पांडिचेरी (नाम-परिवर्तन) अधिनियम, 2006
(2006 का अधिनियम संख्यांक 44)
[13 सितम्बर, 2006]
पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र का नाम-परिवर्तन करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सतावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम पांडिचेरी (नाम-परिवर्तन) अधिनियम, 2006 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के लिए धारा 1 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख अभिप्रेत है;
(ख) समुचित सरकार" से केन्द्रीय सरकार और संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची या समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि के बारे में, जहां तक ऐसा कोई विषय पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में लागू होता है, पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक भी अभिप्रेत है;
(ग) विधि" के अंतर्गत सम्पूर्ण पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग में विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत है ।
3. पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र का नाम-परिवर्तन-नियत दिन से पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र के नाम से ज्ञात होगा ।
4. संविधान के भाग 8 का संशोधन-संविधान के भाग 8 में पांडिचेरी" शब्द, जहां कहीं वह आता है, के स्थान पर पुडुचेरी" शब्द रखा जाएगा ।
5. संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन-संविधान की पहली अनुसूची में, 2. संघ राज्यक्षेत्र" शीर्ष के अधीन प्रविष्टि 6 में, नाम" स्तंभ के अधीन पांडिचेरी" शब्द के स्थान पर पुडुचेरी" शब्द रखा जाएगा ।
6. संविधान की चौथी अनुसूची का संशोधन-संविधान की चौथी अनुसूची में सारणी" शीर्ष के अधीन प्रविष्टि 30 के दूसरे स्तंभ में पांडिचेरी" शब्द के स्थान पर पुडुचेरी" शब्द रखा जाएगा ।
7. 1963 के अधिनियम 20 की धारा 2 का संशोधन-संघ राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1963 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड ज में पांडिचेरी" शब्द के स्थान पर पुडुचेरी" शब्द रखा जाएगा ।
8. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-(1) धारा 3 द्वारा पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र के नाम के परिवर्तन को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए समुचित सरकार, नियत दिन से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व, आदेश द्वारा, नियत दिन से पूर्व बनाई गई किसी विधि में, निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में, ऐसे अनुकूलन और उपान्तरण कर सकेगी, जो आवश्यक या समीचीन हों, और तब प्रत्येक ऐसी विधि इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरणों सहित प्रभावी होगी ।
(2) उपधारा (1) की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह उक्त उपधारा के अधीन समुचित सरकार द्वारा अनुकूलित या उपांतरित किसी विधि का निरसन या संशोधन करने से संसद् या पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा या अन्य सक्षम प्राधिकारी को निवारित करती है ।
9. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन से पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 8 के अधीन उपबंध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबंध किया गया है, ऐसी विधि को प्रवृत्त करने के लिए अपेक्षित या सशक्त, कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण, उसके सार पर प्रभाव डाले बिना उस विधि का अर्थान्वयन, ऐसी रीति से कर सकेगा जो उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष विषय के संबंध में, आवश्यक या उचित हो ।
10. विधिक कार्यवाहियां-जहां, नियत दिन से ठीक पहले कोई ऐसी विधिक कार्यवाहियां लंबित हैं जिनमें पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक एक पक्षकार है या भारत संघ, जिसका प्रतिनिधित्व उक्त प्रशासक द्वारा किया गया है, एक पक्षकार है तो उन कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिए, पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के प्रति किए गए किसी निर्देश का अर्थ ऐसे लगाया जाएगा जैसे कि वह पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के प्रति निर्देश है ।
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