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साप्ताहिक अवकाशदिन अधिनियम, 1942 ( Weekly Holidays Act, 1942 )


 

साप्ताहिक अवकाशदिन अधिनियम, 1942

(1942 का अधिनियम संख्यांक 18)

[3 अप्रैल, 1942]

दुकानों, उपाहारगृहों और नाट्यशालाओं में नियोजित व्यक्तियों को

साप्ताहिक अवकाशदिन अनुदत्त किए जाने

का उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

                दुकानों, उपाहारगृहों और नाट्यशालाओं में नियोजित व्यक्तियों को साप्ताहिक अवकाशदिन अनुदत्त किए जाने का उपबन्ध करना समीचीन है;

अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम साप्ताहिक अवकाशदिन अधिनियम, 1942 कहा जा सकेगा । 

(2) इसका विस्तार  *** सम्पूर्ण भारत पर है । 

(3) यह किसी राज्य में या राज्य में के किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र में केवल तभी प्रवृत्त होगा जबकि राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसा निदेश दे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो,-

(क) “स्थापन” से दुकान, उपाहारगृह या नाट्यशाला अभिप्रेत है; 

(ख) “दिन” से मध्यरात्रि को प्रारम्भ होने वाली चौबीस घण्टों की कालावधि अभिप्रेत है; 

(ग) “उपाहारगृह” से ऐसा कोई परिसर अभिप्रेत है जिसमें जनता को अथवा जनता के किसी वर्ग को परिसर में उपभोग के लिए भोजन या जलपान के प्रदाय का कारबार प्रधानतः या पूर्णतः चलाया जाता है किन्तु किसी नाट्यशाला से संलग्न उपाहारगृह इसके अन्तर्गत नहीं आता; 

(घ) “दुकान” के अन्तर्गत कोई ऐसा परिसर आता है जहां कोई फुटकर व्यापार या कारबार चलाया जाता है, जिसके अन्तर्गत नाई या केश प्रसाधक का कारबार और नीलाम द्वारा फुटकर विक्रय आते हैं, किन्तु कार्यक्रमों के, प्रसूचियों के और अन्य वैसे ही विक्रय, जो नाट्यशालाओं पर किए जाते हैं, नहीं आते ; 

(ङ) “नाट्यशाला” के अन्तर्गत कोई ऐसा परिसर आता है जो प्रधानतः या पूर्णतः चलचित्रों, नाटकों या रंगमंचीय मनोरंजनों के प्रदर्शन के लिए आशयित है; 

(च) “सप्ताह” से शनिवार की मध्यरात्रि को प्रारम्भ होने वाली सात दिन की कालावधि अभिप्रेत है । 

3. दुकानों का बन्द रहना-(1) हर दुकान सप्ताह में एक दिन पूरे तौर पर बन्द रहेगी, जो दिन दुकानदार द्वारा दुकान में के किसी सहजदृश्य स्थान में स्थायी तौर पर प्रदर्शित सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाएगा । 

(2) इस प्रकार विनिर्दिष्ट किया गया दिन दुकानदार द्वारा तीन मास में एक से अधिक बार परिवर्तित नहीं किया जाएगा ।

4. दुकानों, उपाहारगृहों और नाट्यशालाओं में साप्ताहिक अवकाशदिन-किसी दुकान, उपाहारगृह या नाट्यशाला में गोपनीयता की हैसियत में या प्रबन्ध के पद पर से अन्यथा नियोजित हर व्यक्ति को हर एक सप्ताह में एक सम्पूर्ण दिन का अवकाश दिया जाएगा :

परन्तु इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जिसकी प्राधिकृत छुट्टी पर बिताए गए दिनों को सम्मिलित करते हुए उस सप्ताह में नियोजन की कुल कालावधि छह दिन से कम हो, और न दुकान में नियोजित किसी ऐसे व्यक्ति को अतिरिक्त अवकाशदिन का हकदार बनाएगी जिसको उस दिन जब दुकान धारा 3 के अनुसरण में बन्द रही एक सम्पूर्ण दिन का अवकाश दिया जा चुका हो ।

5. अतिरिक्त आधे दिन की बन्दी या अवकाश-(1) राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा दुकानों के या दुकानों के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग के बारे में यह अपेक्षा कर सकेगी कि वे धारा 3 द्वारा उपबन्धित दिन के अतिरिक्त हर सप्ताह में एक साप्ताहिक दिन को अपराह्न में ऐसे समय पर बन्द कर दी जाएंगी, जो राज्य सरकार द्वारा नियत किया जाए, और नाट्यशालाओं तथा उपाहारगृहों या दोनों में से किसी के या दोनों के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग के बारे में यह अपेक्षा कर सकेगी कि गोपनीयता की हैसियत में या प्रबन्ध के पद पर से अन्यथा उसमें नियोजित हर व्यक्ति को हर एक सप्ताह में आधे दिन का अतिरिक्त अवकाश दिया जाएगा, जो अपराह्न में उस समय प्रारम्भ होगा जो राज्य सरकार द्वारा नियत किया जाए ।

(2) राज्य सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए विभिन्न दुकानों या दुकानों के विभिन्न वर्गों के लिए या विभिन्न क्षेत्रों के लिए या वर्ष के विभिन्न कालों के लिए विभिन्न समय नियत कर सकेगी ।

(3) वह साप्ताहिक दिन जिसको दुकान उपधारा (1) के अधीन की अपेक्षा के अनुसरण में बन्द रहती है, दुकानदार द्वारा दुकान में के किसी सहरदृश्य स्थान पर स्थायी तौर पर प्रदर्शित सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाएगा और दुकानदार द्वारा तीन मास में एक से अधिक बार परिवर्तित नहीं किया जाएगा । 

6. मजदूरी में से किसी कटौती या कमी का किया जाना-किसी ऐसे स्थापन में, जिसे यह अधिनियम लागू होता हो, नियोजित किसी व्यक्ति की मजदूरी में से कोई कटौती या कमी किसी ऐसे दिन के या दिन के भाग के बारे में नहीं की जाएगी जिसको धाराओं 3, 4 और 5 के अनुसार वह स्थापन बन्द रहा है या अवकाश दिया गया है और यदि ऐसा व्यक्ति इस आधार पर नियोजित किया गया हो कि मामूली तौर पर उसे ऐसे दिन या दिन के भाग की मजदूरी नहीं मिलेगी तो भी उसे उस दिन के भाग के लिए उतनी मजदूरी दी जाएगी जो उसे तब मिलती जब उस दिन या दिन के भाग को स्थापन बन्द न रहता या अवकाश न दिया गया होता । 

7. निरीक्षक-(1) राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा व्यक्तियों को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसी स्थानीय सीमाओं के लिए जो वह ऐसे हर एक व्यक्ति को समनुष्टि करे, निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी ।  

(2) इस धारा के आधीन नियुक्त किया गया हर निरीक्षक भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के अन्दर लोक सेवक समझा जाएगा । 

8. निरीक्षकों की शक्तियां-(1) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए निरीक्षक उन स्थानीय सीमाओं के भीतर जिनके लिए वह नियुक्त किया गया हो-

(क) किसी ऐसे स्थापन में जिसे यह अधिनियम लागू होता है, ऐसे सहायकों के साथ (यदि कोई हों), जो सरकार के  सेवक हों और जिन्हें वह ठीक समझे, प्रवेश कर सकेगा और बना रह सकेगा; 

(ख) ऐसे किसी स्थापन की और धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में उसमें रखे गए किसी अभिलेख, रजिस्टर या सूचना की ऐसी परीक्षा कर सकेगा और, स्थल पर या अन्यथा किसी व्यक्ति का ऐसा साक्ष्य ले सकेगा जैसा वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे; 

(ग) अन्य ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हों ।

(2) धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में रखे गए किसी अभिलेख, रजिस्टर या सूचना की अभिरक्षा रखने वाला कोई व्यक्ति निरीक्षक द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाने पर उसे पेश करने के लिए आबद्ध होगा, किन्तु कोई भी व्यक्ति किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए विवश न किया जा सकेगा, यदि उसके उत्तर की प्रवृत्ति उस व्यक्ति को प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः अपराध में फंसाने की हो । 

9. शास्तियां-धारा 3 के, धारा 4 के, धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना द्वारा अधिरोपित अपेक्षा के, धारा 6 के या धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के किसी उल्लंघन की दशा में उस स्थापन का, जिसमें ऐसा उल्लंघन हुआ हो, स्वत्वधारी या उसके प्रबन्ध के लिए उत्तरदायी अन्य व्यक्ति जुर्माने से, जो प्रथम अपराध की दशा में पच्चीस रुपए तक का और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा । 

10. नियम-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी । 

(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम- 

(क) ऐसे व्यक्तियों को परिभाषित कर सकेंगे जो धाराओं 4 और 5 के प्रयोजनों के लिए गोपनीयता की हैसियत में या प्रबन्ध के पद पर नियोजित समझे जाएंगे; 

(ख) निरीक्षकों द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कर्तव्यों का निर्वहन विनियमित कर सकेंगे; 

(ग) जिन स्थापनों को यह अधिनियम लागू होता है उनमें रजिस्टरों और अभिलेखों के रखे जाने और सूचनाओं के संप्रदर्शन की अपेक्षा कर सकेंगे और उनके प्ररूप और अन्तर्वस्तु विहित कर सकेंगे । 

 [(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]

11. छूट और निलम्बन की शक्ति-अपने नियंत्रण के अधीन के स्थापनों के बारे में केन्द्रीय सरकार और राज्य में के अन्य सब स्थापनों के बारे में राज्य सरकार ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अध्यधीन जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, किसी ऐसे स्थापन को, जिसे यह अधिनियम लागू होता है, इस अधिनियम के सब उपबन्धों से या किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबन्धों से छूट दे सकेगी और मेला या उत्सव के या लगातार होने वाले लोक अवकाश दिनों के सम्बन्ध में किसी विशेष अवसर पर इस अधिनियम का प्रवर्तन विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए निलम्बित कर सकेगी ।

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