुरोध किया गया पैरीमीटर होगा और एक नियम के रूप में नैसर्गिक भूभाग की विशेषताओं और मानव निर्मित सीमाओं को गणना में लेते हुए पश्चात्वर्ती के साथ इसका निकट संबंध होना चाहिए । सामान्यतः इसे परिवर्ती सुरक्षा रोध के, यदि ऐसा रोध विद्यमान है तो, निकट होना चाहिए । निरीक्षित पक्षकार राज्य को पैरीमीटर के बीच ऐसा संबंध, निम्नलिखित में से कम से कम दो साधनों के संयोग द्वारा स्थापित करने की ईप्सा करनी चाहिए :-
(क) वह वैकल्पिक पैरीमीटर जिसका विस्तार अनुरोध किए गए पैरीमीटर के क्षेत्र से प्रमुखतः अधिक नहीं है ;
(ख) वह वैकल्पिक पैरीमीटर जो अनुरोध किए गए पैरीमीटर से छोटा और एक समान दूरी पर है ;
(ग) कम से कम अनुरोध किए गए पैरीमीटर का भाग है वैकल्पिक पैरीमीटर से दृष्टव्य है ।
18. यदि वैकल्पिक पैरीमीटर निरीक्षण दल को स्वीकार्य है, तो वह अंतिम पैरीमीटर हो जाएगा और निरीक्षण दल का प्रवेश बिन्दु से उस पैरीमीटर पर परिवहन किया जाएगा । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य आवश्यक समझता है तो ऐसा परिवहन वैकल्पिक पैरीमीटर के प्रस्ताव के लिए पैरा 16 में विनिर्दिष्ट समयावधि की समाप्ति के 12 घंटे पूर्व आरम्भ किया जा सकेगा । परिवहन हर दशा में प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के पश्चात् 36 घंटे के भीतर पूरा किया जाएगा ।
19. यदि अंतिम पैरीमीटर पर सहमति नहीं होती है तो पैरीमीटर संबंधी विचार-विमर्श यथासंभव शीघ्र समाप्त कर दिया जाएगा किन्तु किसी भी दशा में वे प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के पश्चात् 24 घंटे से अधिक तक विचार-विमर्श जारी नहीं रखेंगे । यदि कोई करार नहीं होता है तो निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल का वैकल्पिक पैरीमीटर की अवस्थिति तक परिवहन करेगा । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य आवश्यक समझता है तो ऐसा परिवहन, वैकल्पिक पैरीमीटर के प्रस्ताव के लिए पैरा 16 में विनिर्दिष्ट समयावधि की समाप्ति से 12 घंटे पूर्व आरम्भ किया जा सकेगा । हर दशा में परिवहन प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के पश्चात् 36 घंटे के अपश्चात् पूरा किया जाएगा ।
20. एक बार अवस्थिति पर पहुंच जाने पर, निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल को विचार-विमर्श को सुकर बनाने और अंतिम पैरीमीटर पर सहमति तथा अंतिम पैरीमीटर के भीतर पहुंच के लिए वैकल्पिक पैरीमीटर तक शीघ्र व्यवस्था करेगा ।
21. यदि निरीक्षण दल के अवस्थिति पर पहुंचने के पश्चात् 72 घंटे के भीतर कोई करार नहीं हो पाता है तो वैकल्पिक पैरीमीटर को अंतिम पैरीमीटर अभिहित किया जाएगा ।
अवस्थिति का सत्यापन :
22. यह स्थापित करने में सहायता के लिए कि वह निरीक्षण स्थल जिस तक निरीक्षण दल का परिवहन किया गया है, अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य द्वारा विनिर्दिष्ट निरीक्षण स्थल के तत्समान है, निरीक्षण दल को अनुमोदित अवस्थिति खोजी उपस्कर का प्रयोग करने और उसके निदेशों के अनुसार ऐसे उपस्कर संस्थापित कराने का अधिकार होगा । निरीक्षण दल अपनी अवस्थिति मानचित्रों से ज्ञात स्थानीय भूचिह्नों के प्रतिनिर्देश द्वारा सत्यापित कर सकेगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य इस कार्य में निरीक्षण दल की सहायता करेगा ।
स्थल का सुनिश्चय, निकास की मानीटरिंग :
23. निरीक्षण दल के प्रवेश बिन्दु पर पहुंचने के 12 घंटे के भीतर, निरीक्षित पक्षकार राज्य अनुरोध किए गए पैरीमीटर की समस्त भूमि, वायु और जलयानों के लिए सभी निकास बिन्दुओं पर सभी यान निकासी क्रियाकलाप संबंधी तथ्यपरक जानकारी को एकत्रित करेगा और इस जानकारी को निरीक्षण दल के वैकल्पिक अथवा अंतिम पैरीमीटर पर, जो भी पहले आए, पहुंचने पर उपलब्ध कराएगा ।
24. यह दायित्व ट्रैफिक लॉग, फोटोग्राफ, वीडियो रिकार्डिंग के रूप में अथवा निरीक्षण दल द्वारा ऐसे निकासी क्रियाकलाप को मानीटर करने के लिए दिए गए रासायनिक साक्ष्य उपस्कर द्वारा आंकड़ों के रूप में संगृहीत करके पूरा किया जा सकता है । अनुकल्पतः निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल के एक से अधिक सदस्यों को स्वतंत्र रूप से ट्रैफिक लॉग बनाने, फोटोग्राफ लेने, निकासी ट्रैफिक की वीडियो रिकार्डिंग करने या रासायिक साक्ष्य उपस्कर का उपयोग करने और ऐसे अन्य क्रियाकलाप करने की जो निरीक्षित राज्य और निरीक्षण दल के बीच तय पाए जाएं, अनुज्ञात करके भी इस दायित्व को पूरा किया जा सकेगा ।
25. वैकल्पिक पैरीमीटर या अंतिम पैरीमीटर पर, जो भी पहले आए, निरीक्षण दल के पहुंचने पर निरीक्षण दल द्वारा स्थल सुनिश्चित करना, जिसका अर्थ है निकासी मानीटरिंग की प्रक्रिया निरीक्षण दल द्वारा आरम्भ की जाएगी ।
26. ऐसी प्रक्रियाओं में निम्नलिखित सम्मिलित होंगेः यान निकासी की पहचान, ट्रैफिक लॉगों का बनाया जाना, फोटोग्राफ लेना और निकासियों तथा निकास ट्रैफिक का निरीक्षण दल द्वारा वीडियो रिकार्डिंग करना । निरीक्षण दल को यह जांच करने के लिए कि कोई अन्य निकास क्रियाकलाप नहीं है पैरीमीटर के किसी अन्य भाग में अनुरक्षक के साथ जाने का अधिकार है ।
27. निकास मानीटरिंग क्रियाकलाप के लिए अतिरिक्त प्रक्रियाओं में, निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य की सहमति से अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित भी हैं :-
(क) सैंसर का प्रयोग,
(ख) यदाकदा चयनित पहुंच ;
(ग) नमूना विश्लेषण ।
28. स्थल के सुनिश्चयन और निकास मानीटरिंग के लिए सभी क्रियाकलाप पैरीमीटर के बाहर चारों ओर एक बैंड के भीतर, जिसकी चौड़ाई बाहर की ओर से मापी जाने पर 50 मीटर से अधिक नहीं होगी, किए जाएंगे ।
29. निरीक्षण दल को स्थल से निकासी कर रहे यान यातायात का व्यवस्थित पहुंच के आधार पर निरीक्षण करने का अधिकार है । निरीक्षित पक्षकार राज्य निरीक्षण दल को यह प्रदर्शित करने के लिए प्रत्येक उचित प्रयास करेगा कि कोई यान, ऐसे निरीक्षण के अधीन रहते हुए, जिस तक निरीक्षण दल को पूर्ण पहुंच मंजूर नहीं की जाती है, निरीक्षण अनुरोध में उठाए गए संभाव्य अननुपालन की समस्याओं से संबंधित प्रयोजनों के लिए प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है ।
30. स्थल पर प्रवेश करने वाले कार्मिक और यान तथा वहां से बाहर जाने वाले कार्मिक और निजी यात्री यान निरीक्षण के अधीन नहीं हैं ।
31. उपर्युक्त प्रक्रियाओं का लागू होना निरीक्षण की अवधि के दौरान बना रह सकेगा किन्तु वह अनुचित रूप से सुविधा के सामान्य प्रचालन में व्यवधान या विलंब नहीं डाल सकेगा ।
निरीक्षण पूर्व विवरण और निरीक्षण योजना :
32. किसी निरीक्षण योजना के विकास को सुकर बनाने के लिए, निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल को पहुंच के पूर्व सुरक्षा और तर्क संगत संक्षिप्त विवरण प्रदान करेगा ।
33. निरीक्षण पूर्व विवरण इस उपाबंध के भाग 2 के पैरा 37 के अनुसार ही किया जाएगा । निरीक्षण पूर्व विवरण के क्रम में, निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल को ऐसे उपस्कर, दस्तावेज या क्षेत्र उपदर्शित कर सकेगा जिन्हें वह संवेदनशील समझता है और जो आक्षेप निरीक्षण के प्रयोजन से असंबद्ध है । इसके अतिरिक्त, स्थल के लिए उत्तरदायी कार्मिक निरीक्षण दल को, वास्तविक अभिन्यास और स्थल की अन्य संगत विशेषताएं बतलाएंगे । निरीक्षण दल को स्थल की सभी संरचनाओं और महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं को प्रदर्शित करते हुए तैयार किया गया मानचित्र या रेखाचित्र दिया जाएगा । निरीक्षण दल को सुविधा कार्मिक और अभिलेखों की उपलभ्यता का भी विवरण दिया जाएगा ।
34. निरीक्षण पूर्व विवरण के पश्चात्, निरीक्षण दल उपलभ्य और उसके लिए समुचित जानकारी के आधार पर एक आरंभिक निरीक्षण योजना तैयार करेगा, जिसमें निरीक्षण दल द्वारा किए जाने वाले कार्यकलाप विनिर्दिष्ट होंगे, जिनमें स्थल के वे विनिर्दिष्ट क्षेत्र भी होंगे जहां पहुंच वांछनीय है । निरीक्षण योजना में यह भी विनिर्दिष्ट होगा कि क्या निरीक्षण दल उप-समूहों में विभाजित किया जाएगा । निरीक्षण योजना, निरीक्षित पक्षकार राज्य और निरीक्षण स्थल के प्रतिनिधियों को उपलभ्य कराई जाएगी । इसका कार्यान्वयन खंड (ग) के उपबंधों, जिनमें पहुंच और क्रियाकलाप से संबंधित उपबंध भी हैं, से संगत होगा ।
पैरीमीटर क्रियाकलाप :
35. निरीक्षण दल के अंतिम या वैकल्पिक पैरीमीटर पर, जो भी पहले आए, पहुंचने पर, दल को, इस खंड के अधीन वर्णित प्रक्रियाओं के अनुसार तत्काल पैरीमीटर क्रियाकलाप आरंभ करने का और ऐसे क्रियाकलापों को आक्षेप निरीक्षण के पूरा होने तक जारी रखने का अधिकार होगा ।
36. पैरीमीटर क्रियाकलापों के संचालन में निरीक्षण दल को निम्नलिखित अधिकार होंगे :-
(क) इस उपाबंध के भाग 2 के पैरा 27 से 30 तक के अनुसार मानीटरिंग उपकरणों का उपयोग करना ;
(ख) पोंछन, वायु, मृदा या बहिःस्राव के नमूने लेना ; और
(ग) ऐसा कोई अतिरिक्त क्रियाकलाप करना जिस पर निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य के बीच सहमति हो ।
37. निरीक्षण दल के पैरीमीटर क्रियाकलाप पैरीमीटर के बाहर चारों ओर एक बैंड के भीतर जिसकी चौड़ाई पैरीमीटर से बाहर की ओर मापने पर 50 मीटर होगी, किए जा सकेंगे । यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य सहमत होता है तो निरीक्षण दल की पैरीमीटर बैंड के भीतर किसा भवन या संरचना तक भी पहुंच हो सकेगी । सभी निदेशात्मक मानीटरिंग अंतर्मुखी होंगी । घोषित सुविधाओं के लिए निरीक्षित पक्षकार राज्य के विवेक पर बैंड, घोषित पैरीमीटर के भीतर की ओर, बाहर की ओर या दोनों ओर हो सकता है ।
ग. निरीक्षणों का संचालन
साधारण नियम :
38. निरीक्षित पक्षकार राज्य, अनुरोध किए गए पैरीमीटर और साथ ही यदि वैभिन्य हो तो अंतिम पैरीमीटर के भीतर पहुंच की व्यवस्था करेगा । इन पैरीमीटरों के भीतर किसी विशिष्ट स्थान या स्थानों तक पहुंच की सीमा और प्रकृति के संबंध में निरीक्षण दल और निरीक्षित किए जाने वाले पक्षकार राज्य के बीच, व्यवस्थित पहुंच के आधार पर, बातचीत की जाएगी ।
39. निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण के अनुरोध में उठाए गए इस अभिसमय के संभावित अननुपालन से संबंधित मामले को स्पष्ट करने के लिए यथासंभवशीघ्र, किन्तु प्रवेश बिन्दु पर निरीक्षण दल के पहुंचने के 108 घंटे के अपश्चात्, अनुरोध की गई पैरीमीटर के भीतर प्रवेश करने देगा ।
40. निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल के अनुरोध पर, निरीक्षण स्थल में हवाई पहुंच प्रदान कर सकेगा ।
41. निरीक्षित पक्षकार राज्य, पैरा 38 में यथाविनिर्दिष्ट पहुंच प्रदान करने से संबंधित अपेक्षाओं को पूरा करने में, किन्हीं संवैधानिक बाध्यताओं को ध्यान में रखते हुए, जो स्वामिस्व अधिकारों या तलाशी और अभिग्रहण के संबंध में हो, अधिकतम डिग्री तक पहुंच की अनुज्ञा देने के दायित्व के अधीन होगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य को व्यवस्थित पहुंच के अधीन ऐसे उपाय करने का अधिकार होगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की संरक्षा के लिए आवश्यक है । निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा इस पैरा के उपबंधों का अवलंब इस अभिसमय के अधीन प्रतिषिद्ध क्रियाकलापों में लिप्त न होने की इसकी बाध्यताओं की उपेक्षा को छिपाने के लिए नहीं लिया जा सकेगा ।
42. यदि निरीक्षित पक्षकार राज्य, स्थानों, क्रियाकलापों या जानकारी तक पूर्ण पहुंच से कम उपलब्ध कराता है तो यह ऐसे संभावित अननुपालन के मामलों के स्पष्टीकरण हेतु जिन्होंने आक्षेप निरीक्षण को जन्म दिया है वैकल्पिक अर्थ प्रदान करने के लिए प्रत्येक युक्तियुक्ति प्रयास करने के दायित्व के अधीन होगा ।
43. अनुच्छेद 4, 5 और 6 के अनुसरण में घोषित सुविधाओं के अंतिम पैरीमीटर में पहुंचने पर निरीक्षण पूर्व विवरण दिए जाने और निरीक्षण योजनाओं की चर्चा करने के पश्चात् प्रवेश मंजूर किया जाएगा, जो न्यूनतम आवश्यकता तक सीमित होगा और किसी भी दशा में तीन घंटे से अधिक का नहीं होगा । अनुच्छेद 3, पैरा 1(घ) के अनुसरण में घोषित सुविधाओं के संबंध में बातचीत चलाई जाएगी और अंतिम पैरीमीटर पर पहुंचने के 12 घंटे के अपश्चात् व्यवस्थित पहुंच आरम्भ होगी ।
44. निरीक्षण दल निरीक्षण अनुरोध के अनुसार आक्षेप निरीक्षण करने में केवल वे तरीके ही प्रयोग करेगा, जो इस अभिसमय के उपबंधों के संभावित अननुपालन से संबंधित मामलों के स्पष्टीकरण के लिए पर्याप्त सुसंगत तथ्य प्रदान करने के लिए आवश्यक हों और उससे असंगत क्रियाकलापों से विरत रहेगा । यह ऐसे तथ्यों को एकत्रित और लेखबद्ध करेगा, जो निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा इस अभिसमय के संभावित अननुपालन से संबंधित हों । ऐसी जानकारी को न तो मांगेगा न ही लेखबद्ध करेगा, जो स्पष्ट रूप से उनसे संबंधित नहीं है, जब तक कि निरीक्षित पक्षकार राज्य अभिव्यक्त रूप में ऐसा करने के लिए इससे अनुरोध नहीं करता है । ऐसे एकत्रित की गई और तत्पश्चात् उससे सुसंगत न पाई गई सामग्री को नहीं रखा जाएगा ।
45. निरीक्षण दल, इसके मिशन को प्रभावी रूप में और समय से पूरा करने के लिए सुसंगत कम से कम संभावित अतिक्रमी रीति में आक्षेप निरीक्षण करने के सिद्धांत द्वारा मार्गदर्शित होगा । जहां कहीं संभव हो, यह कम से कम अतिक्रमी प्रक्रियाओं के साथ प्रारम्भ करेगा जो यह स्वीकार्य समझता है और केवल ऐसी अधिक अतिक्रमी प्रक्रियाओं पर ही, जिसे यह आवश्यक समझता है, कार्यवाही करेगा ।
प्रबंधित पहुंच :
46. निरीक्षण दल यह सुनिश्चित करने के लिए कि रासायनिक आयुध से असंबंधित संवेदनशील उपस्कर, जानकारी या क्षेत्र संरक्षित है, निरीक्षण योजना और प्रस्तावों के सुझाए गए उपांतरणों पर जो निरीक्षण के किसी भी प्रक्रम पर निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा दिए जाएं, जिसके अंतर्गत निरीक्षण पूर्व विवरण देना भी है, विचार करेगा ।
47. निरीक्षित पक्षकार राज्य, पहुंच के लिए प्रवेश/निकास बिन्दुओं का पैरीमीटर निर्दिष्ट करेगा । निरीक्षण दल और निरीक्षित पक्षकार राज्य, पैरा 48 में यथा-उपबंधित अंतिम और अनुरोध किए गए पैरीमीटरों के भीतर किसी विशिष्ट स्थान या स्थानों में पहुंच की सीमा, निरीक्षण दल द्वारा किए जाने वाले विशिष्ट निरीक्षण क्रियाकलाप जिसके अन्तर्गत नमूने लेना भी है, निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा विशिष्ट क्रियाकलाप का निष्पादन और निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा विशिष्ट जानकारी के उपबंध के संबंध में बातचीत करेंगे ।
48. निरीक्षित पक्षकार को, गोपनीयता उपाबंध में सुसंगत उपाबंधों के अनुरूप संवेदनशील प्रतिष्ठानों की संरक्षा करने और ऐसी गोपनीय जानकारी और आंकड़े प्रकट किए जाने को रोकने के लिए, जो रासायनिक आयुधों से संबंधित नहीं हैं, उपाय करने का अधिकार होगा । ऐसे उपायों में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित हो सकेंगे :-
(क) कार्यालय स्थानों से संवेदनशील कागज़ात को हटाना ;
(ख) संवेदनशील संप्रदर्शों, भंडारों और उपस्कर को ढकना ;
(ग) उपस्कर के संवेदनशील भागों को, जैसे कम्प्यूटर या विद्युत प्रणाली को ढकना ;
(घ) कम्प्यूटर प्रणाली को चालू करना और आंकड़े बताने वाली युक्तियों को बन्द करना ;
(ङ) अनुसूची 1, 2 और 3 में सूचीबद्ध रसायनों की उपस्थिति या अनुपस्थिति या समुचित अपकर्ष उत्पादों के नमूना विश्लेषण पर प्रतिबंध लगाना ;
(च) अनिश्चित चयनकारी पहुंच तकनीकों का उपयोग करना, जिसके द्वारा निरीक्षकों से उनकी पसंद के भवनों की, दी गई प्रतिशतता में या संख्या में निरीक्षण करने के लिए चयन करने का अनुरोध किया जाता है, यदि सिद्धांत संवेदनशील भवनों के अभ्यंतर और इसकी अन्तर्वस्तु के संबंध में लागू किया जा सकता है ;
(छ) आपवादिक मामलों में, निरीक्षण स्थल के कुछ भागों में केवल व्यष्टि निरीक्षकों को ही पहुंचने देना ।
49. निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल को यह प्रदर्शित करने के लिए सभी उचित प्रयास करेगा कि किसी वस्तु, भवन, संरचना, पात्र या वाहन का उपयोग, जिसके संबंध में निरीक्षण दल को पूर्ण पहुंच नहीं दी गई थी या जिसका संरक्षण पैरा 48 के अनुसार किया गया था, निरीक्षण अनुरोध में उठाए गए संभावित अननुपालन की चिन्ताओं से संबंधित प्रयोजनों के लिए नहीं किया गया है ।
50. इसे अन्य बातों के साथ-साथ निरीक्षित पक्षकार राज्य के स्वविवेक पर किसी आच्छादन या पर्यावरण संबंधी संरक्षा आवरण को आंशिक रूप से हटाने के साधन द्वारा, इसके प्रवेश मार्ग से इसके संलग्न स्थान को अभ्यांतर के चाक्षुष निरीक्षण के द्वारा या किन्हीं अन्य रीतियों द्वारा निष्पादित किया जाएगा ।
51. अनुच्छेद 4, 5 और 6 के अनुसरण में घोषित सुविधाओं की दशा में, निम्नलिखित लागू होंगे :-
(क) सुविधा करार वाली सुविधाओं के संबंध में अंतिम पैरीमीटर के भीतर पहुंच और क्रियाकलापों को करारों द्वारा स्थापित सीमाओं के भीतर बाधा रहित किया जाएगा ;
(ख) सुविधा करार रहित सुविधाओं के संबंध में पहुंच और क्रियाकलाप की बातचीत इस अभिसमय के अधीन स्थापित, लागू होने वाले साधारण निरीक्षण मार्गदर्शक सिद्धांतों द्वारा शासित होंगी ;
(ग) अनुच्छेद 4, 5 और 6 के अधीन निरीक्षणों के लिए प्रदान की गई पहुंच से बाहर का प्रबंध इस खंड की प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा ।
52. अनुच्छेद 3, पैरा 1(घ) के अनुसार घोषित सुविधाओं की दशा में, निम्नलिखित लागू होगा-
यदि पैरा 47 और 48 की प्रक्रियाओं का उपयोग करने वाले निरीक्षित पक्षकार राज्य ने ऐसे क्षेत्रों या संरचनाओं तक पूर्ण पहुंच प्रदान नहीं की है, जो रासायनिक आयुधों से संबंधित नहीं है, तो यह निरीक्षण दल को यह प्रदर्शित करने के लिए सभी उचित प्रयास करेगा कि ऐसे क्षेत्रों या संरचनाओं का उपयोग, निरीक्षण अनुरोध में उठाए गए संभावित अननुपालन के मामलों से संबंधित प्रयोजनों के लिए नहीं किया गया है ।
संप्रेक्षक :
53. अनुच्छेद 9, पैरा 12 के उपबंधों के अनुसार आक्षेप निरीक्षण में किसी संप्रेक्षक के भाग लेने के संबंध में अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य निरीक्षण दल के पहुंचने की युक्तियुक्त अवधि के भीतर निरीक्षण दल के रूप में उसी प्रवेश बिन्दु पर संप्रेक्षक के आने को समन्वित करने के लिए तकनीकी सचिवालय के साथ संपर्क करेगा ।
54. संप्रेक्षक को निरीक्षण की पूरी अवधि के दौरान अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य में या मेजबान राज्य के राजदूतावास के साथ या किसी राजदूतावास के न होने की दशा में, स्वयं अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य के साथ परस्पर संपर्क बनाए रखने का अधिकार होगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य संप्रेक्षक को संचार साधन उपलब्ध कराएगा ।
55. संप्रेक्षक को निरीक्षण स्थल के वैकल्पिक या अंतिम पैरीमीटर में, जहां निरीक्षण दल पहले पहुंचता है, पहुंचने और निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा प्रदान किए जाने के अनुसार, निरीक्षण स्थल में पहुंचने का अधिकार होगा । संप्रेक्षक को निरीक्षण दल को सिफारिशें करने का भी अधिकार होगा, जिसे निरीक्षण दल, उस सीमा तक जहां तक वह उचित समझता है, ध्यान में रखेगा । संपूर्ण निरीक्षण के दौरान निरीक्षण दल निरीक्षण के संचालन और इसके निष्कर्षों के बारे में संप्रेक्षक को सूचित करता रहेगा ।
56. निरीक्षित पक्षकार राज्य, देश के अन्दर की संपूर्ण अवधि के दौरान संप्रेक्षक के लिए आवश्यक सुख-सुविधाएं प्रदान करेगा या उनकी व्यवस्था करेगा, जैसे कि संचार साधन, भाषान्तरण सेवाएं, परिवहन, कार्य का स्थान, आवास, भोजन और चिकित्सीय देखभाल । निरीक्षित पक्षकार राज्य या मेजबान राज्य के राज्यक्षेत्र में संप्रेक्षक के रहने के संबंध में सभी खर्चे अनुरोधकर्ता राज्य पक्षकार द्वारा वहन किए जाएंगे ।
निरीक्षण की अवधि :
57. निरीक्षण की अवधि, जब तक निरीक्षित पक्षकार राज्य के साथ करार द्वारा बढ़ाई न गई हो, 84 घंटे से अधिक नहीं होगी ।
घ. निरीक्षण-पश्चात् क्रियाकलाप
प्रस्थान :
58. निरीक्षण स्थल पर निरीक्षण-पश्चात् प्रक्रियाओं के पूरा हो जाने पर, अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य का निरीक्षण दल और संप्रेक्षक प्रवेश के किसी बिन्दु से तत्परता से चल देगा और तब न्यूनतम संभव समय में निरीक्षित पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र को छोड़ देगा ।
रिपोर्टें :
59. निरीक्षण रिपोर्ट में निरीक्षण दल द्वारा किए गए क्रियाकलापों और विशिष्ट रूप से आक्षेप निरीक्षण के संबंध में, इस अभिसमय से संभावित अननुपालन से संबंधित मामलों के संबंध में निरीक्षण दल के तथ्य परक निष्कर्षों का सामान्य रूप में संक्षेपीकरण किया जाएगा और इस अभिसमय से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित जानकारी तक सीमित रखा जाएगा । इसमें निरीक्षण दल द्वारा, निरीक्षकों को दी गई पहुंच और सहयोग की प्रकृति और सीमा, जहां तक इसने उन्हें निरीक्षण आदेश को पूरा करने में समर्थ बनाया, किया गया निर्धारण भी सम्मिलित होगा । आक्षेप निरीक्षण के अनुरोध में उल्लिखित इस अभिसमय के संभावित अननुपालन के संबंध में मामलों से संबंधित ब्यौरेवार जानकारी, अंतिम रिपोर्ट के परिशिष्ट के रूप में पेश की जाएगी और संवेदनशील जानकारी की संरक्षा करने के लिए समुचित सुरक्षोपायों के अधीन तकनीकी सचिवालय द्वारा रखी जाएगी ।
60. निरीक्षण दल, इसके मुख्य कार्य-स्थान पर इसकी वापसी के 72 घंटे के अपश्चात्, अन्य बातों के साथ-साथ गोपनीयता उपाबन्ध के पैरा 17 को ध्यान में रखते हुए, महानिदेशक को प्रस्तुत करेगा । महानिदेशक, प्राथमिक निरीक्षण रिपोर्ट को तत्परता से, अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य, निरीक्षित पक्षकार राज्य और कार्य परिषद् को भेज देगा ।
61. आक्षेप निरीक्षण के पूरा होने के 20 दिन के अपश्चात् निरीक्षित पक्षकार राज्य को एक अंतिम निरीक्षण रिपोर्ट प्रारूप उपलब्ध कराया जाएगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य को किसी जानकारी और आंकड़े का अभिज्ञान करने का अधिकार होगा, जो ऐसे रासायनिक आयुधों से संबंधित नहीं हैं, जिन्हें, इसकी राय में, इसकी गोपनीय प्रकृति के कारण, तकनीकी सचिवालय के बाहर परिचालित नहीं किया जाना चाहिए । तकनीकी सचिवालय, निरीक्षित पक्षकार राज्य द्वारा दी गई प्रारूप अंतिम निरीक्षण रिपोर्ट के परिवर्तनों से संबंधित प्रस्तावों पर विचार करेगा और जहां कहीं संभव हो, अपने स्वविवेक का उपयोग करते हुए, उन्हें अपनाएगा । तत्पश्चात् अंतिम रिपोर्ट, आक्षेप निरीक्षण के पूरा होने के 30 दिन के अपश्चात्, अनुच्छेद 9 पैरा 21 से 25 के अनुसार आगे वितरण और विचार किए जाने के लिए, महानिदेशक को भेजी जाएगी ।
भाग 11
रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के मामलों में अन्वेषण
क. साधारण :
1. रासायनिक आयुधों के या युद्ध की पद्धति के रूप में बलवा नियंत्रण कारकों के अभिकथित उपयोग का, अनुच्छेद 9 या 10 के अनुसरण में आरंभ किया गया अन्वेषण इस उपाबन्ध और महानिदेशक द्वारा स्थापित की जाने वाली ब्यौरेवार प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा ।
2. निम्नलिखित अतिरिक्त उपबंध, रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के मामलों में अपेक्षित विनिर्दिष्ट प्रक्रियाओं को इंगित करते हैं ।
ख. निरीक्षण पूर्व क्रियाकलाप :
अन्वेषण के लिए अनुरोध :
3. रासायनिक आयुधों के किसी अभिकथित उपयोग के अन्वेषण के संबंध में महानिदेशक को प्रस्तुत किए जाने वाले अनुरोध में, संभावित सीमा तक, निम्नलिखित जानकारी शामिल की जानी चाहिए-
(क) पक्षकार राज्य, जिसके राज्यक्षेत्र में रासायनिक आयुधों का उपयोग किया जाना अभिकथित है ;
(ख) प्रवेश का बिन्दु या पहुंच के अन्य सुझाए गए सुरक्षित मार्ग ;
(ग) उन क्षेत्रों की अवस्थिति और विशेषताएं, जहां रासायनिक आयुधों का उपयोग किया जाना अभिकथित है ;
(घ) रासायनिक आयुधों का उपयोग किया जाना कब अभिकथित है ;
(ङ) उन रासायनिक आयुधों की किस्में, जिनके बारे में विश्वास है कि उनका उपयोग किया गया है ;
(च) अभिकथित उपयोग की सीमा ;
(छ) संभावित विषैले रसायनों के गुण धर्म ;
(ज) मानव, पशुओं और वनस्पतियों पर प्रभाव ;
(झ) विनिर्दिष्ट सहायता के लिए अनुरोध, यदि लागू हो ।
4. पक्षकार राज्य, जिसने किसी अन्वेषण के लिए अनुरोध किया है, किसी समय भी, कोई अतिरिक्त जानकारी, जो वह आवश्यक समझता है; दे सकेगा ।
अधिसूचना :
5. महानिदेशक, तुरन्त अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य को इसके अनुरोध की प्राप्ति की अभिस्वीकृति देगा और कार्य परिषद् तथा सभी पक्षकार राज्यों को सूचित करेगा ।
6. यदि लागू हो, महानिदेशक उस पक्षकार राज्य को, जिसके राज्यक्षेत्र में किसी अन्वेषण का अनुरोध किया गया है, अधिसूचित करेगा । महानिदेशक अन्य पक्षकार राज्यों को भी अधिसूचित करेगा यदि अन्वेषण के दौरान उनके राज्यक्षेत्रों में पहुंच अपेक्षित हो जाए ।
निरीक्षण दल का समनुदेशन :
7. महानिदेशक, ऐसे अर्हित विशेषज्ञों की एक सूची तैयार करेगा जिनकी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता की रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के संबंध में किसी अन्वेषण में अपेक्षा हो सकेगी और इस सूची को निरंतर अद्यतन रखेगा । उक्त अनुसूची, इस अभिसमय के प्रवर्तन में आने के 30 दिन के अपश्चात् और सूची में प्रत्येक परिवर्तन के पश्चात् प्रत्येक पक्षकार राज्य को लिखित रूप में प्रेषित की जाएगी । इस सूची में सम्मिलित किए गए किसी भी अर्हित विशेषज्ञ को पदाभिहित समझा जाएगा, जब तक कि कोई पक्षकार राज्य इसके द्वारा सूची की प्राप्ति के 30 दिन के अपश्चात् लिखित रूप में अपनी अस्वीकृति घोषित नहीं करता है ।
8. महानिदेशक, किसी विशिष्ट अनुरोध की परिस्थितियों और विनिर्दिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आक्षेप निरीक्षण के लिए पहले से पदाभिहित किए गए निरीक्षकों और निरीक्षण सहायकों में से, किसी निरीक्षण दल के नेता और सदस्यों का चयन करेगा । इसके अतिरिक्त जब महानिदेशक की राय में, पहले से पदाभिहित किए गए निरीक्षकों में किसी विशिष्ट अन्वेषण के उचित संचालन के लिए अपेक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो तब निरीक्षण दल के सदस्यों का चयन विशेषज्ञों की सूची से किया जा सकेगा ।
9. महानिदेशक, निरीक्षण दल को विवरण देते समय यह सुनिश्चित करने के लिए कि निरीक्षण को अधिकतम दक्षतापूर्ण और समीचीन रूप में किया जा सकता है, अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य या किन्हीं अन्य स्रोतों द्वारा दी गई किसी अतिरिक्त जानकारी को सम्मिलित करेगा ।
निरीक्षण दल का भेजा जाना :
10. महानिदेशक, रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के किसी अन्वेषण के संबंध में किसी अनुरोध की प्राप्ति पर तुरन्त, सुसंगत पक्षकार राज्यों के साथ संपर्कों के माध्यम से दल के सुरक्षित प्रवेश के लिए अनुरोध करेगा और व्यवस्था की पुष्टि करेगा ।
11. महानिदेशक, दल की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दल को सर्वप्रथम अवसर पर भेजेगा ।
12. यदि निरीक्षण दल को अनुरोध की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर नहीं भेजा गया है तो महानिदेशक, कार्य परिषद् और संबंधित पक्षकार राज्यों को विलंब के कारणों के बारे में सूचित करेगा ।
विवरण देना :
13. निरीक्षण दल को, आगमन पर और निरीक्षण के दौरान किसी भी समय, निरीक्षित पक्षकार राज्य के प्रतिनिधियों से विवरण प्राप्त करने का अधिकार होगा ।
14. निरीक्षण दल, निरीक्षण के प्रारंभ से पहले अन्य बातों के साथ-साथ सैन्य तंत्र और सुरक्षा व्यवस्थाओं के आधार रूप में काम करने के लिए एक निरीक्षण योजना तैयार करेगा । निरीक्षण योजना को आवश्यकतानुसार अद्यतन किया जाएगा ।
ग. निरीक्षणों का संचालन :
पहुंच :
15. निरीक्षण दल को, ऐसे किसी या सभी क्षेत्रों में पहुंचने का अधिकार होगा, जो रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग द्वारा प्रभावित हो सकते हैं । इसे अस्पतालों, शरणार्थी शिविरों और अन्य अवस्थानों में पहुंचने का भी अधिकार होगा, जिन्हें यह रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के दक्षतापूर्ण अन्वेषण के लिए सुसंगत समझता हो । निरीक्षण दल ऐसी पहुंच के संबंध में निरीक्षित पक्षकार राज्य के साथ परामर्श कर सकेगा ।
नमूने लेना :
16. निरीक्षण दल को इस प्रकार के और ऐसी मात्रा में नमूने एकत्रित करने का अधिकार होगा, जितना वह आवश्यक समझता है । यदि निरीक्षण दल इसे आवश्यक समझता है और यदि इसके द्वारा ऐसा अनुरोध किया जाए तो निरीक्षित पक्षकार राज्य, निरीक्षकों या निरीक्षण सहायकों के पर्यवेक्षण के अधीन नमूनों को एकत्र करने में सहायता दे सकेगा । निरीक्षित पक्षकार राज्य, अभिकथित उपयोग स्थल के पड़ोसी क्षेत्रों से और ऐसे अन्य क्षेत्रों से समुचित नियंत्रण नमूने एकत्र करने के लिए जिनके लिए निरीक्षण दल द्वारा अनुरोध किया गया है, अनुज्ञात करेगा और सहयोग भी देगा ।
17. अभिकथित उपयोग के अन्वेषण में महत्वपूर्ण नमूनों में, विषैले रसायन, युद्ध सामग्री और युक्तियां, युद्ध सामग्रियों और युक्तियों के अवशेष, पर्यावरण संबंधी (वायु, मृद्रा, वनस्पति, जल, बर्फ, आदि) नमूने और मानव या पशु स्रोतों से (रक्त, मूत्र, विष्ठा, तंतु आदि) जैव चिकित्सीय नमूने सम्मिलित हैं ।
18. दो नमूनों के न लिए जा सकने और स्थल से बाहर प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किए जाने की दशा में, किसी बचे हुए नमूने को यदि ऐसा अनुरोध किया जाए, विश्लेषण के पूरा होने के पश्चात् निरीक्षित पक्षकार राज्य को वापस कर दिया जाएगा ।
निरीक्षण स्थल का विस्तार :
19. यदि किसी निरीक्षण के दौरान, निरीक्षण दल, अन्वेषण को किसी पड़ोसी पक्षकार राज्य के भीतर विस्तारित करना आवश्यक समझता है तो महानिदेशक, उस पक्षकार राज्य को उसके राज्यक्षेत्र में पहुंच की आवश्यकता के बारे में अधिसूचित करेगा और दल की सुरक्षित पहुंच के संबंध में व्यवस्था के लिए अनुरोध करेगा और उसकी पुष्टि करेगा ।
निरीक्षण अवधि का विस्तारण :
20. यदि निरीक्षण दल यह समझता है कि अन्वेषण से सुसंगत किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में सुरक्षित पहुंच संभव नहीं है तो अनुरोधकर्ता पक्षकार राज्य को तुरन्त सूचना दी जाएगी । यदि आवश्यक हो तो निरीक्षण की अवधि को, सुरक्षित पहुंच प्रदान किए जाने और निरीक्षण दल द्वारा अपने मिशन को पूरा कर दिए जाने तक विस्तारित किया जा सकेगा ।
साक्षात्कार :
21. निरीक्षण दल को ऐसे व्यक्तियों से साक्षात्कार और उनकी परीक्षा करने का अधिकार होगा, जो रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग द्वारा प्रभावित हुए हों । ऐसे रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के प्रत्यक्षदर्शियों और ऐसे चिकित्सा कार्मिकों तथा अन्य व्यक्तियों से साक्षात्कार करने का भी अधिकार होगा, जिन्होंने ऐसे व्यक्तियों का उपचार किया है या उनके संपर्क में आए हैं, जो रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग द्वारा प्रभावित हुए हों । निरीक्षण दल का चिकित्सा इतिहासों तक, यदि उपलब्ध हो, पहुंच का अधिकार होगा और ऐसे व्यक्तियों के, जो रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग द्वारा प्रभावित हुए हों, यथासमुचित, शव परीक्षणों में भाग लेने के लिए भी अनुज्ञात किया जाएगा ।
घ. रिपोर्टें
प्रक्रियाएं :
22. निरीक्षण दल, निरीक्षित पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र में पहुंचने के 24 घंटे के अपश्चात् महानिदेशक को स्थिति की एक रिपोर्ट भेजेगा । इसके अतिरिक्त यह पूरे अन्वेषण के दौरान, यथाआवश्यक प्रगति रिपोर्ट भेजेगा ।
23. निरीक्षण दल, अपने मुख्य कार्य स्थान पर अपनी वापसी के 72 घंटे के अपश्चात् महानिदेशक को एक प्रारंभिक रिपोर्ट भेजेगा । महानिदेशक को अंतिम रिपोर्ट, इसके मुख्य स्थान पर वापसी के 30 दिन के अपश्चात् भेजी जाएगी । महानिदेशक, प्रारंभिक और अंतिम रिपोर्टों को कार्य परिषद् और सभी पक्षकार राज्यों को तत्परता से भेजेगा ।
अन्तर्वस्तु :
24. स्थिति रिपोर्ट में सहायता के संबंध में कोई तत्काल आवश्यकता और कोई अन्य सुसंगत जानकारी उपदर्शित की जाएगी । प्रगति रिपोर्टों में सहायता के संबंध में कोई और आवश्यकता, जिसका अन्वेषण के दौरान पता चला हो, उपदर्शित की जाएगी ।
25. अंतिम रिपोर्ट में निरीक्षण के संबंध में, विशेष रूप से अनुरोध में उल्लेख किए गए अभिकथित उपयोग के संबंध में तथ्यपरक निष्कर्षों का संक्षेपीकरण किया जाएगा । इसके अतिरिक्त, अभिकथित उपयोग के किसी अन्वेषण की रिपोर्ट में, निम्नलिखित के प्रति विशेष निर्देश के साथ इसके विभिन्न प्रक्रमों का वर्णन करते हुए अन्वेषण प्रक्रिया की विशिष्टियां सम्मिलित होंगी :-
(क) नमूने लेने और स्थल पर विश्लेषणों का अवस्थान और कथन ;
(ख) समर्थनकारी साक्ष्य, जैसे कि साक्षात्कारों के अभिलेख, चिकित्सा परीक्षणों और विज्ञान संबंधी विश्लेषणों के परिणाम और निरीक्षण दल द्वारा परीक्षित दस्तावेज ।
26. यदि निरीक्षण दल अपने अन्वेषण के प्रक्रम में, जो उपयोग किए गए किसी रासायनिक आयुधों के उद्भव का पता लगाने के लिए किया गया हो, अन्य बातों के साथ-साथ, लिए गए नमूनों के प्रयोगशाला में विश्लेषण के दौरान किसी अपद्रव्य या अन्य पदार्थों की पहचान करने के द्वारा कोई जानकारी एकत्रित करता है तो वह जानकारी उक्त रिपोर्ट में सम्मिलित की जाएगी ।
ङ. ऐसे राज्य जो इस अभिसमय के पक्षकार नहीं हैं
27. रासायनिक आयुधों के अभिकथित उपयोग के मामले में, जिसमें कोई ऐसा राज्य अंतर्वलित है, जो इस अभिसमय का पक्षकार नहीं है या ऐसे राज्यक्षेत्र में जो किसी पक्षकार राज्य के नियंत्रण के अधीन नहीं है, संगठन, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के साथ घनिष्ठ रूप से सहयोग करेगा । संगठन, यदि ऐसा अनुरोध किया जाए, अपने संसाधनों को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के नियंत्रणाधीन करेगा ।
गोपनीय सूचना के संरक्षण के संबंध में उपाबंध
(गोपनीयता उपाबंध")
क. गोपनीय जानकारी के रखरखाव संबंधी साधारण सिद्धांत
1. गोपनीय जानकारी की संरक्षा करने का दायित्व सिविल और सैन्य दोनों क्रियाकलापों और सुविधाओं के संबंध में होगा । अनुच्छेद 8 में वर्णित साधारण दायित्वों के अनुसरण में संगठन :-
(क) इस अभिसमय के अधीन अपने उत्तरदायित्वों का यथा समय और दक्षतापूर्ण निर्वाह करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आवश्यक जानकारी और आंकड़ों की अपेक्षा करेगा ;
(ख) यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करेगा कि निरीक्षकों और तकनीकी सचिवालय के अन्य कर्मचारिवृन्द दक्षता, सक्षमता और निष्ठा के उच्चतम मानदंडों को पूरा करते हैं ;
(ग) इस अभिसमय के उपबंधों को लागू करने के लिए करारों और विनियमों को विकसित करेगा और यथासंभव सुस्पष्ट रूप से ऐसी जानकारी विनिर्दिष्ट करेगा जिस तक संगठन को किसी पक्षकार राज्य द्वारा पहुंच प्रदान की जाएगी ।
2. महानिदेशक का गोपनीय जानकारी की संरक्षा सुनिश्चित करने का मुख्य उत्तरदायित्व होगा । महानिदेशक, तकनीकी सचिवालय द्वारा गोपनीय जानकारी के रखरखाव को शासित करने वाली सख्त अवधि स्थापित करेगा और ऐसा करने में निम्नलिखित मार्गदर्शक सिद्धांतों का अनुपालन करेगा :-
(क) जानकारी को गोपनीयता समझा जाएगा, यदि :-
(i) इसे पक्षकार राज्य द्वारा, जिससे जानकारी प्राप्त की गई थी और जिससे वह संबंधित है, इस प्रकार अभिहित किया जाता है, या
(ii) महानिदेशक के निर्णय के अनुसार इसके अप्राधिकृत प्रकटन से युक्तियुक्त रूप से ऐसे पक्षकार राज्य को जिससे वह संबंधित है या इस अभिसमय के क्रियान्वयन संबंधी प्रक्रिया को नुकसान पहुंच सकता है ;
(ख) तकनीकी सचिवालय द्वारा अभिप्राप्त किए गए सभी आंकड़ों और दस्तावेजों का, यह स्थापित करने के लिए कि क्या उनमें गोपनीय जानकारी अंतर्विष्ट है, तकनीकी सचिवालय की समुचित इकाई द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा । अन्य पक्षकारों द्वारा इस अभिसमय के लगातार अनुपालन के बारे में आश्वासित होने के लिए पक्षकार राज्यों द्वारा अपेक्षित आंकड़े नैत्यिक रूप से उन्हें दिए जाएंगे । ऐसे आंकड़ों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे :-
(i) सत्यापन उपाबंध में वर्णित उपबंधों के अनुसार, अनुच्छेद 3, 4, 5 और 6 के अधीन पक्षकार राज्यों द्वारा दी गई प्रारंभिक और वार्षिक रिपोर्टें और घोषणाएं ;
(ii) सत्यापन क्रियाकलापों के परिणामों और प्रभावों के बारे में साधारण रिपोर्ट; और
(iii) इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार सभी पक्षकार राज्यों को प्रदान की जाने वाली जानकारी ;
(ग) इस अभिसमय को क्रियान्वयन के संबंध में संगठन द्वारा अभिप्राप्त की गई कोई भी जानकारी निम्नलिखित के सिवाय, प्रकाशित या अन्यथा जारी नहीं की जाएगी :-
(i) इस अभिसमय के क्रियान्वयन के बारे में साधारण जानकारी सम्मेलन या कार्य परिषद् के विनिश्चयों के अनुसार संकलित और सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जाएगी ;
(ii) कोई भी जानकारी ऐसे पक्षकार राज्य की अभिव्यक्त सम्मति से प्रकाशित की जा सकेगी, जिससे वह संबंधित है ;
(iii) गोपनीय के रूप में वर्गीकृत की गई जानकारी, संगठन द्वारा केवल ऐसी प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रकाशित की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करती है कि जानकारी का प्रकाशन करना केवल इस अभिसमय की आवश्यकताओं के अनुपालन में ही किया गया है । ऐसी प्रक्रियाओं पर अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसार सम्मेलन द्वारा विचार और अनुमोदन किया जाएगा ;
(घ) गोपनीय आंकड़ों या दस्तावेजों की संवेदनशीलता का स्तर उनके समुचित रखरखाव और संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए एकरूप से लागू किए जाने वाले मानदंड के आधार पर स्थापित किया जाएगा । इस प्रयोजन के लिए, एक वर्गीकरण प्रणाली पुरःस्थापित की जाएगी, जो इस अभिसमय को तैयार करने में किए गए सुसंगत कार्य को ध्यान में रखकर, गोपनीयता के समुचित प्रवर्गों में जानकारी के सम्मिलित किए जाने और जानकारी की गोपनीय प्रकृति के न्याय-संगत स्थायित्व को सुनिश्चित करने वाले स्पष्ट मानदंड के लिए उपबंध करेगी । वर्गीकरण प्रणाली अपने क्रियान्वयन में आवश्यक नमनीयता के लिए उपबंध करते समय, गोपनीय जानकारी देने वाले पक्षकार राज्यों के अधिकारों की संरक्षा करेगी । किसी वर्गीकरण प्रणाली पर सम्मेलन द्वारा अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में विचार और अनुमोदन किया जाएगा ;
(ङ) गोपनीय जानकारी को संगठन के परिसर में सुरक्षित रूप से रखा जाएगा । कुछ आंकड़ों या दस्तावेजों को किसी पक्षकार राज्य के राष्ट्रीय प्राधिकरणों में भी भंडारित किया जा सकेगा । संवेदनशील जानकारी जिसके अंतर्गत, अन्य बातों के साथ केवल किसी विनिर्दिष्ट सुविधा के निरीक्षण के लिए अपेक्षित फोटो चित्र, योजनाएं और अन्य दस्तावेज भी हैं, इस सुविधा में ताला चाबी के अन्दर रखी जा सकेगी ;
(च) जानकारी को इस अभिसमय के सत्यापन उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन से सुसंगत अधिकतम सीमा तक तकनीकी सचिवालय द्वारा ऐसे रूप में रखा और भण्डारित किया जाएगा, जो इस सुविधा की, जिससे यह संबंधित है, सीधी पहचान प्रतिबाधित कर दे ;
(छ) किसी सुविधा से हटाई गई गोपनीय जानकारी की मात्रा को इस अभिसमय के सत्यापन उपबंधों के सामयिक और दक्ष कार्यान्वयन के लिए न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार रखा जाएगा; और
(ज) गोपनीय जानकारी तक पहुंच, इसके वर्गीकरण के अनुसार विनियमित होगी । संगठन के भीतर गोपनीय जानकारी का प्रसार कड़ाई से जानकारी हासिल करने की आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा ।
3. महानिदेशक, तकनीकी सचिवालय द्वारा गोपनीय जानकारी का रखरखाव शासित करने वाली अवधि को लागू करने के संबंध में सम्मेलन को वार्षिक रूप से रिपोर्ट देगा ।
4. प्रत्येक पक्षकार राज्य, ऐसी जानकारी को, जो वह संगठन से प्राप्त करता है, इस जानकारी के संबंध में स्थापित गोपनीयता के स्तर के अनुसार मानेगा । कोई पक्षकार राज्य, अनुरोध किए जाने पर, संगठन द्वारा इसे जानकारी के रखरखाव के संबंध में दिए गए ब्यौरे देगा ।
ख. तकनीकी सचिवालय में कार्मिकों का नियोजन और संचालन
5. कर्मचारिवृन्द के नियोजन की शर्तें ऐसी होंगी, जिनसे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गोपनीय जानकारी तक पहुंच और उनका रखरखाव खंड (क) के अनुसार महानिदेशक द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप है ।
6. तकनीकी सचिवालय में प्रत्येक प्रास्थिति उस प्ररूपित प्रास्थिति द्वारा शासित होगा, जो उस प्रास्थिति के लिए आवश्यक गोपनीय जानकारी, यदि कोई हो, तक पहुंच की सीमा को विनिर्दिष्ट करता है ।
7. महानिदेशक, निरीक्षक और कर्मचारी वर्ग के अन्य सदस्य, उनके शासकीय कर्तव्यों के निष्पादन के समय उनकी जानकारी में आने वाली किसी गोपनीय जानकारी को, अपने कृत्यों की समाप्ति के पश्चात् भी किसी अप्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष प्रकट नहीं करेंगे । वे तकनीकी सचिवालय से बाहर किसी राज्य, संगठन या व्यक्ति को ऐसी कोई जानकारी संसूचित नहीं करेंगे जिस तक किसी पक्षकार राज्य के संबंध में अपने क्रियाकलापों के दौरान उनकी पहुंच रही है ।
8. निरीक्षक अपने कृत्यों के निर्वहन में केवल ऐसी जानकारी और आंकड़ों की मांग कर सकेंगे, जो उनके आदेश की पूर्ति के लिए आवश्यक हो । वे ऐसी जानकारी का कोई अभिलेख नहीं बनाएंगे जो संयोगवश एकत्रित हुई हो और जो इस अभिसमय के अनुपालन के सत्यापन से संबंधित नहीं है ।
9. कर्मचारिवृन्द, तकनीकी सचिवालय के साथ व्यक्तिगत गोपनीयता करार करेंगे, जो उनके नियोजन की अवधि और इसके समाप्त हो जाने के पश्चात् पांच वर्ष की अवधि तक लागू होगा ।
10. अनुचित प्रकटीकरण से बचने के लिए निरीक्षक और कर्मचारिवृन्द के सदस्यों की सुरक्षा संबंधी बातों और संभावित शास्तियों के बारे में, जो अनुचित प्रकटीकरण की दशा में वे उपगत करेंगे, समुचित रूप से सलाह दी जाएगी और उन्हें स्मरण कराया जाएगा ।
11. किसी कर्मचारी को ऐसी गोपनीय जानकारी तक पहुंच प्रदान करने से जो किसी पक्षकार राज्य के राज्यक्षेत्र या उसकी अधिकारिता या नियंत्रण के अधीन किसी अन्य स्थान में क्रियाकलापों के संबंध में है, कम से कम 30 दिन पूर्व संबंधित पक्षकार राज्य को प्रस्तावित निर्बंधन की अधिसूचना दी जाएगी । निरीक्षकों के संबंध में किसी प्रस्तावित पदाभिधान की अधिसूचना में इस अपेक्षा की पूर्ति की जाएगी ।
12. निरीक्षकों और तकनीकी सचिवालय के अन्य कर्मचारियों के निष्पादन का मूल्यांकन करते समय गोपनीय जानकारी की संरक्षा के संबंध में कर्मचारी के अभिलेख पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ।
ग. स्थल पर सत्यापन क्रियाकलापों के दौरान संवेदनशील संस्थापनों के संरक्षण और गोपनीय आंकड़ों के प्रकटन को रोकने के संबंध में उपाय
13. पक्षकार राज्य गोपनीयता के संरक्षण के लिए ऐसे उपाय कर सकेंगे जिन्हें वे आवश्यक समझे परन्तु यह कि वे संबंधित अनुच्छेदों और सत्यापन उपाबंध के अनुसार अनुपालन प्रदर्शित करने के अपने दायित्वों को पूरा करते हों । कोई निरीक्षण स्वीकार करते समय पक्षकार राज्य, निरीक्षण दल को ऐसे उपस्कर, प्रलेखन या क्षेत्र का संकेत दे सकेगा, जिन्हें वह संवेदनशील और निरीक्षण के प्रयोजन से असंबंधित समझता है ।
14. निरीक्षण दल, अपने मिशन के प्रभावी और सामयिक निष्पादन से सुसंगत और न्यूनतम साध्य बाधाकारी रीति में स्थल पर निरीक्षण करने के सिद्धांत द्वारा मार्गदर्शित होंगे । वे ऐसे प्रस्तावों को ध्यान में रखेंगे, जो निरीक्षण के किसी भी प्रक्रम में निरीक्षण स्वीकार करने वाले पक्षकार राज्य द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए दिए जा सकेंगे कि ऐसे संवेदनशील उपस्कर या जानकारी का जो रासायनिक आयुधों से संबंधित नहीं है संरक्षण किया गया है ।
15. निरीक्षण दल, निरीक्षणों के संचालन को शासित करने वाले सुसंगत अनुच्छेदों और उपाबंधों में वर्णित उपबंधों का कड़ाई से पालन करेंगे । वे संवेदनशील संस्थापनों का संरक्षण करने और गोपनीय आंकड़ों के प्रकटन को रोकने के लिए अभिकल्पित प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन करेंगे ।
16. व्यवस्थाओं और सुविधा करारों का विस्तार करते समय, गोपनीय जानकारी की संरक्षा करने की अपेक्षा पर सम्यक् ध्यान दिया जाएगा । व्यष्टिक सुविधाओं के लिए निरीक्षण प्रक्रियाओं से संबंधित करारों में सुविधा के उन क्षेत्रों के अवधारण के संबंध में जिन पर निरीक्षकों को पहुंच प्रदान की गई है, स्थल पर गोपनीय जानकारी को संचित करने, करार किए गए क्षेत्रों में निरीक्षण प्रयासों की परिधि, उनके नमूने लेना और उनका विश्लेषण करना, अभिलेखों तक पहुंच और उपकरणों का उपयोग और उपस्कर के लगातार मानिटर करने के संबंध में विनिर्दिष्ट और ब्यौरेवार व्यवस्थाएं भी सम्मिलित होंगी ।
17. प्रत्येक निरीक्षण के पश्चात् तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में केवल इस अभिसमय के अनुपालन से संबंधित तथ्य अंतर्विष्ट होंगे । रिपोर्ट को गोपनीय जानकारी के रखरखाव को शासित करने वाले संगठन द्वारा सुस्थापित विनियमों के अनुसार रखा जाएगा । यदि आवश्यक हो, रिपोर्ट में अंतर्विष्ट जानकारी को तकनीकी सचिवालय और निरीक्षित पक्षकार राज्य से बाहर इसके प्रेषित किए जाने से पूर्व कम संवेदनशील रूपों में तैयार किया जाएगा ।
घ. गोपनीयता के भंग या अभिकथित भंग की दशा में प्रक्रियाएं
18. महानिदेशक, अनुच्छेद 8, पैरा 21(i) के अनुसरण में सम्मेलन द्वारा विचार और अनुमोदित किए जाने वाली सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए गोपनीयता के भंग या अभिकथित भंग के मामले में अनुपालन की जाने वाली आवश्यक प्रक्रियाएं स्थापित करेगा ।
19. महानिदेशक, पृथक्-पृथक् गोपनीयता करारों के कार्यान्वयन का निरीक्षण करेगा । महानिदेशक, यदि उसके निर्णय में इस बात के पर्याप्त संकेत हैं कि जानकारी की गोपनीयता के संरक्षण दायित्वों का अतिक्रमण किया गया है, तुरन्त एक अन्वेषण प्रारम्भ करेगा । यदि किसी पक्षकार राज्य के द्वारा गोपनीयता के भंग से संबंधित कोई अभिकथन किया जाता है तो महानिदेशक, तत्परतापूर्वक एक अन्वेषण प्रारम्भ करेगा ।
20. महानिदेशक ऐसे कर्मचारिवृन्द पर जिन्होंने गोपनीय जानकारी का संरक्षण करने के अपने दायित्व का अतिक्रमण किया है, समुचित दांडिक और अनुशासनिक उपाय अधिरोपित कर सकेगा । गंभीर भंग के मामलों में, महानिदेशक द्वारा अधिकारिता से छूट का परित्याग किया जा सकेगा ।
21. पक्षकार राज्य, गोपनीयता के किसी भंग या अभिकथित भंग का अन्वेषण करने और किसी भंग के सिद्ध हो जाने की दशा में समुचित कार्यवाही करने में संभव सीमा तक, महानिदेशक को सहयोग और समर्थन देंगे ।
22. संगठन तकनीकी सचिवालय के सदस्यों द्वारा किए गए गोपनीयता के किसी भंग के लिए जिम्मेदार नहीं होगा ।
23. ऐसे भंगों के संबंध में जिसमें कोई पक्षकार राज्य और संगठन दोनों ही शामिल हैं, सम्मेलन के समनुषंगी अंग के रूप में स्थापित गोपनीयता से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए आयोग, मामले पर विचार करेगा । इस आयोग की नियुक्ति सम्मेलन द्वारा की जाएगी । जिसकी संरचना और प्रवर्तन प्रक्रियाओं को शासित करने वाले नियम, सम्मेलन द्वारा अपने पहले सत्र में अंगीकार किए जाएंगे ।
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