Saturday, 02, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1994 ( Manipur Municipalities Act, 1994. )


 

मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1994

(1994 का अधिनियम संख्यांक 43)

[8 जुलाई, 1994]

मणिपुर के नगरीय क्षेत्रों में नगरपालिकाओं के गठन और

संगठन के लिए और उससे संबंधित तथा उसके

आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के पैंतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में, यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मणिपुर नगरपालिका अधिनियम 1994 है ।

                (2) इसका विस्तार उन पहाड़ी क्षेत्रों को, जिन पर मणिपुर (पहाड़ी क्षेत्रों) जिला परिषद् अधिनियम, 1971 (1971 का 76)का विस्तार है या किसी ऐसे क्षेत्र को, जो छावनी अधिनियम, 1924 (1924 का 2) के अधीन किसी छावनी में शामिल है, छोड़कर संपूर्ण मणिपुर राज्य पर है ।

                (3) यह 24 मई, 1994 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(1) अध्यक्ष" से मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) के उपबंधों के अधीन निर्वाचित किसी जिला परिषद् का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;

(2) भवन" से कोई गृह, उपगृह, अस्तबल, शौचालय, मूत्रालय, शैड, झोंपड़ी, दीवार (सीमा दीवार से भिन्न) या कोई अन्य संरचना, चाहे वह पत्थर की हो, ईंटों की हो, लकड़ी की हो, मिट्टी की हो, धातु की हो या किसी अन्य पदार्थ से बनी हो, अभिप्रेत है, किन्तु इसके अंतर्गत कोई संवहनीय आश्रय स्थल नहीं है ;

(3) उपविधि" से इस अधिनियम के अधीन अधिसूचना द्वारा बनाई गई उपविधि अभिप्रेत है ;

(4) समिति" से इस अधिनियम के अधीन वार्ड समिति से भिन्न गठित समिति अभिप्रेत है ;

(5) अहाता" से ऐसी भूमि, चाहे संलग्न हो या नहीं, अभिप्रेत है जो किसी भवन की अनुलग्नक या कई भवनों की सामान्य अनुलग्नक है ;

(6) सफाई" से मल, घृणोत्पादक पदार्थ और कूड़े का हटाया जाना और व्ययन अभिप्रेत है ;

(7) निगम" से नगर निगम अभिप्रेत है ;

(8) परिषद्" से नगरपालिका परिषद् अभिप्रेत है ;

(9) पार्षद" से, यथास्थिति, नगरपालिका परिषद् या नगर पंचायत का कोई ऐसा सदस्य अभिप्रेत है, जिसे इस अधिनियम के अधीन निर्वाचित या नियुक्त किया गया हो ;

(10) उपायुक्त" से मणिपुर के किसी जिले की नगरपालिका पर अधिकारिता रखने वाला उपायुक्त या कोई ऐसा अन्य अधिकारी अभिप्रेत है, जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी जिले या जिलों में उपायुक्त के कृत्यों का पालन करने के लिए सरकार द्वारा किसी समय नियुक्त किया जाए ;

(11) निदेशक" से मणिपुर सरकार का नगरपालिक प्रशासन, आवास और शहरी विकास निदेशक या ऐसा कोई अन्य अधिकारी अभिप्रेत है जिसे मणिपुर के नगरपालिक प्रशासन, आवास और शहरी विकास निदेशक के कृत्यों का प्रयोग करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किया जाए ;

(12) जिला" से मणिपुर राज्य में कोई जिला अभिप्रेत है ;

(13) जिला मजिस्ट्रेट" से जिला मजिस्ट्रेट अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत नगरपालिका पर क्षेत्रीय अधिकारिता रखने वाला अपर जिला मजिस्ट्रेट या कोई ऐसा मजिस्ट्रेट भी है जिसे सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया जाए ;

(14) नाली" के अन्तर्गत सीवर, मोरी, किसी अन्य प्रकार की नाली, सुरंग, पुलिया, खाई, जलसरणी तथा मैलापानी, मल, घृणोत्पादक पदार्थों, दूषित जल, बेकार जल, वर्षा-जल या अवमृदा जल के निकास के लिए कोई अन्य युक्ति भी है ;

(15) निर्वाचन आयोग" से मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) की धारा 98 के अधीन गठित राज्य निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है ;

(16) कार्यपालक अधिकारी" से नगरपालिका का कोई ऐसा कार्यपालक अधिकारी अभिप्रेत है, जिसे इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया हो ;

(17) वित्तीय वर्ष" से किसी वर्ष की 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाला और अगले वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होने वाला वर्ष अभिप्रेत है ;

(18) खाद्य" के अन्तर्गत किसी मनुष्य द्वारा ओषधि या जल से भिन्न खाद्य या पेय के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु और कोई ऐसी वस्तु है, जिसको साधारणतया मानव खाद्य बनाने या तैयार किए जाने में मिलाया या उपयोग किया जाता है और इसमें मिठाइयां, सुरुचिकारी और रंगकारी पदार्थ, मसाले और स्वादक भी सम्मिलित हैं ;

(19) सरकार" से मणिपुर राज्य सरकार अभिप्रेत है ;

(20) अर्ध वर्ष" से ऐसा अर्ध वर्ष अभिप्रेत है जो 1 अप्रैल या 1 अक्तूबर से या ऐसी अन्य तारीख से प्रारंभ होता है, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे ;

(21) धृति" से ऐसी भूमि अभिप्रेत है जो हक या करार के अधीन धारित है और सीमाओं के एक संवर्ग से घिरी हुई है :

परन्तु जहां दो या अधिक परस्पर लगी हुई धृतियां किसी निवास-गृह, निर्माणशाला, भांडागार अथवा व्यापार या कारबार के स्थान या परिसर का भाग या खंड है वहां ऐसी धृतियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक धृति है :

परन्तु यह और कि जहां भूमि पृथक् रूप से भाटक का संदाय करने वाले अधिभोगियों को पृथक् खंडों में भाटक पर दी गई है वहां प्रत्येक ऐसे खंड को एक हक के अधीन धारित की गई भूमि के ऐसे खंडों के बावजूद एक सुभिन्न धृति माना जाएगा ।

स्पष्टीकरण 1-सड़क या संचार के अन्य साधनों द्वारा पृथक् की गई धृतियों को इस परन्तुक के अर्थान्तर्गत परस्पर लगी हुई समझा जाएगा ।

स्पष्टीकरण 2-स्पष्ट सीमाओं वाले और पूर्णतः खाली पड़े हुए किसी भूखंड को, यदि वह निर्माण प्रयोजनों के लिए ठीक है या यदि उससे कोई आय प्राप्त हो रही है तो उस दशा में जब वह किन्हीं कृषि प्रयोजनों के लिए अनुलग्नक नहीं है, धृति" माना जाएगा ;

(22) गृह" से उनकी चिनाई की गई या बनाई गई कोई झोंपड़ी, दुकान, भांडागार, वर्कशाप अभिप्रेत है ;

(23) सफाई गली" या सफाई रास्ता" से ऐसा रास्ता या भूमि का टुकड़ा अभिप्रेत है जो नाली के रूप में प्रयुक्त किए जाने या नाली निकालने के लिए अथवा शौचालय, शौच स्थान, मूत्रालय, मलकुंड तक या गन्दगी या दूषित पदार्थ के लिए अन्य पात्र तक, उसकी सफाई के लिए या उसमें से ऐसे पदार्थ को हटाने के लिए नियोजित नगरपालिका कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों के आने जाने के प्रयोजन के लिए बनाया गया है, पृथक् रखा गया या प्रयोग में लाया गया है और इसके अन्तर्गत ऐसे रास्ते या भूमि के ऊपर का आकाशी क्षेत्र भी है ;

(24) झोंपड़ी" से ऐसा कोई निर्माण अभिप्रेत है जो मुख्यतः लकड़ी, बांस, मिट्टी, पत्तियों, घास या फूंस से निर्मित है और इसके अन्तर्गत किसी भी सामग्री से निर्मित किसी भी आकार की अस्थायी संरचना या कोई छोटा भवन भी है ;

(25) संक्रामक या सांसर्गिक रोग" से हैजा, प्लेग, चेचक, खसरा, कालाजार, यक्ष्मा, डिपथीरिया और मियादी बुखार या आंत्र ज्वर या ऐसा अन्य भंयकर रोग अभिप्रेत है जो सरकार इस निमित्त अधिसूचित करे ;

(26) स्थानीय क्षेत्र के संबंध में प्रयोग किए जाने पर निवासी" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो उसमें मामूली तौर से निवास करता है या कारबार करता है या स्थावर सम्पत्ति का स्वामी या अधिभोगी है ;

(27) संयुक्त कुटुम्ब" से कोई ऐसा कुटुम्ब अभिप्रेत है जिसके सदस्य साथ-साथ रहते हों, जिनका साझा भोजनालय हो और जो एक ही पूर्वज से अवजनित हों और इसके अंतर्गत, जिसके सदस्यों की, यथास्थिति, पत्नियां या पति होंगे किन्तु इसमें उनकी विवाहित पुत्रियां और उनके बच्चे सम्मिलित नहीं होंगे ;

(28) भूमि" के अंतर्गत भूमि से उद्भूत होने वाले फायदे, गृह और भू-बद्ध चीजें या भू-बद्ध किसी चीज के साथ स्थायी रूप से जकड़ी हुई चीजें और वह भूमि भी है, जो जल से ढकी हुई है ;

(29) विधान सभा" से मणिपुर विधान सभा अभिप्रेत है ;

(30) स्थानीय प्राधिकरण" के अन्तर्गत जिला परिषद्, नगरपालिका परिषद्, नगर पंचायत, नगर निगम और पंचायत है ;

(31) वासा" से ऐसा गृह अभिप्रेत है जिसमें परिदर्शक या अन्य व्यक्ति एक या अधिक रात्रि के लिए भाड़े पर निवास करते हैं ;

(32) बाजार" या हाट" से कोई ऐसा स्थान, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अभिप्रेत है, जहां मांस, मछली, फल, सब्जी, पशुधन या खाद्य या वाणिज्या की किसी अन्य वस्तु के विक्रय के लिए व्यक्ति एकत्रित होते हैं और जो बाजार के रूप में नगरपालिका द्वारा घोषित या अनुज्ञप्त हैं ;

(33) नगरपालिका क्षेत्र" से किसी नगरपालिका का प्रादेशिक क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे राज्यपाल द्वारा अधिसूचित किया गया है ;

(34) नगरपालिका" से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन गठित, यथास्थिति, नगर पंचायत या नगरपालिका परिषद् अभिप्रेत है ;

(35) नगरपालिका बाजार" से नगरपालिका से संबंधित या उसके द्वारा अनुरक्षित कोई बाजार अभिप्रेत है ;

(36) अधिसूचना" से मणिपुर के राजपत्र में अधिसूचना अभिप्रेत है ;

(37) न्यूसेंस" के अन्तर्गत ऐसा कोई कार्य, लोप, स्थान या चीज है, जिससे इन्द्रीय या दृष्टि, घ्राणेन्द्रिय या श्रवणेन्द्रिय को क्षति, खतरा, क्षोभ या संताप होता है या होना सम्भाव्य है अथवा जिससे आराम या निद्रा में विघ्न पड़ता है या विघ्न पड़ना सम्भाव्य है अथवा जो जीवन के लिए खतरनाक है या खतरनाक हो सकता है या स्वास्थ्य या सम्पत्ति के लिए क्षतिकर है या क्षतिकर हो सकता है ;

(38) अधिभोगी" के अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं, अर्थात् :-

(क) ऐसा कोई व्यक्ति, जो स्वामी को उस भूमि या भवन का भाटक या भाटक का कोई भाग दे रहा है या देने का जिम्मेदार है, जिसकी बाबत ऐसा भाटक दिया जाता है या देय है ; 

(ख) वह स्वामी, जो अपनी भूमि या भवन का अधिभोग करता है या अन्यथा उसका प्रयोग करता है ;

(ग) किसी भूमि या भवन का भाटकमुक्त अभिधारी ;

(घ) किसी भूमि या भवन का अधिभोग करने वाला, अनुज्ञप्तिधारी ; और

(ङ) ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी भूमि या भवन के स्वामी को ऐसी भूमि या भवन के प्रयोग और अधिभोग के लिए नुकसानी देने का जिम्मेदार है ;

(39) घृणोत्पादक पदार्थ" के अन्तर्गत जीव जन्तु के पिंजर, रसोई या अस्तबल का कचरा, पशुविष्ठा, गंदगी, सड़े-गले या सड़ रहे पदार्थ और किसी प्रकार की ऐसी गन्दगी भी है, जो मल में सम्मिलित नहीं है ;

(40) स्वामी" के अन्तर्गत निम्नलिखित भी है, -

(क) ऐसा व्यक्ति जो तत्समय किसी भूमि या भवन या ऐसी किसी भूमि या भवन के किसी भाग का भाटक, चाहे अपने ही निमित्त या अपने और अन्य व्यक्तियों के निमित्त या किसी अन्य व्यक्ति या सोसाइटी के लिए या किसी धार्मिक या पूर्त प्रयोजन के लिए अभिकर्ता, न्यासी, संरक्षक या रिसीवर के रूप में प्राप्त कर रहा है या प्राप्त करने का हकदार है या जो, यदि भूमि, भवन या उसका भाग किसी अधिकारी को पट्टे पर दे दिया जाए तो, इस प्रकार भाटक प्राप्त करेगा या उसे प्राप्त करने का हकदार होगा ; और

(ख) अपने नियंत्रण के अधीन सम्पत्तियों के बारे में सरकारी विभाग का प्रधान ;

(41) पंचायत" से मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) के अधीन जिला या ग्राम स्तर पर गठित स्वायत्त शासन की कोई संस्था अभिप्रेत है ;

(42) प्लेटफार्म" से कोई ऐसी संरचना अभिप्रेत है, जो किसी सार्वजनिक सड़क या किसी खुली नाली, सीवर, या जलसेतु पर हो या उसके अंतर्गत हो या उसके बाहर निकली हुई हो ;

(43) जनसंख्या" से ऐसी अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना में अभिनिश्चित की गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आकड़े प्रकाशित हो गए हैं ;

(44) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(45) प्राइवेट सड़क" से कोई पथ, सड़क, चौक, प्रांगण, गली या ऐसा रास्ता अभिप्रेत है जो सार्वजनिक सड़क नहीं है और इसके अंतर्गत परिसर के स्वामी द्वारा ऐसे परिसर तक पहुंचने या उसका सुविधाजनक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अपनी भूमि पर बनाई गई पथ्या भी है ;

(46) पुनः परिनिर्माण" पद के अन्तर्गत जब इसका प्रयोग भवन के संबंध में किया जाए तब निम्नलिखित भी हैं :-

(क) भवन का पुनर्निर्माण जब उसके घनीय विस्तार का आधे से अधिक भाग गिरा दिया गया है या जला दिया गया है या गिर गया है ;

(ख) एक या अधिक झोंपड़ियों या अस्थायी संरचनाओं का पक्की चिनाई के या बनाए गए भवन में संपरिवर्तन ;

(ग) किसी भवन का मानव निवास के लिए, जो ऐसे निवास के लिए मूलतः निर्मित नहीं किया गया हो, स्थान में संपरिवर्तन, और

(घ) किसी भवन का विस्तार ;

                                (47) प्राइवेट वधशाला" से ऐसी वधशाला अभिप्रेत है जो नगरपालिका वधशाला नहीं है ;

                (48) सार्वजनिक स्थान" से ऐसा स्थान अभिप्रेत है जो प्राइवेट सम्पत्ति नहीं है और जो जनता के प्रयोग या उपयोग के लिए खुला है, चाहे ऐसा स्थान नगरपालिका में निहित है या नहीं ;

                (49) सार्वजनिक सड़क" से कोई ऐसा मार्ग, सड़क, कच्चा चौक, प्रांगण, वीथि, गली, रास्ता या पथ्या अभिप्रेत है जिस पर जनता का मार्गाधिकार है चाहे वह आम रास्ता हो या नहीं और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं -

                                (क) किसी सार्वजनिक पुल या काजवे के ऊपर सड़क मार्ग ;

                                (ख) ऐसी किसी सड़क, सार्वजनिक पुल या काजवे से संलग्न पैदल मार्ग ; और

                (ग) किसी ऐसी सड़क, सार्वजनिक पुल या काजवे से संलग्न नालियां और भूमि, चाहे वह किसी खड़ंजे से ढ़की हो या नहीं, बरामदा या अन्य संरचना जो पार्श्वस्थ सम्पत्ति की सीमाओं तक सड़क मार्ग के दोनों ओर हो, चाहे वह सम्पत्ति प्राइवेट सम्पत्ति हो या सरकारी सम्पत्ति हो ;

(50) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन नगरपालिका द्वारा अधिसूचना द्वारा, बनाया गया विनियम    अभिप्रेत है :

(51) कूड़ा" से राख, टूटी ईंटें, गारा, टूटा शीशा, धूल या किसी प्रकार का कचरा अभिप्रेत है जो गन्दगी नहीं है ;

(52) नियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाया गया नियम अभिप्रेत है ;

(53) अनुसूचित जाति" से ऐसी जाति, मूल वंश या जनजाति या ऐसी जातियों, जनजातियों के अंतर्गत समूहों के भाग अभिप्रेत हैं जिन्हें मणिपुर राज्य के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 के अधीन अनुसूचित जातियों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है ;

(54) अनुसूचित जनजाति" से ऐसी जनजातियां या जनजाति समुदाय या ऐसी जनजातियों या जनजाति समुदायों के अन्तर्गत समूहों के भाग अभिप्रेत हैं, जिन्हें मणिपुर राज्य के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अधीन अनुसूचित जनजातियों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है ;

(55) मल" से विष्ठा और शौच स्थान, शौचालयों, मूत्रालयों, मलकुण्डों और नालियों की अन्य अन्तर्वस्तुएं अभिप्रेत हैं और इसके अन्तर्गत सिंकों, स्नानागारों, अस्तबलों, पशु शैडों और अन्य वैसे ही स्थानों का दूषित जल और सभी प्रकार की निर्माणशालाओं का निस्सरण भी है ;

(56) वधशाला" से ऐसा कोई स्थान अभिप्रेत है जो जीव-जंतुओं के मांस का मानव उपभोग के लिए विक्रय करने के प्रयोजन के लिए उन जीव-जंतुओं का वध करने के लिए मामूली तौर पर प्रयोग में लाया जाता है ;

(57) नगरीय क्षेत्र" से मणिपुर राज्य में ऐसे क्षेत्र अभिप्रेत हैं जो ग्रामीण क्षेत्र नहीं हैं ;

(58) यान" के अन्तर्गत बाइसाईकिल, ट्राई-साइकिल और आटो-मोटर कार तथा पहियों वाला प्रत्येक वाहन भी है, चाहे वह कोई गाड़ी, बैलगाड़ी, वैन, ठेला हो जो किसी सार्वजनिक सड़क पर प्रयोग की जाती है या प्रयोग की जा सकती है ;

(59) वार्ड" से धारा 18 के अधीन गठित कोई नगरपालिका वार्ड अभिप्रेत है ;

(60) जल संकर्म" के अंतर्गत सभी तालाब, सरिताएं, हौज, चश्में, पम्प, कुएं, जलाशय, जलसेतु, जलद्वार, मुख्य प्रणाल (मेन), पाइपें, बम्बा (हाइड्रेंट), सार्वजनिक नल और नलिकाएं तथा जल प्रदाय के लिए प्रयुक्त या उस प्रयोजन के लिए आशयित सभी भूमि, भवन, मशीनें और चीजें भी हैं ;

(61) जिला परिषद्" से मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) के अधीन गठित किसी जिले की जिला परिषद् अभिप्रेत है ।

अध्याय 2

नगरपालिकाओं का गठन

3. नगरपालिकाओं का गठन-(1) राज्यपाल, इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित का गठन करेगा, -

(क) किसी संक्रमणशील क्षेत्र के लिए अर्थात् ग्रामीण क्षेत्र से नगरीय क्षेत्र में संक्रमणगत क्षेत्र के लिए कोई नगर पंचायत ;

(ख) किसी लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद्, और

(ग) किसी वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम :

                परन्तु इस धारा के अधीन कोई नगरपालिका ऐसे नगरीय क्षेत्र या उसके भाग में गठित नहीं की जा सकेगी जिसे राज्यपाल, क्षेत्र के आकार और उस क्षेत्र में किसी औद्योगिक स्थापन द्वारा दी जा रही या दिए जाने के लिए प्रस्तावित नगरपालिक सेवाओं और ऐसी अन्य बातों को, जो वह ठीक समझे, ध्यान में रखते हुए, अधिसूचना द्वारा औद्योगिक नगरी के रूप में विनिर्दिष्ट करे ।

                स्पष्टीकरण-इस धारा में, संक्रमणशील क्षेत्र", लघुतर नगरीय क्षेत्र" या वृहत्तर नगरीय क्षेत्र" से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उस क्षेत्र की जनसंख्या, उसमें जनसंख्या की सघनता, स्थानीय प्रशासन के लिए उत्पन्न राजस्व, कृषि से भिन्न क्रियाकलापों में नियोजन की प्रतिशतता, आर्थिक महत्व या ऐसी अन्य बातों को जो वह ठीक समझे, ध्यान में रखते हुए, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।

                (2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी स्थानीय क्षेत्र को, अनुसूचित क्षेत्र को छोड़कर जिसे मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1976 (1976 का मणिपुर अधिनियम सं० 26) के अधीन, इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व लघु नगर या नगरपालिका घोषित किया गया था, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, संक्रमणशील क्षेत्र या लघुतर नगरीय क्षेत्र घोषित किया गया समझा जाएगा ।

                (3) उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी करने से पूर्व अधिसूचना का एक प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा जिसमें नगरपालिका में सम्मिलित या उससे अपवर्जित किए जाने वाले क्षेत्र की स्थानीय सीमाएं उपदर्शित होंगी ।

                (4) कोई व्यक्ति जो उस स्थानीय क्षेत्र का साधारणतया निवासी है जिसकी बाबत उपधारा (3) के अधीन प्रारूप अधिसूचना प्रकाशित की गई है, उक्त प्रारूप अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर उपायुक्त को लिखित में ऐसी अधिसूचना में अन्तर्विष्ट प्रस्ताव के विरुद्ध आक्षेप कर सकेगा ।

                (5) उपायुक्त, उपधारा (4) के अधीन आक्षेप की प्राप्ति पर, आक्षेप की प्राप्ति के पैंतालीस दिन के भीतर अपनी टिप्पणियों सहित उसे सरकार को उसके विचार के लिए भेज देगा ।

4. नगरपालिका से स्थानीय क्षेत्र के अपवर्जन का प्रभाव-(1) जब किसी स्थानीय क्षेत्र को धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना द्वारा किसी नगरपालिका से अपवर्जित किया जाता है और अन्य स्थानीय प्राधिकरण में सम्मिलित किया जाता है तो सरकार यह अवधारित करते हुए एक स्कीम तैयार करेगी कि नगरपालिका निधि के बकाया का और उस नगरपालिका में निहित सभी अन्य सम्पत्ति का कितना भाग ऐसे अपवर्जन पर :-

(i) जब ऐसा क्षेत्र किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण की सीमाओं के भीतर सम्मिलित किया जाता है तब ऐसे प्राधिकरण में निहित होगा ; और

(ii) किसी अन्य दशा में, सरकार में निहित होगा और किसी रीति में नगरपालिका का दायित्व, यथास्थिति, नगरपालिका और ऐसे स्थानीय प्राधिकरण या सरकार के बीच प्रभाजित किया जाएगा और ऐसी किसी स्कीम के राजपत्र में प्रकाशन पर ऐसी सम्पत्ति और दायित्व निहित हो जाएंगे और वे तद्नुसार प्रभाजित किए जाएंगे :

                परंतु ऐसी कोई स्कीम तैयार करने से पूर्व सरकार, नगरपालिका से और जहां क्षेत्र को ऐसे किसी स्थानीय प्राधिकरण की सीमा में सम्मिलित किया जाता है वहां ऐसे प्राधिकरण से भी परामर्श करेगी ।

                (2) ऐसे अपवर्जन की तारीख से ठीक पूर्व कर, पथकर, फीस, रेट मद्दे या अन्यथा नगरपालिका को शोध्य सभी धन, जो इस प्रकार अपवर्जित क्षेत्र से संबंधित है, नगरपालिका द्वारा इस प्रकार वसूल किए जाएंगे मानो ऐसा क्षेत्र अपवर्जित ही न किया गया हो ।

5. सीमाचिह्नों का परिनिर्माण और अनुरक्षण-प्रत्येक नगरपालिका, अधिसूचना द्वारा यथा उपवर्णित उसके प्राधिकार के अध्यधीन क्षेत्र की सीमाओं को परिनिश्चित करते हुए सीमाचिह्नों का परिनिर्माण और स्थापन तथा अनुरक्षण कराएगी ।

अध्याय 3

नगर पंचायत

6. नगर पंचायत का निगमन-नगर पंचायत अपने नाम वाली एक निगमित निकाय होगी जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे संपत्ति का अर्जन करने, उसे धारण करने और उसका व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी और वह अपने नाम से वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।

7. नगर पंचायत की संरचना-(1) प्रत्येक नगर पंचायत में पार्षद् उतनी संख्या में होंगे जो सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा नियत करे ।

(2) उपधारा (3) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, नगर पंचायत में सभी स्थान नगर पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से, जिन्हें नगरपालिका क्षेत्र में वार्ड कहा गया है, प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाएंगे ।

(3) सरकार, किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव है, नगर पंचायत के पार्षद् के रूप में नियुक्त कर सकेगी:

परन्तु ऐसे व्यक्ति को नगर पंचायत के अधिवेशनों में मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

8. नगर पंचायत की दशा में परिषद् से संबंधित कतिपय उपबंधों का लागू होना-परिषद् से संबंधित इस अधिनियम की धारा 17, धारा 19 और धारा 20 के उपबंध नगर पंचायत की दशा में भी लागू होंगे ।

9. नगर पंचायत का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-प्रत्येक नगर पंचायत का एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होगा ।

10. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन-(1) अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, साधारण निर्वाचन के पश्चात्, उपायुक्त के कहने पर बुलाए गए नगर पंचायत के प्रथम अधिवेशन में पार्षद् अपने में से किसी एक व्यक्ति को इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार अध्यक्ष निर्वाचित करेंगे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन निर्वाचन, -

                (क) धारा 22 के अधीन निर्वाचन के परिणाम की अधिसूचना की तारीख से इक्कीस दिन के भीतर होगा ;

                (ख) अध्यक्ष की पदावधि की समाप्ति से भिन्न किसी कारण अध्यक्ष पद में रिक्ति की दशा में, रिक्ति होने की तारीख से इक्कीस दिन से भीतर होगा ।

(3) राज्य सरकार अधिवेशन की अध्यक्षता करने और उपधारा (1) में उल्लिखित कारबार के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त करेगी ।

(4) पार्षद् या तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिवेशन में या किसी पश्चात्वर्ती अधिवेशन में उपधारा (1) के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष के अलावा अपने में से किसी एक व्यक्ति को उपाध्यक्ष निर्वाचित करेंगे ।

11. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद् द्वारा त्यागपत्र-(1) अध्यक्ष, कार्यपालक अधिकारी को सम्बोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ।

(2) उपाध्यक्ष या पार्षद् अध्यक्ष को सम्बोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा, जो इसे कार्यपालक अधिकारी को भेजेगा ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन त्यागपत्र उस तारीख से, जिसको सरकार उसे स्वीकार करती है, प्रभावी होगा ।

(4) कार्यपालक अधिकारी उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्राप्त त्यागपत्र के तथ्य की सूचना नगर पंचायत और राज्य सरकार को तुरन्त देगा ।

(5) राज्य सरकार, उपधारा (4) के अधीन सूचना की प्राप्ति पर उक्त त्यागपत्र और उसके परिणामस्वरूप रिक्ति होने के तथ्य को अधिसूचित करेगी ।

12. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पारिश्रमिक-नगर पंचायत के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या किसी अन्य पार्षद् को उस नगर पंचायत द्वारा ऐसा पारिश्रमिक या भत्ता प्रदान किया जा सकेगा, जो विहित किया जाए ।

 

अध्याय 4

नगरपालिका परिषद्

13. नगरपालिका परिषद् का निगमन-नगरपालिका परिषद् अपने नाम वाली एक निगमित निकाय होगी जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी, और जिसे संपत्ति का अर्जन करने, उसे धारण करने और उसका व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी और जो अपने नाम से वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।

14. नगरपालिका प्रशासन-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी नगरपालिका का नगरपालिका प्रशासन, यथास्थिति, परिषद् या नगर पंचायत में निहित होगा ।

15. परिषद् की संरचना-(1) प्रत्येक परिषद् में पार्षदों की उतनी संख्या होगी जितनी राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर अधिसूचना द्वारा नियत की जाए ।

(2) उपधारा (3) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, नगरपालिका के सभी स्थान प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से, जिन्हें नगरपालिका क्षेत्र में वार्ड कहा जाएगा, प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरे जाएंगे ।

(3) राज्य सरकार, किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव है, नगरपालिका परिषद् का सदस्य नियुक्त कर सकेगी :

परन्तु ऐसे व्यक्ति को परिषद् के अधिवेशनों में मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

16. वार्ड समितियों का गठन और उनकी संरचना-(1) ऐसी नगरपालिका की बाबत, जिसकी जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, राज्य सरकार द्वारा आदेश द्वारा उतनी वार्ड समितियों का गठन किया जाएगा जितनी उसके द्वारा अवधारित की जाए किन्तु ऐसी प्रत्येक वार्ड समिति में कम से कम पांच वार्ड होंगे :

परन्तु वार्ड समितियों का गठन करने में राज्य सरकार यावत्संभव भौगोलिक सामीप्य बनाए रखेगी ।

(2) प्रत्येक वार्ड समिति में निम्नलिखित होंगे :-

                (i) उन वार्डों से निर्वाचित सदस्य जिनके लिए वार्ड समिति गठित की गई है ;

                (ii) कार्यपालक अधिकारी जो पदेन सदस्य होगा ; और

                (iii) नगरपालिका के ऐसे अन्य अधिकारी जिन्हें राज्य सरकार पदेन सदस्य के रूप में विनिर्दिष्ट करे जिनमें से एक विनिर्दिष्ट अधिकारी वार्ड समिति का सचिव होगा :

परन्तु पदेन सदस्यों को वार्ड समिति के अधिवेशनों में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

(3) वार्ड समिति का अध्यक्ष, उसके निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगा ।

(4) अध्यक्ष, यदि वार्ड समिति का सदस्य नहीं रहता है तो वह उस पद पर नहीं रहेगा । अध्यक्ष पद पर किसी आकस्मिक रिक्ति को, ऐसी रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र वार्ड समिति के निर्वाचित सदस्यों में से एक और अन्य अध्यक्ष के निर्वाचन द्वारा भरा जाएगा ।

(5) वार्ड समिति की शक्तियां और उसके कृत्य तथा उसके अधिवेशनों में कारबार के संचालन की रीति वह होगी जो विहित की जाए ।

17. स्थानों का आरक्षण-(1) प्रत्येक नगरपालिका में, धारा 15 के अधीन अवधारित निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या में से राज्य सरकार, ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो अधिसूचना द्वारा विहित किए जाएं -

(i) अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों की इतनी संख्या जो उनके द्वारा अवधारित की जाए, इस शर्त के अधीन रहते हुए आरक्षित करेगी कि इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात उस नगरपालिका परिषद् में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशक्य निकटतम वही होगा जो उस नगरपालिका में, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस नगरपालिका की कुल जनसंख्या से है ; और ऐसे स्थान नगरपालिका के विभिन्न वार्डों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे ;

(ii) उपधारा (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे ;

(iii) प्रत्येक परिषद् में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए आरक्षित करेंगी और ऐसे स्थान नगरपालिका के भिन्न-भिन्न वार्डों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे ।

                स्पष्टीकरण-इस धारा में अनुसूचित जातियों", अनुसूचित जनजातियों" पदों के क्रमशः वही अर्थ होंगे जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (25) में हैं ।

                (2) नगरपालिकाओं के अध्यक्षों के पद, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और स्त्रियों के लिए ऐसी रीति से आरक्षित रहेंगे जो राज्य सरकार, इस निमित्त, अधिसूचना द्वारा विहित करे ।

                (3) उपधारा (1) के अधीन स्थानों का आचरण, जिसके अंतर्गत उपधारा (2) के अधीन अध्यक्षों के पदों का आरक्षण भी है (जो स्त्रियों के लिए आरक्षण से भिन्न है) भारत के संविधान के अनुच्छेद 334 में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति प्रभावी नहीं रहेगा ।

18. आरक्षित स्थानों का आबंटन और वार्डों का परिसीमन-राज्य सरकार नगरपालिका में वार्डों की सीमाओं का परिसीमन और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा स्त्रियों के पक्ष में बोर्डों में से आरक्षित स्थानों का विहित रीति में आबंटन करेगी ।

19. सदस्यता के लिए निरर्हताएं-(1) कोई व्यक्ति किसी नगरपालिका का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा, -

(क) यदि वह मणिपुर विधान सभा के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है :

परंतु कोई व्यक्ति इस आधार पर निरर्हित नहीं होगा कि उसकी आयु पच्चीस वर्ष से कम है, यदि उसने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है ;

(ख) यदि वह मणिपुर विधान सभा द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है ;

(ग) यदि वह किसी वार्ड की निर्वाचन नामावली में निर्वाचक के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं है ;

(घ) यदि वह उस वार्ड के भीतर मामूली तौर से निवासी नहीं है जिससे वह निर्वाचन में खड़ा हुआ है ।        

                स्पष्टीकरण-मामूली तौर से निवासी" पद का वही अर्थ होगा जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 20 में है ।

                (2) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी नगरपालिका का कोई सदस्य उपधारा (1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न निर्वाचन अधिकरण को ऐसी रीति से जो विहित की जाए, विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा ।                               

20. पद की शपथ-(1) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो किसी नगरपालिका के पार्षद् के रूप में नियुक्त या निर्वाचित होता है, इस अधिनियम के अधीन अपना पद ग्रहण करने से पूर्व ऐसे प्राधिकारी के समक्ष जो इस प्रयोजन के लिए विहित किया जाए, भारत के संविधान के प्रति अपनी निष्ठा की विहित प्ररूप में शपथ लेगा और प्रतिज्ञान करेगा तथा उस पर हस्ताक्षर करेगा ।

                (2) यदि ऐसा व्यक्ति जो पार्षद् के रूप में नियुक्त या निर्वाचित किया गया है, नगरपालिका के प्रथम अधिवेशन की तारीख से तीन मास के भीतर उपधारा (1) में अधिकथित शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने और उस पर हस्ताक्षर करने में असफल रहता है तो वह अपना पद धारण नहीं करेगा और उसका पद रिक्त हो गया समझा जाएगा ।

21. प्रशासक की नियुक्ति-राज्य सरकार किसी नगरपालिका की शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों तथा कृत्यों का पालन करने के लिए किसी व्यक्ति को प्रशासक के रूप में नियुक्त करेगी जब तक कि इस अधिनियम के अधीन ऐसे क्षेत्र के लिए किसी नगरपालिका का गठन नहीं कर दिया जाता है :

                परन्तु ऐसी नियुक्ति की अवधि छह मास से अधिक नहीं होगी :

                परन्तु यह और कि मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1976 (1976 का मणिपुर अधिनियम सं० 26) के उपबंधों के अधीन 12 अक्तूबर, 1993 को या उससे पूर्व नियुक्त कोई प्रशासक उस अधिनियम के अधीन विधिमान्य रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा और ऐसे प्रशासक की पदावधि इस अधिनियम के प्रारंभ पर समाप्त हो जाएगी ।

22. नगरपालिकाओं आदि की अवधि-(1) प्रत्येक नगरपालिका यदि वह इस अधिनियम के अधीन पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो उस साधारण निर्वाचन के पश्चात् अपने प्रथम अधिवेशन के लिए, जिसमें गणपूर्ति हो जाती है, नियत तारीख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी इससे अधिक नहीं :

परन्तु ऐसी नगरपालिका जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व कार्य कर रही है, उसकी अवधि की समाप्ति तक बनी रहेगी, जब तक कि मणिपुर राज्य की विधान सभी द्वारा इस आशय के पारित संकल्प द्वारा उसे पहले ही विघटित नहीं कर दिया जाता है ।

(2) किसी नगरपालिका को गठित करने के लिए, निर्वाचन-

                (क) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट उसकी अवधि की समाप्ति के पूर्व ;

                (ख) उसके विघटन की तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व ;

पूरा किया जाएगा :

                परन्तु जहां वह शेष अवधि, जिसके लिए विघटित नगरपालिका बनी रहती, छह मास से कम है वहां ऐसी अवधि के लिए उस नगरपालिका का गठन करने के लिए इस उपधारा के अधीन कोई निर्वाचन कराना आवश्यक नहीं होगा :

                परन्तु यह और कि निर्वाचन का परिणाम अधिसूचित किया जाएगा ।

                (3) किसी नगरपालिका की अवधि की समाप्ति के पूर्व उस नगरपालिका के विघटन पर गठित की गई कोई नगरपालिका उस अवधि के केवल शेष भाग के लिए बनी रहेगी जिसके लिए विघटित नगरपालिका उपधारा (1) के अधीन बनी रहती यदि वह इस प्रकार विघटित नहीं की जाती ।

23. प्रत्येक परिषद् में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का होना-प्रत्येक परिषद् में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होगा ।

24. अध्यक्ष का निर्वाचन-(1) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, पार्षद् साधारण निर्वाचन के पश्चात् उपायुक्त की प्रेरणा पर बुलाए जाने वाले परिषद् के प्रथम अधिवेशन में, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार अपने में से एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित करेंगे ।

(2) ऐसा निर्वाचन धारा 22 के अधीन परिणाम की अधिसूचना की तारीख से इक्कीस दिन के भीतर और अध्यक्ष की पदावधि की समाप्ति से भिन्न किसी कारणवश अध्यक्ष के पद में रिक्ति की दशा में ऐसी रिक्ति होने की तारीख से इक्कीस दिन के भीतर कराया   जाएगा ।

(3) राज्य सरकार अधिवेशन की अध्यक्षता करने के लिए और उपधारा (1) में वर्णित कारबार के प्रयोजन के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त करेगी ।

25. उपाध्यक्ष का निर्वाचन-पार्षद् धारा 24 की उपधारा (1) में वर्णित अधिवेशन में या किसी पश्चात्वर्ती अधिवेशन में अपने में से किसी व्यक्ति को जो धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष से भिन्न हो, उपाध्यक्ष निर्वाचित करेंगे ।

26. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का उस रूप में पद धारण करना-जब कोई पार्षद्, जो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद धारण करता है, किसी भी कारण से पार्षद् नहीं रहता है तो वह उसी समय से, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद को धारण नहीं करेगा ।

27. रिक्तियों का भरा जाना और रिक्ति को भरने वाले व्यक्तियों की पदावधि-यदि कोई पार्षद् अपनी मृत्यु, पद त्याग या हटाए जाने के कारण या अन्यथा अपने पद की पूर्ण अवधि को पूरा करने में असमर्थ रहता है तो इस प्रकार कारित रिक्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी व्यक्ति के, यथास्थिति, निर्वाचन या नियुक्ति द्वारा भरी जाएगी और इस प्रकार निर्वाचित या नियुक्त किया गया व्यक्ति अपने पूर्ववर्ती की अनवसित अवधि के लिए पद धारण करेगा :

परन्तु किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए तब कोई निर्वाचन नहीं किया जाएगा जब यह रिक्ति, उस तारीख को, जिसको पार्षद् की पदावधि समाप्त होती है, पूर्ववर्ती तारीख से छह मास की अवधि के भीतर होती है ।

28. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद् द्वारा पद त्याग-(1) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को संबोधित त्यागपत्र लिखकर अपना पद त्याग सकेगा जो उस त्यागपत्र को तत्काल कार्यपालक अधिकारी को परिदत्त करेगा ।

(2) उपाध्यक्ष या पार्षद्, अध्यक्ष को संबोधित त्यागपत्र लिखकर अपना पद त्याग सकेगा, जो उस त्यागपत्र को तत्काल कार्यपालक अधिकारी को परिदत्त करेगा ।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन त्यागपत्र उस तारीख से प्रभावी होगा जिस तारीख को यह सरकार द्वारा स्वीकार किया जाता है ।

(4) कार्यपालक अधिकारी उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्राप्त त्यागपत्र के तथ्य की सूचना परिषद् को और राज्य सरकार को तत्काल देगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन सूचना की प्राप्ति पर, राज्य सरकार, त्यागपत्र और उस पर पारिणामिक आकस्मिक रिक्ति होने के तथ्य को राजपत्र में अधिसूचित करेगी ।

29. पार्षदों का हटाया जाना-(1) राज्य सरकार किसी निर्वाचित पार्षद् को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में उसके कदाचार के आधार पर हटा सकेगी यदि उसके हटाए जाने की नगरपालिका द्वारा उस प्रयोजन के लिए बुलाए गए एक विशेष अधिवेशन में पारित और नगरपालिका के पार्षदों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा और ऐसे अधिवेशन में उपस्थित तथा मत देने वाले पार्षदों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा सिफारिश की जाती है ।

(2) राज्य सरकार किसी पार्षद् को निम्नलिखित आधार पर हटा सकेगी, -

                (क) यदि वह लगातार बारह मास की अवधि के लिए नगरपालिका के भीतर निवास नहीं करता है, या

                (ख) यदि वह राज्य सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा निष्ठा की शपथ या प्रतिज्ञान का उल्लघंन करने वाला घोषित कर दिया गया है ; या

(ग) यदि वह मणिपुर विधान सभा के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन निरर्हित हो गया है ; या

(घ) यदि उसने धारा 59 के अर्थान्तर्गत, राज्य सरकार की लिखित रूप में अनुज्ञा के बिना प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से या एक भागीदार के रूप में नगरपालिका द्वारा या उसकी ओर से किसी संविदा या नियोजन में अंश या हित जानबूझकर अर्जित किया है या धारण करता रहा है ; या

(ङ) यदि वह किसी बिल या सूचना के उस पर सम्यक् रूप से तामील किए जाने के पश्चात् छह मास से अधिक तक नगरपालिका के किसी प्रकार के देय की बकाया में रहा है :

                परन्तु कोई पार्षद् उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।

30. पार्षद् के हटाए जाने का प्रभाव-किसी नगर पंचायत या परिषद् का कोई पार्षद्, जो धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 29 की उपधारा (2) के खंड (ख), खंड (ग), खंड (घ) या खंड (ङ) के अधीन उसके पद से हटा दिया गया है, ऐसी अवधि के लिए, जो विहित की जाए, पार्षद् के रूप में निर्वाचन या पुनःनिर्वाचन के लिए पात्र नहीं होगा ।

31. अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव-(1) राज्य सरकार पार्षदों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा पारित और उपधारा (2) के अधीन प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाए गए किसी अधिवेशन में उपस्थित और मत देने वाले पार्षदों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित संकल्प के अनुसरण में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को उसके पद से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, हटा सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए नगर पंचायत या परिषद् का अधिवेशन निम्नलिखित रीति में होगा, अर्थात् :-

(i) अधिवेशन कार्यपालिका अधिकारी द्वारा तत्समय नगर पंचायत या परिषद् का गठन करने वाले पार्षदों की कुल संख्या के 1/5 से अन्यून पार्षदों द्वारा हस्ताक्षरित अध्यपेक्षा पर बुलाया जाएगा ;

(ii) ऐसे अधिवेशन की सूचना, जिसमें उसका समय और स्थान विनिर्दिष्ट हो, कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रत्येक पार्षद् को अधिवेशन के दस दिन पूर्व भेजी जाएगी ;

(iii) यथास्थिति, वह अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट संकल्प लाया जाना है, अधिवेशन में पीठासीन नहीं होगा ;

(iv) सूचना की एक प्रति राज्य सरकार का भेजी जाएगी ।

                (3) यदि अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है तो अध्यक्ष की सभी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन नए अध्यक्ष का निर्वाचन होने तक उपाध्यक्ष द्वारा किया जाएगा ।

                (4) उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का हटाया जाना इस बारे में उसके संकल्प की तारीख से प्रभावी होगा ।

32. अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति की छुट्टी की मंजूरी-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, समय-समय पर, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को अनुपस्थिति की ऐसी छुट्टी मंजूर कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

(2) यदि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बीमारी के कारण या किसी अन्य कारण से, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की अनुमति के बिना तीन मास से अधिक अवधि के लिए अपने पद से अनुपस्थित रहता है तो वह, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नहीं रहेगा और उसका पद रिक्त हो जाएगा ।

(3) अध्यक्ष की छुट्टी पर अनुपस्थिति के दौरान, उपाध्यक्ष और ऐसी ही परिस्थिति में उपाध्यक्ष की दशा में पार्षदों में से कोई एक जो उनके द्वारा उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए निर्वाचित किया जाए, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के कृत्यों का निर्वहन करेगा ।

(4) उपाध्यक्ष या पार्षद्, उस अवधि की बाबत और उसके दौरान जिसमें वह, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करेगा ।

33. अध्यक्ष की शक्तियां और कृत्य-अध्यक्ष का यह कृत्य होगा कि वह-

(क) जब तक युक्तियुक्त कारणों से निवारित नहीं किया गया हो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के सभी अधिवेशनों में पीठासीन हो और तत्समय प्रवृत्त उपविधियों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अधिवेशनों में काम-काज के संचालन को विनियमित करे ;

(ख) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के वित्तीय और कार्यपालक प्रशासन पर निगरानी रखे और ऐसे कार्यपालक कृत्यों को करे जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों या उपविधियों द्वारा या उनके अधीन उसे आबंटित किए जाएं ;

(ग) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यपालक कृत्यों से संबंधित सभी मामलों में उनके कार्यों और कर्तव्यों पर तथा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के लेखा और अभिलेखों पर पर्यवेक्षी और कार्यपालक नियंत्रण रखे ;

(घ) आपात की दशा में ऐसे किसी काम का निष्पादन करने या उसे रोकने के लिए या कोई ऐसा कार्य करने के लिए जिसके लिए, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की मंजूरी अपेक्षित है और उसकी राय में लोक सेवा या सुरक्षा के लिए जिसका तत्काल निष्पादन करना या किया जाना आवश्यक है, निदेश दे सकेगा और ऐसे काम के निष्पादन या ऐसे कार्य के किए जाने में उपगत व्यय नगरपालिका निधि से संगत किया जाएगा :

                परन्तु-

(क) वह खंड (घ) के अधीन यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के ऐसे किसी आदेश के उल्लघंन में कार्य नहीं करेगा जिसमें किसी विशिष्ट काम के निष्पादन या किसी विशिष्ट कार्य के किए जाने को प्रतिषिद्ध किया गया हो ; और

(ख) वह खंड (घ) के अधीन की गई कार्रवाई और उसके लिए कारणों की रिपोर्ट तत्काल, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को उसके आगामी अधिवेशन में करेगा ।

34. उपाध्यक्ष के कृत्य-उपाध्यक्ष का यह कृत्य होगा कि वह-

(क) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में और जब तक युक्तियुक्त कारणों से निवारित न किया जाए, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के अधिवेशनों में पीठासीन हो और जब वह इस प्रकार पीठासीन हो उसी प्राधिकार का प्रयोग करेगा जो धारा 33 के खंड (क) के अधीन अध्यक्ष में निहित है ;

(ख) अध्यक्ष के निर्वाचन के लंबित रहने तक या अध्यक्ष की अनुपस्थिति के दौरान अध्यक्ष की शक्तियों का प्रयोग करे और कर्तव्यों का निर्वहन करे ।

35. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पारिश्रमिक-परिषद् के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी अन्य पार्षद् को परिषद् द्वारा ऐसा पारिश्रमिक या ऐसा भत्ता मंजूर किया जाएगा जो विहित किया जाए :

                परन्तु इस धारा के अधीन उपगत होने वाला व्यय, धारा 71 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना नगरपालिका निधि में से संदत्त किया जाएगा ।

36. नगरपालिकाओं की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व-(1) राज्य सरकार, जब कभी वह समीचीन समझे, अधिसूचना द्वारा-

                                (क) नगरपालिकाओं को निम्नलिखित कृत्य न्यस्त कर सकेगी, -

                                                (i) आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना ;

(ii) ऐसे कृत्यों का पालन करना और ऐसी स्कीमों को, जो उसे सौंपी जाएं, जिनके अंतर्गत वे स्कीमें भी हैं, जो अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के संबंध में हैं, कार्यान्वित करना ;

(ख) समितियों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकेगी जो उन्हें प्रदत्त उत्तरदायित्वों को कार्यान्वित करने के लिए उन्हें समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों जिनके अंतर्गत वे उत्तरदायित्व भी हैं जो अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के संबंध में हैं ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन कृत्य सौंपे जाने पर, सरकार नगरपालिका को ऐसी निधि और कार्मिक आबंटित करेगी जो नगरपालिका को इस प्रकार सौंपे गए कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक हों ।

37. नगरपालिका के अनिवार्य कृत्य-प्रत्येक नगरपालिका का यह कर्तव्य होगा कि वह अपनी अधिकारिता के अधीन नगरपालिका के भीतर निम्नलिखित विषयों के लिए युक्तियुक्त उपबन्ध करे, अर्थात् :-

                (क) सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रकाश करना ;

                (ख) सार्वजनिक सड़कों और स्थानों पर जल छिड़कना ;

                (ग) सार्वजनिक सड़कों, स्थानों तथा सीवरों और ऐसे सभी स्थानों की, जो प्राइवेट संपत्ति नहीं हैं और जो जनता के अधिभोग के लिए खुले हैं, चाहे ऐसे स्थान नगरपालिका में निहित हैं या नहीं, सफाई करना, हानिकर घासपात को हटाना और सभी लोक न्यूसेंसों का उपशमन करना ;

                (घ) गंदगी, कूड़े, मल, गंध या किसी अन्य हानिकर या घृणोत्पादक पदार्थ को शौच स्थानों, शौचालयों, मूत्रालयों, मलकुंडों या ऐसे पदार्थों के लिए अन्य सामान्य पात्रों से, जो किसी भवन या भवनों में हों या उनसे संबंधित हों, हटाना ;

                (ङ) आग बुझाना और आग लगने की दशा में जीवन और संपत्ति की रक्षा करना ;

                (च) घृणोत्पादक या खतरनाक व्यापारों या व्यवसायों को विनियमित करना ;

                (छ) सार्वजनिक सड़कों या सार्वजनिक स्थानों और ऐसे स्थानों में से, जो प्राइवेट संपत्ति नहीं है और जनता के अधिभोग के लिए खुले हैं, चाहे ऐसे स्थान नगरपालिका में निहित हैं या राज्य सरकार के हैं, बाधाओं और निकले हुए भागों को हटाना ;

                (ज) खतरनाक भवनों और स्थानों की रक्षा करना या उनको हटाना और अस्वास्थ्यकर परिक्षेत्रों का उद्धार करना ;

                (झ) शवों और मृत जीव-जन्तुओं के शवों के व्ययन के लिए स्थानों का अर्जन, अनुरक्षण, परिवर्तन और विनियमन करना ;

                (ञ) सार्वजनिक सड़कों, पुलियाओं, नगरपालिका सीमा चिह्नों, बाजारों, वधशालाओं, नालियों, सीवरों, जल निकास संकर्मों, मलवहन संकर्मों, स्नानागारों, धुलाई स्थानों, पेय फुहारों, टंकियों, कूपों, बांधों और ऐसे ही स्थानों का सन्निर्माण, संपरिवर्तन और अनुरक्षण करना ;

                (ट) सार्वजनिक शौचालयों, शौच स्थानों और मूत्रालयों का सन्निर्माण करना ;

                (ठ) निवासियों के स्वास्थ्य को वर्तमान जल प्रदाय की अपर्याप्तता या अस्वास्थ्यप्रदता से बचाने के लिए उचित और पर्याप्त जल प्रदाय या अतिरिक्त जल प्रदाय अभिप्राप्त करना ;

                (ड) पथों का नामकरण और मकानों का संख्यांकन ;

                (ढ) जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण ;

                (ण) पशु लसीका के प्रदाय के लिए नगरपालिका के अंतर्गत बछड़ों, गायों या भैंसों के लिए अपेक्षित युक्तियुक्त वास सुविधा ;

                (त) नगरपालिका के प्रशासन के संबंध में ऐसी वार्षिक रिपोर्ट मुद्रित करना जो आवश्यक हो या जिले राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा नगरपालिका से मुद्रित कराने की अपेक्षा करे ;

                (थ) मल और कूड़े से कंपोस्ट खाद तैयार कराने के लिए व्यवस्था करना ; और

                (द) कांजी हाउस का स्थापन और अनुरक्षण ।

38. नगरपालिकाओं के विशेष कर्तव्य-ऐसे युक्तियुक्त उपबन्धों के अधीन रहते हुए, जो धारा 37 के अधीन किए जाएं, प्रत्येक नगरपालिका निम्नलिखित विशेष विषयों के लिए युक्तियुक्त उपबन्ध करेगी, अर्थात् :-

(क) भयंकर रोगों की दशा में रोगियों के लिए विशेष चिकित्सीय सहायता और वास-सुविधा की व्यवस्था करना और ऐसे उपाय करना जो ऐसे रोग के फैलने को रोकने या दबाने और उसके फिर से होने को रोकने के लिए आवश्यक हों, और

(ख) निराश्रित व्यक्तियों को या उनके लिए नगरपालिका सीमा के अंतर्गत दुर्भिक्ष या अन्नाभाव की दशा में राहत देना और राहत कार्य स्थापित करना तथा उसका अनुरक्षण करना ;

39. नगरपालिका के वैवेकिक कृत्य-नगरपालिका अपने विवेकानुसार नगरपालिका संपत्ति और निधि में से निम्नलिखित के लिए पूर्णतः या भागतः उपबन्ध कर सकेगी, -

(क) किन्हीं क्षेत्रों में, भले ही उनमें पहले से ही निर्माण कार्य किया गया हो या नहीं, नई सार्वजनिक सड़कें बनाना और इस प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन करना, जिसे अंतर्गत ऐसी सड़कों से लगे हुए भवनों और उसके अहातों के सन्निर्माण के लिए अर्जित भूमि भी है ;

(ख) सार्वजनिक पार्कों, उद्यानों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों, वाचनालयों, हालों, कार्यालयों, धर्मशालाओं, विश्रामगृहों, शिविर भूमियों और अन्य सार्वजनिक भवनों और स्थानों का निर्माण, स्थापित करना, अनुरक्षण करना या उनके अनुरक्षण के लिए अभिदाय करना ;

(ग) निर्धन व्यक्तियों के आवास के लिए जहां आवश्यक हो, उपयुक्त स्वच्छ गृहों का निर्माण और अनुरक्षण करना तथा ऐसे गृहों के निर्माण या उनके संबंध में आवश्यक सुधार करने के लिए, उधार देना ;

(घ) नगरपालिका द्वारा नियोजित किसी वर्ग के सेवकों के लिए आवास की व्यवस्था करना या इस निमित्त बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए गृहों के निर्माण के लिए ऐसे सेवकों को ऋण प्रदान करना ;

(ङ) सड़क के किनारे रोपण करना और वृक्षों का अनुरक्षण करना ;

(च) धारा 167 में वर्णित घृणोत्पादक व्यापार करने के लिए उपयुक्त स्थान सुनिश्चित करना या सुनिश्चित करने में सहायता करना ;

(छ) प्राइवेट परिसरों पर या उनके उपयोग के लिए नगरपालिका के नियंत्रण के अधीन सीवरों में मल प्राप्त करने और संचालित करने के लिए पात्रों, फिटिंग पाइपों और अन्य साधनों, जो कोई हों का प्रदाय करना, निर्माण करना और अनुरक्षण करना ;

(ज) लोक स्वास्थ्य और शिशु कल्याण ;

(झ) नगरपालिका के भीतर या बाहर मानव पीड़ाओं की राहत के लिए एकत्रित की गई किसी लोक निधि में अभिदाय करना ;

(ञ) साधारण अधिवेशन में पारित और पार्षदों की कुल सदस्य संख्या के आधे द्वारा समर्थित संकल्प द्वारा नगरपालिका के भीतर कोई सार्वजनिक स्वागत समारोह, आमोद-प्रमोद या प्रदर्शनी लगाना ;

(ट) जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं के विक्रय के लिए दुकानों या स्टालों का संगठन या अनुरक्षण ;

(ठ) मेले और प्रदर्शनियां कराना ;

(ड) दुग्ध प्रदाय ;

(ढ) अपने कर्मचारियों के लिए श्रम-कल्याण केन्द्र स्थापित करना और ऐसे कर्मचारियों के किसी संगम, संघ या क्लब के कार्यकलापों में ऋण देकर उनकी साधारण उन्नति के लिए सहायता देना ;

(ण) एम्बुलेंस सेवा का अनुरक्षण ;

(त) सार्वजनिक अस्पतालों और औषधालयों की स्थापना और अनुरक्षण तथा लोक चिकित्सा सेवा की व्यवस्था करना ;

(थ) एन्टीफैब्रिक उपचार के लिए सुविधाओं की व्यवस्था करना और नगरपालिका की सीमाओं के भीतर या बाहर एन्टीफैब्रिक उपचार कराने वाले दरिद्र व्यक्तियों के व्ययों की पूर्ति करना ;

(द) निराश्रित, अनाथों और विकलांगों को घर प्रदान करना और उनका अनुरक्षण करना और मातृत्व केन्द्र तथा शिशु-कल्याण क्लीनिकों का अनुरक्षण करना ;

(ध) उद्धार गृहों को स्थापित करना ;

(न) कोई अन्य विषय, जिससे नगरपालिका के निवासियों की शिक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा अथवा सुविधा में वृद्धि होने की या आर्थिक दशाओं के उन्नत होने की संभावना है, या जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हैं ।

40. नगरपालिका द्वारा लोक संस्था के प्रबन्ध का उसमें निहित होना-प्रत्येक लोक संस्था का प्रबंध, नियंत्रण और प्रशासन, जो अनन्य रूप से नगरपालिका संपत्ति और निधि में से अनुरक्षित है उस नगरपालिका में निहित होगा जिसके द्वारा उसका इस प्रकार अनुरक्षण किया गया है । 

अध्याय 5

स्थापन

41. कार्यपालक अधिकारियों की नियुक्ति-(1) यथास्थिति, प्रत्येक नगर पंचायत या परिषद् का एक कार्यपालक अधिकारी होगा जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के सचिव के रूप में भी कार्य करेगा और, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के अन्य सभी अधिकारी तथा कर्मचारी उसके अधीनस्थ होंगे ।

                (2) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, राज्य सरकार की सहमति से एक कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करेगी और राज्य सरकार, यदि, यथास्थिति, कोई विशिष्ट नगर पंचायत या परिषद् ऐसी नियुक्ति नहीं करती है, तो, यथास्थिति, उस नगर पंचायत या परिषद् की बाबत ऐसे अधिकारी के रूप में किसी व्यक्ति को नियुक्त करेगी ।

                (3) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, कार्यपालक अधिकारी के अतिरिक्त, राज्य सरकार की सहमति से कार्यपालक अधिकारी की सहायता के लिए अन्य अधिकारियों को भी नियुक्त कर सकेगी ।

42. कार्यपालक अधिकारी के मुख्य कृत्य-कार्यपालक अधिकारी :-

(क) अध्यक्ष के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के वित्तीय और कार्यपालक प्रशासन पर निगरानी रखेगा और इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों और उपविधियों के द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित या उसको प्रदत्त अथवा प्रत्यायोजित सभी कर्तव्यों का पालन और सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा ; और

(ख) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा किए गए विनिश्चय को कार्यान्वित करेगा तथा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् यदि ऐसा निदेश करती है तो उसके संबंध में की गई प्रगति की बाबत कालिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।

43. स्वास्थ्य अधिकारी, राजस्व अधिकारी और इंजीनियर की नियुक्ति-(1) यथास्थिति, प्रत्येक नगर पंचायत या परिषद् में एक राजस्व अधिकारी और एक इंजीनियर, एक स्वास्थ्य अधिकारी, उसके कृत्यों और कर्तव्यों के दक्ष निर्वहन के लिए होंगे ।

(2) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, राज्य सरकार की सहमति से एक स्वास्थ्य अधिकारी, एक राजस्व अधिकारी और इंजीनियर की नियुक्ति करेगी ।

44. नगर पंचायत और परिषद् की अपने कर्मचारियों की संख्या अवधारित करने की शक्ति-(1) धारा 41 और धारा 43 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय और राज्य सरकार के अनुमोदन के अधीन रहते हुए, नगर पंचायत या परिषद्, विशेष संकल्प द्वारा अपने कृत्यों और कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए उसके द्वारा अपेक्षित कर्मचारियों का प्रवर्ग और उनकी संख्या को अवधारित कर सकेगी ।

(2) धारा 71 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, नगर पंचायत या परिषद् के स्थापन पर उपगत व्यय का संदाय नगरपालिका निधि में से किया जाएगा ।

45. नगर पंचायत और परिषद् की अपने अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त करने की शक्ति-धारा 41 और धारा 43 में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, नगर पंचायत या परिषद् को अपने अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त करने की शक्ति होगी :

परन्तु अध्यक्ष श्रेणी 3 और श्रेणी 4 में ऐसे अतकनीकी पदों को ऐसी रीति से, जो इस निमित्त उपविधियों में अधिकथित की जाए, भर सकेगा ।

46. नगर पंचायत और परिषद् के कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई, उनकी सेवा की शर्तें आदि-(1) नगर पंचायत या परिषद् के ऐसे कर्मचारी को, जो उसके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई में अध्यक्ष के आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध उस पर उसकी तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर नगर पंचायत या परिषद् को अपील करने का अधिकार होगा ।

(2) कोई कर्मचारी, जो नगर पंचायत या परिषद् के किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध ऐसे आदेश की तामील की तारीख से साठ दिन के भीतर राज्य सरकार को अपील कर सकेगा :

परन्तु हटाए जाने या पदच्युति के किसी आदेश से भिन्न किसी आदेश के विरुद्ध अपील राज्य सरकार को नहीं होगी ।

(3) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नगर पंचायत या परिषद् के कर्मचारियों की बाबत अनुशासनिक कार्रवाई, सेवा की शर्तें और अर्हताएं वही होंगी जो समय-समय पर राज्य सरकार के कर्मचारियों को लागू हैं ।

47. उपदान और पेंशन-राज्य सरकार के कर्मचारियों को लागू उपदान और पेंशन से संबंधित नियम, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के कर्मचारियों को लागू होंगे और उनका संदाय, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की निधि में से किया   जाएगा ।

48. नियम बनाने की शक्ति-राज्य सरकार नगर पंचायत या परिषद् के कार्यपालक अधिकारी, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन, सेवा की शर्तों, कर्तव्यों और कृत्यों तथा उनसे संबंधित अन्य सुसंगत विषयों की बाबत नियम बना सकेगी:

परन्तु कार्यपालक अधिकारी के विरुद्ध कोई अनुशासनिक कार्रवाई राज्य सरकार के अनुमोदन से ही की जाएगी ।

अध्याय 6

कारबार का संचालन

49. नगर पंचायत या परिषद् का अधिवेशन-(1) नगर पंचायत या परिषद् का उसके कारबार के संव्यवहार के लिए प्रत्येक मास में कम से कम एक अधिवेशन होगा जो उस तारीख को जो नगर पंचायत या परिषद् द्वारा इस प्रयोजन के लिए बुलाए गए विशेष अधिवेशन में नियत की जाए, नगरपालिका कार्यालय में, यदि कोई हों, या अन्य सुविधाजनक स्थान पर होगा, जिसकी सम्यक् रूप से सूचना दे दी गई हो ।

                (2) यदि किसी मासिक अधिवेशन में नगर पंचायत या परिषद् के समक्ष रखे जाने के लिए कोई कारबार न हो तो अध्यक्ष अधिवेशन बुलाने की बजाय प्रत्येक पार्षद् को उस तारीख से, जो मासिक अधिवेशन के लिए नियत की गई हो, तीन दिन पूर्व उस तथ्य की सूचना देगा ।

                (3) अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष पार्षदों की कुल सदस्य संख्या के आधे से अन्यून की लिखित अध्यपेक्षा पर विशेष अधिवेशन बुला सकेगा ।

                (4) यदि, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष कोई ऐसी अध्यपेक्षा किए जाने के पश्चात् पन्द्रह दिन के भीतर विशेष अधिवेशन बुलाने में असफल रहता है तो उन पार्षदों द्वारा, जिन्होंने अध्यपेक्षा की थी, बुलाया जा सकेगा ।

50. अधिवेशन का अध्यक्ष-यदि किसी अधिवेशन में न तो अध्यक्ष और न ही उपाध्यक्ष उपस्थित हैं तो उपस्थित पार्षद् अधिवेशन की अध्यक्षता करने के लिए अपने में से एक को निर्वाचित करेंगे और ऐसा पार्षद् अधिवेशन में पीठासीन होते हुए नगर पंचायत या परिषद् के अध्यक्ष के सभी कर्तव्यों का पालन और सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा :

                परन्तु अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद के निर्वाचन के लिए कोई अभ्यर्थी ऐसे निर्वाचन में पीठासीन नहीं होगा ।

51. प्रश्नों का विनिश्चय करने की रीति-इस अधिनियम में या उसके अधीन जैसा अन्यथा स्पष्ट रूप से उपबंधित है उसके सिवाय, नगर पंचायत या परिषद् या उसकी समितियों में से किसी समिति के किसी अधिवेशन के समक्ष लाए गए सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले पार्षदों के बहुमत से किया जाएगा और किसी प्रश्न पर मतों के बराबर होने की दशा में पीठासीन व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा :

परन्तु-

                (क) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के ; अथवा

                (ख) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी पार्षद् के,

निर्वाचन में मतों के बराबर होने की दशा में पीठासीन व्यक्ति अपने निर्णायक मत का प्रयोग नहीं करेगा और परिणाम का विनिश्चय लाटरी द्वारा किया जाएगा ।

52. गणपूर्ति के अभाव में अधिवेशन का स्थगन-(1) किसी अधिवेशन में कारबार का संव्यवहार तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि नगर पंचायत या परिषद् के पार्षदों की कुल संख्या के एक-तिहाई से गणपूर्ति न हो :

परन्तु उन दशाओं में जहां नगर पंचायत या परिषद् के पार्षदों की कुल संख्या तीन द्वारा विभक्त करने योग्य न हो, वहां कुल संख्या ऐसी निम्नतर संख्या द्वारा बढ़ा दी जाएगी जिससे कि कुल संख्या को तीन द्वारा विभक्त किया जा सके ।

(2) यदि किसी अधिवेशन में उपस्थित गणपूर्ति न हो तो अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष किसी भावी दिन के इतने बजे तक के लिए, जो वह युक्तियुक्त रूप से नियत करे, अधिवेशन को स्थगित करेगा । ऐसे स्थगन की सूचना नगरपालिका कार्यालय के सूचना पट्ट पर लगा दी जाएगी और वह कारबार जो मूल अधिवेशन के समक्ष, यदि वहां गणपूर्ति हुई होती तो लाया गया होता, स्थगित अधिवेशन के समक्ष लाया जाएगा और ऐसे अधिवेशन में अथवा उसके किन्हीं पश्चात्वर्ती स्थगित अधिवेशनों में, चाहे गणपूर्ति हो या नहीं, निपटाया जाएगा ।

(3) नगरपालिका कार्यालय के सूचना पट्ट पर उस दिन, जिसको अधिवेशन स्थगित किया गया है, प्रदर्शित स्थगन की सूचना पश्चात्वर्ती अधिवेशन के लिए पर्याप्त सूचना होगी ।

53. कार्यवाहियों का कार्यवृत्त-(1) नगर पंचायत या परिषद् या उसकी किसी समिति के प्रत्येक अधिवेशन की कार्यवाहियों का कार्यवृत्त नगर पंचायत या परिषद् या उसकी प्रत्येक समिति के लिए पृथक् रूप से इस प्रयोजन के लिए रखी जाने वाली पुस्तक में अभिलिखित किया जाएगा और उस पर उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे, जो उक्त अधिवेशन में पीठासीन था ।

(2) नगर पंचायत या परिषद् के अधिवेशनों का कार्यवृत्त सभी युक्तियुक्त समयों पर और बिना प्रभार के जनता के किसी भी सदस्य द्वारा निरीक्षण किए जाने के लिए खुला रहेगा ।

(3) नगर पंचायत या परिषद् के सभी अधिवेशनों की कार्यवाहियों के कार्यवृत्त तत्काल कार्यपालक अधिकारी द्वारा उपायुक्त, निदेशक और राज्य सरकार को भेजे जाएंगे ।

54. संकल्प का उपांतरण और रद्दकरण-नगर पंचायत या परिषद् का कोई भी संकल्प पार्षदों की कुल संख्या के दो तिहाई से अन्यून द्वारा समर्थित और उस अधिवेशन में जिसकी सूचना ऐसे अधिवेशन में प्रस्तावित संकल्प को उपांतरित या रद्द करने का पूर्णतः उल्लेख करते हुए दी जाएगी, पारित संकल्प तथा ऐसे संकल्प के उपांतरण या रद्दकरण के प्रतिपादन के प्रस्ताव द्वारा ही उपांतरित या रद्द किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

55. सरकारी अधिकारियों का नगर पंचायत या परिषद् के अधिवेशनों में उपस्थित होने, उसे संबोधित करने और उसमें भाग लेने का अधिकार-उपायुक्त, निदेशक और ऐसे अन्य अधिकारी, जिन्हें राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, अपनी अधिकारिता के भीतर नगर पंचायत या परिषद् के किसी अधिवेशन में उपस्थित होने, उनके विभाग के कार्य पर प्रभाव डालने वाले किसी विषय पर उसे संबोधित करने और उसके अधिवेशनों में भाग लेने के हकदार होंगे, किन्तु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

56. समितियों की नियुक्ति-(1) नगर पंचायत या परिषद्, किसी अधिवेशन में समय-समय पर सम्पूर्ण नगरपालिका या उसके किसी भाग के भीतर इस अधिनियम के अधीन उसको सौंपे गए किसी विनिर्दिष्ट कर्तव्य के निर्वहन में उसकी सहायता करने के लिए स्थायी समिति" कही जाने वाली समितियों को नियुक्त कर सकेगी और ऐसी समिति को अपनी सभी या किसी शक्ति को, जो ऐसी सहायता देने के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो, प्रत्यायोजित कर सकेगी या इस प्रकार प्रत्यायोजित सभी या किसी शक्ति को वापस ले सकेगी ।

(2) प्रत्येक समिति पार्षदों से और जब आवश्यक हो, विशेष अर्हताओं वाले ऐसे निवासियों से, जिन्हें नगर पंचायत या परिषद् किसी अधिवेशन में नियुक्त करने की वांछा करती है, मिलकर बनेगी । ऐसी दशा में पार्षदों की संख्या समिति के सदस्यों की कुल संख्या के दो-तिहाई से अन्यून नहीं होगी :

परन्तु कोई पार्षद् जो एक समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है, उस रूप में एक ही समय पर दूसरी समिति में नियुक्त नहीं किया जाएगा ।

(3) ऐसी समितियों के सदस्य ऐसी शक्तियों के संबंध में, जो उन्हें प्रत्यायोजित की जाएं, नगर पंचायत या परिषद् के पार्षदों पर इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित सभी बाध्यताओं के लिए दायी होंगे ।

(4) किसी ऐसी समिति की सभी कार्यवाहियां किसी अधिवेशन में नगर पंचायत या परिषद् द्वारा पुष्टि किए जाने के अधीन होंगी ।

(5) समिति के सदस्यों को हटाए जाने या उनके त्यागपत्र से संबंधित सभी प्रश्न नगर पंचायत या परिषद् द्वारा किसी अधिवेशन में तय किए जाएंगे ।

57.  समिति का अध्यक्ष-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् का अध्यक्ष यदि वह किसी समिति का सदस्य है तो उसका पदेन, अध्यक्ष होगा ।

(2) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् का उपाध्यक्ष, यदि वह किसी ऐसी समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है जिसका अध्यक्ष सदस्य नहीं है तो उसका पदेन अध्यक्ष होगा ।

(3) जब, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् का न तो अध्यक्ष और न उपाध्यक्ष किसी समिति का सदस्य है तो ऐसी समिति का अध्यक्ष, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ।

58. निधियों और सम्पत्ति की हानि, अपव्यय या दुरुपयोजन के लिए दायित्व-नगर पंचायत या परिषद् का प्रत्येक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षद्, अधिकारी या कर्मचारी, जिसके अंतर्गत ऐसा सरकारी सेवक भी है जिसकी सेवाएं नगर पंचायत या परिषद् को उधार दी गई हैं, नगर पंचायत या परिषद् के स्वामित्वाधीन या उसमें निहित किसी धन या अन्य संपत्ति की हानि, अपव्यय या दुरुपयोजन के लिए दायी होगा, यदि ऐसी हानि, अपव्यय या दुरुपयोजन उसकी ओर से किसी अवैध कार्य, लोप, उपेक्षा या अवचार का सीधा परिणाम है, और प्रतिकर के लिए कोई वाद सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा उसके विरुद्ध संस्थित किया जा सकेगा ।

59. संविदा में अंश या हित रखने वाले पार्षदों की निरर्हताएं-नगर पंचायत या परिषद् का कोई भी पार्षद् राज्य सरकार की लिखित अनुज्ञा के बिना, प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से भूमि की किसी ऐसी संविदा, पट्टे, विक्रय या क्रय अथवा उसके लिए या किसी भी प्रकार के किसी करार में जिसमें नगर पंचायत या परिषद् पक्षकार हैं, कोई अंश या हित नहीं रखेगा अथवा उसके अधीन कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा और यदि कोई पार्षद् ऐसा अंश या हित रखेगा अथवा ऐसा पद धारण करेगा तो वह पार्षद् के रूप में पद पर बने रहने के लिए निरर्हित हो जाएगा :

परन्तु कोई पार्षद् :-

(क) (i) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् और किसी निगमित अथवा रजिस्ट्रीकृत कम्पनी या किसी ऐसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी, जिसका ऐसा पार्षद् सदस्य या शेयरधारक है, के बीच हुई किसी संविदा ; या

(ii) धन के उधार के लिए या केवल धन के संदाय के लिए किसी प्रतिभूति के लिए किसी करार ; या

(iii) किसी समाचारपत्र, जिसमें नगरपालिका के कार्यकलापों से संबंधित कोई विज्ञापन अंतःस्थापित किया गया है,

                में कोई अंश या हित रखने के कारण ; या

(ख) विधि या चिकित्सा व्यवसायी के रूप में, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की ओर से व्यावसायिक रूप में लगे रहने और अपनी व्यावसायिक हैसियत में की गई सेवाओं के लिए फीस प्राप्त करने के कारण,

इस प्रकार निरर्हित या दायी नहीं होगा ।

60. उस दशा में शास्ति, जिसमें पार्षद्, कार्यपालक अधिकारी, आदि नगर पंचायत या परिषद् के साथ संविदा, आदि में हित रखते हैं-किसी नगर पंचायत या परिषद् में, -

(क) धारा 59 के परन्तुक के अधीन रहते हुए कोई पार्षद् जो, प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से उस नगर पंचायत या परिषद् के साथ, उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से, जिसका वह पार्षद् है, किसी संविदा या नियोजन में कोई अंश या हित अर्जित करता है ;

(ख) कोई कार्यपालक अधिकारी या कर्मचारी, जो प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से किसी नगर पंचायत या परिषद् के साथ, उसके अधीन, उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी संविदा में कोई अंश या हित अर्जित करता है वहां तक के सिवाय, जहां वह कार्यपालक अधिकारी या किसी कर्मचारी के रूप में उसके स्वयं के नियोजन से संबंधित है,

जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

61. मत देने के लिए निरर्हता-नगर पंचायत या परिषद् का कोई पार्षद् या किसी समिति का कोई सदस्य नगर पंचायत या परिषद् या समिति के किसी अधिवेशन में किसी प्रश्न के विचार-विमर्श में मत नहीं देगा या भाग नहीं लेगा यदि प्रश्न ऐसा है जिसमें उसका कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष धन संबंधी हित है ।

अध्याय 7

नगरपालिका संपत्ति, वित्त और संविदाएं

62. नगरपालिका संपत्ति और उसका निहित होना-(1) नगरपालिका के भीतर सभी संपत्ति, जो निजी संपत्ति या सरकार अथवा अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित संपत्ति से भिन्न है, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित हो जाएगी और किसी भी प्रकृति की और किसी प्रकार की सभी अन्य संपत्ति, जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित हो गई है, उसके निदेशन, प्रबंध और नियंत्रण के अधीन होगी जब तक कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा अन्यथा निदेशन दे, अर्थात् :-

(क) सभी सार्वजनिक सड़कें, जिनके अन्तर्गत मृदा, परिपथ, पत्थर और उसकी अन्य सामग्री भी है और सभी नालियां, पुल, वृक्ष, परिनिर्माण, सामग्री उपकरण और ऐसी सड़कों के लिए उपलब्ध कराई गई अन्य वस्तुएं ;

(ख) सभी लोक जलस्रोत, जल सरणियां, जलमार्ग, झरने, टैंक, जलाशय, कुण्ड, कूप, जल प्रणालिकाएं, पानी की मोरियां, सुरंग, पाइप, पंप और अन्य जल संकर्म, चाहे नगर पंचायत या परिषद् के खर्च पर या अन्यथा बनाए गए, बिछाए गए या सृजित किए गए हों और सभी पुल, इमारत, इंजन, संकर्म, सामग्री और उससे संबंधित या उससे अनुलग्न वस्तुएं और कोई पार्श्वस्थ भूमि जो निजी संपत्ति नहीं है, और किसी सार्वजनिक टैंक से अनुलग्न नहीं है :

परन्तु उससे संबंधित या उससे अनुलग्न जल पाइप और जल संकर्म जो नगर पंचायत या परिषद् की अनुमति से किसी पथ पर किसी मिल, कारखाने, कार्यशाला के स्वामियों द्वारा बिछाए गए या स्थापित किए गए हैं अथवा उसी प्रकार के उनके कर्मचारियों के उपयोग के लिए प्रथमतः बनाए गए हैं, जनता द्वारा उनका उपयोग किए जाने के कारण सार्वजनिक जल संकर्म नहीं समझे जाएंगे ;

(ग) सभी सार्वजनिक सीवर और निकास नालियां और सभी संकर्म तथा उससे संलग्न सामग्री और वस्तुएं और अन्य सफाई संकर्म ;

(घ) सभी मल-मूत्र, कूड़ा और घृणोत्पादक सामग्री जो नगर पंचायत या परिषद् द्वारा सड़कों, शौचालयों, गंदी नालियों, मलकुंडों और अन्य स्थानों से एकत्रित की गई है ;

(ङ) सभी सार्वजनिक लैंप, लैंप-स्तम्भ और उससे संबंधित या उससे अनुलग्न उपकरण और सभी सार्वजनिक द्वार, बाजार, वधशालाएं और प्रत्येक वर्णन की सार्वजनिक इमारतें, जिनका नगरपालिका निधि से निर्माण किया गया है या उससे अनुरक्षण किया जाता है ; और

(च) सभी भूमि या अन्य संपत्ति, जो सरकार द्वारा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को अंतरित की गई है अथवा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा स्थानीय लोक प्रयोजनों के लिए दान, क्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित की गई है ।

                (2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि कोई संपत्ति, जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित हो गई है, इस प्रकार निहित नहीं रहेगी और राज्य सरकार ऐसा आदेश पारित कर सकेगी जो वह ऐसी संपत्ति के व्ययन और प्रबंध की बाबत ठीक समझे ।

                (3) राज्य सरकार स्वयं द्वारा या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को अंतरित की गई किसी स्थावर संपत्ति को, परिषद् द्वारा ऐसे अंतरण के लिए संदत्त की गई रकम के संदाय पर और, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा उस पर बाद में बनाई गई या निष्पादित किसी इमारत या संकर्म के ग्रहण की तारीख को बाजार मूल्य के संदाय पर ग्रहण कर सकेगी :

                परन्तु अंतरण के निबंधनों के उल्लघंन में निर्मित या सृजित इमारतों या संकर्मों के लिए प्रतिकर का संदाय किए जाने की आवश्यकता नहीं है ।

63. नगरपालिका सम्पत्ति का अंतरण-धारा 6 या धारा 13 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, कोई भी नगर पंचायत या परिषद् किसी स्थावर संपत्ति का किसी ऐसे संकल्प के अनुसरण में के सिवाय, जो उसके अधिवेशन में उसके सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया गया हो तथा उस दशा के सिवाय जिसमें वह स्थानीय लोक प्रयोजनों के लिए अपेक्षित नहीं है, अंतरण नहीं करेगी :

परन्तु किसी ऐसी संपत्ति की दशा में जिसका उसे राज्य सरकार द्वारा अंतरण किया गया है, इस धारा के अधीन अंतरण राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के अधीन रहते हुए होगा :

परंतु यह और कि इस धारा की कोई बात स्थावर संपत्ति के ऐसे पट्टों को लागू नहीं होगी जो कुल मिलाकर दो वर्ष से अधिक की अवधि के लिए नहीं है ।

64. संविदाओं का निष्पादन-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई संविदा कर सकेगी ।

(2) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा अथवा उसकी ओर से दस हजार रुपए से अधिक किसी राशि के संबंध में की गई प्रत्येक संविदा को, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा किसी अधिवेशन में मंजूरी दी जाएगी और वह लिखित रूप में होगी और उस पर कम से कम दो पार्षदों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिनमें से एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष और दोनों की अनुपस्थिति में कार्यपालक अधिकारी होगा । प्रत्येक ऐसी संविदा को, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की सामान्य मुद्रा से मुद्रांकित किया   जाएगा ।

(3) उपधारा (2) के उल्लंघन में की गई कोई संविदा, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् पर आबद्धकर नहीं होगी ।

65. प्राइवेट सड़कों आदि का नगर पंचायत या परिषद् को अन्तरण-(1) नगर पंचायत या परिषद् किसी अधिवेशन में किसी व्यक्ति से जिसमें कोई सड़क, पुल, तालाब, घाट, कुआं, जलसरणी या नाली में की कोई संपत्ति निहित है, के साथ उनमें की संपत्ति या उसका नियन्त्रण ग्रहण करने के लिए सहमत हो सकेगी और ऐसे करार के पश्चात् उस पर या उसके समीप लिखित सूचना लगाकर घोषित कर सकेगी कि ऐसी सड़क, पुल, तालाब, घाट, कुआं, जलसरणी या नाली, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को अन्तरित कर दी गई है ।

(2) अन्तरण के पूरा होने पर संपत्ति, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित हो जाएगी और उसके बाद से नगरपालिका निधि में से उसकी मरम्मत और अनुरक्षण अपेक्षित होगी ।

66. भूमि का अर्जन-जब किसी भूमि की, चाहे, वह नगरपालिका की सीमा के भीतर हो या बाहर, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यकता है तब राज्य सरकार नगर पंचायत या परिषद् के अनुरोध पर भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) के उपबंधों के अधीन उसके अर्जन के लिए अग्रसर हो सकेगी और उक्त अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर तथा भूमि के अर्जन में उपगत किन्हीं अन्य प्रभारों को, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा संदाय किए जाने पर भूमि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित हो जाएगी ।

67. नगरपालिका निधि का गठन और उसकी अभिरक्षा-(1) प्रत्येक नगर पंचायत के लिए और प्रत्येक परिषद् के लिए एक नगरपालिका निधि गठित की जाएगी जो नगरपालिका निधि" कहलाएगी और इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए तथा उसके उपबन्धों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा धारित की जाएगी ।

(2) नगरपालिका निधि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित होगी ।

68. नगरपालिका निधि में रकम का जमा किया जाना-(1) नगरपालिका निधि में निम्नलिखित राशियां जमा की जाएंगी :-

(क) नगर पंचायत या परिषद् द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन या किसी संविदा के अधीन प्राप्त सभी राशियां ;

(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ पर नगर पंचायत या परिषद् के खाते में जमा अतिशेष, यदि कोई हो ;

(ग) नगर पंचायत या परिषद् द्वारा या उसकी ओर से संपत्ति के व्ययन के सभी आगम ;

(घ) नगर पंचायत या परिषद् की किसी संपत्ति से प्रोद्भूत होने वाले सभी किराए ;

(ङ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उद्गृहीत किसी कर द्वारा जुटाया गया सभी धन ;

(च) इस अधिनियम के अधीन संदेय और उद्गृहीत सभी फीसें ;

(छ) नगर पंचायत या परिषद् द्वारा प्रतिकर के रूप में या इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अपराधों के प्रशमन के लिए प्राप्त किया गया सभी धन ;

(ज) राज्य सरकार या प्राइवेट व्यक्तियों से अनुदान, अभिदाय, दान, या निक्षेप के रूप में नगर पंचायत या परिषद् द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त सभी धन ; और

(झ) नगर पंचायत या परिषद् के किसी धन के किसी विनियोग से या उसके संबंध में किसी संव्यवहार से उद्भूत सभी ब्याज और लाभ ।

                (2) इस धारा या इस अधिनियम की किसी बात से, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् पर विधिक रूप से अधिरोपित या उनके द्वारा स्वीकार किए गए न्यास से उद्भूत होने वाली नगर पंचायत या परिषद् की बाध्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

69. नगर पंचायत या परिषद् की धन उधार लेने की शक्तियां-(1) कोई नगर पंचायत या परिषद् राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो प्रतिभूति ब्याज की दर और मूलधन तथा ब्याज के प्रति संदाय की बाबत विहित की जाएं या तो राज्य सरकार से या किसी वित्तीय संस्था से ऐसी कोई धनराशि जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन आवश्यक हैं या प्राप्त करने के लिए सशक्त हैं, उधार ले सकेगी ।

(2) उपधारा (1) या तद्धीन बनाए गए नियमों में अंतर्विष्ट कोई बात सामुदायिक विकास स्कीमों के प्रति और उनके क्रियान्वयन, उनकी उपलब्धि और उनको पूरा करने के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार के किसी विभाग, कार्यालय या प्राधिकारी द्वारा या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या किसी अन्य संस्था द्वारा नगर पंचायत या परिषद् को दिए गए अनुदान या ऋण या अग्रिम को लागू नहीं होगी और कोई नगर पंचायत या परिषद् ऐसे अनुदान या ऋण को स्वीकार कर सकेगी जो ऐसे निबंधनों द्वारा जिस पर और ऐसी शर्तों द्वारा जिनके अध्यधीन अनुदान दिया गया है या अग्रिम लिया गया है, विनियमित और शासित होगा ।

70. नगरपालिका जन संपत्ति और निधि का उपयोग-(1) इस अधिनियम के अधीन किसी नगर पंचायत में या किसी परिषद् में निहित सभी संपत्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उसके द्वारा प्राप्त सभी निधियां और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों के अधीन उद्भूत होने वाली सभी राशियां इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए नगरपालिका की सीमा के भीतर इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोजित की जाएंगी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, किसी नगर पंचायत या किसी परिषद् के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह :-

(क) नगरपालिका की सीमाओं के बाहर भूमि के अर्जन पर या नगरपालिका के निवासियों के लिए अपेक्षित जल की आपूर्ति अभिप्राप्त करने के प्रयोजनों के लिए संकर्मों के सन्निर्माण, अनुरक्षण या मरम्मत पर या वधशालाओं की स्थापना पर या विष्टा या मल या जीवजंतुओं के शवों के व्ययन के लिए स्थानों के लिए या जल निकास संकर्मों के लिए या जनता के आवागमन के लिए यांत्रिक रूप से चालित परिवहन प्रसुविधाओं का उपबंध करने के प्रयोजनों के लिए या नगरपालिका के निवासियों के फायदे के लिए दुग्ध उत्पादों के प्रदाय, वितरण और उपाप्ति के लिए डेरियों या फार्मों की स्थापना के प्रयोजनों के लिए या ऐसे किन्हीं अन्य प्रयोजनों के लिए जो नगरपालिका के निवासियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा के संवर्द्धन के लिए परिकलित हैं, व्यय उपगत करे ; या

(ख) अभिदायी नगरपालिका की सीमाओं के भीतर रहने वाले निवासियों के फायदे के लिए परिकलित जनता के स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधाओं को प्रभावित करने वाले रक्षोपायों के लिए किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या किसी लोक निधि में ऐसे उपगत व्यय के लिए कोई अभिदाय ले ; या

(ग) नगरपालिका सीमाओं के बाहर मान्य छात्रवृत्ति का सृजन करे ; या

(घ) नगरपालिका अग्नि-शमन और अन्य यांत्रिक साधित्रों का नगरपालिका सीमाओं से परे उपयोग करे ; या

(ङ) राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किसी अन्य प्रकार का अभिदाय करे जो नगर पंचायत या परिषद् द्वारा आवश्यक समझा जाए :

                परन्तु इस धारा में की या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में की कोई बात, किसी नगर पंचायत या परिषद् के लिए इसे अविधिमान्य बनाने वाली नहीं समझी जाएगी जब उसने यथापूर्वोक्तानुसार जल या विद्युत ऊर्जा के प्रदाय के लिए या जल निकास के लिए नगरपालिका सीमाओं के परे निम्नलिखित संकर्मों का सन्निर्माण किया हो :-

(क) किसी स्थान में भले ही वह उक्त नगरपालिका की सीमाओं के भीतर न हो, किसी व्यक्ति या भवन या भूमि के फायदे के लिए जल या विद्युत ऊर्जा की किसी मात्रा को, जो इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए उक्त नगरपालिका की सीमाओं के भीतर या जल निकास संकर्म प्रणाली के द्वारा दिए गए फायदों के लिए अपेक्षित न हो, उस संदाय की बाबत ऐसे निबंधनों और शर्तों पर प्रदाय करना या उसका विस्तार करना और ऐसे प्रदाय फायदों को जारी रखना जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् और ऐसे व्यक्तियों या ऐसे भवन या भूमि के अधिभोगी या स्वामी के बीच करार द्वारा तय किए जाएं ; या

(ख) ऐसे प्रदाय या ऐसे प्रदाय के विस्तार या ऐसे फायदों के विस्तार के प्रयोजन के लिए आवश्यक किसी संबंधन पाइप, या किसी विद्युत आपूर्ति लाइन  या अन्य संकर्म के सन्निर्माण, अनुरक्षण, मरम्मत या प्रभार के लिए यथापूर्वोक्त तय की गई शर्तों पर संदाय की बाबत कोई व्यय उपगत करना ।

71. बजट-(1) कोई नगर पंचायत या कोई परिषद् वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो मास पूर्व इस प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाए गए अधिवेशन में ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, एक बजट तैयार करेगी जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ आगामी वर्ष के दौरान अधिसंभाव्य प्राप्तियों और व्यय को दर्शाया जाएगा और ऐसे पुनरीक्षण के पश्चात् जो अपेक्षित प्रतीत हो बजट को पारित करेगी और ऐसा बजट राज्य सरकार से अनुमोदन अभिप्राप्त करने के लिए निदेशक को प्रस्तुत किया जाएगा :

                परन्तु यदि राज्य सरकार द्वारा बजट की प्राप्ति या ऐसी अन्य जानकारी की प्राप्ति की तारीख से, जो राज्य सरकार द्वारा मांगी गई हो, एक मास के भीतर अनुमोदन की सूचना नहीं दी जाती है तो यह मान लिया जाएगा कि बजट का अनुमोदन हो गया है ।

                (2) नगर पंचायत या परिषद् समय-समय पर, किसी उपांतरण के लिए उपबंध करने की दृष्टि से, जो वह अपने व्ययनाधीन रकम के विनियोग में करना उचित समझे, व्यय के किन्हीं प्राक्कलनों का पुनरीक्षण कर सकेगी और ऐसा पुनरीक्षित बजट उपधारा (1) में उपबन्धित रीति से पारित किया जाएगा ।

                (3) जब बजट पारित कर दिया गया हो तब नगर पंचायत या परिषद् बजट के किसी शीर्ष में उस शीर्ष के अधीन मंजूर की गई रकम से अधिक कोई व्यय, ऐसे आधिक्य के लिए उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति से बजट के पुनरीक्षण द्वारा उपबंध किए बिना उपगत नहीं करेगी ।

72. लेखा और संपरीक्षा-(1) प्रत्येक नगरपालिका प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे लेखे ऐसे प्ररूप में रखेगी जो विहित किए जाएं और ऐसे विवरण उपायुक्त, निदेशक और राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी और ऐसे लेखे उस रीति में, जो विहित की जाए, निदेशक, स्थानीय निधि संपरीक्षा और लेखा, मणिपुर सरकार द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे ।

                (2) नगरपालिका ऐसे निदेशों का पालन करेगी जो राज्य सरकार उसकी बाबत संपरीक्षा रिपोर्ट के निरीक्षण के पश्चात् देना ठीक समझे ।

                (3) नगरपालिका, नगरपालिका निधि में से ऐसी राशि का संदाय करेगी जो ऐसी संपरीक्षा के लिए प्रभार के रूप में राज्य सरकार द्वारा अवधारित की जाए ।

73. नगरपालिकाओं के लिए वित्त आयोग-(1) मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) की धारा 97 के अधीन गठित राज्य वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का भी पुनर्विलोकन करेगा और जो-

(क) (i) राज्य द्वारा उद्गृहणीय ऐसे करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों के शुद्ध आगमों के राज्य और नगरपालिकाओं के बीच जो इस अधिनियम के अधीन उनमें विभाजित किए जाएं, वितरण को और सभी स्तरों पर नगरपालिकाओं के बीच ऐसे आगमों के तत्संबंधी भाग के आबंटन को ;

(ii) ऐसे करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों के अवधारण को, जो नगरपालिकाओं को समनुदिष्ट की जा सकेंगी या उनके द्वारा विनियोजित की जा सकेंगी ;

(iii) राज्य की संचित निधि में से नगरपालिकाओं के लिए सहायता अनुदान को,

                शासित करने वाले सिद्धांतों के बारे में ;

                                (ख) नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक अध्युपाय के बारे में ;

                (ग) नगरपालिकाओं के सुदृढ़ वित्त के हित में राज्यपाल द्वारा वित्त आयोग को निर्दिष्ट किए गए किसी अन्य विषय के बारे में,

राज्यपाल को सिफारिश करेगा ।

                (2) राज्यपाल इस धारा के अधीन आयोग द्वारा की गई प्रत्येक सिफारिश को उस पर की गई कार्रवाई के स्पष्टीकारक ज्ञापन सहित राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।

अध्याय 8

नगरपालिका कराधान

74. नगरपालिकाओं की कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियां-(1) राज्य सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा-

(क) ऐसे कर, शुल्क, पथकर और फीस उद्गृहीत, संगृहीत और विनियोजित करने के लिए किसी नगरपालिका को, ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसे निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो उसके द्वारा विहित की जाए, प्राधिकृत कर सकेगी ।

(ख) राज्य सरकार द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत ऐसे कर, शुल्क, पथकर और फीसें किसी नगरपालिका को, ऐसे प्रयोजनों के लिए तथा ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं, समनुदिष्ट कर सकेगी ;

(ग) राज्य की संचित निधि में से नगरपालिकाओं के लिए ऐसे सहायता अनुदान देने के लिए उपबंध कर सकेगी ।

75. कर जो अधिरोपित किए जा सकेंगे-(1) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए और राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन से नगरपालिका समय-समय पर संपूर्ण नगरपालिका या उसके किसी भाग में निम्नलिखित कोई कर और पथकर अधिरोपित कर सकेगी, अर्थात् :-

(क) नगरपालिका के भीतर अवस्थित धृतियों पर कोई कर, जो भवन या भूमि या दोनों के स्वामी द्वारा संदेय उनके वार्षिक मूल्य पर निर्धारित होगा ;

(ख) मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के अंतर्गत आने वाले यानों से भिन्न सभी या किसी यान पर अथवा सवारी करने, हांकने, खींचने या लादने में प्रयुक्त पशुओं पर और जो नगरपालिका की सीमाओं के भीतर प्रयुक्त किए जाते हैं, चाहे वे वास्तव में उक्त सीमाओं के भीतर रखे जाते हों या बाहर, कोई कर ;

(ग) ऐसी सीमाओं के भीतर विक्रय, उपभोग या प्रयोग के लिए नगरपालिका की सीमाओं के भीतर लाए गए माल पर चुंगी ;

(घ) नगरपालिका द्वारा नगरपालिका की सीमाओं के भीतर शौचालयों, पाखानों, मूत्रालयों, मलकुंडों अथवा कंपाउंडों से मल या घृणोत्पादक पदार्थ के संग्रहण, हटाने और व्ययन के लिए स्वामियों या अधिभोगियों द्वारा संदेय कोई शौचालय कर ;

(ङ) कोई सफाई कर ;

(च) कोई प्रकाश कर, जहां प्रकाश की व्यवस्था नगरपालिका द्वारा की जाती है ;

(छ) कोई जल निकास कर, जहां जल निकास की कोई प्रणाली नगरपालिका द्वारा प्रारम्भ कर दी गई है ;

(ज) नगरपालिका की सीमाओं के भीतर अवस्थित स्थावर संपत्ति के अन्तरण के विलेख पर कोई कर ;

(झ) नगरपालिका की सीमाओं के भीतर अखबार में प्रकाशित वाणिज्येतर उपक्रम विज्ञापनों से भिन्न किए गए विज्ञापन पर कोई कर ;

(ञ) कोई जल कर, जहां जल का प्रदाय नगरपालिका द्वारा किया जाता है ;

(ट) उस व्यक्ति पर बाजार फीस जो किसी बाजार में या राज्य सरकार या किसी नगरपालिका के या उसके नियंत्रण के अधीन किसी स्थान पर विक्रय के लिए माल का प्रदर्शन कर रहा हो ;

(ठ) उन संपत्तियों पर, जिनके मूल्य में नगरपालिका द्वारा कार्यान्वित की गई नगर योजना स्कीम के परिणामस्वरूप अभिवृद्धि हो गई हो, कोई सुधार कर ; और

(ड) कोई अन्य कर, पथकर, रेट, प्रभार या फीस ।

                (2) कोई नगरपालिका समय-समय पर, राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किसी अनुज्ञप्ति के दिए जाने या नवीकरण के संबंध में जो इस अधिनियम के अधीन नगरपालिका द्वारा प्रदान की जाएगी और जिसकी बाबत उपधारा (1) के अधीन कोई फीस उद्ग्रहणीय नहीं है, कोई फीस प्रभारित कर सकेगी ।

                (3) ऐसी किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए जो संसद् द्वारा बनाई जाए, कोई कर या फीस, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1976 (1976 का मणिपुर अधिनियम संख्यांक 26) के अधीन विधिपूर्वक उद्ग्रहीत की जा रही थी, इस बात के होते हुए भी कि ऐसा कर या फीस उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट नहीं है, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा उद्ग्रहीत की जाती रहेगी ।

                (4) राज्य सरकार समय-समय पर किसी कर को अधिरोपित करने या पहले से ही अधिरोपित किसी कर की दर में उपांतरण करने के लिए नगरपालिका को निदेश दे सकेगी ।

                (5) निदेश की प्राप्ति से तीन मास के भीतर उपधारा (4) के अधीन विनिश्चय के अनुपालन के लिए नगरपालिका के व्यतिक्रम पर नगरपालिका से इस बात में कारण बताने की अपेक्षा की जा सकेगी कि, उक्त कर, यथास्थिति, अधिरोपित या उपांतरित क्यों न कर दिया जाए ।

76. सरकारी धृतियों पर कर-किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुए भी सरकारी धृतियों की बाबत धारा 75 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन प्रभारों के सिवाय सभी नगरपालिका कर, जिसमें सेवा प्रभार भी है, उस सरकारी विभाग द्वारा नगरपालिका को संदेय होंगे, जिसके नियंत्रण और प्रबन्ध में वे धृतियां हैं ।

77. धृतियों पर कर के संबंध में निर्बंधन-राज्य सरकार को राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम की धारा 75 के अधीन किसी कर के उद्ग्रहण से किसी प्रवर्ग के भवन या धृति को छूट देने की शक्ति होगी ।

78. करों का संग्रहण, उपविधियों, आदि के अधीन होगा-धारा 75 में उल्लिखित सभी करों का संग्रहण उपविधियों द्वारा उपबंधित रीति से किया जाएगा ।

79. नगर पंचायत या परिषद् धृतियों का मूल्यांकन अवधारित करेगी-जब धृतियों के वार्षिक मूल्य पर कोई कर अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया हो तब कर निर्धारक ऐसी जांच करने के पश्चात् जो आवश्यक हो, इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से नगरपालिका के भीतर सभी धृतियों के मूल्यांकन का अवधारण करेगा और उसको एक सूची में प्रविष्ट करेगा जो मूल्यांकन सूची कहलाएगी और जो विहित प्ररूप में होगी :

परन्तु साधारण मूल्यांकन से भिन्न मूल्यांकन नगरपालिका द्वारा ऐसे व्यक्ति के माध्यम से कराया जाएगा, जिसे इस निमित्त नगरपालिका द्वारा प्राधिकृत किया जाए ।

80. वार्षिक मूल्य सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित विवरणी-कर निर्धारक, मूल्यांकन सूची तैयार करने की दृष्टि से जब भी वह उचित समझे, सूचना द्वारा सभी धृतियों के स्वामियों या अधिभोगियों से पन्द्रह दिन के भीतर उनका किराया या वार्षिक मूल्य की विवरणी और ऐसे ब्यौरों में धृतियों का विवरण, जैसा नगरपालिका निदेश दे, उसे पेश करने की अपेक्षा कर सकेगा और कर निर्धारक सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी भी समय ऐसी किसी धृति में प्रवेश, उसका निरीक्षण कर सकेगा और उसका नाप ले सकेगा :

परन्तु किसी धृति में प्रवेश करने, उसका निरीक्षण करने और नाप लेने के अपने आशय की सूचना कम से कम अड़तालीस घण्टे पूर्व उसके स्वामी या अधिभोगी को दी जाएगी जब तक कि उसने ऐसी सूचना के अपने अधिकार का त्याग न कर दिया हो ।

81. विवरणी देने में व्यतिक्रम के लिए और कर निर्धारक को बाधा डालने के लिए शास्ति-(1) जो कोई उस दिन से जिसको उससे ऐसा करने की अपेक्षा की गई हो, पन्द्रह दिन की अवधि तक किसी ऐसी विवरणी को पेश करने में असफल रहता है या मना करता है या जानबूझकर झूठी या गलत विवरणी या विवरण पेश करता है वह ऐसे जुर्माने से जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा और ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से जो उस अवधि के लिए जिसमें वह सही और ठीक विवरणी पेश करने में लोप करता है, प्रत्येक दिन के लिए पचास रुपए से अनधिक हो, दंडनीय होगा ।

(2) जो कोई नगरपालिका द्वारा नियुक्त किए गए कर निर्धारक को ऐसी किसी धृत्ति में प्रवेश करने या उसका निरीक्षण करने या नाप लेने में बाधा डालता है, प्रतिबंधित करता है या निवारित करता है, ऐसे जुर्माने से जो दो हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा, दंडनीय होगा ।

82. धृति के वार्षिक मूल्य का अवधारण-वार्षिक मूल्य" से निम्नलिखित अभिप्रेत है-

(क) होटलों, महाविद्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों , कारखानों और ऐसे अन्य भवनों की दशा में, भवन परिनिर्माण की परिकलित वर्तमान लागत को जोड़कर तथा नियम द्वारा नियत दर से अवक्षयण को घटाकर अभिप्राप्त राशि का, उससे अनुलग्न भूमि के परिकलित मूल्य से अनुपात, जो पांच प्रतिशत से अधिक न हो, जिसे इस निमित्त बनाए गए नियम द्वारा नियत किया जाएगा ; और

(ख) खंड (क) के उपबंधों के अन्तर्गत न आने वाले किसी भवन या भूमि की दशा में, सकल वार्षिक किराया, जिसके लिए उक्त भवन, उसके फर्नीचर या मशीनरी या भूमि को छोड़कर, वास्तविक रूप से किराए पर दी जाती है, या जहां भवन या भूमि किराए पर नहीं दी जाती है या नगरपालिका की राय में उसे उसके उचित किराए मूल्य से कम पर किराए पर दिया जाता है, जिसकी वर्षानुवर्ष आधार पर किराए पर देने की युक्तियुक्त रूप से आशा की जाती है :

                परन्तु जहां आपवादिक परिस्थितियों के कारण, यदि पूर्वोक्त रीति से संगणना की जाती है, और किसी भवन का वार्षिक मूल्य, नगरपालिका की राय में अत्यधिक हो जाता है, वहां नगरपालिका उसका वार्षिक मूल्य किसी कम रकम पर, जो उसे उपयुक्त प्रतीत हो, नियत कर सकेगी :

                परन्तु यह और कि इस निमित्त बनाए गए नियम राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के अधीन होंगे ।

83. धृति पर कर की दर का अवधारण-भूमि तथा धृति पर कर प्रक्रिया की पद्धति और प्रणाली वह होगी जो इस निमित्त समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए ।

84. निर्धारण रजिस्टर का तैयार किया जाना-धारा 83 के अधीन उस प्रतिशतता का अवधारण हो जाने के पश्चात्, जिससे कर उद्ग्रहीत किया जाएगा, नगरपालिका यथासंभव शीघ्र, एक निर्धारण रजिस्टर तैयार कराएगी जिसमें निम्नलिखित विशिष्टियां और कोई अन्य विषय, जिन्हें नगरपालिका सम्मिलित करना उचित समझे, होंगे-

(क) उक्त रजिस्टर पर धृति की संख्या, उस सड़क के, यदि कोई हो, नाम सहित जिसमें धृति अवस्थित है ;

                (ख) धृति का वार्षिक मूल्य (जैसा कि मूल्यांकन सूची में उल्लेख किया गया है) ;

                (ग) स्वामी और अधिभोगी के नाम ;

                (घ) वित्तीय वर्ष के लिए संदेय कर की रकम ;

                (ङ) धारा 75 की उपधारा (1) के खंड (क), खंड (घ), खंड (च) या खंड (ञ) के अधीन पृथक् रूप से संदेय करों की रकम ;

                (च) त्रैमासिक किस्तों की रकमें ; और

                (छ) यदि धृति को निर्धारण से छूट प्राप्त है तो उस आशय का टिप्पण ।

85. भवन और उस भूमि के लिए जिस पर वह स्थित है, समेकित कर निर्धारित करने की शक्तियां-(1) यदि कोई भवन किसी एक स्वामी का है और वह भूमि, जिस पर वह स्थित है, और कोई अन्य साथ लगी भूमि, जिसका प्रायः उसके साथ अधिभोग किया जाता है, किसी और व्यक्ति की है तो नगरपालिका ऐसे भवन और भूमि का मूल्यांकन एक साथ कर सकेगी और उन पर एक समेकित कर अधिरोपित कर सकेगी ।

(2) कर की कुल रकम भवन के स्वामी द्वारा संदेय होगी, जो उसके पश्चात् उस किराए से, जो वह उस भूमि के लिए संदत्त करता है, अपने द्वारा इस प्रकार संदत्त कर के उतने अनुपात की कटौती करने का हकदार होगा जो उस अनुपात के बराबर हो जो उस धृति के किराए और वार्षिक मूल्य में है ।

(3) विवादों की दशा में नगरपालिका इस बात का अवधारण करेगी कि भवन और भूमि के स्वामी क्रमशः किस-किस रकम का संदाय करेंगे ।

86. मूल्यांकन में घटोतरी, मूल्यांकन का पुनरीक्षण तथा निर्धारण और मूल्यांकन सूची तथा निर्धारण रजिस्टर का पुनरीक्षण-(1) नगरपालिका किसी भी समय निर्धारण रजिस्टर में निम्नलिखित रूप में किसी परिवर्तन या संशोधन का निदेश दे सकेगी-

(क) उसमें किसी ऐसे व्यक्ति के नाम की या किसी ऐसी संपत्ति की जिसकी उसकी राय में प्रविष्टि की जानी चाहिए थी या किसी ऐसी संपत्ति की, जो निर्धारण रजिस्टर तैयार किए जाने के पश्चात् कराधान के लिए दायी हो गई है, प्रविष्टि करके, या

(ख) उसमें, यथास्थिति, उत्तराधिकार या अंतरण की तारीख से किसी धृति के स्वामी के नाम के स्थान पर किसी ऐसे अन्य व्यक्ति का नाम प्रतिस्थापित करके जिसको धृति का स्वामित्व अंतरण द्वारा या अन्य रीति से उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त हुआ है, या

(ग) किसी ऐसी धृति के मूल्यांकन या निर्धारण में परिवर्तन करके जिसका मूल्यांकन निर्धारण उसकी राय में गलत हुआ है, या

(घ) किसी ऐसी धृति का, जिसके मूल्य में वृद्धि भवन में परिवर्धन या परिवर्तन द्वारा हुई है, पुनःमूल्यांकन या पुनःनिर्धारण करके, या

(ङ) स्वामी के आवेदन पर किसी धृति का, जिसे पूर्णतया या आंशिक रूप से तोड़ दिया गया है या नष्ट कर दिया गया है, या जिसका मूल्य स्वामी के नियंत्रण से परे किसी कारण से कम हो गया है, मूल्यांकन में घटोतरी करके, या

(च) कोई लिपिकीय या गणित संबंधी गलती का सुधार करके ।

                (2) नगरपालिका किसी ऐसे परिवर्तन में जिसको उपधारा (1) के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग) या खंड (घ) के अधीन करने का नगरपालिका का प्रस्ताव है, हितबद्ध व्यक्ति को कम से कम एक मास की सूचना देगी ।

                (3) निर्धारण रजिस्टर में उपधारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक परिवर्तन पर अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर होंगे ।

87. कर के संदाय के लिए दायी व्यक्तियों के हक के अंतरण की अध्यक्ष को सूचना का दिया जाना-(1) जहां किसी धृति से संबंधित हक का अंतरण किया जाता है, वहां अंतरक और अंतरिती दोनों ही धारा 86 की उपधारा (1) के खंड (ख) के प्रयोजन के लिए अंतरण की लिखत के निष्पादन के पश्चात् तीन मास के भीतर, या यदि ऐसी कोई लिखत निष्पादित नहीं की गई है तो ऐसे अंतरण के प्रभावी होने के पश्चात् तीन मास के भीतर ऐसे अंतरण की सूचना नगरपालिका की लिखित में देंगे ।

                (2) किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु की दशा में, जिसमें ऐसा हक निहित होता है, ऐसा व्यक्ति जिसे वारिस के रूप में या अन्यथा, मृतक का हक, विरासत में या मृत्यु के कारण अंतरित होता है, मृतक की मृत्यु से एक वर्ष के भीतर ऐसे उत्तराधिकार की नगरपालिका को लिखित में सूचना देगा ।

                (3) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी धृति पर करों के संदाय का दायी है जो ऐसी संपत्ति में या उस पर अपने किसी हक को यथापूर्वोक्त रूप में नगरपालिका को ऐसे अंतरण की सूचना दिए बिना जब तक कि नगरपालिका विशेष परिस्थितियों से उद्भूत कठिनाई के आधार पर कोई अन्य निदेश न दे, उक्त संपत्ति के संबंध में समय-समय पर संदेय सभी ऐसे करों के संदाय के लिए तब तक दायी होगा जब तक कि वह ऐसी सूचना नहीं दे देता या जब तक कि अंतरण नगरपालिका की पुस्तकों में अभिलिखित नहीं कर दिया जाता है ।

                (4) नगरपालिका किसी धृति के हक के प्रत्येक ऐसे अंतरण के लिए धारा 75 की उपधारा (1) के खंड (क) में उपबंधित कर के अतिरिक्त एक सौ रुपए से अनधिक फीस उद्गृहीत कर सकेगी ।

88. मूल्यांकन सूची का पुनरीक्षण-(1) नई मूल्यांकन सूची जब तक कि राज्य सरकार द्वारा अन्यथा आदेश नहीं दिया जाता है, प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार उसी रीति से तैयार की जाएगी जिसमें मूल सूची तैयार की गई थी ।

                (2) धारा 86 के अधीन किए गए किसी परिवर्तन या संशोधन और धारा 95 के अधीन किए गए किसी आवेदन के परिणाम के अधीन रहते हुए प्रत्येक मूल्यांकन सूची या निर्धारण रजिस्टर उस तारीख से विधिमान्य होगा जिसको सूची या रजिस्टर नगरपालिका में प्रभावी होता है ।

89. कर निर्धारक की नियुक्ति और राज्य सरकार की कर निर्धारक की नियुक्ति का निदेश देने की शक्ति-(1) नगरपालिका साधारण मूल्यांकन के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार की सहमति से कोई कर निर्धारक जो न तो नगरपालिका का कर्मचारी होगा और न कोई पार्षद् ऐसे वेतन पर और ऐसे स्थापन सहित, जो वह अवधारित करे, नियुक्त कर सकेगी ।

(2) धारा 88 में किसी बात के होते हुए भी यदि किसी समय राज्य सरकार को यह प्रतीत होता है कि किसी नगरपालिका में मूल्यांकन अपर्याप्त, अत्यधिक या असाम्यापूर्ण है तो राज्य सरकार लिखित आदेश द्वारा नगरपालिका से विनिर्दिष्ट मूल्यांकन का पुनरीक्षण करने या पुनरीक्षण के विरुद्ध विहित समय के भीतर कारण बताने की अपेक्षा कर सकेगी और यदि नगरपालिका आदेश का अनुपालन करने में असफल रहती है या राज्य सरकार की राय में बताया गया कारण अपर्याप्त है तो राज्य सरकार लिखित आदेश द्वारा नगरपालिका से राज्य सरकार के अनुमोदन से नगरपालिका के लिए किसी समय के भीतर और ऐसी अवधि के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, कोई कर निर्धारक नियुक्त करने की अपेक्षा कर सकेगी । आदेश में निर्धारक का वेतन और स्थापन की लागत नियत की जाएगी और वेतन और लागत का संदाय मासिक रूप में नगरपालिका द्वारा किया जाएगा ।

90. निर्धारण रजिस्टर का पुनरीक्षण-जब भी मूल्यांकन सूची का पूर्णतया या आंशिक रूप से पुनरीक्षण किया जाता है या उसमें परिवर्तन किया जाता है या धारा 83 के अधीन नई प्रतिशतता नियत की जाती है, तभी निर्धारण रजिस्टर को भी पुनरीक्षित किया जाएगा और उसमें सभी पारिणामिक परिवर्तन किए जाएंगे ।

91. निर्धारण रजिस्टर के पुनरीक्षण का प्रभाव-अधिनियम के अधीन किसी नगरपालिका के लिए तैयार किया गया पहला निर्धारण रजिस्टर और पूर्वगामी धारा के अधीन किया गया उसका कोई पुनरीक्षण या उसमें किया गया कोई परिवर्तन धारा 86 और धारा 96 के अधीन रहते हुए, धारा 96 में उल्लिखित सूचना के प्रकाशन की आगामी तिमाही से प्रभावी होगा ।

92. छूट और परिहार-(1) धारा 75 की उपधारा (1) के खंड (क), खंड (छ) और खंड (ठ) में उल्लिखित कर, किसी ऐसे भवन पर, जिसका उपयोग अनन्य रूप से सार्वजनिक उपासना के रूप में किया जाता है या किसी ऐसी धृति पर, जो इस अधिनियम के अधीन सार्वजनिक कब्रिस्तान या श्मशान भूमि के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं, निर्धारित या उद्गृहीत नहीं किया जाएगा ।

(2) नगरपालिका धारा 75 की उपधारा (1) के खंड (क) में उल्लिखित कर के निर्धारण से किसी लोक पूर्त प्रयोजन के लिए प्रयुक्त किसी धृति को छूट दे सकेगी ।

(3) नगरपालिका धारा 75 की उपधारा (1) के खंड (क), खंड (ख), खंड (च) और खंड (झ) में उल्लिखित करों में से किसी कर मद्दे संदेय रकम को उसका संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति के लिए अत्यधिक कठिनाई के आधार पर कम कर सकेगी या उसका परिहार कर सकेगी :

परन्तु ऐसी कमी या परिहार, जब तक कि नगरपालिका द्वारा उसका नवीकरण न कर दिया जाए, एक वित्तीय वर्ष से अधिक के लिए प्रभावी नहीं होगा ।

93. कर निर्धारक की शक्ति-धारा 89 के अधीन नगरपालिका द्वारा नियुक्त कोई कर निर्धारक मूल्यांकन की ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा जो नगरपालिका द्वारा उसमें निहित की जाएं या जो विहित की जाएं ।

94. निर्धारण की सूचना का प्रकाशन-(1) जब धारा 79 में उल्लिखित मूल्यांकन सूची और धारा 84 में उल्लिखित निर्धारण रजिस्टर तैयार कर लिया जाएगा या उसका पुनरीक्षण कर लिया जाएगा तब अध्यक्ष उस पर हस्ताक्षर करेगा और उसे, यथास्थिति, नगरपालिका या परिषद् के कार्यालय में जमा कराएगा तथा सूचना ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से प्रकाशित कराएगा, जो विहित की जाए ।

(2) ऐसे सभी मामलों में जिनमें किसी संपत्ति का निर्धारण पहली बार किया जाता है या निर्धारण में वृद्धि की जाती है वहां कार्यपालक अधिकारी उसकी सूचना संपत्ति के स्वामी या अधिभोगी को देगा ।

95. पुनर्विलोकन के लिए आवेदन-(1) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उस पर निर्धारित रकम से या किसी धृति के मूल्यांकन या निर्धारण से संतुष्ट नहीं है या किसी धृति के अपने अधिभोग या निर्धारण के लिए अपने दायित्व का प्रतिवाद करता है, नगरपालिका को मूल्यांकन के निर्धारण की रकम का पुनर्विलोकन करने या उसे कर के निर्धारण से छूट देने के लिए आवेदन कर सकेगा :

परन्तु किसी भी आवेदन को तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक ऐसे आवेदन की तारीख तक देय उस राशि से भिन्न, जो मूल्यांकन या निर्धारण द्वारा बढ़ा दी गई है और जिसके विरुद्ध पुनर्विलोकन आवेदन फाइल किया गया है, शोध्य रकम की बकाया का नगरपालिका को संदाय नहीं कर देता है ।

(2) जब किसी कर निर्धारक को धारा 89 के अधीन नियुक्त कर दिया गया हो तो प्रत्येक ऐसे आवेदन की सूचना नगरपालिका द्वारा कर निर्धारक को दी जाएगी ।

96. पुनर्विलोकन की प्रक्रिया-(1) धारा 95 के अधीन प्रस्तुत किए गए प्रत्येक आवेदन की सुनवाई और उसका अवधारण एक समिति द्वारा किया जाएगा, जो पांच से अनधिक सदस्यों के मिलकर बनेगी ।

(2) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष ऐसी समिति के सदस्यों में से पदेन एक सदस्य होगा और अन्य सदस्यों को, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा पार्षदों में से नियुक्त किया जाएगा :

परन्तु इस प्रकार नियुक्त किया गया कोई सदस्य उस वार्ड से जिसमें वह निवास करता है या किसी निर्वाचित सदस्य की दशा में उस वार्ड से, जिसका वह प्रतिनिधित्व करता है, किए गए किसी आवेदन की सुनवाई या अवधारण में भाग नहीं लेगा परन्तु इस परन्तुक की कोई बात जांच के अधीन मामले के संबंध में किसी सदस्य को साक्ष्य देने से निवारित नहीं करेगी ।

(3) ऐसे किसी आवेदन की सुनवाई या अवधारण समिति द्वारा तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि तीन सदस्य, जिनके अन्तर्गत अध्यक्ष या उपाध्यक्ष भी हैं, उपस्थित न हों ।

(4) समिति आवेदक को उस समय और उस स्थान की सूचना देगी जहां आवेदन की सुनवाई की जाएगी और आक्षेपकर्ता या उसके अभिकर्ता की उपस्थिति में यदि वह हाजिर होता है, ऐसा साक्ष्य लेने और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह आवश्यक समझे, समिति ऐसे आदेश पारित करेगी जो वह ऐसे आवेदन के संबंध में उचित समझे ।

(5) यदि समिति यह आदेश करती है कि वह मूल्यांकन जिससे आवेदन संबंधित है, कम किया जाएगा तो ऐसी कमी के लिए संक्षेप में कारण अभिलिखित किए जाएंगे ।

(6) इस धारा के अधीन निर्दिष्ट किसी आवेदन की बाबत समिति या उसके सदस्यों के बहुमत का विनिश्चय अंतिम होगा ।

97. पुनर्विलोकन के लिए आवेदन की समय की परिसीमा-जब तक अनुज्ञात समय बढ़ाने के लिए धारा 96 में निर्दिष्ट समिति को समाधानप्रद रूप में अच्छा हेतुक दर्शित नहीं कर दिया जाता है और इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, तब तक ऐसा कोई आवेदन, ऐसी सूची या रजिस्टर, जिसमें निर्धारण अंतर्विष्ट है जिसकी बाबत आवेदन किया गया है, से संबंधित धारा 94 द्वारा अपेक्षित सूचना के प्रकाशन की तारीख से एक मास की समाप्ति के पश्चात् या ऐसी दर से, जिसकी बाबत आवेदन किया जाता है, संदाय के लिए मांग की पहली सूचना की तामील की तारीख से पंद्रह दिन की समाप्ति के पश्चात् जो भी अवधि बाद में समाप्त हो, प्राप्त नहीं किया जाएगा :

परन्तु यदि नगरपालिका ने किसी व्यक्ति पर धारा 94 के अधीन सूचना की तामील कर दी है तो ऐसी तामील की तारीख से पंद्रह दिन की समाप्ति के पश्चात् उससे ऐसा कोई आवेदन प्राप्त नहीं किया जाएगा ।

98. निर्धारण को केवल अधिनियम के अधीन ही प्रश्नगत किया जाएगा-इस अधिनियम में उपबंधित रीति के सिवाय किसी और रीति से किसी निर्धारण या मूल्यांकन की बाबत कोई आक्षेप नहीं किया जाएगा ।

99. प्ररूप के अभाव में कर का अविधिमान्य होना-संपत्ति पर कर का कोई निर्धारण और इस अधिनियम के प्राधिकार के अधीन कोई प्रभार या कर की कोई मांग प्ररूप में गलती या कमी के कारण अविधिमान्य नहीं होगी और इस प्रयोजन के लिए किसी मूल्यांकन या निर्धारण के लिए यह पर्याप्त होगा कि इस प्रकार मूल्यांकित या निर्धारित संपत्ति को इस रूप में वर्णित किया जाए जिसमें वह साधारणतया जानी जाती है और उसके स्वामी या अधिभोगी का नाम वर्णित करना आवश्यक नहीं होगा ।

100. कर अधिरोपित करने और दावों आदि की वसूली की प्रक्रिया-उन विभिन्न प्रक्रियाओं का, जो समय-समय पर, राज्य सरकार द्वारा, विहित की जाएं, इस अधिनियम के अधीन कर, पथकर, फीस और रेट अधिरोपित करने और उनकी वसूली के लिए अनुसरण किया जाएगा ।

अध्याय 9

नगरपालिका दावों की वसूली

101. अनिवासी स्वामी से देय कर की अधिभोगी की वसूली-यदि किसी धृति के स्वामी द्वारा इस अधिनियम के अधीन संदेय कोई कर सम्यक् रूप से मांग की सूचना की तामील के पश्चात् भी असंदत्त रहता है और यदि ऐसा स्वामी नगरपालिका के भीतर निवासी नहीं है या ऐसे स्वामी का निवास स्थान ज्ञात नहीं है तो कर ऐसी धृति के तत्समय अधिभोगी से वसूल किया जा सकेगा जो किराए के अगले और आगामी संदायों से वह रकम काट सकेगा जो उसने इस प्रकार संदत्त की हो या उससे वसूल की गई हो :

                परन्तु यदि ऐसी धृति का अधिभोग एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है तो ऐसे व्यक्तियों में से किसी एक से वसूल की जाने वाली रकम उनके अपने अधिभोग में धृति के भाग के मूल्य के अनुपात में होगी ।

102. कतिपय मामलों में अधिभोगी के कर की स्वामी से वसूली-यदि कोई धृति एक से अधिक किराएदारों के पृथक्-पृथक् अधिभोग में है तो नगरपालिका के लिए ऐसी धृति के स्वामी से धृति के अधिभोगी द्वारा इस अधिनियम के अधीन संदेय कोई कर वसूल करना विधिपूर्ण होगा ।

103. स्वामी द्वारा संदत्त अधिभोगी के कर की स्वामी द्वारा वसूली-जब भी धारा 102 के उपबंधों के अधीन किसी धृति के स्वामी से कोई कर वसूल किया जाए और यदि ऐसी संपूर्ण धृति का एक ही अधिभोगी किराएदार हो तो ऐसे स्वामी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसे किराएदार से कर की वह कुल रकम वसूल करे जो ऐसे स्वामी द्वारा इस प्रकार संदत्त की गई हो और यदि ऐसी धृति के किसी भाग में एक अधिभोगी किराएदार है या ऐसी धृति के एक से अधिक अधिभोगी किराएदार हैं तो वह ऐसे प्रत्येक किराएदार से उस अनुपात में ऐसी राशि वसूल कर सकेगा जो कर की कुल रकम का, जो ऐसे स्वामी से उस अनुपात में इस प्रकार वसूल की जाती, वही अनुपात होगा, जो प्रत्येक किराएदार के अधिभोग में ऐसी धृति के मूल्य का ऐसी धृति के कुल मूल्य के अनुपात में है ।

104. स्वामी द्वारा वसूली की पद्धति-प्रत्येक स्वामी को, जो धारा 102 के उपबंधों के अधीन किसी धृति या उसके किसी भाग के अधिभोगी किराएदार से कोई राशि वसूल करने का हकदार है, ऐसी राशि की वसूली के लिए ऐसे सभी उपचार, शक्तियां, अधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे मानो, ऐसी राशि ऐसी धृति के उतने भाग की बाबत, जो ऐसे किराएदार के अधिभोग में है, ऐसे किराएदार द्वारा ऐसे स्वामी को संदेय किराया हो ।

105. शास्ति-जो कोई इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित अनुज्ञप्ति के बिना कोई गाड़ी, सवारी या पशु रखता है या उसके कब्जे में है तो वह देय अनुज्ञप्ति फीस के अतिरिक्त जुर्माने के लिए, जो ऐसी अनुज्ञप्ति की बाबत उसके द्वारा संदेय फीस के चार गुने से अधिक नहीं होगा, दायी होगा ।

106. नगरपालिका अस्तबल के स्वामी के साथ कर का प्रशमन कर सकेगी-नगरपालिका एक वर्ष से अनधिक किसी अवधि के लिए अस्तबल के स्वामी और अन्य व्यक्तियों के साथ जो गाड़ियां, सवारियां या पशु किराए के लिए रखते हैं, नगरपालिका द्वारा किए गए किसी आदेश में विनिर्दिष्ट अनुज्ञप्ति फीस के बजाय ऐसे व्यक्तियों द्वारा इस प्रकार रखी जाने वाली गाड़ियों, सवारियों या पशुओं के लिए संदत्त की जाने वाली कतिपय राशि के लिए प्रशमन कर सकेगी ।

107. बाजारों की बाबत किराया, पथकर और फीस-(1) नगरपालिका कोई नगरपालिका बाजार स्थापित करने या किसी विद्यमान नगरपालिका बाजार में सुधार करने के प्रयोजन के लिए अपनी स्वयं की भूमि या भवन का उपयोग कर सकेगी या किसी भूमि या भवन का क्रय कर सकेगी, पट्टे पर ले सकेगी या अन्यथा अर्जित कर सकेगी ।

(2) नगरपालिका, नगरपालिका बाजार में माल को विक्रय के लिए अभिदर्शित करने के अधिकार के लिए तथा दुकानों, स्टालों और उनमें खड़े होने के स्थान के उपयोग के लिए ऐसी दरों पर किराया, पथकर और फीस उद्गृहीत कर सकेगी जो वह उचित समझे और प्राइवेट बाजारों या परिक्षेत्र में बाजार स्थान के रूप में उपयोग में लाए जाने वाले या नगरपालिका द्वारा सार्वजनिक सूचना द्वारा घोषित स्थानों के संबंध में भी ऐसी दरों को विनियमित कर सकेगी ।

(3) नगरपालिका, नगरपालिका, बाजारों में किराए, पथकर और फीस का उपधारा (2) के अधीन नगरपालिका द्वारा नियत दरों पर संग्रहण करने के लिए तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए पट्टा अनुदत्त कर सकेगी ।

(4) उपधारा (3) के अधीन नियुक्त नगरपालिका बाजार का कोई पट्टेदार किसी व्यक्ति को बाजार में माल को विक्रय के लिए अभिदर्शित करने या दुकानों, स्टालों और उनमें खड़े होने के स्थानों का उपयोग करने के लिए अनुज्ञात करने से तब तक इनकार कर सकेगा जब तक कि समुचित किराया, पथकर और फीस का संदाय न कर दिया गया हो ।

(5) जो कोई अपने आप को किराए, पथकर या फीस के लिए दायी बनाने के पश्चात् उसका संदाय करने से इंकार करेगा वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा । 

(6) जब किराया, पथकर या फीस संगृहीत करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति का प्रतिरोध किया जाता है तब कोई पुलिस अधिकारी, जिसे वह अपनी सहायता के लिए बुलाए, उसकी सहायता करने के लिए बाध्य होगा ; और ऐसे पुलिस अधिकारी को उस प्रयोजन के लिए वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो उसे अपने साधारण पुलिस कर्तव्यों के पालन के लिए प्राप्त हैं ।

108. करों की भू-राजस्व के रूप में वसूली-(1) जहां कोई राशि चुंगी या पथकर या तुरन्त मांग किए जाने पर संदेय ऐसे ही किसी कर से भिन्न किसी कर के मद्धे किसी व्यक्ति से नगरपालिका को देय है तो नगरपालिका, इस अधिनियम में उपबंधित वसूली के किसी अन्य ढंग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उपायुक्त को ऐसी राशि इस निमित्त उपगत कार्यवाहियों के खर्चों, सहित वसूल करने के लिए आवेदन कर सकेगी ।

(2) उपायुक्त, यह समाधान हो जाने पर कि उपधारा (1) के अधीन आवेदन में उल्लिखित रकम देय है, उसे उसके पश्चात् यथाशीघ्र भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल करने के लिए अग्रसर होगा ।

109. देय धन के लिए अदावाकृत धृतियों का विक्रय करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन वसूलीय किसी कर, व्यय या प्रभार के मद्धे किसी धृति की बाबत उसके स्वामी से इस अधिनियम के अधीन कोई धन देय है और यदि ऐसी धृति के स्वामी या उसका पता ज्ञात नहीं है या उसके स्वामित्व की बाबत कोई विवाद है या जहां स्वामी नगरपालिका के बाहर रहता है और मांग सूचना की दो बार तामील के बावजूद भी उसका संदाय करने में असफल रहता है तो नगरपालिका तीन-तीन मास के अंतराल से ऐसी धृति के विक्रय की अधिसूचना दो बार प्रकाशित कर सकेगी और अंतिम प्रकाशन की तारीख से कम से कम तीन मास समाप्त होने के पश्चात् तब जब वसूलीय रकम का संदाय न किया गया हो, ऐसी धृति का विक्रय सबसे अधिक बोली लगाने वाले व्यक्ति को कर सकेगी जो विक्रय के समय क्रय धन का पच्चीस प्रतिशत तुरन्त जमा करेगा । अतिशेष का संदाय विक्रय की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर किया जाएगा । अतिशेष रकम के संदाय के व्यतिक्रम की दशा में, जमा की गई राशि, यदि कोई हो, समपहृत कर ली जाएगी और धृति का पुनः विक्रय किया जाएगा । नगरपालिका को देय रकम काटने के पश्चात् अधिशेष विक्रय आगम, यदि कोई हो, नगरपालिका निधि में जमा कर दिया जाएगा और मांग किए जाने पर उसका किसी ऐसे व्यक्ति को संदाय कर दिया जाएगा जिसने नगरपालिका  या सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय के समक्ष समाधानप्रद रूप से अपने दावे का अधिकार स्थापित कर दिया है ।

                (2) कोई व्यक्ति विक्रय पूरा होने से पूर्व किसी भी समय देय रकम का संदाय कर सकेगा और ऐसी रकम ऐसी संपत्ति में फायदा पाने वाले के रूप में हितबद्ध व्यक्ति से सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय में वाद लाकर वसूल कर सकेगा ।

110. नगर पंचायत या परिषद् को देय अवसूलीय राशियों का अपलिखित किया जाना-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को देय अवसूलीय राशि, ऐसी रीति और ऐसे प्राधिकारी द्वारा, जो विहित किया जाए, अपलिखित की जा सकेगी ।

अध्याय 10

नगरपालिका की शक्तियां और अपराध

सड़क की बाबत शक्तियां

111. सड़क बनाने की शक्ति-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्-

                                (क) नई सार्वजनिक सड़क बिछा या बना सकेगी ; या

                (ख) किसी सार्वजनिक सड़क को चौड़ा कर सकेगी, खोल सकेगी, बढ़ा सकेगी या अन्यथा उसमें सुधार कर सकेगी और सुरंगों तथा ऐसी सड़कों के लिए अन्य समनुषंगी संकर्मों का सन्निर्माण कर सकेगी ; या

                (ग) किसी सार्वजनिक सड़क की दिशा परिवर्तित कर सकेगी, उसे रोक या स्थायी रूप से बंद कर सकेगी ; या

                (घ) ऐसी सड़क के प्रयोजन के लिए या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रयोजन के लिए अर्जित ऐसी भूमि का, जिस पर ऐसी सड़क या उसका कोई भाग है, विक्रय कर सकेगी या उसे पट्टे पर दे सकेगी :

परन्तु, ऐसी किसी सार्वजनिक सड़क को राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना रोका, स्थायी रूप में बन्द नहीं किया जाएगा या उसका किन्हीं अन्य प्रयोजनों के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा ।

(2) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी सार्वजनिक सड़क को बिछाते, बनाते, मोड़ते, दिशा परिवर्तन करते, चौड़ा करते, खोलते, बढ़ाते या अन्यथा उसमें सुधार करते समय इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उसके वहन पथ, पैदल पथ तथा नालियों के लिए अपेक्षित भूमि अर्जित कर सकेगी ।

112. प्राइवेट सड़क, नालियों, आदि की मरम्मत, आदि करने की शक्ति-(1) जहां, नगर पंचायत या परिषद् यह समझती है कि नगर पालिका के भीतर किसी सड़क पर, जो सार्वजनिक सड़क नहीं है, या ऐसी सड़क के किसी भाग पर लोक स्वास्थ्य, सुविधा या सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि उसे समतल कराने, पटवाने, पक्का करने, फर्श डालने, जलप्रवाह योग्य बनाने, उसमें नाली बनाने, उस पर बत्ती लगाने या उसकी सफाई कराने के लिए कोई कार्य किया जाना है, तो यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषदें लिखित सूचना द्वारा उक्त सड़क के सामने वाली या पार्श्वस्थ या उससे लगी विभिन्न भूमियों या भवनों के स्वामी या स्वामियों से ऐसा कार्य ऐसी रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, निष्पादित करने की अपेक्षा कर सकेगी ।

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना का पालन नहीं किया जाता है, तो ऐसा कार्य नगर पंचायत या परिषद् द्वारा निष्पादित किया जा सकेगा । उसके द्वारा उपगत व्यय, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा ऐसे स्वामियों के बीच और ऐसी रीति में प्रभाजित किया जाएगा, जो वह उचित समझे । यदि आवश्यक समझा जाता है तो ऐसी भूमियों या भवनों के स्वामियों या अधिभोगियों द्वारा पहले किए गए किसी कार्य की रकम और मूल्य को ध्यान में रखा जाएगा ।

(3) स्वामी या स्वामियों द्वारा ऐसा कार्य कर देने के पश्चात् या स्वामियों के ऐसा करने में असफल रहने पर ऐसे स्वामियों के खर्चे पर, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा ऐसे कार्य के निष्पादन किए जाने के पश्चात् वह सड़क या उसका भाग, जिस पर ऐसा कार्य किया गया है, और उक्त स्वामियों के बहुमत से संयुक्त अध्यपेक्षा पर, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा, उसमें लगाई गई लोक सूचना द्वारा सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया जाएगा ।

113. पशुओं, गाड़ियों या वाहनों के किसी वर्ग द्वारा सार्वजनिक सड़कों के प्रयोग का प्रतिषेध-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् लोक सूचना द्वारा किसी सार्वजनिक सड़क या ऐसी सड़क के किसी भाग पर किसी विशिष्ट प्रकार के पशुओं या वाहनों को चलाने, उन पर सवारी करने, या उनको हांकने को प्रतिषिद्ध या विनियमित कर सकेगी ।

(2) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा पारित किसी आदेश की अवज्ञा करेगा, वह जुर्माने से, जो दो सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दण्डनीय होगा ।

114. सार्वजनिक सड़कों आदि पर अधिक्रमण के लिए आस्ति-कोई व्यक्ति, जो नगर पंचायत या परिषद् की अनुज्ञा के बिना, -

(क) किसी सार्वजनिक सड़क या सफाई, गली या किसी सार्वजनिक नाली, सीवर, जलसेतु, जलमार्ग का या उसका उल्लंघन करके या कोई दीवार, बाड़, रेल, खम्बा, बाहर निकले हुए किसी भाग या अन्य बाधा का परिनिर्माण करके या उस पर कोई जंगम संपत्ति जमा करके अधिक्रमण करेगा, या

(ख) किसी सार्वजनिक सड़क पर फर्श या अन्य सामग्री, वाड़ या खम्बे लगाता है या उसमें परिवर्तन करता है,

तो वह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, और प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान अधिक्रमण जारी रहता है, अतिरिक्त जुर्माने से, जो दो सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दण्डनीय होगा ।

115. विक्रेताओं और अन्य व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक सड़क या स्थान का उपयोग और उसकी शास्ति-(1) इस अधिनियम के उपबंधों और उसके अधीन बनाए गए नियमों और उपविधियों के अधीन रहते हुए, कोई फेरीवाला, विक्रेता या कोई अन्य व्यक्ति वस्तुओं के विक्रय के लिए या किसी आजीविका के प्रयोग के लिए या कोई बूथ या स्टाल लगाने के लिए किसी सार्वजनिक सड़क या स्थान का उपयोग अधिभोग, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की अनुज्ञा के बिना नहीं करेगा ।

                (2) जो कोई उपधारा (1) के उपबंधों का अतिक्रमण करेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध के लिए अतिरिक्त जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

116. सार्वजनिक सड़क, आदि पर बाधाओं, अधिक्रमणों और बाहर निकले हुए भाग को हटाने की शक्ति-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् इस अधिनियम के अधीन उसके विरुद्ध प्रारंभ की गई किन्हीं कार्यवाहियों के होते हुए भी, सूचना जारी कर सकेगी, जिसमें किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह किसी सार्वजनिक सड़क, सफाई गली, सार्वजनिक नाली, सीवर, जलसेतु, जलमार्ग, घाट या यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् में निहित किसी भूमि के किसी भाग पर से किसी भवन, जो उसने बनाया हो या ऐसी किसी बाड़, रेल, खम्बा या अन्य बाधा या अधिक्रमण को, जो उसने परिनिर्मित की थी या उसे खूंटे लगाकर घेरा हो, हटा दे । यदि ऐसा व्यक्ति ऐसी अध्यपेक्षा की प्राप्ति के अड़तालीस घंटे के भीतर उस अध्यपेक्षा का पालन करने में असफल रहता है तो उप-खंड मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के आवेदन पर यह आदेश कर सकेगा कि ऐसी बाधा या अतिक्रमण को हटा दिया जाए और तदुपरि नगर पंचायत या परिषद् ऐसी बाधा या अतिक्रमण को हटा देगी और उसके द्वारा उपगत व्यय का संदाय उस व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जिसने उसे परिनिर्मित किया था या खूंटे लगाकर घेरा था ।    

117. उस समय प्रक्रिया जब उस व्यक्ति का पता लग सके जिसने बाधा परिनिर्मित की थी-(1) यदि वह व्यक्ति, जिसने पूर्ववर्ती धारा में निर्दिष्ट उक्त भवन, बोर्ड, रेल, खंभे या अन्य बाधा या अधिक्रमण का निर्माण, परिनिर्माण किया है या उसे खूंटों से घेरा है, ज्ञात नहीं है या उसका पता नहीं लगाया जा सकता है तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् उक्त भवन, बाड़, रेल, खंभे या अन्य बाधा या अधिक्रमण के पास सूचना लगवाएगी जिसमें उसमें हितबद्ध व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह उसे हटा दे और ऐसी अध्यपेक्षा में किसी व्यक्ति के नाम का उल्लेख आवश्यक नहीं होगा ।

(2) यदि उक्त भवन, बाड़, रेल, खंबा या अन्य बाधा या अधिक्रमण ऐसी सूचना के चिपकाए जाने के अड़तालीस घंटे के भीतर उस सूचना में अन्तर्विष्ट अध्यपेक्षा के अनुपालन में हटाई नहीं जाती है तो उप-खण्ड मजिस्ट्रेट यथास्थिति, नगर पंचायत  या परिषद् के आवेदन पर यह आदेश कर सकेगा कि ऐसी बाधा या अधिक्रमण को हटा दिया जाए और तदुपरि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसी किसी बाधा या अधिक्रमण को हटा सकेगी और इस प्रकार हटाने का खर्च इस प्रकार हटाई गई सामग्री का विक्रय करके वसूल कर सकेगी ।

(3) अधिशेष विक्रय आगम को, यदि कोई हो, नगरपालिका निधि में जमा किया जाएगा और मांग किए जाने पर उसका उस व्यक्ति को संदाय किया जाएगा जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के समाधानप्रद रूप में या सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में अपना अधिकार सिद्ध कर देता है ।

118. भवनों से निकले हुए भागों का हटाया जाना-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् एक सूचना जारी कर सकेगी जिसमें किसी भवन के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह ऐसे भवन के पीछे या सामने परिनिर्मित या रखे गए या ऐसे किसी निकले हुए भाग, बाधा या अधिक्रमण को पीछे हटा दे या परिवर्तित कर दे जो सार्वजनिक सड़क पर प्रलंबित हो या किसी सार्वजनिक सड़क या सफाई गली पर या किसी भी प्रकार निकला हुआ हो या अधिक्रमण करता हो या उस पर सुरक्षित और सुविधाजनक मार्ग के लिए बाधा हो या किसी सार्वजनिक सड़क की किसी नाली, सीवर या जलसेतु में या उस पर या किसी सार्वजनिक जलमार्ग या घाट या, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की किसी भूमि में या उस पर बाधा पहुंचाता है या निकला हुआ है या अधिक्रमण करता है ।

(2) यदि ऐसा स्वामी या अधिभोगी सूचना की प्राप्ति के अड़तालीस घंटे के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् अनुज्ञात करे, ऐसी अध्यपेक्षा का पालन करने में असफल रहता है तो उपखंड मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के आवेदन पर यह आदेश कर सकेगा कि ऐसा निकला हुआ भाग, बाधा या अधिक्रमण हटा दिया जाए या परिवर्तित कर दिया जाए, और तदुपरि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसे निकले हुए भाग, बाधा या अधिक्रमण को हटा देगी या परिवर्तित कर देगी और इस प्रकार हटाए जाने या परिवर्तन के प्रयोजन के लिए उपगत युक्तियुक्त व्यय व्यतिक्रमी स्वामी या अधिभोगी से वसूल किया जाएगा ।

(3) यदि ऐसी किसी संरचना या फिक्सचर को हटाए जाने या परिवर्तित करने का व्यय उक्त भवन के अधिभोगी द्वारा, किसी ऐसी दशा में, जिसमें वह उसके द्वारा परिनिर्मित नहीं किया गया था, संदत्त किया जाता है तो वह भवन के स्वामी को उसके द्वारा संदेय किराए से उस युक्तियुक्त व्यय की कटौती करने का हकदार होगा जो उसने इस प्रकार हटाए जाने या परिवर्तन के प्रयोजन के लिए उपगत किया था ।

119. जिला मजिस्ट्रेट और उपखंड मजिस्ट्रेट की राज्य सरकार की अध्यपेक्षा पर संक्षेपतः अधिक्रमण हटाने की शक्ति-धारा 116 और धारा 118 में किसी बात के होते हुए भी, जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट, सरकार द्वारा इस प्रकार अपेक्षा किए जाने पर, धारा 116 और धारा 118 में विनिर्दिष्ट किसी बाधा या अधिक्रमण या निकले हुए भाग के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को यह आदेश कर सकेगा कि वह अड़तालीस घंटे से अन्यून अवधि के भीतर ऐसी बाधा या अधिक्रमण या निकाले गए भाग को हटा दे या परिवर्तित कर दे और इसके अनुपालन पर, यथास्थिति, जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट ऐसी बाधा या अधिक्रमण या निकाले गए भाग को हटा देगा और इसके द्वारा उपगत व्यय संबद्ध व्यक्ति से दंड न्यायालय के जुर्माने के रूप में वसूल करेगा :

परन्तु यदि ऐसी बाधा, अधिक्रमण या निकाले गए भाग के लिए उत्तरदायी व्यक्ति या व्यक्तिगत ज्ञात नहीं हैं या उनका पता नहीं लगाया जा सकता है तो धारा 117 में अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा ।

120. धारा 116, धारा 117, धारा 118, या धारा 119, के अधीन किए गए आदेश का प्रभाव-धारा 116, धारा 117, धारा 118 या धारा 119 के अधीन, यथास्थिति, उपखंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए प्रत्येक आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उसके न्यायिक कर्तव्य के निर्वहन में उसके द्वारा किया गया आदेश है और, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के बारे में यह समझा जाएगा कि वह न्यायिक अधिकारी संरक्षण अधिनियम, 1850 (1850 का 18) के अर्थ में ऐसा आदेश निष्पादित करने के लिए आबद्ध व्यक्ति है ।

121. नगर पंचायत या परिषद् भूधारकों से झाड़ीदार बाड़, आदि की सुव्यवस्था करने की अपेक्षा कर सकेगा-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह तीन दिन के भीतर किसी सार्वजनिक सड़क या नालियों के किनारे झाड़ीदार बाड़ को साफ करे या उसकी छटाई करे और किसी सार्वजनिक सड़क, नाले या तालाब या पीने के प्रयोजन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी कुएं पर प्रलंबित या किसी सार्वजनिक सड़क या नाली पर बाधा पहुंचाने वाले या किसी सार्वजनिक सड़क या नाली या, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले या नुकसान पहुंचाने के लिए संभाव्य या किसी सार्वजनिक सड़क का उपयोग करने वाले किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए संभाव्य या किसी कुएं या तालाब के पानी को गंदा करने के लिए संभाव्य किन्हीं वृक्षों या बांसों को काट दे या छांट दे ।

122. धारा 116, धारा 117, धारा 118 या धारा 119 के अधीन अध्यपेक्षा की अवज्ञा के लिए शास्ति-जो कोई किसी नगरपालिका के भीतर किसी भूमि पर किसी गृह का स्वामी या अधिभोगी होते हुए, धारा 116, धारा 117, धारा 118, या धारा 119 के उपबंधों के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा जारी की गई किसी अध्यपेक्षा का पालन करने में असफल रहता है तो वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान व्यतिक्रम प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, अतिरिक्त जुर्माने से, जो एक सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दण्डनीय होगा ।

123. सार्वजनिक सड़कों के नाम और भवनों की संख्या-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी सार्वजनिक सड़क का नाम रखवा सकेगी या उसे ऐसे स्थान पर लगवा सकेगी जहां वह उचित समझे और वह प्रत्येक भवन पर संख्यांक भी डलवा सकेगी और इसी रीति में समय-समय पर ऐसे नामों और संख्यांकों को परिवर्तित करा सकेगी ।

(2) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा लगाए गए किसी नाम या संख्यांक को नष्ट करेगा, गिराएगा, विरुपित करेगा या परिवर्तित करेगा, वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

भवन

124. मंजूरी के बिना भवन का परिनिर्माण-(1) कोई भी व्यक्ति, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की मंजूरी के बिना कोई भवन परिनिर्मित, उसे तात्त्विक रूप से परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित नहीं करेगा या उसे परिनिर्मित, तात्त्विक रूप से परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित करना प्रारंभ नहीं करेगा ।

(2) प्रत्येक व्यक्ति, जो कोई भवन परिनिर्मित, उसे तात्त्विक रूप से परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित करने का आशय रखता है, ऐसे परिनिर्माण के बारे में, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को लिखित में सूचना देगा ।

(3) यदि इस अधिनियम के अधीन उपविधियां बना दी गई हों तो उपधारा (2) के अधीन कोई सूचना तब तक विधिमान्य नहीं समझी जाएगी जब तक कि ऐसी सूचना उपविधियों के उपबंधों के अनुसार न हो ।

स्पष्टीकरण-इस धारा और उपविधियों के प्रयोजनों के लिए किसी भवन में परिवर्तन तात्त्विक समझा जाएगा, यदि इससे-

(क) भवन की स्थिरता या सुरक्षा पर या भवन की जल-निकास, संवातन, स्वच्छता अथवा स्वास्थ्यकर दशा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है ;

(ख) भवन या भवन के किसी कक्ष की ऊंचाई या उसके द्वारा आवृत क्षेत्र या उसकी घन क्षमता में वृद्धि या कमी हो जाती है ।

                (4) ऐसी नगरपालिकाओं में जहां जल संकर्मों का अनुरक्षण किया जाता हो, वहां दो लाख रुपए या उससे अधिक की लागत वाले (भूमि और भूमि सुधार की लागत अपवर्जित करते हुए) भवनों का परिनिर्माण या पुनः परिनिर्माण करने वाले व्यक्तियों के लिए स्वच्छ शौचालय प्रतिष्ठापित करना अनिवार्य होगा । यदि सूचना के साथ प्रस्तुत की गई भवन संबंधी योजना या विनिर्देश में स्वच्छ शौचालय प्रतिष्ठापित करने का उपबंध नहीं है तो नगरपालिका मंजूरी विधारित कर लेगी ।

125. उन मामलों के लिए विशेष उपबंध जहां उपविधियां नहीं बनाई गई हों-किसी ऐसे मामले में, जिसमें इस अधिनियम के अधीन उपविधि नहीं बनाई हो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् धारा 124 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित सूचना की प्राप्ति के चौदह दिन के भीतर उस व्यक्ति से, जिसने ऐसी सूचना दी है, यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह उसके द्वारा अध्यापेक्षा की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर सभी या किन्हीं ऐसे विषयों के बारे में जानकारी प्रस्तुत करे जिसके बारे में उपविधियां बनाई जा सकती थीं और ऐसे मामले में सूचना तब तक विधिमान्य नहीं होगी जब तक ऐसी जानकारी नहीं दे दी गई हो ।

126. नगर पंचायत या परिषद् की मंजूरी देने या इंकार करने की शक्ति-(1) धारा 124 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित सूचना की प्राप्ति के पश्चात् साठ दिन के भीतर, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् भवन बनाने की मंजूरी देने से इंकार कर सकेगी या इसे आत्यंतिक रूप में या ऐसे उपांतरण के अधीन रहते हुए मंजूर कर सकेगी, जो वह उपविधियों में विनिर्दिष्ट सभी या किन्हीं विषयों की बाबत उचित समझे और पूर्वोक्त रूप से ऐसे किसी भवन को परिनिर्मित तात्त्विक रूप में उसे परिवर्तित या पुनः परिनिर्मित करने वाला व्यक्ति प्रत्येक विशिष्टि में दी गई, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की मंजूरी का पालन करेगा ।

(2) जब नगर पंचायत या परिषद् विधिमान्य सूचना की प्राप्ति के पश्चात् साठ दिन की अवधि के भीतर मंजूरी का आदेश करने या उसकी बाबत इंकार करने और उस व्यक्ति को, जिसने ऐसी सूचना दी है, परिदत्त करने में असफल रहती है तो यह समझा जाएगा कि प्रस्तावित भवन की आत्यंतिक रूप से मंजूरी दे दी गई है :

परन्तु किसी विधिमान्य सूचना, यदि कोई हो, की प्राप्ति के पश्चात् नगर पंचायत या परिषद् द्वारा अध्यपेक्षित जानकारी देने में आवेदक द्वारा लिए गए समय को इस उपधारा में निर्दिष्ट साठ दिन की अवधि में गणना में नहीं लिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-नगर पंचायत या परिषद् किसी भवन का परिनिर्माण उसमें तात्त्विक परिवर्तन या पुनः परिनिर्माण या तो किसी विशिष्ट भवन को प्रभावित करने वाले आधार पर या नगर पंचायत या परिषद् द्वारा किसी अधिवेशन में अंगीकृत साधारण स्कीम के अनुसरण में अति भीड़ के निवारण के लिए विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर या ऐसी सीमाओं के भीतर निवासियों के हित में या किसी अन्य लोक प्रयोजन के लिए किसी भवन या किसी वर्ग के भवन के परिनिर्माण या पुनःपरिनिर्माण को निर्बंधित करते हुए, मंजूर करने से इंकार कर सकेगी । ऐसी किसी दशा में भी जिसमें, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् और आवेदक के बीच उस भूमि के हक के बारे में विवाद है जिस पर भवन परिनिर्मित करने का प्रस्ताव है, तब तक अनुज्ञा देने से इंकार किया जा सकेगा जब तक ऐसे विवाद का विनिश्चय नहीं कर दिया जाता है ।

127. मंजूरी का व्यपगत होना-इस अध्याय के अधीन भवन को परिनिर्मित, तात्त्विक रूप में परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित करने के लिए दी गई या नगर पंचायत या परिषद् द्वारा दी गई समझी गई अनुज्ञा, इसे मंजूर किए जाने की तारीख से केवल एक वर्ष तक जारी रहेगी जब तक इसे इस प्रयोजन के लिए नगर पंचायत या परिषद् को किए गए आवेदन पर नवीकृत नहीं किया जाता है ।

128. मंजूरी के बिना या उसके उल्लंघन में भवन-निर्माण के लिए शास्ति-जो कोई, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की पूर्व मंजूरी के बिना या धारा 123 के अधीन मंजूरी देते समय, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा दिए गए किन्हीं निदेशों के उल्लंघन में कोई भवन परिनिर्मित, तात्त्विक रूप में परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित करेगा या उसे परिनिर्मित, तात्त्विक रूप में परिवर्तित या पुनःपरिनिर्मित करना प्रारंभ करेगा, वह जुर्माने का, जो ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए एक हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा और प्रत्येक ऐसे दिन के लिए, जिसके दौरान अपराध उसकी प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, अतिरिक्त जुर्माने का, जो दो सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, भागी होगा ।

129. अवज्ञा की दशा में नगर पंचायत या परिषद् की शक्ति-(1) यदि-

                (क) धारा 126 की उपधारा (1) द्वारा यथा अपेक्षित मंजूरी के बिना ; या

                (ख) धारा 124 की उपधारा (2) द्वारा यथा अपेक्षित सूचना के बिना ; या

                (ग) जब मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया हो ; या

                (घ) दी गई किसी मंजूरी के निबंधनों के उल्लंघन में ; या

                (ङ) जब मंजूरी व्यपगत हो गई हो ; या

                (च) धारा 209 की उपधारा (1) के खंड (vi) के अधीन बनाई गई किसी उपविधि के उल्लंघन में,

किसी भवन का सन्निर्माण प्रारंभ किया जाता है या कोई भवन तात्त्विक रूप से परिवर्तित या परिनिर्मित किया जाता है तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, युक्तियुक्त समय के भीतर परिदत्त की जाने वाली सूचना द्वारा, ऐसी सूचना की तामील की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर भवन परिवर्तित करने या तोड़ डालने की, जैसा वह आवश्यक समझे, अपेक्षा कर सकेगी :

                परन्तु यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, किसी ऐसे भवन में परिवर्तन या उसे तोड़ डालने की अपेक्षा करने के बजाय, प्रतिकर के रूप में ऐसी रकम स्वीकार कर सकेगी, जो वह युक्तियुक्त समझे ।

                (2) कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा जारी की गई अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहेगा वह जुर्माने का, जो पांच सौ रुपए से अधिक नहीं होगा और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान वह व्यक्ति ऐसी अध्यपेक्षा के उस पर तामील किए जाने के पश्चात् व्यतिक्रम करना जारी रखता है, अतिरिक्त जुर्माने का, जो एक सौ रुपए से अधिक नहीं होगा, भागी होगा ।

130. छतों और बाह्य दीवारों का ज्वलनशील सामग्री से नहीं बनाया जाना-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, लिखित सूचना द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसने पुआल, घनी पत्तियों या अन्य ज्वलनशील सामग्री से और धारा 209 के अधीन बनाई गई उपविधियों के उल्लंघन में कोई बाह्य छत या दीवार बनाई है, सूचना में विनिर्दिष्ट की जाने वाली अवधि के भीतर एक छत या दीवार हटाने या उसमें परिवर्तन करने की अपेक्षा कर सकेगी ।

131. लैम्प के लिए ब्रेकेट लगाने की शक्ति-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी भवन के बाहर लैंम्पों के लिए ब्रेकेट ऐसी रीति में, जिससे उसको कोई क्षति या असुविधा उत्पन्न न हो, लगा सकेगी या लगवा सकेगी ।

132. मानव आवास के लिए अनुपयुक्त भवन-(1) यदि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की राय में कोई भवन या किसी भवन का कोई कक्ष नालियों या संवातन के उचित साधन के अभाव के परिणामस्वरूप या अन्यथा, मानव आवास के लिए अनुपयुक्त है तो यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, सूचना द्वारा, उसके स्वामी या अधिभोगी को मानव आवास के लिए ऐसे भवन या कक्ष का उपयोग करने या इस प्रकार उपयोग करने देने से, चाहे वह आत्यंतिक रूप में हो या नहीं, तब तक प्रतिषिद्ध कर सकेगीं, जब तक सूचना में विनिर्दिष्ट की जाने वाली अवधि के भीतर वह उसमें ऐसा परिवर्तन नहीं करता है, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया      गया है ।

(2) किसी ऐसे व्यक्ति के, जिसे उपधारा (1) के अधीन सूचना जारी की गई है, उसका अनुपालन करने में असफल होने पर, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् एक और सूचना द्वारा भवन या कक्ष के तोड़े जाने की अपेक्षा कर सकेगी ।

(3) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के उपबंधों के विपरीत किसी भवन या कक्ष का उपयोग करता है या उसको उपयोग करने देता है, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान अपराध प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, अतिरिक्त जुर्माने से, जो एक सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दंडनीय होगा ।

133. खतरनाक अवस्था में भवन की बाढ-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् सूचना द्वारा, किसी भूमि या भवन के स्वामी या अधिभोगी से-

(क) किसी भवन, किसी भवन के भाग, दीवार या अन्य संरचना या उससे संलग्न किसी ऐसी वस्तु को जो भग्नावस्था में है या अंतःवासियों, यदि कोई हो, पथिकों या अन्य सम्पत्ति के लिए खतरनाक प्रतीत हो, सूचना की तामील की तारीख से आठ दिन के भीतर ऐसी रीति में जो वह आवश्यक समझें, तोड़ डालने, सुरक्षित रखने या मरम्मत करने की अपेक्षा कर   सकेगी ; या

(ख) ऐसे स्वामी के या ऐसे अधिभोगी के कब्जाधीन किसी तालाब, कुएं या उत्खनन की, जो नगर पंचायत या परिषद् को इसकी स्थिति के कारण, मरम्मत के अभाव के कारण या अन्य ऐसी परिस्थितियों में व्यक्तियों के लिए खतरनाक प्रतीत हो, सूचना की तामील की तारीख से आठ दिन के भीतर ऐसी रीति में, जो वह आवश्यक समझे, मरम्मत करने, सुरक्षित रखने या उसे बन्द करने की अपेक्षा कर सकेगी ।

                (2) जहां नगर पंचायत या परिषद् को यह प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति या संपत्ति को आसन्न खतरे को रोकने के प्रयोजन के लिए तुरन्त कार्रवाई करना आवश्यक है तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् का यह कर्तव्य होगा कि वह तुरन्त कार्रवाई करे और भवन के स्वामी या अधिभोगी से या ऐसी भूमि के, जिसमें ऐसा भवन या अन्य संरचना या कोई वस्तु संलग्न है, स्वामी या अधिभोगी से इस प्रकार उपगत व्यय वसूल करे ।

134. नगर पंचायत या परिषद् स्वामियों से भग्नावशेषों को गिराने की अपेक्षा कर सकेगी-जब भी नगर पंचायत या परिषद् को यह प्रतीत होता है कि कोई भवन परित्याग या विवादग्रस्त स्वामित्व या अन्य कारण से खाली पड़ा है या भग्नावशेष होने के कारण उपद्रवी व्यक्तियों द्वारा न्यूसेंस किए जाने के लिए या सर्पों या अन्य क्षतिकारी पशुओं को आश्रय देने के लिए सुविधा प्रदान कर रहा है तो नगर पंचायत या परिषद् ऐसे भवन या उस भूमि के, जिससे ऐसा भवन संलग्न है, स्वामी से उसकी उचित रूप से सुरक्षा करने या ऐसे भग्नावशेषों को हटाने या समतल करने की, जैसा मामले में अपेक्षित हो, अपेक्षा कर सकेगी ।

135. धारा 133 और धारा 134 के अधीन अध्यपेक्षा की अवज्ञा के लिए शास्ति-किसी गृह या भूमि का ऐसा स्वामी या अधिभोगी, जो धारा 133 और धारा 134 के उपबंधों के अधीन नगर पंचायत या परिषद् द्वारा जारी की गई अध्यपेक्षा का पालन करने में असफल रहता है, ऐसे प्रत्येक व्यतिक्रम के लिए शास्ति का, जो एक हजार रुपए से अधिक की नहीं होगी, और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसी अध्यपेक्षा की उस पर तामील की तारीख से आठ दिन की समाप्ति के पश्चात् व्यतिक्रम जारी रहता है, अतिरिक्त शास्ति का, जो दो सौ रुपए से अधिक की नहीं होगी, भागी होगा ।

136. परिनिर्माण या पुनःपरिनिर्माण के प्रतिषेध के लिए प्रतिकर-प्रतिकर के बारे में इस अधिनियम में के किसी अन्य उपबंध के अधीन रहते हुए, किसी स्वामी द्वारा किसी ऐसे नुकसान के लिए, जो वह किसी भवन के परिनिर्माण के प्रतिषेध के परिणामस्वरूप उठाए, कोई प्रतिकर का दावा नहीं किया जाएगा ।

नालियों से संबंधित शक्तियां

137. क्षतिकर वनस्पति की सफाई के लिए स्वामियों से अपेक्षा करने की शक्ति-नगर पंचायत या परिषद्, सूचना द्वारा, किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह ऐसे समय के भीतर, जो नगर पंचायत या परिषद् नियत करे, किसी वृक्ष या बांस या उसकी शाखाओं को काटे और हटाए या ऐसी वनस्पति और झाड़-झंखाड़ का उन्मूलन करे और उसे नष्ट करे, जो नगर पंचायत या परिषद् को यह प्रतीत होते हों कि वे अस्वास्थ्यकर, स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर या पड़ोस के लिए घृणोत्पादक या किसी फसल के बढ़ने या उगाए जाने के लिए नुकसान या विनाश करने वाली या करने के लिए संभाव्य या किसी सार्वजनिक सड़क पर व्यक्तियों या पशुओं के या सार्वजनिक जलमार्ग पर किसी वाष्प जलयान या नौका के निर्बाध आवागमन के लिए बाधा हो सकते हैं या बाधा पहुंचा सकते हैं ।

138. स्वामी से खराब नाली व्यवस्था में सुधार करने की अपेक्षा करने की शक्ति-जब कभी किसी भूमि के बारे में, जो प्राइवेट संपत्ति है या किसी प्राइवेट अहाते में है, नगर पंचायत या परिषद् को प्रतीत होता है कि वह नाली व्यवस्था के अभाव के कारण स्वास्थ्य के लिए क्षतिकर हालत या पड़ोस के लिए घृणोत्पादक हालत में हो गई है या नाली सुविधा प्रदान करने के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण लोक न्यूसेंस पैदा करेगी तो नगर पंचायत या परिषद् ऐसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी या दोनों से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह पन्द्रह दिन के भीतर ऐसी भूमि से जल निकास की व्यवस्था कर दे या उसे समतल कर दे :

परन्तु यदि इस धारा के अधीन किसी नाली व्यवस्था को प्रभावी बनाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक है कि किसी भूमि को, जो ऐसे व्यक्ति की भूमि नहीं है, जिससे अपनी भूमि में जल निकासी की अपेक्षा की गई है, अर्जित कर ले या किसी अन्य व्यक्ति को प्रतिकर का संदाय करे, तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसी भूमि उपलब्ध कराएगी और ऐसे प्रतिकर का संदाय करेगी ।

139. अस्वास्थ्यकर तालाबों या प्राइवेट परिसरों को स्वच्छ किए जाने या उनमें जल निकास की अपेक्षा करने की शक्ति-(1) नगर पंचायत या परिषद् किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह आठ दिन के भीतर या ऐसी दीर्घतर अवधि के भीतर, जो नगर पंचायत या परिषद् नियत करे, किसी कुंए, जलसरणी, प्राइवेट तालाब या उसमें कुंड को पुनः खुदवाए या अपने विकल्प पर उसे उपयुक्त सामग्री से भरवा दे या उसकी सफाई कराए और किसी अपशिष्ट या स्थिर जल को जो पड़ोस के स्वास्थ्य के लिए क्षति, हानिकर या घृणोत्पादक हो, निस्सारित करे और हटा दे :

परन्तु यदि इस धारा के अधीन किसी जल निकासी को प्रभावी बनाने के प्रयोजन के लिए किसी भूमि को, जो ऐसे व्यक्ति की भूमि नहीं है, जिससे अपनी भूमि से जल निस्सारित करने की अपेक्षा की गई है, अर्जित करना या किसी अन्य व्यक्ति को प्रतिकर देना आवश्यक है, तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसी भूमि उपलब्ध कराएगी या ऐसे प्रतिकर का संदाय करेगी ।

(2) यदि इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन नगर पंचायत या परिषद्, ऐसे पुनः उत्खनन का या उपयुक्त सामग्री से भरवाने का कार्य निष्पादित करती है तो वह उस तालाब या कुंड या ऐसे तालाब या कुंड के स्थल का कब्जा ले सकेगी और उसका कब्जा बनाए रख सकेगी और उसे लाभदायक बनाएगी जब तक कि उससे उपगत व्यय वसूल नहीं हो जाता है ।

140. कुंओं, तालाबों, आदि को सुरक्षित बनाना-यदि कोई कुआं या तालाब या अन्य उत्खनन, चाहे वह सार्वजनिक भूमि पर हो या प्राइवेट भूमि पर हो, पर्याप्त मरम्मत या संरक्षण के अभाव में आने-जाने वालों के लिए खतरनाक है तो यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् सूचना द्वारा ऐसे स्वामी या अधिभोगी से या दोनों से तत्काल यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह आठ दिन के भीतर ऐसे कुंओं, तालाब या अन्य उत्खनन को सुरक्षित या संरक्षित रखे और यदि उक्त अवधि के पश्चात् उक्त कार्य का निष्पादन नहीं किया जाता है तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् आने-जाने वालों के संरक्षण के लिए एक स्थायी बाड़ लगवाएगी और इस प्रकार उपगत व्यय उस भूमि के जिस पर ऐसा कुआं, तालाब या उत्खनन स्थित है, स्वामी या अधिभोगी अथवा स्वामियों या अधिभोगियों से वसूल कर सकेगी ।

141. धारा 137, धारा 138, धारा 139 और धारा 140 के अधीन अध्यपेक्षा की अवज्ञा के लिए शास्ति-यदि किसी गृह या भूमि का स्वामी या अधिभोगी जो धारा 137, धारा 138, धारा 139 और धारा 140 के उपबंधों के अधीन नगर पंचायत या परिषद् द्वारा जारी अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहता है तो वह जुर्माने से जो एक हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा तथा ऐसी अध्यपेक्षा की उस पर तामील होने की तारीख से आठ दिन की समाप्ति के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान व्यतिक्रम जारी रहता है, दो सौ रुपए से अनधिक के अतिरिक्त जुर्माने से दंडनीय होगा ।

142. स्वास्थ्य के लिए हानिकर खेती, खाद के उपयोग या सिंचाई को प्रतिषिद्ध करने की सरकार की शक्ति-यदि चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सेवा निदेशक, राज्य सरकार का लोक स्वास्थ्य अधिकारी या नगरपालिका का स्वास्थ्य अधिकारी या मणिपुर के चिकित्सा विभाग का ऐसा चिकित्सा अधिकारी, जो विहित किया जाए, प्रमाणित करता है कि किसी प्रकार की फसल की खेती या किसी प्रकार के खाद का उपयोग या किसी विनिर्दिष्ट रीति में भूमि की सिंचाई-

(क) नगरपालिका की परिसीमा के भीतर किसी स्थान में पड़ोस में निवास करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकर है ; या

(ख) नगरपालिका की सीमा के भीतर या उसके बाहर किसी स्थान में नगरपालिका के जलप्रदाय को संदूषित करने की संभाव्यता है या अन्यथा उसे पीने के प्रयोजन के लिए अनुपयुक्त बना देती है, तो राज्य सरकार नगरपालिका से आवेदन प्राप्त होने पर लोक सूचना द्वारा ऐसी फसल की खेती, खाद के उपयोग, सिंचाई की किसी पद्धति के उपयोग को जिसका हानिकर होना प्रमाणित कर दिया गया है, प्रतिषिद्ध करेगी या उसके संबंध में ऐसी शर्तें अधिरोपित करेगी जो क्षति को निवारित कर सके ।

143. सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय-नगरपालिका पुरुषों और महिलाओं के पृथक् उपयोग के लिए सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय पर्याप्त संख्या और उचित दशा में उपलब्ध कराएगी और उनको उचित अवस्था में तथा उचित रूप से स्वच्छ रखवाएगी ।

144. सार्वजनिक स्थान की ओर जाने वाली अप्राधिकृत नालियों को तोड़ने की शक्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति नगरपालिका से पहले लिखित अनुज्ञा अभिप्राप्त किए बिना नगरपालिका में निहित किसी सीवर, नाली, जलसरणी, सड़क या भूमि में जाने वाली कोई नाली बनाता है, या बनवाता है या परिवर्तन करता है या परिवर्तन करवाता है तो नगरपालिका ऐसी शाखा नाली को तुड़वा सकेगी, परिवर्तित करा सकेगी, बना सकेगी, या अन्यथा ऐसी रीति में कार्रवाई कर सकेगी जो वह उचित समझे और उससे उपगत व्यय ऐसे व्यक्ति द्वारा संदाय किया जाएगा जो ऐसी शाखा नाली को बनाता है या उसमें परिवर्तन करता है ।

(2) ऐसी शाखा नाली को बनाने वाला या उसमें परिवर्तन करने वाला व्यक्ति ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए ऐसे जुर्माने का, जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, भी भागी होगा ।

145. किसी सीवर आदि के पानी को किसी सार्वजनिक सड़क पर बहने देने के लिए शास्ति-जो कोई किसी सिंक, सीवर, शौचालय, मूत्रालय, मलकुंड या किसी अन्य घृणोत्पादक पदार्थ को, जो उससे संबंधित है या जो उसकी भूमि पर है, किसी सार्वजनिक सड़क पर जाने, जल निकास होने या उस पर फेंकने या उस पर रखने देता है या किसी सार्वजनिक सड़क के पास घृणोत्पादक पदार्थ बहने देता है, जल निकास होने देता है या उसे भूतल नाली में फेंकने देता है तो वह जुर्माने का, जो दो सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, पचास रुपए से अनधिक जुर्माने का दायी होगा ।

146. भूमि के स्वामी से जल निकासी की अपेक्षा करने की शक्ति-यदि किसी ऐसे सीवर, नाली या अन्य निकास के निकट किसी भूमि से जिसमें यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की राय में जल निकासी की जानी है, नगर पंचायत या परिषद् के समाधानप्रद रूप में जल निकासी नहीं की जाती है तो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसी भूमि के स्वामी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह ऐसी भूमि को जल निकासी के लिए एक मास के भीतर, ऐसे सीवर, नाली या निकास से जोड़ दें ।

147. धारा 146 के अधीन अध्यपेक्षा की अवज्ञा के लिए शास्ति-ऐसा कोई व्यक्ति जो धारा 146 के उपबन्ध के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा जारी की गई किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहता है, प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए जुर्माने का जो दो सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा और ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान वह उस पर ऐसी अध्यपेक्षा तामील किए जाने के पश्चात् व्यतिक्रम करता रहेगा, ऐसे अतिरिक्त जुर्माने का जो पचास रुपए से अधिक का नहीं होगा, दायी होगा ।

स्वच्छता और सफाई

148. मल, घृणोत्पादक पदार्थ और कूड़ा-करकट हटाने के लिए स्थापन-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् निम्नलिखित को हटाने की व्यवस्था करेगी :-

(क) सभी सार्वजनिक शौचालयों, मूत्रालयों और जल निकासों से तथा नगरपालिका में निहित सभी सार्वजनिक सड़कों और अन्य संपत्ति से मल, कूड़ा-करकट और घृणोत्पादक पदार्थ; और 

(ख) ऐसी किसी नगरपालिका में, जहां धारा 75 की उपधारा (1) के अधीन शौचालय कर अधिरोपित किया गया है, सभी प्राइवेट शौचालयों,पाखानों, मूत्रालयों, मलकुंडों और अहातों से मल और घृणोत्पादक पदार्थ ।

149. मलवहन स्कीम-नगरपालिका भूमिगत बन्द सीवर के माध्यम से जल प्रवाह द्वारा मल हटाने के लिए मल वहन स्कीम भी आरम्भ कर सकेगी । जब कोई नगरपालिका, अपने क्षेत्र में ऐसी स्कीम आरंभ करती है, तो वह नगरपालिका जहां वह आवश्यक समझे, राज्य सरकार के अनुमोदन से ऐसी स्कीम की लागत और रखरखाव को पूरा करने के लिए अतिरिक्त शौचालय और जल कर उद्गृहीत कर सकेगी ।

150. मल, घृणोत्पादक पदार्थ, कूड़ा-करकट का हटाया जाना-(1) नगरपालिका, समय-समय पर, विहित रीति में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसा समय, जिसके भीतर म[ल और घृणोत्पादक पदार्थ हटाया जा सकता है, वह रीति जिसमें उसे हटाया जाएगा और ऐसा समय भी जिनके भीतर ही किसी गृह या भूमि का प्रत्येक अधिभोगी नगरपालिका द्वारा सार्वजनिक सड़क पर या उसके किनारे पर व्यवस्थित आधान में कूड़ा-करकट रख सकेगा, नियत कर सकेगी । 

                (2) नगरपालिका मल और घृणोत्पादक पदार्थ जमा करने के लिए सुविधाजनक स्थानों की व्यवस्था कर सकेगी और गृहों के अधिभोगियों से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वे प्रतिदिन या अन्य कथित अंतरालों पर ऐसे स्थानों में उसे जमा कराएं और यदि किसी गृह का अधिभोगी ऐसा करने में असफल रहता है, तो उसके खर्चे पर उसे हटवा सकेगी ।

151. सार्वजनिक सड़क पर कूड़ा कचरा रखने के लिए शास्ति-ऐसा कोई व्यक्ति, जो सार्वजनिक सड़क पर या नगरपालिका द्वारा व्यवस्था किए गए आधान में, धारा 150 की उपधारा (1) के अधीन नगरपालिका द्वारा नियत किए गए समय से भिन्न समय पर कूड़ा-करकट रखता है या रखने की अनुज्ञा देता है, ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए जुर्माने से जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दंडनीय होगा ।

152. गन्दगी, आदि हटाने के लिए अधिभोगी पर शास्ति-सार्वजनिक सड़क पर या उसके निकट के किसी भवन का कोई अधिभोगी जो चौबीस घंटे से अधिक के लिए या ऐसे कम समय से अधिक के लिए जो नगरपालिका द्वारा नियत किया जाए, किसी गृह-राख, मल या कोई हानिकर या घृणोत्पादक पदार्थ किसी समुचित आधान से भिन्न आधान या ऐसे गृह में या उस पर या किसी ऐसे गृह से संबद्ध या अधिमुक्त किसी उपगृह, यार्ड या भूतल में रखता है या रखे जाने की अनुज्ञा देता है या ऐसे आधान को गन्दी या घृणित स्थिति में रहने देता है या उनकी सफाई के साधनों का उपयोग करने में उपेक्षा करता है तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दंडनीय होगा ।

153. सार्वजनिक सड़क, आदि पर घृणोत्पादक पदार्थ फेंकने के लिए शास्ति-कोई भी व्यक्ति, जो नगरपालिका की अनुज्ञा के बिना किसी सार्वजनिक सड़क पर कोई मल या घृणोत्पादक पदार्थ फेंकेगा या रखेगा अथवा अपने सेवकों को फेंकने या रखने की अनुज्ञा देगा या जो उसके साथ जुड़ी किसी नाली में कोई मिट्टी, कूड़ा, मल या घृणोत्पादक पदार्थ फेंकेगा या रखेगा या अपने सेवकों को फेंकने या रखने की अनुज्ञा देगा, जुर्माने से जो पांच सौ रुपए से अधिक का नहीं होगा, दंडनीय होगा ।

154. नगर पंचायत या परिषदों के सेवकों की शक्ति-धारा 163 में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए नियोजित, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के सभी सेवक, ऐसे समय के भीतर, जो नगर पंचायत या परिषद् द्वारा नियत किया जाए, ऐसे किसी परिसर में प्रवेश कर सकेंगे, जिसका अधिभोगी या स्वामी शौचालय-कर संदाय करने के लिए दायी है और अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए सभी आवश्यक कार्य कर सकेंगे ।

जल प्रदाय और जल-निकास प्रणाली

155. पेय जल का प्रदाय-(1) यथास्थिति, प्रत्येक नगर पंचायत या परिषद् अपनी अधिकारिता के भीतर के क्षेत्रों के निवासियों के लिए पेय जल की व्यवस्था करेगी या उसके पर्याप्त, प्रदाय का उपबंध करने के लिए व्यवस्था करेगी ।

                (2) यथास्थिति, प्रत्येक नगर पंचायत या परिषद् या नगर पंचायत की या परिषद् की अधिकारिता के भीतर मानव उपभोग के लिए या घरेलू प्रयोजनों के लिए उपयुक्त पेय जल के पर्याप्त और नियमित प्रदाय की व्यवस्था करेगी ।

156. जल प्रदाय के स्रोत के निकट से शौचालयों, आदि का हटाया जाना-नगरपालिका सूचना द्वारा उस स्वामी या अधिभोगी से, जिसकी भूमि पर कोई नाली, शौच स्थान, शौचालय, मूत्रालय, मल-कुंड या गन्दगी या कचरे के लिए अन्य कूड़ेदान विद्यमान हैं, जिससे जल, स्रोता, कुआं, टंकी, जलाशय या अन्य स्रोत की जिनसे जनता के उपयोग के लिए जल पर्याप्त प्राप्त किया जाता है या किया जा सकता है, शुद्धता को खतरा हो सकता है, ऐसी सूचना की तारीख से एक सप्ताह के भीतर उसे हटाने या बन्द करने की अपेक्षा कर सकेगी ।

157. स्वामी या अधिभोगी द्वारा संक्रामक रोग फैलने को रोकने के लिए कदम उठाया जाना-किसी नगरपालिका या उसके किसी भाग में हैजा या अन्य संक्रामक रोग फैलने की दशा में, इस निमित्त अधिसूचित किए जाने पर, स्वामी या अधिभोगी महामारी के जारी रहने के दौरान बिना सूचना के और किसी भी समय किसी कुंए,  टंकी या अन्य स्थान का, जिससे पीने के प्रयोजन के लिए पानी लिया जाता है या लिए जाने की संभावना है, निरीक्षण कर सकेगा और उसका विसंक्रामण कर सकेगा और आगे ऐसी कार्रवाई कर सकेगा, जो वह उससे जल ले जाए जाने को रोकने के लिए ठीक समझे ।

158 नाली या जल संकर्म पर अप्राधिकृत सन्निर्माण या वृक्ष-(1) जहां नगरपालिका की लिखित अनुज्ञा के बिना नगरपालिका में निहित किसी सार्वजनिक नाली, पुलिया या जल संकर्म पर कोई सड़क या रास्ता बनाया गया है या कोई भवन, दीवार, या अन्य संरचना खड़ी की गई है या कोई वृक्ष रोपित किया गया है, वहां नगरपालिका इस अधिनियम के अन्य उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना-

(क) उस व्यक्ति से, जिसने सड़क बनाई है, संरचना खड़ी की है या वृक्ष रोपित किया है या उस भूमि के स्वामी या अधिभोगी से, जिस पर सड़क बनाई गई है, संरचना खड़ी की गई है या वृक्ष रोपित किया गया है, सूचना द्वारा उस सड़क, संरचना या वृक्ष को हटाने या ऐसी अन्य रीति से कार्रवाई करने की अपेक्षा कर सकेगी, जो नगरपालिका ठीक समझे; या

(ख) उस सड़क, संरचना या वृक्ष को स्वयं हटा सकेगी या किसी अन्य रीति से कार्रवाई कर सकेगी, जो वह ठीक समझे ।

                (2) नगरपालिका द्वारा उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन की गई कार्रवाई के लिए उपगत व्यय उस व्यक्ति से वसूलीय होगा जिसके द्वारा सड़क या रास्ता बनाया गया है, संरचना खड़ी की गई है या वृक्ष रोपित किया गया है ।

शवों के व्ययन के लिए कब्रिस्तान और श्मशान

159. कब्रिस्तानों और श्मशानों के बारे में शक्तियां-(1) नगरपालिका, समय-समय पर, नगरपालिका निधि में से या तो नगरपालिका की सीमाओं के भीतर या उनके बाहर कब्रिस्तानों या श्मशानों के रूप में उपयोग किए जाने के लिए उपयुक्त स्थानों का उपबंध कर सकेगी और उन स्थानों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों से ऐसी फीसें प्रभारित कर सकेगी, जो उपविधियों द्वारा, जो उस निमित्त बनाई जाएं, नियत की जाएं ।

                (2) नगरपालिका, लोक सूचना द्वारा, नगरपालिका सीमाओं के भीतर स्थित किसी कब्रिस्तान या श्मशान को या ऐसी सीमाओं के बाहर किसी नगरपालिका-कब्रिस्तान या श्मशान को, जिसे, चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सेवा निदेशक या राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य अधिकारी या नगरपालिका स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा पड़ोस में निवास करने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होना प्रमाणित किया जाता है, सूचना में विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख से बन्द करने का आदेश दे सकेगी, और ऐसी स्थिति में, यदि समुचित दूरी के भीतर कोई कब्रिस्तान या श्मशान विद्यमान नहीं है, तो उस प्रयोजन के लिए उपयुक्त स्थान की व्यवस्था करेगी ।

                (3) यदि कोई व्यक्ति, नगरपालिका की अनुज्ञा के बिना, किसी शव को ऐसे स्थान पर, जो इस धारा के उपबन्धों के अनुसार बनाया गया या तैयार किया गया कोई कब्रिस्तान या श्मशान नहीं है या उस कब्रिस्तान या श्मशान को बन्द किए जाने के लिए उसमें नियत तारीख के पश्चात् दफनाएगा या दाह कर्म करेगा या दफनाने या उसका दाह कर्म करने की अनुज्ञा देगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

                (4) प्राइवेट कब्रिस्तानों को उक्त आदेश से ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो नगरपालिका इस निमित्त अधिरोपित करे, छूट दी जा सकेगी :

                परन्तु ऐसे कब्रिस्तानों की सीमाएं पर्याप्त रूप से परिनिश्चित की गई हों और उनका उनके स्वामियों के कुटुम्ब के सदस्यों को दफनाने के लिए ही उपयोग किया जाएगा ।

                (5) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् नगरपालिका के भीतर कोई प्राइवेट कब्रिस्तान या श्मशान नगरपालिका की लिखित अनुज्ञा के बिना नहीं बनाया जाएगा ।

                160. अकिंचन और अदावाकृत शवों को दफनाना-नगरपालिका, समय-समय पर, नगरपालिका निधि में से नगरपालिका की सीमाओं के भीतर अकिंचन और अदावाकृत शवों को निशुल्क दफनाने या उनका दाह संस्कार करने के लिए उपबन्ध या उनके अन्यथा व्ययन के लिए, जो वह ठीक समझे, व्यवस्था कर सकेगी ।

161. मृतक के धार्मिक मत के अनुसार शवों का दाह कर्म कराने या दफन कराने की शक्ति-किसी व्यक्ति की मृत्यु से कम से कम चौबीस घंटे की समाप्ति के पश्चात्, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसे व्यक्ति के शव का दाह संस्कार करवाएगी या उसे दफन करवाएगी और उसके द्वारा उपगत व्यय ऐसे व्यक्ति की संपदा से शोध्य ऋण के रूप में वसूलीय होंगे । ऐसे प्रत्येक मामले में शव का व्ययन, यथासंभव मृत व्यक्ति के धार्मिक मत से संगत रीति में किया जाएगा ।

अध्याय 11

अन्य शक्तियां और शास्तियां

बाजार और वधशालाएं

162. बाजारों की स्थापना-नगरपालिका, जनता की सुविधा के लिए नगरपालिका के उपयुक्त स्थानों पर बाजार स्थापित कर सकेंगी और उनका अनुरक्षण कर सकेगी ।

163. नगरपालिका बाजार से व्यक्तियों को हटाने की शक्ति-यदि नगर पंचायत या परिषद् द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि किसी नगरपालिका बाजार में किसी स्टाल या स्थान का अधिभोगी कोई व्यक्ति स्टाल या स्थान के अप्राधिकृत अधिभोग में है या अधिभोग में रखने का प्राधिकार समाप्त हो जाने के पश्चात् स्टाल या स्थान का अधिभोग बनाए रखता है, तो वह नगर पंचायत या परिषद् की पूर्व मंजूरी से ऐसे व्यक्ति से ऐसी अवधि के भीतर, जो अध्यपेक्षा में उल्लिखित हो, स्टाल या स्थान को रिक्त करने की अपेक्षा कर सकेगा, और ऐसे व्यक्ति को ऐसी शास्ति के अतिरिक्त, जिसके लिए वह इस अधिनियम के अधीन दायी हो सकता है, स्टाल या स्थान से संक्षिप्ततया हटाया जा सकेगा ।

164. विक्रय के लिए पशुओं के वध के लिए स्थान-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद्, और जब सरकार द्वारा अपेक्षित हो, विक्रय के लिए पशुओं के वध के लिए राज्य सरकार के अनुमोदन से स्थान नियत करेगी और नगर पंचायत या परिषद् ऐसे परिसरों के उपयोग के लिए अनुज्ञप्ति मंजूर कर सकेगी और उसे वापस ले सकेगी, अथवा, यदि वे नगर पंचायत या परिषद् में निहित हैं तो उन स्थानों के उपयोग के लिए किराया या फीस प्रभारित कर सकेगी ।

                (2) जब ऐसे कोई परिसर नियत कर दिए गए हों तो कोई व्यक्ति नगरपालिका क्षेत्र के भीतर किसी अन्य स्थान पर विक्रय के लिए किसी ऐसे पशु का वध नहीं करेगा ।

                (3) कोई व्यक्ति जो इस धारा के अधीन, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा नगरपालिका क्षेत्र के भीतर नियत किए गए स्थान से भिन्न किसी स्थान पर विक्रय के लिए किसी पशु का वध करता है, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

165. वध के पूर्व और पश्चात् निरीक्षण-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी पशु को मारे जाने के पूर्व किसी पशु सर्जन या सक्षम व्यक्ति द्वारा पशु के निरीक्षण के लिए इंतजाम करेगी और खाद्य के रूप में उपयोग के लिए मांस के, उपविधियों द्वारा अधिकथित रूप में प्रमाणीकरण के प्रयोजन के लिए मांस और अंगों के निरीक्षण के लिए भी व्यवस्था कर सकेगी ।

166. बूचड़ों को अनुज्ञप्ति देना-कोई भी व्यक्ति नगरपालिका से अनुज्ञप्ति के सिवाय बूचड़ की वृत्ति नहीं करेगा ।

कतिपय व्यवसायों, वृत्तियों आदि से न्यूसेंस

167. घृणोत्पादक व्यवसायों का विनियमन-(1) यदि नगर पंचायत या परिषद् के समाधान के लिए यह दर्शित कर दिया जाता है कि नगरपालिका की सीमाओं के भीतर किसी भवन या स्थान का, जिसका कोई व्यक्ति कारखाने के रूप में अथवा किसी वस्तु के विनिर्माण, भण्डारण, अभिक्रिया या व्ययन के लिए कारबार के अन्य स्थान के रूप में प्रयोग करता है या प्रयोग करने का आशय रखता है जिससे ऐसे प्रयोग के कारण अथवा ऐसे आशयित उपयोग के कारण पब्लिक न्यूसेंस होता है या कारित होने की संभावना है तो नगर पंचायत या परिषद् स्वविकल्प पर, उक्त भवन या स्थान के स्वामी या अधिभोगी से यह अपेक्षा कर सकेगी,- 

(क) कि वह ऐसे प्रयोजन के लिए भवन या स्थान के उपयोग से या उपयोग की अनुज्ञा देने से, यथास्थिति, विरत रहे या बचे, या 

(ख) कि वह भवन या स्थान केवल ऐसे प्रयोजनों के लिए, ऐसी शर्तो के अधीन अथवा ऐसे संरचात्मक परिवर्तनों के पश्चात् ही उपयोग करे या उपयोग करने दे जो नगर पंचायत या परिषद् भवन या स्थान का ऐसे प्रयोजन के लिए आक्षेप से मुक्त उपयोग करने के उद्देश्य से सूचना में अधिरोपित या विहित करे ।

                (2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन दी गई सूचना प्राप्त करने के पश्चात् किसी भवन या स्थान का उपयोग सूचना के उल्लंघन में करता है या उपयोग करने देता है, वह जुर्माने से जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसमें वह प्रथम दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् ऐसे भवन या स्थान का प्रयोग करता है या प्रयोग करने देता है, चार सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

168. कतिपय घृणोत्पादक और खतरनाक व्यवसायों का नगरपालिका द्वारा नियत की गई सीमाओं के भीतर अनुज्ञप्ति के बिना स्थापित किया जाना-(1) ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर जो नगरपालिका द्वारा नियत की जाएं, किसी स्थान का नगरपालिका से अनुज्ञप्ति लिए बिना, जो वार्षिक रूप से नवीकरणीय होगी, निम्नलिखित किसी प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा, अर्थात् :-

                                (क) पशु वसा पिघलाना;

                                (ख) सड़ा-गला मांस या रक्त उबालना;

                                (ग) किसी पशु की खाल उतारना या अंतड़ियां निकालना;

                                (घ) किसी भट्ठे, पंजा या लैम्प में अथवा किसी अन्य समरूप पद्धति द्वारा ईंट, पॉंटरी, टाइल या चूने का विनिर्माण;

                                (ङ) साबुन घर, तेल उबालने का घर, रंगाई के घर के रूप में;

                                (च) चर्म शोधन गृह, वधशाला के रूप में;

                                (छ) ऐसे विनिर्माण या कारबार के स्थान के रूप में जिससे घृणोंत्पादक या अस्वास्थ्यप्रद गंध उत्पन्न हो सकती है;

(ज) किसी व्यवसाय के प्रयोजन के लिए घास, डंठल, बांस, फूस, जूट या अन्य खतरनाक रूप से ज्वलनशील सामग्री के लिए यार्ड या डिपो के रूप में; 

(झ) मिट्टी का तेल, पेट्रोलियम, नपथमकोल-तार या किसी ज्वलनशील तेल के लिए अथवा सौ ग्रुस से अधिक माचिसों के थोक स्टाक के लिए में भंडार गृह के रूप में;

(ञ) मांस के विक्रय के लिए दुकान के रूप में;

(ट) गूदड़ या हड्डियों या दोनों के भंडारण के लिए स्थान के रूप में;

(ठ) टी-स्टाल;

(ड) मिष्ठान स्टाल;

(ढ) होटल या भोजनालय;

(ण) बातित जल;

(त) बेकरी, जिसमें बिस्कुट कारखाना भी है ।

                (2) ऐसी अनुज्ञप्ति तब तक विधारित नहीं की जाएगी जब तक कि नगरपालिका के पास यह विश्वास करने का कारण न हो कि वह कारबार, जिसे स्थापित करने या बनाए रखने का आशय है, पास-पड़ोस में निवास करने वाले या प्रायः वहां आने-जाने वाले व्याक्तियों के लिए घृणोत्पादक या खतरनाक होगा ।

                (3) नगरपालिका, ऐसे निर्बंधनों के, यदि कोई हों जो वह अधिरोपित करे, अधीन रहते हुए, इस धारा के उपबन्धों का विस्तार कोयला, कोक, टिम्बर या काष्ठ व्यवसाय के यार्डों या डिपों पर कर सकेगी ।

                (4) उपधारा (1) के खण्ड (झ) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए अनुज्ञप्ति की मंजूरी, पेट्रोलियम अधिनियम, 1934(1934 का 30) के उपबन्धों के संगत होगी और ऐसी कोई अनुज्ञप्ति तब तक अनुदत्त नहीं की जाएगी जब तक कि अनुज्ञप्ति के लिए आवेदक द्वारा उक्त उपबन्ध का अनुपालन न कर दिया गया हो ।

169. सिनेमा, नाट्य अभिनय, सर्कस आदि-(1) नगरपालिका के भीतर कोई भी स्थान लोक सिनेमाटोग्राफिक प्रदर्शनी, नाट्य अभिनय, सर्कस, बैराइटी शो के द्वारा नियमित अभिलाभ या अन्यथा प्रयोजनों के लिए या ऐसे ही मनोरंजन या विनोद के लिए लोक विहारों के स्थान के रूप में तब तक खुला नहीं रखा जाएगा जब तक कि उसके लिए नगरपालिका द्वारा अनुज्ञप्ति प्रदान न कर दी गई हो और वह अनुज्ञप्ति वार्षिक रूप से नवीकरणीय होगी और ऐसी शर्तों के अनुसार होगी जिन्हें नगरपालिका नियमों के अधीन रहते हुए, अधिरोपित करना उचित समझे :

                परन्तु ऐसी शर्तें किसी ऐसी अनुज्ञप्ति के निबंधनों से असंगत नहीं होंगी जो किसी अन्य अधिनियम के अधीन ऐसे स्थानों के लिए अपेक्षित हों ।

                (2) नगरपालिका के भीतर किसी स्थान का, लोक सिनेमाटोग्राफिक अभिनय, सर्कस, वैराइटी शो के प्रयोजन के लिए या लोक विहारों के स्थान के रूप में ऐसे ही विनोद या मनोरंजन के प्रयोजन के लिए, जो नियमित अभिलाभ से भिन्न प्रयोजन के लिए हो, तब तक प्रयोग नहीं किया जाएगा जब तक कि नगरपालिका द्वारा उसके लिए, और ऐसी शर्तों के अनुसार जो नगरपालिका नियमों के अधीन रहते हुए अधिरोपित करना उचित समझे, कोई अनुज्ञप्ति प्रदान न कर दी जाएः 

                परन्तु ऐसी शर्तें किसी ऐसी अनुज्ञप्ति के निबंधनों से अंसगत नहीं होंगी जो किसी अन्य अधिनियम के अधीन ऐसे स्थानों के लिए अपेक्षित हो :

                परन्तु यह और कि यह उपधारा प्राइवेट कला प्रेमी अभिनयों या किसी ऐसे स्थान में पूर्णतः पूर्त के फायदे के लिए किए गए अभिनयों को लागू नहीं होगी ।

                (3) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए किसी आवेदन की प्राप्ति के आगामी तीन मास की अवधि के भीतर, नगर पंचायत या परिषद् ने किसी अधिवेशन में अनुज्ञप्ति मंजूर करने या उसे नामंजूर करने के लिए उस पर कोई आदेश पारित नहीं किया है तो अनुज्ञप्ति मंजूर की गई समझी जाएगी ।

170. अनुज्ञप्तियों का रद्दकरण, प्रतिसंहरण, आदि-धारा 196 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नगरपालिका द्वारा धारा 169 के अधीन मंजूर की गई कोई अनुज्ञप्ति उसके द्वारा किसी भी समय निलंबित या प्रतिसंहृत की जा सकेगी, यदि प्राप्तिकर्ता द्वारा अनुज्ञप्ति के साथ संलग्न किसी निर्बन्धन परिसीमा या शर्तों का अपवंचन या अतिलंघन किया जाता है या यदि प्राप्तिकर्ता को इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए नियम या उपविधि के उपबन्धों में से किसी उपबन्ध का किसी ऐसे विषय के संदर्भ में, जिससे उक्त अनुज्ञप्ति संबंधित है, किसी भंग के लिए दोषसिद्ध किया जाता है या यदि प्राप्तिकर्ता ने उसे मिथ्या व्यपदेश या कपट द्वारा प्राप्त किया है ।

171. अनुज्ञप्तियों की नामंजूरी निलंबन के आदेश का प्रकाशन-धारा 169 या धारा 170 के अधीन, यथास्थिति, कोई अनुज्ञप्ति मंजूर, नामंजूर, निलंबित, प्रतिसंहृत या उपांतरित करने वाला प्रत्येक आदेश लिखित में होगा और उसमें उन आधारों का विवरण होगा जिन पर वह कार्यवाही करता है, और उसे नगर पंचायत या परिषद् के कार्यालय के सूचना पट्ट पर प्रकाशित किया जाएगा और आदेश के चौदह दिन के भीतर संबधित परिसर के स्वामी पर भी तामील किया जाएगा ।

172. बाजार, टी स्टाल; आदि बंद कराने की शक्ति-(1) यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोक के फैलने से निवारित करने की दृष्टि से, आदेश कर सकेगी कि नगरपालिका के भीतर कोई बाज़ार टी स्टाल, या रेस्तरां, होटल या बासा किसी विनिर्दिष्ट समय के लिए बंद कर दिया जाए या किसी व्यक्ति को किसी ऐसे बाजार, टी-स्टाल या रेस्तरां होटल या बासा में जाने से निषिद्ध कर दिया जाए ।

                (2) उक्त आदेश, ऐसी रीति में और ऐसे स्थानों पर अधिसूचित किया जाएगा जैसा कि नगर पंचायत या परिषद् निदेश करे और उसकी सूचना बाजार के स्वामी, अधिभोगी या विक्रेता पर या होटल, बासा, टी-स्टाल या रेस्तरां चलाने वाले पर तामील की जाएगी ।

                (3) सूचना का पालन करने के पश्चात् बाजार का स्वामी या अधिभोगी या विक्रेता या होटल या बासा, टी-स्टाल या रेस्तरां चलाने वाला या कोई हितबद्ध व्यक्ति, यदि वह सूचना को अनुचित समझता है तो, उपायुक्त को अपील कर सकेगा और उपायुक्त का आदेश अंतिम होगा ।

                (4) जब कोई आदेश उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित कर दिया गया है और उपधारा (3) के अधीन अपास्त नहीं किया गया है तो किसी बाजार का ऐसा कोई स्वामी, अधिभोगी या विक्रता या होटल या बासा, टी-स्टाल या रेस्तरां चलाने वाला, जो बाजार, होटल या बासा, टी-स्टाल या रेस्तरां बंद करने की उपेक्षा करता है, ऐसे जुर्माने का जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, भागी होगा और ऐसा कोई व्यक्ति, जो आदेश के निबंधनों के उल्लंघन में ऐसे बाजार, होटल या बासा, टी-स्टाल या रेस्तरां में जाता है, ऐसे जुर्माने का जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगा, भागी होगा ।

संक्रामक या सांसर्गिक रोग

173. हैजा की सूचना देने में असफल रहने के लिए शास्ति-जो कोई- 

(क) एक चिकित्सा व्यवसायी होते हुए व्यवसाय के अनुक्रम में हैजा, प्लेग, चेचक या अन्य संक्रामक रोगों के, जो राज्य सरकार द्वारा इस बाबत अधिसूचित किए जाएं, नगरपालिका क्षेत्र में सार्वजनिक अस्पताल से भिन्न किसी निवास-गृह में होने का संज्ञान रखता है; या 

(ख) ऐसे निवास-गृह का स्वामी या अधिभोगी होते हुए उसमें किसी ऐसे संक्रामक रोग के होने का संज्ञान रखता है; या

(ग) ऐसे निवास-गृह में किसी ऐसे संक्रामक रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति का भारसाधक या परिचर्या करने वाला व्यक्ति होते हुए उसमें रोग के होने का संज्ञान रखता है,

ऐसा संज्ञान होने के चौबीस घंटे के भीतर जानकारी देने में असफल रहता है या किसी ऐसे अधिकारी को जिसे यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसे रोग के होने के संबंध में इस निमित्त नियुक्त करे, मिथ्या जानकारी देता है तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

174. भवनों और वस्तुओं का विसंक्रामण-(1) यदि, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् की यह राय है कि किसी भवन या भवन के किसी भाग की अथवा उसमें की किसी वस्तु की, जिसके संक्रमित होने की संभावना है, सफाई या विसंक्रामण करने से किसी रोग का फैलना निवारित होगा या रुकेगा तो वह स्वामी या अधिभोगी से, सूचना द्वारा, उसकी सफाई या विसंक्रमण उस रीति से और उतने समय के भीतर, जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

                (2) यदि-

(क) सूचना की प्राप्ति से पूर्वोक्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर कोई व्यक्ति, जिस पर भवन या उसके किसी भाग को या किसी वस्तु को विसंक्रामित कराने की सूचना की तामील की जाती है; या

(ख) यथास्थिति, स्वामी या अधिभोगी अपनी सहमति देता है, तो नगर पंचायत या परिषद् ऐसे स्वामी या अधिभोगी के खर्च पर भवन की या उसके किसी भाग की और वस्तुओं की सफाई करा सकेगी और उसे विसंक्रामित करा सकेगी :

                परन्तु नगर पंचायत या परिषद् अपने विवेकानुसार ऐसा संपूर्ण खर्च या उसके किसी भाग का संदाय कर सकेगी ।

175. संक्रमित भवन को किराए पर देने के लिए शास्ति-ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो किसी ऐसे मकान या अन्य भवन या किसी मकान या भवन के किसी भाग को, जिसमें किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित कोई व्यक्ति रहा था, ऐसे मकान या अन्य भवन या उसके भाग को और उसमें की सभी वस्तुओं को, जो संक्रमित हो सकती है, नगर पंचायत या परिषद् के समाधान के लिए विसंक्रमित किए बिना जानबूझकर किराए पर देता है तो वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

                स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए किसी होटल या बासा को चलाने वाले के बारे में जिसने होटल या बासा में किसी व्यक्ति को मेहमान के रूप में रखा है, यह माना जाएगा कि उसने मकान के भाग को किराए पर दिया है ।

176. रोग के फैलाने को निवारित करने के प्रयोजन के लिए प्रवेश की शक्ति-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी अधिकारी को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी भी समय तीन घंटे की सूचना देने के पश्चात् ऐसे किसी भवन या परिसर में, जिसमें किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग के होने की सूचना दी गई है या संदेह किया गया है, ऐसे भवन या परिसर के निरीक्षण के प्रयोजन के लिए प्रवेश करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी । उक्त अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर नगर पंचायत या परिषद् को यह घोषित करने की शक्ति होगी कि कोई व्यक्ति सांसर्गिक रोग से पीड़ित है और वह मकान संक्रामक है ।

177. संक्रामक रोग से पीड़ित रोगियों को अस्पताल में ले जाया जाना-किसी नगरपालिका में जब संक्रामक रोग से पीड़ित कोई ऐसा व्यक्ति पाया जाता है जो-

                                (क) उचित बासा या वास-सुविधा के बिना रह रहा है, या

                                (ख) किसी सराय या अन्य सार्वजनिक होस्टल में रह रहा है, या

(ग) किसी ऐसे कमरे या मकान में रह रहा है, जिसका न तो वह और न ही कोई अन्य, जिसका वह आश्रित है, स्वामी है या किराए का संदाय करता है तो,

यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् किसी सहायक सर्जन की सलाह पर इसके द्वारा इस बाबत प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा रोगी को किसी अस्तपाल या ऐसे स्थान पर ले जा सकेगी जहां ऐसे रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को चिकित्सीय उपचार के लिए लिया जाता है और ऐसे ले जाए जाने के लिए आवश्यक कोई भी कार्य कर सकेगी ।

उद्यान, क्रीड़ा-स्थल और खुले स्थान

178. नगरपालिका द्वारा आमोद-प्रमोद के लिए स्थानों का प्रबन्ध किया जाना-नगरपालिका, जनता के उपयोग और उपभोग के लिए खुले स्थानों, उद्यानों, क्रीड़ा-स्थल, संयुक्त तरणतालों और सुख-सुविधाओं का प्रबंध कर सकेगी और उनके उपयोग को विनियमित करने के लिए उपविधियां बना सकेगी ।

179. कांजी हौस के संबंध में कृत्य और शक्तियां-प्रत्येक नगरपालिका, कांजी हौस स्थापित करने, उनकी व्यवस्था करने और प्रबंध के संबंध में ऐसे कृत्यों का पालन करेगी, जो पशु अतिचार अधिनियम, 1871 (1871 का 1) की धारा 31 के अधीन अधिसूचना द्वारा उसे अंतरित किए जाएं और इस प्रकार अंतरित किए जाने पर इस धारा के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार कांजी हौस को पट्टे पर देगी ।

अध्याय 12

प्रक्रिया

180. सूचना की तामील-(1) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक सूचना, बिल, प्ररूप, समन या मांग की सूचना,-

                                (क) उस व्यक्ति को, जिसको वह संबोधित की गई है, व्यक्तिगत रूप से तामील या प्रस्तुत की जा सकेगी, या

(ख) यदि वह इस प्रकार तामील, प्रस्तुत या परिदत्त नहीं की जा सकती है तो उसके निवास-स्थान के या उस भूमि, भवन या अन्य वस्तु के, जिसके संबंध में सूचना, बिल, प्ररूप समन या मांग की सूचना तामील किए जाने के लिए आशयित है, किसी सहजदृश्य भाग पर लगाई जा सकेगी; या

(ग) रजिस्ट्रीकृत लिफाफे में डाक  द्वारा भेजी जा सकेगी ।

                (2) प्रत्येक ऐसी सूचना, बिल, प्ररूप, समन या मांग की सूचना पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या उस निमित्त अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे या उस पर उनके प्रतिरूप होंगे ।

181. कार्य के किए जाने के लिए उचित समय नियत किया जाना-जब इस अधिनियम के अधीन किसी सूचना में, कोई ऐसा कार्य किया जाना अपेक्षित है, जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा कोई समय नियत नहीं किया गया है, नगर पंचायत या परिषद् उसके किए जाने के लिए उचित समय नियत करेगी ।

182. भूमि के स्वामी या अधिभोगी पर सूचना की तामील-जब किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी को या दोनों को किसी सूचना का दिया जाना अपेक्षित हो तो स्वामी या अधिभोगी या दोनों को संबोधित उक्त सूचना जैसा अपेक्षित हो, उक्त भूमि के अधिभोगी पर या अन्यथा, धारा 180 में उल्लिखित रीति में तामील की जाएगी :

                परन्तु जब नगर पंचायत या परिषद् या सूचना जारी करने वाले अन्य प्राधिकारी को स्वामी और उसके निवास स्थान की जानकारी है तो वे, यदि उक्त निवास-स्थान उनके प्राधिकार की परिसीमाओं के भीतर है, ऐसी सूचना उक्त स्वामी पर तामील कराएंगे या उसके कुटुम्ब के किसी वयस्क सदस्य या सेवक को देंगे और यदि स्वामी का निवास-स्थान ऐसी परिसीमाओं के भीतर नहीं है, तो वे प्रत्येक ऐसी सूचना को, उसके निवास-स्थान के पते पर रजिस्ट्रीकृत लिफाफे में डाक द्वारा भेजेंगे और ऐसी तामील, सूचनाओं की उचित तामील समझी जाएगीः

                परन्तु यह और कि जब स्वामी या अधिभोगी या दोनों के नाम ज्ञात न हों, तो उसे या उन्हें उस भूमि के जिसकी बाबत सूचना की तामील की गई है, स्वामी" या अधिभोगी" के रूप में अभिहित किया जाना पर्याप्त होगा ।

183. नगर पंचायत या परिषद् द्वारा स्वामी या अधिभोगियों को कार्य निष्पादित करने के लिए अपेक्षित किए जाने पर प्रक्रिया-(1) जहां कहीं भी इस अधिनियम में यह उपबंधित किया गया है कि नगर पंचायत या परिषद् किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी से या दोनों से किसी कार्य को निष्पादित करने या कोई काम करने की अपेक्षा करे, ऐसी अपेक्षा, जहां तक संभव हो, प्रत्येक स्वामी या अधिभोगी को, जिससे उक्त कार्य को निष्पादित करने या उक्त काम को करने के लिए अपेक्षा की गई है धारा 180 और धारा 182 में यथाउपबंधित तामील की जाने वाली किसी सूचना द्वारा की जाएगी, किन्तु ऐसे व्यक्तियों के संबंध में, जो स्वामी या अधिभोगी हैं, कोई संदेह होने पर उक्त अध्यपेक्षा, किसी भूमि के स्वामी या अधिभोगी या दोनों से उक्त सूचना का निष्पादन करने की अपेक्षा करते हुए, उस स्थल पर या उसके निकट जहां कार्य को निष्पादित किया जाना या काम का किया जाना अपेक्षित है, चिपका कर या डाक द्वारा सूचना भेजकर की जा सकेगी । यह आवश्यक नहीं होगा कि स्वामियों या अधिभोगियों के नाम दिए जाएं ।

(2) ऐसी प्रत्येक अध्यपेक्षा में, उस व्यक्ति को, जिसे वह संबोधित की गई है यह सूचना दी जाएगी कि यदि वे अध्यपेक्षा का पालन करने में असफल रहेंगे या इसकी पश्चात्वर्ती धारा 184 में यथाउपबंधित उक्त अध्यपेक्षा के विरुद्ध कोई आक्षेप करेंगे तो नगरपालिका उस भूमि पर प्रवेश कर सकेगी और अपेक्षित कार्य निष्पादित करवा सकेगी या अपेक्षित काम करवा सकेगी, और यह कि ऐसी दशा में उसके द्वारा उपगत व्यय उस व्यक्ति से वसूल किया जाएगा, जिससे उक्त कार्य को निष्पादित करने या उक्त काम को करने की उस अध्यपेक्षा में अपेक्षा की गई है ।

184. किसी कार्य का निष्पादन करने के लिए अपेक्षित व्यक्ति नगरपालिका को आक्षेप कर सकते हैं-कोई व्यक्ति, जिससे उस अध्यपेक्षा द्वारा किसी कार्य को निष्पादित करने या किसी बात को करने की अपेक्षा की गई है, अपेक्षित कार्य को निष्पादित करने या काम करने के बजाय, अध्यपेक्षा वाली अधिसूचना को चिपका कर या प्रविष्टि करके सूचना की तामील के किए जाने के पन्द्रह दिन के भीतर या यदि वह समय, जिसके भीतर उसके द्वारा अध्यपेक्षा का अनुपालन किया जाना अपेक्षित है, पन्द्रह दिन से कम है, तो ऐसे कम समय के भीतर ऐसी अपेक्षा के विरुद्ध नगरपालिका को लिखित में कोई आक्षेप कर सकेगा ।

185. आक्षेप करने वाले व्यक्ति द्वारा यह अभिकथन करने पर कि कार्य में तीन हजार रुपए से अधिक खर्च होगा, प्रक्रिया-यदि आक्षेपकर्ता यह अभिकथन करता है कि कार्य को निष्पादित करने या अपेक्षित काम को करने का खर्च तीन हजार रुपए से अधिक होगा तो ऐसा आक्षेप नगरपालिका द्वारा एक अधिवेशन में सुना जाएगा और निपटाया जाएगा जब तक कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष यह प्रमाणित नहीं कर देता कि उक्त खर्च तीन हजार रुपए से अधिक नहीं होगा और उस दशा में आक्षेप अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा सुना जाएगा और निपटाया जाएगा :

                परन्तु ऐसी किसी भी दशा में जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा अपनी राय को प्रमाणित किया गया हो और उसके परिणामस्वरूप, आक्षेप अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा सुना गया और निपटाया गया हो, आक्षेप करने वाला व्यक्ति यदि उससे की गई अपेक्षा को उसके आक्षेप की सुनवाई करने पर वापस नहीं किया गया है, कार्य निष्पादित करने या अपेक्षित काम को करने के खर्च के रूप में नगरपालिका को तीन हजार रुपए की उक्त रकम का संदाय करेगा, तत्पश्चात् ऐसा व्यक्ति कार्य को निष्पादित करने या अपेक्षित काम को करने के संबंध में और उसके व्यय को संदाय करने की बाबत दायित्वों और आगे से सभी बाध्यताओं से निर्मुक्त हो जाएगा और नगरपालिका उक्त कार्य को स्वयं निष्पादित करेगी या उक्त काम को करेगी और उसके लिए आवश्यक सभी शक्तियों का प्रयोग करेगी ।

186. अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा आक्षेप की सुनवाई के पश्चात् आदेश किया जाना-यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, आक्षेप की सुनवाई और ऐसी कोई जांच करने के पश्चात् जिसे वे आवश्यक समझे, उस अध्यपेक्षा को, जिसके विरुद्ध आक्षेप किया गया है, वापस लेने, उपांतरित करने या स्पष्ट करने वाला कोई आदेश अभिलिखित करेगा और यदि उक्त आदेश के द्वारा अध्यपेक्षा को वापस नहीं लिया गया है तो वह ऐसा समय विनिर्दिष्ट करेगा, जिसके भीतर अध्यपेक्षा को पूरा किया जाएगा जो उस न्यूनतम समय से कम नहीं होगा, जो इस अधिनियम के अधीन मूल अध्यपेक्षा में उल्लिखित किया गया हो ।

187. कार्यों का निष्पादन करने में व्यक्तियों के असफल रहने पर नगरपालिका की शक्ति-यदि कार्य का निष्पादन करने या काम करने के लिए अपेक्षित व्यक्ति, उपयुक्तानुसार किसी अध्यपेक्षा में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उक्त कार्य का निष्पादन आरम्भ करने या उक्त काम को करने में असफल रहता है/रहते हैं और उसके पश्चात्, उसके पूरे होने तक, नगरपालिका के समाधान के लिए उसका तत्परतापूर्वक निष्पादन करना आरंभ करता है/करते हैं तो नगरपालिका या उस बाबत इसके द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति स्थल पर या उसके निकट चिपकाए या प्रविष्ट की जाने वाली किसी अधिसूचना द्वारा अपने आशय की अड़तालीस घंटे की सूचना के पश्चात्, भूमि पर प्रवेश कर सकेगी और कार्य के निष्पादन या अपेक्षित काम को करने के लिए आवश्यक सभी कृत्यों का अनुपालन करेगी, और उसके द्वारा उपगत व्यय, यथास्थिति, स्वामी द्वारा या अधिभोगी द्वारा संदत्त किया जाएगा, यदि उक्त अध्यपेक्षा स्वामी या अधिभोगी को संबोधित की गई थी ।

188. स्वामियों और अधिभोगियों के बीच व्यय प्रभाजित करने की शक्ति-(1) जब कभी नगरपालिका द्वारा उपगत कोई व्यय धारा 187 में यथाउपबंधित किसी भूमि के स्वामियों द्वारा संदत्त किए जाने हैं तब नगरपालिका, यदि स्वामी एक से अधिक हैं, उक्त व्ययों को, ऐसे स्वामियों के बीच, जो ज्ञात हों, ऐसी रीति से जिसे नगरपालिका ठीक समझे, प्रभाजित कर सकेगी ।

                (2) जब कभी कोई ऐसा व्यय, धारा 187 में यथा उपबंधित, किसी भूमि के अधिभोगियों द्वारा किए जाने हैं, संदत्त तब नगरपालिका, यदि अधिभोगी एक से अधिक हों, उक्त व्ययों को ऐसे अधिभोगियों के बीच जो ज्ञात हों, ऐसी रीति से, जिसे नगरपालिका ठीक समझे, प्रभाजित कर सकेगी ।

189. स्वामियों और अधिभोगियों के बीच प्रभाजन-जब कभी नगरपालिका द्वारा उपगत कोई व्यय धारा 187 में यथा उपबंधित किसी भूमि के स्वामियों या अधिभोगियों द्वारा संदत्त किए जाने हैं तब नगरपालिका द्वारा उक्त व्यय ऐसे स्वामियों और अधिभोगियों या उनमें से ऐसों के बीच जो इस प्रकार जाने/जाते हैं, ऐसी रीति से जिसे नगरपालिका ठीक समझे, प्रभाजित किए जा सकेंगे ।

190. अधिभोगी अपनी लागत पर निष्पादित किए गए कार्यों के खर्च को स्वामी से वसूल कर सकेंगे-जब कभी कोई संकर्म या परिवर्तन और सुधार, जिनके लिए नगरपालिका निष्पादन की अपेक्षा करने के लिए इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत की गई हैं, नगरपालिका की अध्यपेक्षा पर अधिभोगी द्वारा निष्पादित किए जाते हैं या नगरपालिका द्वारा निष्पादित किए जाते हैं और उसकी लागत अधिभोगी से वसूल की जाती हैं तो उसकी लागत, यदि नगरपालिका यह प्रमाणित कर दे कि उक्त लागत को स्वामी द्वारा वहन किया जाना चाहिए था उस अधिभोगी द्वारा उक्त स्वामी को देय या देय होने वाले उसके किराए के अगले और आगामी संदायों से, कटौती की जा सकेगी या उसके द्वारा सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में वसूल किया जा सकेगा ।

191. इस प्रकार मरम्मत किए गए मकानों का कब्जा लेने की शक्ति-यदि नगरपालिका इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी मकान या अन्य संरचना की कोई मरम्मत करवाएगी और यदि उक्त मकान या अन्य संरचना दखल में नहीं है, तो नगरपालिका उसका कब्जा ले सकेगी और जब तक उसके द्वारा मरम्मत पर खर्च की गई रकम, उसको संदत्त नहीं कर दी जाती, कब्जा रख सकेगी ।

192. गिराए गए मकानों की सामग्री की बिक्री-(1) किसी भवन या सरंचना की सामग्री, जो धारा 183 के उपबंधों के अधीन गिराई या हटाई गई होगी, नगरपालिका द्वारा बेची जा सकेंगी और उक्त बिक्री के आगमों को, उपगत व्ययों के संदाय में समायोजित किया   जाएगा ।

                (2) अधिशेष विक्रय आगमों को, यदि कोई हों, नगरपालिका निधि में जमा कर दिया जाएगा और मांग करने पर किसी ऐसे व्यक्ति को, जो नगरपालिका के समाधान में या सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय में अपने अधिकार को स्थापित करता है, उसका संदाय किया जा सकेगा ।

193. संज्ञान-(1) जब तक इस अधिनियम में अन्यथा स्पष्ट रूप से उपबंधित न हो, कोई न्यायालय, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या उपविधियों के अधीन किसी अपराध का संज्ञान नगरपालिका या नगरपालिका द्वारा इस निमित्त साधारण या विशेष आदेश द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के परिवाद पर करने के सिवाय न करेगा ।

                (2) प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्नतर कोई न्यायालय उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट किन्हीं अपराधों का विचारण नहीं करेगा ।

194. अधिनियम के अधीन अपराधों का शमनीय होना-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध, शमनीय होंगे :

                परन्तु, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् द्वारा या उसकी ओर से दी गई लिखित सूचना का अनुपालन करने में असफल रहने से उत्पन्न कोई अपराध तब तक शमनीय नहीं होगा जब तक कि सूचना का अनुपालन नहीं किया गया हो ।

                (2) इस धारा के अधीन प्रशासन के रूप में संदत्त रकम को नगरपालिका निधि में जमा कर दिया जाएगा । 

195. अपराधों के संबंध में पुलिस की शक्ति और कर्तव्य-प्रत्येक पुलिस आफिसर, उसकी जानकारी में आने वाले किसी अपराध की, जो इस अधिनियम के विरुद्ध या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या उपविधियों के विरुद्ध किया गया है, परिषद् को तुरन्त सूचना देगा और परिषद् के सभी सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके विधिपूर्ण कर्तव्य करने में सहायता देने के लिए आबद्ध होगा ।

196. अनुज्ञप्तियां नामंजूर करने वाले आदेश के संबंध में अपीलें-इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित अनुज्ञप्ति या मंजूरी को नामंजूर करने, प्रतिसंहृत या निलंबित करने वाले नगरपालिका के किसी आदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति, इस अधिनियम में अन्यत्र कहीं अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी नामंजूरी, प्रतिसंहरण या निलंबन की तारीख से तीस दिन के भीतर, राज्य सरकार या सरकार द्वारा इस बाबत प्राधिकृत किसी अधिकारी को अपील कर सकेगा, जिसका विनिश्चय अंतिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

197. अन्य मामलों में आदेशों के विरुद्ध अपील-(1) कोई व्यक्ति, जो-

(क) धारा 126 के अधीन किसी भवन के परिनिर्माण, पुनः परिनिर्माण, या तात्विक परिवर्तन के संबंध में नगर पंचायत या परिषद् की नामंजूरी से, या ; 

(ख) किसी सड़क में गड्ढा खोदने के लिए, समतल करने, खड़ंजा  बनाने, पताकंकित करने, पक्का करने की अपेक्षा करने या बिजली के पर्याप्त साधनों की व्यवस्था किए जाने के लिए अपेक्षित धारा 112 के अधीन या किसी भवन का परिवर्तन या तोड़े जाने के लिए अपेक्षित धारा 129 के अधीन नगर पंचायत या परिषद् की सूचना से; या

(ग) नगर पंचायत या परिषद् के धारा 132 द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों के अधीन किसी आदेश से या धारा 209 की उपधारा (1) के खंड (vii) के अधीन बनाई गई उपविधि के अधीन नगर पंचायत या परिषद् द्वारा किए गए किसी आदेश से, 

व्यथित है, ऐसी नामंजूरी, सूचना, आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर उपायुक्त को अपील कर सकेगा ।

                (2) ऐसी किसी नामंजूरी, सूचना, या आदेश को ऐसी अपील द्वारा ही प्रश्नगत किया जाएगा अन्यथा नहीं;

                (3) उपायुक्त का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

198. उचित अवसर दिए बिना अपील खारिज नहीं होगी-(1) धारा 196 या धारा 197 के अधीन कोई अपील भागतः या पूर्णतः तब तक खारिज या अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि पक्षकारों को कारण बताने या सुने जाने का उचित अवसर नहीं दे दिया गया है ।

199. नगरपालिका द्वारा संदेय प्रतिकर की बाबत विवाद-(1) यदि प्रतिकर की रकम की बाबत, जिसका इस अधिनियम द्वारा नगरपालिका से संदाय अपेक्षित है, विवाद उत्पन्न होता है तो उसे ऐसी रीति में जिस पर पक्षकार सहमत हों, और सहमति के व्यक्तिगत की दशा में, नगरपालिका द्वारा या प्रतिकर का दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा उपायुक्त को आवेदन किए जाने पर, उसके द्वारा तय किया जाएगा ।

                (2) यदि नगरपालिका या प्रतिकर का दावा करने वाले व्यक्ति का उपायुक्त के विनिश्चय से समाधान नहीं होता है तो नगरपालिका या प्रतिकर का दावा करने वाले व्यक्ति को यह अधिकार होगा कि वह उपायुक्त से, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894(1894 का 1) की धारा 18 के उपबन्धों के अनुसार जिला न्यायाधीश को निर्देश करने की अपेक्षा करे ।

200. क्षतिपूर्ति-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या बनाई गई उपविधि के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए नगर पंचायत या परिषद् या उसकी किसी समिति या किसी अधिकारी या कर्मचारी या किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जो नगर पंचायत या परिषद् या उसकी किसी समिति या किसी नगरपालिका अधिकारी या सेवक के निदेश के अधीन अथवा उसके अनुसार कार्य कर रहा है, कोई वाद नहीं लाया जाएगा ।

201. सूचना के अभाव में वादों का वर्जन-(1) किसी नगर पंचायत या परिषद् या उसके किसी अधिकारी के विरुद्ध किसी ऐसे कार्य के संबंध में जो ऐसे अधिकारी द्वारा उसकी पदीय है सियत में किया जाना तात्पर्यित है या किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध जो उसके निदेशों के अधीन कार्य कर रहा है, कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही जो दांडिक कार्यवाही नहीं है, तब तक संस्थित नहीं की जाएगी जब तक कि निम्नलिखित के कार्यालय में लिखित सूचना परिदत्त किए जाने या छोड़े जाने के पश्चात् दो मास न समाप्त हो चुके हों-

                                (क) नगर पंचायत या परिषद् के विरुद्ध किसी वाद की दशा में, कार्यापालक अधिकारी;

(ख) किसी अधिकारी के मामले में, ऐसा अधिकारी, जिसके विरुद्ध वाद या कार्यवाही संस्थित की गई है, और ऐसे किसी व्यक्ति के मामले में जो उसके निदेश के अधीन कार्य कर रहा है, उसके निवास या कारबार के स्थान पर परिदत्त सूचना में वाद हेतुक, वादी या अर्जीदार का नाम, वर्णन और निवास का स्थान और अनुतोष, जिसका उसने दावा किया है कथन हो, और वाद या अर्जी में यह कथन होगा कि उक्त सूचना इस प्रकार परिदत्त कर दी गई है या छोड़ दी गई है ।

                स्पष्टीकरण-इस धारा में अधिकारी" पद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सम्िमलित हैं ।

                (2) ऐसी प्रत्येक कार्रवाई वादहेतुक प्रोद्भूत होने के पश्चात् तीन मास के भीतर प्रारम्भ होगी, तत्पश्चात् नहीं ।

अध्याय 13

नियंत्रण

202. उपायुक्त द्वारा नियंत्रण-उपायुक्त या निदेशक या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त सशक्त कोई अधिकारी, किसी भी समय-

                                (i) यथास्थिति, नगर पंचायत या, परिषद् के-

                                                (क) अधिभोग के अधीन किसी स्थावर सम्पत्ति में, या

                                                (ख) उनके अधीन चल रहे किसी संकर्म में, या

                                                (ग) यथास्थिति नगर पंचायत या परिषद् के नियंत्रण और प्रशासनाधीन किसी संस्था में, 

                प्रवेश और निरीक्षण कर सकेगा या किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश करवा सकेगा और उससे निरीक्षण करवा सकेगा, और

(ii) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए किसी लेखा पुस्तक या दस्तावेज को मंगा सकेगा और उसका निरीक्षण कर सकेगा जो, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् के कब्जे में या नियंत्रण के अधीन हो ।

203. अधिनियम के अधीन कार्रवाई निलंबित करने की शक्ति-(1) सरकार या उपायुक्त लिखित आदेश द्वारा नगरपालिका के किसी संकल्प या आदेश के निष्पादन को निलंबित कर सकेगा या किसी ऐसे कार्य का करना प्रतिसिद्ध कर सकेगा जो इस अधिनियम के अनुसरण में या इसके अधीन या इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका द्वारा दी गई किसी मंजूरी या अनुज्ञा के अनुसार में किया जाने वाला है या किया जा रहा है यदि उसकी राय में संकल्प, आदेश या कार्य लोकहित के प्रतिकूल है या विधि द्वारा प्रदत्त शक्तियों के बाहर है या संकल्प या आदेश के निष्पादन से या कार्य किए जाने से शान्ति के गंभीर रूप से भंग होने या जनता या किसी वर्ग के व्यक्तियों या निकाय को उससे गम्भीर क्षति या क्षोभ कारित होने की संभावना है ।

(2) जब उपायुक्त इस धारा के अधीन कोई आदेश करता है  तब वह आदेश करने के लिए अपने कारणों के कथन के साथ आदेश की एक प्रति सरकार को तत्काल भेजेगा ।

(3) सरकार निदेशक की राय प्राप्त कर सकेगी और तत्पश्चात् या तो आदेश विखंडित कर सकेगी या यह निदेश दे सकेगी कि वह ऐसे उपान्तरणों के साथ और ऐसी अवधि के लिए, जो वह उचित समझे, प्रवर्तन में बना रहेगा ।

204. आपात की दशा में उपायुक्त की शक्तियां-(1) यदि आपात की किसी दशा में, उपायुक्त की, तत्काल उपलब्ध संबंधित तकनीकी सलाहकार की सिफारिश पर, यह राय है कि किसी कार्य का तत्काल निष्पादन या किसी ऐसे कार्य का तत्काल किया जाना, जिसे नगर पंचायत या परिषद् या तो किसी अधिवेशन में या अन्यथा निष्पादित करने या कारित करने के लिए सशक्त है, जनता के स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए आवश्यक है तो वह नगर पंचायत या परिषद् को ऐसे समय के भीतर, कार्य निष्पादित करने के लिए कह सकेगा, जो वह नियत करे । यदि उक्त कार्य ऐसी अवधि के भीतर निष्पादित नहीं किया जाता है तो वह किसी अन्य व्यक्ति को, तत्काल कार्य को निष्पादित करने या कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकेगा ।

(2) उपायुक्त सरकार को ऐसे प्रत्येक मामले की तुरन्त रिपोर्ट देगा, जिसमें उसने उपधारा (1) के अधीन उसे प्रदत्त की गई शक्तियों का प्रयोग किया है, जिस पर सरकार ऐसा आदेश पारित कर सकेगी, जो वह उचित समझे ।

(3) जहां किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया जाता है, वहां उपायुक्त यह निदेश दे सकेगा कि इस प्रकार नियुक्त किए गए व्यक्ति को कर्तव्य पालन करने, कार्य निष्पादित करने या कार्य करने के व्यय सहित समुचित पारिश्रमिक का, यदि कोई हो, संदाय नगर पंचायत या परिषद् द्वारा तुरन्त किया जाएगा ।

(4) जहां ऐसे व्यय और पारिश्रमिक का इस प्रकार संदाय नहीं किया जाता है वहां उपायुक्त ऐसे व्यक्ति को जिसकी अभिरक्षा में नगरपालिका निधि का अतिशेष रखा हो, व्यय और पारिश्रमिक का या उसके उतने भाग का जितना अतिशेष से संभव हो, किसी या अन्य सभी प्रभारों से पूर्विकता के आधार पर संदाय करने का निदेश देते हुए आदेश कर सकेगा और उक्त व्यक्ति तद्नुसार, संदाय करेगा ।

205. कतिपय दशाओं में नगर पंचायत या परिषद् को विघटित करने की शक्ति-(1) यदि सरकार की राय में, यथास्थिति, कोई नगर पंचायत या परिषद् इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उस पर अधिरोपित किए गए आबद्धकर कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम नहीं हैं, या उनका पालन करने में लगातार व्यतिक्रम करती है या अपनी शक्तियों से बाहर कार्य करती है या उनका दुरुपयोग करती है तो सरकार, अधिसूचना द्वारा ऐसा करने के लिए कारण कथित करते हुए , उक्त नगर पंचायत या परिषद् को, यथास्थिति, अक्षम या व्यतिक्रमी या अपनी शक्तियों से बाहर कार्य करने या उनका दुरुपयोग करने वाली घोषित कर सकेगी और ऐसी नगर पंचायत या परिषद् को विघटित कर सकेगी :

परन्तु, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् को, उसके विघटन से पूर्व सुने जाने का समुचित अवसर दिया जाएगा :

परन्तु यह और कि जब यथास्थिति, किसी नगर पंचायत या परिषद् का विघटन किया जाता है तब सरकार, जब तक यथास्थिति, नई नगर पंचायत या परिषद् गठित नहीं की जाती है, विघटन की अवधि के दौरान नगर पंचायत या परिषद् की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग और निर्वहन करने के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी :

परन्तु यह और भी कि सरकार नगर पंचायत या परिषद् के विघटन की तारीख से छह मास की अवधि समाप्त होने से पूर्व नई नगर पंचायत या नई परिषद् के गठन के लिए नए सिरे से निर्वाचन कराएगी ।

206. विघटन के परिणाम-विघटन के आदेश के निम्नलिखित परिणाम होंगे, अर्थात् :-

(क) नगर पंचायत या परिषद् के सभी पार्षद, आदेश की तारीख से ही ऐसे पार्षदों के रूप में अपने पदों को रिक्त कर देंगे; 

(ख) नगर पंचायत या परिषद् द्वारा अधिनियम के अधीन किसी अधिवेशन में या अन्यथा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों और पालन किए जाने वाले सभी कर्तव्यों का प्रयोग और पालन विघटन की अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा जैसा सरकार निदेश करे;

(ग) ऐसी नगर पंचायत या परिषद् में निहित सभी संपत्तियां, विघटन की अवधि के दौरान, सरकार में निहित   होंगी ।

207. स्थानीय प्राधिकारियों के बीच विवादों का विनिश्चय-(1) यदि किसी नगर पंचायत या किसी परिषद् या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी के बीच किसी मामले पर जिसमें वे संयुक्त रूप से हितबद्ध हैं, कोई विवाद उद्भूत होता है तो ऐसा विवाद सरकार को निर्देशित किया जाएगा जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।

(2) सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा, किसी ऐसे मामले में जिसमें वे संयुक्त रूप से हितबद्ध हैं, नगर पंचायत या परिषद् और अन्य स्थानीय प्राधिकारियों के बीच पालन किए जाने वाले संबंध को विनियमित कर सकेगी ।

अध्याय 14

नियम और उपविधियां

208. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) सरकार अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से नियम बना सकेगी ।

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :- 

(i) वह रीति जिसमें नगर पंचायत या परिषद् या उसकी समितियों के अधिवेशन की कार्यवाहियों का कार्यवृत्त अभिलिखित और प्रकाशित किया जाएगा;

(ii) वह प्ररूप और रीति जिसमें नगर पंचायत या परिषद् की प्राप्तियों और व्ययों का लेखा रखा जाएगा;

(iii) वह प्ररूप और रीति जिसमें नगर पंचायत या परिषद् का वार्षिक बजट तैयार किया जाएगा;

(iv) वह रीति, जिसमें नगर पंचायत या परिषद् द्वारा विवरणियां, विवरण और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएंगी;

(v) धृतियों के मूल्यांकन, इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित करों के निर्धारण, संग्रहण और प्रतिदाय के वे मामले जो इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित नहीं किए गए हैं;

(vi) इस अधिनियम के अधीन करस्थम् वारंट पर संदेय फीसों का अवधारण;

(vii) नगर पंचायत या परिषद् द्वारा या उसके नियंत्रण और प्रशासन के अधीन उपलब्ध कराई गई, स्थापित या अनुरक्षित जल प्रदाय, प्रकाश जल निकास या मल वहन प्रणाली का विनियमन, प्रबंध और निरीक्षण;

(viii) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों द्वारा शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने के लिए प्ररूप और प्रक्रिया और वह प्राधिकारी जो शपथ दिलाएगा या प्रतिज्ञान कराएगा; और

(ix) वह रीति जिसमें सरकार द्वारा पुष्टि किए जाने के पश्चात् उपाविधियां प्रकाशित की जाएंगी ।

                (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, विधान सभा के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की कुल अविध के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व विधान सभा उस नियम में कोई परिवर्तन करती है या यह विनिश्चय करती है कि ऐसा नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह, यथास्थिति, ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा, या निष्प्रभाव हो जाएगा । तथापि, नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

209. नगरपालिका की उपविधियां बनाने की शक्ति-नगरपालिका, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों से संगत उपविधियां निम्नलिखित के लिए बना सकेगी :- 

 (i) ऐसा कोई विषय जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन उपविधियां बनाने की शक्ति अभिव्यक्त रूप से नगरपालिका को प्रदान की गई है ।

(ii) सार्वजनिक सड़कों पर या उनके समीप या पोन्टून पुलों, घाटों, पहुंच स्थलों, नदी तटों या लोक बिहार के अन्य स्थानों पर या उसके समीप या पीने के पानी के प्रदाय के लिए जल साधित्र के समीप के स्थानों पर यातायात का विनियमन करना और अवरोध और अधिक्रमण तथा न्यूसेंस को हटाना;

(iii) नगरपालिका की सीमा में रखी या प्रयोग की जाने वाली विभिन्न श्रेणियों की गाड़ियों और वाहनों के पहियों के टायरों की न्यूनतम चौड़ाई या न्यूनतम व्यास और पहियों का अधिकतम पथ या पहिए विहित करना;

(iv) वह रीति विहित करना जिसमें किसी भवन के परिनिर्माण, पुनः परिनिर्माण या उसमें तात्विक रूप में परिवर्तन करने के आशय की सूचना नगरपालिका को दी जाएगी;

(v) यह अपेक्षा करना कि ऐसी प्रत्येक सूचना के साथ भूमि की स्थल योजना जिस पर उक्त भवन के परिनिर्माण, पुनः परिनिर्माण, या उसमें तात्विक रूप से परिवर्तन करने का आशय है और नक्शा तथा विनिर्देश और भवन परिनिर्माण या पुनः परिनिर्माण की दशा में भवन के सन्निर्माण की लागत का अनुमान (भूमि और उसके सुधार की लागत छोड़कर) तथा निम्नलिखित विषयों में सभी या किसी एक की बाबत उपविधियों में यथा अपेक्षित सभी ऐसी विशिष्टियां और ऐसे विवरण भी साथ में दिए जाएंगे, अर्थात् :-

                                                (क) भवन के सम्मुख निर्बाध रास्ता या मार्ग;

(ख) वायु के मुक्त परिसंचारण और सफाई की सुविधा सुनिश्चित करने और अग्नि निवारण के लिए भवन के चारों और खाली छोड़ा जाने वाला स्थान;

(ग) शौचालय, पाखाना, मूत्रालय, मलकुंड या नालियों की व्यवस्था और स्थिति;

(घ) बुनियाद की सतह और चौड़ाई, सबसे नीचे के तल की सतह और संरचना का स्थायित्व; और

(ङ) पड़ोस के भवनों के पुरोभाग की रेखा, यदि भवन सार्वजनिक सड़क पर साथ-साथ है;

(vi) नगरपालिका या उसके भाग के भीतर किसी भवन के परिनिर्माण, पुनःपरिनिर्माण या तात्विक परिवर्तन की बाबत निम्नलिखित के संबंध में विनियमन करना- 

                (क) बाहरी ओर विभाजन दीवारों, छतों और तलों के लिए प्रयुक्त सन्निर्माण की सामग्री और रीति;

(ख) सन्निर्माण की सामग्री और रीति और अंगीठी, चिमनी, शौचालय, पाखाना, मूत्रालय, मलकुंड और  नाली की स्थिति;

(ग) सबसे ऊपरी तल के ऊपर छत की ऊंचाई और ढलान, जिस पर मनुष्य को रहना है या खाना पकाना है;

(घ) वायु का मुक्त परिसंचारण सुनिश्चित करने और अग्नि के निवारण के लिए भवन के चारों और स्थान छोड़ना;

(ङ) पुरोभाग की रेखा, जहां भवन सार्वजनिक सड़क पर साथ-साथ स्थित है;

(च) मंजिलों की संख्या और ऊंचाई, जो भवन में होगी;

(छ) आग लगने की दशा में भवन से निकलने के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले साधन;

(ज) भवन के वातायान या सफाई को प्रभावित करने वाले कोई अन्य विषय; और

(झ) क्षेत्र की स्वच्छता संबंधी दशाओं और जल प्रदूषण से संबंधित विषय;

                                (vii) सड़कों के अभिव्यास और अवस्थिति के लिए पर्याप्त उपबन्ध किए बिना भवनों के परिनिर्माण को रोकना;

(viii) प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा सन्निर्मित सड़कों की सतह, जल निकास के साधन, संरेखण, पंक्तिबद्धता और चौड़ाई को विनियमित करना;

(ix) सार्वजनिक जल प्रदाय, नहाने और धोने का स्थान, झरना, सरणी, तालाब और कुंओं के उपयोग को विनियमित करना और उनसे संबंधित न्यूसेंस का निवारण करना;

(x) वृत्तिक धोबी द्वारा कपड़ों की धुलाई को, या तो आवश्यक अनुज्ञप्ति देकर या अन्यथा, विनियमित करना और ऐसे स्थान नियत करना जहां कपड़े इस तरह धोए जाएं या जहां वे इस तरह नहीं धोए जाएं;

(xi) कुंओं, तालाबों, पोखरों, उत्खनन, हौज या जल से युक्त या जल रखने में सक्षम अन्य स्थान या नलिकाओं में मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले उपाय विहित करना;

(xii) नगरपालिका के भीतर पेड़ों और बांसों की कटाई को विनियमित करना;

(xiii) मल, घृणात्मक सामग्री, जीव-जन्तुओं के शव और कूड़ाकरकट के निस्तारण और शौचालयों, पाखानों, मूत्रालयों, मलकुंड़ों, जल निकासों और मल निकासों के सन्निर्माण और अनुरक्षण को विनियमित करना;

(xiv) बाजारों के निरीक्षण और विनियमन के लिए और मूल्य सूची तैयार करने और वहां प्रदर्शित करने के लिए उपबन्ध करना;

(xv) नगरपालिका के भीतर किसी विनिर्दिष्ट खाद्य या पेय वस्तु के परिवहन के घंटे और रीति विनियमित करना;

(xvi) ऐसे स्थान जहां कोई विनिर्दिष्ट खाद्य या पेय बेचे जा सकेंगे या विक्रय के लिए रखे जा सकेंगे या ऐसे स्थान जहां से बेचे नहीं जा सकेंगे या विक्रय के लिए नहीं रखे जा सकेंगे, नियत करना और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य सामग्री के विक्रय को विनियमित करना;

(xvii) घोड़ों, पशुओं, सूअर, गधा, भेड़ या बकरियों, हंस, बत्तख और मुर्गों के स्टाल या झुंड से लोक स्वास्थ्य के खतरे के रोकथाम के प्रयोजन के लिए या तो आवश्यक अनुज्ञप्ति देकर या अन्यथा, विनियमित करना या प्रतिषिद्ध करना; या

(xviii) दुधारू पशुओं के निरीक्षण के लिए उपबन्ध करना और उनमें संक्रामक या सांसर्गिक रोगों के होने पर किए जाने वाले उपाय विहित करना; और डेरीवाला या दुग्ध विक्रेताओं का व्यापार करने वाले व्यक्तियों के व्यवसाय में डेरी और पशु शालाओं के सन्निर्माण, विस्तार, संवातन, प्रकाश व्यवस्था, सफाई, जल निकासी और जल प्रदाय विहित करना और विनियमित करना;

(xiv) पड़ाव मैदानों, कांजी हौसों, सराय या धर्मशालाओं, बेकरियों और बातित जल कारखानों, बर्फ कारखानों, आटा मिलों, तेल मिलों, मिष्ठान की दुकानों, कारखानों और अन्य स्थानों जिनमें यांत्रिक या विद्युत शक्ति लगी है और बधशालाओं के निरीक्षण और उचित विनियमन के लिए उपबंध करना;

(xv) मनोरंजन या विनोद के प्रयोजन के लिए सार्वजनिक बिहारों में लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा को प्रभावित करने वाले न्यूसेंस का निवारण करना;

(xvi) लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा को प्रभावित करने वाले न्यूसेंस का निवारण करना;

(xvii) कब्रिस्तान और श्मशान के उपयोग और प्रबंध और शवों के व्ययन पर नियंत्रण रखना और विनियमित करना;

(xviii) नगरपालिका के भीतर या नगरपालिका के नियंत्रण के अधीन मेले और औद्योगिक प्रदर्शनियां आयोजित करने और उन पर उद्ग्रहणीय शुल्क नियत करने और संगृहीत करने के लिए उपबंध करना;

(xix) ऐसी शर्तें नियत करना जिन पर इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्तियां दी जानी है और निलंबित या रद्द की जा सकेंगी;

(xx) किसी नगरपालिक भूमि पर जिसमें बाजार, नाली, सड़क, आदि भी सम्मिलित हैं, किसी अतिक्रमण को रोकना या हटाना;

(xxi) इस अधिनियम के उद्देश्यों और प्रयोजनों को प्रभावी बनाना और नगरपालिका, ऐसी उपविधियों द्वारा, उपविधियों के किसी उपबंध के विरुद्ध अपराधियों पर, प्रत्येक अपराध के लिए ऐसी युक्तियुक्त शास्ति, जो वह उचित समझे और जो पांच हजार रुपए से अधिक की नहीं होंगी, नगरपालिका से उन्हें अपराध की लिखित सूचना के पश्चात् जारी रहने वाले किसी अपराध की दशा में, प्रत्येक के लिए दो सौ रुपए से अनधिक की अतिरिक्त शास्ति, अधिरोपित कर सकेगी :

परन्तु पांच हजार रुपए और दो सौ रुपए की उपरोक्त सीमाएं चुंगी को विनियमित करने वाली उपविधि की बाबत अपराधों को लागू नहीं होगी;

(xxii) नगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द के बीच कार्यों का वितरण ।

210. पहाड़ी क्षेत्रों में उपविधि विरचित करने की अतिरिक्त शक्ति-(1) कोई नगर पंचायत या परिषद् जिसकी नगरपालिका पूर्णतः या भागतः किसी पहाड़ी भू-भाग में अवस्थित है, ऐसी उपविधियों के अतिरिक्त जो वह पूर्ववर्ती धारा के अधीन बनाए, वृक्षों और झाड़ियों की कटाई या उन्हें नष्ट करने का विनियमन या प्रतिषेध करने या उत्खनन करने या मृद्रा को हटाने या खदान किया का विनियमन या प्रतिषेध करने के लिए उपविधियां बना सकेगी जहां नगर पंचायत या परिषद् को निम्नलिखित किसी या सभी प्रयोजनों के लिए ऐसा विनियमन या प्रतिषेध करना आवश्यक प्रतीत हो :-

(क) जल प्रदाय का अनुरक्षण;

                                (ख) भूमि का परिरक्षण;

                                (ग) भू-स्खलन का निवारण;

                                (घ) खादरों या बेगधारा का निर्माण;

                                (ङ) कटाव या उस पर बालू, कंकड़ या पत्थर के जमाव के विरुद्ध भूमि का संरक्षण;

                                (च) नगरपालिका के सौंदर्य या सामान्य रूप का संरक्षण ।

                (2) नगर पंचायत या परिषद्, इस धारा के अधीन विरचित किसी उपविधि द्वारा, घोषित कर सकेगी कि ऐसी किसी उपविधि का उल्लंघन करने वाला या उसके अधीन जारी किसी सूचना के अनुपालन में असफल रहने वाला कोई व्यक्ति, ऐसे जुर्माने का, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा और ऐसे अतिरिक्त जुर्माने का जो दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, दो सौ रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा ।

211. उपविधियों का पुष्टिकरण-(1) अधिनियम में उपविधि विरचित करने की शक्ति पूर्व अधिसूचना की शर्त के अधीन होगी ।

                (2) ऐसी कोई उपविधि तब तक प्रवृत्त नहीं होगी जब तक कि इसकी पुष्टि सरकार द्वारा नहीं कर दी जाती है ।

                (3) सरकार ऐसी किसी उपविधि के अपने पुष्टिकरण को रद्द कर सकेगी और इसके पश्चात् उपविधि का प्रभाव समाप्त हो जाएगा ।

212. उपविधियों का प्रकाशन-प्रत्येक उपविधि, पुष्टिकरण के पश्चात् विहित रीति से प्रकाशित की जाएगी ।

213. आदर्श उपविधियां-सरकार, समय-समय पर, ऐसे किसी विषय की बाबत जिसके लिए नगरपालिका इस अधिनियम के अधीन उपविधियों की विरचना करने के लिए सशक्त है, आदर्श उपविधियों की विरचना कर सकेगी और नगरपालिका के मार्गदर्शन के लिए उन्हें राजपत्र में प्रकाशित कर सकेगी ।

अध्याय 15

प्रकीर्ण

214. कार्यों और कार्यवाहियों की विधिमान्यता-(1) नगर पंचायत या परिषद् या उसकी समितियों में से किसी समिति का कोई कार्य उसकी सदस्यता में किसी रिक्ति के कारण अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा ।

                (2) नगर पंचायत या परिषद् या उसकी किसी समिति के अधिवेशन की कोई कार्यवाही बाद में यह पता चलने पर भी विधिमान्य होगी कि अधिवेशन की कार्यवाहियों में ऐसा व्यक्ति बैठा था या उसने मतदान किया था या उसमें अन्यथा भाग लिया था, जो ऐसा करने का हकदार नहीं था ।

215. निर्वाचन को चुनौती देने के लिए अर्जी-(1) किसी पार्षद के पद पर किसी व्यक्ति के निर्वाचन को, निर्वाचन अधिकरण के समक्ष ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में जो विहित की जाए, निम्नलिखित आधार पर अर्जी फाइल करके ही प्रश्नगत किया जाएगा-

(क) उक्त निर्वाचन रिश्वत के भ्रष्ट आचरण या अनुचित प्रभाव की व्यापकता के कारण निष्पक्ष निर्वाचन नहीं था; या 

(ख) निर्वाचन का परिणामः-

                (i) किसी नामनिर्देशन के अनुचित प्रतिग्रहण या प्रतिक्षेपण से; या

(ii) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन करने में घोर असफलता से, 

                वस्तुतः प्रभावित हुआ है । 

                (2) मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) की धारा 103 के अधीन गठित निर्वाचन अधिकरण, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए भी निर्वाचन अधिकरण होगा ।

                (3) निर्वाचन अधिकरण का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

216. निर्वाचन और निर्वाचन अर्जी के लिए नियम बनाने की शक्ति-सरकार, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षद् के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए, इस अधिनियम के अधीन निर्वाचन और निर्वाचन अर्जी के लिए नियम बनाएगी ।

217. निर्वाचन मामलों में सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-(1) किसी भी सिविल न्यायालय को यह अधिकारिता नहीं होगी कि वह ऐसे किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा जो इस अधिनियम के अधीन नियुक्त है, उसके अधीन निर्वाचनों के संचालन के संबंध में की गई किसी कार्रवाई या किए गए किसी विनिश्चय की वैधता को प्रश्नगत करे ।

                (2) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,- 

(क) इस अधिनियम के अधीन निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन या ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों के स्थानों के आबंटन के संबंध में बनाई गई या बनाई जाने के लिए तात्पर्यित किसी विधि की विधिमान्यता को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा;

(ख) किसी नगरपालिका के किसी निर्वाचन को, निर्वाचन अधिकरण में उपस्थित की गई निर्वाचन अर्जी और ऐसी रीति में, जैसी इस अधिनियम में उपबंधित है, के सिवाय, प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।

218. नगरपालिकाओं के निर्वाचन-(1) नगरपालिकाओं के सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावलियां तैयार कराने और उन सभी निर्वांचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) की धारा 98 के अधीन गठित राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा ।

                (2) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नगरपालिका के निर्वाचन सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार कराए जाएंगे ।

                (3) सरकार, जब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसा अनुरोध करे, राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसे कर्मचारिवृन्द उपलब्ध कराएगी जो इस अधिनियम के अधीन राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदत्त कृत्यों का निर्वहन करने के लिए आवश्यक हों ।

219. किसी नगरपालिका क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली-(1) प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के लिए ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्शाने वाली एक निर्वाचक नामावली होगी जो मत देने के लिए अर्हित है ।

                (2) प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र की निर्वाचक नामावली को कई भागों में विभाजित किया जाएगा जिसमें नगरपालिक क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड के लिए एक पृथक् भाग होगा ।  

                (3) किसी नगरपालिक क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावाली राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ऐसे नियमों के अनुसार, जो सरकार द्वारा निमित्त बनाए जाएं, तैयार, पुनरीक्षित या संशोधित की जाएगीः 

                परन्तु ऐसी निर्वाचक नामावली को तैयार करने या पुनरीक्षित करने के पश्चात् उसका प्रारंभिक प्रकाशन किया जाएगा और वाद में आक्षेपों की विहित रीति में सुनवाई करने के पश्चात् उसका अंतिम प्रकाशन किया जाएगा ।

                (4) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, मणिपुर विधान सभा के सदस्यों के निर्वाचन के लिए तत्समय प्रवृत्त निर्वाचक नामावली को, जहां तक उसका संबंध नगरपालिक क्षेत्र में समाविष्ट क्षेत्र से है, प्रारंभिक प्रकाशन के प्रयोजनों के लिए उस नगरपालिका क्षेत्र की निर्वाचक नामावली के रूप में अंगीकार किया जा सकेगा ।

220. मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकरण की शर्तें-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो-

                                (क) अर्हता की तारीख को 18 वर्ष से कम आयु का नहीं है, और

                                (ख) किसी नगरपालिक क्षेत्र में मामूली तौर से निवासी है, उस नगरपालिका क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार होगा ।

                (2) कोई व्यक्ति किसी नगरपालिक क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली में एक स्थान से अधिक स्थानों में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार नहीं होगा ।

                (3) कोई व्यक्ति किसी नगरपालिका क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार नहीं होगा यदि उसका नाम किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी की निर्वाचक नामावली में मतदाता के रूप में पहले ही रजिस्ट्रीकृत किया जा चुका है ।

                स्पष्टीकरण 1-अर्हता की तारीख" पद से वह तारीख अभिप्रेत होगी जो सरकार अधिसूचना द्वारा इस अध्यादेश के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट करे ।

                स्पष्टीकरण 2-मामूली तौर से निवासी" पद का वही अर्थ होगा जो उसका लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950(1950 का 43) की धारा 20 में है ।

221. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी बनाने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो सरकार आदेश द्वारा ऐसी कोई बात जो उसके उपबंधों से असंगत न हो जिसे वह कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक और समीचीन समझती हों, कर सकेगी ।

222. अधिनियम के उपबन्धों का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध, उसके अधीन बनाए गए नियम, उपविधि, किए गए आदेश और जारी किए गए निदेश, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट या ऐसी किसी विधि के कारण प्रभावी किसी लिखत में किसी विपरीत बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

223. नगरपालिका अभिलेख को साबित करने का दंड और प्रमाणित प्रति की फीस-(1) नगर पंचायत या परिषद् के कब्जे में की किसी रसीद, आवेदन पत्र रेखांक, सूचना आदेश, रजिस्टर में की गई किसी प्रविष्टि या अन्य दस्तावेज की कोई प्रति, किसी उपविधि द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा यदि सम्यक् रूप से प्रमाणित है तो वह किसी प्रविष्टि या दस्तावेज के विद्यमान होने के साक्ष्य के रूप में प्राप्त की जाएगी और प्रत्येक मामले में उसके अभिलिखित मामलों और संव्यवहारों के साक्ष्य के रूप में वहां इस सीमा तक ग्रहण की जाएगी मानो मूल प्रविष्टि या दस्तावेज, यदि प्रस्तुत किया जाता है, ऐसे मामलों को सिद्ध करने के लिए ग्राह्य होता ।

                (2) ऐसी प्रतियों को जारी करने के लिए, यथास्थिति, नगर पंचायत या परिषद् ऐसी फीसें अधिरोपित कर सकेगी जैसी इस निमित्त किसी उपविधि द्वारा नियत की जाएं ।

224. नगरपालिक सेवकों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समन करने पर निर्बंधन-किसी भी नगरपालिक अधिकारी या सेवक से किसी विधिक कार्यवाही में, जिसमें नगर पंचायत या परिषद् पक्षकार नहीं है, कोई रजिस्टर या दस्तावेज, जिसकी अंतर्वस्तु उसकी प्रमाणित प्रति द्वारा साबित की जा सकती है, प्रस्तुत करने या उसमें अभिलिखित बातों और संव्यहारों को साबित करने के लिए साक्षी के रूप में उपस्थित होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी जब तक कि न्यायालय द्वारा, विशेष कारण से, आदेश नहीं दिया जाए ।

225. इस अधिनियम के उपबंध के अतिक्रमण के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों का अतिक्रमण करेगा जिसके लिए इस अधिनियम में पहले से शास्ति उपबंधित नहीं है तो वह निरन्तर अतिक्रमण की दशा में प्रत्येक दिन के लिए पांच सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दायी होगा ।

226. लोक सेवक-नगर पंचायत या परिषद् का प्रत्येक पार्षद् और प्रत्येक अधिकारी या सेवक और कर के संग्रह के लिए इसके द्वारा नियुक्त प्रत्येक ठेकेदार या अभिकर्ता या ऐसे कर का संग्रह करने के लिए ऐसे ठेकेदार या अभिकर्ता द्वारा नियोजित प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समक्षा जाएगा ।

 227. जिला योजना समिति-(1) मणिपुर पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 26) की धारा 96 के अधीन गठित जिला योजना समिति इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भी जिला योजना समिति होगी ।

                (2) जिला योजना समिति में निम्नलिखित होंगे-

                                (क) लोक सभा के वे सदस्य जो संपूर्ण जिला या उसके भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं;

                                (ख) राज्य विधान सभा के वे सभी सदस्य जिनके निर्वाचन- क्षेत्र उस जिले के भीतर आते हैं;

                                (ग) जिला परिषद् का अध्यक्ष;

(घ) नगर निगम या नगरपालिका परिषद् के क्रमशः महापौर या अध्यक्ष जिनकी अधिकारिता के अंतर्गत जिला मुख्यालय आते हैं; और

स्पष्टीकरण -इस खंड के प्रयोजनों के लिए, महापौर या अध्यक्ष" से यथास्थिति, नगर नियम या नगरपालिका परिषद् का अध्यक्ष अभिप्रेत है  ।

(ङ) समिति के कुल सदस्यों के चार बटा पांच से अन्यून संख्या में उतने व्यक्ति जितने सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, जो, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में, जिले की जिला परिषद्, नगर पंचायत और नगर निगम तथा नगरपालिका परिषद् के सदस्यों में से, विहित रीति में, निर्वाचित किए जाएं ।

                (3) जिला सहकारी बैंक और विकास बैंक के अध्यक्ष समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे ।

                (4) मुख्य कार्यपालक अधिकारी समिति का सचिव होगा ।

                (5) जिले का उपायुक्त जिला योजना समिति का अध्यक्ष होगा ।

                (6) जिला योजना समिति, जिले के अन्तर्गत आने वाली जिला परिषद्, ग्राम पंचायत, नगरपालिका परिषद् और नगर निगम द्वारा तैयार की गई योजनाओं को समेकित करेगी और संपूर्ण जिले के लिए एक विकास योजना प्रारूप तैयार करेगी ।

                (7) (क) प्रत्येक जिला योजना समिति विकास योजना प्रारूप तैयार करने में निम्नलिखित को ध्यान में रखेगी :-

(i) जिले के अंतर्गत आने वाली जिला परिषद्, ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम और नगरपालिका परिषद् के बीच समान हित के विषय, जिनमें स्थानीय योजना, जल और अन्य भौतिक तथा प्राकृतिक स्रोत में हिस्सेदारी, एकीकृत अवसंरचनात्मक विकास और पर्यावरण संरक्षण भी सम्मिलित हैं;

(ii) उपलब्ध संसाधनों की सीमा और उनकी किस्में चाहे वित्तीय हो या अन्यथा ।

                (ख) ऐसी संस्थाओं और संगठनों से परामर्श करना जो सरकार आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।

                (8) प्रत्येक जिला योजना समिति का अध्यक्ष, ऐसी विकास योजना जिसकी ऐसी समिति द्वारा सिफारिश की गई है, सरकार को अग्रेषित करेगा ।

228. महानगर योजना के लिए समिति-(1) राज्यपाल, अधिसूचना द्वारा, एक या अधिक जिलों में समाविष्ट दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र को जिसके अंतर्गत दो या दो से अधिक नगरपालिकाएं या पंचायतें या अन्य समीपस्थ क्षेत्र आते हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए महानगर क्षेत्र अधिसूचित कर सकेगा ।

                (2) ऐसी अधिसूचना पर सरकार प्रत्येक महानगर क्षेत्र में संपूर्ण महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना प्रारूप तैयार करने के लिए एक महानगर योजना समिति गठित करेगी ।

                (3) सरकार अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित के संबंध में विहित कर सकेगी- 

                                (क) वह रीति जिससे ऐसी समिति के स्थान भरे जाएंगे : 

परन्तु ऐसी समिति के सदस्यों के दो तिहाई से अन्यून सदस्य, महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों में से और उनके द्वारा उक्त क्षेत्र में नगरपालिकाओं की और पंचायतों की जनसंख्या के बीच अनुपात के आधार पर निर्वाचित किए जाएंगे;

(ख) ऐसी समिति में भारत सरकार का और राज्य सरकार का तथा ऐसे संगठनों और संस्थाओं का प्रतिनिधित्व उतना होगा जितना ऐसी समिति को समनुदेशित कृत्यों को करने के लिए आवश्यक समझा जाए;

(ग) महानगर क्षेत्र के लिए योजना और समन्वय से संबंधित कृत्य जो ऐसी समिति को सौंपे जाएं;

(घ) वह रीति जिससे ऐसी समिति का अध्यक्ष चुना जाएगा ।

                (4) प्रत्येक महानगर योजना समिति प्रारूप विकास योजना को तैयार करने में निम्नलिखित को ध्यान में रखेगी-

                                (क) (i) महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं और पंचायतों द्वारा तैयार की गई योजनाएं;

(ii) नगरपालिकाओं और पंचायतों के बीच समान हित के विषय जिनमें क्षेत्र की विशेष समन्वित स्थानीय योजना, जल और अन्य भौतिक और प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सेदारी और अवसंरचना का एकीकृत विकास और पर्यावरण संबंधी संरक्षण भी सम्मिलित है;

                                (iii) भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा स्थापित समस्त उद्देश्य और पूर्विकताएं;

(iv) ऐसे विनिधानों का विस्तार और प्रकृति जिनका महानगर क्षेत्र में भारत सरकार या राज्य सरकार के अभिकरणों द्वारा किया जाना संभावित है और अन्य उपलब्ध संसाधन चाहे वित्तीय हों या अन्यथा;

(ख) ऐसी संस्थाओं और संगठनों से परामर्श करना, जो राज्यपाल आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे । (

(5) प्रत्येक महानगर योजना समिति का अध्यक्ष, ऐसे विकास योजना जिसकी ऐसी समिति द्वारा सिफारिश की जाए, सरकार को अग्रेषित करेगा ।

229. राज्य सरकार द्वारा शक्तियों का प्रत्यायोजन-राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी या किसी प्राधिकारी को इस अधिनियम द्वारा उसे या उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी को प्रदत्त किन्हीं शक्तियों को, जो नियम बनाने की शक्तियों से भिन्न है, ऐसे निबंधनों और शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उक्त अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रयोग किए जाने के लिए प्रत्यायोजित कर सकेगी ।

230. 1976 के मणिपुर अधिनियम सं० 26 का निरसन और व्यावृत्ति-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से ही मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1976 निरसित समझा जाएगा :

परन्तु उक्त निरसन से निम्नलिखित पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा :-

                (क) उक्त अधिनियमिति के अधीन की गई या हुई किसी बात की विधिमान्यता, उसका प्रभाव या परिणाम;

(ख) उक्त अधिनियमिति के अधीन पहले से अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत कोई अधिकार, हक, बाध्यता या दायित्व या उसकी बाबत कोई उपचार या कार्यवाही;

(ग) किसी ऋण, शास्ति, बाध्यता, दायित्व, दावे या मांग से निर्मुक्ति या उसका उन्मोचन या पहले ही की गई कोई क्षतिपूर्ति;

(घ) उपरोक्तानुसार ऐसे किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड की बाबत कोई अन्वेषण विधिक कार्यवाही या उपचार; और ऐसे किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार को संस्थित या प्रवृत्त किया जा सकेगा और ऐसी कोई शास्ति, समपहरण या दंड इस प्रकार अधिरोपित किया जा सकेगा मानो उक्त अधिनियमिति या उसका कोई भाग निरसित न किया गया हो; और

(ङ) मोरेह की नगरपालिका सीमाओं के भीतर आने वाले क्षेत्रों के संबंध में उक्त अधिनियमिति का प्रवर्तन ।

                (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के प्रारंभ से ठीक पूर्व प्रवृत्त मणिपुर नगरपालिका अधिनियम, 1976(1976 का मणिपुर अधिनियम 26) के अधीन घोषित सभी नगरपालिकाएं, परिनिश्चित सीमाएं, बनाए गए विनियम और प्रभाग, सभी नियम और उपविधियां, अधिसूचनाएं आदेश, की गई नियुक्तियां और निर्धारण, जारी की गई अनुज्ञप्तियां और सूचनाएं, अधिरोपित या निर्धारित कर, पथकर, रेट और फीसें, पारित बजट, अनुमोदित योजनाएं, दी गई अनुज्ञाएं या मंजूरियां, की गई संविदाएं, संस्थित वाद और की गई कार्यवाहियां प्रवृत्त बनी रहेंगी और इस अधिनियम के अधीन तब तक क्रमशः बनाई गई, जारी की गई, अधिरोपित या निर्धारित, पारित, अनुमोदित, दी गई, की गई और संस्थित और की गई समझी जाएंगी जब तक कि इस अधिनियम के अधीन नए उपबंध नहीं कर दिए जाते हैं या की गई किसी बात या किसी कार्रवाई द्वारा अधिक्रांत नहीं कर दिए जाते हैं ।

231. निरसन और व्यावृत्ति-(1) मणिपुर नगरपालिका अध्यादेश, 1994 (1994 का अध्यादेश सं० 6) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

                (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

 

अनुसूची

(धारा 36 देखिए)

                1. नगरीय योजना जिसके अन्तर्गत नगर योजना भी है ।

                2. भूमि उपयोग का विनियमन और भवन निर्माण । 

                3. आर्थिक और सामाजिक विकास योजना ।

                4. सड़कें और पुल ।

                5. घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जल प्रदाय ।

                6. लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई और कूड़ा-करकट प्रबन्धन ।

                7. अग्नि शमन सेवाएं ।

                8. नगरीय वानिकी, पर्यावरण का संरक्षण और पारिस्थितिकी आयमों की अभिवृद्धि ।

                9. समाज के दुर्बल वर्गों के, जिसके अन्तर्गत विकलांग और मानसिक रूप से मंद व्यक्ति भी हैं, हितों की रक्षा ।

                10. गन्दी बस्ती सुधार और प्रोन्नयन ।

                11. नगरीय निर्धनता उन्मूलन ।

12. नगरीय सुख-सुविधाओं और सुविधाओं, जैसे पार्क, उद्यान और खेल के मैदानों की व्यवस्था ।

                13. सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सौंदर्यपरक आयामों की अभिवृद्धि ।

                14. शव गाड़ना और कब्रिस्तान, शवदाह, श्मशान और विद्युत शवदाह गृह ।

                15. कांजी हाउस, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण ।

                16. जन्म-मरण सांख्यिकी जिसके अंतर्गत जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण भी है ।

                17. सार्वजनिक सुख-सुविधाएं जिनके अन्तर्गत सड़कों पर प्रकाश, पार्किंग स्थल, बस स्टाप और जन-सुविधाएं भी हैं ।

                18. वधशालाओं और चर्मशोधन शालाओं का विनियमन ।

________________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter