भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002
(2002 का अधिनियम संख्यांक 58)
[17 दिसंबर, 2002]
भारतीय यूनिट ट्रस्ट के उपक्रम का (विनिर्दिष्ट उपक्रम को छोड़कर)
कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन बनाई और रजिस्ट्रीकृत की
जाने वाली विनिर्दिष्ट कंपनी को अंतरण करने और उसमें
निहित करने तथा भारतीय यूनिट ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट
उपक्रम का प्रशासक को अंतरण करने और उसमें
निहित करने और उससे संबंधित या उसके
आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने
के लिए और भारतीय यूनिट ट्रस्ट
अधिनियम, 1963 का निरसन
करने के लिए भी
अधिनियम
भारत गणराज्य के तिरपनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 है ।
(2) यह 29 अक्तूबर, 2002 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) प्रशासक" से कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का कोई निकाय अभिप्रेत है, जो धारा 7 के अधीन प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया हो;
(ख) नियत दिन" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार धारा 4 के अधीन राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे;
(ग) बैंक" का वही अर्थ होगा जो बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण वसूली अधिनियम, 1993(1993 का 51) की धारा 2 के खंड (घ) में है;
(घ) विकास बैंक" से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अभिप्रेत है;
(ङ) वित्तीय संस्था" का वही अर्थ होगा जो बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण वसूली अधिनियम, 1993 (1993 का 51) की धारा 2 के खंड (ज) में है;
(च) भारतीय जीवन बीमा निगम" से जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 31) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय जीवन बीमा निगम अभिप्रेत है;
(छ) अनुसूची" से इस अधिनियम की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 अभिप्रेत हैं;
(ज) विनिर्दिष्ट कंपनी" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाई और रजिस्ट्रीकृत की जाने वाली कंपनी अभिप्रेत है और जिसकी संपूर्ण पूंजी ऐसी वित्तीय संस्थाओं या बैंकों द्वारा प्रतिश्रुत की गई है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उपक्रम का अन्तरण करने और उसमें निहित करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट की जाए;
(झ) विनिर्दिष्ट उपक्रम" के अंतर्गत ट्रस्ट के ऐसे सभी कारबार, आस्तियां, दायित्व और संपत्ति हैं, जो अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट स्कीमों और विकास आरक्षित निधि के रूप में और उससे संबंधित हों;
(ञ) स्टेट बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है;
(ट) ट्रस्ट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है;
(ठ) उपक्रम" के अंतर्गत ट्रस्ट के सभी कारबार, आस्तियां, दायित्व और संपत्तियां हैं जो अनुसूची 2 में विनिर्दिष्ट स्कीमों और योजनाओं के रूप में और उनसे संबंधित हों;
(ड) यूनिट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) की धारा 21 के अधीन बनाई गई किसी यूनिट स्कीम के अधीन जारी की गई कोई यूनिट अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
ट्रस्ट के उपक्रम का विनिर्दिष्ट कंपनी को अंतरण और उसमें निहित होना और प्रशासक में ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का अंतरण और निहित होना
3. आरंभिक पूंजी का अंतरण-(1) नियत दिन को, भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) की धारा 4 और धारा 4क के अधीन विकास बैंक, जीवन बीमा निगम, स्टेट बैंक और समनुषंगी बैंक तथा अन्य संस्थाओं द्वारा अभिदाय की गई ट्रस्ट की आरंभिक पूंजी, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व विद्यमान थी, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएगी ।
(2) विकास बैंक, जीवन बीमा निगम, स्टेट बैंक और समनुषंगी बैंक तथा अन्य संस्थाओं द्वारा अभिदाय की गई आरंभिक पूंजी केन्द्रीय सरकार द्वारा ट्रस्ट के बही मूल्य, आस्तियों और दायित्वों का ध्यान रखते हुए, उतनी सीमा तक जो अवधारित की जाए, वापस की जाएगी ।
4. ट्रस्ट के उपक्रम का विनिर्दिष्ट कंपनी में निहित होना और ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रशासक में निहित होना-(1) ऐसी तारीख को, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, -
(क) ट्रस्ट का उपक्रम (विनिर्दिष्ट उपक्रम को छोड़कर), ऐसे प्रतिफल के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो केन्द्रीय सरकार और विनिर्दिष्ट कंपनी की पूंजी के अभिदाताओं के बीच पारस्परिक रूप से करार पाई जाए, विनिर्दिष्ट कंपनी को;
(ख) ट्रस्ट का विनिर्दिष्ट उपक्रम, प्रशासक को,
अंतरित और उसमें निहित हो जाएगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार का इस बारे में विनिश्चय कि कोई कारबार, आस्ति, दायित्व या संपत्ति, उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम की है या उससे संबंधित है, अंतिम होगा:
परंतु कोई कारबार, आस्ति या संपत्ति, जो उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम की नहीं है या उससे संबंधित नहीं है, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी ।
5. उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम की विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक में निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) ट्रस्ट के ऐसे उपक्रम के बारे में, जो, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट कंपनी या ट्रस्ट के उस विनिर्दिष्ट उपक्रम को अंतरित और उसमें निहित हो गया है, जो धारा 4 के अधीन प्रशासक को, अंतरित और उसमें निहित हो गया है, यह समझा जाएगा कि उसके अंतर्गत सभी कारबार, आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा किसी भी प्रकृति की और कहीं भी स्थित जंगम और स्थावर, वास्तविक और व्यक्तिगत, मूर्त और अमूर्त, कब्जे या आरक्षण में की, वर्तमान या समाश्रित सभी संपत्तियां हैं, जिनके अंतर्गत भूमि, भवन, यान, नकद अतिशेष, निक्षेप, विदेशी मुद्रा, प्रकटित और अप्रकटित आरक्षितियां, आरक्षित निधि, विशेष आरक्षित निधि, हितकारी आरक्षित निधि, कोई अन्य निधि, स्टाक, विनिधान, शेयर, बंधपत्र, डिबेंचर, प्रतिभूति, किसी औद्योगिक समुत्थान का प्रबंध, औद्योगिक समुत्थानों को दिए गए ऋण, अग्रिम और प्रत्याभूतियां, अभिधृतियां, पट्टे और बही ऋण तथा ऐसी संपत्ति से उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व भारत में या भारत के बाहर, यथास्थिति, उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में ट्रस्ट के स्वामित्व, कब्जे या शक्ति में थी और उससे संबंधित सभी लेखा बहियां, रजिस्टर, अभिलेख और दस्तावेज हैं और यह भी समझा जाएगा कि उनके अंतर्गत ऐसे सभी उधार, दायित्व, जारी की गई यूनिटें और बाध्यताएं भी हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, जो ट्रस्ट की, भारत में या भारत के बाहर, यथास्थिति, ऐसे उपांतरण या विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में उस समय अस्तित्व में थीं ।
(2) सभी संविदाएं, विलेख, बंधपत्र, प्रत्याभूतियां, मुख्तारनामे, अन्य लिखतें (जिसके अंतर्गत जारी की गई सभी यूनिटें और ट्रस्ट द्वारा बनाई गई सभी यूनिट स्कीमें भी हैं) और काम करने के बारे में ऐसे ठहराव जो नियत दिन के ठीक पूर्व अस्तित्वशील हैं और ट्रस्ट को प्रभावित कर रहे हैं, ट्रस्ट के विरुद्ध प्रभावी नहीं रहेंगे या प्रवर्तनीय नहीं होंगे और, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक के विरुद्ध या उसके पक्ष में, जिसमें उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम इस अधिनियम के आधार पर निहित हुए हैं, पूर्ण बल और प्रभाव रखेंगे और पूर्ण रूप से तथा प्रभावी तौर पर इस प्रकार प्रवर्तनीय होंगे मानो ट्रस्ट के बजाय वहां, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक को नामित किया गया था या वह उनमें एक पक्षकार रहा था ।
(3) इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व ट्रस्ट के बोर्ड द्वारा ली गई सभी यूनिट स्कीमें, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक द्वारा ली गई समझी जाएंगी और ऐसी स्कीम के अधीन ट्रस्ट द्वारा जारी की गई सभी यूनिटें, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक द्वारा जारी की गई यूनिटें समझी जाएंगी और ऐसी यूनिटों पर आय का वितरण किया जाएगा तथा उनके द्वारा ऐसी यूनिटों का मोचन या क्रय उसी रीति से किया जाएगा जैसा कि ट्रस्ट द्वारा किया गया होता यदि उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम धारा 4 के अधीन अंतरित नहीं किया गया होता ।
(4) कोई कार्यवाही या वाद हेतुक नियत दिन के ठीक पूर्व ट्रस्ट द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित या विद्यमान नियत दिन से ही, यथास्थिति, उस विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक द्वारा या उसके विरुद्ध, जिसमें इस अधिनियम के आधार पर उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम निहित हो गया है उसी प्रकार जारी रहेगा और प्रवर्तित किया जाएगा जिस प्रकार वह ट्रस्ट द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तित किया गया होता जब यह अधिनियम अधिनियमित नहीं किया गया होता और ट्रस्ट द्वारा या उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं रहेगा ।
6. ट्रस्ट के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बारे में उपबंध-(1) ट्रस्ट का प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी (बोर्ड के न्यासी, अध्यक्ष और कार्यपालक न्यासी को छोड़कर) जो नियत दिन के ठीक पूर्व उसके नियोजन में सेवारत है, नियत दिन से विनिर्दिष्ट कंपनी का, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा और उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर, उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर, उन्हीं बाध्यताओं के साथ तथा छुट्टी, छुट्टी भाड़ा रियायत, कल्याण स्कीम, चिकित्सा प्रसुविधा स्कीम, बीमा, भविष्य निधि, अन्य निधियों, सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, उपदान और अन्य फायदों के बारे में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ उसमें अपना पद धारण करेगा या सेवा करेगा जो वह ट्रस्ट के अधीन उस दशा में धारण करता यदि उसका उपक्रम विनिर्दिष्ट कंपनी में निहित नहीं हुआ होता और वह विनिर्दिष्ट कंपनी के, यथास्थिति, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में ऐसा करता रहेगा या नियत दिन से छह मास की अवधि के समाप्त हो जाने तक, यदि ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी उस अवधि के भीतर विनिर्दिष्ट कंपनी का अधिकारी या अन्य कर्मचारी नहीं बने रहने का विकल्प देता है, ऐसा करता रहेगा ।
(2) प्रशासक, विनिर्दिष्ट कंपनी के परामर्श से, ऐसे अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों की जो वह ठीक समझे सेवाओं की अध्यपेक्षा, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो प्रशासक और विनिर्दिष्ट कंपनी के बीच पारस्परिक रूप से करार पाई जाए, कर सकेगा ।
(3) जहां ट्रस्ट का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, उपधारा (1) के अधीन कंपनी के नियोजन या सेवा में न रहने का विकल्प देता है, वहां ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने त्यागपत्र दे दिया है ।
(4) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, ट्रस्ट के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का विनिर्दिष्ट कंपनी को अंतरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
(5) ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी जो नियत दिन के पूर्व ट्रस्ट की सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं और जो किन्हीं प्रसुविधाओं, अधिकारों या विशेषाधिकारों के हकदार हैं, विनिर्दिष्ट कंपनी से ऐसी प्रसुविधाएं, अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त करने के हकदार होंगे ।
(6) भारतीय यूनिट ट्रस्ट की भविष्य-निधि या उपदान निधि संबंधी न्यास और अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों के कल्याण के लिए सृजित कोई अन्य निकाय विनिर्दिष्ट कंपनी में वैसे ही अपने कृत्यों का निर्वहन करते रहेंगे जैसे कि वे अब तक भारतीय यूनिट ट्रस्ट में कर रहे थे और भविष्य-निधि या उपदान निधि के संबंध में दी गई कोई कर-छूट विनिर्दिष्ट कंपनी को लागू रहेगी ।
(7) इस अधिनियम या कंपनी अधिनियम, 1956(1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष, न्यासी, कार्यपालक न्यासी या कोई अन्य व्यक्ति जो ट्रस्ट के संपूर्ण कारबार और कार्यकलापों का या उनके सारवान् भाग का प्रबंध करने का हकदार है, ट्रस्ट के विरुद्ध पद की हानि या ट्रस्ट के साथ उसके द्वारा की गई किसी प्रबंध संविदा के समय से पूर्व पर्यवसान के लिए किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।
अध्याय 3
ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रबंध करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति
7. विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रबंध करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, नियत दिन से ही, भारतीय यूनिट ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रशासन ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए, भारतीय यूनिट ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रशासक" के रूप में एक व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय को नियुक्त करेगी और प्रशासक केन्द्रीय सरकार के निमित्त और उसकी ओर से ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रबंध करेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार प्रशासक को, उसकी शक्तियों और कृत्यों के बारे में ऐसे निदेश (जिनके अंतर्गत किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष किन्हीं विधिक कार्यवाहियों को संस्थित करने, उनकी प्रतिरक्षा करने और उन्हें जारी रखने के बारे में निदेश भी हैं), जिन्हें वह सरकार वांछनीय समझे, जारी कर सकेगी और प्रशासक केन्द्रीय सरकार को किसी भी समय उस रीति के बारे में जिसमें वह विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रबंध का संचालन करेगा, या ऐसे प्रबंध के अनुक्रम में उद्भूत किसी विषय के संबंध में अनुदेशों के लिए आवेदन कर सकेगा ।
(3) प्रशासक, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाई गई स्कीमों के अन्य उपबंधों तथा केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रबंध के संबंध में धारा 10 में विनिर्दिष्ट शक्तियों का, जिनके अंतर्गत ऐसे विनिर्दिष्ट उपक्रम की किसी संपत्ति या आस्तियों का व्ययन करने की शक्तियां भी है, प्रयोग करने का हकदार होगा चाहे ऐसी शक्तियां तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन की गई हों ।
(4) ऐसी किसी संपत्ति को जो ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का भाग है, अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसी संपत्ति को तुरंत प्रशासक को परिदत्त करेगा ।
(5) ऐसा कोई व्यक्ति, जो नियत दिन को अपने कब्जे या नियंत्रण के अधीन विनिर्दिष्ट उपक्रम से संबंधित कोई बहियां, कागजपत्र या अन्य दस्तावेज, जिनके अंतर्गत नियत दिन के पूर्व विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रबंध के प्रभारी व्यक्तियों के संकल्पों में अन्तर्विष्ट करने वाली कार्यवृत्त पुस्तक भी है, विनिर्दिष्ट उपक्रम से संबंधित चालू चेक बुक, उसके और ट्रस्ट के बीच के पत्र, ज्ञापन, टिप्पण या अन्य संसूचनाएं, जहां तक वे विनिर्दिष्ट उपक्रम से संबंधित है, रखता है, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी अन्य बात के होते हुए भी, ऐसी बहियों, कागजपत्रों और अन्य दस्तावेजों का (जिनके अंतर्गत ऐसी कार्यवृत्त पुस्तकें, पत्र, ज्ञापन, टिप्पण या अन्य संसूचनाएं हैं) लेखा-जोखा प्रशासक को देने के लिए दायी होगा ।
(6) नियत दिन से ठीक पूर्व विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रबंध का प्रभारी कोई व्यक्ति, उस दिन से दस दिन के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, प्रशासक को सभी संपत्तियों और आस्तियों की (जिनके अंतर्गत बही-ऋणों और विनिधानों तथा अन्य सामान की विशिष्टियां भी हैं) जो नियत दिन से ठीक पूर्व विनिर्दिष्ट उपक्रम का भाग हैं और ऐसे विनिर्दिष्ट उपक्रम के उसके प्रशासन से संबंधित सभी दायित्वों और बाध्यताओं की, जो उस दिन से ठीक पूर्व अस्तित्व में थीं, तथा ट्रस्ट द्वारा उसके प्रशासन के संबंध में विनिर्दिष्ट उपक्रम से संबंधित किए गए सभी करारों की, जो उस दिन से ठीक पूर्व प्रवर्तन में थे, पूर्ण सूची देगा ।
(7) प्रशासक, विनिर्दिष्ट उपक्रम की निधियों में से ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
8. प्रशासक द्वारा पद रिक्त करना-(1) प्रशासक, विनिर्दिष्ट उपक्रम की सभी स्कीमों का निर्मोचन हो जाने पर और विनिधानकर्ताओं को संपूर्ण रकम का संदाय हो जाने पर, तत्काल अपना पद रिक्त कर देगा; किंतु इस उपधारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह उस रूप में उसके द्वारा पद रिक्त कर दिए जाने के पश्चात् सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में उसकी नियुक्ति का प्रतिषेध करती है ।
(2) प्रशासक, अपने पद को रिक्त कर देने पर तत्काल केन्द्रीय सरकार या किसी संस्था या उसके द्वारा विनिर्दिष्ट अधिकारी को विनिर्दिष्ट उपक्रम के रूप में और उससे संबंधित ऐसी सभी आस्तियों का कब्जा परिदत्त करेगा जो उस तारीख से, जिसको वह प्रशासक के रूप में अपना पद रिक्त करता है, ठीक पूर्व की तारीख को उसके कब्जे, अभिरक्षा और नियंत्रण में हैं ।
अध्याय 4
प्रशासक की शक्तियां और कृत्य
9. सलाहकार बोर्ड-(1) केन्द्रीय सरकार, विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रबंध करने में प्रशासक को सलाह देने और सहायता करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड की ऐसी तारीख को, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, नियुक्ति करेगी ।
(2) सलाहकार बोर्ड की संरचना, सलाहकारों की पदावधि, उनकी फीस और भत्ते तथा नियुक्ति की अन्य शर्तें, सलाहकार होने के लिए निरर्हताएं ऐसी होंगी, सलाहकार के पद पर आकस्मिक रिक्ति को भरने, सलाहकार बोर्ड के अधिवेशन, सलाहकार के पद में रिक्ति और उसके पद त्याग की रीति ऐसी होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई स्कीम में विनिर्दिष्ट हों ।
10. प्रशासक की शक्तियां और कृत्य-(1) प्रशासक, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाई गई स्कीम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सलाहकार बोर्ड की सलाह पर, केवल विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में भारत में निम्नलिखित प्रकार के कारबारों में से कोई कर सकेगा, अर्थात्: -
(क) अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट स्कीमों की यूनिटों का विक्रय और क्रय करना;
(ख) प्रतिभूतियों में विनिधान करना और उनको अर्जित करना, धारित करना या उनका व्ययन करना और उनसे आनुषंगिक सभी शक्तियों और अधिकारों का प्रयोग करना और उन्हें प्रवर्तित करना जिनके अंतर्गत ऐसे विनिधान की संरक्षा या वसूली तथा ऐसे विनिधान के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रस्थापित किसी संपत्ति का प्रशासन ग्रहण करना भी है;
(ग) किसी जंगम या स्थावर संपत्ति की प्रतिभूति पर या अन्यथा ऋण और अग्रिम धन देना;
(घ) किन्हीं विनिमयपत्रों, हुंडियों, वचनपत्रों, कूपनों, ड्राफ्टों, वहन-पत्रों, रेल रसीदों, भांडागार रसीदों, माल की हकदारी के दस्तावेजों, वारंटों, प्रमाणपत्रों, लिपियों और अन्य वाणिज्यिक लिखतों को स्वीकार करना, संग्रहण करना, मितिकाटे पर भुगतान करना, पुनःमिति काटे पर भुगतान करना, क्रय करना, विक्रय करना या परक्रामित करना अथवा उनके साथ अन्य प्रकार से व्यवहार करना;
(ङ) किसी लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या ऐसी अन्य संस्था द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, अनुदत्त किसी ऋण या उधार के संबंध में भागीदारी प्रमाणपत्रों का क्रय करना, विक्रय करना या जारी करना;
(च) कंपनियों या अन्य निगमित निकायों, अनुसूचित बैंकों या ऐसी अन्य संस्थाओं के, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, पास जमा धन रखना;
(छ) अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट किसी यूनिट स्कीम के संबंध में -
(i) ऐसी बचत और जीवन बीमा योजना या योजनाएं तैयार करना, जिनके अधीन कोई व्यक्ति भारतीय जीवन बीमा निगम या केन्द्रीय सरकार के सहयोजन में या उसके अभिकर्ता के रूप में, यूनिटों में कोई हित अर्जित कर सकेगा किन्तु इसके अंतर्गत जीवन बीमा कारबार नहीं है;
(ii) ऐसी बचत और बीमा योजना या योजनाएं तैयार करना, जिनके अधीन कोई व्यक्ति साधारण बीमा निगम के सहयोजन में या उसके अभिकर्ता के रूप में यूनिटों में, कोई हित अर्जित कर सकेगा किन्तु इसके अंतर्गत साधारण बीमा कारबार नहीं है; या
(iii) कोई अन्य योजना या योजनाएं तैयार करना, जिनके अधीन कोई व्यक्ति यूनिटों में हित अर्जित कर सकेगा;
(ज) कोई स्थावर संपत्ति या उसमें कोई हित अर्जित करना, ऐसी संपत्ति का विकास करना (जिसके अंतर्गत सन्निर्माण भी है) और उसका विक्रय करना तथा कोई स्थावर संपत्ति या उसमें कोई हित अर्जित करने के लिए और ऐसी संपत्ति के विकास के लिए (जिसके अंतर्गत सन्निर्माण भी है) किसी व्यक्ति को वित्तीय या अन्य सहायता;
(झ) व्यक्तियों, कंपनियों और अन्य निगमित निकायों को पट्टे और अवक्रय आधारित वित्तपोषण करना;
(ञ) वाणिज्यिक बैंककारी और विनिधान सलाह सेवाएं उपलब्ध कराना;
(ट) भारत से बाहर निवासी व्यक्तियों तक विनिधान या निधि या पोर्टफोलियो प्रबंध सेवाओं का विस्तार करना;
(ठ) भारत से बाहर निगमित किसी बैंक में कोई खाता खोलना या अभिकरण की व्यवस्था करना;
(ड) विदेशी मुद्रा का जो उसके कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हो, क्रय करना या विक्रय करना या उसमें अन्य व्यवहार करना;
(ढ) ऐसी बचतों या विनिधानों के, जिन्हें केन्द्रीय सरकार प्राधिकृत करे, संग्रहण के संबंध में किसी अन्य प्रकार का कारबार करना;
(ण) साधारणतया सभी ऐसे कार्य और बातें करना जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन से आनुषंगिक या उनकी पारिणामिक हों ।
(2) प्रशासक, नियत दिन से ही, न तो कोई नई स्कीम विरचित करेगा और न कोई नई यूनिट जारी करेगा चाहे वह उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम से संबंधित हो या नहीं या कोई अन्य बात नहीं करेगा ।
11. प्रशासक द्वारा लेखाओं का रखा जाना-(1) प्रशासक, प्रत्येक ऐसे विनिर्दिष्ट उपक्रम की आस्ति का पृथक् लेखा रखेगा जिसका उसने कब्जा लिया है और उसमें उसके संबंध में सभी प्राप्तियों और व्ययों की प्रविष्टियां करवाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन पृथक् लेखे प्ररूप में और ऐसी रीति से रखे जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
(3) केंद्रीय सरकार इस धारा के अधीन रखे गए लेखाओं का निरीक्षण और संपरीक्षा ऐसे अंतरालों पर और ऐसे व्यक्तियों द्वारा करवाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
12. रियायत आदि के बारे में यह समझा जाना कि वह विनिर्दिष्ट उपक्रम को दी गई है-नियत दिन से ही, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम के कार्यकलाप और कारबार के संबंध में ट्रस्ट को अनुदत्त सभी वित्तीय और अन्य रियायतें, अनुज्ञप्तियां, फायदे, विशेषाधिकार और छूटें विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में दी गई समझी जाएंगी ।
13. कर छूट या फायदे का प्रभावशील बने रहना-(1) आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) या आय, लाभ अथवा अभिलाभ पर कर से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में किसी बात के होते हुए भी, प्रशासक द्वारा विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में व्युत्पन्न किसी आय, लाभ या अभिलाभ अथवा प्राप्त की गई किसी रकम के संबंध में नियत दिन को संगणित पांच वर्ष की अवधि के लिए कोई आय-कर या कोई अन्य कर संदेय नहीं होगा ।
(2) धारा 4 के निबंधनों के अनुसार उपक्रम या विनिर्दिष्ट उपक्रम के अंतरण और उसके निहित किए जाने का अर्थ यह नहीं लगाया जाएगा कि वह पूंजी अभिलाभ के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अर्थान्तर्गत अंतरण है ।
14. स्टाप शुल्क से छूट-भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (1899 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 4 के निबन्धानुसार उपक्रम और विनिर्दिष्ट उपक्रम का अंतरण और निहित होना उस अधिनियम के अधीन किसी स्टांप शुल्क के संदाय के लिए दायी नहीं होगा ।
15. प्रत्याभूति का प्रवर्तन में होना-किसी ऋण, पट्टे, वित्त पोषण या अन्य सहायता के संबंध में ट्रस्ट के लिए या उसके पक्ष में दी गई कोई प्रत्याभूति ऐसे विनिर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में जिसका प्रबंध प्रशासक द्वारा किया जा रहा है प्रवर्तन में बनी रहेगी ।
16. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से कारित या कारित होने के लिए या होने वाले संभावित किसी नुकसान के लिए कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार या प्रशासक, सलाहकार बोर्ड या केंद्रीय सरकार के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों में से किसी के विरुद्ध नहीं होगी ।
17. शेयरों, बंधपत्रों, डिबेंचरों और यूनिटों का अनुमोदित प्रतिभूतियां समझा जाना-तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट उपक्रम के शेयर, बंधपत्र, डिबेंचर और यूनिटें, भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2), बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित प्रतिभूतियां समझी जाएंगी ।
18. प्रत्येक अधिनियम, नियम, विनियम या अधिसूचना में ट्रस्ट के स्थान पर विनिर्दिष्ट कंपनी या प्रशासक का प्रतिस्थापन-नियत दिन को प्रवृत्त प्रत्येक अधिनियम, नियम, विनियम या अधिसूचना में, भारतीय यूनिट ट्रस्ट" शब्दों के स्थान पर, जहां-जहां वे आते हैं, यथास्थिति, भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 में निर्देशित विनिर्दिष्ट कंपनी" या भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम 2002 में निर्देशित भारतीय यूनिट ट्रस्ट के विनिर्दिष्ट उपक्रम का प्रशासक" शब्द रखे जाएंगे ।
19. केन्द्रीय सरकार की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 में परिवर्तन करने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को परिवर्तित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा किया गया प्रत्येक परिवर्तन, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस परिवर्तन में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएं या यदि दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु ऐसे उपांतरित या निष्प्रभाव होने से उस परिवर्तन के अनुसरण में पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
20. केंद्रीय सरकार की स्कीम बनाने की शक्ति-(1) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए स्कीम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उक्त स्कीम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेगी, अर्थात्: -
(क) वह रीति जिसमें विनिर्दिष्ट उपक्रम और अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट स्कीमों और आस्तियों तथा विनिधानों का प्रबंध किया जाएगा;
(ख) सलाहकारों की पदावधि, सलाहकारों की फीस और भत्ते तथा नियुक्ति की अन्य शर्तें, सलाहकार होने के लिए निरर्हताएं, सलाहकार के पद में आकस्मिक रिक्ति का भरा जाना, सलाहकार बोर्ड के अधिवेशन, सलाहकार के पद की रिक्ति और पदत्याग;
(ग) उस प्रतिफल के संदाय की रीति जिसके लिए उपक्रम विनिर्दिष्ट कंपनी को अंतरित किए जाएंगे;
(घ) उपक्रम और विनिर्दिष्ट उपक्रम की और उनसे संबंधित आस्तियां; और
(ङ) ऐसे आनुषंगिक, पारिणामिक और अनुपूरक विषय जो इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों ।
(3) उपधारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा किया गया प्रत्येक परिवर्तन, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीन दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस परिवर्तन में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएं या यदि दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह ऐसे उपांतरित रूप से ही प्रभावी होगा या वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु ऐसे उपांतरित या निष्प्रभाव होने से उस स्कीम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
21. 1963 के अधिनियम 52 का निरसन और व्यावृत्ति-(1) नियत दिन को भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 निरसित हो जाएगा और उक्त अधिनियम (जिसे इसमें इसके पश्चात् निरसित अधिनियम कहा गया है) की धारा 10 में निर्दिष्ट न्यासी बोर्ड विघटित हो जाएगा ।
(2) उक्त बोर्ड के विघटन पर, ऐसा व्यक्ति बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति और न्यासी तथा कार्यपालक न्यासी के रूप में नियुक्त प्रत्येक अन्य व्यक्ति और उस रूप में पद धारण करने वाला व्यक्ति ऐसी तारीख से ठीक पूर्व अपने-अपने पद रिक्त कर देंगे ।
(3) ऐसे निरसन के होते हुए भी, अधिनियम के अधीन की गई या की गई तात्पर्यित कोई बात या की गई कोई कार्रवाई जिसके अंतर्गत बनाया गया कोई नियम, विनियम, जारी की गई अधिसूचना, बनाई गई स्कीम, किया गया निरीक्षण, आदेश, दी गई सूचना या की गई कोई नियुक्ति, पुष्टि या घोषणा या प्रदत्त कोई अनुज्ञा, प्राधिकार या छूट या निष्पादित कोई दस्तावेज या लिखत या अधिनियम के अधीन दिया गया कोई निदेश है, जिसे निरसित किया गया है, जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन किया गया या लिया गया समझा जाएगा ।
(4) भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के निरसन के होते हुए भी, प्रशासक, जहां तक हो सके, ट्रस्ट के वार्षिक लेखाओं और संपरीक्षा से संबंधित किन्हीं प्रयोजनों के लिए इस प्रकार निरसित अधिनियम के अध्याय 6 के उपबंधों का अनुपालन करेगा ।
22. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-इस अधिनियम के उपबंध इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
23. अन्य विधियों के लागू होने को वर्जित न करना-इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।
24. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होते हों:
परन्तु इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् इस धारा के अधीन कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
25. निरसन और व्यावृत्ति-(1) भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अध्यादेश, 2002(2002 का अध्यादेश 5) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अध्यादेश, 2002 (2002 का अध्यादेश 5) के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची 1
[धारा 2(छ), धारा 2(झ) और धारा 19 देखिए]
भाग 1
स्कीमें
1. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, तारीख 30 मई, 1964 को प्रकाशित यूनिट स्कीम, 1964 ।
2. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, तारीख 11 दिसंबर, 1971 को प्रकाशित चिल्ड्रन्स गिफ्ट प्लान-1970 ।
3. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/392/डी पी डी (पी एंड आर) 3बी/वोल्यूम-1/85-86, तारीख 3 अप्रैल, 1986 के अधीन, 19 अप्रैल, 1986 को प्रकाशित चिल्ड्रन्स गिफ्ट ग्रोथ फंड यूनिट स्कीम, 1986 ।
4. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/360 ए/एस पी डी-174/93-94, तारीख 13 अगस्त, 1993 के अधीन, 18 सितम्बर, 1993 को प्रकाशित भोपाल गैस विक्टिम्स-मंथली इंकम प्लान-1992 ।
5. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/140ए/एस पी डी-55/93-94, तारीख 29 जुलाई, 1994 के अधीन, 27 अगस्त, 1994 को प्रकाशित राजलक्ष्मी यूनिट स्कीम (ख्र्ख्र्)।
6. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/एस पी डी-71-आर/आर-97-98, तारीख 23 अक्तूबर, 1997 के अधीन, 2 नवंबर, 1997 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1997 (ख्र्ज्) ।
7. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-96/एस पी डी-89सी/97-98, तारीख 5 जनवरी, 1998 के अधीन, 21 फरवरी, 1998 को प्रकाशित इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स स्पेशल फंड यूनिट स्कीम, 1997 (ख्र्ख्र्) ।
8. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-95/एस पी डी 71 एस/97-98, तारीख 12 जनवरी, 1998 के अधीन, 21 फरवरी, 1998 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1997 (ज्) ।
9. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-104/एस पी डी 71टी/97-97, तारीख 5 मार्च, 1998 के अधीन, 4 अप्रैल, 1998 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1998 ।
10. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/एस पी डी-89-डी/आर-ख्र्ख्र्ख्र्/97-98, तारीख 27 अप्रैल, 1998 के अधीन, 23 मई, 1998 को प्रकाशित इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स स्पेशल फंड यूनिट स्कीम 1998 (आई आई एस एफ यू एस, 98) ।
11. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/एन आर आई/आर-113/एन-52/ 97-98, तारीख 15 मई, 1998 के अधीन, 13 जून, 1998 को प्रकाशित यूटीआई, एन आर आई फंड (यू एन एफ) ।
12. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-119/एस पी डी-71 यू/97-98, तारीख 29 जून, 1998 के अधीन, 1 अगस्त, 1998 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1998 (ख्र्ख्र्) ।
13. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-125/एस पी डी-71-ज्/98-99, तारीख 7 अगस्त, 1998 के अधीन, 5 सितंबर, 1998 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान (ख्र्ख्र्ख्र्) ।
14. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-160/एस पी डी-71 डब्ल्यू/98-99, तारीख 28 जनवरी, 1999 के अधीन, 27 फरवरी, 1999 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान (ख्र्ज्) ।
15. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-101/एस पी डी-71 एक्स/98-99, तारीख 28 जनवरी, 1999 के अधीन, 6 मार्च, 1999 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1998 (ज्) ।
16. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-175/एस पी डी-55/98-99, तारीख 29 मई, 1999 के अधीन, 29 मई, 1999 को प्रकाशित चिल्ड्रन्स गिफ्ट ग्रोथ फंड यूनिट स्कीम 1999 ।
17. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर/एस पी डी-98-99, तारीख 31 मार्च, 1999 के अधीन, 29 मई, 1999 को प्रकाशित इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स स्पेशल फंड यूनिट स्कीम, 1998 (ख्र्ख्र्) ।
18. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-175/एस पी डी-59ए / 98-99, के अधीन तारीख 29 मई, 1999 को प्रकाशित राजलक्ष्मी यूनिट प्लान, 1999 ।
19. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-179/एस पी डी-71 वाई/98-99, तारीख 5 मई, 1999 के अधीन, 12 जून, 1999 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1999 ।
20. भारत सरकार और भारतीय यूनिट ट्रस्ट के बीच 22 जुलाई, 1999 को हुए करार के अधीन स्पेशल यूनिट स्कीम-1999 ।
21. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-224/एस पी डी-71-जेड/99-2000, तारीख 30 दिसम्बर, 1999 के अधीन, 22 जनवरी, 2000 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 1999 (ख्र्ख्र्) ।
22. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/एस पी डी-119-ए/आर-235/99-2000, तारीख 14 मार्च, 2000 के अधीन, 15 अप्रैल, 2000 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 2000 ।
23. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/एस पी डी-119-बी/आर-7/99-2001, तारीख 10 अगस्त, 2000 के अधीन, 9 सितंबर, 2000 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 2000 (सेकेन्ड) ।
24. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/आर-69/एस पी डी-119-डी/2000-2001, तारीख 9 अप्रैल, 2001 के अधीन, 12 मई, 2001 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 2001 ।
25. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यू टी/डी बी डी एम/एस पी डी-119-सी/आर 15/2000-2001, तारीख 14 नवम्बर, 2000 के अधीन, 13 जनवरी, 2001 को प्रकाशित मंथली इंकम प्लान 2000 (थर्ड) ।
भाग 2
आस्तियां और विनिधान
26. 1984 में भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) की धारा 25क की उपधारा (1) के अधीन सृजित विकास रिजर्व फंड में से की गई सभी आस्तियां और विनिधान ।
अनुसूची 2
[धारा 2(छ), धारा 2(ठ) और धारा 19 देखिए]
स्कीमें और योजनाएं
1. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. 158/डीपीडी (पी एंड आर)100/ वाल्यूम.1/86-87, तारीख 9 अक्तूबर, 1986 के अधीन, 25 अक्तूबर, 1986 को प्रकाशित म्यूचुअल फंड (सब्सीडरी) यूनिट स्कीम, 1986 ।
2. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/1144/एसपीडी-185/91-92, तारीख 8 जून, 1992 के अधीन, 4 जुलाई, 1992 को प्रकाशित कैपिटल ग्रोथ यूनिट स्कीम 1992 (मास्टरगेन 92) ।
3. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/155ए/एसपीडी-184/92-93, तारीख 8 अगस्त, 1992 के अधीन प्रकाशित हाऊसिंग यूनिट स्कीम, -1992 ।
4. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/2044ए/एसपीडी-61/92-93, के अधीन तारीख 17 अप्रैल, 1993 को प्रकाशित यूनिट स्कीम 1992 ।
5. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/2454ए/एसपीडी-74ए/92-93, के अधीन तारीख 17 जुलाई, 1993 को प्रकाशित मास्टर इक्विटी प्लान-1993 ।
6. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/393ए/एसपीडी-60/93-94, तारीख 18 अगस्त, 1993 के अधीन, तारीख 28 अगस्त, 1993 प्रकाशित सीनियर सिटिजंस यूनिट प्लान ।
7. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-96ए/एसपीडी-74बी/93-94, तारीख 11 जनवरी, 1994 के अधीन, 12 फरवरी, 1994 को प्रकाशित इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स यूनिट स्कीम- (ईएलएसएस 94) ।
8. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/1704ए/एसपीडी-78/93-94, तारीख 7 मार्च, 1994 के अधीन, 2 अप्रैल, 1994 को प्रकाशित ग्रोइंग कार्पस ग्रोइंग इंकम स्कीम-1994 (जी सी जी आई 94) ।
9. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/76ए/एसपीडी-68/93-94 के अधीन, 20 अगस्त, 1994 को प्रकाशित गृहलक्ष्मी यूनिट स्कीम-1994 (जी यू एस 1994) ।
10. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/680ए/एसपीडी-74सी/94-95, तारीख 10 जनवरी, 1995 के अधीन, 11 फरवरी, 1995 को प्रकाशित इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स यूनिट स्कीम 1995 (ईएलएसएस 95) ।
11. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/1109ए/एसपीडी-85/94-95, तारीख 2 मई, 1995 के अधीन, 3 जून, 1995 को प्रकाशित प्राइमरी इक्विटी फंड ।
12. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/431ए/एसपीडी-74डी/95-96, तारीख 30 नवम्बर, 1995 के अधीन, 23 दिसंबर, 1995 को प्रकाशित मास्टर इक्विटी प्लान 1996 ।
13. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-172/एसपीडी-77/96-97, तारीख 9 दिसंबर, 1996 के अधीन, 25 जनवरी, 1997 को प्रकाशित ग्रांडमास्टर यूनिट स्कीम 1993 ।
14. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर173/एसपीडी-74ई/96-97, तारीख 23 दिसंबर, 1996 के अधीन, 25 जनवरी, 1997 को प्रकाशित मास्टर इक्विटी प्लान 1997 ।
15. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/एसपीडी-93/आर-223/96-97, तारीख 24 जून, 1997 के अधीन, 26 जुलाई, 1997 को प्रकाशित यूटीआई मनी मार्केट फंड (ए मनी मार्केट म्यूचल फंड) ।
16. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-96/एसपीडी-74एफ97-98, तारीख 5 जनवरी, 1998 के अधीन, 21 फरवरी, 1998 को प्रकाशित मास्टर इक्विटी प्लान 1998 ।
17. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, तारीख 27 जून, 1998 को प्रकाशित यूनिट ग्रोथ स्कीम 10000 ।
18. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-121/एसपीडी-102/97-98, तारीख 14 जुलाई, 1998 के अधीन, 8 अगस्त, 1998 को प्रकाशित यूटीआई-बांड फंड ।
19. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-181/एसपीडी-98/97-98, तारीख 14 जुलाई, 1998 के अधीन, 8 अगस्त, 1998 को प्रकाशित यूटीआई-स्मॉल इन्वेस्टर्स फंड ।
20. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/एसपीडी-107/आर-121/97-98, तारीख 14 जुलाई, 1998 के अधीन, 8 अगस्त, 1998 को प्रकाशित मास्टर वैल्यू यूनिट प्लान 1998 ।
21. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/एसपीडी-108आर-122/97-98, तारीख 17 जुलाई, 1998 के अधीन, 15 अगस्त, 1998 को प्रकाशित मास्टर इंडेक्स फंड ।
22. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-171/एसपीडी-172/98-99, तारीख 30 मार्च, 1999 के अधीन, 24 अप्रैल, 1999 को प्रकाशित मास्टरशेयर प्लस यूनिट स्कीम 1991 ।
23. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर/एसपीडी-74जी/98-99, तारीख 7 अप्रैल, 1999 के अधीन, 29 मई, 1999 को प्रकाशित मास्टर इक्विटी प्लान 1999 ।
24. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/एसपीडी-112/आर-194ए/98-99, तारीख 27 जुलाई, 1999 के अधीन, 28 अगस्त, 1999 को प्रकाशित यूटीआई-ग्रोथ सेक्टर्स फंड (यूटीआई-जीएसएफ) ।
25. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर/एसपीडी-114/99-2000, तारीख 18 नवंबर, 1999 के अधीन, 18 दिसम्बर, 1999 को प्रकाशित यूटीआई जी-सेकेन्ड फंड ।
26. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर/एसपीडी-117/99-2000, तारीख 9 फरवरी, 2000 के अधीन, 18 मार्च, 2000 को प्रकाशित यूटीआई इक्विटी टैक्स सेविंग्स प्लान ।
27. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-238/एसपीडी-118/99-2000, तारीख 17 अप्रैल, 2000 के अधीन, 20 मई, 2000 को प्रकाशित मास्टरग्रोथ यूनिट स्कीम-1993 ।
28. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-239/एसपीडी-120/99-2000, तारीख 17 अप्रैल, 2000 के अधीन, 20 मई, 2000 को प्रकाशित निफ्टी इंडेक्स फंड (एनआईएफ) ।
29. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-241/एसपीडी-84/99-2000, तारीख 3 मई, 2000 के अधीन, 3 जून, 2000 को प्रकाशित यूनिट स्कीम 1995 (यूएस-95) ।
30. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-62/एसपीडी-96/2000-2001, तारीख 12 फरवरी, 2001 के अधीन, 17 मार्च, 2001 को प्रकाशित इंडेक्स सलेक्ट इक्विटी फंड ।
31. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-65/एसपीडी-53/2000-2001, तारीख 20 मार्च, 2001 के अधीन, 28 अप्रैल, 2001 को प्रकाशित यूनिट स्कीम फार चैरिटेबल एंड रिलिजियस ट्रस्ट्स एंड रजिस्टर्ड सोसाइटीज, 1981 ।
32. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-7/एसडी-52/2000-2001, तारीख 24 अप्रैल, 2001 के अधीन, 19 मई, 2001 को प्रकाशित यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, 1971 ।
33. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-69/एसपीडी-64/2000-2001, तारीख 9 अप्रैल, 2001 के अधीन, 12 मई, 2001 को प्रकाशित चिल्ड्रंस कैरियर प्लान (सीसीपी) ।
34. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर/एसपीडी-68-ए/2000-2001, तारीख 11 मई, 2001 के अधीन, 16 जून, 2001 को प्रकाशित यूटीआई, महिला यूनिट स्कीम (एमयूएस) ।
35. भारत के राजपत्र, भाग 3, खंड 4 में, सं. यूटी/डीबीडीएम/आर-47/एसपीडी-66/2001-2002, तारीख 25 जुलाई, 2001 के अधीन, 10 अगस्त, 2002 को प्रकाशित रिटायरमेंट बेनिफिट प्लान (आरबीपी) ।
36. यूटीआई रेगुलर इनकम स्कीम ।
37. इंडिया फंड यूनिट स्कीम 1986 ।
38. इंडिया एक्सेस फंड यूनिट स्कीम 1996 ।
39. इंडिया इंफोर्मेशन टेकनोलाजी फंड यूनिट स्कीम 1997 ।
40. इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड यूनिट स्कीम 1999 ।
41. इंडिया मीडिया-इंटरनेट एंड कम्यूनीकेशन फंड यूनिट स्कीम 2000 ।
42. वेरिएबल इंवेस्टमेंट स्कीम 2002 ।
43. यूनिट स्कीम, 2002 ।
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