विदेशी मुद्रा प्रेषण और विदेशी मुद्रा बंधपत्रों में विनिधान (उन्मुक्ति और छूट) अधिनियम, 1991
(1991 का अधिनियम संख्यांक 41)
[18 सितम्बर, 1991]
विदेशी मुद्रा में प्रेषण प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और विदेशी मुद्रा
बंधपत्रों का स्वामित्व रखने वाले व्यक्तियों के लिए कुछ
उन्मुक्तियों का और ऐसे प्रेषणों और बंधपत्रों के संबंध
में प्रत्यक्ष करों से कुछ छूटों का तथा उनसे संसक्त
या उनके आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
संदायों के संतुलन से संबंधित स्थिति कठिन हो गई है और यह आवश्यक है कि विदेशी मुद्रा का अधिक मात्रा में आगमन आकर्षित हो ;
और विदेशी मुद्रा का ऐसा आगमन आकर्षित करने की दृष्टि से कुछ ऐसी उन्मुक्तियों और छूटों के लिए उपबंध करना समीचीन है जिससे कि कतिपय व्यक्तियों के लिए विदेशी मुद्रा में उक्त प्रेषण प्राप्त करना और ऐसे बंधपत्रों का स्वामी होना संभव हो ;
भारत गणराज्य के बयालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम विदेशी मुद्रा प्रेषण और विदेशी मुद्रा बंधपत्रों में विनिधान (उन्मुक्ति और छूट) अधिनियम, 1991 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
अध्याय 2
विदेशी मुद्रा का प्रेषण
2. परिभाषाएं-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) प्राप्तिकर्ता" से आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 2 के खंड (31) में यथापरिभाषित ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो इस अध्याय के अधीन कोई प्रेषण प्राप्त करता है ;
(ख) प्रेषण" से भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को या उसके पश्चात् किंतु विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व ड्राफ्ट, यात्री-चैक, भारत के बाहर स्थित बैंक को लिखे गए चैक, तार-अंतरण आदेश, डाक-अंतरण आदेश, मनीआर्डर के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन भारत में रखे गए अनिवासी (विदेशी) खाता, विदेशी करेंसी अनिवासी खाता या विदेशी करेंसी अनिवासी विशेष निक्षेप खाता में से अंतरण के रूप में विदेशी मुद्रा में किया गया प्रेषण अभिप्रेत है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, विनिर्दिष्ट तारीख" से 1 दिसम्बर, 1991 या ऐसी अन्य पश्चात्वर्ती तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ;
(ग) अन्य सभी शब्दों और पदों के, जो इस अध्याय में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं और विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं ।
3. उन्मुक्तियां-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) किसी भी प्राप्तिकर्ता से, जो ऐसी स्कीम के अनुसार जो भारतीय रिजर्व बैंक इस अध्याय के अधीन प्रेषण प्राप्त करने के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, इस अध्याय के अधीन उन्मुक्ति का दावा करता है, उसको किए गए प्रेषण की प्रकृति और स्रोत को, किसी भी प्रयोजन के लिए, प्रकट करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी ;
(ख) किसी ऐसी विधि के अधीन प्राप्तिकर्ता के विरुद्ध इस आधार पर कोई जांच या अन्वेषण प्रारंभ नहीं किया जाएगा कि उसने ऐसा प्रेषण प्राप्त किया है ;
(ग) इस तथ्य पर कि प्राप्तिकर्ता ने कोई प्रेषण प्राप्त किया है ध्यान नहीं दिया जाएगा और ऐसा तथ्य ऐसी किसी विधि के अधीन किसी अपराध या कोई शास्ति अधिरोपित करने से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात-
(क) ऐसी विदेशी मुद्रा को लागू नहीं होगी जिसे-
(i) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) ; या
(ii) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) के साथ पठित आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43),
के उपबंधों मे से किसी के अधीन भारत में लाने की अपेक्षा की गई है, यदि उस कालावधि का, जिसके भीतर ऐसी विदेशी मुद्रा भारत में लाई जानी है, अवसान नहीं हुआ है या जहां ऐसी अवधि का विस्तार किसी भी रीति में, केन्द्रीय सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किया गया है वहां, ऐसी विस्तारित कालावधि का इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को अवसान नहीं हुआ है ;
(ख) उस अभियोजन के संबंध में लागू नहीं होगी जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय 9 या अध्याय 17, स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61), आतंकवादी और विध्वंसक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1987 (1987 का 28), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए या किसी सिविल दायित्व के प्रवर्तन के प्रयोजन के लिए है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन अधिसूचित स्कीम को उसके अधिसूचित किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
4. कुछ दशाओं में प्रेषणों का हिसाब में न लिया जाना-धारा 3 के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना,-
(क) इस अध्याय के अधीन प्राप्त कोई प्रेषण आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा, और, विशिष्टतया उसका प्राप्तिकर्ता उस अधिनियम के अधीन किसी निर्धारण, पुनर्निर्धारण, अपील, निर्देश या अन्य कार्यवाही में किसी मुजरा या अनुतोष का दावा करने का या उस अधिनियम के अधीन किया गया कोई निर्धारण या पुनर्निर्धारण फिर से कराने का इस आधार पर हकदार नहीं होगा कि उसने ऐसा प्रेषण प्राप्त किया है ।
स्पष्टीकरण-शंका को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के उपबंध ऐसी किसी आय को लागू होंगे जो प्राप्तिकर्ता को प्रेषण की रकम से प्रोद्भूत या उद्भूत होती है अथवा प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी जाती है ;
(ख) इस अध्याय के अधीन प्राप्त कोई प्रेषण 1 अप्रैल, 1992 के पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धन-कर अधिनियम, 1957 (1954 का 27) के अधीन किसी निर्धारिती के शुद्ध धन की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए उसकी आस्तियों का भाग नहीं होगा ।
अध्याय 3
विदेशी मुद्रा बंधपत्रों में विनिधान
5. परिभाषाएं-(1) इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) विदेशी मुद्रा बंधपत्र" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 28) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक द्वारा ऐसी स्कीम के अनुसार, जो भारतीय रिजर्व बैंक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, निर्गमित ऐसे बंधपत्र अभिप्रेत हैं जिनमें विनिधान इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को या उसके पश्चात् किन्तु विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व किया जाता है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट तारीख" से 1 दिसम्बर, 1991 या ऐसी अन्य पश्चात्वर्ती तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ;
(ख) अनिवासी भारतीय" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो भारत का नागरिक या भारतीय मूल का व्यक्ति होते हुए भारत के बाहर निवासी है ।
स्पष्टीकरण 1-कोई व्यक्ति भारतीय मूल का समझा जाएगा यदि,-
(i) वह, अथवा उसके माता या पिता में से कोई अथवा उसके पितामह या पितामही या मातामह या मातामही में से कोई, संविधान या नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के आधार पर भारत का नागरिक था ; या
(ii) उसके पास, किसी भी समय, भारतीय पासपोर्ट था :
परन्तु पाकिस्तान या बंगलादेश के राष्ट्रिक भारतीय मूल के नहीं समझे जाएंगे ।
स्पष्टीकरण 2-भारतीय मूल के व्यक्ति का पति या पत्नी भी (जो पाकिस्तान या बंगलादेश का या की राष्ट्रिक नहीं है) भारतीय मूल का समझा जाएगा या समझी जाएगी ;
(ग) विदेशी निगमित निकाय" से भारत के बाहर के किसी देश की विधि के अधीन स्थापित कोई ऐसी संस्था, संगम या निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, अभिप्रेत है जिसमें किसी अनिवासी भारतीय का कोई हित है ;
(घ) अन्य सभी शब्दों और पदों के, जो इस अध्याय में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अधिसूचित स्कीम को उसके अधिसूचित किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
6. उन्मुक्तियां-(1) धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27), दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18), आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43), विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) और विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम, 1976 (1976 का 49), में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) ऐसे किसी अनिवासी भारतीय या विदेशी निगमित निकाय से, जिसके पास विदेशी मुद्रा बंधपत्रों का स्वामित्व है या भारत में निवासी ऐसे किसी व्यक्ति से जिसे ऐसे अनिवासी भारतीय या विदेशी निगमित निकाय द्वारा ऐसे बंधपत्र दान में दिए गए हैं, किसी भी प्रयोजन के लिए, ऐसे बंधपत्रों में विनिधान की प्रकृति और स्रोत को प्रकट करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी ;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट व्यक्तियों में से किसी के विरुद्ध उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन इस आधार पर कोई जांच या अन्वेषण प्रारंभ नहीं किया जाएगा कि ऐसा व्यक्ति ऐसे बंधपत्रों का स्वामी है ;
(ग) इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया जाएगा कि खंड (क) में निर्दिष्ट व्यक्तियों में से कोई ऐसे बंधपत्रों का स्वामी है और ऐसा तथ्य उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन किसी अपराध से या कोई शास्ति अधिरोपित करने से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात ऐसी विदेशी मुद्रा को लागू नहीं होगी, जिसे,-
(i) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46); या
(ii) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1961 (1961 का 46) के साथ पठित आय-कर अधिनियम, 1961(1961 का 43),
के उपबंधों में से किसी के अधीन भारत में लाया जाना अपेक्षित है, यदि उस कालावधि का, जिसके भीतर ऐसी विदेशी मुद्रा भारत में लाई जानी है, अवसान नहीं हुआ है या, जहां ऐसी अवधि का विस्तार किसी भी रीति में केन्द्रीय सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किया गया है, वहां ऐसी विस्तारित कालावधि का इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख को अवसान नहीं हुआ है ।
7. कुछ दशाओं में विदेशी मुद्रा बंधपत्रों का हिसाब में न लिया जाना-धारा 6 के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, -
(क) आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के उपबन्ध विदेशी मुद्रा बंधपत्रों के संबंध में प्रोद्भूत किसी ब्याज की बाबत लागू नहीं होंगे;
(ख) धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) के उपबंध विदेशी मुद्रा बंधपत्रों के संबंध में लागू नहीं होंगे ;
(ग) दान-कर अधिनियम, 1958 (1958 का 18) के उबपंध वहां लागू नहीं होंगे जहां कोई अनिवासी भारतीय भारत का निवासी हो जाता है और विदेशी मुद्रा बंधपत्रों का दान करता है ।
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