एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड (उपक्रम का अर्जन) अधिनियम, 1971
(1971 का अधिनियम संख्यांक 65)
[23 दिसम्बर, 1971]
लौह तथा इस्पात उद्योग की आवश्यक अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए
उच्चतापसह के प्रदाय में वृद्धि के प्रयोजनार्थ एशियन
रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड के उपक्रम के अर्जन
का उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
यतः एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड समापन में है और उसने अपना उत्पादन बन्द कर दिया है;
और यतः भारत में उच्चतापसह का कुल उत्पादन लौह तथा इस्पात उद्योग की आवश्यक अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए अपर्याप्त है;
और यतः उच्चतापसह के प्रदाय में वृद्धि एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड को शीघ्र चालू करके और तत्पश्चात् उसकी क्षमता बढ़ाकर की जा सकती है;
अतः भारत गणराज्य के बाईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड (उपक्रम का अर्जन) अधिनियम, 1971 है ।
(2) यह 17 अक्तूबर, 1971 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, --
(क) नियत दिन" से 17 अक्तूबर, 1971 अभिप्रेत है;
(ख) कम्पनी" से एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड अभिप्रेत है, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथा परिभाषित कम्पनी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय पश्चिमी बंगाल राज्य में है;
(ग) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं ।
3. कम्पनी के उपक्रम का केन्द्रीय सरकार में निहित होना-नियत दिन से, कम्पनी का उपक्रम, इस अधिनियम के आधार पर, सब विल्लंगमों से मुक्त होकर केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएगा ।
4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) कम्पनी के उपक्रम की बाबत यह समझा जाएगा कि कम्पनी के उपक्रम में सब आस्तियां, अधिकार, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सब जंगम और स्थावर सम्पत्ति, नकद अतिशेष, आरक्षित निधियां, विनिधान और ऐसी सम्पत्ति में या उससे उद्भूत होने वाले सब अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पहले, चाहे भारत के अन्दर या बाहर, कम्पनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में थे, तथा तत्सम्बन्धी सब लेखा-बहियां, रजिस्टर और किसी भी प्रकृति के सब अन्य दस्तावेज सम्मिलित हैं ।
(2) केन्द्रीय सरकार में जो उपक्रम धारा 3 के अधीन निहित हुआ है उसमें यथापूर्वोक्त सम्मिलित सब सम्पत्ति, उस सम्पत्ति पर प्रभाव डालने वाले किन्हीं न्यासों, बाध्यताओं, बंधकों, भारों, धारणाधिकारों और अन्य विल्लंगमों से ऐसे निहित होने के आधार पर मुक्त और उन्मोचित हो जाएगी और कुर्की, व्यादेश, अथवा किसी न्यायालय की कोई डिक्री या आदेश, जो ऐसी सम्पत्ति के उपयोग को किसी प्रकार से निर्बन्धित करता हो, वापस ले लिया गया समझा जाएगा ।
(3) यदि नियत दिन कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध कम्पनी के उपक्रम के कारबार के सम्बन्ध में कोई वाद, अपील या किसी प्रकार की अन्य कार्यवाही लम्बित हो, तो वह कम्पनी के उपक्रम के अन्तरित होने या इस अधिनियम में किसी बात के होने के कारण उपशमित या बन्द या किसी प्रकार से प्रतिकूलतः प्रभावित नहीं होगी, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, अभियोजित की जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी ।
5. उपक्रम तथा उससे संबंधित दस्तावेजों के कब्जे के परिदान का कर्तव्य-(1) किसी न्यायालय की किसी डिक्री, निर्णय या आदेश के अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कम्पनी का शासकीय समापक या कोई अन्य व्यक्ति, जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में कम्पनी का उपक्रम या उसका कोई भाग हो, यथास्थिति, कम्पनी के उपक्रम या उसके उस भाग का कब्जा तुरन्त केन्द्रीय सरकार को परिदत्त कर देगा ।
(2) शासकीय समापक या कोई अन्य व्यक्ति, जो नियत दिन ऐसी किन्हीं पुस्तकों, दस्तावेजों या अन्य कागजपत्रों को अपने कब्जे या नियंत्रण में रखता हो, जो उस उपक्रम से संबद्ध हों जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार सरकार में निहित हो गया है, उन पुस्तकों, दस्तावेजों और कागजपत्रों के बारे में केन्द्रीय सरकार को लेखा-जोखा देने का दायी होगा और उन्हें केंद्रीय सरकार या ऐसे व्यक्ति को जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त कर देगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार धारा 3 के अधीन उसमें निहित उपक्रम का कब्जा लेना सुनिश्चित करने के लिए सब आवश्यक कदम उठा या उठवा सकेगी ।
6. विशिष्टियां देने का कर्तव्य-कम्पनी ऐसी कालावधि के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, उस सरकार को, कम्पनी की नियत दिन विद्यमान उन सब सम्पत्तियों और आस्तियों की पूरी तालिका देगी जो उस उपक्रम से सम्बद्ध हों जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है ।
7. प्रतिकर का संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन कम्पनी के उपक्रम के केन्द्रीय सरकार को अन्तरण की बाबत प्रतिकर के रूप में इक्यासी लाख रुपए की राशि, कम्पनी के नाम में न्यायालय में नकद जमा करेगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रतिकर की कुल रकम में से,-
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा कम्पनी के नाम में आठ लाख रुपए की राशि नियत दिन से तीन मास के भीतर जमा की जाएगी;
(ख) प्रतिकर की रकम का अतिशेष, केन्द्रीय सरकार द्वारा दस समान किस्तों में जमा किया जाएगा, जिसकी पहली किस्त उस तारीख को देय होगी जब नियत दिन से एक वर्ष की कालावधि समाप्त हो और पश्चात्वर्ती किस्तें तद्नुसार देय होंगी; और
(ग) खण्ड (ख) में निर्दिष्ट प्रतिकर की प्रत्येक किस्त पर, इस अधिनियम के प्रारम्भ से सात प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा ।
(3) शंकाओं से बचने के लिए एतद्द्वारा घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रतिकर उस उपक्रम की, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, आस्तियों के आपनीय मूल्य को व्यक्त करता है और उपक्रम के दायित्व प्रतिकर की उक्त रकम में से पूरे किए जाएंगे ।
(4) उस उपक्रम के, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, दायित्वों को पूरा करने में वह न्यायालय, जिसके द्वारा उस उपक्रम की स्वामिनी कम्पनी का परिसमापन किया जा रहा हो, प्रतिकर की रकम को लेनदारों में प्रशासन के सम्यक् अनुक्रम में वितरित कर देगा और यदि ऐसे वितरण के बाद कुछ अधिशेष बचे तो उसे कम्पनी के अभिदाताओं में उनके अधिकारों और हितों के अनुसार वितरित कर देगा ।
8. उपक्रम का प्रबन्ध और प्रशासन-धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित उपक्रम का केन्द्रीय सरकार की ओर से प्रबन्ध ऐसे व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय द्वारा किया जाएगा जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नामनिर्दिष्ट करे और ऐसा व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय प्रबन्ध ऐसे विनियमों के अनुसार चलाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएं ।
9. शास्तियां-(1) कोई व्यक्ति, जो-
(क) कम्पनी के उपक्रम की भागभूत किसी सम्पत्ति का कब्जा, अभिरक्षा या नियंत्रण रखते हुए, उस सम्पत्ति को केन्द्रीय सरकार से सदोष विधारित करेगा; अथवा
(ख) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित उपक्रम की भागभूत किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा; अथवा
(ग) अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में की कोई दस्तावेज केन्द्रीय सरकार से या केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति से जानबूझकर विधारित करेगा या धारा 5 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार उसे देने में असफल रहेगा; अथवा
(घ) धारा 6 की अपेक्षानुसार कोई तालिका देने में जानबूझकर असफल रहेगा; अथवा
(ङ) ऐसी तालिका देने की अपेक्षा किए जाने पर, उसमें कोई ऐसी विशिष्टियां देगा जो मिथ्या हों और या तो जिनके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास हो या जिनके सत्य होने का उसे विश्वास न हो,
कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डनीय होगा:
परन्तु इस उपधारा के खण्ड (क) या खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन अपराध का विचारण करने वाला न्यायालय अभियुक्त को दोषसिद्ध करते समय यह आदेश दे सकेगा कि वह सदोष विधारित या सदोष अभिप्राप्त कोई सम्पत्ति अथवा जानबूझकर विधारित किया गया या न दिया कोई दस्तावेज उस समय के भीतर, जो न्यायालय द्वारा नियत किया जाएगा, परिदत्त या वापस कर दे:
परन्तु यह और कि इस धारा की या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध की कोई बात किसी व्यक्ति को किसी ऐसी बात के बारे में दोषसिद्ध किए जाने का भागी न बनाएगी जो नियत दिन के पहले उसके द्वारा की गई हो या जिसे करने का लोप उक्त दिन के पहले उसके द्वारा किया गया हो ।
(2) कोई न्यायालय इस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान केन्द्रीय सरकार की अथवा उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
10. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण-कोई भी याद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या कम्पनी के उपक्रम के कार्यलाप के सम्बन्ध में सेवा करने वाले किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
11. निरसन और व्यावृत्तियां-(1) एशियन रिफ्रेक्टरीज लिमिटेड (उपक्रम का अर्जन) अध्यादेश, 1971 (1971 अध्या० सं०13) एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी यह है कि इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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