राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
(2013 का अधिनियम संख्यांक 20)
[10 सितम्बर, 2013]
जनसाधारण को गरिमामय जीवन निर्वाह करने के लिए सस्ती कीमतों पर पर्याप्त मात्रा में
क्वालिटी खाद्य की सुलभ्यता को सुनिश्चित करके, मानव जीवनचक्र के
मार्ग में खाद्य और पोषण संबंधी सुरक्षा और उससे संबंधित या
उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौंसठवें वर्ष से संसद् द्वारा निम्निलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह, जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, 5 जुलाई, 2013 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(1) आंगनवाड़ी" से धारा 4, धारा 5 की उपधारा (1) के खंड (क) और धारा 6 के अंतर्गत आने वाली सेवाएं प्रदान करने के लिए केन्द्रीय सरकार की एकीकृत बाल विकास सेवा स्कीम के अधीन गठित बाल देखरेख और विकास केन्द्र अभिप्रेत है;
(2) केन्दीय पूल" से खाद्यान्नों का ऐसा स्टाक अभिप्रेत है, जो-
(i) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों द्वारा न्यूनतम समर्थन कीमत संक्रियाओं के माध्यम से उपाप्त किया जाता है;
(ii) लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अन्य कल्याणकारी स्कीमों, जिनके अन्तर्गत आपदा राहत भी है और ऐसी अन्य स्कीमों के अधीन आबंटनों के लिए रखा जाता है;
(iii) उपखंड (ii) में निर्दिष्ट स्कीमों के लिए आरक्षितियों से रूप में रखा जाता है;
(3) पात्र गृहस्थी" से धारा 3 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट पूर्विकताप्राप्त गृहस्थी और अन्त्योदय अन्न योजना के अंतर्गत आने वाली गृहस्थी अभिप्रेत हैं;
(4) उचित दर दुकान" से ऐसी दुकान अभिप्रेत है, जिसे आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) की धारा 3 के अधीन जारी किए गए किसी आदेश द्वारा राशन कार्ड धारकों को लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन आवश्यक वस्तुओं का वितरण करने के लिए अनुज्ञप्ति दी गई है;
(5) खाद्यान्न" से चावल, गेहूं या मोटा अनाज या उनका कोई ऐसा संयोजन अभिप्रेत है, जो ऐसे क्वालिटी सन्नियमों के अनुरूप हो, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर, आदेश द्वारा, अवधारित किए जाएं;
(6) खाद्य सुरक्षा" से अध्याय 2 के अधीन विनिर्दिष्ट खाद्यान्न और भोजन की हकदार मात्रा का प्रदाय अभिप्रेत है;
(7) खाद्य सुरक्षा भत्ता" से धारा 8 के अधीन हकदार व्यक्तियों को संबंधित राज्य सरकार द्वारा संदत्त की जाने वाली धनराशि अभिप्रेत है;
(8) स्थानीय प्राधिकारी" में पंचायत, नगरपालिका, जिला बोर्ड, छावनी बोर्ड, नगर योजना प्राधिकारी और असम, मणिपुर, मेद्यालय, मिजोरम, नागालैंड तथा त्रिपुरा राज्यों में, जहां पंचायतें विद्यमान नहीं हैं, ग्राम परिषद् या समिति या ऐसा कोई अन्य निकाय, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जो स्वशासन के लिए संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत है अथवा ऐसा कोई अन्य प्राधिकारी या निकाय सम्मिलित है, जिसमें किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के भीतर नागरिक सेवाओं का नियंत्रण और प्रबंधन निहित है;
(9) भोजन" से गरम पकाया हुआ या पहले से पकाया हुआ और परोसे जाने के पूर्व गरम किया गया भोजन या घर ले जाया जाने वाला ऐसा राशन अभिप्रेत है, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए;
(10) न्यूनतम समर्थन मूल्य" से केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित ऐसा सुनिश्चित मूल्य अभिप्रेत है, जिस पर केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों तथा उनके अभिकरणों द्वारा केन्द्रीय पूल के लिए किसानों से खाद्यान्न उपाप्त किए जाते हैं;
(11) अधिसूचना" से इस अधिनियम के अधीन जारी की गई और राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना अभिप्रेत है;
(12) अन्य कल्याणकारी स्कीमों" से, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अतिरिक्त, ऐसी सरकारी स्कीमें अभिप्रेत हैं, जिनके अधीन स्कीमों के भागरूप खाद्यान्नों और भोजन का प्रदाय किया जाता है;
(13) निःशक्त व्यक्ति" से निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (न) में उस रूप में परिभाषित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(14) पूर्विकताप्राप्त गृहस्थी" से धारा 10 के अधीन उस रूप में पहचान की गई गृहस्थी अभिप्रेत है;
(15) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(16) राशन कार्ड" से लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन उचित दर दुकानों से आवश्यक वस्तुओं के क्रय के लिए राज्य सरकार के किसी आदेश या प्राधिकार के अधीन जारी किया गया कोई दस्तावेज अभिप्रेत है;
(17) ग्रामीण क्षेत्र" से तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन स्थापित या गठित किसी नगरीय स्थानीय निकाय या छावनी बोर्ड के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के सिवाय, किसी राज्य में का कोई क्षेत्र अभिप्रेत है;
(18) अनुसूची" से इस अधिनियम से उपाबद्ध अनुसूची अभिप्रेत है;
(19) वरिष्ठ नागरिक" से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 (2007 का 56) की धारा 2 के खंड (ज) के अधीन उस रूप में परिभाषित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(20) सामाजिक संपरीक्षा" से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है, जिसमें जनता किसी कार्यक्रम या स्कीम की योजना और उसके कार्यान्वयन को सामूहिक रूप से मानीटर और उनका मूल्यांकन करती है;
(21) राज्य आयोग" से धारा 16 के अधीन गठित राज्य खाद्य आयोग अभिप्रेत है;
(22) राज्य सरकार" से, किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त उसका प्रशासक अभिप्रेत है;
(23) लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली" से उचित दर दुकानों के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को आवश्यक वस्तुओं के वितरण की प्रणाली अभिप्रेत है;
(24) सतर्कता समिति" से इस अधिनियम के अधीन सभी स्कीमों के कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करने के लिए धारा 29 के अधीन गठित कोई समिति अभिप्रेत है;
(25) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें परिभाषित नहीं हैं किंतु आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) या किसी अन्य सुसंगत अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उन अधिनियमों में हैं ।
अध्याय 2
खाद्य सुरक्षा के लिए उपबंध
3. लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन पात्र गृहस्थी के व्यक्तियों द्वारा सहायताप्राप्त कीमतों पर खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार-(1) ऐसी पूर्विकता प्राप्त गृहस्थी का, जिसकी धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन पहचान की गई है, प्रत्येक व्यक्ति, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन, राज्य सरकार से अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट सहायताप्राप्त कीमतों पर प्रति मास प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने का हकदार होगा :
परंतु अन्त्योदय अन्न योजना के अंतर्गत आने वाली गृहस्थी, उस सीमा तक, जो केंद्रीय सरकार उक्त स्कीम में प्रत्येक राज्य के लिए विनिर्दिष्ट करे, अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर प्रति मास प्रति गृहस्थी पैंतीस किलोग्राम खाद्यान्न की हकदार होगी:
परंतु यह और कि यदि अधिनियम के अधीन किसी राज्य को खाद्यान्नों का वार्षिक आबंटन, सामान्य लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन पिछले तीन वर्ष के लिए खाद्यान्नों के औसत वार्षिक कुल क्रय से कम है, तो उसको उन कीमतों पर, जो केंद्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाएं, संरक्षित किया जाएगा और राज्य को अनुसूची 4 में यथा विनिर्दिष्ट खाद्यान्नों का आबंटन किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए, अन्त्योदय अन्न योजना" से केन्द्रीय सरकार द्वारा 25 दिसंबर, 2000 को उक्त नाम से आरंभ की गई, और समय-समय पर यथा उपांतरित, स्कीम अभिप्रेत है ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट पात्र गृहस्थी के व्यक्तियों की सहायताप्राप्त कीमतों पर हकदारियां ग्रामीण जनसंख्या के पचहत्तर प्रतिशत तक और नगरीय जनसंख्या के पचास प्रतिशत तक विस्तारित होंगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन रहते हुए, राज्य सरकार, पात्र गृहस्थी के व्यक्तियों को ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, खाद्यान्नों की हकदार मात्रा के बदले गेहूं का आटा उपलब्ध करा सकेगी ।
4. गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषणाहार सहायता-ऐसी स्कीमों के अधीन रहते हुए, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विरचित की जाएं, प्रत्येक गर्भवती स्त्री और स्तनपान कराने वाली माता निम्नलिखित के लिए हकदार होगी, -
(क) गर्भावस्था और शिशु जन्म के पश्चात् छह मास के दौरान स्थानीय आंगनवाड़ी के माध्यम से निःशुल्क भोजन, जिससे अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट पोषणाहार के मानकों को पूरा किया जा सके; और
(ख) कम से कम छह हजार रुपए का, ऐसी किस्तों में, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं, प्रसूति फायदाः
परंतु केंद्रीय सरकार या राज्य सरकारों या पब्लिक सेक्टर उपक्रमों में नियमित रूप से नियोजित सभी गर्भवती स्त्रियां और स्तनपान कराने वाली माताएं अथवा वे जिनको तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन वैसे ही फायदे मिल रहे हैं, खंड (ख) में विनिर्दिष्ट फायदों की हकदार नहीं होंगी ।
5. बालकों को पोषणाहार सहायता-(1) खंड (ख) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, चौदह वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बालक की, उसकी पोषणाहार संबंधी आवश्यकताओं के लिए निम्नलिखित हकदारियां होंगी, अर्थात्ः-
(क) छह मास से छह वर्ष के आयु समूह के बालकों की दशा में, स्थानीय आंगनवाड़ी के माध्यम से आयु के अनुरूप निःशुल्क भोजन, जिससे अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट पोषणाहार संबंधी मानकों को पूरा किया जा सकेः
परंतु छह मास से कम आयु के बालकों के लिए, केवल स्तनपान को ही बढ़ावा दिया जाएगा;
(ख) कक्षा 8 तक के अथवा छह से चौदह वर्ष के आयु समूह के बीच के बालकों की दशा में, इनमें से जो भी लागू हो, स्थानीय निकायों, सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी विद्यालयों में और सरकारी सहायताप्राप्त विद्यालयों में, विद्यालय अवकाश दिनों को छोड़कर, प्रत्येक दिन एक बार निःशुल्क दोपहर का भोजन, जिससे अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट पोषणाहार संबंधी मानकों को पूरा किया जा सके ।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रत्येक विद्यालय तथा आंगनवाड़ी में भोजन पकाने, पेयजल और स्वच्छता की सुविधाएं होंगीः
परंतु नगरीय क्षेत्रों में, केंद्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, भोजन पकाने के लिए केंद्रीयकृत रसोईघरों की सुविधाओं का, जहां कहीं अपेक्षित हो, उपयोग किया जा सकेगा ।
6. बालक कुपोषण का निवारण और प्रबंधन-राज्य सरकार, स्थानीय आंगनवाड़ी के माध्यम से ऐसे बालकों की, जो कुपोषण से ग्रस्त हैं, पहचान करेगी और उनको निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराएगी, जिससे अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट पोषणाहार संबंधी मानकों को पूरा किया जा सके ।
7. हकदारियों के आपन के लिए स्कीमों का कार्यान्वयन-राज्य सरकारें, मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच लागत में हिस्सा बंटाने सहित ऐसी स्कीमों का, जिसके अंतर्गत धारा 4, धारा 5 और धारा 6 के अधीन हकदारियां आती हैं, ऐसी रीति में कार्यान्वयन करेंगी, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।
अध्याय 3
खाद्य सुरक्षा भत्ता
8. कतिपय दशाओं में खाद्य सुरक्षा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार-अध्याय 2 के अधीन हकदार व्यक्तियों को खाद्यान्नों या भोजन की हकदार मात्रा का प्रदाय न किए जाने की दशा में, ऐसे व्यक्ति संबंधित राज्य सरकार से ऐसे खाद्य सुरक्षा भत्ता प्राप्त करने के हकदार होंगे, जिसका कि प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से संदाय किया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
अध्याय 4
पात्र गृहस्थी की पहचान
9. लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन जनसमुदाय को लाना-धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन रहते हुए, प्रत्येक राज्य के लिए ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन आने वाली प्रतिशतता का अवधारण केंद्रीय सरकार द्वारा किया जाएगा और राज्य के ऐसे ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या उस जनगणना के अनुसार, जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित किए जा चुके हैं, जनसंख्या प्राक्कलनों के आधार पर संगणित की जाएगी ।
10. राज्य सरकार द्वारा मार्गदर्शक सिद्धांत तैयार करना और पूर्विकताप्राप्त गृहस्थियों की पहचान करना-(1) राज्य सरकार, ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए धारा 9 के अधीन अवधारित व्यक्ति-संख्या के भीतर ही,-
(क) धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट सीमा तक अन्त्योदय अन्न योजना के अंतर्गत लाई आने वाली गृहस्थियों की, उक्त स्कीम को लागू मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार पहचान करेगी;
(ख) लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत लाई जाने वाली पूर्विकताप्राप्त गृहस्थियों के रूप में शेष बची गृहस्थियों की ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, जो राज्य सरकार विनिर्दिष्ट करे, पहचान करेगीः
परंतु राज्य सरकार, अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, किन्तु ऐसी अवधि के भीतर, जो तीन सौ पैंसठ दिन से अधिक की न हो, इस उपधारा के अधीन विरचित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार पात्र गृहस्थियों की पहचान कर सकेगीः
परंतु यह और कि राज्य सरकार, ऐसी गृहस्थियों की पहचान पूरी होने तक, विद्यामन लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन केंद्रीय सरकार से खाद्यान्नों का आबंटन प्राप्त करती रहेगी ।
(2) राज्य सरकार, ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए धारा 9 के अधीन अवधारित व्यक्ति-संख्या के अंतर्गत ही, पात्र गृहस्थियों की सूची को उपधारा (1) के अधीन विरचित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार अद्यतन करेगी।
11. पात्र गृहस्थियों की सूची का प्रकाशन और संप्रदर्शन-राज्य सरकार, पहचान की गई पात्र गृहस्थियों की सूची सार्वजनिक क्षेत्र में लगाएगी और उसे प्रमुख रूप से संप्रदर्शित करेगी ।
अध्याय 5
लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार
12. लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार-(1) केंद्रीय और राज्य सरकारें, इस अधिनियम में उनके लिए परिकल्पित भूमिका के अनुरूप लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में उत्तरोत्तर आवश्यक सुधारों का जिम्मा लेने का प्रयास करेंगी ।
(2) सुधारों के अंतर्गत, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित आएंगेः-
(क) लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के निर्गम-स्थानों पर खाद्यान्नों का द्वार तक परिदान; -
(ख) संव्यवहारों का सभी स्तरों पर पारदर्शक अभिलेखन सुनिश्चित करने तथा उनका अपयोजन रोकने की दृष्टि से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी साधनों का, जिनके अंतर्गत विस्तृत कंप्यूटरीकरण भी है, उपयोजन;
(ग) इस अधिनियम के अधीन फायदों को समुचित रूप से लक्ष्यित करने के लिए हकदार हिताधिकारियों की बायोमीट्रिक सूचना के साथ विशिष्ट पहचान के लिए आधार" का प्रयोग किया जाना;
(घ) अभिलेखों की पूर्ण पारदर्शिता;
(ङ) उचित दर दुकानों की अनुज्ञप्तियां दिए जाने में, लोक संस्थाओं या लोक निकायों, जैसे पंचायतों, स्वयंसेवी समूहों, सहकारी संस्थाओं को और उचित दर दुकानों का प्रबंधन महिलाओं और उनके समुच्चयों द्वारा किए जाने को अधिमानता;
(च) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन वितरित वस्तुओं का समयकालिक विविधत्व;
(छ) स्थानीय सार्वजनिक वितरण प्रतिमानों और धान्य बैंकों को समर्थन;
(ज) लक्ष्यित हिताधिकारियों के लिए, ऐसे क्षेत्र में और ऐसी रीति से, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं, अध्याय 2 में विनिर्दिष्ट उनकी खाद्यान्न हकदारियों को सुनिश्चित करने के लिए नकदी अंतरण, खाद्य कूपन जैसी स्कीमें या अन्य स्कीमें प्रारंभ करना ।
अध्याय 6
महिला सशक्तिकरण
13. राशन कार्ड जारी किए जाने के प्रयोजन के लिए अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु की स्त्रियों का गृहस्थी का मुखिया होना-(1) प्रत्येक पात्र गृहस्थी में, वर्षिष्ठ स्त्री, जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम की न हो, राशन कार्ड जारी किए जाने के प्रयोजन के लिए, गृहस्थी की मुखिया होगी ।
(2) जहां किसी गृहस्थी में किसी समय कोई स्त्री या अठारह वर्ष या उससे अधिक आयु की स्त्री नहीं है, किंतु अठारह वर्ष से कम आयु की महिला सदस्य है वहां गृहस्थी का वर्षिष्ठ पुरुष सदस्य राशन कार्ड जारी किए जाने के प्रयोजन के लिए गृहस्थी का मुखिया होगा और महिला सदस्य, अठारह वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, ऐसे राशन कार्डों के लिए, ऐसे पुरुष सदस्य के स्थान पर, गृहस्थी की मुखिया बन जाएगी ।
अध्याय 7
शिकायत निवारण तंत्र
14. आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र-प्रत्येक राज्य सरकार एक आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र, जिसके अंतर्गत कॉल सेंटर, हेल्पलाइनें, नोडल अधिकारियों का पदाभिहित किया जाना आता है या ऐसा अन्य तंत्र, जो विहित किया जाए, स्थापित करेगी ।
15. जिला शिकायत निवारण अधिकारी-(1) राज्य सरकार, प्रत्येक जिले के लिए, अध्याय 2 के अधीन हकदार खाद्यान्नों या भोजन के वितरण संबंधी विषयों में व्यथित व्यक्तियों की शिकायतों के शीघ्र और प्रभावी निवारण के लिए और इस अधिनियम के अधीन हकदारियों के प्रवर्तन के लिए, एक अधिकारी जो जिला शिकायत निवारण अधिकारी होगा, नियुक्त या पदाभिहित करेगी ।
(2) जिला शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं और उसकी शक्तियां ऐसी होंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं ।
(3) जिला शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की पद्धति और उसके निबंधन तथा शर्तें ऐसे होंगे, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
(4) राज्य सरकार, जिला शिकायत निवारण अधिकारी और अन्य कर्मचारिवृंद के वेतन और भत्तों तथा ऐसे अन्य व्यय का, जो उनके उचित कार्यकरण के लिए आवश्यक समझे जाएं, उपबंध करेगी ।
(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी हकदार खाद्यान्नों या भोजन वितरित न किए जाने और उससे संबंधित मामलों के संबंध में शिकायतों को सुनेगा और उनके निवारण के लिए, ऐसी रीति से और ऐसे समय के भीतर, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, आवश्यक कार्रवाई करेगा ।
(6) ऐसा कोई शिकायतकर्ता अथवा अधिकारी य प्राधिकारी, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा कोई आदेश पारित किया गया है, जो शिकायत के निवारण से संतुष्ट नहीं है, ऐसे आदेश के विरुद्ध राज्य आयोग के समक्ष कोई अपील फाइल कर सकेगा ।
(7) उपधारा (6) के अधीन प्रत्येक अपील, ऐसे रीति से और ऐसे समय के भीतर, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, फाइल की जाएगी ।
16. राज्य खाद्य आयोग-(1) प्रत्येक राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के कार्यान्वयन को मानीटर करने और उसका पुनर्विलोकन करने के प्रयोजन के लिए एक राज्य खाद्य आयोग का गठन करेगी ।
(2) राज्य आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, -
(क) अध्यक्ष;
(ख) पांच अन्य सदस्य; और
(ग) सदस्य-सचिव, जो राज्य सरकार का, उस सरकार में संयुक्त सचिव से अनिम्न पंक्ति का एक अधिकारी होगाः
परंतु उसमें कम से कम दो स्त्रियां होंगी, चाहे वे अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य-सचिव होंः
परंतु यह और कि उसमें एक व्यक्ति अनुसूचित जाति का और एक व्यक्ति अनुसूचित जनजाति का होगा, चाहे वह अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य-सचिव हो ।
(3) अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति निम्नलिखित ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, -
(क) जो आखिल भारतीय सेवाओं या संघ या राज्य की किन्हीं अन्य सिविल सेवाओं के सदस्य हैं या रह चुके हैं या जो संघ या राज्य के अधीन कोई सिविल पद धारण किए हुए हैं और जिन्हें कृषि, सिविल आपूर्ति, पोषण, स्वास्थ्य के क्षेत्र में या किसी संबद्ध क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, नीति बनाने और प्रशासन से संबंधित मामलों में ज्ञान और अनुभव प्राप्त है; या
(ख) जो सार्वजनिक जीवन में के ऐसे विख्यात व्यक्ति हैं, जिन्हें कृषि, विधि, मानवाधिकार, समाज सेवा, प्रबंधन, पोषण, स्वास्थ्य, खाद्य संबंधी नीति या लोक प्रशासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव प्राप्त है; या
(ग) जिनके पास निर्धनों के खाद्य और पोषण संबंधी अधिकारों में सुधार लाने से संबंधित कार्य का कोई प्रमाणित रिकार्ड है ।
(4) अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए पद धारण करेगा और वह पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगाः परंतु कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात् पद धारण नहीं करेगा ।
(5) राज्य आयोग के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों और सदस्य-सचिव की नियुक्ति की पद्धति और अन्य निबंधन और शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए उनकी नियुक्ति की जा सकेगी और राज्य आयोग की बैठकों का समय, स्थान और प्रक्रिया (जिसके अंतर्गत ऐसी बैठकों की गणपूर्ति भी है) और उसकी शक्तियां ऐसी होंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
(6) राज्य आयोग निम्नलिखित कृत्यों का जिम्मा लेगा, अर्थात्ः-
(क) राज्य के संबंध में, इस अधिनियम के कार्यान्वयन को मानीटर करना और उसका मूल्यांकन करना;
(ख) अध्याय 2 के अधीन उपबंधित हकदारियों के अतिक्रमणों की या तो स्वप्रेरणा से या शिकायत के प्राप्त होने पर, जांच करना;
(ग) इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार को सलाह देना;
(घ) व्यष्टियों को इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट उनकी हकदारियों तक पूर्ण पहुंच बनाने के लिए समर्थ बनाने के संबंध में खाद्य और पोषण संबंधी स्कीमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार को, सुसंगत सेवाओं के परिदान में अंतर्वलित उसके अभिकरणों, स्वायत्त निकायों और गैर-सरकारी संगठनों को सलाह देना;
(ङ) जिला शिकायत निवारण अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करना;
(च) वार्षिक रिपोर्टें तैयार करने, जो राज्य सरकार द्वारा राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखी जाएंगी ।
(7) राज्य सरकार, राज्य आयोग को उतने प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारिवृन्द उपलब्ध कराएगी जितने वह राज्य आयोग के उचित कार्यकरण के लिए आवश्यक समझे ।
(8) उपधारा (7) के अधीन कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति की पद्धति, उनके वेतन, भत्ते और सेवा की शर्तें ऐसी होंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
(9) राज्य सरकार, ऐसे अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा सकेगी, -
(क) जो दिवालिया है या किसी समय दिवालिया अधिनिर्णीत किया गया है; या
(ख) जो सदस्य के रूप में कार्य करने में शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से असमर्थ हो गया है; या
(ग) जिसे ऐसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है; या
(घ) जिसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है, जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ङ) जिसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है जिससे उसका पद पर बने रहना लोकहित में हानिकर है ।
(10) ऐसे किसी अध्यक्ष या सदस्य को उपधारा (9) के खंड (घ) या खंड (ङ) के अधीन तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक कि उसे मामले में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
17. राज्य आयोग के अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य-सचिव और अन्य कर्मचारिवृन्द के वेतन और भत्ते-राज्य सरकार अध्यक्ष, अन्य सदस्यों, सदस्य-सचिव, सहायक कर्मचारिवृन्द के वेतन और भत्तों का तथा राज्य आयोग के उचित कार्यकरण के लिए उपेक्षित अन्य प्रशासनिक व्ययों का उपबंध करेगी ।
18. राज्य आयोग के रूप में कार्य करने के लिए किसी आयोग या निकाय को अभिहित किया जाना-राज्य सरकार, यदि वह यह आवश्यक समझती है तो, अधिसूचना द्वारा, किसी कानूनी आयोग या निकाय को, धारा 16 में निर्दिष्ट राज्य आयोग की शक्तियों का प्रयोग और उसके कृत्यों का पालन करने के लिए अभिहित कर सकेगी ।
19. संयुक्त राज्य खाद्य आयोग-धारा 16 की उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, दो या अधिक राज्यों का एक संयुक्त राज्य खाद्य आयोग हो सकेगा ।
20. जांच से संबंधित शक्तियां-(1) राज्य आयोग को, धारा 16 की उपधारा (6) के खंड (ख) और खंड (ङ) में निर्दिष्ट किसी विषय की जांच करते समय और विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों के संबंध में वे सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय की होती हैं, अर्थात्ः-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) किसी दस्तावेज का प्रकटीकरण और पेश किया जाना;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना; और
(ङ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
(2) राज्य आयोग को किसी मामले को, उसका विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट को अग्रेषित करने की शक्ति होगी और ऐसा मजिस्ट्रेट, जिसको ऐसा मामला अग्रेषित किया जाता है, अभियुक्त के विरुद्ध परिवाद की उसी प्रकार सुनवाई करेगा मानो वह मामला दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 346 के अधीन उसको अग्रेषित किया गया है ।
21. रिक्तियों, आदि से राज्य आयोग की कार्यवाहियां का अविधिमान्य न होना-राज्य आयोग का कोई कार्य या कार्यवाही, केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि, -
(क) राज्य आयोग में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या
(ख) राज्य आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या
(ग) राज्य आयोग की प्रक्रिया में ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं डालती है ।
अध्याय 8
खाद्य सुरक्षा के लिए केन्द्रीय सरकार की बाध्यताएं
22. केन्द्रीय सरकार द्वारा केन्द्रीय पूल से खाद्यान्नों की अपेक्षित मात्रा का राज्य सरकरों को आबंटन किया जाना-(1) केन्द्रीय सरकार, पात्र गृहस्थियों के व्यक्तियों को खाद्यान्नों का नियमित प्रदाय सुनिश्चित करने के लिए धारा 3 के अधीन हकदारियों के अनुसार और अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन, केन्द्रीय पूल से खाद्यान्नों की अपेक्षित मात्रा का राज्य सरकरों को आबंटन करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, धारा 10 के अधीन प्रत्येक राज्य में पहचान की गई पात्र गृहस्थियों की व्यक्ति-संख्या के अनुसार खाद्यान्न आबंटित करेगी ।
(3) केन्द्रीय सरकार, धारा 4, धारा 5 और धारा 6 के अधीन हकदारियों के संबंध में, पात्र गृहस्थियों के व्यक्तियों के लिए अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर खाद्यान्न राज्य सरकारों को उपलब्ध कराएगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, -
(क) अपने स्वयं के अभिकरणों और राज्य सरकारों तथा उनके अभिकरणों के माध्यम से केन्द्रीय पूल के लिए खाद्यान्न उपाप्त करेगी;
(ख) राज्यों को खाद्यान्न आबंटित करेगी;
(ग) प्रत्येक राज्य में केन्द्रीय सरकार द्वारा अभिहित डिपो को, आबंटन के अनुसार, खाद्यान्नों के परिवहन का उपबंध करेगी;
(घ) राज्य सरकार को ऐसे सन्नियमों और रीति के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं, खाद्यान्नों के अंतर-राज्यिक संचलन, उठाई-धराई और उचित दर दुकान के व्यौहारियों को संदत्त अतिरिक्त धन (मार्जिन) मद्दे उसके द्वारा उपगत व्यय को पूरा करने में सहायता प्रदान करेगी; और
(ङ) विभिन्न स्तरों पर अपेक्षित आधुनिक और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाएं सृजित करेगी और बनाए रखेगी ।
23. केन्द्रीय सरकार द्वारा कतिपय मामलों में राज्य सरकार को निधियां उपलब्ध कराया जाना-किसी राज्य को केन्द्रीय पूल से खाद्यान्न की कम आपूर्ति की दशा में, केन्द्रीय सरकार, ऐसी रीति से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए, अध्याय 2 के अधीन की बाध्यताओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को किए गए कम प्रदाय की सीमा तक निधियां उपलब्ध कराएगी ।
अध्याय 9
खाद्य सुरक्षा के लिए राज्य सरकार की बाध्यताएं
24. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कीमों का कार्यान्वयन और उन्हें मानीटर किया जाना-(1) राज्य सरकार, अपने राज्य में लक्ष्यित हिताधिकारियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, केन्द्रीय सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की स्कीमों और अपनी स्वयं की स्कीमों का केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रत्येक स्कीम के लिए जारी मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार कार्यान्वयन किए जाने और उन्हें मानीटर करने के लिए उत्तरदायी होगी ।
(2) लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन राज्य सरकार का निम्नलिखित कर्तव्य होगा, -
(क) अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर, राज्य में केन्द्रीय सरकार के अभिहित डिपो से खाद्यान्नों का परिदान लेना; प्रत्येक उचित दर दुकान के द्वार तक अपने प्राधिकृत अभिकरणों में माध्यम से आबंटित खाद्यान्नों के परिदान के लिए अंतर-राज्यिक आबंटनों को संचालित करना; और
(ख) हकदार व्यक्तियों को अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर खाद्यान्नों का वास्तविक परिदान या प्रदाय सुनिश्चित करना ।
(3) धारा 4, धारा 5 और धारा 6 के अधीन हकदारियों के संबंध में खाद्यान्न अपेक्षाओं के लिए, राज्य सरकार, राज्य में केन्द्रीय सरकार के अभिहित डिपो से, पात्र गृहस्थियों के व्यक्तियों के लिए, अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कीमतों पर खाद्यान्नों का परिदान लेने और पूर्वोक्त धाराओं में यथा विनिर्दिष्ट हकदार फायदों के वास्तविक परिदान को सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होगी ।
(4) अध्याय 2 के अधीन हकदार व्यक्तियों के खाद्यान्नों या भोजनों की हकदार मात्रा का प्रदाय न करने की दशा में, राज्य सरकार धारा 8 में विनिर्दिष्ट खाद्य सुरक्षा भत्ते का संदाय करने के लिए उत्तरदायी होगी ।
(5) प्रत्येक राज्य सरकार, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दक्षतापूर्वक प्रचालन के लिए, -
(क) राज्य, जिला और ब्लाक स्तरों पर ऐसी वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं का सृजन करेगी और उन्हें बनाए रखेगी, जो लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य खाद्य आधारित कल्याणकारी स्कीमों के अधीन अपेक्षित खाद्यान्नों को समायोजित करने के लिए पर्याप्त हों;
(ख) अपने खाद्य और सिविल आपूर्ति निगमों और अन्य अभिहित अभिकरणों की क्षमताओं को यथोचित रूप से सुदृढ़ करेगी;
(ग) आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10), समय-समय पर यथासंशोधित के अधीन किए गए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2001 के सुसंगत उपबंधों के अनुसार उचित दर दुकानों के लिए संस्थागत अनुज्ञापन इंतजामों को स्थापित करेगी ।
अध्याय 10
स्थानीय प्राधिकारियों की बाध्यताएं
25. स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा अपने क्षेत्रों में लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का कार्यान्वयन-(1) स्थानीय प्राधिकारी, अपने-अपने क्षेत्रों में इस अधिनियम के उचित कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होंगे ।
(2) उपधारा (1) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, स्थानीय प्राधिकारी को लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए अतिरिक्त उत्तरदायित्व सौंप सकेगी ।
26. स्थानीय प्राधिकारी की बाध्यताएं-इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए तैयार की गई केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों के मंत्रालयों और विभागों की भिन्न-भिन्न स्कीमों के कार्यान्वयन में, स्थानीय प्राधिकारी ऐसे कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए उत्तरदायी होंगे, जो संबंधित राज्य सरकारों द्वारा, अधिसूचना द्वारा, उन्हें सौंपे जाएं ।
अध्याय 11
पारदर्शिता और जवाबदेही
27. लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अभिलेखों का प्रकटीकरण-लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित सभी अभिलेखों को, ऐसी रीति से, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, सार्वजनिक क्षेत्र में रखा जाएगा और जनसाधारण के निरीक्षण के लिए खुला रखा जाएगा ।
28. सामाजिक संपरीक्षा का कराया जाना-(1) प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी या ऐसा कोई अन्य प्राधिकारी या निकाय, जिसे राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किया जाए, उचित दर दुकानों, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी स्कीमों के कार्यकरण के संबंध में समय-समय पर सामाजिक संपरीक्षा करेगा या करवाएगा और ऐसी रीति से, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, अपने निष्कर्ष प्रचारित करवाएगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, यदि वह आवश्यक समझे, सामाजिक संपरीक्षा कर सकेगी या ऐसी संपरीक्षाएं करने का अनुभव रखने वाले स्वतंत्र अभिकरणों के माध्यम से करवा सकेगी ।
29. सतर्कता समितियों का गठन-(1) प्रत्येक राज्य सरकार, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और उचित कार्यकरण को तथा ऐसी प्रणाली में कृत्यकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, राज्य, जिला, ब्लाक और उचित दर दुकान के स्तरों पर, समय-समय पर यथासंशोधित, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) के अधीन किए गए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2001 में यथाविनिर्दिष्ट सतर्कता समितियों का गठन करेगी जो ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनेंगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं और इनमें स्थानीय प्राधिकारियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, स्त्रियों और निराश्रित व्यक्तियों या निःशक्त व्यक्तियों को सम्यक् प्रतिनिधित्व दिया जाएगा ।
(2) सतर्कता समितियां, निम्नलिखित कृत्यों का पालन करेंगी, अर्थात्ः-
(क) इस अधिनियम के अधीन सभी स्कीमों के कार्यान्वयन का नियमित रूप से पर्यवेक्षण करना;
(ख) इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों के अतिक्रमण की जिला शिकायत निवारण अधिकारी को, लिखित में, सूचना देना; और
(ग) किसी अनाचार या निधियों के दुर्विनियोग की, जिनका उसे पता चले, जिला शिकायत निवारण अधिकारी को, लिखित में, सूचना देना ।
अध्याय 12
खाद्य सुरक्षा अग्रसर करने के लिए उपबंध
30. दूरस्थ, पहाड़ी और जनजाति क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा-केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारें, इस अधिनियम के उपबंधों और विनिर्दिष्ट हकदारियों की पूर्ति के लिए स्कीमों का कार्यान्वयन करते समय कमजोर समूहों की, विशेष रूप से, उनकी जो दूरस्थ क्षेत्रों और ऐसे अन्य क्षेत्रों में, जहां पहुंचना कठिन है, पहाड़ी और जनजाति क्षेत्रों में रहते हैं, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनकी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देंगी ।
31. खाद्य तथा पोषणाहार संबंधी सुरक्षा को और अग्रसर करने के उपाय-केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारें और स्थानीय प्राधिकारी, खाद्य और पोषणाहार संबंधी सुरक्षा को अग्रसर करने के प्रयोजन के लिए अनुसूची 3 में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों को उत्तरोत्तर प्राप्त करने का प्रयास करेंगे ।
अध्याय 13
प्रकीर्ण
32. अन्य कल्याणकारी स्कीमें-(1) इस अधिनियम के उपबंध, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को अन्य खाद्य आधारित कल्याणकारी स्कीमों को जारी रखने या विरचित करने से प्रवारित नहीं करेंगे ।
(2) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, अपने स्वयं के स्रोतों से इस अधिनियम के अधीन उपबंधित फायदों से उच्चतर फायदों का उपबंध करने के लिए खाद्य या पोषण आधारित योजनाएं या स्कीमें जारी रख सकेगी या विरचित कर सकेगी ।
33. शास्तियां-ऐसा कोई लोक सेवक या प्राधिकारी, जिसे राज्य आयोग द्वारा, किसी परिवाद या अपील का विनिश्चय करते समय, जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा सिफारिश किए गए अनुतोष को, बिना किसी युक्तियुक्त कारण के उपलब्ध करवाने में असफल रहने का या ऐसी सिफारिश की जानबूझकर अवज्ञा करने का दोषी पाया जाएगा, पांच हजार रुपए से अनधिक की शास्ित का दायी होगाः
परंतु कोई शास्ित अधिरोपित करने के पूर्व, यथास्थिति, लोक सेवक या लोक प्राधिकारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया जाएगा ।
34. न्यायनिर्णयन की शक्ति-(1) राज्य आयोग, धारा 33 के अधीन शास्ित का न्यायनिर्णयन करने के प्रयोजन के लिए, अपने किसी सदस्य को, कोई शास्ित अधिरोपित करने के प्रयोजन के लिए संबद्ध किसी व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के पश्चात् विहित रीति से जांच करने के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में प्राधिकृत करेगा ।
(2) न्यायनिर्णायक अधिकारी को, कोई जांच करते समय, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से अवगत किसी ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसा साक्ष्य देने या कोई ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए जो न्यायनिर्णायक अधिकारी की राय में, जांच की विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो सकता है, समन करने और हाजिर कराने की शक्ति होगी और यदि ऐसी जांच करने पर उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा व्यक्ति, बिना किसी युक्तियुक्त कारण के जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर अनुतोष प्रदान करने में असफल रहा है या उसने जानबूझकर ऐसी सिफारिशों की अवज्ञा की है तो वह ऐसी शास्ति, जो वह धारा 33 के उपबंधों के अनुसार ठीक समझे, अधिरोपित कर सकेगा ।
35. केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा प्रत्यायोजन की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि उसके द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां (नियम बनाने की शक्ति के सिवाय), ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, राज्य सरकार अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के अधीनस्थ किसी ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जिसे वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, प्रयोक्तव्य होंगी ।
(2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि उसके द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियां (नियम बनाने की शक्ित के सिवाय) ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, उसके अधीनस्थ किसी ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जिसे वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, प्रयोक्तव्य होंगी ।
36. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई स्कीमों के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या ऐसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
37. अनुसूचियों का संशोधन करने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह अधिसूचना द्वारा अनुसूची 1 या अनुसूची 2 या अनुसूची 3 या अनुसूची 4 का संशोधन कर सकेगी और तदुपरि, यथास्थिति, अनुसूची 1 या अनूसूची 2 या अनुसूची 3 या अनुसूची 4 तदनुसार संशोधित की गई समझी जाएगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना की एक प्रति, उसके जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।
38. केंद्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केंद्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समय-समय पर, राज्य सरकारों को ऐसे निदेश दे सकेगी, जो वह आवश्यक समझे और राज्य सरकारें ऐसे निदेशों का पालन करेंगी ।
39. नियम बनाने की केंद्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राज्य सरकार के परामर्श से और अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टता और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 4 के खंड (ख) के अधीन गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रसूति फायदा उपलब्ध करवाने संबंधी स्कीम, जिसके अंतर्गत खर्च में हिस्सा बंटाना भी है;
(ख) धारा 4, धारा 5 और धारा 6 के अधीन हकदारी संबंधी स्कीमें, जिनके अंतर्गत धारा 7 के अधीन खर्च में हिस्सा बंटाना भी है;
(ग) धारा 8 के अधीन हकदार व्यष्टियों को खाद्य सुरक्षा भत्ते के संदाय की रकम, उसका समय और रीति;
(घ) धारा 12 की उपधारा (2) के खंड (ज) के अधीन लक्ष्यित हिताधिकारियों को ऐसे क्षेत्रों में और रीति से उनकी खाद्यान्न हकदारियों को सुनिश्चित करने के लिए नकदी अन्तरण, खाद्य कूपनों की स्कीमें या अन्य स्कीमें प्रारंभ करना;
(ङ) धारा 22 की उपधारा (4) के खंड (घ) के अधीन व्यय को पूरा करने में राज्य सरकारों को सहायता उपलब्ध कराने के सन्नियम और रीति;
(च) वह रीति, जिसमें धारा 23 के अधीन खाद्यान्नों के कम प्रदाय की दशा में केंद्रीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों को निधियां उपलब्ध कराई जाएंगी;
(छ) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए या जिसके संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
40. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम और केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से संगत, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन पूर्विकताप्राप्त गृहस्थियों की पहचान के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत;
(ख) धारा 14 के अधीन आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र;
(ग) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन जिला शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताएं और उसकी शक्तियां;
(घ) धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन जिला शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की पद्धति और उसके निबंधन तथा शर्तें;
(ङ) धारा 15 की उपधारा (5) और उपधारा (7) के अधीन जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा शिकायतों की सुनवाई तथा अपीलें फाइल किए जाने की रीति और समय-सीमा;
(च) धारा 16 की उपधारा (5) के अधीन राज्य आयोग के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों तथा सदस्य-सचिव की नियुक्ति की पद्धति और उनकी नियुक्ति के निबंधन और शर्तें, आयोग की बैठकों की प्रक्रिया तथा उसकी शक्तियां;
(छ) धारा 16 की उपधारा (8) के अधीन राज्य आयोग के कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति की पद्धति, उनके वेतन, भत्ते तथा सेवा की शर्तें;
(ज) वह रीति, जिसमें धारा 27 के अधीन लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित अभिलेख सार्वजनिक अधिकार क्षेत्र में रखे जाएंगे और जनता के निरीक्षण के लिए खुले रखे जाएंगे;
(झ) वह रीति, जिसमें धारा 28 के अधीन उचित दर दुकानों, लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी स्कीमों के कार्यकरण की सामाजिक संपरीक्षा की जाएगी;
(ञ) धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन सतर्कता समितियों की संरचना;
(ट) धारा 43 के अधीन संस्थागत तंत्र के उपयोग के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की स्कीमें या कार्यक्रम;
(ठ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए या जिसके संबंध में राज्य सरकार द्वारा नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम या जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना और मार्गदर्शक सिद्धान्त, उसके बनाए जाने या जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान-मंडल के, जहां उसके दो सदन हैं, प्रत्येक सदन के समक्ष और जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखे जाएंगे ।
41. स्कीमों, मार्गदर्शक सिद्धांतों आदि के लिए संक्रमणकालीन उपबंध-इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को विद्यमान स्कीमें, मार्गदर्शक सिद्धांत, आदेश और खाद्य मानक, शिकायत निवारण तंत्र, सतर्कता समितियां तब तक प्रवृत्त और प्रभाव में बनी रहेंगी जब तक इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन ऐसी स्कीमें, मार्गदर्शक सिद्धांत, आदेश और खाद्य मानक, शिकायत निवारण तंत्र, सतर्कता समितियां विनिर्दिष्ट या अधिसूचित हैः
परंतु उक्त स्कीमों, मार्गदर्शक सिद्धांतों, आदेशों और खाद्य मानक, शिकायत निवारण तंत्र के अधीन या सतर्कता समितियों द्वारा की गई कोई बात या कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी और तदनुसार तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक कि इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या किसी कार्रवाई द्वारा उसे अधिक्रांत नहीं कर दिया जाता है ।
42. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होंः
परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से दो वर्ष की समाप्ित के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
43. संस्थागत तंत्र का अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग-धारा 15 और धारा 16 के अधीन नियुक्त या गठित किए जाने वाले प्राधिकारियों की सेवाओं का उपयोग केंद्रीय सरकार की या राज्य सरकारों की ऐसी अन्य स्कीमों या कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में, जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, किया जा सकेगा ।
44. अपरिहार्य घटना-यथास्िथति, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन हकदार किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी दावे के लिए, ऐसे युद्ध, बाढ़, सूखे, आग, चक्रवात या भूंकप की दशा के सिवाय, जिससे इस अधिनियम के अधीन ऐसे व्यक्ति को खाद्यान्न या भोजन के नियमित प्रदाय पर प्रभाव पड़ता है, दायी होगीः
परंतु केन्द्रीय सरकार, योजना आयोग के परामर्श से, यह घोषित कर सकेगी कि ऐसे व्यक्ति को खाद्यान्न या भोजन के नियमित प्रदाय को प्रभावित करने वाली ऐसी कोई परिस्िथति उ-ूत या विद्यमान है अथवा नहीं ।
45. निरसन और व्यावृत्ति-(1) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश, 2013 (2013 का अध्यादेश सं0 7) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन, -
(क) की गई किसी बात, की गई किसी कार्रवाई या पात्र गृहस्थियों की, की गई पहचान; या
(ख) अर्जित, प्रो-ूत या उपगत किसी अधिकार, हकदारी, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व; या
(ग) विरचित किन्हीं मार्गदर्शन सिद्धांतों या जारी किए गए निर्देश; या
(घ) यथापूर्वोक्त ऐसे अधिकार, हकदारी, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व के संबंध में आरंभ की गई, संचालित या जारी किसी अन्वेषण, जांच या किसी अन्य विधिक कार्यवाही; या
(ङ) किसी अपराध के संबंध में अधिरोपित किसी शास्ति,
के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई, अर्जित की गई, प्रो-ूत हुई, उपगत की गई, विरचित की गई, जारी की गई, आरंभ की गई, संचालित की गई, जारी रखी गई या अधिरोपित की गई है ।
अनुसूची 1
[धारा 3(1), धारा 22(1), (3) और धारा 24(2), (3) देखिए]
लक्ष्यित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन सहायताप्राप्त कीमतें
पात्र गृहस्थियां, धारा 3 के अधीन सहायताप्राप्त कीमत पर, जो चावल के लिए 3 रुपए प्रति कि. ग्रा., गेहूं के लिए 2 रुपए प्रति कि. ग्रा. और मोटे अनाज के लिए 1 रुपए प्रति कि. ग्रा. से अधिक की नहीं होगी, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के लिए और उसके पश्चात् ऐसी कीमत पर खाद्यान्न लेने की हकदार होंगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत की जाए और जो, यथास्थिति, -
(i) गेहूं और मोटे अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत; और
(ii) चावल के लिए व्युत्पन्न न्यूनतम समर्थन कीमत, से अधिक नहीं होगी ।
अनुसूची 2
[धारा 4(क), धारा 5(1), और धारा 6 देखिए]
पोषणाहार मानक
पोषणाहार मानक: छह मास से तीन वर्ष के आयु समूह, तीन से छह वर्ष के आयु समूह के बालकों तथा गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषणाहार मानक घर ले जाया जाने वाला राशन" उपलब्ध कराकर या एकीकृत बाल विकास सेवा स्कीम के अनुसार पोषक गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराकर पूरे किए जाने अपेक्षित हैं और अपराह्न भोजन स्कीम के अधीन निम्न तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं के बालकों के पोषणाहार मानक निम्नानुसार हैंः
|
क्रम संख्यांक |
प्रवर्ग |
भोजन का प्रकार |
कैलोरी (कि. कैलोरी) |
प्रोटीन (ग्रा.) |
|
1. |
बालक (6 मास से 3 वर्ष) |
घर ले जाया जाने वाला राशन |
500 |
12-15 |
|
2. |
बालक (3 से वर्ष 6 वर्ष) |
सुबह का नाश्ता और गर्म पका हुआ भोजन |
500 |
12-15 |
|
3. |
बालक (6 मास से 6 वर्ष) जो कुपोषित हैं |
घर ले जाया जाने वाला राशन |
800 |
20-25 |
|
4. |
निम्न प्राथमिक कक्षाएं |
गर्म पका हुआ भोजन |
450 |
12 |
|
5. |
उच्च प्राथमिक कक्षाएं |
गर्म पका हुआ भोजन |
700 |
20 |
|
6. |
गर्भवती स्त्रियां और स्तनपान कराने वाली माताएं |
घर ले जाया जाने वाला राशन |
600 |
18-20 |
अनुसूची 3
(धारा 31 देखिए)
खाद्य सुरक्षा को अग्रसर करने के लिए उपबंध
(1) कृषि का पुनःसुदृढ़ीकरण-
(क) छोटे और सीमांत कृषकों के हितों को सुरक्षित करने के उपायों के माध्यम से भूमि संबंधी सुधार करना;
(ख) कृषि, जिसके अन्तर्गत अनुसंधान और विकास, विस्तार सेवाएं, सूक्ष्म और लघु सिंचाई और उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाने के लिए शक्ति भी है, विनिधान में वृद्धि करना;
(ग) लाभकारी कीमतों, निवेशों तक पहुंच, प्रत्यय, सिंचाई, विद्युत, फसल बीमा, आदि के रूप में कृषकों के जीवन निर्वाह की सुरक्षा सुनिश्चित करना;
(घ) खाद्य उत्पादन से भूमि और जल के अनपेक्षित उपयोजन का प्रतिषेध करना ।
(2) उपापन, भंडारण और लाने-ले-जाने से संबंधित मध्यक्षेप-
(क) विकेन्द्रीकृत उपापन को, जिसके अन्तर्गत मोटे अनाजों का उपापन भी है, प्रोत्साहित करना;
(ख) उपापन संक्रियाओं का भौगोलिक विशाखन;
(ग) पर्याप्त विकेंद्रीकृत आधुनिक और वैज्ञानिक भंडारण का संवर्द्धन;
(घ) खाद्यान्नों के लाने-ले-जाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और इस प्रयोजन के लिए पर्याप्त रैक उपलब्ध कराना जिसमें अधिशेष वाले क्षेत्रों से उपयोग वाले क्षेत्रों को खाद्यान्नों के लाने-ले-जाने को सुकर बनाने के लिए रेल की लाइन क्षमता का विस्तार भी सम्मिलित है ।
(3) अन्य: निम्नलिखित तक पहुंच-
(क) सुरक्षित और पर्याप्त पेय जल और स्वच्छता;
(ख) स्वास्थ्य देखभाल;
(ग) किशोर बालिकाओं का पोषणाहार, स्वास्थ्य और शिक्षा के संबंध में सहायता; और
(घ) वरिष्ठ नागरिकों, निःशक्त व्यक्तियों और एकल महिलाओं के लिए पर्याप्त पेंशनें ।
अनुसूची 4
[धारा 3(1) देखिए]
खाद्यान्नों का राज्य-वार आबंटन
|
क्रम सं० |
राज्य का नाम |
मात्रा (लाख टनों में) |
|
1 |
2 |
3 |
|
1. |
आंध्र प्रदेश |
32.10 |
|
2. |
अरुणाचल प्रदेश |
0.89 |
|
3. |
असम |
16.95 |
|
4. |
बिहार |
55.27 |
|
5. |
छत्तीसगढ़ |
12.91 |
|
6. |
दिल्ली |
5.73 |
|
7. |
गोवा |
0.59 |
|
8. |
गुजरात |
23.95 |
|
9. |
हरियाणा |
7.95 |
|
10. |
हिमाचल प्रदेश |
5.08 |
|
11. |
जम्मू-कश्मीर |
7. 51 |
|
12. |
झारखंड |
16.96 |
|
13. |
कर्नाटक |
25.56 |
|
14. |
केरल |
14.25 |
|
15. |
मध्य प्रदेश |
34.68 |
|
16. |
महाराष्ट्र |
45.02 |
|
17. |
मणिपुर |
1.51 |
|
18. |
मेघालय |
1.76 |
|
19. |
मिजोरम |
0.66 |
|
20. |
नागालैंड |
1.38 |
|
21. |
ओडिशा |
21.09 |
|
22. |
पंजाब |
8.70 |
|
23. |
राजस्थान |
27.92 |
|
24. |
सिक्किम |
0.44 |
|
25. |
तमिलनाडु |
36.78 |
|
26. |
त्रिपुरा |
2.71 |
|
27. |
उत्तर प्रदेश |
96.15 |
|
28. |
उत्तराखंड |
5.03 |
|
29. |
पश्चिमी बंगाल |
38.49 |
|
30. |
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह |
0.16 |
|
31. |
चंडीगढ़ |
0.31 |
|
32. |
दादरा और नागर हवेली |
0.15 |
|
33. |
दमन और दीव |
0.07 |
|
34. |
लक्षद्वीप |
0.05 |
|
35. |
पुडुचेरी |
0.50 |
|
|
कुल |
549.26 |
----------------

