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आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 ( Assam Reorganisation (Meghalaya) Act, 1969 )


 

आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969

(1969 का अधिनियम संख्यांक 55)

[29 दिसम्बर, 1969]

आसाम राज्य में मेघालय नामक एक स्वायत्त राज्य बनाने का और तत्संबद्ध

विषयों का उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के बीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

भाग 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 कहा जा सकेगा

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे:

परन्तु इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

() नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार स्वायत्त राज्य बनाने के लिए, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ;

() अनुच्छेद" से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है ;

() स्वायत्त राज्य" से धारा 3 के अधीन बनाया गया मेघालय का स्वायत्त राज्य अभिप्रेत है ;

() निर्वाचन-क्षेत्र" से विधान सभा के लिए निर्वाचन के प्रयोजनार्थ धारा 12 के अधीन किए गए आदेश द्वारा उपबंधित प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र अभिप्रेत है ;

() निर्वाचन आयोग" से राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 324 के अधीन नियुक्त निर्वाचन आयोग अभिप्रेत है ;

() राज्यपाल" से इस अधिनियम के आधार पर मेघालय के संबंध में राज्यपाल के रूप में अपने कृत्यों का निर्वहन कर रहा आसाम का राज्यपाल अभिप्रेत है ;

() विधि" के अन्तर्गत संपूर्ण स्वायत्त राज्य में या उसके किसी भाग में नियत दिन के ठीक पहले विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी हैं ;

() विधान सभा" से मेघालय की विधान सभा अभिप्रेत है ;

() मेघालय" से धारा 3 में निर्दिष्ट स्वायत्त राज्य अभिप्रेत है ;

() सदस्य" से विधान सभा का सदस्य अभिप्रेत है ;

() शासकीय राजपत्र" से मेघालय का शासकीय राजपत्र या भारत का राजपत्र अभिप्रेत है ; तथा

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है

 

भाग 2

मेघालय के स्वायत्त राज्य का बनाया जाना

3. मेघालय का बनाया जाना-(1) आसाम राज्य में नियत दिन से एक स्वायत्त राज्य बनाया जाएगा जो मेघालय कहलाएगा और जिसमें, उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित जनजाति क्षेत्र समाविष्ट होंगे, अर्थात् :-

(i) संविधान की षष्ठ अनुसूची के पैरा 20 के उपपैरा (2) में (उसके परन्तुक को छोड़कर) यथावर्णित संयुक्त खासी-जयन्तिया पहाड़ी जिला, किन्तु उन क्षेत्रों को छोड़कर जो आसाम सरकार की तारीख 13 अप्रैल, 1951 की अधिसूचना सं० टीएडी/आर/31/50/149 द्वारा मिकिर पहाड़ी स्वायत्त जिले को अंतरित किए गए ; तथा

(ii) पूर्वोक्त पैरा 20 से संलग्न सारणी के भाग में विनिर्दिष्ट गारो पहाड़ी जिला

                (2) यदि उस तारीख  से पहले जो केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस प्रयोजन के लिए नियत करे और जो नियत दिन के पश्चात् की हो, यथास्थिति, उत्तरी कछार पहाड़ी या मिकिर पहाड़ी या दोनों स्वायत्त जिलों की जिला परिषद् अपने सदस्यों के दो-तिहाई से अन्यून के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा यह इच्छा प्रकट करे कि उक्त स्वायत्त जिला या जिले मेघालय का भाग बने या बनें, तो राष्ट्रपति उस भाव की घोषणा आदेश द्वारा कर सकेगा और तद्नुसार नियत दिन से, यथास्थिति, उत्तरी कछार पहाड़ी जिला या मिकिर पहाड़ी जिला या दोनों मेघालय के भाग हो जाएंगे

4. मेघालय की कार्यपालिका शक्ति-(1) मेघालय की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी तथा वह उसका प्रयोग इस अधिनियम के अनुसार या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा

                (2) इस धारा की किसी बात से-

() वे कृत्य राज्यपाल को अन्तरित समझे जाएंगे जो किसी विद्यमान विधि द्वारा किसी अन्य प्राधिकारी को प्रदान किए गए हैं, अथवा

() संसद् अथवा आसाम या मेघालय का विधान-मंडल राज्यपाल के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी को विधि द्वारा कृत्य प्रदान करने से निवारित होगा

5. मेघालय की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, मेघालय की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उन विषयों पर होगा जिनके बारे में मेघालय के विधान-मंडल को विधि बनाने की शक्ति है :

                परन्तु किसी ऐसे विषय में, जिनके बारे में मेघालय के विधान-मंडल, आसाम राज्य के विधान-मंडल और संसद् को विधि बनाने की शक्ति है, मेघालय की कार्यपालिका शक्ति, यथास्थिति, इस अधिनियम द्वारा अथवा संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा संघ को या आसाम राज्य को या उसके प्राधिकारियों को अथवा आसाम राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा आसाम राज्य को या उसके प्राधिकारियों को अभिव्यक्त रूप से प्रदत्त कार्यपालिका शक्ति के अधीन और उससे परिसीमित रहेगी

                (2) नियत दिन से आसाम राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार मेघालय के सम्बन्ध में उन विषयों पर होगा जिनके बारे में विधि बनाने की शक्ति इस अधिनियम के अधीन अनन्यतः मेघालय के विधान-मंडल को है

                (3) शंकाओं को दूर करने के लिए एतद्द्वारा घोषित किया जाता है कि इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, आसाम राज्य की कार्यपालिका शक्ति मेघालय के सम्बन्ध में उन विषयों पर बनी रहेगी जिनके बारे में विधि बनाने की शक्ति मेघालय के विधान-मंडल को नहीं है

6. मंत्रि-परिषद्-(1) राज्यपाल को मेघालय के संबंध में उसके कृत्यों का संपादन करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा

                (2) क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी, यदि दी तो क्या दी, इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच की जाएगी

7. मंत्रियों संबंधी अन्य उपबंध-(1) मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा और मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेंगे

                (2) मंत्रि-परिषद् विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी

                (3) किसी मंत्री के अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल उसे प्रथम अनुसूची में इस प्रयोजनार्थ दिए गए प्ररूप के अनुसार पद की और गोपनीयता की शपथ दिलाएगा

(4) कोई मंत्री, जो निरन्तर छह मास की किसी कालावधि तक विधान सभा का सदस्य रहे, उस कालावधि की समाप्ति पर मंत्री रह जाएगा

(5) मंत्रियों के वेतन और भत्ते ऐसे होंगे जो मेघालय का विधान-मंडल समय-समय पर, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब तक विधान-मंडल इस प्रकार अवधारित करे तब तक के लिए राज्यपाल द्वारा अवधारित किए जाएंगे

8. मेघालय का महाधिवक्ता-(1) राज्यपाल, यदि वह ऐसा करना ठीक समझे तो, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की अर्हता रखने वाले किसी व्यक्ति को मेघालय का महाधिवक्ता नियुक्त कर सकेगा

(2) महाधिवक्ता का कर्तव्य होगा कि वह मेघालय सरकार को ऐसे विधि संबंधी विषयों पर सलाह दे तथा विधिक रूप के अन्य ऐसे कर्तव्यों का पालन करे जो राज्यपाल उसे समय-समय पर निर्देशित करे या सौंपे तथा उन कृत्यों का निर्वहन करे जो इस अधिनियम अथवा अन्य किसी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदान किए गए हों

(3) महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा तथा ऐसा पारिश्रमिक पाएगा जो राज्यपाल अवधारित करे

9. कार्य-संचालन-(1) मेघालय सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की गई अभिव्यक्त की जाएगी

(2) राज्यपाल के नाम से किए गए और निष्पादित आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणन उस रीति से किया जाएगा जो राज्यपाल द्वारा बनाए जाने वाले नियमों में विनिर्दिष्ट हों तथा इस प्रकार अधिप्रमाणित आदेश या लिखत की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत की जाएगी कि वह राज्यपाल द्वारा किया गया या निष्पादित आदेश या लिखत नहीं है

(3) मेघालय सरकार का कार्य अधिक सुविधापूर्वक किए जाने के लिए और उक्त कार्य के मंत्रियों में आबंटन के लिए राज्यपाल नियम बनाएगा

10. राज्यपाल को जानकारी देने आदि विषयक मुख्यमंत्री के कर्तव्य-मेघालय के मुख्यमंत्री का कर्तव्य होगा कि वह-

() मेघालय के कार्यकलाप के प्रशासन से तथा विधान की प्रस्थापनाओं से संबद्ध मंत्रि-परिषद् के सब विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे;

() मेघालय के कार्यकलाप के प्रशासन से तथा विधान की प्रस्थापनाओं से संबद्ध जो जानकारी राज्यपाल मंगाए वह उसे दे ; तथा

() किसी विषय को, जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया हो किन्तु मंत्री-परिषद् ने विचार किया हो, राज्यपाल की अपेक्षा करने पर, परिषद् के समक्ष विचार के लिए निवेदित करे

भाग 3

विधान-मंडल

साधारण

11. मेघालय के विधान-मंडल का गठन-(1) मेघालय के लिए एक विधान-मंडल होगा जो राज्यपाल तथा विधान सभा से मिलकर बनेगा

                (2) मेघालय के निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरे जाने विधान सभा के स्थानों की कुल संख्या केन्द्रीय सरकार द्वारा, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात्, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत की जाएगी, किन्तु वह पैंतीस से कम या पचपन से अधिक होगी

                (3) यदि राज्यपाल की राय हो कि मेघालय के किन्हीं अल्पसंख्यक समुदायों के विधान सभा में प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है और उनका उसमें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो वह उन समुदायों के तीन से अधिक सदस्यों को, जो सरकार की सेवा में के व्यक्ति हों, विधान सभा के लिए नामनिर्दिष्ट कर सकेगा

12. निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-(1) निर्वाचन आयोग विधान सभा में धारा 11 की उपधारा (2) के अधीन नियत कुल स्थानों को एक-सदस्य निर्वाचन-क्षेत्रों में इसमें उपबंधित रीति से वितरित कर देगा और उनका परिसीमन, निम्नलिखित उपबन्धों का ध्यान रखते हुए अंतिम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर करेगा, अर्थात् :-

() सब निर्वाचन-क्षेत्रों में यथासंभव भौगोलिक दृष्टि से संहृत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन भौतिक लक्षणों, प्रशासनिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार की सुविधाओं और लोक-सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ;

() प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र का इस प्रकार परिसीमन किया जाएगा कि वह आसाम राज्य की विधान सभा के एक ही सभा निर्वाचन-क्षेत्र में पड़े ; तथा

() प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र की जनसंख्या समस्त मेघालय में यथासाध्य वही होगी

                (2) निर्वाचन आयोग इस धारा के अधीन अपने कृत्यों के पालन में अपनी सहायता के प्रयोजनार्थ पांच से अनधिक उतने सहयुक्त सदस्य जितने राज्यपाल मेघालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्दिष्ट करे अपने साथ सहयुक्त करेगा :

                परन्तु किसी सहयुक्त सदस्य को मत देने का या निर्वाचन आयोग के किसी विनिश्चय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार होगा

                (3) यदि सहयुक्त सदस्य का पद मृत्यु या पद त्याग के कारण रिक्त हो जाए तो वह, यथासाध्य शीघ्र, उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार राज्यपाल द्वारा भरा जाएगा

                (4) निर्वाचन आयोग-

() निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपनी प्रस्थापनाएं, किसी ऐसे सहयुक्त सदस्य की विसम्मत प्रस्थापनाओं सहित, (यदि कोई हों) जो उनका प्रकाशन चाहे शासकीय राजपत्र में और अन्य ऐसी रीति से, जिसे आयोग ठीक समझे, प्रकाशित करेगा और साथ-साथ एक सूचना भी प्रकाशित करेगा जिसमें प्रस्थापनाओं के सम्बन्ध में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हों और वह तारीख विनिर्दिष्ट हो जिसको या जिसके पश्चात् प्रस्थापनाओं पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा ;

() उन सब आपत्तियों और सुझावों पर, जो उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पहले प्राप्त हुए हों विचार करेगा और ऐसे विचार के प्रयोजनार्थ एक या अधिक सार्वजनिक बैठकें ऐसे स्थान या स्थानों पर करेगा जो वह ठीक समझे ;

() उसे इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पहले प्राप्त हुई सब आपत्तियों और सुझावों पर, विचार करने के पश्चात् एक या अधिक आदेशों द्वारा निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन अवधारित करेगा, और ऐसे आदेश या आदेशों को शासकीय राजपत्र में प्रकाशित कराएगा ; और ऐसे प्रकाशन पर वह आदेश या वे आदेश विधि का पूर्ण बल रखेंगे और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किए जाएंगे

                (5) ऐसा प्रत्येक आदेश ऐसे प्रकाशन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा

                (6) प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर विधान सभा के स्थानों की कुल संख्या और मेघालय के प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजन का पुनः समायोजन ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से किया जाएगा जिसे संसद् विधि द्वारा अवधारित करे :

                परन्तु ऐसे किसी पुनः समायोजन का प्रभाव विधान सभा में प्रतिनिधित्व पर तब तक पड़ेगा जब तक उस समय विद्यमान सभा विघटित हो जाए

                स्पष्टीकरण-इस धारा में अंतिम जनगणना के आंकड़ों" से मेघालय की जनगणना के वे आंकड़े अभिप्रेत हैं जो उस अंतिम जनगणना से विनिश्चेय हैं जिसके अंतिम रूप से प्रकाशित आंकड़े उपलभ्य हैं

13. परिसीमन आदेशों को अद्यतन रखने की निर्वाचन आयोग की शक्ति-(1) निर्वाचन आयोग, समय-समय पर, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-

() धारा 12 के अधीन किए गए किसी आदेश में किसी मुद्रण संबंधी भूल को या उसमें अनवधानता से हुई भूल या लोप के कारण हुई किसी गलती को ठीक कर सकेगा ;

() जहां ऐसे किसी आदेश में वर्णित किसी प्रादेशिक खंड की सीमाओं या नाम में परिवर्तन हो जाए वहां ऐसे संशोधन, जो ऐसे आदेश को अद्यतन करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों, कर सकेगा

                (2) इस धारा के अधीन की प्रत्येक अधिसूचना जारी किए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधान सभा के समक्ष रखी जाएगी

14. निर्वाचक और निर्वाचक नामावलि-(1) वही व्यक्ति सदस्यों के निर्वाचन में मत देने के हकदार होंगे जो संविधान तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) के उपबन्धों के आधार पर लोक सभा के लिए निर्वाचन में मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकरण के हकदार हों

                (2) प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावलि आसाम राज्य की विधान सभा के सभा निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावलि के उतने भाग से बनेगी जो उस निर्वाचन-क्षेत्र में समाविष्ट क्षेत्रों के संबंध में हो तथा ऐसे किसी निर्वाचन-क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावलि अलग से तैयार करने या पुनरीक्षित करने की आवश्यकता होगी

15. मत देने का अधिकार-प्रत्येक व्यक्ति, जिसका नाम निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावलि में तत्समय प्रविष्ट हो, उस निर्वाचन-क्षेत्र से सदस्य के निर्वाचन में मत देने का हकदार होगा

16. सदस्यता के लिए अर्हता-कोई व्यक्ति विधान सभा के किसी स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए तब ही अर्हित होगा जब वह-

() भारत का नागरिक हो और निर्वाचन आयोग द्वारा उस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष प्रथम अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्ररूप के अनुसार शपथ ले ले या प्रतिज्ञान करे तथा उस पर हस्ताक्षर कर दे;

() पच्चीस वर्ष से कम आयु का हो; तथा

() मेघालय के किसी निर्वाचन-क्षेत्र का निर्वाचक हो

17. विधान-सभा के लिए निर्वाचन-ऐसे उपांतरों के अधीन रहते हुए जो राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) के भाग 1, भाग 2 के अध्याय 3 और 4 तथा भाग 3 से 11 तक के तथा उनके अधीन बनाए गए तत्समय प्रवृत्त नियमों और आदेशों के उपबन्ध मेघालय की विधान सभा के लिए निर्वाचनों को और उनके संबंध में ऐसे लागू होंगे जैसे वे किसी राज्य की विधान सभा के लिए निर्वाचन को और उनके संबंध में लागू होते हैं

18. विधान सभा की अवधि-विधान सभा, यदि पहले ही विघटित कर दी जाए तो, अपने प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी और इससे अधिक नहीं तथा पांच वर्ष की उक्त कालावधि की समाप्ति का परिणाम विधान सभा का विघटन होगा:

                परन्तु उक्त कालावधि को, जब तक अनुच्छेद 352 के खण्ड (1) के अधीन जारी की गई आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो, संसद् विधि द्वारा किसी कालावधि के लिए बढ़ा सकेगी जो एक बार में एक वर्ष से अधिक होगी तथा, किसी भी दशा में, उद्घोषणा के प्रवर्तन का अंत हो जाने के पश्चात् छह मास की कालावधि से अधिक विस्तृत होगी

19. विधान सभा के सत्र, सत्रावसान और विघटन-(1) राज्यपाल समय-समय पर विधान सभा को ऐसे समय तथा स्थान पर, जो वह उचित समझे, अधिवेशन के लिए आहूत करेगा किन्तु उसके एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख के बीच छह मास का अंतर होगा

                (2) राज्यपाल, समय-समय पर, -

() विधान सभा का सत्रावसान कर सकेगा;

() विधान सभा का विघटन कर सकेगा

20. विधान सभा को संबोधित करने और संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार-(1) राज्यपाल विधान सभा को संबोधित कर सकेगा तथा उस प्रयोजन के लिए सदस्यों की उपस्थिति की अपेक्षा कर सकेगा

                (2) राज्यपाल विधान सभा में उस समय लंबित किसी विधेयक विषयक अथवा अन्य विषयक संदेश विधान सभा को भेज सकेगा तथा जब इस प्रकार संदेश भेजा जाए तब विधान सभा उस संदेश द्वारा अपेक्षित विचारणीय विषय पर सुविधानुसार शीघ्रता से विचार करेगी

21. राज्यपाल द्वारा विशेष सम्बोधन-(1) विधान सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के प्रारंभ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में राज्यपाल विधान सभा को संबोधित करेगा तथा सभा को उसके आह्वान के कारण बताएगा

                (2) विधान सभा की प्रक्रिया के विनियामक नियमों में ऐसे संबोधन में निर्दिष्ट विषयों पर चर्चा हेतु समय आबंटित करने के लिए उपलब्ध किया जाएगा

22. विधान सभा के बारे में मंत्रियों के अधिकार-मेघालय के प्रत्येक मंत्री और महाधिवक्ता को अधिकार होगा कि वह विधान सभा में बोले तथा अन्य प्रकार से उसकी कार्यवाहियों में भाग ले तथा विधान सभा की किसी समिति में जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया हो, बोले तथा अन्य प्रकार से उसकी कार्यवाहियों में भाग ले, किन्तु इस धारा के आधार पर वह मत देने का हकदार होगा

विधान सभा के अधिकारी

23. विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-(1) विधान सभा यथाशक्यशीघ्र अपने दो सदस्यों को क्रमशः अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगी तथा जब-जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो तब-तब सभा किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुनेगी

                (2) विधान सभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के रूप में पद-धारण करने वाला सदस्य-

() यदि वह सभा का सदस्य नहीं रहता है तो अपना पद रिक्त कर देगा;

() किसी समय भी, यदि वह सदस्य अध्यक्ष है तो उपाध्यक्ष को और यदि उपाध्यक्ष है तो अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;

() विधान सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित सभा के संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा:

                परन्तु खण्ड () के प्रयोजन के लिए कोई संकल्प तब तक प्रस्तावित किया जाएगा जब तक कि उसे प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना दे दी गई हो:

                परन्तु यह और कि जब विधान सभा का विघटन किया जाए तो विघटन के पश्चात् होने वाले विधान सभा के प्रथम अधिवेशन के ठीक पहले तक अध्यक्ष अपने पद को रिक्त करेगा

                (3) जब अध्यक्ष का पद रिक्त हो तब उपाध्यक्ष, अथवा यदि उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त हो तो विधान सभा का ऐसा सदस्य जिसे राज्यपाल उस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा

                (4) विधान सभा की किसी बैठक से अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, अथवा यदि वह भी अनुपस्थित हो तो ऐसा व्यक्ति जो विधान सभा की प्रक्रिया के नियमों से अवधारित किया जाए अथवा यदि ऐसा कोई व्यक्ति उपस्थित हो तो ऐसा अन्य व्यक्ति जो विधान सभा द्वारा अवधारित किया जाए, अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा

                (5) विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को ऐसे वेतन और भत्ते, जैसे मेघालय का विधान-मण्डल विधि द्वारा क्रमशः नियत करे, तथा जब तक उस निमित्त उपबन्ध इस प्रकार किया जाए तब तक ऐसे वेतन और भत्ते जैसे राज्यपाल आदेश द्वारा अवधारित करे, दिए जाएंगे

24. जब अध्यक्ष  या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो तब उसका पीठासीन होना-(1) विधान सभा की किसी बैठक में जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन हो तब अध्यक्ष, अथवा जब उपाध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन हो तब उपाध्यक्ष उपस्थित रहने पर भी पीठासीन होगा तथा धारा 23 की उपधारा (4) के उपबन्ध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध में उस प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस बैठक के संबंध में लागू होते हैं जिससे, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अनुपस्थित है

                (2) जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विधान सभा में विचाराधीन हो तब उसे विधान सभा में बोलने तथा उसकी कार्यवाहियों में अन्य प्रकार से भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु धारा 27 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे संकल्प पर या ऐसी कार्यवाहियों के दौरान किसी अन्य विषय पर प्रथमतः ही मत देने का हक होगा, किन्तु मत बराबर होने की दशा में नहीं होगा

25. विधान सभा का सचिवालय-(1) विधान सभा का पृथक् सचिवीय कर्मचारिवृन्द होगा

                (2) मेघालय का विधान-मण्डल विधि द्वारा विधान सभा के सचिवीय कर्मचारिवृन्द में भर्ती का और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन कर सकेगा

                (3) जब तक मेघालय का विधान-मण्डल उपधारा (2) के अधीन उपबन्ध नहीं करता तब तक राज्यपाल विधान सभा के अध्यक्ष से परामर्श के पश्चात् विधान सभा के सचिवीय कर्मचारिवृन्द में भर्ती के तथा नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा तथा इस प्रकार बने कोई नियम उक्त उपधारा के अधीन बनी किसी विधि के उपबन्धों के अधीन रह कर ही प्रभावी होंगे

कार्य-संचालन

26. सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान-विधान सभा का प्रत्येक सदस्य अपना स्थान ग्रहण करने के पूर्व, राज्यपाल या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष प्रथम अनुसूची में इस प्रयोजन से दिए हुए प्ररूप के अनुसार शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा तथा उस पर हस्ताक्षर करेगा

27. सभा में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सभा की कार्य करने की शक्ति तथा गणपूर्ति-(1) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, विधान सभा की किसी बैठक में सब प्रश्नों का अवधारण, अध्यक्ष अथवा उसके रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को छोड़कर, उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा

                (2) अध्यक्ष या उसके रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति प्रथमतः मत नहीं देगा किन्तु मत बराबर होने की दशा में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा

                (3) विधान सभा को अपनी सदस्यता में कोई रिक्ति होने पर भी कार्य करने की शक्ति होगी तथा यदि बाद में यह पता चले कि कोई व्यक्ति, जिसे ऐसा करने का हक था, कार्यवाहियों में उपस्थित रहा या उसने मत दिया या अन्य प्रकार से भाग लिया तो भी विधान सभा में की गई कार्यवाही विधिमान्य होगी

                (4) जब तक मेघालय का विधान-मण्डल विधि द्वारा अन्यथा उपबन्धित करे तब तक विधान सभा का अधिवेशन गठित करने के लिए गणपूर्ति दस सदस्यों से होगी

                (5) यदि विधान सभा के अधिवेशन के दौरान किसी समय गणपूर्ति हो तो अध्यक्ष या उसके रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति का कर्तव्य होगा कि वह या तो सभा को स्थगित कर दे या अधिवेशन को तब तक के लिए निलम्बित कर दे जब तक गणपूर्ति हो जाए

सदस्यों की निरर्हताएं

28. स्थानों की रिक्ति-(1) कोई व्यक्ति संसद् या आसाम राज्य की विधान सभा और मेघालय की विधान सभा दोनों का सदस्य होगा तथा यदि कोई व्यक्ति संसद् या आसाम राज्य की विधान सभा और मेघालय की विधान सभा दोनों का सदस्य चुन लिया जाए तो ऐसी कालावधि की समाप्ति पर, जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट हो, यथास्थिति, संसद् या आसाम राज्य की विधान सभा में उस व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने मेघालय की विधान सभा में अपने स्थान को पहले ही त्याग दिया हो

                (2) यदि विधान सभा का कोई सदस्य-

() धारा 29 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी के अधीन हो जाता है, अथवा

() अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने स्थान का त्याग कर देता है,

तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा

                (3) यदि विधान सभा का कोई सदस्य साठ दिन की कालावधि तक विधान सभा की अनुज्ञा के बिना उसके सब अधिवेशनों से अनुपस्थित रहे तो सभा उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगी:

                परन्तु साठ दिन की उक्त कालावधि की संगणना में किसी ऐसी कालावधि को सम्मिलित किया जाएगा जिसमें सभा सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित रही हो

29. सदस्यता के लिए निरर्हताएं-(1) कोई व्यक्ति विधान सभा का सदस्य चुने जाने के लिए तथा सदस्य होने के लिए निर्रहित होगा-

() यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के या मेघालय की सरकार के अधीन, ऐसे पद को छोड़कर जिसे धारण करने वाले का निरर्हित होना मेघालय के विधान-मण्डल ने विधि द्वारा घोषित किया हो, कोई अन्य लाभ का पद धारण किए हुए हो;

() यदि वह विकृतचित्त हो तथा सक्षम न्यायालय की ऐसी घोषणा विद्यमान हो;

() यदि वह अनुन्मोचित दिवालिया हो;

() यदि वह भारत का नागरिक हो या किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर चुका हो या किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या अनुषक्ति अभिस्वीकार किए हुए हो;

() यदि वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) के भाग 2 के अध्याय 3 के उपबन्धों के, जैसे कि वे धारा 17 द्वारा विधान सभा को और उसके संबंध में लागू किए गए हैं, द्वारा या अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया गया हो

                (2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए कोई व्यक्ति भारत सरकार के अथवा किसी राज्य की सरकार के अथवा मेघालय की सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करने वाला केवल इसी कारण नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का या ऐसे राज्य का या मेघालय का मंत्री है

                (3) यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई सदस्य ऐसा सदस्य होने के लिए, उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन निरर्हित हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न राज्यपाल को विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा तथा उसका विनिश्चय अन्तिम होगा

                (4) ऐसे किसी प्रश्न पर कोई विनिश्चय देने के पूर्व राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय अभिप्राप्त करेगा और ऐसी राय के अनुसार कार्य करेगा

30. शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने के पूर्व अथवा अर्हित होते हुए या निरर्हित होते हुए बैठने और मत देने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, धारा 26 की अपेक्षाओं का अनुपालन करने के पहले या यह जानते हुए कि वह उसकी सदस्यता के लिए अर्हित नहीं है या निरर्हित है या संसद् या मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबन्धों से ऐसा करने से प्रतिषिद्ध है, विधान सभा के सदस्य के रूप में बैठेगा या मतदान करेगा तो वह प्रत्येक दिन के लिए, जब वह इस प्रकार बैठता है या मतदान करता है, पांच सौ रुपए की शास्ति का दायी होगा, जो मेघालय को देय ऋण के रूप में वसूल की जाएगी

31. सदस्यों की शक्तियां, विशेषाधिकार, आदि-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के तथा मेघालय के विधान-मण्डल की प्रक्रिया के विनियामक नियमों और स्थायी आदेशों के अधीन रहते हुए मेघालय की विधान सभा में वाक्-स्वातंत्र्य होगा

                (2) सभा में या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात अथवा दिए गए किसी मत के बारे में मेघालय की विधान सभा के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही चल सकेगी और सभा द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन किसी रिपोर्ट या पत्र या किन्हीं मतों या कार्यवाहियों के प्रकाशन के विषय में इस प्रकार की कोई कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध चल सकेगी

                (3) अन्य बातों में विधान सभा की तथा उसके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां वे ही होंगी जो मेघालय का विधान-मंडल समय-समय पर, विधि द्वारा, परिनिश्चित करे तथा जब तक इस प्रकार परिनिश्चित नहीं की जाती तब तक वही होंगी जो लोक सभा तथा उसके सदस्यों और समितियों की तत्समय हों

                (4) जिन व्यक्तियों को इस अधिनियम के आधार पर विधान सभा या उसकी किसी समिति में बोलने का अथवा उसकी कार्यवाहियों में अन्य प्रकार से भाग लेने का अधिकार है, उनके सम्बन्ध में उपधारा (1), (2) और (3) के उपबन्ध उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे सभा के सदस्यों के संबंध में लागू होते हैं

32. सदस्यों के वेतन और भत्ते-विधान सभा के सदस्यों को ऐसे वेतन और भत्ते, जो मेघालय का विधान-मंडल विधि द्वारा समय-समय पर अवधारित करे, तथा जब तक उसके लिए इस प्रकार उपबंध किया जाए तब तक ऐसे वेतन और भत्ते जो राज्यपाल आदेश द्वारा अवधारित करे, पाने का हक होगा

विधायी शक्तियां और प्रक्रिया

33. विधायी शक्ति का विस्तार-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए मेघालय के विधान-मण्डल को द्वितीय अनुसूची के भाग या भाग के प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में मेघालय या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति होगी:

                परन्तु मेघालय के विधान-मण्डल की विधि बनाने की अनन्य शक्ति का, जहां तक वह संविधान के प्रारम्भ के ठीक पहले यथा विद्यमान शिलांग नगरपालिका में समाविष्ट क्षेत्र के उस भाग के सम्बन्ध में हो, जो मिलियम के खासी राज्य का भाग था, विस्तार केवल उन विषयों पर होगा जिनके बारे में विधि (वह चाहे जिस रूप में हो) बनाने की शक्ति संविधान की षष्ट अनुसूची द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में, उस क्षेत्र पर प्राधिकार रखने वाली जिला परिषद् को नियत दिन के ठीक पहले हो

                (2) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, मेघालय के विधान-मण्डल को तथा आसाम राज्य के विधान-मण्डल को भी द्वितीय अनुसूची के भाग में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में मेघालय या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी:

                परन्तु ऐसी विधि बनाने की मेघालय के विधान-मण्डल की शक्ति का विस्तार शिलांग नगरपालिका में समाविष्ट उस क्षेत्र पर होगा जो संविधान के प्रारम्भ के ठीक पहले मिलियम के खासी राज्य का भाग था

                (3) शंकाओं को दूर करने के लिए एतद्द्वारा घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) या उपधारा (2) की कोई बात उन शक्तियों को कम करेगी जो संविधान द्वारा-

() सम्पूर्ण आसाम राज्य, जिसके अन्तर्गत मेघालय भी है, या उसके किसी भाग के लिए द्वितीय अनुसूची में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में विधि बनाने के लिए संसद् को प्रदत्त हैं; अथवा

() सम्पूर्ण आसाम राज्य जिसके अन्तर्गत मेघालय भी है, या उसके किसी भाग के लिए संविधान की सप्तम अनूसूची की सूची 2 या सूची 3 में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में, उसके सिवाय जहां तक उपर्युक्त कोई विषय उपधारा (1) के अन्तर्गत आता है, विधि बनाने के लिए आसाम राज्य के विधान-मण्डल को प्रदत्त है

34. संघ और आसाम राज्य की संपत्तियों को तथा आसाम या मेघालय में रजिस्ट्रीकृत कुछ यानों को कराधान से छूट-(1) वहां तक के सिवाय जहां तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबन्ध करे, संघ की संपत्ति मेघालय द्वारा या मेघालय में के किसी प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित सब करों से छूट-प्राप्त होगी

                (2) जब तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबन्ध करे तब तक उपधारा (1) की कोई बात मेघालय में के किसी प्राधिकारी को संघ की किसी संपत्ति पर कोई ऐसा कर जिसके लिए ऐसी संपत्ति पर इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले दायित्व था या माना जाता था, उद्गृहीत करने से तब तक निवारित करेगी जब तक वह कर मेघालय में उद्गृहीत होता रहे

                (3) जब तक मेघालय की सम्पत्ति शेष आसाम राज्य में आसाम सरकार द्वारा या आसाम राज्य में के किसी प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित करों से छूट-प्राप्त रहे, तब तक आसाम राज्य की सम्पत्ति मेघालय द्वारा या मेघालय में के किसी प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित सभी करों से छूट-प्राप्त होगी

                (4) जब तक मेघालय में के किसी स्थान में रजिस्ट्रीकृत यान, जो आसाम राज्य के उस क्षेत्र में होकर जाए जो मेघालय में नहीं है, आसाम राज्य के विधान-मंडल द्वारा अधिनियमित किसी विधि के अधीन कर से छूट-प्राप्त रहे, जब तक आसाम राज्य के उस स्थान में, जो मेघालय में नहीं है, रजिस्ट्रीकृत कोई यान, जो मेघालय में होकर जाए, मेघालय के विधान-मंडल द्वारा अधिनियमित किसी विधि के अधीन किसी कर का दायी होगा

35. संसद् द्वारा बनाई गई विधियों तथा मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति-(1) यदि मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि का कोई उपबन्ध संसद् द्वारा बनाई गई ऐसी विधि के, जिसे संसद् अधिनियमित करने के लिए सक्षम हो, अथवा संविधान की सप्तम अनुसूची की समवर्ती सूची में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में विद्यमान विधि के किसी उपबन्ध के विरुद्ध हो तो उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए यह है कि संसद् द्वारा बनाई गई विधि, चाहे वह मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि के पहले पारित हुई हो या उसके पश्चात् या, यथास्थिति, विद्यमान विधि, अभिभावी होगी तथा मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि विरोध की मात्रा तक शून्य होगी

                (2) जहां मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि में जो संविधान की सप्तम अनुसूची की समवर्ती सूची में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में हो और जिसे अधिनियमित करने के लिए मेघालय का विधान-मण्डल इस अधिनियम के अधीन सक्षम हो कोई ऐसा उपबन्ध हो जो संसद् द्वारा पहले बनाई गई किसी विधि के या उस विषय के बारे में किसी विद्यमान विधि के उपबन्धों के विरुद्ध हो वहां मेघालय के विधान-मंडल द्वारा इस प्रकार बनाई गई विधि मेघालय में अभिभावी होगी यदि उसको राष्ट्रपति के विचारार्थ रक्षित किया गया हो और उस पर उसकी अनुमति मिल चुकी हो :

                परन्तु इस उपधारा की कोई बात संसद् की उसी विषय के बारे में कोई विधि, जिसके अन्तर्गत ऐसी विधि भी है जो मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा इस प्रकार बनाई गई विधि का परिवर्धन, संशोधन, परिवर्तन या निरसन करे, किसी समय अधिनियमित करने से निवारित करेगी

36. आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधियों तथा मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति-जहां द्वितीय अनुसूची के भाग में प्रगणित विषयों में से किसी के बारे में मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि में कोई ऐसा उपबन्ध हो जो आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा पहले बनाई गई किसी ऐसी विधि के उपबन्ध के, जिसे अधिनियमित करने के लिए वह विधान-मण्डल सक्षम हो अथवा उस विषय के बारे में किसी विद्यमान विधि के किसी उपबन्ध के विरुद्ध हो वहां मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा इस प्रकार बनाई गई विधि विरोध की मात्रा तक शून्य होगी जब तक कि उस विधि को राज्यपाल द्वारा आसाम के मुख्यमन्त्री की सलाह अभिप्राप्त किए जाने के पश्चात् धारा 39 के अधीन अनुमति मिल चुकी हो :

                परन्तु इस धारा की कोई बात आसाम राज्य के विधान-मण्डल को उसी विषय के बारे में कोई विधि जिसके अन्तर्गत ऐसी विधि भी है जो मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा इस प्रकार बनाई गई विधि का परिवर्धन, संशोधन, परिवर्तन या निरसन करे, किसी समय अधिनियमित करने से निवारित करेगी

                स्पष्टीकरण 1-इस धारा में तथा धारा 35 और 59 में विद्यमान विधि" से अभिप्रेत है कोई विधि, अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम या विनियम जिसे ऐसी विधि, अध्यादेश, आदेश, उपवधि, नियम या विनियम बनाने की शक्ति रखने वाले विधान-मण्डल, प्राधिकारी या व्यक्ति ने नियत दिन के पहले पारित किया या बनाया हो

                स्पष्टीकरण 2-इस धारा में तथा धारा 39 और 50 में आसाम के मुख्यमन्त्री की सलाह के प्रति निर्देश का, जब संविधान के अनुच्छेद 356 के खण्ड (1) के अधीन आसाम राज्य के सम्बन्ध में जारी की गई उद्घोषणा प्रवर्तन में हो, अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह राष्ट्रपति के अनुदेशों के प्रति निर्देश है

37. वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) निम्नलिखित विषयों में से किसी के लिए उपबन्ध करने वाला कोई विधेयक या संशोधन राज्यपाल की सिफारिश के बिना विधान सभा में पुरःस्थापित या प्रस्तावित किया जाएगा, अर्थात्: -

() किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन;

() मेघालय द्वारा धन उधार लेने का अथवा कोई प्रत्याभूति देने का विनियमन अथवा मेघालय द्वारा ली गई अथवा ली जाने वाली किन्हीं वित्तीय बाध्यताओं के बारे में विधि का संशोधन;

() मेघालय की संचित निधि अथवा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, ऐसी किसी निधि में धन डालना अथवा उसमें से धन निकालना;

() मेघालय की संचित निधि में से धन का विनियोग;

() किसी व्यय को मेघालय की संचित निधि पर भारित व्यय घोषित करना अथवा ऐसे किसी व्यय की रकम को बढ़ाना;

() मेघालय की संचित निधि या मेघालय के लोक लेखे मद्दे धन प्राप्त करना अथवा ऐसे धन की अभिरक्षा या उसका दिया जाना:

परन्तु किसी कर को घटाने अथवा उसके उत्सादन का उपबन्ध करने वाले संशोधन के प्रस्ताव के लिए इस उपधारा के अधीन किसी सिफारिश की अपेक्षा होगी

                (2) किसी विधेयक या संशोधन के बारे में, केवल इसी कारण कि वह जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों के अधिरोपण का अथवा अनुज्ञप्तियों के लिए फीसों अथवा की हुई सेवाओं के लए फीसों की मांग या उनके दिए जाने का उपबन्ध करता है अथवा इस कारण कि वह किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन का उपबन्ध करता है, यह समझा जाएगा कि वह उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी के लिए उपबन्ध करता है

                (3) जिस विधेयक के अधिनियमित किए जाने और प्रवर्तन में लाए जाने पर मेघालय की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा वह विधेयक विधान सभा द्वारा तब तक पारित किया जाएगा जब तक उस विधेयक पर विचार करने के लिए उस सभा से राज्यपाल ने सिफारिश की हो

38. विधेयकों के व्यपगत होने के बारे में प्रक्रिया-विधान सभा में लम्बित विधेयक सभा के सत्रावसान के कारण व्यपगत होगा, किन्तु उसके विघटन पर व्यपगत हो जाएगा

39. विधेयकों पर अनुमति-जब कोई विधेयक विधान सभा द्वारा पारित कर दिया गया हो तब वह राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा तथा राज्यपाल या तो यह घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनुमति देता है या यह है कि वह उस पर अनुमति रोक लेता है या यह कि वह विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ रक्षित कर लेता है:

                परन्तु राज्यपाल, अनुमति के लिए अपने समक्ष विधेयक प्रस्तुत किए जाने के पश्चात्, यथासंभवशीघ्र, उस विधेयक को, यदि वह धन विधेयक हो तो, इस संदेश के साथ वापस कर सकेगा कि विधान सभा उस विधेयक पर अथवा उसके किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबन्धों पर पुनर्विचार करे तथा विशिष्टतः किन्हीं ऐसे संशोधनों के समावेश की वांछनीयता पर विचार करे जिनकी उसने अपने संदेश में सिफारिश की हो तथा जब विधेयक इस प्रकार वापस कर दिया गया हो तब विधान सभा विधेयक पर तद्नुसार पुनर्विचार करेगी तथा यदि विधेयक विधान सभा द्वारा संशोधन सहित या रहित पुनः पारित कर दिया जाए और राज्यपाल के समक्ष अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाए तो राज्यपाल,-

() धारा 36 में निर्दिष्ट प्रकृति के उपबन्धों वाले विधेयक पर अनुमति तब तक देगा जब तक वह आसाम के मुख्यमंत्री की सलाह अभिप्राप्त कर ले;

() किसी अन्य विधेयक की दशा में अपनी अनुमति नहीं रोकेगा

                स्पष्टीकरण-इस धारा तथा धारा 40 के प्रयोजनों के लिए कोई विधेयक धन विधेयक समझा जाएगा यदि वह धारा 37 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट सब विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए अथवा उन विषयों के आनुषंगिक किसी विषय के लिए ही उपबन्ध करता हो और उस पर विधान सभा के अध्यक्ष का उसके द्वारा हस्ताक्षरित या प्रमाणपत्र पृष्ठांकित हो कि वह धन विधेयक है:

                परन्तु कोई विधेयक केवल इस कारण धन विधेयक समझा जाएगा कि वह जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों के अधिरोपण का अथवा अनुज्ञप्तियों के लिए फीसों अथवा की हुई सेवाओं के लिए फीसों की मांग का या उनके दिए जाने का उपबन्ध करता है अथवा इस कारण कि वह किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन का उपबन्ध करता है

40. विचारार्थ रक्षित विधेयक-जब राज्यपाल द्वारा कोई विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ रक्षित किया जाए तब राष्ट्रपति या तो यह घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनुमति देता है या यह कि वह उस पर अनुमति रोक देता है:

                परन्तु जहां विधेयक धन विधेयक हो वहां राष्ट्रपति राज्यपाल को यह निदेश दे सकेगा कि वह विधेयक को ऐसे संदेश सहित जैसा धारा 39 में निर्दिष्ट है विधान सभा को वापस कर दे तथा जब कोई विधेयक इस प्रकार वापस कर दिया गया हो तब विधान सभा ऐसा संदेश मिलने की तारीख से छह मास की कालावधि के भीतर उस पर तद्नुसार पुनर्विचार करेगी तथा यदि वह विधान सभा द्वारा संशोधन सहित या रहित पुनः पारित कर दिया जाए तो वह राष्ट्रपति के समक्ष उसके विचारार्थ पुनः प्रस्तुत किया जाएगा

41. मंजूरी और सिफारिश की अपेक्षाओं को केवल प्रक्रिया के विषय मानना-मेघालय के विधान-मण्डल का कोई अधिनियम या ऐसे किसी अधिनियम का कोई उपबन्ध केवल इस कारण अविधिमान्य होगा कि संविधान या इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित कोई सिफारिश नहीं की गई या पूर्व मंजूरी नहीं दी गई, यदि उस अधिनियम पर अनुमति, -

() जहां राज्यपाल की सिफारिश अपेक्षित हो वहां या तो राज्यपाल या राष्ट्रपति द्वारा,

() जहां राष्ट्रपति की सिफारिश या पूर्व मंजूरी अपेक्षित हो वहां राष्ट्रपति द्वारा,

दी गई हो

वित्तीय विषयों में प्रक्रिया

42. वार्षिक वित्त वितरण-(1) प्रत्येक वित्तीय वर्ष के बारे में राज्यपाल विधान सभा के समक्ष मेघालय की उस वर्ष के लिए प्राक्कलित प्राप्तियों और व्ययों का विवरण रखवाएगा जिसे इसमें इसके पश्चात् वार्षिक वित्त विवरण" कहा गया है

                (2) वार्षिक वित्त विवरण में दिए हुए व्यय के प्राक्कलनों में, -

() जो व्यय इस अधिनियम में मेघालय की संचित निधि पर भारित व्ययों के रूप में वर्णित हैं उनकी पूर्ति के लिए अपेक्षित राशियां; तथा

() मेघालय की संचित निधि से किए जाने के लिए प्रस्थापित अन्य व्ययों की पूर्ति के लिए अपेक्षित राशियां,

पृथक्-पृथक् दिखाई जाएंगी तथा राजस्व खाते में होने वाले व्यय का अन्य व्यय से भेद किया जाएगा

                (3) निम्नलिखित व्यय मेघालय की संचित निधि पर भारित व्यय होगा: -

() विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते;

() ऐसे ऋण-प्रभार जिनका दायित्व स्वायत्त राज्य पर है, जिनके अन्तर्गत ब्याज, निक्षेप-निधि-प्रभार और   मोचन-प्रभार तथा उधार लेने और ऋण की शोधन व्यवस्था और ऋण-मोचन संबंधी अन्य व्यय भी हैं;

() किसी न्यायालय या मध्यस्थ अधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या अधिनिर्णय की तुष्टि के लिए अपेक्षित कोई राशियां; तथा

() संविधान अथवा मेघालय विधान-मण्डल द्वारा इस प्रकार भारित घोषित किया गया कोई अन्य व्यय

43. विधान सभा में प्राक्कलनों के विषय में प्रक्रिया-(1) प्राक्कलनों में से जितने मेघालय की संचित निधि पर भारित व्यय से संबद्ध हों वे विधान सभा में मतदान के लिए नहीं रखे जाएंगे, किन्तु इस उपधारा की किसी बात का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह विधान सभा में उन प्राक्कलनों में से किसी पर चर्चा को निवारित करती है

                (2) उक्त प्राक्कलनों में से जितने अन्य व्यय से संबद्ध हैं वे विधान सभा के समक्ष अनुदानों की मांगों के रूप में रखे जाएंगे तथा विधान सभा को शक्ति होगी कि किसी मांग पर अनुमति दे या अनुमति देने से इन्कार करे, या किसी मांग पर अनुमति उसमें विनिर्दिष्ट रकम को कम कर के दे

                (3) राज्यपाल की सिफारिश के बिना किसी भी अनुदान की मांग नहीं की जाएगी

44. विनियोग विधेयक-(1) विधान सभा द्वारा धारा 43 के अधीन अनुदान किए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र मेघालय की संचित निधि में से-

() विधान सभा द्वारा इस प्रकार किए गए अनुदानों की; तथा

() मेघालय की संचित निधि पर भारित व्यय की,

पूर्ति के लिए अपेक्षित किन्तु सभा के समक्ष पहले रखे गए विवरण में दी हुई रकम से किसी भी दशा में अनधिक सब धनों के विनियोग के लिए विधेयक पुरःस्थापित किया जाएगा

                (2) इस प्रकार किए किसी अनुदान की रकम में परिवर्तन करने अथवा अनुदान के लक्ष्य को बदलने अथवा मेघालय की संचित निधि पर भारित किसी व्यय की रकम में परिवर्तन करने का प्रभाव रखने वाला कोई संशोधन ऐसे किसी विधेयक पर विधान सभा में प्रस्थापित नहीं किया जाएगा तथा कोई संशोधन इस उपधारा के अधीन अग्राह्य है या नहीं इस बारे में पीठासीन व्यक्ति का विनिश्चय अंतिम होगा

                (3) धारा 45 और 46 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए मेघालय की संचित निधि में से कोई धन इस धारा के उपबन्धों के अनुसार पारित विधि द्वारा किए गए विनियोग के अधीन ही निकाला जाएगा; अन्यथा नहीं

45. अनुपूरक, अतिरिक्त या आधिक्य अनुदान-(1) यदि-

() धारा 44 के उपबन्धों के अनुसार बनाई गई किसी विधि द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में किसी विशिष्ट सेवा पर व्यय किए जाने के लिए प्राधिकृत कोई रकम उस वर्ष के प्रयोजनों के लिए अपर्याप्त पाई जाए अथवा उस वर्ष के वार्षिक वित्त विवरण में अनुध्यात की गई किसी नई सेवा पर अनुपूरक या अतिरिक्त व्यय की चालू वित्तीय वर्ष में आवश्यकता पैदा हो गई हो; अथवा

() किसी वित्तीय वर्ष में किसी सेवा पर, उस सेवा और उस वर्ष के लिए अनुदत्त की गई रकम से अधिक कोई धन व्यय हो गया हो,

तो राज्यपाल, यथास्थिति, विधान सभा के समक्ष उस व्यय की प्राक्कलित रकम को दिखाने वाला दूसरा विवरण रखवाएगा या विधान सभा में ऐसे आधिक्य के लिए मांग उपस्थित कराएगा

                (2) ऐसे किसी विवरण और व्यय या मांग के सम्बन्ध में, तथा मेघालय की संचित निधि में से ऐसे व्यय अथवा ऐसी मांग के बारे में अनुदान की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली किसी विधि के सम्बन्ध में भी,धारा 42, 43 और 44 के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे वे वार्षिक वित्त विवरण तथा उसमें वर्णित व्यय अथवा अनुदान की किसी मांग तथा मेघालय की संचित निधि में से ऐसे किसी व्यय या अनुदान की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली विधि के संबंध में प्रभावी होते हैं

46. लेखानुदान और आपवादिक अनुदान-(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी विधान सभा को शक्ति होगी कि-

() किसी वित्तीय वर्ष के भाग के लिए प्राक्कलित व्यय के बारे में कोई अनुदान, ऐसे अनुदान के लिए मतदान करने के लिए धारा 43 में विहित प्रक्रिया पूरी होने तथा उस व्यय के सम्बन्ध में धारा 44 के उपबन्धों के अनुसार विधि पारित होने तक के लिए अग्रिम रूप से करे;

() जब किसी सेवा की महत्ता या उसके अनिश्चित रूप के कारण मांग ऐसे ब्यौरे के साथ वर्णित नहीं की जा सकती जैसा कि वार्षिक वित्त विवरण में मामूली तौर पर दिया जाता है तब स्वायत्त राज्य के साधनों से अप्रत्याशित मांग की पूर्ति के लिए अनुदान करे;

() कोई ऐसा आपवादिक अनुदान करे, जो किसी वित्तीय वर्ष की चालू सेवा का भाग हो,

तथा उक्त अनुदान जिस प्रयोजन के लिए किए जाएं उनके लिए मेघालय की संचित निधि में से धन निकालना विधि द्वारा प्राधिकृत करने की शक्ति मेघालय के विधान-मण्डल को होगी

                (2) उपधारा (1) के अधीन किए जाने वाले किसी अनुदान तथा उस उपधारा के अधीन बनाई जाने वाली किसी विधि के सम्बन्ध में धारा 43 और 44 के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे वे वार्षिक वित्त विवरण में वर्णित किसी व्यय के बारे में कोई अनुदान करने के तथा मेघालय की संचित निधि में से व्यय की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली विधि के सम्बन्ध में प्रभावी होते हैं

साधारणतया प्रक्रिया

47. प्रक्रिया के नियम-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, विधान सभा अपनी प्रक्रिया के तथा अपने     कार्य-संचालन के (जिनके अन्तर्गत वह भाषा या वे भाषाएं भी हैं जिनका प्रयोग विधान सभा में किया जाएगा), विनियमन के लिए नियम बना सकेगी

                (2) जब तक उपधारा (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते तब तक आसाम राज्य की विधान सभा के बारे में जो प्रक्रिया के नियम और स्थायी आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले प्रवृत्त थे वे ऐसे उपान्तरों और अनुकूलनों के सहित जो राज्यपाल उनमें करे, विधान सभा के सम्बन्ध में प्रभावी होंगे

48. विधान सभा में चर्चा पर निर्बन्धन-उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश के अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए आचरण के विषय में कोई चर्चा विधान सभा में होगी

49. न्यायालय विधान सभा की कार्यवाहियों की जांच करेंगे-(1) विधान सभा की किसी कार्यवाही की विधिमान्यता को प्रक्रिया की किसी अभिकथित अनियमितता के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा

                (2) विधान सभा का कोई अधिकारी या सदस्य, जिसमें इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विधान सभा की प्रक्रिया का या कार्य-संचालन का विनियमन करने की या व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियां निहित हैं, उन शक्तियों के अपने द्वारा प्रयोग के विषय में किसी न्यायालय की अधिकारिता के अधीन नहीं होगा

राज्यपाल की विधायी शक्ति

50. विधान सभा के विश्रान्तिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की राज्यपाल की शक्ति-(1) उस समय को छोड़कर जब विधान सभा सत्र में हो, यदि किसी समय राज्यपाल का समाधान हो जाए कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनमें तुरन्त कार्रवाई करना उसके लिए आवश्यक हो गया है तो वह ऐसे अध्यादेश का प्रख्यापन कर सकेगा जो उसे परिस्थितियों से अपेक्षित प्रतीत हो:

                परन्तु राज्यपाल ऐसा कोई अध्यादेश राष्ट्रपति के अनुदेशों के बिना प्रख्यापित करेगा यदि-

() उन्हीं उपबन्धों को अन्तर्विष्ट रखने वाले विधेयक को मेघालय के विधान-मण्डल में पुरःस्थापित करने के लिए संविधान या इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी की अपेक्षा होती; अथवा

() वही उपबन्ध अन्तर्विष्ट रखने वाले विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ रक्षित करना वह आवश्यक समझता; अथवा

() वही उपबन्ध अन्तर्विष्ट रखने वाला मेघालय के विधान-मण्डल का अधिनियम इस अधिनियम के अधीन तब तक अविधिमान्य होता जब तक कि राष्ट्रपति के विचारार्थ रखे जाने पर उस पर उसकी अनुमति प्राप्त हो गई होती:

                परन्तु यह और कि आसाम के मुख्यमन्त्री की सलाह पर ऐसा करने के सिवाय राज्यपाल ऐसा कोई अध्यादेश प्रख्यापित करेगा यदि उन्हीं उपबन्धों को अंतर्विष्ट रखने वाले विधेयक के बारे में उसने इस अधिनियम के अधीन यह आवश्यक समझा होता कि उस पर अनुमति देने के पूर्व मुख्यमंत्री की सलाह अभिप्राप्त कर ली जाए

                (2) इस धारा के अधीन प्रख्यापित अध्यादेश का वही बल और प्रभाव होगा जो विधान सभा के ऐसे अधिनियम का होता है जिस पर राज्यपाल ने अनुमति दे दी है, किन्तु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश-

() विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा तथा विधान सभा के पुनःसमवेत होने से छह सप्ताह की समाप्ति पर, अथवा यदि उस कालावधि की समाप्ति के पूर्व विधान सभा उसके निरनुमोदन का संकल्प पारित कर दे तो ऐसा संकल्प पारित किए जाने पर, प्रवर्तन में रहेगा; तथा

() राज्यपाल द्वारा किसी समय वापस लिया जा सकेगा

                (3) यदि और जहां तक इस धारा के अधीन कोई अध्यादेश कोई ऐसा उपबन्ध करता है जो मेघालय के विधान-मण्डल के राज्यपाल को अनुमति दिए गए अधिनियम के अधिनियमित होने पर विधिमान्य होता तो और वहां तक वह शून्य होगा:

                परन्तु-

() मेघालय के विधान-मण्डल के ऐसे अधिनियम के, जो संसद् के किसी अधिनियम अथवा संविधान की सप्तम अनुसूची की समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय के बारे में किसी विद्यमान विधि के विरुद्ध हो, प्रभाव से सम्बन्धित धारा 35 के प्रयोजनों के लिए, कोई अध्यादेश जो राष्ट्रपति के अनुदेशों के अनुसरण में इस धारा के अधीन प्रख्यापित किया गया हो, विधान-मण्डल का ऐसा अधिनियम समझा जाएगा जो राष्ट्रपति के विचारार्थ रक्षित किया गया था तथा जिस पर उसके द्वारा अनुमति दे दी गई है;

() मेघालय के विधान-मण्डल के ऐसे अधिनियम के, जो आसाम राज्य के विधान-मण्डल के किसी अधिनियम या द्वितीय अनुसूची के भाग में प्रगणित किसी विषय के बारे में किसी विद्यमान विधि के विरुद्ध है, प्रभाव से सम्बन्धित धारा 36 के प्रयोजनों के लिए, कोई अध्यादेश, जो आसाम के मुख्यमंत्री की सलाह पर इस धारा के अधीन प्रख्यापित किया गया हो, विधान-मण्डल का ऐसा अधिनियम समझा जाएगा जिस पर अनुमति मुख्यमंत्री की सलाह पर दी गई है

भाग 4

वित्तीय उपबंध

51. संचित निधि-(1) धारा 52 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, मेघालय की सरकार द्वारा प्राप्त सब राजस्व, राजहुंडियां जारी करके उस सरकार द्वारा लिया गया सब उधार और उधार या अर्थोपाय अग्रिम और उधारों के प्रतिदाय में उस सरकार द्वारा प्राप्त किए गए सब धन एक संचित निधि का भाग होंगे जो मेघालय की संचित निधि" के नाम से ज्ञात होगी

(2) मेघालय की सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त अन्य सब लोक धन मेघालय के लोक-लेखे में जमा किया जाएगा

(3) मेघालय की संचित निधि में से कोई धन विधि के अनुसार तथा उन प्रयोजनों के लिए और उस रीति से जो इस अधिनियम में उपबंधित हैं विनियोजित किया जाएगा, अन्यथा नहीं

52. आकस्मिकता निधि-(1) मेघालय का विधान-मण्डल विधि द्वारा अग्रदाय के रूप में मेघालय की आकस्मिकता निधि" के नाम से ज्ञात आकस्मिकता निधि की स्थापना कर सकेगा, जिसमें ऐसी विधि द्वारा अवधारित राशियां समय-समय पर जमा की जाएंगी तथा उक्त निधि राज्यपाल के व्ययनाधीन रखी जाएगी जिससे वह इस बात के लिए समर्थ हो कि अनवेक्षित व्यय की पूर्ति के लिए अधिदाय उस निधि में से तब तक के लिए दे सके जब तक वह व्यय मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा धारा 45 या धारा 46 के अधीन विधि द्वारा प्राधिकृत कर दिया जाए

53. लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त किए गए वादकर्ताओं के निक्षेपों निक्षेपों और अन्य धन की अभिरक्षा-वह सब धन जो-

() मेघालय सरकार द्वारा लिए गए या प्राप्त किए गए राजस्वों और लोक-धनों से भिन्न हो तथा मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में नियोजित किसी अधिकारी द्वारा अपनी उस हैसियत में प्राप्त किया जाए या उसके पास निक्षिप्त किया जाए; अथवा

() किसी वाद, मामले या खाते में या व्यक्तियों के नाम जमा किए जाने के लिए मेघालय के किसी न्यायालय द्वारा प्राप्त किया जाए या उसके पास निक्षिप्त किया जाए,

मेघालय के लोक-लेखे में जमा किया जाएगा

54. संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लोक लेखे में जमा किए गए धन की अभिरक्षा आदि-मेघालय की संचित निधि और आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा का, इन निधियों में धन जमा करने का, उनमें से धन निकालने का, मेघालय सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त लोक-धनों की, जो उक्त निधियों में जमा किए गए धन हों, अभिरक्षा का, उन्हें मेघालय के लोक-लेखे में जमा करने का तथा उस लेखे से धन निकालने का तथा उपर्युक्त विषयों से संबद्ध या उनके सहायक अन्य सब विषयों का विनियमन मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि से होगा तथा जब तक इस निमित्त उपबन्ध इस प्रकार किया जाए तब तक राज्य के राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों से होगा

55. आसाम द्वारा उद्गृहीत कुछ करों का मेघालय द्वारा विनियोग-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यह है कि आसाम सरकार द्वारा उद्गृहीत विद्युत के उपभोग या विक्रय पर कोई कर, जो संविधान की सप्तम अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 53 से संबद्ध हो, तथा माल के विक्रय या क्रय पर कोई कर जो उक्त सूची की प्रविष्टि 54 से संबद्ध हो, मेघालय में (जिसके अन्तर्गत शिलांग नगरपालिका में समाविष्ट क्षेत्र नहीं हैं) वहां की सरकार द्वारा वसूल किया जाएगा और मेघालय में उद्ग्रहणीय ऐसे किसी कर के किसी वित्तीय वर्ष के आगम आसाम की संचित निधि के भाग होंगे, किन्तु मेघालय की संचित निधि के भाग होंगे

(2) जहां आसाम सरकार द्वारा उद्गृहीत पूर्वोक्त राज्य सूची की प्रविष्टि 54 के सम्बद्ध कोई कर उस सरकार द्वारा माल के प्रथम विक्रय या क्रय पर वसूल किया जाए, वहां इस प्रकार संगृहीत कर का वह प्रभाग जो आसाम और मेघालय की सरकारों के बीच करार पाया जाए, अथवा ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, मेघालय को संदेय होगा

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट करों के बारे में विधियां ऐसे अपवादों और उपान्तरों सहित प्रभावी होंगी जो केन्द्रीय सरकार उस उपधारा के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे

56. राजस्वों का वितरण-(1) अनुच्छेद 275 के खण्ड (1) के अधीन सहायता-अनुदान तथा आय पर करों, वितरणीय संघ उत्पाद-शुल्क, विशेष महत्व के माल पर अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क तथा संपदा-शुल्क में अंश का, जो आसाम राज्य को संविधान (राजस्व-वितरण) आदेश, 1969, संघ उत्पाद-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 (1962 का 3), अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम, 1957 (1957 का 58) तथा संपदा-शुल्क (वितरण) अधिनियम, 1962 (1962 का 9) के अधीन संदेय हो, नियत दिन से यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह आसाम राज्य तथा मेघालय के स्वायत्त राज्य को ऐसे अनुपात में संदेय है, जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे

(2) उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रपति द्वारा किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र संसद् के समक्ष रखा जाएगा

57. विधान सभा द्वारा मंजूरी होने तक व्यय का प्राधिकरण-राज्यपाल नियत दिन के पहले किसी समय मेघालय की संचित निधि में से नियत दिन से प्रारम्भ होने वाली छह मास से अनधिक की कालावधि के लिए ऐसा व्यय, जो वह आवश्यक समझे, तब तक के लिए प्राधिकृत कर सकेगा जब तक वह व्यय विधान सभा द्वारा मंजूर कर दिया जाए:

परन्तु नियत दिन के पश्चात् राज्यपाल उक्त छह मास की कालावधि के भीतर की किसी कालावधि के लिए मेघालय की संचित निधि में से ऐसा और व्यय, जो वह आवश्यक समझे, प्राधिकृत कर सकेगा

भाग 5

आस्तियां और दायित्व

58. आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन-आसाम राज्य की नियत दिन के ठीक पहले की आस्तियां और दायित्व उस राज्य तथा मेघालय के बीच तृतीय अनुसूची के उपबन्धों के अनुसार प्रभाजित किए जाएंगे

भाग 6

प्रशासनिक संबंध

59. मेघालय, आसाम राज्य तथा संघ की बाध्यता-मेघालय की कार्यपालिका शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा कि संसद् तथा आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधियों का तथा किन्हीं विद्यमान विधियों का, जो मेघालय में लागू हों, अनुपालन सुनिश्चित रहे और मेघालय को ऐसे निदेश देना भी संघ तथा आसाम राज्य की कार्यपालिका शक्ति में होगा जो, यथास्थिति, भारत सरकार को या आसाम सरकार को उस प्रयोजन के लिए, आवश्यक प्रतीत हों

60. कुछ दशाओं में स्वायत्त राज्य पर नियंत्रण-मेघालय की कार्यपालिका शक्ति का इस प्रकार प्रयोग किया जाएगा कि, यथास्थिति, संघ या आसाम सरकार की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में कोई अड़चन या उस पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़ तथा मेघालय को ऐसे निदेश देना भी संघ और आसाम राज्य की कार्यपालिका शक्ति में होगा जो, यथास्थिति, भारत सरकार का या आसाम सरकार को उस प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों

61. कृत्यों का सौंपा जाना-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, -

() मेघालय सरकार की सम्मति से आसाम सरकार उस सरकार को या उसके अधिकारियों को किसी ऐसे विषय सम्बन्धी कृत्य जो आसाम राज्य की कार्यपालिका शक्ति के भीतर है, शर्तों के साथ या बिना शर्त सौंप सकेगी;

() आसाम सरकार की सम्मति से मेघालय सरकार, उस सरकार को या उसके अधिकारियों को किसी ऐसे विषय सम्बन्धी कृत्य जो मेघालय की कार्यपालिका शक्ति के भीतर हैं, शर्तों के साथ या बिना शर्त सौंप सकेगी

भाग 7

संक्रमणकालीन उपबन्ध

62. अन्तःकालीन विधान सभा के बारे में उपबन्घ-(1) जब तक मेघालय की विधान सभा भाग 3 के उपबन्धों के अधीन सम्यक् रूप से गठित और प्रथम सत्र के लिए समवेत होने के लिए आहूत हो जाए तब तक एक अन्तःकालीन विधान सभा होगी जो पैंतीस से अन्यून और पचपन से अनधिक उतने व्यक्तियों से गठित होगी जितने केन्द्रीय सरकार, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा अवधारित करे और ऐसे व्यक्ति उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति से निर्वाचित किए जाएंगे

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, अन्तःकालीन विधान सभा के सदस्य निम्नलिखित रीति से निर्वाचित किए जाएंगे, अर्थात्: -

() मेघालय में प्रत्येक स्वायत्त जिले के लिए एक निर्वाचकगण होगा जो उसकी जिला परिषद् के निर्वाचित सदस्यों से गठित होगा और प्रत्येक निर्वाचकगण अन्तःकालीन विधान सभा के लिए उतने व्यक्ति निर्वाचित करेगा जितने राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा अवधारित करें;

() अस्थायी विधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होगा और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए होगा जो केन्द्रीय सरकार, निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् इस निमित्त बनाए

(3) केन्द्रीय सरकार मेघालय के किन्हीं ऐसे अल्पसंख्यक समुदायों का, जिन्हें उसकी राय में सभा में प्रतिनिधित्व की अपेक्षा हो, प्रतिनिधित्व करने के लिए अन्तःकालीन विधान सभा के लिए तीन से अनधिक ऐसे व्यक्तियों को नामनिर्दिष्ट कर सकेगी जो सरकार की सेवा में के व्यक्ति हों

(4) कोई व्यक्ति अन्तःकालीन विधान सभा का सदस्य चुने जाने के लिए तभी अर्हित होगा जब वह ऐसा व्यक्ति हो जिसका नाम आसाम की विधान सभा के किसी निर्वाचन-क्षेत्र के उस भाग की निर्वाचक नामावलि में तत्समय प्रविष्ट हो जो मेघालय में समाविष्ट हो तथा जब वह पच्चीस वर्ष से कम आयु का हो

(5) यदि अन्तःकालीन विधान सभा के किसी सदस्य का पद मृत्यु या पदत्याग के कारण या अन्यथा रिक्त हो जाए तो वह यथासाध्यशीघ्र इस धारा के पूर्वगामी उपबन्घों के अधीन और अनुसार भरा जा सकेगा

(6) अन्तःकालीन विधान सभा के सदस्यों की पदावधि इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से गठित विधान सभा के प्रथम अधिवेशन के ठीक पहले समाप्त हो जाएगी

(7) निर्वाचकगण द्वारा इस धारा के अधीन निर्वाचन केवल इस आधार पर प्रश्नगत किया जाएगा कि निर्वाचकगण की भागरूप किसी जिला परिषद् की सदस्यता में कोई रिक्ति थी

(8) इस धारा के अधीन गठित अन्तःकालीन विधान सभा, जब तक वह अस्तित्व में रहे, इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से गठित विधान सभा समझी जाएगी और तद्नुसार भाग 3 के उपबन्ध अन्तःकालीन विधान सभा के संबंध में यावत्शक्य ऐसे लागू होंगे जैसे वे विधान सभा के संबंध में लागू होते हैं

भाग 8

प्रकीर्ण उपबन्घ

63. शिलांग के विकास के लिए विशेष समिति-केन्द्रीय सरकार आसाम और मेघालय की सरकारों से परामर्श करके, उन दोनों सरकारों को शिलांग की बाबत सामान्य हित के विषयों पर, विशिष्टतः शिक्षा और जल-प्रदाय के क्षेत्र में और साधारणतः उसके विकास और प्रशासन के सम्बन्ध में, सलाह देने के लिए, आदेश द्वारा, एक समिति गठित कर सकेगी, जिसमें उतने व्यक्ति होंगे जितने वह ठीक समझे

स्पष्टीकरण-इस धारा में शिलांग से शिलांग छावनी और नगरपालिका में समाविष्ट क्षेत्र अभिप्रेत होंगे तथा उक्त छावनी या नगरपालिका से लगे हुए ऐसे क्षेत्र भी इसके अन्तर्गत होंगे जिनका आसाम और मेघालय की सरकारों में इस निमित्त करार हो जाए

64. न्यायालयों के बने रहने के बारे में उपबन्ध-नियत दिन के ठीक पहले संपूर्ण मेघालय में या उसके किसी भाग में विधिपूर्ण कृत्यों का निर्वहन करने वाले सब न्यायालय और अधिकरण तथा सब प्राधिकारी, जब तक कि उनका बना रहना इस अधिनियम के उपबन्घों से असंगत हो, जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्य उपबन्ध किया जाए, अपने-अपने कृत्य करते रहेंगे

65. सेवाओं से संबंधित उपबन्ध-(1) प्रत्येक व्यक्ति से, जो अखिल भारतीय सेवा का सदस्य होते हुए तत्समय उस सेवा के आसाम राज्य के काडर में हो या जो आसाम राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में उस राज्य की प्रथम वर्ग की सेवा के सदस्य के रूप में अन्यथा सेवा कर रहा हो, उस राज्य की सरकार अपेक्षा कर सकेगी कि वह मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में ऐसी कालावधि या कालावधियां पर्यंत सेवा करे जिसका या जिनका आसाम सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे:

परन्तु ऐसा कोई आदेश-

() नियत दिन के पहले, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं; तथा

() नियत दिन या तत्पश्चात् ऐसे नियमों के अनुसार ही, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा आसाम और मेघालय की सरकारों के परामर्श के पश्चात् बनाए जाएं, किया जाएगा, अन्यथा नहीं

(2) किसी ऐसे साधारण या विशेष आदेश के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त करे, उपधारा (1) में यथानिर्दिष्ट व्यक्ति के ऊपर नियन्त्रण का अधिकार, जब तक उससे मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करने की अपेक्षा की जाती रहे, मेघालय सरकार में निहित होगा

(3) नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करने वाले उन व्यक्तियों से, जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति हों, और जो आसाम सरकार और मेघालय की सरकार के बीच करार द्वारा, अथवा करार के अभाव में केन्द्रीय सरकार द्वारा, अवधारित किए जाएं, उनकी नियुक्तियों के निबन्धनों में या उनकी सेवा की शर्तों में कोई बात होते हुए भी, इस बात की अपेक्षा की जा सकेगी कि वे स्वायत्त राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करें

(4) उपधारा (3) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा आसाम राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में की गई सब पूर्व सेवा, उसकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के प्रयोजनार्थ स्वायत्त राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में की गई समझी जाएगी

(5) उपधारा (3) और (4) की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह मेघालय के विधान-मण्डल या राज्यपाल की मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करने वाले व्यक्तियों की सेवा की शर्तें अवधारित करने की शक्ति पर प्रभाव डालती है:

परन्तु उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को नियत दिन के ठीक पहले लागू होने वाली सेवा की शर्तों में उसके लिए अहितकर रूप में परिवर्तन, आसाम सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा

66. विद्यमान विधियों का चालू रहना और उनके अनुकूलन-(1) नियत दिन के ठीक पहले स्वायत्त राज्य में प्रवृत्त सब विधियां जब तक वे सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित कर दी जाएं, उसमें प्रवृत्त बनी रहेंगी

(2) नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के स्वायत्त राज्य के सम्बन्ध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ समुचित सरकार उस दिन से दो वर्ष के अन्दर आदेश द्वारा विधि के ऐसे अनुकूलन या उपांतरण (चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में), जो आवश्यक या समीचीन हों, कर सकेगी और तब ऐसी प्रत्येक विधि, जब तब वह सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित कर दी जाए, उन अनुकूलनों और उपान्तरों के सहित प्रभावी होगी

स्पष्टीकरण-इस धारा में समुचित सरकार" पद से संविधान की सप्तम अनुसूची की संघ सूची में प्रगणित विषय से सम्बन्धित किसी विधि के बारे में केन्द्रीय सरकार तथा द्वितीय अनुसूची के किसी विषय से सम्बन्धित किसी विधि के बारे में मेघालय सरकार और किसी अन्य विधि के बारे में आसाम सरकार अभिप्रेत है

67. स्वायत्त राज्य का संविधान के कुछ प्रयोजनों के लिए राज्य होना-इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए संविधान के निम्नलिखित अनुच्छेदों में से किसी में राज्य के प्रति (किसी भी शब्दावली में) निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत स्वायत्त राज्य के प्रति निर्देश भी है, अर्थात्: -

अनुच्छेद 12 से 15 तक (दोनों सहित), 16 [उसके खण्ड (3) को छोड़कर], 18, 19, 23, 25, 28 से 31 तक (दोनों सहित),  31, 34 से 51 तक (दोनों सहित), 58, 59, 66, 73, 102, 110(1) (),  131, 138, 149, 150, 151, 161, 209, 210, 233, 234, 235, 237, 251, 252, 256 से 258 तक (दोनों सहित), 261, 262, 263, 268, 269, 270, 272, 274 से 280 तक (दोनों सहित), 282, 288, 289, 293, 296, 298 से 305 तक (दोनों सहित), 308 से 311 तक (दोनों सहित), 320, 323(2), 324 से 329 तक (दोनों सहित), 339 से 342 तक (दोनों सहित), 345 से 348 तक (दोनों सहित), 350, 350, 350, 353, 355 से 358 तक (दोनों सहित), 360, 361, 364 से 367 तक (दोनों सहित)

स्पष्टीकरण-ऊपर विनिर्दिष्ट अनुच्छेदों में से किसी में उच्च न्यायालय या राज्य लोक सेवा आयोग के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, आसाम उच्च न्यायालय या आसाम राज्य के लोक सेवा आयोग के प्रति निर्देश है

68. मेघालय में व्यापार आदि करने की आसाम और मेघालय सरकारों की शक्ति-(1) कोई व्यापार या कारबार करने के लिए तथा संपत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन तथा किसी प्रयोजन के लिए संविदाएं करने के लिए जिस कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग आसाम सरकार अनुच्छेद 298 के अधीन मेघालय में करे वह, जहां तक ऐसा व्यापार या कारबार या ऐसा प्रयोजन ऐसा हो जिसके बारे में आसाम राज्य का विधान-मण्डल विधि बना सकता है, उसके बारे में विधि मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई जा सकेगी

(2) कोई व्यापार या कारबार करने के लिए तथा सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन तथा किसी प्रयोजन के लिए संविदाएं करने के लिए जिस कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग मेघालय सरकार अनुच्छेद 298 के अधीन मेघालय में करे, वह, जहां तक ऐसा व्यापार या कारबार या ऐसा प्रयोजन ऐसा हो जिसके बारे में मेघालय का विधान-मण्डल विधि बना सकता है, उसके बारे में विधि आसाम राज्य के विधान-मण्डल के द्वारा भी बनाई जा सकेगी

69. सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में इस अधिनियम के उपबन्धों को निलंबित करने की शक्ति-जहां मेघालय के बारे में अनुच्छेद 356 के अधीन उद्घोषणा जारी की जाए वहां राष्ट्रपति उसी उद्घोषणा द्वारा या उसमें परिवर्तन करने वाली पश्चात्वर्ती उद्घोषणा द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों में से किसी के भी प्रवर्तन का पूर्णतः या भागतः निलंबन कर सकेगा

70. अन्य विधियों में राज्य" और राज्य सरकार" के प्रति निर्देशों का मेघालय के सम्बन्ध में अर्थान्वयन-धारा 66 और 71 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार, आसाम सरकार से परामर्श करने के पश्चात्, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, घोषित कर सकेगी कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी केन्द्रीय अधिनियम में राज्य" के प्रति निर्देश का, मेघालय को लागू होने के सम्बन्ध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह सम्पूर्ण मेघालय के प्रति या उसके किसी भाग के प्रति निर्देश है तथा अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी केन्द्रीय अधिनियम में राज्य सरकार" के प्रति निर्देश का मेघालय को लागू होने के सम्बन्ध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार के प्रति निर्देश है

71. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 66 के अधीन उपबन्ध नहीं किया गया है या अपर्याप्त उपबन्ध किया गया है, कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी जो ऐसी विधि को प्रवृत्त कराने के लिए अपेक्षित या सशक्त हो, स्वायत्त राज्य के सम्बन्ध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ उस विधि का अर्थ, उसके सार पर प्रभाव डाले बिना, यथास्थिति, उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष के विषय के बारे में ऐसी रीति से जो आवश्यक या उचित हो लगा सकेगा

72. अन्य विधियों से असंगत इस अधिनियम के उपबन्धों का प्रभाव-इस अधिनियम के उपबन्ध किसी अन्य विधि में उनसे असंगत कोई बात होते हुए भी प्रभावी होंगे

73. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, कोई ऐसी बात कर सकेगा जो ऐसे उपबन्धों से असंगत हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजनार्थ उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा

74. षष्ठ अनुसूची का संशोधन-संविधान की षष्ठ अनुसूची, चतुर्थ अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से संशोधित हो जाएगी

75. 1934 के अधिनियम संख्या 2 का संशोधन-भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 21 की उपधारा (1) में किसी राज्य की" शब्दों के पश्चात् (जिसके अन्तर्गत मेघालय का स्वायत्त राज्य भी है)" कोष्ठक और शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे

76. 1956 के अधिनियम संख्या 37 का संशोधन-राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 16 की उपधारा (1) में खण्ड () के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

() पूर्वी जोन की दशा में -

(i) मेघालय के स्वायत्त राज्य का मुख्यमन्त्री और कोई अन्य मन्त्री जो आसाम के राज्यपाल द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा और यदि वहां मन्त्रि-परिषद् हो तो मेघालय के स्वायत्त राज्य से दो से अनधिक सदस्य जो राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे; तथा

(ii) जनजाति क्षेत्रों के लिए आसाम के राज्यपाल के सलाहकार का पद तत्समय धारण करने वाला व्यक्ति "

77. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी

 [(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।ट

प्रथम अनुसूची

(धारा 7, 16 और 26 देखिए)

शपथों या प्रतिज्ञानों के प्ररूप

विधान सभा के लिए निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले प्रतिज्ञान का प्ररूप

1

मैं कख, जो मेघालय की विधान सभा में स्थान भरने के लिए अभ्यर्थी के रूप में नामनिर्दिष्ट हुआ हूं,

 ईश्वर की शपथ लेता

-------------------------हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा

       सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता

रखूंगा और मैं भारत की प्रभुत्ता और अखण्डता अक्षुण्ण रखूंगा "

2

विधान सभा के सदस्यों द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले प्रतिज्ञान का प्ररूप

मैं कख, जो मेघालय की विधान सभा का सदस्य निर्वाचित (या नामनिर्दिष्ट) हुआ हूं,

ईश्वर की शपथ लेता

-------------------------हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा

     सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता

रखूंगा और मैं भारत की प्रभुत्ता और अखण्डता अक्षुण्ण रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूंगा "

 

3

मंत्रि-परिषद् के सदस्य के लिए पद-शपथ का प्ररूप

     ईश्वर की शपथ लेता

मैं कख ----------------------हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता

रखूंगा, मैं भारत की प्रभुत्ता और अखण्डता अक्षुण्ण रखूंगा; मैं मेघालय के मन्त्री के रूप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अन्तःकरण से निर्वहन करूंगा तथा भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना मैं सब प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा "

4

मंत्रि-परिषद् के सदस्य के लिए गोपनीयता-शपथ का प्ररूप

            ईश्वर की शपथ लेता

मैं कख ------------------------हूं कि जो विषय मेघालय के मन्त्री के रूप में मेरे विचार के                

                सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता

लिए लाया जाएगा या मुझे ज्ञात होगा उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, उस अवस्था को छोड़कर जब कि ऐसे मन्त्री के रूप में अपने कर्तव्यों के उचित निर्वहन के लिए ऐसा करना अपेक्षित हो, अन्य अवस्था में मैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा "

द्वितीय अनुसूची

(धारा 33 और 36 देखिए)

स्वायत्त राज्य सूची

[धारा 33 (1) देखिए]

                वे विषय जिनके बारे में विधान सभा को विधि बनाने की अनन्य शक्ति है

भाग

                सूची 2-राज्य सूची -में प्रगणित या उसके अन्तर्गत आने वाली सीमा तक निम्नलिखित विषय-

                1. संविधान की षष्ठ अनुसूची के पैरा 3 के उपपैरा (1) के खण्ड () के अर्थ के अन्दर ग्राम और नगर पुलिस (प्रविष्टि 2)

                2. न्याय प्रशासन; उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय को छोड़कर सब न्यायालयों का गठन और संगठन; लगान और राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया; उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय को छोड़कर सब न्यायालयों में ली जाने वाली फीसें (प्रविष्टि 3)

3. कारागार, सुधारालय, बोर्स्टल संस्थाएं और तद्रूप अन्य संस्थाएं और उनमें निरुद्ध व्यक्ति; कारागारों और अन्य संस्थाओं के उपयोग के लिए आसाम तथा अन्य राज्यों से ठहराव (प्रविष्टि 4)

4. स्थानीय शासन, अर्थात् नगर निगमों, सुधार न्यासों, जिला बार्डों, खनन बस्ती प्राधिकारियों तथा स्थानीय स्वशासन या ग्राम्य प्रशासन के लिए अन्य स्थानीय प्राधिकारियों का गठन और शक्तियां (प्रविष्टि 5)

5. लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता; चिकित्सालय और औषधालय (प्रविष्टि 6)

6. भारत के बाहर के स्थानों की तीर्थ यात्राओं को छोड़कर तीर्थयात्राएं (प्रविष्टि 7)

7. मादक पान, अर्थात् मादक पानों का उत्पादन, विनिर्माण, कब्जा, परिवहन, का और विक्रय (प्रविष्टि 8)

8. निःशक्त और नियोजन के अयोग्य व्यक्तियों की सहायता (प्रविष्टि 9)

9. दफन और कब्रिस्तान; शवदाह और शमशान (प्रविष्टि 10)

10. सूची 1 की विशिष्टियां 63, 64, 65 और 66 तथा सूची 3 की प्रविष्टि 25 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, शिक्षा जिसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय भी हैं (प्रविष्टि 11)

11. स्वायत्त राज्य द्वारा नियन्त्रित या वित्तपोषित पुस्तकालय, संग्रहालय या अन्य समतुल्य संस्थाएं, संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व के घोषित से भिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख (प्रविष्टि 12)

12. संचार, अर्थात् सड़कें, पुल, पारघाट तथा सूची 1 में अविनिर्दिष्ट अन्य संचार-साधन, किन्तु ऐसी सड़कों, पुलों तथा पारघाटों को छोड़कर जिन्हें आसाम विधान-मण्डल ने विधि द्वारा राज्य के राजमार्ग घोषित किया है; नगरपालिक ट्राममार्ग; रज्जुमार्ग; ऐसे जलमार्गों के बारे में सूची 1 और सूची 3 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए अन्तर्देशीय जलमार्ग और उन पर यातायात, यंत्रनोदित यानों को छोड़कर अन्य यान (प्रविष्टि 13)   

13. भाग की प्रविष्टि 1 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए कृषि, जिसके अन्तर्गत कृषि की शिक्षा और गवेषणा, नाशक जीवों से संरक्षण तथा वनस्पति के रोगों का निवारण भी हैं (प्रविष्टि 14)  

14. पशु-नस्ल का परिरक्षण, संरक्षण और सुधार तथा पशुओं के रोगों का निवारण, पशु-चिकित्सा प्रशिक्षण और व्यवसाय (प्रविष्टि 15)  

15. कांजी हाउस और पशुओं के अतिचार का निवारण (प्रविष्टि 16)

16. सूची 1 की प्रविष्टि 56 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, जल, अर्थात् जल-प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकास और बांध, जल-संचयन और जल-विद्युत, किन्तु आसाम सरकार द्वारा पूर्णतः या भागतः वित्तपोषित सिंचाई जल-विद्युत और नौपरिवहन की ऐसी परियोजनाओं के सम्बन्ध में, जिन्हें आसाम राज्य के विधान-मण्डल ने विधि द्वारा, राज्य महत्व की परियोजनाएं घोषित किया हो, जल प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल-निकास और बांध, जल संचयन और जल-विद्युत को छोड़कर (प्रविष्टि 17)  

17. भूमि, अर्थात् भूमि में या उस पर अधिकार, भूधृतियां, जिनके अन्तर्गत भूस्वामी और अभिधारी का संबंध भी है, तथा लगान की वसूली; कृषि-भूमि का अन्तरण और अन्य संक्रामण; भूमि-सुधार और कृषिक उधार, उपनिवेशन (प्रविष्टि 18)

18. भाग की प्रविष्टि 2 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, वन (प्रविष्टि 19)

19. वन-जंतुओं और पक्षियों का संरक्षण (प्रविष्टि 20)  

20. मीन-क्षेत्र (प्रविष्टि 21)

21. सूची 1 की प्रविष्टि 34 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्रतिपाल्य-अधिकरण; विल्लंगमित और कुर्क संपदाएं (प्रविष्टि 22)

22. संघ के नियन्त्रण के अधीन विनियमन और विकास के बारे में सूची 1 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, खानों का विनियमन और खनिज विकास (प्रविष्टि 23)

23. गैस और गैस-संकर्म (प्रविष्टि 25)

24. सूची 3 की प्रविष्टि 33 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, स्वायत्त राज्य के अन्दर व्यापार और वाणिज्य (प्रविष्टि 26)

25. बाजार और मेले (प्रविष्टि 28)

26. मानक-स्थापन को छोड़कर, बाट और माप (प्रविष्टि 29)

27. साहूकारी और साहूकार; कृषि-ऋणिता से राहत (प्रविष्टि 30)

28. पांथशालाएं और पांथशालापाल (प्रविष्टि 31)

29. विश्वविद्यालय का निगमन, विनियमन और परिसमापन; अनिगमित व्यापारिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक, धार्मिक तथा अन्य सोसाइटियां और संगम; सहकारी सोसाइटियां (प्रविष्टि 32)

30. नाट्यशाला और नाटक; सूची 1 की प्रविष्टि 60 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, चलचित्र; क्रीडा, मनोरंजन और आमोद (प्रविष्टि 33)

31. बाजी लगाना और जुआ (प्रविष्टि 34)

32. स्वायत्त राज्य में निहित या उसके कब्जे के संकर्म, भूमि और भवन (प्रविष्टि 35)

33. संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबन्घों के अधीन रहते हुए, स्वायत्त राज्य के विधान-मण्डल के लिए निर्वाचन (प्रविष्टि 37)

34. विधान सभा के सदस्यों, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते (प्रविष्टि 38)

35. विधान सभा और उसके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां, मेघालय के विधान-मण्डल की समितियों के समक्ष साक्ष्य देने या दस्तावेज पेश करने के लिए व्यक्तियों को हाजिर कराना (प्रविष्टि 39)

36. स्वायत्त राज्य के मन्त्रियों के वेतन और भत्ते (प्रविष्टि 40)

37. स्वायत्त राज्य की लोक-सेवाएं (प्रविष्टि 41)

38. स्वायत्त राज्य द्वारा अथवा मेघालय की संचित निधि में से संदेय पेन्शनें (प्रविष्टि 42)

39. स्वायत्त राज्य का लोक-ऋण (प्रविष्टि 43)

40. निखात निधि (प्रविष्टि 44)

41. भू-राजस्व, जिसके अन्तर्गत, राजस्व का निर्धारण और उसकी वसूली, भू-अभिलेखों को रखना, राजस्व प्रयोजनों और अधिकार-अभिलेखों के लिए सर्वेक्षण और राजस्व का अन्यसंक्रामण भी हैं (प्रविष्टि 45)

42. कृषि-आय पर कर (प्रविष्टि 46)

43. कृषि-भूमि के उत्तराधिकार के विषय में शुल्क (प्रविष्टि 47)

44. कृषि-भूमि के विषय में सम्पदा शुल्क (प्रविष्टि 48)

45. भूमि और भवनों पर कर (प्रविष्टि 49)

46. खनिज विकास के सम्बन्ध में संसद् द्वारा विधि द्वारा अधिरोपित परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, खनिज अधिकारों पर कर (प्रविष्टि 50)

47. स्वायत्त राज्य में विनिर्मित या उत्पादित निम्नलिखित माल पर उत्पाद-शुल्क और भारत में अन्यत्र विनिर्मित या उत्पादित वैसे ही माल पर उसी या कम दर से प्रतिशुल्क: -

                () मानव उपभोग के लिए मद्यसारिक पान;

                () अफीम, भांग-गांजा-वर्ग पदार्थ और अन्य स्वापक ओषधियां तथा स्वापक पदार्थ,

किन्तु ऐसी ओषधीय और प्रसाधन निर्मिताओं को छोड़कर जिनमें मद्यसार अथवा इस प्रविष्टि के उपपैरा () में का कोई पदार्थ हो (प्रविष्टि 51)

48. किसी स्थानीय क्षेत्र में उपभोग, उपयोग या विक्रय के लिए, माल के वहां प्रवेश पर कर (प्रविष्टि 52)

49. समाचारपत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों को छोड़कर अन्य विज्ञापनों पर कर (प्रविष्टि 55)

50. सड़कों या अन्तर्देशीय जलमार्गों पर ले जाए जाने वाले माल और यात्रियों पर कर (प्रविष्टि 56)

51. सूची 3 की प्रविष्टि 35 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सड़कों पर उपयोग के योग्य यानों पर, चाहे वे यन्त्रनोदित हों या हों, तथा जिनके अन्तर्गत ट्राम गाडियां भी हैं, कर (प्रविष्टि 57)  

52. पशुओं और नौकाओं पर कर (प्रविष्टि 58)

53. पथकर (प्रविष्टि 59)

54. वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर (प्रविष्टि 60)

55. प्रति व्यक्ति कर (प्रविष्टि 61)

56. विलास-वस्तुओं पर कर, जिनके अन्तर्गत मनोरंजन, आमोद, बाजी लगाने और जुआ खेलने पर कर भी हैं (प्रविष्टि 62)

57. स्टाम्प-शुल्क की दरों के सम्बन्ध में सूची 1 के उपबन्धों में विनिर्दिष्ट दस्तावेजों को छोड़कर अन्य दस्तावेजों के बारे में स्टाम्प-शुल्क की दरें (प्रविष्टि 63)  

58. इस भाग में अप्रगणित कोई अन्य विषय, जिसके बारे में जिला परिषद् को संविधान की षष्ठ अनुसूची के पैरा 3 के अधीन विधि बनाने की शक्ति है, उस सीमा तक जहां तक कि वह इस भाग की प्रविष्टि 16 और भाग की प्रविष्टि 2 में सम्मिलित नहीं है

59. इस भाग के विषयों में से किसी से सम्बद्ध विधियों के विरुद्ध अपराध (प्रविष्टि 64)

60. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में, उच्चतम न्यायालय को छोड़कर, सब न्यायालयों की अधिकारिता और शक्तियां (प्रविष्टि 65)

61. किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीसों को छोड़कर, इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में फीसें (प्रविष्टि 66)

भाग

सूची 3-समवर्ती सूची-में प्रगणित या उसके अन्तर्गत आने वाली सीमा तक निम्नलिखित विषय-

1. विवाह और विवाह-विच्छेद, विल, निर्वसीयतता और उत्तराधिकार; सामाजिक रूढ़ियां; प्रमुखों या मुखियों की नियुक्ति या उत्तराधिकार (प्रविष्टि 5)

2. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में विधियों के विरुद्ध अपराध (प्रविष्टि 1)

3. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में, उच्चतम न्यायालय को छोड़कर अन्य सब न्यायालयों की अधिकारिता और शक्तियां (प्रविष्टि 46)

4. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में फीसें, किन्तु इनके अन्तर्गत किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीसें नहीं हैं (प्रविष्टि 47)

स्वायत्त राज्य और आसाम राज्य की समवर्ती सूची

भाग

[धारा 33 (2) देखिए]

                वे विषय जिनके बारे में विधि बनाने की शक्ति मेघालय के विधान-मण्डल को, तथा आसाम राज्य के विधान-मण्डल को भी है, अर्थात् सूची 2-राज्य सूची-तथा सूची 3-समवर्ती सूची-में प्रगणित या उसके अन्तर्गत आने वाली सीमा तक निम्नलिखित विषय-

                1. स्वायत्त राज्य तथा शेष आसाम दोनों के क्षेत्रों के फायदे के लिए परिकल्पित कृषि-स्कीम (सूची 2 की प्रविष्टि 14)

                2. भाग की प्रविष्टि 16 में निर्दिष्ट ऐसी परियोजनाओं के आवाह क्षेत्रों में वनों का संरक्षण, जो पूर्णतः या भागतः आसाम सरकार द्वारा वित्तपोषित हों और जिन्हें आसाम राज्य के विधान-मण्डल ने विधि द्वारा राज्य-महत्व की परियोजनाएं घोषित किया हो (सूची 2 की प्रविष्टि 19)

                3. सूची 1 की प्रविष्टि 7 और 52 के अधीन रहते हुए, उद्योग (सूची 2 की प्रविष्टि 24)

4. सूची 3 की प्रविष्टि 33 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, माल का उत्पादन, प्रदाय और वितरण (सूची 2 की प्रविष्टि 27)

5. कैदियों और अभियुक्त व्यक्तियों का स्वायत्त राज्य से आसाम राज्य के किसी अन्य क्षेत्र को या किसी अन्य राज्य को हटाया जाना (सूची 3 की प्रविष्टि 4)

6. भाग की प्रविष्टि 58 के अधीन रहते हुए, कृषि-भूमि को छोड़कर अन्य सम्पत्ति का अन्तरण; विलेखों और दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण (सूची 3 की प्रविष्टि 6)

7. आर्थिक और सामाजिक योजना (सूची 3 की प्रविष्टि 20)

8. सम्पत्ति का अर्जन और अधिग्रहण (सूची 3 की प्रविष्टि 42)

9. स्वायत्त राज्य से बाहर उद्भूत कर तथा अन्य लोक-मांगों के बारे में दावों की, जिनके अन्तर्गत भू-राजस्व की बकाया और इस प्रकार की बकाया के रूप में वसूल की जा सकने वाली राशियां भी हैं, स्वायत्त राज्य में वसूली (सूची 3 की प्रविष्टि 43)

10. इस अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी के प्रयोजनों के लिए जांच या सांख्यिकी (सूची 3 की प्रविष्टि 45)

11. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में विधियों के विरुद्ध अपराध (सूची 2 की प्रविष्टि 64 और सूची 3 की प्रविष्टि 1)

12. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में, उच्चतम न्यायालय को छोड़कर, अन्य सब न्यायालयों की अधिकारिता और शक्तियां (सूची 2 की प्रविष्टि 65 और सूची 3 की प्रविष्टि 46)

13. इस भाग के विषयों में से किसी के बारे में फीसें, किन्तु इनके अन्तर्गत किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीसें नहीं हैं (सूची 2 की प्रविष्टि 66 और सूची 3 की प्रविष्टि 47)

तृतीय अनुसूची

(धारा 58 देखिए)

आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन

1. परिभाषाएं-इस अनुसूची में, -

() स्वायत्त राज्य का प्रयोजन" से ऐसा प्रयोजन अभिप्रेत है जो उन विषयों में से किसी से सम्बन्धित है जिनके बारे में इस अधिनियम के अधीन विधि बनाने की शक्ति मेघालय के विधान-मण्डल को है; तथा

() मेघालय के संबंध में जनसंख्या अनुपात" से ऐसा अनुपात अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, मेघालय तथा शेष आसाम राज्य की अंतिम पूर्वगामी जनगणना में यथा विनिश्चित जनसंख्या के बीच अनुपात के रूप में विनिर्दिष्ट करे

2. भूमि और माल-(1) इस अनुसूची के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए यह है कि मेघालय राज्यक्षेत्र में आसाम राज्य द्वारा धारित सब भूमि और सब सामान, वस्तुएं और अन्य माल नियत दिन मेघालय को उस दशा में संक्रान्त हो जाएंगे, जब वे प्रयोजन जिनके लिए वे धारित थे, स्वायत्त राज्य के प्रयोजन हों

(2) भागतः मेघालय और भागतः शेष आसाम में समाविष्ट क्षेत्रों पर अधिकारिता रखने वाले सचिवालय और विभागाध्यक्षों के कार्यालयों से सम्बन्धित सामान और अनिर्मित सामान आसाम राज्य और मेघालय के बीच ऐसे निदेशों के अनुसार विभाजित किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार उनके न्यायसंगत और साम्यापूर्ण वितरण के लिए जारी करना ठीक समझे

स्पष्टीकरण-इस पैरा में भूमि" पद के अन्तर्गत प्रत्येक प्रकार की स्थावर सम्पत्ति तथा ऐसी सम्पत्ति में या उस पर कोई अधिकार है और माल" पद के अन्तर्गत सिक्के, बैंक नोट और करेन्सी नोट नहीं हैं

3. खजाना और बैंक अतिशेष-आसाम राज्य के सब खजानों में की रोकड़ बाकी का तथा उस राज्य के भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य बैंक में जमा अतिशेषों का, जैसे कि वे नियत दिन के ठीक पहले हों, विभाजन आसाम राज्य और मेघालय के बीच जनसंख्या-अनुपात के अनुसार किया जाएगा:

परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजन के लिए कोई रोकड़ बाकी एक खजाने से दूसरे खजाने को अंतरित नहीं की जाएगी और प्रभाजन नियत दिन भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में आसाम राज्य तथा मेघालय के अतिशेषों का समायोजन करके या अन्य ऐसी रीति से, जिसका केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा निदेश दे, किया जाएगा

4. करों की बकाया-मेघालय को अधिकार होगा कि मेघालय में स्थित सम्पत्ति पर के किसी कर या शुल्क की बकाया जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व की बकाया भी है, वसूल करे तथा उसे यह भी अधिकार होगा कि यदि किसी अन्य कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान मेघालय में अवस्थित हो तो उस कर या शुल्क की बकाया भी वसूल करे :

परन्तु इस पैरा की कोई बात किसी ऐसे कर या शुल्क की बकाया के सम्बन्ध में लागू नहीं होगी जिसे वसूल करने के लिए मेघालय सक्षम नहीं है

5. उधार और अधिदायों की वसूली का अधिकार-(1) मेघालय में के किसी स्थानीय निकाय, सोसाइटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को आसाम राज्य द्वारा नियत दिन के पहले दिए गए उधारों या अधिदायों की वसूली का अधिकार उस दशा में मेघालय को होगा जब वह प्रयोजन जिसके लिए उधार या अधिदाय दिया गया तत्पश्चात् स्वायत्त राज्य का प्रयोजन होगा

(2) किसी सरकारी सेवक को नियत दिन के पहले आसाम राज्य द्वारा दिए गए उधारों और वेतन तथा यात्रा भत्तों के अग्रिम की वसूली का अधिकार मेघालय को उस दशा में संक्रान्त हो जाएगा जब नियत दिन के पश्चात् उस सरकारी सेवक से यह अपेक्षा की जाए कि वह धारा 65 की उपधारा (3) के अधीन मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करे

6. कतिपय निधियों में विनिधान और जमा-आसाम राज्य के रोकड़ बाकी विनिधान खाते में से या किसी अन्य साधारण खाते में से नियत दिन के पहले किए गए विनिधान, नियत दिन के पश्चात् आसाम राज्य और मेघालय की जनसंख्या अनुपात के अनुसार विभाजित किए जाएंगे; और किसी ऐसी विशेष निधि में विनिधान, जिसके उद्देश्य मेघालय के किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हों, मेघालय को उस दशा में संक्रान्त हो जाएंगे जब वह विनिधान स्वायत्त राज्य के प्रयोजन से सम्बन्धित हो

7. राज्य उपक्रमों की आस्तियां और दायित्व तथा विनिधान-(1) ऐसे उपक्रम जिस पर आसाम राज्य ने पचास लाख रुपए से अधिक पूंजी लागत लगाई हो, या सरकारी कम्पनी को छोड़कर, आसाम राज्य के किसी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम से सम्बन्धित मेघालय में की आस्तियां और दायित्व, जैसे कि वे नियत दिन हों, नियत दिन के पश्चात् उस दशा में मेघालय को संक्रान्त हो जाएंगे जब उपक्रम का प्रयोजन स्वायत्त राज्य के प्रयोजन से सम्बन्धित हो

(2) जहां उपपैरा (1) में निर्दिष्ट प्रकार के किसी उपक्रम के लिए आसाम राज्य द्वारा अवक्षयण आरक्षित निधि रखी जाती हो वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत प्रतिभूतियां मेघालय को संक्रांत हो जाएंगी

(3) किसी ऐसे निगमित निकाय या सहकारी सोसाइटी में, जिसके कार्यक्षेत्र या अधिकारिता का विस्तार उन क्षेत्रों में हो जो भागतः मेघालय में और भागतः शेष आसाम राज्य में पडते हों या किसी सरकारी कम्पनी या प्राइवेट वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम में नियत दिन के पहले किए गए आसाम राज्य के विनिधान, यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा निदेश दे तो, आसाम राज्य और मेघालय की सरकारों में उस अनुपात में आबंटित किए जाएंगे जो पूर्वोक्त निदेश की तारीख से एक वर्ष के भीतर दोनों सरकारों के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में, जिसका केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे

8. लोक-ऋण-(1) आसाम राज्य का लोक-ऋण, जो उस उधार के कारण हो जो सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके लिया गया हो और जो नियत दिन के ठीक पहले जनता को बकाया हो, उस राज्य का ऋण बना रहेगा और मेघालय का दायित्व होगा कि वह ऐसे ऋण की शोधन व्यवस्था और अदायगी के लिए समय-समय पर देय राशियों में अपना अंश आसाम राज्य को दे

(2) उपपैरा (1) में निर्दिष्ट भाग का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए ऋण का आसाम राज्य और मेघालय में विभाजन ऐसे किया गया समझा जाएगा मानो वह उपपैरा (4) में निर्दिष्ट ऋण हो

(3) उपपैरा (1) में निर्दिष्ट लोक-ऋण से भिन्न आसाम राज्य के लोक-ऋण के उतने भाग में से, जो उस राज्य द्वारा दिए गए तथा नियत दिन बकाया उधारों और अधिदायों की रकम के बराबर हो, मेघालय के दायित्व का अंश उतना होगा जो पैरा 5 के अधीन मेघालय द्वारा वसूल किए जा सकने वाले उधारों और अधिदायों के बराबर हो

(4) आसाम राज्य के शेष लोक-ऋण का, जो केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य निकाय या बैंक से लिए गए और नियत दिन के ठीक पहले बकाया उधारों के कारण हो, आसाम राज्य और मेघालय में विभाजन उस अनुपात में किया जाएगा जो सब पूंजी संकर्मों और अन्य पूंजी लागतों मध्ये आसाम राज्य द्वारा नियत दिन तक उपगत या उपगत समझे गए कुल पूंजी व्यय तथा सब पूंजी संकर्मों और अन्य पूंजी लागतों मध्ये मेघालय में स्वायत्त राज्य के प्रयोजनों के लिए उपगत या उपगत समझे गए कुल व्यय के बीच हो

(5) इस पैरा के प्रयोजनों के लिए सरकारी प्रतिभूति" से ऐसी प्रतिभूति अभिप्रेत है जो जनता से उधार लेने के लिए आसाम राज्य द्वारा सृजित और जारी की गई है और जो लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 2 के खण्ड (2) में विनिर्दिष्ट या उसके अधीन विहित प्ररूपों में से किसी प्ररूप में है

9. आधिक्य में वसूल किए गए करों की वापसी-नियत दिन के पश्चात् यह मेघालय का दायित्व होगा कि वह सम्पत्ति पर के किसी कर या शुल्क को, (जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व भी हैं) जो मेघालय में स्थित किसी सम्पत्ति पर आधिक्य में वसूल किया गया हो या आधिक्य में वसूल किए गए किसी अन्य कर या शुल्क को यदि उस अन्य कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान मेघालय में स्थित हो, वापस करे:

परन्तु इस धारा की कोई बात किसी ऐसे कर या शुल्क की वापसी को लागू नहीं होगी जिसकी वसूली करने के लिए मेघालय सक्षम नहीं है

10. निक्षेप, आदि-मेघालय में स्थित किसी स्थान में नियत दिन के पहले किए गए किसी सिविल निक्षेप या स्थानीय निधि निक्षेप के बारे में आसाम राज्य का दायित्व उस दशा में मेघालय का दायित्व हो जाएगा जब वह निक्षेप स्वायत्त राज्य के किसी प्रयोजन के लिए हो

11. भविष्य-निधि-धारा 65 की उपधारा (3) के अधीन मेघालय के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करने के लिए अपेक्षित सरकारी सेवक के भविष्य-निधि खाते के बारे में आसाम राज्य का दायित्व नियत दिन से मेघालय का दायित्व हो जाएगा    

12. पेंशनें-आसाम राज्य या मेघालय का पेंशनों के बारे में दायित्व उन दोनों में ऐसी रीति से प्रभाजित किया जाएगा जो उनमें करार पाई जाए, या ऐसे करार के अभाव में ऐसी रीति से किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे

13. संविदाएं-(1) जहां आसाम राज्य ने अपनी कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में उस राज्य के प्रयोजनों में से किसी के लिए कोई संविदा नियत दिन के पहले की हो वहां वह संविदा मेघालय की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई उस दशा में समझी जाएगी जब उस दिन से वह प्रयोजन अनन्यतः स्वायत्त राज्य का प्रयोजन हो और सब अधिकार और दायित्व जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों या प्रोद्भूत हों, उस सीमा तक मेघालय के अधिकार या दायित्व होंगे जिस तक वे आसाम के अधिकार या दायित्व होते

(2) इस पैरा के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि ऐसे दायित्वों के अन्तर्गत जो संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों या प्रोद्भूत हों निम्नलिखित भी हैं: -

() संविदा सम्बन्धी किसी कार्यवाही में किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किए गए किसी आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व; तथा

() ऐसी किसी कार्यवाही में या उसके सम्बन्ध में उपगत व्ययों के बारे में कोई दायित्व

(3) यह पैरा उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं के बारे में दायित्वों के प्रभाजन से सम्बन्धित इस अनुसूची के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा; और बैंक अतिशेषों और प्रतिभूतियों के विषय में, इस बात के होते हुए भी कि वे संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति वाली हैं, कार्यवाही उन अन्य उपबन्धों के अधीन की जाएगी

14. अभियोज्य दोष के बारे में दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य पर संविदा भग से भिन्न किसी अभियोज्य दोष के बारे में कोई दायित्व हो वहां वह दायित्व मेघालय का दायित्व उस दशा में होगा जब वह तत्पश्चात् स्वायत्त राज्य से सम्बन्धित हो

15. प्रत्याभूतिदाता का दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पहले आसाम राज्य पर किसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी या अन्य व्यक्ति के दायित्व के बारे में प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व हो वहां वह दायित्व मेघालय का दायित्व उस दशा में होगा जब वह तत्पश्चात् स्वायत्त राज्य से सम्बन्धित हो  

16. उचंत मदें-यदि स्वायत्त राज्य के प्रयोजन से सम्बन्धित कोई उचंत मद अन्ततः इस अनुसूची के पूर्वगामी पैराओं में से किसी में निर्दिष्ट प्रकृति की आस्ति या दायित्व पर प्रभाव डालने वाली पाई जाए तो उसके सम्बन्ध में उस उपबन्ध के अनुसार कार्यवाही की जाएगी

17. अवशिष्टीय उपबन्ध-आसाम राज्य की किसी ऐसी आस्ति या दायित्व का फायदा या भार, जो स्वायत्त राज्य के प्रयोजन से सम्बन्धित हो और जिसके बारे में इस अनुसूची के पूर्वगामी पैराओं में से किसी में व्यवस्था नहीं की गई है, मेघालय को संक्रान्त हो जाएगा

18. आस्तियों और दायित्वों का करार द्वारा प्रभाजन-जहां आसाम राज्य और मेघालय करार कर लें कि किसी विशिष्ट आस्ति या दायित्व को फायदों का भार का प्रभाजन उनके बीच ऐसी रीति से किया जाना चाहिए जो उससे भिन्न है जो इस अनुसूची के पूर्वगामी पैराओं में से किसी में उपबन्धित है वहां उनमें किसी बात के होते हुए भी, उस आस्ति या दायित्व के फायदों या भार का प्रभाजन उस रीति से किया जाएगा जो करार पाई जाए

19. कुछ मामलों में आबंटन या समायोजन का आदेश करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जहां आसाम राज्य या मेघालय इस अनुसूची के उपबन्धों में से किसी के आधार पर किसी सम्पत्ति का हकदार हो या कोई फायदे अभिप्राप्त करे या किसी दायित्व के अधीन हो जाए और नियत दिन से तीन वर्ष की कालावधि के भीतर, यथास्थिति, आसाम राज्य या स्वायत्त राज्य द्वारा केन्द्रीय सरकार को किए गए निर्देश पर उस सरकार की यह राय हो कि वह न्यायसंगत और साम्यापूर्ण है कि वह सम्पत्ति या वे फायदे दो राज्यों में से एक को अन्तरित किए जाने चाहिएं या उनमें विभाजित किए जाने चाहिएं या यह कि उस दायित्व मद्दे अभिदाय दोनों में से किसी राज्य द्वारा किया जाना चाहिए, वहां उक्त सम्पत्ति या फायदों का आबंटन ऐसी रीति से किया जाएगा अथवा मेघालय या आसाम राज्य प्रथमतः दायित्वाधीन राज्य को उनके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा जिसका केन्द्रीय सरकार, आसाम सरकार और मेघालय सरकार से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा अवधारण करे

चतुर्थ अनुसूची

(धारा 74 देखिए)

संविधान की षष्ठ अनुसूची के संशोधन

1. संविधान की षष्ठ अनुसूची में (जिसे इसमें इसके पश्चात् षष्ठ अनुसूची कहा गया है) पैरा 1 के उपपैरा (3) में, खण्ड () के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

(चच) किसी स्वायत्त जिले का नाम परिवर्तित कर सकेगा,"

2. षष्ठ अनुसूची के पैरा 2 में, -         

(i) उपपैरा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपपैरा प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

(1) प्रत्येक स्वायत्त जिले की एक जिला परिषद् होगी, जो तीस से अनधिक सदस्यों से गठित होगी; जिनमें चार से अनधिक व्यक्ति राज्यपाल द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे और शेष वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित किए जाएंगे ”;

(ii) उपपैरा (6) में, -

() खण्ड () में ऐसी परिषदों" शब्दों के स्थान पर प्रादेशिक परिषदों" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

() खण्ड () में, कार्य-संचालन" शब्दों के पश्चात् (जिसके अन्तर्गत किसी रिक्ति के होते हुए कार्य करने की शक्ति भी है)" कोष्ठक और शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे;

(iii) उपपैरा (6) के पश्चात् निम्नलिखित उपपैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

(6) जिला परिषद् के निर्वाचित सदस्य परिषद् के लिए निर्वाचन के पश्चात् परिषद् के प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे, यदि जिला परिषद् पैरा 16 के अधीन पहले ही विघटित कर दी जाए तथा नामनिर्दिष्ट सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा:

परन्तु जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में हो अथवा ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हों जिनके कारण निर्वाचन कराना राज्यपाल की राय में असाध्य हो तो पांच वर्ष की उक्त कालावधि राज्यपाल द्वारा, एक समय में एक वर्ष से अनधिक के लिए, और किसी ऐसी दशा में जब आपात की उद्घोषणा का प्रवर्तन समाप्त हो जाने के पश्चात् छह मास की कालावधि के आगे की होने वाली कालावधि के लिए, बढ़ाई जा सकेगी:

परन्तु यह और कि आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित सदस्य उस सदस्य की शेष पदावधि पर्यन्त पद धारण करेगा जिसके स्थान पर वह आया ";

(iv) उपपैरा (7) में, -

() के बारे में नियम" शब्दों के पश्चात् राज्यपाल के अनुमोदन से" शब्द तथा विनियमन करने वाले नियम भी" शब्दों के पश्चात् वैसे ही अनुमोदन से" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;

() द्वितीय परन्तुक का लोप कर दिया जाएगा

               

3. षष्ठ अनुसूची के पैरा 3 के उपपैरा (1) में, -

(i) खण्ड () के परन्तुक में आसाम सरकार" शब्दों के स्थान पर आसाम सरकार या मेघालय सरकार" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ii) खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -  

                                () विवाह और विवाह-विच्छेद;"

4. षष्ठ अनुसूची के पैरा 4 में निम्नलिखित उपपैरा अंत में अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: - 

(5) उस तारीख से जो राष्ट्रपति, यथास्थिति, आसाम सरकार या मेघालय सरकार से परामर्श करने के पश्चात् अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे, यह कंडिका ऐसे स्वायत्त जिले या प्रदेश के संबंध में, जो उस अधिसूचना में उल्लिखित किया जाए, इस प्रकार प्रभावी होगी मानो-

(i) उप-कंडिका (1) में जिनके सभी पक्ष ऐसे क्षेत्रों के भीतर की अनुसूचित आदिम-जातियों के ही हैं तथा जो उन व्यवहारवादों से भिन्न हैं जिन्हें इस अनुसूची की कंडिका 5 की उप-कंडिका (1) के उपबन्ध लागू होते हैं" शब्दों के स्थान पर जो इस अनुसूची की कंडिका 5 की उप-कंडिका (1) में निर्दिष्ट प्रकृति के ऐसे व्यवहारवाद और मामले हों जो राज्यपाल इस निमित्त उल्लिखित करे," शब्द रख दिए गए हों;

(ii) उप-कंडिका (2) और (3) का लोप कर दिया गया हो;

(iii) उप-कंडिका (4) में-

() यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् या जिला परिषद् राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से" शब्दों के स्थान पर राज्यपाल" शब्द तथा अन्त में आने वाले सकेंगी" शब्द के स्थान पर सकेगा" शब्द रख दिए गए हों, तथा

() खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया गया हो, अर्थात्: -

() ग्राम परिषदों और न्यायालयों के गठन, इस कंडिका के अधीन उनके द्वारा प्रयोक्तव्य शक्तियों के और उन न्यायालयों के जिन्हें ग्राम परिषदों और न्यायालयों के विनिश्चय से अपीलें हो सकेंगी,";

() खण्ड () के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया गया हो, अर्थात्: - 

() प्रादेशिक या जिला परिषद् या ऐसी परिषद् द्वारा गठित किसी न्यायालय के समक्ष राष्ट्रपति द्वारा उप-कंडिका (5) के अधीन नियत तारीख के ठीक पहले विलम्बित अपीलों और अन्य कार्यवाहियों के अन्तरण के,"; तथा

() खण्ड () में उप-कंडिका (1) और (2)" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर उप-कंडिका (1)" शब्द, कोष्ठक और अंक रख दिए गए हों "

5. षष्ठ अनुसूची के पैरा 5 में उपपैरा (3) के पश्चात् निम्नलिखित उपपैरा अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -    

(4) किसी स्वायत्त जिले या स्वायत्त प्रदेश के संबंध में कंडिक 4 की उप-कंडिका (5) के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियत तारीख से इस कंडिका की जैसी कि वह उस जिले या प्रदेश को लागू हो किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह राज्यपाल को प्राधिकृत करती है कि वह किसी जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् को या जिला परिषद् द्वारा गठित न्यायालयों को इस कंडिका की उप-कंडिका (1) में निर्दिष्ट शक्तियों में से कोई प्रदान करे "

6. षष्ठ अनुसूची के पैरा 6 के स्थान पर निम्नलिखित पैरा प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

6. प्राथमिक विद्यालय आदि स्थापित करने की जिला परिषद् की शक्तियां-(1) स्वायत्त जिला की जिला परिषद् जिले के प्राथमिक विद्यालयों, ओषधालयों, बाजारों, कांजीहौसों, पारघाटों, मीन-क्षेत्रों, सड़कों; सड़क परिवहन और जलमार्गों की स्थापना, निर्माण और प्रबन्ध कर सकेगी तथा उनके विनियमन और नियंत्रण के लिए विनियम राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से बना सकेगी और विशिष्टतः वह भाषा और वह रीति विहित कर सकेगी जिसमें प्राथमिक शिक्षा जिले के प्राथमिक विद्यालयों में दी जाएगी

(2) राज्यपाल, जिला परिषद् की सम्मति से उस परिषद् को या उसके अधिकारियों को कृषि, पशु-पालन सामुदायिक परियोजनाओं, सहकारी सोसाइटियों, समाज-कल्याण, ग्राम-योजना तथा किसी अन्य ऐसे विषय के संबंध में जिस पर, यथास्थिति, आसाम या मेघालय की सरकार की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार हो, कृत्य सशर्त या अशर्त रूप से सौंप सकेगा "

                7. षष्ठ अनुसूची के पैरा 7 में उपपैरा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपपैरा प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्: -

(2) राज्यपाल, यथास्थिति, जिला निधि या प्रादेशिक निधि के प्रबन्ध के लिए तथा उक्त निधि में धन जमा करने और उसमें से धन निकालने के बारे में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया उसके धन की अभिरक्षा तथा पूर्वोक्त विषयों से सम्बन्धित या आनुषंगिक किसी अन्य विषय के लिए नियम बना सकेगा

(3) यथास्थिति, जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् के लेखे ऐसे प्ररूप में रखे जाएंगे जो भारत का नियंत्रक महालेखापरीक्षक राष्ट्रपति के अनुमोदन से विहित करे

(4) नियंत्रक महालेखापरीक्षक जिला और प्रादेशिक परिषदों के लेखाओं की संपरीक्षा ऐसी रीति से कराएगा जो वह ठीक समझे तथा नियंत्रक महालेखापरीक्षक की ऐसे लेखाओं से सम्बन्धित रिपोर्टें राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएंगी जो उन्हें परिषद् के समक्ष रखवाएगा "

8. षष्ठ अनुसूची के पैरा 8 के उपपैरा (4) के अन्त में निम्नलिखित शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्: -

और ऐसा प्रत्येक विनियम राज्यपाल को तुरन्त प्रस्तुत किया जाएगा और जब तक उस पर वह अनुमति दे दें उसका कोई प्रभाव नहीं होगा "

9. पृष्ठ अनुसूची के पैरा 12 के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

12. मेघालय में विधियां लागू होने के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) कंडिका 12 में किसी बात के होते हुए भी -

() यदि इस अनुसूची की कंडिका 3 की उप-कंडिका (1) के खण्ड () या खण्ड () में उल्लिखित विषयों में से किसी के बारे में मेघालय में की जिला या प्रादेशिक परिषद् द्वारा बनाई गई किसी विधि का कोई उपबन्ध आसाम राज्य के विधान-मंडल द्वारा राज्य महत्व की घोषित की गई किसी परियोजना के बारे में आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि के किसी उपबन्ध के विरुद्ध हो तो, यथास्थिति, जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् द्वारा बनाई गई विधि चाहे वह आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि के पहले बनाई गई हो या पीछे विरोध की मात्रा तक शून्य होगी और आसाम राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी ;

() यदि इस अनुसूची की कंडिका 3 की उप-कंडिका (1) के खण्ड () या खण्ड () या खण्ड () में उल्लिखित विषयों में से किसी के बारे में मेघालय में की जिला या प्रादेशिक परिषद् द्वारा बनाई गई किसी विधि का कोई उपबन्ध, उस विषय के बारे में मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि के किसी उपबन्ध के विरुद्ध हो तो, यथास्थिति, जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् द्वारा बनाई गई विधि, चाहे वह मेघालय द्वारा बनाई गई विधि के पहले बनाई गई हो या उसके पश्चात् विरोध की मात्रा तक शून्य होगी और मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी  

(2) यदि मेघालय में की दो या अधिक जिला परिषदों या प्रादेशिक परिषदों को यह वांछनीय प्रतीत हो कि जिन विषयों के बारे में उन्हें इस अनुसूची की कंडिका 3 के अधीन विधि बनाने की शक्ति है उनमें से किसी का विनियमन मेघालय के विधान-मण्डल को विधि द्वारा करना चाहिए, और यदि उक्त जिला परिषदों या प्रादेशिक परिषदों द्वारा उस आशय के संकल्प पारित कर दिए जाएं तो मेघालय के विधान-मण्डल के लिए तद्नुसार उस विषय का विनियमन करने वाला अधिनियम पारित करना विधिपूर्ण होगा और इस प्रकार पारित कोई अधिनियम उन संबद्ध स्वायत्त जिलों और प्रदेशों को लागू होगा और किसी अन्य ऐसे स्वायत्त जिले या प्रदेश को भी लागू होगा जिसकी जिला या प्रादेशिक परिषद् उसे बाद में इस निमित्त पारित संकल्प द्वारा अंगीकार कर ले

(3) मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा इस कंडिका की उप-कंडिका (2) के अधीन पारित कोई अधिनियम मेघालय के विधान-मण्डल द्वारा उसी रीति से पारित अधिनियम द्वारा संशोधित या निरसित किया जा सकेगा, किन्तु किसी ऐसे स्वायत्त जिला या प्रदेश के बारे में, जिसको वह लागू हो, उसकी जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा संशोधित या निरसित नहीं किया जाएगा

(4) राज्यपाल आसाम राज्य के विधान-मण्डल के किसी अधिनियम के बारे में और राष्ट्रपति संसद् के किसी अधिनियम के बारे में, लोक अधिसूचना द्वारा निदेश दे सकेगा कि वह मेघालय को लागू नहीं होगा अथवा उसे या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपान्तरों के सहित लागू होगा जो वह अधिसूचना में उल्लिखित करे और ऐसा कोई निदेश भूतलक्षी प्रभाव से दिया जा सकेगा

(5) कंडिका 12 की उप-कंडिका (1) के खण्ड () के उपबन्ध मेघालय को लागू नहीं होंगे "

10. षष्ठ अनुसूची के पैरा 15 के उपपैरा (1) में, संभाव्य है" शब्दों के पश्चात् या लोक-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे

11. षष्ठ अनुसूची के पैरा 16 को उस पैरा के उपपैरा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित पैरा में निम्नलिखित उपपैरा जोड़ दिए जाएंगे, अर्थात्: -

(2) यदि किसी समय राज्यपाल का समाधान हो जाए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें स्वायत्त जिला या प्रदेश का प्रशासन इस अनुसूची के उपबन्धों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है तो वह, यथास्थिति, जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद् में निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सब कृत्य या शक्तियां या उनमें से कोई लोक अधिसूचना द्वारा, छह मास से अनधिक की कालावधि के लिए अपने हाथ में ले सकेगा और यह घोषित कर सकेगा कि ऐसे कृत्यों या शक्तियों का प्रयोग ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा किया जा सकेगा जिसे वह इस निमित्त उल्लिखित करे :

परन्तु राज्यपाल मूल आदेश का प्रवर्तन अतिरिक्त आदेश या आदेशों द्वारा एक बार में छह मास से अनधिक की कालावधि के लिए बढ़ा सकेगा

(3) इस कंडिका की उप-कंडिका (2) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश उसके कारणों सहित, राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखा जाएगा और उस आदेश के जारी किए जाने के पश्चात् राज्य विधान-मंडल जिस तारीख को प्रथम बार बैठे उससे तीस दिन के अवसान पर प्रवर्तन में नहीं रह जाएगा, जब तक वह उक्त कालावधि के पूर्व राज्य विधान-मंडल द्वारा अनुमोदित हो गया हो "

12. षष्ठ अनुसूची के पैरा 20 के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

20. निर्वचन-(1) इस अनुसूची में, -

() मेघालय के सम्बन्ध में, राज्यपाल" से मेघालय की मंत्रि-परिषद् की सहायता और सलाह से कार्य करता हुआ आसाम का राज्यपाल अभिप्रेत है, सिवाय वहां तक जहां तक कि उससे इस अनुसूची द्वारा या उसके अधीन यह अपेक्षित है कि वह अपने कृत्यों का प्रयोग स्वविवेक से करे या कंडिका 12 की उप-कंडिका (4) के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करे;

() मेघालय" से अनुच्छेद 244 के अधीन बनाया गया स्वायत्त राज्य अभिप्रेत है

(2) इस निमित्त बनाए गए अभिव्यक्त उपबन्धों के अधीन रहते हुए, इस अनुसूची के उपबन्ध मेघालय को लागू होने में इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो

(i) आसाम सरकार, आसाम राज्य, राज्य और राज्य के विधान-मण्डल के प्रति निर्देश क्रमशः मेघालय सरकार, मेघालय के स्वायत्त राज्य, मेघालय और मेघालय के विधान-मण्डल के प्रति निर्देश हों;

(ii) कंडिका 13 में अनुच्छेद 202 के अधीन" शब्दों और अंकों का लोप कर दिया गया हो ।‘।

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