विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड अधिनियम, 2008
(2009 का अधिनियम संख्यांक 9)
[17 जनवरी, 2009]
विज्ञान और इंजीनियरी में बुनियादी अनुसंधान का संवर्धन करने के लिए बोर्ड के
गठन के लिए तथा ऐसे अनुसंधान में लगे हुए व्यक्तियों, शैक्षणिक संस्थाओं,
अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं, औद्योगिक समुत्थानों तथा
अन्य अभिकरणों को ऐसे अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता
देने और उनसे संबंधित या उनके
आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड अधिनियम, 2008 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) बोर्ड" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठिन विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ग) निधि" से धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन गठित विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान निधि अभिप्रेत है;
(घ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है;
(ङ) अन्वेक्षा समिति" से धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन गठित विशेषज्ञों की अन्वेक्षा समिति अभिप्रेत है;
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(छ) सचिव" से धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त बोर्ड का सचिव अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड
3. बोर्ड का गठन और निगमन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक बोर्ड का गठन करेगी जिसका नाम विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड होगा ।
(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
(3) बोर्ड निम्नलिखित व्यक्तियों से मिलकर बनेगा, अर्थात्ः-
(क) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में भारत सरकार का सचिव, पदेन-अध्यक्ष;
(ख) सदस्य-सचिव, योजना आयोग, पदेन-सदस्य;
(ग) जैव प्रौद्योगिकी विभाग में भारत सरकार का सचिव, पदेन-सदस्य;
(घ) विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान विभाग में भारत सरकार का सचिव, पदेन-सदस्य;
(ङ) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में भारत सरकार का सचिव, पदेन-सदस्य;
(च) वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग में भारत सरकार का सचिव या उसका नामनिर्देशिती, पदेन-सदस्य;
(छ) भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग का सचिव, पदेन-सदस्य;
(ज) शैक्षणिक संस्थाओं में विभिन्न विधाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले तीन से अनधिक सदस्य;
(झ) सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विभिन्न विधाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले तीन से अनधिक सदस्य;
(ञ) उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, सामाजिक-आर्थिक सेक्टर और अन्य सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विभिन्न विधाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले चार से अनधिक सदस्य ।
(4) बोर्ड का प्रधान कार्यालय दिल्ली में या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होगा ।
(5) उपधारा (3) के खंड (ज) से खंड (ञ) में विनिर्दिष्ट सदस्यों की अर्हताएं और अनुभव, पदावधि और भत्ते वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(6) अध्यक्ष, बोर्ड के अधिवेशनों की अध्यक्षता करने के अतिरिक्त, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा जो विहित किए जाएं या बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(7) बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि-
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है;
(ख) बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है;
(ग) बोर्ड की प्रक्रिया में ऐसी कोई अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता है ।
4. बोर्ड का सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के परामर्श से, भारत सरकार के अपर सचिव की पंक्ति से अनिम्न पंक्ति के किसी विख्यात वैज्ञानिक को बोर्ड का सचिव नियुक्त कर सकेगा ।
(2) बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जो वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्ष निर्वहन के लिए आवश्यक समझे ।
(3) बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की अर्हताएं और अनुभव, सेवा के निबंधन और शर्तें, जिनमें वेतन और भत्ते भी हैं, वे होंगे जो बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(4) बोर्ड देश के भीतर और बाहर दोनों से कार्मिकों की सेवाएं परामर्शियों, अभ्यागत वैज्ञानिकों के रूप में ऐसे निबंधनों और शर्तों तथा पारिश्रमिक पर ले सकेगा जो बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए और उनकी संक्रियाओं को देश के भीतर सुकर बनाएगा ।
5. विशेषज्ञों की अन्वेक्षा समिति-(1) बोर्ड, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, बोर्ड को परामर्श देने और सहायता करने के लिए विशेषज्ञों, विख्यात वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों से मिलकर बनने वाली विशेषज्ञों की एक अन्वेक्षा समिति का गठन करेगा ।
(2) अन्वेक्षा समिति निम्नलिखित व्यक्तियों से मिलकर बनेगी, अर्थात्ः-
(i) विख्यात और अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक-अध्यक्ष;
(ii) भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का सचिव, पदेन-उपाध्यक्ष;
(iii) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरी अकादमी के अध्यक्ष, पदेन-सदस्य;
(iv) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट विशेषज्ञों में से तीन से अनधिक सदस्य; और
(v) बोर्ड का सचिव, पदेन-सदस्य ।
6. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, उतनी समितियां नियुक्त कर सकेगा जितनी इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के दक्ष निर्वहन और कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हों ।
(2) बोर्ड को उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, अन्य व्यक्तियों को, जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित करने की शक्ति होगी और इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा ।
7. बोर्ड की शक्तियां और कृत्य-(1) बोर्ड, विज्ञान और इंजीनियरी के उभरते हुए क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान की योजना तैयार करने, उसका संवर्धन और वित्तपोषण करने के लिए एक प्रमुख बहुविषयी अनुसंधान वित्तपोषण अभिकरण के रूप में कार्य करेगा ।
(2) बोर्ड की शक्तियों और कृत्यों में, अन्य बातों के साथ निम्नलिखित सम्मिलित होगा, -
(i) उभरते हुए क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी अनुसंधान की योजना तैयार करने, उसका संवर्धन और वित्तपोषण करने के लिए एक प्रमुख बहुविषयी अनुसंधान अभिकरण के रूप में कार्य करना;
(ii) विशेषज्ञों की अन्वेक्षा समिति द्वारा की गई सिफारिशों और दिए गए सुझावों पर विचार करना और उन पर विनिश्चय करना;
(iii) मुख्य अंतर-विषयी अनुसंधान क्षेत्रों और व्यष्टियों, समूहों या संस्थाओं की पहचान करना और अनुसंधान करने के लिए उनका वित्तपोषण करना;
(iv) विभिन्न पहचान किए गए क्षेत्रों में ऐसी संस्थाओं को शामिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्यक्रम विकसित करना जिनका अनुसंधान के संवर्धन में बहुआयामी प्रभाव होगा;
(v) वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए अवसंरचना और पर्यावरण स्थापित करने में सहायता करना;
(vi) विज्ञान और इंजीनियरी में बुनियादी अनुसंधान का संवर्धन करने के लिए शैक्षणिक संस्थाओं, अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं तथा उद्योग के बीच सहचर्य प्राप्त करना;
(vii) आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को अंगीकार करके, अनुसंधान, जिसके अंतर्गत मानीटरी और मूल्यांकन भी है, के लिए त्वरित वित्तपोषण का उपबंध करने के लिए प्रबंधन प्रणाली तैयार करना;
(viii) अन्तरराष्ट्रीय सहयोगकारी परियोजनाओं में, जहां आवश्यक या वांछनीय हो, सहभागिता पैदा करना; और
(ix) विद्यमान विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान परिषद् स्कीम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रारंभ की गई या वित्तपोषित बुनियादी अनुसंधान परियोजनाओं और कार्यक्रमों को अपने हाथ में लेना और जारी रखना ।
(3) बोर्ड, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए व्यष्टियों, शैक्षणिक संस्थाओं, अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं, उद्योगों और अन्य संगठनों को अनुदानों और ऋणों के रूप में वित्तीय सहायता दे सकेगा ।
अध्याय 3
वित्तीय सहायता मंजूर करने के लिए आवेदन
8. वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन-(1) धारा 7 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कोई आवेदन बोर्ड को ऐसे प्ररूप में किया जाएगा जो विहित किया जाए ।
(2) बोर्ड, आवेदन की परीक्षा करने के पश्चात् और ऐसी जांच करने या ऐसा स्पष्टीकरण मांगने के पश्चात् जो वह आवश्यक समझे, लिखित आदेश द्वारा, या तो वित्तीय सहायता मंजूर कर सकेगा अथवा उससे इंकार कर सकेगा ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
9. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा, इस निमित्त विधि द्वारा, किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, बोर्ड को अनुदानों और उधारों के रूप में उतनी धनराशियों का संदाय कर सकेगी जितनी वह सरकार आवश्यक समझे ।
10. विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान निधि-(1) विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान निधि के नाम से एक निधि का गठन किया जाएगा और उस निधि में निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, -
(क) धारा 9 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को दिया गया कोई अनुदान और उधार;
(ख) किसी अन्य स्रोत से, बोर्ड द्वारा प्राप्त सभी राशियों जिसमें संदान सम्मिलित हैं;
(ग) निधि से अनुदत्त रकमों की वसूलियां; और
(घ) निधि की रकम के विनिधान से कोई आय ।
(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित की पूर्ति के लिए किया जाएगा,-
(क) इस अधिनियम के उद्देश्य और इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत प्रयोजनों के लिए व्यय;
(ख) बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य व्यय;
(ग) परामर्शियों और अभ्यागत वैज्ञानिकों के पारिश्रमिक; और
(घ) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के कृत्यों का निर्वहन करने में उसके व्यय ।
11. बजट-बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा, जिसमें बोर्ड की प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शाए जाएंगे और उसे केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
12. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का पूरा विवरण दिया जाएगा और उसकी एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
13. लेखा और संपरीक्षा-(1) बोर्ड, उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके विहित करे ।
(2) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या इस अधिनियम के अधीन बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति के उस संपरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और उसे विशिष्ट रूप में बहियां, लेखा, संबंधित वाउचर और अन्य दस्तावेज और कागजपत्र पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(3) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रतिवर्ष की जाएगी और उस संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय, बोर्ड द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(4) बोर्ड, ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, अपने लेखाओं की संपरीक्षित प्रति, संपरीक्षक की रिपोर्ट के साथ, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
14. वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट का संसद् के समक्ष रखा जाना-केन्द्रीय सरकार वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षक की रिपोर्ट, उसकी प्राप्ति के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
15. बोर्ड को विवरणियों का दिया जाना-बोर्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहा कोई औद्योगिक समुत्थान या कोई संस्था, बोर्ड को, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरणियां देगा ।
(2) बोर्ड, इस धारा के अधीन दी गई किसी विवरणी की सत्यता को सत्यापित करने के लिए, किसी अधिकारी को किसी भी समय उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक समुत्थान या संस्था का निरीक्षण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।
16. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-(1) इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में नीति संबंधी प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, उसे लिखित रूप में देः
परन्तु बोर्ड को इस उपधारा के अधीन कोई निदेश दिए जाने से पहले यथासाध्य, अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।
(2) कोई प्रश्न नीति संबंधी है या नहीं, इस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
17. केन्द्रीय सरकार की बोर्ड को अतिष्ठित करने की शक्ति-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-
(क) बोर्ड, गंभीर आपात के कारण, इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है; या
(ख) बोर्ड ने, इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी निदेश के अनुपालन में या इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन अधिरोपित कृत्यों और कर्तव्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है और ऐसे व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप बोर्ड की वित्तीय स्थिति या बोर्ड के प्रशासन की हानि हुई है; या
(ग) ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण लोकहित में ऐसा करना आवश्यक हो गया है,
तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, छह मास से अनधिक की उतनी अवधि के लिए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, बोर्ड को अतिष्ठित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को अतिष्ठित करने वाली अधिसूचना के प्रकाशन पर,-
(क) सभी सदस्य, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से उस रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;
(ख) ऐसी सभी शक्तियों, कृत्यों और कर्तव्यों का, जिनका प्रयोग या निर्वहन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन, किया जा सकता है, उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन किए जाने तक ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा जो केन्द्रीय सरकार निदेश करे, प्रयोग और निर्वहन किया जाएगा; और
(ग) बोर्ड के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन सभी संपत्ति, उपधारा (3) के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन किए जाने तक केन्द्रीय सरकार में निहित रहेगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिक्रमण काल की समाप्ति पर, केन्द्रीय सरकार, नई नियुक्ति करके बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में, ऐसा या ऐसे व्यक्ति, जिसने या जिन्होंने उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन अपने पद रिक्त किए हैं, नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझा जाएगा/समझे जाएंगेः
परन्तु केन्द्रीय सरकार, अतिक्रमण काल की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय, इस उपधारा के अधीन कार्रवाई कर सकेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की और उन परिस्थितियों की, जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई है, पूरी रिपोर्ट यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
18. प्रत्यायोजन-बोर्ड, लिखित, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, बोर्ड के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य या किसी अधिकारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियां और कृत्य (धारा 21 के अधीन शक्ति के सिवाय) जो वह आवश्यक समझे, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
19. सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या बोर्ड या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य या सरकार के या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी या केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
20. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 3 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड के सदस्यों की अर्हताएं और अनुभव, पदावधि और अन्य भत्ते;
(ख) धारा 3 की उपधारा (6) के अधीन अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;
(ग) धारा 5 के अधीन अन्वेक्षा समिति का गठन;
(घ) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन समितियों का गठन;
(ङ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन का प्ररूप;
(च) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जब बोर्ड धारा 11 के अधीन अपना बजट और धारा 12 के अधीन अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा;
(छ) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन लेखाओं के वार्षिक विवरण का प्ररूप और वह तारीख जिससे पूर्व उस धारा की उपधारा (4) के अधीन लेखाओं की संपरीक्षित प्रति केन्द्रीय सरकार को भेजी जा सकेगी;
(ज) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए अथवा जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना है या किया जाए ।
21. विनियम बनाने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, इस अधिनियम के उपबंधों को साधारणतः कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम और नियमों से संगत विनियम बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के सचिव और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की अर्हताएं और अनुभव, सेवा के निबंधन और शर्तें जिनमें वेतन और भत्ते सम्मिलित हैं;
(ख) वह प्ररूप जिसमें, और वह समय जिस पर, धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को, विवरणियां दी जा सकेंगी ।
22. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी और यदि उस सत्र या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पू्र्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उस नियम या विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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