Friday, 01, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

फतुहा-इस्‍लामपुर लाइट रेल लाइन (राष्‍ट्रीयकरण) अधिनियम, 1985 ( Futwah-Islampur Light Railway Line (Nationalisation) Act, 1985 )


 

फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेल लाइन (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1985

(1985 का अधिनियम संख्यांक 83)

[30 दिसम्बर, 1985]

फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेल लाइन के संबंध में फतुहा-इस्लामपुर

लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड के उपक्रमों के, लोकहित में

अर्जन का और उससे संबंधित या उसके

आनुषंगिक विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

                फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड के स्वामित्वाधीन फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेल लाइन का ट्रेक और चल स्टाफ जीर्ण स्थिति में है;

                और उपरोक् लाइन पर रेल गाड़ी का चलाना परिसंकटमय और अलाभकारी होने के अतिरिक् केंद्रीय सरकार को भारी हानि भी पहुंचा रहा है;

                उपरोक् कंपनी आस्तियों को लोक उपयोग के लिए काम में लाने योग् बनाने की स्थिति में नहीं है;

                और उक् रेल लाइन के संबंध में उक् कंपनी के उपक्रमों का अर्जन करना लोकहित में आवश्यक हो गया है;

                भारत गणराज् के छत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: ––

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप् नाम––इस अधिनियम का संक्षिप् नाम फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेल लाइन (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1985 है

2. परिभाषाएं––इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो: ––

                () “नियत दिनसे वह दिन अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है;

() “कंपनीके फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड अभिप्रेत है, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित कंपनी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय 12, मिसन रोड़ कलकत्ता में है;

() “अधिसूचनासे राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

() कंपनी के संबंध मेंउपक्रमोंसे फतुहा-इस्लामपुर लाइट रेल लाइन और उस रेल लाइन से संबंधित उस कंपनी के सभी अन् उपक्रम अभिप्रेत हैं;

() उन श्ाब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक् हैं, किन्तु परिभाषित नहीं हैं और कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं

अध्याय 2

कंपनी के उपक्रमों का अर्जन

3. कंपनी के उपक्रमों का केंद्रीय सरकार को अंतरण और उसमें निहित होना––नियत दिन को कंपनी के उपक्रम और ऐसे उपक्रमों के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक और हित, इस अधिनियम के आधार पर, केंद्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगे

4. निहित होने का साधारण प्रभाव––(1) कंपनी के उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अंतर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम संपत्ति, जिसके अंतर्गत भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर, रोकड़ बाकी, हाथ की रोकड़, चेक, मांगदेय ड्राफ्ट, आरक्षित निधियां, विनिधान, बही-ऋण और ऐसी संपत्ति में या उससे उत्पन् होने वाले सभी अन् अधिकार और हित हैं, जो नियत दिन के ठीक पूर्व कंपनी के स्वामित्, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे, और सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और तत्संबंधी अन् सभी दस्तावेजें हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हैं

                (2) यथापूर्वोक् सभी संपत्तियां, जो धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के बल पर किसी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन् विल्लंगमों से मुक् और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय, अधिकरण या अन् प्राधिकरण की ऐसी किसी कुर्की, व्यादेश या डिक्री या आदेश को, जो ऐसी संपत्ति के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बंधित करे या ऐसी संपूर्ण संपत्ति या उसके किसी भाग के संबंध में कोई रिसीवर नियुक् करे, वापस ले लिया गया समझा जाएगा

                (3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (2) में निर्दिष् किसी संपत्ति का बंधकदार या ऐसी किसी संपत्ति में या उसके संबंध में कोई भार, धारणाधिकार या अन् हित रखने वाला कोई अन् व्यक्ति कंपनी को, धारा 6 और धारा 7 के अधीन संदेय रकमों में से बंधक धन या अन् शोध् रकमों के पूर्णत: या भागत: संदाय के लिए अपने अधिकारों और हितों के अनुसार दावा करने का हकदार होगा किन्तु ऐसा कोई बंधक, भार, धारणाधिकार या अन् हित किसी ऐसी संपत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो केंद्रीय सरकार में निहित हो गई है

                (4) ऐसे किसी उपक्रम के संबंध में, जो नियत दिन के ठीक पूर्व किसी भी समय धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गया है, कंपनी को प्रदत्त और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई अनुज्ञप्ति या अन् लिखत, ऐसे उपक्रम के संबंध में और उसके प्रयोजनों के लिए ऐसी तारीख को और उसके पश्चात् अपने प्रकट शब्दानुसार प्रवृत्त बनी रहेगी और धारा 3 के अधीन ऐसे उपक्रम के केंद्रीय सरकार में निहित होने की तारीख से वह सरकार ऐसी अनुज्ञप्ति या अन् लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गई समझी जाएगी मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन् लिखत उस सरकार को प्रदत्त की गई थी और वह सरकार उसे इस शेष अवधि के लिए धारण करेगी  जिसके लिए उसे उसके निबंधनों के अनुसार वह कंपनी धारण करती

5. कुछ पूर्व दायित्वों के लिए कंपनी का दायी होना––(1) नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के संबंध में कंपनी का प्रत्येक दायित् कंपनी का दायित् होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा कि केंद्रीय सरकार के विरुद्ध

                (2) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि––

() नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कंपनी के उपक्रमों के संबंध में कंपनी का कोई दायित्, केंद्रीय सरकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा;

() कंपनी के उपक्रमों के संबंध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन् प्राधिकरण का कोई अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश, जो नियत दिन के पूर्व उत्पन् किसी मामले, दावे या विवाद के बारे में नियत दिन को या उसके पश्चात् पारित किया गया है, केंद्रीय सरकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा;

() तत्समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबंध के उल्लंघन के लिए नियत दिन के पूर्व कंपनी द्वारा उपगत कोई दायित् केंद्रीय सरकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा

अध्याय 3

रकम का संदाय

6. रकम का संदाय––(1) केंद्रीय सरकार कंपनी के उपक्रमों के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक और हित का धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार को अंतरण करने और उन्हें उसमें निहित करने के लिए कंपनी को नियत दिन से तीन मास की अवधि की समाप्ति के पूर्व उन्नीस लाख उनतीस हजार पांच सौ बयालीस रुपए की राशि के बराबर रकम का नकद संदाय करेगी

                (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी उस उपधारा में निर्दिष् रकम में से केंद्रीय सरकार, प्रथमत: किसी ऐसी रकम की कटौती करेगी जो कंपनी से उस सरकार को और भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 3 के अधीन गठित स्टेट बैंक आफ तिरुवांकुर को शोध् है और उस कंपनी का दायित् ऐसी कटौती की सीमा तक उन्मोचित हो जाएगा और ऐसी कटौती को प्रतिभूत या अप्रतिभूत अन्य सभी ऋणों पर पूर्विकता प्राप् होगी

7. ब्याजधारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष् ऐसी रकम पर, जो उस धारा  की उपधारा (2) के अधीन कटौती करने पर आए, यदि उस रकम का उक् उपधारा (1) में विनिर्दिष् अवधि की समाप्ति के पूर्व कंपनी को संदाय नहीं किया गया है तो, नियत दिन को प्रारंभ होकर और उस तारीख को, जिसको ऐसे कटौती की गई रकम का संदाय केंद्रीय सरकार द्वारा उस कंपनी को किया जाता है, समाप् होने वाली अवधि के लिए चार प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज लगेगा :

                परंतु यदि ऐसे कटौती की गई रकम कंपनी को निविदत्त की जाती है किन्तु उसके द्वारा उसे स्वीकार नहीं किया जाता है तो ऐसे निविदान की तारीख से कोई ब्याज नहीं लगेगा

अध्याय 4

कंपनी के उपक्रमों के प्रबंध के भारसाधक व्यक्तियों या सभी आस्तियों, आदि का परिदान करने का कर्तव्

8. उपक्रमों के प्रबंध का भारसाधन करने वाले व्यक्तियों का सभी आस्तियों आदि का परिदान करने का कर्तव्––कंपनी के उपक्रमों के केंद्रीय सरकार में निहित हो जाने पर, ऐसे निहित होने से ठीक पूर्व उन उपक्रमों के प्रबंध के भारसाधक सभी व्यक्ति उपक्रमों से संबंधित सभी आस्तियों, लेखाबहियों, रजिस्टरों या अन् दस्तावेजों का, जो उनकी अभिरक्षा में हों, परिदान करने के लिए आबद्ध होंगे

9. व्यक्तियों का अपने कब्जे में की आस्तियों आदि का लेखा-जोखा देने का कर्तव्––(1) ऐसा कोई व्यक्ति जिसके कब्जे या नियंत्रण में नियत दिन को कंपनी के स्वामित्वाधीन किसी ऐसे उपक्रम से संबधित कोई आस्तियां, बहियां, दस्तावेजें या अन् कागजपत्र हैं जो केंद्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, और कंपनी के हैं या यदि कंपनी के स्वामित्वाधीन उपक्रम, केंद्रीय सरकार में निहित हुए होते तो उसके होते, उक् आस्तियों, बहियों, दस्तावेजों और अन् कागजपत्रों का लेखा-जोखा केंद्रीय सरकार को देने के लिए दायी होगा और वह उनका परिदान केंद्रीय सरकार को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को करेगा, जिन्हें केंद्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष् करे

                (2) केंद्रीय सरकार कंपनी के उन उपक्रमों का, जो इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, कब्जा प्राप् करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा सकेगी या उठवा सकेगी

                (3) कंपनी ऐसी अवधि के भीतर जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, केंद्रीय सरकार को उन उपक्रमों के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, नियत दिन को यथाविद्यमान अपनी सभी संपत्तियों और आस्तियों की एक संपूर्ण तालिका देगी और केंद्रीय सरकार इस प्रयोजन के लिए कंपनी को सभी युक्तियुक् सुविधाएं प्रदान करेगी

अध्याय 5

कंपनी के उपक्रमों के कर्मचारियों के बारे में उपबंध

10. कुछ कर्मचारियों के नियोजन का बना रहना––(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व कंपनी के उपक्रमों में से किसी उपक्रम में नियोजित रहा है, नियत दिन से ही, केंद्रीय सरकार का कर्मचारी हो जाएगा ; और केंद्रीय सरकार के अधीन पेंशन, उपदान और अन् बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे उस दशा में अनुज्ञेय होते यदि ऐसा निधान हुआ होता और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक कि केंद्रीय सरकार के अधीन उसका नियोजन सम्यक् रूप में समाप् नहीं कर दिया जाता या जब तक कि उसके पारिश्रमिक और सेवा की अन् शर्तों में केंद्रीय सरकार सम्यक् रूप से परिवर्तन नहीं कर देती है :

परंतु जब तक कि उस निमित्त उस समय प्रवृत्त नियमों के अनुसार नियत दिन के पश्चात् ऐसे व्यक्ति को सेवा के किसी विस्तार की मंजूरी नहीं दी जाती है तब तक, ऐसा व्यक्ति––

() जहां उसने नियत दिन से पूर्व, या को, या उसके तीन मास की अवधि के भीतर अठावन वर्ष की आयु प्राप् कर ली है या कर लेता है, तो तीन मास की उक् अवधि के अवसान की तारीख को या उस तारीख को जिसको वह नियत दिन के तुरंत पूर्व उसे लागू होने वाली सेवा की शर्तों के अनुसार सेवा से अनिवार्य रूप से निवृत्त हो जाता, इनमें से जो भी तारीख पूर्वतर हो;

() किसी अन् मामले में अठावन वर्ष की आयु प्राप् कर लेने पर; केंद्रीय सरकार की सेवा से अनिवार्य रूप से निवृत्त हो जाएगा

                (2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन् विधि में किसी बात के होते हुए भी, कंपनी के उपक्रमों में नियोजित किसी अधिकारी या अन् व्यक्ति की सेवाओं का केंद्रीय सरकार को अंतरण ऐसे अधिकारी या अन् कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन् विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन् प्राधिकरण द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा

11. भविष् निधि और अन् निधियां––(1) जहां कंपनी के उपक्रमों में से किसी उपक्रम में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए कंपनी ने कोई भविष् निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या कोई अन् निधि स्थापित की है वहां ऐसे अधिकारियों या अन् कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन केंद्रीय सरकार को अंतरित हो गई हैं, संबंधित धनराशियां ऐसी भविष् निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन् निधि में नियत दिन को जमा धनराशियों में से केंद्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगी

                (2) उन धनराशियों के संबंध में जो उपधारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार को अंतरित हो जाती हैं, केंद्रीय सरकार द्वारा ऐसी रीति से कार्रवाई की जाएगी जो नियमों द्वारा विहित की जाए

अध्याय 6

प्रकीर्ण

12. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव––इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन् विधि में या इस अधिनियम से भिन् किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी अन् न्यायालय, अधिकरण या अन् प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे

               

13. शास्तियां––जो कोई व्यक्ति––

() कंपनी के उपक्रमों की भागरूप किसी संपत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केंद्रीय सरकार से सदोष विधारित करेगा; या

() कंपनी के उपक्रमों की भागरूप किसी संपत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप् करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा; या

() ऐसे उपक्रमों से संबंधित किसी दस्तावेज को जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केंद्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा विनिर्दिष् किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को देने से जानबूझकर विधारित करेगा या उसे देने में असफल रहेगा; या

() कंपनी के उपक्रमों से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखाबहियों, रजिस्टरों या अन् दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हैं, केंद्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा विनिर्दिष् किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को देने में असफल रहेगा; या

() कंपनी के उपक्रमों की भागरूप किसी संपत्ति को सदोष हटाएगा या नष् करेगा या ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है,

वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा

14. कंपनियों द्वारा अपराध––(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

                परंतु इस उपधारा की कोई बात ऐसे व्यक्ति को किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी

                (2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन् अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन् अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा

                स्पष्टीकरण––इस धारा के प्रयोजनों के लिए––

() “कंपनीसे कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन् संगम भी है, और

                () फर्म के संबंध मेंनिदेशकसे उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है

15. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण––(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए केंद्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी या अन् कर्मचारी अथवा उस सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन् व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन् विधिक कार्यवाही नहीं होगी

(2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन् विधिक कार्यवाही केंद्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी या अन् कर्मचारी अथवा उस सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन् व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी

16. शक्तियों का प्रत्यायोजन––(1) केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली ऐसी सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग, जो इस धारा और धारा 17 और धारा 18 द्वारा प्रदत्त शक्तियों से भिन् हो, किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष् किए जाएं

(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया जाता है तब वह व्यक्ति जिसको ऐसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया गया है, केंद्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा

17. नियम बनाने की शक्ति––(1) केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में ऐसी रीति का उपबंध किया जा सकेगा, जिससे धारा 11 के अधीन किसी भविष् निधि या अन् निधि में धनराशियों को बरता जाएगा

                (3) इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक् आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक् अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

18. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति––यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन् होती है तो केंद्रीय सरकार आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत हो, ऐसी कठिनाई को दूर कर सकेगी: परन्‍तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

______

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter