राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते और विशेषाधिकार) अधिनियम, 1982
(1982 का अधिनियम संख्यांक 43)
[28 अगस्त, 1982]
राज्यपालों की उपलब्धियों, भत्तों और
विशेषाधिकारों का अवधारण
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राज्यपाल (उपलब्धियां, भत्ते और विशेषाधिकार) अधिनियम, 1982 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
[(क) पूर्व राज्यपाल" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी राज्य का या दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल रहा है ;
(कक) राज्यपाल" से किसी राज्य का या दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल या कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन कर रहा है ;]
(ख) अनुरक्षण" के अन्तर्गत-
(i) पदीय आवासों के सम्बन्ध में है विद्युत, गैस और पानी की व्यवस्था ;
(ii) मोटर यानों के सम्बन्ध में हैं चालकों का वेतन और भत्ते तथा तेल और पैट्रोल या अन्य ईंधन की व्यवस्था ;
(ग) राज्यपाल के सम्बन्ध में, कुटुम्ब के सदस्य" से राज्यपाल की [पत्नी या पति, आश्रित संतानें और आश्रित माता-पिता] अभिप्रेत हैं ;
(घ) राज्यपाल के सम्बन्ध में, पदीय आवास" से ऐसे आवास अभिप्रेत हैं जो राष्ट्रपति द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, राज्यपाल के पदीय आवासों के रूप में विनिर्दिष्ट किए जाएं और इसके अन्तर्गत कर्मचारी क्वार्टर और उनसे अनुलग्न अन्य भवन और उनके उद्यान भी हैं ;
(ङ) नियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं ;
(च) राज्य" के अन्तर्गत संघ राज्यक्षेत्र नहीं है ।
3. उपलब्धियां-प्रत्येक राज्यपाल को [एक लाख दस हजार रुपए प्रतिमास] की दर से उपलब्धियों का संदाय किया जाएगा :
परन्तु यदि किसी राज्यपाल को अपनी नियुक्ति के समय,-
(क) भारत सरकार अथवा उसकी पूर्ववर्ती सरकारों में से किसी के अधीन अथवा किसी राज्य सरकार या उसकी पूर्ववर्ती सरकारों में से किसी के अधीन किसी पूर्वतन सेवा की बाबत कोई पेंशन (जो निःशक्तता या क्षति पेंशन से भिन्न है) प्राप्त होती है तो उसकी उपलब्धियों में से,-
(i) उस पेंशन की रकम को घटा दिया जाएगा ; और
(ii) यदि उसने ऐसी नियुक्ति के पहले उस पेंशन के, जो उसे ऐसी पूर्वतन सेवा की बाबत शोध्य है, किसी भाग के बदले में उसका संराशित मूल्य प्राप्त कर लिया है तो पेंशन के उस भाग की रकम को घटा दिया जाएगा ; [अथवा]
। । । । । ।
(ख) अभिदायी भविष्य-निधि के रूप में कोई प्रसुविधा प्राप्त होती है तो उसकी उपलब्धियों में से ऐसी प्रसुविधा के पेंशन समतुल्य को घटा दिया जाएगा ।
4. छुट्टी भत्ता-(1) राष्ट्रपति, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, किसी राज्यपाल को ऐसी छुट्टी मंजूर करेंगे जो वे आवश्यक समझें ।
(2) जहां राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा छुट्टी मंजूर की जाती है, वहां उसे ऐसी छुट्टी की अवधि के दौरान ऐसी दर से छुट्टी भत्ते का संदाय किया जाएगा जो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, अवधारित करें :
परन्तु ऐसे छुट्टी भत्ते को घटाकर उस मात्रा तक, यदि कोई हो, कर दिया जाएगा जिस मात्रा तक राज्यपाल की उपलब्धियां धारा 3 के परन्तुक के अधीन घटाई जाने के दायित्वाधीन हैं ।
5. पदीय आवासों का उपयोग और अनुरक्षण-राज्यपाल अपनी संपूर्ण पदावधि पर्यन्त अपने पदीय आवासों का उपयोग, किराए का संदाय किए बिना, करने का हकदार होगा तथा ऐसे आवासों के सुसज्जित किए जाने या अनुरक्षण की बाबत स्वयं राज्यपाल पर कोई भार नहीं पड़ेगा ।
6. गृह्य स्थापन-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, ऐसे गृह्य स्थापन के, जिसकी व्यवस्था राज्यपाल के लिए की गई है, सदस्यों को दिए जाने वाले वेतन, भत्तों या पेंशन या अन्य उपलब्धियों अथवा उनको प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की बाबत स्वयं राज्यपाल पर कोई भार नहीं पड़ेगा ।
7. चिकित्सीय उपचार-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल और उसके कुटुम्ब के सदस्य, उसकी पदावधि के दौरान और तत्पश्चात् भी, उन अस्पतालों में, जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य की सरकार द्वारा चलाए जाते हैं, मुफ्त चिकित्सीय परिचर्या, स्थान-सुविधा और उपचार के हकदार होंगे ।
8. वाहन-(1) राज्यपाल किराए या भाड़े का संदाय किए बिना, उतने मोटर यानों का, जितने राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, अवधारित करें, उपयोग करने का हकदार होगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मोटर यानों के अनुरक्षण की बाबत स्वयं राज्यपाल पर कोई भार नहीं पड़ेगा ।
(3) राज्यपाल के कुटुम्ब के सदस्यों द्वारा उन मोटर यानों का, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट हैं, उपयोग इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विनियमित किया जाएगा ।
9. पद ग्रहण या पद रिक्त करने पर यात्रा भत्ता-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल-
(क) पद ग्रहण करने के लिए उस स्थान से, जहां वह मामूली तौर से निवास करता है, अपने कर्तव्य स्थान तक यात्रा की बाबत ; और
(ख) पदमुक्त होने पर अपने कर्तव्य स्थान से उस स्थान तक जहां वह तत्पश्चात् मामूली तौर से निवास करेगा, अथवा यदि उसे ऐसी पदमुक्ति के पश्चात् सरकार के अधीन कोई अन्य पद (जिसके अन्तर्गत किसी अन्य राज्य के राज्यपाल का पद भी है) ग्रहण करना है तो ऐसे अन्य पद के सम्बन्ध में कर्तव्य स्थान तक यात्रा की बाबत,
अपने लिए और अपने कुटुम्ब के सदस्यों के लिए तथा अपनी और अपने कुटुम्ब की चीजबस्त के परिवहन के लिए यात्रा भत्ते का हकदार होगा ।
10. साज-सामान के नवीकरण और पदीय आवासों के अनुरक्षण के लिए भत्ते-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल साज-सामान के नवीकरण और पदीय आवासों के अनुरक्षण के लिए ऐसे भत्तों का हकदार होगा, जो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, अवधारित करें ।
11. अन्य विशेषाधिकार और भत्ते-राज्यपाल को अपने पद के कर्तव्यों का सुविधापूर्वक और गरिमा के साथ निर्वहन करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए,-
(i) राज्यपाल ऐसे अन्य विशेषाधिकारों का हकदार होगा जो इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विहित किए जाएं, तथा
(ii) राज्यपाल को इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित के रूप में ऐसी रकम का, जो राष्ट्रपति, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, अवधारित करें, संदाय किया जाएगा, अर्थात् :-
(क) सत्कार भत्ता ;
(ख) आतिथ्य अनुदान ;
(ग) गृह्य स्थापन व्यय ;
(घ) कार्यालय व्यय ;
(ङ) संविदात्मक भत्ता, अर्थात् प्रकीर्ण व्ययों के लिए भत्ता ;
(च) पर्यटन व्यय ; और
(छ) ऐसे अन्य भत्ते या व्यय जो नियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं ।
12. अतिरिक्त व्यय-(1) जहां किसी राज्यपाल की दशा में, राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि किसी विषय की बाबत किन्हीं भत्तों के रूप में या किन्हीं व्ययों को पूरा करने के लिए, इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत रकम में वृद्धि की जाने की आवश्यकता है अथवा किसी ऐसे विषय की बाबत, जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में उपबंध यद्यपि अनुज्ञेय है तदपि वह नहीं किया गया है, व्यय मंजूर किए जाने की आवश्यकता पैदा हो गई है, वहां वह विशेष आदेश द्वारा, ऐसी रकम में उस मात्रा तक, वृद्धि कर सकेगा या ऐसे व्ययों को उस मात्रा तक मंजूर कर सकेगा जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन इस प्रकार आदेश किया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो ।
(3) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा ।
[12क. पूर्व राज्यपाल की सचिवालयिक सहायता की हकदारी-इस निमित्त बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, पूर्व राज्यपाल, उसके शेष जीवन के लिए, प्रतिपूर्ति आधार पर एक निजी सहायक की सचिवालयिक सहायता का हकदार होगा :
परन्तु जहां ऐसा पूर्व राज्यपाल, राज्यपाल के पद पर पुनर्नियुक्त या संसद् या राज्य विधान-मंडल के लिए निर्वाचित या संघ या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर नियुक्त किया गया है वहां, वह, ऐसी अवधि के लिए जिसके दौरान वह ऐसा पद धारण करता है, ऐसी सचिवालयिक सहायता के लिए पात्र नहीं होगा ।]
13. नियम बनाने की शक्ति-(1) राष्ट्रपति, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेंगे ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) धारा 4 के अधीन, राज्यपाल को छुट्टी की मंजूरी ;
(ख) धारा 6 के अधीन, ऐसे गृह्य स्थापन से, जिसकी व्यवस्था राज्यपाल के लिए की गई है, संबंधित विषय ;
(ग) धारा 7 के अधीन, राज्यपाल और उसके कुटुम्ब के सदस्यों की चिकित्सीय परिचर्या, स्थान-सुविधा और उपचार ;
(घ) धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन, राज्यपाल के कुटुम्ब के सदस्यों द्वारा मोटर यानों का उपयोग ;
(ङ) धारा 9 के अधीन, राज्यपाल के पद ग्रहण या पद रिक्त करने पर यात्रा भत्ता ;
(च) धारा 10 के अधीन, पदीय आवासों के साज-सामान के नवीकरण के लिए और उनके अनुरक्षण के लिए भत्ते ;
(छ) धारा 11 के अधीन, वे विशेषाधिकार जिनके लिए राज्यपाल हकदार है और वे भत्ते या व्यय जो राज्यपाल को संदेय हैं ।
[(ज) धारा 12क के अधीन सचिवालयिक सहायता और प्रतिपूर्ति प्रदान करने की रीति ।]
(3) इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रपति द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
14. विधिमान्यकरण-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ के पहले, राष्ट्रपति द्वारा किसी राज्यपाल (नागालैण्ड के राज्यपाल से भिन्न) के भत्तों, व्ययों (जिनके अन्तर्गत चिकित्सा व्यय भी हैं) या विशेषाधिकारों की बाबत जारी किया गया प्रत्येक विशेष आदेश, इस बात के होते हुए भी कि ऐसा आदेश भूतलक्षी प्रभाव देकर किया गया था, अथवा वह उन विषयों की बाबत किसी विधि के अधीन जारी किए गए किसी साधारण आदेश से असंगत है, ऐसे विधिमान्य और प्रभावी होगा मानो ऐसा विशेष आदेश इस उपधारा का भाग था तथा यह उपधारा सभी तात्त्विक समयों पर प्रवृत्त थी ।
(2) इस अधिनियम के प्रारंभ के पहले, राष्ट्रपति द्वारा नागालैंड के राज्यपाल के भत्तों, व्ययों (जिनके अंतर्गत चिकित्सा व्यय भी हैं) या विशेषाधिकारों की बाबत जारी किया गया प्रत्येक साधारण या विशेष आदेश, इस बात के होते हुए भी कि ऐसा आदेश भूतलक्षी प्रभाव देकर किया गया था, ऐसे विधिमान्य और प्रभावी होगा मानो वह इस उपधारा का भाग था और यह उपधारा सभी तात्त्विक समयों पर प्रवृत्त थी ।
15. व्यावृत्ति-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों की कोई भी बात इस प्रकार प्रभावी नहीं होगी कि उससे किसी राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी उपलब्धियां और भत्ते घट जाएं ।
___________

