*** बायलर अधिनियम, 1923
(1923 का अधिनियम संख्यांक 5)
[23 फरवरी, 1923]
वाष्प बायलरों से संबंधित विधि का समेकन और संशोधन
करने के लिए
अधिनियम
वाष्प बायलरों से संबंधित विधि का समेकन और संशोधन करना समीचीन है ;
अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप से यह अधिनियमित किया जाता है :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम 1*** बायलर अधिनियम, 1923 है ।
[(2) इसका विस्तार [जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय] सम्पूर्ण भारत पर है ।]
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो,-
[(क) "दुर्घटना" से बायलर या बायलर संघटक का ऐसा विस्फोट जो उसकी मजबूती को कमजोर करने के लिए उपयुक्त है या उससे जल या वाष्प का ऐसा अनियंत्रित बहाव अभिप्रेत है, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु या उसको क्षति या किसी संपत्ति को नुकसान कारित हो सकता है ;]
[(ख) "बायलर" से ऐसा दबाव पात्र अभिप्रेत है जिसमें उसके स्वयं के बाह्य उपयोग के लिए ऊष्मा के अनुप्रयोग द्वारा वाष्प उत्पन्न की जाती है, जो वाष्प बंद कर दिए जाने पर पूर्णतः या भागतः दबावाधीन रहता है किंतु इसके अंतर्गत ऐसा दबाव पात्र नहीं है,-
(i) जो 25 लीटर से कम क्षमता वाला है (ऐसी क्षमता को भरणरोधी वाल्व से मुख्य वाष्परोधी वाल्व तक मापा जाता है) ;
(ii) जो प्रति वर्ग सेंटीमीटर एक किलोग्राम से कम डिजाइन गेज दबाव या क्रियाशील गेज दबाव वाला है ;
(iii) जिसमें जल 100 डिग्री सेंटीग्रेड से कम पर ऊष्मित किया जाता है ;
(खक) "बायलर संघटक" से वाष्प नली, भरण नली, इकोनोमाईजर, अति तापित्र, कोई मढ़ाई या अन्य फिटिंग और किसी बायलर का कोई अन्य ऐसा बाह्य या आंतरिक भाग अभिप्रेत है जो प्रति वर्ग सेंटीमीटर गेज एक किलोग्राम से अधिक दबावाधीन है ;]
[(ग) "मुख्य निरीक्षक", "उपमुख्य निरीक्षक" और "निरीक्षक" से इस अधिनियम के अधीन क्रमशः मुख्य निरीक्षक, उपमुख्य निरीक्षक तथा निरीक्षक के रूप में नियुक्त व्यक्ति अभिप्रेत है ; ]
[(गक) "सक्षम प्राधिकारी" से बायलर और बायलर संघटकों की वेल्डिंग करने के लिए वेल्डरों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ऐसी रीति में मान्यताप्राप्त कोई संस्था अभिप्रेत है, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ;
(गख) "सक्षम व्यक्ति" से ऐसी रीति में मान्यताप्राप्त विनिर्माण, परिनिर्माण और उपयोग के दौरान बायलर और बायलर संघटकों के निरीक्षण और प्रमाणन के लिए कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो विनियमों द्वारा विहित किए जाएं । सभी निरीक्षक तथ्यतः सक्षम व्यक्ति होंगे ;]
[(गग) "इकानामाईजर" से अभिप्रेत है भरण नली का कोई ऐसा भाग जो अवशिष्ट ऊष्मा को इकट्ठा करने के लिए फ्लू गैसेज की क्रिया के लिए पूर्णतः या भागतः खुला रहता है ;
(गगग) "भरण नली" से अभिप्रेत है पूर्णतः या भागतः दबावाधीन कोई नली या संबद्ध फिटिंग, जिसके द्वारा भरण जल सीधे बायलर में पहुंचता है और [जो] उसका अनिवार्य भाग नहीं है ;]
[(गगघ) "निरीक्षण प्राधिकारी" से विनिर्माण के दौरान बायलरों और बायलर संघटकों के निरीक्षण और प्रमाणन के लिए ऐसी रीति में मान्यताप्राप्त कोई संस्था अभिप्रेत है, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए । सभी मुख्य बायलर निरीक्षक तथ्यतः निरीक्षण प्राधिकारी होंगे ;
(गगङ) "विनिर्माण" से बायलर, बायलर संघटक या दोनों का विनिर्माण, सन्निर्माण और बनाना अभिप्रेत है ;
(गगच) "विनिर्माता" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो विनिर्माण से लगा हुआ है ;]
(घ) "स्वामी" के [अंतर्गत अपने स्वामी के अभिकर्ता के रूप में बायलर का कब्जा रखने वाला या उपयोग करने वाला] कोई व्यक्ति है और इसके अन्तर्गत किसी ऐसे बायलर का उपयोग करने वाला ऐसा व्यक्ति भी है जो बायलर के स्वामी ने भाड़े पर लिया है अथवा उधार के रूप में प्राप्त किया है ;
(ङ) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों या नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
[(च) "वाष्प नली" से कोई ऐसी नली अभिप्रेत है, जिससे वाष्प निकलती है यदि-
(i) वह दबाव, जिस पर ऐसी नली से निकलने वाली वाष्प का दबाव, वायु मंडलीय दबाव से प्रति वर्ग सेंटीमीटर 3.5 किलोग्राम से अधिक है, या
(ii) ऐसी नली आंतरिक व्यास में 254 मिलीमीटर से अधिक है और वाष्प का दबाव वायु मंडलीय दबाव से प्रति वर्ग सेंटीमीटर 1 किलाग्राम से अधिक है,
और दोनों ही दशाओं में वाष्प नली से संबंधित फिटिंग भी उसके अंतर्गत है ;]
[(छ) संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरणञ्ज् से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं,-
(i) बायलर या बायलर संघटक के डिजाइन में कोई परिवर्तन ;
(ii) बायलर या बायलर संघटक के किसी भाग का ऐसे भाग द्वारा, जो उसी विनिर्देश के अनुरूप नहीं है, प्रतिस्थापन ; और
(iii) बायलर या बायलर संघटक के किसी भाग में कोई परिवर्धन ;]
(ज) "अति तापित्र" से कोई ऐसा उपस्कर अभिप्रेत है, जो संतृप्ति ताप से अधिक उस दाब पर वाष्प का ताप बढ़ाने के प्रयोजन के लिए फ्लु गैसों की ओर भागतः या पूर्णतः अभिदर्शित है और उसके अन्तर्गत पुनः तापित्र है ;
(झ) "तकनीकी सलाहकार" से धारा 4क की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त तकनीकी सलाहकार अभिप्रेत है ।]
[2क. अधिनियम का भरण नलियों को लागू होना-इस अधिनियम में [धारा 2 के खण्ड (च) में प्रयुक्त "वाष्प नली" शब्द के सिवाय], किसी वाष्प नली या वाष्प नलियों के प्रति निर्देश के बारे में यह समझा जाएगा कि इसके अन्तर्गत क्रमशः भरण नली या भरण नलियों के प्रति निर्देश भी है ।]
[2ख. अधिनियम का इकानामाईजर को लागू होना-इस अधिनियम में [धारा 2 के खण्ड (गगग) *** *** के सिवाय], किसी बायलर या बायलरों के प्रति निर्देश के बारे में यह समझा जाएगा कि इसके अन्तर्गत क्रमशः किसी इकानामाईजर या इकानामाईजर्स के प्रति निर्देश भी है ।]
[3. लागू होने की परिसीमा-इस अधिनियम की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी :-
(क) रेल का या उसके नियंत्रणाधीन लोकोमोटिव बायलर ;
(ख) (त्) वाष्प शक्ति द्वारा पूर्णतः या भागतः नोदित किसी जलयान का ;
(त्त्) सेना, नौसेना या वायुसेना का या उसके नियंत्रणाधीन ; अथवा
(त्त्त्) यदि बायलर क्षमता में एक सौ लीटर से अधिक नहीं है, तो अस्पताल या परिचर्या गृहों में प्रयुक्त निर्जर्मक रोगाणु नाशी से संबंधित है,
बायलर या बायलर संघटक ।]
4. विस्तार को सीमित करने की शक्ति- [राज्य सरकार], राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के सभी या किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबन्धों के प्रवर्तन से किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र को, अपवर्जित कर सकेगी ।
[4क. तकनीकी सलाहकार-(1) केन्द्रीय सरकार, ऐसी अर्हताएं और अनुभव, जो नियमों द्वारा विहित किए जाएं, रखने वाले व्यक्तियों में से तकनीकी सलाहकार नियुक्त करेगी ।
(2) तकनीकी सलाहकार की सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं ।
(3) तकनीकी सलाहकार, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के अधीन उसको समनुदेशित शक्तियों का प्रयोग करने और कर्तव्यों का निर्वहन करने के अतिरिक्त, ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो केन्द्रीय सरकार और बोर्ड उसे प्रत्यायोजित करें ।
4ख. वेल्डर प्रमाणपत्र-(1) कोई व्यक्ति जो, किसी बायलर या बायलर संघटक या दोनों से संसक्त या संबंधित किसी वेल्डिंग कार्य को करने की प्रस्थापना करता है, सक्षम प्राधिकारी को, वेल्डर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, सक्षम प्राधिकारी वेल्डर प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा और उसे अनुदत्त करने के लिए ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।
(3) सक्षम प्राधिकारी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उपधारा (2) के अधीन वेल्डर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति ने वेल्डर प्रमाणपत्र जारी किए जाने के लिए पूर्व शर्तों का अनुपालन किया है तो ऐसे व्यक्ति को ऐसा प्रमाणपत्र ऐसी फीस का संदाय किए जाने पर और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विनियमों द्वारा विहित की जाएं, जारी करेगा :
परन्तु सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति को वेल्डर प्रमाणपत्र देने से तब तक इंकार नहीं करेगा, जब तक कि ऐसे व्यक्ति को सुनवाई का अवसर नहीं दे दिया जाता है ।
4ग. बायलर और बायलर संघटक के विनिर्माण के लिए पूर्व शर्तें- कोई व्यक्ति, बायलर या बायलर संघटक या दोनों का तब तक विनिर्माण नहीं करेगा या विनिर्माण नहीं कराएगा जब तक कि,-
(क) उसने ऐसे परिसरों या प्रसीमाओं में जहां, ऐसे बायलर या बायलर संघटक या दोनों का विनिर्माण नहीं किया जाता है, डिजाइन और संरचना के लिए ऐसी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की है, जो विनियमों द्वारा विहित की जाएं ;
(ख) बायलर और बायलर संघटक के डिजाइन और रेखाचित्र का धारा 4घ की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन निरीक्षण प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन न कर दिया गया हो ;
(ग) ऐसे बायलर या बायलर संघटक या दोनों की विनिर्माण में प्रयुक्त सामग्री, मढ़ाई और फिटिंगें विनियमों द्वारा विहित विनिर्देशों के अनुरूप न हों ;
(घ) बायलर या बायलर संघटक की वेल्डिंग के लिए नियोजित व्यक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया बायलर वेल्डर प्रमाणपत्र धारण न करता हो ।
4घ. विनिर्माण के दौरान निरीक्षण-(1) प्रत्येक विनिर्माता, किसी बायलर या बायलर संघटक का विनिर्माण प्रारंभ करने के पूर्व, विनिर्माण के ऐसे प्रक्रमों पर, जो विनियमों द्वारा विहित किए जाएं, निरीक्षण करने के लिए एक निरीक्षण प्राधिकारी नियोजित करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियोजित निरीक्षण प्राधिकारी, बायलर या बायलर संघटक के निरीक्षण और प्रमाणन के लिए ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो विनियमों द्वारा विहित की जाए और निरीक्षण के पश्चात् यदि-
(क) उसका यह समाधान हो जाता है कि बायलर या बायलर संघटक विनियमों द्वारा विहित मानकों के अनुरूप है तो वह निरीक्षण का प्रमाणपत्र जारी करेगा और बायलर या बायलर संघटक, या दोनों पर स्टाम्प लगाएगा ; या
(ख) उसकी यह राय है कि बायलर या बायलर संघटक या दोनों विनियमों द्वारा विहित मानकों के अनुरूप नहीं है तो वह उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार कर सकेगा :
परन्तु किसी प्रमाणपत्र से तब तक इन्कार नहीं किया जाएगा जब तक कि निरीक्षण प्राधिकारी ने, बायलर या बायलर संघटक या दोनों के विनिर्माता को लिखित रूप में ऐसे उपान्तरण या सुधार करने के लिए जो वह आवश्यक समझे, निदेश नहीं दे दिया हो और निरीक्षण प्राधिकारी की यह राय है कि ऐसे निदेश के बाद भी बायलर या बायलर संघटक या दोनों के विनिर्माता ने निदेश का पालन नहीं किया है ।
(3) निरीक्षण प्राधिकारी, इस धारा के अधीन निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए, ऐसी फीस प्रभारित कर सकेगा, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।
4ङ. परिनिर्माण के दौरान निरीक्षण-(1) कोई स्वामी, जो धारा 7 के अधीन बायलर को रजिस्टर करने की प्रस्थापना करता है, बायलर के परिनिर्माण के प्रक्रम पर निरीक्षण करने के लिए किसी निरीक्षण प्राधिकारी को नियोजित करेगा ।
(2) निरीक्षण प्राधिकारी, बायलर या बायलर संघटक या दोनों के निरीक्षण और प्रमाणन के लिए ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जो विनियमों द्वारा विहित की जाए और निरीक्षण के पश्चात् यदि-
(क) उसका यह समाधान हो जाता है कि बायलर का परिनिर्माण विनियमों के अनुसार है तो वह ऐसे प्ररूप में जो विनियमों द्वारा विहित किया जाए, निरीक्षण प्रमाणपत्र जारी करेगा ; या
(ख) उसकी यह राय है कि बायलर का परिनिर्माण विनियमों के अनुसार नहीं किया गया है तो वह उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, प्रमाणपत्र अनुदत्त करने से इंकार कर सकेगा और तत्काल बायलर या बायलर संघटक के विनिर्माता को ऐसी इंकारी के बारे में संसूचित करेगा :
परन्तु ऐसे किसी प्रमाणपत्र से तब तक इंकार नहीं किया जाएगा जब तक कि निरीक्षण प्राधिकारी ने स्वामी को लिखित रूप में ऐसे उपान्तरण या सुधार करने के लिए, जो वह आवश्यक समझे, निदेश न दे दिया हो और निरीक्षण प्राधिकारी की यह राय है कि ऐसे निदेश के बाद भी स्वामी ने, निदेश का पालन नहीं किया है ।
(3) निरीक्षण प्राधिकारी इस धारा के अधीन निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए ऐसी फीस प्रभारित कर सकेगा, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।
4च. बायलर और बायलर संघटक की मरम्मत के लिए पूर्व शर्तें-कोई व्यक्ति, किसी बायलर या बायलर संघटक या दोनों की तब तक मरम्मत न करेगा या मरम्मत नहीं कराएगा जब तक कि,श्न्
(क) उसने उन परिसरों या प्रसीमाओं में, जिनमें ऐसा बायलर या बायलर संघटक या दोनों का उपयोग किया जा रहा है, मरम्मत के लिए ऐसी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं कर ली हो, जो विनियमों द्वारा विहित की जाएं ;
(ख) यथास्थिति, बायलर या बायलर संघटक के डिजाइन और रेखाचित्र और ऐसे बायलर या बायलर संघटक की मरम्मत में प्रयुक्त सामग्री, मढ़ाई, फिटिंगें विनियमों के अनुरूप न हों ;
(ग) वेल्डिंग में लगाया गया व्यक्ति किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया वेल्डर प्रमाणपत्र धारण न करता हो ;
(घ) प्रत्येक उपयोगकर्ता, जिसके पास बायलर या बायलर संघटक की मरम्मत के लिए अपनी सुविधाएं नहीं हैं किसी ऐसे बायलर मरम्मतकर्ता को नियोजित करेगा जिसके पास, यथास्थिति, किसी बायलर या बायलर संघटक की या दोनों की मरम्मत के लिए बायलर मरम्मत प्रमाणपत्र, हो ;
(ङ) प्रत्येक उपयोगकर्ता अपने द्वारा या मरम्मतकर्ताओं द्वारा की जाने वाली मरम्मत के अनुमोदन के लिए किसी सक्षम व्यक्ति को नियोजित करेगा ।]
[5. मुख्य निरीक्षक, उपमुख्य निरीक्षक तथा निरीक्षक-(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राज्य के लिए उन व्यक्तियों को निरीक्षक के रूप में नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह उचित समझे और उन स्थानीय सीमाओं को परिनिश्चित कर सकेगी जिनके भीतर प्रत्येक निरीक्षक, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा अपने पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करेगा ।
(2) राज्य सरकार, राज्य के लिए उन व्यक्तियों को उपमुख्य निरीक्षक के रूप में नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह उचित समझे और उन स्थानीय सीमाओं को परिनिश्चित कर सकेगी जिनके भीतर प्रत्येक उपमुख्य निरीक्षक, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा अपने कर्तव्यों का पालन करेगा ।
(3) प्रत्येक उपमुख्य निरीक्षक, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन निरीक्षकों को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा तथा अपने पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन कर सकेगा और उसके अतिरिक्त इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन मुख्य निरीक्षक को प्रदत्त ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा या मुख्य निरीक्षक पर अधिरोपित ऐसे कर्तव्यों का पालन कर सकेगा, जो राज्य सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएं ।
(4) राज्य सरकार किसी व्यक्ति को राज्य के लिए मुख्य निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन मुख्य निरीक्षक को प्रदत्त शक्तियों तथा उस पर अधिरोपित कर्तव्यों के अतिरिक्त उपमुख्य निरीक्षक या निरीक्षकों को इस प्रकार प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग कर सकेगा या उन पर अधिरोपित किसी कर्तव्य का पालन कर सकेगा ।
[(4क) कोई व्यक्ति मुख्य निरीक्षक, उपमुख्य निरीक्षक या निरीक्षक के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसके पास ऐसी अर्हताएं और अनुभव न हों, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।]
(5) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उपमुख्य निरीक्षक और निरीक्षक इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उनको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग तथा उन पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन मुख्य निरीक्षक के साधारण अधीक्षण तथा नियंत्रण के अधीन रहते हुए करेंगे ।
(6) मुख्य निरीक्षक, उपमुख्य निरीक्षक तथा निरीक्षक बायलर के उचित अनुरक्षण तथा सुरक्षित कार्यकरण की बाबत; स्वामियों को ऐसी सलाह दे सकेंगे जैसी वे उचित समझें ।
(7) मुख्य निरीक्षक, तथा सभी उपमुख्य निरीक्षक और निरीक्षक भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।]
6. रजिस्टर न किए गए या अप्रमाणित बायलरों के उपयोग पर रोक- इस अधिनियम में जैसा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है उसके सिवाय किसी बायलर का कोई स्वामी-
(क) किसी बायलर का उपयोग तब तक नहीं करेगा या उसके उपयोग की अनुज्ञा तब तक नहीं देगा जब तक उसे इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार रजिस्टर न किया गया हो ;
(ख) किसी ऐसे बायलर की दशा में जिसका एक राज्य से दूसरे राज्य को अन्तरण किया गया है, किसी बायलर का उपयोग तब तक नहीं करेगा या उसके उपयोग की अनुज्ञा तब तक नहीं देगा जब तक उक्त अन्तरण की रिपोर्ट विहित रीति से नहीं कर दी गई हो ;
(ग) किसी बायलर का उपयोग तब तक नहीं करेगा या उसके उपयोग की अनुज्ञा तब तक नहीं देगा जब तक इस अधिनियम के अधीन बायलर का उपयोग प्राधिकृत करने वाला प्रमाणपत्र या कोई अनन्तिम आदेश उस समय प्रवृत्त न हो ;
(घ) किसी बायलर का उपयोग ऐसे दबाव पर जो उक्त प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश में अभिलिखित अधिकतम दबाव से अधिक न हो, उपयोग नहीं करेगा या उसके उपयोग के लिए अनुज्ञा नहीं देगा ;
(ङ) जहां [केंद्रीय सरकार] ने यह अपेक्षा करने वाले नियम बनाए हों कि बायलर, [दक्षता या क्षमता का प्रमाणपत्र] धारण करने वाले व्यक्तियों के भारसाधन में हो, वहां तब तक किसी बायलर का उपयोग नहीं करेगा या उसके उपयोग की अनुज्ञा तब तक नहीं देगा जब तक वह बायलर ऐसे नियमों द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र धारण करने वाले किसी व्यक्ति के भारसाधन में न हो :
परन्तु ऐसे किसी अधिनियम के अधीन जिसे इसके द्वारा निरसित कर दिया गया हे, रजिस्ट्रीकृत किसी बायलर के बारे में या प्रमाणित या अनुज्ञप्त किसी बायलर के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, रजिस्टर किया गया है या प्रमाणित किया गया है ।
। । । । ।
7. रजिस्ट्रीकरण-(1) किसी ऐसे बायलर का स्वामी जो इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं है, [बायलर रजिस्टर करने के लिए निरीक्षक को आवेदन, ऐसे अन्य दस्तावेजों के साथ जो विनियमों द्वारा विहित किए कर सकेगा । प्रत्येक ऐसा आवेदन विहित फीस के साथ किया जाएगा ।]
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन की प्राप्ति पर निरीक्षक तीस दिन की अवधि के भीतर या प्राप्ति की तारीख से ऐसी लघुतर अवधि के भीतर जो विहित की जाए, बायलर की परीक्षा के लिए कोई तारीख नियत करेगा और उसके स्वामी को इस प्रकार नियत की गई तारीख की कम से कम दस दिन की सूचना देगा ।
[(3) निरीक्षक उक्त तारीख को, अपना यह समाधान करने की दृष्टि से कि बायलर को उसके विनिर्माण के स्थान से परिनिर्माण के स्थल तक अधिवहन के दौरान कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, बायलर का निरीक्षण करेगा और दस्तावेजों के साथ निरीक्षण की रिपोर्ट सात दिन के भीतर मुख्य निरीक्षक को भेजेगा ।]
(4) रिपोर्ट की प्राप्ति पर मुख्य निरीक्षक,-
(क) या तो तुरन्त या अपना यह समाधान करने के पश्चात् कि बायलर में या उससे संलग्न किसी वाष्प नली में कोई संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण, जो वह आवश्यक समझे, कर दिया गया है, बायलर को रजिस्टर कर सकेगा और उसके लिए रजिस्टर संख्यांक निश्चित कर सकेगा ;
(ख) बायलर को रजिस्टर करने से इंकार कर सकेगा :
परन्तु जहां मुख्य निरीक्षक किसी बायलर को रजिस्टर करने से इंकार करता है वहां वह अपने इंकार करने की संसूचना, उसके कारणों सहित, बायलर के स्वामी को देगा ।
(5) मुख्य निरीक्षक, बायलर को रजिस्टर करने पर स्वामी को विहित प्ररूप में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आदेश देगा । इस प्रमाणपत्र में बायलर का उपयोग, ऐसी अवधि के लिए जो बारह मास से अधिक की न हो, ऐसे अधिकतम दबाव पर करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे और जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार है :
[परन्तु किसी इकानामाईजर [या किसी उज्जवलित बायलर की बाबत, जो किसी ऐसे प्रसंस्करण संयंत्र का अनिवार्य भाग है जिसमें वाष्पजनित करने के लिए तेल, असफाल्ट या बिटुमेन का एकमात्र उपयोग ऊष्मा के माध्यम के रूप में किया जाता है,] इस उपधारा के अधीन जारी किया गया प्रमाणपत्र ऐसी अवधि के लिए जो चौबीस मास से अधिक की न हो उसके उपयोग किए जाने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।]
(6) निरीक्षक, बायलर के स्वामी को मुख्य निरीक्षक के आदेश को तुरंत सूचित करेगा और तद्नुसार स्वामी को कोई ऐसा प्रमाणपत्र जारी करेगा जिसे जारी करने के लिए आदेश दिया गया है और जहां बायलर रजिस्टर किया गया है, वहां स्वामी विहित अवधि के भीतर विहित रीति से उस पर स्थायी रूप से रजिस्टर संख्यांक लगवाएगा ।
8. प्रमाणपत्र का नवीकरण-(1) किसी बायलर के उपयोग को प्राधिकृत करने वाला प्रमाणपत्र, निम्नलिखित दशाओं में प्रवृत्त नहीं रहेगा, अर्थात् : -
(क) उस अवधि की समाप्ति पर जिसके लिए वह दिया गया था, या
(ख) जब बायलर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, या
(ग) जब बायलर हटाया जाता है, तब हटाया जाने वाला बायलर खड़ा बायलर न हो और उसकी ऊष्मा सतह [20 वर्गमीटर] से कम हो या वहनीय या यानीय बायलर न हो, या
[(घ) धारा 12 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, जब बायलर में या उस पर कोई संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण किया जाता है ;]
(ङ) यदि मुख्य निरीक्षक किसी विशिष्ट मामले में, उस दशा में ऐसा निदेश देता है जब बायलर से संलग्न किसी वाष्प नली में कोई संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण किया जाता है, या
(ङ) यदि मुख्य निरीक्षक किसी विशिष्ट मामले में, उस दशा में ऐसा निदेश देता है जब बायलर से संलग्न किसी वाष्प नली में कोई संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण किया जाता है, या
(च) मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा बायलर के स्वामी को ऐसा आदेश संसूचित किए जाने पर जिसमें बायलर का उपयोग इस आधार पर प्रतिषिद्ध किया गया है कि [वह या उससे संलग्न] कोई बायलर संघटक खतरनाक स्थिति में है ।
(2) जहां उपधारा (1) के खण्ड (च) के अधीन आदेश किया गया है, वहां वे आधार, जिन पर वह आदेश किया है, आदेश के साथ, स्वामी को संसूचित किए जाएंगे ।
1[(3) जब कोई प्रमाणपत्र प्रवृत्त नहीं रहता है तब बायलर का स्वामी ऐसी अवधि के लिए, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए, उसके नवीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकेगा ।]
1[(4) उपधारा (3) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर सक्षम व्यक्ति, ऐसी प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर ऐसी रीति में बायलर का निरीक्षण करेगा, जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।
(5) यदि सक्षम व्यक्ति-
(क) का यह समाधान हो जाता है कि बायलर और उससे संलग्न बायलर संघटक अच्छी हालत में है तो वह उतनी अवधि के लिए, जितनी विनियमों द्वारा विहित की जाए, एक प्रमाणपत्र जारी करेगा ;
(ख) की यह राय है कि बायलर या बायलर संघटक या दोनों विनियमों द्वारा विहित मानकों के अनुरूप नहीं है तो वह उन कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसा प्रमाणपत्र देने से इंकार कर सकेगा :
परंतु किसी प्रमाणपत्र से तब तक इंकार नहीं किया जाएगा जब तक कि निरीक्षण प्राधिकारी ने बायलर या बायलर संघटक या दोनों के स्वामी को लिखित रूप में ऐसे उपांतरण या सुधार करने के लिए, जो वह आवश्यक समझे, निदेश न दे दिया हो और सक्षम व्यक्ति की यह राय है कि ऐसे निदेश के बावजूद बायलर या बायलर संघटक या दोनों के स्वामी ने निदेशों का पालन नहीं किया है :
परन्तु यह और कि सक्षम व्यक्ति परीक्षा करने के अड़तालीस घंटे के भीतर बायलर या बायलर संघटक के स्वामी को अपनी राय में जो कोई त्रुटि हो, उसको और उसके कारणों को सूचित करेगा और मामले की मुख्य निरीक्षक को तत्काल रिपोर्ट करेगा ।
[(5क)] सक्षम व्यक्ति इस धारा के अधीन निरीक्षण के प्रयोजनों के लिए ऐसी फीस प्रभारित कर सकेगा जो विनियमों द्वारा विहित की जाए ।]
(6) मुख्य निरीक्षक, उपधारा (5) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर, इस अधिनियम के उपबन्धों तथा उसके अधीन बनाए गए विनियमों के अधीन रहते हुए, प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए ऐसे निर्बन्धनों तथा ऐसी शर्तों पर, यदि कोई हों, जैसा वह ठीक समझे, आदेश दे सकेगा या उसका नवीकरण करने से इंकार कर सकेगा :
परन्तु जहां मुख्य निरीक्षक प्रमाणपत्र को नवीकरण करने से इंकार करता है वहां वह बायलर के स्वामी को अपने इंकार करने की सूचना उसके कारणों सहित तुरन्त देगा ।
(7) इस धारा की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह बायलर के स्वामी को प्रमाणपत्र के चालू रहने के दौरान किसी भी समय नवीकृत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने से रोकती है ।
9. अनन्तिम आदेश-जंहा निरीक्षक धारा 7 की उपधारा (3) *** के अधीन किसी बायलर के मामले की रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक को करता है, वहां यदि बायलर ऐसा बायलर नहीं है जिसका उपयोग धारा 8 की उपधारा (1) के खण्ड (च) के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया है तो वह उसके स्वामी को लिखित रूप से बायलर को ऐसे अधिकतम दबाव से अनधिक दबाव पर उपयोग करने के लिए अनुज्ञात करने वाला आदेश दे सकेगा जैसा वह ठीक समझे और जैसा मुख्य निरीक्षक के आदेश की प्राप्ति तक इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार है । ऐसा अनन्तिम आदेश-
(क) उस तारीख से जिसको वह मंजूर किया गया है, छह मास की समाप्ति पर, या
(ख) मुख्य निरीक्षक के आदेशों की प्राप्ति पर, या
(ग) धारा 8 की उपधारा (1) के खण्ड (ख), (ग), (घ), (ङ) तथा (च) में निर्दिष्ट मामलों में से किसी मामले में, प्रवृत्त नहीं रहेगा और इस प्रकार प्रवृत्त न रहने पर इसे निरीक्षक को अभ्यर्पित कर दिया जाएगा ।
10. प्रमाणपत्र के मंजूर किए जाने तक बायलर का उपयोग-(1) इसमें इसके पूर्व अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जब किसी बायलर से संबंधित प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त हो गई है, तब यदि उसके स्वामी ने उस अवधि की समाप्ति के पूर्व, प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए आवेदन किया है, तो वह आवेदन पर आदेश जारी होने तक, पूर्ववर्ती प्रमाणपत्र में दर्ज किए गए अधिकतम दबाव पर, बायलर का उपयोग करने का हकदार होगा ।
(2) उपधारा (1) की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह धारा 8 की उपधारा (1) के खण्ड (ख), (ग), (घ), (ङ) तथा (च) में निर्दिष्ट मामलों में से किसी भी मामले में प्रमाणपत्र की अवधि की समाप्ति के पश्चात् होने वाले बायलर के उपयोग के लिए प्राधिकृत करती है ।
11. प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश का प्रतिसंहरण-मुखय निरीक्षक किसी भी समय निरीक्षक की रिपोर्ट पर या अन्यथा किसी प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश को वापस ले सकेगा या प्रतिसंहृत कर सकेगा-
(क) यदि यह विश्वास करने का कारण है कि प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश कपटपूर्ण रीति से प्राप्त किया गया है या गलती से या पर्याप्त परीक्षा के बिना अनुदत्त किया गया है, या
(ख) यदि ऐसा बायलर, जिसकी बाबत यह अनुदत्त किया गया है, क्षतिग्रस्त हो गया है या अच्छी हालत में नहीं है, या
(ग) जहां [केंद्रीय सरकार] ने ऐसे नियम बनाए हैं जो यह अपेक्षा करते हैं कि बायलर झ्र्दक्षता या क्षमता का प्रमाणपत्रट धारण करने वाले व्यक्तियों के भारसाधन में होंगे, वहां यदि बायलर किसी ऐसे व्यक्ति के भारसाधन में है जिसके पास ऐसे नियमों द्वारा अपेक्षित प्रमाणपत्र नहीं हैं, या
। । । । ।
12. बायलरों में परिवर्तन और उनका नवीकरण-इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर किए गए किसी बायलर में या उससे संबंधित कोई भी संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसा परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण मुख्य निरीक्षक द्वारा लिखित रूप में मंजूर न कर दिया गया हो :
[परन्तु ऐसी कोई मंजूरी वहां अपेक्षित नहीं होगी, जहां संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण सक्षम व्यक्ति के पर्यवेक्षण के अधीन किया गया है ।]
[13. बायलर संघटक का परिवर्तन या नवीकरण-(1) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी बायलर के स्वामी द्वारा बायलर से संलग्न किसी बायलर संघटक में या उसके संबंध में कोई भी संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण किए जाने से पूर्व, वह मुख्य निरीक्षक को अपने आशय की लिखित रूप में रिपोर्ट पारेषित करेगा और उसके साथ प्रस्तावित परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण की ऐसी विशिष्टियां भेजेगा, जो विनियमों द्वारा विहित की जाएं ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण ऐसे व्यक्ति द्वारा सक्षम व्यक्ति के पर्यवेक्षणाधीन किया जाएगा, जिसके पास बायलर मरम्मतकर्ता का प्रमाणपत्र है ।]
14. परीक्षा के समय स्वामी का कर्तव्य-(1) किसी बायलर की परीक्षा के लिए, इस अधिनियम के अधीन नियत किसी तारीख को, बायलर का स्वामी-
(क) [सक्षम व्यक्ति] को परीक्षा के लिए सभी समुचित सुविधाएं तथा सभी ऐसी जानकारी देने के लिए जो उससे युक्तियुक्त रूप से अपेक्षित हो,
(ख) बायलर को उचित रूप से बनाए रखने तथा [विनियमों द्वारा विहित रीति से] परीक्षा के लिए तैयार रखने के लिए, और
(ग) किसी बायलर के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन की दशा में, ऐसे रेखाचित्र, विनिर्देश, प्रमाणपत्र तथा अन्य विशिष्टियां जो [विनियमों द्वारा विहित की जाएं,] देने के लिए, आबद्ध होगा ।
(2) यदि स्वामी युक्तियुक्त कारण के बिना उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुपालन में असफल रहता है, तो [सक्षम व्यक्ति] परीक्षा करने से इन्कार कर देगा और मामले की रिपोर्ट मुख्य निरीक्षक को करेगा । मुख्य निरीक्षक, स्वामी से जब तक उसके विरुद्ध पर्याप्त कारण दर्शित नहीं कर दिया जाता है, यथास्थिति, धारा 7 या धारा 8 के अधीन नया आवेदन फाइल करने की अपेक्षा करेगा और धारा 10 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उसे बायलर का उपयोग करने के लिए निषिद्ध कर सकेगा ।
15. प्रमाणपत्रों आदि का प्रस्तुत करना-किसी बायलर का स्वामी, जिसके पास बायलर संबंधित प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश है, प्रमाणपत्र या आदेश प्रभावी रहने वाली अवधि के दौरान, सभी उचित समयों पर उस क्षेत्र की, जिसमें बायलर उस समय है, अधिकारिता रखने वाले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा अथवा मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक या [काराखाना अधिनियम 1948] (1948 का 63) के अधीन नियुक्त किसी निरीक्षक द्वारा अथवा जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त द्वारा लिखित रूप में विशेष रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा मांग किए जाने पर प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश को, यदि उससे कहा जाए, प्रस्तुत करने के लिए आबद्ध होगा ।
16. प्रमाणपत्र आदि का अन्तरण-यदि कोई व्यक्ति, ऐसी अवधि के दौरान जिसके लिए बायलर से संबंधित प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश प्रभावी है, किसी बायलर का स्वामी हो जाता है तो पूर्ववर्ती स्वामी, वह प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश उसके हवाले करने के लिए आबद्ध होगा ।
17. प्रवेश करने की शक्तियां-कोई निरीक्षक, किसी बायलर या उससे संलग्न किसी वाष्प नली का निरीक्षण या परीक्षा करने के लिए या यह देखने के लिए कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी विनियम या नियम के किसी उपबन्ध का पालन किया गया है अथवा किया जा रहा है, उचित समयों पर, उस क्षेत्र की सीमाओं के भीतर जिसके लिए उसे नियुक्त किया गया है, किसी ऐसे स्थान या भवन में प्रवेश कर सकेगा जिसमें उसे यह विश्वास करने का कारण है कि किसी बायलर का उपयोग किया जा रहा है ।
18. दुर्घटनाओं की रिपोर्ट-(1) यदि कोई बायलर या [बायलर संघटक] दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो उसका स्वामी या भारसाधक व्यक्ति दुर्घटना होने के चौबीस घंटे के भीतर लिखित रूप में निरीक्षक को उसकी रिपोर्ट करेगा । ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में दुर्घटना की प्रकृति का तथा उससे बायलर या [बायलर संघटक] या किसी व्यक्ति को हुई क्षति का, यदि कोई हो, सही वर्णन होगा, और वह इतनी पर्याप्त ब्यौरे में होगी जिससे निरीक्षक दुर्घटना की गम्भीरता को समझ सके ।
(2) प्रत्येक व्यक्ति, दुर्घटना के कारण, उसकी प्रकृति या विस्तार की बाबत निरीक्षक द्वारा लिखित रूप में उससे पूछे गए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अपनी सर्वोत्तम जानकारी तथा योग्यता के अनुसार सही रूप से, देने के लिए आबद्ध होगा ।
[(3) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप कोई मृत्यु हो गई है, तो वहां ऐसे व्यक्ति द्वारा और ऐसी रीति में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए जांच की जा सकेगी ।]
19. मुख्य निरीक्षक को अपील- [(1)]कोई व्यक्ति जो-
(क) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन परिदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किसी निरीक्षक द्वारा किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी आदेश से, या
(ख) किसी निरीक्षक के किसी ऐसे आदेश से या ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने से जिसे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उससे देने या जारी करने की अपेक्षा की जाए, इंकार करने से,
अपने को व्यथित समझता है, तो वह उस तारीख से तीन दिन के भीतर जिसको ऐसा आदेश या इंकार उसे संसूचित किया गया है, मुख्य निरीक्षक को, ऐसे आदेश या इंकार के विरुद्ध अपील कर सकेगा ।
[(2)] उपधारा (1) के अधीन अपील ऐसी रीति में की जाएगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए ।
(3) अपील के निपटारे की प्रक्रिया ऐसी होगी, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए ।]
20. अपील प्राधिकरण को अपीलें- [(1)] कोई व्यक्ति, जो अपने को मुख्य निरीक्षक के-
(क) किसी बायलर को रजिस्टर करने या किसी बायलर की बाबत प्रमाणपत्र देने या उसे नवीकृत करने से इंकार करने वाले, या
(ख) आवेदन किए गए पूर्ण अवधि के लिए विधिमान्यता रखने वाले प्रमाणपत्र को देने से इंकार करने वाले, या
(ग) अपेक्षित अधिकतम दबाव पर, किसी बायलर का उपयोग प्राधिकृत करने वाला प्रमाणपत्र देने से इंकार करने वाले, या
(घ) प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश को वापस लेने या प्रतिसंहृत करने वाले, या
(ङ) किसी प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दबाव की मात्रा या जिस अवधि के लिए प्रमाणपत्र दिया गया है उसे कम करने वाले, या
(च) किसी बायलर या वाष्प नली में किए जाने वाले किसी संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण के लिए आदेश देने या बायलर में या उससे संबंधित किसी संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण करने की मंजूरी देने से इंकार करने वाले, मूल या अपीली आदेश से व्यथित समझता है, तो ऐसे आदेश की संसूचना की प्राप्ति से तीस दिन के भीतर [केंद्रीय सरकार को, अपील प्रस्तुत कर सकेगा] ।
[(2) ऐसा कोई व्यक्ति, जो अपने को, यथास्थिति, विनिर्माण या परिनिर्माण के निरीक्षण का प्रमाणपत्र देने से इंकार करने वाले निरीक्षण प्राधिकारी के आदेश से व्यथित समझता है तो वह ऐसे इंकार की संसूचना की तारीख से तीस दिन के भीतर केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील ऐसी रीति में की जाएगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।
(4) अपील के निपटारे की प्रक्रिया ऐसी होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।]
[20क. केन्द्रीय सरकार की अपील प्राधिकरण के आदेश का पुनरीक्षण करने की शक्ति-(1) कोई व्यक्ति धारा 20 के अधीन किसी बायलर को इस आधार पर कि बायलर इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुरूप नहीं है, रजिस्टर न करने या उसकी बाबत प्रमाणपत्र न देने या नवीकरण न करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करने वाले अपील प्राधिकरण के आदेश से अपने को व्यथित समझता है तो वह ऐसे आदेश की संसूचना की प्राप्ति से दो मास के भीतर केन्द्रीय सरकार को इस आधार पर उस आदेश के पुनरीक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा कि ऐसे बायलर अन्य देशों में उपयोग में लाए जाते हैं ।
(2) केन्द्रीय सरकार ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर अपील प्राधिकरण से सुसंगत अभिलेख तथा अन्य जानकारी मांगने के पश्चात् तथा आवेदन पर उस प्राधिकरण की टिप्पणियों पर, यदि कोई हों, विचार करने के पश्चात् और ऐसी तकनीकी सलाह प्राप्त करने के पश्चात् जैसी केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे, आवेदन के संबंध में, ऐसा आदेश पारित कर सकेगी जैसा केन्द्रीय सरकार उचित समझे, और जहां निरीक्षण अनुज्ञात किया गया है वहां आदेश में वे निबंधन और शर्तें विनिर्दिष्ट होंगी जिनके अनुसार इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों से हुए फेरफार के संबंध में बायलर की परीक्षा के दौरान, कार्यवाही की जाएगी ।]
[21. आदेशों को अन्तिमता- [धारा 20 और धारा 20क के अधीन, केन्द्रीय सरकार का कोई आदेश] या मुख्य निरीक्षक या उपमुख्य निरीक्षक या निरीक्षक का आदेश अंतिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।]
22. गौण शास्तियां-किसी बायलर का कोई ऐसा स्वामी जो-
(i) धारा 9 द्वारा अपेक्षित अनन्तिम आदेश को अभ्यर्पित करने से, या
(ii) जब धारा 15 के अधीन ऐसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षा की जाए तब प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश को प्रस्तुत करने से, या
(iii) धारा 16 द्वारा अपेक्षित बायलर के नए स्वामी को प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश सौंपने से,
इंकार करेगा या उचित कारण के बिना उपेक्षा करेगा तो, जुर्माने से, जो झ्र्पांच सौ रुपएट तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।
23. बायलर के अवैध उपयोग के लिए शास्तियां-किसी बायलर का कोई ऐसा स्वामी, जो किसी ऐसी दशा में जिसमें इस अधिनियम के अधीन बायलर के प्रयोग के लिए प्रमाणपत्र या अनन्तिम आदेश की अपेक्षा की गई है, बायलर का, या तो किसी ऐसे प्रमाणपत्र के बिना या ऐसे किसी आदेश के प्रवृत्त न रहने पर अथवा उसके द्वारा अनुज्ञात दबाव से अधिक दबाव पर उपयोग करेगा, तो जुर्माने से, जो [एक लाख रुपए] तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और अपराध चालू रहने की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दिन के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसकी बाबत अपराधक चालू रहने के लिए उसे सिद्धदोष ठहराया गया है, [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।
24. अन्य शास्तियां-ऐसे कोई व्यक्ति जो-
(क) ऐसे किसी बायलर का उपयोग करेगा या उपयोग करने की अनुज्ञा देगा जिसका वह स्वामी है तथा जिसका अन्तरण एक राज्य से दूसरे राज्य को धारा 6 द्वारा अपेक्षित ऐसे अन्तरण की रिपोर्ट किए बिना किया गया है, या
(ख) किसी बायलर का स्वामी होते हुए इस अधिनियम के अधीन बायलर को आबंटित रजिस्टर संख्यांक को, धारा 7 की उपधारा (6) की अपेक्षानुसार बायलर पर चिह्नित करवाने में असफल रहेगा, या
(ग) मुख्य निरीक्षक की पूर्व मंजूरी प्राप्त किए बिना ही, जबकि धारा 12 द्वारा ऐसा करना अपेक्षित है, बायलर में या उसके संबंध में या मुख्य निरीक्षक को पहले सूचित किए बिना ही, जबकि धारा 13 द्वारा ऐसा करना अपेक्षित है, किसी वाष्प नली में, संरचनात्मक परिवर्तन, परिवर्धन या नवीकरण करेगा, या
(घ) जब किसी बायलर या वाष्प नली के दुर्घटनाग्रस्त होने की रिपोर्ट देने में, जबकि धारा 18 द्वारा ऐसा करना अपेक्षित है, असफल रहेगा, या
(ङ) बायलर की सुरक्षा वाल्व को इस प्रकार बिगाड़ेगा कि वह उस अधिकतम दबाव पर चलाए जाने के लिए निष्क्रिय हो जाए जिस पर इस अधिनियम के अधीन बायलर का उपयोग प्राधिकृत किया गया है, [या]
[(च) बायलर के वाष्प या ऊष्म जल कनेक्शन को किसी अन्य बायलर या ईंधन मैन से विहित रीति से प्रभावी रूप से अलग किए बिना किसी अन्य व्यक्ति को बायलर के भीतर जाने के लिए अनुज्ञात करेगा,]
[तो वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।]
25. रजिस्टर चिह्न को बिगाड़ने के लिए शास्ति-(1) जो कोई, इस अधिनियम या इसके द्वारा निरसित किसी अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार किसी बायलर पर चिह्नित रजिस्टर संख्यांक को हटाएगा, परिवर्तित करेगा, विरूपित करेगा, उसे अदृश्य बनाएगा या अन्यथा उसे बिगाड़ेगा तो जुर्माने से, जो [एक लाख रुपए] तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, किसी बायलर पर कपटपूर्ण रीति से किसी ऐसी रजिस्टर संख्यांक को चिह्नित करेगा जो इस अधिनियम या इसके द्वारा निरसित किसी अधिनियम के अधीन उसे आबंटित नहीं की गई है, तो कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या [जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दण्डित किया जाएगा] ।
26. अभियोजनों के लिए परिसीमा तथा पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए कोई भी अभियोजन अपराध के किए जाने की तारीख से [चोबीस मास] के भीतर ही संस्थित किया जाएगा, न कि उसके पश्चात् और कोई भी ऐसा अभियोजन मुख्य निरीक्षक की पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जाएगा ।
27. अपराधों का विचारण-इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से अवर किसी भी न्यायालय द्वारा नहीं किया जाएगा ।
[27क. केन्द्रीय बायलर बोर्ड-(1) धारा 28 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए केन्द्रीय बायलर बोर्ड के नाम से ज्ञात एक बोर्ड का गठन किया जाएगा ।
[(2) बोर्ड निम्निलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) बोर्ड पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले केन्द्रीय सरकार के विभाग का भारसाधक, भारत सरकार का सचिव, जो पदेन अध्यक्ष होगा ;
(ख) प्रत्येक राज्य (संघ राज्यक्षेत्र से भिन्न) की सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक ज्येष्ठ तकनीकी अधिकारी, जो बायलरों के निरीक्षण और परीक्षण में निपुण हो ;
(ग) निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए समान संख्या में अन्य व्यक्ति, जैसे कि ऊपर उपधारा (ख) में हैं,-
(i) केन्द्रीय सरकार,
(ii) भारतीय मानक ब्यूरो,
(iii) बायलर और बायलर संघटक विनिर्माता,
(iv) राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं,
(v) इंजीनियरी परामर्श अभिकरण,
(vi) बायलरों के उपयोगकर्ता ; और
(vii) ऐसे अन्य हित, जिनके बारे में केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि उनका बोर्ड में प्रतिनिधित्व होना ही चाहिए,
जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ;
(घ) तकनीकी सलाहकार, पदेन, सदस्य-सचिव ।
(3) उपधारा (2) के खंड (ख) और खंड (ग) के अधीन नामनिर्देशित सदस्यों की पदावधि वह होगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए ।]
[(4) बोर्ड को उपविधियों द्वारा या अन्यथा अपनी प्रक्रिया और अपने द्वारा किए जाने वाले सभी कारबार के संचालन के, विनियमित करने की सदस्यों की समितियों तथा उपसमितियों के गठन के और बोर्ड की शक्तियों और कर्तव्यों में से उन्हें प्रत्यायोजन करने की प्रतिक्रिया को, विनियमित करने की पूरी शक्ति होगी ।]
(5) बोर्ड में किसी रिक्ति के होते हुए भी, बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग किया जा सकेगा ।
28. विनियम बनाने की शक्ति- [(1)] [बोर्ड], निम्नलिखित किन्हीं या सभी प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम से संगत विनियम भारत के राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा, अर्थात् : -
[(क) ऐसी सामग्री, डिजाइन, सन्निर्माण, परिनिर्माण, प्रचालन और अनुरक्षण की बाबत मानक शर्तों को अधिकथित करने के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन बायलरों, बायलर संघटकों, बायलर मढ़ाइयों और फिटिंगों के रजिस्ट्रीकरण और प्रमाणन को समर्थ बनाने के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित होंगी ; -
(कक) ऐसी परिस्थितियां विहित करने के लिए जिनमें, और उस विस्तार तथा और ऐसी शर्तें विहित करने के लिए जिनके अधीन रहते हुए खण्ड (क) के अधीन अभिकथित मानक शर्तों में फेरफार अनुज्ञात किया जा सके ;]
(ख) बायलर का उपयोग जिस अधिकतम दबाव पर किया जाना है उसके निर्धारण की रीति विहित करने के लिए ;
(ग) बायलरों के रजिस्ट्रीकरण को विनियमित करने के लिए, उसके लिए संदेय फीस विहित करने के लिए [और बायलरों या उनके पुर्जों का निरीक्षण तथा परीक्षा करने के लिए,] स्वामी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले रेखाचित्रों, विनिर्देशों, प्रमाणपत्रों और विशिष्टियों के लिए, परीक्षा के लिए बायलर को तैयार किए जाने के तरीके तथा उस पर निरीक्षक की रिपोर्ट का प्ररूप, रजिस्टर संख्यांक चिह्नित करने के तरीके और वह अवधि जिसके भीतर बायलर पर ऐसी संख्यांक चिह्नित की जानी है ;
(घ) बायलरों तथा [बायलर सघटकों, बायलर मढ़ाइयों और फिटिंगों] के निरीक्षण और परीक्षा को विनियमित करने के लिए तथा उनके लिए प्रमाणपत्रों के प्ररूपों को विहित करने के लिए ;
(ङ) बायलर के भीतर काम करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ;
[ङक) ऐसी अर्हताएं और अनुभव विहित करने के लिए, जिनके अधीन रहते हुए निरीक्षण प्राधिकारियों, सक्षम प्राधिकारियों और सक्षम व्यक्तियों को इस अधिनियम के अधीन मान्यता दी जाएगी ;
(ङख) वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए और वह रीति, जिसमें बायलर संघटकों या सामग्री के विनिर्माता को मान्यता दी जा सकेगी ;
(ङग) डिजाइन और सन्निर्माण के लिए ऐसी सुविधाएं, जिनकी उस परिसर में व्यवस्था की जाने की अपेक्षा है, जहां किसी बायलर या बायलर संघटक का विनिर्माण किया जाता है ;
(ङघ) इस अधिनियम के अधीन निरीक्षण या कोई मान्यता या कोई प्रमाणपत्र देने के प्रयोजन के लिए फीस ;
(ङच) वेल्डर प्रमाणपत्र के लिए परीक्षा और उसको देने की प्रक्रिया ;
(ङछ) वे शक्तियां और कृत्य, जो बोर्ड तकनीकी सलाहकार को प्रत्यायोजित कर सकेगा ;
(ङज) वे दस्तावेज, जो बायलरों के रजिस्ट्रीकरण या बायलरों के उपयोग को प्राधिकृत करने वाले प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिए आवेदन के साथ संलग्न किए जाएंगे ;
(ङझ) बायलरों के निरीक्षण की रीति ;
(ङञ) वह अवधि, जिसके लिए किसी बायलर के उपयोग को प्राधिकृत करने वाले प्रमाणपत्र का नवीकरण किया जा सकेगा ;
(ङट) वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए और वह प्ररूप, जिसमें सक्षम व्यक्ति बायलर के उपयोग को प्राधिकृत करने वाले प्रमाणपत्र का नवीकरण करेगा ;
(ङठ) वह रीति और प्ररूप, जिसमें मरम्मतकर्ता का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा ;
(ङड) वह रीति, जिसमें बायलर को परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा ;
(ङढ) रेखाचित्र, विनिर्देश, दस्तावेज और अन्य विशिष्टियां, जिन्हें सक्षम व्यक्ति को उपलब्ध कराने की किसी स्वामी से अपेक्षा की जाती है ;
(ङण) वह रीति, जिसमें किसी व्यक्ति को ऊर्जा संपरीक्षा करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकेगा और वह रीति, जिससे ऐसी संपरीक्षा की जाएगी ;
(ङत) वह रीति, जिसमें राज्यों के बीच बायलरों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित विवादों का निपटारा किया जाएगा ;] और
(च) किसी ऐसी अन्य बात का उपबन्ध करने के लिए जो झ्र्बोर्डट की राय में केवल स्थानीय या राज्य स्तर के महत्व की बात नहीं है ।
[(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
[28क. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति- [(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(1क) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) धारा 20क के अधीन आवेदन करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और ऐसे आवेदन की बाबत संदेय फीस ;
(ख) मुख्य निरीक्षकों, उप मुख्य निरीक्षकों और निरीक्षकों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की अर्हताएं और अनुभव ;
(ग) वह रीति, जिसमें बोर्ड को अपीलें की जा सकेंगी और ऐसी अपीलों की बाबत संदेय फीस तथा वह प्रक्रिया, जिसका ऐसी अपीलों के निपटारे के लिए, अनुसरण किया जाएगा ;
(घ) सदस्यों की पदावधि और वह रीति, जिसमें उनका धारा 27क की उपधारा (2) के खंड (ख) और खंड (ग) के अधीन नामनिर्देशन किया जाएगा ;
(ङ) तकनीकी सलाहकार की अर्हताएं और अनुभव ;
(च) बायलरों की प्रवीणता या सक्षमता का प्रमाणपत्र धारण करने वाले व्यक्तियों के भारसाधन के अधीन होने की अपेक्षा करने के लिए और वे शर्तें विहित करने के लिए, जिन पर ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा ;
(छ) वह रीति जिसमें और वह व्यक्ति, जिसके द्वारा दुर्घटना की जांच की जाएगी ।]
[(2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
29. नियम बनाने की शक्ति- [(1)] राज्य सरकार, निम्नलिखित किन्हीं या सभी प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए विनियमों से संगत नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी, अर्थात् : -
[(क) मुख्य निरीक्षक, उप मुख्य निरीक्षकों और निरीक्षकों की शक्तियां तथा कर्तव्य ;]
(ख) बायलरों का अन्तरण विनियमित करने के लिए ;
(ग) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार बायलरों के रजिस्ट्रीकरण तथा प्रमाणन के बारे में उपबन्ध करने के लिए ;
। । । ।
(ङ) वह समय विहित करने के लिए, जिसके भीतर निरीक्षकों से धारा 7 या धारा 8 के अधीन बायलरों की परीक्षा करने की अपेक्षा की जाएगी ;
[(च) बायलरों के रजिस्ट्रीकरण के लिए संदेय फीस ;]
(छ) दुर्घटनाओं की बाबत जांच को विनियमित करने के लिए ;
[(ज) वह रीति, जिसमें अपीलें मुख्य निरीक्षक को की जाएंगी और वह प्रक्रिया, जिसका ऐसी अपीलों की सुनवाई के लिए अनुसरण किया जाएगा ;]
(झ) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत फीसों, खर्चों और शास्तियों के व्ययन के तरीकों को अवधारित करने के लिए ;
* * * * *
[(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
30. नियम भंग करने के लिए शास्ति- धारा 28 या धारा 29 के अधीन बनाए गए किसी विनियम या नियम में [यह निदेश हो सकेगा कि ऐसे विनियम या नियम का उल्लंघन करने वाला कोई व्यक्ति, प्रथम अपराध की दशा में, जुर्माने से, जो [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा और किसी भी पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में, ऐसे जुर्माने से, जो [एक लाख रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा] ।
31. विनियमों तथा नियमों का प्रकाशन-(1) विनियमों और नियमों को बनाने के लिए धारा 28 तथा धारा 29 द्वारा प्रदत्त शक्ति इस शर्त के अधीन होगी कि ऐसे विनियम या नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएं ।
(2) इस प्रकार बनाए गए विनियम और नियम क्रमशः भारत के राजपत्र और स्थानीय राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो वे इस अधिनियम में अधिनियमित किए गए हों ।
[31क. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार को, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने की बाबत ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह ठीक समझे और राज्य सरकार ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगी ।]
32. फीस, आदि की वसूली-इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत सभी फीसें, व्यय और शास्तियां भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल की जाएंगी ।
33. सरकार को लागू होना-जैसे अभिव्यक्त रूप से उपबंधित है उसके सिवाय यह अधिनियम केन्द्रीय सरकार के बायलरों और [बायलर संघटकों] को लागू होगा ।
34. छूट, आपात की दशा में निलंबित करने की शक्ति- [(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किन्हीं ऐसे बायलरों या बायलरों के वर्गों या प्रकार को इस अधिनियम के प्रवर्तन से, ऐसी शर्तों तथा निबंधनों के अधीन रहते हुए जैसा वह ठीक समझे, छूट दे सकेगी जिनका भवनों को गर्म रखने या गर्म पानी का प्रदाय करने के लिए अनन्यतः उपयोग किया जाता है।]
[(2)] किसी आपात की दशा में, राज्य सरकार लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा किन्हीं बायलरों या वाष्प नलियों या बायलर या वाष्प नलियों के किसी वर्ग या किसी बायलर या वाष्प नली को इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।
[(3) यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता है कि बायलरों की सामग्री, डिजाइन या सन्निर्माण और देश के तीव्र औद्योगिकीकरण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना आवश्यक है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो विनियमों द्वारा विहित की जाएं, संपूर्ण राज्य या उसके किसी भाग में किसी बायलर या बायलर संघटकों को इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबंधों के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।]
35. [अधिनियमितियों का निरसन ।]-निरसन अधिनियम, 1927 (1927 का अधिनियम संख्यांक 12) की धारा 2 तथा अनुसूची द्वारा निरसित ।
अनुसूची-[अधिनियमितिया निरसित ।]-निरसन अधिनियम, 1927 (1927 का अधिनियम संख्यांक 12) की धारा 2 तथा अनुसूची द्वारा निरसित ।
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