Wednesday, 29, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

राजनयिक संबंध (वियना कन्वेन्शन) अधिनियम, 1972 ( Diplomatic Relations (Vienna Convention) Act, 1972 )


 

 

राजनयिक संबंध (वियना कन्वेन्शन) अधिनियम, 1972

(1972 का अधिनियम संख्यांक 43)

[29 अगस्त 1972]

राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन, 1961 को

प्रभावी करने और उससे सम्बद्ध विषयों का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राजनयिक संबंध (वियना कन्वेन्शन) अधिनियम, 1972 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

2. राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन का लागू होना-(1) किसी अन्य विधि में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, 1961 के अप्रैल के चौदहवें दिन संयुक्त राष्ट्र संघ के राजनयिक समागम और उन्मुक्ति विषयक सम्मेलन द्वारा अंगीकृत, राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन के उपबन्ध, जो इस अधिनियम की अनुसूची में उपवर्णित हैं, भारत में विधि का बल रखेंगे ।

(2) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उक्त कन्वेन्शन के उन उपबन्धों में, जो अनुसूची में उपवर्णित हैं, सम्यक् रूप से किए गए और अंगीकृत किन्हीं संशोधनों के अनुरूप अनुसूची का संशोधन कर सकेगी ।

3. अन्तर्राष्ट्रीय करार के अनुसरण में कतिपय विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का राजनयिक मिशनों और उनके सदस्यों को लागू होना-जहां किसी करार, कन्वेन्शन या अन्य लिखत के अनुसरण में, किसी राजनयिक मिशन और उसके सदस्यों को, जिसका प्रेषक राज्य, राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन, 1961 का पक्षकार नहीं है, या किसी अन्य विशेष मिशन और उसके सदस्यों को, भारत में वैसे ही विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां देना आवश्यक है जो अनुसूची में उपवर्णित उपबन्धों में अन्तर्विष्ट हैं, वहां, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, घोषणा कर सकेगी कि अनूसूची में उपवर्णित उपबन्ध, ऐसे उपान्तरों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए जो वह उक्त करार, कन्वेन्शन या अन्य लिखत को प्रभावी करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझे, यथास्थिति, उस राजनयिक मिशन और उसके सदस्यों को या उस अन्य विशेष मिशन और उसके सदस्यों को यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे, और तब उक्त उपबन्ध तद्नुसार लागू होंगे और किसी अन्य विधि में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, ऐसे लागू होने में, भारत में विधि का बल रखेंगे ।

4. विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों पर निर्बन्धन-यदि केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि ऐसे किसी राज्य ने जो राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन, 1961 का पक्षकार हैं, उस कन्वेन्शन के अधीन उद्भूत होने वाली अपनी बाध्यताओं को भंग किया है या भारतीय मिशन या उसके सदस्यों को, किसी ऐसे राज्य के राज्यक्षेत्र में, जो राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेन्शन, 1961 का पक्षकार है, दिए गए विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां, उस राज्य के राजनियक मिशन या उसके सदस्यों को इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकारों या उन्मुक्तियों से कम हैं तो केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस राज्य के राजनयिक मिशन या उसके सदस्यों से इस प्रकार प्रदत्त उन विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों को वापस ले सकेगी जो केन्द्रीय सरकार को उचित प्रतीत हों ।

5. अधित्यजन-अनुसूची में उपवर्णित कन्वेन्शन के अनुच्छेद 32 के प्रयोजनार्थ, किसी राज्य के मिशन के प्रधान के तत्समय उसके कृत्यों का निर्वहन करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा कोई अधित्यजन उस राज्य द्वारा अधित्यजन समझा जाएगा ।

6. सीमाशुल्क आदि से छूटों में से कतिपय छूटों पर निर्बन्धन-अनुसूची में उपवर्णित कन्वेन्शन के अनुच्छेद 36 की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी राजनयिक मिशन या उसके सदस्य को इस बात का हकदार बनाती है कि वह सीमाशुल्क दिए बिना तथा भारत में माल आयात करके उसे बाद में किसी प्रकार के निर्बन्धनों के बिना भारत में बेच सकता है ।

7. भारत के नागरिकों के विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां-अनुसूची में उपवर्णित कन्वेन्शन के अनुच्छेद 38 के प्रयोजनार्थ, भारत का नागरिक, उस अनुच्छेद में उपवर्णित विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से भिन्न केवल ऐसे अतिरिक्त विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उसे अनुदत्त करे

8. राजनियक परिसरों में प्रवेश पर निर्बन्धन-केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या किसी लोक प्राधिकारी का कोई लोक सेवक या अभिकर्ता, कोई विधिक आदेशिका तामील करने के प्रयोजनार्थ, किसी राजनयिक मिशन के परिसर में, उस मिशन के प्रधान की सम्मति से ही प्रविष्ट होगा अन्यथा नहीं । ऐसी सम्मति भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी ।

9. साक्ष्य-यदि किसी कार्यवाही में यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी विशेषाधिकार या उन्मुक्ति का हकदार है या नहीं, तो भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचित द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन दिया गया ऐसा प्रमाणपत्र जो उस प्रश्न से सम्बन्धित किसी तथ्य को कथित करे, उस तथ्य का निश्चायक साक्ष्य होगा ।

10. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम  [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा] बना सकेगी ।

11. इस अधिनियम के अधीन निकाली गई अधिसूचनाओं और बनाए गए नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन निकाली गई प्रत्येक अधिसूचना और बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन, यथास्थिति, उस अधिसूचना या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना निकाली नहीं जानी चाहिए या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु अधिसूचना या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

अनुसूची

(धारा 2 देखिए)

राजनयिक सम्बन्धों पर वियना कन्वेन्शन, 1961 के उपबन्ध जो

विधि का बल रखेंगे

अनुच्छेद 1

वर्तमान कन्वेन्शन के प्रयोजनार्थ, निम्नलिखित पदों के वे ही अर्थ होंगे जो उन्हें नीचे दिए गए हैं :-

(क)  मिशन का प्रधान" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे प्रेषक राज्य ने उस हैसियत से कार्य करने का कर्तव्य सौंपा हो;

(ख)  मिशन के सदस्य" से मिशन का प्रधान और मिशन के कर्मचारिवृन्द के सदस्य अभिप्रेत हैं;

(ग)  मिशन के कर्मचारिवृन्द के सदस्य" से मिशन के राजनयिक कर्मचारिवृन्द के, प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारिवृन्द के तथा सेवा कर्मचारिवृन्द के सदस्य अभिप्रेत हैं ;

(घ) राजनयिक कर्मचारिवृन्द के सदस्य" से मिशन के कर्मचारिवृन्द के वे सदस्य अभिप्रेत हैं जो राजनयिक रैंक के हैं;

(ङ) राजनयिक अभिकर्ता" से मिशन का प्रधान या मिशन के राजनयिक कर्मचारिवृन्द का कोई सदस्य अभिप्रेत है;

(च) प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारिवृन्द के सदस्य" से मिशन के कर्मचारिवृन्द के वे सदस्य अभिप्रेत हैं जो मिशन की प्रशासनिक और तकनीकी सेवा में नियोजित हैं;

(छ) सेवा कर्मचारिवृन्द के सदस्य" से मिशन के कर्मचारिवृन्द के वे सदस्य अभिप्रेत हैं जो मिशन की घरेलू सेवा में हैं;

(ज) निजी सेवक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो मिशन के किसी सदस्य की घरेलू सेवा में है और जो प्रेषक राज्य का कर्मचारी नहीं है;

(झ)  मिशन के परिसर" से वे भवन या भवनों के वे भाग और उनकी आनुषंगिक भूमि अभिप्रेत है जिन्हें, चाहे उनका स्वामी कोई भी हो, मिशन के प्रयोजन के लिए, जिसके अन्तर्गत मिशन के प्रधान का निवास स्थान भी है, उपयोग में लाया जाता है ।

अनुच्छेद 22

1. मिशन के परिसर अनतिक्रमणीय होंगे। ग्राही राज्य के अभिकर्ता, मिशन के प्रधान की सम्मति के बिना उनमें प्रवेश नहीं कर सकेंगे ।

2. ग्राही राज्य का यह विशेष कर्तव्य होगा कि वह किसी भी अतिक्रमण या नुकसान से मिशन के परिसर की संरक्षा करे और मिशन की शांति में विघ्न का या उसकी प्रतिष्ठा पर आघात का निवारण करने के लिए सभी समुचित कदम उठाए ।

3. मिशन के परिसर, उनमें उनका साजसामान और अन्य सम्पत्ति तथा मिशन के परिवहन के साधन, तलाशी, अधिग्रहण, कुर्की या निष्पादन से उन्मुक्त होंगे ।

अनुच्छेद 23

1. उन संदायों से भिन्न जो विनिर्दिष्ट सेवाओं के संबंध में देय हों, प्रेषक राज्य और मिशन के प्रधान को, मिशन के परिसर की बाबत, चाहे वे उनके स्वामित्व में हों या उन्होंने पट्टे पर लिए हों, सभी देश और राष्ट्रीय, क्षेत्रीय या नगरपालिक शुल्क और करों से छूट प्राप्त होगी ।

2. इस अनुच्छेद में निर्दिष्ट कराधान से छूट ऐसे शुल्क और करों को लागू नहीं होगी जो प्रेषक राज्य या मिशन के प्रधान के साथ संविदा करने वाले व्यक्तियों द्वारा, ग्राही राज्य की विधि के अधीन, देय हों ।

अनुच्छेद 24

मिशन के अभिलेखागार और दस्तावेज किसी भी समय और जहां कहीं भी वे हों, अनतिक्रमणीय होंगे ।

अनुच्छेद 27

1. ग्राही राज्य सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए मिशन को मुक्त संचार की अनुज्ञा देगा और उसकी संरक्षा करेगा । प्रेषक राज्य की सरकार और अन्य मिशनों तथा कौंसलों के साथ, चाहे वे कहीं भी स्थित हों, संचार करने में मिशन सभी समुचित साधनों का, जिनके अन्तर्गत राजनयिक पत्रवाहक, संकेत या बीज लिपि में संदेश भी हैं, उपयोग कर सकेगा । तथापि, मिशन किसी वायरलैस ट्रांसमीटर को केवल ग्राही राज्य की सहमति से ही लगा सकेगा और उपयोग में ला सकेगा ।

2. मिशन का शासकीय पत्र-व्यवहार अनतिक्रमणीय होगा । शासकीय पत्र-व्यवहार से मिशन और उसके कार्यों से सम्बन्धित सभी पत्र-व्यवहार अभिप्रेत हैं ।

3. राजनयिक डाक थैला खोला या रोका नहीं जाएगा ।

4. उन पैकेजों पर जो राजनयिक डाक थैले के रूप में हों, उनके स्वरूप का दृश्यमान बाह्य चिह्न होना चाहिए और उनमें केवल राजनयिक दस्तावेजें या शासकीय उपयोग के लिए आशयित वस्तुएं ही रखी जा सकेंगी ।

5. ग्राही राज्य राजनयिक पत्रवाहक की, जिसे एक ऐसा शासकीय दस्तावेज दिया जाएगा जिसमें उसकी प्रास्थिति और राजनयिक डाक थैले के रूप में पैकेजों की संख्या उपदर्शित होगी, उसके कृत्यों के पालन में संरक्षा करेगा । उसे वैयक्तिक अनतिक्रमणीयता प्राप्त होगी और उसे किसी भी प्रकार गिरफ्तार या निरुद्ध न किया जाएगा ।

6. प्रेषक राज्य या मिशन, तदर्थ राजनयिक पत्रवाहक अभिहित कर सकेगा । ऐसे मामलों में इस अनुच्छेद के पैरा 5 के उपबन्ध भी लागू होंगे, सिवाय इसके कि उसमें वर्णित उन्मुक्तियों का उस समय लागू होना समाप्त हो जाएगा जब ऐसे पत्रवाहक ने राजनयिक बैंक को, जो उसके भारसाधन में हो, परेषिती को परिदत्त कर दिया हो ।

7. राजनयिक बैग किसी ऐसे वाणिज्यिक वायुयान के कप्तान को सौंपा जा सकेगा जिसके बारे में यह नियत हो कि वह प्रवेश के लिए प्राधिकृत किसी पत्तन पर उतरेगा । उसे ऐसा शासकीय दस्तावेज दिया जाएगा जिसमें डाक थैले के रूप में पैकेजों की संख्या उपदर्शित हो किन्तु उसे राजनयिक पत्रवाहक नहीं माना जाएगा । मिशन अपने सदस्यों में से किसी को वायुयान के कप्तान से सीधे और स्वतन्त्र रूप में राजनयिक डाक थैला अपने कब्जे में लेने के लिए भेज सकेगा ।

अनुच्छेद 28

मिशन द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के दौरान उद्गृहीत फीसों और प्रभारों को सभी शोध्य धनराशियों और करों से छूट प्राप्त होगी ।

अनुच्छेद 29

राजनयिक अभिकर्ता को शारीरिक अनतिक्रमणीयता प्राप्त होगी । उसको किसी भी प्रकार गिरफ्तार या निरुद्ध नहीं किया जाएगा । ग्राही राज्य उसके साथ सम्यक्तः आदरपूर्ण व्यवहार करेगा और उसके शरीर या उसकी स्वतन्त्रता या उसकी प्रतिष्ठा को सभी प्रकार के आघातों से बचाने के लिए सभी समुचित कदम उठाएगा ।

अनुच्छेद 30

1. किसी राजनयिक अभिकर्ता का प्राइवेट निवास-स्थान मिशन के परिसर के समान ही अनतिक्रमणीय और संरक्षणीय होगा ।

2. उसके कागज, पत्राचार और अनुच्छेद 31 के पैरा 3 में यथा उपबन्धित के सिवाय, उसकी सम्पत्ति भी उसी प्रकार अनतिक्रमणीय होगी ।

अनुच्छेद 31

1. राजनयिक अभिकर्ता ग्राही राज्य की दण्डिक अधिकारिता से उन्मुक्त होगा । वह, निम्नलिखित दशाओं के सिवाय, सिविल और प्रशासनिक अधिकारिता से भी उन्मुक्त होगा :-

(क) ग्राही राज्य के राज्यक्षेत्र में स्थित प्राइवेट स्थावर सम्पत्ति के सम्बन्ध में कोई अनुयोजन, जब तक कि वह मिशन के प्रयोजनों के लिए उसे प्रेषक राज्य की ओर से धारण न करता हो ;

(ख)  उत्तराधिकार के संबंध में ऐसा अनुयोजन जिससे राजनयिक अभिकर्ता, प्राइवेट व्यक्ति रूप में, न कि प्रेषक राज्य की ओर से, निष्पादक, प्रशासक, वारिस या वसीयतदार के रूप में संबद्ध हो ;

(ग)  ग्राही राज्य के भीतर, राजनयिक अभिकर्ता द्वारा अपने शासकीय कार्यों से परे किए गए किसी वृत्तिक या वाणिज्यिक क्रियालाप के संबंध में कोई अनुयोजन ।

2. कोई राजनयिक अभिकर्ता साक्षी के रूप में साक्ष्य देने के लिए बाध्य नहीं होगा ।

3. इस अनुच्छेद के पैरा 1 के उपपैरा (क), (ख) और (ग) के अधीन आने वाली दशाओं के सिवाय, किसी राजनयिक अभिकर्ता की बाबत निष्पादन की कोई कार्यवाही नहीं की जा सकेगी, और यह कि सम्बद्ध कार्यवाही उसके शरीर और उसके निवास-स्थान की अनतिक्रमणीयता का अतिलंघन किए बिना ही की जा सकेगी ।

4. ग्राही राज्य की अधिकारिता से किसी राजनयिक अभिकर्ता की उन्मुक्ति प्रेषक राज्य की अधिकारिता से उसे छूट प्रदान नहीं करती ।

अनुच्छेद 32

1. प्रेषक राज्य राजनयिक अभिकर्ताओं की और अनुच्छेद 37 के अधीन उन्मुक्तिप्राप्त व्यक्तियों की अधिकारिता से उन्मुक्ति का अधित्यजन कर सकेगा ।

2. अधित्यजन सदैव अभिव्यक्त होना चाहिए ।

3. यदि राजनयिक अभिकर्ता या अनुच्छेद 37 के अधीन अधिकारिता से उन्मुक्तिप्राप्त व्यक्ति कोई कार्यवाही आरम्भ करता है तो वह मूल दावे से सीधे सम्बन्धित किसी प्रतिदावे की बाबत अधिकारिता से उन्मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा ।

4. सिविल या प्रशासनिक कार्यवाहियों की बाबत अधिकारिता से उन्मुक्ति के अधित्यजन का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि उसमें ऐसे निर्णय के निष्पादन की बाबत उन्मुक्ति का अधित्यजन अन्तर्निहित है जिसके निष्पादन के लिए पृथक् अधित्यजन आवश्यक हो ।

अनुच्छेद 33

1. इस अनुच्छेद के पैरा 3 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, राजनयिक अभिकर्ता को, प्रेषक राज्य के लिए की गई सेवाओं की बाबत, सामाजिक सुरक्षा के उन उपबन्धों से छूट प्राप्त होगी जो ग्राही राज्य में प्रवृत्त हों ।

2. इस अनुच्छेद के पैरा 1 में उपबंधित छूट उन निजी सेवकों को भी, जो किसी राजनयिक अभिकर्ता के एकमात्र नियोजन में हों, शर्त पर लागू होगी कि,-

(क) वे ग्राही राज्य के राष्ट्रिक या स्थायी निवासी न हों; और

(ख) वे सामाजिक सुरक्षा के उन उपबन्धों की परिधि में आते हों जो प्रेषक राज्य या किसी अन्य राज्य में प्रवृत्त हों ।

3. यदि कोई राजनयिक अभिकर्ता ऐसे व्यक्तियों को नियोजित करे, जिन्हें इस अनुच्छेद के पैरा 2 में उपबंधित छूट लागू नहीं होती, तो वह ऐसी बाध्यताओं का अनुपालन करेगा जो नियोजकों पर ग्राही राज्य के सामाजिक सुरक्षा के उपबन्धों द्वारा अधिरोपित की जाएं ।

4.  इस अनुच्छेद के पैरा 1 और 2 में उपबन्धित छूट, ग्राही राज्य की सामाजिक सुरक्षा पद्धति में स्वेच्छया भाग लेना उस दशा में प्रवाहित नहीं करेगी जब कि ऐसे भाग लेने की अनुज्ञा उस राज्य द्वारा दे दी गई हो ।

5. इस अनुच्छेद के उपबन्ध, तत्पूर्व किए गए सामाजिक सुरक्षा से संबद्ध द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करारों पर प्रभाव नहीं डालेंगे और भविष्य में ऐसे करारों का किया जाना निवारित नहीं करेंगे ।

अनुच्छेद 34

राजनयिक अभिकर्ता को, निम्नलिखित के सिवाय, सभी शोध्य धनराशियों और करों से छूट प्राप्त होंगी, चाहे वे वैयक्तिक या सम्पत्ति संबंधी हों या चाहे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय या नगरपालिक हों :-

(क) इस प्रकार के अप्रत्यक्ष कर जो सामान्यतः माल या सेवाओं की कीमतों में सम्मिलित होते हैं;

(ख) ग्राही राज्य के राज्यक्षेत्र में स्थित प्राइवेट स्थावर संपत्ति पर शोध्य धनराशि और कर, जब तक कि वह प्रेषक राज्य की ओर से मिशन के प्रयोजनों के लिए उसे धारण न करता हो;

(ग) अनुच्छेद 39 के पैरा 4 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए ग्राही राज्य द्वारा उद्गृहीत सम्पदा, उत्तराधिकार या विरासत शुल्क;

(घ) उस निजी आय पर शोध्य धनराशि और कर जिसका स्रोत ग्राही राज्य में हो और  ग्राही राज्य में वाणिज्यिक उपक्रमों में किए गए विनिधानों पर पूंजी कर;

(ङ) की गई विनिर्दिष्ट सेवाओं के लिए उद्गृहीत प्रभार;

(च) अनुच्छेद 23 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, स्थावर सम्पत्ति की बाबत रजिस्ट्रीकरण, न्यायालय या अभिलेख फीसें, बन्धक की बाबत शोध्य धनराशि और स्टाम्प शुल्क ।

अनुच्छेद 35

ग्राही राज्य राजनयिक अभिकर्ताओं को सभी वैयक्तिक सेवाओं से, सभी प्रकार की लोक सेवाओं से और सैनिक बाध्यताओं से, जैसे कि अध्यपेक्षा, सैनिक अभिदाय और आवास आदेश से सम्बद्ध बाध्यताएं हैं, छूट देगा ।

अनुच्छेद 36

1. ग्राही राज्य, ऐसी विधियों और विनियमों के अनुसार जिन्हें वह अंगीकृत करे,-

(क) मिशन के शासकीय उपयोग की वस्तुओं के;

(ख) राजनयिक अभिकर्ता या उसके कुटुम्ब के उन सदस्यों के, जो उसकी गृहस्थी के भागरूप हों, वैयक्तिक उपयोग की उन वस्तुओं को, जिनके अन्तर्गत उसके स्थापन के लिए आशयित वस्तुएं भी हैं,

प्रवेश की अनुज्ञा देगा और भण्डारकरण, ढुलाई और वैसी ही सेवाओं के प्रभारों से भिन्न, सभी सीमाशुल्कों, करों और अन्य सम्बद्ध प्रभारों से छूट अनुदत्त करेगा ।

2. राजनयिक अभिकर्ता के वैयक्तिक सामान को निरीक्षण से छूट होगी जब तक कि यह उपधारणा करने के लिए गंभीर आधार हों कि उसमें ऐसी वस्तुएं हैं जो इस अनुच्छेद के 1 पैरा में वर्णित छूट के अन्तर्गत नहीं हैं, या ऐसी वस्तुएं हैं जिनका आयात अथवा निर्यात ग्राही राज्य की विधि द्वारा प्रतिषिद्ध है या करन्तीन विनियमों द्वारा नियंत्रित है ऐसा निरीक्षण राजनयिक अभिकर्ता या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति में ही किया जाएगा

अनुच्छेद 37

1. राजनयिक अभिकर्ता के कुटुम्ब के उन सदस्यों को, जो उसकी गृहस्थी के भागरूप हों तथा ग्राही राज्य के राष्ट्रीक न हों, अनुच्छेद 29 से 36 तक में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी ।

2.  मिशन के प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारिवृन्द के सदस्यों को, उनके कुटुम्बों के उन सदस्यों सहित जो उनकी गृहस्थियों के भागरूप हों, किन्तु ग्राही राज्य के राष्ट्रिक अथवा स्थायी निवासी न हों, अनुच्छेद 29 से 35 तक में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी किन्तु ग्राही राज्य की उस सिविल और प्रशासनिक अधिकारिता से उन्मुक्ति का जो अनुच्छेद 31 के पैरा 1 में विनिर्दिष्ट है, विस्तार उनके कर्तव्यों के अनुक्रम से परे किए गए कार्यों पर न होगा । उनके प्रथम बार पदासीन होने के समय आयात की गई वस्तुओं की बाबत भी उन्हें वे विशेषाधिकार प्राप्त होंगे जो अनुच्छेद 36 के पैरा 1 में विनिर्दिष्ट हैं ।

3. मिशन के सेवा कर्मचारिवृन्द के उन सदस्यों को जो ग्राही राज्य के राष्ट्रिक या स्थायी निवासी नहीं हैं, अपने कर्तव्यों के अनुक्रम में किए गए कार्यों के बारे में उन्मुक्ति प्राप्त होगी, उन परिलब्धियों पर शोध्य धनराशियों और करों से छूट प्राप्त होगी जो वे अपने नियोजन के कारण प्राप्त करें, और अनुच्छेद 33 में अन्तर्विष्ट छूट भी प्राप्त होगी ।

4. मिशन के सदस्यों के निजी सेवकों को, यदि वे ग्राही राज्य के राष्ट्रिक अथवा स्थायी निवासी न हों तो, ऐसी परिलब्धियों पर जो वे अपने नियोजन के कारण प्राप्त करें, शोध्य धनराशियों और करों से छूट प्राप्त होगी । अन्य विषयों के बारे में उन्हें उस विस्तार तक ही विशेषाधिकार तथा उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी जिस तक ग्राही राज्य स्वीकार करे । तथापि, ग्राही राज्य को उन व्यक्तियों पर अपनी अधिकारिता का प्रयोग ऐसी रीति से करना होगा जिससे मिशन के कार्यों के पालन में असम्यक् रूप से हस्तक्षेप न हो ।

अनुच्छेद 38

1. ग्राही राज्य द्वारा अनुदत्त अतिरिक्त विशेषधिकारों और उन्मुक्तियों के सिवाय ऐसे राजनयिक अभिकर्ता को जो उस राज्य का राष्ट्रिक अथवा स्थायी निवासी है, केवल अपने कार्यों के प्रयोग में की गई शासकीय बातों की बाबत ही अधिकारिता से उन्मुक्ति और अनतिक्रमणीयता प्राप्त होगी ।

2. मिशन के कर्मचारिवृन्द के ऐसे अन्य सदस्यों और निजी सेवकों को जो ग्राही राज्य के राष्ट्रिक अथवा स्थायी निवासी हैं, केवल उस विस्तार तक ही विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होंगी जिस तक ग्राही राज्य स्वीकार करे । तथापि, ग्राही राज्य को उन व्यक्तियों पर अपनी अधकारिता का प्रयोग ऐसी रीति से करना होगा जिससे मिशन के कार्यों के पालन में असम्यक् रूप से हस्तक्षेप न हो ।

अनुच्छेद 39

1. विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों के हकदार हर व्यक्ति को ऐसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां उसी क्षण से प्राप्त होंगी जब वह अपना पद ग्रहण करने के लिए ग्राही राज्य के राज्यक्षेत्र में प्रवेश करता है अथवा, यदि वह उसके राज्यक्षेत्र में पहले ही से है तो, उस क्षण से प्राप्त होंगी जब उसकी नियुक्ति विदेश मंत्रालय को या ऐसे अन्य मंत्रालय को जिसके बारे में करार हो, अधिसूचित की जाती है ।

2. जब विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त व्यक्ति का कार्य समाप्त हो जाए तब, ऐसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्रसामान्य रूप से उसी क्षण समाप्त हो जाएंगी जब वह देश छोड़े या ऐसा करने के लिए अपेक्षित युक्तियुक्त अवधि के अवसान पर समाप्त हो जाएंगी किन्तु वे उस दशा में भी उस समय तक बनी रहेंगी जब कि सशस्त्र संघर्ष की अवस्था उत्पन्न हो जाए । मिशन के सदस्य के रूप में अपने कार्यों के पालन में ऐसे व्यक्ति द्वारा की गई बातों के बारे में उन्मुक्ति बनी रहेगी ।

3. मिशन के किसी सदस्य की मृत्यु की दशा में, उसके कुटुम्ब के सदस्यों को वे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां, जिनके वे हकदार रहे हों, उस युक्तियुक्त अवधि के अवसान तक बनी रहेंगी जिसके भीतर उन्हें देश छोड़ देना हो

4. मिशन के किसी ऐसे सदस्य की, जो ग्राही राज्य का राष्ट्रिक या स्थायी निवासी न हो, या उसके कुटुम्ब के किसी ऐसे सदस्य की जो उसकी गृहस्थी का भागरूप हो, मृत्यु की दशा में, ग्राही राज्य, देश में अर्जित किसी ऐसी सम्पत्ति के सिवाय जिसका निर्यात उसकी मृत्यु के समय प्रतिषिद्ध रहा हो, मृतक की जंगम सम्पत्ति की वापसी की अनुज्ञा देगा । सम्पदा, उत्तराधिकार और विरासत शुल्क ऐसी जंगम सम्पत्ति पर उद्गृहीत नहीं किया जाएगा जिसकी उपस्थिति ग्राही राज्य में, केवल मिशन के सदस्य के रूप में या मिशन के सदस्य के कुटुम्ब के किसी सदस्य के रूप में, मृतक की उपस्थिति के कारण ही रही हो ।

अनुच्छेद 40

1.  यदि कोई राजनयिक अभिकर्ता अपना पद ग्रहण करने या उस पर लोटने के लिए अग्रसर होते समय या अपने ही देश लोटने के समय, किसी ऐसे अन्य राज्य के राज्यक्षेत्र से होकर निकले या उसमें हो, जिसने उसे पासपोर्ट/वीजा, यदि ऐसा वीजा आवश्यक हो, अनुदत्त किया हो, तो वह अन्य राज्य उसे ऐसी अनतिक्रमणीयता और उन्मुक्तियां प्रदान करेगा जो उसके जाने या लौटने को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों यही बात उसके कुटुम्ब के उन सदस्यों की दशा में भी लागू होगी जिन्हें विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त हों और जो राजनयिक अभिकर्ता के साथ जा रहे हों या उसके पास जाने या अपने देश लौटने के लिए पृथक्तः यात्रा कर रहे हों

2.  वैसी ही परिस्थितियों में जो इस अनुच्छेद के पैरा 1 में विनिर्दिष्ट हैं, अन्य राज्य, मिशन के प्रशासनिक और तकनीकी या सेवा कर्मचारिवृन्द के सदस्यों और उनके कुटुम्ब के सदस्यों के जाने में अपने राज्यक्षेत्र के भीतर बाधा नहीं डालेंगे ।

3.  अन्य राज्य उस शासकीय पत्र-व्यवहार और अन्य शासकीय संसूचनाओं के, जिनके अन्तर्गत संकेत या बीजों लिपि में संदेश भी हैं, अभिवहन में वही स्वतन्त्रता और संरक्षण प्रदान करेंगे जो ग्राही राज्य द्वारा प्रदान की जाती हों । वे उन राजनयिक पत्रवाहकों को, जिन्हें पासपोर्ट/वीजा, यदि ऐसा वीजा आवश्यक हो, अनुदत्त किया गया हो, और उन राजनयिक डाक थैलों को जो अभिवहन में हों, वैसी ही अनतिक्रमणीयता और संरक्षण प्रदान करेंगे जैसी ग्राही राज्य प्रदान करने के लिए आबद्ध हो ।

4.  इस अनुच्छेद के पैरा 1, 2 और 3 के अधीन अन्य राज्यों की बाध्याताएं उन पैराओं में क्रमणः वर्णित व्यक्तियों को और शासकीय संसूचनाओं और राजनयिक डाक थैलों को भी लागू होंगी जिनकी ऐसे अन्य राज्यों के राज्यक्षेत्र में उपस्थिति अपरिहार्य बाध्यता" के कारण हो ।

____________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter