चीनी उपकर अधिनियम, 1982
(1982 का अधिनियम संख्यांक 3)
[19 मार्च, 1982]
चीनी उद्योग के विकास के लिए चीनी पर उपकर
के अधिरोपण और संबंधित विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चीनी उपकर अधिनियम, 1982 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) किसी चीनी कारखाने के संबंध में अधिभोगी" से अभिप्रेत है वह व्यक्ति जिसका चीनी कारखाने के कार्यकलाप पर अंतिम नियंत्रण है या चीनी कारखाने का स्वामी, यदि वह अधिभोगी नहीं है ;
(ख) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ग) चीनी कारखाना" से ऐसा परिसर (जिसके अन्तर्गत उसकी प्रसीमाएं भी हैं) अभिप्रेत है, जिसके किसी भी भाग में निर्वात कड़ाह प्रक्रिया द्वारा चीनी का विनिर्माण किया जाता है ;
(घ) चीनी" से किसी भी प्रकार की ऐसी चीनी अभिप्रेत है, जिसके अन्तर्गत पिसी हुई चीनी या दानेदार या बारीक चीनी भी है और जिसमें नब्बे प्रतिशत या उससे अधिक इक्षु-शर्करा है और जिसका उत्पादन निर्वात कड़ाह प्रक्रिया द्वारा किया गया है, और इसके अन्तर्गत उक्त प्रक्रिया द्वारा उत्पादित अपरिष्कृत चीनी भी है ।
3. उपकर का अधिरोपण-(1) भारत में किसी भी चीनी कारखाने द्वारा उत्पादित सब चीनी पर, चीनी विकास निधि अधिनियम, 1982 (1982 का 4) के प्रयोजनों के लिए, उपकर के रूप में, [पच्चीस रुपए] प्रति क्विटंल चीनी से अनधिक ऐसी दर पर, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे, उत्पाद-शुल्क उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा :
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(2) उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क, केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन चीनी पर उद्ग्रहणीय उत्पाद-शुल्क के अतिरिक्त होगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क उस चीनी कारखाने के अधिभोगी द्वारा संदेय होगा जिसमें चीनी का उत्पादन किया जाता है ।
(4) केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंध, जिनके अन्तर्गत शुल्क के प्रतिदायों और छूटों से सम्बन्धित उपबंध भी हैं, जहां तक हो सके, उक्त उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस अधिनियम के अधीन चीनी पर उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण और संग्रहण के सम्बन्ध में लागू होते हैं ।
4. शुल्क के आगमों का भारत की संचित निधि में जमा किया जाना-धारा 3 के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क के आगम भारत की संचित निधि में जमा किए जाएंगे ।
5. रिपोर्टें और विवरणियां मंगाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी चीनी कारखाने के अधिभोगी से अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, ऐसी सांख्यिकीय और अन्य जानकारी ऐसे प्ररूप में और ऐसी अवधि के भीतर दे जो विहित की जाए ।
6. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में उस प्ररूप का जिसमें और उस अवधि का जिसके भीतर, धारा 5 के अधीन सांख्यिकीय और अन्य जानकारी दी जा सकेगी, उपबंध किया जा सकेगा ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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