Wednesday, 29, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

भारत का राष्ट्रीय पुस्तकालय अधिनियम, 1976 ( National Library of India Act, 1976 )


 

भारत का राष्ट्रीय पुस्तकालय अधिनियम, 1976

(1976 का अधिनियम संख्यांक 76)

[11 जून, 1976]

राष्ट्रीय पुस्तकालय के प्रशासन और उससे

सम्बन्धित अन्य विषयों का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के सत्ताईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारत का राष्ट्रीय पुस्तकालय अधिनियम, 1976 है । 

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बोर्ड" से धारा 3 के अधीन स्थापित बोर्ड अभिप्रेत है, 

(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है, 

(ग) निधि" से धारा 23 में निर्दिष्ट निधि अभिप्रेत है,

(घ) पुस्तकालय" से कलकत्ता में स्थित और संविधान के प्रारम्भ के समय राष्ट्रीय पुस्तकालय के नाम से ज्ञात संस्था अभिप्रेत है; 

(ङ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है ; 

(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है । 

अध्याय 2

राष्ट्रीय पुस्तकालय बोर्ड

3. बोर्ड की स्थापना और निगमन-(1) ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा जो राष्ट्रीय पुस्तकालय बोर्ड के नाम से ज्ञात होगा । 

(2) बोर्ड उपरोक्त नाम से एक शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय होगा जिसे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन की और संविदा करने की शक्ति होगी तथा वह उस नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा । 

(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना पुस्तकालय के स्वामित्वाधीन किसी पाण्डुलिपि, पुस्तक, वस्तु या चीज का विक्रय या अन्यथा व्ययन नहीं करेगा किन्तु फर्नीचर, लेखन सामग्री, और इस प्रकार के मृतस्टाक का विक्रय या अन्यथा व्ययन कर सकेगा :

परन्तु जहां ऐसी पाण्डुलिपियों, पुस्तकों, वस्तुओं या चीजों का, जो किसी व्यक्ति द्वारा पुस्तकालय को दी गई हैं, विक्रय या अन्यथा व्ययन करने की प्रस्थापना है, वहां इस उपधारा के अधीन कोई अनुमोदन नहीं किया जाएगा जब तक, यथास्थिति, दाता या उसका पद उत्तरवर्ती लिखित रूप में ऐसा करने के लिए अनुज्ञात नहीं कर देता है । 

4. बोर्ड का गठन-बोर्ड के निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-

(i) अध्यक्ष जो शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा प्राप्त व्यक्ति होगा और जिसे केन्द्रीय सरकार नामनिर्दिष्ट करेगी; 

(ii) तीन व्यक्ति जो संसद् द्वारा चुने जाएंगे जिनमें से दो लोक सभा से, लोक सभा के सदस्यों द्वारा और एक राज्य सभा से राज्य सभा के सदस्यों द्वारा; 

(iii) तीन व्यक्ति जो राज्य सरकारों द्वारा वर्णानुक्रम में चक्रानुक्रम से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे; 

(iv) भारत के विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चार व्यक्ति जो विहित रीति से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे  

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय" का वही अर्थ है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) में उसका है और इसके अन्तर्गत ऐसी कोई शैक्षणिक संस्था भी है जिसे संसद् ने विधि द्वारा राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया है;

(v) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष या उसके अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट उस आयोग का कोई सदस्य;

(vi) पुस्तक और समाचारपत्र (सार्वजनिक पुस्तकालय) परिदान अधिनियम, 1954 (1954 का 27) की धारा 2 के खंड (ख) के अर्थान्तर्गत सार्वजनिक पुस्तकालयों में से, किन्तु इसके अन्तर्गत राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता नहीं है, किसी एक का मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष चाहे उसे किसी भी नाम से संबोधित किया जाता हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा वर्णानुक्रम में चक्रानुक्रम से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा; 

(vii) भारत के ऐसे सार्वजनिक पुस्तकालयों में से [जो खंड (i) में निर्दिष्ट पुस्तकालय नहीं हैंट जिनमें ऐतिहासिक, साहित्यिक या कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का महत्वपूर्ण संग्रह है, किसी एक का मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष, चाहे उसे किसी भी नाम से संबोधित किया जाता हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा;

(viii) एक व्यक्ति जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी, इंडियन लाइब्रेरी ऐसोसिएशन द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा; 

(ix) भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार का निदेशक; 

(x) मानविकी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी और विधि के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न विषयों के आठ प्रतिष्ठित विद्वान, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;

(xi) दो व्यक्ति जो पुस्तकालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने में से ऐसी रीति से निर्वाचित किए जाएंगे जो विहित की जाए :

परन्तु इन व्यक्तियों में से कम से कम एक पुस्तकालय के तकनीकी कर्मचारिवृन्द का सदस्य होगा ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए तकनीकी कर्मचारिवृन्द का सदस्य से अभिप्रेत है पुस्तकालयाध्यक्ष, उपपुस्तकालयाध्यक्ष, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, तकनीकी सहायक, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, प्राध्यापक, माइक्रोफोटोग्राफर, केमिस्ट और व्यक्तियों के ऐसे अन्य प्रवर्ग जो विहित किए जाएं;

(xii) दो व्यक्ति जो भारत सरकार के संयुक्त सचिव से निम्न पंक्ति के नहीं होंगे, जिन्हें केन्द्रीय सरकार क्रमशः पुस्तकालय से संबंधित मामलों को निपटाने वाले केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग और वित्त से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट करेगी; 

(xiii) पश्चिमी बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक व्यक्ति, जो उस सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा; 

(xiv) पुस्तकालय का निदेशक, जो सदस्य सचिव होगा । 

5. सदस्य के पद के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति बोर्ड या धारा 11 में निर्दिष्ट कार्यकारी परिषद् के सदस्य के रूप में, यथास्थिति, नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित होने और बने रहने के लिए निरर्हित होगा,-

(क) यदि उसे किसी अपराध के लिए, जिसमें नैतिक अधमता समाविष्ट है, सिद्धदोष ठहराया गया है और कारावास के लिए दंडादिष्ट किया गया है; या 

(ख) यदि वह अनुन्मोचित दिवालिया है; या

(ग) यदि वह विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त घोषित किया गया है; या 

(घ) यदि उसका बोर्ड में ऐसा वित्तीय या अन्य हित है जिससे सदस्य के रूप में उसके द्वारा उसके कृत्य के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभाव्यता है । 

6. सदस्यों की पदावधि, आदि-(1) धारा 4 के अधीन अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का प्रत्येक, यथास्थिति, नामनिर्देशन या निर्वाचन केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा और उनकी पदावधि ऐसी अधिसूचना की तारीख से तीन वर्ष होगी :

परन्तु धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ii) या उस उपधारा के खंड (xi) के अधीन निर्वाचित सदस्य की पदावधि, यथास्थिति, जैसे ही वह उस सदन का सदस्य नहीं रहता है जिससे वह निर्वाचित हुआ था या जैसे ही वह बोर्ड के नियोजन में नहीं रहता है, समाप्त हो जाएगी । 

(2) कोई भी नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित सदस्य केन्द्रीय सरकार को लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग सकता है और केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में ऐसा पद-त्याग अधिसूचित किए जाने पर यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है । 

(3) उपधारा (2) के अधीन किसी नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित सदस्य के पद-त्याग द्वारा या किसी अन्य कारण से हुई आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, उस प्राधिकारी द्वारा, जिसने उस सदस्य को नामनिर्दिष्ट किया था, नामनिर्देशन द्वारा या उस सदन या निकाय द्वारा, जिसने उसे निर्वाचित किया था, नए निर्वाचन द्वारा, भरी जाएगी तथा ऐसे नामनिर्देशन या निर्वाचन को केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा और इस प्रकार नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित सदस्य उस अवशिष्ट कालावधि के लिए पद धारण करेगा जिसके लिए वह व्यक्ति जिसके स्थान पर वह नामनिर्दिष्ट या निर्वाचित किया गया है पद धारण करता । 

(4) पदावरोही सदस्य पुनः नामनिर्देशन या पुनः निर्वाचन का पात्र होगा । 

(5) यदि कोई नामनिर्दिष्ट सदस्य किसी अंग शैथिल्य के कारण या अन्यथा अपने कर्तव्यों को करने में अस्थायी रूप से असमर्थ हो जाता है या छुट्टी पर होने के कारण या अन्यथा ऐसी परिस्थितियों में अनुपस्थित है जिसमें उसकी पद रिक्ति सम्मिलित नहीं है तो, वह प्राधिकारी जिसने उस सदस्य को नामनिर्दिष्ट किया था उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसके स्थान पर कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट कर सकता है ।

7. सदस्य के पद का रिक्त होना-केन्द्रीय सरकार बोर्ड के या धारा 11 में निर्दिष्ट कार्यकारी परिषद् के सदस्य को हटा देगी यदि वह,-

(क) धारा 5 में लिखित निरर्हताओं से ग्रस्त हो जाता है :

परन्तु कोई सदस्य इस आधार पर कि वह उस धारा के खंड (घ) में लिखित निरर्हताओं से ग्रस्त हो गया है तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक उसे इस मामले में सुनवाई का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता है, या 

(ख) बोर्ड से अनुपस्थिति की इजाजत प्राप्त किए बिना, यथास्थिति, बोर्ड या कार्यकारी परिषद् की लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहता है । 

8. रिक्तियों आदि के कारण कार्यों का अविधिमान्य होना-बोर्ड का कोई कार्य केवल निम्नलिखित कारणों से अविधिमान्य न होगा, अर्थात्-

(क) बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि, या 

(ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के नामनिर्देशन में कोई त्रुटि, या

(ग) उसकी प्रक्रिया में कोई अनियमितता जो मामले के गुणोगुण का प्रभावित न करती हो । 

9. सदस्यों द्वारा बोर्ड में वित्तीय या अन्य हित का प्रकट किया जाना-कोई सदस्य जो बोर्ड द्वारा की गई या की जाने के लिए प्रस्थापित किसी संविदा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हितबद्ध है सुसंगत परिस्थितियां उसकी जानकारी में आने के पश्चात् यथाशीघ्र बोर्ड के अधिवेशन में अपने हित की प्रकृति प्रकट करेगा और यह प्रकटीकरण बोर्ड के कार्यवृत्त में अभिलिखित किया जाएगा, और वह सदस्य, प्रकटीकरण के पश्चात्, उस संविदा से सम्बन्धित बोर्ड के विचार-विमर्श या विनिश्चय में भाग नहीं लेगा ।

10. बोर्ड के अधिवेशन-(1) बोर्ड एक वर्ष में कम से कम दो बार सामान्यतः पुस्तकालय के परिसर में अधिवेशन करेगा और उपधारा (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए अपने अधिवेशन में कार्य करने के बारे में, जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है, प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं । 

(2) अध्यक्ष, या उसकी अनुपस्थिति में, उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य बोर्ड के अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा । 

(3) यदि कोई सदस्य, जो सरकार का अधिकारी है, बोर्ड के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो वह अध्यक्ष के पूर्वानुमोदन से उस मंत्रालय या विभाग के किसी ऐसे अधिकारी को, जो भारत सरकार के उप सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो, ऐसा करने के लिए लिखित रूप से प्राधिकृत कर सकेगा ।

(4) बोर्ड के अधिवेशन में सभी प्रश्न उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे और समान मतों की दशा में अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थिति में, अध्यक्षता करने वाले सदस्य का द्वितीय या निर्णायक मत होगा । 

11. कार्यकारी परिषद्-(1) बोर्ड की एक कार्यकारी परिषद् होगी जिसमें नौ सदस्य होंगे । 

(2) पुस्तकालय का निदेशक कार्यकारी परिषद् का अध्यक्ष होगा और उसके अन्य सदस्य बोर्ड के सदस्यों में से या बाहर से या भागतः बोर्ड के सदस्यों में से और भागतः बाहर से नियुक्त किए जाएंगे :

परन्तु वित्त से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय से और पुस्तकालय से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग से एक-एक प्रतिनिधि और पश्चिमी बंगाल सरकार का एक प्रतिनिधि कार्यकारी परिषद् का सदस्य होगा :

परन्तु यह और कि पूर्ववर्ती परन्तुक के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना तीस से अनधिक व्यक्ति बाहर से नियुक्त किए जाएंगे ।  

(3) कार्यकारी परिषद् इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग और उसके कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी सहायता करेगी तथा बोर्ड की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड उसे ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें बोर्ड ठीक समझे प्रत्यायोजित करे । 

(4) बोर्ड के पूर्वानुमोदन से कार्य परिषद् बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की व्यथा का न्यायनिर्णयन करने के लिए सक्षम होगी । 

(5) कार्यकारी परिषद् के उन सदस्यों की पदावधि, जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, बोर्ड के सदस्यों की पदावधि के साथ ही समाप्त होगी । 

12. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए बोर्ड के साथ व्यक्तियों का अस्थायी सहयोजन-(1) बोर्ड ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं, किसी व्यक्ति को, जिसकी सहायता या सलाह से वह अपने कृत्यों का पालन करना चाहता है, अपने साथ सहयुक्त कर सकेगा । 

(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड द्वारा किसी प्रयोजन के लिए उसके साथ सहयुक्त व्यक्ति को उस प्रयोजन से सम्बन्धित बोर्ड के विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु इस धारा के आधार पर उसे मत देने का हक नहीं होगा । 

13. बोर्ड और कार्यकारी परिषद् के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन-(1) बोर्ड के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष या इस निमित्त बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे और बोर्ड द्वारा जारी की गई अन्य सभी लिखतें इस निमित्त ऐसी ही रीति से प्राधिकृत बोर्ड के अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी । 

(2) कार्यकारी परिषद् के सभी आदेशों और विनिश्चयों का पुस्तकालय के निदेशक के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणन किया जाएगा । 

14. कुलाध्यक्ष-(1) भारत का राष्ट्रपति पुस्तकालय का कुलाध्यक्ष होगा । 

(2) कुलाध्यक्ष को पुस्तकालय का निरीक्षण कराने का और ऐसे व्यक्ति या ऐसे व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें वह निदेश दे, पुस्तकालय से सम्बन्धित किसी विषय के बारे में पुस्तकालय का कोई निरीक्षण या जांच कराने का अधिकार होगा । 

(3) कुलाध्यक्ष प्रत्येक मामले में निरीक्षण या जांच कराने के अपने आशय की सूचना बोर्ड को देगा और बोर्ड एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का हकदार होगा जिसे ऐसे निरीक्षण या जांच में उपस्थित होने और सुने जाने का अधिकार होगा । 

(4) कुलाध्यक्ष ऐसे निरीक्षण और जांच के परिणाम के निर्देश में अध्यक्ष को सम्बोधित कर सकेगा और अध्यक्ष कुलाध्यक्ष की राय ऐसी सलाह के साथ, जो कुलाध्यक्ष उस पर कार्रवाई करने के सम्बन्ध में दे, बोर्ड को संसूचित करेगा ।

(5) बोर्ड अध्यक्ष के माध्यम से कुलाध्यक्ष की उस कार्रवाई की, यदि कोई हो, जो ऐसे निरीक्षण या जांच के परिणामस्वरूप की जाने के लिए प्रस्थापित है या की गई है संसूचना देगा । 

(6) जहां बोर्ड उचित समय के भीतर कुलाध्यक्ष के समाधन पर्यन्त रूप में कार्रवाई नहीं करता है वहां कुलाध्यक्ष बोर्ड द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण या अभ्यावेदन पर विचार करने के पश्चात् ऐसे निदेश जारी कर सकेगा जो वह ठीक समझे और बोर्ड ऐसे निदेशों का पालन करने के लिए आबद्ध होगा ।

(7) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कुलाध्यक्ष, लिखित आदेश द्वारा बोर्ड की किसी ऐसी कार्यवाही को बातिल कर सकेगा या रोक सकेगा जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उपबन्धों के अनुरूप नहीं है :   

परन्तु ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक बोर्ड को इस सम्बन्ध में सुनवाई का या अभ्यावेदन करने का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता है ।   

15. पुस्तकालय का निदेशक-(1) कुलाध्यक्ष एक व्यक्ति को, जो प्रतिष्ठित विद्वान या उच्च शैक्षणिक अर्हताओं वाला प्रतिष्ठित पुस्तकालयाध्यक्ष है, पुस्तकालय का निदेशक नियुक्त करेगा । 

(2) निदेशक की पदावधि उसके पद धारण करने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि या साठ वर्ष की आयु तक, जो भी बाद में हो, होगी :

परन्तु कोई भी व्यक्ति पैंसठ वर्ष की आयु का होने के पश्चात् निदेशक का पद धारण नहीं करेगा । 

(3) निदेशक ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा और सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो विहित की जाएं । 

(4) निदेशक के रूप में नियुक्त और इस अधिनियम के प्रारम्भ के समय इस रूप में पद धारण करने वाले व्यक्ति को इस धारा के अधीन नियुक्त किया गया समझा जाएगा और उसको इस धारा के उपबन्ध तद्नुसार लागू होंगे । 

16. बोर्ड का कर्मचारिवृन्द-(1) इस धारा के उपबन्धों के अधीन रहते हुए बोर्ड, अपने को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष पालन के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए इतनी संख्या में अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जो वह ठीक समझे और ऐसी नियुक्तियां करने में बोर्ड अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए संघ की सेवाओं में आरक्षण के संबंध में केन्द्रीय सरकार के तत्समय प्रवृत्त आदेशों के अनुरूप कार्य करेगा ।

(2) ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें वे होंगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित की जाएं । 

(3) बोर्ड का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जो प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त, अधिकारी या अन्य कर्मचारी नहीं है, लिखित संविदा के अनुसार नियुक्त किया जाएगा; जो बोर्ड के पास रखी जाएगी और जिसकी एक प्रति सम्बद्ध कर्मचारी को दी जाएगी । 

(4) बोर्ड और उसके किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के बीच जो प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त अधिकारी या कर्मचारी नहीं है, संविदा से उद्भूत होने वाला विवाद, सम्बद्ध कर्मचारी के अनुरोध पर या बोर्ड की प्रेरणा, से माध्यस्थम् अधिकरण को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसमें एक सदस्य बोर्ड द्वारा नियुक्त होगा, एक सदस्य कर्मचारी द्वारा नामनिर्दिष्ट होगा और एक अधिनिर्णायक कुलाध्यक्ष द्वारा नियुक्त होगा ।

(5) माध्यस्थम् अधिकरण का विनिश्चय अन्तिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

(6) उपधारा (4) द्वारा माध्यस्थम् अधिकरण को निर्दिष्ट किए जाने के लिए अपेक्षित किसी विषय की बाबत कोई वाद या अन्य कार्यवाही न्यायालय में नहीं होगी । 

(7) माध्यस्थम् अधिकरण को अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी । 

(8) तत्समय प्रवृत्त माध्यस्थम् से सम्बन्धित किसी विधि की कोई बात इस धारा के अधीन माध्यस्थम् को लागू नहीं होगी ।

17. विद्यमान कर्मचारियों की सेवा का बोर्ड को अन्तरण-(1) बोर्ड की स्थापना पर केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह पुस्तकालय में काम करने वाले अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को, आदेश द्वारा ऐसी तारीख या तारीखों से, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, बोर्ड को अंतरित करे :

परन्तु किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के सम्बन्ध में जिसने केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारी या कर्मचारी को बोर्ड को अन्तरित करने की प्रस्थापना के सम्बन्ध में ऐसे समय के भीतर जो उस सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए बोर्ड का कर्मचारी न बनने का अपना आशय संसूचित कर दिया है इस उपधारा के अधीन कोई आदेश नहीं किया जाएगा । 

(2) उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अन्तरित अधिकारी या अन्य कर्मचारी ऐसी तारीख से ही केन्द्रीय सरकार का कर्मचारी नहीं रहेगा और ऐसे पदाभिधान से बोर्ड का कर्मचारी हो जाएगा जो बोर्ड अवधारित करे और पारिश्रमिक तथा सेवा की अन्य शर्तों के सम्बन्ध में जिसके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी और भविष्य निधि भी हैं उपधारा (3), (4) और (5) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए इस बोर्ड द्वारा अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों से शासित होगा और बोर्ड का कर्मचारी तब तक बना रहेगा जब तक कि उसका नियोजन बोर्ड द्वारा समाप्त नहीं कर दिया जाए । 

(3) उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश द्वारा अन्तरित प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी ऐसी तारीख से छह मास के भीतर लिखित रूप में अपना विकल्प देगा कि वह,-

() बोर्ड की स्थापना की तारीख के ठीक पहले सरकार के अधीन उसके द्वारा धारित पद को लागू वेतनमान द्वारा या बोर्ड के अधीन जिस पद को वह अंतरित किया गया है उसको लागू वेतनमान द्वारा शासित होना चाहता है

(ख) केन्द्रीय सरकार के समय-समय पर यथासंशोधित नियमों और आदेशों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को अनुज्ञेय छुट्टी, भविष्य-निधि, सेवानिवृत्ति या अन्य निवृत्ति फायदों से शासित होना चाहता है या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों के अधीन बोर्ड के कर्मचारियों को लागू होने वाली छुट्टी, भविष्य-निधि या अन्य निवृत्ति फायदों से शासित होना चाहता है और ऐसा विकल्प एक बार प्रयोग किए जाने के पश्चात् अन्तिम होगा : 

परन्तु खण्ड (क) के अधीन प्रयोग किया गया विकल्प उसी पद के सम्बन्ध में लागू होगा जिस पर ऐसा व्यक्ति बोर्ड को अन्तरित किया गया है, और बोर्ड के अधीन किसी उच्चतर पद पर नियुक्ति होने पर वह व्यक्ति ऐसे उच्चतर पद को लागू होने वाले वेतनमान के लिए ही पात्र होगा :

परन्तु यह और कि यदि ऐसे व्यक्ति के अन्तरण की तारीख के ठीक पहले ऐसा कोई व्यक्ति सरकार के किसी उच्चतर पद पर या तो छुट्टी से हुई रिक्ति में या किसी अन्य विनिर्दिष्ट अवधि की रिक्ति में स्थानापान्न कार्य कर रहा है तो ऐसी रिक्ति की शेष अवधि के लिए उसका वेतन अन्तरण होने पर संरक्षित रखा जाएगा और तब वह सरकार के अधीन उस पद को लागू वेतमान का हकदार होगा जिसको कि वह वापस जाता या बोर्ड के अधीन उस पद को लागू वेतनमान का हकदार होता जिसको कि उसे अन्तरित किया गया है इनमें से जिसका भी वह विकल्प करे ।

(4) उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अन्तरित कोई अधिकारी या कर्मचारी- 

(क) बोर्ड के अधीन वैसी ही या उसके समतुल्य नियुक्ति करने के लिए सक्षम ऐसे प्राधिकारी के अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा या हटाया नहीं जाएगा जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए; 

(ख) ऐसी जांच के पश्चात् ही पदच्युत किया जाएगा या हटाया जाएगा या पंक्तिच्यु किया जाएगा जिसमें उसे उसके विरुद्ध आरोपों की सूचना दी गई है और उन आरोपों की बाबत सुनवाई का उचित अवसर दिया गया है और जहां ऐसी जांच के पश्चात् उस पर कोई ऐसी शास्ति अधिरोपित करने की प्रस्थापना है वहां जब तक उसे प्रस्थापित शांस्ति के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता है किन्तु ऐसा केवल जांच के दौरान पेश किए गए साक्ष्य के आधार पर होगा :

                परन्तु यह खण्ड-  

(i) जहां कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी ऐसे आचारण के आधार पर पदच्युत किया जाता है या हटाया जाता है  या पंक्तिच्युत किया जाता है जिससे उसे किसी आपराधिक आरोप पर सिद्धदोष ठहराया गया है वहां, या 

(ii) जहां किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को पदच्युत करने, हटाने या पंक्तिच्युत करने के लिए सशक्त किसी प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है किसी कारणवश जो वह प्राधिकारी लेखबद्ध करेगा, ऐसे जांच करना उचित रूप से साध्य नहीं है वहां, या 

(iii) किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को जो बोर्ड को अन्तरित किए जाने पर बोर्ड के अधीन किसी उच्चतर पद पर खुले विज्ञापन के परिणामस्वरूप और अन्य बाहरी व्यक्तियों से प्रतियोगिता करके नियुक्त होता है,

लागू नहीं होगा । 

(5) यदि पूर्वोक्त किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के सम्बन्ध में यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या उपधारा (4) में यथानिर्दिष्ट जांच करना उचित रूप से साध्य है या नहीं तो उसे पदच्युत करने या हटाने या पंक्तिच्युत करने के लिए सशक्त प्राधिकारी का उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा । 

18. पुस्तकालय का भारत का राष्ट्रीय पुस्तकालय" के नाम से ज्ञात होना और पुस्तकालय का अवस्थान-(1) इस धारा के प्रारम्भ से ही पुस्तकालय भारत का राष्ट्रीय पुस्तकालय" नाम से ज्ञात होगा और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या किसी अनुबन्ध या अन्य दस्तावेजों में नेशनल लाइब्रेरी के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह भारत के राष्ट्रीय पुस्तकालय के प्रति निर्देश है । 

(2) पुस्तकालय कलकत्ता में ही अवस्थित बना रहेगा ।

अध्याय 3

बोर्ड की सम्पत्ति, दायित्व और कृत्य

19. बोर्ड की सम्पत्ति और दायित्व-(1) बोर्ड की स्थापना पर,-

(i) वे सभी सम्पत्तियां, निधियां और देय जो पुस्तकालय के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार में निहित हैं या उसके द्वारा वसूल किए जा सकते हैं, बोर्ड में निहित हो जाएंगे या उसके द्वारा वसूल किए जाएंगे; और

(ii) पुस्तकालय के सम्बन्ध में सभी दायित्व जो केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय हैं, केवल बोर्ड के विरुद्ध प्रवर्तनीय होंगे ।

(2) वे सभी सम्पत्तियां बोर्ड में निहित होंगी जो बोर्ड की स्थापना के पश्चात् पुस्तकालय को दी जाती हैं, वसीयत की जाती हैं या अन्यथा अन्तरित की जाती हैं या बोर्ड द्वारा अर्जित की जाती हैं । 

20. बोर्ड के कर्तव्य-(1) बोर्ड का यह साधारण कर्तव्य होगा कि वह पुस्तकालय का प्रबन्ध करे और आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से पुस्तकालय के विकास के कार्यक्रम को क्रियान्वित करे, पुस्तकालय और उनके कार्यकरण से, जिसके अन्तर्गत पुस्तक सूची, या वर्णनात्मक सूची तैयार करना और अन्य विषय भी हैं, सम्बन्धित विषयों पर केन्द्र और राज्य सरकारों को सलाह दे और ऐसे अन्य कार्य करे जो केन्द्रीय सरकार, बोर्ड को समय-समय पर, सौंपे  

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित की बाबत वे सभी कार्यवाहियां कर सकेगा, जो वह ठीक समझे,-

(क) पुस्तकालय का उपयोग करने वाली जनता की सेवा और पुस्तकालय में पाण्डुलिपियों, पुस्तकों और अन्य वस्तुओं के विद्यमान संग्रह का आधुनिक, वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण;

(ख) भारत में मुद्रित सभी महत्वपूर्ण सामग्री का, भारत से सम्बन्धित सभी मुद्रित सामग्री का, चाहे वह किसी भी स्थान में प्रकाशित हुई हो, और राष्ट्रीय महत्व की पाण्डुलिपियों का अर्जन और संरक्षण; 

(ग) पुस्तक और समाचारपत्र परिदान (सार्वजनिक पुस्तकालय) अधिनियम, 1954 (1954 का 27) की धारा 2 के खण्ड (ख) के अर्थान्तर्गत अन्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को तकनीकी सलाह देना; 

(घ) सूचियों का प्रकाशन करना और संस्थाओं और विद्वानों को पुस्तक सूची के प्रकाशन में सहायता देना; 

(ङ) इतिहास, साहित्य, विज्ञान और इसी प्रकार के अन्य विषयों से सम्बन्धित परिचर्चा और गोष्ठियों का आयोजन और उनके लिए सुविधाएं देना; 

(च) पुस्तकालय की ऐसी पाण्डुलिपियों, पुस्तकों, वस्तुओं या चीजों की प्रदर्शनी करना जिनमें बोर्ड की राय में जनता की रुचि होगी; 

(छ) भारत के बाहर अन्य देशों के पुस्तकालयों और अन्य संस्थाओं से पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का विनिमय और इस कार्य का संवर्धन; 

(ज) ऐसी शर्तों और निबंधनों के अधीन रहते हुए जो बोर्ड या किसी अन्य संस्था के बीच करार पाए जाएं किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से पाण्डुलिपियों, पुस्तकों, वस्तुओं या चीजों की प्रतियां बनाना (जिसके अन्तर्गत फोटो प्रतियां बनाना भी है) और उनका अनुरक्षण;

(झ) ऐसे अन्य सभी कार्य करना जो किसी राष्ट्रीय पुस्तकालय की भूमिका के अनुरूप हों । 

21. बोर्ड की शक्तियां-(1) ऐसी शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, बोर्ड ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों को करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या  समीचीन हैं । 

(2) ऐसे विनियमों के अधीन रहते हुए, जो इस निमित्त बोर्ड द्वारा बनाए जाएं, बोर्ड समय-समय पर ऐसी पाण्डुलिपियों, पुस्तकों, वस्तुओं या चीजों को, जो बोर्ड की राय में पुस्तकालय में रखी जाने योग्य हैं, क्रय या अन्यथा अर्जित कर सकता है । 

अध्याय 4

वित्त, लेखे, संपरीक्षा और रिपोर्ट

22. केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को अनुदान-बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्वक पालन करने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार संसद् द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् बोर्ड को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी धनराशि अनुदान या उधार के रूप में या अन्यथा देगी जो वह सरकार आवश्यक समझे ।

23. बोर्ड की निधि-(1) बोर्ड एक निधि रखेगा जिसमें,-

(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा संदत्त सभी धन, 

(ख) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत सभी फीसें और अन्य प्रभार, 

(ग) बोर्ड द्वारा अनुदान, दान, संदान, उपकृति, वसीयत, अभिदाय, चन्दा या अन्तरण द्वारा प्राप्त सभी धन,

(घ) बोर्ड द्वारा किसी अन्य रीति से या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त अन्य सभी धन, जमा किए जाएंगे । 

(2) बोर्ड इतनी राशियां खर्च कर सकेगा जितनी वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए उचित समझता है और ऐसी राशियां निधि में से संदेय व्यय समझी जाएंगी । 

(3) एक धनराशि जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित रकम से अधीन नहीं होगी भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 में यथापरिभाषित किसी अनुसूचित बैंक में, या केन्द्रीय सरकार द्वारा, इस निमित्त अनुमोदित किसी अन्य बैंक में चालू खाते में रखी जाएगी । किन्तु ऐसी राशि से अधिक धन भारतीय रिजर्व बैंक में या भारतीय रिजर्व बैंक के अभिकर्ताओं के पास जमा किया जाएगा या ऐसी रीति से विनिहित किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार अनुमोदित करे ।

24. बजट-(1) बोर्ड प्रत्येक वर्ष ऐसी तारीख तक जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे उसके अनुमोदनार्थ आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बजट विनिर्दिष्ट प्ररूप में उसे प्रस्तुत करेगा जिसमें प्राक्कलित आय और व्यय दर्शित होंगे और वे राशियां दर्शित होंगी जो उस वित्तीय वर्ष में केंद्रीय सरकार से अपेक्षित होंगी । 

(2) यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदत्त कोई राशियां किसी वित्तीय वर्ष में पूर्णतः या भागतः बिना खर्च की हुई रहती हैं तो बिना खर्च की हुई राशियां आगामी वित्तीय वर्ष में अग्रनीत की जा सकेंगी और उस वर्ष के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि के अवधारण में हिसाब में ली जा सकेंगी ।

(3) उपधारा (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से कोई राशि तब तक खर्च नहीं की जाएगी जब तक व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट की व्यवस्था के अन्तर्गत आता हो  

(4) बोर्ड ऐसी शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, व्यय के एक शीर्ष से दूसरे को या एक प्रयोजन के लिए की गई व्यवस्था से किसी अन्य प्रयोजन को पुनर्नियोजन की मंजूरी दे सकेगा  

25. लेखे और संपरीक्षा-(1) बोर्ड, उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और तुलनपत्र सहित लेखे का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में और ऐसे साधारण निदेशों के अनुसार, तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके विनिर्दिष्ट या जारी करे । 

(2) बोर्ड के लेखे प्रतिवर्ष भारत के नियंत्रण-महालेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे और ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा उपगत व्यय बोर्ड द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति को ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में वे ही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में होते हैं, और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, सम्बन्धित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों और कागजों को पेश करने की मांग करने का और बोर्ड के कार्यालय और पुस्तकालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित बोर्ड के लेखे, उसकी संपरीक्षा रिपोर्ट के साथ बोर्ड प्रतिवर्ष केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित करेगा और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

26. विवरणियां और रिपोर्ट-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार को समय-समय पर और ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति से, जैसी केन्द्रीय सरकार निदेश करे, ऐसी विवरणियां, विवरण और विशिष्टियां देगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे  

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे, पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान बोर्ड के क्रियाकलापों का सही और पूरा वृत्त देते हुए और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान किए जाने के लिए सम्भावित क्रियाकलापों का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और केन्द्रीय सरकार उसे संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी । 

अध्याय 5

प्रकीर्ण

27. शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन-बोर्ड साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा यह निदेश दे सकेगा कि उसके द्वारा प्रयोग या निर्वहन की जाने वाली सभी या किन्हीं शक्तियों या कर्तव्यों का प्रयोग या निर्वहन ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं उस आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट किसी सदस्य, किसी अधिकारी या बोर्ड के अन्य कर्मचारी द्वारा भी किया जाएगा ।

28. बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी अधिकारी और अन्य कर्मचारी (जिसके अन्तर्गत पुस्तकालय का निदेशक भी है) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्य करते हुए या ऐसा करने के तात्पर्य से कार्य करते हुए भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अन्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे । 

29. इस अधिनियम के अधीन कार्रवाई के लिए संरक्षण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए बोर्ड या बोर्ड के किसी सदस्य, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के (जिसके अन्तर्गत पुस्तकालय का निदेशक भी है) विरुद्ध नहीं होगी ।

30. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम बना सकेगी :

परन्तु बोर्ड की स्थापना के पश्चात् ऐसा कोई नियम बोर्ड से परामर्श किए बिना नहीं बनाया जाएगा ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-

।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।             

(क) किसी सदस्य को (जिसके अन्तर्गत धारा 11 के अधीन नियुक्त कार्यकारी परिषद् का सदस्य है) और धारा 12 के अधीन बोर्ड से सहयुक्त किसी सदस्य को संदेय यात्रा और अन्य भत्ते, 

।                              ।                              ।                              ।                              ।                              ।

() धारा 15 के अधीन पुस्तकालय के निदेशक के पद के लिए नियुक्ति की रीति, और वेतन तथा भत्ते और सेवा की अन्य शर्तें और निबंधन

(ग) वे शर्तें जिन्हें ध्यान में रखते हुए और वह ढंग जिससे बोर्ड या उसकी ओर से संविदा की जा सकेगी; 

(घ) कोई भी अन्य विषय जो विहित किए जाने हैं या विहित किए जाएं । 

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, जिसमें वह इस प्रकार रखा गया हो, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान से पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

31. बोर्ड की विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से अपने को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन में समर्थ बनाने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित में से सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :- 

() वे शर्तें और निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए पुस्तकलय में पाण्डुलिपियों और पुस्तकों का उपयोग किया जा सकेगा

(ख) वह रीति जिससे और वे प्रयोजन जिनके लिए कुछ व्यक्ति सहयुक्त किए जा सकेंगे, 

(ग) बोर्ड के अधिवेशन का समय और स्थान, ऐसे अधिवेशन में कार्य करने के बारे में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और अधिवेशन में कार्य करने के लिए आवश्यक गणपूर्ति, 

(घ) बोर्ड के अधिवेशनों का कार्यवृत्त रखना और उसकी प्रतियों को केन्द्रीय सरकार को भेजना, 

(ङ) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें, 

(च) वह व्यक्ति जिसके द्वारा और वह रीति जिससे बोर्ड की ओर से संदाय, जमा और विनिधान किए जा सकेंगे,        

(छ) वह अधिकतम रकम जो चालू खाते में रखी जा सकेगी, 

(ज) रजिस्टरों और लेखाओं का रखना, 

() पुस्तकालय में पाण्डुलिपियों, पुस्तकों और अन्य वस्तुओं और चीजों की सूचियों और तालिकाओं का बनाया जाना

() पुस्तकालय में पाण्डुलिपियों, पुस्तकों और अन्य वस्तुओं और चीजों के परीक्षण के लिए की जाने वाली कार्यवाही

(ट) पुस्तकालय का साधारण प्रबन्ध, 

(ठ) पुस्तकालय में पाण्डुलिपियों और पुस्तकों की फोटो प्रतिलिपियों के लिए दी जाने वाली सुविधाओं के लिए उदग्रहण की जाने वाली फीसें और अन्य प्रभार,   

() पुस्तकालय में पाठकों के आवास के कमरों के उपयोग के लिए भाटक के रूप में उद्ग्रहण किए जाने वाला प्रभार

(ढ) कोई अन्य विषय जिसके सम्बन्ध में बोर्ड की राय में इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए उपबन्ध करना आवश्यक है । 

(3) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विनियम का जिसका उसने अनुमोदन किया है, संशोधन, परिवर्तन या विखण्डन कर सकेगी और तब उस विनियम का तद्नुसार प्रभाव होगा किन्तु उपधारा (1) और (2) के अधीन बोर्ड की शक्तियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा ।

____________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter