राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस)
अधिनियम, 1948
(1948 का अधिनियम संख्यांक 41)
[3 सितम्बर, 1948]
राजनयिक और कौंसलीय आफिसरों द्वारा शपथ दिलाए जाने के लिए और
उनके कुछ पदीय कर्तव्यों के बारे में उद्ग्रहणीय फीस विहित
करने के लिए उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
यतः राजनयिक और कौंसलीय आफिसरों द्वारा शपथ दिलाए जाने के लिए और उनके द्वारा किए जाने वाले कुछ पदीय कर्तव्यों के बारे में फीस के उद्ग्रहण के लिए उपबन्ध करना समीचीन है ;
अतः एत्दद्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है : -
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राजनयिक और कौंसलीय आफिसर (शपथ और फीस) अधिनियम, 1948 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में,
(क) “कौंसलीय आफिसर" के अन्तर्गत महाकौंसल, कौंसल, उप-कौंसल, उप-कौंसलीय अभिकर्ता, प्रो-कौंसल, और ऐसा अन्य व्यक्ति है जो महाकौंसल, कौंसल, उप-कौंसल या कौंसलीय अभिकर्ता के कर्तव्यों को करने के लिए प्राधिकृत है ;
(ख) “राजनयिक अधिकारी" से कोई राजदूत, दूत, मंत्री, कार्य दूत, राजदूतावास या दूतावास का सचिव अभिप्रेत है ;
(ग) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ; और
। । । ।
3. विदेशों में शपथ और नोटेरी के कार्यों के बारे में शक्ति(1) प्रत्येक राजनयिक या कौंसलीय आफिसर किसी विदेश या विदेशी स्थान में जहां वह अपने कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, कोई शपथ दिला सकता है और कोई शपथपत्र ले सकता है और नोटेरी का वह काम कर सकता है जो [किसी राज्य] के अंदर कोई नोटेरी पब्लिक कर सकता है और ऐसे व्यक्ति के द्वारा या समक्ष दिलाई गई शपथ, शपथित शपथपत्र या किया गया नोटेरी का काम इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वह [किसी राज्यट में किसी विधिपूर्ण प्राधिकारी के द्वारा या समक्ष सम्यक्तः ली गई, शपथित या किया गया हो ।
(2) इस अधिनियम द्वारा शपथ दिलाने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति की किसी शपथ, शपथपत्र या काम में उसके द्वारा या उसके समक्ष दिए या किए जाने के परिसाक्ष्य में, मुद्रा लगाया गया और हस्ताक्षर किया गया या मुद्रा की छाप लगाया गया तात्पर्यित कोई दस्तावेज यह साबित हुए बिना कि वह मुद्रा या हस्ताक्षर उस व्यक्ति की या उस व्यक्ति की पदीय हैसियत की मुद्रा या हस्ताक्षर है साक्ष्य में ग्रहण किया जाएगा ।
4. इस अधिनियम के अधीन अपराधों के लिए दण्ड-(1) जो कोई इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ली गई शपथ या बनाए गए शपथपत्र में मिथ्या शपथ ग्रहण करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई, इस अधिनियम द्वारा उसके अधीन शपथ दिलाने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति की मुद्रा या हस्ताक्षर की कूटरचना करेगा या उसका कपटपूर्ण रूप से परिवर्तन करेगा, या इस प्रकार कूटरचित या कूटकृत या कपटपूर्णतः परिवर्तित मु्द्रा या हस्ताक्षर वाले किसी शपथपत्र को यह जानते हुए कि वह कूटरचित, कूटकृत या कपटपूर्णतः परिवर्तित है साक्ष्य में देगा या उसका अन्यथा उपयोग करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा ।
5. अपराधों का विचारण-इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध की [उस [राज्यट] में जांच, कार्यवाही तथा विचारण किया जा सकता है और दण्ड दिया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति जिस पर अपराध का आरोप लगाया गया है, पकड़ा गया था या अभिरक्षा में है, उसी रीति से और विस्तार तक मानो अपराध उसी राज्य के अन्दर किया गया है जहां वह पकड़ा गया है, या जहां वह अभिरक्षा में है ।]
6. फीस विहित करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, किसी राजनयिक या कौंसलीय आफिसर द्वारा अपने पद के निष्पादन में किए गए किसी मामले या बात की बाबत उद्ग्रहणीय फीस विहित कर सकती है ।
(2) ऐसी सभी फीसें ऐसी रीति से उद्ग्रहण की जाएंगी, उनका हिसाब रखा जाएगा, और वे उपयोजित की जाएंगी और दी जाएंगी जैसा विहित किया जाए ।
(3) इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा जैसा उपबन्धित किया जाए उसके सिवाय कोई राजनायिक या कौंसलीय आफिसर, अपने पद के निष्पादन में, अपने द्वारा किए गए किसी कार्य या बात या पालन की गई या दी गई सेवा के लिए कोई फीस या पारितोषिक की न तो मांग करेगा और न लेगा ।
7. फीस की सारणी का जारी किया जाना और प्रकाशन-(1) नियमों के अधीन तत्समय उद्ग्रहणीय फीसों की सारणी ऐसी रीति से प्रकाशित की जाएगी और उनकी प्रतियां निःशुल्क ऐसे व्यक्तियों को दी जाएंगी जो विहित किए जाएं ।
(2) प्रत्येक कौंसलीय आफिसर, और किसी विदेश या विदेशी स्थान में जहां कोई कौंसलीय आफिसर नहीं है, प्रत्येक राजनयिक अधिकारी, अपने कार्यालय में सहजदृश्य स्थान पर इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय फीसों को सारणी की एक प्रति प्रदर्शित रखेगा और उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति द्वारा उसका निरीक्षण किया जाना अनुज्ञात करेगा ।
8. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,] बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम, निम्नलिखित को विहित कर सकते है : -
(क) इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय फीस का मान और वह रीति जिसमें ऐसी फीस का उद्ग्रहण और संग्रहण किया जाएगा :
(ख) इस अधिनियम द्वारा राजनयिक या कौंसलीय आफिसर में निहित किन्हीं कर्तव्यों के निष्पादन के लिए उनको संदेय पारिश्रमिक, यदि कोई हो ;
(ग) इस अधिनियम के अनुसरण में रखे जाने वाले रजिस्टर और दिए जाने वाले विवरण ;
(घ) वह रीति जिससे फीसों की सारणियों की प्रतियां प्रकाशित और वितरित की जाएं ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
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