तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974
(1974 का अधिनियम संख्यांक 47)
[16 सितम्बर, 1974]
तेल उद्योग के विकास के लिए एक बोर्ड की स्थापना के लिए और
उस प्रयोजनार्थ कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर उत्पाद-शुल्क
उद्गृहीत करने और उनसे सम्बन्धित विषयों
के लिए उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के पच्चीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 है ।
(2) इस विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) सहायता" से धारा 6 के अधीन दी गई सहायता अभिप्रेत है;
(ख) बोर्ड" से धारा 3 के अधीन स्थापित तेल उद्योग विकास बोर्ड अभिप्रेत है;
(ग) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(घ) न्यायालय" से वह उच्च न्यायालय या न्यायिक आयुक्त का न्यायालय अभिप्रेत है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर प्रतिवादी या प्रत्यर्थी अपने कारबार का सम्पूर्ण या पर्याप्त भाग चलाता है और जहां केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और ऐसे निर्बन्धनों, मर्यादाओं और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिन्हें वह ठीक समझे, यथास्थिति, उच्च न्यायालय या न्यायिक आयुक्त के न्यायालय के अधीनस्थ सिविल अधिकारिता वाले किसी न्यायालय को इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों में से सभी या किन्हीं का प्रयोग करने के लिए सशक्त किया है, वहां ऐसा न्यायालय;
(ङ) कच्चा तेल" से परिष्कृत या अन्यथा अभिक्रियित किए जाने के पहले प्राकृतिक अवस्था में ऐसा पैट्रोलियम अभिप्रेत है, जिससे जल और विजातीय पदार्थों का निष्कर्षण कर दिया गया है;
(च) उर्वरक" से ऐसे तेलाधार रासायनिक यौगिक अभिप्रेत हैं जो कृषि में उपयोग किए जाने पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के एक या अधिक रूपों में या तो एकल या बहु पादप पोषक देते हैं;
(छ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है;
(ज) खनिज तेल" के अन्तर्गत पैट्रोलियम और प्राकृति गैस भी हैं;
(झ) प्राकृतिक गैस" से अभिप्रेत है तेल के कुओं या गैस के कुओं से प्राप्त गैस जो मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बनों से बनी है;
(ञ) तेल उद्योग समुत्थान" से ऐसी कम्पनी, निगम या सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है जो खण्ड (ट) में निर्दिष्ट किसी क्रियाकलाप में लगी हुई है या लगने वाली है;
(ट) तेल उद्योग" के अन्तर्गत खनिज तेल के पूर्वेक्षण या खोज या उत्पादन, खनिज तेल के परिष्करण, संसाधन, परिवहन, भण्डारकरण, हैंडलिंग और विपणन तथा तेल परिष्करणशाला के अनुप्रवाह में सभी उत्पादों के उत्पादन और विपणन तथा उर्वरकों और पैट्रो-रसायनों के उत्पादन के और उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्बद्ध सभी क्रियाकलाप हैं;
(ठ) पैट्रो-रसायन" से ऐसे रसायन अभिप्रेत हैं, चाहे वे कार्बनिक हों या आकर्बनिक जो पैट्रोलियम से, जिसके अन्तर्गत कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, द्राव, परिष्कृत पैट्रोलियम प्रभाज और परिष्करण गैसें भी हैं, व्युत्पन्न रसायन हैं;
(ड) पैट्रोलियम उत्पाद" से पैट्रोलियम या प्राकृतिक गैस से बनाई गई कोई वस्तु अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत परिष्कृत कच्चा तेल, संसाधित कच्चा पैट्रोलियम, कच्चा पैट्रोलियम भंजन संभार का अवशेष, अभंजित ईंधन तेल, ईंधन तेल, अभिक्रियित कच्चा तेल अवशेष, प्राकृत गैसोलीन, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, नैफ्था, आसुत ग्रैसोलीन, किरोसिन, बिटूमेन, ऐस्फाल्ट और डामर, अपशिष्ट तेल, संमिश्र पेट्रोल, स्नेहक तेल, तेल या गैस से व्युत्पन्न एक या अधिक द्रव उत्पादों से या उप-उत्पादों से तेल के संमिश्र या मिश्रण और तेल द्राव और गैस से व्युत्पन्न दो या अधिक द्रव उत्पादों के या उप-उत्पादों के संमिश्र या मिश्रण या इसमें इसके पूर्व अविनिर्दिष्ट पैट्रोलियम हाइड्रोकार्बन;
(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
तेल उद्योग विकास बोर्ड
3. बोर्ड की स्थापना और गठन-(1) ऐसी तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा जिसका नाम तेल उद्योग विकास बोर्ड होगा ।
(2) बोर्ड शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा, उसे स्थावर और जंगम दोनों प्रकार की सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) तीन से अनधिक सदस्य, जो केन्द्रीय सदस्य द्वारा, केन्द्रीय सरकार में पैट्रोलियम और रसायन से संबंधित मंत्रालय या मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए जाएंगे;
(ख) दो सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, केन्द्रीय सरकार में वित्त से संबंधित मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए जाएंगे ;
(ग) पांच से अनधिक सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, उन निगमों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन ऐसे निगम हैं जो धारा 2 के खण्ड (ट) में निर्दिष्ट क्रियाकलापों में लगे हुए हैं;
(घ) दो सदस्य, जिनमें से एक केन्द्रीय सरकार द्वारा उन व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा जिन्हें, उस सरकार की राय में, तेल उद्योग की विशेष जानकारी या अनुभव है और दूसरा उस सरकार द्वारा, तेल उद्योग में नियोजित श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया जाएगा;
(ङ) बोर्ड का सचिव, पदेन ।
(4) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करेगी ।
(5) बोर्ड के (पद के आधार पर नियुक्त सदस्यों से भिन्न) सदस्यों की पदावधि और सदस्यों की रिक्तियों के भरने की रीति और उनके द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी जो विहित की जाए ।
(6) ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं, बोर्ड अपनी किसी शक्ति के प्रयोग या अपने किसी कर्तव्य के निर्वहन के लिए स्थायी समितियां या तदर्थ समितियां गठित कर सकता है । ये समितियां किसी ऐसे मामले की जांच करने, उस पर रिपोर्ट देने और सलाह देने के लिए भी नियुक्त की जा सकती है जो बोर्ड द्वारा उन्हें निर्दिष्ट किया जाए :
परन्तु स्थायी समिति में केवल बोर्ड के सदस्य ही होंगे ।
(7) बोर्ड या उपधारा (6) के अधीन गठित किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल निम्नलिखित कारणों से अविधिमान्य न होगी, अर्थात् :-
(क) बोर्ड या ऐसी समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि; या
(ख) बोर्ड या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि; या
(ग) बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता जो मामले के गुणागुण को प्रभावित न करती हो ।
4. सदस्यों की सेवा की शर्तें-बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति ऐसे वेतन और भत्तों का तथा छुट्टी, पेंशन, भिवष्य-निधि और अन्य बातों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत की जाएं और बोर्ड के अन्य सदस्य और धारा 3 की उपधारा (6) के अधीन गठित किसी तदर्थ समिति के ऐसे सदस्य जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, ऐसे भत्तों के, यदि कोई हों, और सेवा की ऐसी अन्य शर्तों के हकदार होंगे जो विहित की जाएं ।
5. बोर्ड के सचिव, अधिकारी, परामर्शी और कर्मचारी-(1) केन्द्रीय सरकार बोर्ड का एक सचिव नियुक्त करेगी ।
(2) इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, सचिव ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(3) सचिव ऐसे वेतन और भत्तों का तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और अन्य बातों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत की जाएं ।
(4) ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं, बोर्ड इतने परामर्शी नियुक्त कर सकता है जो उसके कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हों और उन्हें ऐसी शर्तों और निबन्धनों पर नियुक्त कर सकता है जो वह समय-समय पर अवधारित करे ।
(5) ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हए जो विहित किए जाएं, बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकता है जो उसके कृत्यों के पालन के लिए आवश्यक हों और उन्हें ऐसे वेतन और भत्तों का संदाय करेगा जो वह समय-समय पर अवधारित करे ।
6. बोर्ड के कृत्य-(1) इस अधिनियम के और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड ऐसी रीति से, ऐसे विस्तार तक और ऐसी शर्तों और निबन्धनों पर जो वह ठीक समझे, ऐसे सभी अध्युपायों के संप्रवर्तन के लिए, जो उसकी राय में तेल उद्योग के विकास में साधक हों, वित्तीय और अन्य सहायता देना ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड उस उपधारा के अधीन निम्नलिखित रीति से सहायता दे सकता है, अर्थात् :-
(क) किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति को जो धारा 2 के खण्ड (ट) में निर्दिष्ट क्रियाकलाप में लगा हुआ है या लगने वाला है, अनुदान या उधार देना;
(ख) किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा लिए गए ऐसे उधारों की, जो पच्चीस वर्ष से अनधिक अवधि के भीतर प्रतिसंदेय हों और बाजार में चालू किए गए हों या किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा किसी ऐसे बैंक से, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) में यथा परिभाषित अनुसूचित बैंक या राज्य सहकारी बैंक है, लिए गए उधारों की ऐसी शर्तों और निबन्धनों पर जो करार पाए जाएं, प्रत्याभूति देना;
(ग) भारत के बाहर से पूंजी माल के आयात के संबंध में किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति से अथवा भारत के भीतर पूंजी माल के क्रय के संबंध में ऐसे समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा शोध्य आस्थगित संदायों की ऐसी शर्तों और निबन्धनों पर जो करार पाए जाएं, प्रत्याभूति देना ;
(घ) किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किसी देश में किसी बैंक या वित्तीय संस्था से विदेशी करेंसी में लिए गए उधारों की या किए गए प्रत्यय ठहरावों की, ऐसी शर्तों और निबन्धनों पर जो करार पाए जाएं, प्रत्याभूति देना :
परन्तु ऐसी कोई भी प्रत्याभूति केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं दी जाएगी;
(ङ) किसी तेल उद्योग समुत्थान के स्टाक, शेयरों, बंधपत्रों या डिबैंचरों के पुरोधरण की हामीदारी करना और उनके संबंध में अपनी बाध्यताओं को पूरा करने में जिन स्टाक, शेयरों, बंधपत्रों या डिबैंचरों को उसे लेना पड़े उन्हें अपनी आस्तियों के भागरूप रखे रहना ;
(च) केन्द्रीय सरकार या किसी विदेशी वित्तीय संगठन या प्रत्यय अभिकरण द्वारा दिए गए उधार या अग्रिम धन के या अभिदाय किए गए डिबैंचरों के संबंध में, किसी तेल उद्योग समुत्थान के साथ किसी कारबार के संव्यवहार में, केन्द्रीय सरकार के या, उसके अनुमोदन से, ऐसे संगठन या अभिकरण के अभिकर्ता के रूप में कार्य करना;
(छ) किसी तेल उद्योग समुत्थान के स्टाक या शेयरों के लिए अभिदाय करना;
(ज) किसी तेल उद्योग समुत्थान के ऐसे डिबैंचरों के लिए अभिदाय करना जो अभिदाय की तारीख से पच्चीस वर्ष से अनधिक अवधि के भीतर प्रतिसंदेय हैं :
परन्तु इस खण्ड की कोई बात बोर्ड को किसी तेल उद्योग समुत्थान के ऐसे डिबैंचरों के लिए अभिदाय करने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी जिन पर परादेय रकम बोर्ड के विकल्प पर उस अवधि के भीतर जिसमें डिबैंचर प्रतिसंदेय हैं, उस समुत्थान के स्टाक या शेयरों में संपरिवर्तनीय हैं ।
स्पष्टीकरण-इस खण्ड में, किसी उधार या अग्रिम धन के संबंध में प्रयुक्त जिन पर परादेय रकम" पद से ऐसे उधार या अग्रिम धन पर उस समय संदेय मूलधन, ब्याज और अन्य प्रभार अभिप्रेत हैं जब उन रकमों को स्टाक या शेयरों में संपरिवर्तित किया जाना है ।
(3) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उन अध्युपायों के अन्तर्गत, जिनके संप्रवर्तन के लिए बोर्ड उस उपधारा के अधीन सहायता दे सकता है, निम्नलिखित के लिए या के रूप में अध्युपाय भी हैं, अर्थात् :-
(क) भारत के भीतर (जिसके अन्तर्गत भारत का कान्टीनेन्टल शेल्फ भी है) या भारत के बाहर खनिज तेल का पूर्वेक्षण और खोज;
(ख) कच्चे तेल के उत्पादन, हैंडलिंग, भण्डारकरण और परिवहन के लिए सुविधाओं की व्यवस्था;
(ग) पैट्रोलियम और पैट्रोलियम उत्पादों का परिष्करण और विपणन;
(घ) पैट्रो-रसायनों और उर्वरकों का विनिर्माण और विपणन;
(ङ) वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अनुसंधान जो तेल उद्योग को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोगी हो सके;
(च) तेल उद्योग के किसी क्षेत्र में प्रयोगात्मक या आरम्भिक अध्ययन;
(छ) तेल उद्योग के किसी क्षेत्र में लगे हुए या लगने वाले कार्मिकों का भारत के भीतर या भारत के बाहर प्रशिक्षण, और
ऐसे अध्युपाय जो विहित किए जाएं ।
(4) बोर्ड अपने कृत्यों के प्रयोग में अपने द्वारा दी गई सेवाओं के लिए ऐसी फीस ले सकता है या ऐसा कमीशन प्राप्त कर सकता है जो वह समुचित समझे ।
(5) बोर्ड किसी तेल उद्योग समुत्थान को या अन्य व्यक्ति को अपने द्वारा दिए गए उधार या अग्रिम धन के संबंध में किसी लिखत को प्रतिफल के लिए अन्तरित कर सकता है ।
(6) बोर्ड वे सभी बातें कर सकता है जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन के आनुषंगिक या पारिणामिक हों ।
7. सहायता के सिद्धान्त और शर्तें-(1) किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति को सहायता देने के पहले, बोर्ड ऐसे निदेशों को ध्यान में रखेगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त जारी करे और अपना यह समाधान करेगा कि,-
(क) ऐसी सहायता ऐसे निदेशों के प्रतिकूल नहीं है; और
(ख) तेल उद्योग के विकास के हित में ऐसी सहायता को पूर्विकता देना आवश्यक है ।
(2) किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति को सहायता देने में बोर्ड ऐसी शर्तें अधिरोपित करेगा जो विहित की जाएं और बोर्ड ऐसी अतिरिक्त शर्तें भी अधिरोपित कर सकता है जो वह बोर्ड के हितों के संरक्षण के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके द्वारा दी गई सहायता का ऐसे समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा सर्वोत्तम उपयोग किया जाए, आवश्यक या समीचीन समझे ।
8. करार पाई गई अवधि के पहले प्रतिसंदाय की मांग करने की शक्ति-किसी करार में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड, लिखित सूचना द्वारा, किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति से जिसको उसने कोई सहायता दी है यह अपेक्षा कर सकता है कि वह बोर्ड के प्रति अपने दायित्वों का तुरन्त पूरी तरह निर्वहन करे,-
(क) यदि बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि ऐसी सहायता के लिए आवेदन देते समय ऐसी सूचना दी गई थी जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है या भ्रामक है; या
(ख) यदि समुत्थान या अन्य व्यक्ति ने ऐसी सहायता के मामले में बोर्ड के साथ अपनी संविदा के निबंधनों का अनुपालन नहीं किया है; या
(ग) यदि इस बात की युक्तियुक्त आशंका है कि समुत्थान या अन्य व्यक्ति अपने ऋण चुकाने में असमर्थ है या ऐसे समुत्थान या व्यक्ति के सम्बन्ध में समापन या दिवाला विषयक कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकती है; या
(घ) यदि प्रतिभूति के रूप में बोर्ड के पास गिरवी रखी गई, बन्धक रखी गई, आड्मान रखी गई या बोर्ड की समनुदेशित सम्पत्ति का बोर्ड के समाधान पर्यन्त समुत्थान या अन्य व्यक्ति द्वारा बीमा नहीं कराया जाता है या बीमा चालू नहीं रखा जाता है; या ऐसी सम्पत्ति के मूल्य में इतना ह्रास हो जाता है कि बोर्ड की राय में बोर्ड के समाधान पर्यन्त और प्रतिभूति दी जानी चाहिए तथा ऐसी प्रतिभूति नहीं दी जाती है; या
(ङ) यदि बोर्ड की अनुज्ञा के बिना, कोई मशीनरी, संयंत्र या अन्य उपस्कर (चाहे वह प्रतिभूति का भागरूप हो या नहीं) समुत्थान या अन्य व्यक्ति के परिसर से उसके समतुल्य कुछ रखे बिना हटाया जाता है; या
(च) यदि किसी कारणवश बोर्ड के हितों का संरक्षण आवश्यक है ।
9. बोर्ड के दावों के प्रवर्तन के लिए विशेष उपबन्ध-(1) जहां कोई तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति, किसी करार को भंग करते हुए, किसी उधार या अग्रिम धन या उसकी किसी किस्त के प्रतिसंदाय में या बोर्ड द्वारा दी गई किसी अन्य सहायता के संबंध में अपनी बाध्यताओं को पूरा करने में व्यतिक्रम करता है या अन्यथा बोर्ड के साथ किसी करार के निबन्धनों के अनुपालन में असफल रहता है या जहां बोर्ड किसी तेल उद्योग समुत्थान से या अन्य व्यक्ति से किसी उधार या अग्रिम धन के तुरन्त प्रतिसंदाय करने की अपेक्षा करता है और समुत्थान या अन्य व्यक्ति ऐसा प्रतिसंदाय करने में असफल रहता है वहां सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 69 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड द्वारा इस निमित्त साधारणतः या विशिष्टतः प्राधिकृत बोर्ड का अधिकारी, न्यायालय से निम्नलिखित में से एक या अधिक अनुतोषों के लिए आवेदन कर सकता है, अर्थात् :-
(क) किसी उधार या अग्रिम धन के लिए प्रतिभूति के रूप में बोर्ड के पास गिरवी रखी गई, बन्धक रखी गई, आड्मान रखी गई या उसे समनुदेशित की गई किसी सम्पत्ति के विक्रय के आदेश के लिए; या
(ख) जहां यह आशंका है कि किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति के परिसर से बोर्ड की अनुमति के बिना कोई मशीनरी या उपस्कर हटा लिया जाएगा वहां अन्तरिम व्यादेश के लिए; या
(ग) किसी तेल उद्योग समुत्थान की दशा में, समुत्थान का प्रबंध बोर्ड को अन्तरित करने के लिए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति के बोर्ड के प्रति दायित्व की प्रकृति और परिणाम, वह आधार जिस पर आवेदन किया गया है और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं, कथित की जाएंगी ।
(3) जहां आवेदन उपधारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) में उल्लिखित अनुतोष के लिए है, वहां न्यायालय तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति या इतनी सम्पत्ति को कुर्क करने के लिए अन्तरिम आदेश पारित करेगा जिसके विक्रय किए जाने पर न्यायालय के प्राक्कलन के अनुसार उस तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति के बोर्ड के प्रति बकाया दायित्व के, इस धारा के अधीन की गई कार्यवाहियों के खर्चे सहित, मूल्य के बराबर रकम प्राप्त होगी । ऐसा आदेश तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति को मशीनरी या उपस्कर अन्तरित करने या हटाने से रोकने के अन्तरिम व्यादेश के सहित या उसके बिना हो सकेगा ।
(4) जहां आवेदन उपधारा (1) के खण्ड (ग) में उल्लिखित अनुतोष के लिए है, वहां न्यायालय तेल उद्योग समुत्थान को अपनी मशीनरी और उपस्कर अन्तरित करने या हटाने से रोकने के लिए अन्तरिम व्यादेश देगा और समुत्थान को एक ऐसी सूचना जारी करेगा जिसमें विनिर्दिष्ट तारीख को समुत्थान से हेतुक दर्शित करने की अपेक्षा की जाएगी कि समुत्थान का प्रबन्ध बोर्ड को अन्तरित क्यों न कर दिया जाए ।
(5) न्यायालय, उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन आदेश पारित करने के पहले, यदि वह ठीक समझे तो, आवेदन करने वाले अधिकारी की परीक्षा कर सकता है ।
(6) न्यायालय, जब वह उपधारा (3) के अधीन आदेश पारित करता है, उसी समय तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति को आदेश, आवेदन और अपने द्वारा अभिलिखित साक्ष्य की, यदि कोई हो, प्रतियों सहित एक ऐसी सूचना जारी करेगा जिसमें विनिर्दिष्ट तारीख को उस समुत्थान या अन्य व्यक्ति से यह हेतुक दर्शित की अपेक्षा की जाएगी कि कुर्की का अन्तरिम आदेश स्थायी क्यों न कर दिया जाए या व्यादेश की पुष्टि क्यों न कर दी जाए ।
(7) यदि उपधारा (4) और (6) के अधीन सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख के पहले कोई हेतुक दर्शित नहीं किया जाता है तो न्यायालय तुरन्त अन्तरिम आदेश को स्थायी कर देगा और कुर्क सम्पत्ति के विक्रय का या तेल उद्योग समुत्थान के प्रबन्ध को बोर्ड को अन्तरण करने का निदेश देगा या व्यादेश की पुष्टि करेगा ।
(8) यदि हेतुक दर्शित किया जाता है तो न्यायालय बोर्ड के दावे के अन्वेषण की कार्यवाही करेगा और ऐसी कार्यवाहियों को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उपबन्ध, जहां तक हो सके, लागू होंगे ।
(9) उपधारा (8) के अधीन किए गए अन्वेषण के आधार पर न्यायालय,-
(क) कुर्की के आदेश की पुष्टि करते हुए और कुर्क सम्पत्ति के विक्रय का निदेश देते हुए, या
(ख) कुर्की के आदेश को इस प्रकार परिवर्तित करते हुए जिससे कुर्क सम्पत्ति का एक भाग कुर्की से निर्मुक्त हो जाए और यह निदेश देते हुए कि कुर्क सम्पत्ति के शेष भाग का विक्रय किया जाए, या
(ग) यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि बोर्ड के हित में ऐसा करना आवश्यक नहीं है तो सम्पत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करते हुए, या
(घ) व्यादेश की पुष्टि करते हुए या उसे विघटित करते हुए, या
(ङ) तेल उद्योग समुत्थान के प्रबन्ध का बोर्ड को अन्तरण करते हुए या इस निमित्त किए गए दावे को नामंजूर करते हुए, आदेश पारित करेगा :
परन्तु न्यायालय, खण्ड (ग) के अधीन आदेश करते समय, बोर्ड के हितों के संरक्षण के लिए ऐेसे अन्य आदेश कर सकता है जो वह ठीक समझे और कार्यवाहियों के खर्चे ऐसी रीति से प्रभाजित कर सकता है जिसे वह ठीक समझे :
परन्तु यह और कि जब तक बोर्ड न्यायालय को यह सूचित नहीं करता है कि वह किसी सम्पत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करने वाले आदेश के विरुद्ध अपील नहीं करेगा, तब तक ऐसे आदेश को उस समय तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक उपधारा (12) के अधीन नियत वह अवधि समाप्त नहीं हो जाती जिसके भीतर अपील की जा सकती है, या यदि अपील की जाती है तो, यदि उक्त न्यायालय के विनिश्चयों से अपील सुनने के लिए सशक्त न्यायालय अन्यथा निदेश न दे तो, जब तक अपील निपटा न दी जाए ।
(10) सम्पत्ति की कुर्की या विक्रय के आदेश को, यथासाध्य, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में डिक्री के निष्पादन में सम्पत्ति की कुर्की या विक्रय के लिए उपबन्धित रीति से ऐसे क्रियान्वित किया जाएगा मानो बोर्ड डिक्रीदार हो ।
(11) इस धारा के अधीन तेल उद्योग समुत्थान का प्रबन्ध बोर्ड को अन्तरित करने वाला आदेश, यथासाध्य, सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 (1908 का 5) में डिक्री के निष्पादन में स्थावर सम्पत्ति के कब्जे या जंगम सम्पत्ति के परिदान के लिए उपबन्धित रीति से ऐसे क्रियान्वित किया जाएगा मानो बोर्ड डिक्रीदार हो ।
(12) उपधारा (7) या उपधारा (9) के अधीन आदेश से व्यथित पक्षकार, उस आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, आदेश पारित करने वाले न्यायालय के विनिश्चयों से अपील सुनने के लिए सशक्त न्यायालय में अपील कर सकता है और अपील न्यायालय, पक्षकारों को सुनने के पश्चात् ऐसे आदेश पारित कर सकता है जो वह उचित समझे ।
(13) जहां उपधारा (1) के अधीन आवेदन किए जाने के पहले किसी तेल उद्योग समुत्थान या अन्य व्यक्ति के सम्बन्ध में समापन या दिवाला विषयक कार्यवाही, प्रारम्भ हो गई है, वहां इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह बोर्ड को समुत्थान या अन्य व्यक्ति के अन्य लेनदारों पर ऐसा अधिमान देती है जो किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त न हो ।
(14) शंकाओं को दूर करने के लिए घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन अन्तरिम व्यादेश देने के लिए सक्षम न्यायालय को रिसीवर नियुक्त करने की और उसके आनुषंगिक सभी अन्य शक्तियों का प्रयोग करने की शक्ति होगी ।
10. बोर्ड की तेल उद्योग समुत्थान के निदेशक नियुक्त करने की शक्ति-जब बोर्ड द्वारा किसी तेल उद्योग समुत्थान का प्रबन्ध ग्रहण कर लिया जाता है तब बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, इतने व्यक्तियों को जितने वह ठीक समझे, उस समुत्थान के निदेशक नियुक्त कर सकता है और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की या उस समुत्थान से सम्बन्धित किसी विधि या लिखत की कोई बात, जहां तक वह समुत्थान के किसी निदेशक के संबंध में, शेयरजात अर्हता, आयु-सीमा, निदेशक पदों की संख्या विषयक निर्बन्धन, चक्रानुक्रम से निवर्तन या पद से हटाए जाने के बारे में कोई उपबन्ध करती है इस धारा के अधीन बोर्ड द्वारा नियुक्त निदेशक को लागू नहीं होगी ।
11. निदेशक नियुक्त करने वाले अधिसूचित आदेश का प्रभाव-धारा 10 के अधीन अधिसूचित आदेश जारी किए जाने पर-
(क) अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के ठीक पहले तेल उद्योग समुत्थान के निदेशक के रूप में पद धारण करने वाले या प्रबन्ध के भारसाधक सभी व्यक्तियों के बारे में यह समझा जाएगा कि उन्होंने उस हैसियत में अपना पद रिक्त कर दिया है;
(ख) धारा 10 के अधीन नियुक्त निदेशक ऐसी सम्पत्ति, चीजबस्त और अनुयोज्य दावों को, जिनका वह तेल उद्योग समुत्थान हकदार है या हकदार प्रतीत होता है, अपनी अभिरक्षा या नियंत्रण में लेने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे और समुत्थान की सभी सम्पत्ति और चीजबस्त अधिसूचित आदेश की तारीख से निदेशकों की अभिरक्षा में समझी जाएंगी;
(ग) धारा 10 के अधीन नियुक्त निदेशक सभी प्रयोजनों के लिए कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन सम्यक्तः गठित तेल उद्योग समुत्थान के निदेशक होंगे और केवल वे ही समुत्थान के निदेशकों की सभी शक्तियों का प्रयोग करने के हकदार होंगे चाहे ऐसी शक्तियां उक्त अधिनियम से व्युत्पन्न हों या समुत्थान के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेद से व्युत्पन्न हों या किसी अन्य स्रोत से ।
12. निदेशकों की शक्तियां और कर्तव्य-बोर्ड के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, धारा 10 के अधीन नियुक्त निदेशक तेल उद्योग समुत्थान के कारबार के दक्ष प्रबन्ध के प्रयोजन के लिए ऐसी सभी कार्रवाई करेंगे जो आवश्यक हों और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करेंगे जो विहित किए जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन उनमें निहित शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 10 के अधीन नियुक्त निदेशक, बोर्ड के पूर्वानुमोदन से, धारा 10 के अधीन अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के पहले किसी समय तेल उद्योग समुत्थान और किसी अन्य व्यक्ति के बीच की गई किसी संविदा या करार के रद्दकरण या परिवर्तन के प्रयोजन के लिए न्यायालय को आवेदन कर सकते हैं, और यदि न्यायालय का सम्यक् जांच करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि ऐसी संविदा या करार असद्भावपूर्वक किया गया था और समुत्थान के हितों के लिए अहितकर है तो वह उस संविदा या करार को रद्द करते हुए या उसमें परिवर्तन करते हुए (या तो शर्त रहित या ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें वह अधिरोपित करना ठीक समझे) आदेश कर सकता है और तदनुसार वह संविदा या करार, यथास्थिति, रद्द हो जाएगा या ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा ।
13. पद की हानि के लिए प्रतिकर का अधिकार न होना-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे समुत्थान के सम्बन्ध में धारा 10 के अधीन अधिसूचित आदेश के जारी किए जाने के ठीक पहले किसी तेल उद्योग समुत्थान का निदेशक या उसके प्रबन्ध का भारसाधक कोई अन्य व्यक्ति पद की हानि के लिए या ऐसे प्रबन्ध के भारसाधक होने के लिए हकदार बनाने वाली किसी संविदा की इस अधिनियम के अधीन समयपूर्व समाप्ति के लिए प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।
(2) उपधारा (1) की कोई बात, निदेशक या उसमें निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति के, उस तेल उद्योग समुत्थान से ऐसे प्रतिकर से अन्यथा वसूलीय धनराशियां वसूल करने के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी ।
14. 1956 के अधिनियम सं० 1 का लागू होना-(1) जहां किसी तेल उद्योग समुत्थान का, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथापरिभाषित कम्पनी है, बोर्ड द्वारा प्रबन्ध ग्रहण कर लिया जाता है, वहां उक्त अधिनियम या ऐसे समुत्थान के संगम-ज्ञापन या संगम-अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) ऐसे समुत्थान के शेयरधारकों के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी व्यक्ति को उस समुत्थान का निदेशक नामनिर्दिष्ट करना या नियुक्त करना विधिपूर्ण न होगा;
(ख) ऐसे समुत्थान के शेयरधारकों के अधिवेशन में पारित कोई संकल्प तब तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक वह बोर्ड द्वारा अनुमोदित नहीं कर दिया जाता;
(ग) ऐसे समुत्थान के परिसमापन के लिए या उसके सम्बन्ध में रिसीवर नियुक्त करने के लिए कोई कार्यवाही किसी न्यायालय में बोर्ड की सम्मति के बिना नहीं होगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों और इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए और ऐसे अन्य अपवादों, निर्बन्धनों और मर्यादाओं के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) ऐसे समुत्थान को उसी रीति से लागू रहेगा जिससे वह धारा 10 के अधीन अधिसूचित आदेश जारी करने के पहले उसके सम्बन्ध में लागू था ।
अध्याय 3
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
15. उत्पाद-शुल्क-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, अनुसूची के स्तम्भ 2 में विनिर्दिष्ट प्रत्येक मद पर, जो भारत में (जिसके अन्तर्गत भारत का कान्टीनेन्टल शेल्फ भी है) उत्पादित की जाती है और जो-
(क) किसी परिष्करणशाला या कारखाने के लिए हटाई जाती है; या
(ख) उस व्यक्ति द्वारा जिसके द्वारा वह मद उत्पादित की जाती है किसी अन्य व्यक्ति को अन्तरित की जाती है,
उस अनुसूची के स्तम्भ 3 में तत्स्थानी प्रविष्टि में दी गई दर से अनधिक ऐसी दर पर जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, उत्पाद-शुल्क उपकर के रूप में उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा :
परन्तु जब तक केन्द्रीय सरकार कच्चे तेल की बाबत (जो उस अनुसूची में विनिर्दिष्ट मद है) ऐसी अधिसूचना द्वारा उत्पाद-शुल्क की दर विनिर्दिष्ट नहीं करती है तब तक इस उपधारा के अधीन कच्चे तेल पर उत्पाद-शुल्क साठ रुपए प्रति टन की दर से उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा ।
(2) किसी मद पर उपधारा (1) के अधीन उद्ग्रहणीय प्रत्येक उत्पाद-शुल्क उस व्यक्ति द्वारा संदेय होगा जो उस मद का उत्पादन करता है और कच्चे तेल की दशा में उत्पाद-शुल्क परिष्करणशाला में प्राप्त मात्रा पर संगृहीत किया जाएगा ।
(3) अनुसूची में विनिर्दिष्ट मदों पर उपधारा (1) के अधीन उत्पाद-शुल्क तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उन मदों पर उद्ग्रहणीय उपकर या शुल्क के अतिरिक्त होगा ।
(4) केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) के और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्ध, जिनके अन्तर्गत प्रतिदाय और शुल्क से छूट से सम्बन्धित उपबन्ध भी हैं, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन उद्ग्रहणीय उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण और संग्रहण के सम्बन्ध में लागू होंगे और इस प्रयोजन के लिए उस अधिनियम के उपबन्ध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो वह अधिनियम अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी मदों पर उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण के लिए उपबन्ध करता है ।
16. शुल्क के आगमों का भारत की संचित निधि में जमा किया जाना-धारा 15 के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क के आगम पहले भारत की संचित निधि में जमा किए जाएंगे और केन्द्रीय सरकार, यदि संसद् इस निमित्त बनाई गई विधि द्वारा विनियोग द्वारा इस प्रकार उपबन्धित करे तो, बोर्ड को समय-समय पर ऐसे आगमों में से, संग्रहण के खर्चों की कटौती करने के पश्चात्, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अनन्यतः उपयोग के लिए इतनी धनराशियां दे सकती है जो वह ठीक समझे ।
17. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक्तः विनियोग किए जाने के पश्चात्, बोर्ड को अनुदान या उधार के रूप में ऐसी धनराशियां दे सकती है जो केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे ।
18. तेल उद्योग विकास निधि-(1) तेल उद्योग विकास निधि के नाम से एक निधि बनाई जाएगी और उस निधि में निम्नलिखित धनराशियां जमा की जाएंगी, अर्थात् :-
(क) धारा 16 या धारा 17 के अधीन संदत्त धनराशियां;
(ख) वे अनुदान जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा दिए जाएं;
(ग) बोर्ड द्वारा लिए गए उधार;
(घ) वे राशियां, यदि कोई हों, जो बोर्ड अपने कृत्यों के निष्पादन में या इस अधिनियम के प्रशासन में वसूल करे ।
(2) निधि को निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उपयोजित किया जाएगा, अर्थात् :-
(क) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों और उसके सलाहकारों, परामर्शियों या अन्य अभिकरणों को जिनकी बोर्ड सेवाएं प्राप्त करे, वेतन, भत्ते, मानदेय और अन्य पारिश्रमिक देने के लिए;
(ख) बोर्ड के अन्य प्रशासनिक व्ययों को चुकाने के लिए;
(ग) धारा 6 के अधीन सहायता देने के लिए;
(घ) बोर्ड द्वारा लिए गए उधारों के प्रतिसंदाय या इस अधिनियम के अधीन अन्य दायित्वों को चुकाने के लिए ।
19. उधार लेने की शक्ति-ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, बोर्ड को इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए तेल उद्योग विकास निधि या किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर उधार लेने की शक्ति होगी ।
20. लेखा और संपरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अन्तर्गत लाभ और हानि लेखा तथा तुलनपत्र भी हैं, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।
(2) बोर्ड के लेखे भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, संपरीक्षित किए जाएंगे और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के तथा बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियां, लेखा, सम्बद्ध वाउचर तथा अन्य दस्तावेज और कागज पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे तद्विषयक संपरीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को हर वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 4
केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण
21. तेल उद्योग में लगे हुए व्यक्तियों से, कारबार से संबंधित बहियां, लेखे और अभिलेखे रखने और पेश करने की अपेक्षा करने की और उनका निरीक्षण करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, तेल उद्योग में लगे हुए सब व्यक्तियों से या ऐसे व्यक्तियों के किसी वर्ग से यह अपेक्षा कर सकती है कि वे,-
(क) अपने कारबार से संबंधित ऐसी बहियां, लेखे और अभिलेख रखें जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं;
(ख) ऐसी बहियां, लेखे और अभिलेख निरीक्षण के लिये पेश करें और उनसे संबंधित ऐसी जानकारी ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी को ऐसे समय या ऐसी परिस्थितियों में दें जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं ।
[22. केंद्रीय सरकार द्वारा निदेश-बोर्ड ऐसे निदेशों का पालन करेगा जो इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जाएं ।]
। । । । ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
23. शास्ति-जो कोई व्यक्ति-
(क) इस अधिनियम के अधीन किसी बही, लेखे या अभिलेख को पेश करने की या कोई जानकारी देने की अपेक्षा किए जाने पर ऐसी बहियां, लेखे या अभिलेख पेश करने में असफल रहेगा या ऐसी जानकारी देने में असफल रहेगा या ऐसी जानकारी देगा जो मिथ्या है और जिसके बारे में वह या तो जानता है या यह विश्वास करता है कि वह मिथ्या है या यह विश्वास नहीं करता है कि वह सत्य है; या
(ख) बोर्ड के किसी सदस्य या अधिकारी या अन्य कर्मचारी को या केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में या उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा डालेगा,
वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
24. अन्य शक्तियां-जो कोई इस अधिनियम के या तदधीन बनाए गए किसी नियम के (उन उपबन्धों से भिन्न जिनके उल्लंघन के लिए धारा 23 लागू होती है) किन्हीं उपबन्धों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
25. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया हो, तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी कम्पनी द्वारा किया गया हो तथा यह साबित हो कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
26. न्यायालयों की अधिकारिता-महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से अवर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
27. केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए कोई भी अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जाएगा ।
28. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या तदधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के अथवा बोर्ड के या बोर्ड द्वारा गठित किसी समिति के अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अभिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
29. बोर्ड का विघटन-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकती है कि बोर्ड तारीख से और ऐसी अवधि के लिए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटित हो जाएगा ।
(2) जब बोर्ड उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन विघटित कर दिया जाता है तब,-
(क) इस बात के होते हुए भी कि सदस्यों की पदावधि समाप्त नहीं हुई है सब सदस्य विघटन की तारीख से सदस्य के रूप में अपना पद रिक्त कर देंगे;
(ख) विघटन की अवधि के दौरान बोर्ड की सभी शक्तियों का और कर्तव्यों का, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, प्रयोग किया जाएगा या पालन किया जाएगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे;
(ग) बोर्ड में निहित सभी निधियां और अन्य सम्पत्तियां, विघटन की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित रहेंगी ।
(3) जैसे ही विघटन की अवधि समाप्त होती है, वैसे ही बोर्ड इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार पुनर्गठित किया जाएगा ।
30. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में इस अधिनियम से असंगत किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के उपबन्ध प्रभावी होंगे ।
31. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं बातों के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात् :-
(क) सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, उनकी रिक्तियों के भरने की रीति और उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(ख) वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कर्तव्य जिनका पालन बोर्ड का सचिव करेगा;
(ग) वे परिस्थितियां जिनमें और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा कोई सदस्य हटाया जा सकता है;
(घ) प्रत्येक वर्ष बोर्ड की बैठकों की न्यूनतम संख्या;
(ङ) बोर्ड की बैठकों तथा उसकी समितियों की बैठकों का बुलाया जाना, बोर्ड की और उसकी समितियों की बैठकों में कामकाज के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और बैठक की गणपूर्ति के लिए सदस्यों की संख्या;
(च) बोर्ड द्वारा किए गए कामकाज के अभिलेखों का बोर्ड द्वारा रखा जाना और केन्द्रीय सरकार को उनकी प्रतियों का प्रस्तुत किया जाना;
(छ) व्यय उपगत करने के बारे में बोर्ड की, उसके माध्यम और अन्य सदस्यों की, बोर्ड के सचिव और समितियों की शक्तियां;
(ज) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड भारत के बाहर व्यय उपगत कर सकता है;
(झ) बोर्ड की प्राप्तियों के और व्यय के बजट प्राक्कलनों का तैयार किया जाना और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा प्राक्कलनों को मंजूरी दी जाएगी;
(ञ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे बोर्ड के लेखे रखे जाएंगे;
(ट) बोर्ड की निधियों की अभिरक्षा और विनिधान;
(ठ) बोर्ड द्वारा धन उधार लेने में अनुपालन की जाने वाली शर्तें;
(ड) वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए और वह रीति जिससे बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकती हैं;
(ढ) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की किन्हीं शक्तियों और कर्तव्यों का अध्यक्ष, सचिव या बोर्ड के सदस्यों या अधिकारियों को प्रत्यायोजन;
(ण) वे अतिरिक्त अध्युपाय जिनके संप्रवर्तन के लिए बोर्ड सहायता दे सकता है;
(त) धारा 29 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों को संदेय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते;
(थ) वे फीस जिन्हें बोर्ड इस अधिनियम के अधीन दी गई किसी सहायता या सेवा के लिए ले सकता है;
(द) वे कर्मचारिवृन्द जिन्हें बोर्ड द्वारा नियोजित किया जा सकता है और बोर्ड के (केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों से भिन्न) अधिकारियों के और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते और छुट्टी और सेवा की अन्य शर्तें;
(ध) कोई अन्य बात जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित या उपबन्धित की जानी है या की जाए ।
(3) इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अनुसूची
[धारा 15 (1) देखिए]
|
क्रम सं० |
मद का नाम |
अधिकतम दर जिस पर उत्पाद-शुल्क संगृहीत किया जा सकता है |
|
1 |
2 |
3 |
|
1. |
कच्चा तेल . . . . |
[चार हजार पांच सौ रुपए प्रति टन] |
|
2. |
प्राकृतिक गैस . . . . |
[तीन सौ रुपए प्रति हजार घनमीटर ।] |
__________________

