आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005
(2005 का अधिनियम संख्यांक 53)
[23 दिसंबर, 2005]
आपदाओं के प्रभावी प्रबन्धन और उससे संबंधित या
उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के छप्पनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे; और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी राज्य के संबंध में इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में उस उपबंध के प्रारंभ के प्रति निर्देश है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो: -
(क) प्रभावित क्षेत्र" से देश का ऐसा क्षेत्र या भाग अभिप्रेत है जो किसी आपदा से प्रभावित है;
(ख) क्षमता निर्माण" के अन्तर्गत निम्नलिखित है-
(i) विद्यमान संसाधनों और अर्जित या सृजित किए जाने वाले संसाधनों की पहचान;
(ii) उपखंड (i) के अधीन पहचान किए गए संसाधनों को अर्जित करना या सृजित करना;
(iii) आपदाओं के प्रभावी प्रबन्धन के लिए कार्मिक का गठन और प्रशिक्षण तथा ऐसे प्रशिक्षण का समन्वयन;
(ग) केन्द्रीय सरकार" से भारत सरकार का ऐसा मंत्रालय या विभाग अभिप्रेत है जिसका आपदा प्रबन्धन पर प्रशासनिक नियंत्रण है;
(घ) आपदा" से किसी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानवकृत कारणों से या दुर्घटना या उपेक्षा से उद्भूत ऐसी कोई महाविपत्ति, अनिष्ट, विपत्ति या घोर घटना अभिप्रेत है जिसका परिणाम जीवन की सारवान् हानि या मानवीय पीड़ाएं, या संपत्ति का नुकसान और विनाश या पर्यावरण का नुकसान या अवक्रमण है और ऐसी प्रकृति या परिमाण का है, जो प्रभावित क्षेत्र के समुदाय की सामना करने की क्षमता से परे है;
(ङ) आपदा प्रबन्धन" से योजना, संगठन, समन्वयन और कार्यान्वयन की निरन्तर और एकीकृत प्रक्रिया अभिप्रेत है जो निम्नलिखित के लिए आवश्यक या समीचीन हैं-
(i) किसी आपदा के खतरे या उसकी आशंका का निवारण;
(ii) किसी आपदा या उसकी गंभीरता या उसके परिणामों के जोखिम का शमन या कमी;
(iii) क्षमता निर्माण;
(iv) किसी आपदा से निपटने के लिए तैयारियां;
(v) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा से तुरन्त बचाव;
(vi) किसी आपदा के प्रभाव की गंभीरता या परिमाण का निर्धारण;
(vii) निष्क्रमण, बचाव और राहत;
(viii) पुनर्वास और पुनर्निर्माण;
(च) जिला प्राधिकरण" से धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन गठित जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(छ) जिला योजना" से धारा 31 के अधीन जिले के लिए तैयार की गई आपदा प्रबन्धन योजना अभिप्रेत है;
(ज) स्थानीय प्राधिकारी" के अन्तर्गत पंचायती राज संस्थाएं, नगरपालिकाएं, जिला बोर्ड, छावनी बोर्ड, नगर योजना प्राधिकारी या जिला परिषद् या किसी भी नाम से ज्ञात कोई अन्य निकाय या प्राधिकारी है जिनमें तत्समय विधि द्वारा किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के भीतर आवश्यक सेवाएं प्रदान करने की नागरिक सेवाओं के नियंत्रण और प्रबन्धन सहित शक्तियां विनिहित की गई हैं;
(झ) शमन" से किसी आपदा या आपदा की आशंका की स्थिति के जोखिम, समाघात या प्रभाव को कम करने के लिए आशयित उपाय अभिप्रेत हैं;
(ञ) राष्ट्रीय प्राधिकरण" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण अभिप्रेत है;
(ट) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति" से धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन गठित राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति अभिप्रेत है;
(ठ) राष्ट्रीय योजना" से धारा 11 के अधीन संपूर्ण देश के लिए तैयार की गई आपदा प्रबन्धन योजना अभिप्रेत है;
(ड) तैयारी" से किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तैयार रहने की स्थिति अभिप्रेत है;
(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ण) पुनर्निर्माण" से आपदा के पश्चात् किसी सम्पत्ति का सन्निर्माण या प्रत्यावर्तन अभिप्रेत है;
(त) संसाधन" के अन्तर्गत जनशक्ति, सेवाएं, सामग्री और रसद भी हैं;
(थ) राज्य प्राधिकरण" से धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण अभिप्रेत है और उसके अंतर्गत उस धारा के अधीन गठित संघ राज्यक्षेत्र का आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी है;
(द) राज्य कार्यकारिणी समिति" से धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति अभिप्रेत है;
(ध) राज्य सरकार" से राज्य सरकार का वह विभाग अभिप्रेत है जिसका आपदा प्रबंधन पर प्रशासनिक नियंत्रण है और उसके अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त किया गया किसी संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक भी है;
(न) राज्य योजना" से धारा 23 के अधीन संपूर्ण राज्य के लिए तैयार की गई आपदा प्रबन्धन योजना अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण
3. राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की स्थापना-(1) ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नाम से ज्ञात एक प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी ।
(2) राष्ट्रीय प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और नौ से अनधिक उतने सदस्य होंगे जितने केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं और जब तक कि नियमों में अन्यथा उपबंधित न किया जाए, राष्ट्रीय प्राधिकरण में निम्नलिखित होंगे: -
(क) भारत का प्रधानमंत्री, जो राष्ट्रीय प्राधिकरण का पदेन अध्यक्ष होगा;
(ख) नौ से अनधिक ऐसे अन्य सदस्य जो राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ।
(3) राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों में से एक सदस्य को राष्ट्रीय प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप से पदाभिहित कर सकेगा ।
(4) राष्ट्रीय प्राधिकरण के सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
4. राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिवेशन-(1) राष्ट्रीय प्राधिकरण का अधिवेशन जब भी आवश्यक हो, ऐसे समय और स्थान पर होगा, जिसे राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष ठीक समझे ।
(2) राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिवेशनों की अध्यक्षता करेगा ।
(3) यदि राष्ट्रीय प्राधिकरण का अध्यक्ष किसी कारण से राष्ट्रीय प्राधिकरण के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो राष्ट्रीय प्राधिकरण का उपाध्यक्ष उस अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
5. राष्ट्रीय प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति-केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय प्राधिकरण को उतने अधिकारी, परामर्शदाता और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह राष्ट्रीय प्राधिकरण के कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।
6. राष्ट्रीय प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य-(1) राष्ट्रीय प्राधिकरण इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, आपदा का समय पर और प्रभावी मोचन सुनिश्चित करने के लिए आपदा प्रबन्धन के लिए नीतियां, योजनाएं और मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रीय प्राधिकरण, -
(क) आपदा प्रबन्धन के संबंध में नीतियां अधिकथित कर सकेगा;
(ख) राष्ट्रीय योजना का अनुमोदन कर सकेगा;
(ग) भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों द्वारा राष्ट्रीय योजना के अनुसार तैयार की गई योजनाओं का अनुमोदन कर सकेगा;
(घ) राज्य योजना तैयार करते समय राज्य प्राधिकरणों द्वारा अनुसरित किए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित कर सकेगा;
(ङ) भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा के निवारण या उसके प्रभावों के शमन के उपायों के एकीकरण के प्रयोजनों के लिए अपनाए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित कर सकेगा;
(च) आपदा प्रबन्धन के लिए नीति और योजना के प्रवर्तन और कार्यान्वयन को समन्वित कर सकेगा;
(छ) शमन के प्रयोजन के लिए निधियों की व्यवस्था करने की सिफारिश कर सकेगा;
(ज) बड़ी आपदाओं से प्रभावित अन्य देशों को ऐसी सहायता उपलब्ध करा सकेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित की जाए;
(झ) आपदा के निवारण या शमन या आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा से निपटने के लिए तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए ऐसे अन्य उपाय कर सकेगा, जिन्हें वह आवश्यक समझे;
(ञ) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कार्यकरण के लिए विस्तृत नीतियां और मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित कर सकेगा ।
(3) राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष को, आपात की दशा में, राष्ट्रीय प्राधिकरण की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति होगी किन्तु ऐसी शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा कार्योत्तर अनुसमर्थन के अध्यधीन होगा ।
7. राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा सलाहकार समिति का गठन-(1) राष्ट्रीय प्राधिकरण आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर सिफारिशें करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन कर सकेगा, जिसमें आपदा प्रबन्धन के क्षेत्र में विशेषज्ञ और राष्ट्रीय, राज्य या जिला स्तर पर आपदा प्रबन्धन में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ होंगे ।
(2) सलाहकार समिति के सदस्यों को ऐसे भत्तों का संदाय किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्राधिकरण के परामर्श से विहित किए जाएं ।
8. राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किए जाने के ठीक पश्चात्, राष्ट्रीय प्राधिकरण को इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति का गठन करेगी ।
(2) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्: -
(क) भारत सरकार का ऐसा सचिव जो भारत सरकार के ऐसे मंत्रालय या विभाग का भारसाधक है, जिसका आपदा प्रबन्धन पर प्रशासनिक नियंत्रण है और जो पदेन अध्यक्ष होगा,
(ख) भारत सरकार के ऐसे सचिव जो भारत सरकार के ऐसे मंत्रालयों या विभागों के भारसाधक हैं जिनका कृषि, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, पीने का जल प्रदाय, पर्यावरण और वन, वित्त (व्यय), स्वास्थ्य, विद्युत, ग्रामीण विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, दूरसंचार, शहरी विकास, जल संसाधन पर प्रशासनिक नियंत्रण है और चीफ्स आफ स्टाफ कमेटी के समन्वित सुरक्षा कर्मचारिवृन्द का प्रमुख, पदेन सदस्य ।
(3) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के किसी अधिवेशन में भाग लेने के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अन्य अधिकारी को आमंत्रित कर सकेगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्राधिकरण के परामर्श से विहित किए जाएं ।
(4) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा अपनी शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के निर्वहन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।
9. उपसमितियों का गठन-(1) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, जब भी वह अपने कृत्यों के प्रभावी निर्वहन के लिए आवश्यक समझे, एक या अधिक उपसमितियों का गठन कर सकेगी ।
(2) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, अपने सदस्यों में से किसी को उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपसमिति का अध्यक्ष नियुक्त करेगी ।
(3) किसी उपसमिति के साथ विशेषज्ञ के रूप में सहयोजित किसी व्यक्ति को ऐसे भत्ते, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं, संदत्त किए जा सकेंगे ।
10. राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की शक्तियां और कृत्य-(1) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राष्ट्रीय प्राधिकरण को उसके कृत्यों के निर्वहन में सहायता करेगी और राष्ट्रीय प्राधिकरण की नीतियों तथा कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगी तथा देश में आपदा प्रबंधन के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए अनुदेशों का पालन सुनिश्चित करेगी ।
(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति-
(क) आपदा प्रबन्धन के लिए समन्वय और मानिटरी निकाय के रूप में कार्य कर सकेगी;
(ख) राष्ट्रीय योजना तैयार कर सकेगी जिनका राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन किया जाएगा;
(ग) राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन का समन्वय और उसे मानिटर कर सकेगी;
(घ) भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों और राज्य प्राधिकरणों द्वारा आपदा प्रबन्धन योजना तैयार करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित कर सकेगी;
(ङ) राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार अपनी आपदा प्रबन्धन योजना तैयार करने के लिए राज्य सरकारों और राज्य प्राधिकरणों को आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकेगी;
(च) राष्ट्रीय योजना और भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों द्वारा तैयार की गई योजनाओं के कार्यान्वयन को मानिटर कर सकेगी;
(छ) मंत्रालयों या विभागों द्वारा उनकी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा निवारण और उसके शमन के लिए उपायों के एकीकरण के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के कार्यान्वयन को मानिटर कर सकेगी;
(ज) सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों और अभिकरणों द्वारा किए जाने वाले शमन और तैयारी, उपायों के संबंध में मानिटर कर सकेगी, समन्वय कर सकेगी और निदेश दे सकेगी;
(झ) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन के प्रयोजन के लिए सभी सरकारी स्तरों पर तैयारी का मूल्यांकन कर सकेगी, और जहां आवश्यक हो, ऐसी तैयारी में वृद्धि करने के लिए निदेश दे सकेगी;
(ञ) विभिन्न स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वैच्छिक बचाव कर्मकारों के लिए आपदा प्रबन्धन के संबंध में विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना बना सकेगी और उनको समन्वित कर सकेगी;
(ट) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की दशा में उसके मोचन के लिए समन्वय कर सकेगी;
(ठ) भारत सरकार के सम्बद्ध मंत्रालयों या विभागों, राज्य सरकारों और राज्य प्राधिकरणों को उनके द्वारा किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन के लिए किए जाने वाले उपायों के संबंध में मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित कर सकेगी या निदेश दे सकेगी;
(ड) सरकार के किसी विभाग या अभिकरण से राष्ट्रीय प्राधिकरण या राज्य प्राधिकरणों को ऐसे व्यक्ति या तात्त्विक संसाधन जो आपातकालीन मोचन, बचाव और राहत के प्रयोजनों के लिए उसके पास उपलब्ध हैं, उपलब्ध कराने की अपेक्षा कर सकेगी;
(ढ) भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों, राज्य प्राधिकरणों, कानूनी निकायों, अन्य सरकारी या गैर सरकारी संगठनों और आपदा प्रबन्धन में लगे अन्य व्यक्तियों को सलाह दे सकेगी, सहायता प्रदान कर सकेगी और उनके क्रियाकलापों का समन्वय कर सकेगी;
(ण) राज्य प्राधिकरणों और जिला प्राधिकरणों को इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों को करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकेगी या उन्हें सलाह दे सकेगी;
(त) आपदा प्रबन्धन के संबंध में साधारण शिक्षा और जागरुकता का संवर्धन कर सकेगी; और
(थ) ऐसे अन्य कृत्य कर सकेगी जो राष्ट्रीय प्राधिकरण उससे करने की अपेक्षा करे ।
11. राष्ट्रीय योजना-(1) संपूर्ण देश के लिए आपदा प्रबन्धन के लिए राष्ट्रीय योजना नामक एक योजना तैयार की जाएगी ।
(2) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा राष्ट्रीय नीति को ध्यान में रखते हुए और राज्य सरकारों तथा आपदा प्रबन्धन के क्षेत्र में विशेषज्ञ निकायों या संगठनों के परामर्श से राष्ट्रीय योजना तैयार की जाएगी जिसका राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन किया जाएगा ।
(3) राष्ट्रीय योजना में निम्नलिखित होंगे-
(क) आपदाओं के निवारण या उनके प्रभाव के शमन के लिए किए जाने वाले उपाय;
(ख) विकास योजनाओं में शमन संबंधी उपायों के एकीकरण के लिए किए जाने वाले उपाय;
(ग) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा का प्रभावी रूप से मोचन करने के लिए तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए किए जाने वाले उपाय;
(घ) खण्ड (क), खण्ड (ख) और खण्ड (ग) में विनिर्दिष्ट उपायों की बाबत भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों या विभागों की भूमिका और उत्तरदायित्व ।
(4) राष्ट्रीय योजना का वार्षिक पुनर्विलोकन किया जाएगा और उसे अद्यतन किया जाएगा ।
(5) केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय योजना के अधीन किए जाने वाले उपायों के वित्तपोषण के लिए समुचित उपबंध किए जाएंगे ।
(6) उपधारा (2) और उपधारा (4) में निर्दिष्ट राष्ट्रीय योजना की प्रतियां भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों को उपलब्ध कराई जाएंगी और ऐसे मंत्रालय या विभाग राष्ट्रीय योजना के अनुसार अपनी स्वयं की योजनाएं तैयार करेंगे ।
12. राहत के न्यूनतम मानकों के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त-राष्ट्रीय प्राधिकरण, आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाने वाली राहत के न्यूनतम मानकों के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्तों की सिफारिश करेगा जिनके अन्तर्गत निम्नलिखित होंगे, -
(i) राहत कैंपों में आश्रयस्थल, खाद्य, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा और स्वच्छता के संबंध में उपलब्ध कराई जाने वाली न्यूनतम अपेक्षाएं;
(ii) विधवाओं और अनाथों के लिए किए जाने वाले विशेष उपबन्ध;
(iii) जीवन की हानि मद्दे अनुग्रह सहायता और मकानों को नुकसान मद्दे सहायता तथा जीविका के साधनों की बहाली के लिए सहायता;
(iv) ऐसी अन्य सहायता जो आवश्यक हो ।
13. ऋण प्रतिदाय आदि में राहत-राष्ट्रीय प्राधिकरण, प्रचंड मात्रा की आपदाओं की दशा में आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को ऋणों के प्रतिदाय में राहत या ऐसे रियायती निबंधनों पर, जो उचित हों, नए ऋण देने की सिफारिश कर सकेगा ।
अध्याय 3
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
14. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना-(1) प्रत्येक राज्य सरकार, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राज्य के लिए ऐसे नाम से जो राज्य सरकार की अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करेगी ।
(2) राज्य प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और नौ से अनधिक उतने सदस्य होंगे जितने राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं और जब तक कि नियमों में अन्यथा उपबंध न किया जाए, राज्य प्राधिकरण में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्: -
(क) राज्य का मुख्यमंत्री जो पदेन अध्यक्ष होगा;
(ख) आठ से अनधिक ऐसे अन्य सदस्य जो राज्य प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे;
(ग) राज्य कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष, पदेन ।
(3) राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों में से एक सदस्य को राज्य प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के रूप में पदाभिहित कर सकेगा ।
(4) राज्य कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष राज्य प्राधिकरण का पदेन मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा:
परंतु ऐसे संघ राज्यक्षेत्र की दशा में, दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र को छोड़कर, जिसकी विधान सभा है, मुख्यमंत्री इस धारा के अधीन स्थापित प्राधिकरण का अध्यक्ष होगा और अन्य संघ राज्यक्षेत्रों की दशा में, उपराज्यपाल या प्रशासक उस प्राधिकरण का अध्यक्ष होगा:
परंतु यह और कि दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र का उपराज्यपाल राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष होगा और उसका मुख्यमंत्री राज्य प्राधिकरण का उपाध्यक्ष होगा ।
(5) राज्य प्राधिकरण के सदस्यों की पदावधि और सेवा शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।
15. राज्य प्राधिकरण के अधिवेशन-(1) राज्य प्राधिकरण का अधिवेशन जब भी आवश्यक हो, ऐसे समय और स्थान पर होगा जिसे राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष ठीक समझे ।
(2) राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष राज्य प्राधिकरण के अधिवेशनों की अध्यक्षता करेगा ।
(3) यदि राज्य प्राधिकरण का अध्यक्ष किसी कारण से राज्य प्राधिकरण के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो राज्य प्राधिकरण का उपाध्यक्ष उस अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
16. राज्य प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति-राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण को उतने अधिकारी, परामर्शदाता और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह राज्य प्राधिकरण के कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।
17. राज्य प्राधिकरण द्वारा सलाहकार समिति का गठन-(1) राज्य प्राधिकरण, जब भी वह आवश्यक समझे, आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर सिफारिशें करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन कर सकेगा जिसमें आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ होंगे ।
(2) सलाहकार समिति के सदस्यों को ऐसे भत्तों का संदाय किया जाएगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
18. राज्य प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य-(1) राज्य प्राधिकरण इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए नीतियां और योजनाएं अधिकथित करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य प्राधिकरण, -
(क) राज्य आपदा प्रबंधन नीति अधिकथित कर सकेगा;
(ख) राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य योजना का अनुमोदन कर सकेगा;
(ग) राज्य सरकार के विभागों द्वारा तैयार की गई आपदा प्रबंधन योजनाओं का अनुमोदन कर सकेगा;
(घ) राज्य सरकार के विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदाओं के निवारण और शमन के उपायों के एकीकरण के प्रयोजनों के लिए अपनाए जाने वाले मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित कर सकेगा और उसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता करा सकेगा;
(ङ) राज्य योजना के कार्यान्वयन को समन्वित कर सकेगा;
(च) शमन और तैयारी उपायों के लिए निधियों की व्यवस्था करने की सिफारिश कर सकेगा;
(छ) राज्य के विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं का पुनर्विलोकन कर सकेगा और यह सुनिश्चित कर सकेगा कि निवारण और शमन के उपाय उसमें एकीकृत किए गए हैं;
(ज) राज्य सरकार के विभागों द्वारा शमन, क्षमता निर्माण और तैयारी के लिए किए जा रहे उपायों का पुनर्विलोकन कर सकेगा और ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांत जारी कर सकेगा जो आवश्यक हों ।
(3) राज्य प्राधिकरण के अध्यक्ष को, आपात की दशा में, राज्य प्राधिकरण की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति होगी किन्तु ऐसी शक्तियों का प्रयोग राज्य प्राधिकरण के कार्योत्तर अनुसमर्थन के अधीन रहते हुए होगा ।
19. राज्य प्राधिकरण द्वारा राहत के न्यूनतम मानक के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत-राज्य प्राधिकरण राज्य में आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को राहत के मानकों का उपबंध करने के लिए विस्तृत मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित करेगा:
परंतु ऐसे मानक किसी भी दशा में राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा इस संबंध में अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों में न्यूनतम मानकों से कम नहीं होंगे ।
20. राज्य कार्यकारिणी समिति का गठन-(1) राज्य सरकार, धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किए जाने के ठीक पश्चात् राज्य प्राधिकरण को इस अधिनियम के अधीन राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य प्राधिकरण के कृत्यों के निर्वहन में सहायता करने और कार्य का समन्वय करने के लिए तथा राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक राज्य कार्यकारिणी समिति का गठन करेगी ।
(2) राज्य कार्यकारिणी समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-
(क) राज्य सरकार का मुख्य सचिव, जो पदेन अध्यक्ष होगा;
(ख) राज्य सरकार के ऐसे विभागों के चार सचिव जिन्हें राज्य सरकार ठीक समझे, पदेन ।
(3) राज्य कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करेगा जो उसे राज्य प्राधिकरण द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(4) राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए ।
21. राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा उपसमितियों का गठन-(1) राज्य कार्यकारिणी समिति जब भी वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे, एक या अधिक उपसमितियों का गठन कर सकेगी ।
(2) राज्य कार्यकारिणी समिति अपने सदस्यों में से किसी को उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपसमिति का अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगी ।
(3) किसी उपसमिति के साथ विशेषज्ञ के रूप में सहयोजित किसी व्यक्ति को ऐसे भत्ते जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, संदत्त किए जा सकेंगे ।
22. राज्य कार्यकारिणी समिति के कृत्य-(1) राज्य कार्यकारिणी समिति राष्ट्रीय योजना और राज्य योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगी और राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए समन्वय करने और मानिटरी करने वाले निकाय के रूप में कार्य करेगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राज्य कार्यकारिणी समिति-
(क) राष्ट्रीय नीति, राष्ट्रीय योजना और राज्य योजना के कार्यान्वयन का समन्वय और मानिटरी कर सकेगी;
(ख) आपदाओं के विभिन्न रूपों से राज्य के विभिन्न भागों की भेद्यता की परीक्षा कर सकेगी और उनके निवारण या शमन के लिए किए जाने वाले उपायों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी;
(ग) राज्य सरकार के विभागों और जिला प्राधिकरणों द्वारा आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार किए जाने के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त अधिकथित कर सकेगी;
(घ) राज्य सरकार के विभागों और जिला प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई आपदा प्रबंधन योजनाओं के कार्यान्वयन की मानिटरी कर सकेगी;
(ङ) विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदाओं के निवारण और शमन के उपायों के एकीकरण के लिए राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के कार्यान्वयन की मानीटरी कर सकेगी;
(च) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन के लिए सभी सरकारी और गैर सरकारी स्तरों पर तैयारी का मूल्यांकन कर सकेगी और जहां आवश्यक हो, ऐसी तैयारियों में वृद्धि करने के लिए निदेश दे सकेगी;
(छ) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की दशा में मोचन का समन्वय कर सकेगी;
(ज) किसी आपदा की आंशका की स्थिति या आपदा के मोचन में किए जाने वाले उपायों के संबंध में राज्य सरकार के किसी विभाग या राज्य में किसी अन्य प्राधिकरण या निकाय को निदेश दे सकेगी;
(झ) आपदाओं के ऐसे रूपों के संबंध में, जिनसे राज्य के विभिन्न भाग भेद्य हैं, सामान्य शिक्षा, जागरुकता और समुदाय प्रशिक्षण का संवर्धन कर सकेगी और ऐसे उपाय, जो आपदा के निवारण और ऐसी आपदा के शमन और मोचन के लिए ऐसे समुदाय द्वारा किए जा सकेंगे;
(ञ) राज्य सरकार के विभागों, जिला प्राधिकरणों, कानूनी निकायों और आपदा प्रबंधन में लगे अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को सलाह दे सकेगी, उनके क्रियाकलापों में सहायता कर सकेगी और उनका समन्वय कर सकेगी;
(ट) उनके कृत्यों को प्रभावी रूप से कार्यान्वित करने के लिए जिला प्राधिकरणों और स्थानीय प्राधिकरणों को उनके कृत्यों का प्रभावी रूप से निर्वहन करने में आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान कर सकेगी या सलाह दे सकेगी;
(ठ) आपदा प्रबंधन से संबंधित सभी वित्तीय विषयों के संबंध में राज्य सरकार को सलाह दे सकेगी;
(ड) राज्य में किसी स्थानीय क्षेत्र में सन्निर्माण की परीक्षा कर सकेगी और यदि उसकी यह राय है कि आपदा के निवारण के लिए ऐसे सन्निर्माण के लिए अधिकथित मानकों का अनुसरण नहीं किया जा रहा है या नहीं किया गया है तो, यथास्थिति, जिला प्राधिकरण या स्थानीय प्राधिकरण को ऐसी कार्रवाई करने के लिए निदेश दे सकेगी जो ऐसे मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो;
(ढ) राष्ट्रीय प्राधिकरण को आपदा प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा सकेगी;
(ण) राज्य स्तर की मोचन योजनाओं और मार्गदर्शक सिद्धांतों को अधिकथित, पुनर्विलोकित और अद्यतन कर सकेगी और यह सुनिश्चित कर सकेगी कि जिला स्तर की योजनाएं तैयार, पुनर्विलोकित और अद्यतन की गई हैं;
(त) यह सुनिश्चित कर सकेगी कि संसूचना तंत्र ठीक हैं और आपदा प्रबंधन कवायद कालिकतः की जाती है;
(थ) ऐसे अन्य कृत्य कर सकेगी जो उसे राज्य प्राधिकरण द्वारा समनुदेशित किए जाएं या जैसा वह आवश्यक समझे ।
23. राज्य योजना-(1) प्रत्येक राज्य के लिए आपदा प्रबंधन के लिए एक योजना होगी जिसे राज्य आपदा प्रबंधन योजना कहा जाएगा ।
(2) राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा, राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और स्थानीय प्राधिकरणों तथा जिला प्राधिकरणों और जनता के प्रतिनिधियों के साथ ऐसा परामर्श करने के पश्चात् जिसे राज्य कार्यकारिणी समिति ठीक समझे, राज्य योजना तैयार की जाएगी ।
(3) राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा उपधारा (2) के अधीन तैयार की गई राज्य योजना का राज्य प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन किया जाएगा ।
(4) राज्य योजना के अंतर्गत निम्नलिखित होगा, -
(क) आपदा के विभिन्न रूपों से राज्य के विभिन्न भागों की भेद्यता;
(ख) आपदाओं के निवारण और शमन के लिए अपनाए जाने वाले उपाय;
(ग) ऐसी रीति जिसमें शमन के उपाय, विकास योजनाओं और परियोजनाओं के साथ एकीकृत किए जाएंगे;
(घ) क्षमता निर्माण और तैयारी के लिए किए जाने वाले उपाय;
(ङ) ऊपर खंड (ख), खंड (ग) और खंड (घ) में विनिर्दिष्ट उपायों के संबंध में राज्य सरकार के प्रत्येक विभाग की भूमिकाएं और उत्तरदायित्व;
(च) किसी आशंकित आपदा स्थिति या आपदा के मोचन में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की भूमिकाएं और दायित्व ।
(5) राज्य योजना प्रतिवर्ष पुनर्विलोकित और अद्यतन की जाएगी ।
(6) राज्य योजना के अधीन किए जाने वाले उपायों के वित्त पोषण के लिए राज्य सरकार द्वारा समुचित उपबंध किए जाएंगे ।
(7) उपधारा (2) और उपधारा (5) में निर्दिष्ट राज्य योजना की प्रतियां राज्य सरकार के विभागों को उपलब्ध कराई जाएंगी और ऐसे विभाग राज्य योजना के अनुसार अपनी योजनाएं तैयार करेंगे ।
24. आपदा की आशंका की दशा में राज्य कार्यकारिणी समिति की शक्तियां और कृत्य-आपदा द्वारा प्रभावित समुदाय की सहायता और संरक्षा करने के प्रयोजनों के लिए या ऐसे समुदायों को राहत प्रदान करने के लिए या किसी आपदा की आशंका की स्थिति का निवारण करने या उसके विनाश का प्रत्युपाय करने या उसके प्रभावों से निपटने के प्रयोजन के लिए राज्य कार्यकारिणी समिति, -
(क) संवेदनशील या प्रभावित क्षेत्रों को या वहां से या उसके भीतर वाहन यातायात को नियंत्रित और निर्बन्धित कर सकेगी;
(ख) किसी संवेदनशील या प्रभावित क्षेत्र में किसी व्यक्ति के प्रवेश, उसके भीतर, उसके आने-जाने और वहां से प्रस्थान को नियंत्रित और निर्बन्धित कर सकेगी;
(ग) मलबे को हटा सकेगी, खोज कर सकेगी और बचाव कार्य कर सकेगी;
(घ) राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मानकों के अनुसार आश्रय, खाद्य, पेयजल, आवश्यक रसद, स्वास्थ्य देखभाल और सेवाएं उपलब्ध करा सकेगी;
(ङ) राज्य सरकार के संबंधित विभाग और राज्य की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी जिला प्राधिकरण या अन्य प्राधिकरण को जीवन या संपत्ति को बचाने के लिए बचाव, निष्क्रमण या तत्काल राहत पहुंचाने के ऐसे उपाय करने या कार्रवाई करने के निदेश दे सकेगी; जो उसकी राय में आवश्यक हों;
(च) राज्य सरकार के किसी विभाग या अन्य किसी निकाय या प्राधिकरण से या किन्हीं सुसंगत संसाधनों के भारसाधक व्यक्ति से आपात् मोचन, बचाव और राहत के प्रयोजनों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की अपेक्षा कर सकेगी;
(छ) आपदाओं के क्षेत्र में विशेषज्ञों और परामर्शियों से बचाव और राहत के लिए सलाह और सहायता देने की अपेक्षा कर सकेगी;
(ज) जब भी अपेक्षित हो, किसी प्राधिकरण या व्यक्ति से सुख-सुविधाओं के उपयोग को अनन्य रूप से या अधिमानतः उपाप्त कर सकेगी;
(झ) अस्थायी पुलों या अन्य आवश्यक संरचनाओं का सन्निर्माण कर सकेगी और ऐसी असुरक्षित संरचनाओं को ध्वस्त कर सकेगी जो जनता के लिए परिसंकटमय हों;
(ञ) यह सुनिश्चित कर सकेगी कि गैर सरकारी संगठन साम्यापूर्ण रूप में या अविभेदकारी रीति में अपने क्रियाकलाप करें;
(ट) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा से निपटने के लिए जनता को जानकारी दे सकेगी;
(ठ) ऐसे उपाय कर सकेगी जिनके लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार इस संबंध में निदेश दे या ऐसे अन्य उपाय कर सकेगी जो किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा में अपेक्षित या वांछित हों ।
अध्याय 4
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
25. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन-(1) प्रत्येक राज्य सरकार, धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य में प्रत्येक जिले के लिए ऐसे नाम से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, एक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करेगी ।
(2) जिला प्राधिकरण में अध्यक्ष और सात से अनधिक उतने अन्य सदस्य होंगे जितने राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं और जब तक कि नियमों में अन्यथा उपबंध न किया जाए, इसमें निम्नलिखित होंगे, अर्थात्ः-
(क) जिले का, यथास्थिति, कलक्टर या जिला मजिस्ट्रेट या उपायुक्त जो पदेन अध्यक्ष होगा;
(ख) स्थानीय प्राधिकारी का निर्वाचित प्रतिनिधि जो पदेन सह-अध्यक्ष होगा:
परंतु संविधान की छठी अनुसूची में जैसा निर्दिष्ट है, जनजाति क्षेत्रों में, स्वशासी जिले की जिला परिषद् का मुख्य कार्यपालक सदस्य, पदेन सह-अध्यक्ष होगा;
(ग) जिला प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक अधिकारी, पदेन;
(घ) पुलिस अधीक्षक, पदेन;
(ङ) जिले का मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पदेन;
(च) दो से अनधिक जिला स्तर के अन्य अधिकारी जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।
(3) ऐसे किसी जिले में जहां जिला परिषद् विद्यमान है, उसका अध्यक्ष जिला प्राधिकरण का सह-अध्यक्ष होगा ।
(4) राज्य सरकार जिले के किसी ऐसे अधिकारी को, जो, यथास्थिति, अपर कलक्टर या अपर जिला मजिस्ट्रेट या अपर उपायुक्त की पंक्ति से नीचे का न हो, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करने के लिए जो, राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करने के लिए जो जिला प्राधिकरण द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं, जिला प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करेगी ।
26. जिला प्राधिकरण के अध्यक्ष की शक्तियां-(1) जिला प्राधिकरण का अध्यक्ष, जिला प्राधिकरण के अधिवेशनों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त, जिला प्राधिकरण की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करेगा जो जिला प्राधिकरण उसे प्रत्यायोजित करे ।
(2) जिला प्राधिकरण के अध्यक्ष को, आपात की दशा में, जिला प्राधिकरण की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति होगी किन्तु ऐसी शक्तियों का प्रयोग जिला प्राधिकरण के कार्योत्तर अनुसमर्थन के अधीन रहते हुए होगा ।
(3) जिला प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण का अध्यक्ष, साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा, यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपनी शक्तियों और कृत्यों में से ऐसी शक्तियां और कृत्य, जिला प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसी शर्तों और निबंधनों, यदि कोई हों, जिन्हें वह ठीक समझे, के अधीन रहते हुए, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
27. अधिवेशन-जिला प्राधिकरण का अधिवेशन जब कभी आवश्यक हो ऐसे समय और स्थान पर होगा जिसे अध्यक्ष ठीक समझे ।
28. सलाहकार समितियों और अन्य समितियों का गठन-(1) जिला प्राधिकरण, जब भी वह आवश्यक समझे, अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए एक या अधिक सलाहकार समितियों और अन्य समितियों का गठन कर सकेगा ।
(2) जिला प्राधिकरण अपने सदस्यों में से उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति का अध्यक्ष नियुक्त करेगा ।
(3) उपधारा (1) अधीन गठित किसी समिति या उपसमिति में विशेषज्ञ के रूप में सहयुक्त किसी व्यक्ति को ऐसे भत्ते संदत्त किए जा सकेंगे जो राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
29. जिला प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति-राज्य सरकार जिला प्राधिकरण को उतने अधिकारी, परामर्शदाता और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह जिला प्राधिकरण के कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।
30. जिला प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य-(1) जिला प्राधिकरण आपदा प्रबंधन के लिए जिला योजना, समन्वयन और कार्यान्वयन निकाय के रूप में कार्य करेगा और राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार जिले में आपदा प्रबंधन के प्रयोजन के लिए सभी उपाय करेगा ।
(2) जिला प्राधिकरण, उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिनाः-
(i) जिले के लिए जिला मोचन योजना सहित आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर सकेगा;
(ii) राष्ट्रीय नीति, राज्य नीति, राष्ट्रीय योजना, राज्य योजना और जिला योजना के कार्यान्वयन का समन्वय और मानीटरी कर सकेगा;
(iii) यह सुनिश्चित कर सकेगा कि जिले में आपदाओं के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है और आपदाओं के निवारण और उसके प्रभावों के शमन के लिए उपाय जिला स्तर पर सरकार के विभागों द्वारा तथा स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा किए गए हैं;
(iv) यह सुनिश्चित कर सकेगा कि आपदाओं के निवारण, उनके प्रभावों के शमन, तैयारी के और राष्ट्रीय प्राधिकरण तथा राज्य प्राधिकरण द्वारा यथा अधिकथित मोचन के उपायों का जिला स्तर पर सरकार के सभी विभागों और जिले में स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा अनुसरण किया जाता है;
(v) विभिन्न जिला स्तर के प्राधिकारियों और स्थानीय प्राधिकारियों को आपदाओं के निवारण या शमन के लिए ऐसे अन्य उपाय करने के लिए निदेश दे सकेगा, जो आवश्यक हों;
(vi) जिला स्तर पर सरकारी विभागों और जिले में स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा आपदा निवारण प्रबंधन योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित कर सकेगा;
(vii) जिला स्तर पर सरकारी विभागों द्वारा तैयार की गई आपदा प्रबंधन योजनाओं के कार्यान्वयन को मानीटर कर सकेगा;
(viii) जिला स्तर पर सरकारी विभागों द्वारा अपनी योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा निवारण और शमन के लिए उपायों के एकीकरण के प्रयोजन के लिए अनुसरित किए जाने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित कर सकेगा और उनके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकेगा;
(ix) खंड (viii) में निर्दिष्ट उपायों के कार्यान्वयन को मानीटर कर सकेगा;
(x) जिले में किसी आपदा या आपदा की आशंका की स्थिति के मोचन के लिए राज्य की क्षमताओं का पुनर्विलोकन कर सकेगा और उनके उन्नयन के लिए जिला स्तर पर संबंधित विभागों या प्राधिकारियों को ऐसे निदेश दे सकेगा, जो आवश्यक हों;
(xi) तैयारी उपायों का पुनर्विलोकन कर सकेगा और जिला स्तर पर संबद्ध विभागों या संबद्ध प्राधिकारियों को जहां किसी आपदा या आपदा की आशंका की स्थिति का प्रभावी रूप से मोचन करने के लिए तैयारी उपायों को अपेक्षित स्तरों तक लाना आवश्यक हों, निदेश दे सकेगा ।
(xii) जिले में विभिन्न स्तरों के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वैच्छिक बचाव कार्यकर्ताओं के लिए विशेषज्ञता प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजित कर सकेगा और उनका समन्वयन कर सकेगा;
(xiii) आपदा निवारण या शमन के लिए स्थानीय प्राधिकारियों, सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की सहायता से सामुदायिक प्रशिक्षण और जागरुकता कार्यक्रमों को सुकर बना सकेगा;
(xiv) जनता को पूर्व चेतावनी और उचित सूचना के प्रसार के लिए तंत्र की स्थापना कर सकेगा उसका अनुरक्षण कर सकेगा, पुनर्विलोकन और उन्नयन कर सकेगा;
(xv) जिला स्तर मोचन, योजना और मार्गदर्शक सिद्धांतों को बना सकेगा, उनका पुनर्विलोकन और उन्नयन कर सकेगा;
(xvi) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन का समन्वयन कर सकेगा;
(xvii) यह सुनिश्चित कर सकेगा कि जिला स्तर पर सरकारी विभागों और स्थानीय प्राधिकारी जिला मोचन योजना के अनुसरण में अपनी मोचन योजना तैयार करें;
(xviii) जिला स्तर पर संबद्ध सरकारी विभाग या जिले की स्थानीय सीमाओं के भीतर अन्य प्राधिकारी के लिए किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के प्रभावी मोचन के उपाय करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत अधिकथित कर सकेगा या उन्हें निदेश दे सकेगा;
(xix) जिला स्तर पर सरकारी विभागों, कानूनी निकायों और जिले में आपदा प्रबंधन में लगे सरकारी और गैर सरकारी संगठनों को सलाह दे सकेगा, उनकी सहायता कर सकेगा और उनके क्रियाकलापों का समन्वयन कर सकेगा;
(xx) यह सुनिश्चित करने के लिए जिले में आपदा स्थिति की आशंका की या आपदा के निवारण या उसके शमन के लिए उपायों को तत्परता से और प्रभावी रूप से किया जा रहा है, जिले में स्थानीय प्राधिकारियों के साथ समन्वयन कर सकेगा और उनको मार्गनिर्देश दे सकेगा;
(xxi) जिले में स्थानीय प्राधिकारियों को उनके कृत्यों को करने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करा सकेगा या उन्हें सलाह दे सकेगा;
(xxii) जिले स्तर पर सरकारी विभागों, कानूनी प्राधिकारियों या स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा आपदा निवारण या उनका शमन करने के लिए तैयार की गई विकास योजनाओं में आवश्यक उपबंधों को ध्यान में रखते हुए उनका पुनर्विलोकन कर सकेगा;
(xxiii) जिला के किसी क्षेत्र में सन्निर्माण की जांच कर सकेगा और यदि उसकी यह राय हो कि आपदा निवारण या उसके शमन के लिए ऐसे सन्निर्माणों के लिए अधिकथित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है या उनका पालन नहीं किया गया है, संबद्ध प्राधिकारी को ऐसी कार्रवाई के लिए जो ऐसे मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो, निदेश दे सकेगा;
(xxiv) ऐसे भवनों और स्थानों की पहचान कर सकेगा जिनका किसी आपदा की आंशका या आपदा की घटना की स्थिति में राहत केन्द्रों या शिविरों के रूप में प्रयोग किया जा सकेगा और ऐसे भवनों और स्थानों में जल प्रदाय तथा स्वच्छता की व्यवस्था कर सकेगा;
(xxv) राहत संचय और बचाव सामग्री की स्थापना कर सकेगा या किसी अल्प सूचना पर ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी को सुनिश्चित कर सकेगा;
(xxvi) आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के संबंध में राज्य प्राधिकरण को सूचना दे सकेगा;
(xxvii) जिले में प्रारंभिक स्तर पर कार्यरत गैर सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक सामाजिक कल्याण संस्थाओं को आपदा प्रबंधन में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित कर सकेगा;
(xxviii) यह सुनिश्चित कर सकेगा कि संचार प्रणालियां ठीक हैं और आपदा प्रबंधन कवायद कालिक रूप से की जा रही है;
(xxix) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन कर सकेगा जो उसे राज्य सरकार या राज्य प्राधिकरण द्वारा समनुदेशित किए जाएं या जिले में आपदा प्रबंधन के लिए जो आवश्यक समझे जाएं ।
31. जिला योजना-(1) राज्य के प्रत्येक जिले के लिए आपदा प्रबंधन हेतु एक योजना होगी ।
(2) जिला प्राधिकरण द्वारा, स्थानीय प्राधिकारियों से परामर्श करने के पश्चात् और राष्ट्रीय योजना और राज्य योजना को ध्यान में रखते हुए जिला योजना तैयार की जाएगी जिसे राज्य प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया जाएगा ।
(3) जिला योजना में निम्नलिखित सम्मिलित होगा-
(क) जिले में ऐसे क्षेत्र जो आपदाओं के विभिन्न रूपों से संवेदनशील हैं;
(ख) जिला स्तर के सरकारी विभागों और जिले के स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा आपदा के निवारण और शमन के लिए किए जाने वाले उपाय;
(ग) जिला स्तर के सरकारी विभागों और जिले में स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के मोचन के लिए अपेक्षित क्षमता निर्माण और उनकी तैयारी के उपाय;
(घ) किसी आपदा की दशा में, मोचन योजनाएं और प्रक्रियाएं, जिनमें निम्नलिखित के लिए उपबंध हों-
(i) जिला स्तर के सरकारी विभागों और जिले में स्थानीय निकायों के उत्तरदायित्वों का आबंटन;
(ii) आपदा का तुरंत मोचन और उससे राहत;
(iii) आवश्यक संसाधनों का उपापन;
(iv) संचार सम्पर्क की स्थापना; और
(v) जनता को सूचना का प्रसार;
(ङ) ऐसे अन्य विषय जो राज्य प्राधिकरण द्वारा अपेक्षित हों ।
(4) जिला योजना का वार्षिक रूप से पुनर्विलोकन किया जाएगा और उसे अद्यतन किया जाएगा ।
(5) उपधारा (2) और उपधारा (4) में निर्दिष्ट जिला योजना की प्रतियां जिले में सरकारी विभागों को उपलब्ध कराई जाएंगी ।
(6) जिला प्राधिकरण जिला योजना की एक प्रति राज्य प्राधिकरण को भेजेगा जिसे वह राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा ।
(7) जिला प्राधिकरण समय-समय पर, योजना के कार्यान्वयन का पुनर्विलोकन करेगा और जिले में सरकार के विभिन्न विभागों को ऐसे अनुदेश जारी करेगा जिन्हें वह कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे ।
32. जिला स्तर पर विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा योजनाएं तैयार करना और उनका कार्यान्वयन-जिला स्तर पर भारत सरकार और राज्य सरकार का प्रत्येक कार्यालय और स्थानीय जिला प्राधिकारी जिला प्राधिकरण के पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए-
(क) आपदा प्रबंधन योजना तैयार करेंगे जिसमें निम्नलिखित उपवर्णित होगा, अर्थात्ः-
(i) जिला योजना में यथाउपबंधित निवारण और शमन उपायों के लिए उपबंध जो संबद्ध विभाग या अभिकरण को समनुदेशित है;
(ii) जिला योजना में यथा अधिकथित क्षमता निर्माण और तैयारी से संबंधित उपायों को करने के उपबंध;
(iii) किसी आपदा की आशंका या आपदा की दशा में, मोचन योजनाएं और प्रक्रियाएं;
(ख) जिला स्तर पर अन्य संगठनों, जिनके अंतर्गत स्थानीय समुदाय और अन्य स्थानीय प्राधिकारी समुदाय और अन्य पणधारी भी हैं, की योजनाओं के साथ अपनी योजना को तैयार और उसके कार्यान्वयन को समन्वित करेंगे;
(ग) योजना का नियमित रूप से पुनर्विलोकन करेंगे और उसे अद्यतन करेंगे; और
(घ) जिला प्राधिकरण को अपनी आपदा प्रबंधन योजना और उसके किसी संशोधन की एक प्रति प्रस्तुत करेंगे ।
33. जिला प्राधिकरण द्वारा अध्यादेश-जिला प्राधिकरण आदेश द्वारा, जिला स्तर पर किसी अधिकारी या किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह आपदा निवारण या उसके शमन के लिए या उसके प्रभावी रूप से मोचन के लिए ऐसे उपाय करे, जो आवश्यक हों और ऐसा प्राधिकारी या विभाग ऐसे आदेश का पालन करने के लिए बाध्य होगा ।
34. किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की दशा में जिला प्राधिकरण की शक्तियां और कृत्य-किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा में समुदाय की सहायता करने, उसका संरक्षण करने या उसे राहत उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए, जिला प्राधिकरण, -
(क) जिले में किसी सरकारी विभाग और स्थानीय प्राधिकारी के पास उपलब्ध संसाधनों की निकासी और उपयोग के लिए निदेश दे सकेगा;
(ख) अतिसंवेदनशील या प्रभावित क्षेत्र में या उससे अथवा उसके भीतर यानों के आवागमन को नियंत्रित और निर्बंधित कर सकेगा;
(ग) किसी अतिसंवेदनशील या प्रभावित क्षेत्र में किसी व्यक्ति के प्रवेश, उसके भीतर, उसके संचरण और उससे उसके प्रस्थान को नियंत्रित और निर्बंधित कर सकेगा;
(घ) मलबा हटा सकेगा, तलाशी ले सकेगा और बचाव कार्य कर सकेगा;
(ङ) आश्रय, भोजन, पीने का पानी और आवश्यक सामग्री, स्वास्थ्य देखरेख और सेवाएं उपलब्ध करा सकेगा;
(च) प्रभावित क्षेत्र में आपात संचार प्रणालियों की स्थापना कर सकेगा;
(छ) अदावाकृत शवों के निपटारे के लिए इंतजाम कर सकेगा;
(ज) जिला स्तर पर राज्य सरकार के किसी विभाग या उस सरकार के अधीन किसी प्राधिकारी या किसी निकाय को ऐसे आवश्यक उपाय करने की सिफारिश कर सकेगा जो उसकी राय में आवश्यक हों;
(झ) सुसंगत क्षेत्रों में सलाह और सहायता देने के लिए विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं की, जो वह आवश्यक समझे अपेक्षा कर सकेगा;
(ञ) किसी प्राधिकारी या व्यक्ति से किन्हीं सुख-सुविधाओं के अनन्य या अधिमानी उपयोग का उपापन कर सकेगा;
(ट) अस्थायी पुलों या अन्य आवश्यक संरचनाओं का सन्निर्माण कर सकेगा और ऐसी संरचनाओं को जो जनता के लिए परिसंकटमय हैं या आपदा के प्रभाव को गंभीर बना सकती हैं, ध्वस्त कर सकेगा;
(ठ) यह सुनिश्चित कर सकेगा कि गैर सरकारी संगठन अपने क्रियाकलापों को साम्यापूर्ण और अभिवेदकारी रीति से करे;
(ड) ऐसी अन्य कार्रवाई कर सकेगा जिसका ऐसी किसी स्थिति में किया जाना अपेक्षित या आवश्यक हो ।
अध्याय 5
आपदा प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उपाय
35. केन्द्रीय सरकार द्वारा किए जाने वाले उपाय-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे सभी उपाय करेगी जिन्हें वह आपदा प्रबंधन के प्रयोजन के लिए आवश्यक और समीचीन समझे ।
(2) विशिष्टतया और उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उन उपायों में जिन्हें केन्द्रीय सरकार, उस उपधारा के अधीन कर सकेगी, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों की बाबत उपाय भी हैं, अर्थात्ः-
(क) आपदा प्रबंधन के संबंध में भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरणों, सरकारी या गैर सरकारी संगठनों के कार्यों का समन्वयन करना;
(ख) भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा के निवारण और शमन के लिए उपायों के एकीकरण को सुनिश्चित करना;
(ग) भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों द्वारा आपदा के निवारण, शमन, क्षमता निर्माण और तैयारी के लिए निधियों के समुचित आबंटन को सुनिश्चित करना;
(घ) यह सुनिश्चित करना कि भारत सरकार के मंत्रालय या विभाग किसी आपदा की आशंका या आपदा के त्वरित और प्रभावी मोचन तैयारी के लिए आवश्यक उपाय करते हैं;
(ङ) राज्य सरकारों को उनके द्वारा अनुरोध किए जाने पर या उसके द्वारा अन्यथा समुचित समझे जाने पर सहयोग और सहायता देना;
(च) नौसेना, थल सेना और वायु सेना, संघ के अन्य सशस्त्र बलों या किसी अन्य सिविलियन कार्मिकों को तैनात करना जिनका इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अपेक्षा की जाए;
(छ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिकरणों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विदेशी सरकारों के साथ समन्वयन करना;
(ज) आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रमों के लिए संस्थाओं की स्थापना करना;
(झ) ऐसे अन्य विषय, जो इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए वह आवश्यक या समीचीन समझे ।
(3) केन्द्रीय सरकार बड़ी आपदा द्वारा प्रभावित अन्य देशों को ऐसी सहायता दे सकेगी जिसे वह उचित समझे ।
36. भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों के उत्तरदायित्व-भारत सरकार के प्रत्येक मंत्रालय या विभाग का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह-
(क) राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार आपदा के निवारण, शमन, तैयारी या क्षमता निर्माण के लिए आवश्यक उपाय करे;
(ख) राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार आपदाओं के निवारण या शमन के लिए उपायों की अपनी विकास योजनाओं, और परियोजनाओं में एकीकृत करे;
(ग) राष्ट्रीय प्राधिकरण के मार्गदर्शक सिद्धांतों या इस निमित्त राष्ट्रीय कार्यकारणी समिति के निदेशों के अनुसार किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा का प्रभावी और त्वरित मोचन करे;
(घ) आपदाओं के निवारण, शमन या तैयारी के लिए आवश्यक उपबंध समाविष्ट करने की दृष्टि से उसके द्वारा प्रशासित अधिनियमितियों, अपनी नीतियों, नियमों और विनियमों का पुनर्विलोकन करे;
(ङ) आपदा के निवारण, शमन या क्षमता निर्माण और तैयारी के उपायों के लिए निधियों का आबंटन करे;
(च) राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य सरकारों को निम्नलिखित के लिए सहायता प्रदान करे-
(i) आपदा प्रबंधन के संबंध में शमन, तैयारी और मोचन योजनाएं तैयार करना, क्षमता निर्माण, डाटा संग्रहण और कार्मिकों की पहचान तथा प्रशिक्षण;
(ii) प्रभावित क्षेत्र में बचाव और राहत कार्य करना;
(iii) किसी आपदा से क्षति का निर्धारण;
(iv) पुनर्वास और पुनर्निर्माण करना;
(छ) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा का तत्परता से और प्रभावी रूप से मोचन करने के प्रयोजन के लिए अपने संसाधन राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या राज्य कार्यकारिणी समिति को उपलब्ध कराना, जिनमें निम्नलिखित उपाय भी हैं, -
(i) किसी भेद्य या प्रभावित क्षेत्र में आपात संचार सुविधाएं उपलब्ध करना;
(ii) कार्मिकों और राहत सामग्री का प्रभावित क्षेत्र तक या उससे परिवहन;
(iii) निष्क्रमण, बचाव, अस्थायी आश्रय और अन्य तत्काल राहत प्रदान करना;
(iv) अस्थायी पुल, घाट और हवाई पट्टियां स्थापित करना;
(v) किसी प्रभावित क्षेत्र में पीने का पानी, आवश्यक रसद, स्वास्थ्य देखरेख और सेवाएं उपलब्ध करना;
(ज) ऐसे अन्य कार्य करना जो आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक समझे जाएं ।
37. भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों की आपदा प्रबंधन योजनाएं-(1) भारत सरकार का प्रत्येक मंत्रालय या विभाग-
(क) निम्नलिखित विशिष्टियां विनिर्दिष्ट करते हुए आपदा प्रबंधन योजना तैयार करेगा, अर्थात्ः-
(i) उसके द्वारा आपदा के निवारण और शमन के लिए राष्ट्रीय योजना के अनुसार किए जाने वाले उपाय;
(ii) राष्ट्रीय प्राधिकरण और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार अपनी विकास योजनाओं में शमन के उपायों के एकीकरण की बाबत विनिर्देश;
(iii) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के संबंध में कार्रवाई की तैयारी और क्षमता निर्माण के संबंध में उसकी भूमिका और उत्तरदायित्व;
(iv) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की तत्परता से और प्रभावी रूप से मोचन की बाबत उसकी भूमिका और उत्तरदायित्व;
(v) उपखंड (iii) और उपखंड (iv) में विनिर्दिष्ट तैयारी की उसकी भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों की वर्तमान स्थिति;
(vi) उपखंड (iii) और उपखंड (iv) में विनिर्दिष्ट उसके उत्तरदायित्वों का पालन करने में समर्थ बनाने के लिए किए जाने वाले अपेक्षित उपाय;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट योजना का वार्षिक रूप से पुनर्विलोकन और अद्यतन करेगा;
(ग) यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट योजना की एक प्रति केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित करेगा जिसे सरकार उसके अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण को भेजेगी ।
(2) भारत सरकार का प्रत्येक मंत्रालय या विभाग-
(क) उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन जब आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जा रही हो तब उसमें विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों के वित्तपोषण लिए उपबंध करेगा;
(ख) राष्ट्रीय प्राधिकरण को उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट योजना के कार्यान्वयन से संबंधित स्थिति रिपोर्ट, जब भी अपेक्षित हो, देगा ।
38. राज्य सरकार द्वारा उपाय करना-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक राज्य सरकार राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों में विनिर्दिष्ट सभी उपाय तथा ऐसे और उपाय करेगी जिन्हें वह आपदा प्रबंधन के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।
(2) उन उपायों के अंतर्गत जिन्हें राज्य सरकार उपधारा (1) के अधीन कर सकेगी, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों की बाबत उपाय भी हैं, अर्थात्ः-
(क) राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, राज्य प्राधिकरण, जिला प्राधिकरणों, स्थानीय प्राधिकारी और अन्य गैर सरकारी संगठनों के कार्यों का समन्वय;
(ख) आपदा प्रबंधन में राष्ट्रीय प्राधिकरण और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य प्राधिकरण और राज्य कार्यकारिणी समिति तथा जिला प्राधिकरणों को सहयोग और उनकी सहायता;
(ग) भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों का आपदा प्रबंधन में ऐसा सहयोग या सहायता जिनके लिए उनके द्वारा अनुरोध किया जाए या जो उसके द्वारा अन्यथा उचित समझे जाएं;
(घ) राज्य सरकार के विभागों द्वारा आपदा के निवारण, शमन, क्षमता निर्माण और तैयारी के लिए राज्य योजना तथा जिला योजनाओं के उपबंधों के अनुसार उपायों के लिए निधियों का आबंटन;
(ङ) राज्य सरकार के विभागों द्वारा अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा के निवारण या शमन के लिए उपायों के एकीकरण को सुनिश्चित करना;
(च) राज्य के विभिन्न भागों में विभिन्न आपदाओं की संवेदनशीलता को कम करने या शमन करने के लिए राज्य विकास योजना या उपायों में एकीकरण;
(छ) राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार करने को सुनिश्चित करना;
(ज) संवेदनशील समुदायों के स्तर तक पर्याप्त चेतावनी प्रणालियों की स्थापना;
(झ) यह सुनिश्चित करना कि राज्य सरकार के विभिन्न विभाग और जिला प्राधिकरण समुचित तैयारी के लिए उपाय करें;
(ञ) यह सुनिश्चित करना कि आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के संसाधन, किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के प्रभावी मोचन, बचाव और राहत के प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या राज्य कार्यकारिणी समिति को उपलब्ध कराए गए हैं;
(ट) किसी आपदा से पीड़ित व्यक्तियों का पुनर्वास करना और उन्हें पुनर्निर्माण में सहायता देना;
(ठ) ऐसे अन्य विषय जिन्हें वह इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।
39. राज्य सरकार के विभागों के उत्तरदायित्व-राज्य सरकार के प्रत्येक विभाग का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह-
(क) राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार आपदाओं के निवारण, शमन, तैयारी और क्षमता-निर्माण के लिए आवश्यक उपाय करे;
(ख) अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में आपदा के निवारण और शमन के लिए उपायों को एकीकृत करे;
(ग) आपदा के निवारण, शमन, क्षमता-निर्माण और तैयारी के लिए निधियां आबंटित करे;
(घ) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा का राज्य योजना के अनुसार और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति और राज्य कार्यकारिणी समिति के मार्गदर्शक सिद्धांतों या निदेशों के अनुसार प्रभावी रूप से और तत्परता से मोचन करे;
(ङ) आपदाओं के निवारण, शमन या उसके लिए तैयारी के आवश्यक उपबंध सम्मिलित करने की दृष्टि से उसके द्वारा प्रशासित अधिनियमितियों, अपनी नीतियों, नियमों और विनियमों का पुनर्विलोकन करे;
(च) निम्नलिखित के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति और जिला प्राधिकरणों द्वारा, यथा अपेक्षित, सहायता प्रदान करे, -
(i) शमन, तैयारी और मोचन, क्षमता निर्माण, डाटा संग्रहण और आपदा प्रबंधन के संबंध में कर्मचारिवृंद की पहचान और उनके प्रशिक्षण के लिए योजनाएं तैयार करना;
(ii) किसी आपदा से नुकसान का निर्धारण करना;
(iii) पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य करना;
(छ) जिला स्तर पर अपने प्राधिकारियों द्वारा जिला योजना को कार्यान्वित करने के लिए राज्य प्राधिकरण के परामर्श से संसाधनों की व्यवस्था करे;
(ज) राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरणों को राज्य में किसी आपदा की तत्परता से प्रभावी रूप से मोचन करने के प्रयोजनों के लिए, जिनके अंतर्गत निम्नलिखित के लिए उपाय करना भी है, अपने संसाधन उपलब्ध कराए-
(i) संवेदनशील या प्रभावित क्षेत्र में आपात संचार सुविधाएं उपलब्ध कराना;
(ii) कार्मिकों और राहत सामग्री का प्रभावित क्षेत्र तक या उससे बाहर परिवहन प्रदान करना;
(iii) निष्क्रमण, बचाव, अस्थायी आश्रय या अन्य तत्काल राहत प्रदान करना;
(iv) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के किसी क्षेत्र से व्यक्तियों या पशुओं का निष्क्रमण करना;
(v) अस्थायी पुल, घाट या हवाई पट्टियां स्थापित करना;
(vi) प्रभावित क्षेत्र में पीने का पानी, आवश्यक रसद, स्वास्थ्य देखरेख सेवाएं उपलब्ध कराना;
(झ) ऐसे अन्य कार्य करना जो आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक हों ।
40. राज्य सरकार के विभागों की आपदा प्रबंधन योजना-राज्य सरकार का प्रत्येक विभाग, राज्य प्राधिकरण द्वारा अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप, -
(क) एक आपदा प्रबंधन योजना तैयार करेगा जिसमें निम्नलिखित अधिकथित होगाः-
(i) उन आपदाओं के प्रकार जिनसे राज्य के विभिन्न भाग संवेदनशील हैं;
(ii) आपदा के निवारण या उसके प्रभावों के शमन या दोनों के लिए नीतियों का उस विभाग द्वारा विकास योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ एकीकरण;
(iii) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की दशा में और उन आपातकालीन सहायता कार्यों में जिनके किए जाने की उनसे अपेक्षा है, राज्य के उक्त विभाग की भूमिका और उत्तरदायित्व;
(iv) उपखंड (iii) के अधीन ऐसी भूमिका या उत्तरदायित्वों या आपातकालीन सहायता कार्य को करने की उसकी तैयारियों की वर्तमान स्थिति;
(v) धारा 37 के अधीन भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों को उनके उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने के लिए समर्थ बनाने हेतु किए जाने वाले प्रस्तावित क्षमता निर्माण और तैयारी के उपाय;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट योजना का वार्षिक रूप से पुनर्विलोकन और उन्हें अद्यतन करना; और
(ग) राज्य प्राधिकरण को, यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट योजना की प्रति देना ।
(2) राज्य सरकार का प्रत्येक विभाग, उपधारा (1) के अधीन योजना तैयार करते समय, उसमें विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों के वित्तपोषण के लिए उपबंध करेगा ।
(3) राज्य सरकार का प्रत्येक विभाग राज्य कार्यकारिणी समिति को उपधारा (1) में निर्दिष्ट आपदा प्रबंधन योजना के कार्यान्वयन के संबंध में कार्यान्वयन स्थिति की रिपोर्ट देगा ।
अध्याय 6
स्थानीय प्राधिकारी
41. स्थानीय प्राधिकारी के कृत्य-(1) स्थानीय प्राधिकारी, जिला प्राधिकरण के निदेशों के अधीन रहते हुए, -
(क) यह सुनिश्चित करेगा कि उसके अधिकारी और कर्मचारी आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित हैं;
(ख) यह सुनिश्चित करेगा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित संसाधनों का इस प्रकार अनुरक्षण किया जा रहा है जिससे कि वे किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की दशा में सदैव उपयोग के लिए उपलब्ध रहेंगे;
(ग) यह सुनिश्चित करेगा कि उसके अधीन या उसकी अधिकारिता के भीतर सभी सन्निर्माण परियोजनाएं राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण और जिला प्राधिकरण द्वारा आपदाओं के निवारण और शमन के लिए अधिकथित मानकों और विनिर्देशों के अनुरूप हैं;
(घ) प्रभावित क्षेत्र में राज्य योजना और जिला योजना के अनुसार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के क्रियाकलाप करेगा ।
(2) स्थानीय प्राधिकारी ऐसे अन्य उपाय कर सकेगा जिन्हें वह आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक समझे ।
अध्याय 7
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान
42. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान-(1) ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के नाम से एक संस्थान का गठन किया जाएगा ।
(2) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान में उतने सदस्य होंगे, जितने केन्द्रीय सरकार विहित करे ।
(3) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के सदस्यों की पदावधि और उनमें रिक्तियां तथा ऐसी रिक्तियों को भरे जाने की रीति वह होगी जो विहित की जाए ।
(4) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान का एक शासी निकाय होगा जिसका गठन केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के सदस्यों में से ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की जाए ।
(5) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान का शासी निकाय ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा जो विनियमों द्वारा विहित किए जाएं ।
(6) शासी निकाय द्वारा अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और शासी निकाय के सदस्यों की पदावधि तथा उनकी रिक्तियों को भरे जाने की रीति वह होगी जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।
(7) इस धारा के अधीन विनियम बनाए जाने तक केन्द्रीय सरकार ऐसे विनियम बना सकेगी और इस प्रकार बनाए गए किसी विनियम को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उपांतरित या विखंडित कर सकेगा ।
(8) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा अधिकथित विस्तृत नीतियों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के भीतर रहते हुए कार्य करेगा और आपदा प्रबन्धन, दस्तावेजीकरण और आपदा प्रबन्धन की नीतियों, निवारणतंत्र और शमन के उपायों से संबंधित राष्ट्रीय स्तर की सूचना के आधार के विन्यास के क्षेत्र में प्रशिक्षण और अनुसंधान की योजना बनाने और उनका संवर्धन करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(9) उपधारा (8) में अंतर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, राष्ट्रीय संस्थान, अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए, -
(क) आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण मापदंडों का विकास, अनुसंधान और दस्तावेजीकरण तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेगा;
(ख) ऐसी व्यापक मानव संसाधन विकास योजना तैयार कर सकेगा और उसे कार्यान्वित कर सकेगा जिसके अंतर्गत आपदा प्रबंधन के सभी पहलू आते हों;
(ग) राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाने में सहायता प्रदान कर सकेगा;
(घ) सरकारी कृत्यकारियों सहित पणधारकों के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों के विकास के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थानों की अपेक्षित सहायता कर सकेगा और राज्य स्तर के प्रशिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्यों को प्रशिक्षण दे सकेगा;
(ङ) राज्य स्तर की नीतियों, रणनीतियों, आपदा प्रबंधन ढांचे में राज्य सरकारों और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों को सहायता तथा अपने कृत्यकारियों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों, कार्पोरेट सेक्टर और जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों सहित पणधारियों और सरकार के क्षमता-निर्माण के लिए राज्य सरकारों या राज्य प्रशिक्षण संस्थानों को यथाअपेक्षित सहायता दे सकेगा;
(च) आपदा प्रबंधन के लिए शैक्षिक और वृत्तिक पाठ्यक्रमों सहित शैक्षिक सामग्री का विकास कर सकेगा;
(छ) बहुविपत्ति के शमन, तैयारी और उसके मोचन के उपायों से सहबद्ध महाविद्यालय या स्कूल अध्यापकों और छात्रों, तकनीकी कार्मिकों तथा अन्य व्यक्तियों सहित पणधारकों के बीच जागरुकता पैदा कर सकेगा;
(ज) पूर्वोक्त उद्देश्यों का संवर्धन करने के लिए देश के भीतर या देश के बाहर अध्ययन पाठ्यक्रम, सम्मेलन, व्याख्यान, सेमिनार कर सकेगा, उनका आयोजन कर सकेगा और उन्हें सुकर बना सकेगा;
(झ) पत्रिकाओं, अनुसंधान पत्रों और पुस्तकों का प्रकाशन करा सकेगा और पूर्वोक्त उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए पुस्तकालयों की स्थापना और उनका अनुरक्षण कर सकेगा;
(ञ) ऐसे सभी अन्य विधिपूर्ण कार्य कर सकेगा जो उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक या आनुषंगिक हों; और
(ट) ऐसे कोई अन्य कृत्य कर सकेगा जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा समनुदेशित किए जाएं ।
43. राष्ट्रीय संस्थान के अधिकारी और अन्य कर्मचारी-केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान को उतने अधिकारी, परामर्शदाता और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जितने वह उसके कृत्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक समझे ।
अध्याय 8
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल
44. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल-(1) किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के विशेषज्ञतापूर्ण मोचन के प्रयोजन के लिए एक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल का गठन किया जाएगा ।
(2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उक्त बल का गठन ऐसी रीति से किया जाएगा और बल के सदस्यों की सेवा की शर्तें जिनके अंतर्गत उनके लिए अनुशासन संबंधी उपबंध भी हैं, वे होंगी जो विहित की जाएं ।
45. नियंत्रण, निदेशन, आदि-बल का साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राष्ट्रीय प्राधिकरण में निहित होगा और उसके द्वारा उनका प्रयोग किया जाएगा तथा बल की कमान और उनका अधीक्षण केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किए जाने वाले अधिकारी में निहित होगा ।
अध्याय 9
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
46. राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली एक निधि का गठन कर सकेगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे-
(क) ऐसी रकम जिसे केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्रदान करे;
(ख) ऐसे कोई अनुदान आपदा प्रबंधन के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा दिए गए कोई अनुदान ।
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्राधिकरण के परामर्श से अधिकथित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार आपातकालीन मोचन, राहत और पुनर्वास के व्ययों को चुकाने के लिए उपयोजित किए जाने हेतु राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि उपलब्ध कराई जाएगी ।
47. राष्ट्रीय आपदा शमन निधि-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, आपदा के शमन के प्रयोजन के लिए अनन्य रूप से परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय आपदा शमन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली एक निधि का गठन कर सकेगी और उसमें ऐसी रकम जमा की जाएगी जो केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, प्रदान करे ।
(2) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन निधि का उपयोजन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा ।
48. राज्य सरकार द्वारा निधियों की स्थापना-(1) राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण और जिला प्राधिकरणों का गठन करने के लिए अधिसूचनाओं के जारी किए जाने के ठीक पश्चात्, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित निधियों की स्थापना करेगी, अर्थात्ः-
(क) राज्य आपदा मोचन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली निधि;
(ख) जिला आपदा मोचन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली निधि;
(ग) राज्य आपदा शमन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली निधि;
(घ) जिला आपदा शमन निधि के नाम से ज्ञात होने वाली निधि ।
(2) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि-
(i) उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन स्थापित निधियां राज्य कार्यकारिणी समिति को उपलब्ध हैं;
(ii) उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन स्थापित निधियां राज्य प्राधिकरण को उपलब्ध हैं;
(iii) उपधारा (1) के खंड (ख) और खंड (घ) के अधीन स्थापित निधियां जिला प्राधिकरण को उपलब्ध हैं ।
49. मंत्रालयों और विभागों द्वारा निधियों का आबंटन-(1) भारत सरकार का प्रत्येक मंत्रालय या विभाग, अपने वार्षिक बजट में, अपनी आपदा प्रबंधन योजना में वर्णित क्रियाकलापों और कार्यक्रमों को करने के प्रयोजनों के लिए निधियों का उपबंध करेगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित राज्य सरकार के विभागों को लागू होंगे ।
50. आपात उपापन और लेखा-जोखा-जहां किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा के कारण, राष्ट्रीय प्राधिकरण या राज्य प्राधिकरण अथवा जिला प्राधिकरण का यह समाधान हो जाता है कि बचाव या राहत के लिए रसद या सामग्री का तत्काल उपापन या संसाधनों का तत्काल उपयोजन आवश्यक है वहां, -
(क) वह संबद्ध विभाग या प्राधिकारी को उपापन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा और ऐसी दशा में, निविदाएं आमंत्रित करने के लिए अपेक्षित मानक प्रक्रिया का त्यजन किया गया समझा जाएगा;
(ख) यथास्थिति, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत नियंत्रक अधिकारी द्वारा रसद या सामग्री के उपयोजन के बारे में प्रमाणपत्र ऐसी रसद या सामग्री के आपात उपापन के लेखा-जोखा प्रयोजन के लिए विधिमान्य दस्तावेज या बीजक माना जाएगा ।
अध्याय 10
अपराध और शास्तियां
51. बाधा डालने, आदि के लिए दंड-जो कोई, युक्तियुक्त कारण के बिना, -
(क) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी अथवा राष्ट्रीय प्राधिकरण या राज्य प्राधिकरण अथवा जिला प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के लिए इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन में बाधा डालेगा; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण द्वारा या उसकी ओर से दिए गए किसी निदेश का पालन करने से इंकार करेगा,
तो वह दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा और यदि ऐसी बाधा या निदेशों का पालन करने से इंकार करने के परिणामस्वरूप जीवन की हानि होती है या उनके लिए आसन्न खतरा पैदा होता है, तो दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा ।
52. मिथ्या दावे के लिए दंड-जो कोई जानबूझकर केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण के किसी अधिकारी से आपदा के परिणामस्वरूप कोई राहत, सहायता, मरम्मत, सन्निर्माण या अन्य फायदे अभिप्राप्त करने के लिए ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या यह विश्वास करने का उसके पास कारण है कि वह मिथ्या है, तो वह दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडनीय होगा ।
53. धन या सामग्री आदि के दुरुपयोजन के लिए दंड-जो कोई, जिसे किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा में राहत पहुंचाने के लिए आशयित कोई धन या सामग्री सौंपी गई है या अन्यथा कोई धन या माल उसकी अभिरक्षा या अधिपत्य में है और वह ऐसे धन या सामग्री या उसके किसी भाग का दुरुपयोजन करेगा या अपने स्वयं के उपयोग के लिए उपयोजन करेगा अथवा उसका व्ययन करेगा या जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने के लिए विवश करेगा, तो वह दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडनीय होगा ।
54. मिथ्या चेतावनी के लिए दंड-जो कोई, जिसे किसी आपदा या उसकी गंभीरता या उसके परिमाण के संबंध में आतंकित करने वाली मिथ्या संकट-सूचना या चेतावनी देता है, तो वह दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से दंडनीय होगा ।
55. सरकार के विभागों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया है वहां विभागाध्यक्ष ऐसे अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा, जब तक कि वह यह साबित नहीं कर देता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध विभागाध्यक्ष से भिन्न किसी अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा अधिकारी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
56. अधिकारी की कर्तव्य पालन में असफलता या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के प्रति मौनानुकूलता-ऐसा कोई अधिकारी, जिस पर इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन कोई कर्तव्य अधिरोपित किया गया है और जो अपने पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा या करने से इंकार करेगा या स्वयं को उससे विमुख कर लेगा तो, जब तक कि उसने अपने से वरिष्ठ अधिकारी की अभिव्यक्त लिखित अनुमति अभिप्राप्त न कर ली हो या उसके पास ऐसा करने के लिए कोई अन्य विधिपूर्ण कारण न हो, ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, दंडनीय होगा ।
57. अध्यपेक्षा के संबंध में किसी आदेश के उल्लंघन के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति धारा 65 के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
58. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कंपनी या निगमित निकाय द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारोबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे उल्लंघन के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
59. अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी-धारा 55 और धारा 56 के अधीन दंडनीय अपराधों के लिए कोई अभियोजन, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या ऐसी सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जाएगा ।
60. अपराधों का संज्ञान-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान निम्नलिखित द्वारा परिवाद किए जाने पर करने के सिवाय नहीं करेगा, -
(क) राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, जिला प्राधिकरण या, यथास्थिति, उस प्राधिकरण या सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य प्राधिकारी या अधिकारी; या
(ख) ऐसा कोई व्यक्ति, जिसने अभिकथित अपराध की और राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, जिला प्राधिकरण या पूर्वोक्तानुसार प्राधिकृत किसी प्राधिकारी या अधिकारी को परिवाद करने के अपने आशय की विहित रीति में कम-से-कम तीस दिन की सूचना दे दी है ।
अध्याय 11
प्रकीर्ण
61. विभेद का प्रतिषेध-आपदा के पीड़ित व्यक्तियों को प्रतिपूर्ति और राहत देते समय लिंग, जाति, समुदाय, उद्भव या धर्म के आधार पर कोई विभेद नहीं किया जाएगा ।
62. केन्द्रीय सरकार की निदेश जारी करने की शक्ति-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आपदा प्रबंधन को सुकर बनाने या उसमें सहायता करने के लिए, यथास्थिति, भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों, या राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या किसी राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण, राज्य कार्यकारिणी समिति, कानूनी निकायों या उनके किन्हीं अधिकारियों या कर्मचारियों को लिखित में निदेश जारी करे और ऐसा मंत्रालय या विभाग या सरकार या प्राधिकरण, कार्यकारिणी समिति, कानूनी निकाय, अधिकारी या कर्मचारी ऐसे निदेश का पालन करने के लिए आबद्ध होगा ।
63. बचाव कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली शक्तियां-संघ या राज्य का कोई अधिकारी या प्राधिकारी, उससे राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, किसी राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण द्वारा या ऐसी किसी समिति या प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा अनुरोध किए जाने पर, उस समिति या प्राधिकरण या उस व्यक्ति को, आपदा के निवारण या उसके शमन या बचाव या राहत कार्यों के संबंध में कोई कृत्य करने के लिए ऐसे अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगा, जिनके लिए अनुरोध किया गया है ।
64. कतिपय परिस्थितियों में नियम, आदि बनाना या उनमें संशोधन करना-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए यदि, यथास्थिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण को यह प्रतीत होता है कि आपदाओं के निवारण या उनके शमन के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, मार्गदर्शक सिद्धांत, अनुदेश, आदेश, स्कीम या उपविधि में उपबंध करना या उनमें संशोधन करना अपेक्षित है तो वह उस प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, नियमों, विनियम, अधिसूचना, मार्गदर्शक सिद्धांतों, अनुदेश, आदेश, स्कीम या उपविधियों में संशोधन की अपेक्षा कर सकेगा और समुचित विभाग या प्राधिकारी ऐसी अपेक्षाओं का अनुपालन करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा ।
65. बचाव कार्य आदि के लिए संसाधनों, रसद, यानों आदि की अध्यपेक्षा करने की शक्ति-(1) यदि राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण या उसके द्वारा इस निमित्त यथा प्राधिकृत किसी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि, -
(क) किसी प्राधिकारी या व्यक्ति के पास किन्हीं संसाधनों की तत्काल भेजने के प्रयोजन के लिए आवश्यकता है;
(ख) बचाव कार्य के प्रयोजन के लिए किन्हीं परिसरों की आवश्यकता है या उनकी आवश्यकता संभावित है; या
(ग) आपदा से प्रभावित क्षेत्रों से संसाधनों के परिवहन या प्रभावित क्षेत्र को संसाधनों के परिवहन या बचाव, पुनर्वास या पुनः सन्निर्माण के संबंध में परिवहन के प्रयोजनों के लिए किसी यान की आवश्यकता है या उसकी आवश्यकता संभावित है,
तो ऐसा प्राधिकारी लिखित आदेश द्वारा, यथास्थिति, ऐसे संसाधनों या परिसरों या ऐसे यान की अध्यपेक्षा कर सकेगा और ऐसे और आदेश भी कर सकेगा जो उसे अध्यपेक्षा के संबंध में आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(2) जब भी उपधारा (1) के अधीन किसी संसाधन, परिसर या यान की अध्यपेक्षा की जाती है वहां ऐसी अध्यपेक्षा की अवधि उस अवधि से अधिक नहीं होगी जिसके लिए ऐसे संसाधन, परिसर या यान उस उपधारा में उल्लिखित किसी भी प्रयोजन के लिए अपेक्षित हैं ।
(3) इस धारा में, -
(क) संसाधन" के अन्तर्गत मानव और सामग्री संसाधन हैं;
(ख) सेवाओं" के अन्तर्गत सुविधाएं हैं;
(ग) परिसर" से कोई भूमि, भवन या भवन का कोई भाग अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कोई झोंपड़ी, छप्पर या कोई अन्य संरचना या उसका भाग भी है; और
(घ) यान" से परिवहन के प्रयोजन के लिए उपयोग किया गया या उपयोग किए जाने के लिए सक्षम कोई यान अभिप्रेत है चाहे वह यांत्रिक शक्ति से या अन्यथा नोदित हो ।
66. प्रतिपूर्ति का संदाय-(1) जब भी धारा 65 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई समिति, प्राधिकरण या अधिकारी, उस धारा के अनुसरण में किसी परिसर की अध्यपेक्षा करता है वहां हितबद्ध व्यक्तियों को प्रतिपूर्ति का संदाय किया जाएगा जिसकी रकम निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए अवधारित की जाएगी, अर्थात्ः-
(i) परिसर के संबंध में संदेय किराया, या यदि इस प्रकार कोई किराया संदेय नहीं है तो उसके परिक्षेत्र में उसके समान परिसर के लिए संदेय किराया;
(ii) यदि परिसर की अध्यपेक्षा के परिणामस्वरूप हितबद्ध व्यक्ति अपने आवास या कारबार के स्थान में परिवर्तन करने के लिए बाध्य होता है तो ऐसे परिवर्तन से अनुषंगी युक्तियुक्त व्यय (यदि कोई हों):
परंतु जहां कोई हितबद्ध व्यक्ति इस प्रकार अवधारित प्रतिपूर्ति की रकम से व्यथित होकर, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को तीस दिन के भीतर, मामले को किसी मध्यस्थ को निर्दिष्ट करने के लिए आवेदन करता है तो संदाय की जाने वाली प्रतिपूर्ति की रकम वह होगी जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त मध्यस्थ अवधारित करे:
परंतु यह और कि जहां प्रतिपूर्ति को प्राप्त करने के लिए हकदारी के संबंध में या प्रतिपूर्ति रकम के प्रभाजन के संबंध में कोई विवाद है वहां विवाद को, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी मध्यस्थ को अवधारण के लिए निर्दिष्ट किया जाएगा और उसे ऐसे मध्यस्थ के निर्णय के अनुसार अवधारित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा में हितबद्ध व्यक्ति" पद से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 65 के अधीन अध्यपेक्षित परिसर पर, अध्यपेक्षा से तुरंत पूर्व वास्तविक रूप में काबिज था, या उस दशा में जहां कोई व्यक्ति इस प्रकार वास्तविक रूप में काबिज नहीं था वहां ऐसे परिसर का स्वामी अभिप्रेत है ।
(2) जब कभी धारा 65 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई समिति, प्राधिकरण या अधिकारी उस धारा के अनुसरण में किसी यान की अध्यपेक्षा करता है तो उसके स्वामी को प्रतिकर का संदाय किया जाएगा जिसकी रकम, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसे यान के किराए के लिए उस परिक्षेत्र में विद्यमान भाड़ा या दरों के आधार पर अवधारित की जाएगी:
परन्तु जहां ऐसे अवधारित किए गए प्रतिकर की रकम से व्यथित ऐसे यान का स्वामी विहित समय के भीतर मामले को किसी मध्यस्थ को निर्दिष्ट करने के लिए, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को आवेदन करता है तो संदत्त की जाने वाली प्रतिकर की रकम वह होगी जो, इस निमित्त, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ अवधारित करे:
परन्तु यह और कि जहां अध्यपेक्षा किए जाने के ठीक पूर्व यान या जलयान, अवक्रय करार के कारण स्वामी से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में था वहां अध्यपेक्षा की बाबत संदेय कुल प्रतिकर के रूप में, इस उपधारा के अधीन अवधारित रकम उस व्यक्ति और स्वामी के बीच ऐसी रीति में प्रभाजित की जाएगी जिसमें वे सहमत हों और करार के व्यतिक्रम में ऐसी रीति से प्रभाजित की जाएगी जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ इस निमित्त विनिश्चय करे ।
67. चेतावनी, आदि की संसूचना के लिए मीडिया को निदेश-राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण या कोई जिला प्राधिकरण किसी प्राधिकारी या किसी श्रव्य या श्रव्य-दृश्य मीडिया या संसूचना के ऐसे साधनों पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को, जो किसी आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा की बाबत किसी चेतावनी या मंत्रणाओं को कार्यान्वित करने के लिए उपलब्ध हों, निदेश देने की सरकार को सिफारिश कर सकेगा और संसूचना के उक्त साधन और यथा अभिहित मीडिया ऐसे निदेश का पालन करेगा ।
68. आदेशों या विनिश्चयों का अधिप्रमाणन-राष्ट्रीय प्राधिकरण या राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या राज्य प्राधिकरण या राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण का प्रत्येक आदेश या विनिश्चय, राष्ट्रीय प्राधिकरण या राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति या राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण के ऐसे अधिकारियों द्वारा अधिप्रमाणित किया जाएगा जो इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत हों ।
69. शक्तियों का प्रत्यायोजन-यथास्थिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति लिखित साधारण या विशेष आदेश द्वारा अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को, जो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
70. वार्षिक रिपोर्ट-(1) राष्ट्रीय प्राधिकरण, प्रत्येक वर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का सही और पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजेगा और वह सरकार उसकी प्राप्ति के एक मास के भीतर उसे संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।
(2) राज्य प्राधिकरण, प्रत्येक वर्ष, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान किए गए उसके क्रियाकलापों का सही और पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी प्रतियां राज्य सरकार को भेजेगा और वह सरकार, जहां उस राज्य के विधान-मंडल में दो सदन हैं वहां राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष और जहां ऐसे विधान-मंडल में केवल एक ही सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखवाएगी ।
71. न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन-किसी न्यायालय को (उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय को छोड़कर) केन्द्रीय सरकार, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण द्वारा इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में या इसके अधीन कृत्यों के संबंध में की गई किसी बात या कार्रवाई, किए गए आदेश, दिए गए निदेश या अनुदेश या मार्ग निदेशन के संबंधों में कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी ।
72. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
73. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उपबंधों के अधीन केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय प्राधिकरण या राज्य सरकार या राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण या स्थानीय प्राधिकारी या केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय प्राधिकरण या राज्य सरकार या राज्य प्राधिकरण या जिला प्राधिकरण या स्थानीय प्राधिकारी के किसी अधिकारी या कर्मचारी या ऐसी सरकार या प्राधिकरण के निमित्त कार्यरत किसी व्यक्ति द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए किसी कार्य या किए जाने के लिए तात्पर्यित या किए जाने के लिए आशयित किसी कार्य की बाबत किसी न्यायालय में कोई वाद या अभियोजन या अन्य कार्यवाही ऐसे प्राधिकरण या सरकार या ऐसे अधिकारी या कर्मचारी या ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
74. विधिक प्रक्रिया से उन्मुक्ति-केन्द्रीय सरकार, राष्ट्रीय प्राधिकरण, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति, राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण, राज्य कार्यकारिणी समिति या जिला प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी अपनी शासकीय क्षमता में उनके द्वारा संसूचित या प्रसारित किसी आसन्न आपदा की बाबत, ऐसी संसूचना या प्रसारण के अनुसरण में उनके द्वारा की गई कार्रवाई या जारी निदेश की बाबत विधिक प्रक्रिया से उन्मुक्त रहेंगे ।
75. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण की संरचना और सदस्यों की संख्या तथा उसकी उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें;
(ख) धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन सलाहकार समिति के सदस्यों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;
(ग) धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष की शक्तियां और उसके कृत्य तथा धारा 8 की उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करने में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया;
(घ) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा गठित उपसमिति से सहयुक्त व्यक्तियों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;
(ङ) धारा 42 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के सदस्यों की संख्या, उपधारा (3) के अधीन सदस्यों की पदावधि और उनकी रिक्तियां तथा ऐसी रिक्तियों को भरे जाने की रीति और उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के शासी निकाय के गठन की रीति;
(च) धारा 44 की उपधारा (2) के अधीन बल के गठन की रीति, अनुशासनिक उपबंधों सहित बल के सदस्यों की सेवा की शर्तें;
(छ) वह रीति जिसमें धारा 60 के खंड (ख) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्य प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या प्राधिकारी या अधिकारी को अपराध की सूचना और परिवाद करने के आशय की सूचना दी जाएगी;
(ज) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा 70 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जानी है;
(झ) अन्य कोई विषय जो विहित किया जाए या किया जा सके या जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
76. विनियम बनाने की शक्ति-(1) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों से संगत विनियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) शासी निकाय द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां और उनके द्वारा निर्वहन किए जाने वाले कृत्य;
(ख) शासी निकाय द्वारा अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कृत्यों के निर्वहन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
(ग) ऐसा कोई अन्य विषय जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन विनियमों द्वारा उपबंध किए जा सकेंगे ।
77. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हो जाएं कि नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो वह नियम या विनियम केवल, यथास्थिति, ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या निष्प्रभाव हो जाएगा । तथापि, ऐसे परिवर्तन या निष्प्रभाव होने से नियम या विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
78. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन राज्य प्राधिकरण की संरचना और सदस्यों की संख्या तथा उसकी उपधारा (5) के अधीन राज्य प्राधिकरण के सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें;
(ख) धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन सलाहकार समिति के सदस्यों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;
(ग) धारा 20 की उपधारा (3) के अधीन राज्य कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष की शक्तियां और उसके कृत्य तथा धारा 20 की उपधारा (4) के अधीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करने में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया;
(घ) धारा 21 की उपधारा (3) के अधीन राज्य कार्यकारिणी समिति द्वारा गठित उपसमिति से सहयुक्त व्यक्तियों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते;
(ङ) धारा 25 की उपधारा (2) के अधीन जिला प्राधिकरण की संरचना और उसके सदस्यों की संख्या तथा धारा 25 की उपधारा (3) के अधीन जिला प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां और निर्वहन किए जाने वाले कृत्य;
(च) धारा 28 की उपधारा (3) के अधीन विशेषज्ञों के रूप में जिला प्राधिकरण द्वारा गठित किसी समिति से सहयुक्त व्यक्तियों को संदेय भत्ते;
(छ) अन्य कोई विषय जो विहित किया जाए या किया जा सके या जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है ।
(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के, जहां वह दो सदनों से मिलकर बना है या जहां ऐसा विधान-मंडल एक सदन का है, वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
79. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा आदेश कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, और जो कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो:
परन्तु इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, यथास्थिति, संसद् या विधान-मंडल के प्रत्येक सदने के समक्ष रखा जाएगा ।
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