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विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 ( Legal Metrology Act, 2009 )


 

विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009

(2010 का अधिनियम संख्‍यांक 1)

[13 जनवरी, 2010]

बाटों और मापों के मानक नियत करने और प्रवृत्त करने, बाटों, मापों,

और ऐसे अन्‍मालों में, जिनका विक्रय या वितरण तोल,

माप या संख्‍या से किया जाता हैं, व्‍व्यापार या वाणिज्य‍

 को विनियमित करने तथा उनसे संबंधित

या उनके आनुषंगिक

विषयों के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य‍ के साठवें वर्ष में संसद द्वारा निम्‍नलिखित रूप में यह अधिनियम हो: ––

अध्‍याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त‍ नाम, विस्‍तार और प्रारंभ––(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त‍ नाम विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 है ।

(2) इसका विस्‍तार संपूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्‍द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्‍न-भिन्‍न उपबंधों के लिए भिन्‍न-भिन्‍न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

2. परिभाषाएं––इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्‍यथा अपेक्षित न हो, ––

(क) “नियंत्रक” से धारा 14 के अधीन नियुक्‍त विधिक मापविज्ञान नियंत्रक अभिप्रेत है;

(ख) किसी बाट या माप के संबंध में “व्‍यौहारी” से ऐसा व्‍यक्‍ति अभिप्रेत है, जो चाहे नकदी के लिए या आस्‍थगित संदाय के लिए अथवा कमीशन, पारिश्रमिक या अन्‍य मूल्‍यवान प्रतिफल के लिए प्रत्‍यक्षत: या अन्‍यथा किसी ऐसे बाट या माप के क्रय, विक्रय, प्रदाय या वितरण का कारबार चलाता है और इसके अंतर्गत ऐसा कोई कमीशन अभिकर्ता, कोई आयातकर्ता, कोई विनिर्माता भी है, जो उसके द्वारा विनिर्मित किसी बाट या माप का व्‍यौहारी से भिन्‍न किसी व्‍यक्‍ति को विक्रय, प्रदाय, वितरण या अन्‍यथा परिदान करता है ;

(ग) “निदेशक” से धारा 13 के अधीन नियुक्‍त विधिक मापविज्ञान निदेशक अभिप्रेत है;

(घ) “निर्यात” से उसके व्‍याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित भारत से भारत के बाहर किसी स्‍थान को ले जाना अभिप्रेत है;

(ङ) “आयात” से उसके व्‍याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित भारत के बाहर किसी स्‍थान से भारत में लाना अभिप्रेत है;

(च) “लेबल” से कोई ऐसी लिखित, चिह्नित, स्‍टांपित, मुद्रित या आलेखित सामग्री अभिप्रेत है, जो किसी पैकेज-पूर्व वस्‍तु पर चिपकाई गई है या दिखाई देती है;

(छ) “विधिक मापविज्ञान” से मापविज्ञान का वह भाग अभिप्रेत है जो तोलने और मापने की इकाइयों, तोलने और मापने की पद्धतियों तथा तोलने और मापने के उपकरणों को, ऐसी आज्ञापक तकनीकी और विधिक अपेक्षाओं की बाबत मानता है, जिनका उद्देश्य‍य तोलों और मापों की सुरक्षा और शुद्धता की दृष्‍टि से लोक गारंटी सुनिश्‍िचत करना है;

(ज) “विधिक मापविज्ञान अधिकारी” से धारा 13 और धारा 14 के अधीन नियुक्‍त अपर निदेशक, अपर नियंत्रक, संयुक्त‍ निदेशक, संयुक्त‍ नियंत्रक, उप निदेशक, उप नियंत्रक, सहायक निदेशक, सहायक नियंत्रक और निरीक्षक अभिप्रेत है;

(झ) किसी बाट या माप के संबंध में “विनिर्माता” से ऐसा कोई व्‍यक्‍ति अभिप्रेत है जो, ––

(i) बाट या माप का विनिर्माण करता है,

(ii) ऐसे बाट या माप के एक या अधिक भागों का विनिर्माण करता है और अन्‍य भागों को अर्जित करता है तथा उन भागों को जोड़ने के पश्‍चात्, अंतिम उत्‍पाद का अपने द्वारा विनिर्मित, यथास्‍थिति, बाट या माप के रूप में, दावा करता है,

(iii) ऐसे बाट या माप के किसी भाग का विनिर्माण नहीं करता है किंतु दूसरों द्वारा विनिर्मित उसके भागों को जोड़ता है और अंतिम उत्‍पाद का अपने द्वारा विनिर्मित, यथास्‍थिति, बाट या माप के रूप में दावा    करता है,

(iv) किसी ऐसे पूर्ण बाट या माप पर, जो किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति द्वारा निर्मित या विनिर्मित किया गया है, अपना चिह्न लगाता है या लगवाता है और ऐसे उत्‍पाद का अपने या उसके द्वारा निर्मित या विनिर्मित, यथास्‍थिति, बाट या माप के रूप में दावा करता है;

(ञ) “अधिसूचना” से, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(ट) “संरक्षण” से यह अवधारित करने के प्रयोजन के लिए कि किसी मनुष्‍य या पशु की भलाई की सुरक्षा के लिए अथवा किसी वस्‍तु, वनस्‍पति या चीज की या तो अलग-अलग या सामूहिक रूप से संरक्षा के लिए कोई उपाय किए जाने की आवश्‍यकता है, किसी बाट या माप से प्राप्‍त पाठ्यांक का उपयोग अभिप्रेत है;

(ठ) “पैकेज-पूर्व वस्‍तु” से ऐसी वस्‍तु अभिप्रेत है जो क्रेता के उपस्‍थित हुए बिना किसी भी प्रकृति के पैकेज में, चाहे सीलबंद हो या नहीं, रखी गई है, जिससे उसमें अंतर्विष्‍ट उत्‍पाद की पूर्व अवधारित मात्रा रहे;

(ड) “व्‍यक्‍ति” के अंतर्गत निम्‍निलिखित हैं, ––

(i) कोई हिंदू अविभक्‍त कुटुंब,

(ii) प्रत्‍येक विभाग या कार्यालय,

(iii) सरकार द्वारा स्‍थापित या गठित प्रत्‍येक संगठन,

(iv) भारत के राज्‍यक्षेत्र के भीतर प्रत्‍येक स्‍थानीय प्राधिकारी,

(v) कोई कंपनी, फर्म और व्‍यष्‍टि संगम,

(vi) किसी अधिनियम के अधीन गठित न्‍यास,

(vii) किसी अधिनियम के अधीन गठित प्रत्‍येक सहकारी सोसाइटी,

(viii) सोसाइटी रजिस्‍ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्‍ट्रीकृत प्रत्‍येक अन्‍य सोसाइटी;

(ढ) “परिसर” के अंतर्गत निम्‍नलिखित हैं: ––

(i) ऐसा कोई स्‍थान, जहां कोई कारबार, उद्योग, उत्‍पादन या संव्‍यवहार किसी व्‍यक्‍ति द्वारा चाहे स्‍वयं या किसी अभिकर्ता के माध्‍यम से चलाया जाता है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जिसके अंतर्गत ऐसा व्‍यक्‍ति भी है, जो ऐसे परिसरों में कारबार चलाता है,

(ii) ऐसा कोई भांडागार, गोदाम या अन्‍य स्‍थान, जहां कोई बाट या माप या अन्‍य माल भंडारित या प्रदर्शित किए जाते हैं,

(iii) ऐसा कोई स्‍थान, जहां किसी व्‍यापार या संव्‍यवहार से संबंधित लेखाबहियां या अन्‍य दस्‍तावेज रखे जाते हैं,

(iv) कोई निवास गृह, यदि उसके किसी भाग का प्रयोग कोई कारबार, उद्योग, उत्‍पादन या व्‍यापार चलाने के प्रयोजन के लिए किया जाता है,

(v) ऐसा कोई यान या जलयान अथवा कोई अन्‍य चल युक्‍ति, जिसकी सहायता से कोई संव्‍यवहार या कारबार किया जाता है;

(ण) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(त) “मरम्‍मतकर्ता” से ऐसा व्‍यक्‍ति अभिप्रेत है, जो किसी बाट या माप की मरम्‍मत करता है और इसके अंतर्गत ऐसा व्‍यक्‍ति भी है, जो ऐसे बाट या माप को अनुकूल बनाता है, उसकी सफाई करता है, उसका स्‍नेहन करता है या उस पर रंग करता है अथवा ऐसे बाट या माप की कोई अन्‍य सेवा प्रदान करता है जिससे यह सुनिश्‍िचत हो सके कि ऐसा बाट या माप इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन नियत मानकों के अनुरूप है;

(थ) किसी संघ राज्‍यक्षेत्र के संबंध में “राज्‍य सरकार” से उसका प्रशासक अभिप्रेत है;

(द) “विक्रय” से, उसके व्‍याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित किसी बाट, माप या अन्‍य माल में एक व्‍यक्‍ति द्वारा किसी दूसरे व्‍यक्‍ति को नकदी के लिए या आस्‍थगित संदाय के लिए या किसी अन्‍य मूल्‍यवान प्रतिफल के लिए, संपत्ति का अंतरण अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत किस्‍तों में संदाय की भाड़ा-क्रय प्रणाली या किसी अन्‍य प्रणाली से किसी बाट, माप या अन्‍य माल का अंतरण भी है, किंतु इसके अंतर्गत ऐसे बाट, माप या अन्‍य माल का बंधक या आडमान अथवा उस पर प्रभार या उसकी गिरवी नहीं है;

(ध) “मुद्रा” से ऐसी युक्‍ति या प्रक्रिया अभिप्रेत है, जिससे कोई स्‍टाम्‍प बनाया जाता है और उसमें कोई तार या अन्‍य उपसाधन सम्‍मिलित है, जिसका प्रयोग किसी स्‍टाम्‍प की अखंडता सुनिश्‍िचत करने के लिए किया जाता है;

(न) “स्‍टाम्‍प” से ऐसा चिह्न अभिप्रेत है जो छापने, ढालने, उत्‍कीर्णन, निक्षारण, दाहांकन, पूर्व प्रतिबलित कागज मुद्रा के अंकन या किसी अन्‍य प्रक्रिया द्वारा किसी बाट या माप के संबंध में निम्‍नलिखित उद्देश्‍य से बनाया जाता है––

(i) यह प्रमाणित करने के लिए कि ऐसा बाट या माप इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट मानक के अनुरूप है, या

(ii) यह उपदर्शित करने के लिए कि कोई चिह्न जो पहले यह प्रमाणित करने के लिए उस पर लगाया गया था कि ऐसा बाट या माप इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट मानकों के अनुरूप है, मिटा दिया गया है;

(प) “संव्‍यवहार” से निम्‍नलिखित अभिप्रेत है, ––

(i) कोई संविदा, चाहे वह विक्रय, क्रय, विनिमय या किसी अन्‍य प्रयोजन के लिए है, या

(ii) स्‍वामिस्‍व, चुंगी, शुल्‍क या अन्‍य देयों का कोई निर्धारण, या

(iii) किसी किए गए कार्य, देय मजदूरी या दी गई सेवाओं का निर्धारण;

(फ) “सत्‍यापन” के अंतर्गत उसके व्‍याकरणिक रूपभेदों और सजातीय पदों सहित किसी बाट या माप के संबंध में, ऐसे बाट या माप की तुलना, जांच, परख करने या अनुकूलन की ऐसी प्रक्रिया भी है जिससे यह सुनिश्‍िचत हो जाए कि ऐसा बाट या माप इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन नियत मानकों के अनुरूप है तथा इसके अंतर्गत पुन: सत्‍यापन और अशांकन भी हैं;

(ब) “बाट या माप” से इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट या माप अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत तोलने या मापने का उपकरण है ।

3. इस अधिनियम के उपबंधों का किसी अन्‍विधि के उपबंधों पर अध्‍यारोही प्रभाव होना––इस अधिनियम के उपबंध इस अधिनियम से भिन्‍न किसी अधिनियमिति में अथवा इस अधिनियम से भिन्‍न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

अध्‍याय 2

मानक बाट और माप

4. बाटों और मापों की इकाइयों का मीटरी प्रणाली पर आधारित होना––बाट या माप की प्रत्‍येक इकाई, इकाइयों की अंतरराष्‍ट्रीय प्रणाली पर आधारित मीटरी प्रणाली के अनुसार होगी ।

5. बाटों और मापों की आधार इकाई––(1) (i) लंबाई की मीटर;

(ii) द्रव्‍यमान की किलोग्राम;

(iii) समय की सेकिंड;

(iv) विद्युत धारा की एम्‍िपयर;

(v) उष्‍मागतिक तापमान की केल्‍विन;

(vi) ज्‍योति तीव्रता की केंडेला; और

(vii) पदार्थ के परिमाण की मोल,

आधार इकाई होगी ।

(2) उपधारा (1) में उल्‍लिखित आधार इकाइयों, व्‍युत्‍पन्‍न इकाइयों और अन्‍य इकाइयों के विनिर्देश ऐसे होंगे जो विहित किए जाएं ।

6. अंकों की आधार इकाई––(1) अंकों की आधार इकाई भारतीय अंकों के अंतरराष्‍ट्रीय रूप की इकाई होगी ।

(2) प्रत्‍येक अंक, दशमलव प्रणाली के अनुसार होगा ।

(3) अंकों के दशमलव गुणज और उपगुणज ऐसे अभिधान वाले होंगे और ऐसी रीति से लिखे जाएंगे, जो विहित की जाए ।

7. बाट और माप की मानक इकाइयां––(1) धारा 5 में विनिर्दिष्‍ट बाटों और मापों की आधार इकाइयां बाटों और मापों की मानक इकाइयां होंगी ।

(2) धारा 6 में विनिर्दिष्‍ट अंकों की आधार इकाई अंकों की मानक इकाई होगी ।

(3) धारा 5 में उल्‍लिखित आधार, व्‍युत्‍पन्‍न और अन्‍य इकाइयों का मूल्‍य निकालने के प्रयोजन के लिए, केन्‍द्रीय सरकार ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, वस्‍तुओं या उपस्‍करों को तैयार करेगी या तैयार करवाएगी ।

(4) भौतिक लक्षण, आकृति, संरचनात्‍मक ब्‍यौरे, सामग्रियां, उपस्‍कर, कार्यपालन, सह्यता, पुन: सत्‍यापन की अवधि, परीक्षणों की पद्धतियां या प्रक्रियाएं ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।

8. मानक बाट, माप या अंक––(1) कोई बाट या माप, जो ऐसे बाट या माप की मानक इकाई के अनुरूप है और धारा 7 के ऐसे उपबंधों के भी अनुरूप हैं, जो उसे लागू हैं, मानक बाट या माप होगा ।

(2)  कोई अंक, जो धारा 6 के उपबंधों के अनुरूप है, मानक अंक होगा ।

(3) मानक बाट, माप या अंक से भिन्‍न किसी बाट, माप या अंक को मानक बाट, माप या अंक के रूप में प्रयुक्‍त नहीं किया जाएगा ।

(4) किसी बाट या माप का विनिर्माण या आयात तभी किया जाएगा जब वह धारा 8 के अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट या माप के मानकों के अनुरूप हो:

परंतु इस धारा के उपबंध निर्यात के लिए या किसी वैज्ञानिक अन्‍वेषण या अनुसंधान के प्रयोजन के लिए अनन्‍य रूप से किए गए विनिर्माण को लागू नहीं होंगे ।

9. निर्देश, द्वितीयिक और कार्यसाधक मानक––(1) बाटों और मापों के निर्देश मानक, द्वितीयिक मानक और कार्यसाधक मानक ऐसे होंगे, जो विहित किए जाएं ।

(2) प्रत्‍येक ऐसे निर्देश मानक, द्वितीयिक मानक और कार्यसाधक मानक को ऐसी रीति में और ऐसी फीस के संदाय के पश्‍चात्, जो विहित की जाए सत्‍यापित और स्‍टांपित किया जाएगा ।

(3) प्रत्‍येक ऐसे निर्देश मानक, द्वितीयिक मानक और कार्यसाधक मानक को, जिनका उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार सत्‍यापन और स्‍टांपन नहीं किया जाता है, विधिमान्‍य मानक नहीं समझा जाएगा ।

10. विशिष्‍प्रयोजनों के लिए बाट या माप का उपयोग––किसी माल, माल के वर्ग अथवा वचनबंध के संबंध में कोई संव्‍यवहार, व्‍यौहार या संविदा ऐसे बाट, माप या अंक द्वारा की जाएगी, जो विहित किया जाए ।

11. बाट, माप या अंक की मानक इकाइयों के निबंधनों के अनुसार से अन्‍यथा कोटेशन आदि का प्रतिषेध––कोई व्‍यक्‍ति, किसी माल, चीज या सेवा के संबंध में बाट, माप या अंक की मानक इकाई के निबंधनों के अनुसार से अन्‍यथा––

(क) मौखिक शब्‍दों द्वारा या अन्‍यथा, किसी कीमत या प्रभार को कोट नहीं करेगा या उसकी घोषणा नहीं करेगा; या

(ख) कोई कीमत सूची, बीजक, कैशमैमो या अन्‍य दस्‍तावेज जारी या प्रदर्शित नहीं करेगा; या

(ग) कोई विज्ञापन, पोस्‍टर या अन्‍य दस्‍तावेज तैयार या प्रकाशित नहीं करेगा; या

(घ) पैकेज पूर्व वस्‍तु की शुद्ध मात्रा को उपदर्शित नहीं करेगा; या

(ङ) किसी संव्‍यवहार या संरक्षा, किसी मात्रा या विमा के संबंध में अभिव्‍यक्‍ति नहीं करेगा ।     

(2) उपधारा (1) के उपबंध किसी माल, चीज या सेवा के निर्यात के लिए लागू नहीं होंगे ।

12. मानक बाट, माप या अंक के प्रतिकूल किसी रूढ़ि, प्रथा आदि का शून्‍होना––किसी भी प्रकार की कोई रूढ़ि, प्रथा, व्‍यवहार या पद्धति, जो किसी व्‍यक्‍ति को किसी वस्‍तु, चीज या सेवा से संबंधित संविदा या अन्‍य करार में तोल, माप या संख्‍या द्वारा विनिर्दिष्‍ट मात्रा से अधिक या कम की उक्‍त वस्‍तु, चीज की मात्रा या सेवा की मांग करने, प्राप्‍त करने अथवा मांग करवाने या प्राप्‍त करवाने की अनुज्ञा देती है, शून्‍य होगी ।

अध्‍याय 3

निदेशक, नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारियों की नियुक्‍ति और शक्‍तियां

13. निदेशक, विधिक मापविज्ञान अधिकारी और अन्‍कर्मचारियों की नियुक्‍ति––(1) केन्‍द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, विधिक मापविज्ञान निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्‍त निदेशक, उप निदेशक, सहायक निदेशक और अन्‍य कर्मचारियों की, अंतरराज्‍यीय व्‍यापार और वाणिज्‍य के संबंध में इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्‍तियों का प्रयोग करने और उन पर अधिरोपित कर्तव्‍यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्‍ति कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त निदेशक और विधिक मापविज्ञान अधिकारियों की अर्हताएं ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।

(3) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त निदेशक और प्रत्‍येक विधिक मापविज्ञान अधिकारी, ऐसी स्‍थानीय सीमाओं के संबंध में, ऐसी शक्‍ितयों का प्रयोग और ऐसे कृत्‍यों का निर्वहन करेगा, जो केन्‍द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्‍ट करे ।

(4) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त प्रत्‍येक विधिक मापविज्ञान अधिकारी, निदेशक के साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अधीन रहते हुए शक्‍तियों का प्रयोग और कर्तव्‍यों का निवर्हन करेगा ।

(5) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी कर्तव्‍य का पालन करने के लिए प्राधिकृत निदेशक, नियंत्रक और प्रत्‍येक विधिक, मापविज्ञान अधिकारी, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक समझा जाएगा ।

(6) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी कर्तव्‍य का पालन करने के लिए प्राधिकृत निदेशक, नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारी के विरुद्ध किसी ऐसी बात के संबंध में, जो इस अधिनियम के अधीन या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या की जानी आशयित है, कोई वाद, अभियोजन या अन्‍य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।

(7) केन्‍द्रीय सरकार, राज्‍य सरकार की सहमति से और ऐसी शर्तों, सीमाओं और निर्बन्‍धनों के अधीन रहते हुए, जो वह इस निमित्त विनिर्दिष्‍ट करे, इस अधिनियम के अधीन निदेशक की ऐसी शक्‍तियों को, जिन्‍हें वह ठीक समझे, राज्‍य में विधिक मापविज्ञान नियंत्रक को प्रत्‍यायोजित कर सकेगी और यदि ऐसे नियंत्रक की यह राय है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्‍यक या समीचीन है, तो वह उसे प्रत्‍यायोजित शक्‍तियों में से ऐसी शक्‍तियां, जिन्‍हें वह ठीक समझे किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी को प्रत्‍यायोजित कर सकेगा तथा जहां ऐसे नियंत्रक द्वारा शक्‍तियों का कोई ऐसा प्रत्‍यायोजन किया जाता है, वहां वह व्‍यक्‍ति, जिसको ऐसी शक्‍तियां प्रत्‍यायोजित की जाती हैं, उन शक्‍तियों का प्रयोग उसी रीति से और वैसे ही प्रभावी रूप से करेगा मानो वे इस अधिनियम द्वारा, न कि प्रत्‍यायोजन के तौर पर, उसे सीधे प्रदत्त की गई हों ।

(8) जहां, उपधारा (7) के अधीन शक्‍तियों का कोई प्रत्‍यायोजन किया जाता है, वहां इस प्रकार प्रत्‍यायोजित शक्‍तियों का प्रयोग निदेशक के साधारण अधीक्षण, निदेशन और मार्गदर्शन के अधीन किया जाएगा ।

14. नियंत्रक, विधिक मापविज्ञान अधिकारियों और अन्‍कर्मचारियों की नियुक्‍ति––(1) राज्‍य सरकार, अधिसूचना द्वारा, राज्‍य के लिए एक विधिक मापविज्ञान नियंत्रक, अपर नियंत्रक, संयुक्‍त नियंत्रक, उप नियंत्रक, सहायक नियंत्रक, निरीक्षक और अन्‍य कर्मचारी की, अंत: राज्‍यीय व्‍यापार और वाणिज्‍य के संबंध में इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्‍तियों का प्रयोग करने और उन पर अधिरोपित कर्तव्‍यों का निर्वहन करने के लिए, नियुक्‍ति कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारियों की अर्हताएं ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।

(3) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त नियंत्रक और प्रत्‍येक विधिक मापविज्ञान अधिकारी, ऐसी स्‍थानीय सीमाओं के संबंध में, ऐसी शक्‍तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्‍यों का निर्वहन करेगा, जो राज्‍य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्‍ट करे ।

(4) उपधारा (1) के अधीन नियुक्‍त प्रत्‍येक विधिक मापविज्ञान अधिकारी, नियंत्रक के साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अधीन शक्‍तियों का प्रयोग और कर्तव्‍यों का निर्वहन करेगा ।

15. निरीक्षण, अभिग्रहण आदि की शक्‍ति––(1) निदेशक, नियंत्रक या कोई विधिक मापविज्ञान अधिकारी, यदि उसके पास, चाहे किसी व्‍यक्‍ति द्वारा उसे दी गई और लेखबद्ध कर ली गई किसी जानकारी से अथवा वैयक्‍तिक ज्ञान से अथवा अन्‍यथा यह विश्‍वास करने का कारण है कि कोई बाट या माप या अन्‍य माल, जिसके संबंध में कोई व्‍यापार या वाणिज्‍य हुआ है

या होना आशयित है और जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है या किया जाना संभाव्‍य है, किसी परिसर में या तो रखा गया है या छिपाया गया है अथवा परिवहन के अनुक्रम में है, ––

(क) ऐसे किसी परिसर में किसी भी युक्‍तियुक्‍त समय पर प्रवेश कर सकेगा और किसी बाट, माप या अन्‍य माल के लिए, जिसके संबंध में व्‍यापार और वाणिज्‍य हुआ है या होना आशयित है और उससे संबंधित किसी अभिलेख, रजिस्‍टर या अन्‍य दस्‍तावेज के लिए तलाशी ले सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा;

(ख) ऐसे किसी बाट, माप या अन्‍य माल को और किसी अभिलेख, रजिस्‍टर या अन्‍य दस्‍तावेज या वस्‍तु को, जिसके बारे में उसके पास यह विश्‍वास करने का कारण है कि उससे इस बात का साक्ष्‍य मिल सकता है कि किसी व्‍यापार और वाणिज्‍य के दौरान या उसके संबंध में इस अधिनिमय के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है या किया जाना संभाव्‍य है, अभिगृहीत कर सकेगा ।

(2) निदेशक, नियंत्रक या कोई विधिक मापविज्ञान अधिकारी, उपधारा (1) में निर्दिष्‍ट बाट या माप से संबंधित प्रत्‍येक दस्‍तावेज या अन्‍य अभिलेख पेश करने की भी अपेक्षा कर सकेगा और ऐसे बाट या माप को अभिरक्षा में रखने वाला व्‍यक्‍ति ऐसी अध्‍यपेक्षा का अनुपालन करेगा ।

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन अभिगृहीत कोई माल शीघ्रतया या प्रकृत्‍या क्षयशील है तो निदेशक, नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी ऐसे माल का ऐसी रीति में व्‍ययन कर सकेगा, जो विहित की जाए ।

(4) इस धारा के अधीन की गई प्रत्‍येक तलाशी या अभिग्रहण, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के तलाशी और अभिग्रहण से संबंधित उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।

16. समपहरण––(1) प्रत्‍येक अमानक या असत्‍यापित बाट या माप और धारा 18 के उल्‍लंघन में बनाया गया प्रत्‍येक पैकेज, जिसका प्रयोग किसी व्‍यापार या वाणिज्‍य के दौरान या उसके संबंध में किया गया है और जिसे धारा 15 के अधीन अभिगृहीत किया गया है, राज्‍य सरकार को समपहृत होने के दायित्‍वाधीन होगा:

परंतु ऐसा असत्‍यापित बाट या माप राज्‍य सरकार को समपहृत नहीं होगा, यदि वह व्‍यक्‍ति, जिससे ऐसा बाट या माप अभिगृहीत किया गया था, उसे ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सत्‍यापित और स्‍टाम्‍िपत करा लेता है ।

(2) धारा 15 के अधीन अभिगृहीत, किंतु उपधारा (1) के अधीन समपहृत न किए गए प्रत्‍येक बाट, माप या अन्‍य माल का ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, व्‍ययन किया जाएगा ।

17. विनिर्माता, आदि द्वारा अभिलेखों और रजिस्‍टरों का रखा जाना––(1) बाट या माप का प्रत्‍येक विनिर्माता, मरम्‍मतकर्ता या व्‍यौहारी, ऐसे अभिलेख और रजिस्‍टर रखेगा, जो विहित किए जाएं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन रखे गए अभिलेख और रजिस्‍टर, निरीक्षण के समय धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन उक्‍त प्रयोजन के लिए प्राधिकृत व्‍यक्‍तियों के समक्ष पेश किए जाएंगे ।

18. पूर्व पैक की गई वस्‍तुओं पर घोषणाएं––(1) कोई भी व्‍यक्‍ति, किसी पूर्व पैक की गई वस्‍तु को तब तक विनिर्मित, पैक, विक्रीत, आयात, वितरित, परिदत्त, प्रस्‍थापित, अभिदर्शित नहीं करेगा या विक्रय के लिए नहीं रखेगा, जब तक ऐसा पैकेज ऐसे मानक परिमाण या संख्‍या में न हों और उस पर ऐसी रीति से ऐसी घोषणाएं और विशिष्‍टियां न हों, जो विहित की जाएं ।

(2) किसी पूर्व पैक की गई वस्‍तु की फुटकर विक्रय कीमत का उल्‍लेख करने वाले किसी विज्ञापन में, पैकेज में रखी हुई वस्‍तु का शुद्ध परिमाण या संख्‍या के बारे में ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, एक घोषणा अंतर्विष्‍ट होगी ।

19. बाट या माप के आयातकर्ता के लिए रजिस्‍ट्रीकरण––कोई भी व्‍यक्‍ति किसी बाट या माप का आयात तब तक नहीं करेगा, जब तक वह ऐसी रीति में और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाएं, निदेशक के पास रजिस्‍ट्रीकृत न हो ।

20. अमानक बाटों और मापों का आयात किया जाना––किसी भी बाट या माप का, चाहे एकल रूप में या किसी मशीन के भाग या घटक के रूप में तभी आयात किया जाएगा, जब वह इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्‍थापित बाट या माप मानकों के अनुरूप हो ।

21. विधिक मापविज्ञान में प्रशिक्षण––(1) विधिक मापविज्ञान और ज्ञान की अन्‍य सहबद्ध शाखाओं में प्रशिक्षण देने के लिए बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 (1976 का 60) के उपबंधों के अधीन स्‍थापित “भारतीय विधिक मापविज्ञान संस्‍थान” (जिसे इसमें इसके पश्‍चात् “संस्‍थान” कहा गया है) इस अधिनियम के तत्‍स्‍थानी उपबंधों के अधीन स्‍थापित किया गया समझा जाएगा ।

(2) संस्‍थान का प्रबंध और नियंत्रण, अध्‍यापन, कर्मचारिवृंद और अन्‍य कर्मचारी, उसमें प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या, वे अर्हताएं, जो उसमें प्रवेश हेतु पात्र होने के लिए किसी व्‍यक्‍ति के पास होंगी, ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।

22. प्रतिमान का अनुमोदन––प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, किसी बाट या माप का विनिर्माण या आयात करने से पूर्व ऐसी रीति से, ऐसी फीस के संदाय पर और ऐसे प्राधिकारी से, जो विहित किया जाए, उस बाट या माप के प्रतिमान का अनुमोदन प्राप्‍त करेगा:

परंतु प्रतिमान का ऐसा अनुमोदन, किसी ढलवां लोहे, तांबे, बुलियन या कैरट बाट या किसी किरणपुंज मान, लंबाई मापों (जो मापमानी टेप नहीं हैं), जिनका सामान्‍यतया वस्‍त्र या काष्‍ठ मापने के लिए फुटकर व्‍यापार में उपयोग किया जाता है, क्षमता में बीस लीटर से अनधिक क्षमता माप, जिनका सामान्‍यतया मिट्टी का तेल, दूध या पेय लिकरों का माप करने के लिए फुटकर व्‍यापार में उपयोग किया जाता है, के संबंध में अपेक्षित नहीं होगा:

परन्‍तु यह और कि यदि विहित प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि किसी ऐसे बाट या माप का प्रतिमान, जो भारत से बाहर किसी देश में अनुमोदित किया गया है, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्‍थापित मानकों के अनुरूप है तो वह ऐसे प्रतिमान का किसी परीक्षण के बिना या ऐसे परीक्षण के पश्‍चात्, जो वह ठीक समझे, अनुमोदन कर सकेगा ।

23. अनुज्ञप्‍ति के बिना बाट या माप के विनिर्माण, मरम्‍मत या विक्रय का प्रतिषेध––(1) कोई भी व्‍यक्‍ति, किसी बाट या माप का तब तक विनिर्माण, मरम्‍मत या विक्रय नहीं करेगा अथवा मरम्‍मत या विक्रय के लिए उसे प्रस्‍थापित, अभिदर्शित नहीं करेगा या कब्‍जे में नहीं रखेगा, जब तक वह उपधारा (2) के अधीन नियंत्रक द्वारा की गई अनुज्ञप्‍ति धारित न करता हो:

परंतु किसी विनिर्माता से अपने स्‍वयं के बाट और माप की मरम्‍मत के लिए उसके विनिर्माण के राज्‍य से भिन्‍न किसी राज्‍य में मरम्‍मत की कोई अनुज्ञप्‍ति अपेक्षित नहीं होगी ।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए, नियंत्रक ऐसे प्ररूप और रीति से, ऐसी शर्तों पर, ऐसी अवधि और अधिकारिता के ऐसे क्षेत्र के लिए तथा ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, अनुज्ञप्‍ति जारी करेगा ।

अध्‍याय 4

बाट या माप का सत्‍यापन और स्‍टाम्‍पन

24. बाट या माप का सत्‍यापन और स्‍टाम्‍पन––(1) प्रत्‍येक ऐसा व्‍यक्‍ति, जिसके कब्‍जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में कोई बाट या माप ऐसी परिस्‍थितियों में है, जो यह उपदर्शित करती हैं कि ऐसे बाट या माप का उसके द्वारा किसी संव्‍यवहार में या संरक्षा के लिए उपयोग किया जा रहा है या किया जाना आशयित या संभाव्‍य है, ऐसे बाट या माप को ऐसे उपयोग में लाने से पूर्व, ऐसी फीस का संदाय किए जाने पर, जो विहित की जाए, ऐसे स्‍थान पर और ऐसे समय के दौरान, जो नियंत्रक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्‍ट करे, सत्‍यापित कराएगा ।

(2) केंद्रीय सरकार, ऐसे बाट और माप की किस्‍में विहित कर सकेगी, जिनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केन्‍द्र द्वारा सत्‍यापन किया जाना है ।

(3) सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र, यथास्‍थिति, केंद्रीय सरकार या राज्‍य सरकार द्वारा, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर तथा ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, अधिसूचित किया जाएगा ।

(4) सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र, उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट और माप के सत्‍यापन के लिए ऐसे निबंधनों और शर्तों पर ऐसी अर्हताएं और अनुभव रखने वाले व्‍यक्‍तियों को नियुक्‍त करेगा या लगाएगा और ऐसी फीस का संग्रहण करेगा, जो विहित की जाएं ।

अध्‍याय 5

अपराध और शास्‍तियां

25. अमानक बाट या माप के उपयोग के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट, यथास्‍थिति, बाट या माप मानकों या अंक मानकों से भिन्‍न किसी बाट या माप का उपयोग करेगा या उपयोग के लिए उसे रखेगा या किसी अंक का उपयोग करेगा, जुर्माने से, जो पच्‍चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

26. बाट और माप के परिवर्तन के लिए शास्‍ति––जो कोई किसी व्‍यक्‍ति को प्रवंचित करने की दृष्‍टि से या यह जानते हुए या यह विश्‍वास करने का कारण होते हुए कि उससे किसी व्‍यक्‍ति को प्रवंचित किए जाने की संभावना है, किसी निर्देश मानक, द्वितीयक मानक या कार्यसाधक मानक को किसी प्रकार बिगाड़ेगा या परिवर्तित करेगा या किसी बाट या माप में वृद्धि या कमी करेगा या परिवर्तन करेगा, सिवाय उस दशा के, जहां ऐसा परिवर्तन सत्‍यापन पर उसमें पाई गई किसी भूल का सुधार करने के लिए किया जाता है, वह जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

27. अमानक बाट या माप के विनिर्माण या विक्रय के लिए शास्‍ति––ऐसा प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, जो किसी ऐसे बाट या माप का जो––

(क) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट या माप मानकों के अनुरूप नहीं है; या

(ख) जिस पर बाट, माप या अंक का ऐसा कोई अंतरालेखन है, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट, माप या अंक मानकों के अनुरूप नहीं है,

सिवाय उस दशा के, जहां इस अधिनियम के अधीन उसे ऐसा करने की अनुमति दी गई है, विनिर्माण करेगा या विनिर्माण कराएगा अथवा विक्रय करेगा या विक्रय के लिए प्रस्‍थापित करेगा, अभिदर्शित करेगा या उसे कब्‍जे में रखेगा, वह जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

28. विहित मानकों के उल्‍लंघन में कोई संव्‍यवहार, व्‍यौहार या संविदा करने के लिए शास्‍ति––जो कोई धारा 10 के अधीन विनिर्दिष्‍ट बाट और माप मानकों के उल्‍लंघन में कोई संव्‍यवहार, व्‍यौहार या संविदा करेगा, वह जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

29. अमानक इकाइयों को कोट करने या प्रकाशित करने, आदि के लिए शास्‍ति––जो कोई धारा 11 का अतिक्रमण करेगा, वह जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

30. मानक बाट या माप के उल्‍लंघन में संव्‍यवहारों के लिए शास्‍ति––जो कोई, ––

(क) बाट, माप या संख्‍या में किसी वस्‍तु या चीज का विक्रय करने में, क्रेता को उस वस्‍तु या चीज को ऐसी मात्रा या संख्‍या में परिदत्त करेगा या परिदत्त करवाएगा, जो उस मात्रा या संख्‍या से कम है, जिसके लिए संविदा की गई है या संदाय किया गया है; या

(ख) बाट, माप या संख्‍या में कोई सेवा प्रदान करने में, उस सेवा से कम सेवा प्रदान करेगा, जिसके लिए संविदा की गई है या संदाय किया गया है; या

(ग) बाट, माप या संख्‍या में कोई वस्‍तु या चीज क्रय करने में, कपटपूर्वक उस मात्रा या संख्‍या से अधिक उस वस्‍तु या चीज को ऐसी मात्रा या संख्‍या में प्राप्‍त करेगा या प्राप्‍त करवाएगा, जिसके लिए संविदा की गई है या संदाय किया गया है; या

(घ) बाट, माप या संख्‍या में कोई सेवा प्राप्‍त करने में, उस सेवा से अधिक सेवा प्राप्‍त करेगा, जिसके लिए संविदा की गई है या संदाय किया गया है,

वह जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि के एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

31. दस्‍तावेजों, आदि के पेश किए जाने के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उनके अधीन विवरणियां प्रस्‍तुत करने, कोई अभिलेख या रजिस्‍टर रखे जाने की अपेक्षा किए जाने पर या निदेशक या नियंत्रक या किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी द्वारा कोई बाट या माप या उससे संबंधित कोई दस्‍तावेज, रजिस्‍टर या अन्‍य अभिलेख निरीक्षण के लिए उसके समक्ष पेश करने की अपेक्षा किए जाने पर, किसी युक्‍तियुक्‍त कारण के बिना ऐसा करने का लोप करेगा या उसमें असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

32. प्रतिमान अनुमोदित कराने में असफलता के लिए शास्‍ति––जो कोई किसी बाट या माप के प्रतिमान को अनुमोदन के लिए प्रस्‍तुत करने में असफल रहेगा या उसमें लोप करेगा, वह जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

33. असत्‍यापित बाट या माप के उपयोग के लिए शास्‍ति––जो कोई किसी असत्‍यापित बाट या माप को विक्रीत, वितरित, परिदत्त करेगा या अन्‍यथा उसका अंतरण या उपयोग करेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

34. अमानक बाट या माप द्वारा वस्‍तुओं, आदि के विक्रय या परिदान के लिए शास्‍ति––जो कोई मानक बाट, माप या संख्‍या से भिन्‍न किसी साधन द्वारा किसी वस्‍तु, चीज या सामग्री का विक्रय करेगा या करवाएगा अथवा परिदान करेगा या परिदान करवाएगा, जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम नहीं होगी, किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

35. अमानक बाट, माप या संख्‍या द्वारा सेवाएं प्रदान करने के लिए शास्‍ति––जो कोई बाट या माप या संख्‍या से भिन्‍न किसी साधन द्वारा या मानक बाट या माप से भिन्‍न किसी बाट, माप या संख्‍या द्वारा कोई सेवा प्रदान करेगा या प्रदान करवाएगा वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम नहीं होगी, किंतु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

36. अमानक पैकजों का विक्रय आदि करने के लिए शास्‍ति––(1) जो कोई किसी पूर्व पैक की गई ऐसी वस्‍तु को, जो इस अधिनियम में यथा उपबंधित पैकेज पर घोषणाओं के अनुरूप नहीं है विक्रय के लिए विनिर्मित करेगा, पैक करेगा, आयात करेगा, विक्रय करेगा, वितरित करेगा, परिदत्त करेगा या अन्‍यथा अंतरित करेगा, प्रस्‍थापित करेगा, अभिदर्शित करेगा या कब्‍जे में रखेगा अथवा विक्रय करवाएगा, विक्रय के लिए वितरित करवाएगा, परिदत्त करवाएगा या अन्‍यथा अंतरित कराएगा, प्रस्‍थापित करवाएगा, अभिदर्शित करवाएगा वह जुर्माने से, जो पच्‍चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा, द्वितीय अपराध के लिए जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

(2) जो कोई उस शुद्ध मात्रा में, जो विहित की जाए, गलती सहित पहले से पैक की गई किसी वस्‍तु को विनिर्मित करेगा या पैक करेगा या आयात करेगा अथवा विनिर्मित करवाएगा या पैक करवाएगा या आयात करवाएगा, वह जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय और पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

37. सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केन्‍द्र द्वारा उल्‍लंघन के लिए शास्‍ति––(1) जहां सरकार द्वारा अनुमोदित कोई परीक्षण केन्‍द्र, इस अधिनियम के किन्‍हीं उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए नियमों का या अनुज्ञप्‍ित की शर्तों का उल्‍लंघन करेगा, वहां वह जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।

(2) जहां इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार कर्तव्‍यों का निर्वहन करने वाला सरकार द्वारा अनुमोदित किसी परीक्षण केन्‍द्र का कोई स्‍वामी या कर्मचारी इस अधिनियम के उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उल्‍लंघन में किसी बाट या माप का जानबूझकर सत्‍यापन या स्‍टाम्‍पन करता है, तो वह ऐसे प्रत्‍येक उल्‍लंघन के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

38. बाट या माप के आयातकर्ता द्वारा अरजिस्‍ट्रीकरण के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम के अधीन रजिस्‍ट्रीकृत हुए बिना किसी बाट या माप का आयात करेगा, वह जुर्माने से, जो पच्‍चीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

 39. अमानक बाट या माप के आयात के लिए शास्‍ति––जो कोई किसी अमानक बाट या माप का आयात करेगा, वह जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

40. निदेशक, नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी को बाधा पहुंचाने के लिए शास्‍ति––जो कोई निदेशक, नियंत्रक या किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी को, उसकी शक्‍तियों का प्रयोग या उसके कृत्‍यों का निर्वहन करने से उस निदेशक या नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी को निवारित करने या भयोपरत करने के आशय से या निदेशक या नियंत्रक अथवा विधिक मापविज्ञान अधिकारी द्वारा उस रूप में अपनी शक्‍तियों के विधिपूर्ण प्रयोग या उसके कृत्‍यों के निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयास की गई किसी बात के परिणामस्‍वरूप बाधा पहुंचाएगा या किसी बाट या माप या उससे संबंधित किसी दस्‍तावेज या अभिलेख या किसी पैक की गई वस्‍तु की शुद्ध अंतर्वस्‍तुओं के निरीक्षण या सत्‍यापन के लिए या किसी अन्‍य प्रयोजन के लिए निदेशक या नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी को किसी परिसर में प्रवेश करने में बाधा पहुंचाएगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।

41. मिथ्‍या जानकारी या मिथ्‍या विवरणी देने के लिए शास्‍ित––(1) जो कोई निदेशक, नियंत्रक या किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी को, कोई ऐसी जानकारी देगा जिसकी वह अपने कर्तव्‍यों के अनुक्रम में अपेक्षा या मांग करे और जिसकी बाबत ऐसा व्‍यक्‍ति या तो यह जानता है  या उसके पास यह विश्‍वास करने का कारण है कि वह मिथ्‍या है, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

(2) जो कोई इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन ऐसा करने की अपेक्षा किए जाने पर, ऐसी विवरणी प्रस्‍तुत करेगा या ऐसा कोई अभिलेख या रजिस्‍टर रखेगा, जिसकी तात्त्विक विशिष्‍टियां मिथ्‍या हैं, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

42. तंग करने वाली तलाशी––इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन शक्‍तियों का प्रयोग करने वाला निदेशक या नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी, जो यह जानते हुए भी कि ऐसा करने के लिए कोई युक्‍तियुक्‍त आधार नहीं है: ––

(क) किसी गृह, वाहन या स्‍थान की तलाशी लेगा या तलाशी करवाएगा; या

(ख) किसी व्‍यक्‍ति की तलाशी लेगा; या

(ग) किसी बाट, माप या अन्‍य जंगम संपत्ति को अभिगृहीत करेगा,

वह प्रत्‍येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा ।

43. अधिनियम या नियमों के उल्‍लंघन में सत्‍यापन के लिए शास्‍ति––जहां इस अधिनिमयम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन शक्‍तियों का प्रयोग करने वाला नियंत्रक या कोई विधिक मापविज्ञान अधिकारी इस अधिनियम के उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के उल्‍लंघन में जानबूझकर किसी बाट या माप को सत्‍यापित या स्‍टाम्‍पित करेगा, वहां वह प्रत्‍येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

44. मुद्राओं के कूटकरण, आदि के लिए शास्‍ति––(1) जो कोई, ––

(i) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उनके अधीन विनिर्दिष्‍ट किसी मुद्रा का कूटकरण करेगा; या

(ii)  किसी कूटकृत मुद्रा का विक्रय करेगा या अन्‍यथा व्‍ययन करेगा; या

(iii) किसी कूटकृत मुद्रा को कब्‍जे में रखेगा; या

(iv) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उनके अधीन विनिर्दिष्‍ट किसी स्‍टाम्‍प को कूटकृत करेगा या हटाएगा या उससे छेड़छाड़ करेगा; या

(v) इस प्रकार हटाए गए स्‍टाम्‍प को किसी अन्‍य बाट या माप पर लगाएगा या उनमें अंत: स्‍थापित करेगा,

वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी, किन्‍तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।

स्‍पष्‍टीकरण––इस उपधारा में, “कूटकृत” का वही अर्थ है, जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 28 में है ।

(2) जो कोई विधिविरुद्ध ढंग से, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उनके अधीन विनिर्दिष्‍ट किसी मुद्रा को अभिप्राप्‍त करेगा और ऐसी किसी मुद्रा को यह प्रतिरूपित करने की दृष्‍टि से किसी बाट या माप पर कोई स्‍टाम्‍प बनाने के लिए उपयोग करेगा या उपयोग करवाएगा कि ऐसी मुद्रा द्वारा बनाई गई स्‍टाम्‍प इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत है वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।

(3) जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्‍ट किसी मुद्रा के विधिपूर्ण कब्‍जे में होते हुए ऐसी मुद्रा का उपयोग, ऐसे उपयोग के लिए किसी विधिपूर्ण प्राधिकर के बिना करेगा या करवाएगा वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।

(4) जो कोई ऐसे किसी बाट या माप का विक्रय करेगा या विक्रय के लिए प्रस्‍थापित या अभिदर्शित करेगा, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्‍वास करने का करण है कि उस पर कूटकृत स्‍टाम्‍प लगी है, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किन्‍तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा ।

45. अनुज्ञप्‍ति के बिना बाट और माप के विनिर्माण के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अनुज्ञप्‍ति अभिप्राप्‍त करने के लिए अपेक्षित होने पर, विधिमान्‍य अनुज्ञप्‍ति धारण किए बिना, किसी बाट या माप का विनिर्माण करेगा, वह जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

46. अनुज्ञप्‍ति के बिना बाट और माप की मरम्‍मत, विक्रय, आदि के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए, नियमों के अधीन अनुज्ञप्‍ति प्राप्‍त करने के लिए अपेक्षित होने पर, विधिमान्‍य अनुज्ञप्‍ति धारण किए बिना, किसी बाट या माप की मरम्‍मत करेगा या उसका विक्रय करेगा अथवा मरम्‍मत या विक्रय के लिए उसको प्रस्‍थापित करेगा, उसको अभिदर्शित करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

47. अनुज्ञप्‍ति को बिगाड़ने के लिए शास्‍ति––जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन जारी की गई या नवीकृत किसी अनुज्ञप्‍ति को नियंत्रक द्वारा इस निमित्त किए गए किसी प्राधिकार के अनुसार से अन्‍यथा परिवर्तित करेगा या अन्‍यथा बिगाड़ेगा, वह जुर्माने से, जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

48. अपराधों का शमन––(1) धारा 25, धारा 27 से धारा 39, धारा 45 से धारा 47 या धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का, या तो अभियोजन के संस्‍थित किए जाने के पूर्व या पश्‍चात्, सरकार के पक्ष में ऐसी राशि के, जो विहित की जाए, जमा किए जाने के लिए संदाय पर शमन किया जा सकेगा ।

(2) ऐसा निदेशक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी, जो इस निमित्त उसके द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत किया जाए, धारा 25, धारा 27 से धारा 39 या धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दंडनीय अपराधों का शमन कर सकेगा ।

(3) नियंत्रक या उसके द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत विधिक मापविज्ञान अधिकारी, धारा 25, धारा 27 से धारा 31, धारा 33 से धारा 37, धारा 45 से धारा 47 और धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दंडनीय अपराधों का शमन कर सकेगा:

परंतु ऐसी राशि किसी भी दशा में, जुर्माने की उस अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी, जो इस प्रकार शमन किए गए अपराध के लिए इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित की जाए ।

(4) उपधारा (1) की कोई बात ऐसे व्‍यक्‍ति को लागू नहीं होगी, जो वही या वैसा ही अपराध, उस तारीख से, जिसको उसके द्वारा किए गए प्रथम अपराध का शमन किया गया था, तीन वर्ष की अवधि के भीतर करता है ।

स्‍पष्‍टीकरण––इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसे द्वितीय या पश्‍चात्वर्ती अपराध को, जो उस तारीख से, जिसको अपराध का पहले शमन किया गया था, तीन वर्ष की अवधि की समाप्‍ति के पश्‍चात् किया जाता है, प्रथम अपराध समझा जाएगा ।

(5) जहां किसी अपराध का उपधारा (1) के अधीन शमन किया जाता है, वहां उस अपराध के संबंध में, जिसका ऐसे शमन किया जाता है, अपराधी के विरुद्ध, यथास्‍थिति, कोई कार्यवाही या आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी ।

(6) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का, इस धारा द्वारा यथाउपबंधित के सिवाय शमन नहीं किया जाएगा ।

49. कंपनियों द्वारा अपराध और सिद्धदोष कंपनियों के नाम, कारबार के स्‍थान आदि को प्रकाशित करने की न्‍यायालय की शक्‍ति––(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, ––

(क) (i) वहां ऐसा व्‍यक्‍ति, यदि कोई हो, जिसे उपधारा (2) के अधीन, कंपनी के कारबार के संचालन के लिए कंपनी के भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी के रूप में घोषित किया गया है (जिसे इसके पश्‍चात् इस धारा में उत्तरदायी व्‍यक्‍ति कहा गया है); या

(ii) जहां कोई व्‍यक्‍ति नामनिर्दिष्‍ट नहीं किया गया है वहां प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जो उस अपराध के किए जाने के समय कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था; और

(ख) कंपनी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परंतु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्‍यक्‍ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था और उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्‍यक् तत्‍परता बरती थी ।

(2) कोई कंपनी, लिखित आदेश द्वारा अपने किसी निदेशक को ऐसी सभी शक्‍तियों का प्रयोग करने और ऐसे सभी उपाय करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी, जो इस अधिनियम के अधीन कंपनी द्वारा कोई अपराध किए जाने को निवारित करने के लिए आवश्‍यक या समीचीन हो और निदेशक या संबद्ध नियंत्रक अथवा ऐसे नियंत्रक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी को (जिसे इस धारा में इसके पश्‍चात् प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है) ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, यह सूचना कि कंपनी ने ऐसे निदेशक को उत्तरदायी व्‍यक्‍ति के रूप में नामनिर्दिष्‍ट किया है, इस प्रकार नामनिर्दिष्‍ट किए जाने के लिए ऐसे निदेशक की लिखित सहमति के साथ दे सकेगी ।

स्‍पष्‍टीकरण––जहां कंपनी के विभिन्‍न स्‍थापन या शाखाएं अथवा किसी स्‍थापन या शाखा में विभिन्‍न इकाइयां हैं, वहां विभिन्‍न स्‍थापनों या शाखाओं या इकाइयों के संबंध में इस उपधारा के अधीन भिन्‍न-भिन्‍न व्‍यक्‍ति नामनिर्दिष्‍ट किए जा सकेंगे और किसी स्‍थापन, शाखा या इकाई के संबंध में नामनिर्दिष्‍ट व्‍यक्‍ति ऐसे स्‍थापन, शाखा या इकाई की बाबत उत्तरदायी व्‍यक्‍ति समझा जाएगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन नामनिर्दिष्‍ट व्‍यक्‍ति, उस समय तक जब तक कि, ––

(i) निदेशक या संबद्ध नियंत्रक या प्राधिकृत अधिकारी द्वारा कंपनी से ऐसे नामनिर्देशन को रद्द करने वाली और सूचना प्राप्‍त नहीं हो जाती है; या

(ii) वह कंपनी का निदेशक नहीं रहता है; या

(iii) वह निदेशक या संबद्ध नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी को कंपनी को सूचना के अधीन नामनिर्देशन को रद्द करने का लिखित में ऐसा कोई अनुरोध नहीं करता है, जिसका निदेशक या संबद्ध नियंत्रक या विधिक मापविज्ञान अधिकारी द्वारा पालन किया जाएगा,

इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उत्तरदायी व्‍यक्‍ति बना रहेगा:

परंतु जहां ऐसा व्‍यक्‍ति कंपनी का निदेशक नहीं रहता है वहां वह निदेशक या संबद्ध नियंत्रक या प्राधिकृत अधिकारी को इस प्रकार निदेशक न रहने के तथ्‍य को संसूचित करेगा:

परंतु यह और कि जहां ऐसा व्‍यक्‍ति खंड (iii) के अधीन कोई अनुरोध करता है वहां निदेशक या संबद्ध नियंत्रक या प्राधिकृत अधिकारी ऐसी तारीख से, जिसको अनुरोध किया जाता है, पूर्वतर किसी तारीख से ऐसे नामनिर्देशन को रद्द नहीं करेगा ।

(4) पूर्वगामी उपधाराओं में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्‍य अधिकारी, जो उपधारा (2) के अधीन नामनिर्दिष्‍ट व्‍यक्‍ति नहीं है, की सम्‍मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्‍य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

(5) जहां कोई कंपनी इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी के उल्‍लंघन के लिए इसके अधीन दोषसिद्ध की जाती है वहां उस कंपनी को दोषसिद्ध करने वाला न्‍यायालय इस बात के लिए सक्षम होगा कि वह उस कंपनी का नाम और कारबार का स्‍थान, उल्‍लंघन का स्‍वरूप, यह बात कि कंपनी उस प्रकार दोषसिद्ध की गई है और ऐसी अन्‍य विशिष्‍टियां, जिन्‍हें न्‍यायालय मामले की परिस्‍थितियों में समुचित समझे, उस कंपनी के व्‍यय पर ऐसे समाचारपत्रों में या ऐसी अन्‍य रीति से जैसी न्‍यायालय निदेश करे, प्रकाशित कराए ।

(6) उपधारा (5) के अधीन कोई प्रकाशन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक न्‍यायालय के आदेशों के विरुद्ध अपील करने की अवधि, अपील किए बिना, समाप्‍त न हो गई हो या ऐसी अपील किए जाने पर वह निपटा न दी गई हो ।

(7) उपधारा (5) के अधीन किसी प्रकाशन के व्‍यय कंपनी से इस प्रकार वसूलीय होंगे, मानो वह न्‍यायालय द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो ।

स्‍पष्‍टीकरण––इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ––

(क) “कंपनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्‍यष्‍टियों का अन्‍य संगम भी है; तथा

(ख) फर्म के संबंध में “निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है, किन्‍तु उसके अन्‍तर्गत नामनिर्दिष्‍ट निदेशक, अवैतनिक निदेशक, सरकारी नामनिर्दिष्‍ट निदेशक नहीं है ।

50. अपीलें––(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, –– 

(क) धारा 13 के अधीन नियुक्‍त विधिक मापविज्ञान अधिकारी द्वारा धारा 15 से धारा 20, धारा 22, धारा 25, धारा 27 से धारा 39, धारा 41 या धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन प्रत्‍येक विनिश्‍चय या आदेश से अपील निदेशक को होगी;

(ख) धारा 15 से धारा 20, धारा 22, धारा 25, धारा 27 से धारा 39, धारा 41 या धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन विधिक मापविज्ञान निदेशक द्वारा किए गए प्रत्‍येक विनिश्‍चय या आदेश से अपील केन्‍द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी को होगी;

(ग) विधिक मापविज्ञान निदेशक की प्रत्‍यायोजित शक्‍तियों के अधीन विधिक मापविज्ञान नियंत्रक द्वारा किए गए प्रत्‍येक विनिश्‍चय से अपील केन्‍द्रीय सरकार को होगी;

(घ) धारा 14 के अधीन नियुक्‍त किसी विधिक मापविज्ञान अधिकारी द्वारा धारा 5 से धारा 18, धारा 23 से धारा 25, धारा 27 से धारा 37, धारा 45 से धारा 47 या धारा 52 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन किए गए प्रत्‍येक विनिश्‍चय या आदेश से अपील नियंत्रक को होगी; और

 (ङ) धारा 15 से धारा 18, धारा 23 से धारा 25, धारा 27 से धारा 37, धारा 45 से धारा 47 या धारा 52 उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन नियंत्रक द्वारा किए गए ऐसे प्रत्‍येक विनिश्‍चय या आदेश से, जो खंड (घ) के अधीन अपील में किया गया कोई आदेश नहीं है, अपील राज्‍य सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी को होगी ।

(2) ऐसी प्रत्‍येक अपील उस तारीख से जिसको अपेक्षित आदेश किया गया था, साठ दिन के भीतर की जाएगी:

परंतु यदि अपील प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी साठ दिन की उक्‍त अवधि के भीतर अपील करने में पर्याप्‍त कारणों से निवारित रहा था तो वह अपीलार्थी को साठ दिन की अतिरिक्‍त अवधि के भीतर अपील करने की अनुज्ञा दे सकेगा ।

(3) ऐसी किसी अपील की प्राप्‍ति पर, अपील प्राधिकारी अपील के पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्‍चात् और ऐसी जांच, जैसी वह उचित समझे, करने के पश्‍चात्, उस विनिश्‍चय या आदेश को, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्‍ट करने वाला, परिवर्तित करने वाला या उलटने वाला ऐसा आदेश दे सकेगा, जो वह ठीक समझे अथवा मामले को यदि आवश्‍यक हो तो, अतिरिक्‍त साक्ष्‍य लेने के पश्‍चात् ऐसे निदेश के साथ, जो वह ठीक समझे, किसी नए विनिश्‍चय या आदेश के लिए वापस भेज सकेगा ।

(4) प्रत्‍येक अपील ऐसी फीस के संदाय पर की जाएगी, जो विहित की जाए ।

(5) यथास्‍थिति, केन्‍द्रीय सरकार या राज्‍य सरकार, स्‍वप्रेरणा से या अन्‍यथा, किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसके अंतर्गत अपील की कार्यवाही भी है, जिसमें कोई विनिश्‍चय या आदेश किया गया है, अभिलेख ऐसे विनिश्‍चय या आदेश के सही होने, उसकी वैधता या उसके औचित्‍य के बारे में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए मंगा सकेगी और उसकी परीक्षा कर सकेगी तथा उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगी जो वह ठीक समझे:

परंतु इस उपधारा के अधीन किसी विनिश्‍चय या आदेश में ऐसा कोई फेरफार, जो किसी व्‍यक्‍ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, तब तक नहीं किया जाएगा जब तक ऐसे व्‍यक्‍ति को प्रस्‍थापित कार्यवाही के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्‍तियुक्‍त अवसर न दे दिया हो ।

51. भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के उपबंधों का लागू होना––भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 153 के उपबंध, जहां तक ऐसे उपबंध बाटों और मापों से संबंधित अपराधों के बारे में हैं, ऐसे किसी अपराध को लागू नहीं होंगे जो इस अधिनियम के अधीन दंडनीय है ।

52. नियम बनाने की केन्‍द्रीय सरकार की शक्‍ति––(1) केन्‍द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्‍िवत करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्‍टतया और पूर्वगामी शक्‍ति की व्‍यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्‍नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: ––

(क) धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन मापों की आधार इकाइयों और द्रव्‍यमान की आधार-इकाई का विनिर्देश;

(ख) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन वस्‍तुओं और उपस्‍करों को तैयार करने की रीति;

(ग) धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन भौतिक लक्षणों, आकृति, संरचनात्‍मक ब्‍यौरों, सामग्रियों, उपस्‍कर, कार्यपालन, सह्यता, पुन: सत्‍यापन की अवधि, परीक्षण की पद्धतियां या प्रक्रियाएं;

(घ) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन बाटों और मापों के निर्देश मानक, द्वितीयिक मानक और कार्यसाधक मानक;

(ङ) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन निर्देश मानकों, द्वितीयिक मानकों और कार्यसाधक मानकों को सत्‍यापित और स्‍टापित किया जाएगा तथा उस उपधारा के अधीन फीस;

(च) ऐसे बाट या माप या संख्‍या, जिसमें किसी माल, माल के वर्ग के संबंध में कोई संव्‍यवहार, व्‍यौहार या संविदा अथवा वचनबंध धारा 10 के अधीन किए जाएंगे;

(छ) धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन निदेशक और विधिक मापविज्ञान अधिकारियों की अर्हताएं;

(ज) धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारियों की अर्हताएं;

(झ) धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन माल के व्‍ययन की रीति;

(ञ) मानक मात्रा या संख्‍या और वह रीति, जिसमें धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन पैकेजों पर घोषणाएं और विशिष्‍टियां होंगी;

(ट) धारा 19 के अधीन रीति और रजिस्‍ट्रीकरण तथा फीस;

(ठ) संस्‍थान का प्रबंध और नियंत्रण, शिक्षण कर्मचारिवृंद और अन्‍य कर्मचारी, प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या, अर्हताएं, जो धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन उनमें प्रवेश के लिए पात्र होने के लिए किसी व्‍यक्‍ति के पास होंगी;

(ड) धारा 22 के अधीन प्रतिमानों के अनुमोदन की रीति, फीस और प्राधिकारी;

(ढ) धारा 24 की उपधारा (2) के अधीन बाटों या मापों के प्रकार;

(ण) वह रीति, जिसमें और वे निबंधन और शर्तें, जिन पर तथा वह फीस, जिसके संदाय पर केन्‍द्रीय सरकार, धारा 24 की उपधारा (3) के अधीन सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केन्‍द्र को अधिसूचित करेगी;

(त) नियुक्‍त या लगाए गए व्‍यक्‍तियों की अर्हताएं और अनुभव तथा वह फीस और निबंधन तथा शर्तें, जिन पर सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केन्‍द्र, धारा 24 की उपधारा (4) के अधीन बाट या माप का सत्‍यापन करेगा;

(थ) धारा 36 की उपधारा (2) के अधीन शुद्ध मात्रा में गलती;

(द) धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन अपराध के शमन के लिए फीस;

(ध) वह प्ररूप और रीति, जिसमें धारा 49 की उपधारा (2) के अधीन निदेशक या नियंत्रक या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्‍य अधिकारी को सूचना दी जाएगी ।

(3) इस धारा के अधीन कोई नियम बनाते समय केन्‍द्रीय सरकार यह उपबंध कर सकेगी कि उसका भंग जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

(4) इस अधिनियम के अधीन केन्‍द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्‍येक नियम, बनाए जाने के पश्‍चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्‍येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्‍त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्‍पश्‍चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्‍त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्‍पश्‍चात् वह निष्‍प्रभाव हो जाएगा । किन्‍तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्‍प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्‍यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

53. नियम बनाने की राज्‍सरकार की शक्‍ति––(1) राज्‍य सरकार, अधिसूचना द्वारा और केन्‍द्रीय सरकर से परामर्श करने के पश्‍चात्, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्‍िवत करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्‍टतया और पूर्वगामी शक्‍ति की व्‍यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्‍नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: ––

(क) धारा 16 की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन वह समय, जिसके भीतर बाट या माप का सत्‍यापन कराया जा सकेगा;

(ख) धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्‍ट व्‍यक्‍तियों द्वारा रखे जाने वाले रजिस्‍टर और अभिलेख;

(ग) धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञप्‍ति जारी करने के लिए प्ररूप, रीति, शर्तें, अवधि, अधिकारिता का क्षेत्र और फीस;

(घ) धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन किसी बाट या माप के सत्‍यापन और स्‍टाम्‍पन के लिए फीस;

(ङ) धारा 24 की उपधारा (3) के अधीन सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केन्‍द्रों को अधिसूचित करने की रीति, निबंधन और शर्तें तथा संदत्त की जाने वाली फीस;

(च) धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन अपराधों के शमन के लिए फीस ।

(3) राज्‍य सरकार, इस धारा के अधीन किसी नियम को बनाने में, यह उपबंध कर सकेगी कि उसका भंग ऐसे जुर्माने से दंडनीय होगा, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा ।

(4) इस धारा के अधीन नियम बनाने की शक्‍ति, राजपत्र में पूर्व प्रकाशन के पश्‍चात् बनाए गए नियमों की शर्तों के        अधीन होगी ।

(5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्‍येक नियम, बनाए जाने के पश्‍चात्, यथाशीघ्र, जहां राज्‍य विधान-मंडल में दो सदन हैं वहां राज्‍य विधान-मंडल के प्रत्‍येक सदन के समक्ष, और जहां राज्‍य विधान-मंडल में एक सदन है, वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

54. शक्‍तियों का प्रत्‍यायोजन––(1) केन्‍द्रीय सरकार, राज्‍य सरकार के परामर्श से और अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्‍तव्‍य किसी शक्‍ति का, जो अपील से संबंधित धारा 50 या नियम बनाने की शक्‍ति से संबंधित धारा 52 द्वारा प्रदत्त शक्‍ति नहीं है, ऐसे मामलों के संबंध में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विनिर्दिष्‍ट की जाएं, अपने अधीनस्‍थ ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्‍ट किया जाए, प्रयोग किया जा सकेगा ।

(2) राज्‍य सरकार द्वारा अधिरोपित किसी साधारण या विशेष निदेश या शर्त के अधीन रहते हुए, जो केन्‍द्रीय सरकार द्वारा किन्‍हीं शक्‍तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कोई व्‍यक्‍ति, उन शक्‍तियों का प्रयोग उसी रीति से और उसी विस्‍तार तक कर सकेगा, मानो वे उस व्‍यक्‍ति को इस अधिनियम द्वारा सीधे ही प्रदत्त की गई हैं, न कि प्रत्‍यायोजन के रूप में ।

55. अधिनियम का कुछ मामलों में लागू होना––इस अधिनियम के उपबंध, जहां तक वे बाटों और मापों के सत्‍यापन और स्‍टाम्‍पन से संबंधित हैं, किसी ऐसे बाट या माप को लागू नहीं होंगे, जो––

(क) किसी ऐसे कारखाने में प्रयुक्‍त किए जाते हैं, जो अनन्‍यत: संघ के सशस्‍त्र बलों के प्रयोग के लिए किन्‍हीं आयुधों, गोलाबारूद या दोनों के विनिर्माण में प्रयुक्‍त किए जाते हैं;

(ख) वैज्ञानिक अन्‍वेषण के लिए या अनुसंधान के लिए प्रयुक्‍त किए जाते हैं;

(ग) अनन्‍यत: निर्यात के लिए विनिर्मित किए जाते हैं ।

56. विद्यमान निदेशक, नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारी का विहित की जाने वाली नई अर्हता द्वारा प्रभावित होना––(1) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के प्रारंभ के ठीक पूर्व नियुक्‍त प्रत्‍येक निदेशक, नियंत्रक और विधिक मापविज्ञान अधिकारी, विभिन्‍न अर्हताएं विहित करने वाले किसी नियम के होते हुए भी, धारा 13 की उपधारा (1) और धारा 14 के अधीन नियुक्‍त किया गया समझा जाएगा ।

(2) बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 (1985 का 54) के अधीन राज्‍य सरकार द्वारा बनाए गए नियम जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवर्तन में हैं, उस समय तक प्रवर्तन में बने रहेंगे जब तक कि राज्‍य सरकार उस निमित्त नियम न बना दे ।

57. बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 और बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 का निरसन––(1) बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 (1976 का 60) और बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 (1985 का 54) इसके द्वारा निरसित किए जाते हैं ।

(2) निरसन के संबंध में साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 (1976 का 60) और बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 (1985 का 54) के अधीन जारी की गई कोई अधिसूचना, बनाया गया नियम या किया गया आदेश, यदि वह इस अधिनियम के प्रारंभ पर प्रवर्तन में है, तो उसी प्रकार प्रवर्तन में बना रहेगा और इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वह इस अधिनियम के तत्‍स्‍थानी उपबंधों के अधीन किया गया है ।

(3) ऐसे निरसन के होते हुए भी, ऐसी विधि के अधीन की गई कोई नियुक्‍ति, जारी की गई अधिसूचना, बनाया गया नियम, किया गया आदेश, रजिस्‍ट्रीकरण, जारी की गई अनुज्ञप्‍ति, दिया गया प्रमाणपत्र, दी गई सूचना, किया गया विनिश्‍चय, दिया गया अनुमोदन, प्राधिकार या दी गई सहमति, यदि वह इस अधिनियम के प्रारंभ पर प्रवर्तन में है तो उसी प्रकार प्रवर्तन में बनी रहेगी तथा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तस्‍थानी उपबंधों के अधीन की गई, जारी की गई, दी गई, बनाया गया या दिया गया हो ।

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