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भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 ( Bureau of Indian Standards Act, 1986 (Repealed) )


 

भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986

(1986 का अधिनियम संख्यांक 63)

[23 दिसम्बर, 1986]

माल के मानकीकरण, चिह्नांकन और क्वालिटी प्रमाणन के

क्रियाकलापों के सामंजस्यपूर्ण विकास के लिए, एक ब्यूरो

की स्थापना के लिए और उससे सम्बद्ध या

उसके आनुषंगिक विषयों के लिए

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 है ।

                (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

                (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) वस्तु" से (मानकीकरण और चिह्नांकन के बारे में) कृत्रिम या प्राकृतिक, अथवा अंशतः कृत्रिम या अंशतः प्राकृतिक कोई पदार्थ अभिप्रेत है चाहे वह कच्चा हो अथवा अंशतः या पूर्णतः प्रसंस्कृत या विनिर्मित हो ;

(ख) ब्यूरो" से धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय मानक ब्यूरो अभिप्रेत है ;

(ग) उपभोक्ता" से किसी वस्तु या प्रसंस्करण का उपभोक्ता अभिप्रेत है ;

(घ) आवेष्टक" के अन्तर्गत कोई डाट, मंजूषा, बोतल, बर्तन, बक्सा, क्रेट, ढक्कन, कैप्सूल, पेटी, चौखटा, लपेटन या अन्य आधान भी हैं ;

(ङ) कार्यकारिणी समिति" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन गठित कार्यकारिणी समिति अभिप्रेत है ;

(च) निधि" से धारा 18 के अधीन गठित निधि अभिप्रेत है ;

(छ) भारतीय मानक" से, किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, ब्यूरो द्वारा स्थापित और प्रकाशित मानक (जिसके अन्तर्गत कोई प्रायोगिक या अनन्तिम मानक भी है) अभिप्रेत हैं जो ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण की क्वालिटी और विनिर्देश का सूचक है तथा इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी है-

                (i) धारा 10 के खंड (ख) के अधीन ब्यूरो द्वारा मान्यताप्राप्त कोई मानक ; और

(ii) भारतीय मानक संस्था द्वारा स्थापित और प्रकाशित, या मान्यताप्राप्त कोई मानक जो ब्यूरो की स्थापना की तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त है ;

(ज) भारतीय मानक संस्था" से भारत सरकार के तत्कालीन उद्योग और आपूर्ति विभाग के तारीख 3 सितम्बर, 1946 के संकल्प सं० 1 स्टैंडर्ड (4)/45 के अधीन स्थापित और सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत भारतीय मानक संस्था अभिप्रेत है ;

(झ) निरीक्षक अधिकारी" से धारा 25 के अधीन नियुक्त निरीक्षक अधिकारी अभिप्रेत है ;

(ञ) अनुज्ञप्ति" से किसी ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, जो भारतीय मानक के अनुरूप है भारतीय मानक प्रमाणन चिह्न का प्रयोग करने के लिए धारा 15 के अधीन दी गई कोई अनुज्ञप्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत भारतीय मानक संस्था (प्रमाणन चिह्न) अधिनियम, 1952 (1952 का 36) के अधीन दी गई ऐसी कोई अनुज्ञप्ति भी है जो ब्यूरो की स्थापना के तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त है ;

(ट) विनिर्माता" से किसी वस्तु या प्रसंस्करण का विनिर्माता अभिप्रेत है ;

(ठ) चिह्न" के अन्तर्गत कोई आकृति, छाप, सिरा, लेबल, टिकट, चित्ररूपण, नाम, हस्ताक्षर, शब्द, अक्षर या अंक, या इनका कोई संयोजन भी है ;

(ड) सदस्य" से ब्यूरो का कोई सदस्य अभिप्रेत है ;

(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(ण) प्रसंस्करण" के अन्तर्गत किसी वस्तु के विनिर्माण की कोई पद्धति, उपचार तथा ढंग भी है ;

(त) रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी" से कोई कंपनी, फर्म या व्यक्तियों का अन्य निकाय अथवा कोई व्यापार चिह्न या डिजाइन रजिस्टर करने, या कोई पेटेंट प्रदान करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सक्षम प्राधिकारी अभिप्रेत है ;

(थ) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन ब्यूरो द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;

(द) नियम" से इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं ;

(ध) विनिर्देश" से किसी वस्तु या प्रसंस्करण की प्रकृति, क्वालिटी, प्रबलता, शुद्धता, संरचना, परिमाण, आयाम, भार, श्रेणी, टिकाऊपन, उद्गम, आयु, पदार्थ, विनिर्माण के ढंग या अन्य लक्षणों के प्रति यथासाध्य निर्देश से उस वस्तु या प्रसंस्करण का वर्णन अभिप्रेत है जिससे कि उसका किसी अन्य वस्तु या प्रसंस्करण से विभेद किया जा सके ;

(न) मानक चिह्न" से किसी विशिष्ट भारतीय मानक का द्योतन करने वाला ब्यूरो का वह भारतीय मानक प्रमाणन चिह्न अभिप्रेत है जो ब्यूरो द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया है और इसके अन्तर्गत भारतीय मानक संस्था द्वारा विनिर्दिष्ट कोई भारतीय मानक संस्था प्रमाणन चिह्न भी है ;

(प) व्यापार चिह्न" से वह चिह्न अभिप्रेत है जो व्यापार के अनुक्रम में माल और ऐसे किसी व्यक्ति के बीच के संबंध का उपदर्शन करने के प्रयोजनार्थ या उपदर्शन करते हुए जिसे या तो स्वत्वधारी या रजिस्ट्रीकृत प्रयोगकर्ता के रूप में, उस व्यक्ति की पहचान के उपदर्शन सहित या रहित जिसे उस चिह्न के उपयोग का अधिकार है, माल के संबंध में प्रयोग किया जाता है या प्रयोग करना प्रस्थापित है ;

(फ) किसी वस्तु पर मानक चिह्न लगा है ऐसा तब कहा जाता है जब कोई मानक चिह्न स्वयं उस वस्तु पर लगा है या वह चिह्न किसी आवेष्टक पर, जिसमें वह वस्तु है, या उस वस्तु से संलग्न किसी लेबल पर इस प्रकार लगा है ।

अध्याय 2

भारतीय मानक ब्यूरो

3. भारतीय मानक ब्यूरो की स्थापना और निगमन-(1) ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत की जाए इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक ब्यूरो की स्थापना की जाएगी जो भारतीय मानक ब्यूरो कहलाएगा ।

(2) ब्यूरो पूर्वोक्त नाम का, शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए स्थावर और जंगम दोनों प्रकार की सम्पत्ति का अर्जन, धारण तथा व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।

(3) ब्यूरो निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

(क) केन्द्रीय सरकार के उस मंत्रालय या विभाग का जिसका ब्यूरो पर प्रशासनिक नियंत्रण है, भारसाधक मंत्री, जो ब्यूरो का पदेन अध्यक्ष होगा ;

(ख) केन्द्रीय सरकार के उस मंत्रालय या विभाग में जिसका ब्यूरो पर प्रशासनिक नियंत्रण है, राज्य मंत्री, या उपमंत्री यदि कोई हो, जो ब्यूरो का पदेन उपाध्यक्ष होगा और जहां ऐसा कोई राज्य मंत्री या उपमंत्री नहीं है वहां ऐसा व्यक्ति जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ब्यूरो के उपाध्यक्ष के रूप में नामनिर्दिष्ट किया जाए ;

(ग) केन्द्रीय सरकार के उस मंत्रालय या विभाग का जिसका ब्यूरो पर प्रशासनिक नियंत्रण है, भारसाधक भारत सरकार का सचिव, पदेन ;

(घ) ब्यूरो का महानिदेशक, पदेन ;

(ङ) उतने अन्य व्यक्ति जो सरकार, उद्योग, वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थाओं तथा अन्य हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विहित किए जाएं जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ।

(4) उपधारा (3) के खंड (क) मे निर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि और उनके बीच रिक्तियों को भरने की रीति, और सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए ।

(5) ब्यूरो किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को जिनकी इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का अनुपालन करने में सहायता या सलाह लेने की वह वांछा करे, ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए जो विहित किए जाएं, अपने से सहयोजित कर सकेगा और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह उन प्रयोजनों से जिनके लिए उसे सहयोजित किया गया है, ससुंगत ब्यूरो के     विचार-विमर्श में भाग ले किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

4. कार्यकारिणी समित का गठन-(1) ब्यूरो, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक कार्यकारिणी समिति का गठन कर सकेगा जो निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-

                                (क) ब्यूरो का महानिदेशक, जो उसका पदेन सभापति होगा ;

                                (ख) उतने सदस्य, जो विहित किए जाएं ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन गठित कार्यकारिणी समिति ऐसे कृत्यों का पालन, शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो ब्यूरो द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।

5. सलाहकार समितियों और अन्य समितियों का गठन-(1) इस निमित्त बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए, ब्यूरो समय-समय पर और जब यह आवश्यक समझा जाए, अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए निम्नलिखित सलाहकार समितियां गठित कर सकेगा, अर्थात् :-

                                (क) वित्तीय समिति ;

                                (ख) प्रमाणन सलाहकार समिति ;

                                (ग) मानक सलाहकार समिति ;

                                (घ) प्रयोगशाला सलाहकार समिति ;

                                (ङ) योजना और विकास सलाहकार समिति ;

                                (च) उतनी अन्य समितियां जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

                (2) प्रत्येक सलाहकार समिति, सभापति और ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी जो विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।

                (3) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ब्यूरो जब भी आवश्यक समझे, वस्तुओं या प्रसंस्करण की बाबत मानक तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की ऐसी तकनीकी समितियां गठित कर सकेगा ।

6. रिक्तियों आदि के कारण ब्यूरो, कार्यकारिणी समिति आदि की कार्यवाहियों का अविधिमान्य होना-ब्यूरो, कार्यकारिणी समिति या धारा 5 के अधीन गठित किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल निम्नलिखित के कारण अविधिमान्य नहीं होगी, अर्थात् :-

                                (क) ब्यूरो या समिति के गठन में कोई रिक्ति या त्रुटि, या

                (ख) ब्यूरो या समिति के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि, या

(ग) ब्यूरो या समिति की प्रक्रिया में कोई अनियमितता जो मामले के गुणागुण को प्रभावित न करती हो ।

7. ब्यूरो का महानिदेशक-(1) केन्द्रीय सरकार ब्यूरो का महानिदेशक नियुक्त करेगी ।

                (2) ब्यूरो के महानिदेशक की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।

                (3) ब्यूरो के साधारण अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन रहते हुए, ब्यूरो का महानिदेशक, ब्यूरो का मुख्य कार्यपालक प्राधिकारी होगा ।

                (4) ब्यूरो का महानिदेशक ब्यूरो की ऐसी  शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।

8. ब्यूरो के अधिकारी और कर्मचारी-(1) ब्यूरो ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त ब्यूरो के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

अध्याय 3

भारतीय मानक संस्था की शक्तियों, दायित्वों आदि का ब्यूरो को अंतरण

9. भारतीय मानक संस्था की आस्तियों, दायित्वों और कर्मचारियों का अन्तरण-(1) ब्यूरो की स्थापना की तारीख से ही-

(क) इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि में या किसी संविदा या अन्य लिखत में भारतीय मानक संस्था के प्रति किसी निर्देश को ब्यूरो के प्रति निर्देश समझा जाएगा ;

(ख) भारतीय मानक संस्था की सभी स्थावर और जंगम संपत्ति और आस्तियां ब्यूरो में निहित हो जाएंगी ;

(ग) भारतीय मानक संस्था के सभी अधिकार और दायित्व ब्यूरो को अंतरित हो जाएंगे और वे उसके अधिकार और दायित्व होंगे ;

(घ) खंड (ग) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस तारीख के ठीक पूर्व भारतीय मानक संस्था के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में भारतीय मानक संस्था द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं तथा किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें ब्यूरो द्वारा या उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी ;

(ङ) उस तारीख के ठीक पूर्व भारतीय मानक संस्था को देय सभी धनराशियां ब्यूरो को देय समझी जाएंगी ;

(च) ऐसे सभी वाद और संस्थित सभी अन्य विधिक कार्यवाहियां जो ऐसी तारीख के ठीक पूर्व भारतीय मानक संस्था द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित की जा सकती थी, ब्यूरो द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी ; और

(छ) उस तारीख के ठीक पूर्व भारतीय मानक संस्था के अधीन किसी पद को धारण करने वाला प्रत्येक अधिकारी ब्यूरो में अपना पद उसी अवधि तक और पारिश्रमिक, छुट्टी, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति या अन्य सेवान्त प्रसुविधाओं की बाबत, सेवा के उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर धारण करेगा जिन पर वह ऐसे पद को ब्यूरो का गठन न होने की दशा में धारण करता और यदि ऐसा कर्मचारी ऐसी अवधि के भीतर ब्यूरो का कर्मचारी होने का विकल्प नहीं करता है तो वह उस तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति तक ब्यूरो के कर्मचारी के रूप में ऐसा करता रहेगा ।

                (2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ब्यूरो द्वारा इस धारा के अधीन किसी कर्मचारी का अपनी नियमित सेवा में आमेलन, ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

अध्याय 4

ब्यूरो की शक्तियां और कृत्य

10. ब्यूरो के कृत्य-(1) ब्यूरो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेगा जो उसे इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन समनुदेशित किए जाएं और विशिष्टतया ऐसी शक्तियों के अंतर्गत निम्नलिखित के बारे में शक्ित भी है-

(क) किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, ऐसी रीति में जो विहित की जाए, भारतीय मानक की स्थापना, प्रकाशन और संवर्धन ;

(ख) किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, ऐसी रीति में जो विहित की जाए, भारत में या अन्यत्र किसी अन्य संस्था द्वारा स्थापित किसी मानक को भारतीय मानक के रूप में मान्यता प्रदान करना ;

(ग) किसी मानक चिह्न का विनिर्देश करना जो भारतीय मानक ब्यूरो प्रमाणन चिह्न कहलाएगा और जो ऐसी डिजाइन का होगा तथा ऐसी विशिष्टियों से युक्त होगा जो किसी विशिष्ट भारतीय मानक के प्रतीक के रूप में विहित की जाएं ;

(घ) मानक चिह्न के उपयोग के लिए अनुज्ञप्ति देना, उसका नवीकरण करना या उसको निलंबित या रद्द करना ;

(ङ) कोई अनुज्ञप्ति दिए जाने या उसके नवीकरण के लिए फीस उद्गृहीत करना ;

(च) किसी सामग्री या पदार्थ का ऐसा निरीक्षण करना और ऐसे नमूने लेना जो यह देखने के लिए आवश्यक हो कि कोई वस्तु या प्रसंस्करण जिसकी बाबत मानक चिह्न का प्रयोग किया गया है, भारतीय मानकों के अनुरूप है या नहीं या किसी वस्तु या प्रसंस्करण की बाबत मानक चिह्न का किसी अनुज्ञप्ित सहित या उसके बिना अनुचित रूप से प्रयोग किया गया है या नहीं ;

(छ) ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो किसी देश में किसी तत्स्थानी संस्था या संगठन के साथ ब्यूरो द्वारा आपस में करार पाई जाएं, ब्यूरो और भारत के बाहर भारतीय मानक की मान्यता प्राप्त करना ;

(ज) मानकीकरण और क्वालिटी नियंत्रण के प्रयोजनों के लिए और ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए जो विहित किए जाएं, प्रयोगशालाओं की स्थापना, अनुरक्षण और मान्यता प्रदान करना ;

(झ) उपभोक्ताओं और विनिर्माताओं के हित में भारतीय मानक बनाने के लिए अनुसंधान करना ;

(ञ) भारत में या उसके बाहर ऐसी किसी संस्था को मान्यता देना जो किसी वस्तु या प्रसंस्करण के मानकीकरण या किसी वस्तु या प्रसंस्करण की क्वालिटी के सुधार में लगी हुई है ;

(ट) ऐसे निबंधन और शर्तों पर किसी वस्तु या प्रसंस्करण के विनिर्माताओं और उपभोक्ताओं को सेवाएं उपलब्ध कराना जो परस्पर करार पाई जाएं ;

(ठ) निरीक्षण, परीक्षण और ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए जो विहित किए जाएं, भारत में या भारत के बाहर अभिकर्ताओं की नियुक्ति करना ;

(ड) भारत में या उसके बाहर शाखाओं, कार्यालयों या अभिकरणों की स्थापना ;

(ढ) ऐसे समयों और स्थानों पर जो विहित किए जाएं, ऐसी किसी वस्तु या प्रसंस्करण का निरीक्षण करना जिसकी बाबत मानक चिह्न का प्रयोग किया जाता है, या जो इस अधिनियम द्वारा या किसी अन्य विधि के अधीन भारतीय मानक के अनुरूप होने के लिए अपेक्षित है, इस बात पर विचार किए बिना कि क्या ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण भारत में है या भारत के बाहर किसी स्थान से भारत में लाया गया है अथवा लाए जाने के लिए आशयित है ;

(ण) ऐसे किसी विनिर्माता या विनिर्माताओं या उपभोक्ताओं के संगम के जो किसी वस्तु या प्रसंस्करण की क्वालिटी के मानकीकरण और सुधार में या किसी क्वालिटी नियंत्रण क्रियाकलाप के कार्यान्वयन में लगे हुए हैं, क्रियाकलापों का समन्वयन करना ;

(त) ऐसे कृत्यों का पालन करना, जो विहित किए जाएं ।

(2) ब्यूरो इस धारा के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन ऐसे नियमों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं ।

11. मानक चिह्न के अनुचित प्रयोग का प्रतिषेध-(1) कोई व्यक्ति, किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, या किसी पेटेंट के शीर्षक में, या किसी व्यापार-चिह्न या डिजाइन में, अनुज्ञप्ति के बिना, किसी मानक चिह्न या उससे मिलती-जुलती नकल का प्रयोग नहीं करेगा ।

(2) कोई व्यक्ति, इस बात के होते हुए भी कि उसे अनुज्ञप्ति दे दी गई है, किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, मानक चिह्न या उससे मिलती-जुलती नकल का, जब तक वह वस्तु या प्रसंस्करण भारतीय मानक के अनुरूप न हो, प्रयोग नहीं करेगा ।

12. कतिपय नामों आदि के प्रयोग का प्रतिषेध-कोई व्यक्ति, ऐसे मामलों के और ऐसी शर्तों के सिवाय जो विहित की जाएं, ब्यूरो की पूर्व अनुज्ञा के बिना,-

(क) ऐसे किसी नाम का, जो ब्यूरो के नाम के इतना अधिक सदृश है कि जनता को प्रवंचित करे या प्रवंचित करना संभाव्य है या जिसमें भारतीय मानक" पद या उसका कोई संक्षेपाक्षर है, प्रयोग नहीं करेगा ; अथवा

(ख) किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में, किसी ऐसे चिह्न या व्यापार-चिह्न का, जिसमें भारतीय मानक" या भारतीय मानक विनिर्देश" पद या ऐसे पद का कोई संक्षेपाक्षर है, प्रयोग नहीं करेगा ।

13. कतिपय मामलों में रजिस्ट्रीकरण का प्रतिषेध-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, कोई रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी,-

(क) किसी कम्पनी, फर्म या व्यक्तियों  के किसी अन्य निकाय को, जिसका कोई नाम या चिह्न हो, रजिस्टर नहीं करेगा ; अथवा

(ख) कोई ऐसा व्यापार-चिह्न या डिजाइन जिस पर कोई नाम या चिह्न हो, रजिस्टर नहीं करेगा ; अथवा

(ग) किसी आविष्कार की बाबत, जिसका शीर्षक ऐसा हो जिस पर कोई नाम या चिह्न हो, कोई पेटेन्ट नहीं देगा,

यदि ऐसे नाम या चिह्न का प्रयोग धारा 11 या धारा 12 के उल्लंघन में है ।

(2) यदि किसी रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी के समक्ष यह प्रश्न उठता है कि किसी नाम या चिह्न का प्रयोग धारा 11 या धारा 12 के उल्लंघन में है या नहीं तो वह रजिस्ट्रीकर्ता प्राधिकारी उस प्रश्न को केन्द्रीय सरकार को निर्देशित कर सकता है और उस पर उस सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

14. कतिपय अनुसूचित उद्योगों की वस्तुओं और प्रसंस्करणों के लिए मानक चिह्न का अनिवार्य प्रयोग-यदि केन्द्रीय सरकार की ब्यूरो से परामर्श करने के पश्चात् यह राय है कि लोक हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा,-

(क) किसी अनुसूचित उद्योग की ऐसी किसी वस्तु या प्रसंस्करण को अधिसूचित कर सकेगी जो भारतीय मानक के अनुरूप होगा ; और

(ख) ऐसी किसी वस्तु या प्रसंस्करण पर किसी अनुज्ञप्ति के अधीन मानक चिह्न के अनिवार्य रूप से प्रयोग का निदेश दे सकेगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए अनुसूचित उद्योग" पद का वही अर्थ होगा जो उसका उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) में है ।

अध्याय 5

अनुज्ञप्ति

15. अनुज्ञप्ति का दिया जाना-(1) ब्यूरो आदेश द्वारा किसी अनुज्ञप्ति को ऐसी रीति से जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाए, दे सकेगा, नवीकृत कर सकेगा, निलम्बित कर सकेगा या रद्द कर सकेगा ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति का दिया जाना या नवीकरण ऐसी शर्तों के अधीन और ऐसी फीस के संदाय पर होगा जो विनियमों द्वारा अवधारित की जाएं ।

16. अपील-(1) धारा 15 के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति केन्द्रीय सरकार को कोई अपील ऐसी अवधि के भीतर कर सकेगा जो विहित की जाएं ।

(2) कोई अपील स्वीकार नहीं की जाएगी यदि वह उसके लिए विहित अवधि के अवसान के पश्चात् की जाती है :

परन्तु कोई अपील उसके लिए विहित अवधि के अवसान के पश्चात् स्वीकार की जा सकेगी यदि अपीलार्थी केन्द्रीय सरकार का यह समाधान कर देता है कि उसके पास विहित अवधि के भीतर अपीन न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था ।

(3) इस धारा के अधीन की गई प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में होगी और उसके साथ उस आदेश की प्रति होगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है और ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।

(4) अपील के निपटारे की प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए :

परन्तु किसी अपील का निपटारा करने के पूर्व अपीलार्थी को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

अध्याय 6

वित्त, लेखा और लेखा-परीक्षा

17. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् ब्यूरो को ऐसी धनराशि का अनुदान और उधार दे सकेगी जो वह सरकार आवश्यक समझे ।

18. निधि-(1) केन्द्रीय मानक निधि ब्यूरो के नाम से ज्ञात एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, अर्थात् :-

                (क) केन्द्रीय सरकार द्वारा ब्यूरो को धारा 17 के अधीन दिए गए कोई अनुदान और उधार ;

                (ख) इस अधिनियम के अधीन ब्यूरो द्वारा प्राप्त सभी फीसें और प्रभार ;

(ग) ब्यूरो द्वारा ऐसे सभी अन्य स्रोतों से जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चित किए जाएं, प्राप्त सभी राशियां ।

(2) निधि का उपयोजन निम्नलिखित को पूरा करने के लिए किया जाएगा, अर्थात् :-

(क) ब्यूरो के सदस्यों, महानिदेशक, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक ;

                (ख) धारा 10 के अधीन ब्यूरो के कृत्यों का निर्वहन करने में ब्यूरो के व्यय ;

                (ग) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों के लिए व्यय ।

19. ब्यूरो की उधार लेने की शक्तियां-(1) ब्यूरो इस अधिनियम के अधीन अपने सभी या किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए केन्द्रीय सरकार की सम्मति से या केन्द्रीय सरकार द्वारा उसे दिए गए किसी साधारण या विशेष प्राधिकार के निबंधनों के अनुसार किसी भी स्रोत से जो वह ठीक समझे, धन उधार ले सकेगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार, ब्यूरो द्वारा उपधारा (1) के अधीन लिए गए उधारों की बाबत, मूलधन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज के संदाय को ऐसी रीति से प्रत्याभूत कर सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।

20. बजट-ब्यूरो प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा जिसमें ब्यूरो की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित किए जाएंगे और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

21. वार्षिक रिपोर्ट-ब्यूरो प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और समय पर, जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों का पूरा लेखा देगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।

22. लेखा और लेखा-परीक्षा-(1) ब्यूरो उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।

(2) ब्यूरो के लेखे भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर लेखापरीक्षित किए जाएंगे जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय ब्यूरो द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के तथा ब्यूरो के लेखाओं की लेखा-परीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी लेखा-परीक्षा के संबंध में वही अधिकार तथा विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के साधारणतया, सरकारी लेखाओं की लेखा-परीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया, उसे बहियों, लेखा-संबंधी बाउचरों, दस्तावेजों और कागजपत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और ब्यूरो के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित ब्यूरो के लेखा तद्विषयक लेखा-परीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को प्रत्येक वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

23. वार्षिक रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार वार्षिक रिपोर्ट को प्राप्त किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।

अध्याय 7

प्रकीर्ण

24. केन्द्रीय सरकार की निदेश जारी करने की शक्ति-(1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ब्यूरो, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग या कृत्यों के पालन में नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जैसे केन्द्रीय सरकार लिखित रूप में समय-समय पर उसे दे :

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई निदेश दिए जाने के पूर्व यावत्साध्य, ब्यूरो को अपने विचार अभिव्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।

(2) इस बाबत कि कोई प्रश्न नीति के बारे में है या नहीं केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

25. निरीक्षक अधिकारी-(1) ब्यूरो, इस बात का निरीक्षण करने के प्रयोजन के लिए कि कोई वस्तु या प्रसंस्करण, जिसके सम्बन्ध में मानक चिह्न प्रयोग में लाया गया है, भारतीय मानक के अनुरूप है या नहीं, अथवा मानक चिह्न किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में अनुज्ञप्ति सहित या रहित अनुचित रूप से प्रयोग में लाया गया है या नहीं और ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करने के प्रयोजन के लिए जो उसे सौंपे जाएं, उतने निरीक्षक अधिकारियों की नियुक्ति कर सकेगी जितने आवश्यक हों ।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए निरीक्षक अधिकारी को निम्नलिखित शक्ति होगी, अर्थात् :-

(क) किसी ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में जिसके लिए मानक चिह्न का प्रयोग किया गया है, की गई किसी संक्रिया का निरीक्षण करना ; और

(ख) किसी ऐसी वस्तु के, या किसी वस्तु या प्रसंस्करण में प्रयुक्त किसी ऐसी सामग्री या पदार्थ के नमूने लेना जिसके बारे में मानक चिह्न का प्रयोग किया गया  है ।

                (3) प्रत्येक निरीक्षक अधिकारी को निरीक्षक अधिकारी के रूप में नियुक्ति का एक प्रमाणपत्र ब्यूरो द्वारा दिया जाएगा, और वह प्रमाणपत्र मांग की जाने पर, निरीक्षक अधिकारी द्वारा पेश किया जाएगा ।

26. तलाशी और अभिग्रहण करने की शक्ति-(1) यदि निरीक्षक अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसी कोई वस्तु या प्रसंस्करण जिसके संबंध में धारा 11 या धारा 12 का उल्लंघन हुआ है, किसी स्थान, परिसर या यान में छिपा दी गई है, तो वह ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण के लिए किसी ऐसे स्थान, परिसर या यान में प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा ।

(2) जहां, उपधारा (1) के अधीन ली गई किसी तलाशी के परिणामस्वरूप कोई ऐसी वस्तु या प्रसंस्करण पाया गया है जिसके संबंध में धारा 11 या धारा 12 का उल्लंघन हुआ है, वहां वह ऐसी वस्तु और अन्य चीज को अभिगृहीत कर सकेगा जो, उसकी राय में, इस अधिनियम के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही के लिए उपयोगी या उसके लिए सुसंगत होगी :

परन्तु जहां ऐसी किसी वस्तु या चीज को अभिगृहीत करना व्यवहार्य न हो वहां निरीक्षक अधिकारी स्वामी पर यह आदेश तामील कर सकेगा कि वह निरीक्षक अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना ऐसी वस्तु या चीज को न तो हटाएगा, न उसे विलग करेगा या न उसके साथ अन्यथा संव्यवहार करेगा ।

(3) तलाशी और अभिग्रहण संबंधी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन ली गई प्रत्येक तलाशी या अभिग्रहण को लागू होंगे ।

27. प्रत्यायोजन-ब्यूरो, लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों और कृत्यों में से (धारा 38 के अधीन शक्तियों के सिवाय) उन शक्तियों और कृत्यों का प्रत्यायोजन, जिन्हें वह आवश्यक समझे, ब्यूरो के किसी सदस्य, कार्यकारिणी समिति के सदस्य, किसी अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन कर सकेगा जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं ।

28. जानकारी, आदि प्राप्त करने की शक्ति-प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी ब्यूरो को ऐसी जानकारी तथा किसी वस्तु या प्रसंस्करण के संबंध में प्रयोग में लाई गई किसी सामग्री या पदार्थ के ऐसे नमूने देगा, जिनकी ब्यूरो अपेक्षा करे ।

29. व्यावृत्ति-इस अधिनियम की किसी बात से, किसी भी व्यक्ति को, किसी ऐसे वाद या अन्य कार्यवाही से छूट नहीं मिलेगी, जो इस अधिनियम के अलावा, उसके विरुद्ध की जा सकती हो ।

30. कतिपय मामलों को गोपनीय रखना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किए गए किसी कथन या दी गई किसी जानकारी या दिए गए किसी साक्ष्य से, या किए गए किसी निरीक्षण के फलस्वरूप किसी निरीक्षक अधिकारी या ब्यूरो को प्राप्त जानकारी गोपनीय समझी जाएगी :

परन्तु इस धारा की कोई बात इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के प्रयोजन के लिए किसी जानकारी को प्रकट करने पर लागू नहीं होगी ।

31. ब्यूरो के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-ब्यूरो के सभी सदस्य, अधिकारी और अन्य कर्मचारी जब वे इस अधिनियम के किसी उपबंध के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 अर्थ के अन्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।

32. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सरकार के या किसी अधिकारी या ब्यूरो के किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।

33. मानक चिह्न आदि के अनुचित प्रयोग के लिए शास्ति-(1) कोई व्यक्ित जो धारा 11 या धारा 12 या धारा 14 या धारा 15 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।

(2) कोई न्यायालय उपधारा (1) के अधीन किसी उल्लंघन का विचारण करते हुए यह निदेश दे सकेगा कि कोई भी सम्पत्ति, जिसकी बाबत उल्लंघन किया गया है, ब्यूरो को समपहृत हो जाए ।

34. न्यायालयों द्वारा अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान, सरकार या ब्यूरो द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन या सरकार या ब्यूरो द्वारा इस निमित्त सशक्त किसी अधिकारी या किसी उपभोक्ता द्वारा या केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त मान्यताप्राप्त किसी संगम द्वारा किए गए परिवाद पर करने के सिवाय नहीं करेगा ।

(2) महानगर मजिस्ट्रेट या इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।

35. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध की दोषी समझी जाएगी और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने की भी दायी होगी :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, तथा

(ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

36. ब्यूरो के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणीकरण-ब्यूरो के सभी आदेश और विनिश्चय और उसके द्वारा की गई अन्य सभी लिखतें ऐसे अधिकारी या अधिकारियों के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित की जाएंगी, जो ब्यूरो द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किए गए हों ।

37. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, नियम बना सकेगी ।

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

(क) ब्यूरो की सदस्य संख्या और वह हित जिसका ऐसे सदस्य धारा 3 की उपधारा (3) के खंड (ङ) के अधीन प्रतिनिधित्व करेंगे ;

(ख) ब्यूरो के सदस्यों की पदावधि, रिक्तियों को भरने की रीति और वह प्रक्रिया जो धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाएगी ;

(ग) वह रीति और वे प्रयोजन जिनके लिए ब्यूरो धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन सहायता और सलाह के लिए किसी व्यक्ित को अपने साथ सहयोजित कर सकेगा ;

(घ) ब्यूरो की ऐसी सदस्य संख्या जो धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन कार्यकारिणी समिति के सदस्य होंगे ;

(ङ) धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन ब्यूरो के महानिदेशक की सेवा के निबंधन और शर्तें ;

(च) धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन किसी विशिष्ट भारतीय मानक का प्रतिनिधित्व करने के लिए डिजाइन और विशिष्टियां ;

(छ) वे प्रयोजन जिनके लिए धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ज) के अधीन मानकीकरण और क्वालिटी नियंत्रण के प्रयोजनों के लिए ब्यूरो द्वारा प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी ;

(ज) वे प्रयोजन जिनके लिए धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ठ) के अधीन भारत में या भारत के बाहर ब्यूरो द्वारा अभिकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी ;

(झ) वे समय और स्थान जिन पर किसी वस्तु या प्रसंस्करण का धारा 10 की उपधारा (1) के खंड (ढ) के अधीन निरीक्षण किया जा सकेगा ;

(ञ) ऐसे अतिरिक्त कृत्य जिनका धारा 10 के अधीन ब्यूरो द्वारा पालन किया जा सकेगा ;

(ट) वे मामले जिनमें और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए धारा 12 के अधीन छूट दी जा सकेगी ;

(ठ) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिस पर ब्यूरो धारा 20 के अधीन अपना बजट और धारा 21 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा ;

(ड) वह रीति जिससे ब्यूरो के लेखाओं को धारा 22 के अधीन बनाए रखा जाएगा ;

(ढ) वे शर्तें जिनके अधीन निरीक्षक अधिकारी धारा 25 की उपधारा (2) के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा ;

(ण) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए या जिसकी बाबत उपबंध नियमों द्वारा किया जाना है या किया जाए ।

38. विनियम बनाने की शक्ति-(1) कार्यकारिणी समिति, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, इस अधिनियम के प्रयोजनों को साधारणतया कार्यान्वित करने के लिए इस अधिनियम और नियमों से संगत विनियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

                                (क) धारा 5 के अधीन गठित सलाहकार समिति के सदस्य ;

(ख) वे शक्तियां और कर्तव्य जिनका धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन ब्यूरो के महानिदेशक द्वारा प्रयोग और पालन किया जा सकेगा ;

(ग) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन ब्यूरो के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें ;

() धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति के दिए जाने, नवीकरण, निलंबन या उसके रद्द किए जाने की रीति ;

(ङ) वे शर्तें जिनके अधीन कोई अनुज्ञप्ति धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन दी जा सकेगी या नवीकृत की जा सकेगी और उसके लिए फीस संदेय होगी ।

39. संसद् के समक्ष नियमों और विनियमों का रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र में या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र मे अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि, यथास्थिति, वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

40. अधिनियम का कुछ अधिनियमों के प्रवर्तन को प्रभावी करना-इस अधिनियम की कोई बात कृषि उपज (श्रेणीकरण और चिह्नांकन) अधिनियम, 1937 (1937 का 1) या ओषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (1940 का 23) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी जो किसी वस्तु या प्रसंस्करण के किसी मानकीकरण या क्वालिटी नियंत्रण से संबंधित है ।

41. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, और जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों :

परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से पांच वर्ष के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा ।

42. निरसन और व्यावृत्ति-(1) भारतीय मानक संस्था (प्रमाणन चिह्न) अधिनियम, 1952 (1952 का 36) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इसके द्वारा निरसित अधिनियम के अधीन की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित कोई बात या कार्रवाई (जिसके अन्तर्गत बनाया गया कोई नियम, विनियम, जारी की गई अधिसूचना, स्कीम, अपनाया गया विनिर्देश, भारतीय मानक, मानक चिह्न, निरीक्षण आदेश या सूचना, की गई कोई नियुक्ति या घोषणा या दी गई कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा अधिप्रमाणन या छूट या निष्पादित कोई दस्तावेज या लिखत या दिया गया कोई निदेश या की गई कोई कार्यवाही या अधिरोपित कोई शास्ति या जुर्माना है) जहां तक वह अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के तत्समान उपबंधों के अधीन की गई समझी  जाएगी

                (3) उपधारा (2) में किसी विशिष्ट विषय के उल्लेख के बारे में यह नहीं माना जाएगा कि वह निरसन के प्रभाव की बाबत साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के साधारण रूप में लागू किए जाने पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा या उसे प्रभावित करेगा ।

 

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